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‘दीघा जगन्नाथ धाम का प्रसाद बनाएँगे मुस्लिम दुकानदार?’ : बंगाल में ममता सरकार के फैसले पर मचा बवाल, BJP नेता सुकांता मजुमदार ने लिस्ट शेयर करके उठाए सवाल

दीघा जगन्नाथ धाम के प्रसाद का वितरण बंगाल सरकार ‘दुआरे सरकार’ योजना के तहत करवा रही है। लेकिन इन प्रसादों को जगन्नाथ मंदिर धाम ट्रस्ट द्वारा नहीं बल्कि स्थानीय स्तर पर बनाया जा रहा है। इसका बीजेपी लगातार विरोध कर रही है। अब प्रसाद के मुस्लिम मिठाई विक्रेताओं द्वारा बनवाए जाने की बात सामने आई है।

रानीनगर में दीघा जगन्नाथ धाम सांस्कृतिक केन्द्र के राशन डीलरों को जो प्रसाद वितरण के लिए चुने गए हैं उनमें चार में से तीन मुस्लिम हैं। इसके खिलाफ बीजेपी ने आवाज बुलंद की है। बीजेपी नेताओं का कहना है कि ये हिन्दुओं की धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुँचाने जैसा है।

नोटिफिकेशन को लेकर बीजेपी नेता सुकांता मजुमदार ने ट्वीट किया है। बांग्ला में किए गए ट्वीट में उन्होने कहा, “मैं पश्चिम बंगाल प्रशासन से पूछना चाहता हूँ कि क्या यह अधिसूचना सत्य है?

रानीनगर के ब्लॉक नंबर 1 में ‘दीघा जगन्नाथ धाम सांस्कृतिक केंद्र’ के राशन डीलरों को प्रसाद (मिठाई) की आपूर्ति के लिए जो अधिसूचना जारी की गई है, उससे अब स्थानीय हिंदुओं में आशंका पैदा हो गई है। इस अधिसूचना की सच्चाई को प्रशासन के संज्ञान में तुरंत लाया जाना चाहिए।

नोटिस से पता चलता है कि कई स्थानीय मिठाई की दुकानों के मालिकों के नाम और नंबर दिए गए हैं, और सूचीबद्ध चार मिठाई की दुकानों में से तीन मुसलमानों के हैं!

तो क्या सरकार माननीय ‘तोषण’ की ओबीसी सूची की तरह मुसलमानों के आरक्षण को सुनिश्चित करने के लिए कदम उठा रही है?

क्या मुस्लिम व्यापारियों को भी हिंदुओं को वितरित करने के लिए प्रसाद तैयार करने का ठेका दिया जा रहा है?

इससे पहले नेता विपक्ष शुवेंदू अधिकारी ने भी इस मामले को उठाया। उनका कहना है कि न सिर्फ मिठाई खरीदना बल्कि स्थानीय दुकान से मिठाई के डिब्बे खरीदना भी हिन्दू धर्म का अपमान है। मिठाई के पैकेट को दिखाते हुए उन्होने कहा था कि पूर्वी मेदिनीपुर के दीघा में बने जगन्नाथ मंदिर से प्रसाद लाने के बजाए राज्य सरकार स्थानीय दुकान से मिठाई तैयार करवा रही है। भगवान के प्रसाद के नाम पर स्थानीय दुकानों की मिठाई घरों तक पहुँचेगी। ये हिन्दुओं का अपमान है।

राज्य सरकार ने प्रसाद के पैकेट के लिए 20 रुपए दाम तय किए हैं।

कुँवारी लड़कियाँ देती थीं जिन नवजातों को जन्म, उन्हें सेप्टिक टैंक में फेंकती थीं नन: 100 साल बाद 796 बच्चों की हड्डियों की हो रही खोज, 2014 में खुला था आयरलैंड के चर्च का काला सच

आयरलैंड में अविवाहित माँओं के लिए बने ‘बॉन सेकॉर्स मदर एंड बेबी होम’ की खुदाई की जा रही है। होम के सेप्टिक टैंक से मरे हुए 796 बच्चों के अवशेष मिले थे।

न्यूयॉर्क पोस्ट की ख़बर के मुताबिक ये बच्चे 1925 से 1961 के बीच यानी 35 साल के दौरान यहाँ फेंके गए। कैथोलिक चर्च इस आश्रम को चलाता था। इन बच्चों को यहाँ दफन कर दिया गया। इस जगह को सामूहिक कब्र के रूप में जाना जाता है। अब इसकी खुदाई की जा रही है। इससे कई ‘राज’ उजागर होने की उम्मीद है।

इस खुदाई से आयरलैंड के उस एक काले अतीत के बारे में पता चलेगा जब चर्च शक्तिशाली हुआ करते थे और समाज को नियंत्रित करते थे।

स्थानीय इतिहासकार कैथरीन कॉर्लेस ने स्काई न्यूज को बताया कि आशंका है कि कई नवजात के अवशेषों को एक साथ यहाँ फेंक दिया गया। केवल दो बच्चों को ही कब्रिस्तान में दफनाया गया। बॉन सेकॉर्स में हुए खौफनाक नरसंहार का पूरा मामला 2014 में कॉर्लेस ने ही दुनिया के सामने उजागर किया था।

कैथोलिक ईसाई धर्म की छवि को बनाए रखने के लिए इस ‘होम’ में अविवाहित गर्भवती महिलाओं को भेजा जाता था, जहाँ ये अपने बच्चे को जन्म देती थीं। इन बच्चों के देखभाल की जानकारी कैथोलिक नन करती थी।

‘बॉन सेकॉर्स मदर एंड बेबी होम’ को 1971 में तोड़ डाला गया और इसे चलाने वाली संस्था को 1972 में निलंबित कर दिया गया। माना जाता है कि नवजात बच्चों के अवशेष बॉन सेकॉर्स मदर एंड बेबी होम की जमीन के नीचे अभी भी हैं। हालाँकि अब इस जगह के आस-पास आधुनिक अपार्टमेंट्स बन गए हैं।

अविवाहित गर्भवती महिलाओं को प्रसव के लिए इस होम में भेजा जाता था। इस दौरान एक साल तक बिना वेतन के काम करने के लिए इन्हें मजबूर किया जाता था। ये महिलाएँ पूरी तरह नजरबंद रखी जाती थीं।
यहाँ तक कि माँओं को उनके नवजात बच्चों से अलग कर दिया जाता था, जिन्हें नन तब तक पालती थीं जब तक कि उन्हें गोद नहीं ले लिया जाता। बच्चे को किसने गोद लिया? कब लिया? इसकी जानकारी भी माँ को नहीं दी जाती थी।

2014 में सामूहिक कब्र की जानकारी मिलने के बाद आयरलैंड की संसद ने 2022 में कानून पारित किया जिसके बाद टुअम में खुदाई का कार्य शुरू हो सका। एक दशक से भी अधिक समय बीतने के बाद जाँचकर्ताओं की एक टीम ने फोरेंसिक जाँच शुरू की। शिशुओं के अवशेषों की पहचान करने और उन्हें सम्मानजनक तरीके से फिर से दफनाने की पूरी प्रक्रिया में दो साल तक का समय लगने की उम्मीद है।

एनेट मैके नाम की महिला की बहन भी उन अविवाहित माँओं में शामिल थीं जिनके बच्चे को सेप्टिक टैंक में फेंका गया था। एनेट मैके ने स्काई न्यूज को बताया, “मुझे सामूहिक क्रब से बहुत ज्यादा उम्मीद नहीं है। क्योंकि लोग बता रहे हैं कि बहुत अधिक अवशेष नहीं बचे होंगे। नवजात बच्चों के शरीर की हड्डी काफी मुलायम होती है और ये जल्दी नष्ट हो जाती है।”

मार्गरेट “मैगी” ओ’कॉनर नाम की एक महिला ने 17 साल की उम्र में बलात्कार के बाद होम में एक बच्ची को जन्म दिया। नवजात की छह महीने बाद मृत्यु हो गई। नन ने इसकी जानकारी माँ को नहीं दी। माँ मार्गरेट भी भी जिंदा हैं। वह यूके में रहती हैं। घटना की जानकारी मिलने के बारे में महिला ने बताया, “वह बाहर कपड़े धो रही थी और एक नन उसके पीछे आई। वह बोली “तुम्हारे पाप का बच्चा मर गया है।”

आयरलैंड सरकार और कैथोलिक चर्च द्वारा समर्थित बॉन सेकॉर्स एक संस्था थी जिसने आयरलैंड में उत्पीड़न का एक नेटवर्क बनाया था। इसकी वास्तविकता बाद के वर्षों में पता चली।

बॉन सेकॉर्स संस्था के होम में वैसी माताएँ भी रहती थीं, जो एक्सट्रा मेरिटल अफेयर के बाद बच्चे पैदा करने का ‘अपराध’ करती थीं। ऐसी महिलाओं को ‘मैग्डलीन लॉन्ड्रियों’ में भेज दिया जाता था। कैथोलिक आदेशों का पालन करने वाली ये तथाकथित “पतित महिलाओं” का इस्तेमाल करती थी। इन संस्थाओं को सरकारों का मौन समर्थन प्राप्त था।

इन “पतित महिलाओं” से वैश्यावृति कराई जाती थी। ये महिलाएँ भी नन के साथ समाज की बलात्कार की शिकार अविवाहित महिलाओं, अनाथ लड़कियों या परिवार से अलग हुए बच्चों को लेने आती थीं।

1990 में अंतिम ‘मैग्डलीन लॉन्ड्री’ को बंद कर दिया गया। आयरलैंड सरकार ने आधिकारिक तौर पर इसके लिए 2014 में माफी माँगी थी। 2022 में मुआवजा स्कीम बनाया गया जिसके तहत 814 जिंदा बचे पीड़ितों को 28,384 करोड़ रुपए बाँटे गए।

‘पैसों के पहाड़’ पर जस्टिस वर्मा के पास कोई जवाब नहीं, पर्सनल सेक्रेटरी ने आग बुझाने वालों से कहा था- किसी को बताना मत: केस की जाँच रिपोर्ट में खुलासा, कपिल सिब्बल जज के बचाव में उतरे

सुप्रीम कोर्ट की एक 3 जजों की कमेटी ने जस्टिस यशवंत वर्मा को हटाने की सिफारिश पेश की है। इसके बाद जस्टिस वर्मा के खिलाफ महाभियोग की प्रक्रिया शुरू होने की संभावना है। इसी मामले में भ्रष्टाचार के आरोप में फँसे जस्टिस यशवंत वर्मा का सपोर्ट वकील कपिल सिब्बल ने किया है। कपिल सिब्बल ने कहा कि जस्टिस वर्मा अब तक के सबसे बेस्ट जजों में से एक है।

64 पेज रिपोर्ट की मुख्य बातें

सुप्रीम कोर्ट की 3 जजों की कमेटी ने जस्टिस यशवंत वर्मा को पद से हटाने की सिफारिश की है। यह सिफारिश 64 पेज की एक रिपोर्ट में की गई है, जिसे राष्ट्रपति और प्रधानमंत्री को भेजा गया है। रिपोर्ट में साफ कहा गया है कि जले हुए नोट जस्टिस वर्मा के सरकारी आवास के स्टोररूम में ही मिले थे।

स्टोररूम तक सिर्फ जस्टिस वर्मा और उनके परिवार की ही पहुँच थी, किसी बाहरी व्यक्ति की नहीं थी। जाँच में सामने आया है कि आग बुझाने के दौरान फायरफाइटर्स ने ‘आधे जले हुए नोट’ देखे थे। एक गवाह ने तो यहाँ तक कहा कि उसने जिंदगी में पहली बार इतना ज्यादा कैश का पहाड़ देखा था। कमेटी ने माना है कि इतने सारे नोट बिना जस्टिस वर्मा या उनके परिवार की मर्जी के वहाँ नहीं रखे जा सकते थे।

कमेटी ने जस्टिस वर्मा की बेटी दिया वर्मा और उनके निजी सचिव राजिंदर कार्की की भूमिका की भी जाँच की है, जिन पर आरोप है कि उन्होंने फायरफाइटर्स को कैश की जानकारी किसी को भी बताने को मना किया था। इन सभी बातों के आधार पर कमेटी ने कहा है कि जस्टिस वर्मा को पद से हटाने की प्रक्रिया शुरू करने के लिए पर्याप्त सबूत हैं।

हालाँकि, जस्टिस वर्मा ने इन आरोपों से इनकार करते हुए कहा कि उन्हें या उनके परिवार को इस कैश के बारे में कोई जानकारी नहीं थी। जस्टिस वर्मा ने यह भी कहा था कि स्टोररूम में कोई भी आ-जा सकता था।

जून 2025 महीने की शुरुआत में खबर आई थी कि जस्टिस वर्मा को हटाने की प्रक्रिया जल्द ही शुरू हो सकती है। यह भारत के इतिहास में किसी सिटिंग जज को जबरन हटाने का पहला मामला होगा।

जाँच में क्या सामने आया?

सुप्रीम कोर्ट ने जस्टिस यशवंत वर्मा केस में एक जाँच कमेटी बनाई थी। मामले में 55 गवाहों से पूछताछ की गई थी। इसमें जस्टिस वर्मा की बेटी दिया वर्मा भी शामिल थीं। कमेटी ने अपनी रिपोर्ट में बताया है कि कई गवाहों, वीडियो और तस्वीरों से यह साबित होता है कि जस्टिस वर्मा के दिल्ली वाले घर के स्टोररूम में बड़ी मात्रा में कैश खासकर 500 रुपए के नोट मिले थे, जिनमें से कुछ आधे जले हुए थे।

सबसे हैरानी की बात यह है कि इतनी बड़ी घटना के बावजूद ना तो जस्टिस वर्मा और ना ही उनके परिवार ने पुलिस में शिकायत दर्ज करवाई थी और ना ही किसी बड़े ज्यूडिशियल ऑफिसर को इसकी जानकारी दी थी। कमेटी ने इसे विचित्र व्यवहार बताया था।

कमेटी ने यह साफ किया कि जस्टिस वर्मा को जले हुए कैश की जानकारी ना होने का दावा करना एक अविश्वसनीय है। कमेटी ने सवाल किया, “अगर कोई साजिश थी, तो जस्टिस वर्मा ने हाई कोर्ट के चीफ जस्टिस या भारत के चीफ जस्टिस को सूचित क्यों नहीं किया?”

फायर और पुलिस कर्मियों ने भी बताया कि उन्होंने आग बुझाने के बाद स्टोररूम में 500 रुपये के नोटों का ‘बड़ा पहाड़’ देखा था। हालाँकि, घर के नौकरों ने कैश देखने से मना किया, पर कमेटी ने सरकारी अधिकारियों के बयानों को सच माना।

जाँच में यह भी सामने आया कि जिस स्टोररूम में आग लगी थी, उसका कंट्रोल केवल और केवल जस्टिस वर्मा और उनके परिवार के पास था। इसके अलावा घटना के बाद कथित तौर पर जला हुआ कैश ‘गायब’ हो गया और कमरा साफ कर दिया गया।

कमेटी ने कहा है कि जस्टिस वर्मा के निजी सचिव राजिंदर सिंह कार्की ने फायर ऑफिसर को कहा था, कि वे अपनी रिपोर्ट में कैश का जिक्र न करे। फायर सर्विस के ऑफिसर ने यह भी दावा किया था कि उन्हें इस मामले को आगे न बढ़ाने के लिए कहा गया था, क्योंकि इसमें ‘ऊपर के लोग शामिल थे।’

मामला क्या है?

मार्च 2025 में, दिल्ली में जस्टिस यशवंत वर्मा के सरकारी आवास में आग लग गई थी। आग बुझाने के दौरान फायरफाइटर्स को स्टोररूम में जले हुए 500 रुपए के नोटों का एक बड़ा पहाड़ मिला था। इस घटना के बाद तत्कालीन CJI ने जस्टिस वर्मा पर आरोप लगाए थे।

फिर सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले की जाँच के लिए एक कमेटी बनाई थी। जस्टिस वर्मा को इस घटना के कुछ ही दिनों बाद दिल्ली हाई कोर्ट से इलाहाबाद हाई कोर्ट ट्राँसफर कर दिया गया था। ऐसा करने पर कुछ वकीलों और लीगल वर्कर्स ने इसका विरोध किया था।

जस्टिस वर्मा पर क्या-क्या कार्रवाई हो चुकी है?

जस्टिस यशवंत वर्मा मामले में सुप्रीम कोर्ट ने एक 3 सदस्यीय जाँच कमेटी का गठन किया है। कमेटी ने 55 गवाहों से पूछताछ की और जस्टिस वर्मा का बयान दर्ज किया है। कमेटी ने अपनी 64 पेज की रिपोर्ट राष्ट्रपति और प्रधानमंत्री को सौंपी थी, जिसमें जस्टिस वर्मा को पद से हटाने की सिफारिश की गई थी।

जस्टिस वर्मा को इलाहाबाद हाई कोर्ट ट्राँसफर कर दिया गया है, लेकिन उन्हें कोई ज्यूडिशियल काम नहीं सौंपा गया है। जस्टिस वर्मा ने अभी तक ना तो इस्तीफा दिया है और ना ही वॉलंटरी रिटायरमेंट लिया है।

अब संसद में उनके खिलाफ महाभियोग की प्रक्रिया शुरू होने की संभावना जताई जा रही है, जो भारत में किसी सिटिंग जज को हटाने का पहला मामला होगा।

जस्टिस वर्मा ने जाँच को ‘फंडामेंटल रूप से गलत’ बताया है, लेकिन कमेटी ने उनके बचाव को यह कहते हुए खारिज कर दिया कि ‘करेंसी नोट कई लोगों ने देखे और वास्तविक समय में रिकॉर्ड किए गए। यह असंभव है कि उन्हें फँसाने के लिए लगाया गया हो” कमेटी ने सबूत हटाने या घटनास्थल को साफ करने में उनकी बेटी और निजी सचिव की भूमिका पर भी सवाल उठाए हैं।

अब तक के बेस्ट जज वर्मा- कपिल सिब्बल

वरिष्ठ वकील और राज्यसभा सांसद कपिल सिब्बल ने इस मामले में जस्टिस यशवंत वर्मा का बचाव किया है। मंगलवार (17 जून 2025) को सिब्बल ने जस्टिस वर्मा को ‘सबसे बेहतरीन जजों में से एक’ बताया और सरकार की इस कार्रवाई की आलोचना की है। सिब्बल का आरोप है कि सरकार का असली मकसद कॉलेजियम सिस्टम को खत्म करना और न्यायिक नियुक्तियों पर कंट्रोल पाना है।

सिब्बल ने सरकार पर आरोप लगाया कि वह जस्टिस वर्मा के खिलाफ तो मामला चला रही है, लेकिन जस्टिस शेखर यादव के खिलाफ ऐसी ही कार्रवाई नहीं कर रही है। जस्टिस शेखर यादव पर पिछले साल कुछ ‘सांप्रदायिक’ टिप्पणियों के आरोप लगे थे और उनके खिलाफ विपक्ष के सांसदों ने महाभियोग का नोटिस भी दिया था।

सिब्बल ने कहा, “मैं पूरी जिम्मेदारी के साथ कह सकता हूँ कि वह (वर्मा) सबसे बेहतरीन जजों में से एक हैं जिनके सामने मैंने बहस की है। आप हाई कोर्ट या सुप्रीम कोर्ट के किसी भी वकील से पूछ लें, इस जज पर कोई गलत काम करने का आरोप नहीं है।”

सिब्बल ने आगे कहा, “यह चौंकाने वाला है कि आप (सरकार) एक ऐसे जज को निशाना बना रहे हैं जिसके खिलाफ कोई सबूत नहीं है और आप एक ऐसे जज की रक्षा कर रहे हैं जिसके खिलाफ सबूत की जरूरत नहीं है क्योंकि उनका बयान सार्वजनिक डोमेन में है और अध्यक्ष के पास एक महाभियोग प्रस्ताव लंबित है और वह हस्ताक्षर सत्यापन के लिए इस पर बैठे हैं।”

हालाँकि, सिब्बल के दावों के विपरीत, चीफ जस्टिस संजीव खन्ना को भेजी गई एक तीन-जजों की जाँच पैनल की रिपोर्ट ने पुष्टि की है कि जस्टिस यशवंत वर्मा के तुगलक रोड वाले घर में 14 मार्च 2025 को बड़ी मात्रा में कैश मिला था।

खालिस्तानी सिर्फ भारत के लिए नहीं, कनाडा के लिए भी हैं खतरा… अब जाकर कनाडाई सरकार को आ रहा समझ: खुफिया एजेंसी की रिपोर्ट ने माना- ये भारत के खिलाफ रचते हैं साजिश

खालिस्तानियों ने भारत के खिलाफ साजिश रचने के लिए कनाडा को पनाहगाह के तौर पर इस्तेमाल किया है। यह दावा कनाडा की खुफिया एजेंसी की एक रिपोर्ट में किया गया है। दावा है कि कनाडा की धरती से खालिस्तानी भारत को निशाना बना रहे हैं। खालिस्तानी कनाडा में रहकर फंडिंग जुटा रहे हैं, जिससे भारत में हिंसा की घटना को अंजाम दे रहे हैं।

बता दें कि भारत लंबे समय से इस मुद्दे पर चिंता जता रहा, जिसकी पुष्टि कनाडा की खुफिया एजेंसी (CSIS) ने कर दी है। CSIS ने बुधवार (18 जून 2025) को एक वार्षिक रिपोर्ट जारी की। इस रिपोर्ट में कनाडा की राष्ट्रीय सुरक्षा पर खास चिंताओं और खतरों को रेखांकित किया है।

कनाडा की खुफिया एजेंसी की रिपोर्ट में खालिस्तान पर की गई टिप्पणी (साभार: CSIS)

साल 2024 की इस रिपोर्ट में स्पष्ट तौर पर कहा गया है, “खालिस्तानी चरमपंथी मुख्य रूप से भारत में हिंसा को बढ़ावा देने, धन जुटाने या योजना बनाने के लिए कनाडा को इस्तेमाल किया जा रहा है।”

रिपोर्ट में कनाडा स्थित खालिस्तानी चरमपंथियों (CBKE) के सक्रिय समूह का भी जिक्र किया है। यह समूह कनाडा में बैठकर भारत के पंजाब में खालिस्तान के स्वतंत्र राज्य की स्थापना करने के उद्देश्य पर काम कर रहे हैं।

वहीं, इस रिपोर्ट में कनाडा ने पहली बार खालिस्तानी समूहों के लिए अधिकारिक रूप से ‘उग्रवाद’ शब्द का इस्तेमाल किया है। कनाडा ने खालिस्तानी चरमपंथी को राष्ट्रीय की सुरक्षा के लिए खतरा बताया है।

साल 2023 में खालिस्तानी आतंकवादी की हत्या से बिगड़े संबंध

खालिस्तानी आतंकवादी हरदीप सिंह निज्जर की 18 जून 2023 में हत्या के बाद कनाडा और भारत के संबंध बिगड़ गए थे। जहाँ कनाडा ने निज्जर की हत्या को भारत सरकार का हस्तक्षेप बताया था। इसका खंडन करते हुए भारत ने इन आरोपों को बेतुका और निराधार करार दिया था।

इसके बाद भारत ने कनाडा में अपने 6 राजनयिकों को भी वापस बुला लिया था, तब भी भारत ने कनाडा पर खालिस्तानी चरमपंथियों को पनाह देने और उनकी गतिविधियों को नजरअंदाज करने का आरोप लगाया था। अब जाकर कनाडा ने खालिस्तान पर पनाहगाह वाले आरोपों को स्वीकार कर लिया है।

भारत पर लगाया विदेशी हस्तक्षेप का आरोप

CSIS ने अपनी रिपोर्ट में भारत पर कनाडा में विदेशी हस्तक्षेप का भी आरोप लगाया है। रिपोर्ट में कहा गया कि भारत ‘ट्रांस नेशनल दमन’ यानी सीमा पार दमन में मुख्य भूमिका निभाता है। रिपोर्ट में चीन को कनाडा के लिए सबसे बड़ा सीक्रेट खतरा बताया गया। इसके अलावा रूस, ईरान और पाकिस्तान का भी नाम लिया है।

रिपोर्ट में लिखा गया कि कनाडा को भारत सरकार के जातीय, धार्मिक और सांस्कृतिक समुदायों के साथ कनाडा की राजनीतिक प्रणाली में जारी विदेशी हस्तक्षेप के लिए सतर्क रहना चाहिए। रिपोर्ट में कहा गया है, “कनाडा स्थित उनके प्रॉक्सी एजेंटों सहित भारतीय अधिकारी कई तरह की गतिविधियों में शामिल हैं, जो कनाडाई समुदायों और राजनेताओं को प्रभावित करने की कोशिश करते हैं।”

भारत-कनाडा के प्रधानमंत्री ने की मुलाकात

कनाडा की खुफिया एजेंसी (CSIS) की यह रिपोर्ट उस वक्त सामने आई है, जब हाल ही में कनाडा के पीएम मार्क कार्नी और भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मुलाकात की। मंगलवार (18 जून 2025) को जी-7 शिखर सम्मेलन में दोनों देशों के प्रधानमंत्री ने आपसी संबंधों को मजबूत करने की शपथ ली।

कोयंबटूर बम ब्लास्ट में अहमद अली, अब्दुल्ला और शेख दाऊद समेत 4 गिरफ्तार, जिहादी विचारधारा के लिए कर रहे थे भर्ती: प्राचीन मंदिर के सामने उड़ाई थी गाड़ी, NIA ने बताया- अरबी कॉलेज वाला जमील बाशा भी था शामिल

राष्ट्रीय जाँच एजेंसी (NIA) ने कोयंबटूर कार बम ब्लास्ट में 4 और आरोपितों की गिरफ्तारी कर ली है। गिरफ्तार किए गए आरोपितों के नाम अहमद अली, जवाहर सातिक, राजा अब्दुल्ला उर्फ एमएसी राजा और शेख दाऊद के रूप में हुई है। इस मामले में अब तक कुल 8 गिरफ्तारियाँ हो चुकी हैं।

इन गिरफ्तारियों से एक बड़े आतंकी भर्ती नेटवर्क का पर्दाफाश हुआ है, जिसमें मद्रास अरबी कॉलेज के संस्थापक जमील बाशा का नाम भी शामिल है। NIA का दावा है कि आरोपितों ने तमिलनाडु के युवाओं को भड़काकर आतंकी गतिविधियों के लिए तैयार किया जा रहा था।

बाशा, जिसे पहले ही गिरफ्तार किया जा चुका है, अरबी भाषा की कक्षाओं की आड़ में सलाफी-जिहादी विचारधारा फैला रहा था। उसका मकसद ‘जिहाद के ज़रिए खिलाफत बनाना’ और भारत की लोकतांत्रिक सरकार को हटाकर इस्लामिक शासन लागू करना था।

कोयंबटूर धमाका: क्या है ISIS कनेक्शन?

अक्टूबर 2022 में कोयंबटूर में एक कार में धमाका हुआ था। इसमें जमीशा मुबीन नाम का शख्स मारा गया था। भारत की जाँच एजेंसी NIA का कहना है कि यह धमाका एक आतंकी ग्रुप की लोगों को कट्टरपंथी बनाने की कोशिशों का नतीजा था।

शुरुआत में लगा था कि मुबीन एक पुराने मंदिर को उड़ाना चाहता था, लेकिन सूत्रों से पता चला है कि उसका असली मकसद शहर के बीच में जाकर ज़्यादा तबाही मचाना था। उसने पुलिस चौकी देखकर मंदिर के सामने गाड़ी रोकी, और फिर गैस लीक होने से धमाका हो गया।

मुबीन की लाश से 7 लोहे की पिन मिली थीं। उसके घर की तलाशी और उसके शरीर पर लिखी बातों से साफ हुआ कि वह इस्लामिक स्टेट (ISIS) नाम के आतंकी संगठन की सोच से जुड़ा था। वह लोगों को ‘मुस्लिम’ या ‘काफ़िर’ (गैर-मुस्लिम) में बाँटकर ‘जिहाद’ (धर्म युद्ध) की बात करता था।

जाँच और आगे की कार्रवाई

NIA (राष्ट्रीय जाँच एजेंसी) ने 30 अक्टूबर 2022 को इस धमाके की जाँच शुरू की थी। शुरुआत में इस मामले में पहले भी कुछ लोगों को गिरफ्तार किया गया था, जिनके नाम मुहम्मद तालका, मोहम्मद अजहरुद्दीन, मोहम्मद रियाज, फिरोज इस्माइल और मोहम्मद नवाज इस्माइल थे।

NIA का मानना है कि यह सब भारत के खिलाफ आतंकी सोच फैलाने की साजिश है और वे इसकी पूरी गहराई से जाँच कर रहे हैं। उनका मकसद है कि तमिलनाडु पुलिस और बाकी खुफिया एजेंसियों के साथ मिलकर इस आतंकी ग्रुप को पूरी तरह से खत्म किया जाए। NIA ने यह भी बताया है कि अभी और गिरफ्तारियाँ हो सकती हैं।

दक्षिण भारत में आतंकी गतिविधियाँ

पिछले कुछ सालों से भारत की जाँच एजेंसी NIA साउथ इंडिया के कई राज्यों में आतंकवाद से जुड़े मामलों की जाँच कर रही है।

  • जनवरी 2023: केरल के कोल्लम से PFI (एक प्रतिबंधित संगठन) का एक रिपोर्टर मोहम्मद सादिक पकड़ा गया। यह शख्स गैर-मुस्लिमों (जिन्हें वे ‘काफिर’ कहते हैं) की जानकारी इकट्ठा करता था।
  • दिसंबर 2022: केरल से PFI का वकील मोहम्मद मुबारक गिरफ्तार हुआ। यह चरमपंथियों को गला काटने जैसी खतरनाक ट्रेनिंग दे रहा था।
  • जुलाई 2019: तमिलनाडु में वाहदत-ए-इस्लामी हिंद नाम के एक कट्टरपंथी संगठन का पर्दाफाश हुआ और इसके 14 संदिग्धों को गिरफ्तार किया गया। इस संगठन का मकसद भारत को एक इस्लामिक देश बनाना था। ये सभी घटनाएँ बताती हैं कि दक्षिण भारत में कट्टरपंथी सोच को फैलाने और युवाओं को आतंकी कामों में शामिल करने की लगातार कोशिशें हो रही हैं।

अगले तीन सालों में ₹3.5 लाख करोड़ तक पहुँच जाएगा भारत का फिनटेक बाजार, 30% की होगी हर साल बढ़त: वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने बताया- हमारी उपलब्धि के पास भी नहीं कोई मॉडर्न देश

केन्द्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने कहा है कि अगले तीन सालों में भारत का फिनटेक मार्केट ₹3.5 लाख करोड़ की हो जाएगी। उन्होने फिनटेक बाजार में सालाना 30 फीसदी वृद्धि की उम्मीद जताई है।

वित्त मंत्री ने कहा कि भारतीय फिनटेक इनोवेशन में विश्वस्तरीय क्वालिटी उत्पाद बनाने की क्षमता है। फिनटेक कंपनियाँ देश के ग्रामीण क्षेत्रों को न केवल एक सामाजिक जिम्मेदारी की तरह लें, बल्कि नए बाजार अवसर के रूप में भी देख सकते हैं। इन कंपनियों को अब ‘मेक इन इंडिया’ के साथ-साथ ‘मेक फॉर द वर्ल्ड’ भी बनना चाहिए।

वित्त मंत्रालय ने सोशल मीडिया एक्स पर लिखा, ‘‘सीतारमण ने आश्वासन दिया कि सरकार फिनटेक उद्योग को समर्थन देना जारी रखेगी।’’

डिजिटल पेमेंट्स अवॉर्ड्स 2025 देने के मौके पर उन्होने कहा, भारत में फिनटेक क्रांति और भी फलेगी-फूलेगी। इस क्षेत्र में ‘काफी बड़ा’ अवसर अभी भी हैं। उन्होंने कहा, “मेरा विश्वास है कि इसके सर्वश्रेष्ठ अध्याय अभी लिखे जाने बाकी हैं।” उन्होने सभी नागरिकों को इससे जोड़ने और दुनिया को दिशा देने का आह्वान किया।

विश्व बैंक के एक रिपोर्ट का हवाले देते हुए उन्होंने कहा कि डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर के जरिए भारत पिछले 6 साल में 80 फीसदी वित्तीय समावेशन दर हासिल की है। वित्त मंत्री ने कहा, ” भारत अब डिजिटल भुगतान के लेनेदेन का करीब आधा हिस्सा यानी 48.5 फीसदी यूपीआई से कर रहा है” इतना ही नहीं दुनियाभर में 35 करोड़ से ज्यादा यूजर यूपीआई इकोसिस्टम का इस्तेमाल कर रहे हैं। दुनिया के कई देश जैसे भूटान, फ्रांस, मॉरीशस, नेपाल, सिंगापुर,श्रीलंका और यूएई अब यूपीआई का इस्तेमाल कर रहे हैं।

वित्त मंत्री के मुताबिक भारत में जितना इनोवेशन हो रहा है वो दूसरे देशों के लिए सपने से कम नहीं है। उन्होंने कहा, “कई उन्नत देश हमारी फिनटेक कंपनियों द्वारा बनाए गए रफ्तार के करीब भी नहीं हैं, यह भारतीय फिनटेक क्षेत्र के लिए बहुत ही काबिले तारीफ है,”

भारत की कंपनियों और एक्सपोर्टरों का लक्ष्य अब ग्लोबल मार्केट पर कब्जा होना चाहिए। हमारे पास टैलेंट है, उच्च मापदंड और हर समस्या का समाधान मौजूद हैं।

कोरोना महामारी के दौरान ऑनलाइन पेमेंट ऐप लाइफलाइन बन गयी। जब सभी अपने घर में बंद थे और बाहर सुनसान था तो बगैर संपर्क में आए भुगतान और डोरस्टेप बैंकिंग को मजबूत किया गया। उन्होंने कहा कि भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) के अनुसार, भारत का डिजिटल भुगतान सूचकांक, जो डिजिटल भुगतान के समग्र उपयोग को मापता है, पिछले पाँच वर्षों में चौगुना हो गया है, 2018 में 100 से 2024 में 465 तक। दुनिया के सभी डिजिटल भुगतान लेनदेन का 48.5% से अधिक भारत में होता है। 35 करोड़ से अधिक यूजर्स UPI का इस्तेमाल करते हैं।

कैसे-कैसे होना चाहिए संभल में दंगा… व्हॉट्सऐप ग्रुप पर सब तय हुआ: एडमिन सपा सांसद जियाउर्रहमान बर्क निकला, 1000+ पन्नों की चार्जशीट में दुबई तक का कनेक्शन उजागर

संभल हिंसा की गहराई में जाने पर कई चौंकाने वाली बातें सामने आती हैं, जो पहले की रिपोर्टों में नहीं थीं। SIT की चार्जशीट के अनुसार, इस खूनी खेल का साजिशकर्ता दुबई में बैठा गैंगस्टर शारिक साठा है, जिसे संभल के सपा सांसद जियाउर्रहमान बर्क का खुला प्रोटेक्शन मिला था।

जानकारी के अनुसार, पुलिस ने दावा किया कि साठा ने सीधे तौर पर मुस्लिम भीड़ को भड़काया था। शारिक साठा ने मुस्लिमों को उकसाया कि वे जामा मस्जिद के सर्वे को रोकें, क्योंकि यह उनकी ‘500 साल पुरानी बाबर की निशानी’ है, जिसे बचाना उनका फर्ज़ है।

इस साज़िश का सबसे घिनौना पहलू यह है कि शारिक साठा के इशारे पर ही हिंदू पक्ष के वकील विष्णु शंकर जैन की हत्या की साज़िश रची गई थी। इस काम के लिए शारिक साठा गैंग से जुड़े मोहम्मद गुलाम को सुपारी दी गई थी, जिसे पुलिस ने बाद में गिरफ्तार कर लिया था।

मोहम्मद गुलाम के पास से भारी मात्रा में विदेशी हथियार भी बरामद हुए, जो इस साज़िश की गंभीरता को दिखाते हैं। पुलिस ने यह भी खुलासा किया है कि शारिक साठा गैंग का संबंध अंडरवर्ल्ड डॉन दाऊद इब्राहिम की D कंपनी से है, जिससे इस हिंसा के पीछे एक गहरी और खतरनाक अंतरराष्ट्रीय साज़िश की बू आती है।

व्हाट्सएप ग्रुप में साजिश का पटकथा

संभल हिंसा की साज़िश एक व्हाट्सएप ग्रुप ‘सांसद संभल’ से रची गई थी, जिसके एडमिन खुद सांसद जियाउर्रहमान बर्क थे। पुलिस को पक्के सबूत मिले हैं कि 22 और 24 नवंबर को इसी ग्रुप में हिंसा भड़काने के मैसेज भेजे गए। इन मैसेज में भारी भीड़ जुटाने और सरकारी सर्वे को किसी भी कीमत पर रोकने का निर्देश था।

दुबई में बैठा गैंगस्टर शारिक साठा ने भी 23 नवंबर को फोन पर निर्देश दिए थे कि सर्वे नहीं होना चाहिए। इस भीड़ का मुख्य निशाना हिंदू वकील विष्णु शंकर जैन थे, जिनकी हत्या की साज़िश रची गई थी, लेकिन वह बाल-बाल बच गए।

सुनियोजित थी संबल हिंसा साजिश

24 नवंबर 2024 को संभल में शाही जामा मस्जिद के सर्वे के दौरान भड़की हिंसा ने पूरे नॉर्थ इंडिया को हिला दिया था। हिंदू पक्ष का दावा है कि विवादित मस्जिद उस जगह बनी है, जहाँ पहले श्रीहरिहर मंदिर था। कोर्ट के आदेश पर जब एडवोकेट कमिश्नर की टीम सर्वे के लिए पहुँची, तो मुस्लिम भीड़ ने हिंसक रूप ले लिया।

पुलिस की जाँच में सामने आया है कि यह हिंसा कोई अचानक नहीं हुई, बल्कि एक सुनियोजित साज़िश का नतीजा थी। SIT ने अपनी 11वीं चार्जशीट में सपा सांसद जियाउर्रहमान बर्क, सपा विधायक नवाब इकबाल महमूद के बेटे सुहैल इकबाल सहित 23 लोगों को आरोपित बनाया है, जबकि विधायक पुत्र सुहैल इकबाल को क्लीनचिट मिली है।

इस सुनियोजित हमले में चार लोगों की जान गई और 29 पुलिसकर्मी घायल हुए। शाही जामा मस्जिद कमेटी के सदर जफर अली ने पुलिस को बताया कि सपा सांसद बर्क की इसमें बड़ी भूमिका थी। पहले 3000 पन्नों की चार्जशीट दाखिल हुई थी, और अब 1200 पन्नों की एक और चार्जशीट दाखिल की गई है।

मंत्रोच्चार के साथ क्रोएशिया में हुआ प्रधानमंत्री मोदी का स्वागत, कई प्रोजेक्ट्स पर भी हस्ताक्षर : PM ने कहा- आतंकवाद मानवता का दुश्मन, रक्षा सहयोग योजना पर साथ काम करेंगे दोनों देश

अपने तीन देशों के दौरे में भारत के प्रधानमंत्री बुधवार को क्रोएशिया पहुँचे। इस दौरान दोनों देशों के बीच कई अहम मसलों पर एक साथ काम करने के लिए सहमति बनी। पीएम मोदी ने दौरे के बाद आतंकवाद और दोनों देशों की सुरक्षा और संप्रभुता पर अपनी बात रखी।

क्रोशिया में पहली बार किसी भारतीय प्रधानमंत्री ने दौरा किया है। यूरोप का ये एक बेहद छोटा सा देश है। क्रोएशिया के जाग्रेब में पहुँचने के बाद मंत्रोच्चार से पीएम मोदी का स्वागत किया गया। इसके बाद पीएम मोदी ने क्रोएशिया में रह रहे भारतीय प्रवासियों से मुलाकात की। यहाँ लगभग 17,000 भारतीय मूल के लोग रहते हैं। लोगों ने प्रधानमंत्री मोदी के साथ मुलाकात के दौरान ‘वंदे मातरम’, ‘जय श्री राम’ और ‘मोदी-मोदी’ के नारे लगाए।

अपने दौरे में प्रधानमंत्री मोदी ने क्रोशिया के प्रधानमंत्री आंद्रेज प्लेंकोविच के साथ राष्ट्रपति जोरन मिलानोविच से भी मुलाकात की। इस दौरान भारत और क्रोएशिया के बीच विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी, रक्षा, ऊर्जा,  फार्मास्यूटिकल्स, आईटी, सेमीकंडक्टर और एग्रीकल्चर के क्षेत्र में साथ काम करने के लिहाज से कई समझौतों पर हस्ताक्षर किए गए। इनमें से सबसे अहम ‘रक्षा सहयोग योजना’ रही जिसे मजबूत करने पर दोनों देशों की सहमति बनी।

दौरे के बाद प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि हमारे मित्र देश का साथ हमारे दौरे के लिए काफी महत्वपूर्ण रहा। क्रोएशिया और भारत इस बात पर सहमत है कि आतंकवाद मानवता का दुश्मन है। आतंकवाद और बातचीत एक साथ नहीं हो सकती।

पीएम मोदी ने कहा कि यूरोपीय यूनियन के साथ हमारी स्ट्रैटेजिक पार्टनरशिप को मजबूत करने में क्रोएशिया का समर्थन और सहयोग काफी महत्वपूर्ण है। दोनों देश इस बात का समर्थन करते हैं कि यूरोप हो या एशिया किसी भी समस्या का समाधान रणभूमि से नहीं किया जा सकता बल्कि डायलॉग और डिप्लोमेसी से किया जा सकता है।

प्रधानमंत्री ने आगे कहा कि किसी भी देश की अखंडता और संप्रभुता का सम्मान आवश्यक है। क्रोएशिया में आना मेरे लिए एक विशेष पल है। ऑपरेशन सिंदूर के बाद पीएम मोदी ने पहली बार तीन देशों के दौरा किया। इसके तहत पहले वह साइप्रस, कनाडा और क्रोएशिया का दौरा शामिल था।

G7 शिखर सम्मेलन में आमंत्रित किए जाने के बाद पीएम मोदी कनाडा पहुँचे। यहाँ पर उन्होंने भारत के आउटरीच पार्टनर के तौर पर हिस्सा लिया। G-7 दुनिया की 7 उन्नत अर्थव्यवस्थाओं और यूरोपीय संघ का एक अनौपचारिक समूह है। इसमें संयुक्त राज्य अमेरिका, कनाडा, फ्रांस, जर्मनी, इटली, जापान और यूनाइटेड किंगडम शामिल हैं।

G7 शिखर सम्मेलन में पीएम मोदी ने इटली की  पीएम जॉर्जिया मेलोनी, फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों, ब्रिटेन के प्रधानमंत्री कीर स्टार्मर, दक्षिण अफ्रीका के राष्ट्रपति सिरिल रामफोसा, आस्ट्रेलिया के प्रधानमंत्री अल्बनीज समेत अन्य नेताओं के साथ मुलाकात कर द्विपक्षीय वार्ता की।

क्रोएशिया का दौरा पूरा करने के बाद प्रधानमंत्री भारत वापसी कर चुके हैं।

अगर ईरान नहीं आया बाज, तो हम भी करेंगे हमला: ट्रंप ने किया ऐलान, खामेनेई बोला- US बीच में आया तो अंजाम बुरा होगा

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान पर हमला करने का मन तो बना लिया है, लेकिन अभी आखिरी फैसला नहीं लिया है। ट्रंप की नज़र इस बात पर है कि क्या ईरान अपना परमाणु हथियार बनाने का काम छोड़ता है या नहीं। ट्रंप का कहना है कि उनके पास हर मुश्किल का हल है, लेकिन वह अभी इंतज़ार कर रहे हैं।

ट्रंप का यह भी कहना है कि ईरान ने पहले अच्छे समझौते से इनकार कर दिया था, लेकिन अब वे व्हाइट हाउस आकर मिलना चाहते हैं। ट्रंप ने कहा कि वह युद्ध नहीं चाहते, लेकिन अगर ईरान के पास लड़ने या परमाणु हथियार रखने का विकल्प है, तो उन्हें वही करना होगा जो ज़रूरी है।

ट्रंप ने अपने सैन्य सलाहकारों से यह भी पूछा है कि क्या अमेरिका के 30,000 पाउंड वजनी बंकर-बस्टर बमों का इस्तेमाल ईरान की अत्यधिक संरक्षित फोर्डो परमाणु साइट को नष्ट करने के लिए किया जा सकता है।

ट्रंप के समर्थक और युद्ध

ट्रंप के कुछ समर्थक, जिन्होंने उन्हें राष्ट्रपति बनने में मदद की, वे नहीं चाहते कि देश को मिडिल ईस्ट के एक नए युद्ध में धकेला जाए। मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक, ट्रंप को सत्ता में लाने वाले समर्थकों के बीच विभाजन पैदा हो गया है। उनके कुछ प्रमुख रिपब्लिकन समर्थक, जैसे स्टीव बैनन, ईरान पर हमले के विरोध में हैं।

वे ट्रंप की देश को अलग-थलग करने वाली नीतियों के समर्थक हैं। बैनन ने कहा है कि इजरायल ने ‘जो शुरू किया था, उसे पूरा करने दें।’ हालाँकि, ट्रंप का कहना है कि उनके कुछ समर्थक अब थोड़े नाखुश हैं लेकिन अन्य लोग उनसे सहमत हैं कि ईरान परमाणु शक्ति नहीं बन सकता।

ईरान में हालात और हमला

ईरान और इजरायल के बीच पिछले सात दिनों से हमले जारी हैं। इजरायल तेहरान के अलग-अलग हिस्सों में हवाई हमले कर रहा है और उसके परमाणु ठिकानों को नुकसान पहुँचाने का दावा कर रहा है।

वहीं, ईरान इजरायल पर लंबी दूरी की बैलिस्टिक मिसाइलें दाग रहा है। ईरान पर इजरायली हमलों में कम से कम 639 लोग मारे जा चुके हैं और 1,329 घायल हुए हैं। इजरायल में 24 लोगों की मौत की खबरें हैं।

ईरान का जवाब

ईरान के सुप्रीम लीडर आयतुल्लाह अली खामेनेई ने ट्रंप की धमकियों को खारिज कर दिया है और चेतावनी दी है कि अगर अमेरिका हमले में शामिल होता है तो उसके ‘बुरे परिणाम होंगे‘ और अमेरिका को काफी ज्यादा नुकसान होगा।

खामेनेई ने कहा कि ईरान कभी झुकेगा नहीं और धमकी भरी भाषा में बात करने वालों को ‘ईरानी राष्ट्र सरेंडर नहीं करेगा’ समझना चाहिए।

इजरायल की फॉर्डो साइट पर नजर

इजरायली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू चाहते हैं कि ट्रंप अमेरिका को ईरान के खिलाफ सैन्य अभियान में शामिल करें और उसके संभावित भूमिगत हथियार बनाने वाले परमाणु कार्यक्रम को खत्म कर दें। इजरायल का दावा है कि उसने फॉर्डो परमाणु साइट सहित कई परमाणु साइटों पर हमले किए हैं और उन्हें नुकसान पहुँचाया है।

इजरायल का मानना है कि फॉर्डो साइट सबसे महत्वपूर्ण है, जहाँ ईरान परमाणु हथियार बनाने की कोशिश कर रहा है और जिसे इजरायली सेना नुकसान नहीं पहुँचा पा रही है। नेतन्याहू को उम्मीद है कि अगर ट्रंप अंतिम आदेश देते हैं, तो अमेरिकी वायु सेना B2 बॉम्बर से ‘बंकर बस्टर’ बम गिरा सकती है, जिससे इस भूमिगत प्लांट को तबाह किया जा सकता है।

रूस का रुख

रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने कहा है कि वह ईरान-इजरायल के बढ़ते संघर्ष को लेकर इजरायल और अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के लगातार संपर्क में हैं। पुतिन ने जोर देकर कहा कि अब समय आ गया है कि इस लड़ाई को रोकने के रास्ते खोजे जाएँ और ऐसा समाधान निकाला जाए जो इजरायल की सुरक्षा और ईरान के हितों दोनों का सम्मान करे।

पुतिन ने यह भी पुष्टि की कि रूस के वर्कर ईरान के बुशहर परमाणु ऊर्जा संयंत्र में काम कर रहे हैं, और इजरायल से सहमति बनी है कि वह इन लोगों की सुरक्षा सुनिश्चित करेगा। पुतिन ने साफ किया कि रूस और ईरान के बीच परमाणु ऊर्जा के क्षेत्र में सहयोग जारी रहेगा।

यू आर द बेस्ट… G7 में मिले मोदी-मेलोनी तो फिर ट्रेंड में आया Melodi, इतालवी PM बोलीं- आपकी तरह बनना चाहती हूँ, भारत के प्रधानमंत्री ने कहा- हमारी दोस्ती मजबूत

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और इटली की पीएम जॉर्जिया मेलोनी की कनाडा में जी-7 शिखर सम्मेलन के दौरान मुलाकात हुई। दोनों नेताओं ने हाथ मिलाया और दोस्ती की बात की। मेलोनी ने पीएम मोदी की तारीफ करते हुए कहा, “आप बेस्ट हैं, मैं आपकी तरह बनना चाहती हूँ।”

पीएम मोदी से मुलाकात के दौरान मेलोनी ने उनसे कहा कि आप बेस्ट हैं और मैं भी आपकी तरह बनने की कोशिश कर रही हूँ। जी-7 उन 7 देशों का समूह है, जिसमें इटली, फ्रांस, अमेरिका और दूसरे देश शामिल है। भारत इसका हिस्सा नहीं है, लेकिन 2019 से भारत को बतौर गेस्ट आमंत्रित किया जा रहा है।

इसी मुलाकात के दौरान दोनों ने मुलाकात की। इसकी तस्वीर मेलोनी ने सोशल मीडिया पर शेयर की, जिसमें दोनों हँसते नजर आए।

मेलोनी ने ट्वीट कर लिखा, “इटली और भारत गहरी दोस्ती से जुड़े हैं।”

पीएम मोदी ने उनकी पोस्ट को रीपोस्ट करते हुए कहा, “आपसे सहमत हूँ, हमारी दोस्ती मजबूत होगी और लोगों को फायदा होगा।”

दोनों ने भारत-इटली संबंधों को बेहतर करने की बात कही। इस दौरान ग्लोबल साउथ और इंडो-पैसिफिक जैसे मुद्दों पर भी चर्चा हुई।

पीएम मोदी ने इटली में भारतीय सेना के योगदान को याद करते हुए मेमोरियल की योजना का जिक्र किया। मेलोनी ने इसे मूल्य आधारित साझेदारी बताया और सहयोग बढ़ाने की इच्छा जताई। इस मुलाकात से दोनों देशों के रिश्ते और गहरे होंगे। इस बैठक में दोनों देशों के पीएम ने भारत और इटली के बीच बढ़ते द्विपक्षीय संबंधों पर चर्चा की और आपसी सहयोग को और मजबूत करने की प्रतिबद्धता जताई।

गौरतलब है कि पीएम मोदी और जॉर्जिया मेलोनी की मुलाकातों के वीडियो अक्सर सोशल मीडिया पर वायरल होते रहते हैं। दोनों के प्रशंसक Melodi नाम से अक्सर ट्वीट करते हैं, जिसमें दोनों नेता एक-दूसरे से बातचीत करते नजर आते हैं। हालाँकि कई बार ये पोस्ट बेहद मजाकिया भी होते हैं।