Home Blog Page 3378

‘इतने टीके लग गए तो CM योगी को 10 बार सलाम करूँगा.. चैलेंज है’: यूपी में 10 करोड़ वैक्सीनेशन, अजीत अंजुम को खोज रहे लोग

उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को ‘पत्रकार’ अजीत अंजुम ने खुला चैलेंज दिया था। उन्होंने अपने एक वीडियो में ये चैलेंज करते हुए कहा कि यदि वे अपनी सरकार के ही फैसले पर अमल करते है  तो वे उन्हें एक बार नहीं दस बार सलाम करेंगे। उनकी चुनौती राज्य में कोविड वैक्सीनेशन को लेकर थी। 

उन्होंने कहा था, “यूपी सरकार का दावा था कि 1 जुलाई से 3 महीने तक यूपी में महा वैक्सीनेशन अभियान की शुरुआत होगी। उस मेगा वैक्सीनेशन ड्राइव के तहत हर रोज 10 लाख लोगों को टीका लगेगा, वैक्सीनेशन होगा। उस हिसाब से देखें तो 10 लाख यानी महीने में 3 करोड़ और 3 महीने में 9 करोड़ लोगों को टीके का प्लान है।” इसी पर निशाना साधते हुए अजीत अंजुम ने कहा था कि अगर योगी आदित्यनाथ अपने इस फैसले पर अमल कर लेते हैं और सफल हो जाते हैं तो वो एक बार नहीं दस बार सलाम करेंगे।

अब बात करते हैं योगी आदित्यनाथ के सरकार में वैक्सीनेशन ड्राइव पर। उत्तर प्रदेश की योगी सरकार ने कोरोना वायरस संक्रमण को रोकने के लिए चलाए जा रहे वैक्सीनेशन कार्यक्रम में बड़ा मुकाम हासिल किया है। कोरोना वायरस के वैक्सीनेशन के मामले में उत्तर प्रदेश ने अन्य राज्य को पीछे छोड़ते हुए 10 करोड़ से अधिक टीके लगाने के लक्ष्य प्राप्त कर लिया है। उत्तर प्रदेश की योगी सरकार ने शनिवार (सितंबर 25, 2021) को कोरोना वैक्सीन की 10 करोड़ से अधिक डोज लगाकर देश का पहला राज्य बन गया है। 

यूपी में वैक्सीनेशन के नए रिकॉर्ड को लेकर सीएम योगी आदित्यनाथ ने ट्वीट भी किया है। सीएम योगी आदित्यनाथ ने अपने ट्वीट में लिखा “आदरणीय प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी के मार्गदर्शन व यूपी सरकार के अथक प्रयासों का सुफल है कि प्रदेश में 10 करोड़ से अधिक कोविड टीके का सुरक्षा कवच प्रदान किया जा चुका है। यह उपलब्धि प्रतिबद्ध स्वास्थ्यकर्मियों व अनुशासित नागरिकों को समर्पित है। आप भी लगवाएँ ‘टीका जीत का’…”

उत्तर प्रदेश की इस उपलब्धि के बाद अब लोग अजीत अंजुम से सवाल कर रहे हैं कि यूपी सरकार ने तो चुनौती स्वीकार कर लिया है। वो उन्हें कब सलाम करेंगे। जय नाम के यूजर ने लिखा, “आज यूपी ने 10 करोड़ के टार्गेट को पूरा किया। 3 महीने होने में अभी 5 दिन बाकी हैं और और एवरेज 10 लाख के हिसाब से 3 महीने में ९ करोड़ टीके लग गए। अब देखते हैं अजीत अंजुम जी में सलाम करते हुए वीडियो बनाने की हिम्मत हैं या नहीं। इंतज़ार रहेगा अंजुम जी।”

वहीं संजय दीक्षित ने लिखा, “हैलो अजी अंजुम योगी को सलाम करते हुए वीडियो कब डाल रहे हो? हो गए 9 करोड़ टीके और 5 दिन अभी बाकी हैं तुम्हारे चैलेंज के।”

एक यूजर ने लिखा, “सलाम ही करेगा ये मरदूद, नमस्ते नहीं करेगा। वैसे ये सलाम भी नहीं करेगा। वोक लेफ़्टी है ना, थूक के चाट लेगा। मतलब केजरीवाल टर्न ले लेगा।”

दीपक कामत ने लिखा, “गली के कुत्ते आने जाने वाले वाहनों पर भौंकते हैं, पर जब कोई वाहन रोक के दरवाजा खोलता है तो वही कुत्ते अपने स्थान विशेष में अपनी दुम्म दबा कर भाग खड़े होते है। अब मैंने कुत्ते की प्रवृति को व्यक्त किया है आप कुछ और ना समझे।”

एमके जवाली ने लिखा, “ये ऐसे पत्रकार हैं जिन का काम केवल विरोध करना है और लोगो मे नेगेटिव एनर्जी पैदा करना है। वैक्सीन का अभाव या उस का उपलब्ध न होने की तो ऐसे बात करते हैं कि जैसे कोई पानी निकालने वाला पम्प जमीन में लगा है और एक दिन में लगा कर लोगो को उपलव्ब्ध करा दो। जैसे सरकारी हैंड पम्प हो।”

वहीं गौतम कोतवाल ने लिखा, “हाँ भाई अजीत अंजुम…वीडियो नहीं आया अभी तक तुम्हारा…और हाँ अगर बनाओ तो पूरे आदर के साथ बनाना महाराज जी का… भविष्य के प्रधानमंत्री हैं वो।”

‘वो पहले आपके पैर पकड़ेंगे, 1 से 10 हो जाएँगे तो गली में घुसने भी नहीं देंगे’: उत्तराखंड में ‘लैंड जिहाद’ के खिलाफ प्रदर्शन

उत्तराखंड में भाजपा के पूर्व प्रदेश महामंत्री गजराज सिंह बिष्ट ने नैनीताल में शनिवार (25 सितंबर, 2021) को हिन्दू समाज का आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा, ”देवभूमि में समाज के कुछ विधर्मी लोग अराजकता फैलाने का प्रयास कर रहे हैं, जिसे रोकने के लिए आज पूरा हिन्दू समाज एकजुट हुआ है। इसके लिए मैं उनका हृदय से आभार व्यक्त करता हूँ।”

उत्तराखंड कृषि उत्पादन विपणन बोर्ड के पूर्व अध्यक्ष रह चुके बिष्ट ने फेसबुक पर अपना वीडियो शेयर किया है, जिसमें वह लोगों को संबोधित कर रहे हैं। उन्होंने वहाँ मौजूद लोगों से कहा, ”देश का बँटवारा होने के बाद 2 करोड़ मुसलमान हिंदुस्तान में रहे और 2 करोड़ मुस्लिम पाकिस्तान चले गए। आजादी के 70 सालों के बाद आज हमारे प्रेम की वजह से यह संख्या 2 करोड़ से 20 करोड़ हो गई है। वहीं पाकिस्तान में यह संख्या घटकर 2 करोड़ से 2 लाख रह गई है।”

उन्होंने कहा कि ये मुस्लिम शुरुआत में आपके पैर पकड़ने आएँगे। फिर आपसे हाथ जोड़ेगे और विनती करेंगे, लेकिन जब यही 1 से 10 हो जाते हैं तो आप इनकी गली में घुस भी नहीं सकते हैं। मैं आप सभी का धन्यवाद करता हूँ। यहाँ मौजूद सभी लोग बधाई के पात्र हैं।

गजराज सिंह ने कहा, ”ये केवल एक जमीन बिकने का मामला नहीं है। 13 रजिस्ट्रियों का मामला नहीं है। ये हमारी आस्था और पहाड़ को बचाने का मामला है। उत्तराखंड में कई जगहों से लोग आए हैं। उन्होंने 700 सालों तक मुस्लिमों की गुलामी तो सही, लेकिन उनके मजहब को कभी स्वीकार नहीं किया।”

सिंह ने आगे कहा हम अपने पूर्वजों को, अपने पितरों को इस श्राद्ध में इससे अच्छा तोहफा नहीं दे सकते हैं। हमारे पूर्वजों ने मुसलमानों की 700 वर्षों तक गुलामी सही है। कश्मीर भी पहले हमारी तरह था, लेकिन वहाँ भी एक-एक करके मुस्लिम परिवार बढ़ते गए और हिंदुओं की संख्या घटती गई। जैसे ही कश्मीर में 60 प्रतिशत मुस्लिम हुए उन्होंने 40 प्रतिशत हिंदुओं को भगा दिया। आज भी कश्मीर का 23 प्रतिशत ब्राह्मण दिल्ली में शरण लिए हुए है।

उन्होंने अपनी बात को खत्म करते हुए कहा, “ऐसी स्थिति हमारे राज्य की ना हो इससे बचने के लिए हमें कारगर कदम उठाना है। यह केवल एक प्लॉट बेचने या एक रजिस्ट्री करने का मामला नहीं है, बल्कि हिंदुत्व को बचाने का मामला है। ये हमारी आस्था और पितरों के सम्मान का मामला है। हर उत्तराखंडी को इस लड़ाई में सभी मतभेद भुलाकर आगे आना होगा।”

4 लोगों को मार कर लाश बीच चौराहे पर टाँग दी: तालिबान की ताज़ा करतूत, अफगानिस्तान में ‘कुरान के हिसाब से सज़ा’ की तस्वीर

तालिबान (Taliban) के सत्ता में आने के बाद अफगानिस्तान (Afghanistan) के हालात अब तेजी से बदल रहे हैं। तालिबान ने शरिया कानूनों के तहत लोगों का बर्बर सजा देना भी शुरू कर दिया है। ताजा तस्वीर पश्चिमी अफगानिस्तान के हेरात शहर के मुख्य चौक की है, जहाँ एक शख्स को तालिबान ने मारकर सार्वजनिक तौर पर क्रेन से लटका दिया है। इस घटना का वीडियो भी सामने आया है। 

इसे टोलो न्यूज की पत्रकार जहरा रहीमी ने ट्वीट करते हुए लिखा, “अत्याचार वापस आ गया है। तालिबान ने अफगानिस्तान के पश्चिम में हेरात शहर में एक व्यापारी के अपहरण के आरोप में चार लोगों को लटका दिया है।”

इसे अफगानिस्तान के पत्रकार हिजबुल्लाह खान ने भी ट्वीट किया है। उन्होंने लिखा, “तालिबान ने शहरों के अंदर सार्वजनिक तौर पर सजा-ए-मौत देना शुरू कर दिया है। ये हेरात का मामला है।”

चौक के किनारे एक फार्मेसी चलाने वाले वज़ीर अहमद सेद्दीकी ने द एसोसिएटेड प्रेस को बताया कि चार शवों को चौक पर लाया गया और तीन शवों को शहर के दूसरे स्क्वायर पर टाँगने के लिए ले जाया गया है। सिद्दीकी ने कहा कि तालिबान ने चौक पर घोषणा की कि चारों को अपहरण में शामिल पाया गया था और पुलिस ने उन्हें मार दिया। हालाँकि उनकी बातों से यह स्पष्ट नहीं था कि चारों पुलिस के साथ हुए गोलाबारी में मारे गए या उनकी गिरफ्तारी के बाद उन्हें मार डाला गया।

तालिबान के संस्थापक मुल्ला नूरुद्दीन तराबी ने इसी हफ्ते धमकी दी थी कि अफगानिस्तान में उसके संगठन का शासन आने के बाद से चोरों के लिए अंग-भंग की सज़ा फिर से वापस लाई जा सकती है। एक आँख और एक पाँव वाले तालिबान के संस्थापक ने कहा कि चोरों का हाथ काटने की सज़ा वापस आएगी, लेकिन हो सकता है कि ऐसी कार्रवाई अब सार्वजनिक रूप से नहीं की जाए। साथ ही उसने तालिबान द्वारा मचाए गए कत्लेआम का भी बचाव किया।

बता दें कि तालिबान अक्सर महिलाओं को कोड़े मारने से लेकर कथित अपराधियों पर पत्थरबाजी तक, इस तरह की कार्रवाइयों को सार्वजनिक रूप से लोगों के सामने अंजाम देता रहा है। यहाँ तक कि मौत की सज़ा भी लोगों के सामने ही दी जाती है। मुल्ला नूरुद्दीन तराबी ने दुनिया को तालिबान के कार्यों में हस्तक्षेप करने पर भुगतने की भी धमकी दी और कहा कि सजा शरीयत व कुरान के हिसाब से होगी। पिछली बार जब तालिबान ने अफगानिस्तान में सत्ता पाई थी, तब नूरुद्दीन ही उस सरकार का सर्वेसर्वा था।

इससे पहले तालिबान के क्रूरता का एक वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हुआ था। वीडियो में दो शख्स कोड़े बरसा रहे थे और महिला दर्द से चीख रही थी। वीडियो में देखा गया कि तालिबानी अफगान महिला पर कोड़े बरसा रहे हैं और वह दर्द से चीख रही है। वीडियो में एक गाड़ी और आसपास कुछ लोग खड़े थे। अभी तक ऐसे कई वीडियो सोशल मीडिया पर शेयर किए जा चुके हैं जो तालिबान के अत्याचारों का दावा करते हैं। वहीं प्रदर्शनकारियों पर तालिबान को गोली बरसाते हुए भी देखा जा चुका है।

असम पुलिस पर हमले के पीछे PFI? CM हिमंता बिस्वा सरमा ने जताया संदेह, CAA विरोधी आंदोलन व दिल्ली दंगों में भी था हाथ

असम के मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा का अतिक्रमण अभियान के दौरान हुई हिंसा के बाद ताजा बयान सामने आया है। उन्होंने शनिवार (25 सितंबर 2021) को सिपझार हिंसा में पॉपुलर फ्रंट ऑफ इंडिया (पीएफआई) का हाथ होने पर संदेह जताया है।

समाचार एजेंसी एएनआई के मुताबिक, मुख्यमंत्री ने कहा, “स्थिति अब सामान्य है। वहाँ से 60 परिवारों को हटाना था, लेकिन वहाँ 10,000 लोग थे, जो उन्हें लाए थे। उनमें पॉपुलर फ्रंट ऑफ इंडिया का नाम सामने आ रहा है, लेकिन मैं न्यायिक जाँच पूरी होने तक इस पर कोई टिप्पणी नहीं कर सकता हूँ।” 

मालूम हो कि पीएफआई का हिंसा करने का काफी पुराना इतिहास है। नागरिकता संशोधन अधिनियम के मद्देनजर हिंदू विरोधी दिल्ली दंगों और देश भर में हिंसा की जाँच के दौरान, पीएफआई की भूमिका संदिग्ध रही है और पीएफआई के कई सदस्यों को दंगों में शामिल होने के लिए गिरफ्तार किया गया था। 

दरअसल, राज्य के दर्रांग जिले में गुरुवार (23 सितंबर 2021) को अतिक्रमण हटाओ अभियान के दौरान पुलिस और भीड़ के बीच हुई हिंसा में कम से कम दो लोगों की मौत हो गई और 20 अन्य घायल हो गए थे। पुलिस और जिला प्रशासन द्वारा 4,500 बीघा (602.40 हेक्टेयर) सरकारी जमीन को खाली करने के लिए अतिक्रमण हटाओ अभियान शुरू किया गया था। इस जमीन पर बंगाली मुसलमानों के सैकड़ों परिवारों ने अवैध रूप से कब्जा कर लिया था।

मुख्यमंत्री ने कहा था कि यह अभियान बुधवार तक सुचारू रूप से चला और गुरुवार को केवल 60 परिवारों को हटाना पड़ा, लेकिन लाठियों के साथ लगभग 10,000 लोगों ने पुलिस को घेर लिया था, जिसके बाद उन्हें जवाबी कार्रवाई करनी पड़ी। रिपोर्ट्स के मुताबिक, असम के दर्रांग में जिला प्रशासन ने धारा 144 लागू कर दी है।

इससे पहले शुक्रवार (24 सितंबर 2021) को मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा ने अपने बयान कहा था, “उस क्षेत्र में 1983 से ही हत्याएँ होती रही हैं। इसके लिए वो कुख्यात है। मैं मंदिर गया था, मैंने चारों तरफ अतिक्रमण देखा। आखिर वो लोग लाठी व हथियारों से लैस होकर कैसे आ गए? आप सिर्फ एक 30 सेकेंड के वीडियो को आधार बना कर असम सरकार को बदनाम नहीं कर सकते। उससे पहले और उसके बाद क्या हुआ था, ये देखना पड़ेगा। समग्र नजरिए से घटना को देखिए।”

सीएम सरमा ने कहा कि अगर कोई भी पुलिसकर्मी इसमें शामिल है तो वो खुद कार्रवाई करेंगे, लेकिन साथ ही पूछा कि आखिर 27,000 एकड़ जमीन को 2-3 हजार परिवार कैसे कब्ज़ा सकते हैं? उन्होंने कहा कि गरीब लोग एक-एक इंच जमीन के लिए मर रहे हैं और बाढ़ आने से उन्हें परेशानी हो रही है। भूमिहीनों की बात करते हुए सीएम हिमंता बिस्वा ने कहा कि लोग सरकार से जमीन के लिए गुहार लगा रहे हैं।

‘ऑपइंडिया को बंद करो, इसके संपादकों को जेल भेजो’: मोपला नरसंहार पर खुलासे से भड़के कॉन्ग्रेस नेता मोहम्मद तौसीफ

तमिलनाडु के कॉन्ग्रेस के मीडिया प्रभारी सैयद मोहम्मद तौसीफ ने माँग की है कि ऑपइंडिया को बंद कर देना चाहिए और इसके संपादकों को जेल भेज देना चाहिए। आपको पता है कि उन्होंने ऐसा क्यों कहा? क्योंकि ऑपइंडिया कुछ दिनों से मालाबार हिंदू नरसंहार के सच को दिखा रहा है।

सैयद मोहम्मद तौसीफ ने लिखा, “ऑपइंडिया को बंद कर दिया जाना चाहिए और सांप्रदायिक नफरत और हिंसा को हवा देने के लिए इसके संपादकों को अदालत में लाया जाना चाहिए और उन पर मुकदमा चलना चाहिए। यह लगातार अपने मालिक की इच्छा के अनुरूप सांप्रदायिक और फर्जी सूचनाओं शेयर कर रहा है।”

बता दें कि तौसीफ ने यह ऑपइंडिया के एक ट्वीट को रीट्वीट करते हुए लिखा है, जिसमें मालाबार हिंदू नरसंहार को एक ग्राफिक्स के जरिए दर्शाने की कोशिश की गई है। ग्राफिक्स में मुस्लिम लोग हिंदुओं का गला काट कर बेरहमी से हत्या कर रहे हैं, महिलाओं की अस्मत लूट कर उसकी हत्या कर रहे हैं और फिर उसे कुएँ फेंक रहे हैं। इधर भयावह नरसंहार को कम्युनिस्ट ‘किसान विद्रोह’ बताता है, जो रईस जमींदारों के खिलाफ है।

आज मालाबार नरसंहार की 100वीं बरसी है। ठीक 100 वर्ष पहले आज के ही दिन 25 सितंबर 1925 को मालाबार में हिंदुओं नरसंहार हुआ था। हालाँकि इसकी भूमिका इससे पहले ही बन चुकी थी। केरल के मालाबार में लंबे समय तक हिंदुओं का कत्लेआम होता रहा, माताओं बहनों का बलात्कार होता रहा। लेकिन आश्चर्य देखिए इसके बाद भी इस भयावह नरसंहार को ‘कृषि विद्रोह’ कहा जाता रहा है।

25 सितंबर 1921 को 38 हिंदुओं का बेरहमी से सिर कलम किया गया था और उनकी खोपड़ी कुएँ में फेंक दी गई थी। ये बात दस्तावेजों में भी दर्ज है कि जब मालाबार के तत्कालीन जिलाधिकारी इलाके में गए तो कई हिंदू कुएँ से मदद के लिए गुहार लगा रहे थे। ऑपइंडिया का ग्राफिक्स इसी घटना को दर्शाता है।

केरल के मालाबार में मोपला मुसलमानों ने क्रूरता, हैवानियत, दरिंदगी का कोई भी कोना नहीं छोड़ा था। सरेआम सर कलम किए गए। लोगों को जिंदा जलाया गया। परिजनों के सामने महिलाओं की अस्मत लूटी गई। गर्भवती महिलाओं के पेट को चीर दिया गया। लोगों से जबरन धर्मांतरण करवाए गए। हैवानियत की सारी हदों के बारे में आप सोच सकते हैं और जो सोच तक नहीं सकते हैं वो सब हुआ। लेकिन इतिहास के इस क्रूरतम पाप को मोपला विद्रोह का नाम देकर लोगों को गुमराह कर दिया गया।

केरल के मालाबार में हुए विद्रोह को अंग्रेजों के खिलाफ बताया जाता है। लेकिन इसमें बड़े पैमाने पर हिन्दुओं को निशाना बनाया गया था। उनका नरसंहार हुआ था और जबरन धर्म परिवर्तन कराया गया था। लेकिन वामपंथी इतिहासकार इसे सामंतवाद और अंग्रेजों के खिलाफ का विद्रोह करार देते हैं। मोपला विद्रोह एक सांप्रदायिक हिंसा थी जिसमें हिन्दुओं का नरसंहार हुआ था। तलवार के दम पर बड़े पैमाने पर मोपलाओं ने धर्मांतरण करवाए थे। खिलाफत पूरी तरह सांप्रदायिक आंदोलन था। जिसका देश की स्वतंत्रता संग्राम से कोई लेना-देना नहीं था।

इतिहास की किताबें बताती हैं कि खिलाफत आंदोलन वो आंदोलन था जहाँ हिंदू मुस्लिम एक दूसरे के साथ खड़े होकर ब्रिटिशों से लड़े। जबकि सच ये है कि इस आंदोलन का उद्देश्य मुस्लिमों के मुखिया माने जाने वाले टर्की के ख़लीफ़ा के पद की पुन: स्थापना कराने के लिए ब्रिटिश सरकार पर दबाव डालना था। भारतीय मुसलमान इस्लाम के खलीफा के लिए लड़ रहे थे और गाँधी ने इस आंदोलन में उनको समर्थन दिया था।

गाँधी के इस कदम ने इस्लामवाद को भारत में और अधिक पोसा। उनको लग रहा था कि ऐसे कदम से  मुसलमानों के बीच ब्रिटिश विरोधी भावना मजबूत होगी। यह पहला आंदोलन माना जाता है जिसने अंग्रेजों के ख़िलाफ़ ‘असहयोग आंदोलन’ को मजबूत किया।

मोपला नरसंहार की 100वीं बरसी पर बोलते हुए RSS विचारक जे नंदकुमार ने 25 सितंबर की एक क्रूरतम हत्याकांड को याद किया, जहाँ मल्ल्पुरम और कालीकट के बीच एक स्थान पर एक कुएँ के सामने 50 से ज्यादा हिन्दुओं को मुस्लिम आतंकियों ने बाँध कर रख दिया।

एक चट्टान के ऊपर बैठ कर उनके ‘गुनाहों’ की बात की गई और तिलक-चोटी-जनेऊ पर आपत्ति जताते हुए मंदिर में जाने को भी ‘गुनाह’ बताया गया और कहा गया कि शरीयत के शासन में ये ठीक नहीं है। हिन्दुओं के गले काट-काट कर कुएँ में धकेल दिया गया, जिसमें कई हिन्दू दम घुटने से भी मरे। इसके कई घंटों बाद कुएँ में आवाज़ सुन कर कुछ मुस्लिम कुएँ में उतरे और अधमरे लोगों के भी गले काट-काट कर हत्याएँ की गईं।

‘एक ही उपचार – बुलडोजर’: ध्वस्त किया गया मुख़्तार अंसारी के करीबी का मेगा मार्ट, ₹10 करोड़ की संपत्ति जमींदोज

उत्तर प्रदेश में माफियाओं के खिलाफ जारी अभियान के तहत शनिवार (सितंबर 25, 2021) को मऊ जिला प्रशासन ने गैंगस्टर विधायक मुख्तार अंसारी के करीबी कोयला माफिया एवं त्रिदेव कंस्ट्रक्शन के मालिक उमेश सिंह का भीटी में 10 करोड़ रुपए की लागत से बना चार मंजिला मकान बुलडोजर से ध्वस्त करा दिया। प्रशासन के इस कार्रवाई से माफियाओं में हड़कंप मचा हुआ है।

ये कार्रवाई सिटी मजिस्ट्रेट के आदेश पर हुई। जानकारी के अनुसार ये अवैध रूप से निर्मित यह मार्ट पिछले कई सालों से संचालित हो रहा था। मऊ सिटी मजिस्ट्रेट के न्यायालय में अवैध तरीके से निर्माण करने का मुकदमा स्टेट बनाम उमेश सिंह, अजय सिंह, विजय सिंह और विनय सिंह के खिलाफ चल रहा था। इसकी सुनवाई करते हुए कोर्ट ने शुक्रवार (सितंबर 24, 2021) को ध्वस्तीकरण का आदेश जारी कर दिया।

भारी पुलिस बल की मौजूदगी में हुई कार्रवाई

आदेश के बाद शनिवार सुबह कोतवाली क्षेत्र के भीटी में बने मेगा मार्ट ध्वस्तीकरण की कार्रवाई शुरू हुई। एडीएम के हरि सिंह, सीओ सिटी धनंजय मिश्रा, ईओ नगर पालिका दिनेश कुमार, शहर कोतवाल डीके श्रीवास्तव, सरायलखंसी एसओ राम सिंह, हलधरपुर एसओ निहार नंदन सिंह समेत नगर पालिका कर्मचारी और भारी संख्या में पुलिस बल मौजूद रहे। मामले में सीओ सिटी धनंजय मिश्रा ने बताया कि सिटी मजिस्ट्रेट के आदेश के बाद अवैध निर्माण को ध्वस्त किया जा रहा है।

पहले भी उमेश पर हुई है कार्रवाई

इससे पहले भी मुख्तार अंसारी गिरोह के करीबी और त्रिदेव ग्रुप के मालिक कोयला माफिया उमेश सिंह, मुन्ना सिंह हत्याकांड का आरोपित है। मऊ प्रशासन ने इससे पहले भी कई मौके पर उमेश की करोड़ो रुपए की संपत्ति को सीज कर जब्त कर चुकी है। पिछले साल अक्टूबर में कोपागंज थाना क्षेत्र के अदरी स्थित त्रिदेव धर्म काँटा और कोल डिपो को जिला प्रशासन ने जब्त कर लिया था। उमेश सरायलखंसी थाने के अहिलाद गाँव का रहने वाला है। मुख्तार अंसारी को पंजाब से यूपी लाने बाद बांदा जेल में रखा गया है।

गौरतलब है कि उत्तर प्रदेश में योगी राज में, बुलडोजर कानून के अधिकार का दावा करने और कानून का पालन करने वाले नागरिकों की भूमि संपत्तियों के साथ-साथ सरकारी संपत्तियों को माफियाओं से बचाने के लिए एक उपकरण के रूप में उभरा है।

पिछले दिनों मुख्यमंत्री ने ट्वीट करते हुए लिखा था, “निर्दोष लोगों की संपत्ति व सरकारी संपत्ति पर अवैध कब्जा करने वालों का एक ही उपचार है – बुलडोजर।” सीएम ने कहा कि डीजीपी आवास के पास एक शत्रु संपत्ति पर अवैध कब्जा था, तो उन्होंने कहा कि इसका एक ही उपचार है- बुल्डोजर। कभी-कभी ज्यादा पंचायत न करके सीधे जवाब देने की जरूरत होती है। उल्लेखनीय है कि योगी राज में कई माफियाओं के अवैध निर्माण पर बुलडोजर चल चुका है।

‘गुजरात में नहीं होने देंगे मुनव्वर फारूकी का शो’: बजरंग दल ने चेताया, हिन्दू देवी-देवताओं व गोधरा का उड़ाया था मजाक

सूरत में बजरंग दल के सदस्यों ने शहर में कॉमेडियन मुनव्वर फारूकी का शो आयोजित करने वाले आयोजकों को चेतावनी जारी की है। इस शो में ‘कॉमेडियन’ मुनव्वर फारूकी शामिल होगा। वही फारूकी, जिसने 2002 के गोधरा दंगों के हिंदू पीड़ितों का अपमान किया, गुजरात नरसंहार में आरएसएस की संलिप्तता की बात कही और हिंदू देवी-देवताओं का मज़ाक उड़ाया।

बजरंग दल के नेता राहुल शर्मा ने सूरत में कार्यक्रम नहीं होने देने का संकल्प लेते हुए कार्यक्रम के आयोजकों से कार्यक्रम रद्द करने को कहा। आयोजक को यह याद दिलाते हुए कि मुनव्वर फारूकी ने हिंदू देवताओं का मजाक उड़ाया था, राहुल शर्मा ने चेतावनी दी कि यदि आयोजक बजरंग दल की माँग पर ध्यान नहीं देते हैं और तय समय के अनुसार कार्यक्रम होने देते हैं, तो शो के दौरान जो कुछ भी होगा, उसकी जिम्मेदारी आयोजकों की होगी। 

ऑपइंडिया से बात करते हुए बजरंग दल के नेता राहुल शर्मा ने कहा कि वे शो नहीं होने देंगे। उन्होंने कहा, “हम चाहते हैं कि वे शो रद्द कर दें। अगर वे नहीं करते हैं, तो हम सभी टिकट खरीदेंगे और शो में बैठेंगे। हम पूरे शो में हनुमान चालीसा का पाठ करेंगे और जब वह मंच पर आएँगे तो उस पर टमाटर फेंक देंगे। हम उन्हें जूते की माला भी पहनाएँगे।” शर्मा ने आगे कहा कि सूरत एक मिसाल कायम करेगा और फारूकी को पता होगा कि वडोदरा और अहमदाबाद में क्या करना है।

उल्लेखनीय है कि मुनव्वर फारूकी विभिन्न शहरों में टूर और प्रदर्शन करने वाला है। शो का नाम ‘Dongri to Nowhere’ रखा गया है। पहला आयोजन 26 सितंबर को देहरादून में होना है, जिसका टिकट BookMyShow ऐप पर 499 रुपए से शुरू है। इसके बाद सूरत, अहमदाबाद और वडोदरा में उसका शो 1, 2 और 3 अक्टूबर को होने वाला है।

हिंदू देवी-देवताओं का अपमान करने के आरोप में गिरफ्तार हुआ था फारूकी

गौरतलब है कि जनवरी 2021 में मध्य प्रदेश के इंदौर में 56 दुकान के पास मोनरो कैफे में आयोजित एक कार्यक्रम में हिंदू देवताओं और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के बारे में बेहद अपमानजनक टिप्पणी करके विवादास्पद ‘स्टैंड-अप कॉमेडियन’ ने एक बड़ा विवाद खड़ा कर दिया था। कार्यक्रम समाप्त होने के बाद, हिंदू रक्षक संगठन के समर्थकों ने कथित तौर पर ‘कॉमेडियन’ के साथ मारपीट की और फिर उसे कार्यक्रम के आयोजकों के साथ तुकोगंज पुलिस स्टेशन ले गए

घटना के बारे में बोलते हुए, हिंदू अधिकार समूह के नेता एकलव्य गोंड ने तब कहा था कि मुनव्वर फारूकी एक आदतन अपराधी है जिसने हिंदू देवताओं का मजाक उड़ाया था। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि किस तरह ‘कॉमेडियन’ ने गोधरा नरसंहार को कमतर आँकने की कोशिश की और कहा कि इसके पीछे अमित शाह का हाथ है। इसके एक दिन बाद 3 जनवरी, 2021 को, मध्य प्रदेश पुलिस ने हिंदू देवताओं के बारे में अभद्र टिप्पणी करने के लिए ‘कॉमेडियन’ और चार अन्य को गिरफ्तार किया था।

2002 गोधरा नरसंहार और अमित शाह पर मुनव्वर फारूकी 

पिछले साल अप्रैल में एक शो के दौरान, मुनव्वर फारूकी ने 2002 के गोधरा नरसंहार का मजाक उड़ाया था, जिसमें अयोध्या से लौट रहे 58 हिंदुओं को मुस्लिम भीड़ ने जिंदा जला दिया था। सोशल मीडिया पर वायरल हुई क्लिप में वह कहता है कि यह अमित शाह द्वारा निर्देशित और आरएसएस द्वारा बनाई गई एक काल्पनिक फिल्म थी।

‘मोरल साइंस’ का टीचर अब्दुल रफीक, पहली कक्षा की बच्ची से किया रेप: कोर्ट ने सुनाई लगभग 30 साल की जेल

केरल के कुन्नमकुलम में पहली कक्षा की छात्रा से दुष्कर्म करने वाले मोरल सांइस के टीचर को पॉक्सो कोर्ट ने 29 साल 6 महीने की सजा सुनाई है। नीलांबुर के चीराकुझी स्थित करादान हाउस का निवासी 44 वर्षीय अब्दुल रफीक पवारत्ती के पुथुमानस्सेरी में एक प्राइवेट स्कूल में पढ़ाता था। स्पेशल पॉस्को फास्ट-ट्रैक कोर्ट के जस्टिस एमपी शिबू ने उस पर 2.15 लाख रुपए का जुर्माना भी लगाया है।

जुर्माना भरने में विफल रहने पर रफीक को दो साल नौ महीने की अतिरिक्त सजा काटनी होगी। रिपोर्ट्स के मुताबिक, अभियोजन पक्ष की ओर से स्पेशल पब्लिक प्रोसिक्यूटर एडवोकेट केएस बीनू पेश हुए।

मीडिया रिपोर्ट के अनुसार अब्दुल रफीक ने साल 2012 में स्कूल पिकनिक के दौरान इस घिनौनी वारदात को अंजाम दिया था। पिकनिक से वापस आने के बाद बच्ची को पूरे शरीर में बहुत दर्द हो रहा था। यह बात उसने अपनी माँ को बताई, जिसके बाद वह उसे तुरंत अस्पताल ले गईं।

मेडिकल जाँच के दौरान पता चला कि बच्ची का यौन शोषण किया गया था, जिससे उसके प्राइवेट पार्ट्स में गंभीर चोटें आई थीं। इसके बाद परिजन पुलिस के पास पहुँचे और उन्हें पूरा मामला बताया, जिसके बाद पुलिस ने आरोपित के खिलाफ केस दर्ज कर आगे की कार्रवाई की।

गौरतलब है कि केरल हाई कोर्ट ने शुक्रवार (24 सितंबर 2021) को पॉक्सो मामले में एक अन्य आरोपित की याचिका को इस आधार पर खारिज कर दिया था, क्योंकि उसने उस नाबालिग से शादी की थी, जिसका उसने दुष्कर्म किया था।

अदालत ने कहा कि यौन शोषण एक व्यक्ति नहीं बल्कि पूरे समाज के खिलाफ एक गंभीर अपराध है। यौन उत्पीड़न के शिकार लोगों के लिए यह बेहद भयावह और दिल दहलाने वाला होता है। इस तरह के अपराध नाबालिग की मानसिक स्थिति को प्रभावित करते हैं।

‘आगजनी करने वाला खुद को फायर फाइटर बताए, वैसा ही Pak का रवैया’: इमरान खान की कर दी बोलती बंद, जानिए कौन हैं स्नेहा दुबे

पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान खान ने संयुक्त राष्ट्र महासभा (UNGA) में कश्मीर राग अलापा, लेकिन भारतीय विदेश सेवा (IFS) अधिकारी स्नेहा दुबे ने उन्हें आईना दिखा दिया। स्नेहा दुबे ने स्पष्ट कहा कि पाकिस्तान, जहाँ आतंकी खुलेआम घूमते हैं, उसका रवैया ऐसा ही है जैसे कोई आगजनी करने वाला दंगेबाज खुद को ‘फायर फाइटर’ बताए। इमरान खान ने मोदी सरकार द्वारा अनुच्छेद-370 को हटाए जाने से लेकर अलगाववादी नेता सैयद अली शाह गिलानी की मौत का भी जिक्र किया था।

उन्होंने दावा किया था कि इस्लामोफोबिया का सबसे बुरा और व्यापक रूप फ़िलहाल भारत में सत्ता पर काबिज है। कोरोना वायरस संक्रमण के कारण इमरान खान ने वीडियो के जरिए दिए गए सम्बोधन में ये बातें कहीं। स्नेहा दुबे ने उन्हें आईना दिखाते हुए कहा कि आतंकियों को पालने वाले पाकिस्तान के कारण सिर्फ भारत ही नहीं, कई देश इसकी नीतियों के कारण परेशान हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि जम्मू कश्मीर और लद्दाख केंद्र शासित प्रदेशों का शत-प्रतिशत भूभाग भारत का अभिन्न हिस्सा है और रहेगा।

युवा IFS अधिकारी ने कहा कि इसमें वो क्षेत्र भी शामिल हैं, जिन पर पाकिस्तान ने अवैध रूप से कब्ज़ा जमा रखा है। साथ ही पाकिस्तान से कब्ज़ा हटाने को भी कहा। स्नेहा दुबे 2012 बैच की IFS अधिकारी हैं, जिन्होंने गोवा से अपनी स्कूलिंग की है। इसके बाद उन्होंने पुणे स्थित फ़र्ग्यूशन कॉलेज से उच्च-शिक्षा प्राप्त की। तत्पश्चात उन्होंने दिल्ली स्थित JNU से ‘अंतरराष्ट्रीय अध्ययन’ में MPhil की डिग्री प्राप्त की।

जब वो 12 वर्ष की थीं, तभी से उनका सपना था कि वो IFS अधिकारी बनें। 2011 में उन्होंने अपने पहले प्रयास में ही भारतीय सिविल सर्विसेज की परीक्षा पास की। देश-विदेश की यात्रा में रुचि रखने वाली स्नेहा दुबे खुद को सौभाग्यशाली मानती हैं कि उन्हें अंतरराष्ट्रीय स्तर पर देश के प्रतिनिधित्व का मौका मिला है। उनके पिता एक बहुराष्ट्रीय कंपनी में काम करते हैं तो उनकी माँ एक शिक्षक हैं।

अपने परिवार में सरकारी सेवा में नौकरी करने वाली वो पहली व्यक्ति हैं। IFS अधिकारी बनने के बाद उन्हें सबसे पहले भारतीय विदेश मंत्रालय में पदस्थापना मिली थी। फिर उन्हें स्पेन की राजधानी मैड्रिड में स्थित भारतीय दूतावास में भेजा गया। इतनी युवा उम्र में ऐसी सफलता प्राप्त करने के लिए लोग उनकी तारीफ़ कर रहे हैं। उन्होंने अपने सम्बोधन में बांग्लादेशियों के खिलाफ सांस्कृतिक और मजहबी नरसंहार का भी जिक्र किया।

मैड्रिड में ‘थर्ड सेक्रेटरी’ रहीं IFS अधिकारी स्नेहा दुबे अब UNGA में भारत की ‘फर्स्ट सेक्रेटरी’ हैं। उन्होंने MPhil से पहले MA किया था। स्नेहा दुबे का कहना है कि विदेश सेवा में उनकी रुचि इसीलिए है क्योंकि उन्हें नई-नई संस्कृतियों के बारे में जानना-समझना अच्छा लगता है, जो सामंजस्य बिठाने के लिए एक अहम प्रक्रिया है। अब UNGA में उन्होंने जिस तरह से पाकिस्तान की बखिया उधेड़ी है, सोशल मीडिया पर उनकी खूब तारीफ़ हुई है।

‘हिंदू लड़कियों को फँसाओ, गंदे वीडियो बनाओ’ – जिस अली का था यह टार्गेट, वही अब नितिन बन मौलाना कलीम का करेगा पर्दाफाश

उत्तराखंड से धर्मांतरण मामले में बहुत बड़ा खुलासा हुआ है। यह खुलासा किया है यहीं के रहने वाले नितिन पंत नाम के एक युवक ने। नितिन पंत वो शख्स है, जो धर्मांतरण केस में गिरफ्तार कलीम सिद्दीकी के लालच का शिकार हुआ था। कलीम ने नौकरी, शादी और पैसे का लालच देकर नितिन को अली हसन बना दिया था। इस दौरान उसे राजस्थान और फिर मुजफ्फरनगर के मदरसे में रखा गया। 

नितिन ने बताया कि उसे कलीम सिद्दीकी हिंदू लड़कियों को वश में करने के लिए कहता था। हिंदू लड़कियों का अश्लील वीडियो बनाने को कहता था। युवाओं को नशे की लत लगाने को कहता था। नितिन ने बताया कि कलीम सिद्दीकी के पास विदेश से पैसा आता था और दिल्ली के रोहिणी में उसका एक हेड ऑफिस भी है।

नैनीताल (उत्तराखंड) के तल्लीताल निवासी नितिन पंत फिलहाल पांवधोई नदी के पास स्थित बालाजी घाट पर बने आश्रम रह रहे हैं। नितिन ने बताया कि वह वर्ष 2010 में राजस्थान के भिवाड़ी में नौकरी की तलाश में गया था, जहाँ उसकी मुलाकात हरियाणा के मेवात के गाँव पंचगाँव निवासी इम्तियाज अली से हुई थी। इम्तियाज अली उसको अपने घर ले गया था। इसके बाद उसे बंधक बना लिया गया और जबरन एक मस्जिद में रखा गया। 

इसके बाद मौलाना ने आतंकित कर उसका धर्मांतरण कराकर नाम अली हसन रख दिया। उस मस्जिद में वह छह साल तक रहा। यहीं पर उमर गौतम ने उसे लव जिहाद के बारे में ट्रेनिंग दी। बाद में उसे मुजफ्फरनगर के गाँव फुलत स्थित मदरसे में भेजा गया। जहाँ का संचालक मौलाना कलीम सिद्दीकी था और नितिन की मुलाकात कलीम से 8 से 10 बार हुई थी। मौलाना कलीम उसे बरगलाता था। उसने आरोप लगाया कि लड़कियों और युवकों का धर्मांतरण कराने पर उसे रुपए, घर, जमीन और सभी सुविधाएँ मिलने जैसे लालच दिए जाते थे। यह भी कहा जाता था कि उसका निकाह करा दिया जाएगा।

इसके बाद उसे नागल क्षेत्र के गाँव उमाही कोटा स्थित एक मदरसे में भेज दिया गया, जहाँ पर वह दो वर्ष रहा। उसे जब रामपुर मनिहारान के मदरसे में भेजा जा रहा था तो वह भाग गया और विश्व अखाड़ा परिषद के राष्ट्रीय सचिव निपुण भारद्वाज, महंत रामदास से मुलाकात कर मामले की जानकारी दी। इसके बाद उसका शुद्धिकरण कराकर हिंदू धर्म में वापसी कराई गई।

नितिन ने एसपी सिटी से मुलाकात कर तहरीर दी और मौलाना कलीम सहित अन्य लोगों के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज कराने की माँग की। एसपी सिटी राजेश कुमार का कहना है कि मामले की जाँच की जा रही है। नितिन पंत को भी पूछताछ के लिए ले जाया गया है। उसने यह भी बताया कि वहाँ आईटीआई के नाम पर हथियार बनाने की फैक्ट्री भी चलती है।

गौरतलब है कि उत्तर प्रदेश के आतंक निरोधी दस्ते (एटीएस) ने बुधवार (22 सितंबर, 2021) को अवैध धर्मांतरण मामले में मौलाना कलीम सिद्दीकी को गिरफ्तार किया। भारत के सबसे बड़े धर्मांतरण गिरोह का भंडाफोड़ करते हुए एटीएस ने यह गिरफ्तारी मेरठ से की। पुलिस ने बताया कि मौलाना जामिया इमाम वलीउल्लाह ट्रस्ट चलाता है, जो कई मदरसों को फंड देता है। इसके लिए उसे विदेशों से भारी फंडिंग मिलती है। मौलाना को पूछताछ के लिए मेरठ से लखनऊ लाया गया है। यूपी एटीएस ने कलीम के साथ ही उसके तीन सहयोगी मौलानाओं और ड्राइवर को भी पूछताछ के लिए हिरासत में लिया है।