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65 घंटे में 24 बड़ी बैठकें: फ्लाइट से लेकर होटल तक बैठकें करते रहे 71 साल के PM मोदी, लौटे दिल्ली, यहाँ भी व्यस्त शेड्यूल

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने अमेरिका दौरे में 65 घंटों के भीतर 24 बड़ी बैठकों में हिस्सा लिया है। इनमें से 4 लंबी बैठकें तो फ्लाइट में ही हुईं। ‘न्यूज़ 18’ ने अपनी खबर में ये जानकारी दी है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी एक ये अमेरिका दौरा 4 दिनों का था, ऐसे में उनके पास जो भी समय उपलब्ध थे उन्होंने उसका भरपूर उपयोग किया है। अमेरिका दौरे में फ्लाइट में ही उन्होंने कई आधिकारिक फाइलों को भी निपटाया।

इतना ही नहीं, अब जब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी रविवार (26 सितंबर, 2021) को भारत लौट आए हैं और उनका भव्य स्वागत हुआ है तो यहाँ आने पर भी उनके व्यस्त कार्यक्रम जारी रहेंगे। सरकारी सूत्रों के अनुसार, प्रधानमंत्री का उद्देश्य ही है कि उनके हर दौरे को ज्यादा से ज्यादा व्यस्त और उत्पादक रखा जाए। 22 सितंबर, 2021 को फ्लाइट में ही एक बैठक हुई, जिसमें अधिकारियों ने उन्हें अमेरिका दौरे से सम्बंधित पहलुओं के बारे में बताया।

जैसे ही वो वाशिंगटन डीसी में उतरे, वहाँ होटल में भी एक बैठक हुई। इसके अगले दिन 5 बहुराष्ट्रीय कंपनियों के CEOs के साथ उनकी बैठकें हुईं, ताकि भारत में बेहतर निवेश के वातावरण को लेकर सकारात्मकता फैलाई जा सके और महत्वपूर्ण सलाह लिए जा सकें। अमेरिकी उप-राष्ट्रपति कमला हैरिस, ऑस्ट्रेलियाई पीएम स्कॉट मॉरिसन और जापान के प्रीमियर योशिहिदे सुगा के साथ भी उसी दिन बैठकें हुईं।

इसके अलावा उन्होंने अपनी टीम के साथ तीन आतंरिक बैठकें भी की। 24 सितंबर, 2021 को शेड्यूल और भी ज्यादा व्यस्त था, जब QUAD देशों के राष्ट्राध्यक्षों के साथ उनकी बैठक हुई। उससे पहले अमेरिकी राष्ट्रपति जो बायडेन से भी वो मिले। इन दोनों बैठकों की तैयारियों के लिए नरेंद्र मोदी ने अपनी टीम के साथ 4 बार बैठक की। 25 सितंबर को अमेरिका से नई दिल्ली लौटते समय भी फ्लाइट में दो बैठकें हुईं।

इन दोनों बैठकों में अमेरिका दौरे के विभिन्न पहलुओं पर चर्चा हुई और भारत को इससे क्या मिला और इस परिप्रेक्ष्य में आगे क्या-क्या किया जाना है, इस पर गहन विचार-विमर्श हुआ। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ट्वीट कर भी कहा है कि उनका अमेरिका दौरा काफी अच्छा रहा और दोनों देशों के लोगों के बीच संपर्क इस रिश्ते के लिए बड़ी संपदा है। उन्होंने बताया कि कई राष्ट्राध्यक्षों व CEOs के साथ उनकी बैठकें सकारात्मक रहीं।

पवित्रा पुनिया के माता-पिता से मिले एजाज खान, शादी (निकाह) से पहले होती है बच्चों के नाम पर लड़ाई

‘बिग बॉस’ की एक्स कंटेस्टेंट पवित्रा पुनिया और उनके बॉयफ्रेंड एजाज खान इन दिनों जिम कॉर्बेट नेशनल पार्क में एक साथ क्वालिटी टाइम स्पेंड करते दिखे। ऐसी खबरें हैं कि एजाज खान और पवित्रा पुनिया जल्द ही शादी के बंधन में बंध सकते हैं। यहाँ तक कि उन्होंने अभी से अपने बच्चों के नाम भी सोच लिए हैं।

पवित्रा पुनिया और उनके बॉयफ्रेंड एजाज खान हाल में दिल्ली पहुँचे। कारण था अपनी और पवित्रा की शादी की बात। इसके लिए वो एक्ट्रेस के माता-पिता से मिलने पहुँचे। एजाज खान ने टाइम्स ऑफ इंडिया को बताया, “मैं मुंबई में उसके (पवित्रा पुनिया) भाई से पहले ही मिल चुका था। इस बार मैं उसकी माँ और पिता से मिला। हमने कुछ समय एक साथ बिताया। इस दौरान उन्होंने मेरा बुहत अच्छा स्वागत किया। मुझे ऐसा नहीं लगा कि मैं उनसे पहली बार मिल रहा हूँ, शायद इसलिए कि उन्होंने मुझे ‘बिग बॉस’ में कई बार देखा है।”

‘बिग बॉस 14’ के एक्स कंटेस्टेंट एजाज ने कहा, ”यह मेरे लिए बेहद खास था, लेकिन अगली बार मैं उनसे थोड़ा और खुलूँगा। इस बार मैं थोड़ा नर्वस हो गया था। हालाँकि, मैंने पवित्रा को पहले ही कह दिया था कि अगर मैं तुम्हारे माता-पिता से मिलने के दौरान नर्वस हुआ तो ​तुम इस सिचुएशन को संभाल लेना।” इससे पहले पवित्रा जुलाई में एजाज के अब्बा से मिली थीं।

क्या हमें जल्द ही आपकी शादी की खुशखबरी सुनने को मिल सकती है? इस सवाल के जवाब पर एजाज हँसते हुए कहते हैं, “बेशक, हम दोनों अक्सर इसके बारे में बात करते हैं। सच कहूँ तो हम हर चीज के बारे में बात करते हैं, यहाँ तक कि अपने बच्चों के नाम को लेकर भी लड़ते हैं।”

उन्होंने कहा, ”हमारा रिश्ता वैसा ही है जैसा ‘बिग बॉस’ के घर में था। वह एक अल्फा है और मैं एक सिग्मा हूँ। हमारे बीच बहस हो सकती है, लेकिन अंत में हम दोनों एक ही डायरेक्शन में देखते हैं।”

एजाज कुछ देर रुककर आगे कहते हैं, “मुझे हमारे बारे में बात करने से डर लगता है। पवित्रा ने मेरे दिमाग में डाल दिया है कि नजर लग जाती है (मुस्कुराते हुए)। हम बहुत खुश हैं और एक साथ काफी अच्छा महसूस कर रहे हैं।”

एक्टर ने अपनी दिल्ली यात्रा के दौरान यहाँ का खाना भी खाया। वह कहते हैं, ”मुझे यहाँ का खाना बहुत पसंद है। दिल्ली का खाना लाजवाब है। यहाँ मेरे कुछ अच्छे दोस्त भी रहते हैं, इसलिए मैं हमेशा दिल्ली आने के लिए बेताब रहता हूँ।” बता दें कि पवित्रा और एजाज ‘बिग बॉस 14’ के दौरान एक दूसरे के करीब आए थे।

मंदिर तोड़े, गाँव के गाँव मुस्लिम बना दिए, राजाओं का भी धर्मांतरण: बंद हो जिहादी सूफियों को ‘संत’ कहना, वामपंथियों ने किया गुणगान

भारत में अक्सर ‘सूफी परंपरा’ की तुलना ‘भक्ति आंदोलन’ से की जाती रही है। ऐसा जानबूझ कर किया जाता है, ताकि रैदास और चैतन्य महाप्रभु जैसों की तुलना में ख्वाजा मोईनुद्दीन चिश्ती और चाँद मियाँ जैसों को खड़ा किया जा सके। सूफियों को ‘संत’ कहा जाता है, ताकि हिन्दू भी उनका सम्मान करें, उनकी पूजा करें और उनके मजार पर जाकर मत्था टेकें। क्या वाकई में ये सूफी इतने महान थे? इन्हिने हिन्दू-मुस्लिम एकता बढ़ाई और गरीबों की सेवा की?

असल में इन सूफी फकीरों को भेजा ही इसीलिए जाता था, ताकि वो गरीबों को बहला-फुसला कर और उनके साथ प्रेमपूर्वक बर्ताव कर के इस्लामी धर्मांतरण कराएँ। जैसे इस्लामी शासन खून-खराबे से साम्राज्य विस्तार करते चलते थे, इन सूफियों को समाज को तोड़ने के लिए लगाया जाता था। वो अच्छी-अच्छी बातें करते थे, ताकि लोग उन्हें ‘संत’ मानें। उद्देश्य इस्लामी आक्रांताओं और सूफियों का समान ही था – इस्लाम का विस्तार।

लेखिका तस्लीमा नसरीन ने भी अपनी पुस्तक ‘निषिद्ध’ में लिखा है कि सूफियों के ‘प्रेमपूर्वक बर्ताव’ के कारण कई हिन्दुओं ने धर्मांतरण किया। इसका एक उदाहरण देखिए। पेंटर अकबर पद्ममसी के पूर्वज कभी हिन्दू हुआ करते थे, लेकिन 17वीं शताब्दी सूफी पीर सददीन ने उनके परिवार का इस्लामी धर्मांतरण करा के उन्हें मुस्लिम बना दिया। पूरे परिवार के मन में बिठा दिया गया कि पैगंबर मुहम्मद, विष्णु के 11वें अवतार हैं।

आइए, एक उदाहरण बंगाल से भी लेते हैं। बंगाल में एक राजा गणेश हुए हैं। उनके राज्य में भी क़ुतुब अल आलम नाम का सूफी फ़कीर आकर रहता था और उसने अपनी ‘चमत्कारी’ छवि बना रखी थी। आक्रांताओं के खतरे को कम करने के लिए राजा ‘चमत्कार’ का सहारा लेने पहुँचे। सूफी ने कह दिया कि राजा गणेश का बेटा जदु यदि इस्लाम अपना कर राज्य चलाता है तो सारे खतरे टल जाएँगे।

फिर क्या था, जदु को ‘जलालुद्दीन मुहम्मद शाह’ बना कर गद्दी पर बिठा दिया गया। क़ुतुब अल आलम की मौत के बाद राजा गणेश ने पूरे विधि-विधान से उसे हिन्दू धर्म में वापस लाने की प्रक्रिया पूरी की और ‘दनुजमर्दन देव’ नाम से उसका नया नामकरण किया। हालाँकि, ‘सूफी’ का प्रभाव उस पर ऐसा पड़ा था कि पिता की मौत के बाद उसने फिर इस्लाम अपना लिया। उसका बेटा ‘शमशुद्दीन अहमद शाह’ हुआ। 15वीं शताब्दी के दूसरे दशक में हुए इस उथल-पुथल ने बंगाल में इस्लाम का विस्तार शुरू किया।

इसी तरह 14वीं शताब्दी के कुछ शिलालेख शाह जलाल मुजर्रद की बातें करते हैं। बताया गया है कि वो ‘जिहाद’ और ‘काफिरों के खिलाफ युद्ध’ के लिए भारत आया था। साथ ही कहा गया था कि ‘दारुल हरब (नॉन-इस्लाम के राज वाली भूमि)’ में शहीद होकर वो ‘गाजी’ बन सकता है, ऐसी उसे शिक्षा मिली थी। वो युद्ध लड़ता था और अपने जीत होने पर अपने अनुयायियों के साथ इस्लाम का झंडा गाड़ता था।

इसी तरह बंगाल के एक और तथाकथित ‘सूफी संत’ शेख जलाल अल-दीन तबरीजी को देखिए। 13वीं शताब्दी में वो दिल्ली आया था, लेकिन वहाँ भाव न मिलने पर बंगाल आ गया। उसके पक्ष में दलीलें दी जा सकती हैं कि उसने अस्पताल व सामुदायिक किचन बनवाए, लेकिन उसके बारे में समकालीन स्रोतों ने ये भी लिखा है कि उसने एक ‘काफिर’ द्वारा बनवाए गए मंदिर को ध्वस्त कर दिया और उसकी जगह वहाँ ‘सूफी तकिया (रेस्ट हाउस)’ बनवाया। लिखा है कि उसने कई ‘काफिरों’ का इस्लामी धर्मांतरण कराया था।

ये भारत में आने वाले सबसे शुरुआती सूफी लोग थे। जब शुरुआत ही ऐसी थी तो फिर उसके बाद क्या सब हुआ होगा, ये आप समझ सकते हैं। असल में ये सूफी इस्लामी आक्रांताओं का मुखौटा होते थे, जो समाज को प्रदूषित करते हुए हिन्दू राजाओं के विरुद्ध माहौल तैयार करते थे। कभी-कभी ये युद्ध भी लड़ते थे। इस्लामी आक्रांताओं का राज आने पर इन्हें महत्वपूर्ण स्थान मिलता था, इसीलिए गरीब लोग भी इन्हें अपना सब कुछ मान लेते थे।

आइए, अब उन दो सूफी संतों की बात करते हैं, जिन्हें भारत में आज भी पूजा जाता है। स्पष्ट है कि पहला नाम इसमें अजमेर के ख्वाजा मोईनुद्दीन चिश्ती का है। ये महज ‘संयोग’ ही था या कुछ और कि जिस साल मोहम्मद गोरी हार कर भागा, उसके अगले ही साल या कुछ ही दिनों बाद एक सूफी संत ने अजमेर में डेरा जमाया, पृथ्वीराज चौहान की राजधानी में। वहाँ वह कई चमत्कार करने लगा। आस-पास के लोगों में उसके प्रति जिज्ञासा जागी। वह लोगों से काफी अच्छे से पेश आता। गाँव के गाँव इस्लाम में धर्मांतरित होने शुरू हो गए।

बिना हथियार उठाए चिश्ती ने वो जमीन तैयार कर दी, जहाँ वो अगले 44 वर्षों तक इस्लाम का प्रचार-प्रसार करता रहा। 1191 में गोरी हारा और 1192 में दोबारा लौट कर आया। इसी अवधि के बीच चिश्ती ने अजमेर में डेरा जमाया। आखिर ऐसे संवेदनशील समय में चिश्ती भारत क्यों आया था? वो अपने चेलों-शागिर्दों के साथ पहुँचा था। चिश्ती ‘काफिरों के खिलाफ इस्लामी जिहाद’ के लिए भारत आया था।

तभी तो पृथ्वीराज चौहान की हार के बाद ‘ख्वाजा’ मोईनुद्दीन चिश्ती ने जीत का श्रेय लेते हुए कहा था, “हमने पिथौरा (पृथ्वीराज चौहान) को जिंदा दबोच लिया और उसे इस्लाम की फौज के हवाले कर दिया।” पृथ्वीराज चौहान के खिलाफ गद्दारी वाला युद्ध लड़ने के लिए ही मोईनुद्दीन चिश्ती भारत आया था, ताकि वो मोहम्मद गोरी की तरफ से उसकी सहायता कर सके और उसका काम आसान कर सके।

इसी तरह बहराइच में गाजी सैयद सालार मसूद उर्फ़ गाजी मियाँ की दरगाह है, जिसने हिन्दुओं का कत्लेआम किया था और धर्म ग्रंथों को तहस-नहस किया था। उसे महाराजा सुहेलदेव ने सन् 1034 के एक युद्ध में मार गिराया था। गाजी भारत में कई बार आक्रमण करने वाले मौमूद गजनवी का भांजा था। इस्लामी आक्रांता फिरोजशाह तुगलक ने उसका मजार बनवाया था। वामपंथियों की मानें तो हिन्दू उसे प्यार से ‘बाले मियाँ’ और ‘हठीला’ कहते थे, बाल श्रीकृष्ण से उसकी तुलना करते थे।

उसने ज़ुहरा बीबी नाम की एक लड़की से शादी की थी। दावा किया जाता है कि उसने उस लड़की का अंधापन ठीक कर दिया था। हालाँकि, आपको भारत में आए सूफियों और फकीरों के बारे में कई ऐसी कहानियाँ मिलेंगी, जहाँ उन्होंने किसी लड़की या उसके परिवार पर इस तरह का ‘चमत्कार’ कर के उससे शादी की हो। इतिहासकार एना सुवोरोवा ने तो गाजी मियाँ की तुलना श्रीकृष्ण और श्रीराम तक से कर दी है और कहा है कि हिन्दू उसे इसी रूप में देखते थे।

‘दैनिक जागरण’ में वरिष्ठ लेखक व पत्रकार अनंत विजय ने भी अपने एक स्तंभ में लेखक सुधीश पचौरी के हवाले से लिखा है कि ये सूफी इस्लाम के प्रचारक थे। वो सुल्तानों के साथ आते थे, और कट्टर से इतर नरम रुख अपनाते थे। सुल्तान जहाँ जाते थे, वहाँ सूफी इस्लाम को मजबूर करने निकल पड़ते थे। हिंदी साहित्य में भी ‘संत’ बता कर उनका महिमामंडन किया गया। अब समय आ गया है कि इन सूफियों को ‘संत’ न कहा जाए।

मंदिर में ‘सेकेंड हैंड जवानी’ पर डांस, वायरल किया वीडियो: इंस्टाग्राम मॉडल की हरकत से खफा हुए महंत, हिन्दू संगठन भी विरोध में

मध्य प्रदेश के छतरपुर स्थित एक मंदिर में आरती साहू नाम की एक इंस्टाग्राम मॉडल ने ‘सेकेंड हैंड जवानी’ पर डांस करते हुए वीडियो बनाया, जिससे हिन्दू संगठन नाराज़ हो गए हैं। कुछ दिनों पहले इंदौर के चौराहे पर एक मॉडल के ‘डेयर एक्ट’ के बाद हंगामा हुआ था। ताज़ा मामले में युवती ने छतरपुर के जनराय टोरिया मंदिर में सैफ अली खान और दीपिका पादुकोण की फिल्म ‘कॉकटेल’ के गाने पर डांस करते हुए वीडियो बनाया।

वीडियो सामने आने के बाद इसका विरोध भी शुरू हो गया है। हिन्दू संगठनों ने सोशल मीडिया के जरिए इस हरकत पर आपत्ति जताई है। मंदिर के महंत ने भी कहा है कि इंस्टाग्राम मॉडल आरती साहू के विरुद्ध कार्रवाई होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि इस तरह की हरकतें कर के मंदिरों, मठों और आश्रमों को बदनाम नहीं किया जाना चाहिए। आरती साहू अक्सर अपने इंस्टाग्राम हैंडल और यूट्यूब चैनल पर वीडियोज डालती रहती हैं।

आरती साहू के इंस्टाग्राम पर 25 लाख से भी अधिक फॉलोवर्स हैं और उन्होंने 4900 तस्वीरें व वीडियोज अपलोड की हैं। उनके यूट्यूब पर भी 21 हजार सब्सक्राइबर्स हैं और वहाँ भी लाखों लोगों ने उनके वीडियोज देखे हैं। हिन्दू संगठनों ने कहा है कि चंद रुपयों और सस्ती लोकप्रियता के लिए ये हरकत की गई है। हालाँकि, मंदिर में चप्पल पहन कर डांस करती दिख रहीं आरती साहू का कहना है कि वीडियो में जरा भी फूहड़ता नहीं है।

इंस्टाग्राम पर आरती साहू की प्रोफ़ाइल

उन्होंने कहा कि वो सभ्यता से पूरी ड्रेस में थीं और उन्होंने जो भी किया, उसमें कुछ भी अश्लील नहीं है। ‘बजरंग दल’ के विभाग सह संयोजक सौरभ खरे ने कहा है कि ऐसी लड़कियाँ समाज को गंदा कर रही हैं। उन्होंने कहा कि ये लोग हिन्दू संस्कृति को बदनाम कर रहे हैं, जिन्हें समाज में रहने का कोई अधिकार नहीं है। उन्होंने कहा कि उनका संगठन इस तरह की लोगों और ऐसी हरकतों पर कड़ी आपत्ति दर्ज कराता है।

यट्यूब पर आरती साहू का चैनल

नराय टोरिया मंदिर के महंत भगवानदास ने कहा कि इस डांस के समय वो सागर मंदिर में थे, इसीलिए उन्हें जानकारी नहीं मिल पाई। उन्होंने कहा कि ये गलत हरकत है और वो इसका विरोध करते हैं। उन्होंने कहा कि इस तरह के डांस से अपनी इच्छा पूरी करने वालों पर कार्रवाई हो। कुछ दिनों पहले इंदौर में श्रेया कालरा नाम की मॉडल ने डांस कर ट्रैदिक जाम लगाया था। प्रशासन ने ट्रैफिक नियमों के तहत कार्रवाई करते हुए चालान भरवाया था।

चक्रवाती तूफान ‘गुलाब’ के कारण ओडिशा के 7 जिलों में हाई अलर्ट, आंध्र प्रदेश और छत्तीसगढ़ में रेड अलर्ट

भारतीय मौसम विभाग (IMD) ने चेतावनी जारी की है कि एक चक्रवाती तूफान रविवार (26 सितंबर 2021) शाम को उत्तरी आंध्र प्रदेश और दक्षिण ओडिशा के तटीय इलाकों में दस्तक दे सकता है। इस चक्रवात का नाम ‘गुलाब’ (Cyclone Gulab) है। इसके प्रभाव से 95 किमी प्रति घंटे की रफ्तार तक हवा चलने का अनुमान है। इस दौरान आंध्र और ओडिशा के कई हिस्सों में भारी बारिश हो सकती है।

मौसम विभाग ने बताया कि चक्रवाती तूफान ‘गुलाब’ शनिवार दोपहर को बंगाल की खाड़ी के ऊपर बने गहरे दबाव से तेज हो गया। ‘गुलाब’ के रविवार तक कलिंगपट्टनम के आसपास और विशाखापट्टनम, गोपालपुर के बीच पहुँचने की उम्मीद है। वहीं, सोमवार को छत्तीसगढ़ में भी भारी बारिश का अनुमान लगाया गया है, जिसके चलते वहाँ भी रेड अलर्ट जारी किया गया है।

मौसम विभाग ने चक्रवात से संबंधित बाढ़ और विनाश की भी चेतावनी दी है, जिसमें कच्चे घर और अन्य इमारतों के नुकसान पहुँचने की संभावना है। वहीं बिजली/संचार लाइनें और खड़ी फसलें भी प्रभावित हो सकती हैं। इसके अलावा, मुंबई, गुजरात सहित विदर्भ, तेलंगाना, मराठवाड़ा, कोंकण तट पर 29 सितंबर तक भारी बारिश के लिए ऑरेंज अलर्ट जारी किया गया है।

रिपोर्ट्स के मुताबिक, ओडिशा सरकार ने चक्रवाती तूफान ‘गुलाब’ (Cyclone Gulab) को लेकर जारी चेतावनी के बाद सात जिलों में हाई अलर्ट जारी किया है। ओडिशा आपदा त्वरित कार्य बल (ODRAF) के 42 दलों और राष्ट्रीय आपदा प्रतिक्रिया बल (NDRF) के 24 दलों के साथ दमकल कर्मियों को सात जिलों गजपति, गंजम, रायगढ़, कोरापुट, मल्कानगिरी, नबरंगपुर, कंधमाल भेजा गया है।

आईएमडी कोलकाता के निदेशक जीके दास ने बताया कि उत्तर-पूर्व और इससे सटे पूर्व-मध्य बंगाल की खाड़ी के ऊपर एक चक्रवाती हवाओं का क्षेत्र बनने की संभावना है। अगले 24 घंटों में यह एक कम दबाव वाला क्षेत्र होगा और इसके 29 सितंबर के आसपास पश्चिम बंगाल तट तक पहुँचने की संभावना है।

कैसे पड़ा ‘गुलाब’ नाम

‘गुलाब’ शब्द एक बारहमासी फूल है। इस बार चक्रवात का नाम पाकिस्तान ने दिया है। आईएमडी के ऑफिशियल नोटिफिकेशन के अनुसार उष्णकटिबंधीय चक्रवात गुलाब का नाम ‘गुल-आब’ रखा गया है। विश्व मौसम विज्ञान संगठन प्रत्येक उष्णकटिबंधीय चक्रवात के नामों की एक लिस्ट रखता है, जो नियमित आधार पर बदलता है।

बता दें कि इससे पहले देश में Cyclone Tauktae और ‘यास’ आया था। बताया जा रहा है कि ‘यास’ के बाद बनने वाले चक्रवाती तूफान का नाम ‘गुलाब’ पहले से ही तय था, जिसे पाकिस्तान ने चुना है। अगर इस क्षेत्र में कोई अगला तूफान आता है तो उसका नाम ‘शाहीन’ होगा। यह नाम कतर ने दिया है।

PFI के 6 लोग… ₹28 लाख की वसूली… खाली कराना था 60 परिवार, कहाँ से आए 10000? – असम के दरांग में सिपाझार हिंसा के पीछे की कहानी

असम के सिपाझार में अतिक्रमण खाली कराने गई पुलिस पर भीड़ ने हमला कर दिया था, जिसमें कई पुलिसकर्मी घायल हो गए। अब मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा ने इस घटना के पीछे PFI (पॉपुलर फ्रंट ऑफ इंडिया) का हाथ होने की बात कही है। उन्होंने कहा कि PFI दरंग जिले के धौलपुर में ‘तीसरी ताकत’ के रूप में काम कर रहा था, जिसने अवैध अतिक्रमणकारियों को भड़काया। फिर उन्होंने अतिक्रमण खाली कराने गई सरकारी टीम पर हमला बोल दिया।

ये लोग वर्षों से सरकारी जमीन पर कब्ज़ा जमा कर बैठे हुए थे। गुरुवार (23 सितंबर, 2021) को हुए इस हमले में दो अतिक्रमणकारी भी मारे गए। मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा ने अनुसार, भीड़ को उकसाने और लोगों को जुटा कर इस घटना को अंजाम देने वाले 6 लोगों को चिह्नित किया गया है, जिसमें एक कॉलेज शिक्षक भी शामिल है। उन्होंने बताया कि इस घटना के 1 दिन पहले लोगों को भोजन देने के नाम पर PFI के लोगों ने इस क्षेत्र का दौरा किया था।

असम की सरकार ने इस सम्बन्ध में महत्वपूर्ण दस्तावेज केंद्र सरकार को भेजे हैं और माँग की है कि PFI पर पूर्ण रूप से प्रतिबंध लगाया जाए। राज्य सरकार को ये भी जानकारी मिली है कि PFI के 6 लोगों ने पिछले 3 महीनों में अतिक्रमणकारियों से 28 लाख रुपयों की वसूली की है, जिसके बदले वादा किया गया कि वो अवैध कब्जे को खाली नहीं होने देंगे। जब वो ऐसा करने में नाकामयाब रहे तो उन्होंने भीड़ को उकसाया।

इस हमले में 9 पुलिसकर्मी घायल हो गए हैं। वहीं PFI ने इस मामले में उलटे सीएम सरमा को घुड़की देते हुए चुनौती दी है कि अगर उनके पास संगठन के विरुद्ध कोई भी सबूत है तो इसे सार्वजनिक कर के दिखाएँ। PFI ने कहा कि राज्य में उपचुनाव आने वाले हैं, इसीलिए जमीन खाली करने की प्रक्रिया को सांप्रदायिक रंग दिया जा रहा है और मुख्यमंत्री सरमा ‘खुला झूठ’ बोल रहे हैं। बदरुद्दीन अजमल की पार्टी AIUDF भी इस मामले में राज्य सरकार के खिलाफ खड़ी है।

AIUDF के एक प्रतिनिधिमंडल ने राज्यपाल जगदीश मुखी से मिल कर माँग रखी कि जिन-जिन लोगों से जमीनें खाली कराई गई हैं, उनमें प्रत्येक को खेती के लिए 6-6 बीघा और घर के लिए एक-एक बीघा जमीन दी जाए। सीएम सरमा ने कहा कि सिपाझार, लुमडिंग और बरछाला की जमीनों पर ढिंग, रूपोहीहाट और लाहौरीघाट के लोगों द्वारा एक साजिश के तहत कब्ज़ा किया गया। उन्होंने कहा कि ऐसा प्रत्येक 5 वर्षों में किया जाता है, ताकि वहाँ की डेमोग्राफी बदले।

सीएम सरमा ने ख़ुफ़िया एजेंसियों को मिली जानकारी के आधार पर ये बातें कहीं। ये सूचना भी मिली है कि कॉलेज में एक लेक्चर दिया गया था, ताकि विवाद को बढ़ाया जा सके। उन्होंने पूछा कि जहाँ 60 परिवारों को हटाना था, वहाँ 10,000 लोग कैसे जमा हो गए? CAA विरोधी आंदोलन की जाँच के दौरान PFI के प्रदेश अध्यक्ष को गिरफ्तार भी किया गया था, लेकिन 3 महीने बाद उन्हें अदालत से जमानत मिल गई।

उन्होंने कहा कि PFI के विरुद्ध जो भी कार्रवाई की जा सकती है, असम सरकार उसमें लगी हुई है। केंद्र को डोजियर भेजा जाना उसी का हिस्सा है। राज्य सरकार ने अवैध कब्जा खाली कराने से पहले ‘ऑल असम माइनॉरिटीज स्टूडेंट्स यूनियन (AAMSU)’ के साथ 2 बार बैठक की थी। दरंग के डिप्टी कमिश्नर और AAMUSU के लोग दो बार वहाँ साथ गए थे। उन्होंने कहा कि इनमें से अधिकतर लोगों के जमीनें हैं, वो भूमिहीन नहीं हैं।

साथ ही उन्होंने वादा किया कि अगर इनमें से कोई भूमिहीन है तो उसे सरकारी योजना के तहत दो एकड़ जमीन मिलेगी, बशर्ते राज्ये के किसी हिस्से में उनके पास पहले से जमीन नहीं होनी चाहिए। मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा ने कहा कि इन लोगों को विश्वास में लेकर ही कब्ज़ा खाली कराने का कार्य शुरू हुआ था। कॉन्ग्रेस विधायकों के प्रतिनिधिमंडल को उन्होंने उन्होंने ये बात समझाई है, लेकिन उसके बाद हंगामा खड़ा कर दिया गया।

बता दें कि असम में 26 सत्रों (वैष्णव मठों) की 5548 बीघा जमीन को घुसपैठियों ने कब्ज़ा रखा है। एक RTI से तो यहाँ तक पता चला था कि असम का 4 लाख हेक्टेयर जंगल क्षेत्र अतिक्रमण की जद में है। ये राज्य के कुल जंगल क्षेत्रों का 22% एरिया है। एक सरकारी समिति ने पाया था कि असम के 33 जिलों में से 15 में बांग्लादेशी घुसपैठिए हावी हैं। इन अतिक्रमणकारियों ने अवैध गाँव के गाँव बसा लिए हैं।

केरल: CPI(M) यूथ विंग कार्यकर्ता ने किया दलित बच्ची का यौन शोषण, वामपंथी नेताओं ने परिवार को गाँव से बहिष्कृत किया

केरल में DYFI (डेमोक्रेटिक यूथ डेडेरशन ऑफ इंडिया) कार्यकर्ता पर एक दलित बच्ची के यौन शोषण का आरोप लगा है। बच्ची की उम्र मात्र 9 वर्ष है। DYFI केरल की सत्ताधारी वामपंथी पार्टी CPI(M) का यूथ विंग है। अगस्त में केरल के सबसे बड़े त्यौहार ओणम से 4 दिन पहले बच्ची काफी रो रही थी। साथ ही वो अपने पिता के फोन से आउनलाईं क्लासेज भी नहीं कर पा रही थी, जिसके लिए उसकी माँ ने उसे फटकार भी लगाई थी।

बच्ची के पिता वेल्डर का काम करते हैं। इसके बाद बच्ची ने अपनी माँ से कहा कि वो उनसे बात करना चाहती हैं, लेकिन अपने पिता की उपस्थिति में। इसके बाद बच्ची ने बताया कि पड़ोस के ही एक युवक सयूज ने उसका यौन शोषण किया है। ये घटना कुछ महीनों पहले हुई थी। आरोपित सयूज पीड़िता के पिता का दोस्त था और दोनों कभी-कभी साथ काम भी करते थे। सयूज DYFI का कार्यकर्ता है। DYFI के अध्यक्ष मुख्यमंत्री पिनराई विजयन के दामाद पीए मोहम्मद रियास हैं।

पीड़ित के पिता ने अपने ही परिसर में स्थित एक घर को आरोपित को किराए पर भी दे दिया था। दोनों घरों के बीच कोई दीवार नहीं थी। लेकिन, वो रेंट भी नहीं लेता था। पेंटर सयूज अपने तीन बच्चों के साथ अप्रैल 2020 में उस घर में रहने आया था। ‘द न्यूज मिनट’ को पीड़िता के पिता ने बताया कि बच्ची को सयूज ने अपने घर बिरयानी खाने के लिए जून 2020 में बुलाया था, लेकिन वो बिना खाए प्लेट फेंक कर भाग आई।

तब सयूज की माँ ने बच्ची की माँ से कहा कि उसने कुछ नहीं खाया। उस समय मत-पिता को लगा कि शायद बच्ची को बिरयानी का टेस्ट पसंद नहीं आया। लेकिन, बच्ची जब भी आरोपित को देखती, वो अजीब व्यवहार करने लगती थी। उसे असुविधा होने लगती थी। पढ़ाई में उसकी रुचि खत्म हो गई थी और वो अचानक रोने लगती थी। साथ ही उसने सयूज को घर से निकालने के लिए भी मत-पिता से कहा।

इसके बाद बच्ची ने बताया कि जब वो सयूज के घर बिरयानी खाने गई थी, तब उसने उसके साथ यौन शोषण किया। कुछ सप्ताह बाद फिर ऐसा हुआ, लेकिन वो किसी तरह उसके चंगुल से निकलने में कामयाब रही। उस पंचायत में CPI(M) का शासन है जबकि वार्ड सदस्य कॉन्ग्रेस का है। बच्ची के पिता का कहना है कि गाँव में परिवार के खिलाफ माहौल बनाया गया। एक CPI(M) नेता ने उलटा बच्ची के पिता के विरुद्ध ही 400 हस्ताक्षर करा कर पुलिस को दिया और आरोप लगाया कि ये शिकायत गलत है।

लोगों ने पीड़ित परिवार का गाँव से बहिष्कार कर दिया और उनसे बातचीत बंद कर दी। उसे कहा जाने लगा कि वो अपनी बच्ची का इस्तेमाल रुपयों के लिए कर रहा है। उनके घर कोई नहीं आता था। उनका बाहर निकलना तक दूभर हो गया। स्थानीय बसपा यूनिट ने परिवार का समर्थन किया है। हालाँकि, सीपीआईएम नेताओ ने अपने ऊपर लगे आरोपों को नकारते हुए कहा है कि उन्होंने कोई हस्ताक्षर नहीं जुटाए।

रिजवान ने साथी शाहनवाज संग मिल कर विधवा भाभी का किया गैंगरेप: नशीली दवा पिलाई, अश्लील वीडियो भी बनाया

उत्तर प्रदेश के कानपुर में रिजवान नाम के एक व्यक्ति पर आरोप लगा है कि साथी शाहनवाज के साथ मिल कर उसने अपनी ही भाभी के साथ बलात्कार किया। रिजवान दवा दिलाने के बहाने अपनी भाभी को हालसी रोड स्थित होटल पर ले गया। वहाँ पर नशीली कोल्डड्रिंक पिलाकर अपने साथी के साथ मिल कर उसने सामूहिक बलात्कार की इस घटना को अंजाम दिया। रिजवान पीड़िता का रिश्ते का देवर है।

इतना ही नहीं, आरोपितों ने गैंगरेप के दौरान पीड़िता का आपत्तिजनक वीडियो भी रिकॉर्ड कर लिया और इसे वायरल करने की धमकी दी। होश में आने पर पीड़िता ने जब विरोध किया तो उसे ब्लैकमेलिंग की धमकी दी गई। पीड़िता की शिकायत के बाद यूपी पुलिस ने मामला दर्ज कर के दोनों आरोपितों को गिरफ्तार कर के जेल भेज दिया है। पीड़िता बजरिया थाना क्षेत्र में रहती है। उसके पति की मृत्यु हो चुकी है।

पीड़िता ने बताया कि 15 सितंबर, 2021 को वो दवा लेने मूलगंज गई थी। इसी दौरान उसे रिजवान मिला, जो कर्नलगंज का रहने वाला है और रिश्ते में उसका देवर है। दवा दिलाने के बहाने ही वो उसे हालसी रोड स्थित क्लासिक होटल ले गया। यहाँ उसने पीड़िता को नशीली कोल्डड्रिंक पिला दी। महिला के बेहोश होने के बाद उसने अपने साथी शाहनवाज को भी बुला लिया। फिर दोनों ने महिला का गैंगरेप किया।

महिला ने होश में आने के बाद जब अपने कपड़े अस्त-व्यस्त देखे तो वो चिल्लाने लगी। शोर मचाने पर रिजवान ने उसे फ़ोन में रिकॉर्ड किया गया अश्लील वीडियो दिखाया और परिवार को जान से मार डालने की धमकी दी। होटल से किसी तरह निकलने के बाद महिला बादशाहीनाका थाना पहुँची और मामला दर्ज कराया। पुलिस होटल की भूमिका की भी जाँच कर रही है। मैनेजर श्याम राठौड़ का कहना है कि उनके होटल में ऐसी कोई घटना नहीं हुई।

कॉन्ग्रेसियों ने BJP सांसद व भाजपा कार्यकर्ताओं को दौड़ा-दौड़ा कर पीटा, बरसाए ईंट-पत्थर: 9 बार के कॉन्ग्रेस MLA पर आरोप

उत्तर प्रदेश के प्रतापगढ़ में भाजपा सांसद संगम लाल गुप्ता की पिटाई की गई है। 9 बार के विधायक प्रमोद तिवारी और कॉन्ग्रेस कार्यकर्ताओं पर इस घटना को अंजाम देने के आरोप लगे हैं। सांगीपुर में ‘गरीब कल्याण मेला’ के दौरान कॉन्ग्रेस कार्यकर्ताओं ने भाजपा कार्यकर्ताओं पर हमला कर दिया। सांसद संगम लाल गुप्ता पर भी हमला हुआ और उनके कपड़े फाड़ डाले गए, लेकिन सुरक्षाकर्मियों ने उन्हें किसी तरह निकाल लिया।

भाजपा सांसद की गाड़ी और और काफिले में शामिल लगभग आधा दर्जन वाहनों को लाठी-डंडों व ईंट-पत्थर से मार कर क्षतिग्रस्त कर दिया गया। सांसद पर हमले की सूचना के बाद पुलिस भी आनन-फानन में वहाँ पहुँची। इस दौरान एक इंस्पेक्टर पर भी हमला किया गया। शनिवार (25 सितंबर, 2021) को हुए हमले में कॉन्ग्रेस कार्यकर्ताओं पर भाजपा वालों को दौड़ा-दौड़ा कर पीटने के भी आरोप हैं।

कार्यक्रम में आए लोगों ने किसी तरह वहाँ से भाग कर अपनी जान बचाई, लेकिन वहाँ घंटों अफरातफरी का माहौल बना रहा। कार्यक्रम में पूर्व सांसद प्रमोद तिवारी और उनकी बेटी और कांग्रेस की विधायक आराधना मिश्रा मोना मौजूद थीं। भाजपा सांसद के वहाँ पहुँचने पर नारेबाजी शुरू हो गई। कॉन्ग्रेस कार्यकर्ताओं की संख्या अधिक थी। प्रमोद तिवारी 9 बार रामपुर खास से विधायक रहे हैं और पिछले दो बार से उस सीट पर उनकी बेटी का कब्ज़ा है।

सांसद गुप्ता के समर्थकों को दौड़ा-दौड़ा कर पीटा गया और गाड़ी के पास ही सांसद को भी घेर लिया गया। पुलिस के आने पर प्रमोद तिवारी भाजपा कार्यकर्ताओं की ही शिकायत करने लगे। किसी तरह सांसद को भीड़ से बाहर निकाला गया। उनका कहना है कि कॉन्ग्रेस कार्यकर्ताओं ने जानलेवा हमला किया था। उन्होंने बताया कि 50-60 लोग पूर्व-नियोजित साजिश के तहत ईंट-पत्थर लेकर उनका इंतजार ही कर रहे थे।

सांसद ने बताया, “जब इंस्पेक्टर सांगीपुर ने गुंडों को हटाने का प्रयास किया तो वह कोतवाल सांगीपुर को जमीन पर पटक कर मारने लगे। जब मैंने इसका विरोध किया तो हमलावरों ने मेरे ऊपर धावा बोल दिया। सुरक्षाकर्मियों ने किसी तरह हमलावरों के चंगुल से छुड़ाकर मुझे बाहर निकाला। मुझे भी काफी चोट लगी है और मेरे कपड़े फाड़ डाले गए हैं। हमारी कई गाड़ियों को क्षतिग्रस्त कर दिया गया। हमारे समर्थकों और भाजपा कार्यकर्ताओं को दौड़ा-दौड़ाकर पीटा गया।”

‘7 साल में 43 करोड़ लोग बैंकों से जुड़े, 36 करोड़ को बीमा, 50 करोड़ को मुफ्त इलाज’: UNGA में PM मोदी ने चाणक्य को किया याद

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शनिवार (25 सितंबर, 2021) को न्यूयॉर्क में ‘संयुक्त राष्ट्र महासभा (UNGA)’ को सम्बोधित करते हुए आचार्य चाणक्य को याद किया। उन्होंने कहा कि भारत के महान कूटनीतिज्ञ आचार्य चाणक्य ने सदियों पहले कहा था – ‘कालाति क्रमात काल एव फलम् पिबति।’ अर्थात, जब सही समय पर सही कार्य नहीं किया जाता, तो समय ही उस कार्य की सफलता को समाप्त कर देता है। UN को खुद को प्रासंगिक बनाए रखने के लिए उसे अपनी प्रभावशीलता व विश्वसनीयता पर काम करना होगा।

उन्होंने विश्व समुदाय को बताया कि बीते 7 वर्षों में भारत में 43 करोड़ से ज्यादा लोगों को बैंकिंग व्यवस्था से जोड़ा गया है। 36 करोड़ से अधिक ऐसे लोगों को बीमा कवच मिला है जो पहले इस बारे में सोच भी नहीं सकते थे। 50 करोड़ से ज्यादा लोगों को मुफ्त इलाज का लाभ देकर उन्हें क्वालिटी हेल्थ से जोड़ा गया है। उन्होंने UN को नसीहत दी कि कोरोना महामारी के दौरान और जलवायु संकट के दौरान देखा है, जो अफगानिस्तान के ताज़ा हालात के बाद और गहरा हो गया है।

उन्होंने समुद्रों को हमारी साझी विरासत बताते हुए कहा कि हमें उनका उपयोग करना चाहिए, दुरुपयोग नहीं। उन्होंने उन देशों को भी चेताया जो आतंकवाद का इस्तेमाल राजनीतिक हथियार के रूप में कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि ऐसे देश समझ लें, आतंकवाद उनके लिए भी इतना ही बड़ा खतरा है। उन्होंने इसे सुनिश्चित करने पर बल दिया कि अफगानिस्तान का इस्तेमाल आतंकवाद फैलाने और आतंकी हमलों के लिए न हो।

उन्होंने कहा, “हमें इस बात के लिए भी सतर्क रहना होगा कि वहाँ की नाजुक स्थिति का कोई देश अपने स्वार्थ के लिए एक टूल के लिए इस्तेमाल करने की कोशिश न करे। इस समय अफगानिस्तान के लोगों को मदद की जरूरत है, इसमें हमें अपना दायित्व निभाना ही होगा।” प्रधानमंत्री ने कहा कि कोरोना महामारी ने विश्व को ये भी सबक दिया है कि वैश्विक अर्थव्यवस्था को अब और अधिक विविधतापूर्ण किया जाए।

इसके लिए उन्होंने इसके लिए ‘Global Value Chains‘ के विस्तार को आवश्यक बताया। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने दुनिया को बताया कि हमारा ‘आत्मनिर्भर भारत’ अभियान इसी भावना से प्रेरित है। उन्होंने अतिवादी और कट्टरवादी सोचों का प्रभाव बढ़ने का जिक्र करते हुए कहा कि इन परिस्थितियों में पूरे विश्व को विज्ञान पर आधारित तर्कसंगत और प्रगतिशील सोच को विकास का आधार बनाना ही होगा।

संयुक्त राष्ट्र महासभा (UNGA) में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का सम्बोधन

उन्होंने दुनिया को याद दिलाया कि कैसे कम संसाधनों के बावजूद हमारा देश ‘सेवा परमो धर्मः’ का अनुसरण करते हुए कोरोना टीकाकरण के विकास और इसके उत्पादन में जी-जान से जुटा है। उन्होंने दुनिया की पहली DNA वैक्सीन तैयार करने की खबर देते हुए बताया कि इसे 12 वर्ष की आयु से अधिक के सभी लोगों को लगाया जा सकता है। उन्होंने जानकारी दी कि भारत ने मानवता को ध्यान में रखते हुए देशों को वैक्सीन की सप्लाई फिर शुरू कर दी है।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि आज विश्व का हर छठा व्यक्ति भारतीय है, ऐसे में जब भारतीयों की प्रगति होती है तो विश्व का विकास होता है। उन्होंने प्रदूषित पानी को गरीबों के लिए एक बड़ी समस्या बताते हुए कहा कि हमने 17 करोड़ घरों तक पाइप से स्वच्छ जल पहुँचाने का लक्ष्य ले रखा है। प्रधानमंत्री ने कहा कि विकास सर्वसमावेशी, सर-पोषक, सर्व-स्पर्शी और सर्व-व्यापी हो – यही हमारी प्राथमिकता है