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रस्सी.. सल्फास की डिब्बी.. ब्लैकमेल वाली सीडी… सपा नेता भी घेरे में: पढ़ना-लिखना नहीं जानते थे नरेंद्र गिरी, फिर 8 पन्नों का सुसाइड नोट कैसे?

‘अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद (ABAP)’ के अध्यक्ष और प्रयागराज स्थित बाघंबरी मठ के महंत नरेंद्र गिरी की संदिग्ध मृत्यु का रहस्य उलझता ही जा रहा है। मठ में रहने वाले सेवादारों व शिष्यों पर भी सवाल खड़े हो रहे हैं। एक शिष्य बबलू ने बताया कि रविवार (19 सितंबर, 2021) को महंत ने गेहूँ में रखने के लिए सल्फास की गोलियाँ मँगाई थीं। कमरे में सल्फास की डिब्बी मिली, जो बंद थी। एक सपा राज्य मंत्री का नाम भी सामने आ रहा है।

वहीं एक अन्य शिष्य ने जानकारी दी कि महंत ने दो दिन पहले ये कहकर नायलॉन की नई रस्सी मँगाई थी कि कपड़े टाँगने में दिक्कतें आ रही है। इसी रस्सी से महंत नरेंद्र गिरी ने फाँसी लगाई थी। ‘दैनिक भास्कर’ की खबर के अनुसार, प्रत्यक्षदर्शी सर्वेश ने बताया, “मैंने और एक अन्य शिष्य सुमित ने महंत जी को फँदे से उतारा था। प्रतिदिन महंत नरेंद्र गिरि शाम 5 बजे के आसपास चाय पीने के लिए कमरे से बाहर आते थे। सवा 5 बजे तक जब दरवाजा नहीं खुला तो दरवाजा को खटखटाया गया।”

उक्त शिष्य ने बताया कि दरवाजा न खुलने पर फोन किया गया, लेकिन फोन नहीं उठा। फिर दरवाजे को धक्का देकर अंदर जाने पर लोगों ने देखा कि उनका शव फँदे पर लटक रहा था। रस्सी को काट कर शव को फँदे से उतारा गया। तत्पश्चात पुलिस को घटना के सम्बन्ध में सूचित किया गया। बाघंबरी मठ में 12 से अधिक CCTV कैमरे लगे हुए हैं। उसे खँगाला जा रहा है। वहाँ से कोई सुराग हाथ लगने की संभावना है।

शिष्यों का ये भी कहना है कि लेटे हनुमान जी मंदिर के मुख्य पुजारी आद्या तिवारी से दो दिन पहले किसी बात को लेकर उनकी नोकझोक भी हुई थी। फ़िलहाल वो हिरासत में हैं। महंत नरेंद्र गिरी के साथ सुरक्षा का तगड़ा इंतजाम रहता था, जिसमें उनके शिष्यों के अलावा सरकार द्वारा तैनात गार्ड्स भी रहते थे। मठ में तीन बुलेटप्रूफ गाड़ियाँ हैं, जिनसे वो निकला करते थे। मौत के एक दिन पहले उप-मुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य उनसे मिले थे, तब वो काफी प्रसन्न थे।

करीब एक सप्ताह पहले उत्तर प्रदेश के DGP मुकुल गोयल से भी उनकी मुलाकात हुई थी। कई अलग-अलग लोगों से वो मिले, लेकिन चेहरे पर तनाव नहीं दिखा। लोगों का कहना है कि वो ज्यादा पढ़ते-लिखते नहीं थे, ऐसे में 8 पन्नों के सुसाइड नोट पर सवाल खड़े हो रहे हैं। ‘अखिल भारतीय संत समिति’ और ‘गंगा महासभा’ के महासचिव जीतेंद्रानंद सरस्वती का कहना है कि वह इतना बड़ा सुसाइड नोट लिख ही नहीं सकते। 

उन्हें जानने वालों का कहना है कि वो कामचलाऊ रूप से ही लिखते-पढ़ते थे और सामान्यतः हस्ताक्षर से काम चलाते थे। गंगा सफाई आंदोलन में उनके साथ काम कर चुके कानपुर के श्रमिक नेता रामजी त्रिपाठी का कहना है कि महंत नरेंद्र गिरी अपने शिष्यों से ही चीजें पढ़वाते थे और पत्र वगैरह लिखवाते थे। शिष्य सतीश शुक्ल का कहना है कि वो एक लाइन भी ठीक से नहीं लिख पाते थे। उनके मोबाइल फोन की पुलिस पड़ताल कर रही है।

इस मामले में हिरासत में लिए गए उनके शिष्य आनंद गिरि ने इसे हत्या करार देते हुए इसके पीछे सिपाही अजय सिंह (गनर) के साथ ही मनीष शुक्ल, विवेक और अभिषेक मिश्र पर आरोप लगाया है। पुलिस जल्द ही इन लोगों से पूछताछ करेगी। ये सभी प्रॉपर्टी डीलर्स हैं और महंत नरेंद्र गिरी के करीबी भी थे। मठ की जमीन को लेकर कई विवाद सामने आए थे, जिसमें एक सपा नेता महेश नारायण सिंह से हुआ विवाद भी शामिल था। 2004 में भी मठ की जमीन का विवाद सामने आया था।

ये भी सामने आया है कि उन्हें किसी वीडियो के जरिए ब्लैकमेल किया जा रहा था। ‘आज तक’ की खबर के अनुसार, उन्हें ब्लैकमेल करने के लिए किसी सीडी का इस्तेमाल किया जा रहा था और इसमें सपा सरकार में राज्य मंत्री रहा एक नेता भी जाँच के दायरे में है। उक्त राज्य मंत्री नरेंद्र गिरी के शिष्य आनंद का भी करीबी है। कहा जा रहा है कि उस दिन नरेंद्र गिरी किसी का इंतजार कर रहे थे। उनका रिकॉर्ड किया एक वीडियो भी पुलिस ने बरामद किया है। सीएम योगी ने खुद प्रयागराज पहुँच कर श्रद्धांजलि दी।

उत्तर प्रदेश के उप-मुख्यमंत्री दिनेश शर्मा ने इस मामले में निष्पक्ष जाँच का आश्वासन दिया है। ‘अखाड़ा परिषद’ के अध्यक्ष महंत नरेंद्र गिरी ने कुछ ही दिनों पहले इलाहाबाद उच्च-न्यायालय के उस आदेश का समर्थन किया था, जिसमें गाय को राष्ट्रीय पशु घोषित करने का सुझाव दिया गया था। उन्होंने केंद्र की राजग सरकार से इस सम्बन्ध में कानून बनाने की अपील की थी। उन्होंने कहा था कि गौसेवा हमारी जिम्मेमदारी है, लेकिन गायों की आज जो अवस्था है उसके लिए हम भी जिम्मेदार हैं क्योंकि वो जब तक दूध देती है, तभी तक हम उसकी सेवा करते हैं।

सपा के जिन पूर्व राज्य मंत्री का नाम इसमें सामने आ रहा है, उनका नाम इंदु प्रकाश मिश्रा है। अपने ऊपर लगे आरोपों पर उन्होंने पूछा कि क्या समझौता कराना अपराध है? उन्होंने कहा कि वो वर्षों से इस मंदिर व सनातन हिन्दू धर्म से जुड़े हैं। बकौल इंदु प्रकाश मिश्रा, जब वो मंदिर में जाते थे तो महंत कहते थे कि छोटे महंत मीडिया में जो ख़बरें दे रहे हैं वो गलत हैं। फिर उन दोनों के बीच मई 2021 में समझौता कराया गया।

उन्होंने कहा, “मध्यस्थता कराने वालों में मैं भी शामिल था। सोशल मीडिया में जो ख़बरें जाती थीं, उन्हें छोटे महाराज ने रोक दी। यही समझौता हुआ। सब कुछ लिखित था। इसके बाद क्या हुआ, उसकी मुझे कोई जानकारी नहीं है। मुझे क्यों पुलिस पूछताछ के लिए बुलाएगी? पुलिस बुलाएगी तो जो हुआ, सब बता दूँगा। कौन सा मैंने अपराध किया है? कमरे में बना वीडियो सामने आया, जिसमं आनंद गिरी गुरुदेव से कान पकड़ कर माफ़ी माँग रहे हैं।”

‘यूपी में किसानों को गन्ने का सबसे ज्यादा पैसा, फिर भी वहीं करेंगे प्रदर्शन’: इंटरव्यू से हट गया राकेश टिकैत का मुखौटा

20 सितंबर 2021 को किसान नेता राकेश टिकैत का एक इंटरव्यू सुदर्शन न्यूज चैनल पर ऑन एयर किया गया। इस शो में होस्ट सुरेश चव्हाणके ने किसान प्रदर्शन और उनकी समस्या से जुड़े हर पहलू पर बात की और इसी बीच राकेश टिकैत अपनी बातों से ये स्पष्ट करते भी दिखे कि ये प्रदर्शन किसानों के लिए नहीं बल्कि केंद्र और प्रदेश में बैठी भाजपा सरकार के खिलाफ है।

सरकार व्यवसायियों को पहुँचाना चाहती है लाभ, किसानों को नहीं

अपने इंटरव्यू के दौरान टिकैत ने सरकार पर कारोबारियों की मदद करने का आरोप मढ़ा। उन्होंने कहा कि सरकार व्यापारियों को कम कीमत पर उत्पाद खरीदने और उसे अधिक कीमत पर बाजार में बेचने में मदद कर रही है। उन्होंने कहा कि तीनों कृषि कानून लागू होने से पहले, व्यापारिक घरानों ने पहले ही देश भर में भूमिगत कक्ष और गोदाम बना लिए थे। उन्होंने सवाल किया कि क्या व्यापारिक घरानों को पता था कि ऐसे कृषि कानून आ रहे हैं जो उन्हें खाद्य व्यवसाय पर अपनी पकड़ बढ़ाने में मदद करेंगे।

दिलचस्प बात यह है कि चव्हाणके ने इसी दौरान उन्हें जानकारी दी कि निजी फर्म भूमिगत कक्ष का निर्माण 1978 से कर रहे हैं। इसका मतलब ये तो नहीं है कि वो तभी से कानून को लागू करने की योजना बना रहे थे। व्यापारिक घरानों के लिए मार्केट रिसर्च और उन क्षेत्रों में निवेश करना बेहद आम बात है जहाँ वह लाभ की संभावना देखते हैं।

ऐसे दावे कई बार हुए हैं कि अडानी जैसे कारोबारी ऐसे भूमिगत कक्षों का निर्माण करके किसानों का उत्पीड़न करते हैं। हालाँकि सच यह है कि 2005 में अडानी ने मोगा और कैथल में खाद्य भूमिगत कक्ष स्थापित करने के लिए FCI के साथ बू (BOO/(Build, Own, Operate ) एग्रीमेंट किया। 

साल 2008 की एक रिपोर्ट बताती है कि उस समय भूमिगत कक्ष चालू थे और एफसीआई के लिए 3 लाख टन गेहूँ की खरीद की गई थी। अपने बयान में भी अडानी ने कहा था कि उनका काम सिर्फ इन्फ्रास्ट्रक्चर में है। खरीद और कीमत तय करने में उनकी कोई भूमिका नहीं होती है।

‘सरकार को एमएसपी फिक्स करना चाहिए’

टिकैत ने आरोप लगाया कि सरकार को एमएसपी तय करना चाहिए; अन्यथा, निजी क्षेत्र निजी बाजारों में किसानों का शोषण करेगा। उन्होंने दावा किया कि अगर हर फसल के लिए एमएसपी तय किया जाता है, तो कोई भी सरकार द्वारा तय एमएसपी से कम कीमत पर उपज नहीं खरीद पाएगा। यह पूछे जाने पर कि सरकार 100% उत्पाद नहीं खरीद सकती, उन्होंने कहा कि कानून को निजी कंपनियों के लिए भी कीमत को विनियमित करना चाहिए।

अब संभव है कि ये सुझाव किसी को भी अच्छा लग सकता है लेकिन हर प्रकार की उपज, विशेष रूप से सब्जियों जैसे खराब होने वाले खाद्य पदार्थों पर एमएसपी लगाना संभव नहीं है। ऐसे मामलों में, निजी क्षेत्र की भागीदारी और भंडारण और प्रसंस्करण की अंतिम-मील उपलब्धता एक महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है। मगर टिकैत की माँग है कि राष्ट्रीय राजमार्गों के पास कोई व्यावसायिक गतिविधियाँ नहीं होनी चाहिए। हालाँकि, वह इस बात को साफ नहीं बताते कि राष्ट्रीय राजमार्ग के पास प्रसंस्करण संयंत्रों और भंडारण सुविधाओं के खिलाफ क्यों हैं क्योंकि हकीकत में तो वो किसानों को खेतों के पास उपज को संग्रहीत या संसाधित करने में मदद करेंगे।

टिकैत ने दावा किया कि किसान यूनियनों के समूह ने एमएसपी के लिए वित्तीय कार्यप्रवाह (वर्क फ्लो) तैयार किया है जिससे यह सुनिश्चित होगा कि सरकार को उपज की खरीद पर कोई अतिरिक्त पैसा खर्च नहीं करना पड़ेगा। हालाँकि, उन्होंने शो के दौरान कोई डेटा पेश नहीं किया या कोई अतिरिक्त जानकारी नहीं दी।

उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार तभी बात करना चाहती है जब किसान नए कानूनों से सहमत हों, जो कि सच नहीं है। सरकार ने यूनियनों की समस्याओं पर विस्तार से चर्चा करने को कहा है ताकि जरूरत पड़ने पर कानूनों में संशोधन किया जा सके। यह किसान संघ हैं जो कानूनों को निरस्त करने पर अड़े हुए हैं और सरकार के ऐसा करने से पहले कुछ भी चर्चा नहीं करना चाहते हैं।

ज्ञात रहे कि पिछले दिनों भी टिकैत का एक इंटरव्यू आया था। उस समय भी टिकैत अपनी समस्याओं को समझाने में विफल हो गए थे जबकि होस्ट लियाकत बार-बार ये पूछ रहीं थी कि आखिर परेशानियाँ क्या है।

यूपी सरकार गलत डेटा दे रही है।

टिकैत कहते हैं उत्तर प्रदेश सरकार गन्नों की पेमेंट को लेकर गलत डेटा दे रही है। उनका दावा है कि बैकलॉग तक क्लियर नहीं हुआ और सारी पेमेंट योगी सरकार के कारण लेट हो रही है। ऐसे में बात जब बात गन्ने की कीमत की आई तो टिकैत ने कहा कि यूपी सरकार हर क्विंटल पर 325 रुपए की एमएसपी दे रही है, जो कि अन्य राज्यों से ज्यादा है। चाहे वो तमिल नाडु हो, महाराष्ट्र हो या कोई और। फिर भी उन राज्यों में प्रोटेस्ट करने की जगह टिकैत कहते हैं कि वो योगी सरकार के विरोध में प्रदर्शन करेंगे और उन्हीं से पैसे बढ़ाने को भी कहेंगे।

जब चव्हाणके को इंटरव्यू के दौरान ये सारी बातें मालूम चली तो उन्होंने टिकैट का असली चेहरा दिखाना चाहा, जिस पर टिकैत ने बोला कि वो तो खुश होंगे अगर सीएम योगी प्रधानमंत्री बन जाएँ और पीएम मोदी राष्ट्रपति बन जाएँ। लेकिन 2022 के चुनावों के मद्देनजर वो सीएम योगी के ख़िलाफ़ प्रोटेस्ट करेंगे। यहाँ भी टिकैत यह नहीं बताते कि आखिर वो महाराष्ट्र और तमिलनाडु में मिलने वाली कम एमएसपी को लेकर क्यों नहीं प्रोटेस्ट कर रहे।

अल्लाह-हू-अकबर

टिकैत से जब महापंचायत में लगाए गए अल्लाह-हू-अकबर नारे के बारे में पूछा गया तो उन्होंने कहा कि इसका अधिकार संविधान देता है कि कोई भी किसी धर्म का अनुसरण करे। लेकिन उन्हीं टिकैत से जब पूछा गया कि ये अल्लाह-हू-अकबर अल्लाह को सबसे बड़ा ईश्वर बताता है और यह हिंदुओं को कैसे बर्दाश्त होगा। इस पर उन्होंने अपनी रुद्राक्ष माला को ओम लटकन के साथ दिखाना शुरू कर दिया।

इस पर चव्हाणके ने तंज कसते हुए कहा, “क्या ओम में त्रिशूल है, या आपने इसे एक क्रॉस के साथ बदल दिया है? क्योंकि आप कुछ भी कर सकते हैं…।” उन्होंने आगे सवाल किया कि क्या टिकैत के पिता को ठीक लगता यह सुन कर कि वो अल्लाह को भगवान शिव से ऊँचा कहें। इस पर टिकैत ने प्रश्न को नकार दिया और विषय बदल दिया।

ऐसे ही ओवैसी की बात आते ही टिकैत सवाल को नकारते दिखाई दिए। उन्होंने जय श्रीराम पर सवाल खड़ा करते हुए कहा कि पहले चलन था कि लोग राम-राम कहते थे। लेकिन ये लोग आए और इसे जय श्रीराम बना दिया गया। हम जय श्रीराम कहना नहीं चाहते। राम-राम से समस्या क्या है। चव्हाणके ने जब कहा कि ये तो आदमी के ऊपर है वो क्या कहे। इस पर टिकैत ने सवाल किया कि आखिर राम-राम से समस्या ही क्या थी जो जय श्रीराम कर दिया गया।

टिकैत का आरोप है कि सरकार निजीकरण पर जोर देकर सब कुछ बेच रही है। जब चव्हाणके ने कहा कि सरकार ये सब पैसे कमाने के लिए कर कर रही है ताकि प्रोजेक्ट में निवेश हो सके, तो टिकैत ने इस बात को मानने से इंकार कर दिया। अपने पूरे इंटरव्यू में टिकैत सिर्फ यही दिखाते दिखे कि उनका उद्देश्य भाजपा सरकार के ख़िलाफ़ प्रदर्शन है।

पहले सिर पर रॉड मारा, फिर आखिरी दम तक ट्रक से कुचला: हत्या से पहले नफीस अहमद ने मनप्रीत कौर को खूब पिलाई बीयर

उत्तर प्रदेश पुलिस ने नफीस अ​हमद को गिरफ्तार कर मनप्रीत कौर हत्याकांड का खुलासा कर दिया है। बिजनौर के अफजलगढ़ में नेशनल हाइवे-74 पर शनिवार (18 सितंबर 2021) की रात 28 वर्षीय मनप्रीत कौर मृत मिली थी। उसका शरीर बुरी तरह कुचला हुआ था।

अफजलगढ़ पुलिस ने सोमवार को हत्या का खुलासा करते हुए बताया कि ट्रक के केबिन में बैठकर नफीस ने मनप्रीत को जमकर बीयर पिलाई। फिर नशे की हालत में उसके सर पर लोहे की रॉड से हमला किया। इसके बाद लात मार उसे ट्रक से नीचे फेंका और फिर उसे गाड़ी से कुचल दिया। नफीस को गिरफ्तार कर पुलिस ने जेल भेज दिया है। पुलिस अधीक्षक डॉ. धर्मवीर सिंह ने बताया कि नफीस अहमद के पास से मनप्रीत का आधार कार्ड, मोबाइल, हत्या में इस्तेमाल की गई लोहे की रॉड और ट्रक बरामद की गई है।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, मनप्रीत उत्तराखंड के काशीपुर में एक गारमेंट स्टोर में काम करती थी। आठ साल पहले उसकी शादी 29 वर्षीय व्यवसायी सुखवीर सिंह से हुई थी। दोनों की 5 साल की एक बेटी भी है। रविवार को सुखवीर ने मनप्रीत के शव की पहचान की।

रिपोर्ट के अनुसार 2018 से मनप्रीत का बिजनौर के मनियावाला के रहने वाले ट्रक ड्राइवर 26 वर्षीय नफीस अहमद से प्रेम प्रसंग चल रहा था। तीन साल पहले उसने पति को छोड़ दिया था। सुखवीर ने अपनी पत्नी की हत्या के आरोप में नफीस अहमद के खिलाफ पुलिस थाने में शिकायत दर्ज कराई थी। नफीस पर हत्या और सबूत मिटाने का मामला दर्ज किया गया था। जब उसे पूछताछ के लिए हिरासत में लिया गया तो उसने पुलिस के सामने बेरहमी से हत्या करने की बात कबूल कर ली।

नफीस ने पुलिस को बताया कि मनप्रीत उससे शादी करना चाहती थी और उस पर पहली पत्नी को तलाक देने का दबाव बना रही थी। मनप्रीत उससे शादी नहीं करने पर दुष्कर्म के मामले में फँसाने की धमकी देती थी। 18 सितंबर को मनप्रीत कौर ने उसको उधमसिंह नगर बुलाया था। वह दिन में उधमसिंह नगर पहुँच गया और शाम को मनप्रीत को अपने साथ अफजलगढ़ ले आया।

नफीस ने बताया कि मनप्रीत ने बीयर पी रखी थी। इसके बाद उन्होंने एक होटल पर खाना खाया। इस दौरान मनप्रीत के मोबाइल पर एक कॉल आया, तो वह उधमसिंह नगर जाने की जिद करने लगी। नफीस ने उसको उधमसिंह नगर छोड़ने के लिए ट्रक में बैठा लिया। इसी दौरान नफीस ने उसके सिर पर लोहे की रॉड से हमला किया। फिर उसे नीचे गिराकर उसके ऊपर ट्रक चढ़ा दी और फरार हो गया।

घुसपैठ कर उरी में छिपे 10 आतंकी, तलाश में पैराकमांडो उतरे: दो दिन से चल रहा सर्च ऑपरेशन, मोबाइल-इंटरनेट बंद

उत्तरी कश्मीर में नियंत्रण रेखा से सटे उरी (बारामुला) सेक्टर में तकरीबन 10 आतंकियों ने दो दिन पहले घुसपैठ की है। इसे बीते आठ वर्षों में अब तक की सबसे बड़ी आतंकी घुसपैठ कहा जा रहा है। हालाँकि, अभी सेना की ओर से आतंकियों की संख्या के बारे में कोई स्पष्ट बयान नहीं आया है। लेकिन पिछले 36 घंटे से तलाशी अभियान जारी है वहीं आज (21 सितम्बर, 2021) भी उरी और बारामुला सेक्टर में मोबाइल और इंटरनेट सेवाएँ बंद कर दी गई हैं। इस तलाशी अभियान में पैरा कमांडो का एक दस्ता भी शामिल है।

मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, बताया जा रहा है कि रविवार (19 सितम्बर, 2021) की भोर में उरी सेक्टर में अंगूरी पोस्ट के इलाके में स्वचालित हथियारों से लैस आतंकियों के एक दल ने घुसपैठ का प्रयास किया था। इसके बाद हुई मुठभेड़ में एक जवान घायल हो गया था। आतंकी जंगल और बारिश की आड़ में भागने में सफल हुए थे। वहीं सेना के अधिकारियों ने बताया कि उरी से कश्मीर के अंदरूनी इलाकों की तरफ आने वाले सभी प्रमुख रास्तों व नालों में भी विशेष नाके लगाए गए हैं। जहाँ घुसपैठ हुई है, उस पूरे इलाके मेें घेराबंदी कर दी गई है।

रिपोर्ट के अनुसार, सेना की 15वीं कोर के कमांडर लेफ्टिनेंट जनरल डीपी पांडेय ने भी उरी में सैन्य अभियान की पुष्टि की है। लेकिन उन्होंने उरी में घुसपैठ कर आए आतंकियों की संख्या के बारे में कोई जानकारी नहीं दी है, लेकिन मीडिया रिपोर्ट में स्थानीय सूत्रों के हवाले से घुसपैठी आतंकियों की संख्या करीब 10 बताई जा रही है। वहीं सेना की तरफ से यह भी कहा जा रहा है कि फिलहाल अभी इस बात की पुष्टि नहीं की हुई है कि आतंकी घुसपैठ की कोशिश में सफल रहे या फिर कोशिश करने के बाद वापस चले गए।

सेना के मुताबिक घुसपैठ रविवार की तड़के हुई है, लेकिन कई रिपोर्ट में यह दावा किया जा रहा है कि घुसपैठ शनिवार (18 सितंबर, 2021) को हुई होगी, क्योंकि 2016 में 18 सितंबर की सुबह ही लश्कर-ए-तैयबा के आतंकियों ने उरी ब्रिगेड मुख्यालय पर हमला किया था।

रिपोर्ट के अनुसार, लेफ्टिनेंट जनरल ने बताया कि इस वर्ष फरवरी में पाकिस्तानी सेना द्वारा एलओसी पर संघर्ष विराम समझौते के बाद गुलाम कश्मीर की तरफ से उत्तरी कश्मीर में एलओसी पर आतंकियों की यह घुसपैठ की यह दूसरी कोशिश है। इससे पूर्व जून मेें बांडीपोरा में एलओसी पर घुसपैठ हुई थी। हालाँकि, घुसपैठ करने वाले तीनों आतंकी अलग-अलग मुठभेड़ों में मार गिराया गया है। वहीं यह भी कहा जा रहा है कि इस वर्ष घुसपैठ के जो प्रयास हुए उनमें से शायद ही कोई प्रयास आतंकियों का सफल हो पाया हो पाया है।

‘हाँ मारा, क्या कर लोगे’: पेड़ से लटका मिला 17 साल का आलोक, परिजनों का दावा- मुस्लिम लड़की से अफेयर में हत्या

दिल्ली के शालीमार बाग़ के एक नवयुवक आलोक कुमार का शव संदिग्ध परिस्थितियों में पेड़ से लटका हुआ मिला। परिजनों ने एक मुस्लिम लड़की के परिवार वालों पर उसकी हत्या का आरोप लगाया है। 17 वर्षीय आलोक कुमार के शव को पुलिस ने रविवार (19 सितंबर, 2021) को बरामद किया, जिसके बाद पोस्टमॉर्टम की प्रक्रिया पूरी की गई और शव को परिजनों को सौंप दिया गया। पुलिस ने इस घटना को शुरुआती तौर पर आत्महत्या बताया है।

मृतक के परिजनों ने आरोप लगाया है कि मुस्लिम परिवार ने लड़के को मार कर उसके शव को पेड़ से लटका दिया। बताया जा रहा है कि आलोक कुमार का मुस्लिम लड़की के साथ प्रेम सम्बन्ध था। इन आरोपों पर दिल्ली पुलिस जाँच करने की बात कह रही है। रविवार को इस घटना के विरोध में विश्व हिन्दू परिषद (VHP) समेत कई हिन्दू संगठन भी परिजनों के साथ सड़क पर उतरे और न्याय की माँग की।

स्थिति को संवेदनशील होता देखते हुए इलाके में पर्याप्त मात्रा में पुलिस बल की तैनाती की गई है। पुलिस ने मृतक के पिता का बयान भी दर्ज कर लिया है। आलोक कुमार अपने परिवार के साथ हैदरपुर इलाके में रहते थे। वो इलाके में बोतल बंद पानी का कारोबार करते थे। ‘दैनिक जागरण’ की खबर के अनुसार, उनका उसी इलाके में एक मुस्लिम लड़की के साथ प्रेम सम्बन्ध था। उक्त लड़की के परिजन इस रिश्ते के खिलाफ थे।

आलोक के पिता हरिराम का कहना है कि उनका बीटा शुक्रवार के दिन से ही लापता था। ऐसे में परिजन लगातार खोजबीन कर रहे थे। तभी उसी इलाके में एक होटल के नजदीक पेड़ से लटका हुआ शव मिला। परिजनों ने इसे हत्या करार दिया। पिता के अनुसार, उक्त लड़की ने आलोक को अपने घर पर बुलाया था और मोबाइल छोड़ कर आने को कहा था। लड़की के परिजन आलोक पर दबाव बना रहे थे कि वो अपने परिवार को छोड़ दे और लड़की से शादी कर ले।

हरिराम का कहना है कि उनका बेटा अपने परिवार को छोड़ने के लिए तैयार नहीं था। आरोप है कि उसी दिन लड़की के अब्बा ने सबक सिखाने की धमकी भी दी थी, जिस दिन आलोक गायब हुए। पुलिस ने पोस्टमॉर्टम की प्रारंभिक रिपोर्ट में आत्महत्या की बात पता चलने का बयान दिया है। अंतिम रिपोर्ट के आधार पर कार्रवाई का आश्वासन दिया गया है। आलोक के साथ मारपीट का एक वीडियो भी सामने आया है।

इस वीडियो में कुछ लोग उसका बीच-बचाव कर रहे हैं। पुलिस पता लगा रही है कि ये वीडियो कब का है और इसका की मौत से कोई कनेक्शन है या नहीं। आलोक की बहन ने मुस्लिम लड़की के जीजा और खाला सहित कई लोगों पर हत्या का आरोप लगाया है। आलोक की बहन ने बताया कि भाई के गायब होने के बाद जब पिता उक्त मुस्लिम परिवार के पास जानकारी के लिए पहुँचे तो उनके साथ भी मारपीट की गई।

मृतक आलोक कुमार की बहन का बयान

आलोक कुमार की बहन ने बताया, “लड़की के परिवार वालों ने मारपीट की थी। उन्होंने मेरे पापा से स्पष्ट कहा कि हाँ हमने मारा है, क्या कर लोगे। उन्होंने कहा कि जो दो बचे हैं उन्हें भी बचा कर रखना, वरना उन्हें भी मार डालेंगे। हम पहले उस जगह पर भी ढूँढने गए थे, जहाँ बाद में उसका शव मिला। लेकिन, तब वहाँ कुछ नहीं था। मेरे पिता ने कई बार खोजबीन की। उस लड़की के परिजनों ने ही मेरे भाई को मारा है।”

‘अल्लाह करे न्यूजीलैंड के सारे खिलाड़ी मर जाएँ’: शोएब अख्तर ने कहा- पिंजा लगाने का समय आ गया, छोड़ना नहीं है

न्यूजीलैंड और इंग्लैंड द्वारा अपनी-अपनी क्रिकेट टीमों का पाकिस्तान दौरा रद्द किए जाने से न सिर्फ वहाँ के आम लोग, बल्कि पूर्व क्रिकेटर्स भी खासे नाराज़ नजर आ रहे हैं। शोएब अख्तर ने न्यूजीलैंड और इंग्लैंड की टीमों को आगामी T-20 विश्व कप में देख लेने की धमकी भी दी है। उन्होंने लिखा, “अब पिंजा लगाने का समय आ गया है। छोड़ना नहीं है अब।” वहीं वहाँ के कुछ फैंस तो न्यूजीलैंड की टीम को लेकर कुछ ज्यादा ही आक्रामक हैं।

करम जानी शाह नाम के एक पाकिस्तानी क्रिकेट फैन ने तो यहाँ तक लिख डाला, “अल्लाह करे कि न्यूजीलैंड के खिलाड़ियों का जगह क्रैश हो जाए और सारे खिलाड़ी मर जाएँ।” ये अलग बात है कि उसने अंग्रेजी में ‘क्रैश’ की जगह ‘क्रश’ लिख दिया। वहीं शोएब अख्तर ने इस खबर पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि जब आपको कोविड के समय में जरूरत पड़ती है तो आप हमसे मिन्नतें करते फिरते हैं कि हमारे देश का दौरा कर लो।

वहीं शोएब अख्तर ने अपने वीडियो में कहा, “आपने खबर तो सुनी ही होगी कि इंग्लैंड ने अपना दौरा रद्द कर दिया है। न्यूजीलैंड के साथ उन्होंने भी मन बना लिया था कि वो पाकिस्तान नहीं आएँगे। माशाअल्लाह, जब उन्हें अफगानिस्तान से इवेकुएशन की जरूरत पड़ती है तब उन्हें पाकिस्तान नजर आता है। जिस एयरलाइंस को वो सुरक्षित नहीं बताते हैं, तब वो फ़ौरन कूद कर उसमें बैठ जाते हैं। कहते हैं कि हमें उठा कर यहाँ ले आओ।”

शोएब अख्तर ने अपने यूट्यूब वीडियो में कहा, “अगर मैं PCB का अध्यक्ष होता तो इनसे स्पष्ट कह देता कि अब हमें भी आपके साथ अंतरराष्ट्रीय सीरीज नहीं खेलनी है। जब आपको जरूरत पड़ती है तो आप मुँह उठा कर पाकिस्तान आ जाते हैं। आप कह रहे हैं कि आपको हम पर भरोसा नहीं। फिर जब अफगानिस्तान से निकलना था तब आपको हम पर ट्रस्ट था? ये स्वीकार्य नहीं है। ये काफी दुःखद खबर है।”

उधर पूर्व भारतीय क्रिकेटर वसीम जाफर ने सोशल मीडिया के माध्यम से लिखा, “पाकिस्तान क्रिकेट बोर्ड (PCB) के पास कई कारण हैं कि वो ECB से निराश हो। पिछले साल जब कोरोना की वैक्सीन भी नहीं आई थी, तब पाकिस्तान और वेस्टइंडीज ने महामारी के दौरान भी इंग्लैंड का दौरा किया था। ECB इसके बदले कम से कम कुछ कर सकता था तो ये कि वो अपना पाकिस्तान दौरा नहीं रद्द करता। क्रिकेट रद्द होता है तो इसमें किसी की जीत नहीं होती है।”

मुंबई में 4 कोचिंग संस्थान, दुनिया की नजरों में टीचर रिजवान: असल में आतंकियों का मददगार, ATS ने पकड़ा

महाराष्ट्र आतंकरोधी दस्ते (ATS) ने रिजवान इब्राहिम मोमिन नाम के एक संदिग्ध आतंकी को पकड़ा है। वह शिक्षक है और मुंबई में चार कोचिंग संस्थान चलाता है। रविवार (19 सितंबर 2021) को उसे गिरफ्तार किया गया।

दिल्ली पुलिस ने जिस आतंकी मॉड्यूल का खुलासा किया है उसी से संलिप्तता को लेकर रिजवान की गिरफ्तारी हुई है। उसे यूएपीए के तहत गिरफ्तार किया गया है। जाकिर हुसैन शेख ने पूछताछ में उसका नाम लिया था। शेख को एटीएस ने 18 सितंबर को पकड़ा था। शेख के तार दिल्ली पुलिस द्वारा गिरफ्तार किए गए 6 आतंकियों में से एक जान मोहम्मद से जुड़े हैं। शेख ​पाकिस्तानी हैंडलर्स के संपर्क में भी था। रिजवान और जाकिर को सोमवार को विशेष अदालत में पेश किया गया जहाँ से उन्हें 4 अक्टूबर तक न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया।

एक अधिकारी ने बताया, “जान मोहम्मद की गिरफ्तारी के बाद शेख को अपने घर पर छापे का डर सताने लगा था। इसके बाद वह दो दिन तक मुंब्रा स्थित रिजवान के घर पर रहा।” एटीएस का यह भी कहना है कि शेख ने रिजवान के फोन का इस्तेमाल पाकिस्तान में अपने हैंडलर्स को कॉल करने के लिए किया था। उसकी गिरफ्तारी के बाद रिजवान ने कथित तौर पर अपना फोन तीन टुकड़ों में तोड़ घर के पास एक नाले में फेंक दिया।

रिजवान को शनिवार की शाम उसके घर से एटीएस दफ्तर पूछताछ के लिए लाया गया था और रविवार सुबह उसे गिरफ्तार कर लिया गया। एक अधिकारी ने बताया कि उससे पूछताछ कि बाद फेंके गए मोबाइल के सभी टुकड़े नाले से बरामद कर फोरेंसिक जाँच के लिए भेजे गए हैं और डाटा रिट्रीव करने की कोशिश हो रही है। इंडियन एक्सप्रेस के अनुसार एक साझेदार के साथ रिजवान अंधेरी, कुर्ला, बांद्रा में बीते एक साल से ट्यूटोरियल स्कूल चला रहा था। एटीएस ने कहा है कि रिजवान किसी विदेशी से सीधे संपर्क में नहीं था। लेकिन पैसों के लिए शेख के निर्देशों पर काम कर रहा था।

दिल्ली पुलिस ने 14 सितंबर को 6 आतंकियों को गिरफ्तार किया था। इनमें मुंबई का 47 साल का जान मोहम्मद शेख उर्फ समीर कालिया भी है। पेशे से ड्राइवर समीर को हमलों को अंजाम देने के लिए हथियार जुटाने और टारगेट की पहचान का काम दिया गया था। यह बात भी सामने आई थी कि 2001 में उसे यौन शोषण के एक मामले में गिरफ्तार किया था। वह सीधे दाऊद इब्राहिम के भाई अनीस इब्राहिम के संपर्क में था। उससे वाट्सऐप के जरिए बात करता था। उसे आतंकियों को आईडी और लॉजिस्टिक मुहैया कराने की जिम्मेदारी दी गई थी। गिरफ्तारी से पहले उसने अपने मोबाइल का सारा डिलीट कर दिया था। जाँच एजेंसी के अनुसार आईएसआई की इस साजिश के लिए फंडिंग अनीस ही कर रहा था।

अलग-अलग राज्यों से पकड़े गए इन आतंकियों के निशाने पर 6 राज्यों के 15 शहर थे। नवरात्रि और रामलीला के दौरान भीड़भाड़ में हमलों को अंजाम देने की इनकी प्लानिंग थी। कुछ नामचीन भी इनके निशाने पर थे। इनके पास से विस्फोटक भी मिले थे।

‘अमित शाह के मंत्रालय ने कहा- हिंदू धर्म को खतरा काल्पनिक’: कॉन्ग्रेस कार्यकर्ता को RTI एक्टिविस्ट बता TOI ने किया गुमराह

‘टाइम्स ऑफ इंडिया (TOI)’ ने सोमवार (20 सितंबर, 2021) को एक खबर चलाई, जिसका शीर्षक था – ‘RTI: हिन्दू धर्म को खतरा ‘काल्पनिक’ है – केंद्रीय गृह मंत्रालय’ ने कहा’। ये खबर लिखे जाने तक भी TOI का ये लेख उसकी वेबसाइट पर मौजूद है। इस खबर में लिखा है कि अमित शाह के प्रभार वाले केंद्रीय गृह मंत्रालय ने स्पष्ट कहा है कि हिन्दू धर्म को किसी प्रकार का खतरा मौजूद नहीं है।

इस खबर को मूल रूप से समाचार एजेंसी IANS ने तैयार किया था, लेकिन TOI सबसे प्रमुख मीडिया संस्थान था जिसने इसे प्रकाशित किया और आगे बढ़ाया। इसके अलावा ‘दैनिक जागरण‘ और कॉन्ग्रेस पार्टी के मुखपत्र ‘नेशनल हेराल्ड‘ ने भी इस खबर को चलाया। सोशल मीडिया पर कई लोगों ने इन ख़बरों का इस्तेमाल भाजपा पर राजनीतिक हमले के लिए किया और दावा किया कि हिन्दू कभी पीड़ित नहीं हो सकते।

हालाँकि, अगर इस खबर पर स्पष्ट रूप से नजर डालें तो पता चलता है कि ये खुद में ही एक प्रोपेगंडा है और इसमें जम कर भ्रम फैलाया गया है। असल में केंद्रीय गृह मंत्रालय ने महाराष्ट्र स्थित नागपुर के रहने वाले मोहनीश जबलपुरे द्वारा दायर की गई एक RTI का जवाब दिया था। न्यूज़ रिपोर्ट्स में उसने खुद को एक ‘RTI एक्टिविस्ट’ का तमगा दिया है। TOI की खबर में केंद्रीय गृह मंत्रालय के शब्दों की जगह मोहनीश द्वारा की गई उसकी व्याख्या को ही आधार बनाया गया है।

सबसे बड़ी बात तो ये है कि कहीं भी केंद्रीय गृह मंत्रालय ने अपनी इस प्रतिक्रिया में ‘काल्पनिक’ शब्द का इस्तेमाल किया ही नहीं है। तथाकथित RTI एक्टिविस्ट ने ऐसा दावा कर दिया और मीडिया ने बिना इसकी जाँच-पड़ताल के इसे प्रकाशित कर डाला। साथ ही इस चीज को हेडलाइन में भी घुसेड़ दिया गया। असल में केंद्रीय गृह मंत्रालय ने ये कहा था कि वो अलग से इस प्रकार का कोई डेटा नहीं रखता, जिससे पता चले कि किस धर्म/मजहब को कितना खतरा है।

यानी, मंत्रालय ऐसा कोई ट्रैक रिकॉर्ड नहीं रखता जिसमें अपराधों का वर्गीकरण इस प्रकार से हो जिससे पता चले कि कौन से धर्म/मजहब को कितना खतरा है। बस यही कारण है कि केंद्रीय गृह मंत्रालय ने कहा कि वो इस बारे में जानकारी देने में सक्षम नहीं है। इसे इस रूप में प्रचारित किया गया कि हिन्दू धर्म को कोई खतरा नहीं ‘काल्पनिक’ है। अर्थात, सरकार ने इस प्रकार से सूचनाओं का वगीकरण नहीं किया है।

इसका सीधा मतलब है कि अगर कोई व्यक्ति सरकार से पूछे कि इस्लाम, ईसाई या यहूदी मजहब को कितना खतरा है, तो उन सबका जवाब भी यही मिलेगा। या फिर कोई पूछे कि लिबरल मूल्यों को कितना खतरा है, फिर भी यही जवाब मिलेगा। ये सब राजनीतिक बहस में प्रयोग की जाने वाली चीजें हैं, प्रशासनिक रिकॉर्ड्स में नहीं। मीडिया ने ‘सबूत के आभाव’ को ‘अभाव का सबूत’ मान कर खबर चला दी।

अगर गृह मंत्रालय के पास कोई रिकॉर्ड नहीं है तो इसका ये अर्थ थोड़े है कि हिन्दुओं के खिलाफ अपराध नहीं होते, हिन्दू धर्म के खिलाफ घृणा नहीं फैलाई जाती और हिन्दू धर्म व हिन्दुओं को कोई खतरा है ही नहीं। इसीलिए, केंद्रीय गृह मंत्रालय के हवाले से ये लिखना कि ‘हिन्दू धर्म को खतरा काल्पनिक है’ अपने-आप में एक काल्पनिक खबर है। और मोहनीश जबलपुरे कोई निष्पक्ष व्यक्ति नहीं, बल्कि कॉन्ग्रेस पार्टी का कर्यकर्ता है।

उसके ट्विटर बायो में ही लिखा है कि वो ‘कॉन्ग्रेस का व्हिसलब्लोअर’ है। राहुल गाँधी और दिग्विजय सिंह जैसे कॉन्ग्रेसी नेताओं की तारीफ़ से उसका सोशल मीडिया हैंडल भरा पड़ा है। महाराष्ट्र के कॉन्ग्रेस कार्यकर्ताओं द्वारा उसे पार्टी का वफादार बताया जाता है, ये सब वो खुद शेयर करता है। उसके ट्वीट्स भाजपा और RSS के खिलाफ होते हैं। स्पष्ट है कि राजनीतिक लाभ के लिए उसने मीडिया का गलत इस्तेमाल किया और मीडिया ने भी उसके प्रोपेगंडा को पूरा स्थान दिया।

NDTV से रवीश कुमार का इस्तीफा, जहाँ जा रहे… वहाँ चलेगा फॉर्च्यून कड़ुआ तेल का विज्ञापन

NDTV से 2 खबर आ रही है।
पहले छोटी खबर:
NDTV बिकने को तैयार है। कीमत मात्र 1600 करोड़ रुपए लगाई गई है। घाटे वाली कंपनी को और मिलेगा भी कितना?
अब बड़ी खबर:
रवीश कुमार NDTV से इस्तीफा दे चुके हैं। सोर्स बता रहे हैं कि देने वाले हैं। मैं मीडिया में हूँ, मुझे सोर्स से भी ज्यादा भीतर तक की खबर है।

वामपंथी लोग इसे सामान्य खबर मान कर दिल बहला रहे हैं। कई लोग “कोई और आएगा, झंडा बुलंद करेगा” जैसे क्रांति गीत गा रहे हैं। रवीश कुमार NDTV से इस्तीफा दे चुके हैं और उनके लिए ऐसी बात? क्योंकि हमेशा की तरह वामपंथी फिर से गलत हैं।

रवीश कुमार हिंदी मीडिया के एकमात्र पत्रकार हैं, इसमें कोई शक नहीं। उनसे ‘तेरा-मेरा रिश्ता क्या’ भले ही खराब है लेकिन अपने भाई पर लगे बलात्कार आरोप के समय जैसी ग्राउंड रिपोर्टिंग उन्होंने की, उसका कर्ज शायद ही हिंदुस्तानी मीडिया कभी चुका पाए।

आप लोगों को बस याद दिलाना चाहता हूँ। याद रवीश के त्याग की। वो रवीश जिसे देखने के लिए लड़के-लड़कियाँ-बूढ़े-जवान सब टकटकी लगाए रहते हैं, वो रवीश स्क्रीन काली कर बैठे थे… ठीक उसी दिन, जिस दिन उनके भाई पर रेप का आरोप लगा। रवीश से जलने वाली मीडिया ने आपसे यह बात छिपाई। आज जान लीजिए इस रहस्य को।

अभी न जाओ छोड़ कर कि दिल अभी भरा नहीं

2015 में रवीश कुमार ने यह गाना गाया था। रवीश ने तब प्यार से इस्तीफा को इस्तीफ़ू बुलाते हुए गाना गाया था… “अभी न जाओ छोड़ कर कि दिल अभी भरा नहीं।” 2015 की चीज को अभी क्यों याद करवा रहा हूँ? कारण है। दुख, तकलीफ, दर्द… वो सब जो रवीश ने NDTV में रहते हुए झेला। कैसे?

“तुम्हें कभी न लिख पाने वाला एक पत्रकार” – इस कारण की बात कर रहा था मैं। इस्तीफ़ू पर पत्र लिख कर रवीश ने निशाना किसी और पर साधा था लेकिन हस्ताक्षर करते वक्त ‘मन की बात’ लिख ही डाली थी। ध्यान से पढ़िए, इसमें दर्द है, अफसोस है।

NDTV से बड़ी खबर Zee News से

पढ़ने से पहले बता दे रहा हूँ कि यह सोर्स वाली खबर है। इसमें मुझे भीतर तक की खबर नहीं है। लेकिन सोर्स है बहुत दमदार। रवीश कुमार और सुधीर चौधरी दोनों को दाएँ-बाएँ लेकर चलता है – शिवसेना की तरह – कॉन्ग्रेस हो या भाजपा – कुर्सी पकड़ कर चलता है।

NDTV और अडानी के बीच डील की खबर रवीश को लग गई थी। बड़े पत्रकार हैं, लगनी भी चाहिए। लेकिन पत्रकारिता पर दाग न लगे, इसलिए रवीश ने इस्तीफ़ू दे दिया। क्यों?

क्योंकि रामदेव के विज्ञापन को NDTV पर रवीश झेल जाते थे, अडानी को कैसे झेलते… इसका रास्ता नहीं दिखा। यह भी गवारा नहीं कि हर दिन स्क्रीन काली ही कर दी जाए। क्योंकि TV नहीं देखने के लिए रवीश हमेशा बोलते रहे थे, रहे हैं… NDTV नहीं देखने पर आज तक नहीं बोले हैं… हेहेहे!

इसलिए इस्तीफ़ू दे दिया। लेकिन खबर इस्तीफ़ू के पहले की है। दमदार सोर्स ने बताया कि इस्तीफ़ू से पहले वो Zee News के ऑफिस आकर सुधीर चौधरी से मिले और प्राइम टाइम बुक कर लिए। बस एक शर्त माननी पड़ी। उनके शो में Adani Wilmar के फॉर्च्यून कड़ुआ तेल का विज्ञापन साथ-साथ चलता रहेगा… हेहेहे!

8 पन्नों का सुसाइड नोट, शिष्य आनंद गिरी समेत 3 हिरासत में: नरेंद्र गिरी की संदिग्ध मौत के पीछे भू-माफिया? पहुँचेंगे CM योगी

‘अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद (ABAP)’ के अध्यक्ष महंत नरेंद्र गिरी का शव सोमवार (20 सितंबर, 2021) की शाम को संदिग्ध अवस्था में बरामद हुआ। कहा जा रहा है कि उन्होंने आत्महत्या कर ली। उत्तर प्रदेश के प्रयागराज स्थित बाघंबरी मठ में उनका शव मिला। वहाँ से 8 पन्नों का एक सुसाइड नोट भी पुलिस ने बरामद किया है। इसमें उन्होंने अपने ही एक शिष्य आनंद गिरी को अपनी आत्महत्या के लिए जिम्मेदार ठहराया है।

उत्तराखंड पुलिस ने आत्महत्या के लिए उकसाने का मामला दर्ज करते हुए आनंद गिरी को हिरासत में ले लिया है। वहीं आनंद गिरी ने खुद को निर्दोष बताते हुए कहा है कि आश्रम से करोड़ों रुपयों की धोखाधड़ी करने वाले कुछ लोगों का इसमें हाथ है, जो उन्हें फँसाना चाहते हैं। IGP केपी सिंह ने बताया कि महंत का शव एक सीलिंग फैन से लटकता मिला था। सुसाइड नोट में उन्होंने खुद को मानसिक रूप से विक्षुब्ध बताया है।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से लेकर केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह और भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा तक, देश के कई बड़े नेताओं ने उनके निधन पर दुःख जताया है। बाबा रामदेव ने उन्हें कभी न हार मानने वाला वीर और पराक्रमी योद्धा बताते हुए मामले की जाँच की माँग की। AAP और सपा जैसी पार्टियाँ भी जाँच की माँग कर रही है। ‘अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद’ देश में साधुओं की सबसे बड़ी संस्था है।

उत्तर प्रदेश के उप-मुख्यमंत्री दिनेश शर्मा ने इस मामले में निष्पक्ष जाँच का आश्वासन दिया है। नरेंद्र गिरी ने कुछ ही दिनों पहले इलाहाबाद उच्च-न्यायालय के उस आदेश का समर्थन किया था, जिसमें गाय को राष्ट्रीय पशु घोषित करने का सुझाव दिया गया था। उन्होंने केंद्र की राजग सरकार से इस सम्बन्ध में कानून बनाने की अपील की थी। उन्होंने कहा था कि गौसेवा हमारी जिम्मेमदारी है, लेकिन गायों की आज जो अवस्था है उसके लिए हम भी जिम्मेदार हैं क्योंकि वो जब तक दूध देती है, तभी तक हम उसकी सेवा करते हैं।

उधर नरेंद्र गिरी के शिष्य निर्भय द्विवेदी ने दावा किया है कि मौत से पहले महंत ने एक वीडियो भी बनाया था। बताया जा रहा है कि ये वीडियो पुलिस के पास है। वो बड़े-बड़े अक्षरों में लिखते थे। शिष्य का कहना है कि वीडियो में वो सभी बातें हैं, जो उन्होंने सुसाइड नोट में लिखी। उनकी भाषा टूटी-फूटी थी, लेकिन वो लिख लेते थे। आनंद गिरी ने भू-माफियाओं पर साजिश का आरोप लगाते हुए कहा है कि इसमें कई बड़े अधिकारी भी शामिल हैं और ये एक बड़ी साजिश का हिस्सा है।

8 पन्नों का सुसाइड नोट मिलने से पुलिस भी मान रही है कि वो लंबे समय से परेशान चल रहे थे। महंत नरेंद्र गिरी ने खुद को पुराने रिश्तों से परेशान बताते हुए लिखा था कि उन्होंने शान से अपना जीवन जिया है और मृत्यु भी शान से होगी। किस शिष्य को उनकी मृत्यु के बाद क्या मिलना चाहिए, ये सब भी लिखा है। वो दोपहर का भोजन करने के बाद कमरे में गए और काफी देर तक नहीं निकले। दरवाजा तोड़ा गया तो नजारा देख कर शिष्य सन्न रह गए।

कमरे के दरवाजे चारों तरफ से बंद थे। पोस्टमॉर्टम और फॉरेंसिक रिपोर्ट के बाद पुलिस अपना बयान देगी। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने DGP को अपने आवास बुला कर इस मामले पर चर्चा की है। प्रयागराज पुलिस ने प्रसिद्ध लेटे हनुमान मंदिर के पुजारी और उनके बेटे को भी हिरासत में लिया है। जार्ज टाउन थाने में इस मामले की FIR दर्ज हुई है। यूपी पुलिस के 10 अधिकारियों की टीम हरिद्वार भी पहुँची है, जहाँ आनंद गिरी से पूछताछ हो रही है।

क्राइम सीन के साथ छेड़छाड़ की बातें भी कही जा रही है। आज सीएम योगी खुद घटनास्थल का दौरा करेंगे। देश भर के कई संत प्रयागराज पहुँच रहे हैं, जिसके बाद सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी गई और और ख़ुफ़िया एजेंसियों को काम पर लगा दिया गया है। प्रयागराज सांसद रीता बहुगुणा जोशी का कहना है कि आत्मबल के मामले में इतने मजबूत संत की आत्महत्या पर उन्हें यकीन नहीं हो रहा।

महंत नरेंद्र गिरि के कथित सुसाइड से पहले 6 से 10 घंटे के बीच जिन जिन लोगों से बात हुई है, उन सभी के नंबर निकाल कर पुलिस उनसे पूछताछ करेगी। इलाहाबाद हाईकोर्ट के अधिवक्ता सुनील चौधरी ने पत्र याचिका दाखिल कर CBI जाँच की माँग की है। नरेंद्र गिरी ‘श्री निरंजनी अखाड़ा’ के महंत थे। दोपहर बाद स्वरूप रानी अस्पताल में उनका पोस्टमॉर्टम होगा। उनके पार्थिव शरीर को अंतिम दर्शन के लिए भी रखा जाएगा।