Tuesday, July 23, 2024
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पलायन के लिए बदनाम पहाड़ों में जाकर बस रहे मुस्लिम: 10 साल में 45 फीसदी बढ़े, देहरादून में भी डरा रहा डेमोग्राफी चेंज

यह बात भी सामने आ चुकी है कि पश्चिम बंगाल, बिहार, उत्तर प्रदेश और हरियाणा होते हुए पाकिस्तान से बांग्लादेश को जोड़ने वाली एक मुस्लिम पट्टी तैयार करने की साजिश पर भी काम चल रहा है।

उत्तराखंड की पहाड़ों से एक तरफ रोजगार और शिक्षा के लिए लगातार पलायन हो रहा है। दूसरी ओर इन्हीं जगहों पर मैदानी इलाकों से जाकर मुस्लिम बस रहे हैं। इसके कारण राज्य में कई जगहों पर डेमोग्राफी में बड़ा बदलाव आया है और अब इसे भी पलायन की एक वजह माना जा रहा है।

दैनिक जागरण की एक रिपोर्ट के अनुसार राजधानी देहरादून और उससे सटे इलाकों में भी आबादी में बड़ा बदलाव आया है। तीन दर्जन से अधिक ऐसे इलाके हैं जहाँ करीब दो दशक के भीतर ही मुस्लिम आबादी ढाई गुणा तक बढ़ गई है। 2001-2011 के बीच इन इलाकों में समुदाय विशेष की आबादी में 45 फीसदी तक का इजाफा देखने को मिला है। जनगणना के नए आँकड़ें सामने आने के बाद यह तस्वीर और साफ होगी, क्योंकि पिछले 10 सालों में इस ट्रेंड ने और जोर पकड़ा है।

रिपोर्ट के अनुसार डेमोग्राफी में इस बदलाव को लेकर प्रशासन भी सतर्क हो गया है। उन इलाकों की निगरानी शुरू की गई है जहाँ पिछले कुछ सालों में जमीन की खरीद-फरोख्त में तेजी देखी गई है।

उत्तराखंड के वे इलाके जहॉं आबादी के अनुपात में आया बड़ा बदलाव (साभार: दैनिक जागरण)

आबादी के अनुपात में यह बदलाव केवल देहरादून से सटे इलाकों तक ही सीमित नहीं है। नेपाल से लगे जिलों में 2.5 गुना तक मुस्लिम आबादी में वृद्धि देखने को मिली है। बताया जाता है कि इन इलाकों में 2 साल के भीतर ही 400 मदरसे और मस्जिद बने हैं। कुमाऊँ के तीन क्षेत्र ऊधमसिंह नगर, चम्पावत और पिथौरगढ़ इस लिहाज से बेहद संवेदनशील हो चुके हैं।

कुमाऊँ मंडल के मुख्यालय नैनीताल में डेमोग्राफी बदलाव को लेकर खुफिया अलटे के बाद जाँच कमिटी गठित की गई है। शहर के विभिन्न क्षेत्रों में मुस्लिमों के बढ़ते दखल को लेकर एजेंसियों ने अलर्ट किया था। उच्च न्यायालय के अधिवक्ता नितिन कार्की ने इसको लेकर जिला प्रशासन के माध्यम से मुख्यमंत्री को ज्ञापन भी सौंपा था।

एजेंसियों का मानना है कि नैनीताल में घोड़ा, टैक्सी, नौका संचालन, टूरिस्ट गाइडिंग, होटलों इत्यादि को लीज में लेने में मुस्लिम समुदाय का दखल बढ़ा है। इनमें से अधिकतर खास मपुर, दडिय़ाल, स्वार, मुरादाबाद, बिजनौर और सहारनपुर के रहने वाले हैं। इतना ही नहीं कई संवेदनशील और प्रतिबंधित क्षेत्रों में पहले कच्चा मकान और फिर रातोंरात पक्का निर्माण करने की भी बातें सामने आई है।

इस ओर ध्यान खींचते हुए पिछले दिनों उत्तराखंड कृषि उत्पादन विपणन बोर्ड के अध्यक्ष रहे रह चुके  गजराज सिंह बिष्ट ने फेसबुक पर अपना वीडियो शेयर किया था। इसमें वह लोगों को संबोधित करते हुए कह रहे थे कि ये मुस्लिम शुरुआत में आपके पैर पकड़ने आएँगे। फिर आपसे हाथ जोड़ेगे और विनती करेंगे, लेकिन जब यही 1 से 10 हो जाते हैं तो आप इनकी गली में घुस भी नहीं सकते हैं।

हालाँकि उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी पहले ही साफ कर चुके हैं कि इस संबंध में जाँच किसी समुदाय को निशाना बना कर नहीं की जा रही है। उन्होंने कहा था, “काफी विचार-विमर्श करने के बाद ही सरकार ने यह कदम उठाया है। पलायन और जनसंख्या असंतुलन चिंता का विषय है।”

उल्लेखनीय है कि यह बात भी सामने आ चुकी है कि पश्चिम बंगाल, बिहार, उत्तर प्रदेश और हरियाणा होते हुए पाकिस्तान से बांग्लादेश को जोड़ने वाली एक मुस्लिम पट्टी तैयार करने की साजिश पर भी काम चल रहा है। कथित तौर पर रोहिंग्या और बांग्लादे​शी घुसपैठियों को बड़े पैमान पर इस पट्टी में आने वाले इलाकों में बसाया जा रहा है।

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ऑपइंडिया स्टाफ़
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कार्यालय संवाददाता, ऑपइंडिया

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