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उधर कैप्टन बेघर, इधर एंज्वॉय कर रहे राहुल-प्रियंका: कहानी उस घर की जिसकी नींव सरकारी ‘दया’ पर टिकी

पंजाब को सोमवार (20 सितंबर 2021) को चरणजीत सिंह चन्नी के रूप में नया मुख्यमंत्री मिल गया। कॉन्ग्रेस के शीर्ष परिवार ने चन्नी की ताजपोशी उस कैप्टन अमरिंदर सिंह को हटाकर की है, जिनकी गिनती कभी गाँधी परिवार के वफादारों में होती थी। कैप्टन की छुट्टी करने के बाद वाड्रा-गाँधी परिवार के छुट्टी मनाने के लिए शिमला में जुटने की खबर है।

टाइम्स आफ इंडिया की रिपोर्ट के अनुसार चन्नी के शपथ ग्रहण से फ्री होते ही राहुल गाँधी शिमला के बाहरी इलाके में बने अपनी बहन प्रियंका गाँधी वाड्रा की उस कोठी पर पहुँचे जो शुरुआत से ही विवादों में रहा है। प्रियंका और उनकी माँ कॉन्ग्रेस की अंतरिम अध्‍यक्ष सोनिया गाँधी पहले ही यहाँ पहुँच चुकीं थी।

प्रियंका का यह घर शिमला से करीब 15 किलोमीटर दूर छराबड़ा में है। 2020 में जब मुंबई में अभिनेत्री कंगना रनौत की प्रॉपर्टी पर कार्रवाई की गई थी तो नेटिजन्स ने प्रियंका के इस अवैध बंगले को तोड़ने की भी माँग की थी। इस घर को लेकर प्रियंका को हाई कोर्ट तक से नोटिस मिल चुका है।

असल में यह घर वीवीआईपी इलाके में बनाया गया है जो राष्ट्रपति के ग्रीष्मकालीन आवास ‘द रिट्रीट’ से सटा है। हिमाचल प्रदेश किराएदारी और भूमि सुधार अधिनियम की धारा 118 का हवाला देकर इस संपत्ति पर अक्सर सवाल उठते रहते हैं। इस धारा के अंतर्गत प्रावधान है कोई भी बाहरी प्रदेश में जमीन नहीं ले सकता है। यदि कोई इच्छुक भी हो, तो उसे भूअधिनियम की धारा 118 के तहत अनुमति लेनी होती है। इसकी परमिशन राज्य सरकार कैबिनेट में देती है। हालाँकि, कहा जाता है कि प्रियंका ने इस प्रक्रिया का पालन किया है। फिर भी कार्यकर्ताओं और याचिकाकर्ताओं की माँग ये है कि इस जमीन से जुड़े दस्तावेज ऑन रिकॉर्ड लेकर आए जाएँ।

बताया जाता है कि हिमाचल कॉन्ग्रेस के नेता केहर सिंह खाची के नाम पर इस जमीन की पावर ऑफ अटॉर्नी है। रिपोर्ट के अनुसार इस घर के लिए जमीन की खरीद 2007, 2011 और 2013 में की गई थी। कॉन्ग्रेस की वीरभद्र सिंह सरकार ने 2007 में सबसे पहले नियमों में ढील देते हुए प्रियंका को जमीन खरीदने की इजाजत दी थी। बाद में अन्य सरकारों से भी इस तरह की विशेष अनुमति मिलने की बात कही जाती है। इसके लिए राष्ट्रपति सचिवालय से भी प्रियंका को आसानी से एनओसी प्राप्त हुआ था, जबकि उससे पहले इस जमीन के मालिकों ने इसे बेचने की कोशिश की थी तो उन्हें एनओसी नहीं मिल सका था।

इस जमीन पर घर का निर्माण 2008 में शुरू हुआ। करीब 10 साल में यह तैयार हुआ था और 2019 में प्रियंका ने गृह प्रवेश किया था। उससे पहले एक बार निर्माण इसलिए तोड़ दिया गया था, क्योंकि प्रियंका को डिजाइन पसंद नहीं आया था।

‘Pak आकर खेलना चाहिए इंग्लैंड को’ – वसीम जाफर ने बोली अफरीदी के ‘एहसान’ वाली भाषा, आपत्ति पर ट्विटर यूजर ब्लॉक

अब जब ‘इंग्लैंड क्रिकेट बोर्ड (ECB)’ ने अपनी महिला व पुरुष टीमों का पाकिस्तान दौरा रद्द कर दिया है, भारत के पूर्व क्रिकेटर वसीम जाफर नाराज़ हो गए हैं। वसीम जाफर ने भी पाकिस्तान के पूर्व कप्तान शाहिद अफरीदी की भाषा बोलते हुए इंग्लैंड को पाकिस्तान का ‘एहसान’ दिलाया है। हालाँकि, कई लोगों ने वसीम जाफर को इस पर घेरा भी कि वो पाकिस्तान के लिए अपने दिल में सॉफ्ट कॉर्नर रखते हैं।

वसीम जाफर ने सोशल मीडिया के माध्यम से लिखा, “पाकिस्तान क्रिकेट बोर्ड (PCB) के पास कई कारण हैं कि वो ECB से निराश हो। पिछले साल जब कोरोना की वैक्सीन भी नहीं आई थी, तब पाकिस्तान और वेस्टइंडीज ने महामारी के दौरान भी इंग्लैंड का दौरा किया था। ECB इसके बदले कम से कम कुछ कर सकता था तो ये कि वो अपना पाकिस्तान दौरा नहीं रद्द करता। क्रिकेट रद्द होता है तो इसमें किसी की जीत नहीं होती है।”

याद दिला दें कि ‘इंग्लैंड क्रिकेट बोर्ड (ECB)’ ने घोषणा की है कि उसने अपनी पुरुष व महिला टीमों का अक्टूबर में होने वाला पाकिस्तान दौरा रद्द कर दिया है। ECB ने कहा है कि ताज़ा परिस्थितियों में पाकिस्तान का दौरा करना T-20 विश्व कप की तैयारियों की दिशा में ठीक नहीं होगा। साथ ही बोर्ड ने ये भी कहा कि उसमें बेहतर प्रदर्शन करना उसके लिए सबसे बड़ी प्राथमिकता है। इसके साथ ही पाकिस्तान को बड़ा झटका लगा है।

पाकिस्तानी क्रिकेट टीम के पूर्व कप्तान शाहिद अफरीदी ने ‘इंग्लैंड क्रिकेट बोर्ड (ECB)’ से अपील की थी कि वो अपना पाकिस्तान दौरा रद्द न करे। न्यूजीलैंड के वापस जाने से पाकिस्तान के क्रिकेट प्रेमी पहले से ही सदमे में थे। शाहिद अफरीदी ने कहा था कि अब समय आ गया है, जब ECB अपने कार्यों के जरिए ‘पाकिस्तानी क्रिकेट बोर्ड (PCB)’ के प्रति सम्मान दिखाए, क्योंकि अब सिर्फ शब्दों से काम नहीं चलने वाला है।

एक ट्विटर यूजर ने वसीम जाफर को जवाब देते हुए लिखा कि आप कभी किसी पाकिस्तानी को आतंकी हमलों की निंदा करते हुए नहीं देखेंगे, लेकिन भारत वालों से लिखवा लो – ‘क्रिकेट असली विजेता है, कला की कोई सीमा नहीं होती और संगीत देशों को जोड़ता है…’। हालाँकि, इसके बाद वसीम जाफर ने ‘बीइंग ह्यूमर’ नाम के इस ट्विटर हैंडल को ब्लॉक कर दिया, जिसके बाद उसने लिखा, “इसकी ही उम्मीद थी। पाकिस्तानियों से ही गले मिल ले तू भाई।”

एक ट्विटर यूजर ने वसीम जाफर को याद दिलाया कि यही पाकिस्तानी आतंकी आपके गृह नगर (मुंबई) को दहलाते हैं और वहाँ के अधिकतर क्रिकेटर खुल कर ‘गजवा-ए-हिन्द’ का समर्थन करते हैं। एक ट्विटर यूजर ने उन्हें ‘ग़दर’ में सनी देओल का डायलॉग याद दिलाया, “मैडम जी, मैं आपको लाहौर छोड़ आऊँ?” लोगों ने पूछा कि जब जीवन पर ही खतरा हो, तब बाकी चीजें मायने रखती हैं क्या? हालाँकि, कई पाकिस्तानियों ने उन्हें धन्यावद भी दिया।

‘BJP वालों ने साहेब से मिलने की इजाजत नहीं दी’: जेल में बंद माफिया अतीक अहमद से मुलाकात न होने पर भड़के ओवैसी

एआईएमआईएम (AIMIM) प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी गैंगस्टर अतीक अहमद से मिलने की इजाजत नहीं दिए जाने पर बेहद नाराज हैं। अतीक अहमद इस समय गुजरात के अहमदाबाद में स्थित साबरमती जेल में सजा काट रहा है। AIMIM ने गुजरात में अगले साल होने वाले विधानसभा चुनावों में लड़ने का फैसला किया है। इसके मद्देनजर ओवैसी अहमदाबाद की एक दिवसीय यात्रा पर है। ओवैसी ने इस दौरान साबरमती सेंट्रल जेल में बंद अतीक अहमद से मिलने की अनुमति माँगी थी।

अहमदाबाद केंद्रीय कारागार के अधीक्षक रोहन आनंद ने औवेसी को अतीक अहमद से मिलने से इनकार करते हुए कहा, ”आपको सूचित किया जाता है कि जेल नियमों के अनुसार यहाँ बंद व्यक्ति से केवल परिजन या वकीलों को ही मिलने की अनुमति है। जेल के नियमों और कोरोना महामारी के कारण अन्य लोगों को मिलने की अनुमति नहीं है।”

खूँखार गैंगस्टर से मिलने की अनुमति नहीं दिए जाने पर नाराजगी व्यक्त करते हुए असदुद्दीन ओवैसी ने भाजपा सरकार पर निशाना साधा है। ओवैसी ने कहा, “उत्तर प्रदेश के लोग देख रहे हैं कि मेरे साथ कैसा बर्ताव किया जा रहा है। हमें भाजपा सरकार ने अतीक साहेब से मिलने की इजाजत नहीं दी गई।”

यह पूछे जाने पर कि उन्होंने हत्या और जबरन वसूली सहित कई आपराधिक मामलों के आरोपित गैंगस्टर अतीक अहमद को अपनी पार्टी में क्यों शामिल किया। इस पर असदुद्दीन ओवैसी अपने फैसले का बचाव करते हुए कहते हैं कि अहमद को अभी तक दोषी नहीं ठहराया गया है। अदालत को पहले निर्णय लेने दें। एआईएमआईएम प्रमुख ने एक बार फिर विवादित बयान दिया।

ओवैसी ने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान कहा कि अगर किसी व्यक्ति का नाम अतीक, मुख्तार या साहब है, तो उसे निर्दोष साबित होने तक दोषी माना जाता है, जबकि अन्य को दोषी साबित होने के बाद भी निर्दोष माना जाता है। ये दोहरे मापदंड हैं, जो दर्शाते हैं कि कैसे पाखंड का इस्तेमाल किया जा रहा है।

ओवैसी ने अतीक और उसकी पत्नी शाइस्ता को पार्टी में शामिल किया

इस महीने की शुरुआत में ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन (एआईएमआईएम) सुप्रीमो असदुद्दीन ओवैसी ने माफिया डॉन अतीक अहमद की अनुपस्थिति में उसे और उसकी पत्नी शाइस्ता परवीन को पार्टी में शामिल किया था। पाँच बार विधायक और एक बार सांसद रह चुके अहमद पर हत्या, अपहरण, अवैध खनन, रंगदारी, धमकी और धोखाधड़ी सहित 100 से अधिक आपराधिक मामले दर्ज हैं। साल 2019 में सुप्रीम कोर्ट ने उसे उत्तर प्रदेश से अहमदाबाद की जेल में ट्रांसफर करने का आदेश दिया था।

पुलिस अब तक उसकी 200 करोड़ रुपए से अधिक की संपत्तियों के खिलाफ कार्रवाई कर चुकी है। अतीक अहमद के खिलाफ ये कार्रवाई करने के लिए गैंगस्टर एक्ट का इस्तेमाल किया गया था। इलाहाबाद जिला सरकार (Allahabad district government) ने अतीक और उसके सहयोगियों द्वारा अवैध रूप से निर्मित भवनों को ध्वस्त करने के अलावा अतीक और उसके सहयोगियों की संपत्तियों को कुर्क किया है।

न्यूजीलैंड के बाद अब ECB ने पाकिस्तान को दिया झटका: इंग्लैंड ने रद्द किया Pak दौरा, कहा – ‘ताज़ा परिस्थितियाँ ठीक नहीं’

‘इंग्लैंड क्रिकेट बोर्ड (ECB)’ ने घोषणा की है कि उसने अपनी पुरुष व महिला टीमों का अक्टूबर में होने वाला पाकिस्तान दौरा रद्द कर दिया है। ECB ने कहा है कि ताज़ा परिस्थितियों में पाकिस्तान का दौरा करना T-20 विश्व कप की तैयारियों की दिशा में ठीक नहीं होगा। साथ ही बोर्ड ने ये भी कहा कि उसमें बेहतर प्रदर्शन करना उसके लिए सबसे बड़ी प्राथमिकता है। इसके साथ ही पाकिस्तान को बड़ा झटका लगा है।

बता दें कि पाकिस्तानी क्रिकेट टीम के पूर्व कप्तान शाहिद अफरीदी ने ‘इंग्लैंड क्रिकेट बोर्ड (ECB)’ से अपील की थी कि वो अपना पाकिस्तान दौरा रद्द न करे। न्यूजीलैंड के वापस जाने से पाकिस्तान के क्रिकेट प्रेमी पहले से ही सदमे में थे। शाहिद अफरीदी ने कहा था कि अब समय आ गया है, जब ECB अपने कार्यों के जरिए ‘पाकिस्तानी क्रिकेट बोर्ड (PCB)’ के प्रति सम्मान दिखाए, क्योंकि अब सिर्फ शब्दों से काम नहीं चलने वाला है।

बता दें कि न्यूजीलैंड का दौरान रद्द होने के बाद इंग्लैंड भी अपने पाकिस्तान दौरे की समीक्षा कर रहा है। कुछ पाकिस्तानी तो कह रहे हैं कि फौरन पाकिस्तान को फैसला लेना चाहिए कि वो कभी न्यूजीलैंड के साथ कोई मैच नहीं खेलेंगे। पत्रकार फरवा मुनीर समेत कई लोग इसके पीछे भारत और BCCI को जिम्मेदार ठहरा रहे हैं। पत्रकार फजल अब्बास कहते हैं, “न्यूजीलैंड क्रिकेट बीसीसीआई की कठपुतली है। क्रिकेट को उनका बहिष्कार करना चाहिए। न्यूजीलैंड शर्मनाक। शर्मनाक तुम्हारा बर्ताव। घरों में रहो। तुम मर्द नहीं हो।”

आज योगेश है, कल हरीश था: अलवर में 2 साल पहले भी हुई थी दलित की मॉब लिंचिंग, अंधे पिता ने कर ली थी आत्महत्या

आज जब राजस्थान के अलवर में योगेश जाटव नाम के दलित युवक की मॉब लिंचिंग की खबर सुर्ख़ियों में है, मुस्लिम भीड़ द्वारा 2 साल पहले हरीश जाटव की हत्या को भी याद कीजिए। ताज़ा घटना 15 सितंबर, 2021 की है। पिछली घटना 16 जुलाई, 2019 की। राज्य में तब भी अशोक गहलोत के नेतृत्व में कॉन्ग्रेस की ही सरकार थी। आइए, जानते हैं कि दलित हरीश जाटव के साथ क्या हुआ था।

जुलाई 2019: दलित हरीश जाटव की कर दी गई थी हत्या

राजस्थान के अलवर जिले में एक दलित युवक को इस कदर पीटा गया था कि दिल्ली में इलाज के दौरान उसकी मौत हो गई। युवक का कसूर केवल इतना था कि उसके बाइक से एक मुस्लिम महिला को टक्कर लग गई थी। उक्त युवक अलवर जिले के चौपांकी थाना इलाके में फसला गाँव से गुजर रहा था। इसी दौरान उसकी बाइक से हकीमन नाम की महिला को टक्कर लग गई। हादसे के बाद मौके पर मौजूद भीड़ ने हरीश की पिटाई शुरू कर दी।

इस घटना के लगभग एक महीने बाद बेटे की हत्या मामले में संवेदनहीनता दिखाने से परेशान दलित युवक के नेत्रहीन पिता ने भी ज़हर खाकर आत्महत्या कर ली। परिजनों ने बताया था कि रतिराम जाटव पुलिस से परेशान थे क्योंकि वो उसके बेटे हरीश जाटव की मौत की जाँच को दबाने की कोशिश कर रही थी। अपने अंतिम क्षणों में भी पुलिस पर आरोप लगाया कि वो उसके बेटे की हत्या के आरोपितों को बचाने की कोशिश कर रही है।

राजस्थान में मजहबी भीड़ की पिटाई के कारण जान गॅंवाने वाले युवक हरीश जाटव के नेत्रहीन पिता रत्तीराम के शव के साथ भिवाड़ी में लोगों ने सड़क पर उतरकर प्रदर्शन भी किया था। इस दौरान लोगों की पुलिस से झड़प हो गई थी। न्याय न मिलने के कारण परिवार ने आत्मदाह की चेतावनी दी थी। अलवर एसपी ने प्रेसवार्ता कर हरीश की मौत को एक एक्सीडेंट करार दिया था। भाजपा नेताओं ने पीड़ित परिजनों व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत से मिल कर न्याय की माँग की थी।

सितंबर 2021: अब दलित युवक योगेश जाटव की मॉब लिंचिंग

वहीं ताज़ा घटना की बात करें तो बड़ौदामेव के मीना का बास इलाके में बुधवार (15 सितम्बर, 2021) को भटपुरा निवासी योगेश जाटव बाइक से गाँव की तरफ जा रहे थे। रास्ते में एक गड्ढा था, ऐसे में दुर्घटना हो गई और उनकी बाइक एक महिला से टकरा गई। इसके बाद शुरू हुआ मुस्लिम भीड़ का आतंक। दलित युवक की इतनी पिटाई की गई कि वो कोमा में चला गया। 3 दिन इलाज चला, जिसके बाद जयपुर में शनिवार को योगेश की मौत हो गई

अगले ही दिन आक्रोशित ग्रामीणों ने बडौदामेव में अलवर-भरतपुर रोड पर दोपहर करीब 3 बजे से शाम 6 बजे तक शव रखकर विरोध प्रदर्शन किया। प्रशासन के साथ किसी तरह समझौता हुआ, जिसके बाद शव का अंतिम संस्कार करने को परिजन राजी हुए। आरोपितों को तुरंत गिरफ्तार कर के जेल भेजे जाने की माँग के साथ-साथ ग्रामीणों ने पीड़ित परिजनों को 50 लाख रुपए की सहायता देने के लिए सरकार से माँग की है।

इस घटना के अगले ही दिन परिजनों ने FIR दर्ज करवा दी थी, जिसमें 6 लोगों को आरोपित बनाया गया था। रसीद पुत्र नामालूम, साजेत पठान, मुबीना पत्नी नामालूम तथा अन्य चार लोगों के नाम FIR में शामिल थे। ग्रामीणों के आक्रोश के कारण अलवर-भरतपुर मार्ग घंटों जाम रहा। योगेश जाटव की उम्र मात्र 17 वर्ष ही बताई जा रही है। चार बहनों का वो इकलौता भाई था, ऐसे में परिवार का रो-रो कर बुरा हाल है।

अखाड़ा परिषद के अध्यक्ष महंत नरेंद्र गिरि की संदिग्ध हालत में मौत: पंखे से लटकता मिला शव, बरामद हुआ सुसाइड नोट

उत्तर प्रदेश के प्रयागराज में अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद के अध्यक्ष महंत नरेंद्र गिरि की संदिग्ध हालात में मौत हो गई है। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, महंत का शव बाघमबरी मठ में सोमवार (20 सितंबर 2021) को फाँसी के फंदे से लटकता मिला। हालाँकि, अभी तक यह हत्या है या आत्महत्या इसका खुलासा नहीं हो पाया है।

सूचना पाकर मौके पर पहुँचे आईजी केपी सिंह सहित तमाम आला अधिकारी मामले की जाँच में जुट गए हैं। पुलिस ने शव को अपने कब्जे में ले लिया है। महंत के निधन के बाद से साधु संतों में शोक की लहर है और पूरे इलाके में तनाव फैल गया है। महंत नरेंद्र गिरी के शिष्य आनंद गिरि ने कहा कि उनकी हत्या षडयंत्र के तहत की गई है। वहीं, साधु संतों की सबसे बड़ी संस्था अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद के अध्यक्ष की संदिग्ध मौत को लेकर सोशल मीडिया पर भी प्रतिक्रियाएँ आनी शुरू हो गई हैं।

पत्रकार नरेंद्र नाथ मिश्रा ने अपने ट्विटर हैंडल पर लिखा, ”नरेन्द्र गिरि के शिष्य आनंद गिरी ने कहा है कि उनकी मौत आत्महत्या नहीं हत्या है। टीवी रिपोर्ट के अनुसार नरेन्द्र गिरि का सुसाइड नोट बरामद किया गया है। इसमें उन्होंने अपने ही करीबियों पर मानसिक रूप से प्रताड़ित करने करने का आरोप लगाया है।”

यूपी विधानसभा अध्यक्ष हृदय नारायण दीक्षित ने महंत नरेंद्र गिरि के निधन पर शोक व्यक्त किया। वहीं, उनके समर्थकों का कहना है कि महंत नरेंद्र गिरी आत्महत्या नहीं कर सकते। इस मामले में सीबीआई जाँच की माँग भी की जा रही है।

बीते दिनों अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद के नाम से बने फर्जी अकाउंट से कई विवादित ट्विट किए गए थे। इसे लेकर नरेंद्र गिरी ने काफी आश्चर्य जताया था और उन्होंने दारागंज थाने में अज्ञात लोगों के खिलाफ मुकदमा दर्ज कराया था। इससे पहले निरंजनी अखाड़े से निष्कासित योग गुरु आनंद गिरि और अखाड़ा परिषद के अध्यक्ष महंत नरेंद्र गिरि के बीच मठ-मंदिरों की जमीनों को लेकर भी घमासान काफी सुर्खियों में रहा था। आनंद गिरि ने राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री, गृहमंत्री को पत्र भेजकर अखाड़े के विवाद की जानकारी दी थी।

गौरतलब है कि महंत नरेंद्र गिरी देश भर में अपने बयान से सुर्खियों में रहते थे। महंत ने कोरोना महामारी के चलते यूपी की योगी सरकार द्वारा कांवड़ यात्रा पर रोक लगाने के फैसले का स्वागत किया था। गिरि ने बकरीद पर मुस्लिम धर्मगुरुओं से अपील की थी कि कोरोना में वे मस्जिदों से ऐलान करें कि लोग अपने घरों में ही नमाज अदा करें। इसके अलावा उन्होंने मुनव्वर राना के बंगाल जाने वाले बयान पर उन्हें नसीहत दी थी। महंत नरेंद्र गिरि ने कहा था कि सूबे में योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में बीजेपी की सरकार है और बीजेपी की सरकार में पिछले साढ़े चार सालों में कोई दंगा भी नहीं हुआ है। योगी ही होंगे उत्तर प्रदेश के अगले सीएम, मुनव्वर राना बंगाल जा सकते हैं।

‘हिंदू सभ्यता का करते हैं सम्मान’: बदला गया ‘राम में रावण को देखने’ वाली फिल्म का नाम, हिंदुओं के विरोध का असर

रावण और ‘माता सीता’ के बीच प्रेम और ‘श्रीराम’ में रावण को दिखाने वाली फिल्म ‘रावण लीला’ को लेकर हुए विरोध के बाद के बाद फिल्ममेकर्स ने इस फिल्म का नाम बदला है। अब फिल्म का नाम केवल ‘भवई’ है जो सिनेमाघरों में 1 अक्टूबर 2021 को रिलीज होगी।

पेन इंडिया लिमिटेड ने इस फिल्म में दिखाए गए आपत्तिजनक कंटेंट के मद्देनजर अपना बयान जारी करते हुए बताया, “(विवादित) डायलॉग और टाइटल ‘रावण लीला’ फिल्म का पार्ट नहीं हैं और अपने दर्शकों की भावनाओं की कदर करते हुए इन्हें प्रोमो से भी हटा दिया गया है।”

फिल्म के बैन होने की माँग उठने के बाद सामने आए मेकर्स के बयान में लिखा है, “हमारे मन में हिंदू सभ्यता और रामायण को लेकर सम्मान है। फिल्म और उसका कोई भाग धार्मिक भावनाओं या मान्यताओं को ठेस नहीं पहुँचाता है।”

फिल्म निर्माताओं ने यह जानकारी भी दी है कि ‘भवई’ नाम से रिलीज होने जा रही यह फिल्म सेंसर बोर्ड ने ‘यू’ कैटेगरी में पास कर दी है। इसके साथ ही वह कहते हैं, “हमें विश्वास है कि यह हमारी फिल्म के बारे में सभी गलत बयानी, संदेह और गलतफहमियों को स्पष्ट करता है।”

गौरतलब है रावण लीला का ट्रेलर रिलीज होने के बाद से ही इस फिल्म पर हिंदू समुदाय के लोग आपत्ति जता रहे थे। लोगों का आरोप था कि फिल्म में रावण और माँ सीता के बीच प्रेम दिखाया जा रहा है। इसके अलावा श्रीराम की तुलना रावण से हो रही है। कुछ लोग इस फिल्म को पूरी तरह बैन करने की बात कर रहे थे। उन्हें ये ठीक नहीं लग रहा था कि ऐसी फिल्में पर्दे पर किसी कीमत पर आएँ।

‘मुस्लिमों का सबसे बड़ा दुश्मन’, शिव के भक्त: ‘आदिवराह’ के सामने अरबों ने भी टेक दिए थे घुटने, 50 साल तक किया राज

उत्तर प्रदेश के दादरी में बुधवार (22 सितंबर, 2021) को मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ सम्राट मिहिर भोज की प्रतिमा का अनावरण करने वाले हैं। उससे पहले इस बात को लेकर विवाद छिड़ा हुआ है कि वो गुर्जर थे या राजपूत? दोनों जातियों के संगठन आमने-सामने हैं, लेकिन यहाँ हम इस विवाद पर बात नहीं करेंगे। गुर्जर और राजपूत, दोनों उन्हें अपना मानते हैं। लेकिन, सम्राट मिहिर भोज एक शिवभक्त हिन्दू थे, जिन्होंने तुर्क-अरब के मुस्लिम आक्रान्ताओं से भारत को बचाया।

आज हम उन्हीं हिन्दू सम्राट के बारे में आपको बताने जा रहे हैं। हाल की बात करें तो जहाँ वीर गुर्जर महासभा ने सम्राट मिहिर भोज को अपने समुदाय का बताते हुए गर्व जताया है तो कुछ राजपूत संगठनों ने उन्हें गुर्जर समुदाय से जोड़े जाने को इतिहास के साथ छेड़छाड़ करार दिया। मध्य प्रदेश के सतना स्थित नागौद के किले में रहने वाले सम्राट मिहिर भोज के वंशजों के हवाले से उन्हें राजपूत बताया जा रहा है। वहीं गुर्जर साम्राज्य के विस्तार की बात करते हुए ये समाज उन्हें अपना बता रहा है।

इन घटनाओं के बीच सम्राट मिहिर भोज का योगदान कहीं छिप न जाए, इसके हमें ध्यान रखने की जरूरत है। हिन्दू धर्म व भारत देश के प्रति उनके प्रेम और कर्तव्यों को सम्मान देने की जरूरत है। आइए, हम सम्राट मिहिर भोज के संक्षिप्त परिचय से शुरू करते हैं, जिसके बाद हम उनके जीवन के विभिन्न पहलुओं को खँगालेंगे। 836 ईस्वी से 885 ईस्वी तक शासन करने वाले मिहिर भोज का शासनकाल 49 वर्षों का था।

इन 5 दशकों में भारतीय उप-महाद्वीप का एक बड़ा हिस्सा उनके मार्गदर्शन में काफी फला-फूला। उनका साम्राज्य मुल्तान से पश्चिम बंगाल में गुर्जरपुर तक और कश्मीर से कर्नाटक तक फैला हुआ था। ये वो समय था, जब अरब के इस्लामी कट्टरपंथियों ने साम्राज्य विस्तार शुरू कर दिया था और उनकी नजर सिंधु के पार भारतवर्ष पर थी। उनके पूर्वज नागभट्ट ने ‘गुर्जर देश’ पर विजय प्राप्त की थी, जो राजस्थान व गुजरात के इलाके हैं।

आज का जो अफगानिस्तान है, वहाँ तब ब्रह्मणशाही का शासन हुआ करता था। राजा दाहिर को हराने के बाद अरब-तुर्क मुस्लिम आक्रांताओं ने सोच कि भारत के लिए उनके दरवाजे खुल गए हैं, लेकिन सम्राट मिहिर भोज ने ऐसा नहीं होने दिया। उन्होंने अपनी सेना को मजबूत और विशाल बनाया, ताकि वो आक्रमणकारियों का मुकाबला कर सके। आज के राजस्थान, मध्यप्रदेश, उत्तर प्रदेश, पंजाब, हरियाणा, ओडिशा, गुजरात, हिमाचल – ये सभी उनके साम्राज्य का हिस्सा थे।

कन्नौज को उन्होंने अपनी राजधानी बनाया था और वहीं से शासन चलाया करते थे। कृषि और व्यापार को बढ़ावा देने के लिए कई नीतियाँ लाने वाले मिहिर भोज के राज में प्रजा खुशहाल थी। कन्नौज तो इतना समृद्ध शहर था कि वहाँ 7 किलों के अलावा 10 हजार की संख्या में मंदिर थे। धन-वैभव से सम्पन्न उनके राज्य में सोने-चाँदी के सिक्कों से व्यापार होता था। अपराधियों को उचित दंड दिया जाता था।

यहाँ तक कि उस दौर के अरब यात्री सुलेमान ने भी अपनी पुस्तक में उनका जिक्र किया है और तारीफ की है। सुलेमान ने लिखा है कि किस तरह सम्राट मिहिर भोज की सेना में बड़ी संख्या में ऊँट, हाथी और घोड़े शामिल थे। उसने ‘सिलसिला-उत-तारिका’ में लिखा है कि मिहिर भोज के राज में चोर-डाकुओं का भी नहीं रहता था। उनकी सीमाएँ दक्षिण में राष्ट्रकूट और बंगाल में पालवंश के अलावा मुल्तान में इस्लामी शासकों से सटी हुई थीं।

915 ईस्वी में भारत भ्रमण पर आये बगदाद के इतिहासकार अल मसूदी ने भी ‘मिराजुल-जहाब’ नामक पुस्तक में लिखा है कि मिहिर भोज की सेनाएँ काफी शक्तिशाली व पराक्रमी है। उसने लिखा है कि लाखों की संख्या में ये सेना चारों दिशाओं में फैली हुई है। 873 ईस्वी में जन्मे मिहिर भोज की गाथा स्कंद पुराण के ‘प्रभास खंड’ में भी वर्णित है। कश्मीर के राज्य कवि कल्हण ने भी अपनी पुस्तक ‘राज तरंगिणी’ में उनकी वीरता का जिक्र किया है।

काबुल के ललिया शाही राजा, कश्मीर का उत्पल वंशी राजा अवंतीवर्मन, नेपाल का राजा राघवदेव और आसाम के राजा – ये सभी मिहिर भोज के मित्र हुआ करते थे। उन्होंने अपने जीवनकाल में कई युद्ध लड़े। उत्तरी बंगाल को अपने साम्राज्य में मिलाया। अरब शासक इमरान बिन मूसा को धूल चटा कर सिंध को वापस भारतवर्ष का हिस्सा बनाया। काबुल से राँची और हिमालय से आंध्र तक उनकी सीमाएँ विस्तारित हो गई थीं।

उनके सेनापति कनकपाल परमार गुर्जर ने नेपाल की भी बाहरी आक्रमणों से रक्षा की। वहीं काबुल में हिन्दू राजाओं को उन्होंने संरक्षण दिया और इस्लामी आक्रांताओं से उनकी सुरक्षा की। उज्जैन में स्थापित महाकाल के अनन्य भक्त मिहिर भोज की सेना भगवान विष्णु के भी जयकारे लगाती थी। उन्होंने ‘आदिवाराह’ की पदवी भी धारण की, जो उस काल के सिक्कों से पता चलता है। 888 ईस्वी में 72 वर्ष की आयु में उनका निधन हुआ था।

सम्राट मिहिर भोज के काल के जो सिक्के मिले हैं, उसमें यज्ञ वेदी से लेकर रक्षक की आकृतियाँ भी बनी हुई हैं। विष्णु अवतार वराह और सूर्य चक्र की आकृतियाँ भी उनके सिक्कों पर उकेरी जाती थीं। महान सम्राट हर्षवर्धन के काल से ही कन्नौज उनकी राजधानी रही थी और इसीलिए ये एक महत्वपूर्ण नगर था। उनके निधन के बाद गुर्जर-प्रतिहार वंश का शासन प्रारंभ हुआ। इसी वंश के नगभट्ट (725-40 ईस्वी) के नेतृत्व में इस्लामी आक्रांताओं को भगाया गया था।

नगभट्ट के वंश में ही मिहिर भोज का जन्म हुआ और लगभग हार राज्य ने साम्राज्य का विस्तार किया। मिहिर भोज न सिर्फ एक बड़े योद्धा थे, बल्कि वो कला को संरक्षण देना भी भलीभाँति जानते थे। उनके बेटे महेन्द्रपाल ने भी पिता की तरह साम्राज्य की प्रतिष्ठा को बरकरार रखा, लेकिन उसके बाद ये राजवंश कमजोर होता चला गया। 1018 में महमूद गजनी ने कन्नौज में तबाही मचाई। हालाँकि, इसके बाद प्रतिहारों ने कन्नौज को वापस मिलाया, लेकिन तब तक वो काफी कमजोर हो चुके थे। 1090 ईस्वी के बाद वहाँ राठौड़ वंश का शासन था।

उनके प्रतिनिधि अलखाना ने काबुल के ब्रह्मणशाहियों को पूर्व संरक्षण दिया। अलखाना के सेनापति खटाणा के समर्थन से ही ललिया देव ने काबुल को स्वतंत्र कराया था। उन्होंने ही कश्मीर में उत्पलवंशी अवन्तीवर्मन को वहाँ का शासक बनाया, जब 850 ईस्वी आते-आते ललितादित्य मुक्तापीड़ का कर्कोट वंश 850 ईस्वी आते-आते पतन को प्राप्त हो गया था। जिस प्रकार विष्णु अवतार वराह ने पृथ्वी को स्वतंत्र कराया था, उसी तरह म्लेच्छों का विनाश कर मिहिर भोज ने देश को बचाए रखा।

सम्राट मिहिर भोज का विवाह सौराष्ट्र में ही हुआ था और भगवान सोमनाथ के प्रति उनकी बड़ी श्रद्धा थी। उन्होंने खुद अपने बेटे महेंद्र पाल के हाथ में शासन सौंप कर खुद वान्यप्रस्थ आश्रम अपनाया था। अरब यात्री सुलेमान ने तो उन्हें ‘भारत में मुस्लिमों का सबसे बड़ा दुश्मन’ तक करार दिया था। उनके कारण ही भारत में घुसने में मुस्लिम शासकों को 300 वर्ष और लग गए। प्रतिहार वंश ने सहस्रबाहु मंदिर, बटेश्वर मंदिर, कुचामल किला, मिहिर किला, पडावली मंदिर और गुर्जर बावड़ी के अलावा चौंसठ योगिनी मंदिर का भी निर्माण कराया

5 दशकों तक राज करने वाले मिहिर भोज के साम्रज्य के विस्तार को बस इससे समझ लीजिए कि उत्तर-पश्चिम में सतलज नदी से लेकर दक्षिण में नर्मदा तक उनका ही शासन था। वो विद्वान थे और विद्वानों का आदर करते थे। राज शेखर नाम के एक बड़े कवि उनके दरबार का हिस्सा थे। भारतीय इतिहास के महान राजाओं में से एक मिहिर भोज ने शांति से 50 वर्षों तक शांति से शासन चलाया और आक्रांताओं को दूर रखा।

‘काफिर…अपने से काम रख’: अफगानी महिलाओं के लिए जावेद अख्तर का ट्वीट, भड़के कट्टरपंथी

अफगानिस्तान के हालातों पर संगीतकार जावेद अख्तर के एक बयान ने उन्हें कट्टरपंथियों के निशाने पर ला दिया। जावेद ने लिखा था कि काबुल के मेयर ने जो कार्यरत महिलाओं को घरों में रहने को कहा है इसकी निंदा हर मुस्लिम समूह को करनी चाहिए। इसी ट्वीट के बाद एक विशेष समुदाय के लोग बिदक गए और उन्हें काफिर, नास्तिक आदि कहने लगे।

जावेद अख्तर ने ट्वीट किया था, “अलजज़ीरा ने रिपोर्ट किया है कि काबुल के मेयर ने सभी कामकाजी महिलाओं को घर पर रहने का आदेश दिया है मुझे उम्मीद है कि सभी महत्वपूर्ण मुस्लिम निकाय इसकी निंदा करेंगे क्योंकि यह उनके मजहब के नाम पर किया जा रहा है, वे सभी कहाँ हैं जो कल तक तीन तलाक के बचाव में चिल्ला रहे थे।”

इस ट्वीट को देख अली हाशमी ने लिखा, “तुझे क्या मतलब मजहब से। तू नास्तिक है उस पर ध्यान दे। और रही बात काबुल की तो कामकाजी महिलाओं पर थोड़े समय के लिए ही बैन लगा है और वो भी कुछ क्षेत्रों में। उन्हें पढ़ने दिया जा रहा है, दवाइयों का काम करने दिया जा रहा है। मैं तालिबान को समर्थन नहीं देता लेकिन बस आपकी गलतफहमी दूर करना चाहता हूँ।”

अहमद लिखते हैं, “मैंने कभी भी इस काफिर का कोई ट्वीट यूएस द्वारा की गई बमबारी पर नहीं देखा और अब ये ऐसी खबर पर बेचैन है जिसके लिए वे योजना बना रहे हैं और सही तरीका खोज रहे हैं।” आदिल खान कहता है, “तुम केवल अपने देश की महिलाओं की परेशानियों पर फोकस क्यों नहीं कर सकते। तुम्हें दूसरे देशों से क्या है? प्लीज ये तुम्हारा काम नहीं है।”

एक कट्टरपंथी ने लिखा, “बुढ़ापे में अक्सर लोग सठिया जाते हैं। काबुल और अफगानिस्तान से तीन तलाक का क्या लेना-देना। कल इसने भक्त समुदाय को न पसंद आने वाला कुछ कह दिया था। अब उन्हें खुश कर रहा है।”

बाबुल सुप्रियो ने बताया- दीदी ने गाने की दी इजाजत, लेकिन ट्विटर पर बिगड़ा सुर: डेढ़ महीने में जो कमाया उससे ज्यादा एक दिन में गँवाया

कुछ दिन पहले राजनीति छोड़ने की बात करने वाले पूर्व केंद्रीय मंत्री बाबुल सुप्रियो ने दो दिन पहले बीजेपी छोड़ी दी थी। उन्होंने ममता बनर्जी के नेतृत्व वाली पश्चिम बंगाल की सत्ताधारी पार्टी तृणमूल कॉन्ग्रेस (TMC) का दामन थामा था। अब उन्होंने ममता को पीएम मेटेरियल बताते हुए कहा है कि उन्हें बंगाल की मुख्यमंत्री ने सार्वजनिक जीवन के साथ-साथ गायन जारी रखने का प्रस्ताव दिया था। जिसके बाद वे इनकार नहीं कर पाए। इधर, ट्विटर पर पिछले डेढ़ महीने में उन्होंने जितने फॉलोअर जोड़े थे उससे कहीं ज्यादा एक दिन में गँवा दिए हैं।

बाबुल सुप्रियो ने सोमवार (20 सितंबर 2021) को कहा कि पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी 2024 में प्रधानमंत्री पद के शीर्ष दावेदारों में से हैं। वे चाहते हैं कि उनकी पार्टी की कप्तान ममता बनर्जी 2024 में प्रधानमंत्री बनें। ममता की तारीफ करते हुए उन्होंने कहा, “TMC ने मुझे महत्वपूर्ण भूमिका देते हुए गाने की अनुमति भी दी है। ममता बनर्जी ने एक शानदार अवसर प्रदान किया है, ताकि मैं पश्चिम बंगाल में अपना सार्वजनिक जीवन जारी रखते हुए गाना गा सकूँ।” उन्होंने कहा कि इसके लिए मेरी काफी आलोचना होने वाली है, ढेर सारे मीम्स बनने वाले हैं, लेकिन ये अवसर मेरे लिए चुनौती है।

बता दें कि मोदी सरकार में कैबिनेट मंत्री रह चुके सांसद बाबुल सुप्रियो शनिवार (सितंबर 18, 2021) को औपचारिक रूप से तृणमूल कॉन्ग्रेस (TMC) में शामिल हो गए थे। टीएमसी सांसद अभिषेक बनर्जी और डेरेक ओ ब्रायन की मौजूदगी में उन्होंने तृणमूल कॉन्ग्रेस की सदस्यता ग्रहण की थी। इसके बाद से उन्हें कड़ी आलोचनाओं का सामना करना पड़ रहा है, क्योंकि इससे पहले उन्होंने ट्विटर पर घोषणा की थी कि वह राजनीति से संन्यास ले रहे हैं।

दूसरी और उन्होंने बड़ी संख्या में ट्विटर फॉलोअर्स को एक दिन में ही खो दिया है। आसनसोल के सांसद को रविवार (19 सितंबर 2021) को 2145 लोगों ने अनफॉलो किया। यह क्रम सोमवार को भी जारी रहा। 4 अगस्त से 18 सितंबर के बीच बाबुल सुप्रियो के साथ 1464 नए फॉलोअर्स जुड़े थे। पर रविवार को उन्होंने 2145 फॉलोअर्स खोए। यह खबर लिखे जाने तक सोमवार को उन्हें 174 फॉलोअर्स छोड़कर जा चुके थे।

तीसरा कॉलम फॉलोअर्स के एक दिन में फॉलो करने और अनफॉलो किए जाने का संकेत देता है (सोर्स: Social Blade)

इस तरह बाबुल सुप्रियो के फॉलोअर्स की संख्या में 20 सितंबर को सबसे अधिक कमी देखने को मिली।

Source: Social Blade

13 सितंबर को फॉलोअर्स की संख्या 343,255 से घटकर 20 सितंबर को 341,078 हो गई है।