Home Blog Page 3392

मस्जिद में पढ़ने आए नाबालिग को बेड पर नंगा सुलाया फिर खुद उतार लिए कपड़े: आबिद के कुकर्म को मीडिया ने ‘धार्मिक स्थल’ कह छिपाया

राजस्थान के बीकानेर जिले के धोबी तलाई स्थित मस्जिद में एक नाबालिग के साथ दुष्कर्म का प्रयास हुआ। घटना 18 सितंबर 2021 की है। करतूत करने वाला मस्जिद में अजान देता है। उसकी पहचान मोहम्मद आबिद के तौर पर हुई है। पुलिस ने इस मामले में शिकायत मिलने के बाद मामले को दर्ज कर लिया है। अब पुलिस आगे आरोपित को गिरफ्तार कर कार्रवाई कर रही है।

कुछ स्थानीय साइट्स में यह साफ लिखा है कि मस्जिद में अजान देने वाले मुजीम जिसका नाम मोहम्मद आबिद है, उसने नाबालिग लड़के से पहले कपड़े उतरवाए फिर उसे बेड पर लिटाया। इसके बाद आबिद खुद बिन कपड़े हो गया और कुकर्म का प्रयास करने लगा। ये सब देख बच्चा डर गया और पेशाब के बहाने बोलकर वहाँ से भाग गया। घर आकर जब उसने सारी बात बताई तब परिवार ने इस केस को पुलिस में दर्ज करवाया।

हमारा बीकानेर साइट पर प्रकाशित जानकारी का स्क्रीनशॉट, जहाँ मस्जिद साफ लिखा है और मुजीम यानी मो आबिद का नाम भी।

कोटगेट थाना क्षेत्र के सीआई मनोज माचरा इस संबंध में कहते हैं कि एक व्यक्ति ने पुलिस में शिकायत दर्ज कराई है कि उसके दो बेटे मस्जिद पर पढ़ाई करने के लिए जाते हैं। वहाँ आबिद नाम के एक शख्स ने उसके दो बेटों में से एक को तो घर भेज दिया, लेकिन दूसरे बेटे के साथ कुकर्म करने का प्रयास किया। बच्चे ने घर जाकर अपने परिजनों को आरोपित की हर​कत के बारे में बताया, जिसके बाद उन्होंने उसके खिलाफ पुलिस थाने में मामला दर्ज कराया है। मनोज माचरा ने कहा कि पुलिस ने आरोपित के खिलाफ पॉक्सो एक्ट के तहत मामला दर्ज उसे राउंडअप कर लिया है।

अब अजीब बात ये है कि इस पूरी खबर में हर जगह अच्छे से ये बात स्पष्ट है कि ये घटना मस्जिद-मदरसे से जुड़ी है। लेकिन फिर भी कुछ मीडिया साइट और अखबार इसे धार्मिक स्थल कहकर अलग एंगल देने का प्रयास कर रहे हैं या ये कहें कि अपने पाठक को गुमराह करने की कोशिश कर रहे हैं। बच्चे धार्मिक स्थल में पढ़ने नहीं जाते हैं, ये हम सभी जानते हैं। मगर, फिर भी दैनिक भास्कर और राजस्थान पत्रिका ने इस संवेदनशील मुद्दे पर मदरसे के लिए धार्मिक स्थल का इस्तेमाल कर केवल लोगों को भ्रमित करने का काम किया है और कुछ नहीं।

राजस्थान पत्रिका का स्क्रीनशॉट

गौरतलब है कि जून 2021 में उत्तर-पूर्वी दिल्ली के हर्ष विहार में एक मस्जिद में बलात्कार की घटना सामने आई थी। मस्जिद में पानी लेने गई 12 साल की लड़की का मौलवी इलियास ने बलात्कार किया था। मंदिरों में एक थप्पड़ की घटना को भी उछालने वाले मीडिया ने उस दौरान मस्जिद में रेप के मामले को छिपाने का प्रयास किया था। उस समय ‘दैनिक जागरण’ ने भी अपनी हैडिंग में मस्जिद को ‘धार्मिक स्थल’ लिखा था। इतना ही नहीं, पूरे लेख में 4 बार मस्जिद की जगह ‘धार्मिक स्थल’ लिखा गया।

‘दैनिक जागरण’ ने मस्जिद को लिखा ‘धार्मिक स्थल’

सिर्फ ‘दैनिक जागरण’ ही नहीं, ‘अमर उजाला’ और ‘दैनिक भास्कर’ ने भी उस दौरान ऐसा ही कारनामा किया था। ‘दैनिक भास्कर’ ने लिखा था – ‘धार्मिक स्थल पर हुई वारदात।’ 

रूस के पर्म यूनिवर्सिटी में गोलीबारी, 8 की मौत: छात्र तिमूर ने ही दिया घटना को अंजाम, वीडियो में दूसरी मंजिल से कूदते दिखे लोग

रूस के वेस्टर्न सर्बिया में स्थित पर्म युनिवर्सिटी में एक छात्र ने ही गोलीबारी शुरू कर दी, जिसके बाद 8 लोगों की मौत हो गई है। सोशल मीडिया पर कई दर्दनाक वीडियो भी वायरल हुए हैं, जिनमें छात्रों को दूसरी मंजिल से कूदते हुए देखा जा सकता है। कई छात्रों ने खिड़की से कूद कर अपनी जा बचाई। ये यूनिवर्सिटी रूस की राजधानी मॉस्को से 1300 किलोमीटर पूर्व की दिशा में स्थित है। गोली लगने और खिड़की से गिरने के कारण 10 लोग घायल भी हुए हैं।

रूस के स्वास्थ्य मंत्रालय ने बताया कि यूनिवर्सिटी ने कुल 9 एम्बुलेंस लगा रखे हैं, ताकि घायलों को अस्पताल ले जाया जा सके। रूस के गृह मंत्रालय ने बताया कि शूटर भी घायल हुआ है और उसे गिरफ्तार कर लिया गया है। घटना के बाद आपराधिक हत्या का मामला चलाया जा रहा है। बताया जा रहा है कि हत्यारा का नाम तिमूर बेकमनसुरोव है। आरोपित का कहना है कि ये आतंकी हमला नहीं है और वो किसी कट्टरपंथी संगठन से नहीं जुड़ा हुआ है।

हत्यारा भी उसी यूनिवर्सिटी का छात्र है। छात्रों ने कक्षाओं में कुर्सियों का इस्तेमाल कर के बैरिकेड्स बनाए, ताकि हत्यारा उन्हें नुकसान नहीं पहुँचा सके। उस समय क्लास में 60 छात्र मौजूद थे। जाँच एजेंसियों ने कहा है कि जो कैंपस छोड़ सकते हैं, वो बाहर निकल जाएँ। कई कर्मचारियों ने खुद को कमरों में बंद कर लिया था। रूस में हर कोई बंदूक नहीं रख सकता, लेकिन शिकार, आत्मरक्षा और खेल के लिए इसकी अनुमति है।

रूस में इस तरह की घटनाएँ आम नहीं हैं। इसी साल 11 मई को कज़ान इलाके में एक किशोर ने 7 बच्चों और दो शिक्षकों को एक स्कूल में मार डाला था। इसके बाद राष्ट्रपति ब्लादिमीर पुतिन ने कहा था कि बंदूक रखने के नियमों को और कड़ा किया जाएगा। इसके बाद बंदूक खरीदने की उम्र को 18 से बढ़ा कर 21 कर दिया गया। इससे पहले 2018 की एक घटना में एक व्यक्ति ने 20 लोगों को मार डाला था और अंत में खुद को गोली मार दी।

कुछ रिपोर्ट्स में कहा जा रहा है कि हत्यारे ने एक सोशल मीडिया पोस्ट लिख कर पहले ही बता दिया था कि वो अकेले इस घटना को आजम देने जा रहा है और इसके पीछे उसका कोई उद्देश्य नहीं है। छात्र दूसरी मंजिल से कूद रहे थे और डर से चिल्ला रहे थे। पर्म यूनिवर्सिटी के कैंपस में कुल 10 इमारतें हैं। हाल के दिनों में यूरोप के कई देशों में कट्टरपंथी आतंकी हमले बढ़ने की खबर आई है और फ़्रांस में एक छात्र ने शिक्षक का गला रेत दिया था।

NDTV को खरीद रहे अडानी, ₹1600 करोड़ की डील? ‘अफवाह’ पर शेयर्स ने मारी उछाल

एनडीटीवी (NDTV) को अडानी ग्रुप खरीदेगा- यह अफवाह बाजार में उड़ते ही इस समाचार चैनल के शेयर्स सोमवार (सितंबर 20, 2021) को करीबन 10 फीसद ऊपर चढ़ गए। इससे पहले खबरें आई थीं कि अडानी ग्रुप दिल्ली आधारित कोई मीडिया हाउस लेने जा रहा है, जो कि शायद एनडीटीवी हो सकता है। इस खबर के बाद बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज पर मात्र 79.65 रुपए में ट्रेड हो रहा स्टॉक 9.94 फीसद बढ़ गया।

बता दें कि अडानी समूह द्वारा एनडीटीवी को खरीदे जाने के कयास उस समय लगने शुरू जब हुए ‘द क्विंट’ में बतौर एडिटोरियल डारेक्टर रह चुके संजय पुगालिया ‘अडानी इंटरप्राइजेज’ की मीडिया इनिशिएटिव्स में CEO के साथ-साथ मुख्य संपादक के पद के लिए चुने गए।

पायनियर के पत्रकार जे गोपीकृष्णन इस मामले पर लिखते हैं, “अडानी ग्रुप एक पुराने टीवी चैनल को खरीद रहा है जो हमेशा से उनपर हमलावर रहा। इसके लिए लंदन में हस्ताक्षर होंगे। कुछ लोग कह रहे हैं कि डील की कीमत 1600 करोड़ रुपए है। लेकिन जो व्यक्ति अभी जा रहा है उसे केवल 100 करोड़ मिलेंगे… बाकी बड़े शेयरहोल्डर्स को 750 करोड़ रुपए मिलेंगे।”

यहाँ उल्लेखनीय हो कि अडानी समूह और एनडीटीवी को लेकर ये सारी बातें मीडिया और सोशल मीडिया में चल रही हैं। हमारे खबर लिखने तक एनडीटीवी की इस संबंध में कोई प्रतिक्रिया नहीं आई थी।

संजय पुगालिया अडानी समूह में

गौरतलब है कि संजय पुगलिया ‘आज तक’ के संस्थापकों में से एक रहे हैं। प्रिंट में वो ‘नवभारत टाइम्स’ और ‘बिजनेस स्टैण्डर्ड’ का हिस्सा रहे हैं। उन्हें लेकर अडानी समूह ने जानकारी दी थी कि संजय पुगलिया ने 2000-01 में ऑस्ट्रेलियाई मीडिया संस्थान ‘नाइन नेटवर्क’ के ‘इंडियन JV’ में प्रेजिडेंट के अलावा ‘हेड ऑफ स्ट्रेटेजिक प्लानिंग एंड फिल्म बिजनेस’ का पद संभाला था। अडानी समूह ने लिखा कि उसके उत्पादों की ब्रांडिंग और राष्ट्र निर्माण के लिए संजय पुगलिया का किरदार महत्वपूर्ण होगा।

मजे की बात तो ये है कि ‘The Quint’ जिस मीडिया गिरोह का हिस्सा है, वो हमेशा से मुकेश अंबानी और गौतम अडानी के खिलाफ लिखता रहा है और अडानी को मोदी का करीबी बताते हुए उनकी आलोचना करता रहा है। अडानी की संपत्ति में वृद्धि के लिए वामपंथी व विपक्षी नेताओं के अलावा प्रोपेगंडा पत्रकार भी मोदी सरकार पर उनका समर्थन करने के आरोप लगाते रहे हैं। अब ‘The Quint’ के एडिटोरियल डायरेक्टर ने ही अडानी का रुख कर लिया है। वो प्रणव अडानी को रिपोर्ट करेंगे, जो गौतम अडानी के छोटे भाई विनोद अडानी के बेटे हैं।

मस्जिद के नल से पानी लेने पर हिंदू परिवार को बंधक बना किया प्रताड़ित: पाकिस्तान की घटना, टॉर्चर करने वाले इमरान खान की पार्टी से

पाकिस्तान में एक मस्जिद के नल से पीने का पानी लेने पर एक हिंदू परिवार को बंधक बनाकर प्रताड़ित करने की घटना सामने आई है। घटना पंजाब प्रांत के रहीम यार खान की है। मस्जिद को नापाक करने का आरोप लगाकर हिंदू परिवार के साथ इस घटना को अंजाम दिया गया। आरोपित पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान खान की तहरीक-ए-इंसाफ पार्टी से ताल्लुक रखते हैं।

घटना के बाद प्रताड़ित परिवार पुलिस स्टेशन के बाहर धरने पर बैठ गया। इसके बाद जिला शांति समिति के सदस्य पीटर जॉन भील की मदद से उनकी शिकायत दर्ज की गई। पुलिस अधिकारी असद सरफराज का कहना है कि मामले की जाँच की जा रही है। रिपोर्ट के अनुसार पीटर ने जिला शांति समिति के अन्य सदस्यों से इस मुद्दे पर एक आपात बैठक बुलाने का अनुरोध किया, लेकिन उन्होंने मामले को गंभीरता से नहीं लिया। 

रिपोर्टों के अनुसार रहीम यार खान के बस्ती कहूर खान इलाके के कुछ स्थानीय लोगों ने मस्जिद को नापाक करने का आरोप लगा हिन्दू परिवार को बंधक बना लिया। पाकिस्तानी अखबार डॉन की रिपोर्ट के मुताबिक कुछ दिन पहले आलम राम भील परिवार के अन्य सदस्यों के साथ एक खेत में कच्चा कपास चुन रहा था। उसने बताया कि जब परिवार नल से पीने का पानी लेने के लिए पास की एक मस्जिद में गया तो कुछ स्थानीय लोगों ने उनकी पिटाई कर दी। इसके बाद परिवार जब वापस घर लौट रहा था, तो ग्रामीणों ने उन्हें आउटहाउस में बंधक बना फिर से प्रताड़ित किया। 

शुरुआत में पुलिस ने मामला दर्ज नहीं किया क्योंकि हमलावर स्थानीय पाकिस्तान तहरीक-ए-इंसाफ के सांसद से जुड़े हुए थे। वहीं पीटीआई के दक्षिण पंजाब अल्पसंख्यक विंग के महासचिव योधिस्टर चौहान का कहना है कि घटना के बारे में उन्हें जानकारी थी, लेकिन सत्ताधारी पार्टी के सांसद के प्रभाव के कारण उन्होंने मामले में दूर रहना ही बेहतर समझा। जिला पुलिस अधिकारी असद सरफराज ने कहा कि वह मामले की जाँच-पड़ताल कर रहे हैं। डिप्टी कमिश्नर डॉ. खुरम शहजाद ने कहा कि वह कोई भी कार्रवाई करने से पहले हिंदू अल्पसंख्यक बुजुर्गों से मिलेंगे।

उल्लेखनीय है कि पाकिस्तान में अल्पसंख्यकों खासकर हिंदुओं को प्रताड़ित करने की खबरें अक्सर आती रहती हैं। हिंदुओं की संपत्तियों पर कब्जा करना, हिंदू लड़कियों को अगवा कर उनसे जबरन निकाह करने की घटना आम है।

‘जज RR खान पर भरोसा नहीं, किसी अन्य मजिस्ट्रेट को ट्रांसफर हो मामला’: कंगना ने जावेद अख्तर पर ठोका काउंटर केस

बॉलीवुड अभिनेत्री कंगना रनौत ने गीतकार जावेद अख्तर के खिलाफ काउंटर केस दायर किया है, जिसके बाद इस मानहानि के मामले में नया ट्विस्ट आ गया है। अपनी शिकायत में कंगना रनौत न जावेद अख्तर को रंगदारी और आपराधिक धमकी देने का आरोपित बनाया है। साथ ही उन्होंने इस मामले को किसी अन्य मजिस्ट्रेट को ट्रांसफर करने का निवेदन किया है। उन्होंने चीफ मेट्रोपोलिटन मजिस्ट्रेट के समक्ष ये मामला दर्ज कराया।

कंगना रनौत अँधेरी के मेट्रोपोलिटन मजिस्ट्रेट आरआर खान के समक्ष सोमवार (20 सितंबर, 2021) को पेश होते हुईं। इसी अदालत में जावेद अख्तर द्वारा उन पर दर्ज कराए गए मानहानि के मुक़दमे की सुनवाई चल रही है। अपने अधिवक्ता रिजवान सिद्दीकी के जरिए कंगना रनौत ने कहा कि उन्हें बार-बार बिना कोई कारण बताए अदालत से समन भेजा जा रहा था, ऐसे में उनसे पेशी की उम्मीद कैसे की जा सकती है?

रिजवान सिद्दीकी ने कहा कि कंगना रनौत की याचिका को उनकी उपस्थिति के बिना भी दाखिल किया जा सकता है, क्योंकि वो अपने मुवक्किल की जगह अदालत में आ रहे थे। उन्होंने कहा, “मैं एक स्पष्ट बयान दे रहा हूँ। अदालत पर से मेरा विश्वास उठ गया है।” इसीलिए, किसी अन्य मजिस्ट्रेट के समक्ष मामले को स्थानांतरित करने की गुहार लगाई गई है। इसके लिए CMM से तारीख़ की माँग भी की गई है, ताकि अपनी बात रखी जा सके।

कंगना रनौत ने जावेद अख्तर के खिलाफ ‘भारतीय दंड संहिता (IPC)’ की धाराओं (किसी व्यक्ति को क्षति पहुँचाने के आशय से भय में डालना), (जान से मार डालने की धमकी देकर जबरदस्ती वसूली), 503 (किसी के शरीर, लोकप्रियता या संपत्ति को नुकसान पहुँचाने की धमकी) और 506 (आपराधिक धमकी) के तहत FIR दर्ज कराई गई है। अदालत ने 15 नवंबर, 2021 तक सुनवाई स्थगित कर दी है, ताकि काउंटर केस में जावेद अख्तर प्रतिक्रिया दे सकें और उनकी तरफ से बहस की जा सके।

जावेद अख्तर ने कंगना रनौत के खिलाफ IPC की धारा 499 (किसी के मान-सम्मान को क्षति पहुँचाना) और 500 (मानहानि) के तहत मुकदमा दर्ज कराया था। आरोप है कि ‘रिपब्लिक टीवी’ के अर्णब गोस्वामी के साथ एक इंटरव्यू में कंगना रनौत ने जावेद अख्तर को बॉलीवुड के ‘सुसाइड गैंग’ का हिस्सा बताया था, जो कुछ भी कर के बच निकलता है। मजिस्ट्रेट ने कहा था कि अगली तारीख़ पर कंगना रनौत कोर्ट में पेश नहीं होती हैं तो उनके खिलाफ गिरफ़्तारी का वॉरंट जारी किया जाएगा।

जावेद अख्तर पर आरोप है कि उन्होंने कंगना रनौत को धमकी भरे फोन कॉल्स किए और कहा, “तुम आत्महत्या करने के लिए मजबूर हो जाओगी।” वकील रिजवान सिद्दीकी ने पूछा कि कंगना रनौत को मजिस्ट्रेट RR खान ने बार-बार कोर्ट में पेश होने को क्यों कहा और गिरफ़्तारी का वॉरंट जारी करने की धमकी क्यों दी? जावेद अख्तर पर आरोप है कि उन्होंने कंगना रनौत पर हृतिक रौशन से समझौते का भी दबाव बनाया।

कंगना ने पहले इंटरव्यू में कहा था, “जावेद अख्तर ने मुझे अपने घर बुलाया। इसके बाद उन्होंने कहा कि अगर मैं ऋतिक रोशन से माफ़ी नहीं माँगी तो मुझे आत्महत्या करनी पड़ेगी।” जिसके बाद साक्षात्कार ले रहे अर्नब गोस्वामी ने कंगना को जवाब दोहराने के लिए कहा। दूसरी बार भी कंगना ने ठीक वही बात कही। कंगना ने बताया था कि जावेद अख्तर ने उनसे क्या-क्या कहा था, “तुम्हें आत्महत्या करनी पड़ेगी क्योंकि वह तुम्हें जेल में बंद कर देंगे। उन्होंने (ऋतिक रोशन) तुम्हारे खिलाफ़ सारे सबूत इकट्ठा कर लिए हैं। वह समझ चुके हैं कि केस पूरी तरह उनके हाथों में है।”

सबसे ज्यादा फीस लेने वाले साउथ के स्टार थलापति विजय ने माँ-बाप पर भी किया केस, सियासी है वजह

थलापति विजय दक्षिण भारत के बड़े सितारे हैं। उनकी गिनती सबसे ज्यादा फीस लेने वाले तमिल एक्टर में होती है। रिपोर्ट के अनुसार ‘थलापति 65’ के लिए 100 करोड़ रुपए की फीस लेकर उन्होंने रजनीकांत को भी पीछे छोड़ दिया था। अब विजय एक केस को लेकर चर्चा में हैं। खास बात यह है कि उन्होंने जिनलोगाों पर मुकदमा किया है उनमें उनके माता-पिता भी हैं।

‘मास्टर’ फेम थलापति विजय को जोसेफ विजय के नाम से भी जाना जाता है। विजय ने कथित तौर पर मद्रास हाईकोर्ट में अपने पिता एसके चंद्रशेखर और माँ शोभा सहित 11 लोगों के खिलाफ मुकदमा दायर किया है। विजय ने कोर्ट से अपील की है कि कोई भी उनके नाम का इस्तेमाल भीड़ इकट्‌ठा करने के लिए न कर पाए। केस की सुनवाई 27 सितंबर 2021 को है।

क्यों दर्ज करवाया केस? 

दरअसल विजय के पिता व निर्देशक एसके चंद्रशेखर ने कुछ समय पहले ही एक राजनीतिक पार्टी शुरू की थी, जिसका नाम ‘ऑल इंडिया थलापति विजय मक्कल इयक्कम’ रखा था। बताया जा रहा है कि चुनाव आयोग में दर्ज दस्तावेजों में इस चुनावी पार्टी के जनरल सेक्रेटरी के तौर पर विजय के पिता का नाम है, जबकि उनकी माँ शोभा चंद्रशेखर इसकी ट्रेजरर हैं। विजय के पिता एसके चंद्रशेखर ने पार्टी अध्यक्ष के रूप में अपने रिश्तेदार पद्मनाभन के नाम की घोषणा की है।

विजय इसी बात से नाराज हैं और उन्होंने केस में कहा है कि किसी भी शख्स को उनके नाम का इस्तेमाल कर चुनावी पार्टी या कार्यक्रम करने की जरूरत नहीं है। विजय ने अपने केस में कहा है कि अगर कोई भी उनके फैन क्लब का इस्तेमाल करेगा तो उसके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। यही वजह है कि विजय ने अपने नाम का फायदा उठाने के लिए माता-पिता समेत 11 लोगों के खिलाफ केस दर्ज किया है।

बता दें कि विजय ने कुछ दिनों पहले ही अपने बयान में साफ कर दिया था कि उनका इस चुनावी पार्टी से कोई लेना-देना नहीं है। विजय ने अपने फैंस से अपील की थी, “इस ‘ऑल इंडिया थलापति विजय मक्कल इयक्कम’ पार्टी से मेरा कोई कनेक्शन नहीं है, इसलिए मेरा नाम इस चुनावी पार्टी के साथ ना जुड़े। अगर कोई भी मेरे नाम, तस्वीर या फैन क्लब का इस्तेमाल करेगा तो मैं उसके खिलाफ कानूनी कार्रवाई करूँगा।”

माफ़ करना योगेश जाटव, तुम्हारा नाम ‘पहलू खान’ या ‘तबरेज अंसारी’ नहीं था: कॉन्ग्रेस शासित राजस्थान की मुस्लिम भीड़ पर सन्नाटा

आपको पहलू खान याद है? अप्रैल 2017 में उसकी मॉब लिंचिंग का आरोप गोरक्षकों पर लगाते हुए खूब हंगामा किया गया था। तब राज्य में भाजपा की सरकार थी, इसीलिए मामले को अंतरराष्ट्रीय बनाते हुए विदेशी मीडिया तक में हिन्दुओं, गोरक्षकों और हिन्दू धर्म को बदनाम करते हुए लेख लिखे गए थे। अब अलवर में योगेश जाटव नाम के एक दलित युवक की सरेराह मॉब लिंचिंग कर दी गई है। सन्नाटा पसरा हुआ है।

राजस्थान में कॉन्ग्रेस की सरकार है और अशोक गहलोत वामपंथी मीडिया के भी दुलारे हैं (जब तक वो गाँधी परिवार के इशारे पर नाचते रहें, वरना जिस दिन उनका हश्र कैप्टेन अमरिंदर सिंह वाला हुआ, उस दिन से मीडिया का ये गिरोह विशेष उन्हें भी नकार देगा)। दूसरा कारण ये है कि हत्यारे मुस्लिम समुदाय से आते हैं। कॉन्ग्रेस का राज और हत्यारों का मुस्लिम होना – ये दो कारण काफी हैं मीडिया को चुप कराने के लिए।

आइए, सबसे पहले घटना पर एक नज़र डाल लेते हैं कि आखिर हुआ क्या था। घटनाक्रम कुछ यूँ था कि बड़ौदामेव के मीना का बास इलाके में बुधवार (15 सितम्बर, 2021) को भटपुरा निवासी योगेश जाटव बाइक से गाँव की तरफ जा रहे थे। रास्ते में एक गड्ढा था, ऐसे में दुर्घटना हो गई और उनकी बाइक एक महिला से टकरा गई। इसके बाद शुरू हुआ मुस्लिम भीड़ का आतंक। दलित युवक की इतनी पिटाई की गई कि वो कोमा में चला गया।

3 दिन इलाज चला, जिसके बाद जयपुर में शनिवार को योगेश की मौत हो गई। अगले ही दिन आक्रोशित ग्रामीणों ने बडौदामेव में अलवर-भरतपुर रोड पर दोपहर करीब 3 बजे से शाम 6 बजे तक शव रखकर विरोध प्रदर्शन किया। प्रशासन के साथ किसी तरह समझौता हुआ, जिसके बाद शव का अंतिम संस्कार करने को परिजन राजी हुए। आरोपितों को तुरंत गिरफ्तार कर के जेल भेजे जाने की माँग के साथ-साथ ग्रामीणों ने पीड़ित परिजनों को 50 लाख रुपए की सहायता देने के लिए सरकार से माँग की है।

इस घटना के अगले ही दिन परिजनों ने FIR दर्ज करवा दी थी, जिसमें 6 लोगों को आरोपित बनाया गया था। रसीद पुत्र नामालूम, साजेत पठान, मुबीना पत्नी नामालूम तथा अन्य चार लोगों के नाम FIR में शामिल थे। ग्रामीणों के आक्रोश के कारण अलवर-भरतपुर मार्ग घंटों जाम रहा। योगेश जाटव की उम्र मात्र 17 वर्ष ही बताई जा रही है। चार बहनों का वो इकलौता भाई था, ऐसे में परिवार का रो-रो कर बुरा हाल है।

पुलिस-प्रशासन की निष्क्रियता के कारण ही ग्रामीणों को विरोध प्रदर्शन करना पड़ा। 5 घंटे तक हुए प्रदर्शन से पहले पुलिस ने IPC (भारतीय दंड संहिता) की धारा-336 (उतावलेपन या उपेक्षापूर्वक ऐसा कोई कार्य, जिससे मानव जीवन या किसी की व्यक्तिगत सुरक्षा को ख़तरा हो), 143 (भीड़ द्वारा गैर-कानूनी कार्य), 323 (किसी को चोट पहुँचाना), 379 (छीना-झपटी कर घायल करना) और 341 (किसी को गलत तरीके से रोकना) के तहत मामला दर्ज किया था।

पुलिस ने उलटा विरोध प्रदर्शन में शामिल एक व्यक्ति को ही गिरफ्तार कर लिया और उस पर भड़काऊ भाषण देने के आरोप लगाए गए। वो परिजनों की तरफ से बोल रहा था। हालाँकि, बाद में उसे छोड़ दिया गया। SC/ST एक्ट के अलावा अब हत्या की धारा भी लगा दी गई है। प्रशासन दोषियों के विरोध कड़ी कार्रवाई का आश्वासन देते हुए सरकार तक पीड़ित परिजनों की बात पहुँचाने का वादा भी कर रहा है।

हजारों लोगों के सड़क पर उतरने के बावजूद इन पीड़ितों की आवाज़ अब तक मीडिया के कान में नहीं पहुँची है, क्योंकि मृतक का नाम ‘योगेश जाटव’ है, ‘पहलू खान’ नहीं। किसी चोर को रंगे हाथों पकड़े जाने और उसकी पिटाई के बाद मौत होने पर उसके यहाँ ‘राजनीतिक टूर’ करने वाले नेता इस बार संवेदना तक नहीं जताएँगे, क्योंकि इससे उनसे सेक्युलर होने का तमगा छिन जाएगा। मुस्लिम वोटों के तुष्टिकरण के लिए ऐसी घटनाओं पर उन्हें आँख मूँदे रहने की आदत है।

आपको कॉन्ग्रेस के नेतृत्व वाले यूपीए काल याद है, जब संसद में ‘सांप्रदायिक हिंसा बिल’ लाया गया था? इसमें प्रस्ताव था कि दोष किसी का भी हो, हत्या की घटनाओं के लिए बहुसंख्यकों को ही जिम्मेदार माना जाएगा। हिंसा की स्थिति में सीधे केंद्र के दखल की बात कह कर संघीय ढाँचे पर भी प्रहार किया गया था। तब गुजरात के मुख्यमंत्री रहे नरेंद्र मोदी ने इसके खिलाफ आवाज़ बुलंद करते हुए कहा था कि ये बिल धार्मिक और भाषाई आधार पर समाज को बाँटने वाला है।

उनका कहना था कि इससे धार्मिक और भाषाई पहचान हमारे समाज में मजबूत हो चलेगी और आसानी से हिंसा के साधारण घटना को भी सांप्रदायिक रंग दिया जा सकेगा। उन्होंने बताया था कि कैसे यह कानून धार्मिक और भाषाई पहचान वाले नागरिकों के लिए आपराधिक कानूनों को अलग-अलग ढंग से अप्लाई करने का मौका दे सकता है। इससे अधिकारी तक डरे हुए रहते, क्योंकि मुस्लिमों की शिकायत पर उनके खिलाफ भी कड़ी कार्रवाई होती।

इस मामले में पुलिस ने मॉब लिंचिंग वाली धारा भी नहीं लगाई थी। ऐसे में सवाल उठता है कि बहुसंख्यकों को बिना गलती हत्यारा मानने वाले कॉन्ग्रेस के बिल से कितना नुकसान होता? अक्सर देखा गया है कि मुस्लिम भीड़ ने संगठित होकर दंगे किए हैं। हाल की घटनाओं में देखें तो दिल्ली और बेंगलुरु में हुए दंगे इसके उदाहरण हैं। या ऐसी स्थिति में भी हिन्दुओं को ही जेल होती? आरोपित मुस्लिम हैं, इसीलिए कोई नेता/पत्रकार उन्हें जेल भेजने की माँग नहीं करेगा।

राजस्थान भाजपा के पूर्व प्रवक्ता लक्ष्मीकांत भारद्वाज ने इस घटना पर टिप्पणी करते हुए कहा, “राजस्थान के अलवर में शांतिदूतों की भीड़ ने मासूम युवक योगेश को पीट पीट कर मार डाला। सेक्यूलर बिछुओं के कानों तक आवाज़ नहीं पहुँचेगी। क्योंकि मरने वाला योगेश और मारने वाले रशिद, साजित पठान, मूबिना और उसके साथी हैं।’ उनकी बात बिलकुल सही है। आजकल हंगामा मृतकों और आरोपितों का मजहब देख कर होता है।

अंत में दिलीप मंडल, उदित राज और हंसराज मीणा जैसे दलितों के ठेकेदारों से भी सवाल पूछा ही जाना चाहिए कि क्या वो दलितों के विरुद्ध क्रूरता के लिए तब कोई आवाज़ नहीं उठाएँगे, जब ये मुस्लिमों द्वारा किया जा रहा हो? फिर वो खुद को दलितों के ठेकेदार की जगह मुस्लिमों का ठेकेदार क्यों नहीं घोषित कर देते? एक दलित नाबालिग की पीट-पीट कर बेरहमी से हत्या के दी गई और दलित चिंतक चुप्पी साधे हुए हैं?

झारखंड में तबरेज अंसारी के लिए ओवैसी ने आवाज़ उठाई थी। पहलू खान के लिए कॉन्ग्रेस बेचैन थी। हाथरस में मीडिया का जमावड़ा लगा था और राहुल गाँधी व प्रियंका गाँधी वहाँ पहुँचे थे। ये अलग बात है कि रास्ते में वो ठहाके लगा रहे थे। लेकिन, योगेश जाटव का कोई नहीं है। ‘दलित प्रेम’ अब झूठा हो गया है क्योंकि मुस्लिमों के नाराज़ होने की आशंका है उन्हें। इनका दलित प्रेम बनावटी मामलों पर आधारित है, वास्तविक नहीं।

‘इस्लामी कट्टरपंथियों ने हाथ काटा, चर्च के डर से अपनों ने छोड़ा’: परेशान हो केरल के प्रोफेसर की पत्नी ने भी कर ली आत्महत्या

केरल के एक कॉलेज में मलयालम पढ़ाने वाले प्रोफेसर पर साल 2010 में ईशनिंदा का आरोप मढ़ कर कट्टरपंथियों ने हमला किया था। इस हमले में उनके हाथ काटे गए थे। अब उन्हीं टीजे जोसेफ नामक प्रोफेसर का संस्मरण बाजार में अंग्रेजी भाषा में अनुवाद होकर आया है। इसमें उन्होंने बताया है कि कैसे कट्टरपंथियों ने उनके साथ जो किया सो किया लेकिन चर्च, कॉलेज, दोस्त, पड़ोसियों ने भी उन्हें नीचा दिखाने में कोई कसर नहीं छोड़ी।

रविवार को संडे टाइम्स को साक्षात्कार देते हुए जोसेफ ने कहा कि आरोपितों को दंड देने से न्याय नहीं मिलेगा। असल समस्या कट्टरपंथ की है। याद दिला दें इससे पहले टीजे जोसेफ पिछले वर्ष चर्चा में आए थे जब मलयालम में उनका संस्मरण रिलीज हुआ था। अब वही संस्मरण- नंदकुमार द्वारा अंग्रेजी में अनुवाद किए जाने के बाद शीर्षक ‘अ थाऊजेंड कट्स: एन इनोसेंट क्वाश्चन एंड डेडली आंसर’ के साथ बाजार में आया है।

इसमें उन्होंने बताया, “थोड़ूपुझा न्यूमैन कॉलेज के प्रिंसिपल और मैनेजमेंट ने शुरुआती समय में मेरा साथ दिया लेकिन समय के साथ उनके मत बदल गए। ये जानने के बावजूद कि मैं निर्दोष हूँ, कॉलेज ने मुझ पर ईशनिंद का आरोप मढ़ा, मुझे सस्पेंड किया गया और बाद में नौकरी से निकाल दिया गया। चर्च ने मेरे परिवार को बहिष्कृत किया और कोठामंगलम सूबा के 120 चर्चों में मेरे खिलाफ पत्र पढ़े गए कि आखिर मेरे विरुद्ध ऐसा एक्शन क्यों लिया गया है। कई ईसाई दोस्तों और परिवारों ने हमारे घर आना छोड़ दिया। उन्हें डर था कि चर्च उनसे नाराज हो जाएगा। मेरे ऊपर हमला करने वालों की आँख पर कट्टरपंथ की पट्टी बंधी थी जिसने मुझे शारीरिक रूप से दुख दिया। लेकिन जो मेरे लोगों ने मेरे साथ किया वो भी और भी ज्यादा भयावह है क्योंकि उससे मेरे परिवार पर प्रभाव पड़ा।”

बता दें कि टीजे जोसेफ केरल के इदुकी जिले के एक कॉलेज में मलयालम पढ़ाते थे। 2010 में उन पर कट्टरपंथी मुस्लिम संगठन के सदस्य नजीब समेत कुछ युवकों ने चाकुओं से हमला करके उनका दाहिना हाथ काट दिया था। जोसेफ पर आरोप था कि उन्होंने बीकॉम का पेपर तैयार करते हुए पैगंबर मोहम्मद का नाम लिया, जबकि जोसेफ कहते हैं कि वो पीटी कुंजू मोहम्मद नामक एक लेखक के बारे में लिख रहे थे पर कुछ लोगों ने जानबूझकर मोहम्मद नाम को गलत लिया। इसके बाद उनपर हमला हुआ, उन्हें नौकरी से निकाला गया और उनकी पत्नी ने भी हालातों से तंग आकर सुसाइड कर ली।

जोसेफ के अनुसार, उनकी पत्नी गहरे सदमें में थी। 19 मार्च 2014 को वह मनोवैज्ञानिक के पास से लौटीं और सुसाइड कर ली। ये क्षण जोसेफ के लिए और मुश्किल भरा था। उन्हें दुख इस बात का था कि उनकी पत्नी उन्हें दोबारा जॉब करते नहीं देख पाईं जो कि उनकी सबसे बड़ी इच्छा थी। जोसेफ अपनी किताब में आपबीती लिखते हुए समझाते हैं कि कैसे कट्टरपंथ के कारण हर कोई खतरे में हैं।

परमाणु बम की तरह खतरनाक ‘डीप फेक’ का निशाना बने BJP नेता सदानंद गौड़ा, अश्लील वीडियो बना कर दिया वायरल

भाजपा के वरिष्ठ नेता और पूर्व केंद्रीय मंत्री डीवी सदानंद गौड़ा ने रविवार (19 सितंबर, 2021) को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर वायरल हुए अश्लील वीडियो को लेकर साइबर क्राइम पुलिस में शिकायत दर्ज कराई। गौड़ा ने अपनी शिकायत में दावा किया है कि यह एक डीप फेक (Deep Fake) वीडियो है जिसे उनकी छवि को खराब करने के लिए सोशल मीडिया साइटों पर वायरल किया गया है।

गौड़ा ने अपने ट्वीट में लिखा, “प्रिय शुभचिंतकों, मेरा एक मॉर्फ्ड (डीप फेक) वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है। मैं आपको सूचित करना चाहता हूँ कि इस वीडियो में दिख रहा व्यक्ति मैं नहीं हूँ, यह मेरे विरोधियों द्वारा निहित स्वार्थ के लिए मेरी साफ-सुथरी छवि को धूमिल करने के लिए बनाया गया है।”

बीजेपी नेता ने आगे भरोसा जताया कि पुलिस जल्द ही दोषी को पकड़ लेगी। इसके साथ ही उत्तरी बेंगलुरु से लोकसभा सदस्य गौड़ा ने उन लोगों को चेतावनी दी, जो इस वीडियो को फॉरवर्ड या डाउनलोड कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि अदालत से इस क्लिप पर रोक के लिए आदेश प्राप्त किया है और जो कोई भी इसका उल्लंघन करेगा, उसे कानून के तहत सजा मिलेगी। गौड़ा ने ऐसी सामग्री सोशल मीडिया पर अपलोड करने वाले का पता लगाने में लोगों से मदद की अपील की। गौड़ा ने अपने फॉलोवर्स से किसी भी प्लेटफॉर्म पर वीडियो को फॉरवर्ड या अपलोड करने वाले व्यक्ति का डिटेल इनबॉक्स करने का आग्रह किया।

एक फॉलोअप ट्वीट में, गौड़ा ने शिकायत की प्रति साझा की और कहा, “राजनीतिक मोर्चे पर मेरी कामयाबी से परेशान अपराधियों ने मुझे नीचा दिखाने के लिए मेरा एक फेक, भद्दा वीडियो बनाया है। वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो गया है, जिससे मुझे दु:ख हो रहा है।”

उन्होंने आगे कहा, “दोषियों को तुरंत गिरफ्तार करने और सजा दिलाने के लिए संबंधित अधिकारियों के पास शिकायत दर्ज की गई है।” शिकायतकर्ता ने कहा है, “हमारे सांसद डीवी सदानंद गौड़ा का इस्तेमाल कर राजनीति से प्रेरित फर्जी, मॉर्फ्ड वीडियो बनाया गया है। यह वीडियो सोशल मीडिया में वायरल हो रहा है। वीडियो बनाने का उद्देश्य उनकी छवि खराब करना है।”

डीप फेक (Deep Fake) क्या है?

डीप फेक तकनीक फेक न्यूज से भी अधिक घातक है। विशेषज्ञ इसे परमाणु बम की तरह ही खतरनाक मानते हैं, क्योंकि Deep Fake की सहायता से किसी भी देश की राजनीति में भूचाल लाया जा सकता है। इस तकनीक का उपयोग करके किसी के भी जीवन को बर्बाद किया जा सकता है। इसके अंतर्गत पावरफुल ग्राफिक्स वाले कंप्यूटरों की सहायता से उपलब्ध डाटा का ऐसा सम्मिश्रण किया जाता है कि आसानी से फेक वीडियो, फोटो अथवा ऑडियो तैयार किया जा सके। 

सीधी भाषा में कहें तो हाई क्वालिटी AI की सहायता से झूठे कंटेन्ट वाले वीडियो या दूसरे मटेरियल को तैयार करना ही डीप फेक (Deep Fake) है। इसे डिटेक्ट करना अर्थात इसकी पहचान करना किसी भी आम इंसान के लिए बहुत मुश्किल है। डीप फेक, फोटोशॉप के जरिए फेक न्यूज फैलाने का सबसे आधुनिक माध्यम है और झूठे बयानों अथवा वीडियो क्लिप्स बनाने के लिए 21वीं सदी में सबसे अधिक उपयोग में आने वाली तकनीक है।

अब प्रश्न उठता है कि क्या डीपफेक पर कानूनी कार्रवाई नहीं की जा सकती है? तो डीप फेक ऐसे तो दुनिया भर में बैन नहीं है और न ही इसके संबंध में कोई कानून है, लेकिन इसकी सहायता से किसी व्यक्ति के सम्मान को ठेस पहुँचाने के लिए किया गया कार्य विभिन्न देशों के कानूनों के मुताबिक अपराध ही माना जाएगा।

चरणजीत सिंह चन्नी ने पंजाब के CM पद की ली शपथ, पर तमाशा जारी: अब ‘सिद्धू के चेहरे’ पर कॉन्ग्रेस में संग्राम

कैप्टन अमरिंदर सिंह के इस्तीफे के बाद पंजाब के अगले मुख्यमंत्री चरणजीत सिंह चन्नी ने आज (सितंबर 20, 2021) आधिकारिक तौर पर शपथ ग्रहण की। वहीं इस कार्यक्रम से पहले सियासी बयानबाजी शुरू रही। पंजाब कॉन्ग्रेस प्रभारी हरीश रावत ने साफ किया है कि अगले साल होने वाले विधानसभा चुनाव में नवजोत सिंह सिद्धू के चेहरे को आगे रखते हुए चुनाव लड़ा जाएगा। इधर, कॉन्ग्रेस नेता सुनील जाखड़ ने हरीश रावत के बयान पर आपत्ति जताई है।