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घुसपैठियों को ‘बेचारा’ दिखा BBC ने फैलाया बंगाल में SIR पर प्रोपेगेंडा, 90 लाख नाम हटने पर रोया ‘मुस्लिम प्रताड़ना’ का रोना: पढ़ें- कैसे TMC समर्थक लेखक ने नजरअंदाज किए तथ्य

चुनावी राज्य पश्चिम बंगाल में किए गए विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) अभियान के तहत करीब 90 लाख मतदाताओं के नाम सूची से हटा दिए गए हैं। चुनाव आयोग ने भी पुष्टि की कि संशोधन प्रक्रिया के अंतिम चरण में 27,16,393 मतदाता अयोग्य पाए गए। इसके बाद इस मुद्दे को लेकर कुछ इस्लामी-वामपंथी झुकाव वाले राजनीतिक और मीडिया गुटों ने मुस्लिम-पीड़ित की कहानी को हवा देना शुरू कर दिया।

“Political turmoil in Indian border state as nine million lose voting rights” हेडलाइन के साथ इस आर्टिकल में स्निग्धेंदु भट्टाचार्य ने एक तरह का डर का माहौल बनाने की कोशिश की। उन्होंने नाम हटाए जाने को राजनीतिक साजिश के तौर पर पेश करते हुए इसे ‘वोटिंग अधिकार छिन जाने’ का मामला बताया, जो राज्य की नीतियों को प्रभावित कर सकता है। अपने इस एकतरफा लेख में कोलकाता के इस तथाकथित ‘स्वतंत्र पत्रकार’ ने खासतौर पर मुस्लिमों को निशाना बनाए जाने की एक काल्पनिक कहानी को ज्यादा उभारने की कोशिश की।

इस आर्टिकल में चालाकी से आँकड़े, भौगोलिक संदर्भ, राजनीतिक बयान और सहानुभूति जगाने वाली व्यक्तिगत कहानियों को इस तरह पेश किया गया है कि पाठक खुद ही इन बिंदुओं को जोड़कर एक कथित साजिश का अंदाजा लगाने लगें। मानो बंगाल के मुस्लिमों के वोटिंग अधिकार छीनने की कोशिश हो रही हो, जो आमतौर पर BJP के खिलाफ वोट करते हैं।

12 अप्रैल 2026 को प्रकाशित BBC के इस आर्टिकल में लिखा गया है, “भारत की बांग्लादेश के साथ 4,096 किलोमीटर लंबी सीमा लगती है, जो काफी हद तक खुली और कुछ हिस्सों में नदी के किनारे-किनारे गुजरती है। इसका एक बड़ा हिस्सा बंगाल से होकर जाता है। यही वजह है कि राज्य में प्रवासन और मतदाता सूची को लेकर होने वाली बहस को एक संवेदनशील और राजनीतिक रूप दे दिया गया है।”

स्निगधेंदु भट्टाचार्य ने इशारों-इशारों में यह जताने की कोशिश की कि सुप्रीम कोर्ट ने सही फैसला नहीं लिया, जब उसने सभी ‘विवाद सुलझाए बिना ही इस अप्रैल में चुनाव कराने की अनुमति दे दी।’ उन्होंने यह भी लिखा की इस वजह से ‘करीब 27 लाख मतदाताओं का भविष्य अब भी अनिश्चित’ बना हुआ है।

बंगाल SIR में मतदाता हटाना पारदर्शी जाँच या मुस्लिमों का मत छीनने की कोशिश?

गौरतलब है कि दिसंबर 2025 में चुनाव आयोग ने ड्राफ्ट मतदाता सूची से 58.25 लाख नाम हटाए थे। ये वे लोग थे जो या तो मृत पाए गए, कहीं और शिफ्ट हो चुके थे, लंबे समय से अनुपस्थित थे या जिनके नाम दोहराए गए थे। इसके बाद कुल मतदाताओं की संख्या 7.66 करोड़ से घटकर 7.04 करोड़ रह गई। फिर 28 फरवरी को अंतिम सूची से करीब 5 लाख और नाम हटाए गए, जिससे कुल मिलाकर हटाए गए नामों की संख्या करीब 91 लाख के आसपास पहुँच गई।

शुरुआत में 60.06 लाख मतदाताओं को जाँच के दायरे में रखा गया था, जिनमें से लगभग आधे लोग अयोग्य पाए गए। सबसे ज्यादा नाम मुस्लिम बहुल मुर्शिदाबाद जिले में हटाए गए, जहाँ 11 लाख संदिग्ध मतदाताओं में से 4.55 लाख से ज्यादा अयोग्य निकले। मुर्शिदाबाद की सीमा बांग्लादेश से लगती है। यहाँ बांग्लादेशियों की अवैध घुसपैठ और भीड़ जुटाकर हिंसा जैसे मुद्दे लंबे समय से चर्चा में रहे हैं। ऐसे में बड़ी संख्या में अयोग्य मतदाताओं का सामने आना इसी पृष्ठभूमि से जुड़ा माना जा रहा है। मालदा और अन्य सीमावर्ती जिलों में भी कुछ ऐसी ही स्थिति देखने को मिली।

सीमावर्ती इलाकों में बड़ी संख्या में मतदाताओं के नाम हटना और बांग्लादेश से अवैध घुसपैठ की बढ़ती संख्या जैसे संकेत इस बात की ओर इशारा करते हैं कि इन जिलों की धार्मिक जनसंख्या संरचना को बदलने की एक सुनियोजित कोशिश हो सकती है। हालाँकि, इस पूरे मामले पर पर्दा डालने के लिए कुछ इस्लामी-वामपंथी झुकाव वाले गुट यह कहानी गढ़ रहें है कि चुनाव आयोग और BJP मिलकर मुस्लिमों को मनमाने तरीके से वोटिंग अधिकार से वंचित कर रहे हैं।

चुनाव आयोग के आधिकारिक आँकड़े बताते हैं कि हटाए गए ज्यादातर नाम सामान्य श्रेणियों में आते हैं। जैसे मृतक, लंबे समय से अनुपस्थित, स्थायी रूप से कहीं और शिफ्ट हो चुके लोग, दिए गए पते पर न मिलने वाले या फर्जी एंट्रीज। मतदाता सूची में इस तरह की गड़बड़ियाँ आम होती हैं और SIR अभियान का मकसद ही इन्हें ठीक करना था। यह प्रक्रिया सिर्फ बंगाल में ही नहीं, बल्कि अब तक शामिल 13 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में भी इसी उद्देश्य से चलाई गई। ताकि घोस्ट वोटर, पलायन और पुरानी एंट्रीज जैसी समस्याओं को दूर किया जा सके।

SIR में चुनाव आयोग ने तय प्रक्रिया का पालन किया, जबकि उसे राज्य की TMC सरकार के दबाव और विरोध का भी सामना करना पड़ा। लेकिन BBC के आर्टिकल में इस बात का जिक्र तक नहीं है कि चुनाव आयोग के अधिकारी लगातार दबाव में काम कर रहे थे और मालदा में तो न्यायिक अधिकारियों को अपने काम के दौरान इस्लामी भीड़ की हिंसा तक झेलनी पड़ी। जाहिर है, ये बातें उस ‘मुस्लिम पीड़ित’ वाली कहानी में फिट नहीं बैठतीं, जिसे पेश करने की कोशिश की गई है।

BBC के आर्टिकल में दावा किया गया है, “राजनीतिक दलों द्वारा जुटाए गए आँकड़ों के मुताबिक, जिन 27 लाख मामलों पर स्थिति स्पष्ट नहीं है, उनमें करीब 65 प्रतिशत मुस्लिम हैं। कुल मिलाकर हटाए गए 90 लाख नामों में से 31.1 लाख यानी लगभग 34 प्रतिशत मुस्लिम हैं, जो कि 2011 की जनगणना के अनुसार राज्य की 27 प्रतिशत मुस्लिम आबादी से ज्यादा है।”

हालाँकि, BBC की इस कहानी के उलट सच यह है कि जिन 27 लाख मामलों को ‘अभी तय नहीं’ बताया जा रहा है, या जिन 27,16,393 मतदाताओं के नाम हटाए गए। उन्हें बिना जाँच के बाहर नहीं किया गया। बल्कि हर मामले की न्यायिक समीक्षा हुई। इन नामों को कुछ गड़बड़ियों की वजह से चिन्हित किया गया था और करीब 705 न्यायिक अधिकारियों ने इनकी जाँच की। यह पूरी प्रक्रिया हाई कोर्ट की निगरानी में और सुप्रीम कोर्ट की देखरेख में हुई। कुल 60.06 लाख मामलों में से 32.68 लाख लोगों को योग्य माना गया, जबकि 27.16 लाख को अयोग्य घोषित किया गया।

सबसे अहम बात यह है कि जिन लोगों को लगता है कि उनका नाम गलत तरीके से हटाया गया है, उनके लिए आपत्ति दर्ज कराने का रास्ता भी खुला है। इसके लिए 19 खास ट्रिब्यूनल बनाए गए हैं, जहा वे अपील कर सकते हैं।

सुप्रीम कोर्ट ने 23 और 29 अप्रैल 2026 को मतदान कराने की अनुमति जरूर दी है और यह भी कहा कि दूसरे राज्यों में SIR प्रक्रिया ‘सुचारू रूप’ से पूरी हुई, जबकि बंगाल में ‘कानूनी विवादों’ के चलते स्थिति अलग रही। साथ ही, शीर्ष अदालत ने लगातार इस बात पर जोर दिया है कि बिना SIR या चुनाव को रोके पूरी प्रक्रिया में सुरक्षा और तय समयसीमा का ध्यान रखा जाए।

वहीं BBC के आर्टिकल में ‘राजनीतिक दलों’ के आँकड़ों का हवाला देते हुए दावा किया, “हटाए गए 90 लाख नामों में से 3.11 लाख यानी करीब 34 प्रतिशत मुस्लिम हैं, जो कि राज्य की आबादी में उनकी 27 प्रतिशत हिस्सेदारी से ज्यादा हैं।”

लेकिन BBC ने इस बात को नजरअंदाज किया कि कुल संख्या के हिसाब से सबसे ज्यादा नाम हिंदुओं के ही हटाए गए, जो करीब 63 प्रतिशत हैं। यहाँ तक कि कुछ हिंदू बहुल इलाकों जैसे पश्चिम बर्धमान और उत्तर 24 परगना के मतुआ समुदाय वाले क्षेत्रों में भी बड़ी संख्या में नाम हटाए गए। इसके बावजूद BBC का आर्टिकल SIR प्रक्रिया को इस तरह पेश करता है मानो यह बांग्लादेशी मुस्लिम घुसपैठ और किसी ‘मुस्लिम-विरोधी साजिश’ से जुड़ा मामला हो, जिससे राज्य में डर और तनाव का माहौल बन सकता है।

चुनाव आयोग ने साफ कहा है कि नाम हटाने की प्रक्रिया पूरी जाँच के बाद की गई है, न कि किसी खास समुदाय को निशाना बनाने के लिए। मुस्लिम मतदाताओं को जानबूझकर बाहर करने का कोई ठोस सबूत सामने नहीं आया है। इसके बावजूद BBC ने कमजोर दलीलों और अस्पष्ट वजहों के सहारे अपनी साजिश वाली कहानी को सही ठहराने की कोशिश की है।

अगर एक पल के लिए मान भी लें कि चुनाव आयोग और BJP ने मिलकर चुनावी सूची को अपने पक्ष में करने की कोशिश की, तो फिर सवाल उठता है कि खुद को हिंदू समर्थक बताने वाली पार्टी ऐसी प्रक्रिया क्यों होने देंगी, जिसमें हटाए गए नामों में 63 प्रतिशत हिंदू हों? और बंगाल में पहली बार जीत हासिल करने की कोशिश कर रही BJP आखिर ऐसा खुद को नुकसान पहुँचाने वाला कदम क्यों उठाएगी?

इसके बावजूद द वायर, न्यूजलॉन्ड्री, द क्विंट और आर्टिकल-14 जैसे प्लैटफॉर्म्स के लिए लिखने वाले स्निग्धेंदु भट्टाचार्य ने आधिकारिक आँकड़ों या सुप्रीम कोर्ट की निगरानी को तवज्जो देने के बजाए कुछ चुनिंदा उदाहरणों और TMC जैसे दलों के सूत्रों पर ज्यादा भरोसा किया। यहाँ तक कि द क्विंट में अपने एक आर्टिकल में उन्होंने बंगाल के SIR अभियान को ‘घोषित किए बिना लागू किया NRC’ तक बता दिया।

वोटर लिस्ट फ्रीज होने के चलते हटाए गए मतदाता बंगाल चुनाव में नहीं कर सकते वोट

जिन मतदाताओं के नाम स्थायी रूप से हटा दिए गए हैं, उन्हें सिर्फ इस वजह से दोबारा वोट देने की इजाजत नहीं दी जा सकती कि उनमें बड़ी संख्या मुस्लिम हैं। चुनाव आयोग पहले ही बंगाल की मतदाता सूची को फ्रीज कर चुका है यानी जब तक सुप्रीम कोर्ट कोई निर्देश नहीं देता, तब तक इसमें नए नाम नहीं जोड़े जा सकते।

इस बात की पुष्टि 13 अप्रैल 2026 को सुप्रीम कोर्ट ने भी कर दी। CJI सूर्यकांत और जस्टिस जोमल्या बागची की बेंच ने साफ कहा कि जिन लोगों के नाम मतदाता सूची से हटाए जा चुके हैं और जिनकी दोबारा शामिल होने की अर्जी लंबित है, उन्हें आने वाले बंगाल विधानसभा चुनाव में वोट देने की अनुमति नहीं दी जा सकती।

यह टिप्पणी कोर्ट ने उस समय की जब 13 लोगों की याचिका पर सुनवाई हो रही थी, जिन्होंने अपने नाम हटाए जाने के खिलाफ कोर्ट से दखल देने की माँग की थी। हालाँकि, कोर्ट ने उनकी याचिका को ‘समय से पहले’ बताया और उन्हें पहले अपील ट्रिब्यूनल के पास जाने की सलाह दी।

TMC नेता कल्याण बनर्जी ने कोर्ट से कहा था कि करीब 16 लाख लोगों ने अपील की है और उन्हें चुनाव में वोट देने की इजाजत दी जाए। इस पर CJI सूर्यकांत ने साफ शब्दों में कहा, “यह बिल्कुल संभव नहीं है। अगर ऐसा किया गया, तो इशसे जुड़े लोगों के वोटिंग अधिकारों को ही रोकना पड़ेगा।”

वहीं जस्टिस बागची ने बताया कि SIR प्रक्रिया के दौरान करीब 34 लाख अपीलें दायर की गई हैं। कोर्ट ने कहा, “याचिकाकर्ता (कुरैशा यासमीन और अन्य) पहले ही अपील ट्रिब्यूनल के पास जा चुके हैं… ऐसे में हमें लगता है कि उनकी चिंता अभी समय से पहले की है। अगर उनकी माँग मान ली जाती है, तो उसके जरूरी कानूनी परिणाम भी सामने आएँगे।”

कोर्ट ने यह भी साफ किया कि अगर किसी व्यक्ति का नाम जोड़ने का आवेदन 9 अप्रैल 2026 या उसके कुछ दिन बाद मंजूर हो जाता है, तो उसका नाम मतदाता सूची में शामिल हो जाएगा और वह वोट दे सकेगा। लेकिन कोर्ट ने यह भी बिल्कुल स्पष्ट कर दिया कि जिन लोगों के मामले अभी लंबित हैं, उन्हें चुनाव में वोट देने की अनुमति नहीं दी जा सकती है।

BBC आर्टिकल के लेखक की हिंदू-विरोधी, BJP-विरोधी और कभी प्रो-TMC आर्टिकल लिखने की आदत

हालाँकि, स्निधेंदु भट्टाचार्य का बार-बार ‘मुस्लिम-पीड़ित’ वाली कहानी को आगे बढ़ाना हैर करने वाला नहीं है, क्योंकि पहले भी वह हिंदू और हिंदुत्व के खिलाफ लिखे गए आर्टिकल को लेकर चर्चा में रहे हैं।

इतना ही नहीं चुनावों के दौरान उनके TMC के पक्ष में लिखे गए आर्टिकल का भी एक रिकॉर्ड रहा है, जिससे उनकी रिपोर्टिंग पर सवाल उठते रहे हैं।

जहाँ तक बंगाल का सवाल है, यह उन राज्यों में शामिल है जहाँ बांग्लादेश से अवैध घुसपैठ के मामले ज्यादा सामने आते हैं। पिछले तीन साल में 2600 से ज्यादा बांग्लादेशी नागरिकों को पकड़ा गया और वापस भेजा गया है। राज्य के कुल 10 जिले ऐसे हैं जो बांग्लादेश की सीमा से जुड़े हुए हैं। जैसे उत्तर 24 परगना, नदिया, मुर्शिदाबाद, मालदा, उत्तर दिनाजपुर, दक्षिण दिनाजपुर, दार्जिलिंग, कूचबिहार और जलपाईगुड़ी। ऐसे सीमावर्ती इलाकों में घुसपैठ और उससे जुड़े मुद्दे लंबे समय से चिंता का विषय रहे हैं।

सीमा के दोनों ओर रहने वाले लोगों की जातीय और भाषा की समानता की वजह से आवाजाही को पकड़ना हमेशा मुश्किल रहा है। इसी का फायदा उठाकर कई बांग्लादेशी घुसपैठिए, जिनमें ज्यादातर मुस्लिम बताए जाते हैं, यहाँ स्थानीय पहचान पत्र बनवाने और मतदाता सूची में अपने नाम जुड़वाने में सफल हो जाते हैं। ऐसे में SIR जैसे अभियान के जरिए उनकी पहचान करना और उन्हें मतदाता सूची से हटाना एक तरीका माना जा सकता है। लेकिन सवाल यह भी उठता है कि क्या कुछ राजनीतिक दल और उनके समर्थक मीडिया समूह ऐसे लोगों को वोटबैंक के रूप में बनाए रखना चाहते हैं।

पिछले साल भी ऐसा देखा गया था कि जैसे ही नवंबर 2025 में SIR के दूसरे चरण के तहत घर-घर जाकर जाँच की घोषणा हुई, कई अवैध घुसपैठियों में घबराहट फैल गई। कुछ लोगों ने तो यह भी माना कि वे बिना किसी वैध दस्तावेज के भारत में आए थे। इसके बाद अचानक कई लोगों का वहाँ से चले जाना इस बात का संकेत था कि उन्हें पकड़े जाने का डर था।

वहीं, यह भी हैरानी की बात नहीं मानी जा रही कि BBC ने स्निगधेंदु भट्टाचार्य जैसे पत्रकार को मंच दिया, जिन्होंने इस मुद्दे पर ‘मुस्लिम-पीड़ित’ वाली कहानी को आगे बढ़ाया। BBC पर पहले भी भारत और हिंदू समाज से जुड़े मामलों में एकतरफा रिपोर्टिंग के आरोप लगते रहे हैं। चाहे 2022 की लीसेस्टर हिंसा हो, 2020 के दिल्ली दंगे या फिर बांग्लादेश में हिंदुओं के खिलाफ घटनाों की कवरेज।

यह हैरानी की बात नहीं है कि BBC ने स्निगधेंदु भट्टाचार्य जैसे एक पक्षपाती ‘स्वतंत्र पत्रकार’ को मंच दिया, जिन्होंने बंगाल के SIR को लेकर मुस्लिम पीड़ित वाली कहानी पेश की। ब्रिटेन के इस मीडिया संस्थान पर पहले भी कई बार भारत और हिंदू समाज से जुड़े मामलों में एकतरफा रिपोर्टिंग के आरोप लग चुके हैं। चाहे 2022 में लीसेस्टर की हिंसा की कवरेज हो, 2020 के दिल्ली दंगों की रिपोर्टिंग या फिर हिंदू-घृणा वाले पाकिस्तान के फील्ड मार्शल आसिम मुनीर जैसे लोगों को नरम छवि में दिखाना। इन सभी मामलों में उस पर सवाल उठे हैं।इसके अलावा ईरान युद्ध से पैदा हुए वैश्विक ऊर्जा संकट के दौरान भारत के तेल भंडार को लेकर डर फैलाने वाली खबरें हो या 2024 में बांग्लादेश में हिंदू-विरोधी नरसंहार को छिपाने का प्रयास करने जैसे उदाहरण हों।

(मूलरूप से यह रिपोर्ट अंग्रेजी में लिखी गई है, जिसे पढ़ने के लिए इस लिंक पर क्लिक करें।)

प्राइवेट पार्ट पर बात, मौलवी से मुलाकात, गंदे इशारे और देवी-देवताओं का अपमान: पढ़िए नासिक TCS मामले में मुस्लिम गैंग कैसे करते थे हिंदू महिलाओं को परेशान, 9 FIR की सारी डिटेल्स

नासिक के अशोका मार्ग पर स्थित टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज (TCS) के बीपीओ यूनिट से हिंदू महिला कर्मचारियों के साथ यौन उत्पीड़न, शारीरिक दुर्व्यवहार और धर्म के आधार पर भेदभाव का एक बेहद परेशान करने वाला मामला सामने आया। महज 48 घंटों के भीतर, मुंबई नाका पुलिस स्टेशन में एक ही विभाग के पाँच मुस्लिम पुरुष कर्मचारियों के खिलाफ कई FIR दर्ज की गई हैं। ऑपइंडिया (OpIndia) के पास मौजूद इन FIR की कॉपियों से पता चला है कि इस BPO में काम करने वाली हिंदू महिलाएँ पिछले कई सालों से यौन शोषण और धार्मिक प्रताड़ना का शिकार हो रही थीं।

इन मामलों में आरोपित शाहरुख कुरैशी, रजा मेमन, आसिफ अंसारी, तौसीफ अत्तर और शफी शेख सभी ओडीसी-02 (ODC-02) यूनिट से जुड़े हैं, जो कॉलिंग के जरिए एक्सिस बैंक क्रेडिट कार्ड कलेक्शन का काम संभालते हैं। दर्ज की गई शिकायतों में तीन हिंदू महिला कर्मचारियों (जिनमें दो 23 साल की सहयोगी और एक 36 साल की टीम लीडर) ने दफ्तर के बेहद खराब माहौल का जिक्र किया है। उन्होंने बताया कि वहाँ लगातार यौन उत्पीड़न, निजी जिंदगी को लेकर बेतुके सवाल, गलत तरीके से छूने की कोशिश और हिंदू धार्मिक मान्यताओं पर अपमानजनक टिप्पणियाँ की जाती थीं।

(FIR नंबर: 156/2026) हिंदू देवी-देवताओं पर अश्लील टिप्पणी और यौन शोषण

नासिक की TCS कंपनी में काम करने वाली एक 23 वर्षीय हिंदू छात्रा ने सहकर्मी दानिश शेख, तौसीफ अख्तर और निदा खान के खिलाफ यौन उत्पीड़न और धार्मिक प्रताड़ना पर रिपोर्ट दर्ज कराई है। FIR के अनुसार, आरोपित दानिश शेख ने अपने निकाह और दो बच्चों की बात छिपाकर युवती को प्रेम जाल में फँसाया और शादी का झांसा देकर जुलाई 2022 से फरवरी 2026 तक अलग-अलग होटलों में उसका शारीरिक शोषण किया। इस दौरान आरोपित तौसीफ और निदा खान ने पीड़िता को इस्लाम कबूलने के लिए मजबूर किया और शिवलिंग व भगवान कृष्ण सहित हिंदू देवी-देवताओं पर बेहद अश्लील और अपमानजनक टिप्पणियाँ कीं।

हद तो तब हो गई जब तौसीफ अख्तर ने पीड़िता को ब्लैकमेल करते हुए ऑफिस की पेंट्री और लॉबी में यौन उत्पीड़न किया और धमकी दी कि यदि उसने उसकी शारीरिक माँगें पूरी नहीं कीं, तो वह उसके घर वालों को सब बता देगा। इस पूरे मामले में आरोपितों ने न केवल पीड़िता का विश्वास तोड़ा, बल्कि एक सोची-समझी साजिश के तहत उसकी धार्मिक भावनाओं और गरिमा को छलनी किया।

(FIR नंबर: 163/2026) रजा मेमन और शाहरुख पर गंभीर आरोप, हेड अश्विनी पर भी कार्रवाई

नासिक की TCS कंपनी (BPO यूनिट) में काम करने वाली एक 25 वर्षीय शादीशुदा महिला कर्मचारी ने टीम लीडर रजा मेमन और सहकर्मी शाहरुख कुरैशी के खिलाफ यौन उत्पीड़न और मानसिक प्रताड़ना की रिपोर्ट दर्ज कराई। FIR के अनुसार, रजा मेमन मई 2023 से ही पीड़िता को अकेले पाकर गंदी नीयत से छूने, अश्लील पहेलियाँ बुझाने और घूरने जैसी हरकतें कर रहा था। पीड़िता की शादी होने के बाद आरोपित ने उसकी पर्सनल लाइफ पर भद्दे और ‘सेक्सुअली सजेस्टिव’ कमेंट्स किए, जैसे- ‘रात में क्या करती हो कि दिन में नींद आती है?’ और गोवा ट्रिप के नाम पर ‘हनीमून और शराब’ जैसे शर्मनाक सवाल पूछे।

ऑपइंडिया द्वारा प्राप्त FIR की कॉपी

शिकायत में यह भी आरोप है कि जब पीड़िता ने विरोध किया, तो टीम लीडर रजा ने उसका नाम ऑफिस बॉय से जोड़कर चरित्र हनन किया और दानिश-तौसीफ के साथ मिलकर उस पर काम का बोझ बढ़वा दिया। हद तो तब हो गई जब गुड़ी पड़वा पर साड़ी पहनकर आने पर शाहरुख ने उसे गंदी नजरों से देखा और अश्लील टिप्पणी की। पीड़िता का सबसे गंभीर आरोप कंपनी की ऑपरेशनल हेड अश्विनी चौनानी पर है, जिन्होंने बार-बार शिकायत के बावजूद कोई एक्शन नहीं लिया, बल्कि आरोपितों का साथ देकर पीड़िता की आवाज दबाने की कोशिश की।

(FIR नंबर: 164/2026) हिंदू महिलाओं के अंगों को घूरते थे मुस्लिम कर्मचारी, मिसकैरेज होने पर जबरन ‘अजमेर के मौलवी’ के पास भेजने का दबाव

नासिक की TCS कंपनी में एक 36 वर्षीय हिंदू महिला टीम लीडर ने मुस्लिम सहकर्मियों के एक खास गुट पर धार्मिक प्रताड़ना और यौन उत्पीड़न का सनसनीखेज आरोप लगाया। FIR के अनुसार, शफी शेख, तौसीफ अत्तर, दानिश शेख, रज़ा मेमन और शाहरुख कुरैशी जैसे मुस्लिम कर्मचारी दफ्तर में एकजुट होकर गैर-मजहबी लड़कियों और लड़कों को चुन-चुनकर निशाना बनाते हैं। पीड़िता ने बताया कि आरोपित शफी शेख मीटिंग के दौरान सार्वजनिक रूप से उसके प्राइवेट पार्ट्स (छाती) को गंदी नजरों से घूरता था और विरोध करने पर गंदी मुस्कान देता था, जिसकी शिकायत के बावजूद उसे सिर्फ दूसरे विभाग में भेज दिया गया जहाँ से वह लगातार पीड़िता का पीछा करता रहा।

ऑपइंडिया द्वारा प्राप्त FIR की कॉपी

हद तो तब पार हो गई जब फरवरी 2026 में पीड़िता का मिसकैरेज (गर्भपात) हुआ, तो तौसीफ अत्तर ने उसकी व्यक्तिगत पीड़ा का मजाक उड़ाते हुए उसे ‘अजमेर के मौलवी’ का नंबर दिया और जबरन वहाँ जाने का दबाव बनाया। आरोपितों पर आरोप है कि वे दफ्तर में हिंदू लड़कियों पर अश्लील कमेंट करते हैं, उन्हें सिर से पैर तक गंदी नजरों से घूरते हैं और उनकी निजी जिंदगी में दखल देकर उन्हें मजहबी आधार पर प्रताड़ित और शर्मिंदा करते हैं।

(FIR नंबर: 165/2026) हिंदू देवी-देवताओं पर भद्दी टिप्पणी और महिला कर्मचारी को प्राइवेट पार्ट दिखाकर किया यौन उत्पीड़न

नासिक की TCS कंपनी में कार्यरत 25 वर्षीय हिंदू महिला कर्मचारी ने बिजनेस प्रोसेस लीडर तौसीफ अत्तर के खिलाफ यौन प्रताड़ना और हिंदू धर्म के अपमान की FIR दर्ज कराई। FIR के अनुसार, आरोपित तौसीफ दफ्तर में हिंदू लड़कियों को सिर से पैर तक घूरता और उनके अंगों को देखकर आँखें मारता था। पीड़िता ने बताया कि तौसीफ आने-जाने वाली लड़कियों के फिजिकल साइज पर भी बात करता था। हद तो तब पार हो गई जब दिसंबर 2025 में पीड़िता को छाछ पीते देख आरोपित ने अपने प्राइवेट पार्ट की ओर इशारा करते हुए बेहद अश्लील टिप्पणी की और कहा- ‘मेरे पास भी छाछ है, तुझे चाहिए क्या?’

ऑपइंडिया द्वारा प्राप्त FIR की कॉपी

यही नहीं, आरोपित ने दफ्तर में हिंदू धर्म और आस्था पर भी जहरीला हमला बोला। पीड़िता की टेबल पर रखी महादेव की मूर्ति को देखकर मुझसे पूछा कि क्या महादेव सच में भगवान हैं? अगर पार्वती ने गणपति को बनाया, तो महादेव को इसके बारे में क्यों नहीं पता? गणेश सच में महादेव के बेटे है? यह कहते हुए तौसीफ ने देवी पार्वती के चरित्र पर कीचड़ उछाला। इसके अलावा, उसने भगवान ब्रह्मा के लिए भी टिप्पणी कर कहा कि ब्रह्मा अपनी ही बेटी का रेपिस्ट है। और प्रभु श्री राम व माता सीता के बारे में अपमानजनक बातें कहीं कि उन्होंने वनवास में मांस खाया होगा, वे कंद खाकर नहीं रह सकते। तौसीफ ने जहर उगलते हुए हिंदू देवताओं को ‘झूठा’ और ‘दिखावे वाला’ बताया और इस्लाम को श्रेष्ठ साबित करने के लिए हिंदू भावनाओं को बुरी तरह कुचला।

(FIR नंबर: 166/2026) हिंदू कर्मचारी को जबरन खिलाया नॉन-वेज, पत्नी के लिए बोली बेहद शर्मनाक बात

नासिक की TCS कंपनी में काम करने वाले एक वरिष्ठ विश्लेषक ने सहकर्मी तौसीफ अत्तर, दानिश शेख, शाहरुख शेख और रजा मेमन के खिलाफ FIR दर्ज कराई। FIR के अनुसार, ये आरोपित दफ्तर में एक संगठित गिरोह की तरह काम करते थे और हिंदू कर्मचारियों को निशाना बनाकर उनका धर्मांतरण कराने का दबाव डालते थे। पीड़ित, जो रुद्राक्ष की माला पहनते हैं और धार्मिक मार्ग पर चलते हैं, उन्हें आरोपितों ने मानसिक रूप से प्रताड़ित किया। आरोपितों ने छत्रपति संभाजी महाराज को ‘इस्लाम का गुलाम’ बताकर अपमानित किया। हद तो तब हो गई जब आरोपितों ने पीड़ित के शाकाहारी होने के बावजूद उन्हें देर रात जबरन नॉन-वेज खिलाया और मना करने पर जान से मारने की धमकी दी।

ऑपइंडिया द्वारा प्राप्त FIR की कॉपी

इस गिरोह की दरिंदगी यहीं नहीं रुकी। जब आरोपितों को पता चला कि पीड़ित की संतान नहीं हो रही है, तो तौसीफ और दानिश ने सारी मर्यादाएँ लाँघते हुए घटिया टिप्पणी की। आरोपितों ने पीड़ित से कहा, “दवा से बच्चे नहीं हो रहे, तो अपनी पत्नी को हमारे पास भेज दो।” इसके अलावा, पीड़ित को धोखे से घर ले जाकर जबरन टोपी पहनाई गई, कलमा पढ़वाया गया और उसकी तस्वीरें वायरल कर दी गईं। FIR में यह भी आरोप है कि ये आरोपित दफ्तर की महिलाओं को देखकर गंदे कमेंट्स करते थे और कहते थे कि ‘तुम जो भी पसंद करोगी, उसे खुश करना होगा।’ जब पीड़ित ने इस धर्मांतरण और उत्पीड़न का विरोध किया, तो उसे जान से मारने की धमकी दी गई और काम के बहाने प्रताड़ित किया गया।

(FIR नंबर: 167/2026) हिंदू महिला के अंगों को हाथ से छुआ, भगवान कृष्ण को बताया ‘औरतबाज’

नासिक की TCS कंपनी में 25 वर्षीय हिंदू महिला कर्मचारी (जो एक पावरलिफ्टर भी हैं) ने आसिफ अंसारी, शफी शेख और तौसीफ अत्तर के खिलाफ FIR दर्ज कराई। FIR के मुताबिक, आरोपित आसिफ अंसारी ने पीड़िता की छाती को सरेआम घूरते हुए अश्लील सवाल पूछा, “तुम्हारी पसंद छोटी है या बड़ी?” पीड़िता के वजन और शरीर की बनावट का मजाक उड़ाते हुए आरोपित तौसीफ और आसिफ उस पर गंदे कमेंट्स करते थे। दिसंबर 2024 में आरोपित शफी शेख ने पीड़िता के पास बैठकर पैर से पैर रगड़ा और काम सिखाने के बहाने उसके सीने और प्राइवेट पार्ट्स को हाथ से छुआ। जब पीड़िता ने विरोध किया, तो आरोपित गंदी मुस्कान देकर वहाँ से चला गया।

ऑपइंडिया द्वारा प्राप्त FIR की कॉपी

यही नहीं, आरोपितों ने दफ्तर के माहौल को मजहबी जहर से भर दिया था। आरोपित तौसीफ अत्तर ने हिंदू आस्था को चोट पहुँचाने के लिए भगवान कृष्ण को ‘औरतबाज’ कहा और भगवान शिव व माता पार्वती के रिश्ते पर निहायत ही गंदी और अश्लील टिप्पणी की। पीड़िता का आरोप है कि ये आरोपित दफ्तर में एकजुट होकर हिंदू लड़कियों को उनके शरीर और धर्म के आधार पर शर्मिंदा करते थे।

(FIR नंबर: 168/2026) नई नवेली हिंदू दुल्हन से ‘हनीमून’ पर अश्लील सवाल, भगवान ‘नंगे’ रहने पर टिप्पणी

नासिक की TCS कंपनी से एक 23 वर्षीय विवाहित हिंदू महिला कर्मचारी ने शाहरुख कुरैशी, रजा मेमन, आसिफ अंसारी, तौसीफ अत्तर और शफी शेख के खिलाफ सामूहिक उत्पीड़न की FIR दर्ज कराई। FIR के अनुसार, पीड़िता की शादी के महज एक महीने बाद ही टीम लीडर रजा मेमन और शाहरुख कुरैशी ने उसे दफ्तर में घेर लिया और उसके हनीमून को लेकर गंदे और अश्लील सवाल पूछे लगे, जैसे- ‘हनीमून पर क्या किया? क्या तुम्हारे पति ने तुम्हें गाजर दी?’ आरोपितों ने पीड़िता का नाम ‘प्लेयर’ रख दिया था और उसे अपने पति को छोड़कर दूसरा बॉयफ्रेंड बनाने के लिए मजबूर किया।

ऑपइंडिया द्वारा प्राप्त FIR की कॉपी

प्रताड़ना का सिलसिला यहीं नहीं रुका। आरोपित आसिफ अंसारी दफ्तर में पीड़िता को जबरन गले लगा लेता था, उसकी कमर, पेट और जाँघों को गंदी नीयत से छूता था और उसके अंदर के कपड़ों (innerwear) के साइज के बारे में भद्दी बातें पूछता था। आरोपित तौसीफ अत्तर भी काम सिखाने के बहाने पीड़िता के अंगों पर हाथ फेरता था और ‘संतरे छोटे हैं या बड़े’ जैसी अश्लील टिप्पणियाँ करता था। आरोपितों ने हिंदू धर्म पर भी जहर उगला। आसिफ अंसारी ने कहा कि ‘तुम्हारे भगवान नंगे घूमते हैं और तुम लोग नकाब नहीं पहनती, इसीलिए तुम हिंदुओं का रेप होता है।’ गुड़ी पड़वा के दिन आरोपितों ने पीड़िता की साड़ी का पल्लू तक खींच लिया। इन दरिंदों ने पीड़िता को मानसिक और शारीरिक रूप से प्रताड़ित किया, जिससे वह दफ्तर जाने से भी डरने लगी थी।

(FIR नंबर: 169/2026) महिला कर्मचारी की बीमारी का मजाक उड़ाया, प्राइवेट पार्ट और ‘फिजिकल रिलेशन’ पर पूछते अश्लील सवाल

नासिक की TCS कंपनी से एक 23 वर्षीय हिंदू महिला कर्मचारी ने शफी शेख, रजा मेमन और शाहरुख कुरैशी के खिलाफ FIR दर्ज कराई। FIR के अनुसार, ट्रेनिंग के बहाने आरोपित शफी शेख पीड़िता को घेर लेता था और काम की जगह उसकी निजी जिंदगी पर गंदे सवाल पूछता था। शफी पीड़िता से पूछता था कि ‘क्या तुम्हारे अपने बॉयफ्रेंड के साथ फिजिकल रिलेशन (शारीरिक संबंध) रहे हैं?’ और ‘क्या तुम रात को सोई या नहीं?’। हद तो तब हो गई जब अगस्त 2025 में आरोपित ने कैंटीन में पीड़िता को अकेला पाकर जबरन ‘गर्लफ्रेंड’ बनने का दबाव बनाया, जिससे डरकर पीड़िता रोने लगी।

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शिकायत के मुताबिक, जब पीड़िता ने इसकी शिकायत अपने टीम लीडर रज़ा मेमन से की, तो उसने आरोपित शफी के खिलाफ एक्शन लेने के बजाय उसे शह दी और खुद भी पीड़िता का शोषण शुरू कर दिया। रजा मेमन ने पीड़िता की बीमारी (PCOD) का मजाक उड़ाते हुए उसके शरीर पर भद्दी टिप्पणियाँ कीं और उसे जिम जाने व फेशियल कराने की सलाह देते हुए गंदी नीयत से छूने की कोशिश की। आरोपित शाहरुख कुरैशी ने भी पीड़िता को व्यवस्थित ट्रेनिंग न देकर उसे शफी के हवाले कर दिया ताकि वे मिलकर उसे प्रताड़ित कर सकें। पीड़िता ने बताया कि आरोपित उस पर नजर रखते थे और उसे शारीरिक संबंध बनाने के लिए उकसाते थे, जिससे वह दफ्तर में असुरक्षित महसूस करने लगी थी।

(FIR नंबर: 171/2026) हिंदू युवती के शरीर पर भद्दे कमेंट्स, गुड़ी पड़वा पर ड्रेस को लेकर उड़ाया मजाक और डाली गंदी नजर

नासिक की TCS कंपनी से 23 वर्षीय हिंदू पीड़िता ने रजा मेमन और शाहरुख कुरैशी के खिलाफ FIR दर्ज कराई है। FIR के अनुसार, शाहरुख कुरैशी पीड़िता को अकेले पाकर जबरन उसकी पर्सनल लाइफ, बॉयफ्रेंड और ‘एक्स’ के बारे में अश्लील सवाल पूछता था और माता-पिता की गैरमौजूदगी का फायदा उठाकर उसे अपने साथ घूमने चलने के लिए दबाव डालता था। आरोपित रजा मेमन ने पीड़िता के शरीर पर भद्दे कमेंट्स करते हुए उसे ‘शेप में आने’ और जिम जाने जैसी शर्मनाक बातें कहीं।

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प्रताड़ना की हद तब पार हो गई जब 19 मार्च 2026 को गुड़ी पड़वा के पावन अवसर पर पीड़िता नई ड्रेस पहनकर ऑफिस आई। आरोपित रजा मेमन ने उसे सबके सामने बुलाकर सिर से पैर तक गंदी नजर से घूरा और हिंदू त्योहारों का अपमान करते हुए ताना मारा कि ‘क्या तुम पूजा नहीं करती, बस तैयार होकर ऑफिस आ जाती हो?’ आरोपितों ने दफ्तर में ऐसा खौफ पैदा कर रखा था कि पीड़िता शिकायत करने से भी डरती थी। पीड़िता का आरोप है कि ये लोग उस पर लगातार नजर रखते थे और गंदे इशारे कर उसे शारीरिक संबंध बनाने के लिए उकसाते थे।

नासिक TCS कंपनी से सामने आई यह रिपोर्ट न केवल यौन उत्पीड़न और मानसिक प्रताड़ना की पराकाष्ठा है, बल्कि एक इस्लामिक संगठित गिरोह द्वारा हिंदू आस्था और मानवाधिकारों पर किया गया गहरा प्रहार भी है। दफ्तर जैसे पेशेवर माहौल को मजहबी कट्टरता, लव जिहाद और धर्मांतरण की साजिशों का अड्डा बनाना समाज के लिए एक गंभीर चेतावनी है। यह बेहद शर्मनाक है कि जहाँ महिलाओं की सुरक्षा और सम्मान प्राथमिकता होनी चाहिए थी, वहाँ उनकी धार्मिक पहचान को हथियार बनाकर उन्हें शारीरिक और मानसिक रूप से छलनी किया गया।

‘मैनेजर को मारो और सुलगाओ शहर’: मानेसर से नोएडा तक मजदूरों की आड़ में छिपकर हो रही हिंसा की साजिश, जानें- वॉट्सऐप-इंस्टा-X पर क्या मिले सबूत?

नोएडा में मजदूरों के वेतन वृद्धि समेत ज्यादातर माँगों को सरकार ने मान लिया है और उसे 1 अप्रैल 2026 से लागू भी कर दिया है। इसके बावजूद मजदूरों का हिंसक प्रदर्शन जारी है। मंगलवार (14 अप्रैल 2026) को प्रदर्शनकारियों ने 2 से 3 जगहों पर पुलिस की गाड़ियों पर पथराव किया और आगजनी की।

अब सवाल उठ रहा है कि सरकार जब मजदूरों के असंतोष का पता चलते ही एक्शन में आ गई, उनके साथ संवाद किया और सुनिश्चित किया कि उनकी माँगे पूरी हों, इसके बाद भी आगजनी और पथराव की घटनाएँ हो रही है, तो सवाल उठता है कि इसके पीछे कोई साजिश तो नहीं…

हिंसा का नक्सली और पाकिस्तानी कनेक्शन की आशंका

साजिश का तो जाँच के बाद में पता चलेगा, लेकिन मुख्यमंत्री ने आशंका जताई है कि ये नक्सलवाद को फिर से जीवित करने का प्रयास हो सकता है। सीएम ने कहा कि देश में नक्सलवाद खात्मे के कगार पर है, लेकिन इसे पुनर्जीवित करने की कोशिश हो सकती है।

प्रदर्शनकारियों में भ्रामक और विघटनकारी तत्व भी शामिल हो सकते हैं। उन्होंने कहा कि जो वास्तव में मजदूर हैं, उनसे ही बातचीत की जानी चाहिए। अक्सर बाहरी लोग मजदूर के प्रतिनिधि बनकर आंदोलन में घुसपैठ करते हैं।

वहीं श्रम मंत्री अनिल राजभर ने हिंसक प्रदर्शन के मद्देनजर पाकिस्तान लिंक की भी जाँच करने की बात कही थी। उन्होंने हिंसा को सुनियोजित साजिश करार दिया है। उनका कहना है कि मेरठ और नोएडा से 4 आतंकियों को गिरफ्तार किया गया है, जिनका पाकिस्तान कनेक्शन सामने आया है।

सरकार के आला अधिकारी आलोक कुमार ने कहा है कि मजदूरों का प्रदर्शन हिंसक होने के पीछे खुफिया जानकारी मिली है कि कुछ अराजक तत्व मजदूरों की आड़ में हिंसा फैला रहे हैं। राज्य में उद्योगों को लेकर योगी सरकार ने सकारात्मक माहौल बनाया है। कानून व्यवस्था दुरुस्त किया गया है। साजिश कर इसे बिगाड़ने की कोशिश की जा रही है।

गलत वीडियो और जानकारी सोशल मीडिया पर शेयर की गई

डीजीपी राजीव कृष्ण, जो लखनऊ कंट्रोल रूम से मॉनिटरिंग कर रहे हैं, ने कहा है कि अफवाह फैलाने वाले कई ग्रुप को चिन्हित किया गया है। कुछ ऐसे लोग भी हैं, जो अलग-अलग जगहों पर भी पाए गए हैं। अफवाहें फैलाने वाले दो एक्स हैंडल के खिलाफ एफआईआर दर्ज की गई हैं। इसके अलावा 50 से अधिक एक्स हैंडल की पहचान की गई है, जिनमें से कई पिछले 24 घंटों में बनाए गए हैं। अब उनकी जाँच होगी।

इतना ही नहीं, यूपी पुलिस ने सोशल मीडिया पर शेयर किए जा रहे वीडियो को गलत बताते हुए कहा है कि यह वीडियो मध्यप्रदेश के शहडोल जिले की घटना का है। इसे गौतमबुद्ध नगर का बताकर सोशल मीडिया अकाउंट्स से प्रसारित किया जा रहा है, जो पूर्णतः असत्य है।

यूपी पुलिस ने किसी भी वीडियो या जानकारी को साझा करने से पहले उसकी सत्यता जानने की जरूरत पर बल दिया है। इसके अलावा NDTV की रिपोर्ट के मुताबिक, एक ऑडियो क्लिप में एक शख्स लोगों से कहता सुनाई दे रहा है कि मंगलवार को फिर से पुलिस पर हमला करना है और लाठीचार्ज करवाना है, क्योंकि कई लोग पहले दिन घायल हुए थे। इस ऑडियो में शख्स कह रहा है कि हमारे बहुत से बहन-भाई घायल हुए हैं और इसीलिए आप लोग सुबह आने की कृपा करें।

इसी के साथ कुछ चैट्स में प्रदर्शनकारियों को मिर्ची पाउडर साथ लाने की सलाह दी गई ताकि जरूरत पड़ने पर उसका इस्तेमाल किया जा सके। एक मैसेज में लिखा गया कि अगर पुलिस लाठी उठाए तो मिर्ची पाउडर काम आएगा और ज्यादा से ज्यादा लोग इसे लेकर आएँ। वहीं कुछ लोग यह भी कह रहे हैं कि जब तक उनकी माँगें पूरी नहीं होंगी तब तक हड़ताल जारी रहेगी।

अब नोएडा का मामले में साजिश का पता तो जाँच पूरी होने के बाद चलेगा, लेकिन मानेसर को लेकर जो रिपोर्ट आई है उसने साफ हो गया है कि यहाँ मजदूरों की आड़ में साजिश के तहत हिंसा भड़काई गई।

मानेसर में रची गई गहरी साजिश का हुआ खुलासा

9 अप्रैल 2026 को गुरुगाम के मानेसर में आईएमटी कंपनी में वेतन वृद्धि की माँग लेकर मजदूरों ने प्रदर्शन किया। इस दौरान 300 से 400 की भीड़ जमा हो गई और कंपनी प्रबंधन के साथ-साथ पुलिस पर पथराव किया। घटना की जाँच के दौरान पता चला है कि व्हाट्स एप पर ग्रुप बनाई गई थी, जिसमें मैनेजर रामबीर को मारने की बात थी और फिर दंगा भड़काने की साजिश की गई थी। इस मैसेज में लिखा था कि रामबीर को बाहर लेकर आओ।

(साभार- दैनिक भास्कर)

दूसरे मैसेज में रात तक इंतजार करने और फिर आग लगाने को कहा गया था। दरअसल साजिशकर्ता चाहते थे कि रात के अंधेरे का फायदा उठा कर काम को अंजाम दिया जाए। इतना ही नहीं मैसेज से पता चलता है कि पेट्रोल बम से हमले की तैयारी की गई थी। मैसेज में कहा गया है कि ठेके से बीयर की बोतल लेकर आना और पेट्रोल भरकर कंपनी पर फेंक देना। इससे पता चलता है कि साजिश कर मजदूरों की आड में कंपनियों को जलाने और मैनेजर को मारने की योजना थी।

पुलिस का कहना है कि व्हाट्स एप में जिस तरह के मैसेज मिले हैं, उससे पता चलता है कि कितनी बड़ी साजिश रची गई थी। पुलिस इस मामले की गहनता से जाँच कर रही है। जल्द ही ऐसे नकाबपोशों को बेनकाब किया जाएगा, जिन्होंने मजदूरों की आड में हिंसा फैलाने की कोशिश की। इस घटना ने बता दिया है कि कैसे भोलेभाले मजदूरों को भड़का कर, उन्हें विरोध प्रदर्शन के लिए उकसा कर अपनी रोटी सेंकने की कोशिश अराजक तत्व करते हैं।

AMU के हॉस्टल से मिले जाली नोट और कारतूस, शहबाज फरार: पढ़ें- कैसे पहली बार नहीं है यूनिवर्सिटी में संदिग्धों की तलाश, आतंकी मॉड्यूल तक का यहाँ से हो चुका खुलासा

अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी में पढ़ने वाले छात्रों से जुड़े विवाद समय-समय पर सामने आते रहे हैं, और इस बार मामला और भी गंभीर है। एक छात्र, शहबाज, के कमरे से पुलिस को जाली नोट और जिंदा कारतूस मिले हैं। छापेमारी से पहले ही वह फरार हो गया। इसके बाद यूनिवर्सिटी ने 13 अप्रैल को उसे सस्पेंड कर दिया।

पुलिस अब उसकी तलाश कर रही है। जाँच के दौरान 113 संदिग्धों की सूची भी बनाई गई है। इनकी तलाशी ली जाएगी। यह पहली बार नहीं है जब एएमयू का नाम ऐसे मामलों में आया है। इससे पहले भी यहाँ कट्टरपंथ और आतंकी मॉड्यूल से जुड़े मामले सामने आ चुके हैं।

शहबाज की तलाश में पुलिस

अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय में शहबाज एमसीए का छात्र है। पुलिस ने खुफिया जानकारी के आधार पर एएमयू सुरक्षा विभाग के साथ मिलकर कॉलेज हॉस्टल में छापेमारी की थी, इसको लेकर कॉलेज प्रशासन की मदद से एटीएस ने कमरे की छापेमारी की थी। इस दौरान उसके कमरे से 32 बोर पिस्टल की गोलियाँ, 12 बोर हथियार के चार कारतूस, नकली नोट, आठ मोबाइल फोन, खोखे और मैगजीन के अलावा नकली आईडी कार्ड मिले थे, लेकिन शहबाज कमरे में मौजूद नहीं था।

उसका अब तक सुराग नहीं मिल पाया है। पुलिस उसकी तलाश में लगी हुई है। इस बीच यूनिवर्सिटी ने उसे सस्पेंड कर दिया है। बरामद सामानों की फॉरेंसिक जाँच की जा रही है। ये भी पता लगाया जा रहा है कि नकली नोट और छिपाकर रखे गए हथियार किस उद्देश्य के लिए और किसके कहने पर शहबाज ने रखे थे?

कॉलेज के हॉस्टल में छापेमारी हाल ही में हुए सिविल लाइंस क्षेत्र में फायरिंग को लेकर की गई थी। इस मामले में तीन लोगों को गिरफ्तार किया गया था। उनसे पूछताछ में ही शहबाज का नाम सामने आया था।

एएमयू की दो डिग्रियाँ और फर्जी सर्टिफिकेट

शहबाग ने इससे पहले डिप्लोमा इन कैमिकल इंजीनियरिंग करने के लिए भी नामांकन लिया था। उसके पास एएमयू के हाईस्कूल और 12वीं के फर्जी सर्टिफिकेट भी मिले हैं। यूनिवर्सिटी प्रशासन अब उसकी कुंडली खँगाल रही है। ये बात भी सामने आई है कि शहबाज को रूम अलॉट नहीं किया गया था। उसने कमरे पर अवैध रूप से महीनों से कब्जा कर रखा था। वह गैर आवासीय छात्र था।

शहबाज ने अलग-अलग वक्त पर अलग कोर्स में एडमिशन लिया था। उसने डिप्लोमा इन केमिकल इंजीनियरिंग में भी पहले नामांकन लिया था। दूसरी बार एमसीए में नामांकन लिया। उसके कमरे से कई सर्टिफिकेट और दस्तावेज मिले हैं। दो एएमयू की मार्कशीट मिली है, जो फर्जी बताया गया है। वह हाईस्कूल और 12वीं की है। यूनिवर्सिटी ने साफ कहा है कि उसने 12वीं यहाँ से नहीं किया है और वह फर्जी सर्टिफिकेट है। उसे सस्पेंड कर दिया है।

विश्वविद्यालय प्रशासन ने 113 संदिग्धों की लिस्ट बनाई

एएमयू प्रशासन ने कॉलेज में आने जाने वालों पर कड़ी नजर रखने के सख्त हिदायत दिए हैं, साथ ही 113 संदिग्ध और अराजक तत्वों की लिस्ट तैयार की है। कॉलेज प्रशासन का मानना है कि कुछ छात्रों की वजह से पूरी यूनिवर्सिटी का नाम खराब होता है और करीब 26 हजार छात्र-छात्राओं के भविष्य पर असर पड़ता है।

कॉलेज प्रशासन का मानना है कि 99 फीसदी बच्चा पढ़ने आता है। बहुत कम बच्चे हैं, जो कॉलेज किसी और मकसद से आते हैं। उन्हें अलग किया जा रहा है। अब छात्र-छात्राएँ भी गोपनीय तरीके से इनकी जानकारी प्रशासन को दे रहे हैं। यह भी पता लगाया जा रहा है कि कितने स्टूडेंट नियमित कॉलेज आते हैं और कितने बाहरी बच्चें हैं, जो गलत काम में शामिल हैं। उन पर कार्रवाई की जा रही है।

एएमयू के कुछ छात्रों का ISIS कनेक्शन सामने आया था

यह पहला मामला नहीं है जब एएमयू के छात्र संदिग्ध गतिविधियों में लिप्त पाए गए हों। नवबंर 2023 में ISIS मॉड्यूल का अलीगढ़ में भंडाफोड़ हुआ था जिसमें 7 एएमयू के छात्र थे। इसका पता तब चला जब एक फर्जी दस्तावेज और चोरी के मामले में एफआईआर दर्ज हुई थी और उसकी जाँच के दौरान एटीएस को आईएसआईएस मॉड्यूल का पता चला था। इनमें से दो छात्र शाहनवाज और रिजवान एएमयू के छात्र संगठन एसएएमयू के सदस्य थे।

दरअसल छात्र संगठन SAMU पर CAA-NRC विरोधी हिंसा के दौरान ही खुफिया एजेंसियों की नजर थी। उस वक्त भी एटीएस ने एएमयू के कुछ छात्रों को हिरासत में लिया था। इसमें नवंबर 2025 में गिरफ्तार एएमयू के छात्र भी थे।

2023 में सामने आया था मामला

ISIS लिंक को लेकर नवंबर 2023 से फरार चल रहे दो छात्रों, अब्दुल समद मलिक और फैजान बख्तियार पर सरकार ने 25-25 हजार रुपए का इनाम भी घोषित किया था। ये लोग भी SAMU से जुड़े थे।

ATS की FIR के मुताबिक, फैजान बख्तियार और अब्दुल समद मलिक सोशल मीडिया के साथ कई अन्य माध्यमों से ISIS की विचारधारा का प्रचार-प्रसार कर रहे थे। ये दोनों अपने अन्य साथियों के साथ मिल कर कई युवाओं को कट्टरपंथ की राह पर धकेलने की कोशिशों में जुटे थे। इन दोनों को जनवरी 2024 में एटीएस ने गिरफ्तार किया।

दिल्ली में हुई थी कई गिरफ्तारियाँ

अक्टूबर 2023 में दिल्ली पुलिस की क्राइम ब्रांच ने कई आतंकियों को दिल्ली से लेकर अलीगढ़ तक गिरफ्तार किया था। ये आतंकी आईएसआईएस का मॉड्यूल संचालित कर रहे थे। दिल्ली पुलिस के इस ऑपरेशन में पता चला था कि शहनवाज, रिजवान और अरशद नाम के आतंकी, जिसमें शहनवाज पुणे में यूएपीए केस में गिरफ्तारी के बाद से फरार था, वो उत्तरी भारत में आईएसआईएस का पूरा मॉड्यूल खड़ा कर रहे थे और दीपावली के त्योहार के समय कई जगहों पर धमाकों-हमलों की फिराक में थे।

इससे पहले 2023 में ही AMU से पीएचडी करने वाले ISIS आतंकी वजीउद्दीन की छत्तीसगढ़ में गिरफ्तारी हुई थी।

दरअसल एएमयू को आतंकी छिपने का अड्डा बनाते रहे है। हर तरह के कोर्स इस यूनिवर्सिटी में होते हैं। स्कूल से पीएचडी तक की पढ़ाई यहाँ होती है। ऐसे में किसी कोर्स में एडमिशन लेकर छिपना आसान होता है। छात्रों का ब्रेनवॉश कर उन्हें देश विरोधी गतिविधियों में शामिल करना भी तुलनात्मक रूप से आसान होता है, क्योंकि पढ़ने लिखनेवाले छात्र एक साथ रहते हैं और एक-दूसरे पर विश्वास कर लेते हैं। यही वजह है कि कई बार छात्रों के कनेक्शन आतंकियों, कट्टरपंथियों और देश में अराजकता फैलाने वालों से हो जाते है।

मुहर्रम की नंगी तलवारों में जिन वामपंथियों को दिखती है ‘शांति’, हिंदुओं के त्रिशूल वितरण में उनको दिख रहा ‘भय’: तरुण की हत्या The Wire के लिए मामूली विवाद

दिल्ली के उत्तम नगर में होली के दिन हिंदू युवक तरुण कुमार की मुस्लिमों ने पीट-पीटकर हत्या कर दी। तब किसी वामपंथी ने एक शब्द नहीं बोला। परिवार बेसहारा हुआ, तो कोई लेफ्ट लिबरल गैंग का सदस्य उन्हें सांत्वना देने नहीं पहुँचा। पीड़ित होने के बावजूद उन्हीं पर हत्या के इल्जाम लगे। किसी ने आवाज नहीं उठाई। लेकिन जब हिंदू समाज ने तरुण के परिवार के साथ एकजुटता दिखाई तो इस धड़े का हर व्यक्ति बिलबिला उठा।

आज इस घटना को सवा महीने बीतने के बाद भी ये घृणा दबी नहीं है। ‘द वायर’ ने एक आर्टिकल पब्लिश किया है। इसमें उन्होंने मुद्दा इस चीज को लेकर बनाया है कि उत्तम नगर से थोड़ी दूर स्थित अयप्पा पार्क के पास क्यों हिंदू समाज के लोग अब भी एक्टिव हैं, क्यों आसपास कार्यक्रम करवाकर तरुण के मुद्दे को खत्म नहीं होने दिया जा रहा, क्यों कार्यक्रम में आत्मरक्षा के नाम पर छोटे त्रिशूल दिए जा रहे हैं।

अपनी रिपोर्ट में द वायर ने तरुण की हत्या मामले को एक ‘मामूली विवाद’ बताया है। इसके बाद इस बात पर जोर दिया है कि कैसे मुस्लिम परिवार को आरोपित बनाकर उनके घर पर बुलडोजर चलाया गया और स्थिति ऐसी कर दी गई कि उन्हें घर छोड़कर वहाँ से निकलना पड़ा। आगे ये दिखाने की कोशिश हुई है कि एक तरफ तो मुस्लिम परिवार के साथ ये सब हुआ और दूसरी ओर अब हिंदू समाज के लोग यहाँ कार्यक्रम कर रहे हैं।

द वायर को ‘त्रिशुल दीक्षा’ के जमीन पर मायने अलग लग रहे

द वायर ने इस कार्यक्रम की ग्राउंड रिपोर्ट के आधार पर यह आर्टिकल लिखा है और वह इस आर्टिकल में संगठन के हवाले से बता रहा है कि यह ‘त्रिशूल दीक्षा’ कार्यक्रम है, जो ‘संस्कार, सेवा और सुरक्षा’ का संकल्प दिलाने के लिए होता है। इसके बावजूद वह अपनी कमेंटरी से पीछे नहीं हटता और लिखता है- जमीन पर इसके मायने कहीं अधिक जटिल दिखाई देते हैं। मानो किसी को समझ नहीं आ रहा है कि किस ओर इशारा किया जा रहा है।

इस कमेंटरी के बाद वह VHP (इंद्रप्रस्थ) के प्रचार-प्रसार प्रमुख संजीव कुमार के उस बयान को आगे जोड़ देता है, जो उसके हिसाब से इस कमेंटरी के लिए फिट बैठता है। संजीव कुमार का वो बयान, जिसमें वह कहते हैं कि आने वाले दिनों में पूरी दिल्ली में 30 हजार से अधिक त्रिशूल वितरित किए जाने की संभावना है। यहाँ आर्टिकल पढ़ने वाले आम इंसान के मन में ये नैरेटिव गढ़ने की कोशिश की गई है कि अभी तो और त्रिशूल बँटने है, जिनसे जमीन पर मायने पूरी तरह बदल जाएँगे।

तरुण की हत्या से कार्यक्रम को जोड़ा

दिलचस्प बात है कि ये बात जानते हुए कि दिल्ली विश्व हिंदू परिषद त्रिशूल वितरण कार्यक्रम पहली बार नहीं करवा रहा, द वायर ने इसे मुद्दा बनाया। उसके लिए गौर करने वाली बात कार्यक्रम की लोकेशन है। उत्तम नगर में होली के दिन हुई तरुण की हत्या, जिसे असहिष्णु इस्लामी कट्टरपंथियों ने अंजाम दी। इसके बाद जब पीड़ित परिवार के न्याय की बात आई, तो हिंदुओं ने शांतिपूर्ण प्रदर्शन किया। कहीं कोई हिंसा की खबरें नहीं आई।

बावजूद बिना किसी मतलब के द वायर ने ‘त्रिशूल दीक्षा’ कार्यक्रम और तरुण की हत्या को एक खेमे में रखा। उसने नैरेटिव बनाने के लिए अपराधियों का नाम लिए बिना घटना को ‘मामूली’ करार दिया और इसका ठीकरा हिंदुओं पर फोड़ डाला। इतना ही नहीं द वायर को अपराधियों के घर पर बुलडोजर चलने की भी बड़ी चिंता हुई। लेकिन तरुण को न्याय दिलाने के लिए एक शब्द भी बोलना मुनासिब नहीं समझा।

बात रही उत्तर नगर से कुछ दूर पर कार्यक्रम करने की, तो VHP पदाधिकारियों से बातचीत में द वायर खुद बताता है कि ‘उत्तम नगर को इसलिए चुना गया क्योंकि इस जिले का नंबर आया है, और कोई कारण नहीं है।’

द वायर को पता है कि यह कार्यक्रम पहली बार नहीं करवाया जा रहा है, इसके बावजूद बात को तोड़-मरोड़कर पेश कर अपना नैरेटिव गढ़ लिया और लेख के अंत में जाकर लिखा कि ऐसा कार्यक्रम साल 2024 में भी हुआ था और साल 2025 में भी शस्त्र दीक्षा समारोह के तहत 20 हजार लड़कियों को कटार बाँटी गई थी।

कार्यक्रम में भाषण को ‘उग्र’ और मुस्लिम हेट स्पीच को बताया ‘कथित’

अमूमन द वायर ने इस पूरे कार्यक्रम को अपने नैरेटिव के अनुसार कवर किया। कार्यक्रम में शामिल लोगों की हलचल को कैमरे में अपने अनुरूप कैद किया। मंच से दिए गए भाषण को ‘उग्र’ बताकर पेश किया गया। कार्यक्रम में ‘हनुमान चालीसा’ के पाठ से असहजता सामने रखी। तरुण के परिवार की न्याय की माँग को तक अतिवाद का रूप दिया गया।

इतना ही नहीं जमीनी हकीकत को समझने से भी द वायर पीछे नहीं हटा और इसे ‘कथित’ बताकर लिखा गया। चाहे वो हैदराबाद में अकबरुद्दीन ओवैसी का 15 मिनट का भाषण पर की गई टिप्पणी हो, या दिल्ली के त्रिनगर में मुस्लिमों के डर से पलायन को मजबूर हुए हिंदुओं की बात हो।

द वायर का दोहरा रवैया

वामपंथी ‘द वायर’ का इस कार्यक्रम को कवर करने का मंसूबा आर्टिकल के लिखे गए स्टाइल से ही समझ आता है। वह पढ़ने वाले को सोचने के लिए मजबूर कर देता है कि कैसे कार्यक्रम के नाम पर हिंसा के प्रति उकसाया जा रहा है। जबकि हकीकत भी उसने इसी आर्टिकल के कुछ अंशों में साफ झलका दी है। लेकिन तोड़-मरोड़कर पेश किए जाने के चलते एक आम इंसान की सोच पर असर डालने वाला है।

द वायर की सच्चाई किसी से छिपी नहीं है। आज एक हिंदूवादी कार्यक्रम से असहज होने वाला द वायर कभी किसी मुस्लिम जुलूस पर नहीं बोलता। तब इसे समस्या नहीं होती जब मुस्लिम ‘मुहर्रम’ में तलवार लहराकर सड़कों पर निकलते हैं, हाथों में धारदार हथियार दिखते हैं। ऐसे माहौल में सड़क से गुजरने वाला हर आम इंसान डर जाता है। परिवार में माँ-बाप अपने बच्चे को घर से बाहर निकलने से मना कर देते हैं, लड़कियों को बाहर निकलने से खतरा बताया जाता है।

लेकिन द वायर तब बिलखने लगता है कि जब हिंदू कार्यक्रम आयोजित किया जाता है और तस्वीरें खींचने के लिए हाथ में त्रिशूल थामे जाते हैं और सेवाभाव से इसे लोगों में बाँटा जाता है। जबकि इस कार्यक्रम से न कोई आम इंसान घबराता है। न किसी परिवार में माँ-बाप अपने बच्चे को बाहर निकलने से रोकते हैं और न कोई लड़की किसी खतरे को महसूस करती है। यह एकता का प्रतीक और अपने हितों की बात करने से ज्यादा और कुछ नहीं लगता।

300 वर्ष पहले ही भारत में रख दी विकास की नींव, रानी अहिल्याबाई ने बनवाई सड़कें-मंदिर-बाँध: जानिए भारत की एकता में क्या रहा ‘मालवा की रानी’ का योगदान

उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने सोमवार 13 अप्रैल 2026 को मुजफ्फरनगर में रानी अहिल्याबाई होल्कर की भव्य प्रतिमा का अनावरण किया। यह कार्यक्रम जिला अस्पताल चौराहे पर आयोजित हुआ, जहाँ सीएम ने कई विकास परियोजनाओं का भी लोकार्पण किया।

मुजफ्फरनगर में यह अनावरण ₹951 करोड़ की 423 परियोजनाओं के साथ हुआ। सीएम योगी ने लोकमाता अहिल्याबाई के न्यायप्रिय शासन और लोक कल्याण कार्यों की याद दिलाई। यह उनके 300वीं जयंती वर्ष का हिस्सा है। माहेश्वर में अहिल्याबाई होल्कर की मौजूदा प्रतिमा उनके योगदान का प्रतीक है।

महारानी अहिल्याबाई होल्कर की प्रतिमाएँ देश के विभिन्न हिस्सों में स्थापित हो चुकी हैं, जो उनके शासनकाल, धार्मिक योगदान और लोक कल्याण कार्यों की स्मृति को जीवंत रखती हैं।

मध्य प्रदेश के माहेश्वर में नर्मदा तट पर उनकी एक प्रमुख प्रतिमा स्थित है, जो उनके सादगीपूर्ण जीवन और राजधानी के रूप में चुने गए इस स्थान का प्रतीक है। माहेश्वर में स्थित यह प्रतिमा अहिल्याबाई होल्कर के शाही स्वरूप और धार्मिक निष्ठा को खूबसूरती से दर्शाती है।

इंदौर के राजवाड़ा के सामने अहिल्या चौक पर भी एक भव्य प्रतिमा स्थापित है, जिसे लगाने में 36 वर्षों का लंबा संघर्ष हुआ। उत्तर प्रदेश के प्रयागराज में संगम नोएडा पर 12 फीट ऊँची प्रतिमा का अनावरण 2025 में डिप्टी सीएम केशव मौर्य ने किया, जबकि जयपुर के हरिपुरा क्षेत्र के अहिल्याबाई होल्कर उद्यान में 8 फीट की प्रतिमा 2025 में स्थापित हुई।

गुजरात के अहमदाबाद में शहर की पहली प्रतिमा पाल बघेल समुदाय ने स्थापित की, वहीं सोमनाथ में उनकी मंदिर निर्माण की स्मृति में दूसरी प्रतिमा है।

जबलपुर के तिलवाराघाट पर नर्मदा तट के किनारे 2025 में एक और प्रतिमा लोकार्पित हुई। इसके अलावा काशी विश्वनाथ क्षेत्र के मणिकर्णिका घाट पर हाल में स्थानांतरण के बाद उनकी प्रतिमा की पूजा प्रारंभ हुई।

300वीं जयंती वर्ष के अवसर पर कई अन्य शहरों जैसे आगरा आदि में स्थानीय समितियों ने प्रस्ताव दिए हैं। प्रस्तावित प्रतिमाओं की बात करें तो उत्तर प्रदेश के संभल जिले के सद्भावना पार्क में उनकी प्रतिमा लगाने की योजना पर डीएम और एसपी ने 2025 में निरीक्षण किया जो जल्द ही पूरा हो सकता है।

इसके अलावा महाराष्ट्र में पुण्यश्लोक अहिल्याबाई होल्कर स्मारक स्थल पर ₹681 करोड़ की परियोजना के तहत एक भव्य प्रतिमा प्रस्तावित है, जिसमें उनके जीवन से जुड़े स्मारक शामिल होंगे। ये सभी प्रयास अहिल्याबाई के न्यायप्रिय शासन और सांस्कृतिक एकता के संदेश को आगे बढ़ाते हैं।

महारानी से लोकमाता बनने का अहिल्याबाई का सफर

महारानी अहिल्याबाई होल्कर का जीवन भारतीय इतिहास की एक ऐसी प्रेरणादायी कहानी है, जो शासन, धर्म, समाज सुधार और लोक कल्याण का अनुपम उदाहरण प्रस्तुत करती है।

31 मई 1725 को महाराष्ट्र के अहमदनगर जिले के चौंडी गाँव में एक साधारण धांगर परिवार में जन्मीं अहिल्याबाई ने 28 वर्षों तक मालवा साम्राज्य पर शासन किया और पूरे भारत में मंदिरों, घाटों, धर्मशालाओं तथा सड़कों का निर्माण करवाकर सनातन संस्कृति की रक्षा की।

2025 में उनकी 300वीं जयंती पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भोपाल में विकास परियोजनाओं का लोकार्पण किया, स्मारक डाक टिकट और सिक्का जारी किया तथा काशी विश्वनाथ मंदिर में उनकी प्रतिमा स्थापित की गई, जो उनके योगदान का प्रमाण है।

प्रारंभिक जीवन और संघर्ष

अहिल्याबाई का जन्म माकोजी शिंदे और सुशीला बाई के घर हुआ, जहाँ उनके पिता गाँव के पाटिल थे। बचपन से ही धार्मिक प्रवृत्ति की अहिल्याबाई मंदिर सेवा में रुचि रखती थीं। बाजीराव पेशवा के सेनापति मल्हार राव होल्कर ने 1733 में उनका विवाह अपने पुत्र खांडेराव से करवाया लिया।

पति की 1754 में कुम्भेर के युद्ध में मृत्यु के बाद उन्होंने सती होने का संकल्प लिया, किंतु ससुर मल्हार राव ने उन्हें रोककर प्रशासन और युद्धकला सिखाई। 1766 में मल्हार राव तथा 1767 में पुत्र माले राव की मृत्यु के बाद पेशवा से अनुमति लेकर उन्होंने 11 दिसंबर 1767 को इंदौर की गद्दी संभाली।

उनका शासनकाल मराठा साम्राज्य के लिए स्वर्णिम युग सिद्ध हुआ। उन्होंने महेश्वर को राजधानी बनाया, जहाँ नर्मदा तट पर सादा जीवन व्यतीत किया। व्यक्तिगत खजाने से ही उन्होंने कई लोक कल्याण कार्य किए।

अहिल्याबाई का मानना रहा कि राज्य कोष का दुरुपयोग न किया जाए। ब्रिटिश अधिकारी सर जॉन माल्कम ने उनकी प्रशंसा करते हुए कहा कि वे न्याय की मूर्ति थीं तथा प्रजा के दुख-दर्द को स्वयं सुनती थीं।

शासन प्रणाली और प्रशासनिक कुशलता

अहिल्याबाई का शासन कल्याणकारी राज्य का प्रतीक था। उन्होंने दैनिक दरबार लगाकर प्रजा की समस्याएँ सुनीं तथा न्याय निःशुल्क प्रदान किया। जाति, धर्म भेदभाव के बिना उन्होंने ब्राह्मण, मराठा, बहुजन, मुस्लिम सबको सभी को समान अवसर दिया। टिपू सुल्तान के राज्य से ब्राह्मणों ने शरण ली, निजाम के क्षेत्रों में भी शांति बनी रही।

उन्होंने सैन्य शक्ति पर ध्यान दिया। 1792-93 में अमेरिकी जनरल बॉयड को राज्य में नियुक्त कर ब्रिटिश शैली की ड्रिल सेना गठित की। साथ ही पेशवा को पत्र लिखकर सैन्य सुदृढ़ीकरण की सलाह दी।

उनके शासन से मालवा आर्थिक दृष्टि से काफी समृद्ध हुआ। कर-व्यवस्था बेहतर हुई। व्यापार को भी प्रोत्साहन मिला। उन्होंने माहेश्वरी साड़ियों का उद्योग स्थापित कर स्थानीय आदिवासी महिलाओं को प्रशिक्षित किया, जिससे वे आत्मनिर्भर बनीं। इसके अलावा किसानी में मिश्रित फसलें, मसाले, बागवानी को बढ़ावा दिया। साथ ही बीज परीक्षण, जल संरक्षण, तालाब, बाँध पर जोर दिया।

रानी अहिल्याबाई ने माहेश्वर को सांस्कृतिक केंद्र बनाया। वहाँ कवि, कलाकार, विद्वानों को संरक्षण मिली। उन्होंने पुस्तकालय स्थापित कर धार्मिक ग्रंथों की प्रतिलिपियाँ बनवाईं।

इसके अलावा महिलाओं के लिए क्रांतिकारी कदम उठाए। विधवा के लिए पुनर्विवाह को प्रोत्साहन दिया, संपत्ति में अधिकार, शिक्षा तथा सेना में भर्ती जैसे कई विस्तार में महिलाओं को अग्रणी रखने में उनकी सर्वाधिक भूमिका रही।

धार्मिक योगदान और सांस्कृतिक पुनरुत्थान

अहिल्याबाई ने मुगल आक्रमणों से क्षतिग्रस्त मंदिरों का पुनर्निर्माण कराया। काशी विश्वनाथ (1780), ज्ञानवापी क्षेत्र में कार्य, सोमनाथ (अहिल्याबाई मंदिर के नाम से प्रसिद्ध), केदारनाथ, बद्रीनाथ, त्र्यंबकेश्वर, ओंकारेश्वर, महाकालेश्वर आदि 12 ज्योतिर्लिंगों से जुड़े स्थलों का निर्माण करवाया।

इसके अलावा काशी में मणिकर्णिका घाट, दशाश्वमेध घाट, लोलार्क कुंड का निर्माण करवाया। काशी के साथ हरिद्वार में घाट-धर्मशाला बनवाई, गया में विष्णुपद मंदिर, वृंदावन में बावड़ी और भोजनालय बनवाए और पुरी में छत्र दान का निर्माण करवाया।

उन्होंने काशी से लेकर कोलकाता तक जाने वाली देशव्यापी सड़कें, पुल और देश भर में तालाब बनवाए। गर्मियों में लोगों की सहूलियत के लिए प्याऊ लगवाए और सर्दियों में लोगों के बीच गर्म कपड़ों के वितरण को बढ़ावा दिया। यहाँ तक कि चिड़ियों और मछलियों के लिए चारा स्थल भी बनवाया।

अहिल्याबाई ने व्यक्तिगत धन से ब्रह्मपुरी (काशी) और सदावर्त को स्थापित किया। यह कार्य राष्ट्रीय एकता का प्रतीक के तौर पर उभरा। ऐसा करके मालवा की रानी ने पूरे भारत को आपस में जोड़ा और सशक्तिकरण की मिसाल कायम की।

सामाजिक सुधार और महिला सशक्तिकरण

रानी अहिल्याबाई समाज सुधारों में अग्रणी रहीं। विधवाओं को पुनर्विवाह, शिक्षा, आर्थिक सहायता दी। आदिवासी महिलाओं को कपड़ा बुनाई सिखाई, ऋण दिए। जाति भेद मिटाया, धार्मिक सहिष्णुता बढ़ाई। महिलाओं की सेना गठित कर स्वरक्षा सिखाई।

ब्रिटिश इतिहासकारों ने उनकी धार्मिकता पर आपत्ति की पर वे सिद्ध करती रहीं कि धर्म ही कल्याण का आधार है। उनका राज्य आदर्श कल्याण राज्य था जिसमें कृषि, उद्योग, जल प्रबंधन, शिक्षा समेत हर स्तर और विधा विकसित हुई।

आधुनिक प्रासंगिकता और 300वीं जयंती

13 अगस्त 1795 को 70 वर्ष की आयु में उन्होंने समाधि ली थी। उनकी विरासत आज भी जीवंत है। इंदौर का हवाई अड्डा और विश्वविद्यालय आज भी उनके नाम पर है। 2024 में ‘पुण्यश्लोक अहिल्यादेवी होल्कर महिला स्टार्टअप योजना’ शुरू की गई।

इसके अलावा 2025 में उनकी जयंती पर 31 मई 2025 को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भोपाल के जंबूरी मैदान में महिला सशक्तिकरण महासम्मेलन के दौरान अहिल्याबाई होल्कर की 300वीं जयंती पर ₹300 का विशेष स्मारक सिक्का जारी किया। यह सिक्का संस्कृति मंत्रालय द्वारा जारी किया गया, जिसमें उनकी छवि अंकित है।

अहिल्याबाई का जीवन सिद्ध करता है कि सत्ता सेवा का माध्यम है। छत्रपति शिवाजी की उत्तराधिकारी के रूप में उन्होंने स्वराज्य को सांस्कृतिक एकता से मजबूत किया। आज के नेताओं को उनके सादगीपूर्ण जीवन से प्रेरित होना चाहिए।

आज PDA का अखिलेश यादव दे रहे झाँसा, सरकार में रहते ‘D’ का अस्तित्व भी नहीं था कबूल: योगी राज में मिला ‘छत्र’, जानिए- सपा शासन में कैसे होता था दलितों का उत्पीड़न

देशभर में कल (14 अप्रैल 2026) को डॉक्टर भीमराव अंबेडकर की जयंती मनाई जाएगी। उनकी जयंती से पहले ही मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व वाली उत्तर प्रदेश सरकार ने बाबा साहेब से जुड़े कई बड़े ऐलान किए हैं। योगी कैबिनेट ने ‘डा बीआर अंबेडकर मूर्ति विकास योजना’ को मंजूरी दी है जिसके तहत बाबा साहब डॉ. भीमराव अंबेडकर और अन्य सुधारकों और महापुरुषों की मूर्तियों का संरक्षण और सौंदर्यीकरण किया जाएगा।

यह योजना सामाजिक सम्मान और ऐतिहासिक विरासत को मजबूत करने का ठोस कदम है। जिन महापुरुषों ने समाज के सबसे वंचित वर्गों को आवाज दी, उनके योगदान को योगी सरकार में जमीन पर उतारने का काम हो रहा है। अखिलेश यादव के काल में जो दलित भुला दिए गए, जिन नायकों का अपमान किया गया और जिन समुदायों को बस वोट का साधन मानकर छोड़ दिया गया उन्हें अब योगी सरकार में सम्मान और पहचान मिल रही है।

दलितों के नायकों को योगी सरकार का सम्मान

सबसे पहले बात योगी सराकर की सबसे नई योजना से ही शुरू करते हैं। योगी सरकार प्रदेश में डॉ. भीमराव अंबेडकर, संत रविदास, कबीर, ज्योतिबा फुले, महर्षि वाल्मीकि जैसे महानायकों की मूर्तियों का सौंदर्यीकरण और संरक्षण करने जा रही है। योजना के तहत प्रदेश के सभी 403 विधानसभा क्षेत्रों में 10-10 स्मारकों का विकास किया जाएगा और इसके लिए 403 करोड़ रुपए खर्च किए जाएँगे।

इन स्मारकों के आसपास बाउंड्री वॉल, छतरी, सौंदर्यीकरण, हरियाली और लाइट की व्यवस्था की जाएगी। इस योजना का उद्देश्य केवल मूर्तियों की सुरक्षा करना नहीं है, बल्कि आसपास के क्षेत्र को विकसित कर रोजगार के अवसर बढ़ाना भी है। निर्माण कार्यों के जरिए ग्रामीण और शहरी दोनों क्षेत्रों में आर्थिक गतिविधियों को सीधा बढ़ावा मिलेगा। यह पहल मूर्ति स्थलों को केवल प्रतीकात्मक स्थान तक सीमित नहीं रखेगी बल्कि उन्हें उपयोगी और जानकारी देने वाले केंद्र के रूप में विकसित करेगी।

गोरखपुर में BJP के स्थापना दिवस (6 अप्रैल 2026) पर एक कार्यक्रम में सीएण योगी आदित्यनाथ ने ऐलान किया था कि प्रदेश में जहाँ भी बाबा साहब डॉ. भीमराव अंबेडकर की प्रतिमा होगी उसके ऊपर छत्र लगाया जाएगा। उन्होंने कहा था, “हमारी सरकार ने तय किया है कि 14 अप्रैल को भारत के संविधान के शिल्पी बाबा साहब की पावन जयंती पर भाजपा के कार्यकर्ता बूथ स्तर पर बाबा साहब की मूर्तियों के पास एक दिन पहले साफ-सफाई करेंगे। 14 अप्रैल को प्रतिमा पर पुष्पांजलि अर्पित करेंगे।”

एक ओर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की दलितों और दलित नायकों के प्रति संवेदना है तो दूसरी तरफ उनसे पूर्ववर्ती सपा का शासनकाल था। अखिलेश यादव के नेतृत्व वाली उस सरकार में दलितों का खूब उत्पीड़न हुआ तो दलित नायकों का भी अपनाम किया गया।

अखिलेश यादव के काल में दलित नायकों का अपमान

उत्तर प्रदेश में 2012 में सत्ता सँभालने के कुछ ही दिनों के भीतर अखिलेश यादव का दलित विरोधी चेहरा सामने आने लगा था। जुलाई 2012 में अखिलेश यादव ने मायावती के काल के 8 जिलों के नाम बदल दिए थे। इनमें से कुछ नवगठित थे जबकि कुछ के मायावती ने नाम बदले थे। हैरानी की बात ये है कि अखिलेश ने जिन जिलों के नामों को बदला उनमें से अधिकतर बहुजन नायकों से जुड़े नाम थे।

छत्रपति शाहूजी महाराज नगर जिले का नाम बदलकर गौरीगंज कर दिया गया जबकि रमाबाई नगर को फिर से उसके पुराने नाम कानपुर देहात में परिवर्तित कर दिया गया। अखिलेश ने भीमनगर, प्रबुद्धनगर और पंचशीलनगर जैसे जिलों के नाम भी बदले और इन्हें क्रमशः बहजोई, शामली और हापुड़ कर दिया। साथ ही, कांशीराम नगर, महामायानगर और जेपीनगर का नाम बदलकर क्रमशः कासगंज, हाथरस और अमरोहा कर दिया गया। इसी बैठक में छत्रपति शाहूजी महाराज चिकित्सा विश्वविद्यालय, लखनऊ का नाम फिर से ‘किंग जॉर्ज चिकित्सा विश्वविद्यालय’ किया गया था।

जब कांशीराम से अखिलेश ने निकाली ‘खुन्नस’

अखिलेश यादव ने कुछ दिनों पहले एक सियासी नाटक करते हुए कांशीराम जयंती को ‘PDA दिवस’ के रूप में मनाने का ऐलान किया था। हालाँकि, जब कांशीराम की जयंती मनाने की बारी आई तो रविवार (15 मार्च 2026) को अखिलेश यादव मुंबई में सितारों संग महफिल जमाने पहुँच गए। कांशीराम का यह अपमान और सपा का यह राजनीतिक पाखंड नया नहीं है। अखिलेश ने सत्ता सँभालते ही कांशीराम का अपमान करना शुरू कर दिया था।

अखिलेश यादव ने कांशीराम नगर जिले का नाम बदलकर तो कासगंज किया ही और इसके कुछ ही महीनों में लखनऊ के श्री कांशीराम जी उर्दू, अरबी-फारसी विश्वविद्यालय का नाम बदल कर ख्वाजा मुईनुद्दीन चिश्ती उर्दू, अरबी फारसी विश्वविद्यालय कर दिया गया। तब मायावती ने इस पर कड़ा एतराज जताया था। यहाँ तक कि अजमेर शरीफ दरगाह के सज्जादनशीन ने सूफी संत को सियासत में खींचे जाने पर आपत्ति जताई थी। लेकिन दलितों की भावनाओं को ताक पर रख अखिलेश जमकर मुस्लिम तुष्टिकरण में लगे थे और ऐसा आजम खान के कहने पर किया गया था।

अखिलेश का तुष्टीकरण यहीं नहीं थमा, 2013 के आखिर में अखिलेश सरकार ने सहारनपुर में कांशीराम के नाम पर बनाए जा रहे मेडिकल कॉलेज का नाम बदलकर ‘शेखुल हिन्द महमूदुल हसन मदनी’ के नाम पर कर दिया। यह मुजफ्फरनगर में दंगों के बाद का दौर था और अखिलेश किसी भी तरह अपने मुस्लिम वोट बैंक को खुश रखना चाहते थे। अखिलेश ने मायावती सरकार में कांशीराम की पुण्यतिथि पर शुरू की गई छुट्टी को भी रद्द कर दिया था।

अखिलेश यादव ने सत्ता संभालने के बाद मायावती के काल की 25 से अधिक योजनाएँ बंद की थीं जिनमें से कई दलित नायकों के नाम पर थीं। कांशीराम जी शहरी गरीब आवास योजना, कांशीराम ग्रीन (ईको) गार्डेन का निर्माण, कांशीराम शहरी दलित बाहुल्य बस्ती समग्र विकास योजना और अनुसूचित जाति-छात्रवृत्ति योजना जैसी योजनाएँ शामिल थीं।

अखिलेश के राज में दलितों का उत्पीड़न

अखिलेश के राज में दलितों पर उत्पीड़न चुनाव जीतते ही शुरू हो गया था। यूपी में 2012 में जैसी ही सपा लौटी तुरंत हिंसा का दौर लौट आया, फिर अराजकता वाले दिनों की आहट सुनाई देने लगी। मार्च 2012 की इंडिया टुडे की एक रिपोर्ट में लिखा है, “पिछले 36 घंटों के दौरान पूरे राज्य में हुई हिंसा की घटनाओं में कम से कम 3 लोगों की मौत हो गई है और दर्जनों दलितों के घरों में आग लगा दी गई है और इनमें से कई घटनाओं में सपा कार्यकर्ता शामिल थे।”

जानते हैं इस समय मुलायम सिंह की चिंता क्या थी? मुलायम सिंह ने सपा कार्यकर्ताओं से कहा था, “अगर आप अनुशासन नहीं बनाए रखेंगे तो आप भविष्य में मुझे प्रधानमंत्री नहीं बना पाएँगे।”

NDTV की 12 मार्च 2012 की एक रिपोर्ट बताती है कि सपा की जीत के बाद पार्टी कार्यकर्ताओं ने जमकर उत्पाद मचाया। भदोही और सीतापुर में दलितों के घर में आग लगा दी गई। रिपोर्ट में कहा गया, “होली के दिन बाह के पार्वती पूरा गाँव में बीएसपी की प्रधान गुड्डी देवी के पति मुन्ना लाल जाटव की हत्या कर दी गई। हत्या से पहले घर में तोड़फोड़ भी की गई है। भदोही में समाजवादी पार्टी कार्यकर्ताओं पर दलितों के घर में आग लगाने का आरोप लगा है।”

इसी रिपोर्ट में कहा गया कि यूपी में बलिया के भुज छपरा गाँव में सपा कार्यकर्ताओं पर 5 दलित महिलाओं और बच्चों को बुरी तरह मारने-पीटने के आरोप लगे। जब सपा कार्यकर्ताओं को पता चला कि इस गाँव के ज्यादातर लोगों ने JDU को वोट दिया है तो 40+ सपा कार्यकर्ता गाँव में घुसे और मारपीट की। इसी दौरान बसपा सरकार में मंत्री रहे राम अचल राजभर की एक राइस मिल भी सपा समर्थित लोगों ने फूँक दी थी।

हिन्दुस्तान टाइम्स की 15 मार्च 2012 एक रिपोर्ट बताती है कि बसपा प्रमुख मायावती के पैतृक गाँव बादलपुर के पास दादरी इलाके में सपा के कार्यकर्ताओं ने दलित परिवारों पर हमला कर दिया। दलितों को लाठियों से पीटा गया। इस हमले में महिलाओं समेत 19 लोग घायल हुए थे। यह हमला इसलिए हुआ क्योंकि दादरी से बसपा के विधायक जीत गए थे और सपा का उम्मीदवार हार गया था।

2013 में सपा के दौर में एक दलित चिंतक और लेखक कंवल भारती को फेसबुक स्टेट्स के कारण गिरफ्तार कर लिया गया था। बीबीसी की रिपोर्ट में कहा गया है कि कंवल भारती ने इतना लिखा था कि आरक्षण के मामले में सपा सरकार पूरी तरह नाकाम हो गई है और अखिलेश-शिवपाल-आजम-मुलायम जनता से कट गए हैं। इसके बाद बनियान और पाजामे में कंवल भारती को अखिलेश की पुलिस ने घर से उठा लिया। अखिलेश सरकार का पूरा काल हिंसा की लपटों में बीता और इसमें दलितों को खूब निशाना बनाया गया।

योगी सरकार ने ली दलितों की सुध

मार्च 2017 में योगी आदित्यनाथ सरकार सत्ता में आई तो उसने समाज के सभी वर्गों को साथ लेने का बीड़ा उठाया। अनुसूचित जाति (SC) और अनुसूचित जनजाति (ST) छात्रों की 2016-17 की छात्रवृत्तियाँ जो बंद कर दी गई थीं उन्हें योगी सरकार ने फिर से शुरू किया DBT (डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर) के जरिए राशि सीधे खातों में पहुँचाई गई। इस योजना से लाखों दलित छात्रों को लाभ पहुँचा है।

प्रधानमंत्री आवास योजना (PMAY) के तहत दलित परिवारों को प्राथमिकता दी गई। सत्ता में आने के साल में ही 2017 के अंत तक लाखों दलित परिवारों को पक्के घर, राशन कार्ड, शौचालय और बिजली कनेक्शन मिलने शुरू हो गए। सरकार ने दावा किया कि दलित सबसे ज्यादा योजनाओं के लाभार्थी बने।

2018 में जब योगी आदित्यनाथ को सत्ता में आए बमुश्किल एक साल ही हुआ था तब तक भी दलितों के लिए किए जा रहे कार्यों का साफ-साफ असर दिखाई देने लगा था। अप्रैल 2018 की TOI की एक रिपोर्ट बताती है कि PMAY के तहत कुल 8.85 लाख घरों में से 6.50 लाख दलित परिवारों को दिए गए। 37 लाख दलितों को पहली बार राशन कार्ड जारी किए गए। स्वच्छ भारत मिशन के तहत 40 लाख शौचालयों में से 36 लाख दलित बस्तियों में बने और सौभाग्य योजना से 32 लाख दलित घरों को बिजली कनेक्शन मिले। यह पहले वर्ष तक का ही आँकड़ा था।

योगी सरकार ने शिक्षा, रोजगार और सामाजिक सुरक्षा जैसे क्षेत्रों में काम करके ना सिर्फ दलितों को बराबरी का अधिकार देने की कोशिश की है बल्कि उन्हें आत्मनिर्भर बनने के लिए भी प्रोत्साहित किया है। राज्य में अनुसूचित जाति (SC) के छात्रों के लिए 100 सर्वोदय स्कूल खोले गए हैं जिनमें 60% सीटें SC के लिए आरक्षित थीं। उत्तर प्रदेश अनुसूचित जाति वित्त एवं विकास निगम ने लाखों दलित युवाओं को स्वरोजगार के अवसर दिए हैं। दलितों को बड़ी संख्या में लोन दिए गए ताकि वे अपना व्यवसाय शुरू कर सकें और आत्मनिर्भर बन सकें। ऐसे कामों की एक लंबी फेहरिस्त है जो योगी सरकार में दलितों के उत्थान और उन्हें मुख्य धारा में लाने के लिए शुरू किए गए हैं।

हत्या, लूटपाट, आगजनी, बलात्कार… पश्चिम बंगाल में 2021 विधानसभा चुनावों में TMC की जीत के बाद ये हुआ था हाल, पढ़ें हिंसा की 40 घटनाएँ

पश्चिम बंगाल में ममता बनर्जी के नेतृत्व वाली तृणमूल कॉन्ग्रेस (TMC) सरकार के दौरान चुनाव केवल एक सामान्य लोकतांत्रिक प्रक्रिया नहीं रह जाते बल्कि उन लोगों के लिए अस्तित्व की लड़ाई बन जाती हैं जो पार्टी की विचारधारा का समर्थन नहीं करते। चाहे राज्य में विधानसभा चुनाव हों या स्थानीय निकाय चुनाव, राजनीतिक विरोधियों के खिलाफ लक्षित चुनाव के बाद हिंसा TMC के लिए एक सामान्य परंपरा बन चुकी है।

राज्य में स्वतंत्र और निष्पक्ष चुनाव कराना अपने आप में एक बड़ी चुनौती है और जैसे ही चुनाव परिणामों की घोषणा होती है, वैसे ही TMC समर्थित हिंसा का एक दौर शुरू हो जाता है, जिसमें राजनीतिक विरोधियों को निशाना बनाया जाता है।

2021 पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव के परिणाम घोषित होने के बाद राज्य भर से हमलों, हत्याओं और दुष्कर्म जैसी कई भयावह घटनाएँ सामने आईं। नीचे TMC की तीसरी बार सरकार बनने के बाद मई 2021 से जुलाई 2021 के बीच BJP कार्यकर्ताओं के खिलाफ घटी 40 डरावनी हिंसा की घटनाओं के बारे में पूरी जानकारी दी गई है।

1.BJP कार्यकर्ता अविजीत सरकार को पीट-पीटकर मार डाला

भारतीय जनता पार्टी (BJP) के कार्यकर्ता अविजीत सरकार की 2 मई 2021 को TMC के कुछ गुंडों द्वारा पीट-पीटकर हत्या कर दी गई। यह घटना सिर्फ इसलिए हुई क्योंकि उन्होंने फेसबुक पर दो वीडियो अपलोड किए थे, जिनमें कोलकाता के बेलियाघाटा इलाके के वार्ड नंबर 30 में TMC कार्यकर्ताओं द्वारा उनके घर और NGO कार्यालय में तोड़फोड़ करते हुए दिखाया गया था।

अविजीत सरकार एक डॉग-लवर थे और उन्होंने कई आवारा कुत्तों को अपने NGO में रखा था, जिनमें से एक ने उस समय 5 पिल्लों को जन्म दिया था। लेकिन TMC कार्यकर्ताओं की क्रूरता थी कि उन्होंने कुत्तों को भी नहीं बख्शा और उन 5 पिल्लों को बेरहमी से पीटा।

भारतीय मजदूर ट्रेड यूनियन काउंसिल के पदाधिकारी रहे अविजीत सरकार ने दरवाजे पर हुई दस्तक का जवाब दिया, जिसके बाद उन्हें बाहर घसीटा गया, बुरी तरह पीटा गया और केबल टीवी के तार से उनका गला घोंट दिया गया। बाद में उनका शव उनके घर से कुछ दूरी पर बरामद हुआ। अविजीत सरकार की एकमात्र गलती यह थी कि वे BJP के समर्थक थे।

2. BJP कार्यकर्ता विश्वनाथ धर के घर में तोड़फोड़

चुनाव के बाद हिंसा की एक और घटना में 2 मई 2021 को तृणमूल कॉन्ग्रेस के कई गुंडों ने BJP के सक्रिय कार्यकर्ता बिश्वनाथ धर के घर पर हमला किया। यह घटना पश्चिम बंगाल के उत्तर 24 परगना जिला के पानीहाटी नगरपालिका क्षेत्र के घोला मल्लिकपाड़ा में हुई।

TMC समर्थित हमलावरों ने धर के घर में घुसकर जमकर तोड़फोड़ की। बदमाशों ने पहले CCTV कैमरों को नष्ट किया और उसके बाद घर में लूटपाट शुरू कर दी। उन्होंने अलमारी तोड़कर नकदी और गहने चुरा लिए। वापस जाते समय उन्होंने धर की मारुति कार और रॉयल एनफील्ड बुलेट बाइक को भी तोड़ दिया।

3. BJP कार्यकर्ता को उसके ही घर में बेरहमी से पीटा

एक अन्य घटना में BJP के एक कार्यकर्ता को उसके ही घर में सत्तारूढ़ TMC के कार्यकर्ताओं द्वारा बेरहमी से पीटा गया। यह घटना पश्चिम बंगाल के दक्षिण दिनाजपुर जिला के त्रिमोहिनी क्षेत्र के किस्मतदापत गाँव में हुई, जो बालुरघाट विधानसभा क्षेत्र के अंतर्गत आता है।

TMC समर्थित हमलावरों ने पीड़ित के घर पर धावा बोलकर उस पर हमला किया। इस हमले में BJP कार्यकर्ता के सिर पर गंभीर चोटें आईं और वह बुरी तरह खून से लथपथ हो गया। बदमाशों ने उसके घर में घुसकर जमकर तोड़फोड़ भी की।

घटना का एक वीडियो भी सामने आया, जिसमें एक नशे में धुत व्यक्ति पीड़ित और उसकी पत्नी को भद्दी-भद्दी गालियाँ दे रहा था। वह BJP कार्यकर्ता को ‘सूअर का बेटा’ कहकर बोलते हुए बाँस के डंडे से उसकी पिटाई कर रहा था। साथ ही वह धमकी दे रहा था, “मुझे BJP की ताकत दिखाओ? कितनी ताकत है तेरी? क्या तुम सत्ता में आ गए हो?”

4. BJP उम्मीदवार साइंटिस्ट गोबरधन दास को उनके घर में TMC के गुंडों ने बनाया बंधक

चुनाव के बाद TMC के गुंडों ने BJP उम्मीदवार गोबरधन दास से जुड़े कई BJP कार्यकर्ताओं को उनके गाँव में निशाना बनाकर हमला किया। गोबर्धन दास पूर्वस्थली उत्तर विधानसभा क्षेत्र से BJP उम्मीदवार थे।

जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय में मॉलिक्यूलर मेडिसिन के प्रोफेसर और वैज्ञानिक गोबर्धन दास को भी निशाना बनाया गया। 4 मई 2021 को TMC समर्थित हमलावरों ने दास के घर को घेर लिया।

हमलावरों ने उनके आवास पर धावा बोला, जिसके चलते वे अपने परिवार के अन्य सदस्यों के साथ घर के अंदर ही फँस गए। आरोप है कि TMC के गुंडों ने उनके घर पर देसी बम भी फेंके, जिससे स्थिति और भयावह हो गई।

5.TMC कार्यकर्ताओं ने BSF कर्मियों के घरों पर किया हमला

TMC के गुंडों ने केवल BJP के कार्यकर्ताओं को ही नहीं, बल्कि सुरक्षा बलों के जवानों को भी निशाना बनाया। जबकि वो उनके राजनीतिक प्रतिद्वंद्वी भी नहीं थे। सीमा सुरक्षा बल के जवान कमल सेन के घर पर जलपाईगुड़ी जिले के रानीपारहाट में TMC समर्थित हमलावरों ने हमला कर लूटपाट और तोड़फोड़ की। छुट्टी पर घर आए इस जवान और उनके परिवार के साथ मारपीट की गई, जबकि उनके घर, ट्रैक्टर और बाइक को आग के हवाले कर दिया गया।

इसी तरह की हिंसा कूचबिहार में BSF जवान सुशांत बर्मन के खिलाफ भी देखने को मिली। आरोप है कि TMC कार्यकर्ताओं ने उन पर हमला किया और लूटपाट की। केवल इसलिए क्योंकि उनके भाई BJP के समर्थक थे। अपनी जान बचाने के लिए उनके परिवार के सदस्यों को घर छोड़कर भागना पड़ा।

6. TMC के गुंडों ने ABVP दफ्तर में की तोड़फोड़

2021 पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव में जीत के बाद TMC के गुंडों ने अपने राजनीतिक विरोधियों से बदला लेने की मुहिम शुरू कर दी। इसी क्रम में अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (ABVP) के कोलकाता स्थित दफ्तर पर हमला किया गया।

बताया जाता है कि TMC के 20 से अधिक गुंडे ABVP कार्यालय में घुस आए और वहाँ मौजूद कार्यकर्ताओं पर हमला कर दिया, जिसमें ABVP के राष्ट्रीय संयुक्त सचिव भी शामिल थे।

आरोप है कि हमलावरों ने देवी-देवताओं और विचारकों की कई मूर्तियों को भी तोड़ दिया। ABVP का कहना है कि यह हमला पूरी तरह से पूर्व नियोजित था, क्योंकि TMC के 150 से अधिक गुंडे कई बार बाइक से ABVP दफ्तर के आसपास चक्कर लगा रहे थे।

7. BJP कार्यकर्ता सुनील बक्सी पर हमला

चुनाव के बाद हिंसा के एक और मामले में जुलाई 2021 में BJP के बूथ कार्यकर्ता सुनील बक्सी के घर पर एक मुस्लिम भीड़ द्वारा हमला किए जाने का आरोप है। भीड़ ने उनके घर में घुसकर फर्नीचर और अन्य सामान को नष्ट कर दिया, महिलाओं के साथ अभद्रता की और उनकी पत्नी के साथ दुष्कर्म की धमकी तक दी।

शिकायत के अनुसार, करीब 15 घरों को आग के हवाले कर दिया गया। घटना के बाद वे गाँव छोड़कर भागने को मजबूर हो गए। जब बक्सी ने पुलिस का रुख किया तो उन्हें धमकी दी गई कि इसके गंभीर परिणाम भुगतने होंगे। इतना ही नहीं, पुलिस ने यह भी दबाव बनाया कि वे लिखें कि घरों में आग बिजली गिरने की वजह से लगी थी।

इससे पहले 3 मई 2021 को भी बक्सी पर TMC से जुड़े गुंडों द्वारा हमला किया गया था। उन्होंने बताया कि उनके सिर पर वार किया गया, हालाँकि उनके भाई ने उन्हें बचा लिया। जब वे पुलिस के पास शिकायत दर्ज कराने पहुँचे, तो उनकी शिकायत दर्ज करने से मना कर दिया गया और उल्टा उनके खिलाफ ही मामले दर्ज कर लिया गया।

सुनील बक्सी ने इस संबंध में राष्ट्रीय अनुसूचित जनजाति आयोग (NCST) में भी शिकायत दर्ज कराई थी।

8. बीजेपी कार्यकर्ता जय प्रकाश यादव की क्रूड बम हमले में मौत

TMC की चुनाव के बाद हिंसा के तहत, जुलाई 2021 में पश्चिम बंगाल के उत्तर 24 परगना जिला के भाटपाड़ा में 28 वर्षीय BJP कार्यकर्ता जॉय प्रकाश यादव की देसी बम हमले में हत्या कर दी गई।

बताया जाता है कि हत्या से पहले जॉय प्रकाश यादव की दो लोगों के साथ तीखी बहस हुई थी, जिसके बाद एक देसी बम उनके सिर पर फेंका गया, जिससे उनकी मौत हो गई। हमले से पहले एक आरोपित को यह कहते हुए सुना गया, “पुलिस को भूल जाओ… बहुत BJP-BJP कर रहे हो, इसे छोड़ दो।”

इस पूरी घटना को यादव की 17 वर्षीय भतीजी सपना ने कैमरे में रिकॉर्ड किया। इस हमले के दौरान उनकी माँ राजमती देवी भी मौजूद थीं, जिन्हें इस घटना के बाद से सुनने में समस्या होने लगी।

9. BJP कार्यकर्ताओं ने इस्लाम धर्म कबूला और लापता

पश्चिम बंगाल में BJP कार्यकर्ताओं को निशाना बनाने के एक और मामले में दो BJP नेताओं को BJP का समर्थन करने की सजा देते हुए जबरन इस्लाम धर्म कबूलने के लिए मजबूर किया गया। इसके बाद दोनों नेता लापता हो गए, दोनों आपस में भाई थे। उनकी पत्नियों ने अपने पतियों का पता लगाने के लिए कलकत्ता हाई कोर्ट में याचिका दायर की।

मामले की जाँच में गंभीर खामियाँ पाए जाने के बाद हाई कोर्ट ने इसे CBI और NIA को सौंप दिया। याचिकाकर्ताओं ने अदालत को बताया कि उनके पति लापता हो गए हैं और उनका कोई पता नहीं चल रहा है।

इसके बाद उन्होंने पहले मोथाबाड़ी पुलिस स्टेशन और फिर कालियाचक पुलिस स्टेशन में शिकायत दर्ज कराई। उनका कहना था कि एक शिकायत तो दर्ज कर ली गई थी, लेकिन बाद में एक ‘सिविक वॉलंटियर’ ने उस शिकायत को फाड़ दिया और उन्हें बताया कि उनके पतियों ने इस्लाम धर्म अपना लिया है।

10. कूचबिहार में BJP कार्यकर्ता अनिल बर्मन रहस्यमय तरीके से पेड़ से लटके मिले

पश्चिम बंगाल के कूचबिहार जिले के सिताई स्थित अदाबाड़ी इलाके में 30 मई 2021 को BJP के एक कार्यकर्ता का शव संदिग्ध परिस्थितियों में पेड़ से लटका हुआ मिला। स्थानीय लोगों को उनका शव उनके घर के पास एक बगीचे से मिला।

BJP ने इस घटना के लिए सत्तारूढ़ TMC सरकार पर अपने कार्यकर्ता की हत्या का आरोप लगाया। पार्टी का कहना था कि अनिल बर्मन चुनाव के दौरान TMC के निशाने पर थे। यह भी दावा किया गया कि इससे पहले TMC के गुंडों ने मृतक के घर में तोड़फोड़ की थी।

11. TMC के गुंडों ने की BJP समर्थक कुश खेत्रपाल की हत्या

BJP समर्थक 26 वर्षीय कुश खेतरपाल 5 मई 2021 को लापता हो गए। उनका शव दो दिन बाद, 8 मई 2021 को बैष्ठम तालाब के पास गणेश प्रतिमा के पीछे मिला। FIR के अनुसार, उनके शरीर पर चाकू के कई घाव थे। उनके भाई श्रीकांत खेतरपाल ने आरोप लगाया कि TMC के गुंडों ने कुश की रैभगीनी पार्टी कार्यालय में ले जाकर हत्या कर दी।

श्रीकांत ने बताया कि कुश एक होटल में काम करते थे और काम से लौटते समय TMC से जुड़े कानन खेतरपाल, सुकुमार खेतरपाल और दिलीप खेतरपाल अक्सर उन्हें रास्ते में रोकते थे। उन्होंने कुश को TMC में शामिल न होने पर गंभीर परिणाम भुगतने की धमकी दी थी।

12. TMC के गुंडों ने BJP कार्यकर्ता राजीब पल्ली के घर पर किया हमला

बंगाल विधानसभा चुनाव 2021 के नतीजे घोषित होते ही TMC के कुछ गुंडों ने हावड़ा में BJP कार्यकर्ता राजीब पाली के घर पर बम फेंके। हमलावरों ने पीड़ित के घर से नकदी और गहनें भी लूटे और यहाँ तक कि घर की महिलाओं के साथ छेड़छाड़ भी की।

13. BJP नेत्री चंदना हलदर की TMC कार्यकर्ताओं ने पीट-पीटकर की हत्या

2 जुलाई 2021 को पश्चिम बंगाल के दक्षिण 24 परगना जिला में BJP कार्यकर्ता चंदना हलदर की कथित तौर पर TMC के गुंडों ने पीट-पीटकर हत्या कर दी। हलदर सतगाछिया विधानसभा क्षेत्र के रामचंद्रपुर गाँव की रहने वाली थीं। उनके पति गौतम हलदर ने बताया कि वे और उनकी पत्नी दोनों BJP कार्यकर्ता थे।

घटना के दिन TMC समर्थित हमलावरों ने पहले उनके चचेरे भाई स्वरूप हलदर पर हमला किया था। जब गौतम हलदर और उनकी पत्नी चंदना हलदर उन्हें बचाने पहुँचे, तो हमलावरों ने उन पर भी बेरहमी से हमला कर दिया। गंभीर चोट लगने से इलाज के दौरान चंदना हलदर की मौत हो गई।

14. BJP बूथ अध्यक्ष राजा सामोंटो की पीट-पीटकर हत्या

चुनाव के बाद TMC की हिंसा की एक और घटना में BJP के बूथ अध्यक्ष राजा सामंतो की 29 मई 2021 को दक्षिण 24 परगना के डायमंड हार्बर के साधुरघाट गाँव में बेरहमी से पीट-पीटकर हत्या कर दी गई।

15. TMC सदस्यों ने की BJP कार्यकर्ता धीरेन बर्मन की हत्या

राज्य विधानसभा चुनाव परिणामों के बाद पश्चिम बंगाल में विपक्ष के नेता सुवेंदु अधिकारी ने X पर जानकारी दी कि BJP के एक समर्थक 34 वर्षीय धीरेन बर्मन जो सिटलाकुची विधानसभा क्षेत्र के SC राजबंशी समुदाय से थे, उनकी TMC के गुंडों द्वारा बेरहमी से हत्या कर दी गई।

BJP कार्यकर्ताओं पर हमलों की निंदा करते हुए अधिकारी ने ममता बनर्जी पर आरोप लगाया कि वे TMC के गुंडों का परोक्ष रूप से समर्थन कर रही हैं।

16. TMC के गुंडों की प्रताड़ना से परेशान होकर BJP कार्यकर्ता प्रोसेनजीत दास ने की आत्महत्या

एक अन्य भयावह घटना में BJP के कार्यकर्ता प्रोसेनजीत दास ने TMC के कुछ सदस्यों द्वारा मानसिक और शारीरिक उत्पीड़न का सामना करने के बाद आत्महत्या कर ली।

उनके परिवार का कहना था कि TMC के गुंडों ने उन्हें दो बार पीटा और गंभीर परिणाम भुगतने की धमकी दी। राजारहाट के गोपालपुर क्षेत्र के हरिजन पल्ली के निवासी दास मानसिर रूप से आहत हो गए। वे इस दबाव को सहन नहीं कर सके और आत्महत्या जैसा कदम उठा लिया।

17. BJP कार्यकर्ता निर्मल मंडल की पीट-पीटकर हत्या

एक और इसी तरह की घटना में BJP के कार्यकर्ता निर्मल मंडल की सोनारपुर नॉर्थ विधानसभा क्षेत्र में उनके राजनीतिक विरोधियों द्वारा पीट-पीटकर हत्या कर दी गई। मृतक की माँ ने आरोप लगाया कि स्थानीय पार्षद शम्पा चक्रवर्ती ने आरोपितों को सजा दिलाने के बजाए उन्हें ही डाँटते हुए कहा कि वे अपने बेटे का ख्याल नहीं रख पाए।

18. BJP कार्यकर्ता घनश्याम राणा को पहले गोली मारी, फिर चाकू से किए वार

हुगली जिले के आरामबाग नगर के खानाकुल में BJP कार्यकर्ता पर हमले का एक और मामला सामने आया। पीड़ित घनश्याम राणा को उनके ही घर के बाहर पहले गोली मारी गई और फिर बेरहमी से चाकू से हमला किया गया।

उन्हें बेहद गंभीर हालत में अस्पताल ले जाया गया। BJP ने इस हमले के लिए TMC के गुंडों को जिम्मेदार ठहराया।

19. अरिंदम मिद्या को TMC के गुंडों ने फाँसी पर लटकाया

राज्य विधानसभा चुनाव परिणामों के बाद BJP के युवा समर्थक अरिंदम मिद्या को TMC के इस्लामी कट्टरपंथी समर्थकों ने फाँसी पर लटका दिया गया। अरिंदम मिद्या डायमंड हार्बर के फाल्टा विधानसभा क्षेत्र के पंचकोली गाँव के निवासी थे।

20. TMC के गुंडों के हमले में घायल BJP कार्यकर्ता धर्म मंडल की मौत

14 मई 2021 को पश्चिम बंगाल के नदिया जिले में BJP कार्यकर्ता धर्म मंडल पर उनके ही घर में TMC के गुंडों ने बेरहमी से हमला किया। गुंडो के हमले से गंभीर रूप से घायल धर्म मंडल को अस्पताल में भर्ती कराया गया, लेकिन इलाज के दौरान 16 मई 2021 को कोलकाता के एक अस्पताल में उन्होंने दम तोड़ दिया।

21. BJP कार्यकर्ता मनोज जायसवाल की हत्या

उसी दिन बीरभूम जिले के नलहाटी विधानसभा क्षेत्र के BJP कार्यकर्ता मनोज जायसवाल की हत्या का मामला भी सामने आया। BJP ने आरोप लगाया कि उनकी हत्या TMC के गुंडों ने की है।

22. बंगाल में BJP समर्थकों का डबल मर्डर

पश्चिम बंगाल में BJP ने आरोप लगाया कि मालदा के उत्तर लक्ष्मीपुर में उसके दो कार्यकर्ताओं की TMC के गुंडों द्वारा हत्या कर दी गई। BJP के अनुसार, मृतकों की पहचान मनोज मंडल और चैतन्य मंडल के रूप में हुई है। BJP ने साझा की भयावह तस्वीर में दिखाया गया कि दोनों कार्यकर्ताओं को एक ही रस्सी से बाँधकर पेड़ से लटका दिया गया था।

हालाँकि, व्यापक स्तर पर हुई TMC समर्थित हिंसा के बावजूद पार्टी के वरिष्ठ नेताओं ने इन आरोपों से इनकार करते हुए BJP पर झूठ फैलाने का आरोप लगाया। वहीं, बाद में ममता बनर्जी ने हिंसा को स्वीकार किया और पीड़ितों के परिवारों को मुआवजा देने का आश्वासन दिया।

23. BJP कार्यकर्ता अरूप रुइदास को हत्या कर पेड़ से लटकाया शव

राजनीतिक हत्याओं के एक और मामले में BJP के कार्यकर्ता अरूप रुइदास को बांकाुरा जिले में हत्या कर उन्हें पेड़ से लटका दिया गया। रिपोर्ट्स के अनुसार, पश्चिम बंगाल के इंडस विधानसभा क्षेत्र से बूथ एजेंट अरूप रुइदास की कथित तौर पर TMC के कार्यकर्ताओं द्वारा हत्या की गई थी।

24. BJP कार्यकर्ता देवव्रत मैती की बेरहमी से हत्या

3 मई 2021 को BJP कार्यकर्ता देवव्रत मैती पर TMC के गुंडों ने बेरहमी से हमला किया। नंदीग्राम निवासी मैती को हमले के बाद गंभीर हालत में अस्पताल ले जाया गया, जहाँ 13 मई 2021 को इलाज के दौरान उन्होंने दम तोड़ दिया।

25. TMC के गुंडों ने की गौरव सरकार की हत्या

इसी तरह पश्चिम बंगाल के बीरभूम जिले के बोलपुर निवासी BJP कार्यकर्ता गौरव सरकार भी राज्य में चुनाव के बाद हुई हिंसा का शिकार बने थे।

26. सीतलकुची में BJP कार्यकर्ता माणिक मंडल की हत्या

इसी तरह की एक अन्य घटना में पश्चिम बंगाल के सीतलकुची विधानसभा क्षेत्र में BJP कार्यकर्ता माणिक मंडल की हत्या कर दी गई। यह घटना मई 2021 के पहले सप्ताह में हुई, जब विधानसभा चुनाव परिणाम घोषित होने के तुरंत बाद राज्य में तनाव और हिंसा की स्थिति बनी हुई थी।

27. TMC के गुंडों ने की BJP कार्यकर्ता की 80 साल की माँ की हत्या

एक अन्य घटना में जगद्दल से BJP कार्यकर्ता कमल मंडल की 80 साल की माँ शोवा रानी मंडल की हत्या कर दी गई, जब वह अपने बेटे को TMC कार्यकर्ताओं से बचाने की कोशिश कर रही थीं। TMC के गुंडे कमल मंडल और उनकी पत्नी को BJP से जुड़े होने के कारण पीट रहे थे, तभी उनकी माँ अपने बेटे को बचाने के लिए बीच में आई और गंभीर रूप से घायल हो गई। बाद में इलाज के दौरान उनकी मौत हो गई।

28. चुनाव के बाद हुई हिंसा में BJP कार्यकर्ता उत्तम घोष की हत्या

रानाघाट के गंगनापुर में 2 मई 2021 की आधी रात को TMC कार्यकर्ताओं ने BJP कार्यकर्ता उत्तम घोष की हत्या कर दी।

29. BJP कार्यकर्ता होरम अधिकारी की बेरहमी से हत्या

दक्षिण 24 परगना जिले के सोनारपुर दक्षिण क्षेत्र में कार्यरत BJP के समर्थक होरम अधिकारी की चुनाव के बाद हिंसा के दौरान बेरहमी से हत्या कर दी गई।

30. वोटों की गिनती के बाद TMC के गुंडों ने BJP के मोमिक मोइत्रा की बेरहमी से हत्या

02 मई 2021 को मतगणना के बाद कूचबिहार जिले के सिटलाकुची विधानसभा क्षेत्र में BJP कार्यकर्ता मोमिक मोइत्रा की TMC के गुंडों ने हत्या कर दी। इसी क्षेत्र में ममता बनर्जी के आह्वान पर TMC के समर्थकों ने CRPF पर हमला किया था।

31. बीजेपी समर्थक चंदन रॉय और हराधोन रे की TMC कार्यकर्ताओं ने की हत्या

पश्चिम बंगाल में चुनाव परिणाम घोषित होने के बाद 2 मई 2021 को कूचबिहार और दिनहाटा में बीजेपी समर्थक चंदन राय और हराधन राय की हत्या कर दी गई। आरोप लगा कि यह हत्याएँ TMC के कार्यकर्ताओं द्वारा की गईं, जब राज्य में चुनाव बाद तनाव और हिंसा की स्थिति बनी हुई थी।

32. बीजेपी कार्यकर्ता मिंटू बर्मन की पीट-पीटकर हत्या कर दी

एक अन्य राजनीतिक हिंसा की घटना में कूचबिहार में भारतीय जनता पार्टी कार्यकर्ता मिंटू बर्मन की तृणमूल कॉन्ग्रेस के गुंडों द्वारा पीट-पीटकर हत्या कर दी गई। गंभीर रूप से घायल मिंटू बर्मन को तुरंत अस्पताल ले जाया गया, लेकिन इलाज के दौरान उनकी मौत हो गई।

33. टीएमसी के गुंडों ने लड़की के साथ उसके पिता के सामने गैंगरेप किया

चुनाव परिणाम घोषित होने के बाद पश्चिम बंगाल में हुई चुनाव बाद हिंसा की एक घटना में रीतु (नाम बदला गया) नाम की युवती के साथ गंभीर हिंसा और यौन उत्पीड़न की बात सामने आई।

आरोप है कि 2 मई 2021 को जब वह और उनके पिता, जो भारतीय जनता पार्टी के समर्थक बताए गए हैं, संभावित हमले की आशंका के चलते घर से निकलने की तैयारी कर रहे थे, तभी कुछ लोगों का एक समूह उनके घर में घुस आया।

पीड़िता के अनुसार, हमलावरों ने उसके पिता के साथ मारपीट की और उसके साथ गैंगरेप किया। बाद में ऑपइंडिया से बातचीत के दौरान रीतु ने बताया की पुलिस ने कोई एक्शन नहीं लिया और किसी भी प्रकार की सहायता भी नहीं मिली।

34. TMC के गुंडों ने 60 साल की महिला के साथ उसके पोते के सामने गैंगरेप किया

इस तरह की एक अन्य घटना में, 60 साल की महिला के साथ यौन हिंसा की घटना सामने आई। यह हिंसा महिला के 6 साल के पोते के सामने उसके साथ हुई आरोप है कि चुनाव परिणाम घोषित होने के बाद, 4 और 5 मई 2021 की मध्यरात्रि में तृणमूल कॉन्ग्रेस के कार्यकर्ता उसके घर में जबरन घुसे। फिर उसके साथ दुष्कर्म किया गया और घर से कीमती सामान भी लूट लिया गया।

35. महिला BJP समर्थक ने रेप की कोशिश को चकमा दिया, जबकि उसके सामने उसके पति की हत्या कर दी गई

पश्चिम बंगाल में 14 मई 2021 को भारतीय जनता पार्टी के लिए प्रचार करने वाले पूर्निमा मंडल और उनके पति धर्मा मंडल पर जानलेवा हमला किया गया।

आरोप है कि दोनों की पहचान कर उन पर कुल्हाड़ियों से हमला किया गया। पूर्निमा को अपने पति और देवर पर हुए हमले को देखने के लिए मजबूर किया गया, जबकि उनके साथ अभद्र व्यवहार और यौन उत्पीड़न का प्रयास भी किया गया।

पीड़िता के अनुसार, इस भीड़ का नेतृत्व एक स्थानीय जनप्रतिनिधि कालू शेख कर रहा था। उनके पति ने गंभीर चोटों के चलते 16 मई 2021 को दम तोड़ दिया।

36. टीएमसी सदस्यों ने एक किशोरी के साथ सामूहिक बलात्कार किया

एक 17 साल की नाबालिग लड़की के साथ 9 मई 2021 को रेप की घटना सामने आई। पीड़िता को अगले दिन जंगल से गंभीर हालत में पाया गया। बाद में परिवार ने आरोप लगाया कि शिकायत दर्ज न कराने के लिए उन्हें जान से मरने की धमकियाँ दी और घर जलाने की बात भी कही गई।

37. आरएसएस कार्यकर्ता बलराम माझी की मौत

चुनाव परिणामों के बाद पूर्व बर्धमान जिले के केतुग्राम तहसील के श्रीपुर गाँव में 22 साल के राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ कार्यकर्ता बलराम माझी पर TMC के गुंडों द्वारा उनके ही घर में बेरहमी से हमला किया गया। जिसके बाद गंभीर रूप से घायल होने के बाद उसी दिन उनकी मृत्यु हो गई।

38. टीएमसी हिंसा के कारण भाजपा कार्यकर्ताओं का पलायन

2021 के विधानसभा चुनावों में TMC की भारी जीत के बाद, पश्चिम बंगाल में कई बीजेपी कार्यकर्ता और उनके परिवार पर हिंसा के डर से अपने घर छोड़कर पड़ोसी राज्य असम चले गए।

रिपोर्ट्स के अनुसार, लगभग 300-400 लोग उत्तर बंगाल से सीमा पार कर असम के धुबरी जिले में पहुँचे, जहाँ उन्हें अस्थायी शिविरों में आश्रय दिया गया। कई भाजपा नेताओं ने इन शिविरों का दौरा कर राहत सामग्री और आवश्यक वस्तुएँ वितरित कीं।

असम सरकार ने भी धुबरी में इन लोगों के लिए अस्थायी सहायता उपलब्ध कराई और कोविड-19 की दूसरी लहर के दौरान संक्रमण जाँच के लिए एक विशेष केंद्र भी स्थापित किया।

39. भाजपा कार्यकर्ताओं के घरों में तोड़फोड़

2021 पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव परिणामों के बाद, कांकिनारा (भाटपाड़ा) क्षेत्र में भारतीय जनता पार्टी के एक कार्यकर्ता के घर पर बम फेंके जाने की घटना सामने आई।

भाजपा कार्यकर्ता राज बिस्वास ने आरोप लगाया कि तीन लोगों ने उनके घर पर बम फेंके। यह घटना उस समय हुई जब राज्य में चुनाव परिणामों के बाद तनाव और हिंसा की स्थिति बनी हुई थी।

वही एक दूसरी घटना में जादवपुर क्षेत्र में भारतीय जनता पार्टी उम्मीदवार रिंकू नस्कर के घर पर भी हमला किया गया। आरोप है कि चुनाव में हार के बाद TMC से जुड़े लोग उनके घर में घुसे और तोड़फोड़ की।

40. भाजपा कार्यकर्ता का परिवार हुआ बंगाल छोड़ने को मजबूर

2021 के विधानसभा चुनाव परिणामों के बाद पश्चिम बंगाल में TMC की जीत के बाद, बीजेपी के कार्यकर्ता गणेश घोष को राज्य छोड़ने के लिए मजबूर होना पड़ा।

आरोप है कि TMC से जुड़े गुंडों ने शांतिनिकेतन के खोई हाट क्षेत्र के शकुंतला गाँव में स्थित उनके रिसॉर्ट पर हमला कर भारी तोड़फोड़ की। इसके बाद वह अपने परिवार के साथ पश्चिम बंगाल छोड़कर चले गए। यह रिसॉर्ट विश्वभारती विश्वविद्यालय से कुछ ही मिनटों की दूरी पर है।

(मूल रूप से ये रिपोर्ट अंग्रेजी में प्रकाशित है। मूल रिपोर्ट पढ़ने के लिए यहाँ क्लिक करें।)

योगी सरकार ने मजदूरों की मानी हर माँग, फिर नोएडा में क्यों भड़का बवाल?: पढ़िए ‘आंदोलन’ के नाम पर हो रहा संगठित उत्पात या ये है सियासी खेल

नोएडा में वेतन वृद्धि समेत कई माँगों को लेकर अस्थायी मजदूरों का प्रदर्शन जारी है। नोएडा के फेज-2 में स्थित मदरसन कंपनी के अस्थायी मजदूरों ने मनमानी का आरोप लगाते हुए दो-तीन दिन पहले प्रदर्शन शुरू किया था। इसके बाद योगी सरकार ने उनकी कई माँगें मान ली। जिला प्रशासन ने कई आश्वासन दिए।

इसके बावजूद सोमवार (13 अप्रैल 2026) को प्रदर्शन हिंसक हो गया। प्रदर्शनकारियों ने गाड़ियों को आग के हवाले कर दिया और जमकर तोड़फोड़ की। स्थिति को काबू में करने के लिए पुलिस को आँसू गैस के गोले दागने पड़े। बवाल की वजह से एनएच-9, दिल्ली- मेरठ एक्सप्रेस वे और चिल्ला बॉर्डर पर 5 किलोमीटर तक लंबा जाम लग गया। रूट डायवर्ट कर सेक्टर 62 और डीएनडी की ओर भेजा गया। इलाके को छाबनी में तब्दील कर दिया गया है।

मजदूरों का कहना है कि उनकी कंपनी में नए श्रम कानून के प्रावधान लागू नहीं हैं, इसलिए मजदूरों को कम वेतन मिलता है और सुविधाएँ भी न्यूनतम हैं। दिल्ली-हरियाणा समेत कई राज्यों में 1 अप्रैल 2026 से न्यूनतम मजदूरी बढ़ाई गई है। दिल्ली में मजदूरों को अकुशल, कुशल, अर्ध कुशल वर्गों में विभाजित कर 18000 रुपए से 24000 रुपए हर महीना देने का प्रावधान है, जबकि हरियाणा में 15220 रुपए हर महीना मिलता है।

लेकिन, यूपी में मजदूरों की न्यूनतम मजदूरी 13000 रुपए महीना है, इसलिए मजदूर वेतन वृद्धि की माँग कर रहे हैं। 12 अप्रैल को कथित तौर पर एक महिला मजदूर के फायरिंग में घायल होने की खबर फैली। इसके बाद सोमवार को मजदूर उग्र हो गए और उन्होंने बवाल काटा। बताया जा रहा है कि आंदोलन में कई असामाजिक तत्व शामिल हो गए हैं, जो साजिश रच रहे हैं।

मजदूरों की माँगों को सरकार ने माना

  • योगी सरकार मजदूरों की ज्यादातर माँगों को पहले ही मान चुकी है। इसके बावजूद मजदूरों का बवाल सवाल खड़े करता है। योगी सरकार ने जिन माँगों को माना है, उनमें
  • दोगुना ओवरटाइम भुगतान
  • समय पर सैलरी सीधे बैंक में
  • 10 तारीख से पहले हर महीना वेतन मिलना चाहिए
  • सैलरी स्लिप हर मजदूर को हर महीने मिलना चाहिए
  • 30 नवंबर से पहले बोनस का भुगतान सीधा बैंक खाते में होना चाहिए
  • साप्ताहिक अवकाश सुनिश्चित हो
  • अवकाश के दिन काम करने पर दोगुनी मजदूरी मिले
  • महिला सुरक्षा के लिए आंतरिक शिकायत समितियाँ और कंट्रोल रूम बनाना अनिवार्य
  • समिति में एक महिला सदस्य जरूर हो
  • कंट्रोल रूम में शिकायत पेटी लगाई जाए
  • हेल्पलाइन नंबर जारी की जाए, ताकि उससे भी शिकायत दर्ज कराई जा सके
  • शिकायतों का तुरंत निपटारा किया जाए
  • सरकार के निर्देशों का पालन सुनिश्चित कराने के लिए नियमित निगरानी की जाए।
  • नियमों का उल्लंघन करने वाली कंपनी के खिलाफ कार्रवाई की जा सकती है।

शनिवार 11 अप्रैल 2026 को सीएम योगी ने मजदूरों के विरोध प्रदर्शन को संज्ञान में लेते हुए उच्च स्तरीय बैठक की और निर्देश जारी करते हुए कहा कि मजदूरों के हितों की किसी भी हाल में अनदेखी नहीं की जाएगी। नोएडा प्रशासन ने इसकी जानकारी भी दी।

मजदूरों का डिरेल होता आंदोलन

नोएडा में हो रहा मजदूर आंदोलन डिरेल होता नजर आ रहा है। सरकार ने भी हर हाल में मजदूरों के हितों की रक्षा करने की बात कही और सीएम योगी ने खुद संज्ञान लिया। इसके लिए निर्देश जारी किए। लेकिन अब एक प्राइवेट कंपनी के खिलाफ विरोध प्रदर्शन में कई कंपनियों के अस्थायी मजदूर शामिल हो गए हैं। इसमें ऐसे असामाजिक तत्व भी हैं, जो इसे हिंसक बना रहे हैं।

मजदूरों को उनका हक हर हाल में मिलना चाहिए, लेकिन इनके शांतिपूर्ण विरोध को हिंसक बनाने वाले तत्वों को जरूर सामने लाया जाना चाहिए। ऐसा करने वाले मजदूरों का भला नहीं कर रहे होते हैं, क्योंकि आंदोलन के हिंसक होते ही मजदूरों की माँगें कहीं खो जाती है और बातें उस हिंसा की होती है, जो असामाजिक तत्व फैलाते हैं। ऐसी ही हालत अब नोएडा में मजदूर आंदोलन की हो रही है।

इससे पहले पानीपत, मानेसर समेत कई जगहों पर मजदूरों को भड़काने की कोशिश की गई। पानीपत-मानेसर में रिफाइनरी में अस्थायी मजदूरों की कई माँगे हैं। उन्हें 12 घंटे काम कराकर 8 घंटे की ड्यूटी बताया जाता है। मजदूरों ने वेतन वृद्धि और फैक्ट्री में मजदूरों के लिए बेहतर सुविधाएँ देने की माँग की है।

यह आंदोलन भी हिंसक हो गया और मजदूरों की माँग पीछे रह गई और 2500 अज्ञात लोगों के खिलाफ केस दर्ज किया गया। असामाजिक तत्वों ने हिंसा फैला कर मजदूर आंदोलन को डिरेल कर दिया। इस बीच फरीदाबाद में भी मजदूरों का मुद्दा गरमाने लगा है और विरोध प्रदर्शन की तैयारी चल रही है। मजदूर संगठनों ने पानीपत-मानेसर के मजदूरों को समर्थन देने के लिए आंदोलन करने की चेतावनी दी है।

इसी तरह मध्यप्रदेश के सिंगरौली में अडानी ग्रुप की परियोजना का विरोध किया गया। यहाँ की सुलियारी और थिरौली कोयला खदानों को बंद करने की माँग करते हुए विरोध प्रदर्शन हुए। इस दौरान संदिग्ध परिस्थिति में एक मजदूर की मौत के बाद बवाल मच गया।

यूपी समेत कई बीजेपी राज्यों में साजिश रची गई

यूपी को अशांत करने की कोशिशें काफी दिनों से हो रही है। किसान आंदोलन के दौरान पंजाब से यूपी खासकर पश्चिम यूपी में बवाल मचा। जाट आरक्षण आंदोलन के दौरान हरियाणा, राजस्थान, यूपी समेत कई राज्य इसकी जद में आए।

इन आंदोलनों के दौरान सड़कों को जाम कर सरकारी बसों और दूसरे वाहनों को आग के हवाले करना, सरकारी संपत्ति को नुकसान पहुँचाना आम बात हो गई थी। सोशल मीडिया ने इस दौरान आग में घी का काम किया और आंदोलन को लेकर तरह-तरह की अफवाहें फैलाई गई। दरअसल इन आंदोलनों के पीछे सियासी साजिश थी, जिसका खुलासा बाद में सरकारी एजेंसियों ने किया।

2025 में ‘आई लव मोहम्मद’ बीजेपी शासित राज्यों उत्तराखंड, यूपी, हरियाणा, राजस्थान, महाराष्ट्र, गुजरात समेत कई राज्यों में विवाद का विषय रहा। यूपी में कानपुर में 4 सितंबर 2025 को शुरू हुआ यह विवाद बरेली, अलीगढ़, मेरठ तक फैला। इस दौरान ‘आई लव मोहम्मद’ के बैनर-पोस्टर के साथ सड़कों को इस्लामी भीड़ ने जाम किया और भड़काऊ नारेबाजी की। कई जगहों पर पथराव हुए और पुलिस पर हमले किए गए।

इस्लामी कट्टरपंथियों पर काबू पाने के लिए कई जगहों पर पुलिस ने आँसू गैस के गोले छोड़े और लाठीचार्ज किया। उत्तराखंड के काशीपुर में ‘आई लव मुहम्मद’ को लेकर हुए बवाल और पुलिस पर पत्थरबाजी में समाजवादी पार्टी नेता नदीम अख्तर का नाम सामने आया। इस विवाद को भी सोशल मीडिया के माध्यम से हवा दी गई।

दरअसल किसानों, मजदूरों और इस्लामी कट्टरपंथियों के बवाल के पीछे साजिश का खुलासा बाद में होता है। भोले-भाले किसानों और मजदूरों की माँगों को आगे कर सियासी रोटी सेंकने की आदत पार्टियों की रही है। मजदूरों की माँग न्यूनतम मजदूरी की रही है, जिसे नाजायज नहीं कहा जा सकता। लेकिन, क्या इसके पीछे यूपी के विकास और औद्योगिक धंधों को डिरेल करने की कोशिश तो नहीं है?

विवादों में घिरा IPL 2026, डगआउट में फोन इस्तेमाल करते देखे गए राजस्थान रॉयल्स के टीम मैनेजर रोमी भिंडर: पास में बैठे थे वैभव सूर्यवंशी, समझें- ये कितना बड़ा मामला

IPL 2026 में राजस्थान रॉयल्स के टीम मैनेजर रोमी भिंडर विवादों में आ गए हैं। मामला रॉयल चैलेंजर्स बेंगलुरु के खिलाफ खेले गए मैच का है, जहाँ कैमरों में उन्हें डगआउट में मोबाइल फोन इस्तेमाल करते हुए देखा गया।

ये मैच शुक्रवार (10 अप्रैल 2026) को गुवाहाटी में खेला गया था। यह वही मैच था जिसमें राजस्थान रॉयल्स ने शानदार प्रदर्शन करते हुए 6 विकेट से जीत दर्ज की। उस दौरान उनके पास युवा खिलाड़ी वैभव सूर्यवंशी भी बैठे हुए थे।

BCCI के एक अधिकारी ने साफ तौर पर माना है कि डगआउट में फोन का इस्तेमाल करना नियमों के खिलाफ है। IPL जैसे बड़े टूर्नामेंट में इस तरह की गलती को हल्के में नहीं लिया जाता, क्योंकि यहाँ एंटी-करप्शन से जुड़े नियम बहुत सख्त होते हैं। अब यह माना जा रहा है कि भिंडर पर किसी न किसी तरह की कार्रवाई जरूर हो सकती है।

क्या है पूरा मामला?

दरअसल मैच के दौरान टीवी कैमरों ने रोमी भिंडर को फोन इस्तेमाल करते हुए कैद कर लिया। बाद में यह तस्वीर सोशल मीडिया पर वायरल हो गई। शुरुआत में इसे सामान्य बात समझा गया, लेकिन जब इसकी जाँच हुई तो यह पुष्टि हो गई कि वह वास्तव में फोन इस्तेमाल कर रहे थे।

रोमी भिंडर लंबे समय से टीम के साथ जुड़े हुए हैं और IPL की शुरुआत से ही टीम मैनेजमेंट का हिस्सा रहे हैं। ऐसे में उनसे उम्मीद की जाती है कि वे सभी नियमों और प्रोटोकॉल को अच्छी तरह जानते होंगे। इसलिए यह मामला थोड़ा गंभीर माना जा रहा है। हालाँकि कुछ लोग इसे गलती से हुआ काम बता रहे हैं, लेकिन नियमों का उल्लंघन तो साफ तौर पर हुआ है।

अब इस पूरे मामले की रिपोर्ट मैच रेफरी और एंटी-करप्शन यूनिट (ACU) को सौंपी जाएगी, जिसके आधार पर आगे का फैसला लिया जाएगा। यह फैसला इस बात पर निर्भर करेगा कि इसे कितनी बड़ी गलती माना जाता है।

क्या कहते हैं IPL के नियम?

IPL में PMOA यानी प्लायर्स एण्ड मैच अफिशल एरिया को बहुत ही संवेदनशील क्षेत्र माना जाता है। इसमें ड्रेसिंग रूम, डगआउट, खिलाड़ियों की बैठने की जगह और मैच अधिकारियों के कमरे शामिल होते हैं। इस पूरे इलाके में सुरक्षा और नियमों का खास ध्यान रखा जाता है।

स्क्रीन शॉर्ट – IPL PMOA PROTOCOL

नियम साफ कहते हैं कि डगआउट में मोबाइल फोन का इस्तेमाल पूरी तरह से बैन है। टीम मैनेजर को सिर्फ ड्रेसिंग रूम में ही फोन इस्तेमाल करने की अनुमति होती है। इसके अलावा खिलाड़ियों और सपोर्ट स्टाफ को अपने फोन और स्मार्ट डिवाइस बंद करके जमा कराने होते हैं, ताकि मैच के दौरान किसी भी तरह का बाहरी संपर्क न हो सके।

डगआउट और ड्रेसिंग रूम के बीच बातचीत के लिए सिर्फ वॉकी-टॉकी का इस्तेमाल किया जा सकता है। इन सभी नियमों का मकसद मैच को पूरी तरह निष्पक्ष और सुरक्षित बनाए रखना होता है, ताकि किसी भी तरह की गड़बड़ी या भ्रष्टाचार की संभावना न रहे।

अब अगर रोमी भिंडर के मामले की बात करें, तो यह तय है कि नियमों का उल्लंघन हुआ है। ऐसे में उन पर चेतावनी, जुर्माना या फिर मैच बैन जैसी कार्रवाई हो सकती है। अंतिम फैसला ACU की रिपोर्ट और मैच रेफरी की सिफारिश के बाद ही लिया जाएगा।