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अहमद मसूद: ‘पंजशीर के शेर’ का वो बेटा… जो लंदन में पढ़ा, अब तालिबानी शासन से मुक्त करा रहा जिला दर जिला

अफगानिस्तान में तालिबानी शासन के बाद उसके विरोध में दो नाम सामने आ रहे हैं। एक अफगानिस्तान के कार्यवाहक राष्ट्रपति अमरुल्लाह सालेह का, जिन्होंने राष्ट्रपति अशरफ गनी के देश छोड़ने के बाद खुद को कार्यवाहक राष्ट्रपति घोषित कर दिया। अहमद मसूद – यह दूसरा नाम है, वर्तमान परिस्थिति में पहले वाले से ज्यादा अहम।

कौन हैं अहमद मसूद? ‘पंजशीर के शेर’ कहे जाने वाले अफगानी कमांडर अहमद शाह मसूद के बेटे हैं अहमद मसूद। अहमद मसूद तालिबान के खिलाफ मोर्चाबंदी में जुटे हुए हैं। ऐसे में अफगानिस्तान के घटनाक्रम पर नजर रखे हुए पूरी दुनिया देखना चाहती है कि क्या अहमद मसूद अपने पिता की विरासत को आगे बढ़ा पाएँगे?

पिता के हत्यारों के खिलाफ आंदोलन खड़ा करना उद्देश्य

अहमद मसूद जब 12 साल के थे, तब तालिबान और अलकायदा ने षड्यंत्र करके उनके पिता अहमद शाह मसूद की हत्या कर दी थी। उनकी हत्या 9/11 के आतंकी हमले से पहले की गई थी। अफगानिस्तान की राजधानी काबुल से करीब 100 किलोमीटर (किमी) दूर पूर्वोत्तर में स्थित पंजशीर, शुरुआत से ही तालिबान के विरोध का केंद्र रहा।

पंजशीर ही वो जगह है, जहाँ शाह मसूद के नेतृत्व में सन् 1996 में तालिबान विरोधी आंदोलन खड़ा हुआ था। शाह मसूद के प्रयासों का ही परिणाम है कि आज भी जब तालिबान ने पूरे अफगानिस्तान पर अपना कब्जा जमा लिया है, तब पंजशीर ही एकमात्र ऐसा प्रांत है, जो तालिबान के कब्जे से बाहर है।

जब शाह मसूद की हत्या हुई थी, तब अहमद मसूद एक बच्चे थे फिर भी उन्होंने अपने पिता को तालिबान के खिलाफ संघर्ष करते और उसके लिए रणनीति बनाते हुए करीब से देखा और समझा था। अब फिर से अफगानिस्तान की परिस्थितियाँ कुछ ऐसी बनी हैं कि 32 वर्षीय अहमद मसूद तालिबान के विरोध का मोर्चा सँभालने के लिए तैयार हैं और इसके लिए उन्होंने काम भी शुरू कर दिया है। अहमद मसूद, पंजशीर प्रांत में कार्यवाहक राष्ट्रपति अमरुल्लाह सालेह के साथ मिलकर तालिबान विरोधी आंदोलन को पुनर्जीवित करने में लगे हुए हैं।

अफगानी समस्या और तालिबान से निपटने का अनुभव

1989 में जन्मे अहमद मसूद ने ईरान से अपनी स्कूली शिक्षा प्राप्त की लेकिन बाद में उनका शैक्षणिक जीवन अंतरराष्ट्रीय राजनीति और युद्ध रणनीति के अध्ययन पर केंद्रित रहा। ईरान से स्कूल की शिक्षा ख़त्म करने के बाद अहमद मसूद ने ब्रिटिश आर्मी मिलिट्री एकेडमी से मिलिट्री कोर्स किया और लंदन के किंग्स कॉलेज से वॉर स्टडीज में बैचलर डिग्री ली। इसके बाद उन्होंने यूनिवर्सिटी ऑफ लंदन से इंटरनेशनल पॉलिटिक्स में मास्टर डिग्री भी ली।

अहमद मसूद की इस पूरी शैक्षणिक पृष्ठभूमि को देखने के बाद यह साफ़ हो जाता है कि उन्हें अफगानिस्तान में आगामी संघर्ष का पूर्वानुमान था और उन्हें यह भी पता था कि अंततः एक बार फिर उन्हें तालिबान के खिलाफ संघर्ष का नेतृत्व करना होगा। हालाँकि इसकी शुरुआत उन्होंने 2019 में ही कर दी थी, जब उन्होंने नेशनल रेसिस्टेंस फ्रंट ऑफ अफगानिस्तान का गठन किया गया था। यह ठीक वैसा ही हैस जैसे सन् 1996 के दौरान नॉर्दर्न अलायंस था, जिसने तालिबान से संघर्ष शुरू किया था और अहमद मसूद के पिता भी इसी आंदोलन का एक महत्वपूर्ण हिस्सा थे।

‘पता था कि ये दिन जरूर आएगा’

वाशिंगटन पोस्ट के लिए लिखे गए अपने लेख में अहमद मसूद ने कहा, “मैं उन मुजाहिदों के साथ मिलकर अपने पिता के पदचिन्हों पर चलने के लिए तैयार हूँ, जो एक बार फिर तालिबान के खिलाफ संघर्ष के लिए तैयार हैं। हम अपने पिता के समय से ही हथियार और आवश्यक संसाधन जुटाते आ रहे हैं क्योंकि हमें पता था कि यह दिन जरूर आएगा।”

अहमद मसूद ने लिखा कि उनके पास अफगानी सेना के हथियार भी हैं और उनकी अपील पर अफगानिस्तान की सेना के वैसे कई वर्तमान और पूर्व सैनिक भी तालिबान के खिलाफ संघर्ष में साथ आना चाहते हैं, जो अफगानी कमांडर्स के द्वारा तालिबान के आगे सरेंडर किए जाने से व्यथित हैं।

अहमद मसूद का कहना है कि वो और उनकी नेशनल रेसिस्टेंस फोर्स तालिबान के खिलाफ जरूर लड़ेंगे और विरोध का झंडा भी लहराया जाएगा लेकिन उन्हें इसके लिए बाकी देशों की सहायता की आवश्यकता भी होगी। अहमद का कहना है कि भले ही अमेरिका ने उन्हें युद्धभूमि में अकेला छोड़ दिया हो लेकिन अभी भी अमेरिका, अफगानिस्तान में लोकतंत्र की बहाली में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।

तालिबानी शासन से 3 जिले मुक्त

अफगानिस्तान में तालिबान विरोधी गुटों ने मुल्क के कुछ जिलों को कब्जे से छुड़ा लिया है। इस लड़ाई में लगभग 60 तालिबानी मारे भी गए हैं। तालिबान के साथ हुई लड़ाई के बाद पब्लिक रेजिस्टेंस फोर्सेज ने बघलान प्रांत के तीन जिलों- बानू, पोल-ए-हेसर और डेह सलाह को अपने कब्जे में ले लिया है।

पोल-ए-हेसर जिला काबुल के उत्तर में पंजशीर घाटी के करीब स्थित है। पंजशीर घाटी हिंदूकुश पर्वत के नजदीक है। यह इकलौता ऐसा प्रांत है जिस पर तालिबान आज तक नियंत्रण नहीं कर सका है। बताया जाता है कि तालिबान विरोधी यहाँ इकट्ठे हो रहे हैं। अफगानिस्तान के उप-राष्ट्रपति अमरुल्लाह सालेह जिन्होंने तालिबान के आगे घुटने टेकने से इनकार करते हुए खुद को कार्यवाहक राष्ट्रपति घोषित किया था, उनके भी यहीं होने की खबर है।

2 घंटे का ₹2 लाख… सेक्स के लिए हिरोइन और टॉप मॉडल का रेट: फाइव स्टार होटल से ईशा खान गिरफ्तार

मुंबई में हाईप्रोफाइल सेक्स रैकेट का बड़ा खुलासा हुआ है। ग्राहक बनकर पहुँचे क्राइम ब्रांच के एक अधिकारी ने इस पूरे मामले का खुलासा किया है। 32 वर्षीय एक मॉडल को मुंबई क्राइम ब्रांच ने जुहू स्थित फाइव स्टार होटल से गिरफ्तार किया है।

गिरफ्तार की गई मॉडल के ऊपर सेक्स रैकेट चलाने का आरोप है। क्राइम ब्रांच के अधिकारियों के मुताबिक इस मॉडल ने अपने रैकेट में टीवी एक्टर्स और मॉडल्स को शामिल किया हुआ था। वहीं इस दौरान दो अन्य अभिनेत्रियों को छुड़ाया भी गया। 

जाँच टीम ने इस पूरे मामले में ईशा खान नाम की एक महिला को गिरफ्तार किया है, जो इस सेक्‍स रैकेट को चलाया करती थी। मुंबई पुलिस को जानकारी मिली थी कि ईशा खान काफी समय से मुंबई के बड़े होटल में सेक्‍स रैकेट चला रही है।

जानकारी के आधार पर क्राइम ब्रांच ने एक टीम तैयार की। क्राइम ब्रांच के अधिकारी ने फर्जी ग्राहक बनकर पहले ईशा खान से संपर्क किया। इसके बाद ईशा ने कई फोटो भेजे। क्राइम ब्रांच के अधिकारी ने दो लड़कियों के फोटो सेलेक्‍ट किए। इसमें से एक कई विज्ञापनों में काम करती है और दूसरी कई टीवी सीरियलों में काम कर चुकी है।

रिपोर्ट के मुताबिक, ईशा खान ने बताया कि हर लड़की दो घंटे के दो लाख रुपए लेगी। दो लाख में से 50 हजार ईशा खान को मिलने थे। क्राइम ब्रांच के अधिकारियों ने तीनों को जुहू के एक होटल में मिलने को कहा। गुरुवार (अगस्त 19, 2021) रात जैसे ही ईशा खान, मॉडल व अभिनेत्री उस होटल के बाहर पहुँचे, क्राइम ब्रांच टीम ने उन्हें गिरफ्तार कर लिया।

लॉकडाउन ने छीना काम तो उतरी सेक्स रैकेट में

मॉडल और टीवी अभिनेत्री ने बताया कि कोरोना की वजह से जब से लॉकडाउन लगा, तब से काम नहीं मिल रहा। लॉकडाउन के कारण जो धारावाहिक वो कर रही थीं, वो भी बंद है। ऐसे में उन्‍हें मुंबई में रहने के लिए पैसे की जरूरत थी। यही कारण है कि वह सेक्स रैकेट में आ गईं।

गौरतलब है कि हाल ही में बॉलीवुड अभिनेत्री शिल्पा शेट्टी के पति और बिजनेसमैन राज कुंद्रा को साइबर संबंधित पोर्नोग्राफी केस में बॉम्बे हाईकोर्ट से राहत मिली। बॉम्बे हाईकोर्ट ने शिल्पा के पति राज कुंद्रा को अंतरिम राहत देते हुए उनके जमानत की सुनवाई 25 अगस्त तक के लिए सुरक्षित कर ली।

बता दें कि राज कुंद्रा को एक महीने पहले 19 जुलाई को अश्लील फिल्में बनाने एवं उन्हें इंटरनेट के विभिन्न माध्यमों पर अपलोड करने के आरोप में गिरफ्तार किया गया था। वह तभी से जेल में हैं। इससे पहले अक्तूबर 2020 में भी उनके खिलाफ अश्लील फिल्में बनाने के कारोबार से ही जुड़ा एक और मामला मुंबई पुलिस की साइबर क्राइम ब्रांच ने दर्ज किया था। 

मुनव्वर राना के खिलाफ FIR: तालिबान से की महर्षि वाल्मीकि की तुलना, ‘डाकू’ तक कह डाला था

अपनी विवादित टिप्पणियों के लिए मशहूर, शायर मुनव्वर राना के खिलाफ लखनऊ के हजरतगंज थाने में SC/ST एक्ट समेत कई अन्य धाराओं में केस दर्ज किया गया है। मुनव्वर राना ने महर्षि वाल्मीकि की तुलना तालिबान से की थी। इसके बाद अखिल भारतीय हिन्दू महासभा और सामाजिक सरोकार फाउंडेशन की शिकायत पर केस दर्ज किया।

मुनव्वर राना द्वारा महर्षि वाल्मीकि पर की गई टिप्पणी पर आपत्ति जताते हुए वाल्मीकि समाज ने इसे हिन्दुओं की आस्था के साथ किया गया खिलवाड़ बताया। इसके बाद राना के खिलाफ लखनऊ के हजरतगंज थाने में शिकायत दर्ज कराई गई। शिकायत के आधार पर पुलिस ने राना के खिलाफ SC/ST एक्ट और धारा 153A, 295A और 501(1)(B) के अंतर्गत केस दर्ज कर लिया है।

ज्ञात हो कि शायर मुनव्वर राना ने महर्षि वाल्मीकि की तुलना तालिबान से करते हुए कहा था, “इंसान का कैरेक्टर बदलता रहता है। वाल्मीकि का जो इतिहास था, उसे तो हमें निकालना पड़ेगा न। हमें तो अफगानी अच्छे लगते हैं। वाल्मीकि को आप भगवान कह रहे हैं, लेकिन आपके मजहब में तो किसी को भी भगवान कह दिया जाता है।” राना ने न्यूज नेशन पर पत्रकार दीपक चौरसिया से बात करते हुए कहा था कि वाल्मीकि रामायण लिख देता है तो वो देवता हो जाता है, उससे पहले वो डाकू होता है।

राना से पहले अभिनेत्री राखी सावंत ने भी महर्षि वाल्मीकि को लेकर आपत्तिजनक टिप्पणी की थी जिसके बाद उन्हें भी पुलिस के सामने सरेंडर करना पड़ा था। राखी सावंत ने महर्षि वाल्मीकि को ‘हत्यारा’ बता दिया था और कहा था कि इसके बावजूद उन्होंने रामायण लिखा।

2014 में एक जन्मदिन की पार्टी में गायक मीका सिंह ने राखी सावंत को जबरन किस किया था। इसी क्रम में उन्होंने मीका सिंह की तुलना महर्षि वाल्मीकि से कर डाली थी। उन्होंने दावा किया था कि महर्षि वाल्मीकि की तरह मीका भी बदल गए हैं और निर्दोष हो गए हैं। इसी बयान के बाद राखी सावंत ने पंजाब पुलिस के सामने आत्मसमर्पण किया था।

ऑपइंडिया ने जताई थी गिरफ्तारी का आशंका

19 अगस्त को जब मुनव्वर राना ने महर्षि वाल्मीकि पर घटिया कमेंट किया था और गलत जानकारी फैलाई थी, तभी ऑपइंडिया ने इस शायर के गिरफ्तार होने की आशंका जताई थी।

19 अगस्त की खबर और आज FIR वाली न्यूज, आप इसे ऑपइंडिया इम्पैक्ट मान सकते हैं!

क्यों गलत हैं मुनव्वर राना

महर्षि वाल्मीकि के डकैत होने के कोई पुष्ट सबूत नहीं – यह ऑपइंडिया या किसी व्यक्ति-विशेष का नहीं बल्कि हाईकोर्ट का मानना है। नौवीं शताब्दी तक के किसी भी वैदिक साहित्य में महर्षि वाल्मीकि के डाकू होने की बात नहीं लिखी है। ये बात खुद जज ने कही थी।

इससे संबंधित एक मामला (‘विदाई’ नाम के टीवी सीरियल का, जिसमें वाल्मीकि के डकैत का प्रसंग था, बवाल हुआ था) सुप्रीम कोर्ट में भी गया था। वहाँ भी सीरियल के निर्माताओं को राहत नहीं दी गई थी। इसी तरह अरशद वारसी की फिल्म ‘द लीजेंड ऑफ माइकल मिश्रा’ को भी पंजाब में प्रतिबंधित किया गया था, क्योंकि उसमें भी इसी कहानी को दोहराया गया था।

महर्षि वाल्मीकि के ‘अपराधी’ होने की बात से वाल्मीकि समाज के लोग इत्तिफ़ाक़ नहीं रखते और वो इसे अपमानजनक बताते हैं।

मुनव्वर राना = कुत्ता? सोशल मीडिया पर जहरीले बयान

कुमार विश्वास ने ट्वीट करके कहा, “ज्यादा दिमाग न लगाइए। अगर पड़ोस के घर में मची अफरा-तफरी के कारण, जिंदगी भर आपसे इज्जत पाने वाले और आपके घर में रह रहे, बदबूदार सोच से भरे किसी जाहिल शख्स का पर्दाफाश हो रहा है तो शोक नहीं, शुक्र मनाइए कि दो पैसे की प्याली गई (वो भी पड़ोसियों की), पर कुत्ते की जात पहचानी गई।”

इस ट्वीट में कहीं भी किसी का नाम नहीं लिया गया है। कुमार विश्वास वैसे भी गालियों से बात करने वाले प्रतीत होते नहीं हैं। फिर भी पता नहीं क्यों लोग उनके इस ट्वीट पर गाली मुनव्वर राना को दे रहे हैं। कई यूजर्स का मानना है कि कुमार विश्वास ने बिना नाम लिए मुनव्वर राना के लिए ही यह बात कही है।

गवी गंगाधरेश्वर मंदिर: बेंगलुरु से वाराणसी तक सुरंग, जहाँ मकर संक्रांति पर होता है भक्ति और विज्ञान का संगम

भारत के मंदिरों की विशेषता है उनकी संरचना और वास्तुकला। कई ऐसे मंदिर हैं जिनकी वास्तुकला, विज्ञान के उत्कृष्ट स्वरूप पर आधारित है और इन मंदिरों की इसी वास्तुकला के कारण यहाँ कई ऐसी प्राकृतिक घटनाएँ होती हैं जो इन मंदिरों को सबसे अलग बना देती हैं और श्रद्धालुओं को एक दैवीय अनुभव प्रदान करती हैं। ऐसा ही एक मंदिर कर्नाटक की राजधानी बेंगलुरु के गवीपुरम में है, जिसे गवी गंगाधरेश्वर मंदिर के नाम से जाना जाता है। पूरे वर्ष में मकर संक्रांति के दिन इस मंदिर में एक ऐसी प्राकृतिक घटना होती है जो किसी दैवीय चमत्कार से कम नहीं है।

मंदिर का इतिहास

बेंगलुरु का गवी गंगाधरेश्वर मंदिर एक पौराणिक स्थान है। यहाँ गौतम ऋषि ने कई दिनों तक भगवान शिव की कठिन तपस्या की थी, जिसके कारण इस स्थान पर भगवान शिव का प्रादुर्भाव हुआ था। यही कारण है कि इस क्षेत्र को गौतम क्षेत्र के नाम से भी जाना जाता है। इस स्थान पर भारद्वाज ऋषि ने भी तपस्या की थी और भगवान शिव का आशीर्वाद प्राप्त किया था।

यह एक गुफा मंदिर है और इसकी गिनती भारतीय रॉक कट वास्तुशैली के सबसे शानदार मंदिरों में से होती है। बेंगलुरु के इस प्राचीनतम मंदिर का आधुनिक इतिहास 9वीं एवं 16वीं शताब्दी से जुड़ा हुआ है। इसका निर्माण कैम्पे गौड़ा द्वारा 9वीं शताब्दी में कराया गया जबकि 16वीं शताब्दी में इसका जीर्णोद्धार बेंगलुरु के संस्थापक कैम्पे गौड़ा प्रथम द्वारा कराया गया था।

मंदिर की संरचना

गवी गंगाधरेश्वर मंदिर की विशेषता इसकी संरचना ही है। दरअसल यह मंदिर विज्ञान और धर्म का एक अनूठा संगम है। दक्षिण भारत के अन्य मंदिरों से अलग इस मंदिर की दक्षिण-पश्चिमी दिशा अर्थात नैऋत्य कोण की तरफ है। यह बताता है कि मंदिर का निर्माण करने वाले वास्तुविद नक्षत्र विज्ञान के बहुत बड़े ज्ञाता थे। मंदिर के आँगन में चार ऐसी संरचनाएँ हैं, जिनका निर्माण एक ही पत्थर से हुआ है। इनमें से दो संरचनाएँ (एक खंभे पर गोल डिस्क) सूर्यपाण एवं चन्द्रपाण कहलाती हैं। इसके अलावा एक डमरू और एक त्रिशूल भी एक ही पत्थर से बनाया गया है।

सूर्यपाण एवं चन्द्रपाण के बीच में एक ध्वज स्तंभ है और नंदी मंडप है, जिसमें भगवान शिव के वाहन नंदी विराजमान हैं। मंदिर का गर्भगृह एक गुफा में स्थित है, जहाँ तक पहुँचने के लिए सीढ़ियों से नीचे उतरना पड़ता है। गर्भगृह मात्र 6 फुट ऊँचा है और यहीं स्थापित है, एक विशाल शिवलिंग। शिवलिंग के आसपास अन्य देवी-देवताओं और ऋषि-मुनियों की प्रतिमाएँ स्थापित हैं।

मकर संक्रांति का प्रसिद्ध त्यौहार

वैसे तो मकर संक्रांति हिन्दुओं के सबसे पवित्र और सकारात्मक त्यौहारों में से एक है। लेकिन गवी गंगाधरेश्वर मंदिर में इस त्यौहार का महत्व कहीं अधिक बढ़ जाता है और इस दिन होने वाली अद्भुत प्राकृतिक घटना को देखने के लिए न केवल भारत बल्कि विदेशों से भी श्रद्धालु आते हैं। ऐसा नहीं है कि सिर्फ धार्मिक आस्था में विश्वास करने वाले ही इस घटना का साक्षी बनना चाहते हैं बल्कि जिन्हें विज्ञान में रुचि है, वो भी इस मंदिर में मकर संक्रांति के उत्सव पर पहुँचते हैं।

दरअसल मकर संक्रांति के दिन सूर्य भगवान उत्तरायण होते हैं। ऐसे में इस दिन सूर्यास्त के समय मात्र 5-8 मिनटों के लिए ही सूर्य की किरणें गर्भगृह तक पहुँच कर शिवलिंग का अपनी स्वर्णिम लालिमा से अभिषेक करती हैं। घटना कुछ ऐसी होती है कि सूर्यास्त के ठीक पहले सूर्य की किरणें मंदिर के स्तंभों को छूते हुए, नंदी की दोनों सींगों के एकदम मध्य से एक चाप से गुजरते हुए गर्भगृह तक पहुँचती हैं और पूरा गर्भगृह स्वर्णिम किरणों से अलंकृत हो जाता है। इस घटना को देखने के लिए हर साल हजारों लोगों की भीड़ मंदिर में इकट्ठा होती है।

मंदिर के रहस्य

ऐसा नहीं है कि गवी गंगाधरेश्वर सिर्फ अपनी अद्वितीय संरचना के लिए जाना जाता है बल्कि मंदिर के विषय में कुछ चमत्कार भी प्रचलित हैं। कहा जाता है कि गंगाधरेश्वर पर अर्पित किया गया घी पुनः मक्खन में बदल जाता है जबकि ऐसा असंभव है क्योंकि मक्खन से घी बनता है और घी को मक्खन में नहीं बदला जा सकता है।

इसके अलावा कहा जाता है कि मंदिर के गर्भगृह में तीन सुरंगों के द्वार हैं जो शिवगंगा, सिद्धगंगा और वाराणसी के लिए जाती हैं। इस मंदिर और यहाँ स्थित सुरंगों के संबंध में कहा जाता है कि दो युवक किसी तरह से वाराणसी जाने वाली सुरंग में घुसने में कामयाब रहे थे लेकिन कभी वापस नहीं आए।

कैसे पहुँचें?

भारत के महानगरों में से एक बेंगलुरु यातायात के किसी भी साधन से अछूता नहीं है और न केवल भारत बल्कि दुनिया के किसी भी कोने से यहाँ पहुँचना बहुत आसान है। मंदिर से बेंगलुरु के कैम्पे गौड़ा अंतरराष्ट्रीय हवाईअड्डे की दूरी लगभग 38 किलोमीटर (किमी) है। बेंगलुरु कैंट से मंदिर की दूरी लगभग 8.8 किमी है। इसके अलावा कैम्पे गौड़ा मैजेस्टिक बस स्टैंड से मंदिर मात्र 4 किमी है।

भारत में बनी DNA बेस्ड कोरोना वैक्सीन के इस्तेमाल की इजाजत, बच्चों को भी लगेगी: ZyCoV-D के बारे में जानिए सब कुछ

कोरोना के खिलाफ जारी जंग के बीच देश को एक और हथियार मिल गया है। डीएनए बेस्ड कोरोना वैक्सीन के आपातकालीन इस्तेमाल की मंजूरी मिल गई है। जायडस कैडिला (Zydus-Cadila) के इस वैक्सीन की इमरजेंसी इस्तेमाल की इजाजत शुक्रवार (20 अगस्त 2021) को ड्रग कंट्रोलर जनरल ऑफ इंडिया (DCGI) ने दी। यह दुनिया की पहली डीएनए आधारित कोरोना वैक्सीन है। इसे भारत में स्वदेशी रूप से विकसित किया गया है। यह 12 साल या उससे अधिक उम्र के बच्चों को भी दी जा सकती है।

इस वैक्सीन की खास बात यह है कि कोरोना वैक्सीन दुनिया की पहली डीएनए वैक्सीन है। इसके जरिए जेनेटिकली इंजीनियर्ड प्लास्मिड्स को शरीर में इंजेक्ट किया जाता है। 3 खुराक वाले इस टीके से शरीर में कोविड-19 के स्पाइक प्रोटीन का उत्पादन होता है और इस तरह वायरस से बचाव वाले एंटीबॉडी पैदा होते हैं।

ज्यादातर कोरोना वैक्सीन के 2 डोज लगते हैं लेकिन कैडिला की इस वैक्सीन के 3 डोज लगेंगे। वैक्सीन की सबसे खास बात यह है कि यह सूई से नहीं लगाई जाएगी। इसे एक खास डिवाइस से लगाया जाएगा। जायडस कैडिला का दावा है कि इस तरीके से जब वक्सीन लगेगी तो उससे दर्द भी नहीं होगा। कंपनी यह भी दावा कर रही है कि इसके साइड इफेक्ट भी कम हैं।

इस वैक्सीन को 12-18 साल के आयु वर्ग वालों को लगाया जा सकेगा। इसके अलावा 18 वर्ष से अधिक उम्र के लोग भी इस वैक्सीन को ले सकते हैं। अन्य वैक्सीनों से ये इस मायने में अलग है कि वो एम-आरएनए आधारित हैं जबकि ये वैक्सीन डीएनए बेस्ड है। सबका काम एक ही है- वायरस से सुरक्षा प्रदान करना।

इस वैक्सीन को जायडस कैडिला ने ZyCoV-D को बायोटेक्‍नोलॉजी विभाग के साथ पार्टनरशिप में बनाया है। आगे कंपनी वैक्सीन की 10 करोड़ से 12 करोड़ डोज बनाने की तैयारी कर रही है। मालूम हो कि देशभर में हजारों लोगों पर सफल परीक्षण के बाद ही इसे सरकार ने मंजूरी दी है। उससे पहले 28,000 से अधिक लोगों पर लेट-स्‍टेज ट्रायल में 66.6 फीसदी कारगर पाए जाने के बाद कैडिला हेल्‍थकेयर ने ZyCoV-D के ऑथराइजेशन के लिए अप्‍लाई किया था। कीमत की बात करें तो संभव है कि केंद्र सरकार के प्रोग्राम के तहत यह मुफ्त में मिले और यदि ऐसा नहीं होता तो इसकी कीमत भी 700-1500 रुपए के बीच लगाई जा रही है।

गौरतलब है कि ZyCoV-D देश में पूर्णत: स्वदेशी तरीके से विकसित दूसरी वैक्सीन है, जिसे DCGI की मंजूरी मिली है। इसी के साथ यह मंजूरी प्राप्त करने वाला छठा टीका बन गया है। इससे पहले अगस्त में जॉनसन एंड जॉनसन के सिंगल डोज वैक्सीन को मंजूरी दी गई थी। भारत में पहले से स्वीकृत अन्य टीके एस्ट्राजेनेका द्वारा विकसित कोविशील्ड और ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी, भारत बायोटेक द्वारा विकसित कोवैक्सिन, रूस में विकसित स्पुतनिक वी और यूएसए की मॉडर्ना हैं।

अक्षय कुमार की ‘बेल बॉटम’ पर सऊदी अरब, कुवैत, और कतर ने लगाया बैन: जानें क्या है वजह?

बॉलीवुड अभिनेता अक्षय कुमार की नई फिल्म ‘बेल बॉटम’ की रिलीज के बाद सोशल मीडिया पर इसे लेकर अलग-अलग प्रतिक्रियाएँ आ रही हैं। एक ओर जहाँ कई लोग इस फिल्म की तारीफ कर रहे हैं तो वहीं दूसरी ओर सऊदी अरब, कुवैत, और कतर जैसे अरब देशों ने इसे अपने यहाँ रिलीज करने से ही मना कर दिया है। उनका कहना है कि इस फिल्म ने उनकी छवि को खराब किया है। देशों के सेंसर बोर्ड ने भी सीन को लेकर आपत्ति जाहिर की है।

बता दें कि रंजीत एम तिवारी के निर्देशन में बनी ‘बेल बॉटम’ में अक्षय कुमार के अलावा लारा दत्ता, वाणी कपूर, आदिल हुसैन और हुमा कुरैशी ने अहम रोल निभाए हैं। फिल्म में 80 के दौर में भारत के एक सीक्रेट ऑपरेशन को दिखाया गया है।

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, फिल्म के दूसरे हाफ में दिखाया जाता है कि कैसे एक एयरक्राफ्ट को कुछ आतंकी लाहौर से दुबई ले जाते हैं और तब संयुक्त अरब अमीरात की फोर्स हाईजैकर्स को अपने चंगुल में ले लेती है। ये पूरी घटना उस दौर में हुए एक वास्तविक मिशन को दर्शाती है जिसे वहाँ के रक्षा मंत्री मोहम्मद बिन राशिद ने हैंडल किया था और बाद में उन आतंकियों को अपहरण में इस्तेमाल की गई पिस्तौल के साथ भारत सरकार को प्रत्यर्पित कर दिया गया था।

अब ‘बेल बॉटम’ फिल्म में चूँकि दिखाया गया है कि इस सीक्रेट मिशन को भारतीय अधिकारी अंजाम तक पहुँचाते हैं, जिसकी जानकारी वहाँ के डिफेंस मिनिस्टर को भी नहीं होती है। शायद इसीलिए हो सकता है कि कहानी के इसी ट्विस्ट की वजह से वहाँ के सेंसर बोर्ड ने नाराजगी जताई है और इसके रिलीज पर बैन लगा दिया है।

बता दें कि अक्षय कुमार की बेल बॉटम 19 अगस्त को सिनेमाघरों में रिलीज हुई है। भारत में यह 1600 से ज्यादा स्क्रीन्स पर रिलीज हुई है। कहा जा रहा है कि पहले दिन फिल्म का कलेक्शन 3 करोड़ रुपए के करीब का है। हो सकता है कि वीकेंड में इसमें बढ़त दिखे। कई लोग इस फिल्म की सराहना कर रहे हैं और कई लोग इस पर सवाल उठा रहे हैं। फिल्म में अक्षय कुमार द्वारा निभाए गए किरदार सहित कई भारतीय अधिकारियों को एपिसोड के नायक के रूप में दिखाया गया है।

‘अल्लाह के करम से हुआ अफगानिस्तान में तालिबान का उदय…हर मुसलमान को खुश होना चाहिए’ : तमिलनाडु का मौलाना शमसुद्दीन कासिमी

अफगानिस्तान पर तालिबान की जीत के बाद भारत के कई कट्टरपंथी जश्न मनाने का एक मौका नहीं छोड़ रहे। अब इसी क्रम में तमिलनाडु के मौलाना ने वीडियो जारी करके संदेश दिया है कि तालिबान की जीत का जश्न हर मुसलमान को मनाना चाहिए।

द कम्यून की रिपोर्ट के अनुसार, मौलाना शमसुद्दीन कासिमी ने तालिबान को मुबारकबाद देते हुए कहा कि ये पल हर मुसलमान के लिए जश्न मनाने वाला है। कासिमी के मुताबिक अल्लाह के करम से अफगानिस्तान में तालिबान का दोबारा उदय हुआ है। वीडियो में मौलाना शमसुद्दीन कासिमी कहता है,

“कोरोना की दूसरी लहर, तीसरी लहर और चौथी लहर के बारे में सुनने के बाद, यह अब तालिबान की दूसरी लहर है जो हर जगह खबरों में है। तालिबान की जीत के जरिए अल्लाह ने हम सभी को यह बड़ी जीत दिलाई है। मुस्लिम समाज को इस जीत का जश्न मनाना चाहिए।”

तालिबान का हिंसक चेहरा दिखाने के लिए मौलाना ने वीडियो में मीडिया के लिए भी अपशब्दों का इस्तेमाल किया। तालिबान को आंतकी दिखाने के लिए मौलाना ने मीडिया को ‘वेश्यावृत्ति मीडिया’ कहा। साथ ही ये भी कहा कि मुसलमानों को इस बात से नहीं घबराना चाहिए अगर मीडिया ये दिखाए कि वो लोग तालिबान से सहानुभूति रखते हैं।

मौलाना की वीडियो में तालिबान को ‘सामान्य’ और ‘शांतिपूर्ण’ समूह बताते हुए कहा गया कि वह लोग नागरिकों को नुकसान नहीं पहुँचाएँगे। इसके अलावा विवादित मौलाना ने संगठन का महिमामंडन करते हुए प्रधानमंत्री मोदी और अन्य मंत्रियों को फासीवादी और मूर्ख कहा।

मौलाना कहता है, “भारत पर शासन करने वाले, हमारे फासीवादी ‘जी’ (पीएम मोदी) कुछ नहीं जानते। मूर्खों की कैबिनेट। वे मूर्ख प्रशासकों का एक समूह हैं। वे बाहरी मामलों को नहीं जानते हैं। उन्हें नहीं पता कि उन्हें किसे समायोजित करना चाहिए। चारों ओर देखो। श्रीलंका पर चीन का कब्जा है। चीन ने पाकिस्तान पर कब्जा कर लिया है। बांग्लादेश पर भी चीन धीरे-धीरे कब्जा कर रहा है। यह सब हमारे ‘जी’ की घटिया नीतियों के कारण है। उन्होंने चीन से सब कुछ गवा दिया। अब उसी चीन ने तालिबान का समर्थन किया। तमिल अखबार दीनमालम (दिनमालार को अपमानजनक रूप से संदर्भित करते हुए) ने एक रिपोर्ट प्रकाशित की है जिसमें कहा गया है कि एक महिला को बुर्का नहीं पहनने के लिए गोली मार दी गई थी। अरे तुम लोग पेट की आग से मरोगे।”

उल्लेखनीय है कि मौलाना कासिमी के मुख से तालिबान के लिए प्रशंसा उसी तरह निकली है जैसे अन्य मौलवियों ने तालिबान की वाह-वाही की थी। इससे पहले समाजवादी पार्टी के सांसद शफीकुर्रहमान बर्क ने अफगानिस्तान में तालिबान के कब्जे को लेकर चौंकाने वाला बयान दिया था। सपा सांसद ने तालिबान शासकों के इस कदम की सराहना करते हुए कहा था कि तालिबान एक ऐसी ताकत है, जिसने रूस और अमेरिका जैसे शक्तिशाली देशों को भी अपने देश पर कब्जा नहीं करने दिया।

इसी प्रकार ‘ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड (AIMPLB)’ के प्रवक्ता मौलाना सज्जाद नोमानी ने तालिबान का समर्थन करते हुए कहा था कि तालिबान ने दुनिया की सबसे मजबूत फौज को शिकस्त दे दी है। AIMPLB प्रवक्ता ने कहा था, “एक बार फिर यह तारीख रकम हुई है। एक निहत्थी कौम ने सबसे मजबूत फौजों को शिकस्त दी है। काबुल के महल में वे दाखिल होने में कामयाब रहे। उनके दाखिले का अंदाज पूरी दुनिया ने देखा। उनमें कोई गुरूर और घमंड नहीं था।”

BJP नेता किरीट सोमैया की कार पर महाराष्ट्र में हमला, शिवसैनिकों पर लगाया पत्थर फेंकने का आरोप

भाजपा नेता किरीट सौमैया पर महाराष्ट्र के वाशिम में हमला होने की खबर सामने आ रही है। सौमैया की कार पर यह हमला शिवसेना के कार्यकर्ताओं द्वारा किया गया है। इस बात की जानकारी उन्होंने खुद ट्वीट कर दी है। दरअसल, सौमैया ने शिवसेना की सांसद भवना गवली पर 100 करोड़ रुपए के घोटाले का आरोप लगाया था, जिसके बाद उन पर हमला किया गया।

बीजेपी नेता ने ट्वीट कर कहा, “शिवसेना के गुंडों ने मेरी कार पर हमला किया, मेरी कार पर 3 बड़े पत्थर फेंके, जो कि विंडो ग्लास पर लगे। वहीं पर मैं भी बैठा था। काफिले के पास पुलिस वाहन भी था। हादसा दोपहर 12.30 बजे हुआ, जब मेरी कार 100 करोड़ रुपए का घोटाला करने वाली शिवसेना सांसद भावना गवली की वाशिम स्थित बालाजी पार्टिकल्स बोर्ड कारखाना से गुजर रही थी।”

इसके साथ ही सौमैया ने वीडियो भी शेयर किया है, जिसमें स्पष्ट रूप से देखा जा सकता है कि कुछ लोग उनकी कार को घेरकर उस पर हमले कर रहे हैं। उनकी कार पर पड़ी स्याही भी देखी जा सकती है। इसके अलावा, घटनास्थल पर पुलिस बल भी तैनात है, जो कि शिव सैनिकों को खदेड़ने की कोशिश कर रहे हैं। वीडियो में सुना जा सकता है कि लोग किरीट सौमैया मुर्दाबाद के नारे लगा रहे हैं। गाड़ी का काँच भी तोड़ दिया गया था।

भाजपा नेता ने अपने अगले ट्वीट में भ्रष्टाचार के खिलाफ अपनी जंग को जारी रखने का ऐलान किया है। उन्होंने कहा, “इस तरह के हमले भ्रष्टाचार के खिलाफ मेरी लड़ाई को रोक नहीं सकते हैं। मुझे यकीन है कि सांसद भावना गवली, मिलिंद नार्वेकर, यशवंत जाधव, विधायक यामिनी यशवंत जाधव, अनिल परब और प्रताप सरनाइक के खिलाफ कार्रवाई कुछ दिनों में तार्किक रूप से कार्रवाई की जाएगी।”

शिवसेना को पहले से थी जानकारी

शिव सैनिकों के हमले को लेकर भाजपा नेता ने कहा है कि शिवसेना के गुंडों को पहले से पता था कि हमारा काफिला कहाँ से गुजरने वाला है। इसीलिए उस रास्ते पर वे लोग पहले से मौजूद थे और वे जैसे ही वहाँ पहुँचे, उन्होंने हम पर हमला कर दिया। इस मामले में उन्होंने रिसोड़ पुलिस स्टेशन में केस दर्ज कराया है।

भारत का विपक्ष भी चुटकुला है! यहाँ ‘कृष्ण-अर्जुन’ में हो रहा पंगा, अध्यक्षविहीन पार्टी कह रही- अपना टाइम आ गया

जब शरिया की ख्वाहिश रखने वाले अफगानी तालिबान के इस्लामी शासन से खौफजदा हैं। जब भारत के कठमुल्ले तालिबान की वापसी पर भांगड़ा कर रहे हैं। जब यौन दासी बनाने के लिए अफगानिस्तान के घर-घर से बच्चियों को उठाया जा रहा है। जब मासूमों को बचाने के लिए अम्मियाँ उन्हें कंटीले तारों के पार फेंक रही है। जब मोदी सरकार अफगानिस्तान से अपने लोगों को निकालने में व्यस्त है, तब भारत का विपक्ष क्या कर रहा है?

भारत का विपक्ष वही काम कर रहा है जिसमें वह पारंगत है। वह इस बात का ख्याल रख रहा है कि आपके जीवन में मनोरंजन का डोज कम न हो। यह काम वह अक्सर करते रहता है। कभी किसानों के नाम पर। कभी हिंदुओं और मोदी के प्रति घृणा प्रदर्शित कर। कभी कट्टरपंथ के जहाज पर सवार हो कर। वक्त-वक्त पर वह चीन-पाकिस्तान भी हो आता है। कुल मिलाकर उसका जीवन टूलकिट के हिसाब से चलता रहता है। फिर भी मनोरंजन का डोज कम न पड़े इसके लिए उसने 51 साल का एक चिर युवा भी रखा है जो मशीनों में आलू डाल सोने बनाने जैसे अविष्कार कर चुका है। बीच-बीच में आयटम सॉन्ग लेकर आने के लिए विपक्ष ने राज्यों में भी क्षत्रप रख रखे हैं। ढोल-नगाड़े पीटने के लिए मीडिया तो नेहरू ही सेट करके गए हैं।

तो इस शुक्रवार (20 अगस्त 2021) विपक्ष ने मनोरजंन के लिए दो ड्रामे रिलीज किए। एक दिल्ली से तो दूसरी पटना से। दिल्ली में 10 साल तक पर्दे के पीछे से सरकार चलाने वाली सोनिया गाँधी ने विपक्षी नेताओं के साथ वचुर्अल बैठक की और दावा किया- अपना टाइम आ गया। वहीं पटना में लालू प्रसाद यादव के बड़े बेटे तेज प्रताप यादव जो खुद को ‘कृष्ण’ और अपने छोटे भाई तेजस्वी यादव को ‘अर्जुन’ बताते रहते हैं के बीच कलह बढ़ गई। हालाँकि दोनों सियासी ड्रामे की पृष्ठभूमि कई दिनों से लिखी जा रही थी। सो सिनेमाई भाषा में कहें तो सोनिया की विपक्षी एकता वाली फिल्म आज रिलीज हुई और लालू के पारिवारिक सीरियल में आज एक नया मोड़ आया।

पहले बात सोनिया की बैठक की। मीडिया रिपोर्ट बताते हैं कि इस बैठक में पूर्व प्रधानमंत्री डॉ. मनमोहन सिंह, राहुल गाँधी के अलावा फारूक अब्दुल्ला, तमिलनाडु के मुख्यमंत्री एमके स्टालिन, पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी, झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन, महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे, शरद पवार, शरद यादव और सीताराम येचुरी जैसे नेता शामिल थे। कुल मिलकार 18-19 दलों का प्रतिनिधित्व था। बैठक में मोदी सरकार के खिलाफ पुरानी और जानी-पहचानी खुन्नस दिखाने के अलावा 2024 के लोकसभा चुनाव को लक्ष्य बनाया गया। सोनिया गाँधी ने कहा- हमारा लक्ष्य 2024 का लोकसभा चुनाव है। हमें देश को एक ऐसी सरकार देने के उद्देश्य के साथ व्यवस्थिति ढंग से योजना बनाने की शुरुआत करनी है कि जो स्वतंत्रता आंदोलन के मूल्यों और संविधान के सिद्धांतों एवं प्रावधानों में विश्वास करती हो।

यहाँ गौर करने वाली बात यह है कि सोनिया उस पार्टी की अगुवाई कर रही हैं जो अरसे से अपने लिए एक पूर्णकालिक अध्यक्ष नहीं तलाश पाया है। जो अपने इतिहास के सबसे बुरे दौर में है, जहाँ से उसके उबरने के कोई संकेत नहीं दिख रहे। जो राज्यों में कलह से परेशान है। जिस पार्टी को आए दिन कोई न कोई नेता छोड़ रहा है। उस पार्टी की नेता विपक्षी एकता के नाम पर भानुमती का कुनबा जोड़ने की जुगत में हैं। वह भी उस वाम दलों के भरोसे जो केरल के अलावा देश में कहीं बचे नहीं। उन क्षेत्रीय पार्टियों के भरोसे जो अपने अपने दड़बों में सिमटे हैं। उन नेताओं के भरोसे जो प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की लोकप्रियता के आगे कहीं नहीं ठहरते। इससे बेहतर लोकतंत्र में प्रहसन भला क्या हो सकता है!

इस बैठक में बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री लालू प्रसाद यादव के बेटे तेजस्वी यादव भी मौजूद थे। अब इनकी एकता की बानगी ये है कि इनके बड़े भाई तेज प्रताप यादव को आज अपनी माँ राबड़ी देवी के आवास से अपमानित होकर निकलना पड़ा। ये सूत्रों के हवाले से खबर नहीं है। खुद तेज प्रताप ने कहा है कि उनकी तेजस्वी से बात हो रही थी तभी संजय यादव वहाँ पहुँचे और तेजस्वी को लेकर कमरे के अंदर चले गए। तेज प्रताप ने कहा कि संजय यादव होते कौन हैं बीच में बोलने वाले और रोकने वाले?

वैसे तेज प्रताप ये सवाल अक्सर करते रहते हैं। कभी जगदानंद सिंह से तो कभी किसी और से। लेकिन इस बार बात दूर तलक निकल गई है तो भाजपा सांसद और बिहार के पूर्व उप मुख्यमंत्री सुशील मोदी ने कह दिया है- राजद की आंतरिक लड़ाई में कौन औरंगजेब बन कर संगठन पर राज करेगा और कौन दारा शिकोह बनाया जाएगा, यह समय बताएगा।

उम्मीद की जानी चाहिए कि सुशील मोदी के बताए औरंगजेब और दारा शिकोह आने वाले दिनों में जनता का भरपूर मनोरंजन करते रहेंगे। ​फिर भी मसाला कम पड़े तो घबराइएगा मत। युवराज और उनकी दादी जैसी ​नाक वाली दीदी हैं ही और यूपी में चुनाव भी होने हैं।

अफगानिस्तान में तालिबान के खिलाफ खुला मोर्चा: 3 जिले हाथ से निकले, 60 तालिबानियों के मारे जाने की भी खबर

अफगानिस्तान में दशहत और प्रतिरोध के बीच हालात बदलने से संबंधित कुछ खबरें आ रही हैं। कुछ रिपोर्टों में कहा गया है कि तालिबान विरोधी गुटों ने मुल्क के कुछ जिलों को कब्जे से छुड़ा लिया है। इस लड़ाई में लगभग 60 तालिबानी मारे भी गए हैं। तालिबान के विरोध में मुल्क के विभिन्न हिस्सों में लोग अपने-अपने घरों से बाहर निकल रहे हैं और विरोध कर रहे हैं। कई जगहों पर ऐसे लोग पर तालिबान ने गोलीबारी भी की है।

अफगानिस्तान की Aśvaka’ – آسواکا News Agency ने बताया है कि तालिबान के साथ हुई लड़ाई के बाद पब्लिक रेजिस्टेंस फोर्सेज ने बघलान प्रांत के तीन जिलों- बानू, पोल-ए-हेसर और डेह सलाह को अपने कब्जे में ले लिया है। इस लड़ाई में कई तालिबानी भी मारे गए हैं, जबकि कई घायल भी हुए हैं। स्थानीय सूत्रों के हवाले से लड़ाई में लगभग 60 तालिबानियों के मारे जाने की बात कही जा रही है।

पोल-ए-हेसर जिला काबुल के उत्तर में पंजशीर घाटी के करीब स्थित है। पंजशीर घाटी हिंदूकुश पर्वत के नजदीक है। यह इकलौता ऐसा प्रांत है जिस पर तालिबान आज तक नियंत्रण नहीं कर सका है। बताया जाता है कि तालिबान विरोधी यहाँ इकट्ठे हो रहे हैं। अफगानिस्तान के उप-राष्ट्रपति अमरुल्लाह सालेह जिन्होंने तालिबान के आगे घुटने टेकने से इनकार करते हुए खुद को कार्यवाहक राष्ट्रपति घोषित किया था, उनके भी यहीं होने की खबर है। उन्होंने रेजिस्टेंस फोर्स के कमांडर अहमद मसूद के साथ मिलकर तालिबानी शासन से अफगानिस्तान को मुक्त कराने के लिए संघर्ष करने की बात कही है।

खबर ये भी आ रही है कि तालिबान के प्रतिनिधि रेजिस्टेंस फोर्स के कमांडर अहमद मसूद से मुलाकात कर रहे हैं। अहमद मसूद ने एक वीडियो में कहा था, “अगर कोई, चाहे उसका कुछ भी नाम हो, हमारे घरों, जमीनों और हमारी आजादी पर हमला करने की कोशिश करेगा तो हम राष्ट्रीय नायक अहमद शाह मसूद और अन्य मुजाहिदीन की तरह अपनी जान देने तैयार हैं, लेकिन अपनी जमीन और अपनी गरिमा को नहीं लूटने देंगे।” उन्होंने कहा था, “मैं आप सभी को आपकी शुद्ध भावनाओं और इरादों के लिए धन्यवाद देता हूँ। ईश्वर की इच्छा से हम स्वतंत्रता सेनानियों, कमांडरों और हमारे विद्वानों के साथ मिलकर अपना प्रतिरोध जारी रखेंगे।”