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अफगानिस्तान में तालिबान के खिलाफ खुला मोर्चा: 3 जिले हाथ से निकले, 60 तालिबानियों के मारे जाने की भी खबर

अफगानिस्तान में दशहत और प्रतिरोध के बीच हालात बदलने से संबंधित कुछ खबरें आ रही हैं। कुछ रिपोर्टों में कहा गया है कि तालिबान विरोधी गुटों ने मुल्क के कुछ जिलों को कब्जे से छुड़ा लिया है। इस लड़ाई में लगभग 60 तालिबानी मारे भी गए हैं। तालिबान के विरोध में मुल्क के विभिन्न हिस्सों में लोग अपने-अपने घरों से बाहर निकल रहे हैं और विरोध कर रहे हैं। कई जगहों पर ऐसे लोग पर तालिबान ने गोलीबारी भी की है।

अफगानिस्तान की Aśvaka’ – آسواکا News Agency ने बताया है कि तालिबान के साथ हुई लड़ाई के बाद पब्लिक रेजिस्टेंस फोर्सेज ने बघलान प्रांत के तीन जिलों- बानू, पोल-ए-हेसर और डेह सलाह को अपने कब्जे में ले लिया है। इस लड़ाई में कई तालिबानी भी मारे गए हैं, जबकि कई घायल भी हुए हैं। स्थानीय सूत्रों के हवाले से लड़ाई में लगभग 60 तालिबानियों के मारे जाने की बात कही जा रही है।

पोल-ए-हेसर जिला काबुल के उत्तर में पंजशीर घाटी के करीब स्थित है। पंजशीर घाटी हिंदूकुश पर्वत के नजदीक है। यह इकलौता ऐसा प्रांत है जिस पर तालिबान आज तक नियंत्रण नहीं कर सका है। बताया जाता है कि तालिबान विरोधी यहाँ इकट्ठे हो रहे हैं। अफगानिस्तान के उप-राष्ट्रपति अमरुल्लाह सालेह जिन्होंने तालिबान के आगे घुटने टेकने से इनकार करते हुए खुद को कार्यवाहक राष्ट्रपति घोषित किया था, उनके भी यहीं होने की खबर है। उन्होंने रेजिस्टेंस फोर्स के कमांडर अहमद मसूद के साथ मिलकर तालिबानी शासन से अफगानिस्तान को मुक्त कराने के लिए संघर्ष करने की बात कही है।

खबर ये भी आ रही है कि तालिबान के प्रतिनिधि रेजिस्टेंस फोर्स के कमांडर अहमद मसूद से मुलाकात कर रहे हैं। अहमद मसूद ने एक वीडियो में कहा था, “अगर कोई, चाहे उसका कुछ भी नाम हो, हमारे घरों, जमीनों और हमारी आजादी पर हमला करने की कोशिश करेगा तो हम राष्ट्रीय नायक अहमद शाह मसूद और अन्य मुजाहिदीन की तरह अपनी जान देने तैयार हैं, लेकिन अपनी जमीन और अपनी गरिमा को नहीं लूटने देंगे।” उन्होंने कहा था, “मैं आप सभी को आपकी शुद्ध भावनाओं और इरादों के लिए धन्यवाद देता हूँ। ईश्वर की इच्छा से हम स्वतंत्रता सेनानियों, कमांडरों और हमारे विद्वानों के साथ मिलकर अपना प्रतिरोध जारी रखेंगे।”

अफगानिस्तान से ‘खजाना’ लेकर भागे अशरफ गनी की बेटी अमेरिका में टहल रहीं, इधर मारे-काटे जा रहे अफगानी

अफगानिस्तान को तालिबान के हाथों छोड़कर दुबई (UAE) भागे देश के निर्वासित राष्ट्रपति अशरफ गनी इन दिनों राजकोष से 169 मिलियन डॉलर (₹12,57,24,50,800) ‘चुराने’ के कारण चर्चा में हैं। इस बीच उनकी बेटी मरियम गनी को न्यूयॉर्क के ब्रुकलिन में आराम से टहलते देखा गया। मरीयम न्यूयॉर्क में सालों से रह रही हैं और पेशे से वह एक फिल्ममेकर और विजुअल आर्टिस्ट हैं।

सामने आई तस्वीरों में मरियम को नीले रंग के 1 पीस ड्रेस में देखा जा सकता है। रिपोर्ट्स के मुताबिक वह अपने किसी दोस्त के साथ बाहर निकली थीं और इस दौरान उन्होंने अपना मास्क भी हाथ में लिया हुआ था। उनकी यह तस्वीर वर्तमान में इसलिए भी चर्चा में है क्योंकि एक ओर वह खुद हैं जिनके चेहरे पर चिंता की शिकन तक नहीं है और दूसरी ओर वो पूरा देश है जिसकी जिम्मेदारी मरियम के पिता अशरफ गनी के कंधों पर थी, लेकिन जैसे ही तालिबान का खतरा मंडराया, वो देश छोड़ भागे।

मरीयम गनी (साभार: डेलीमेल)

मालूम हो कि मरियम की यह तस्वीर आने से पहले अशरफ गनी ने भी बुधवार देर रात अपने फेसबुक पेज पर एक वीडियो पोस्ट किया था। अपनी वीडियो में उन्होंने पुष्टि की थी कि वह संयुक्त अरब अमीरात (UAE) में हैं। इस वीडियो में अशरफ गनी ने काबुल छोड़कर भागने के अपने फैसले का बचाव किया था और कहा था कि खून-खराबा रोकने का यही एक रास्ता था।

इसके साथ ही कुछ मीडिया रिपोर्ट्स सामने आई थीं जिनमें कहा गया था कि अशरफ गनी 169 मिलियन डॉलर लेकर देश से भागे थे। हालाँकि अपनी वीडियो में गनी ने सभी आरोपों को खारिज करने की कोशिश की। उन्होंने बताना चाहा कि उन्होंने अफगानिस्तान के राजकोष से 169 मिलियन डॉलर नहीं चुराए। गनी ने दावा किया कि उन्हें एक जोड़ी पारंपरिक कपड़ों और सैंडल में अफगानिस्तान छोड़ना पड़ा जो उन्होंने पहन रखे थे। उनके मुताबिक उन पर जो पैसे चोरी का इल्जाम लगाया जा रहा है वो सब निराधार है।

बता दें कि अशरफ गनी के अफगानिस्तान छोड़ने के बाद तालिबान पूरी तरह से देश पर कब्जा कर चुका है। ऐसी रिपोर्ट्स आ रही हैं कि शरिया की आड़ में इस्लामी कट्टरपंथी औरतों को उसी जलालत भरी जिंदगी में फिर से धकेल रहे हैं, जिनसे उन्हें करीब दो दशक पहले आजादी मिली थी। लड़कियों को चिह्नित कर घर से उठाया जा रहा। न 12 साल की लड़की छोड़ी जा रही है न 45 साल की औरत। उन्हें ढूँढ-ढूँढ कर निकाह के लिए उठाया जा रहा है और फिर उन्हें सेक्स स्लेव बनाया जा रहा है।

नए तालिबान में महिलाओं को चुस्त कपड़े पहनने की आजादी तो छोड़ दीजिए, बुर्का न पहनने पर मौत की सजा है। इसी तरह लड़कियों का पढ़ना, लिखना, नौकरी करना सब तालिबान के लिए हराम है। घर की अलमारियों से लेकर दराजों और सूटकेस तक में तालिबानी चेक कर रहे हैं कि कोई लड़की उनसे बच न जाए।

‘ओवैसी को तालिबान के पास भेजना बेहतर होगा’: मोदी की महिला मंत्री का AIMIM मुखिया पर पलटवार

ऑल इंडिया मजलिस ए इत्तेहादुल (AIMIM) के प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी ने कहा है कि भारत सरकार को तालिबान शासन में परेशान अफगान लोगों को मदद करने के बजाय देश की महिलाओं की मदद करनी चाहिए। उनके इस बयान पर अब विवाद छिड़ गया है। उन्होंने यह बात गुरुवार (19 अगस्त 2021) को एक कार्यक्रम के दौरान यह टिप्पणी की।

असदुद्दीन ओवैसी ने कहा था, ‘एक रिपोर्ट के मुताबिक भारत में नौ में से एक बच्ची की 5 साल की उम्र से पहले मौत हो जाती है। यहाँ महिलाओं के खिलाफ अत्याचार और उनके खिलाफ अपराध बढ़े हैं, लेकिन वे (केंद्र) चिंतित हैं कि अफगानिस्तान में महिलाओं के साथ क्या हो रहा है। क्या यह यहाँ नहीं हो रहा है?”

एआईएमआईएम सुप्रीमो का कहना है कि भारत सरकार को तालिबान से बातचीत करनी चाहिए। ओवैसी ने कहा, “अब जबकि अफगानिस्तान तालिबान के पूर्ण नियंत्रण में है, हमारे पास उनके साथ कोई संचार नहीं है, कोई संवाद नहीं है। सभी अंतरराष्ट्रीय और सुरक्षा विशेषज्ञों ने कहा है कि बातचीत होनी चाहिए थी, लेकिन पिछले सात वर्षों से केंद्र सरकार यह नहीं जान पाई है कि क्या हो रहा है।”

ओवैसी के इस बयान पर केंद्रीय मंत्री शोभा करंदलाजे ने पलटवार करते हुए कहा कि उन्हें अफगानिस्तान भेज दिया जाना चाहिए। उन्होंने कहा, “असदुद्दीन ओवैसी को उनकी महिलाओं और समुदाय की सुरक्षा के लिए तालिबान के पास भेजना बेहतर होगा।”

अफगानिस्तान से अमेरिकी सेना की वापसी के बाद वहाँ पर तालिबान ने कब्जा कर लिया है, जिसके बाद से भारत के इस्लामवादी तालिबान के लिए खुशी मना रहे हैं। दिल्ली दंगों के एक आरोपी ने कहा, “मैं आप लोगों को एक खुशखबरी देता हूँ कि अशरफ गनी ने इस्तीफा दे दिया है। अल्लाह का शुक्रिया! धीरे-धीरे यह अफगानिस्तान के इस्लामी साम्राज्य (तालिबान द्वारा शासित) की स्थापना की ओर ले जाएगा। हमें उनसे प्रेरणा लेने और ‘स्वतंत्रता आंदोलन’ के लिए संघर्ष करना सीखना होगा।”

तालिबान द्वारा अफगानिस्तान पर कब्जे के बाद वहाँ की भयावह तस्वीरें सामने आ रही हैं। वहाँ लोग अपनी जान बचाने के लिए देश से भागने की कोशिश कर रहे हैं। हवाई जहाज के पहियों पर लटककर भागने की कोशिश कर रहे अफगान लोगों के आसमान से गिरने के दृश्य सोशल मीडिया पर वायरल हो गए हैं। वहीं, तालिबानियों को मनोरंजन पार्क के साथ-साथ अन्य दृश्यों में आनंद लेते हुए देखा गया है।

बनारस की तरह संस्कृत का केंद्र बनेगा बसोहली, उपराज्यपाल मनोज सिन्हा ने किया चूड़ामणि संस्कृत संस्थान का शिलान्यास

जम्मू-कश्मीर प्रशासन संस्कृत भाषा को बढ़ावा देने के लिए हर संभव कोशिश कर रहा है। इसी कड़ी में उपराज्यपाल मनोज सिन्हा ने गुरुवार (19 अगस्त) को कठुआ जिले के बसोहली में चूड़ामणि संस्कृत संस्थान के नए भवन का शिलान्यास किया।

मनोज सिन्हा ने कहा कि 5 आधिकारिक भाषाओं के साथ जम्मू-कश्मीर प्रशासन नई शिक्षा नीति की सिफारिशों के अनुसार संस्कृत भाषा को बढ़ावा देने का प्रयास कर रहा है। उन्होंने कहा, ”संस्कृत भाषा के गौरव को पुनर्जीवित करना प्रत्येक भारतीय की सामूहिक जिम्मेदारी है। हमारे लिए यह महत्वपूर्ण है कि हम अपनी सभ्यता, मूल्यों को संरक्षित और बढ़ावा देने के लिए अवसर पैदा करें।”

उन्होंने आगे कहा, “चूड़ामणि संस्कृत संस्थान के नए भवन का शिलान्यास एक ऐतिहासिक क्षण है। संस्थान की स्थापना दिवंगत पंडित उत्तम चंद पाठक शास्त्री ने की थी। उन्होंने इस विद्यालय के माध्यम से संस्कृत भाषा, सांस्कृतिक और विरासत मूल्यों को बढ़ावा देने के लिए अद्भुत और महान कार्य किया था। संस्कृत हमारे देश की एकमात्र ऐसी भाषा रही है, जिसने न केवल विभिन्न क्षेत्रों को एकजुट किया है, बल्कि शिक्षकों और उनके शिष्यों के बीच घनिष्ठ संबंध भी बनाए हैं। संस्कृत भाषा के मूल्यों को अल्बर्ट आइंस्टीन, ओपेनहाइमर और मैक्समूलर जैसी महान हस्तियों ने भी पहचाना था।”

उपराज्यपाल मनोज सिन्हा ने कहा, “हमारा प्रयास होना चाहिए कि स्कूलों में आधुनिक आवश्यकताओं के अनुसार संस्कृत पढ़ाई जाए। प्राचीन एवं आधुनिक शिक्षा का तालमेल होना जरूरी है। जैसे कोरोना महामारी के समय में भी आधुनिक तकनीक से घर से पढ़ाई करवाई जा रही है।”

उपराज्यपाल ने कहा कि बसोहली में विभिन्न परियोजनाओं का उद्घाटन बसोहली और आसपास के क्षेत्रों में आर्थिक, सांस्कृतिक और सामाजिक विकास के प्रति केंद्र शासित प्रदेश के प्रशासन की दृढ़ प्रतिबद्धता को दर्शाता है। उनके अनुसार इससे आने वाले समय में बसोहली बनारस की तरह फिर संस्कृत का केंद्र बन सकता है। छोटी काशी के नाम से मशहूर बसोहली के ज्यादातर विद्वान बनारस में भी थे।

बता दें कि उपराज्यपाल ने अभिभावकों से अपील की है कि कि वह अपने बच्चों से संस्कृत पढ़ने के लिए प्रेरित करें। उन्होंने कहा कि अपनी संस्कृति को पास से देखने के लिए सरकारी स्कूलों में भी संस्कृत विषय शुरू करना होगा।

नाइजीरिया की 10 में से 7 शर्तें ट्विटर को कबूल, शेष पर भी जल्द हो सकता है राजी: साल के अंत तक बैन हटने की उम्मीद

माइक्रो ब्लॉगिंग साइट ट्विटर ने नाइजीरिया में बैन होने के बाद वहाँ की सरकार के अधिकांश नियमों और शर्तों को मान लिया है। शेष शर्तों को भी जल्द ही पूरा कर सकती है। ऐसे में इस साल के अंत तक नाइजीरिया में ट्विटर पर से प्रतिबंध को हटाया जा सकता है। नाइजीरियाई सूचना मंत्री लाई मोहम्मद ने कहा कि सरकार साल के अंत से पहले ट्विटर पर से प्रतिबंध हटाने की उम्मीद कर रही है।

दरअसल, नाइजीरियाई सरकार ने जून में सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म की सेवाओं को देश में बंद कर दिया था, क्योंकि उसने वहाँ के राष्ट्रपित द्वारा अलगाववादियों को हिंसा के लिए चेतावनी वाले ट्वीट को डिलीट कर दिया था। मंत्री ने कहा कि ट्विटर सरकार द्वारा निर्धारित 10 आवश्यकताओं में से 7 का पालन करने के लिए सहमत हो गया है, और सरकार तीन लंबित मुद्दों पर कंपनी की प्रतिक्रिया की प्रतीक्षा कर रही है।

मंत्री ने ब्लूमबर्ग टेलीविजन को बताया, “ट्विटर ने सरकार के लगभग 70% नियमों और शर्तों को पूरा किया है, उनमें से कई काफी महत्वपूर्ण हैं।” बाकी की तीन शर्तों में एक स्थानीय कार्यालय स्थापित करना, देश में करों का भुगतान करना और प्लेटफॉर्म पर कंटेंट और हानिकारक ट्वीट्स की निगरानी करने के लिए सरकार का सहयोग करना शामिल है।

मंत्री मोहम्मद ने कहा कि उन्हें उम्मीद है कि ट्विटर जल्द ही सभी शर्तों का पालन करेगा, ताकि साल के अंत तक प्रतिबंध हटाया जा सके। उन्होंने कहा, “हम निश्चित रूप से साल के अंत से पहले इसे शुरू करना चाहते हैं।” मंत्री के मुताबिक, पिछले सप्ताह ट्विटर के अधिकारियों और नाइजीरियाई सरकार के अधिकारियों के बीच एक बैठक हुई थी। हालाँकि, ट्विटर ने मामले में किसी भी तरह की टिप्पणी इनकार कर दिय़ा है।

लाई मोहम्मद का कहना है कि मीडिया में आई खबरों के विपरीत ट्विटर को राष्ट्रपति बुहारी के ट्वीट को हटाने के लिए नहीं, बल्कि अलगाववादियों को उसका प्लेटफॉर्म इस्तेमाल करने देने के मामले में बैन किया गया था। उन्होंने कहा कि प्रतिबंधित समूह बियाफ्रा के लोगों द्वारा ट्विटर के इस्तेमाल के चलते उस पर प्रतिबंध लगाया गया था। दरअसल, आईपीओबी दक्षिण-पूर्वी नाइजीरिया को एक स्वतंत्र राष्ट्र बनाना चाहता है, इसीलिए बुहारी सरकार ने उसे एक आतंकवादी संगठन घोषित किया है।

मंत्री ने कहा, “ट्विटर एक ऐसे समूह के लिए पसंदीदा प्लेटफॉर्म बन गया था, जो पुलिसकर्मियों को निशाना बना रहा था, उनकी हत्या कर रहा था, सेना की हत्या कर रहा था और एक जातीय समूह के हितों को दूसरे के खिलाफ बढ़ावा दे रहा था। इसलिए राष्ट्रीय सुरक्षा को देखते हुए हमने उसे बैन कर दिया।” उन्होंने कहा कि ट्विटर ने अपने प्लेटफॉर्म को अलगाववादियों के लिए पसंदीदा स्थान बना दिया। इसके कारण देश के राष्ट्रीय हितों के लिए खतरा पैदा हो गया था, जिस कारण से सरकार ने माइक्रो ब्लॉगिंग साइट के खिलाफ कदम उठाया।

गौरतलब है कि इसी साल 4 जून को नाइजीरिया ने देश की राजनीति में हस्तक्षेप करने के मामले में ट्विटर पर प्रतिबंध लगा दिया था। इसके कुछ घंटे बाद ट्विटर ने राष्ट्रपति मुहम्मदु बुहारी द्वारा अलगाववादी आंदोलनों के खिलाफ चेतावनी वाले एक ट्वीट को हटा दिया था। ट्वीट में, बुहारी ने 1967-1970 में देश के 30 महीने के गृहयुद्ध का संदर्भ दिया था, जिसमें उन्होंने सरकार को विफल करने की कोशिश करने वाले लोगों को चेतावनी दी थी।

…जो माफी के भी लायक नहीं, उन्हें ही मारा तालिबानियों ने: कमलेश तिवारी की हत्या पर जश्न मनाने वाला पत्रकार अली सोहराब

अफगानिस्तान में तालिबान के घुसने के बाद वहाँ अफरा-तफरी का माहौल है। अधिकांश अफगानी देश छोड़ना चाहते हैं। यही वजह है कि काबुल एयरपोर्ट पर एक हफ्ते से भीड़ कम नहीं हो रही। ऐसी मानव आपदा के बीच भारत के कट्टरपंथी अफगानियों का समर्थन करना तो दूर, उन्हें कोसने में व्यस्त हैं, सिर्फ इसलिए क्योंकि वो लोग तालिबान से भागना चाहते हैं। इसी सूची में एक नाम पत्रकार अली सोहराब का भी है। 

सोहराब वही शख्स हैं जिन्होंने कभी हिंदू समाज पार्टी के नेता कमलेश तिवारी के कत्ल पर दिवाली की बधाई दी थी। अब वही अली सोहराब तालिबान के समर्थन में ट्वीट कर रहे हैं। अपने सोशल मीडिया अकॉउंट पर हाल में सोहराब ने न केवल ये बताया कि तालिबानियों से भागने वाले वो अफगानी हैं जिन्होंने कभी मुसलमानों को मारने में यूएस का साथ दिया था बल्कि काबुल एयरपोर्ट पर हो रहे कत्लेआम को भी जस्टिफाई किया। 

तस्वीर साभार: ट्विटर

ट्वीट में देख सकते हैं कि सोहराब कहते हैं कि जिन लोगों ने मुस्लिमों को मारने में यूएस मिलिट्री का साथ दिया, उनका जुर्म माफी के काबिल नहीं है। इसके बाद उन्होंने लिखा, “जैसे फ़तह मक्का के वक्त भी आम माफी के बाद भी कुछ लोगों को माफ़ी नहीं दी गई और उन्हे क़त्ल किया गया, क्योंकि उनके जुर्म ही ना क़ाबिल-ए-माफी थे और ऐसे कई लोग मक्का छोड़कर फरार भी हो गए थे, क्योंकि वो जानते थें की उनके जुर्म ही ना क़ाबिल-ए-माफी है।”

पत्रकार अली सोहराब के इस ट्वीट के बाद कई यूजर्स ने उनकी बात से सहमति जताई। कट्टरपंथियों ने माना कि काबुल एयरपोर्ट पर हो रहा कत्लेआम एकदम सही है क्योंकि वो लोग मरना डिजर्व करते हैं।

तस्वीर साभार: ट्विटर
तस्वीर साभार: ट्विटर

बता दें कि अफगानिस्तान पर तालिबान के कब्जे के बाद से भारत के कट्टरपंथी इस जीत का जश्न मना रहे हैं। जिस दिन तालिबान काबुल में घुसा उसी दिन सोशल मीडिया पर एक ऑडियो वायरल हुई। जिसमें  जामिया का छात्र और दिल्ली दंगों का आरोपित आसिफ इकबाल तन्हा अफगानिस्तान में तालिबानी शासन का खुलकर समर्थन कर रहा था।

ट्विटर स्पेस पर साथियों से चर्चा करते हुए रविवार (15 अगस्त 2021) को उसने कहा, “मैं एक अच्छी खबर देना चाहता हूँ, अशरफ गनी ने इस्तीफा दे दिया है। अल्लाह का शुक्रिया कि धीरे-धीरे ही सही लेकिन इस्लामिक एमिरेट ऑफ अफगानिस्तान (तालिबान का शासन) स्थापित हो गया। हमें इससे प्रेरणा लेने और सीखने की की जरूरत है कि कैसे आजादी के आंदोलन के लिए संघर्ष किया जाता है।” स्पेस पर जिस टॉपिक पर चर्चा हो रही थी वह था, “क्या भारत में मुस्लिम आजाद हैं?” उस दौरान भी उत्तर प्रदेश के पत्रकार अली सोहराब को इकबाल के समर्थन में ‘अल्हम्दुलिल्लाह’ कहते हुए सुना गया था।

मालूम हो कि सोहराब को उत्तर प्रदेश पुलिस ने नवंबर 2019 में हिन्दू समाज के संस्थापक कमलेश तिवारी की हत्या के बारे में आपत्तिजनक पोस्ट करने के जुर्म में दिल्ली से गिरफ्तार किया था। सोहराब के खिलाफ आईटी एक्ट की धारा 295A, 295B, 66, 67 के अंतर्गत मामला दर्ज किया गया था।

अली सोहराब का पुराना ट्वीट

नूर मोहम्मद 10 साल नागपुर में छिपा रहा, जून में गिरफ्तार कर अफगानिस्तान भेजा गया: अब हथियार लहरा रहा

भारत में 10 साल तक छिपा रहा नूर मोहम्मद उर्फ अब्दुल हक तालिबान में शामिल हो चुका है। मीडिया रिपोर्टों में वरिष्ठ अधिकारियों के हवाले से इसकी आशंका जताई गई है। इसी साल गिरफ्तार करने के बाद उसे अफगानिस्तान भेज दिया गया था। अब सोशल मीडिया में हथियार के साथ उसकी तस्वीर वायरल हो रही है।

रिपोर्ट के मुताबिक पुलिस अधिकारी ने बताया, “30 वर्षीय नूर मोहम्मद उर्फ अब्दुल हक नागपुर के दिघोरी में किराए के कमरे में 10 साल से रह रहा था। इस मामले की जानकारी मिलने के बाद खुफिया तरीके से उसकी हर गतिविधि पर पहले नजर रखी गई और बाद में 23 जून 2021 को उसे गिरफ्तार कर वापस अफगानिस्तान भेज दिया गया।” उन्होंने कहा, “वापस भेजे जाने के बाद ऐसा प्रतीत होता है कि वह तालिबान में शामिल हो गया है और बंदूक पकड़े उसकी तस्वीर सोशल मीडिया पर सामने आई है।”

नूर मोहम्मद साल 2010 में छह महीने के टूरिस्ट वीजा पर नागपुर आया था। भारत आने के बाद उसने संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार परिषद (यूएनएचआरसी) में अपने लिए शरणार्थी का दर्जा माँगने के लिए आवेदन किया था, लेकिन उसका आवेदन खारिज कर दिया गया था। बावजूद इसके वह नागपुर में अवैध तरीके से रह रहा था।

सुरक्षा एजेंसियों ने जून में नूर मोहम्मद के तालिबानी समर्थक होने का दावा किया था। उसके सोशल मीडिया पोस्ट में अफगानिस्तान स्थित कट्टरपंथी संगठन को खुला समर्थन दिया जा रहा था। एक अन्य पुलिस अधिकारी ने बताया कि नूर मोहम्मद का असली नाम अब्दुल हक है और उसका भाई तालिबान के साथ काम करता था। पिछले साल नूर ने धारदार हथियार के साथ सोशल मीडिया पर एक वीडियो जारी किया था। पुलिस ने जब उसे पकड़ा तो पता चला था कि उसके बाएँ कंधे के पास गोली लगने का भी घाव था।

NIA ने भिंडरावाले के पोते को किया गिरफ्तार, पिता हैं अकाल तख्त के पूर्व जत्थेदार: विस्फोटक भरे टिफिन बॉक्स पाकिस्तान से आए थे

खालिस्तानी आतंकवादी जरनैल सिंह भिंडरावाले के भतीजे जसबीर सिंह रोड़े के बेटे को बीती रात NIA ने पंजाब से गिरफ्तार कर लिया। रिपोर्ट्स के मुताबिक जसबीर का बेटा गुरमुख सिंह को पाकिस्तान में रहने वाले अपने चाचा लखबीर सिंह रोड़े से विस्फोटकों से भरे टिफिन बॉक्स मिले थे। इन्हें वह भारत में बाँट रहा था।

एनआईए ने जालंधर के एक गाँव में स्थित जसबीर के घर पर छापा मारा। जसबीर अकाल तख्त का पूर्व जत्थेदार है। NIA को छापेमारी में टिफिन बम, पिस्टल और आरडीएक्स मिला। इसके बाद गुरमुख सिंह को हिरासत में लिया गया। जब छापा मारा गया तब जसबीर घर पर ही था और उसने ख़राब स्वास्थ्य की जानकारी दी।

जसबीर सिंह रोड़े की इसी वर्ष 26 जनवरी को हिंसक हुए कृषि सुधर कानून विरोधी आंदोलन में महत्वपूर्ण भूमिका थी। NIA ने 18 जनवरी को जसबीर को पूछताछ के लिए नोटिस जारी किया था। लेकिन पूर्व जत्थेदार जसबीर ने दावा किया था कि यह आंदोलन को कुचलने की एक साजिश है।

लखबीर सिंह रोड़े इंटरनेशनल सिख यूथ फेडरेशन (ISYF) का अध्यक्ष है। फिलहाल NIA से इस मामले में कोई जानकारी नहीं प्राप्त हुई है। रिपोर्ट्स का यह भी मानना है कि इस ऑपरेशन में इंटेलिजेंस ब्यूरो (IB) भी शामिल थी। इस जाँच के विषय में पूरी जानकारी मिलनी अभी बाकी है।

यहाँ ध्यान योग्य बात यह है कि किसान आंदोलन में खालिस्तानी तत्वों की उपस्थिति जगजाहिर है। इसके बारे में भाजपा और कॉन्ग्रेस दोनों ही पार्टियों के नेता चिंता व्यक्त कर चुके हैं। जसबीर सिंह रोड़े का भाई लखबीर सिंह रोड़े खालिस्तानी समर्थक है।

उज्जैन: मोहर्रम पर ताजिया उठाने के दौरान लगे ‘पाकिस्तान जिंदाबाद’ के नारे, देखें Video

मध्य प्रदेश के उज्जैन में मोहर्रम के अवसर पर देश विरोधी नारे लगाने का मामला सामने आया है। बताया जा रहा है कि वहाँ भीड़ में कुछ युवकों ने देश विरोधी नारे लगाए और फिर पाकिस्तान जिंदाबाद चिल्लाने लगे। पुलिस ने इस मामले में सूचना मिलने के बाद 4 लोगों को गिरफ्तार किया है।

दैनिक भास्कर की रिपोर्ट के अनुसार, एएसपी अमरेंद्र सिंह ने घटना की पुष्टि करते हुए जानकारी दी कि इस मामले में कार्रवाई की जा रही है। आरोपितों से पूछताछ चल रही है। बाद में बाकी खुलासा होगा। बता दें कि पूरा मामला गुरुवार (अगस्त 19, 2021) रात का है। वहाँ भारी भीड़ के बीच गीता कॉलोनी में मोहर्रम का ताजिया उठ रहा था। इसी बीच देश विरोधी नारे लगे और युवक पाकिस्तान जिंदाबाद चिल्लाने लगे। हालाँकि, पुलिस फोर्स के वहाँ पहुँचते ही सारी भीड़ तितर-बितर हो गई। अब कुछ युवकों से खारा कुआं पुलिस थाने में पूछताछ की जा रही है।

घटना की एक वीडियो भी सोशल मीडिया पर सामने आई है। इसमें कई लोगों की भीड़ पाकिस्तान जिंदाबाद-जिंदाबाद चिल्ला रही है। लोग इस वीडियो को शेयर करके सवाल कर रहे हैं कि ऐसी सोच के लोगों को भारत में रहने का क्या अधिकार है? दावा किया जा रहा है कि इस केस में पुलिस ने 10 लोगों के विरुद्ध देशद्रोह का मामला दर्ज किया है, इनमें से 4 की गिरफ्तारी हो गई है।

एवी न्यूज पर प्रकाशित रिपोर्ट बताती है कि गुरुवार रात में गीता कॉलोनी स्थित बड़े साहब के समीप मोहर्रम के चलते समुदाय विशेष के लोग काफी तादाद में पहुँचे थे। जिसे देखते हुए अतिरिक्त पुलिस फोर्स भी तैनात किया गया। यहीं पर सायबर सेल एसआई प्रमोद भदौरिया भी ड्यूटी पर तैनात थे। लेकिन रात के करीब 10.15 बजे जफर, अनीस, अजीज, हारून कुरैशी का भांजा, अज्जू, शानू, अब्दुल, कालू, राजू, ‘शगुन गार्डन’ के पास बने ‘बड़े साहब’ पहुँचे और फिर आपत्तिजनक नारेबाजी करने लगे। उन्हें रोकने का प्रयास किया गया लेकिन वह नहीं माने। 

बाद में उक्त लोगों के खिलाफ धारा 124 ए, 153 बी, 188 के तहत प्रकरण दर्ज कराया गया, जिसके बाद पुलिस ने 4 लोगों को गिरफ्तार किया है। पुलिस अधीक्षक सत्येंद्र कुमार शुक्ल इस मामले पर कहते हैं कि बड़े साहब के पास कुछ युवकों द्वारा नारे लगाकर माहौल बिगाडऩे का प्रयास किया जा रहा था जिनके खिलाफ थाने में एफआईआर दर्ज की गई है, साथ ही 4 युवकों को गिरफ्तार किया गया है। संवेदनशील क्षेत्रों में अतिरिक्त पुलिस फोर्स तैनात है।

कब्र में दफन थी 14 साल की बच्ची, रफीक ने शव बाहर निकाला और झाड़ियों में ले जाकर रेप किया: पाकिस्तान की घटना

पाकिस्तान से दरिंदगी की ऐसी वारदात सामने आई है, जिससे मानवता भी शर्मसार हो जाए। यहाँ सिंध प्रांत में 13 अगस्त 2021 को पाकिस्तान के स्वतंत्रता दिवस से एक दिन पहले एक शख्स ने मरने के बाद दफन की जा चुकी नाबालिग (14) लड़की के शव को जमीन से बाहर निकालकर उसके साथ रेप किया।

रिपोर्ट के मुताबिक, घटना थट्टा जिले में स्थित असरफ चांडीओ नाम के गाँव की है। यहाँ 14 साल की लड़की की बुखार के कारण मौत हो गई थी। मरने के बाद इस्लामिक तरीके से उसे पास के ही कब्रिस्तान में दफन कर दिया गया। लेकिन रात में रफीक चांडीओ नाम के शख्स ने लड़की के शव को कब्र से बाहर निकाला और उसे करीब 500 मीटर दूर स्थित एक झाड़ी में ले गया। वहाँ ले जाकर उसने लड़की के शव के साथ बलात्कार किया और उसे वहीं छोड़कर फरार हो गया।

घटना के अगले दिन कुछ बच्चों की नजर खुदी हुई कब्र पर पड़ी, जिसमें से शव गायब था। इसके बाद उन्होंने तुरंत इसकी जानकारी मृतक लड़की के परिजनों को दी। मौके पर पहुँचे परिजनों समेत गाँव के कई लोगों ने शव की तलाश शुरू की। इसकी जानकारी पुलिस को दी गई। काफी देर तलाश करने के बाद वहाँ से आधा किलोमीटर दूर एक झाड़ी में लड़की शव मिला। उसके शरीर के ऊपर से कफन गायब था औऱ उसके कपड़े अस्त-व्यस्त थे।

पुलिस ने शव को कब्जे में लेकर मेडिकल परीक्षण के लिए पास के अस्पताल में भेजा। डॉक्टरों के मुताबिक, शव के साथ रेप किया गया था। वहीं आरोपित रफीक पुलिस मुठभेड़ में मारा गया। इस बीच सिंध विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष हलीम शेख ने पीड़ित परिवार के लोगों से मुलाकात की। उन्होंने इसे अफसोसनाक, दर्दनाक और शर्मनाक बताते हुए कहा कि इससे बुरी बात नहीं हो सकती है।