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भारत ने 27 करोड़ को निकाला गरीबी से बाहर, मानदंड बदलने पर भी हासिल की उपलब्धि: वर्ल्ड बैंक की रिपोर्ट में आया सामने, मोदी सरकार में हुआ ज्यादातर काम

भारत ने वर्ष 12 वर्षों में लगभग 27 करोड़ लोगों को निर्धनता से बाहर निकाला है। अब भारत में लगभग 5% लोग ही निर्धनता में रह रहे है, जिनके लिए काम चल रहा है। यह सारी जानकारी वर्ल्ड बैंक ने अपनी एक रिपोर्ट में दी है।

वर्ल्ड बैंक की रिपोर्ट के अनुसार, वर्ष 2011-12 में भारत में अत्यंत निर्धनता में रहने वालों की संख्या 34.4 करोड़ से अधिक थी। वर्ष 2022-23 में यह संख्या 7.5 करोड़ हो गई। यानी इसमें लगभग तीन चौथाई से अधिक की कमी आई।

वर्ल्ड बैंक के अनुसार, वर्ष 2011-12 में 27% लोग भारत में अत्यंत निर्धनता में रह रहे थे। अब यह संख्या मात्र 5.3% ही रह गई है। वर्ल्ड बैंक की रिपोर्ट बताती है कि सबसे अधिक काम उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश, ओडिशा और बिहार जैसे राज्यों में हुआ है।

इन राज्यों से सबसे अधिक लोग अत्यंत निर्धनता से बाहर निकाले गए हैं। भारत ने यह उपलब्धि तब हासिल की है जब वर्ल्ड बैंक ने किसी व्यक्ति को गरीब माने जाने के मानदंड बदले हैं और उन्हें और ऊँचा कर दिया है। भारत ने इसके बाद भी सफलता पाई है।

वर्ल्ड बैंक पहले $2.15 (लगभग ₹180) प्रतिदिन खर्चने वाले व्यक्ति को अत्यंत गरीब नहीं मानता था। यह पैमाना लम्बे समय से चला आ रहा था। हालाँकि, वर्ल्ड बैंक ने यह बदल कर $3 (लगभग ₹258) कर दी थी। यह मानदंड बढ़ाने के बावजूद भारत ने अत्यंत गरीबी में जी रहे लोगों को बाहर निकाला है।

यदि पुराना मानदंड ही लगाया गया होता तो भारत में 2022-23 में गरीबी का स्तर मात्र 2.3% पर आ जाता। गौरलतब है कि वर्ल्ड बैंक ने भारत की जो यह उपलब्धि बताई है, उसमें अधिकांश समय भाजपा की अगुवाई वाली NDA सरकार का शासन रहा है।

पहले के कई रिपोर्ट और सर्वे से स्पष्ट हुआ है कि उज्ज्वला योजना, प्रधानमंत्री आवास योजना, हर घर बिजली और जल जीवन मिशन जैसी योजनाओं ने देश के उन लोगों का जीवन स्तर उठाने में सबसे अधिक सहायता की है, जो पहले इनसे वंचित थे।

मुकेश अंबानी ने अपने प्रोफेसर को बताया ‘राष्ट्र गुरु’, उनके कहने पर ICT को दिए ₹151 करोड़: बताया क्यों IIT बॉम्बे में नहीं की पढ़ाई, कहा- यहाँ आना मंदिर आने जैसा

दुनिया के सबसे बड़े उद्योगपतियों में से एक मुकेश अंबानी ने इंस्टीट्यूट ऑफ केमिकल टेक्नोलॉजी (ICT), मुंबई को ₹151 करोड़ का अनुदान दिया है। यह दान उन्होंने अपने प्रोफेसर शर्मा को ‘गुरु दक्षिणा’ के तौर पर दिया है जिन्होंने उनका सही मार्गदर्शन किया था। ICT के लिए यह अब तक का सबसे बड़ा दान है।

मुकेश अंबानी ने यहा दान देने की घोषणा अनीता पाटिल की किताब ‘द डिवाइन साइंटिस्ट’ के लॉन्च के मौके पर की। ये किताब पद्म विभूषण प्रोफेसर मन मोहन शर्मा के जीवन पर आधारित है, जो मुकेश अंबानी के भी गुरु रहे हैं।

बुक लॉन्च में गुरु दक्षिणा का जिक्र करते हुए उन्होंने ऐलान किया कि वो संस्थान को 151 करोड़ का अनुदान करेंगे। उन्होंने बताया कि प्रोफेसर शर्मा उनसे कहा करते थे – मुकेश तुम्हें ICT के लिए कुछ बड़ा करना होगा। इसलिए ये उन्हीं के लिए हैं।

आगे उद्योगपति ने बताया कि उ्न्होंने जानबूझकर IIT-बॉम्बे के ऊपर UDCT को चुना था। उन्होंने कहा, “UDCT कैंपस आना हमेशा एक पवित्र मंदिर में आने जैसा लगता है। प्रोफेसर शर्मा, मैं आपको अपने सबसे सम्मानित गुरु, मेरे मार्गदर्शक और प्रेरणा के स्रोत के रूप में सम्मान देता हूँ।”

मुकेश अंबानी ने भारतीय केमिकल इंडस्ट्री के विकास का सारा श्रेय प्रोफेसर शर्मा को देते हुए उन्हें राष्ट्र गुरु बताया। साथ ही कहा- “मेरे लिए प्रोफेसर शर्मा एक अलकेमिस्ट हैं, धातुओं के नहीं, बल्कि दिमागों के। उनके पास जिज्ञासा को ज्ञान में, ज्ञान को व्यावसायिक मूल्य में और ज्ञान और व्यावसायिक मूल्य दोनों को हमेशा के लिए रहने वाली बुद्धि में बदलने की शक्ति है।”

बता दें कि ICT को पहले यूनिवर्सिटी डिपार्टमेंट ऑफ केमिकल टेक्नोलॉजी के नाम से जाना जाता था। इसकी स्थापना 1933 में यूनिवर्सिटी ऑफ बॉम्बे ने की थी। 2008 में इसका नाम बदला गया और इसे डीम्ड यूनिवर्सिटी का दर्जा दिया गया।

दरगाह से लौटा था बकरीद पर खुद का गला रेतने वाला ईश मोहम्मद, बेवा ने बताया- ‘भूत-प्रेत का साया’: मौलवी बोले- खुद की कुर्बानी देना इस्लाम में नाजायज

उत्तर प्रदेश के देवरिया में एक ईश मोहम्मद नाम के व्यक्ति ने बकरीद पर अल्लाह को अपनी ही कुर्बानी दे डाली। शख्स ने ऐसा करने से पहले एक नोट भी लिखा जिसमें उसने बताया कि किसी ने उसका कत्ल नहीं किया, वो खुद ये कर रहा है। वहीं उसकी बीवी ने बताया कि उसके शौहर पर भूत-प्रेत का साया था जो उन्हें पटकता भी था। इस घटना के बाद हर कोई हैरान है। मौलवियों का कहना है कि खुद की कुर्बानी देना में नाजायज होता है। ऐसा नहीं किया जाना चाहिए।

पूरी घटना देवरिया गौरी बाजार थाना क्षेत्र की है। 60 वर्षीय ईश मोहम्मद ने शनिवार (7 जून 2025) को बकरीद के मौके पर एक सुसाइड नोट लिखने के बाद अपना गला रेत लिया। घर के बाहर बनी झोपड़ी से उसके तड़पने की आवाज सुन कर परिवार वाले आए तो उन्होंने देखा कि झोपड़ी में चारो तरफ खून बिखरा था और ईश मोहम्मद दर्द से तड़प रहा था। आनन – फानन में उसे गोरखपुर मेडिकल ले जाया गया, जहाँ उसने दम तोड़ दिया।

ईश मोहम्मद ने मरने से पहले एक सुसाइड नोट लिखा था। नोट में उसने लिखा है, ”इंसान बकरे को बेटे की तरह पोसकर कुर्बानी करता है। वो भी जीव हैं। कुर्बानी करनी चाहिए। मैं खुद अपनी कुर्बानी अल्लाह के रसूल के नाम से कर रहा हूं। किसी ने मेरा कत्ल नहीं किया है। सुकून से मिट्टी देना। किसी से डरना नहीं है।”

परिवार वालों का कहना है कि ईश मोहम्मद एक मजहबी इंसान था। सुबह बकरीद के मौके पर वह ईद-उल-अजहा की नमाज पढ़कर घर आया था। घर आने के बाद वह बाहर बनी झोपड़ी में चला गया था। उसकी कराह सुनकर घर वाले अंदर पहुँचे तो देखा कि उसने अपना गला रेत लिया है। वहीं मृतक की पत्नी हाजरा खातून ने बताया कि उनके पति पर भूत-प्रेत का साया था और वे अक्सर आज़मगढ़ की दरगाह जाया करते थे। तीन दिन पहले ही दरगाह से लौटा था। इसके बाद ये घटना हुई।

अब इस मामले पर ऑल इंडिया मुस्लिम जमात के अध्यक्ष मौलाना शहाबुद्दीन रजवी ने कहा, “इस्लाम की रोशनी में खुद की कुर्बानी देना बिल्कुल नाजायज है। इस्लाम इस तरह की कुर्बानी की इजाजत नहीं देता है। अल्लाह ने इंसान को बनाया है, वो इंसान की कुर्बानी नहीं चाहता है।”

झारखंड का 700 साल पुराना मंदिर जहाँ ब्राह्मण ही नहीं, ST भी होते हैं ‘पुजारी’: विराजमान हैं यहाँ 5 मुख और 10 भुजाओं के साथ माँ दुर्गा

झारखंड की राजधानी राँची से करीब 60 किलोमीटर दूर तामड़ गाँव में देउड़ी मंदिर है। यहाँ जनजातीय समाज के रीति-रिवाज़ और ब्राह्मण परंपराएँ साथ-साथ निभाई जाती हैं। यहाँ दोनों समुदाय के लोग मिलकर पूजा-पाठ करते हैं। यहाँ मौजूद 15 पुजारियों में से आधे ब्राह्मण और आधे जनजातीय समाज से हैं। समय के साथ मंदिर का जीर्णोद्धार कराया गया लेकिन मूल परंपरा और आस्था अब भी उतनी ही मजबूत हैं।

यह मंदिर सिर्फ आम श्रद्धालुओं के लिए ही नहीं बल्कि खुद टीम इंडिया के पूर्व कप्तान महेंद्र सिंह धोनी के लिए भी खास है। जो हर बड़ी सीरीज़ से पहले यहाँ आशीर्वाद लेने पहुँचते हैं।

मंदिर का इतिहास

देउड़ी मंदिर का इतिहास लगभग 700 साल पुराना माना जाता है। कहा जाता है कि इस मंदिर का निर्माण नागवंशी वंश के राजा ने 14वीं सदी में करवाया था। नागवंशी राजाओं का झारखंड में लंबा शासन रहा था। वे माँ दुर्गा के उपासक थे।

मान्यता है कि राजा ने एक बार माँ दुर्गा से किसी युद्ध में विजय का आशीर्वाद माँगा था और जब उनकी इच्छा पूरी हुई तो उन्होंने इस मंदिर की स्थापना की। माँ देउड़ी को यहाँ माँ दुर्गा के विशेष रूप में पूजा जाता है और उन्हें पाँच मुखों और 10 भुजाओं वाली देवी के रूप में स्थापित किया गया है।

मंदिर की संरचना

देउड़ी मंदिर की वास्तुकला अद्भुत है। पूरा मंदिर बड़े-बड़े पत्थरों से बना है और इसकी बनावट नागर शैली की झलक देती है। मंदिर का मुख्य गर्भगृह छोटा है। लेकिन इसके भीतर स्थापित देवी की मूर्ति बहुत प्रभावशाली है। मूर्ति को काले पत्थर से बनाया गया है और इसकी विशेषता इसके पाँच चेहरे और 10 भुजाएँ हैं। जो देवी को सर्वशक्तिमान दर्शाती हैं।

मंदिर के चारों ओर पत्थरों की दीवारें हैं जो देखने में बहुत प्राचीन लगती हैं। मंदिर का प्रवेश द्वार भी विशेष रूप से सजाया गया है। जहाँ पर देवी की झाँकी और लोककथाओं से जुड़े चित्र देखे जा सकते हैं। गर्भगृह के चारों ओर एक परिक्रमा पथ भी है। जहाँ भक्त पूजा के बाद घूमते हैं। मंदिर का आँगन खुला है, जहाँ विशेष पर्वों और नवरात्रि के दौरान हजारों की संख्या में श्रद्धालु एकत्र होते हैं।

कैसे पहुँचे मंदिर ?

देउड़ी मंदिर राँची से लगभग 60 किलोमीटर दूर राँची-जमशेदपुर रोड पर तामड़ प्रखंड के देउड़ी गाँव में स्थित है। यहाँ पहुँचने के लिए राँची से सड़क मार्ग द्वारा आसानी से जा सकते हैं। राँची रेलवे स्टेशन या बिरसा मुंडा एयरपोर्ट से टैक्सी या बस लेकर भी मंदिर तक पहुँचा जा सकता है। तामड़ तक नियमित लोकल बसें भी चलती हैं जो मंदिर के पास ही रुकती हैं।

मंदिर तक पहुँचने का रास्ता प्राकृतिक सौंदर्य से भरपूर है, जिससे यात्रा का अनुभव और भी मनमोहक हो जाता है। मंदिर के पास श्रद्धालुओं के लिए खाने-पीने की दुकानें और छोटे-छोटे रुकने के स्थान भी मौजूद हैं।

पाकिस्तान का Ex-पुलिसकर्मी शाकिर जट्ट करवा रहा था जसबीर-ज्योति से जासूसी, लाहौर बुला कर 10 दिन रुकवाया: यूट्यूबर बन करता था कॉन्टेक्ट, इसी ने दानिश से भी मिलवाया

पाकिस्तान का एक पूर्व पुलिसकर्मी भारतीय यूट्यूबरों को जासूसी जाल में फँसा रहा था। इस पूर्व पुलिसकर्मी का नाम शाकिर जट्ट है। वह ISI से जुड़ा हुआ था। वह खुद अब एक यूट्यूबर है। एजेंसियों को यह जानकारी पूछताछ में हासिल हुई है। यह भी पता चला है कि जासूसी के आरोप में गिरफ्तार यूट्यूबर 10 दिन लाहौर में साथ रहे थे।

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, पूछताछ के दौरान गिरफ्तार यूट्यूबर जसबीर ने बताया कि वह पाकिस्तान के खुफिया ऑपरेटिव शाकिर उर्फ जट्ट रंधावा और पूर्व पाकिस्तानी पुलिस अधिकारी नासिर ढिल्लन से जुड़ा हुआ था। नासिर अब यूट्यूबर बन चुका है।

वह इसी बहाने भारतीय यूट्यूबरों से सम्पर्क करता था। और उसने पाकिस्तान में जसबीर की मुलाकात ISI अधिकारियों से करवाई। जसबीर ने 2020, 2021 और 2024 में पाकिस्तान की यात्रा की थी और वहीं उसे ISI ने भारत में जासूसी के लिए उसको तैयार किया। जसबीर का यूट्यूब चैनल ‘जान महल वीडियो’ है, जिसके 11 लाख से ज्यादा सब्सक्राइबर हैं।

यह भी सामने आया है कि जसबीर का लिंक ज्योति मल्होत्रा से भी था। मल्होत्रा को भी पाकिस्तान के लिए जासूसी करने के आरोप में गिरफ्तार किया जा चुका है। पता चला है कि इस शाकिर जट्ट से ज्योति की भी पहचान थी। उसने दोनों को एक साथ पाकिस्तान बुलाया था।

दोनों एक साथ पाकिस्तान भी गए थे और 10 दिन लाहौर में रुके थे, वही उन्हें ISI हैंडलर एहसान-उर-रहीम उर्फ दानिश से मिलवाया गया, जो उस समय दिल्ली में पाकिस्तान उच्चायोग में काम कर रहा था। इस दानिश को भारत ने मई में पाकिस्तान वापस भेज दिया था।

जाँच में यह भी सामने आया कि नासिर ढिल्लन और उसकी साथी नौशाबा शहजाद उर्फ मैडम एन ने भारत से गए हिंदू और सिख पर्यटकों को निशाना बनाया और सोशल मीडिया के जरिए प्रभावशाली लोगों को जासूसी के लिए तैयार किया।

वे भारतीय यूट्यूबर्स को पाकिस्तान बुलाकर उच्चायोग के अधिकारियों से मिलवाते थे और फिर जासूसी के काम सौंपते थे। अभी के लिए जसबीर सिंह की पुलिस रिमांड को दो दिनों के लिए बढ़ा दी है। जाँच में यह भी पता चला है कि ISI इन भारतीय यूट्यूबरों उन निशानों की वीडियो व्लॉग के रूप में बनवाती जो महत्वपूर्ण हैं।

इस तरीके से किसी को शक भी नहीं होता और जानकारियाँ भी पाकिस्तान पहुँच जाती थीं। सामान्य तौर पर देखने पर यह वीडियो कोई टूर व्लॉग लगतीं। इसके अलावा इन इन्फ्लुएंसर और यूट्यूबर के जरिए पाकिस्तान अपनी छवि भारत में सुधारना चाहता था। एजेंसियाँ इस मामले में रोज नई कड़ियाँ खोल रही हैं। अभी जाँच जारी है।

मैं रोता रहा, वह जबरन मेरे कपड़े उतारते रहा, किसी ने मदद नहीं की… मदरसों के इन बच्चों की सुनेगा कौन? ‘दीनी तालीम’ देने वाले मौलवी ही कर रहे हैं यौन शोषण

कहने को तो मदरसा ‘दीनी तालीम’ की जगह है। पर आए दिन जिस तरह की खबरें आती रहती है, उससे पता चलता है कि ये आतंकी से लेकर यौन शोषण के अड्डों में तब्दील हो चुके हैं। यह हाल भारत जैसे उन्हीं देशों में नहीं है, जिन्हें इस्लामी मुल्क बनाने की साजिशें रची जा रही है, बल्कि मुस्लिम बहुल मुल्कों में भी यही हाल है।

इस्लाम के नाम पर भारत से अलग होकर बने पाकिस्तान के मदरसों को लेकर ‘फ्रांस 24’ ने एक रिपोर्ट प्रकाशित की है। इससे पता चलता है कि पाकिस्तान के मदरसों में बच्चों का यौन उत्पीड़न संस्थागत रूप ले चुका है। यौन शोषण इतनी आम बात है कि वहाँ व्यवस्था से जुड़े लोगों को भी शायद इसका फर्क नहीं पड़ता है।

गौर करने वाली बात यह भी है कि पाकिस्तान के रक्षा मंत्री ख्वाजा आसिफ ने कुछ समय पहले ही मदरसों में तालीम लेने वालों को अपने मुल्क की ‘सेकेंड डिफेंस लाइन’ बताया था। लेकिन फ्रांस 24 को इन्हीं बच्चों ने अपने साथ हुए यौन उत्पीड़न की जो कहानी सुनाई है, उससे पता चलता है कि पाकिस्तान की ‘सेकेंड डिफेंस लाइन’ खुद ही असुरक्षित है।

रिपोर्ट के अनुसार पाकिस्तान में पंजीकृत और गैर पंजीकृत 36 हजार से अधिक मदरसे चल रहे हैं। इनमें करीब 22 लाख बच्चे तालीम ले रहे हैं। ज्यादातर गरीब परिवारों से आते हैं। ग्रामीण इलाकों के होते हैं और मदरसे में रहकर ही पढ़ाई करते हैं। इसका फायदा इन मजहबी संस्थानों से जुड़े लोग उठाते हैं और बच्चों के साथ यौन हिंसा करते हैं।

फ्रांस 24 की इस रिपोर्ट में दर्जनों पीड़ित बच्चों की आपबीती शामिल है। 14 साल के एक पीड़ित ने बताया कि तालीम देने वाले एक मौलवी ने ही उसके साथ बलात्कार किया। उसने कहा कि गाँव के लड़के मदरसे में यौन शोषण की बातें करते थे, लेकिन उसने सोचा नहीं था कि ऐसा उसके साथ भी होगा।

एक अन्य पीड़ित बच्चे ने बताया, “मदरसे का प्रधान मौलवी मुझे अपने घर की सफाई के बहाने ले गया। जैसे ही मैं पहुँचा, मौलवी ने कमरे का दरवाजा बंद कर दिया। जबरन मेरी पैंट उतार दी। मेरे साथ मारपीट की। जबरदस्ती की। भयानक हरकतें की। मैं लगातार रो रहा था।” 

फ्रांस 24 के एक्स के पोस्ट का स्क्रीनशॉर्ट

एक अन्य पीड़ित बच्चे ने बताया है, “मैं उसके (मौलवी) साथ बाइक पर गया। उसने दरवाजा बंद किया और मेरे कपड़े जबरन उतारे। मैं रोता रहा, लेकिन कोई मदद के लिए नहीं आया।”

मदरसे बने यौन शोषण के अड्डे

पाकिस्तान के मदरसों की इस हालत को लेकर पूर्व में एसोसिएटेड प्रेस भी रिपोर्ट छाप चुका है। भारत हो या बांग्लादेश या फिर पाकिस्तान हर मुल्क के मदरसों की हकीकत करीब-करीब एक जैसी ही है। बच्चों के यौन शोषण का अड्डा बनने की। मुल्लों का खौफ ऐसा है कि कुछ ही मामले सामने आ पाते हैं। ज्यादातर दबा दिए जाते हैं।

पाकिस्तान के मानवाधिकार मामलों के वकील सैफ उल मुल्क भी इस भय की बात कर चुके हैं। उनके मुताबिक- मुल्लों से आज हर कोई डरता है। उन पर यौन दुर्व्यवहार का आरोप लगाने का मतलब है कि न्याय दुर्लभ बन जाएगा। पुलिस भी पीड़ितों की नहीं मुल्लाओं की ही मदद करती है।

नुसरत को मदरसे में जलाकर मार डाला

इस खौफ को बांग्लादेश की एक घटना से समझा जा सकता है। ढाका मेडिकल कॉलेज में 6 अप्रैल 2019 को 80 फीसदी जल चुकी नुसरत जहाँ राफी लाई जाती है। 10 अप्रैल को वह मर जाती है। 19 साल की राफी ने 27 मार्च को पुलिस से शिकायत की थी कि मदरसे के प्रिंसिपल ने ऑफिस में बुला उसे गलत तरीके से छुआ। उसने मदरसे के प्रिंसिपल पर बार-बार यौन शोषण का आरोप लगाया। मदरसे के अन्य शिक्षकों ने भी राफी को ही मुँह बंद रखने को कहा। उस पर शिकायत वापस लेने का दबाव डाला। फिर 6 अप्रैल की रात नुसरत को मदरसे की छत पर बुलाया जाता है। शिकायत वापस लेने को कहा जाता है। वह इनकार कर देती है। हमलावर मिट्टी का तेल उड़ेल उसे आग लगा देते हैं।

नुसरत की हत्या के तीन आरोपित उसके साथ पढ़ते थे। पुलिस के मुताबिक मौलवी ने कहा था कि शिकायत वापस लेने का दबाव डालो, नहीं माने तो मार डालो। योजना तो उसकी हत्या को आत्महत्या की तरह दिखाने की थी। लेकिन ऐसा हो नहीं पाया, क्योंकि नुसरत के हाथ-पैर को जिस स्कार्फ से बाँधा गया था वह जल गया और वह सीढ़ियों से नीचे उतरने में कामयाब रही।

पाकिस्तान में 8 साल बाद भी वही हालात

पाकिस्तान में 2017 में मदरसों के खिलाफ आवाजें उठी भी थी। तब कौसर परवीन का 9 साल का बेटा खून में लथपथ होकर मदरसे से घर लौटा था। रिपोर्टों के मुताबिक अप्रैल की एक रात मदरसे में रहने वाले कौसर के बेटे की जब नींद खुली तो मौलवी उसे बगल में लेटा मिला। मौलवी को देख बच्चा डर गया। मौलवी ने फिर उसके साथ कुकर्म किया। 9 साल का वह बच्चा चिल्ला न पाए, इसलिए मौलवी ने उसके मुँह में उसकी ही कमीज ठूँस दी। लेकिन इस मामले में भी आखिर वही हुआ जो अमूमन ऐसे ज्यादातर मामलों में होता है। मौलवी बच निकला। ‘फ्रांस 24’ की रिपोर्ट बताती है कि आठ साल बाद भी पाकिस्तान के मदरसों में बच्चों का यौन शोषण बदस्तूर जारी है।

अंतरिक्ष में 41 वर्ष बाद कदम रखेगा कोई भारतीय: IAF पायलट शुभांशु शुक्ला जा रहे ISS, जानिए क्यों भारत के लिए महत्वपूर्ण है यह मिशन

भारत 10 जून 2025 को एक नया इतिहास रचने जा रहा है। इस दिन ग्रुप कैप्टन शुभांशु शुक्ला अंतर्राष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन (ISS) के लिए एक्सिओम-4 मिशन का नेतृत्व करेंगे। वह अपने 3 साथियों के साथ अंतरिक्ष की यात्रा करेंगे।

यह मिशन भारत के लिए विशेष रूप से महत्वपूर्ण है क्योंकि यह 1984 में राकेश शर्मा की ऐतिहासिक उड़ान के 4 दशक बाद किसी कोई और भारतीय यह उपलब्धि हासिल करेगा। शुभांशु शुक्ला की यह उड़ान न केवल भारत के लिए एक गौरवपूर्ण पल है, बल्कि यह देश की मानव अंतरिक्ष उड़ान कार्यक्रम और वैज्ञानिक प्रगति की दिशा में रणनीतिक कदम भी है।

अंतरिक्ष क्षेत्र में भारत के लिए नया कदम

अगर मौसम अनुकूल रहा, तो 10 जून 2025 को स्पेसएक्स का फाल्कन 9 रॉकेट फ्लोरिडा स्थित नासा के कैनेडी स्पेस सेंटर से उड़ान भरेगा, जिसमें चार अंतरिक्ष यात्री अंतर्राष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन (ISS) के लिए दो सप्ताह की यात्रा पर रवाना होंगे। इसमें ही भारतीय वायु सेना के प्रतिष्ठित पायलट ग्रुप कैप्टन शुभांशु शुक्ला भी शामिल होंगे।

वे 41 वर्षों बाद किसी क्रू स्पेस मिशन में भाग लेने वाले पहले भारतीय होंगे, जिससे भारत की मानव अंतरिक्ष उड़ान कार्यक्रम में ऐतिहासिक वापसी होगी। इस मिशन को ‘एक्सिओम मिशन 4 (Ax-4)’ नाम दिया गया है, जिसका संचालन ह्यूस्टन स्थित निजी अंतरिक्ष कंपनी एक्सिओम स्पेस कर रही है।

यह मिशन इसलिए भी विशेष है क्योंकि शुभांशु शुक्ला अंतर्राष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन तक पहुँचने वाले पहले भारतीय अंतरिक्ष यात्री बनेंगे। यह भारत के अंतरिक्ष कार्यक्रम के लिए एक मील का पत्थर होगा।

क्या है एक्सिओम- 4 मिशन, क्यों यह महत्वपूर्ण

शुभांशु शुक्ला अमेरिकी निजी अंतरिक्ष कंपनी एक्सिओम के चौथे मिशन में जा रहे हैं। वह इस मिशन में पायलट होंगे। यानि इस मिशन के स्पेसक्राफ्ट को वही चलाएँगे। उनके साथ एक अमेरिकी, एक हंगेरियन और एक पोलिश अंतरिक्षयात्री होंगे।

एक्सिओम के इस मिशन की अगुवाई NASA की पूर्व वैज्ञानिक पेगी व्हिस्टन करेंगी। एक्सिओम इस मिशन के लिए अंतरिक्षयात्रियों की ट्रेनिंग, उनके स्पेससूट, अंतरिक्ष में उपयोग होने वाले उनके सामान और बाकी सारी एजेंसियों के साथ समन्वय के लिए जिम्मेदार है।

वहीं एलन मस्क की स्पेसएक्स इस मिशन के लिए क्रूड्रैगन स्पेसक्राफ्ट देगी। इसमें 7 लोग अंतरिक्ष को जा सकते हैं। यह फाल्कन रॉकेट पर लगाया जाएगा। इसे NASA के लॉन्च सेंटर से अंतरिक्ष में भेजा जाए।

NASA इन अंतरिक्षयात्रियों की ISS में सुविधा, उनके रहने समेत बाकी सुविधाएँ देगा। वह यह भी पक्का करेगा कि इस मिशन में सरे स्टैण्डर्ड पूरे हो रहे हों। एक्सिओम इससे पहले तीन बार ऐसे मिशन पूरा कर चुका है।

एक्सिओम का यह मिशनक्राफ्ट अंतरिक्ष में जाकर शुक्ला और बाकी तीन यात्रियों को ISS के कोलंबस मॉड्यूल में छोड़ देगा। यहाँ वह लगभग 14 दिन तक रहेंगे और रिसर्च करेंगे। इसके बाद वह जमीन पर लौटेंगे।

एक्सिओम-4 मिशन मानव शरीर विज्ञान, पृथ्वी अवलोकन, भौतिक विज्ञान और अंतरिक्ष कृषि जैसे क्षेत्रों में 60 से अधिक वैज्ञानिक प्रयोगों के लिए डिज़ाइन किया गया है।

एक्सिओम-4 मिशन भविष्य में दुनिया का पहला वाणिज्यिक अंतरिक्ष स्टेशन बनाने की एक्सिओम स्पेस की महत्वाकांक्षी योजना की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है, क्योंकि ISS-आधारित यह अस्थायी अनुसंधान मिशन कंपनी को व्यावहारिक अनुभव और मूल्यवान डेटा प्रदान करेगा, जो इस दशक के अंत तक उसके स्टेशन के विकास में सहायक होगा।

कौन-कौन है टीम में शामिल?

एक्सिओम-4 मिशन में चार सदस्य शामिल हैं। इसकी कमांडर पैगी व्हिटसन हैं। वह पूर्व ISS कमांडर हैं और अमेरिका की सबसे अनुभवी अंतरिक्ष यात्री हैं। उन्होंने अंतरिक्ष में 675 दिन से अधिक समय बिताया है और दस बार अंतरिक्ष में चहलकदमी की है।

उनके साथ पायलट शुभांशु शुक्ला हैं जो कि एक लड़ाकू पायलट, परीक्षण पायलट और भारत के गगनयान मिशन के लिए चुने गए चार अंतरिक्ष यात्रियों में से एक हैं। उनके साथ मिशन विशेषज्ञ स्लावोज़ उज़्नान्स्की-विस्निएव्स्की (पोलैंड) हैं जो विकिरण विज्ञान और उच्च ऊर्जा भौतिकी में पृष्ठभूमि वाले एक सर्न इंजीनियर और ईएसए रिजर्व अंतरिक्ष यात्री हैं।

    इसके अलावा उनके साथ हंगरी के मिशन विशेषज्ञ टिबोर कापू हैं। वह हंगरी के HUNOR अंतरिक्ष यात्री कार्यक्रम के तहत प्रशिक्षित एक मैकेनिकल इंजीनियर, जो अंतरिक्ष विकिरण और जीवन विज्ञान में विशेषज्ञता रखते हैं।

    कौन हैं शुभांशु शुक्ला?

    मूल रूप से लखनऊ के रहने वाले शुभांशु शुक्ला IAF पायलट हैं। वर्तमान में वह ग्रुप कैप्टन के पद पर हैं। वह 2006 में IAF में भर्ती हुए थे। शुक्ला को सुखोई-30, मिग-21, मिग-29, डोर्नियर समेत बाकी विमान उड़ाने का 2000 घंटे से अधिक का अनुभव है।

    शुक्ला को 2019 में रूस भेजा गया था ताकि वह अंतरिक्ष में जाने की ट्रेनिंग ले पाएँ। वह इसके बाद से लगातार गगनयान मिशन और इस मिशन की तैयारी में लगे हुए हैं। 40 वर्षीय शुक्ला एक बच्चे के पिता हैं। अब वह ISRO के पहले अंतरिक्षयात्री बन गए जाएँगे।

    अब एक्सिओम-4 मिशन में वे पायलट की भूमिका निभा रहे हैं, जो मिशन कमांडर के बाद दूसरी सबसे महत्वपूर्ण भूमिका है, जिसमें उन्हें नेविगेशन, डॉकिंग और आपातकालीन युद्धाभ्यास जैसी ज़िम्मेदारियाँ सौंपी गई हैं।

    शांत और भावुक स्वभाव के शुक्ला ने हाल ही में कहा, “जब मैं अंतरिक्ष में जाता हूँ, तो मैं न केवल उपकरण और उपकरण ले जाता हूँ, बल्कि एक अरब दिलों की उम्मीदें और सपने भी ले जाता हूँ” और उन्होंने सभी भारतीयों से मिशन की सफलता के लिए प्रार्थना करने का अनुरोध किया।

    कितनी महत्वपूर्ण है शुक्ला की भूमिका?

    भारत ने ग्रुप कैप्टन शुभांशु शुक्ला की एक्सिओम-4 मिशन में सीट सुरक्षित करने के लिए लगभग 500 करोड़ रुपये का निवेश किया है, यह इसरो के आगामी गगनयान मिशन (2025–2027) की सफलता सुनिश्चित करने के लिए एक रणनीतिक कदम है।

    इसरो प्रमुख वी नारायणन ने कहा है कि इस मिशन से प्रशिक्षण, अंतरिक्ष में सुविधाओं के प्रदर्शन और वैज्ञानिक प्रयोगों के अनुभव के रूप में अभूतपूर्व लाभ मिलेंगे। शुक्ला माइक्रोग्रैविटी, अंतरराष्ट्रीय मिशन प्रोटोकॉल और अंतरिक्ष स्टेशन संचालन से जुड़ी महत्वपूर्ण जानकारी लेकर लौटेंगे।

    यह इसरो को स्वदेशी हार्डवेयर के साथ आत्मनिर्भरता से अपना पहला मानव अंतरिक्ष मिशन संचालित करने में मदद करेगी। भारत के लिए एक्स-4 केवल एक वैश्विक उपस्थिति नहीं, बल्कि गगनयान, 2035 तक अपने स्वयं के अंतरिक्ष स्टेशन की स्थापना और 2040 तक चंद्रमा पर अंतरिक्ष यात्री भेजने की का पूर्वाभ्यास भी है।

    अंतरिक्ष में प्रयोग भी करेगा?

    एक्सिओम-4 मिशन के 60 वैज्ञानिक अध्ययनों में से भारत 7 प्रयोग करेगा। इनमें एक प्रयोग में छह प्रकार के फसल बीजों का अध्ययन कर सूक्ष्म गुरुत्वाकर्षण में उनकी अनुकूलन क्षमता को जाँचा जाएगा, इससे अंतरिक्ष खेती की संभावनाओं को बढ़ावा मिलने के साथ-साथ जलवायु-लचीली फसलों के विकास में भी मदद मिलेगी।

    एक अन्य अध्ययन सूक्ष्म शैवाल के तीन उपभेदों का विश्लेषण करेगा, जिनका उपयोग दीर्घकालिक अंतरिक्ष मिशनों में भोजन, ईंधन या जीवन-सहायक घटकों के रूप में किया जा सकता है। शोधकर्ता टार्डिग्रेड्स जैसे चरम स्थितियों में जीवित रहने वाले सूक्ष्म जीवों पर परीक्षण भी करेंगे।

    एक प्रयोग शून्य गुरुत्वाकर्षण में मांसपेशियों के क्षय और उने उनके वापस ठीक किए जाने की विधियों को लेकर किया जाएगा। यह लंबे अंतरिक्ष अभियानों में अंतरिक्ष यात्रियों के स्वास्थ्य के लिए अहम है। एक अन्य प्रयोग यह अंतरिक्ष में आँखों पर प्रभाव को लेकर होगा।

    कब लॉन्च होगा एक्सिओम मिशन?

    प्रतिकूल मौसम के कारण पहले ही दो बार विलंबित हो चुका एक्सिओम-4 मिशन अब 10 जून को सुबह 8:22 बजे (शाम 5:52 बजे भारतीय समय) पर फ्लोरिडा के केप कैनावेरल स्थित लॉन्च कॉम्प्लेक्स 39A से लॉन्च होगा।

    चारों अंतरिक्ष यात्री एक बिल्कुल नए स्पेसएक्स क्रू ड्रैगन कैप्सूल में सवार होंगे, जिसे फाल्कन 9 रॉकेट द्वारा कक्षा में भेजा जाएगा। पृथ्वी से प्रस्थान के बाद, यह कैप्सूल 11 जून को दोपहर लगभग 12:30 बजे EDT पर अंतर्राष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन (ISS) से स्वचालित रूप से डॉक करेगा।

    मिशन के दौरान चालक दल 14 दिनों तक अंतरिक्ष स्टेशन पर रहकर वैज्ञानिक प्रयोग और सार्वजनिक आउटरीच कार्यक्रम आयोजित करेगा। मिशन पूरा होने के बाद वे कैलिफोर्निया तट के पास समुद्र में स्प्लैशडाउन के ज़रिए लौटेंगे, जहाँ स्पेसएक्स की रिकवरी टीमें कैप्सूल को सुरक्षित रूप से पुनः प्राप्त करेंगी।

    एक्सिओम स्पेस के बारे में

    नासा ने 2016 में के पूर्व अधिकारियों माइकल टी. सुफ्रेडिनी और काम गफ़रियन द्वारा स्थापित एक्सिओम स्पेस ने खुद को न्यू स्पेस इकोनॉमी में एक प्रभावशाली और नवोन्मेषी कंपनी के रूप में स्थापित किया है।

    यह न केवल अंतर्राष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन (ISS) के लिए पूर्ण-सेवा निजी मिशन संचालित करती है, बल्कि ‘एक्सिओम स्टेशन’ नामक एक निजी व्यावसायिक अंतरिक्ष स्टेशन भी विकसित कर रही है, जिसे 2030 से पहले लॉन्च करने की योजना है।

    यह ISS का संभावित वाणिज्यिक उत्तराधिकारी होगा। एक्सिओम के पूर्व मिशनों में पहला निजी इज़राइली अंतरिक्ष यात्री, सऊदी अंतरिक्ष यात्रियों की उड़ानें, और यूरोपीय संघ के साथ संयुक्त मिशन शामिल हैं।

    भारत के लिए इस मिशन का क्या महत्व?

    1984 के बाद जन्मी पीढ़ी ने केवल भारतीय अंतरिक्ष यात्री राकेश शर्मा की ब्लैक एंड व्हाइट फोटो देखीं हैं। अब शुभांशु शुक्ला की अंतरिक्ष यात्रा उस याद को एक जीवंत, आधुनिक 4K वास्तविकता में बदलने जा रही है। इसरो ने पुष्टि की है कि शुक्ला अंतरिक्ष से भारतीय छात्रों के साथ इंटरैक्टिव सत्र करेंगे।

    यह अगली पीढ़ी के इंजीनियरों, अंतरिक्ष यात्रियों और सपने देखने वालों को प्रेरित करेगा। उनकी यह यात्रा सिर्फ एक वैज्ञानिक मिशन नहीं, बल्कि एक शक्तिशाली संदेश है कि भारतीय प्रतिभा अब वैश्विक अंतरिक्ष मानकों पर खरा उतर रही है। यह संकेत है कि भारत और अंतरिक्ष के बीच संबंध अब प्रारंभिक चरण में हैं, और ब्रह्मांड अब हमारी पहुँच से बाहर नहीं है।

    महाराष्ट्र चुनाव पर फिर राहुल गाँधी ने फैलाया झूठ, लेकिन ऑपइंडिया के लाई डिटेक्टर टेस्ट में हुए फेल: जानिए उनके दावों का क्या है सच

    कॉन्ग्रेस सांसद और नेता प्रतिपक्ष ने एक बार फिर देश के लोकतंत्र को लेकर प्रोपेगेंडा फैलाया है। उन्होंने एक लेख लिख कर चुनावों में गड़बड़ी के वह दावे दोहराए हैं, जिनका दर्जनों बार जवाब दिया जा चुका है। इसमें उन्होंने कई तथ्यों के साथ छेड़छाड़ भी की है।

    राहुल गाँधी ने यह लेख अंग्रेजी समाचार पत्र द इंडियन एक्सप्रेस में 7 जून 2025 को लिखा है। इसमें उन्होंने 2024 के महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव को ‘बड़े पैमाने पर धांधली’ का परिणाम बताने की कोशिश की है।

    इस लेख का शीर्षक ‘मैच फिक्सिंग महाराष्ट्र’ रखा गया है। राहुल गाँधी ने लेख की शुरुआत में ही महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव के नतीजे को हताश करने वाला और गैर-आधिकारिक स्रोत पर आधारित बताया। उन्होंने अपने इस लेख में जिन-जिन बिंदुओं को आधार बनाया है वास्तव में तथ्यहीन और मनगढ़ंत हैं।

    द इंडियन एक्सप्रेस ने राहुल गाँधी के इस अनर्गल प्रलाप को 5 चरणों में विस्तार से प्रकाशित किया है।

    चुनाव आयुक्तों की नियुक्ति पर फैलाया भ्रम

    लेख के पहले चरण में राहुल ने चुनाव आयुक्तों की नियुक्ति प्रक्रिया पर सवाल उठाते हुए कहा कि ‘खेल के शीर्ष प्रतियोगियों ने ही अपना अंपायर चुन लिया।’ उन्होंने भारत के मुख्य न्यायाधीश (CJI) को नियुक्ति पैनल से हटाने को लेकर भी सवाल खड़े किए।

    राहुल गाँधी यह भूल गए कि चुनाव आयुक्त की नियुक्ति हमेशा केंद्रीय मंत्रिमंडल की सिफारिश पर राष्ट्रपति के द्वारा की जाती रही है और सुप्रीम कोर्ट ने बाद में इस मामले में सरकार को कानून बनाने का आदेश दिया था।

    सरकार ने इसके लिए 2023 में ‘चुनाव आयुक्त नियुक्ति अधिनियम’ बनाया था। इसके लागू होने के बाद 2:1 के पैनल में विपक्ष के प्रतिनिधि को भी शामिल किया गया है। इससे यह स्पष्ट होता है कि सरकार में विपक्ष की अपेक्षा का भाव नहीं है। इसके बावजूद भी राहुल गाँधी द्वारा सवाल उठाया जाना लज्जाजनक है।

    जहाँ पहले चुनाव आयुक्तों की नियुक्ति में विपक्ष का 1% भी रोल नहीं था, वहीं अब उनका प्रतिनिधि इस पूरी प्रक्रिया का हिस्सा है। सरकार द्वारा चुनाव आयोग की नियुक्ति में मुख्य न्यायाधीश को हटाने का फैसला अनावश्यक न्यायिक बाधाओं को दूर करने और चुनाव प्रक्रिया को गति प्रदान करने के लिए लिया गया है।

    मतदाताओं की संख्या पर भी बोला झूठ

    राहुल गाँधी ने एक्सप्रेस को दिए अपने लेख में यह बताया कि महाराष्ट्र में 2019 के विधानसभा चुनाव में पंजीकृत मतदाताओं की संख्या 8.98 करोड़ थी जो 5 साल बाद 2024 लोकसभा चुनाव के लिए बढ़कर 9.29 करोड़ हो गई। उन्होंने प्रश्न उठाए कि 41 लाख की छलाँग 5 महीने में कैसे संभव है।

    इन प्रश्नों का जवाब दर्जनों बार चुनाव आयोग दे चुका है लेकिन फिर भी अगर हम पिछले पाँच लोकसभा और विधानसभा चुनाव के बीच मतदाताओं की संख्या के आँकड़ों पर नजर डालें तो इससे यह स्पष्ट होता है कि लोकसभा और विधानसभा चुनाव के बीच मतदाताओं की संख्या में 4% की बढ़ोतरी कई बार देखी गई है।

    वर्ष 2024 में 4.26%, 2019 में 1.31%, 2014 में 3.48%, 2009 में 4.13 और 2004 में 4.69% (2024 की वृद्धि से भी अधिक) मतदाताओं का अंतर लोकसभा और विधानसभा चुनावों में देखा गया था।इन आँकड़ों से यह स्पष्ट है कि राहुल गाँधी अपनी पार्टी के घटते आधार से खिन्न होकर कुछ भी दावे कर रहे हैं।

    मतदान प्रतिशत पर भी रिपीट किया झूठ

    राहुल गाँधी ने दावा किया कि शाम 5 बजे मतदान प्रतिशत 58.22% था जो मतदान बंद होने के बाद भी लगातार बढ़ता गया। उन्होंने 76 लाख मतदाताओं के प्रतिशत वृद्धि का भी हवाला दिया। इस मामले में राहुल गाँधी चतुराई से एक बात छुपा ले गए।

    सच्चाई है कि 5 बजे मतदाताओं की नई लाइन लगना बंद होती हैं, लेकिन जितने लोग लाइन में लग चुके होते हैं, उन्हें वोट डालने दिए जाते हैं। कई मामलों में चुनाव आयोग ने वोटिंग का समय भी बढ़ाया है। ऐसे में अंतिम आँकड़े 5 बजे के आँकड़ों से हमेशा ही अलग होंगे।

    इस मामले पर महाराष्ट्र के मुख्य निर्वाचन अधिकारी एस. चोकलिंगम ने जवाब देते हुए कहा था कि ‘तय समय के बाद भी मतदान में वृद्धि होना कोई असामान्य बात नहीं है। बल्कि यह प्रक्रियाओं पर आधारित है। महाराष्ट्र के कई शहरी और अर्ध-शहरी क्षेत्रों में लोग बड़ी संख्या में शाम को मतदान देने आते हैं इसलिए यह कोई असामान्य बात नहीं है।

    हद तो तब हो गई जब राहुल गाँधी ने अपने लेख में यह लिख दिया कि किसी भी मतदान केंद्र पर असामान्य रूप से कोई भी लंबी लाइन, कतार या भीड़भाड़ की रिपोर्ट नहीं मिली है। इसका मतलब राहुल गाँधी को यह बात रास नहीं आ रही कि लोग सहजता से आकर मतदान करके जा रहे हैं।

    चुनाव आयोग की प्रशंसा करने के बजाय राहुल गाँधी इस पर भी घिनौनी राजनीति चमका रहे हैं।

    लोकसभा-विधानसभा को एक ही तराजू से तौला

    लेख के चौथे चरण में राहुल ने आरोप लगाते हुए यह कहा कि भाजपा 2024 के विधानसभा चुनाव में 149 सीटों पर चुनाव लड़ी, जिसने 132 पर उसे जीत मिली थी। उन्होंने बताया कि पार्टी का स्ट्राइक रेट 89% रहा जबकि लोकसभा चुनाव में भाजपा का स्ट्राइक रेट केवल 32% ही था।

    राहुल गाँधी का यह दावा काफी हास्यास्पद है क्योंकि कुछ समय के अंतर पर छोड़ दीजिए, बल्कि एक ही समय पर राज्य-केंद्र के लिए वोट करने वाला मतदाता अलग-अलग पार्टी को को वोट कर सकता है। इसका सबसे बड़ा उदहारण 2019 के ओडिशा और लोकसभा चुनाव हैं।

    अगर 2019 में हुए लोकसभा और विधानसभा चुनाव की बात करें तो भारतीय जनता पार्टी को ओडिशा के लोकसभा चुनाव में 38% सीट (21 में 8) मिली थीं जबकि विधानसभा चुनाव में केवल 15.6% सीट(147 में से 23) मिली थी। राहुल ने बूथ की चुनिंदा सूची बनाने का भी आरोप लगाया।

    इस पर चुनाव आयोग उन्हें पहले ही कह चुका है कि वोटर लिस्ट की कॉपी हर चुनाव से पहले अपडेट करके कॉन्ग्रेस समेत सभी पार्टी कार्यालयों में भेजी जाती है। ऐसे में सवाल है कि राहुल ने वोटर लिस्ट की कॉपी पर चुनाव से पूर्व ही हंगामा क्यों नहीं किया?

    EVM पर संदेह जताने की पुरानी आदत से मजबूर राहुल

    राहुल गाँधी ने अपने लेख के अंतिम चरण में मतदाता सूची, वीडियोग्राफी और सीसीटीवी फुटेज को साझा करने की बात कही। जबकि भारतीय निर्वाचन आयोग के आधिकारिक पेज पर मतदाताओं की विस्तृत जानकारी सार्वजनिक रूप से पहले ही उपलब्ध है।

    राहुल ने चुनाव में धांधली का खेल चलने की आशंका भी व्यक्त की और चुनाव आयोग का भाजपा के साथ मिलीभगत बताया। राहुल गाँधी अपने ही देश की एक स्वतंत्र निकाय के ऊपर लगातार उठा रहे अपमानजनक प्रश्नों से बाज नहीं आ रहे।

    यह पहली बार नहीं है जब राहुल गाँधी ने इस तरह की तथ्यहीन और अपमानजनक बात की है। राहुल इससे पहले भी कई बार चुनाव आयोग और अन्य सरकारी एजेंसियों पर सवाल उठा चुके हैं। समझने वाली बात यह है कि राहुल का यह सवाल कान्ग्रेस पार्टी के जीतने पर नहीं उठता।

    जब लोकसभा चुनाव में भाजपा को 240 सीटें मिली जो पिछले लोकसभा चुनाव के मुकाबले कम थी तब राहुल ने इसे अपनी जीत और भाजपा की हार बताया था। झारखंड के विधानसभा चुनाव में झारखंड मुक्ति मोर्चा के साथ गठबंधन में लड़ी कॉन्ग्रेस ने जीत के बाद चुनाव आयोग पर कोई सवाल नहीं उठाया।

    दुर्भाग्य की बात है कि कांग्रेस चुनाव आयोग के दिए निर्णय पर सवाल उठने से पहले यह भूल जाती है कि ऐसा करके वह न केवल भाजपा बल्कि खुद अपनी पार्टी के हजारों नियुक्त प्रतिनिधियों को भी कटघरे में खड़ा कर रही है।

    महिला शूटर को घर बुलाकर की गंदी हरकत, विरोध करने पर जाति वाली गाली दी: इंदौर के रेपिस्ट कोच मोहसिन खान पर 8वीं FIR, पीड़िताओं के कटवा देता था कलावा; मांस खाने को करता था मजबूर

    इंदौर के ‘डर्टी कोच’ मोहसिन खान के खिलाफ अब एक और यानी कुल आठवीं एफआईआर दर्ज हो गई है। यह ताजा मामला एक राष्ट्रीय स्तर की शूटर युवती ने दर्ज कराया है, जिसने मोहसिन पर छेड़छाड़ और धमकी देने का आरोप लगाया है।

    अन्नपूर्णा रोड पर ड्रीम ओलिंपिक शूटिंग एकेडमी में रायफल शूटिंग सीखने के दौरान मोहसिन ने युवती के साथ गलत हरकतें कीं और उसे अपने घर बुलाकर भी छेड़छाड़ की। युवती के विरोध करने पर मोहसिन ने गालीगलौज की और जान से मारने की धमकी भी दी। पुलिस ने 8वीं FIR पर मामला दर्ज कर जाँच शुरू कर दी है।

    अब तक की 8 FIR और संगीन आरोप

    मोहसिन खान पर अब तक कुल 8 FIR दर्ज हो चुकी हैं, जिनमें लव जिहाद, दुष्कर्म, छेड़छाड़, ब्लैकमेलिंग, धोखाधड़ी, यौन शोषण की कोशिश, जादू-टोना और मानसिक प्रताड़ना जैसे बेहद गंभीर आरोप शामिल हैं।

    • जादू-टोना और लाखों की ठगी- 30 मई 2025 को दर्ज हुई सातवीं FIR में पीड़िता ने मोहसिन पर धोखाधड़ी और यौन शोषण की कोशिश के साथ-साथ जादू-टोना और मानसिक प्रताड़ना के आरोप लगाए थें। पीड़िता ने बताया कि मोहसिन ने उसे शूटिंग रेंज खोलने और बंदूक दिलाने का झांसा देकर लाखों की ठगी की। उसने मोहसिन पर एक महिला साधना जोहरी से मिलवाने और फार्महाउस ले जाकर 10-12 पीर बाबाओं के सामने ‘जिन्न को खुश करने के लिए दुल्हन की तरह सजने’ को कहने का भी आरोप लगाया।

    पीड़िता के अनुसार, उसे फार्म हाउस में जादू-टोना के लिए मजबूर किया गया और ध्यान केंद्रित न कर पाने पर पीरों ने कहा कि वह उनके काम की नहीं है। इसके बाद मोहसिन ने ₹20 लाख नुकसान होने की बात कही और एक अन्य युवक से संबंध बनाने का दबाव डाला।

    • बंधक बनाकर गैंगरेप- 26 मई 2025 को दर्ज हुई पाँचवी FIR में मोहसिन खान पर एक 17 वर्षीय नाबालिग को 15 दिनों तक बंधक बनाकर गैंगरेप करने का मामला है। इसमें मोहसिन के 2 दोस्त फैजान और इमरान भी सह-आरोपित हैं। पीड़िता ने मोहसिन पर प्रेस से जलाने और जादू-टोना के आरोप भी लगाए हैं।
    • कलावा उतरवाने की धमकी- जाँच में यह भी सामने आया है कि मोहसिन खान लड़कियों के हाथ से कलावा खुलवाकर उन्हें गोमांस खिलाता था। इसके बाद वह फोटो-वीडियो बना लेता था और फिर वायरल करने की धमकी देकर उन्हें अपने पास बुलाता था। फिर दुष्कर्म की कर छुप रहने की धमकी देता था।
    • पुलिस हिरासत में कबूलनामा- पुलिस हिरासत में मोहसिन खान ने 25 से 30 लड़कियों का उत्पीड़न करने की बात कबूली थी। मोहसिन ने इंदौर के अलावा कुछ अन्य जिलों में भी लड़कियों का फायदा उठाने की बात मानी है। पुलिस को उसके मोबाइल से 100 से ज्यादा अश्लील वीडियो मिले थे, जिनकी जाँच की जा रही है।

    मामले में पुलिस कमिश्नर ने जाँच के लिए 6 सदस्यीय कमेटी गठित की, जिसमें साइबर सेल के अधिकारी भी शामिल हैं। जानकारी के अनुसार मोहसिन का पूरा परिवार फरार है और पुलिस उसके मामा तथा दो बड़े भाइयों- इमरान और साजिद की तलाश कर रही है। पुलिस ने मोहसिन की एकेडमी को सील कर CCTV फुटेज भी जब्त किए थे।

    फिलिस्तीन-हमास से मोहब्बत, टाटा से नफरत… ये है भारत के इस्लामी कट्टरपंथियों की हकीकत: चला रहे हैं ‘बॉयकाट TATA’ कैंपेन, जमात-ए-इस्लामी का है हाथ

    पिछले कुछ दिनों से टाटा समूह के खिलाफ देशभर में इस्लामी कट्टरपंथी प्रदर्शन कर रहे हैं। इनका नेतृत्व इंडियन पीपुल इन सॉलिडेरिटी विद फिलिस्तीन (IPSP) नाम का एक संगठन कर रहा है। यह विरोध प्रदर्शन हमास और फिलिस्तीन समर्थक कई इस्लामी संगठनों द्वारा आयोजित किए जा रहे हैं।

    प्रदर्शनकारी टाटा समूह के इजरायल के साथ कथित व्यापारिक संबंधों का विरोध कर रहे हैं। वह टाटा समूह के उत्पादों का बहिष्कार करने की अपील कर रहे हैं। ये आंदोलन पूरे देश में अलग-अलग जगह किए जा रहे हैं और इनका उद्देश्य फिलिस्तीन का समर्थन है।

    ऐसा ही एक प्रदर्शन केरल के कालीकट में 28 मई, 2025 को जमात-ए-इस्लामी हिंद की छात्र शाखा, स्टूडेंट्स इस्लामिक ऑर्गनाइजेशन (SIO) ने टाटा के स्वामित्व वाले फैशन ब्रांड ज़ूडियो के आउटलेट के बाहर किया।

    यहाँ इन प्रदर्शनकारियों ने फिलिस्तीन के समर्थन में तख्तियाँ उठाईं, नारे लगाए और काफ़ियाह पहनकर ईद से पहले टाटा उत्पादों के बहिष्कार की अपील की।

    IPSP और SIO ने दिल्ली, पुणे, मुंबई, पटना, विशाखापट्टनम, चंडीगढ़, रोहतक और विजयवाड़ा में टाटा समूह के स्वामित्व वाले ब्रांडों के स्टोर्स के बाहर सामूहिक विरोध प्रदर्शन आयोजित किए हैं। इन प्रदर्शनों का उद्देश्य टाटा के इज़राइल से कथित संबंधों के विरोध में आवाज उठाना था। इसके अलावा फिलिस्तीन के समर्थन में इन उत्पादों का बहिष्कार करना भी था।

    SIO ने एक ऑनलाइन अभियान शुरू किया है, जिसमें मुस्लिमों से ईद के मौके पर टाटा के स्वामित्व वाले ब्रांड जैसे ज़ूडियो और वेस्टसाइड से खरीदारी न करने की अपील की गई। इसके साथ ही संगठन ने ज़ारा, एडिडास, H&M, टॉमी हिलफिगर, कैल्विन क्लेन, विक्टोरिया सीक्रेट, टॉम फोर्ड, स्केचर्स, प्राडा, डायर और शनेल जैसे अंतरराष्ट्रीय ब्रांडों के बहिष्कार करने की अपील की। इसके पीछे भी इनका इजरायली संबंध कारण बताया गया।

    हमास समर्थकों के निशाने पर क्यों है टाटा समूह?

    SIO ने टाटा समूह पर आरोप लगाया है कि वह इजरायल के साथ व्यापारिक संबंधों के ज़रिए गाजा में ‘नरसंहार को बढ़ावा’ दे रहा है। SIO कालीकट के अध्यक्ष मुहम्मद शफाक का दावा है कि टाटा समूह इजरायल को बख्तरबंद लैंड रोवर गाड़ियाँ देता है, जिनका इस्तेमाल न केवल गाजा में बल्कि ‘कश्मीर के कब्जे वाले क्षेत्रों’ में भी गश्त के लिए किया जाता है।

    शफाक ने यह भी आरोप लगाया कि टाटा की फैक्ट्रियों में बनी मिसाइलें गाजा में इजरायल द्वारा इस्तेमाल की जा रही हैं, जो एक भारतीय ब्रांड के लिए बेहद चिंताजनक है। उसने कहा कि SIO अन्याय के खिलाफ सीमाओं की परवाह किए बिना खड़ा रहता है, चाहे वह गाजा हो या अमेरिका के गोरे समुदाय के लोग ।

    ध्यान देने वाली बात यह है कि SIO ने पाकिस्तान समर्थित आतंकवादियों द्वारा पहलगाम में 26 हिंदू पर्यटकों की हत्या या भारत विरोधी तुर्की के रवैये के खिलाफ कोई बहिष्कार अभियान अभी तक नहीं चलाया है।

    टाटा और अन्य ब्रांडों के खिलाफ यह राष्ट्रव्यापी बहिष्कार अभियान इजरायल के खिलाफ शुरू किए गए BDS (बॉयकॉट, डिसइन्वेस्टमेंट और सैंक्शन) आंदोलन से प्रेरित बताया जा रहा है। यह आंदोलन यहूदी विरोधी माना जाता है।

    वैश्विक बीडीएस आंदोलन क्या है?

    मुस्लिम ब्रदरहुड, जमात और अन्य इस्लामी संगठनों द्वारा चलाया जा रहा BDS आंदोलन इजरायल के खिलाफ एक्शन की वकालत करता है। इसके तहत इजरायली उत्पादों का बहिष्कार, निवेश की वापसी और आर्थिक व राजनीतिक प्रतिबंध शामिल हैं।

    इस आंदोलन की स्थापना 2005 में कतर में जन्मे फिलिस्तीनी कार्यकर्ता उमर बरगौटी ने की थी और इसमें 100 से अधिक संगठन शामिल हैं, जिनमें आतंकवादी संगठन अल-हक़ (जो मुस्लिम ब्रदरहुड से जुड़ा है) और ‘PLFP’ शामिल हैं।

    2009 में ब्रसेल्स में इस आंदोलन के तहत फिलिस्तीन पर रसेल ट्रिब्यूनल की स्थापना की गई, जिसका उद्देश्य इजरायल के खिलाफ वैश्विक एजेंडा चलाना था। जॉर्ज सोरोस की ओपन सोसाइटी फाउंडेशन ने कथित तौर पर अल-हक़ को 2009 में 2 लाख डॉलर (लगभग ₹1.70 करोड़) और 2016 से 2020 के बीच 2 मिलियन डॉलर (लगभग ₹18 करोड़) की फंडिंग दी थी।

    भारत में कैसे आया BDS आंदोलन?

    2021 में BDS आंदोलन भारत तक तब पहुँचा जब मुस्लिम ब्रदरहुड, कतर, अल-जज़ीरा, तुर्की और पाकिस्तान ने कश्मीर मुद्दे के बहाने भारत के खिलाफ अभियान शुरू किया। इसके तहत इजरायल के खिलाफ स्थापित रसेल ट्रिब्यूनल की तर्ज पर बोस्निया में ‘कश्मीर के लिए रसेल ट्रिब्यूनल’ की स्थापना की गई।

    इसका पहला सत्र दिसंबर 2021 में सेराजेवो और हर्जेगोविना में हुआ। इसका आयोजन भारत विरोधी इस्लामी कट्टरपंथी संगठन कश्मीर सिविटास ट्रिब्यूनल, वर्ल्ड कश्मीर अवेयरनेस फोरम, इटली के परमानेंट पीपुल्स ट्रिब्यूनल और नाहला (सेंटर फॉर एजुकेशन एंड रिसर्च) एवं जाबिर बाल्कन के सहयोग से किया था।

    इसके बाद मार्च 2022 में कश्मीर सिविटास ने एक 32 पेज का टूलकिट भी जारी किया इसमें भारत के खेल, सांस्कृतिक और शैक्षणिक संस्थानों के बहिष्कार, कंपनियों पर भारत से निवेश वापस लेने और व्यापारिक संबंध खत्म करने का दबाव बनाने, भारत पर अंतरराष्ट्रीय प्रतिबंध लगाने और सैन्य समझौतों को समाप्त करने जैसी अपील शामिल थीं।

    अगस्त 2019 में मोदी सरकार द्वारा अनुच्छेद 370 को हटाए जाने के बाद AMP नाम के इस्लामी संगठन ने इस पर प्रलाप किया और इसके संस्थापक हेटम बाजियन को बाद में कश्मीर के लिए रसेल ट्रिब्यूनल में जज नियुक्त किया गया। AMP को पाकिस्तान समर्थित संगठनों ‘स्टैंड विद कश्मीर’ और ‘साउंड विजन’ से समर्थन प्राप्त है।

    यह संगठन जमात-ए-इस्लामी पाकिस्तान से कनेक्शन रखते हैं। टाटा समूह और अन्य भारतीय ब्रांडों के खिलाफ इस्लामी संगठनों द्वारा चलाया जा रहा बहिष्कार अभियान, इज़राइल विरोधी रणनीति की हूबहू नकल है। हालाँकि, इन्हें आम जनता की कोई भी सहानूभूति हासिल नहीं है।