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सिखों के 5वें गुरु की जिसने की हत्या, सैफ अली खान-करीना कपूर के दूसरे बेटे का नाम वही: ‘प्रेग्नेंसी बाइबल’ से खुलासा

सैफ अली खान और करीना कपूर ने अपने दूसरे बेटे का नाम ‘जहाँगीर (Jehangir)’ रखा है। इससे पहले करीना कपूर खान के पिता रणधीर कपूर ने बताया था कि बच्चे का नाम ‘जेह (Jeh)’ रखा गया है, लेकिन अब खुलासा हुआ है कि ‘जहाँगीर’ का ही शॉर्ट फॉर्म ‘जेह’ था। बताते चलें कि जहाँगीर एक मुग़ल आक्रांता था, जिसने सिखों के पाँचवें गुरु अर्जुन सिंह की हत्या करवाई थी। वो एक क्रूर बादशाह था।

करीना कपूर और सैफ अली खान के दूसरे बेटे की अब तक कोई तस्वीर नहीं जारी की गई है। जहाँ उनके पहले बेटे तैमूर के जन्म के समय ही उसकी तस्वीर सामने आ गई थी और उसके बाद से वो लगातार मीडिया में बने रहता है, वहीं जहाँगीर के मामले में सैफ-करीना ने सोशल मीडिया पर कोई चेहरे वाली तस्वीर नहीं डाली है। करीना कपूर ने अपने इंस्टाग्राम हैंडल पर एक तस्वीर डाली ज़रूर, लेकिन उसमें चेहरा ढक दिया गया था।

सैफ अली खान की चौथी संतान के नाम का खुलासा प्रेग्नेंसी पर आई करीना कपूर की किताब से हुआ है। ‘लाल सिंह चड्ढा’ की अभिनेत्री ने इस पुस्तक में बताया है कि किस तरह परिवार व काम के बीच उन्होंने संतुलन बिठाया। खबर के अनुसार, इसी किताब में एक तस्वीर के कैप्शन में उन्होंने अपने दूसरे बेटे को ‘जहाँगीर’ कह कर सम्बोधित किया है। सैफ-करीने के पहले बेटे के नाम को लेकर भी विवाद हो चुका है।

बता दें कि इतिहास में तैमूर एक तुर्क-मंगोल आक्रांता आक्रांता था, जिसने भारत में आकर सैकड़ों लोगों को मौत के घाट उतार दिया था और भारी लूटपाट मचाई थी। महिलाओं की इज्जत के साथ खिलवाड़ किया गया था और बच्चों तक को नहीं बख्शा गया था। इसीलिए, लोगों ने बेटे का तैमूर नाम रखने पर सैफ अली खान व करीना कपूर को आड़े हाथों लिया था। दोनों ने अपने इस फैसले का बचाव भी किया था।

करीना कपूर ने अगस्त 2020 में खुद के प्रेग्नेंट होने की घोषणा की थी। उन्होंने 21 फरवरी, 2021 को अपने दूसरे बेटे को जन्म दिया। बॉलीवुड एक्ट्रेस करीना कपूर खान की किताब ‘प्रेगनेंसी बाइबल’ के लॉन्च के बाद ईसाई संगठनों ने विरोध जताया था। ‘अल्फा ओमेगा क्रिश्चियन महासंघ’ ने शिवाजी नगर थाने में शिकायत करवाते हुए माँग की थी कि लेखक के विरुद्ध ईशनिंदा के आरोप में कार्रवाई हो।

15 साल पहले दबाव में मुस्लिम बने 3 परिवारों के 18 सदस्यों ने अपनाया हिंदू धर्म, कहा- अपना धर्म अपना ही होता है

उत्तर प्रदेश के शामली में सोमवार (9 अगस्त) को तीन मुस्लिम परिवारों ने हिंदू धर्म में वापसी की है। कांधला कस्बे के सूरज कुंड मंदिर में पहले इन परिवारों का पूजा-पाठ के साथ शुद्धिकरण किया गया, इसके बाद 18 मुस्लिमों का धर्म परिवर्तन कर उनकी घरवापसी कराई गई। घरवापसी करने वालों में 7 महिलाएँ, 4 पुरुष और 4 बच्चे शामिल हैं।

इन सभी लोगों ने हिंदू धर्म की मान्यताओं के अनुसार पूजा-अर्चना करने के बाद जनेऊ धारण किया। रिपोर्ट्स के मुताबिक, 15 साल पहले इन लोगों ने दबाव में आकर मुस्लिम धर्म को अपना लिया था, लेकिन बीतते समय के साथ इन्होंने हिंदू धर्म में वापसी का निर्णय लिया। घरवापसी के बाद इन लोगों ने अपने मुस्लिम नाम का त्याग कर हिंदू नाम रखा।

मंदिर के पुजारी यशवीर महाराज ने घरवापसी करने वाले सभी लोगों को गायत्री मंत्र का उच्चारण कराने के साथ-साथ हवन कराकर शुद्धिकरण किया। महाराज ने कहा कि जीवन में कई बार इंसान से अनजाने में गलतियाँ हो जाती हैं। उसी गलती के कारण इन सभी ने इस्लाम मजहब अपना लिया था, लेकिन आज उन्होंने फिर से हिंदू धर्म अपनाकर घरवापसी की है। इन सभी का सनातन धर्म में स्वागत है।

बता दें कि ये सभी लोग हिंदू धर्म अपनाने के बाद से बेहद खुश नजर आ रहे हैं। हिंदू धर्म अपनाकर शहजाद से विकास बने युवक ने बताया कि करीब 15 साल पहले उन्होंने मुस्लिम धर्म अपना लिया था, लेकिन आज फिर से उन्होंने हिंदू धर्म अपनाकर समाज को संदेश दिया है कि अपना धर्म अपना ही होता है।

PM मोदी को बदनाम करने के लिए TMC उपाध्यक्ष यशवंत सिन्हा ने शेयर की एडिटेड तस्वीर, सोशल मीडिया पर लोगों ने लिया आड़े-हाथ

इस साल मार्च में ममता बनर्जी की पार्टी तृणमूल कॉन्ग्रेस (टीएमसी) में शामिल हुए भाजपा के पूर्व नेता यशवंत सिन्हा ने सोशल मीडिया पर अपनी निम्न मानसिकता का परिचय दिया है। उन्होंने केंद्रीय मंत्री व पूर्व खेल मंत्री किरेन रिजूजी द्वारा टोक्यो ओलंपिक में सिल्वर मेडल जीतने वाली मीराबाई चानू को सम्मानित करने के लिए आयोजित एक कार्यक्रम के दौरान लगाए गए पोस्टर को लेकर पीएम मोदी पर निशाना साधा है। दरअसल, यशवंत सिन्हा ने वेटलिफ्टर मीराबाई चानू के पीछे लगाए गए पोस्टर की फोटो अपने ट्विटर अकाउंट पर साझा की है। इस पोस्टर में चानू को भारत के लिए पदक दिलाने में मदद करने के लिए पीएम मोदी को धन्यवाद दिया गया है।

मोदी विरोधी सिन्हा ने प्रधानमंत्री को बदनाम करने के लिए पोस्टर पर पीएम को धन्यवाद देने वाली लाइन पर ही फोकस किया है। उन्होंने फोटो के साथ लिखा, “कृपया पीछे की फोटो देखिए और जो लिखा है उसे एक बार पढ़िए। मेडल मीराबाई चानू मेहनत करके लाई हैं या मोदी जी ने।” साथ ही उन्होंने कैप्शन में लिखा, ”अगर किसी को ओलंपिक पर मेरे आखिरी ट्वीट पर कोई आपत्ति है तो इस तस्वीर की पृष्ठभूमि में क्या लिखा है कृपया उसे देखें।” सिन्हा ने इस ट्वीट में जिस ‘आखिरी ट्वीट’ का जिक्र किया, उसका मकसद भी प्रधानमंत्री का मजाक उड़ाना था।

फैक्ट चे​क

प्रेस सूचना ब्यूरो (पीआईबी) ने 27 जुलाई को वास्तविक तस्वीर शेयर की गई थी, जहाँ यह स्पष्ट रूप से दिखाई दे रहा है कि पोस्टर पर ‘धन्यवाद मोदी जी’ वाली लाइन नहीं हैं।

Source: PIB

पीआईबी ने इवेंट का एक वीडियो भी शेयर किया था, जिसमें पोस्टर साफ नजर आ रहा है।

दिलचस्प बात यह है कि 26 जुलाई को कार्यक्रम होने के बाद इंडिया टुडे ने भी इस खबर को कवर किया था। इस मीडिया हाउस ने भी टोक्यो ओलंपिक के लिए मीराबाई चानू को सम्मानित करते हुए वास्तविक पोस्टर का फोटो के रूप में इस्तेमाल किया था।

इंडिया टुडे की रिपोर्ट में यही तस्वीर है

इंडिया टुडे द्वारा 26 जुलाई को प्रकाशित रिपोर्ट की तस्वीरों को गौर से देखा जाए तो बैकग्राउंड पोस्टर पर ‘धन्यवाद मोदी जी’ का कोई संदेश नहीं दिख रहा है। इससे स्पष्ट है कि यह टीएमसी नेता की पीएम मोदी के लिए नफरत ही है, जो उन्हें बदनाम करने के लिए मॉर्फ्ड फोटो (morphed photo) का इस्तेमाल किया गया।

उसी संपादित फोटो को राष्ट्रीय लोक दल के राष्ट्रीय अध्यक्ष जयंत चौधरी ने भी साझा किया था। उन्होंने लिखा, ”पदक विजेता का अभिनंदन तो ठीक है, लेकिन ‘धन्यवाद मोदी जी मेडल दिलाने के लिए’ कुछ ज़्यादा नहीं हो गया? भक्ति, चापलूसी और प्रोपगेंडा में खिलाड़ी का अपमान तो मत करो!”

हालाँकि, दोनों में केवल यह अंतर है कि जयंत चौधरी ने अनजाने में संपादित की गई फोटो को साझा करने के लिए माफी माँगी है। वहीं, यशवंत सिन्हा ने माफी माँगने की भी जहमत नहीं उठाई।

J&K में 149 साल पुराने ‘दरबार मूव’ का अंत, प्रतिवर्ष लगभग 200 करोड़ रुपए की होगी बचत: आदेश जारी

जम्मू और कश्मीर में दरबार मूव के अफसर और कर्मचारियों को सरकारी आवास खाली करने के लिए 21 अगस्त 2021 तक का समय दिया गया है। जम्मू और कश्मीर सरकार द्वारा आज (09 अगस्त 2021) जारी किए गए आदेश के अनुसार सभी प्रशासनिक सचिवों को यह कहा गया है कि वो जम्मू और श्रीनगर में सरकारी आवास खाली करने के लिए कर्मचारियों को 7 दिन की कैजुअल लीव प्रदान करें। 149 साल पुराने इस दरबार मूव को ख़त्म करने के बाद केंद्र शासित प्रदेश को लगभग 200 करोड़ रुपए सालाना की बचत होगी।

ज्ञात हो कि जम्मू और कश्मीर सरकार के सचिव मनोज कुमार द्विवेदी के द्वारा पूर्व में 27 जुलाई 2021 को जारी किए गए आदेश में आवास खाली करने के लिए कर्मचारियों को 3 दिन की कैजुअल लीव देने का आदेश दिया गया था लेकिन अब इस आदेश में संशोधन किया गया है और कर्मचारियों को 7 दिनों की कैजुअल लीव देने के लिए कहा गया है।

क्या है दरबार मूव

दरबार मूव महाराजा रणजीत सिंह द्वारा 1872 में लागू किया गया था। इसके बाद इसे 1947 में स्वतंत्रता मिलने के बाद भी जारी रखा गया। जम्मू और कश्मीर के दो राजधानियाँ हैं, श्रीनगर जहाँ ग्रीष्मकालीन राजधानी है वहीं जम्मू शीतकालीन राजधानी। हर 6 महीने में हजारों कर्मचारियों की जम्मू और श्रीनगर में अदला-बदली की जाती थी। इसके तहत फाइलों और दूसरे सामानों को भी एक जगह दूसरी जगह ले जाया जाता था। इस प्रक्रिया में न केवल करोड़ों रुपए खर्च होते थे बल्कि सामानों की टूट-फूट भी होती थी। दरबार मूव खत्म करने से जम्मू और कश्मीर प्रशासन को प्रतिवर्ष लगभग 200 करोड़ रुपए की बचत होगी जिसका उपयोग जनकल्याणकारी कार्यों में किया जा सकेगा।

अनुच्छेद 370 और 35-A की समाप्ति के बाद से यह महत्वपूर्ण निर्णय माना जा रहा है क्योंकि ऐसा करने से प्रशासनिक दक्षता बढ़ेगी। खुद उपराज्यपाल मनोज सिन्हा ने अपने ऑफिस को पूरी तरह से ई-ऑफिस में शिफ्ट किया। इसके साथ ही अब जम्मू और कश्मीर के कर्मचारी अपनी नियुक्ति वाले स्थान से ही काम करेंगे और जरुरी काम के लिए ऑनलाइन सेवाओं का सहारा लिया जाएगा। प्रशासनिक विभागों द्वारा सभी दस्तावेजों को ऑनलाइन करने का काम किया जा रहा है।

शहजादा सलीम ने जयपुर के जैन और शिव मंदिर से चुराई बहुमूल्य अष्टधातु की मूर्तियाँ, कूड़ा बीनने के दौरान करता था रेकी

राजस्थान की राजधानी जयपुर में दिगम्बर जैन मंदिर और शिव मंदिर में चोरी करने वाले शहजादा सलीम को पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया है। उसने मंदिर से अष्टधातु से बनी 7 प्रतिमाएँ, 3 किलोग्राम चाँदी के बर्तन और अन्य बहुमूल्य सामानों की चोरी की थी।

सुबह जब श्रद्धालु मंदिर में पूजा-अर्चना करने पहुँचे तब वारदात का पता चला। दरअसल, मंदिर में कहीं और से घुसने की जगह नहीं देखकर शहजादा ने नजदीक खड़े एक ऑटोरिक्शा से पेचकस निकाला और मंदिर के दरवाजों पर लगी कुंडी और तालों को उखाड़ दिया। गलियों में कचरा बीनने का काम करने वाले शहजादा सलीम ने रात में लगभग 3 बजे इस वारदात को अंजाम दिया। इसके बाद वह पड़ोस के एक शिव मंदिर में घुस गया और वहाँ भी चोरी की।

डीसीपी (नॉर्थ) परिस देशमुख ने बताया कि आरोपित शहजादा गलतागेट इलाके के पास स्थित गुलजार कॉलोनी के पास रहता है। शहजादा एक आदतन चोर है, जो कचरा बीनने के बहाने घरों की रेकी करता है और मौका मिलने पर चोरी करता है। रविवार (08 अगस्त 2021) को घटना का पता चलने के बाद पुलिस ने इलाके की सीसीटीवी फुटेज की जाँच की। फुटेज में दिख रहे शख्स के हुलिये जैसा एक व्यक्ति के दिल्ली रोड पर खड़ा होने की सूचना मुखबिर ने पुलिस को दी। इसके बाद पुलिस टीम ने आरोपित को गिरफ्तार कर लिया। शहजादा के पास से 5 मूर्तियाँ बरामद कर ली गई हैं। चुराए गए बाकी सामान को भी बरामद करने की कोशिश की जा रही है।

दैनिक भास्कर की रिपोर्ट के मुताबिक एडिशनल डीसीपी सुमित गुप्ता ने बताया कि शनिवार (07 अगस्त 2021) को शहजादा पानी पीने के बहाने मंदिर में घुसा था, तभी उसकी नजर इन मूर्तियों पर पड़ी थी। इसके बाद उसने इन्हें चुराने की योजना बनाई थी। शहजादा सलीम के साथ पुलिस ने चोरी की गई मूर्तियाँ खरीदने वाले कबाड़ी राहुल सिंधी को भी गिरफ्तार किया है। गौरतलब है कि इस घटना के पहले भी पिछले 2-3 महीनों में शहर के प्रमुख जैन मंदिरों में चोरी की घटनाएँ हो चुकी हैं।

शर्लिन ने कुंद्रा को लेकर मुंबई पुलिस के सामने खोले कई अंतरंग राज, अन्य पीड़ितों से भी आपबीती साझा करने को कहा

राज कुंद्रा के पोर्नोग्राफी मामले में गिरफ्तार होने के बाद से एक्ट्रेस शर्लिन चोपड़ा एक के बाद एक कई चौंकाने वाले खुलासे कर रही हैं। उन्होंने बताया कि पिछले हफ्ते इस मामले को लेकर मुंबई क्राइम ब्रांच की टीम ने उनसे 8 घंटे पूछताछ की थी।

पुलिस ने राज कुंद्रा के खिलाफ उनकी शिकायत के बारे में उनसे क्या पूछा। इस सवाल के जवाब में एक्ट्रेस ने मीडिया से कहा, “मैंने अप्रैल 2021 में जुहू पुलिस स्टेशन में राज कुंद्रा के खिलाफ शिकायत दर्ज की थी। पुलिस अधिकारियों ने मुझे मामले से संबंधित पूछताछ के संबंध में बुलाया था। उन्होंने मुझसे राज कुंद्रा की अन्य कंपनियों जैसे हॉटशॉट, बॉलीफेम के बारे में पूछा।”

उन्होंने कहा कि इसके अलावा पुलिस ने मुझसे पूछा कि मेरे राज कुंद्रा के साथ क्या संबंध हैं? राज कुंद्रा कितनी बार मेरे घर पर आए, उनके मेरे घर पर आने का कारण और उस दौरान आप दोनों के बीच क्या बातचीत हुई थी। एक्ट्रेस ने कहा कि उस दौरान मैंने जाँच अधिकारियों के सामने राज कुंद्रा और उनकी कंपनियों से जुड़ी वो सभी जानकारियाँ रखी जो मेरे पास थी।

चोपड़ा ने आगे बताया कि उन्होंने पुलिस अधिकारियों से कहा था कि अगर वे इस मामले में उनसे कोई और सवाल पूछना चाहते हैं तो बिना किसी हिचकिचाहट के उनसे संपर्क कर सकते हैं। उन्होंने पोर्नोग्राफी रैकेट के अन्य पीड़ितों से भी आगे आने और पुलिस के साथ अपनी आपबीती साझा करने का आग्रह किया।

हाल ही में शर्लिन ने मीडिया से बातचीत के दौरान खुलासा किया था कि राज कुंद्रा उनसे काम से जुड़ी मीटिंग के लिए 5 स्टार होटल जेडब्ल्यू मैरियट (JW Marriott) में मिलते थे। उन्होंने कहा कि मैंने 26 मार्च 2019 को कुंद्रा की आर्म्सप्राइम कंपनी के साथ एक कॉन्ट्रेक्ट किया था। कॉन्ट्रेक्ट पर साइन करने से चार दिन पहले, यानी 22 मार्च 2019 को चोपड़ा ने कुंद्रा से जुहू में जेडब्ल्यू मैरियट होटल में मुलाकात की थी।

बता दें कि शर्लिन ने पुलिस को बताया था कि उन्होंने आर्म्सप्राइम नामक कंपनी के साथ कॉन्ट्रेक्ट पर हस्ताक्षर किए थे फिर वीडियोज बनाने लगी थीं। उनका कहना था कि शुरुआत में ये ग्लैमरस वीडियो थी, लेकिन उसके बाद ये बोल्ड फिल्में बनने लगीं और बाद में उन्हें सेमी न्यूड और न्यूड वीडियोज बनाने पड़े। बकौल शर्लिन चोपड़ा, उन्हें हमेशा कहा जाता था कि इसमें कुछ गलत नहीं है, क्योंकि सभी ऐसा ही करते हैं। शर्लिन ने बताया था कि राज कुंद्रा 27 मार्च 2019 को उनके घर आया था और उनसे जबरदस्ती करने लगा, जबकि वो इसके लिए मना करती रहीं।

पटना HC के जज की कहानी: जब मस्जिद से लाउडस्पीकर हटाने का आदेश पड़ा था भारी, कट्टरपंथियों के खौफ से रातों-रात कराया ट्रांसफर

हाल ही में पटना में हाईकोर्ट की नई बिल्डिंग के उत्तरी भाग के नजदीक बन रहे 4 मंजिला ‘वक्फ भवन’ को ध्वस्त करने का आदेश उच्च न्यायालय में 4:1 के जजमेंट के साथ पास किया गया। ऐसा ही एक मामला सन् 2005 में आया था, जब हाईकोर्ट के पास स्थित मस्जिद में लाउडस्पीकर के उपयोग को एक निश्चित समय के दौरान रोकने का आदेश पारित करने वाले जज को मुस्लिमों के तीव्र विरोध के चलते बिहार से अपना ट्रांसफर कराना पड़ा था।

पटना में हाईकोर्ट से सटी हुई मस्जिद में कोर्ट की कार्यवाही के दौरान लाउडस्पीकर का उपयोग किए जाने के संबंध में तत्कालीन जज, जस्टिस आरएस गर्ग ने नाराजगी जाहिर की थी और DM सुधीर कुमार एवं SSP एनएच खान को यह सुनिश्चित करने के लिए कहा था कि मस्जिद की अजान से कोर्ट की कार्यवाही बाधित न हो। जस्टिस गर्ग ने तब कहा था कि लाउडस्पीकर से दी जाने वाली अजान के कारण उन्हें सुनवाई में बाधा होती है। उन्होंने कहा था कि मस्जिद पर लगे लाउडस्पीकर से अजान देना पटना हाईकोर्ट द्वारा दिए गए निर्देशों का उल्लंघन है।

तब न्यायमूर्ति गर्ग ने कहा था, “मस्जिद प्रबंध समिति के सदस्य सत्ता के करीबी होने के कारण खुद को विशेषाधिकार प्राप्त मानते हैं और अदालत के आदेशों का उल्लंघन करने की धृष्टता करते हैं। अदालत अपने आदेशों की अवहेलना करने वाले किसी भी व्यक्ति को नहीं छोड़ेगी।”

जस्टिस गर्ग द्वारा जिले के प्रमुख अधिकारियों समेत मस्जिद की प्रबंधन समिति के सदस्यों को आदेशित किए जाने के बाद पुलिस ने मस्जिद के इमाम और 3 अन्य लोगों को गिरफ्तार कर लिया था और लाउडस्पीकर को भी जब्त कर लिया था। हालाँकि, जस्टिस गर्ग के इस आदेश के बाद मुस्लिम समुदाय के लोग काफी नाराज हो गए थे और सड़क पर उतरकर उन्होंने इस फैसले के खिलाफ प्रदर्शन किया था। कई मुस्लिमों ने आदेश पारित करने वाले जस्टिस गर्ग को राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) का आदमी कहा था।

इस प्रदर्शन के कारण जस्टिस गर्ग ने अपना ट्रांसफर बिहार से बाहर कराने की अर्जी सुप्रीम कोर्ट को दी थी। जस्टिस गर्ग की अर्जी पर विचार करते हुए तत्कालीन राष्ट्रपति एपीजे अब्दुल कलाम ने उनका ट्रांसफर पटना से गुजरात हाईकोर्ट कर दिया था। जस्टिस गर्ग ने तब कहा था, “इन प्रदर्शनों से सार्वजनिक तौर पर मेरी छवि खराब हुई है, ऐसे में मैं पटना में काम नहीं कर सकता। यही कारण है कि मैंने अपने ट्रांसफर का आवेदन किया है।”

ज्ञात हो कि पटना में हाईकोर्ट की बिल्डिंग के पास बने ‘वक्फ भवन’ के मामले में जस्टिस अश्विन कुमार सिंह, विकास जैन, अहसानुद्दीन अमानुल्लाह, राजेंद्र कुमार मिश्रा और चक्रधारी शरण सिंह की विशेष पीठ ने सुनवाई की थी। मामले की सुनवाई में पीठ के चार जजों ने हाईकोर्ट के पास बने निर्माण को हटाने के पक्ष में फैसला दिया, जबकि अहसानुद्दीन अमानुल्लाह ने इस मामले में अपनी असहमति जताई और निर्माण को बस नियम विरुद्ध बताया और उसे अवैध मानने से इंकार कर दिया।

नीरज चोपड़ा से छिन जाएगा गोल्ड मेडल? गलत निशाने पर लगा था भाला, पावरफुल लोगों ने की शिकायत

भारत के छोरे ने टोक्यो में लठ गेर दी भाई! पूरी दुनिया में डंका बजा दिओ भाले से। ऋतिक रोशन जैसे लंबे बाल में छोरा सेक्सी भी लागे हे। हँसी एकदम गोविंदा सी हे, ताकत धर्मेंद्र सी।

सोशल मीडिया पर कुछ ऐसा ही चल रहा है। लड़कियों के कुछ पोस्ट असंसदीय भाषा (अश्लील कैटिगरी भी कह सकते हैं) वाले भी देखे गए। इसमें गलत कुछ भी नहीं। लड़का जवान है, विपरीत लिंग वाला है और सबसे बड़ी बात – Why should boys have all the fun?

खैर! सोशल मीडिया पर ही एक खबर और दिख गई। खबर भारत के लिए बुरी हो सकती है। खबर के पीछे पावरफुल लोगों का हाथ बताया गया है। शीर्षक था – गलत निशाने के बाद भी नीरज चोपड़ा को क्यों मिला गोल्ड मेडल? खबर के भीतर था – ओलंपिक वालों से कर दी गई है शिकायत।

नीरज चोपड़ा मेरा कोई नहीं। मेरा राज्य भी अलग है, जाति भी। लेकिन… खबर के कारण मेरी नींद उड़ गई है। क्यों? क्योंकि मैं भारतीय हूँ। खबर के कारण मेरा चैन खो गया है। क्यों? क्योंकि जिन लोगों (पावरफुल) ने ओलंपिक वालों के पास शिकायत की है, वो इंडिया के ही हैं। कैसे भारतीय हैं, आप सोच सकते हैं!

OK. काम की बात करते हैं। नीरज ने जैवलिन फेंका। ओलंपिक वालों ने देखा। गोल्ड मेडल दिया। कोई बवाल नहीं। लेकिन एक चूक कर दी ओलंपिक वालों ने। चूक जो इन पावरफुल इंडियंस ने नहीं की। पूरे स्टेडियम से सिर्फ एक एंगल से लिया गया वीडियो ओलंपिक वालों को भेजा। क्यों? क्योंकि इसी एक एंगल से नीरज का जैवलिन गलत जगह घुसता वीडियो में साफ-साफ दिख गया।

ऊपर का वीडियो अगर देख चुके तो समझिए कि दर्द कितना हो रहा होगा। इंडियन हों या पाकिस्तानी… गलत जगह भाला चला जाए तो दर्द होना लाजिमी है। लिबरल, वामपंथी, मोदी-विरोधी आदि कह कर उनके दर्द को कम मत आँकिए। प्लीज!

और हाँ! नीरज चोपड़ा मोदी या देश (जिसे हम भारत कहते हैं, पावरफुल लोग इंडिया) का समर्थक हो सकता है, लेकिन उसे जैवलिन फेंकने पर ध्यान देना चाहिए था। ये जो समय-समय पर उसने ट्वीट फेंका था, शास्त्रों में उसे ही दिशाभटकम भाला कहा गया है, यह बिना वजह बतकुच्चन करने वालों के अंदर कहीं भी-कभी भी घुस जाता है।

कर्नाटक में ‘इंदिरा कैंटीन’ को ‘अन्नपूर्णेश्वरी कैंटीन’ करने की उठी माँग, लगभग ‘रो’ रहे कॉन्ग्रेसी नेता

खेल रत्न अवार्ड को गाँधी परिवार के सदस्य, पूर्व प्रधानमंत्री और कॉन्ग्रेस नेता राजीव गाँधी के नाम पर दिया जाता था लेकिन 06 अगस्त 2021 को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने घोषणा की कि अब इस पुरस्कार को भारत के हॉकी के महान खिलाड़ी मेजर ध्यानचंद के नाम पर दिया जाएगा। हालाँकि जहाँ एक ओर पूरे देश में इस फैसले का स्वागत किया गया वहीं इस पर राजनीति भी शुरू हो चुकी है। ताजा मामला कर्नाटक के पूर्व मुख्यमंत्री और कॉन्ग्रेस नेता सिद्धारमैया का है जिन्होंने एक और योजना का नाम बदले जाने की संभावना पर भाजपा पर प्रतिशोध की राजनीति करने का आरोप लगाया है।

दरअसल, भाजपा के राष्ट्रीय महासचिव सीटी रवि ने 07 अगस्त 2021 को कर्नाटक के मुख्यमंत्री बीएस बोम्मई को ट्विटर पर टैग करते हुए यह माँग की थी कि कर्नाटक में चलने वाली ‘इंदिरा कैंटीन’ के नाम को बदलकर ‘अन्नपूर्णेश्वरी कैंटीन’ किया जाए। रवि ने अपने ट्वीट में आगे लिखा था कि इसका कोई कारण नहीं दिखता कि कर्नाटक के लोग खाना खाते समय आपातकाल के उन काले दिनों को याद करें।

रवि की इस माँग पर प्रतिक्रिया देते हुए सिद्धारमैया ने कहा कि इंदिरा कैंटीन के नाम को बदलने की बात करना कुछ और नहीं बल्कि भाजपा द्वारा की जा रही प्रतिशोध की राजनीति है। उन्होंने यह भी कहा कि भाजपा के नेतृत्व के नाम पर कई कार्यक्रम हैं ऐसे में क्या कभी उन्होंने इन नामों को बदलने की कोशिश की? सिद्धारमैया ने कहा कि खेल रत्न में राजीव गाँधी का नाम था, ऐसे में वह (भाजपा) इसे क्यों बदलना चाहते थे? साथ ही उन्होंने पीएम मोदी से इस मुद्दे पर जवाब माँगा है।

वहीं दूसरी ओर शिवसेना के वरिष्ठ नेता और राज्यसभा सांसद संजय राउत ने इस मुद्दे पर कहा कि राजीव गाँधी के द्वारा दिए गए बलिदान का अपमान किए बिना भी मेजर ध्यानचंद को सम्मान दिया जा सकता था। शिवसेना के मुखपत्र सामना में लिखते हुए राउत ने कहा कि राजीव गाँधी खेल रत्न अवार्ड को मेजर ध्यानचंद खेल रत्न अवार्ड किया जाना एक ‘राजनैतिक दाँव’ है न कि लोगों की इच्छा के अनुरूप लिया गया फैसला।

ज्ञात हो कि केंद्र की मोदी सरकार ने शुक्रवार (6 अगस्त 2021) को खेल रत्न पुरस्कार मेजर ध्यानचंद के नाम पर दिए जाने का फैसला किया। प्रधानमंत्री ने ट्वीट कर कहा था, “मेजर ध्यानचंद के नाम पर खेल रत्न पुरस्कार का नाम रखने के लिए देशभर से नागरिकों का अनुरोध मिले हैं। मैं उनके विचारों के लिए उनका धन्यवाद करता हूँ। उनकी भावना का सम्मान करते हुए, खेल रत्न पुरस्कार को मेजर ध्यानचंद खेल रत्न पुरस्कार कहा जाएगा! जय हिंद!”

शिल्पा और उनकी माँ सुनंदा से UP पुलिस पूछताछ करने पहुँची मुंबई, पति पोर्नोग्राफी मामले में पहले से जेल में

बॉलीवुड अभिनेत्री शिल्पा शेट्टी की मुश्किलें बढ़ती ही जा रही हैं। पोर्नोग्राफी मामले में पति राज कुंद्रा के गिरफ्तार होने के बाद अब शिल्पा और उनकी माँ सुनंदा शेट्टी पर धोखाधड़ी का आरोप लगा है। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, शिल्पा और सुनंदा शेट्टी पर आयोसिस वेलनेस सेंटर के नाम पर लोगों से करोड़ों रुपये की ठगी करने का आरोप है।

दोनों के खिलाफ लखनऊ के हजरतगंज और विभूतिखंड थाने में एफआईआर दर्ज कराई गई थी। धोखाधड़ी के मामले में शिल्पा और उनकी माँ सुनंदा से पूछताछ करने के लिए लखनऊ पुलिस की एक टीम मुंबई पहुँच गई है। वहीं, दूसरी टीम भी जल्दी मुंबई पहुँचेगी और दोनों से पूछताछ करेगी।

शिल्पा शेट्टी और उनकी माँ पर आरोप है कि आयोसिस स्लिमिंग स्किन सैलून और स्पा वेलनेस सेंटर की ब्रांच लखनऊ में खोलने के नाम पर माँ-बेटी ने दो लोगों से करोड़ों रुपए की ठगी की है। एक्ट्रेस और उनकी माँ ने करोड़ों रुपए लेने के बाद भी अपना कमिटमेंट पूरा नहीं किया है। बताया जा रहा है कि न तो शिल्पा ब्रांच की ओपनिंग के दौरान वहाँ पहुँचीं और न ही उनकी कंपनी के लोगों ने कोई मदद की।

इस मामले में विभूतिखंड थाने में ओमेक्स हाइट्स निवासी ज्योत्सना चौहान और हजरतगंज थाने में रोहित वीर सिंह ने शिल्पा शेट्टी और उनकी माँ के खिलाफ ठगी का मुकदमा दर्ज कराया था। इस संबंध में हजरतगंज पुलिस ने एक महीने पहले उन्हें नोटिस भी भेजा था, लेकिन दोनों की तरफ से कोई जवाब नहीं दिया गया। वहीं, विभूतिखंड पुलिस की टीम भी नोटिस का जवाब लेने के लिए मुम्बई पहुँच चुकी है। जाँच में दोनों की भूमिका स्पष्ट होने पर उन्हें गिरफ्तार किया जा सकता है।

बता दें कि शिल्पा शेट्टी आयोसिस वेलनेस नाम से एक फिटनेस चेन चलाती हैं। इस कंपनी की अध्यक्ष शिल्पा शेट्टी हैं, जबकि उनकी माँ सुनंदा इसकी निदेशक हैं।