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अब अफगानिस्तान में फँसे सिखों की चिंता, तब CAA का किया था विरोध: कॉन्ग्रेसी जयवीर शेरगिल के भीतर का ‘जिम्मेदार सिख’

कॉन्ग्रेस पार्टी के राष्ट्रीय प्रवक्ता जयवीर शेरगिल ने खुद को ‘सिख समुदाय का एक जिम्मेदार भारतीय नागरिक’ बताते हुए अफगानिस्तान से 650 सिखों व 50 हिन्दुओं को सुरक्षित निकाले जाने के लिए केंद्रीय विदेश मंत्रालय को पत्र लिखा है। ये अलग बात है कि वो अपनी पार्टी के अध्यक्ष सोनिया गाँधी को पत्र लिख कर कभी ये नहीं कह पाएँ कि वो नागरिकता संशोधन कानून (CAA) का समर्थन करें।

CAA क्या है? इसके तहत दिसंबर 2014 से पहले भारत आए पाकिस्तान, अफगानिस्तान और बांग्लादेश के सिखों, हिन्दुओं, बौद्ध, जैन, पारसी और ईसाई समुदाय के प्रताड़ित लोगों को नागरिकता देने का प्रावधान है। ये तीनों ही इस्लामी देश हैं, जो अल्पसंख्यकों के साथ क्रूरता के लिए कुख्यात हैं। पाकिस्तान में हिन्दू व सिख महिलाएँ सुरक्षित नहीं। बांग्लादेश में आए दिन मंदिर तोड़े जाते हैं। अफगानिस्तान में अल्पसंख्यकों को समूह में ही मार गिराया जाता रहा है।

ऐसे में जयवीर के भीतर का सिख तब नहीं जागा, जब भारत सरकार CAA लेकर आई थी। उनके अंदर का सिख तब क्या ‘गैर-जिम्मेदार’ हो गया था? अब खुद को भारतीय नागरिक बता कर केंद्रीय विदेश मंत्रालय से 650 सिखों के लिए स्पेशल वीजा की व्यवस्था की गुहार लगा रहे जयवीर शेरगिल की माँग एकदम उचित है, लेकिन वो और उनकी पार्टी ही इसके मार्ग में अक्सर रोड़े अटकाती रही है।

आइए, थोड़ा पीछे चलते हैं। 16 दिसंबर, 2019 को। शाहीन बाग़ के उपद्रवियों का उत्पात चरम पर था। देश भर में कई शाहीन बाग़ बना कर भड़काऊ भाषणबाजी हो रही थी। दिल्ली दंगों की स्क्रिप्ट रची ही जा रही थी। कॉन्ग्रेस माहौल का मजा लूट रही थी। उस दिन 10:03 में जयवीर शेरगिल का ट्वीट आता है – ‘CAB = Communal Atom Bomb’, जिसका अर्थ है – ‘नागरिकता संशोधन विधेयक = सांप्रदायिक परमाणु बम।’

बता दें कि CAA ही जब कानून न होकर बिल हुआ करता था तो इसे CAB कहते थे, क्योंकि तब ये संसद के दोनों सदनों में पास नहीं हुआ था। इसलिए, इस CAA और CAB को एक ही समझा जाए। यानी, जब केंद्र सरकार प्रताड़ित अल्पसंख्यकों के लिए संरक्षण की व्यवस्था कर रही थी, तब यही जयवीर शेरगिल अपनी पार्टी के सुर में सुर मिला कर इसका तगड़ा विरोध करने में लगे थे। अब उनके अंदर का सिख जाग गया है।

वो ‘सिख समुदाय का एक जिम्मेदार भारतीय नागरिक’ तब कहलाते, जब वो कॉन्ग्रेस अध्यक्ष सोनिया गाँधी को पत्र लिख कर कहते कि चूँकि ये मामला प्रताड़ित अल्पसंख्यकों को अधिकार देने से जुड़ा है, दलितों को धर्मांतरण व महिलाओं को क्रूरता से बचाने से जुड़ा है, इसीलिए वो इसका विरोध न करें। लेकिन अफ़सोस, इस्लामी मुल्कों से प्रताड़ना सह कर आए इन्हीं सिखों व हिन्दुओं के लिए तब उनकी आवाज़ नहीं निकली।

निकली भी तो विरोध में। पंजाब के जालंधर से आने वाले जयवीर शेरगिल तब मीडिया के माध्यम से CAA के खिलाफ प्रोपेगंडा फैलाने में लगे थे। तब उन्होंने ‘द हिन्दू’ में एक लेख लिखा था, जिसका शीर्षक ही था – ‘बिना सोचे-समझे लिया गया निर्णय’। उनका कहना था कि केंद्र सरकार के इस निर्णय से उत्तर-पूर्व में अशांति या गई है। उन्होंने CAA को भारत की विदेश नीति की भारी गलतियों में से एक करार दिया था।

उन्होंने CAA को एक ‘संकीर्ण निर्णय’ बताते हुए लिखा था कि इसकी वजह से भारत को दुनिया भर में संदेह की दृष्टि से देखा जाएगा। भारत सरकार को इसे लेकर काफी सफाई देनी पड़ेगी। उन्होंने भारत की ‘विविधता और समावेशी’ चरित्र की बात करते हुए बात करते हुए कहा था कि ऐसे निर्णयों से निवेशकों का विश्वास देश में डिगेगा। उन्होंने इसे ‘चुने हुए देशों के शरणार्थियों के लिए मजहब आधारित कानून’ करार दिया था।

अब? अब उन्हें पता चल है कि भारत का हिन्दू या सिख होने के कारण अफगानिस्तान जैसे मुल्कों में तालिबान जैसे इस्लामी आतंकी संगठन उन्हें निशाना बनाते हैं? उन्होंने अपने पत्र में 2018 की एक घटना का जिक्र किया है। तब जलालाबाद में हुए आत्मघाती आतंकी हमले में 19 हिन्दुओं व सिखों को मार डाला गया था। ये सब राष्ट्रपति अशरफ गनी से मिलने जा रहे थे। मृतकों में अवतार सिंह खालसा चुनावी उम्मीदवार भी थे।

इसका सीधा मतलब है कि अफगानिस्तान में अल्पसंख्यकों के साथ क्रूर बर्ताव व उनके नरसंहार की घटनाओं से जयवीर शेरगिल अनजान नहीं थे, लेकिन फिर भी उन्होंने तब अपनी पार्टी के स्टैन्ड को आगे बढ़ाना उचित समझा। आज जब अफगानिस्तान में 650 सिख फँसे हुए हैं तो उन्हें ये घटनाएँ याद आ रही हैं। उनकी नौकरी जाने व आय की चिंता हो रही है। सिख समाज के लिए उनका प्रेम उमड़ आया है।

ये कैसा दोहरा रवैया है कि एक तरफ वो केंद्रीय विदेश मंत्रालय को पत्र लिख कर कहते हैं कि भारतीय मूल के अल्पसंख्यक तालिबानी आतंकियों के लिए आसान निशाना होते हैं, जबकि दूसरी तरफ वो इन्हीं अल्पसंख्यकों के लिए लाए गए कानून का बढ़-चढ़ कर विरोध करते हैं? 2018 की घटना का जिक्र बताता है कि इसके बावजूद उन्होंने 2019-20 में CAA का विरोध किया और इन्हीं अल्पसंख्यकों को अधिकारी मिलने की राह में रोड़े अटकाए।

उनके पास अब भी समय है। ‘सिख समुदाय से तालुक रखने वाले एक जिम्मेदार भारतीय नागरिक’ होने के नाते वो राहुल गाँधी और सोनिया गाँधी को पत्र लिख कर कह सकते हैं कि वो NRC की राह में रोड़े अटकाने बंद करें। वरना अगर असम में जब नॉन-मुस्लिमों के साथ अत्याचार की खबरें आएँगी और उनमें सिख भी होंगे, तब फिर वो केन्द्रीय गृह मंत्रालय को पत्र लिख कर कहेंगे कि अवैध घुसपैठियों के खिलाफ कार्रवाई की जाए।

राहुल गाँधी असम में NRC विरोधी गमछा पहन कर जाते हैं, ‘No CAA’ वाला रूमाल दिखाते हैं और रैली में कहते हैं कि अगर उनकी सरकार आई तो वो CAA को लागू ही नहीं होने देंगे। इस पर जयवीर शेरगिल चूँ तक नहीं करते। उनके ही पंजाब के मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह ने भी कहा था कि वो किसी भी कीमत पर पंजाब में CAA को लागू नहीं करने देंगे। पार्टी में, अपने आसपास चल रहे इन बयानों से शेरगिल अनजान थे, ये पचने वाली बात नहीं है।

बताते चलें कि जयवीर शेरगिल ने इस पत्र में ध्यान दिलाया है कि अमेरिका की सेना की वापसी के बाद तालिबान बंदूक की नोंक पर अफगानिस्तान को अपने कब्जे में लेने के लिए युद्ध कर रहा है। एक बार फिर से अफगानिस्तान के आतंकी चंगुल में जाने की आशंका है। उन्होंने अफगानिस्तान में हुई हालिया हिंसा की भीषण घटनाओं की तरफ ध्यान आकृष्ट कराते हुए कहा कि ये मानवता के लिए संकट पैदा करने वाली समस्या है।

PM किसान सम्मान निधि की 9वीं किस्त जारी, 9.75 करोड़ किसानों के खाते में भेजे गए ₹19,509 करोड़: प्रधानमंत्री ने किसानों से कही ये बात

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सोमवार (9 अगस्त 2021) को पीएम किसान सम्मान निधि (PM-KISAN) की 9वीं किस्त जारी कर दी है। 9वीं किस्त में 9.5 करोड़ किसानों के खाते में 19, 509 करोड़ रुपए ट्रांस्फर किए गए

पीएम ने इस मौके पर किसानों को वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए संबोधित करते हुए बुवाई के मौसम पर बात की। उन्होंने उम्मीद जताई कि पीएम-किसान की नौवीं किस्त के तहत किसानों को जो राशि मिलेगी उससे उनकी मदद हो पाएगी।

पीएम मोदी ने बताया कि सरकार ने खरीफ हो या रबी सीजन, किसानों से MSP पर अब तक की सबसे अधिक खरीद की है। इससे धान किसानों के खातों में लगभग 1 लाख 70 हजार करोड़ रुपए और गेहूँ किसानों के खाते में लगभग 85 हजार करोड़ रुपए डायरेक्ट पहुँचे हैं।

उन्होंने कहा कि कृषि नीतियों में छोटे किसानों को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जा रही है। इसी भावना के साथ छोटे किसानों को सुविधा और सुरक्षा देने का एक गंभीर प्रयास किया जा रहा है। पीएम किसान सम्मान निधि के तहत अब तक 1 लाख 60 हजार करोड़ रुपए किसानों को दिए गए हैं।

वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए संबोधित करते हुए पीएम ने जानकारी दी कि कोरोना काल में ही 2 करोड़ से अधिक किसान क्रेडिट कार्ड जारी किए गए हैं, जिसमें से अधिकतर छोटे किसानों के लिए हैं। उन्होंने कहा, “कल्पना कीजिए कि ये मदद अगर किसानों को न मिलती, तो 100 वर्ष की इस सबसे बड़ी आपदा में उनकी क्या स्थिति होती।”

प्रधानमंत्री मोदी ने बताया कि राष्ट्रीय खाद्य तेल मिशन-ऑयल पाम यानि NMEO-OP के माध्यम से खाने के तेल से जुड़े इकोसिस्टम पर 11,000 करोड़ रुपए से अधिक का निवेश किया जाएगा। आज भारत कृषि निर्यात के मामले में पहली बार दुनिया के टॉप-10 देशों में पहुँचा है।

उन्होंने बताया कि जम्मू-कश्मीर का केसर विश्व प्रसिद्ध है। सरकार ने ये फैसला लिया है कि जम्मू-कश्मीर का केसर देशभर में नाफेड की दुकानों पर उपलब्ध होगा। इससे जम्मू-कश्मीर में केसर की खेती को बहुत प्रोत्साहन मिलने वाला है।

देश की आजादी पर पीएम ने बात रखते हुए कहा, “इस बार देश अपना 75वाँ स्वतंत्रता दिवस मनाने जा रहा है। ये महत्वपूर्ण पड़ाव हमारे लिए गौरव का तो है ही, ये नए संकल्पों, नए लक्ष्यों का भी अवसर है। इस अवसर पर हमें तय करना है कि आने वाले 25 वर्षों में हम भारत को कहाँ देखना चाहते हैं।”

वह बोले, “देश जब आजादी के 100 वर्ष पूरे करेगा, 2047 में तब भारत की स्थिति क्या होगी, ये तय करने में हमारी खेती, हमारे किसानों की बहुत बड़ी भूमिका है। ये समय भारत की कृषि को एक ऐसी दिशा देने का है, जो नई चुनौतियों का सामना कर सके और नए अवसरों का लाभ उठा सके।”

संबोधन के दौरान पीएम मोदी ने याद दिलाया कि किस तरह कुछ समय पहले देश में दालों की कमी हो गई थी और उन्होंने इसके उत्पादन को बढ़ाने का आग्रह किया था। वह बताते हैं कि उस आग्रह का परिणाम आज 6 साल बाद ये है कि दाल उत्पादन में 50 फीसद वृद्धि हुई है।

J&K में आतंकियों ने भाजपा सरपंच और उनकी पत्नी पर बरसाईं ताबड़तोड़ गोलियाँ, अस्पताल ले जाते हुए दोनों की मौत

जम्मू-कश्मीर में सोमवार (9 अगस्त) को दिनदहाड़े आतंकवादियों ने एक भाजपा सरपंच और उनकी पत्नी की गोली मारकर हत्या कर दी। यह घटना दक्षिण कश्मीर के अनंतनाग जिले के लाल चौक इलाके की है। यहां आतंकवादियों ने भाजपा सरपंच गुलाम रसूल और उसकी पत्नी पर ताबड़तोड़ गोलियाँ बरसाईं, जिसकी वजह से दोनों की मौत हो गई।

इस घटना के संबंध में एक अधिकारी ने बताया कि अनंतनाग के लाल चौक इलाके में आतंकियों ने रेडवानी बाला के भाजपा सरपंच गुलाम रसूल और उनकी पत्नी पर अंधाधुन फायरिंग की, जिसके बाद दोनों गंभीर रूप से घायल हो गए। इसके बाद इलाज के लिए नजदीकी अस्पताल में ले जाते पति-पत्नी दोनों ने रास्ते में ही दम तोड़ दिया।

अधिकारी ने बताया कि भाजपा सरपंच और उनकी पत्नी के हत्यारों को पकड़ने के लिए इलाके की घेराबंदी कर दी गई है। साथ ही हमलावरों को पकड़ने के लिए तलाशी अभियान चलाया जा रहा है।

जम्मू-कश्मीर भाजपा के प्रवक्ता अल्ताफ ठाकुर ने भाजपा नेता और उनकी पत्नी की हत्या की निंदा की है। ठाकुर ने कहा कि निर्दोष लोगों पर हमला और उनकी हत्या आतंकियों की हताशा को दर्शाता है। कुलगाम जिले के रेडवानी गांव के रहने वाले सरपंच गुलाम रसूल डार कुलगाम भाजपा किसान मोर्चा के अध्यक्ष भी थे। बीते साल उन्होंने जिला विकास परिषद का चुनाव भी लड़ा था, लेकिन उन्हें हार का सामना करना पड़ा था।

बता दें कि 8 जुलाई 2021 को भी उत्तरी कश्मीर के बांडीपोरा जिला में आतंकियों ने भाजपा की प्रदेश कार्यकारिणी के सदस्य और पूर्व जिला प्रधान शेख वसीम उर्फ वसीम बारी, उनके भाई उमर सुल्तान और पिता बशीर शेख की गोलियों से भूनकर हत्या कर दी थी। उमर भाजपा की जिला युवा इकाई का सदस्य थे, जबकि उनके पिता बशीर शेख भाजपा के जिला उपाध्यक्ष रह चुके थे।

पाकिस्तान ने पंजाब में ड्रोन से गिराए RDX व हैंड ग्रेनेड, टिफिन बम जैसे हथियार: 15 अगस्त से पहले पुलिस ने किया आतंकी साजिश नाकाम

15 अगस्त से पहले पाकिस्‍तान ने सीमा पर फिर नापाक हरकत की है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, पाकिस्तान ने ड्रोन से पंजाब में अमृतसर के बॉर्डर क्षेत्र के गाँव डालेके में दो किलो आरडीएक्‍स (RDX) से भरा टिफिन बम फेंका है। हालाँकि, गाँव वालों की मुस्तैदी के कारण एक बड़ा हादसा होने से टल गया है। बताया जा रहा है कि इस बम से पंजाब में स्‍वतंत्रता दिवस के दिन बड़ा धमाका करने की साजिश थी। इसके बाद से पुलिस व सुरक्षा एजेंसियाँ सतर्क हो गई हैं।

पंजाब के डीजीपी दिनकर गुप्ता ने सोमवार (9 अगस्त) को प्रेस कॉन्फ्रेंस में बताया, ”अमृतसर में रविवार (8 अगस्त) शाम को बॉर्डर क्षेत्र के गाँव से हैंड ग्रेनेड और टिफिन बॉक्स में IED और कारतूस बरामद हुए हैं।” उन्होंने बताया कि बच्चों के टिफिन बॉक्स में IED बम फिट किया गया था। डीजीपी ने कहा कि इसे ड्रोन के माध्यम से बैग में भेजा गया था, जिसमें हथियारों का जखीरा था। इसमें 5 हैंड ग्रेनेड, 100 9mm कारतूस और टिफिन बम मिले हैं।

पंजाब डीजीपी ने कहा कि आतंक की एक बड़ी साजिश को नाकाम कर दिया गया है। हम इस मामले में एनआईए और बीएसएफ जैसी केंद्रीय एजेंसियों की मदद ली जा रही है। गुप्ता ने पंजाब के लोगों से यात्रा के समय सार्वजनिक परिवहन का इस्तेमाल करते हुए विशेष सावधानी बरतने और कोई संदिग्ध वस्तु दिखने पर पुलिस को सूचित करने का आदेश दिया है। इसके साथ ही डीजीपी दिनकर गुप्ता ने यह भी कहा कि पिछले कुछ दिनों से सिख फॉर जस्टिस की तरफ से भी लगातार मुख्यमंत्री और राज्यपाल को जो धमकी दी जा रही है, उसकी भी जाँच की जा रही है। फिलहाल प्रदेश भर में हाई अलर्ट जारी कर दिया गया है। पुलिस हर एंगल से जाँच में जुट गई है।

नीरज चोपड़ा का बिहार कनेक्शन, जमुई के ‘सुदामा’ के लिए ‘कृष्ण’ बने भारत के गोल्डन बॉय, हैं कई जैवलिन प्लेयर्स के आदर्श

हाल ही में संपन्न हुए टोक्यो ओलंपिक में ट्रैक एंड फील्ड अर्थात एथलेटिक्स इवेंट्स में भारत को पहली बार गोल्ड मेडल दिलाने वाले जैवलिन थ्रोअर नीरज चोपड़ा वैसे तो हरियाणा के पानीपत के रहने वाले हैं, लेकिन उनका एक अनोखा संबंध बिहार के जमुई से भी है, जहाँ वो कभी गए भी नहीं।

पूरे बिहार में सबसे अधिक जैवलिन थ्रोअर की संख्या जमुई में ही है। यहाँ कई ऐसे जैवलिन थ्रोअर हैं, जो जूनियर प्रतियोगिताओं में मेडल जीत चुके हैं। इन्हीं में से एक हैं, जमुई के ही रहने वाले ‘सुदामा’ कुमार यादव, जो गोल्ड मेडल विजेता नीरज को अपना ‘कृष्ण’ मानते हैं। 2019 में जब सुदामा घायल हुए थे तब उन्हें सहायता मिलने में कठिनाई आ रही थी, ऐसे में नीरज ने उनकी न केवल सहायता की बल्कि उन्हें दोबारा भाला पकड़ने के लिए प्रेरित भी किया।

कर्नाटक के इंस्पायर इंस्टीट्यूट ऑफ स्पोर्ट्स में प्रशिक्षण हासिल कर रहे सुदामा ने दैनिक जागरण से बातचीत करते हुए नीरज से अपने खास संबंध के बारे चर्चा की। दरअसल, हॉन्गकॉन्ग में 2019 में आयोजित यूथ एशियन चैंपियनशिप के दौरान सुदामा घायल हो गए थे और उनके लिगामेंट में समस्या आ गई थी। सुदामा के ऐसे कठिन समय में आगे आए नीरज चोपड़ा, जिन्होंने उनकी सहायता की और उन्हें दोबारा जैवलिन थ्रो में बेहतर करने के लिए प्रोत्साहित भी किया। हालाँकि, पिछली कुछ रिपोर्ट्स के अनुसार, बॉलीवुड अभिनेता सोनू सूद ने भी सुदामा की मदद करने का वादा किया था।

सुदामा ने कहा कि जमुई के जैवलिन थ्रो के खिलाडियों को यदि बेहतर सुविधाएँ मिलें तो वो भी कई राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में मेडल जीत सकते हैं। सुदामा खुद 2018 में अंडर-18 एज ग्रुप में वर्ल्ड की नंबर एक रैंकिंग हासिल कर चुके हैं। हॉन्गकॉन्ग में 2019 में आयोजित यूथ एशियन चैंपियनशिप में चोट के बावजूद उन्होंने 75.80 मीटर भाला फेंका था। जमुई की ही अंजनी कुमारी और मीनू सोरेन भी नीरज को अपना आदर्श मानती हैं। अंजनी अब तक 11 तो मीनू 9 मेडल जीत चुकी हैं। वहीं, जमुई के ही आशुतोष कुमार सिंह भाला फेंक में 21 मेडल जीत चुके हैं।

ज्ञात हो कि 07 अगस्त 2021 को भारत के स्टार जैवलिन थ्रोअर नीरज चोपड़ा ने इतिहास रचते हुए टोक्यो ओलंपिक में देश को पहला गोल्ड मेडल दिलाया था। ट्रैक एंड फील्ड अर्थात एथलेटिक्स इवेंट्स में ओलंपिक के इतिहास में यह भारत का पहला गोल्ड मेडल था। हरियाणा के एक छोटे से गाँव से निकलकर भारत के लिए ओलंपिक जैसे खेल में मेडल जीतने वाले नीरज चोपड़ा आज देश के कई युवा खिलाडियों के लिए प्रेरणास्तोत्र बन चुके हैं।

आंध्र प्रदेश: पद्मनाभा स्वामी मंदिर में तोड़ी गई भगवान गणेश और माँ सरस्वती की मूर्ति, कीमती सामान सुरक्षित

आंध्र प्रदेश के श्रीकाकुलम (Srikakulam) जिले के जालुमुरु मंडल के कराकावलसा गाँव के पद्मनाभा स्वामी मंदिर में अज्ञात बदमाशों द्वारा देवी-देवताओं की मूर्ति तोड़ने का मामला उजागर हुआ है। घटना कुछ दिन पहले घटित हुई थी। लेकिन इसके बारे में रविवार (अगस्त 8, 2021) को मालूम हुआ। पुलिस ने बताया कि मंदिर के बाहर रखी सरस्वती देवी और भगवान गणेश की मूर्ति को क्षतिग्रस्त किया गया है।

पुलिस ने बताया कि मंदिर में श्रद्धालु साल में एक दिन संक्रांति त्योहार के लिए इकट्ठा होते हैं। मंदिर पहाड़ों पर है इसलिए आम दिनों में वहाँ केवल पुजारी लोग जाते हैं। ये काम लूटपाट करने वालों ने नहीं किया क्योंकि मंदिर की कोई भी कीमती चीज गायब नहीं हुई है। पुलिस उपाधीक्षक एम महेंद्र ने बताया कि मंदिर के पुजारी और समिति के सदस्यों की ओर से पुलिस को शिकायत मिली है।

पुलिस उपाधीक्षक महेंद्र ने कहा, “हमने मंदिर का दौरा किया और पाया कि मंदिर के बाहर कुछ मूर्तियों को तोड़ा गया था। हमने इस साल जनवरी में मंदिर प्रबंधन को सीसीटीवी कैमरे लगाने के लिए नोटिस जारी किया था। लेकिन सीसीटीवी कैमरे नहीं लग पाए। हमने मामला दर्ज कर लिया है और जाँच जारी है।”

अब इस मामले को ट्विटर पर शेयर करके आंध्र प्रदेश सरकार पर सवाल उठाया जा रहा है। लोग ट्वीट कर पूछ रहे हैं कि आखिर ईसाइयों के सीएम के राज में क्या उम्मीद की जाए। ट्वीट में एक यूजर लिखती हैं, “श्रीकाकुलम में सरस्वती माँ की मूर्ति को तोड़ा गया। आप इसके अलावा क्या उम्मीद करते हुए ईसाइयों के सीएम राज से? शर्म करो जगन मोहन रेड्डी, तुम्हारी सरकार ने हिंदू मंदिरों से सैंकड़ों रुपए लूटे और अब तुम उन्हें प्रोटेक्शन भी नहीं दे पा रहे।”

उल्लेखनीय है कि हिंदू मंदिर में तोड़फोड़ का एक ऐसा ही मामला बांग्लादेश से भी आया था। वहाँ अल्पसंख्यक हिंदुओं के मंदिरों को निशाना बनाया गया था। शनिवार (7 अगस्त) को बांग्लादेश में कुछ कट्टरपंथियों ने अल्पसंख्यक हिंदू समुदाय के कई घरों, दुकानों पर हमला किया था और चार मंदिरों में तोड़फोड़ की थी। यह घटना बांग्लादेश के खुलना जिले के रूपशा उपजिला के शियाली गाँव में हुई थी।

‘भड़काऊ नारेबाजी करने वाले हमारे लोग नहीं, कड़ी कार्रवाई कीजिए’: वायरल वीडियो पर अश्विनी उपाध्याय का दिल्ली पुलिस को पत्र

दिल्ली पुलिस ने जंतर-मंतर पर विरोध प्रदर्शन के दौरान भड़काऊ नारेबाजी के आरोप के मामले में FIR दर्ज की है। ये विरोध प्रदर्शन रविवार (8 अगस्त, 2021) को हुआ था। पुलिस ने IPC (भारतीय दंड संहिता) की धारा-153A (विभिन्न समुदायों के बीच वैमनस्य को बढ़ावा देना) के तहत मामला दर्ज किया है। अंग्रेजों के जमाने के कानूनों को ख़त्म करने की माँग करते हुए उक्त विरोध प्रदर्शन का आयोजन किया गया था।

दिल्ली पुलिस का कहना है कि रैली निकालने के लिए आयोजकों ने पुलिस से अनुमति नहीं ली थी, इसीलिए पुलिस द्वारा FIR में IPC की धारा-188 (जानबूझ कर प्रशासन द्वारा जारी किए गए आदेश की अवहेलना करना) और कोरोना दिशानिर्देशों के उल्लंघन के लिए आपदा प्रबन्धन अधिनियम, 2005 (DDMA Act) की धारा-51 भी लगाई गई है। इस रैली का आयोजन सुप्रीम कोर्ट के अधिवक्ता अश्विनी उपाध्याय ने किया था।

अश्विनी उपाध्याय ने दिल्ली पुलिस को जानकारी दी है कि इस रैली में कुछ असामाजिक तत्व घुस गए थे, जिन्होंने इस कार्यक्रम को बदनाम करने की कोशिश की है। उन्होंने बताया कि वो दोपहर 12:15 बजे ही कार्यक्रम स्थल से निकल गए थे। नई दिल्ली जिले के DCP दीपक यादव ने बताया कि मामला दर्ज करने के बाद जाँच की जा रही है। इस रैली में सैकड़ों लोग शामिल थे। मुस्लिम विरोधी नारेबाजी का भी आरोप है।

‘भारत जोड़ो आंदोलन’ की मीडिया प्रभारी शिप्रा श्रीवास्तव ने बताया कि ये विरोध प्रदर्शन अंग्रेजों के जमाने के उन कानूनों को लेकर था, जिनका इस्तेमाल कर के ब्रिटिश भारतीयों पर अत्याचार करते थे। उन्होंने कहा कि चूँकि ये कानून अभी भी मौजूद हैं, इसीलिए इस विरोध प्रदर्शन में ‘यूनिफॉर्म सिविल कोड’ की माँग की गई, ताकि देश में सभी नागरिकों के लिए समान कानून हो। उन्होंने बताया कि उन्हें किसी भड़काऊ नारेबाजी की जानकारी नहीं है।

उन्होंने कहा कि जिस रैली में 5000 लोग थे, अगर वहाँ किसी कोने में 5-6 लोगों ने कुछ आपत्तिजनक नारेबाजी कर भी दी तो हम इससे खुद को अलग करते हैं। दिल्ली पुलिस का कहना है कि यहाँ और भी बड़ी संख्या में लोग आने वाले थे। अश्विनी उपाध्याय ने इससे खुद को अलग करते हुए दिल्ली पुलिस से निवेदन किया कि वो वीडियो के समय, जगह और प्रमाणिकता की जाँच करे। साथ ही उन्होंने वीडियो में आपत्तिजनक नारेबाजी कर रहे लोगों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की माँग की।

हालाँकि, अश्विनी उपाध्याय ने ये भी कहा कि जो लोग इस वीडियो को उनके नाम पर शेयर कर के फैला रहे हैं, उनके खिलाफ भी मानहानि का मुकदमा दर्ज किया जाना चाहिए। अश्विनी उपाध्याय दिल्ली भाजपा के प्रवक्ता भी रहे हैं। उन्होंने दिल्ली पुलिस कमिश्नर को लिखित शिकायत देकर मजहबी उन्माद फ़ैलाने वालों के खिलाफ कार्रवाई का निवेदन किया है। उन्होंने कहा कि जब तक 1860 की IPC, 1861 का पुलिस एक्ट और 1872 का एविडेंस एक्ट लागू रहेगा, मजहबी उन्माद काबू में नहीं आएगा।

उन्होंने दिल्ली पुलिस को भेजे गए पत्र में लिखा है, “सोशल मीडिया में एक वीडियो वायरल हो रहा है जिसमें एक व्यक्ति उन्मादी भाषण दे रहा है। कुछ लोग मुझे बदनाम करने के लिए मेरा नाम लेकर यह वीडियो ट्विटर फेसबुक और व्हाट्सएप्प पर शेयर कर रहे हैं जबकि वीडियो में दिख रहे लोगों को न तो मैं जानता हूँ, न तो इनमें से किसी से मिला हूँ और न तो इन्हें बुलाया गया था। कानून बहुत ही घटिया और कमजोर है इसीलिए प्रसिद्धि पाने के लिए भी कई बार लोग उन्मादी वीडियो जारी करते हैं।”

‘हिम्मत कैसे हुई मुझे काटने की’: जहरीले साँप ने बुजुर्ग को काटा तो गुस्से में उसने साँप को चबा डाला, दुस्साहस पड़ा भारी

बिहार के नालंदा जिले से एक अनोखा मामला सामने आया है। शराब के नशे में धुत एक बुजुर्ग को साँप ने डंस लिया तो गुस्‍साए बुजुर्ग ने उसे चबा डाला। हालाँकि, 1 दिन बाद 65 वर्षीय बुजुर्ग की भी मौत हो गई। बताया जा रहा है कि मृतक का नाम रामा महतो है। वह नालंदा के चंडी थाना क्षेत्र के माधोपुर डीह गाँव का रहने वाला था।

रिपोर्ट्स के मुताबिक, रामा महतो नाम का शख्स शनिवार (7 अगस्त) को रात करीब आठ बजे अपने घर के दरवाजे पर बैठा था। उसी दौरान करैत साँप का एक बच्चा (संपोला) ने आया और उसे डंस लिया। बुजुर्ग को यह बात बहुत नागवार गुजरी और उसने संपोले को पकड़कर चबा डाला।

पुलिस ने बताया कि कि जिस समय साँप ने बुजुर्ग को काटा, उस दौरान वह शराब के नशे था। महतो ने अंजाम की परवाह किए बिना साँप को पकड़ लिया और कहा, “तुम्हारी हिम्मत कैसे हुई मुझे काटने की। तुम मुझे काटे हो, मैं भी तुम्हें काटूँगा।” यह कहते हुए बुजुर्ग साँप को चबाने लगा। इसके बाद महतो ने साँप को चबा-चबाकर तो मार डाला। चबाने के दौरान साँप ने बुजुर्ग को कई जगह और काट लिया।

बुजुर्ग यहीं नहीं रूका उसने अंत में मरे हुए साँप को अपने घर के पास एक पेड़ की टहनी पर टांग दिया और सोने चला गया। इस दौरान ​परिवार और आस-पास के लोगों ने उसे इलाज कराने की सलाह दी, लेकिन उसने टाल दिया। बुजुर्ग ने कहा कि वो साँप का बच्चा था, इसलिए उसे जहर नहीं चढ़ेगा। अगले दिन यानी रविवार सुबह को परिवार के लोगों ने महतो को अचेत देखा। उसके बाद उसे आनन-फानन में अस्पताल ले गए, जहाँ डॉक्टरों ने बुजुर्ग को मृत घोषित कर दिया। थाना पुलिस ने सर्पदंश से मौत की एफआइआर दर्ज कर ली है।

‘शरजील भाई धमकी दो’: NDTV के बाद Times Now और HT की रिपोर्ट में मुस्लिम का फोटो, लोग ले रहे मजे

कोरोना वायरस से सम्बंधित खबर में फीचर इमेज में एक मुस्लिम व्यक्ति की फोटो लगाए जाने के बाद NDTV को इस्लामी चरमपंथियों की धमकी मिलनी शुरू हुई और अंततः NDTV को अपना ट्वीट डिलीट करना ही पड़ा। इसके बाद आज (09 अगस्त 2021) Times Now के द्वारा भी पिछले 24 घंटों में भारत में मिलने वाले संक्रमण के मामलों से सम्बंधित खबर प्रकाशित की गई और उसमें फीचर इमेज के तौर पर एक मुस्लिम महिला का फोटो उपयोग किया गया।

ज्ञात हो कि शुक्रवार (6 अगस्त, 2021) को आई NDTV की खबर में बताया गया था कि भारत में पिछले 1 दिन के मुकाबले कोरोना के 4% ज्यादा मामले आए हैं और नए मामलों की संख्या 44,643 है। जिस प्रकार हर खबर के साथ तस्वीर होती है, जो प्रतीकात्मक भी हो सकती है। इस खबर के साथ भी एक व्यक्ति (मुस्लिम) की तस्वीर थी, जो कोरोना टेस्ट करा रहा था। इस्लामी चरमपंथियों ने इसे मुस्लिमों को बदनाम करने की साजिश करार दिया और पूछा कि आखिर कोरोना की खबर में मुस्लिम व्यक्ति की तस्वीर क्यों लगाई गई?

खुद को इस्लामी एक्टिविस्ट कहने वाले शरजील उस्मानी भी धमकी पर उतर आया। उन्होंने सीधा यही सवाल पूछा कि आखिर वो कौन सा एम्प्लॉय है, जिसने NDTV में इस तरह की तस्वीर के प्रयोग करने का निर्णय लिया? साथ ही उसने NDTV के कर्मचारियों से कहा कि वो मैसेज भेज कर गुप्त रूप से बता सकते हैं कि किसने ऐसा किया है। इसके बाद NDTV ने ट्वीट डिलीट कर दिया।

Times Now के अलावा हिंदुस्तान टाइम्स ने भी पटना में Covid-19 टीकाकरण से सम्बंधित कार्यक्रम में एक मुस्लिम महिला का फोटो उपयोग किया था लेकिन संभवतः विवाद होने की संभावना के चलते ट्विटर पर पोस्ट की गई रिपोर्ट का फोटो बदल दिया गया है हालाँकि हिंदुस्तान टाइम्स की वेब रिपोर्ट में अभी भी मुस्लिम महिला का फोटो ही है।

अब Times Now द्वारा प्रकाशित Covid-19 से जुड़ी खबर भी सोशल मीडिया में चर्चा का विषय बनी हुई है। कई यूजर Times Now की तारीफ कर रहे हैं, साथ ही अधिकांश यूजर शरजील उस्मानी को याद कर रहे हैं जिसने NDTV को धमकी दी थी। हाल ही में चर्चा में रहे The Skin Doctor ने प्रतिक्रिया देते हुए व्यंग्यात्मक रूप से पूछा कि Times Now में ऐसा कौन है जिसने रिपोर्ट के साथ ऐसी फोटो का उपयोग करने का निर्णय लिया।

कई मीडिया संस्थान शायद इसीलिए मौलानाओं द्वारा किए गए अपराधों में भी पुजारियों व साधु-संतों की प्रतीकात्मक तस्वीर डाल देते हैं, फकीरों को तांत्रिक बताते हैं, क्योंकि हिन्दू सहिष्णु हैं। अपना अपमान होते हुए देख कर भी हिन्दू सिर्फ विरोध भर ही करते हैं। सहिष्णु हिन्दुओं के विरोध पर ‘कड़ा जवाब’ देकर लिबरल गिरोह के पत्रकार खुद को ‘शेर’ दिखाते हैं। लेकिन, इस्लामी चरमपंथियों के आगे इनके पास ‘भीगी बिल्ली’ बनने के अलावा कोई चारा नहीं रहता।

‘टाइट कपड़े’ पहनने पर तालिबान ने लड़की को भूना: इलाके पर कब्जा करते ही मस्जिदों से ऐलान- ‘सरकारी कर्मचारी अपनी पत्नियों को सौंप दें’

अफगानिस्तान में तालिबानी आतंकियों का आतंक दिन प्रतिदिन बढ़ता जा रहा है। तालिबान के इस्लामी आतंकी क्रूरता की सारी हदें पार करते हुए निर्दोष लोगों को भी मार रहे हैं। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, तालिबान ने एक 21 वर्षीय लड़की की हत्या सिर्फ इसलिए कर दी, क्योंकि उसने टाइट कपड़े पहने थे और उसके साथ कोई पुरुष रिश्तेदार नहीं था। बताया जा रहा है कि अफगानिस्तान से अमेरिकी सैनिकों की वापसी के बाद से तालिबानी आतंकी बेगुनाह लोगों को जबरन घरों से बाहर निकालकर मार रहे हैं। उन्होंने जिन इलाकों पर कब्जा कर लिया है, वहाँ शरियत कानून लागू करते हुए महिलाओं के अकेले घर से बाहर निकलने पर प्रतिबंध लगा दिया है।

रिपोर्ट के मुताबिक, यह घटना उत्तरी बल्ख प्रांत के समर कांदियान के एक गाँव की है। इस गाँव पर तालिबानी आतंकवादियों का पूरी तरह से कब्जा है। बल्ख के पुलिस प्रवक्ता आदिल शाह आदिल ने रेडियो आज़ादी को बताया कि 3 अगस्त को आतंकियों ने 21 साल की लड़की नाजनीन की गोली मार कर हत्या कर दी थी।

उन्होंने आगे बताया कि लड़की अपने घर से बल्ख की राजधानी मजार-ए-शरीफ जा रही थी। जैसे ही वह घर से निकलकर गाड़ी में बैठने जा रही, तभी आतंकियों ने गोलियों से भूनकर उसकी हत्या कर दी। पुलिस का कहना है कि लड़की ने उस समय बुर्का पहना हुआ था। वहीं, तालिबानियों ने इन आरोपों को खारिज कर दिया है। तालिबान के प्रवक्ता जबीहुल्ला मुजाहिद ने इस बात से इनकार किया कि उनकी ओर से किसी भी हमले को अंजाम नहीं दिया गया है।

मालूम हो कि तालिबान ने अपने 1996-2001 के क्रूर शासन के दौरान लड़कियों को स्कूल जाने के अधिकार से वंचित रखा था। साथ ही महिलाओं को घर से बाहर काम करने की अनुमति भी नहीं थी।

उस समय महिलाओं को बुर्का पहनना पड़ता था और बाहर जाते समय उनके साथ पुरुष परिजन या किसी पुरुष रिश्तेदार का साथ होना जरूरी होता था। वहीं, उस समय व्यभिचार (adultery) के आरोपितों को सार्वजनिक रूप से पत्थर मार-मार कर मार डाला जाता था।

जैसे-जैसे तालिबान का कब्जा अफगानिस्तान में बढ़ता जा रहा है, वैसे-वैसे उनका लड़कियों और महिलाओं पर अत्याचार भी बढ़ रहा है। तालिबानी आतंकी अफगानिस्तान की लड़कियों और महिलाओं का अपहरण कर रहे हैं और जबरन उनसे निकाह कर रहे हैं।

द सन की रिपोर्ट के मुताबिक, तालिबान ने अपने कब्जे वाले अफगानिस्तान के क्षेत्र के नेताओं को 15 वर्ष से अधिक उम्र की लड़कियों और 45 वर्ष से कम उम्र की विधवाओं की लिस्ट जारी करने का आदेश दिया है। एक मीडिया रिपोर्ट में दावा किया गया है कि तालिबान जैसे ही किसी नए इलाके या शहर पर कब्जा करता है, वैसे ही मस्जिदों से पुलिसकर्मियों और सरकारी कर्मचारियों की पत्नियों और विधवाओं को उन्हें सौंपने का ऐलान करता है।

बता दें कि अफगानिस्तान से अमेरिकी सैनिकों के वापस लौटने के बावजूद अमेरिका लगातार अफगान सेना की मदद कर रहा है। रविवार को अफगानिस्तान के रक्षा मंत्रालय के प्रवक्ता फवाद अमान ने ट्वीट कर जानकारी दी कि उन्होंने पिछले 24 घंटों के दौरान 572 तालिबानी आतंकवादियों को मार गिराया और 309 अन्य को घायल कर दिया है।