Home Blog Page 3513

J&K में 149 साल पुराने ‘दरबार मूव’ का अंत, प्रतिवर्ष लगभग 200 करोड़ रुपए की होगी बचत: आदेश जारी

जम्मू और कश्मीर में दरबार मूव के अफसर और कर्मचारियों को सरकारी आवास खाली करने के लिए 21 अगस्त 2021 तक का समय दिया गया है। जम्मू और कश्मीर सरकार द्वारा आज (09 अगस्त 2021) जारी किए गए आदेश के अनुसार सभी प्रशासनिक सचिवों को यह कहा गया है कि वो जम्मू और श्रीनगर में सरकारी आवास खाली करने के लिए कर्मचारियों को 7 दिन की कैजुअल लीव प्रदान करें। 149 साल पुराने इस दरबार मूव को ख़त्म करने के बाद केंद्र शासित प्रदेश को लगभग 200 करोड़ रुपए सालाना की बचत होगी।

ज्ञात हो कि जम्मू और कश्मीर सरकार के सचिव मनोज कुमार द्विवेदी के द्वारा पूर्व में 27 जुलाई 2021 को जारी किए गए आदेश में आवास खाली करने के लिए कर्मचारियों को 3 दिन की कैजुअल लीव देने का आदेश दिया गया था लेकिन अब इस आदेश में संशोधन किया गया है और कर्मचारियों को 7 दिनों की कैजुअल लीव देने के लिए कहा गया है।

क्या है दरबार मूव

दरबार मूव महाराजा रणजीत सिंह द्वारा 1872 में लागू किया गया था। इसके बाद इसे 1947 में स्वतंत्रता मिलने के बाद भी जारी रखा गया। जम्मू और कश्मीर के दो राजधानियाँ हैं, श्रीनगर जहाँ ग्रीष्मकालीन राजधानी है वहीं जम्मू शीतकालीन राजधानी। हर 6 महीने में हजारों कर्मचारियों की जम्मू और श्रीनगर में अदला-बदली की जाती थी। इसके तहत फाइलों और दूसरे सामानों को भी एक जगह दूसरी जगह ले जाया जाता था। इस प्रक्रिया में न केवल करोड़ों रुपए खर्च होते थे बल्कि सामानों की टूट-फूट भी होती थी। दरबार मूव खत्म करने से जम्मू और कश्मीर प्रशासन को प्रतिवर्ष लगभग 200 करोड़ रुपए की बचत होगी जिसका उपयोग जनकल्याणकारी कार्यों में किया जा सकेगा।

अनुच्छेद 370 और 35-A की समाप्ति के बाद से यह महत्वपूर्ण निर्णय माना जा रहा है क्योंकि ऐसा करने से प्रशासनिक दक्षता बढ़ेगी। खुद उपराज्यपाल मनोज सिन्हा ने अपने ऑफिस को पूरी तरह से ई-ऑफिस में शिफ्ट किया। इसके साथ ही अब जम्मू और कश्मीर के कर्मचारी अपनी नियुक्ति वाले स्थान से ही काम करेंगे और जरुरी काम के लिए ऑनलाइन सेवाओं का सहारा लिया जाएगा। प्रशासनिक विभागों द्वारा सभी दस्तावेजों को ऑनलाइन करने का काम किया जा रहा है।

शहजादा सलीम ने जयपुर के जैन और शिव मंदिर से चुराई बहुमूल्य अष्टधातु की मूर्तियाँ, कूड़ा बीनने के दौरान करता था रेकी

राजस्थान की राजधानी जयपुर में दिगम्बर जैन मंदिर और शिव मंदिर में चोरी करने वाले शहजादा सलीम को पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया है। उसने मंदिर से अष्टधातु से बनी 7 प्रतिमाएँ, 3 किलोग्राम चाँदी के बर्तन और अन्य बहुमूल्य सामानों की चोरी की थी।

सुबह जब श्रद्धालु मंदिर में पूजा-अर्चना करने पहुँचे तब वारदात का पता चला। दरअसल, मंदिर में कहीं और से घुसने की जगह नहीं देखकर शहजादा ने नजदीक खड़े एक ऑटोरिक्शा से पेचकस निकाला और मंदिर के दरवाजों पर लगी कुंडी और तालों को उखाड़ दिया। गलियों में कचरा बीनने का काम करने वाले शहजादा सलीम ने रात में लगभग 3 बजे इस वारदात को अंजाम दिया। इसके बाद वह पड़ोस के एक शिव मंदिर में घुस गया और वहाँ भी चोरी की।

डीसीपी (नॉर्थ) परिस देशमुख ने बताया कि आरोपित शहजादा गलतागेट इलाके के पास स्थित गुलजार कॉलोनी के पास रहता है। शहजादा एक आदतन चोर है, जो कचरा बीनने के बहाने घरों की रेकी करता है और मौका मिलने पर चोरी करता है। रविवार (08 अगस्त 2021) को घटना का पता चलने के बाद पुलिस ने इलाके की सीसीटीवी फुटेज की जाँच की। फुटेज में दिख रहे शख्स के हुलिये जैसा एक व्यक्ति के दिल्ली रोड पर खड़ा होने की सूचना मुखबिर ने पुलिस को दी। इसके बाद पुलिस टीम ने आरोपित को गिरफ्तार कर लिया। शहजादा के पास से 5 मूर्तियाँ बरामद कर ली गई हैं। चुराए गए बाकी सामान को भी बरामद करने की कोशिश की जा रही है।

दैनिक भास्कर की रिपोर्ट के मुताबिक एडिशनल डीसीपी सुमित गुप्ता ने बताया कि शनिवार (07 अगस्त 2021) को शहजादा पानी पीने के बहाने मंदिर में घुसा था, तभी उसकी नजर इन मूर्तियों पर पड़ी थी। इसके बाद उसने इन्हें चुराने की योजना बनाई थी। शहजादा सलीम के साथ पुलिस ने चोरी की गई मूर्तियाँ खरीदने वाले कबाड़ी राहुल सिंधी को भी गिरफ्तार किया है। गौरतलब है कि इस घटना के पहले भी पिछले 2-3 महीनों में शहर के प्रमुख जैन मंदिरों में चोरी की घटनाएँ हो चुकी हैं।

शर्लिन ने कुंद्रा को लेकर मुंबई पुलिस के सामने खोले कई अंतरंग राज, अन्य पीड़ितों से भी आपबीती साझा करने को कहा

राज कुंद्रा के पोर्नोग्राफी मामले में गिरफ्तार होने के बाद से एक्ट्रेस शर्लिन चोपड़ा एक के बाद एक कई चौंकाने वाले खुलासे कर रही हैं। उन्होंने बताया कि पिछले हफ्ते इस मामले को लेकर मुंबई क्राइम ब्रांच की टीम ने उनसे 8 घंटे पूछताछ की थी।

पुलिस ने राज कुंद्रा के खिलाफ उनकी शिकायत के बारे में उनसे क्या पूछा। इस सवाल के जवाब में एक्ट्रेस ने मीडिया से कहा, “मैंने अप्रैल 2021 में जुहू पुलिस स्टेशन में राज कुंद्रा के खिलाफ शिकायत दर्ज की थी। पुलिस अधिकारियों ने मुझे मामले से संबंधित पूछताछ के संबंध में बुलाया था। उन्होंने मुझसे राज कुंद्रा की अन्य कंपनियों जैसे हॉटशॉट, बॉलीफेम के बारे में पूछा।”

उन्होंने कहा कि इसके अलावा पुलिस ने मुझसे पूछा कि मेरे राज कुंद्रा के साथ क्या संबंध हैं? राज कुंद्रा कितनी बार मेरे घर पर आए, उनके मेरे घर पर आने का कारण और उस दौरान आप दोनों के बीच क्या बातचीत हुई थी। एक्ट्रेस ने कहा कि उस दौरान मैंने जाँच अधिकारियों के सामने राज कुंद्रा और उनकी कंपनियों से जुड़ी वो सभी जानकारियाँ रखी जो मेरे पास थी।

चोपड़ा ने आगे बताया कि उन्होंने पुलिस अधिकारियों से कहा था कि अगर वे इस मामले में उनसे कोई और सवाल पूछना चाहते हैं तो बिना किसी हिचकिचाहट के उनसे संपर्क कर सकते हैं। उन्होंने पोर्नोग्राफी रैकेट के अन्य पीड़ितों से भी आगे आने और पुलिस के साथ अपनी आपबीती साझा करने का आग्रह किया।

हाल ही में शर्लिन ने मीडिया से बातचीत के दौरान खुलासा किया था कि राज कुंद्रा उनसे काम से जुड़ी मीटिंग के लिए 5 स्टार होटल जेडब्ल्यू मैरियट (JW Marriott) में मिलते थे। उन्होंने कहा कि मैंने 26 मार्च 2019 को कुंद्रा की आर्म्सप्राइम कंपनी के साथ एक कॉन्ट्रेक्ट किया था। कॉन्ट्रेक्ट पर साइन करने से चार दिन पहले, यानी 22 मार्च 2019 को चोपड़ा ने कुंद्रा से जुहू में जेडब्ल्यू मैरियट होटल में मुलाकात की थी।

बता दें कि शर्लिन ने पुलिस को बताया था कि उन्होंने आर्म्सप्राइम नामक कंपनी के साथ कॉन्ट्रेक्ट पर हस्ताक्षर किए थे फिर वीडियोज बनाने लगी थीं। उनका कहना था कि शुरुआत में ये ग्लैमरस वीडियो थी, लेकिन उसके बाद ये बोल्ड फिल्में बनने लगीं और बाद में उन्हें सेमी न्यूड और न्यूड वीडियोज बनाने पड़े। बकौल शर्लिन चोपड़ा, उन्हें हमेशा कहा जाता था कि इसमें कुछ गलत नहीं है, क्योंकि सभी ऐसा ही करते हैं। शर्लिन ने बताया था कि राज कुंद्रा 27 मार्च 2019 को उनके घर आया था और उनसे जबरदस्ती करने लगा, जबकि वो इसके लिए मना करती रहीं।

पटना HC के जज की कहानी: जब मस्जिद से लाउडस्पीकर हटाने का आदेश पड़ा था भारी, कट्टरपंथियों के खौफ से रातों-रात कराया ट्रांसफर

हाल ही में पटना में हाईकोर्ट की नई बिल्डिंग के उत्तरी भाग के नजदीक बन रहे 4 मंजिला ‘वक्फ भवन’ को ध्वस्त करने का आदेश उच्च न्यायालय में 4:1 के जजमेंट के साथ पास किया गया। ऐसा ही एक मामला सन् 2005 में आया था, जब हाईकोर्ट के पास स्थित मस्जिद में लाउडस्पीकर के उपयोग को एक निश्चित समय के दौरान रोकने का आदेश पारित करने वाले जज को मुस्लिमों के तीव्र विरोध के चलते बिहार से अपना ट्रांसफर कराना पड़ा था।

पटना में हाईकोर्ट से सटी हुई मस्जिद में कोर्ट की कार्यवाही के दौरान लाउडस्पीकर का उपयोग किए जाने के संबंध में तत्कालीन जज, जस्टिस आरएस गर्ग ने नाराजगी जाहिर की थी और DM सुधीर कुमार एवं SSP एनएच खान को यह सुनिश्चित करने के लिए कहा था कि मस्जिद की अजान से कोर्ट की कार्यवाही बाधित न हो। जस्टिस गर्ग ने तब कहा था कि लाउडस्पीकर से दी जाने वाली अजान के कारण उन्हें सुनवाई में बाधा होती है। उन्होंने कहा था कि मस्जिद पर लगे लाउडस्पीकर से अजान देना पटना हाईकोर्ट द्वारा दिए गए निर्देशों का उल्लंघन है।

तब न्यायमूर्ति गर्ग ने कहा था, “मस्जिद प्रबंध समिति के सदस्य सत्ता के करीबी होने के कारण खुद को विशेषाधिकार प्राप्त मानते हैं और अदालत के आदेशों का उल्लंघन करने की धृष्टता करते हैं। अदालत अपने आदेशों की अवहेलना करने वाले किसी भी व्यक्ति को नहीं छोड़ेगी।”

जस्टिस गर्ग द्वारा जिले के प्रमुख अधिकारियों समेत मस्जिद की प्रबंधन समिति के सदस्यों को आदेशित किए जाने के बाद पुलिस ने मस्जिद के इमाम और 3 अन्य लोगों को गिरफ्तार कर लिया था और लाउडस्पीकर को भी जब्त कर लिया था। हालाँकि, जस्टिस गर्ग के इस आदेश के बाद मुस्लिम समुदाय के लोग काफी नाराज हो गए थे और सड़क पर उतरकर उन्होंने इस फैसले के खिलाफ प्रदर्शन किया था। कई मुस्लिमों ने आदेश पारित करने वाले जस्टिस गर्ग को राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) का आदमी कहा था।

इस प्रदर्शन के कारण जस्टिस गर्ग ने अपना ट्रांसफर बिहार से बाहर कराने की अर्जी सुप्रीम कोर्ट को दी थी। जस्टिस गर्ग की अर्जी पर विचार करते हुए तत्कालीन राष्ट्रपति एपीजे अब्दुल कलाम ने उनका ट्रांसफर पटना से गुजरात हाईकोर्ट कर दिया था। जस्टिस गर्ग ने तब कहा था, “इन प्रदर्शनों से सार्वजनिक तौर पर मेरी छवि खराब हुई है, ऐसे में मैं पटना में काम नहीं कर सकता। यही कारण है कि मैंने अपने ट्रांसफर का आवेदन किया है।”

ज्ञात हो कि पटना में हाईकोर्ट की बिल्डिंग के पास बने ‘वक्फ भवन’ के मामले में जस्टिस अश्विन कुमार सिंह, विकास जैन, अहसानुद्दीन अमानुल्लाह, राजेंद्र कुमार मिश्रा और चक्रधारी शरण सिंह की विशेष पीठ ने सुनवाई की थी। मामले की सुनवाई में पीठ के चार जजों ने हाईकोर्ट के पास बने निर्माण को हटाने के पक्ष में फैसला दिया, जबकि अहसानुद्दीन अमानुल्लाह ने इस मामले में अपनी असहमति जताई और निर्माण को बस नियम विरुद्ध बताया और उसे अवैध मानने से इंकार कर दिया।

नीरज चोपड़ा से छिन जाएगा गोल्ड मेडल? गलत निशाने पर लगा था भाला, पावरफुल लोगों ने की शिकायत

भारत के छोरे ने टोक्यो में लठ गेर दी भाई! पूरी दुनिया में डंका बजा दिओ भाले से। ऋतिक रोशन जैसे लंबे बाल में छोरा सेक्सी भी लागे हे। हँसी एकदम गोविंदा सी हे, ताकत धर्मेंद्र सी।

सोशल मीडिया पर कुछ ऐसा ही चल रहा है। लड़कियों के कुछ पोस्ट असंसदीय भाषा (अश्लील कैटिगरी भी कह सकते हैं) वाले भी देखे गए। इसमें गलत कुछ भी नहीं। लड़का जवान है, विपरीत लिंग वाला है और सबसे बड़ी बात – Why should boys have all the fun?

खैर! सोशल मीडिया पर ही एक खबर और दिख गई। खबर भारत के लिए बुरी हो सकती है। खबर के पीछे पावरफुल लोगों का हाथ बताया गया है। शीर्षक था – गलत निशाने के बाद भी नीरज चोपड़ा को क्यों मिला गोल्ड मेडल? खबर के भीतर था – ओलंपिक वालों से कर दी गई है शिकायत।

नीरज चोपड़ा मेरा कोई नहीं। मेरा राज्य भी अलग है, जाति भी। लेकिन… खबर के कारण मेरी नींद उड़ गई है। क्यों? क्योंकि मैं भारतीय हूँ। खबर के कारण मेरा चैन खो गया है। क्यों? क्योंकि जिन लोगों (पावरफुल) ने ओलंपिक वालों के पास शिकायत की है, वो इंडिया के ही हैं। कैसे भारतीय हैं, आप सोच सकते हैं!

OK. काम की बात करते हैं। नीरज ने जैवलिन फेंका। ओलंपिक वालों ने देखा। गोल्ड मेडल दिया। कोई बवाल नहीं। लेकिन एक चूक कर दी ओलंपिक वालों ने। चूक जो इन पावरफुल इंडियंस ने नहीं की। पूरे स्टेडियम से सिर्फ एक एंगल से लिया गया वीडियो ओलंपिक वालों को भेजा। क्यों? क्योंकि इसी एक एंगल से नीरज का जैवलिन गलत जगह घुसता वीडियो में साफ-साफ दिख गया।

ऊपर का वीडियो अगर देख चुके तो समझिए कि दर्द कितना हो रहा होगा। इंडियन हों या पाकिस्तानी… गलत जगह भाला चला जाए तो दर्द होना लाजिमी है। लिबरल, वामपंथी, मोदी-विरोधी आदि कह कर उनके दर्द को कम मत आँकिए। प्लीज!

और हाँ! नीरज चोपड़ा मोदी या देश (जिसे हम भारत कहते हैं, पावरफुल लोग इंडिया) का समर्थक हो सकता है, लेकिन उसे जैवलिन फेंकने पर ध्यान देना चाहिए था। ये जो समय-समय पर उसने ट्वीट फेंका था, शास्त्रों में उसे ही दिशाभटकम भाला कहा गया है, यह बिना वजह बतकुच्चन करने वालों के अंदर कहीं भी-कभी भी घुस जाता है।

कर्नाटक में ‘इंदिरा कैंटीन’ को ‘अन्नपूर्णेश्वरी कैंटीन’ करने की उठी माँग, लगभग ‘रो’ रहे कॉन्ग्रेसी नेता

खेल रत्न अवार्ड को गाँधी परिवार के सदस्य, पूर्व प्रधानमंत्री और कॉन्ग्रेस नेता राजीव गाँधी के नाम पर दिया जाता था लेकिन 06 अगस्त 2021 को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने घोषणा की कि अब इस पुरस्कार को भारत के हॉकी के महान खिलाड़ी मेजर ध्यानचंद के नाम पर दिया जाएगा। हालाँकि जहाँ एक ओर पूरे देश में इस फैसले का स्वागत किया गया वहीं इस पर राजनीति भी शुरू हो चुकी है। ताजा मामला कर्नाटक के पूर्व मुख्यमंत्री और कॉन्ग्रेस नेता सिद्धारमैया का है जिन्होंने एक और योजना का नाम बदले जाने की संभावना पर भाजपा पर प्रतिशोध की राजनीति करने का आरोप लगाया है।

दरअसल, भाजपा के राष्ट्रीय महासचिव सीटी रवि ने 07 अगस्त 2021 को कर्नाटक के मुख्यमंत्री बीएस बोम्मई को ट्विटर पर टैग करते हुए यह माँग की थी कि कर्नाटक में चलने वाली ‘इंदिरा कैंटीन’ के नाम को बदलकर ‘अन्नपूर्णेश्वरी कैंटीन’ किया जाए। रवि ने अपने ट्वीट में आगे लिखा था कि इसका कोई कारण नहीं दिखता कि कर्नाटक के लोग खाना खाते समय आपातकाल के उन काले दिनों को याद करें।

रवि की इस माँग पर प्रतिक्रिया देते हुए सिद्धारमैया ने कहा कि इंदिरा कैंटीन के नाम को बदलने की बात करना कुछ और नहीं बल्कि भाजपा द्वारा की जा रही प्रतिशोध की राजनीति है। उन्होंने यह भी कहा कि भाजपा के नेतृत्व के नाम पर कई कार्यक्रम हैं ऐसे में क्या कभी उन्होंने इन नामों को बदलने की कोशिश की? सिद्धारमैया ने कहा कि खेल रत्न में राजीव गाँधी का नाम था, ऐसे में वह (भाजपा) इसे क्यों बदलना चाहते थे? साथ ही उन्होंने पीएम मोदी से इस मुद्दे पर जवाब माँगा है।

वहीं दूसरी ओर शिवसेना के वरिष्ठ नेता और राज्यसभा सांसद संजय राउत ने इस मुद्दे पर कहा कि राजीव गाँधी के द्वारा दिए गए बलिदान का अपमान किए बिना भी मेजर ध्यानचंद को सम्मान दिया जा सकता था। शिवसेना के मुखपत्र सामना में लिखते हुए राउत ने कहा कि राजीव गाँधी खेल रत्न अवार्ड को मेजर ध्यानचंद खेल रत्न अवार्ड किया जाना एक ‘राजनैतिक दाँव’ है न कि लोगों की इच्छा के अनुरूप लिया गया फैसला।

ज्ञात हो कि केंद्र की मोदी सरकार ने शुक्रवार (6 अगस्त 2021) को खेल रत्न पुरस्कार मेजर ध्यानचंद के नाम पर दिए जाने का फैसला किया। प्रधानमंत्री ने ट्वीट कर कहा था, “मेजर ध्यानचंद के नाम पर खेल रत्न पुरस्कार का नाम रखने के लिए देशभर से नागरिकों का अनुरोध मिले हैं। मैं उनके विचारों के लिए उनका धन्यवाद करता हूँ। उनकी भावना का सम्मान करते हुए, खेल रत्न पुरस्कार को मेजर ध्यानचंद खेल रत्न पुरस्कार कहा जाएगा! जय हिंद!”

शिल्पा और उनकी माँ सुनंदा से UP पुलिस पूछताछ करने पहुँची मुंबई, पति पोर्नोग्राफी मामले में पहले से जेल में

बॉलीवुड अभिनेत्री शिल्पा शेट्टी की मुश्किलें बढ़ती ही जा रही हैं। पोर्नोग्राफी मामले में पति राज कुंद्रा के गिरफ्तार होने के बाद अब शिल्पा और उनकी माँ सुनंदा शेट्टी पर धोखाधड़ी का आरोप लगा है। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, शिल्पा और सुनंदा शेट्टी पर आयोसिस वेलनेस सेंटर के नाम पर लोगों से करोड़ों रुपये की ठगी करने का आरोप है।

दोनों के खिलाफ लखनऊ के हजरतगंज और विभूतिखंड थाने में एफआईआर दर्ज कराई गई थी। धोखाधड़ी के मामले में शिल्पा और उनकी माँ सुनंदा से पूछताछ करने के लिए लखनऊ पुलिस की एक टीम मुंबई पहुँच गई है। वहीं, दूसरी टीम भी जल्दी मुंबई पहुँचेगी और दोनों से पूछताछ करेगी।

शिल्पा शेट्टी और उनकी माँ पर आरोप है कि आयोसिस स्लिमिंग स्किन सैलून और स्पा वेलनेस सेंटर की ब्रांच लखनऊ में खोलने के नाम पर माँ-बेटी ने दो लोगों से करोड़ों रुपए की ठगी की है। एक्ट्रेस और उनकी माँ ने करोड़ों रुपए लेने के बाद भी अपना कमिटमेंट पूरा नहीं किया है। बताया जा रहा है कि न तो शिल्पा ब्रांच की ओपनिंग के दौरान वहाँ पहुँचीं और न ही उनकी कंपनी के लोगों ने कोई मदद की।

इस मामले में विभूतिखंड थाने में ओमेक्स हाइट्स निवासी ज्योत्सना चौहान और हजरतगंज थाने में रोहित वीर सिंह ने शिल्पा शेट्टी और उनकी माँ के खिलाफ ठगी का मुकदमा दर्ज कराया था। इस संबंध में हजरतगंज पुलिस ने एक महीने पहले उन्हें नोटिस भी भेजा था, लेकिन दोनों की तरफ से कोई जवाब नहीं दिया गया। वहीं, विभूतिखंड पुलिस की टीम भी नोटिस का जवाब लेने के लिए मुम्बई पहुँच चुकी है। जाँच में दोनों की भूमिका स्पष्ट होने पर उन्हें गिरफ्तार किया जा सकता है।

बता दें कि शिल्पा शेट्टी आयोसिस वेलनेस नाम से एक फिटनेस चेन चलाती हैं। इस कंपनी की अध्यक्ष शिल्पा शेट्टी हैं, जबकि उनकी माँ सुनंदा इसकी निदेशक हैं।

अब अफगानिस्तान में फँसे सिखों की चिंता, तब CAA का किया था विरोध: कॉन्ग्रेसी जयवीर शेरगिल के भीतर का ‘जिम्मेदार सिख’

कॉन्ग्रेस पार्टी के राष्ट्रीय प्रवक्ता जयवीर शेरगिल ने खुद को ‘सिख समुदाय का एक जिम्मेदार भारतीय नागरिक’ बताते हुए अफगानिस्तान से 650 सिखों व 50 हिन्दुओं को सुरक्षित निकाले जाने के लिए केंद्रीय विदेश मंत्रालय को पत्र लिखा है। ये अलग बात है कि वो अपनी पार्टी के अध्यक्ष सोनिया गाँधी को पत्र लिख कर कभी ये नहीं कह पाएँ कि वो नागरिकता संशोधन कानून (CAA) का समर्थन करें।

CAA क्या है? इसके तहत दिसंबर 2014 से पहले भारत आए पाकिस्तान, अफगानिस्तान और बांग्लादेश के सिखों, हिन्दुओं, बौद्ध, जैन, पारसी और ईसाई समुदाय के प्रताड़ित लोगों को नागरिकता देने का प्रावधान है। ये तीनों ही इस्लामी देश हैं, जो अल्पसंख्यकों के साथ क्रूरता के लिए कुख्यात हैं। पाकिस्तान में हिन्दू व सिख महिलाएँ सुरक्षित नहीं। बांग्लादेश में आए दिन मंदिर तोड़े जाते हैं। अफगानिस्तान में अल्पसंख्यकों को समूह में ही मार गिराया जाता रहा है।

ऐसे में जयवीर के भीतर का सिख तब नहीं जागा, जब भारत सरकार CAA लेकर आई थी। उनके अंदर का सिख तब क्या ‘गैर-जिम्मेदार’ हो गया था? अब खुद को भारतीय नागरिक बता कर केंद्रीय विदेश मंत्रालय से 650 सिखों के लिए स्पेशल वीजा की व्यवस्था की गुहार लगा रहे जयवीर शेरगिल की माँग एकदम उचित है, लेकिन वो और उनकी पार्टी ही इसके मार्ग में अक्सर रोड़े अटकाती रही है।

आइए, थोड़ा पीछे चलते हैं। 16 दिसंबर, 2019 को। शाहीन बाग़ के उपद्रवियों का उत्पात चरम पर था। देश भर में कई शाहीन बाग़ बना कर भड़काऊ भाषणबाजी हो रही थी। दिल्ली दंगों की स्क्रिप्ट रची ही जा रही थी। कॉन्ग्रेस माहौल का मजा लूट रही थी। उस दिन 10:03 में जयवीर शेरगिल का ट्वीट आता है – ‘CAB = Communal Atom Bomb’, जिसका अर्थ है – ‘नागरिकता संशोधन विधेयक = सांप्रदायिक परमाणु बम।’

बता दें कि CAA ही जब कानून न होकर बिल हुआ करता था तो इसे CAB कहते थे, क्योंकि तब ये संसद के दोनों सदनों में पास नहीं हुआ था। इसलिए, इस CAA और CAB को एक ही समझा जाए। यानी, जब केंद्र सरकार प्रताड़ित अल्पसंख्यकों के लिए संरक्षण की व्यवस्था कर रही थी, तब यही जयवीर शेरगिल अपनी पार्टी के सुर में सुर मिला कर इसका तगड़ा विरोध करने में लगे थे। अब उनके अंदर का सिख जाग गया है।

वो ‘सिख समुदाय का एक जिम्मेदार भारतीय नागरिक’ तब कहलाते, जब वो कॉन्ग्रेस अध्यक्ष सोनिया गाँधी को पत्र लिख कर कहते कि चूँकि ये मामला प्रताड़ित अल्पसंख्यकों को अधिकार देने से जुड़ा है, दलितों को धर्मांतरण व महिलाओं को क्रूरता से बचाने से जुड़ा है, इसीलिए वो इसका विरोध न करें। लेकिन अफ़सोस, इस्लामी मुल्कों से प्रताड़ना सह कर आए इन्हीं सिखों व हिन्दुओं के लिए तब उनकी आवाज़ नहीं निकली।

निकली भी तो विरोध में। पंजाब के जालंधर से आने वाले जयवीर शेरगिल तब मीडिया के माध्यम से CAA के खिलाफ प्रोपेगंडा फैलाने में लगे थे। तब उन्होंने ‘द हिन्दू’ में एक लेख लिखा था, जिसका शीर्षक ही था – ‘बिना सोचे-समझे लिया गया निर्णय’। उनका कहना था कि केंद्र सरकार के इस निर्णय से उत्तर-पूर्व में अशांति या गई है। उन्होंने CAA को भारत की विदेश नीति की भारी गलतियों में से एक करार दिया था।

उन्होंने CAA को एक ‘संकीर्ण निर्णय’ बताते हुए लिखा था कि इसकी वजह से भारत को दुनिया भर में संदेह की दृष्टि से देखा जाएगा। भारत सरकार को इसे लेकर काफी सफाई देनी पड़ेगी। उन्होंने भारत की ‘विविधता और समावेशी’ चरित्र की बात करते हुए बात करते हुए कहा था कि ऐसे निर्णयों से निवेशकों का विश्वास देश में डिगेगा। उन्होंने इसे ‘चुने हुए देशों के शरणार्थियों के लिए मजहब आधारित कानून’ करार दिया था।

अब? अब उन्हें पता चल है कि भारत का हिन्दू या सिख होने के कारण अफगानिस्तान जैसे मुल्कों में तालिबान जैसे इस्लामी आतंकी संगठन उन्हें निशाना बनाते हैं? उन्होंने अपने पत्र में 2018 की एक घटना का जिक्र किया है। तब जलालाबाद में हुए आत्मघाती आतंकी हमले में 19 हिन्दुओं व सिखों को मार डाला गया था। ये सब राष्ट्रपति अशरफ गनी से मिलने जा रहे थे। मृतकों में अवतार सिंह खालसा चुनावी उम्मीदवार भी थे।

इसका सीधा मतलब है कि अफगानिस्तान में अल्पसंख्यकों के साथ क्रूर बर्ताव व उनके नरसंहार की घटनाओं से जयवीर शेरगिल अनजान नहीं थे, लेकिन फिर भी उन्होंने तब अपनी पार्टी के स्टैन्ड को आगे बढ़ाना उचित समझा। आज जब अफगानिस्तान में 650 सिख फँसे हुए हैं तो उन्हें ये घटनाएँ याद आ रही हैं। उनकी नौकरी जाने व आय की चिंता हो रही है। सिख समाज के लिए उनका प्रेम उमड़ आया है।

ये कैसा दोहरा रवैया है कि एक तरफ वो केंद्रीय विदेश मंत्रालय को पत्र लिख कर कहते हैं कि भारतीय मूल के अल्पसंख्यक तालिबानी आतंकियों के लिए आसान निशाना होते हैं, जबकि दूसरी तरफ वो इन्हीं अल्पसंख्यकों के लिए लाए गए कानून का बढ़-चढ़ कर विरोध करते हैं? 2018 की घटना का जिक्र बताता है कि इसके बावजूद उन्होंने 2019-20 में CAA का विरोध किया और इन्हीं अल्पसंख्यकों को अधिकारी मिलने की राह में रोड़े अटकाए।

उनके पास अब भी समय है। ‘सिख समुदाय से तालुक रखने वाले एक जिम्मेदार भारतीय नागरिक’ होने के नाते वो राहुल गाँधी और सोनिया गाँधी को पत्र लिख कर कह सकते हैं कि वो NRC की राह में रोड़े अटकाने बंद करें। वरना अगर असम में जब नॉन-मुस्लिमों के साथ अत्याचार की खबरें आएँगी और उनमें सिख भी होंगे, तब फिर वो केन्द्रीय गृह मंत्रालय को पत्र लिख कर कहेंगे कि अवैध घुसपैठियों के खिलाफ कार्रवाई की जाए।

राहुल गाँधी असम में NRC विरोधी गमछा पहन कर जाते हैं, ‘No CAA’ वाला रूमाल दिखाते हैं और रैली में कहते हैं कि अगर उनकी सरकार आई तो वो CAA को लागू ही नहीं होने देंगे। इस पर जयवीर शेरगिल चूँ तक नहीं करते। उनके ही पंजाब के मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह ने भी कहा था कि वो किसी भी कीमत पर पंजाब में CAA को लागू नहीं करने देंगे। पार्टी में, अपने आसपास चल रहे इन बयानों से शेरगिल अनजान थे, ये पचने वाली बात नहीं है।

बताते चलें कि जयवीर शेरगिल ने इस पत्र में ध्यान दिलाया है कि अमेरिका की सेना की वापसी के बाद तालिबान बंदूक की नोंक पर अफगानिस्तान को अपने कब्जे में लेने के लिए युद्ध कर रहा है। एक बार फिर से अफगानिस्तान के आतंकी चंगुल में जाने की आशंका है। उन्होंने अफगानिस्तान में हुई हालिया हिंसा की भीषण घटनाओं की तरफ ध्यान आकृष्ट कराते हुए कहा कि ये मानवता के लिए संकट पैदा करने वाली समस्या है।

PM किसान सम्मान निधि की 9वीं किस्त जारी, 9.75 करोड़ किसानों के खाते में भेजे गए ₹19,509 करोड़: प्रधानमंत्री ने किसानों से कही ये बात

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सोमवार (9 अगस्त 2021) को पीएम किसान सम्मान निधि (PM-KISAN) की 9वीं किस्त जारी कर दी है। 9वीं किस्त में 9.5 करोड़ किसानों के खाते में 19, 509 करोड़ रुपए ट्रांस्फर किए गए

पीएम ने इस मौके पर किसानों को वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए संबोधित करते हुए बुवाई के मौसम पर बात की। उन्होंने उम्मीद जताई कि पीएम-किसान की नौवीं किस्त के तहत किसानों को जो राशि मिलेगी उससे उनकी मदद हो पाएगी।

पीएम मोदी ने बताया कि सरकार ने खरीफ हो या रबी सीजन, किसानों से MSP पर अब तक की सबसे अधिक खरीद की है। इससे धान किसानों के खातों में लगभग 1 लाख 70 हजार करोड़ रुपए और गेहूँ किसानों के खाते में लगभग 85 हजार करोड़ रुपए डायरेक्ट पहुँचे हैं।

उन्होंने कहा कि कृषि नीतियों में छोटे किसानों को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जा रही है। इसी भावना के साथ छोटे किसानों को सुविधा और सुरक्षा देने का एक गंभीर प्रयास किया जा रहा है। पीएम किसान सम्मान निधि के तहत अब तक 1 लाख 60 हजार करोड़ रुपए किसानों को दिए गए हैं।

वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए संबोधित करते हुए पीएम ने जानकारी दी कि कोरोना काल में ही 2 करोड़ से अधिक किसान क्रेडिट कार्ड जारी किए गए हैं, जिसमें से अधिकतर छोटे किसानों के लिए हैं। उन्होंने कहा, “कल्पना कीजिए कि ये मदद अगर किसानों को न मिलती, तो 100 वर्ष की इस सबसे बड़ी आपदा में उनकी क्या स्थिति होती।”

प्रधानमंत्री मोदी ने बताया कि राष्ट्रीय खाद्य तेल मिशन-ऑयल पाम यानि NMEO-OP के माध्यम से खाने के तेल से जुड़े इकोसिस्टम पर 11,000 करोड़ रुपए से अधिक का निवेश किया जाएगा। आज भारत कृषि निर्यात के मामले में पहली बार दुनिया के टॉप-10 देशों में पहुँचा है।

उन्होंने बताया कि जम्मू-कश्मीर का केसर विश्व प्रसिद्ध है। सरकार ने ये फैसला लिया है कि जम्मू-कश्मीर का केसर देशभर में नाफेड की दुकानों पर उपलब्ध होगा। इससे जम्मू-कश्मीर में केसर की खेती को बहुत प्रोत्साहन मिलने वाला है।

देश की आजादी पर पीएम ने बात रखते हुए कहा, “इस बार देश अपना 75वाँ स्वतंत्रता दिवस मनाने जा रहा है। ये महत्वपूर्ण पड़ाव हमारे लिए गौरव का तो है ही, ये नए संकल्पों, नए लक्ष्यों का भी अवसर है। इस अवसर पर हमें तय करना है कि आने वाले 25 वर्षों में हम भारत को कहाँ देखना चाहते हैं।”

वह बोले, “देश जब आजादी के 100 वर्ष पूरे करेगा, 2047 में तब भारत की स्थिति क्या होगी, ये तय करने में हमारी खेती, हमारे किसानों की बहुत बड़ी भूमिका है। ये समय भारत की कृषि को एक ऐसी दिशा देने का है, जो नई चुनौतियों का सामना कर सके और नए अवसरों का लाभ उठा सके।”

संबोधन के दौरान पीएम मोदी ने याद दिलाया कि किस तरह कुछ समय पहले देश में दालों की कमी हो गई थी और उन्होंने इसके उत्पादन को बढ़ाने का आग्रह किया था। वह बताते हैं कि उस आग्रह का परिणाम आज 6 साल बाद ये है कि दाल उत्पादन में 50 फीसद वृद्धि हुई है।

J&K में आतंकियों ने भाजपा सरपंच और उनकी पत्नी पर बरसाईं ताबड़तोड़ गोलियाँ, अस्पताल ले जाते हुए दोनों की मौत

जम्मू-कश्मीर में सोमवार (9 अगस्त) को दिनदहाड़े आतंकवादियों ने एक भाजपा सरपंच और उनकी पत्नी की गोली मारकर हत्या कर दी। यह घटना दक्षिण कश्मीर के अनंतनाग जिले के लाल चौक इलाके की है। यहां आतंकवादियों ने भाजपा सरपंच गुलाम रसूल और उसकी पत्नी पर ताबड़तोड़ गोलियाँ बरसाईं, जिसकी वजह से दोनों की मौत हो गई।

इस घटना के संबंध में एक अधिकारी ने बताया कि अनंतनाग के लाल चौक इलाके में आतंकियों ने रेडवानी बाला के भाजपा सरपंच गुलाम रसूल और उनकी पत्नी पर अंधाधुन फायरिंग की, जिसके बाद दोनों गंभीर रूप से घायल हो गए। इसके बाद इलाज के लिए नजदीकी अस्पताल में ले जाते पति-पत्नी दोनों ने रास्ते में ही दम तोड़ दिया।

अधिकारी ने बताया कि भाजपा सरपंच और उनकी पत्नी के हत्यारों को पकड़ने के लिए इलाके की घेराबंदी कर दी गई है। साथ ही हमलावरों को पकड़ने के लिए तलाशी अभियान चलाया जा रहा है।

जम्मू-कश्मीर भाजपा के प्रवक्ता अल्ताफ ठाकुर ने भाजपा नेता और उनकी पत्नी की हत्या की निंदा की है। ठाकुर ने कहा कि निर्दोष लोगों पर हमला और उनकी हत्या आतंकियों की हताशा को दर्शाता है। कुलगाम जिले के रेडवानी गांव के रहने वाले सरपंच गुलाम रसूल डार कुलगाम भाजपा किसान मोर्चा के अध्यक्ष भी थे। बीते साल उन्होंने जिला विकास परिषद का चुनाव भी लड़ा था, लेकिन उन्हें हार का सामना करना पड़ा था।

बता दें कि 8 जुलाई 2021 को भी उत्तरी कश्मीर के बांडीपोरा जिला में आतंकियों ने भाजपा की प्रदेश कार्यकारिणी के सदस्य और पूर्व जिला प्रधान शेख वसीम उर्फ वसीम बारी, उनके भाई उमर सुल्तान और पिता बशीर शेख की गोलियों से भूनकर हत्या कर दी थी। उमर भाजपा की जिला युवा इकाई का सदस्य थे, जबकि उनके पिता बशीर शेख भाजपा के जिला उपाध्यक्ष रह चुके थे।