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सर्वेश श्रीवास्तव पर चोरी का लगाया आरोप, हैंडपंप से बाँध कर पीटा: राजा, निसार सहित 4 पर एक्शन लेगी UP पुलिस

उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ से दिल दहला देने वाली घटना सामने आई है। बताया जा रहा है कि शनिवार (31 जुलाई 2021) को ठाकुरगंज में बालागंज पुलिस चौकी के पास फूलों की गठरी चुराने के आरोप में कुछ दबंगों ने एक युवक को हैंडपंप से बाँधकर पीटा। युवक की फोटो, वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद पुलिस ने मामले की जाँच शुरू की और उन दंबगों के बंधन से उसे मुक्त कराया। एडीसीपी (पश्चिम) राजेश श्रीवास्तव ने बताया कि युवक को पीटने के आरोप में राजा और निसार समेत चार लोगों के खिलाफ केस दर्ज कर जाँच की जा रही है।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, बालागंज में नगरिया निवासी राजा की फूलों की दुकान है। बताया जा रहा है कि शनिवार सुबह राजा ने मंडी से फूलों की गठरी लाकर दुकान के तख्त पर रख दी और कहीं चला गया। तभी राधाग्राम निवासी सर्वेश श्रीवास्तव वहाँ आया, इसी बीच दुकान पर राजा भी आ गया। राजा ने देखा कि सर्वेश फूलों की गठरी के पास खड़ा है। उसने बिना कुछ सोचे समझे उस पर चोरी करने का आरोप लगा दिया और शोर मचाने लगा।

शोर सुनकर राजा का साथी निसार भी वहाँ आ धमका। दोनों चोरी का आरोप लगाते हुए सर्वेश को गाली देने लगे और उसके साथ हाथापाई शुरू कर दी। इस बीच राजा और निसार के दो और साथी भी आ गए। उन्होंने सर्वेश की कोई बात नहीं सुनी और उसे सड़क पर गिरा दिया। वो चारों उसे घसीटते हुए बालागंज चौकी के सामने लगे हैंडपंप पर ले गए और हैंडपंप से बाँधकर उसे पीटना शुरू कर दिया। किसी ने इस घटना का वीडियो बनाकर सोशल मीडिया पर डाल दिया, जिसके बाद पुलिस हरकत में आई।

बता दें कि एडीसीपी (पश्चिम) राजेश कुमार श्रीवास्तव ने बताया कि चोरी के आरोप में युवक को बाँधकर पीटना गलत है। अगर चोरी का मामला था तो दुकानदार को थाने में शिकायत करनी चाहिए। कोई भी व्यक्ति अपने हाथ में कानून नहीं ले सकता है। उन्होंने कहा कि पीड़ित सर्वेश की शिकायत पर उसे बंधक बनाकर पीटने वालों चारों आरोपितों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी।

कंधार एयरपोर्ट पर रॉकेट से हमला, हेरात पर कब्जे के लिए भी गोलीबारी: चीन के समर्थन के बाद बढ़ा तालिबान का हौसला

दक्षिण अफगानिस्तान के कंधार में तालिबान ने हमला बोला है। आतंकियों ने कंधार एयरपोर्ट को निशाना बनाया। कम से कम तीन रॉकेटों से कंधार एयरपोर्ट पर हमला किया गया। तालिबान ने मुल्क में अपनी ताकत बढ़ानी शुरू कर दी है और इसी क्रम में शनिवार (31 जुलाई, 2021) की रात ये हमला किया गया। तीन रॉकेटों में से दो रनवे पर आकर लगा। एयरपोर्ट से सारी उड़ानें रद्द कर दी गई हैं। सुरक्षा बढ़ा दी गई है।

कंधार एयरपोर्ट के प्रमुख मसूद पश्तून ने कहा कि एयरपोर्ट के रनवे को बनाने का काम जारी है और रविवार को ही उड़ानें फिर से चालू कर दी जाएँगी। राजधानी काबुल में सिविल एविएशन विभाग ने भी इस हमले की पुष्टि की है। ये अफगानिस्तान के कंधार प्रांत की राजधानी भी है। काबुल के बाद कंधार मुल्क का सबसे बड़ा शहर है। आशंका जताई जा रही है कि इसके आसपास आतंकियों की सक्रियता बढ़ गई है।

कंधार पर कब्ज़ा करने के लिए तालिबानी कूच कर सकते हैं और हो सकता है कि उससे पहले ये इस तरह के हमले कर रहे हों। अफगानिस्तान में तालिबान की ताकत और न बढ़े, इसके लिए इस शहर का सरकार के नियंत्रण में रहना ज़रूरी है क्योंकि सेना को एयर सपोर्ट देने से लेकर रसद की सप्लाई तक के लिए ये महत्वपूर्ण है। अफगानिस्तान की सरकार इस बात को नकार रही है कि तालिबान ने मुल्क के 85% भू-भाग पर कब्ज़ा कर लिया है।

वहीं अफगानिस्तान के हेरात में पिछले 4 दिनों से वहाँ के सुरक्षा बलों और तालिबानी आतंकियों के बीच संघर्ष चल रहा है। हेरात के लाखों लोगों को डर है कि काबुल और कंधार के बाद मुल्क के इस तीसरे बड़े शहर के भीतर तालिबान कभी भी घुस सकता है। वहाँ के एयरपोर्ट से मात्र 10 किलोमीटर की दूरी पर ही भारी फायरिंग हुई है। इस दौरान एक स्थानीय मिलिट्री कमांडर को तालिबान ने मार डाला।

साथ ही UN के एक कैम्पस में कार्यरत सिक्योरिटी गार्ड को भी मौत के घाट उतार दिया गया। एयरपोर्ट फ़िलहाल सुरक्षा बलों के नियंत्रण में है। आसपास के कई इलाकों से भाग कर भी लोग हेरात आए हैं, जिनमें बड़ी संख्या में महिलाएँ-बच्चे हैं। इलाके में दो बड़े पुल हैं, जिनका इस्तेमाल कर तालिबान हमला बोलना चाहता है। एयर सपोर्ट लगा दिया गया है। अमेरिका इस पर नजर रखे हुए है। कंधार से काबुल के लंबे रास्ते में खतरे के कारण व्यापार भी प्रभावित हो रहा है।

बता दें कि हाल ही में मुल्ला अब्दुल गनी बरादर के नेतृत्व में एक तालिबान प्रतिनिधिमंडल ने चीन में विदेश मंत्री वांग यी से मुलाकात की थी। चीन ने तालिबान को अपना समर्थन दे दिया है। यह बैठक चीन के उत्तरी शहर तियानजिन में हुई थी। सोशल मीडिया पर इस मुलाकात की कई तस्वीरें सामने आई हैं। हालिया संकट के दौरान यह पहली बार है जब तालिबान के किसी बड़े नेता ने चीन का दौरा किया है, क्योंकि इस्लामिक आतंकवादी समूह ने पूरे अफगानिस्तान पर कब्जा करने के लिए बड़े पैमाने पर हमला किया है।

15 अगस्त को तिरंगा नहीं फहराने देंगे, पंजाब के बाद हिमाचल पर करेंगे कब्जा: खालिस्तानी गुरपतवंत सिंह पन्नू पर FIR

हिमाचल प्रदेश में शिमला के साइबर थाने में खालिस्तान समर्थक एवं सिख फॉर जस्टिस संगठन (एसएफजे) के नेता गुरपतवंत सिंह पन्नू के खिलाफ राजद्रोह का केस दर्ज किया गया है। इसमें आईटी एक्ट समेत कई और धाराएँ भी जोड़ी गई हैं।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, साइबर थाने की पुलिस ने प्रारंभिक जाँच में पाया कि पत्रकारों के अलावा कई नागरिकों को भी धमकी भरे कॉल आए थे। ये संगठन अमेरिका समेत कई देशों में भारत विरोधी गतिविधियाँ चलाता है। डीजीपी संजय कुंडू ने बताया कि हिमाचल पुलिस इस मामले में केंद्रीय एजेंसियों की भी मदद ले रही है।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, 56 सेकेंड के आडियो संदेश में पन्नू ने हिमाचल प्रदेश के सीएम जयराम ठाकुर को धमकी दी थी कि वह उन्हें 15 अगस्त को तिरंगा नहीं फहराने देगा। आडियो संदेश में ये भी कहा गया था कि पंजाब के बाद वे हिमाचल में भी कब्जा करेंगे, क्योंकि हिमाचल का कुछ क्षेत्र पहले पंजाब का हिस्सा था।

गौरतलब है कि यह संगठन भारत में देश विरोधी गतिविधियाँ चलाने के आरोप में 10 जुलाई, 2019 से प्रतिबंधित है। इसके बावजूद खालिस्तानियों द्वारा पंजाब के बाद हिमाचल प्रदेश में शांति भंग करने के प्रयास जारी हैं।

दरअसल, शुक्रवार (30 जुलाई 2021) को सुबह 10:30 बजे से दोपहर 12:30 बजे के बीच शिमला के 20 से अधिक पत्रकारों को धमकी भरे फोन फोन आए थे, जिसमें यह कहा था गया कि हिमाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर को इस बार स्वतंत्रता दिवस पर तिरंगा नहीं फहराने दिया जाएगा। ये खालिस्तान समर्थक संगठन सिख फॉर जस्टिस (SFJ) के प्री रिकॉर्डेड कॉल थे और धमकी देने वाला शख्स खुद को SFJ का सदस्य गुरपतवंत सिंह पन्नू बता रहा था।

बता दें कि कनाडा में रहते हुए सिख फॉर जस्टिस (एसएफजे) का आतंकी गुरपतवंत सिंह पन्नू समय-समय पर पंजाब के युवाओं को गुमराह करने के लिए उनको इनामी राशि देने का लालच देता आ रहा है। पन्नू के उकसाने पर अप्रैल 2021 में तीन सिख युवकों ने 14 अगस्त 2020 को पंजाब के मोगा जिला की प्रशासनिक इमारत पर खालिस्तानी झंडा लहरा दिया था। तीनों आज भी जेल में बंद हैं और उन्हें फूटी कौड़ी नहीं मिली है।

खालसा टुडे के एडिटर इन चीफ सुखी चहल ने यह बात सार्वजनिक की थी। चहल के मुताबिक तीनों युवकों का परिवार अब पन्नू को कोस रहा है। उसने इस काम के बदले उन्हें 2500 डॉलर देने का लालच दिया था, लेकिन इस घटना के बाद कोई पैसा नहीं दिया।

मानसिक-शारीरिक शोषण से धर्म परिवर्तन और निकाह गैर-कानूनी: हिन्दू युवती के अपहरण-निकाह मामले में इलाहाबाद HC

धर्मांतरण व निकाह के एक मामले में इलाहाबाद हाईकोर्ट ने अहम फैसला सुनाया है। जावेद अंसारी ने उत्तर प्रदेश में ‘लव जिहाद’ के खिलाफ बने कानून के तहत हो रही कार्रवाई को रोकने के लिए हाईकोर्ट का रुख किया था। उसने आयुषी नाम की एक हिन्दू लड़की से निकाह किया था। 17 नवंबर, 2020 को आयुषी घर से बाजार के लिए निकलने के बाद वापस नहीं आई थी। परिजनों ने 21 वर्षीय आयुषी की गुमशुदगी की रिपोर्ट दर्ज कराई थी।

इसके बाद पता चला कि जलेसर से जावेद अंसारी अपने साथियों के साथ उसे बहला-फुसला कर ले गया है। धर्म-परिवर्तन कर जबरन निकाह के उद्देश्य से ऐसा किया गया। आरोप था कि बिना जिलाधिकारी को सूचित किए हुए अवैध रूप से हिन्दू युवती का धर्म-परिवर्तन कर उसे मुस्लिम बना दिया गया। साथ ही उसके यौन शोषण भी किया जा रहा था। आरोपित के वकील का कहना था कि सब दोनों की मर्जी से हुआ है और आयुषी अब आयशा हो गई है।

दोनों के बालिग़ होने की बात कही गई। आरोपित के वकील ने ये तर्क भी दिया कि इस घटना के बाद उत्तर प्रदेश का धर्मांतरण व जबरन शादी वाला कानून लागू हुआ था, इसीलिए इस पर ये लागू नहीं होता। जबकि पीड़ित पक्ष का कहना था कि शादीशुदा आरोपित ने युवती का अपहरण कर के उसे नशीली दवा खिलाई और जबरन दस्तावेजों पर हस्ताक्षर करा लिए। होश आने पर पीड़िता ने पुलिस को सूचित किया और मजिस्ट्रेट के समक्ष आरोपित के विरुद्ध बयान दर्ज कराया।

मोहम्मद जावेद ने अपने साले फैजान व महफूज के यहाँ पीड़िता को छिपाया हुआ था। पीड़िता को गाड़ी में बंद कर उसका मुँह दबा कर ले जाया गया था, इसीलिए पीड़ित पक्ष ने अपहरण बताया है। पीड़ित पक्ष ने मीडिया की विभिन्न खबरों का हवाला देते हुए इलाहाबाद हाईकोर्ट को बताया कि कैसे गूँगी-बहरी व गरीब-असहाय महिलाओं का धर्मांतरण कराया जाता है। डर, प्रलोभन व लालच देकर ऐसा करने के लिए विदेशी फंडिंग भी हो रही है।

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने दोनों पक्षों को विस्तृत रूप से सुनने के बाद कहा कि हर वयस्क व्यक्ति को स्वेच्छा से धर्म-परिवर्तन व दो बालिगों को सहमति से विवाह का अधिकार है। किसी भी धर्म का व्यक्ति किसी भी धर्म के व्यक्ति से विवाद करने के लिए स्वतंत्र है। हालाँकि, कोर्ट ने नोट किया कि अपमान व उपेक्षा के कारण भी कई बार लोग धर्मांतरण करते हैं। लेकिन, इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कुछ और महत्वपूर्ण बातें भी कही।

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा, “किसी भी देश का बहुल नागरिक जब धर्मांतरण करता है तो इससे देश कमजोर होता है। इससे विघटनकारी शक्तियों को लाभ प्राप्त हो जाता है। देश का इतिहास बताता है कि जब-जब हम बँटे और देश पर आक्रमण हुआ, तब-तब हम गुलाम हुए। किसी को ये अधिकार नहीं है कि किसी का लालच या भय के माध्यम से किसी का धर्मांतरण कराए। अगर जबरन ऐसा किया जाता है तो इससे विवेक की स्वतंत्रता प्रभावित होगी।”

साथ ही सुप्रीम कोर्ट के निर्णय का हवाला देते हुए न्यायाधीश शेखर कुमार यादव ने बताया कि ऐसी घटनाओं से सार्वजनिक व्यवस्था पर बुरा प्रभाव पड़ता है। धर्म को जीवनशैली बताते हुए सुप्रीम कोर्ट ने कहा था कि यहाँ कट्टरता का कोई स्थान नहीं। इलाहाबाद उच्च-न्यायालय ने इससे पहले भी एक फैसले में कहा था कि केवल शादी के लिए धर्म-परिवर्तन स्वीकार्य नहीं। इस मामले में कोर्ट ने माना कि पीड़िता को उर्दू नहीं आता था और धोखे से हस्ताक्षर करा कर उसका मानसिक व शारीरिक यौन शोषण किया गया।

लेकिन, ‘आजतक’ जैसे मीडिया संस्थानों ने इस पूरी घटना को छिपाते हुए सिर्फ खबर की हैडिंग में सिर्फ इतना लिखा, “नागरिक को कोई भी धर्म अपनाने का अधिकार, मर्जी से शादी करना संवैधानिक अधिकार: इलाहाबाद HC“। इससे न तो जावेद अंसारी के गुनाह का पता चलता है, न हिन्दू पीड़िता पर हुए अत्याचार का और न ही हाईकोर्ट द्वारा कही गई अन्य बातों का। इस हैडिंग में जो है, वो तो सबको पता है।

लेकिन, जबरन धर्म-परिवर्तन से देश को होने वाले नुकसान को लेकर इलाहाबाद हाईकोर्ट ने जो कहा, उसे बड़ी चालाकी से छिपा लिया गया। साथ ही अंतिम पैराग्राफ में कोर्ट द्वारा ‘फटकार लगाने’ की बात लिखी हुई है। जबकि असल में ये मामला उससे कहीं बड़ा है और हाईकोर्ट की टिप्पणियाँ भी गौर करने लायक है। ये मामला ‘मर्जी से शादी’ या ‘किसी भी धर्म अपनाने’ का नहीं है, अपहरण, यौन शोषण और जबरन धर्मांतरण का है।

वामपंथी मीडिया सिर्फ धर्मांतरण के एक कारण पर कोर्ट की टिप्पणी तो दिखा रहा है कि धर्म व जाति के ठेकेदारों को सुधरने की ज़रूरत है, लेकिन जिस ‘जबरन धर्मांतरण’ से ये मामला जुड़ा है, उस पर हाईकोर्ट की टिप्पणी पर मीडिया चुप्पी साधे हुए है। धर्म के प्रचार-प्रसार का अधिकार है, लेकिन डर, लालच और भय वाली बात जो हाईकोर्ट ने कही है, उसे छिपाई जा रही है। हाल ही में एक धर्मांतरण गिरोह का पर्दाफाश होने के बाद ये मुद्दा और गंभीर हो गया है।

गोविंद देव मंदिर: हिंदू घृणा के कारण औरंगजेब ने जिसे आधा ढाह दिया… और उसके ऊपर इस्लामिक गुंबद बना नमाज पढ़ी

मुगल आक्रांता औरंगजेब ने अपने शासनकाल के दौरान कई ऐसे हिन्दू मंदिरों को नष्ट कर दिया था, जिनका प्राचीन इतिहास हुआ करता था और जो अपने वैभव के लिए पूरे भारत में प्रसिद्ध हुआ करते थे। ऐसा ही एक मंदिर वृंदावन में मौजूद है, जो औरंगजेब के इस्लामिक कट्टरपंथ की कहानी कहता है। उत्तर भारत का सबसे सुंदर और विशाल गोविंद देव मंदिर जो अपनी बनावट और दिव्यता के लिए कभी सनातनियों का गौरव हुआ करता था, वहाँ आज भी उस कट्टरपंथी विचारधारा के निशान मौजूद हैं, जिनके कारण कई हिन्दू मंदिर नष्ट कर दिए गए। कहा जाता है कि इस मंदिर में भूतों का भी निवास है।

इतिहास

स्थानीय इतिहासकारों का मानना है कि भगवान गोविंद देव अर्थात श्रीकृष्ण का यह मंदिर वृंदावन के सबसे पुराने मंदिरों में से एक है। वैष्णव संप्रदाय के इस मंदिर का निर्माण राजा मानसिंह ने सन् 1590 में कराया था। गोविंद देव मंदिर का निर्माण सनातन गुरु और महान कृष्णभक्त श्री कल्याणदास जी की देखरेख में हुआ था। हालाँकि मंदिर निर्माण का पूरा खर्च राजा मानसिंह द्वारा ही उठाया गया था। निर्माण के समय मंदिर 7 मंजिला हुआ करता था और सबसे ऊपरी मंजिला पर एक विशालकाय दीपक का निर्माण कराया गया था और इस दीपक में प्रतिदिन बाती की लौ को जलाए रखने के लिए 50 किलोग्राम से अधिक देसी घी का उपयोग होता था।

यही कारण था मंदिर कई किलोमीटर (किमी) दूर से ही दिखाई देता था। मंदिर के इसी विशालकाय दीपक की चमक इसकी शत्रु साबित हुई। मंदिर के इस दीपक की लौ को देखकर तत्कालीन मुगल आक्रांता औरंगजेब के मन में ईर्ष्या का भाव उत्पन्न हो गया और इस भव्य मंदिर की सुंदरता उसे खटकने लगी। इसी ईर्ष्या और हिंदुओं के प्रति अपनी घृणा के चलते उसने अंततः एक दिन अपनी सेना को इस गोविंद देव मंदिर को तोड़ने का आदेश दे दिया। किसी दैवीय कृपा के कारण मंदिर के पुजारी को औरंगजेब की इस योजना का भान हो गया और उन्होंने मंदिर में स्थापित भगवान गोविंद की पुरातन प्रतिमा को वृंदावन से बहुत दूर, जयपुर भेज दिया, जहाँ उनकी स्थापना कनक बाग में स्थित गोविद देव मंदिर में हुई।

खैर, औरंगजेब अपनी सेना के साथ मंदिर को तोड़ने पहुँचा। मंदिर की भव्यता इतनी थी कि औरंगजेब की सेना 4 मंजिल ही गिरा सकी। इसके बाद औरंगजेब ने मंदिर को खंडित और अपवित्र करने के प्रयास में यहाँ नमाज पढ़ी और शेष बचे मंदिर पर मस्जिद की संरचनाएँ और गुंबद आदि बनवा दिए। हालाँकि 1873 तक मंदिर उसी अवस्था में रहा, जिस अवस्था में औरंगजेब द्वारा इसे छोड़ा गया था लेकिन इसके बाद मंदिर का जीर्णोद्धार प्रारंभ हुआ और मंदिर के साथ छेड़छाड़ करते हुए औरंगजेब ने जो निर्माण किया था, उसे हटा दिया गया और मंदिर का पुनर्निर्माण किया गया। मंदिर 200 फुट लंबा और 120 फुट चौड़ा था। साथ ही मंदिर की ऊँचाई 110 फुट थी।

स्थानीय मान्यताएँ

कहा जाता है कि औरंगजेब के द्वारा इस मंदिर को तोड़ दिए जाने के बाद इस मंदिर में भक्तों का आना-जाना बंद हो गया। कई सालों तक मंदिर वीरान अवस्था में रहा और इसी के चलते यहाँ भूतों का निवास हो गया। हालाँकि कहा जाता है कि इन भूतों द्वारा कभी भी किसी को कोई नुकसान नहीं पहुँचाया गया। इसके अलावा स्थानीय लोग तो यह भी मानते हैं कि इस मंदिर के निर्माण में भी भूतों का योगदान रहा है क्योंकि इस मंदिर की भव्यता और कारीगरी ऐसी है कि इसे 5 से 10 सालों में इंसान द्वारा बनाया जाना बहुत मुश्किल प्रतीत होता है।

दैनिक भास्कर की रिपोर्ट में बताया गया है कि मंदिर में मौजूद संतों का यह कहना है कि मथुरा में कृष्णजन्मभूमि पर जिस मस्जिद का निर्माण किया गया है, उसमें इस मंदिर को तोड़कर प्राप्त किए गए पत्थरों का भी उपयोग किया गया है। कहा जाता है कि मस्जिद के अधिकांश हिस्सों के पत्थर और गोविंद देव मंदिर के पत्थर एक जैसे ही हैं।

मंदिर के जीर्णोद्धार के बाद यहाँ भक्तों का आगमन शुरू हुआ और इसी के साथ यहाँ भगवान श्रीकृष्ण की प्रतिमा की स्थापना की गई। अब नियमित तौर पर इस मंदिर में भगवान की पूजा-पाठ और आरती का आयोजन किया जाता है। भले ही यहाँ के वास्तविक प्रतिमाओं को जयपुर के गोविंद वल्लभ मंदिर में स्थानांतरित कर दिया गया हो लेकिन वृंदावन के लोगों के लिए इस मंदिर का महत्व बिल्कुल वैसा ही है, जैसा पहले हुआ करता था। अब इस मंदिर में अनेकों त्यौहार भी धूमधाम से मनाए जाते हैं। श्रीकृष्ण जन्माष्टमी, राधा अष्टमी, श्रीरामनवमी और दीपावली यहाँ के प्रमुख त्यौहार हैं।

कैसे पहुँचें?

वृंदावन का नजदीकी हवाईअड्डा आगरा में स्थित है, जो यहाँ से लगभग 78 किमी की दूरी पर है। इसके अलावा यहाँ से दिल्ली के अंतरराष्ट्रीय हवाईअड्डे की दूसरी लगभग 170 किमी है। वृंदावन, आगरा-दिल्ली रेलमार्ग पर स्थित है।

वृंदावन में दो रेलवे स्टेशन हैं। मुख्य स्टेशन से गोविंद देव मंदिर की दूरी लगभग 1.5 किमी ही है। इसके अलावा सड़क मार्ग से भी वृंदावन पहुँचना काफी आसान है। वृंदावन दिल्ली और आगरा समेत उत्तर प्रदेश के कई शहरों से सड़क मार्ग से भली-भांति जुड़ा हुआ है।

‘ISIS की दुल्हन’ को ₹5 करोड़ का घर, इलाज का पूरा खर्चा: आतंकी हमलों का करती है बचाव, UK दे रहा सौगात पर सौगात

यूनाइटेड किंगडम ने ‘ISIS की दुल्हन’ सामिया हुसैन को £500,000 (5.17 करोड़ रुपए) का एक घर दिया है। साथ ही उसे वहाँ की राष्ट्रीय स्वास्थ्य योजना (NHS) के तहत मुफ्त इलाज की सुविधा भी दी गई। इस ‘ISIS की दुल्हन’ ने मेनचेस्टर में हुए बम धमाके में मारे गए बच्चों को ‘युद्ध का शिकार’ बताया था। याद हो कि मई 2017 में मेनचेस्टर में हुए आत्मघाती धमाके में 23 लोगों की मौत हो गई थी और 1000 से ज्यादा लोग घायल हुए थे।

सामिया हुसैन नाम की ये महिला पश्चिमी लंदन के साउथॉल की रहने वाली है। महिला ने दावा किया था कि जनवरी 2015 में जब सीरिया में सिविल वॉर अपने चरम पर था, तब उसे ऑनलाइन फँसा के (Groom) वहाँ बुलाया गया था और युद्ध में हिस्सा लेने के लिए बाध्य किया गया था। इसके बाद एक बम धमाके में वो घायल हो गई। 1 साल के भीतर हुए इस हमले की चपेट में आकर उसका एक बाँह और स्तन गंभीर रूप से जख्मी हो गए।

इसके बाद वो कई महीनों तक बिस्तर पर पड़ी रही। उसका इलाज चल रहा था। 7 महीने तक इलाज के बाद वो फरवरी 2020 में ब्रिटेन पहुँची। वहाँ उसे गिरफ्तार कर लिया गया, लेकिन उसके खिलाफ कभी कोई आपराधिक मुकदमा नहीं चलाया गया। उसकी एक बाँह धमाके में कट कर अलग हो गई थी। NHS की मदद से उसे एक कृत्रिम बाँह लगाई गई है। इसकी कीमत £3,000 (3.10 लाख रुपए) है। एक इंटरव्यू में उसने कहा था कि उसे तो कटे हुए सिर देख कर भी कोई हैरानी नहीं होती है, क्योंकि वो इसकी आदी रही है।

डॉक्टरों की फी से लेकर इलाज के बाद के अन्य खर्च भी है, जो इसके अतिरिक्त हैं। अब ‘ISIS की दुल्हन’ सामिया हुसैन पश्चिमी लंदन में सरकार द्वारा दिए गए घर में रह रही है। मैनचेस्टर में हुए बम धमाके में मारे गए लोगों में 10 ऐसे थे, जिनकी उम्र 20 से कम थी। शामिया हुसैन ने इन किशोरों की हत्या की निंदा करने से इनकार कर दिया था। साथ ही इसे आतंकी हमले की बजाए ‘युद्ध’ बताया था। उसने सीरिया में बमबारी से महिलाओं और बच्चों के मारे जाने का दावा करते हुए कहा था कि सब, सबको मार रहे हैं।

उसने इस घटना को एक ‘दुष्ट साइकिल’ का हिस्सा बताया था। साथ ही कहा था कि इसमें मारे जाने वाले दोनों तरफ के लोग ‘युद्ध के शिकार’ हैं। उसने कहा था कि वो इसके पक्ष में नहीं है कि ISIS के विरोध में बना सैन्य गठबंधन सीरिया में जाकर महिलाओं व बच्चों की ‘हत्या’ करे। सीरिया में एक हमले में जब शामिया हुसैन की बाँह कट गई थी, उस दौरान उसके पाँव भी जख्मी हो गए थे। लेकिन, अब NHS की मदद से इलाज हुआ है।

पाकिस्तानी मंत्री फवाद चौधरी चीन को भूले, Covid के लिए भारत को ठहराया जिम्मेदार, कहा- विश्व ‘इंडियन कोरोना’ से परेशान

पाकिस्तान के संघीय सूचना एवं प्रसारण राज्यमंत्री फवाद चौधरी ने उनके मुल्क और दुनिया में कोविड-19 के प्रसार के लिए भारत को जिम्मेदार ठहराया है। उन्होंने कहा कि दुनिया कोरोना वायरस महामारी पर जीत हासिल करने की कगार पर थी, लेकिन भारत सरकार की ढुलमुल नीतियों ने दुनिया को संकट में डाल दिया है।

फवाद चौधरी ने कहा, “इसमें कोई संदेह नहीं है कि पाकिस्तान में कोरोना वायरस बहुत तेजी से दोबारा फैला है। इस क्षेत्र का दुर्भाग्य है कि नरेंद्र मोदी सरकार को कोविड-19 से बचाव के लिए जो इंतजाम करने चाहिए थे, उन्होंने नहीं किए गए। इसकी वजह से हिंदुस्तान कोरोना वायरस का अब एक सोर्स बन गया है पूरी दुनिया में। ये जो कोरोना वायरस की चौथी लहर आई है, ये हिंदुस्तान से उठी है।”

उन्होंने डेल्टा वैरिएंट को इंडियन कोरोना वायरस बताते हुए कहा, “इसकी जो सबसे बड़ी वजह है, वो ये है कि जो हिंदुस्तान की हुकुमत है वो बदकिस्तमती से इंताजामात ऐसी नहीं ले सकी, जिससे कि ये कम होता हो। और उस वक्त जब हम बिल्कुल फतह के करीब थे, इंसान कोरोना वायरस पर कामयाबी पाकर उससे बाहर आ रहा था, उस वक्त हिंदुस्तान की हुकुमत की इंतेहाई गैर-जिम्मेदाराना पॉलिसीज की वजह से पूरी दुनिया दोबारा डेल्टा वायरस की शिकार हो गई है और उसकी वजह से दोबारा मुश्किलात का सामना करना पड़ रहा है।”

दिलचस्प बात यह है कि पाकिस्तान ने अब तक चीन को कोविड-19 के प्रसार के लिए जिम्मेदार नहीं ठहराया है। दुनिया को संदेह है कि चीन के वुहान लैब से कोरोना की उत्पति हुई और इसका पहला मामला वहीं सामने आया था। इसके बावजूद पाकिस्तान यह वायरस के प्रसार के लिए भारत को दोष दे रहा है और इसके डेल्टा वैरिएंट को इंडियन वैरिएंट बता रहा है।

ध्यान देने वाली बात यह भी है कि पश्चिमी देशों का महामारी के दौरान भारत की तुलना में कोविड प्रबंधन को लेकर बेहद खराब प्रदर्शन था, फिर भी फवाद चौधरी भारत पर दोष मढ़ना चाहते हैं। हालाँकि, यह नई बात नहीं है। पाकिस्तान में हर बात के लिए भारत पर दोष मढ़ने की प्रवृत्ति आम है।

उन्होंने हाल ही में दावा किया था कि भारतीयों ने पेगासस के जरिए इमरान खान की जासूसी की थी। इससे पहले उन्होंने पुलवामा आतंकी हमले के पीछे पाकिस्तान की भूमिका स्वीकार की थी। उन्होंने कहा था कि पाकिस्तान ने भारतीय क्षेत्र में घुसकर और पुलवामा में भारतीय सैनिकों पर हमला कर भारत को मुँहतोड़ जवाब दिया।

केरल के 53 वर्षीय दोषी पादरी रॉबिन से शादी के लिए रेप पीड़िता पहुँची SC: 20 साल की हुई थी सजा, सोमवार को होगी सुनवाई

केरल की एक बलात्कार पीड़िता ने उसका यौन शोषण करने वाले 53 वर्षीय कैथोलिक पादरी रॉबिन वडक्कुमचेरी से शादी करने की अनुमति के लिए सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया है। कोर्ट मामले की सुनवाई सोमवार (अगस्त 2, 2021) को करेगा। पादरी रॉबिन को फरवरी 2019 में एक अदालत द्वारा नाबालिग से बलात्कार और गर्भवती करने का दोषी पाए जाने के बाद 20 साल के कठोर कारावास की सजा सुनाई गई थी। उसे वेटिकन की तरफ से पादरी के पद से भी बर्खास्त कर दिया गया है।

पीड़िता ने वडक्कुमचेरी के लिए जमानत भी माँगी है ताकि उनकी शादी हो सके। रिपोर्ट्स के मुताबिक अदालत सोमवार को मामले पर विचार करेगी। इससे पहले, रॉबिन ने भी पीड़िता से शादी करने की माँग वाली एक याचिका के साथ केरल हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया था, लेकिन अदालत ने तब इसे ठुकरा दिया था

रॉबिन कन्नूर के पास एक पैरिश पादरी के रूप में सेवा कर रहा था और चर्च समर्थित स्कूल का प्रबंधक था। मई 2016 में लड़की कुछ डेटा-एंट्री कार्य के लिए वडक्कुमचेरी के कमरे में गई थी। उस साल उसने 10वीं के एग्जाम दिए थे। दोपहर में जब अन्य लड़कियाँ बाहर गई तो पादरी ने बच्ची को अपने बेडरूम में ले जाकर उसके साथ दुष्कर्म किया। रॉबिन ने घटना के बारे में किसी को न बताने की बात कहकर उसे घर जाने दिया।

जिसके बाद लड़की ने अपने परिवार को इस बारे में कुछ नहीं बताया। वह स्कूल जाती थी और हर दिन स्थानीय चर्च में सामूहिक रूप से उपस्थित होती थी। बलात्कार के कारण वह गर्भवती हो गई थी, लेकिन किसी को इस बात का अहसास नहीं हुआ। 7 फरवरी, 2017 को, लड़की के पेट में तेज दर्द हुआ और उसे पास के एक अस्पताल में ले जाया गया। जाँच करने पर पता चला कि लड़की गर्भवती है। उसने बाद में एक बच्चे को जन्म दिया। उसने अपनी माँ को इस घटना के बारे में बताया। जिसके बाद परिवार ने वडक्कुमचेरी के सामने मामला उठाया, उसने अस्पताल के 30,000 रुपए के बिल का भुगतान करने की पेशकश की।

पादरी को 27 फरवरी, 2017 को कोच्चि अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे के पास से गिरफ्तार किया गया था, जब वह देश से बाहर जाने की तैयारी कर रहा था। यौन अपराधों से बच्चों का संरक्षण (पॉस्को) अधिनियम के तहत मुकदमा चलाने के बाद पादरी को 17 फरवरी, 2019 को थालास्सेरी की एक अदालत ने 20 साल कैद की सजा सुनाई थी। सुनवाई के दौरान पीड़िता और उसकी माँ मुकर गई। मगर इसके बावजूद, अदालत पहले से एकत्र किए गए सबूतों के आधार पर आगे बढ़ी और फैसला सुनाया।

चार नन, एक अन्य पादरी और कॉन्वेंट से जुड़ी एक और महिला, जो पुलिस चार्जशीट में सह-आरोपित थे, को पर्याप्त सबूतों के अभाव में छोड़ दिया गया। संयोग से पिछले साल मार्च में, मंथवाडी (वायनाड जिले में) सूबे के अधिकारियों ने मीडिया को सूचित किया कि वेटिकन ने सारी प्रक्रिया से गुजरने के बाद रॉबिन को उसके पद से बर्खास्त करने का फैसला किया।

‘आदर्श स्टेशन योजना’ के तहत 1,206 स्टेशन हुए आधुनिक, जल्द हासिल होगा 1,253 का लक्ष्य: अश्विनी वैष्णव

आदर्श स्टेशन योजना के तहत विकास के लिए चिन्हित किए गए 1253 रेलवे स्टेशनों में से 1206 रेलवे स्टेशनों का विकास किया जा चुका है और शेष स्टेशनों का वित्तीय वर्ष 2021-22 में विकास कार्य किया जा रहा है। यह जानकारी रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने शुक्रवार (30 जुलाई, 2021) को राज्यसभा में एक प्रश्न के जवाब में दिया। 

उन्होंने बताया कि वित्त वर्ष 2021-22 में आदर्श स्टेशन योजना के तहत 1,253 रेलवे स्टेशनों का आधुनिकीकरण किया जाएगा। इसकी लागत 2,800 करोड़ आएगी। फंड को जोन के हिसाब से वितरित किया गया है। मध्य रेलवे के लिए धनराशि का आवंटन 230.58 करोड़ है जबकि पूर्वी रेलवे के लिए 178.71 करोड़ रुपए आवंटित किए गए हैं।

आदर्श योजना के तहत व्यस्त स्टेशनों में यात्री सुविधाएँ जैसे शौचालय, पेयजल, प्रतीक्षालय, बेंच, सभी में सुधार हुआ है। नागालैंड और त्रिपुरा राज्यों में एक-एक स्टेशन को अपग्रेड किया जाएगा, जबकि गोवा, हिमाचल प्रदेश और केंद्र शासित प्रदेश पुडुचेरी में दो-दो स्टेशन को विकसित किया जाएगा। दिल्ली में चार स्टेशनों, जम्मू-कश्मीर में पाँच और उत्तराखंड में आठ स्टेशनों का चयन किया गया है।

पश्चिम बंगाल में 384 स्टेशन, जबकि उत्तर प्रदेश में 152, महाराष्ट्र में 108, केरल में 75, बिहार में 59, ओडिशा में 47, आंध्र प्रदेश में 46, कर्नाटक और मध्य प्रदेश में 44 और राजस्थान में 40 स्टेशनों को अपग्रेड किया जाएगा। 2021-22 के लिए उत्तर रेलवे को सबसे ज्यादा 291 करोड़ रुपए का आवंटन मिला। मध्य रेलवे के लिए 230 करोड़ रुपए का आवंटन किया गया है, जबकि पूर्वी रेलवे के लिए 178 करोड़ रुपए का आवंटन किया गया है।

गौरतलब है कि अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस (8 मार्च) के मौके पर भारतीय रेलवे ने देश के इतिहास में हुई महिला वीरांगनाओं और शासकों की गाथाओं को जनता तक पहुँचाने का बीड़ा उठाया था। पहली बार उनके नाम रेलवे के इंजनों पर अंकित किए गए। झाँसी की रानी लक्ष्मीबाई, इंदौर की रानी अहिल्याबाई और रामगढ़ की रानी अवंतीबाई इनमें प्रमुख थी। ऐसे ही दक्षिण भारत में कित्तूर की रानी चिन्नम्मा, शिवगंगा की रानी वेलु नचियार को सम्मान दिया गया।

‘रामायण में भी कार्ल मार्क्स की झलक’: केरल की वामपंथी सरकार भगवान राम की शरण में, 7 दिन का प्रवचन

वामपंथी भी अब भगवान राम की शरण में पहुँच गए हैं। केरल की सत्ताधारी कम्युनिस्ट पार्टी ऑफ इंडिया (CPI) की मलप्पुरम जिला समिति ने 7 दिवसीय प्रवचन का आयोजन कराया, जहाँ रामायण और भगवान श्री राम पर चर्चा हुई। आज (शनिवार, 31 जुलाई 2021) समाप्त हुई इस ऑनलाइन संवाद सीरीज का शीर्षक था ‘रामायण एण्ड इंडियन हेरिटेज’।

केरल में CPI की मलप्पुरम जिला समिति ने अपने फेसबुक पेज पर रामायण पर आधारित 7 दिवसीय प्रवचन एवं संवाद श्रृंखला का आयोजन किया। CPI ने रामायण विचार सीरीज को 25 जुलाई से शुरू किया था, जो शनिवार (31 जुलाई 2021) को समाप्त हुई। इस संवाद कार्यक्रम में जिला एवं राज्य स्तर के भी कई कम्युनिस्ट नेताओं ने भाग लिया और रामायण पर चर्चा की।

हालाँकि, इन वामपंथी नेताओं द्वारा रामायण और भगवान श्री राम के जीवन पर चर्चा करना, केरल में आरएसएस के बढ़ते कद से प्रेरित माना जा रहा है और वामपंथी नेताओं ने इसे साबित भी किया। CPI की मलप्पुरम जिला समिति के सचिव पीके कृष्णदास ने कहा कि वर्तमान में कई सांप्रदायिक और फासीवादी तकतें हिन्दू धर्म से जुड़े हर मुद्दे पर अपना एकछत्र अधिकार मानती हैं। कृष्णदास ने कहा कि रामायण जैसे ग्रंथ देश की साझी विरासत और संस्कृति के अंग हैं और इस पर आधारित संवाद श्रृंखला का आयोजन वर्तमान समय में रामायण की प्रासंगिकता को परखने के लिए किया गया। इस संवाद सीरीज में भगवान राम और माता सीता के पोस्टर लगे हुए थे।

वामपंथी नेता एम केशवन नायर इस चर्चा में थोड़ा और आगे निकाल गए और उन्होंने कहा कि रामायण में व्याप्त राजनीति, संघ परिवार द्वारा की जा रही राजनीति से कहीं अलग है। नायर ने कहा कि भगवान राम को विरोधाभासी शक्तियों के संगम के रूप में दिखाया गया है, लेकिन जब एक वामपंथी रामायण पर विचार करता है तो उसके दिमाग जो पहला विचार आता है, वह है कार्ल मार्क्स का द्वंदात्मक भौतिकवाद का सिद्धांत। इस संवाद श्रृंखला में विचार रखने वाले लीलाकृष्णन ने कहा कि वो सब मिलकर रामायण के विभिन्न पहलुओं को सबके सामने लाकर उसकी फासीवादी व्याख्या को रोक सकते हैं।

हालाँकि, CPI इकलौती ऐसी पार्टी नहीं है जो श्री राम की शरण में पहुँची है। दशकों से लगातार राजनीतिक स्वार्थों से प्रेरित होकर हिन्दू हितों की बलि देने वाली पार्टियों के नेता भी आज मंदिरों में जा रहे हैं और हिन्दू मतदाताओं को लुभाने के पूरे प्रयास कर रहे हैं। CPI के नेताओं द्वारा रामायण पर परिचर्चा का आयोजन उसी बदलते राजनीतिक समीकरणों का परिणाम है, जहाँ अब हिन्दू भी अपने हितों के लिए जागरूक होता दिखाई दे रहा है। केरल में आरएसएस के सदस्यों के विरुद्ध लगातार होती रही हिंसा के बाद भी संगठन का विस्तार हो रहा है और हिन्दुत्व के प्रति संघ के सुदृढ़ विचारों के मद्देनजर वामपंथी नेताओं द्वारा श्री राम की स्तुति में प्रवचन का आयोजन करना, केरल में सरकती हुई अपनी राजनीतिक जमीन को बचाए रखने का एक उपाय ही है।