Home Blog Page 3612

8 बच्चे होंगे तो पंक्चर ही बनाएँगे… हम मुसलमानों को टोपी से टाई तक लाना चाहते हैं: UP सरकार के मंत्री मोहसिन रजा

उत्तर प्रदेश सरकार में अल्पसंख्यक कल्याण मंत्री मोहसिन रजा ने योगी आदित्यनाथ सरकार की नई जनसंख्या नीति पर बयान देते हुए कहा, “राज्य में जनसंख्या पॉलिसी बहुत जरूरी है। हमारी सरकार ने इस विषय पर जनता से भी राय माँगी है। इसके बाद ही हम इस कानून को लाएँगे।”

विपक्ष के रवैये पर निशाना साधते हुए मोहसिन रजा ने कहा, “हम (भारतीय जनता पार्टी की सरकार) मुसलमानों को टोपी से टाई की तरफ ले जाना चाहते हैं, लेकिन ये (विपक्ष) चाहते हैं कि वो अशिक्षित रहें। वो (मुस्लिम) रोज ऐसे ही आपके घर के आगे फेरी लगाते रहें, रद्दी खरीदते रहें, कबाड़ खरीदते रहें और छोटे-मोटे पंक्चर और परचून की दुकान पर बैठे दिखाई दें। ये हश्र इन्होंने किया है। इससे पहले कॉन्ग्रेस ने किया था और आज उत्तर प्रदेश में समाजवादी पार्टी कर रही है। ये इनका एजेंडा हो सकता है, हमारा एजेंडा सबका साथ सबका विकास है, जिस पर योगी सरकार काम कर रही है।”

उन्होंने आगे कहा, “जनसंख्या नियंत्रण हम सबकी चिंता है। हम 8 भाई-बहन हैं, लेकिन क्या आज हम 8 बच्चे पैदा कर सकते हैं? नहीं कर सकते हैं, क्योंकि हम उनको अच्छा संसाधन नहीं दे सकते, उनको अच्छी शिक्षा नहीं दे सकते, तो ये इस कानून को घूमा क्यों रहे हैं? इनकी कोई जननीति नहीं है। ये अपने निजी स्वार्थों की राजनीति करते रहे हैं। अब इनको प्रदेश की जनता समझ चुकी है। इसलिए ये हाशिए पर पड़े हुए हैं। आगे भी ये हाशिए पर ही रहेंगे।”

न्यूज 18 की रिपोर्ट के मुताबिक मोहसिन रजा ने ये भी कहा, “दो बच्चों को हम डॉक्टर और इंजीनियर बना सकते हैं, लेकिन 8 बच्चे होंगे तो साइकिल की दुकान पर पंक्चर बनाएँगे और फावड़ा लेकर मजदूरी ही करेंगे। हम धर्म और संप्रदाय को टारगेट नहीं कर रहे हैं, बल्कि देश को आगे ले जाना चाहते हैं।”

उल्लेखनीय है कि उत्तर प्रदेश में जनसंख्या नियंत्रण के लिए कानूनी उपायों के रास्ते बनने लगे हैं। राज्य विधि आयोग ने यूपी जनसंख्या (नियंत्रण, स्थिरीकरण व कल्याण) विधेयक-2021 का ड्राफ्ट तैयार कर लिया है। इसमें दो से अधिक बच्चे होने पर सरकारी नौकरियों में आवेदन से लेकर स्थानीय निकायों में चुनाव लड़ने पर रोक लगाने का प्रस्ताव है। सरकारी योजनाओं का भी लाभ न दिए जाने का जिक्र है। आयोग ने ड्राफ्ट अपनी वेबसाइट http://upslc।upsdc।gov।in/ पर अपलोड कर दी है। 19 जुलाई तक जनता से राय माँगी गई है।

जम्मू-कश्मीर में चुनाव से पहले परिसीमन: कितनी बदल जाएगी राजनीति, महबूबा की पार्टी को क्यों लगी है मिर्ची

जम्मू-कश्मीर में परिसीमन (Delimitation) राजनीतिक चर्चा का विषय बना हुआ है। मार्च 2020 में गठित परिसीमन कमीशन के आजकल जम्मू-कश्मीर के दौरे पर होने के कारण राजनीतिक दलों से प्रतिक्रिया आनी शुरू हो गई है। साल 2019 में जम्मू-कश्मीर में अनुच्छेद 370 हटने और लद्दाख को केंद्र शासित प्रदेश बनाने के बाद केंद्र सरकार के लिए आवश्यक था कि अगले चुनाव से पहले जम्मू-कश्मीर में परिसीमन की प्रक्रिया पूरी हो।

प्रदेश की सीमाएँ नए रूप में तय के करने के कारण विधानसभा में सदस्यों की संख्या बदलने के आसार हैं। साथ ही जम्मू और कश्मीर घाटी में विधानसभा सीटों की संख्या को लेकर वर्षों से जो विवाद रहा है, उसका भी हल निकलने की संभावना है। यही कारण है कि घाटी के राजनीतिक दलों ने इस प्रक्रिया को लेकर प्रतिक्रिया देनी शुरू कर दी है। महबूबा मुफ्ती की पीपुल्स डेमोक्रेटिक पार्टी (PDP) को छोड़ सभी राजनीतिक दल परिसीमन कमीशन से मिलने के लिए तैयार भी हैं।

क्या है परिसीमन

किसी लोकसभा या विधानसभा सीट के पुनः आरेखण (Redrawing) को परिसीमन (Delimitation) कहते हैं। जनसंख्या के घटकों में बदलाव के कारण लोकसभा या विधानसभा क्षेत्र को समय-समय पर परिसीमन की आवश्यकता पड़ती है ताकि राज्य या केंद्र शासित प्रदेशों में डेमोग्राफी में हुए बदलाव के अनुसार लोकसभा या विधानसभा सीटों की संख्या बढ़ाई जा सके। इसके साथ ही न केवल होने वाले बदलाव का पता चल सके, बल्कि उसके अनुसार सीट का परिसीमन किया जा सके।

परिसीमन की इसी प्रक्रिया को तय करने के लिए परिसीमन कमीशन का गठन होता है जो एक स्वतंत्र कमीशन होता है और अपनी कार्यप्रणाली खुद तय करता है। यह कमीशन सरकार के अधीन नहीं रहता और न ही इसके काम करने के तरीके पर सरकार का कोई हस्तक्षेप होता है। परिसीमन कमीशन की अध्यक्षता उच्चतम न्यायालय के अवकाश प्राप्त न्यायाधीश करते हैं। कमीशन के सदस्यों का चयन कमीशन अध्यक्ष केंद्रीय चुनाव आयोग और राज्य निर्वाचन आयोग से करते हैं।

वर्तमान परिसीमन कमीशन के अध्यक्ष जस्टिस (अवकाश प्राप्त) रंजन प्रकाश देसाई कर रहे हैं। कमीशन को मिले मैंडेट के अनुसार उसे जम्मू-कश्मीर के साथ ही अरुणाचल प्रदेश, नगालैंड, असम और मणिपुर की लोकसभा और विधानसभा की सीटों का पुनः आरेखण (Redrawing) करना है।

अब तक कुल चार परिसीमन कमीशन

केंद्रीय स्तर पर भारत में अभी तक कुल चार परिसीमन कमीशन का गठन हो चुका है। अंतिम कमीशन का गठन वर्ष 2002 में किया गया था। यह अलग बात है कि पिछले लगभग पचास वर्षों में लोकसभा की सीटों में किसी तरह का बदलाव नहीं हुआ है और 1972 से उनकी संख्या 543 रही है।

परिसीमन की प्रक्रिया के तहत कमीशन अंतिम जनगणना के आँकड़ों का अध्ययन, वर्तमान सीटों में जनसंख्या का अध्ययन, परिसीमन के लिए सीटों का चुनाव और उनमें किए जाने वाले संभावित बदलाव पर एक ड्राफ्ट रिपोर्ट प्रस्तुत करता है। यह रिपोर्ट केंद्र सरकार के गजट में छपता है। साथ ही यह राज्य सरकार के आधिकारिक गजट और स्थानीय अखबारों में छपता है ताकि संभावित बदलावों को लेकर राज्य के नागरिक अपना मंतव्य दे सकें।

नागरिकों से मिले मंतव्य की विवेचना के साथ यह कमीशन के अधिकार क्षेत्र में है कि आवश्यकता पड़ने पर वह अंतरिम रिपोर्ट में बदलाव करने का फैसला कर सकता है। बदलाव के बाद अंतरिम रिपोर्ट को अंतिम रूप देकर उसे भारत गणराज्य के आधिकारिक गजट में प्रकाशित किया जाता है और भारत के राष्ट्रपति द्वारा निर्धारित तिथि से परिसीमन को लागू माना जाता है।

जम्मू-कश्मीर में परिसीमन का संभावित असर

वर्ष 2019 में अनुच्छेद 370 हटाए जाने से पहले जम्मू-कश्मीर में परिसीमन जम्मू -कश्मीर के संविधान के तहत बने कानून के अनुसार होता था। यह अलग बात है कि परिसीमन की प्रक्रिया वही थी जो केंद्र सरकार द्वारा गठित परिसीमन कमीशन के तहत होती थी। अनुच्छेद 370 हटाए जाने और राज्य के पुनर्गठन के पश्चात जम्मू-कश्मीर में परिसीमन का काम अब केंद्र द्वारा गठित परिसीमन कमीशन के अधीन आ गया है। इसी को लेकर मार्च 2020 में केंद्र ने परिसीमन कमीशन का गठन किया जो इस समय जम्मू-कश्मीर में अलग-अलग राजनीतिक दलों से चर्चा कर रहा है।

जम्मू-कश्मीर में हुए अभी तक के सारे परिसीमन को लेकर जम्मू के लोगों की यह शिकायत रही है कि पहले गठित हर परिसीमन कमीशन ने सीटों की संख्या के मामले में कश्मीर घाटी को एक तरह का अनुचित लाभ दिया था। जम्मू के लोगों की यह शिकायत पुरानी है। यह अलग बात है कि घाटी से चलने वाली राज्य सरकारें इन शिकायतों को नजरअंदाज करती आई थी। इस बार जम्मू के लोगों में एक आशा जगी है कि उनकी शिकायतों को अनदेखा नहीं किया जाएगा। वर्तमान परिसीमन कमीशन पहली बार जम्मू-कश्मीर में अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति के लिए आरक्षित सीट निकालेगी।

जम्मू-कश्मीर में परिसीमन का आधार क्या हो, इसे लेकर राजनीतिक दलों मतभेद है। जहाँ सीपीआई (एम) का मानना है कि वर्ष 2011 की जनगणना को आधार बनाया जाए, वहीं अन्य दलों के अनुसार परिसीमन की प्रक्रिया और नए सीटों को निकालने के लिए जनसंख्या को आधार बनाया जाना चाहिए। लद्दाख के अलग से केंद्र शासित प्रदेश बनाए जाने के बाद जम्मू-कश्मीर में विधानसभा सीटों की संख्या 87 से 83 हो गई है। कमीशन जम्मू-कश्मीर में सीटों की संख्या 90 करने वाला है। कमीशन के अनुसार उसके सदस्य राज्य में सभी राजनीतिक दलों के प्रतिनिधियों से मिल रहे हैं। कमीशन ने यह विश्वास दिलाया है कि अगले चुनाव के पहले वह परिसीमन संबंधित प्रक्रिया पूरी कर लेगा।

जम्मू-कश्मीर में होने जा रहे इस परिसीमन का राजनीतिक महत्व इसलिए भी है, क्योंकि कयास लगाए जा रहे हैं कि इससे जम्मू के लोगों की वर्षों पुरानी शिकायत को दूर करने की दिशा में कोई कदम उठाया जा सकता है। यह बात शायद घाटी के राजनीतिक दलों के लिए सुखद न हो। 

गर्भवती नुसरत जहां टानती हैं ड्रग्स-गाँजा? ‘आँखों में नशा’ देख कर सोशल मीडिया पर लोग कर रहे ट्रोल

बंगाली अभिनेत्री और टीएमसी सांसद नुसरत जहां पिछले ​कुछ दिनों से प्रेग्नेंसी और अपनी शादी टूटने को लेकर खासा चर्चा में हैं। नुसरत जल्द ही माँ बनने वाली हैं। इसी बीच इंस्टाग्राम पर एक तस्वीर को लेकर वह ट्रोलर्स के निशाने पर आ गई हैं। उनकी यह तस्वीर सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रही है, जिसमें टीएमसी सांसद अपनी दोस्तों के साथ मस्ती करती हुई नजर आ रही हैं।

दरअसल, नुसरत की खास दोस्त व एक्ट्रेस तनुश्री ने अपने इंस्टाग्राम अकाउंट पर तीन हार्ट इमोजी के साथ एक फोटो शेयर की है। इसमें उन दोनों के साथ एक्ट्रेस श्राबंती भी नजर आ रही हैं। फोटो में साफ दिखाई दे रहा है कि तीनों ने जमकर मस्ती की है। हालाँकि, यूजर्स को उनकी ये हरकतें पसंद नहीं आई और उन्होंने तीनों को ट्रोल करना शुरू कर दिया।

एक यूजर ने कहा कि ड्रग्स लेने के बाद तीनों की आँखों में नशा दिखाई दे रहा है। वहीं, काफी लोगों ने बंगाली भाषा में कमेंट कर इनकी क्लास लगाई है।

इंस्टाग्राम पोस्ट का स्क्रीनशॉट

इंस्टाग्राम पर prosidadhikary123 नाम के यूजर ने लिखा तीन भूतनी, जबकि doomer.5237 नाम के यूजर ने लिखा चरस गाँजा मेरे को प्यारा।

इंस्टाग्राम पोस्ट का स्क्रीनशॉट

हालाँकि, यह पहला मौका नहीं है, जब सोशल मीडिया पर नुसरत को ट्रोल किया गया हो। इससे पहले वह निखिल जैन से शादी, माँग में सिंदूर, हिंदू पूजा-पाठ, फिर दोनों के बीच तनाव को लेकर कई बार ट्रोलर्स के निशाने पर आ चुकी हैं।

गौरतलब है कि बीते दिनों नुसरत जहां ने एक बयान जारी करके कहा था कि निखिल जैन के साथ उनकी शादी कभी हुई ही नहीं थी और भारतीय कानून की नजर में भी वो सिर्फ एक लिव-इन रिलेशनशिप था, विवाह नहीं। तुर्की में ये शादी हुई थी, जिसका यहाँ अलग-अलग समुदाय के लोगों के बीच होने वाली शादी वाला स्पेशल रजिस्ट्रेशन नहीं कराया गया था। नुसरत जहां ने इसी आधार पर कहा था कि शादी हुई ही नहीं तो तलाक का सवाल ही नहीं उठता है।

वहीं, एक्ट्रेस की प्रेग्नेंसी की खबर सोशल मीडिया वायरल होने के बाद उनके पति निखिल ने कहा था कि उन्हें नुसरत की प्रेग्नेंसी के बारे में कुछ नहीं पता है। साथ ही उन्होंने नुसरत के बच्चे का पिता होने से भी इनकार कर दिया था।

निखिल ने दावा किया था कि नुसरत की प्रेग्नेंसी की खबर से वह खुद भी हैरान हैं। उन्होंने एबीपी आनंदा से कहा था कि उनकी और नुसरत की शादी टूट गई है और वे छह महीने से ज्यादा समय से साथ नहीं रह रहे हैं। ऐसे में किसी भी तरह से ये बच्चा उनका नहीं है। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक नुसरत कथित तौर पर बीजेपी उम्मीदवार रहे और एक्टर यश दासगुप्ता के साथ रिलेशनशिप में हैं। ये दोनों ‘एसओएस कोलकाता’ की शूटिंग के दौरान करीब आए थे।

‘मस्जिद में बैठ कर कुरान पढ़ रहे क्रिस्टियानो रोनाल्डो, इस्लाम में रखते हैं श्रद्धा’: वायरल वीडियो का फैक्ट-चेक

सोशल मीडिया पर एक वीडियो वायरल हो रहा है, जिसके आधार पर दावा किया जा रहा है कि दुनिया के सबसे के सबसे लोकप्रिय फुटबॉलरों में से क्रिस्टियानो रोनाल्डो एक मस्जिद में बैठ कर इस्लाम की पवित्र पुस्तक कुरान का पाठ कर रहे हैं। इसी वीडियो के आधार पर कहा जा रहा है कि क्रिस्टियानो रोनाल्डो इस्लाम में श्रद्धा रखते हैं। वीडियो पर TikTok का मार्क लगा है। कुरान पढ़ रहा व्यक्ति देखने में रोनाल्डो ही लग रहा।

फेसबुक पर इस वीडियो को खास कर के कई लोगों ने शेयर किया, जिसे लाखों बार देखा गया।

अब हम आपको बताते हैं कि इस वीडियो की सच्चाई क्या है। असल में ये वीडियो क्रिस्टियानो रोनाल्डो के एक हमशक्ल की है, जिसके TikTok अकाउंट पर 6.72 लाख से भी अधिक फॉलोवर्स हैं। इस व्यक्ति का नाम बेवर अब्दुल्लाह है और वो पहले से ही मुस्लिम है। मूल रूप से ईराक के अब्दुल्लाह इंग्लैंड के बर्मिंघम में रहते हैं। @bewarabdullah यूजरनेम से TikTok चलाने वाले अब्दुल्लाह पहले से ही ईराक में जाना-पहचाना नाम हैं।

अब्दुल्लाह के बारे में खास बात ये है कि वो रोनाल्डो की तरह न सिर्फ ड्रेसिंग स्टाइल और हेयर स्टाइल रखते हैं, बल्कि फुटबॉल के भी शौक़ीन हैं। इसीलिए, इंग्लैंड में भी कई लोग उन्हें जानने लगे हैं। अब्दुल्लाह रोनाल्डो की तरह ही 7 नंबर की जर्सी पहन कर फील्ड में उन्हीं की पोजीशन पर खेलते हैं। रोनाल्डो से मिलने का उनका सपना है। वो 2019 में एक कंट्रक्शन वर्कर के रूप में यूके आए थे।

हाल ही में क्रिस्टियानो रोनाल्डो तब चर्चा में आए थे, जब उन्होंने यूरो 2020 प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान अपने सामने रखी कोका कॉल की बोतल को वहाँ से हटा दिया था और पानी की माँग की थी। कोका कोला उस कार्यक्रम का आधिकारिक स्पॉन्सर था। कॉन्फ्रेंस खत्म होते-होते कोका कोला कंपनी के शेयर के दाम 1.6% गिर गए और उसे 29.79 हजार करोड़ रुपयों का बड़ा घाटा हुआ था। बता दें कि दुनिया भर में इंस्टाग्राम पर सबसे ज्यादा फैन फॉलोविंग उनकी ही है।

40 साल से चल रहा था संजय गाँधी एनिमल केयर सेंटर, प्रताड़ना से कुत्ते की मौत के बाद मेनका गाँधी ने अस्थायी तौर पर बंद किया

संजय गाँधी एनिमल केयर सेंटर (SGACC) में एक कुत्ते को दो पैरा पशु चिकित्सकों द्वारा बेरहमी से पीटे जाने के कुछ दिनों बाद, बीजेपी सांसद मेनका गाँधी ने पशु देखभाल सुविधा को अस्थायी रूप से बंद करने की घोषणा की है। मेनका गाँधी ने ट्विटर पर एक बयान में कहा, “यह दुख और रोष को बयाँ करता है। हाल में एक कुत्ता नई दिल्ली के संजय गाँधी पशु देखभाल केंद्र (SGACC) में लाया गया था। बीते एक साल से कोरोना की वजह से SGACC में कर्मचारियों की कमी है और दो नए पैरा-पशु चिकित्सक मदद के लिए रखे गए थे। इस दौरान घटना ने दुखद मोड़ लिया, जब कुत्ता काफी दर्द में था तब पैरा-पशु चिकित्सक ने उसे बेरहमी से पीटा, जिसके बाद चोटों से कुत्ते की मौत हो गई।”

भाजपा सांसद ने आगे कहा, “इस घटना ने हम सभी को अंदर तक झकझोर दिया है। जब से मैंने भयावह वीडियो देखा है, तब से मैं व्यक्तिगत रूप से गुस्से से काँप रही हूँ। हमने तुरंत पैरा-पशु चिकित्सकों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की और उन्हें गिरफ्तार कर लिया गया है। विभाग के प्रभारी चिकित्सक को छुट्टी का नोटिस दिया गया है। लेकिन इतना पर्याप्त नहीं है। SGACC अपने मिशन में लड़खड़ा गया है और इसे फिर से खड़ा करने की जरूरत है।”

मेनका गाँधी ने 40 साल की सेवा के बाद संजय गाँधी पशु देखभाल केंद्र को अस्थायी रूप से बंद करने और पशु बचाव मिशन को बंद करने की घोषणा की। उन्होंने आश्वासन दिया कि सभी जानवरों का पुनर्वास पशु देखभाल सुविधा द्वारा किया जाएगा। सुल्तानपुर के भाजपा सांसद ने पशु आश्रय का भौतिक रूप से पुनर्निर्माण करने, नया बुनियादी ढाँचा बनाने और पर्याप्त स्टाफ सदस्य सुनिश्चित करने का संकल्प लिया।

उन्होंने कहा, “हम अस्पताल प्रबंधन और उसके कर्मचारियों को पूरी तरह से बदल देंगे और यह सुनिश्चित करेंगे कि वहाँ काम करने वाले सभी लोगों को पशु-संवेदनशीलता प्रशिक्षण प्रदान किया जाए। हम अपनी आंतरिक नीतियों और प्रोत्साहन तंत्र की भी समीक्षा करेंगे। समय आ गया है कि इस संस्था को फिर से खड़ा किया जाए और यह सुनिश्चित किया जाए कि ऐसी घटना दोबारा कभी न हो।”

पीपुल फॉर एनिमल (PFA) की कार्यकर्ता कावेरी चौधरी ने सोमवार (5 जुलाई, 2021) को एक ट्वीट में कुत्ते के साथ दो पैरा पशु चिकित्सकों की बेरहमी का विचलित करने वाला वीडियो शेयर किया था। उन्होंने ट्वीट में कहा था, “बेचारे बीमार कुत्ते को फर्श पर पटका गया, मुँह पर मारा गया और स्टाफ हँस रहा था। संजय गाँधी पशु अस्पताल में इस बर्बरता के बारे में आज मुझे एक अज्ञात रिपोर्टर से कई भयावह वीडियो मिले। इसे देख कर मेरी आत्मा विचलित हो उठी।”

सूचना देने वाली लड़की उसी पशु आश्रय में काम करती थी। उसने आरोपित की पहचान पैरा पशु चिकित्सक सत्यम और प्रदीप के रूप में की। युवती ने दोनों पर महिला कुत्ते के साथ दुष्कर्म करने का प्रयास करने का आरोप लगाया। जानवर का पेट फूला हुआ और योनि से भारी रक्तस्राव पाया गया। दुर्भाग्य से, कुत्ते ने चोटों के कारण दम तोड़ दिया।

भारतीय मूल की सिरिशा बांदला… वायुसेना पायलट नहीं बन सकीं, अब जा रहीं अंतरिक्ष में, होंगी तीसरी ‘इंडियन’ महिला

सुनीता विलियम्स और कल्पना चावला के बाद अब भारत की एक और बेटी सिरिशा बांदला अंतरिक्ष की सैर करने वाली हैं। भारतीय मूल की सिरिशा मशहूर उद्योगपति रिचर्ड ब्रैनसन की स्पेस कंपनी वर्जिन गैलेक्टिक के अंतरिक्ष यान वर्जिन ऑर्बिट में बैठकर रविवार (11 जुलाई 2021) को अंतरिक्ष यात्रा पर रवाना होंगी। अंतरिक्ष यात्रा पर जा रही ब्रैनसन की टीम में बांदला के अलावा एक दूसरी महिला बेश मोसिस भी शामिल हैं।

रिपोर्ट्स के मुताबिक, आंध्र प्रदेश के गुंटूंर जिले में जन्मी सिरिशा वर्जिन गैलेक्टिक कंपनी में गवर्नमेंट अफेयर्स एंड रिसर्च ऑपरेशंस की वॉयस प्रेसीडेंट हैं। वह अमेरिका में टेक्सास के ह्यूस्टन में पली-बढ़ी हैं। भारत में सिरिशा केवल 5 साल तक ही रही हैं। 34 वर्षीय सिरिशा पर्ड्यू यूनिवर्सिटी से एयरोनॉटिकल/एस्ट्रोनॉटिकल इंजीनियरिंग में ग्रैजुएट हैं और जॉर्जटाउन यूनिवर्सिटी से MBA की डिग्री हासिल की हैं।

सिरिशा बांदला ने महज 6 सालों की नौकरी में ही यह पद हासिल कर लिया है। वह भारतीय मूल की तीसरी ऐसी महिला हैं, जो अंतरिक्ष के सफर पर रवाना होने वाली हैं। इससे पहले सुनीता विलियम्स और कल्पना चावला अंतरिक्ष में गई थीं। बताया जा रहा है कि ब्रैनसन की टीम में सिरिशा के अलावा चार और लोग भी शामिल हैं।

उन्होंने हाल ही में ट्वीट किया, “मैं यूनिटी22 के बेहतरीन क्रू का हिस्सा बनकर और एक ऐसी कंपनी का साथ पाकर बेहद सम्मानित महसूस कर रही हूँ, जिसका मिशन सभी के लिए अंतरिक्ष को सुगम बनाना है।” सिरिशा के अंतरिक्ष में जाने की खबर सोशल मीडिया पर वायरल होते ही हर भारतीय खुद को गौरवान्वित महसूस कर रहा है और उन्हें ट्विटर पर बधाई दे रहे हैं।

गौरतलब है कि सिरिशा बचपन से ही अंतरिक्ष यात्री बनना चाहती थीं। हालाँकि, कमजोर दृष्टि होने के कारण वह वायुसेना में पायलट नहीं बन सकीं। लेकिन अब वह अपनी अंतरिक्ष यात्रा के दौरान अंतरिक्षयात्रियों पर होने वाले असर का अध्ययन भी करेंगी।

सिरिशा के पिता डॉक्टर मुरलीधर एक वैज्ञानिक हैं और अमेरिकी सरकार में वरिष्ठ कार्यकारी सेवा के सदस्य हैं। वहीं, उनके दादा बांदला रगहिया एक कृषि विज्ञानी हैं। वह अपनी पोती की इस उपलब्धि से बेहद खुश हैं। उन्होंने कहा, “हमेशा उसमें कुछ बड़ा हासिल करने का उत्साह देखता था। आखिरकार वह अपना सपना पूरा करने जा रही है। मुझे विश्वास है कि वह इस मिशन में सफलता हासिल करेगी और पूरे देश को गर्व महसूस कराएगी।”

पुलिस वाले सस्पेंड, निर्दलीय समर्थक गिरफ्तार; तब जाकर सपा कार्यकर्ता की ‘साड़ी’ पर जागे राहुल गॉंधी

पार्ट टाइम पॉलिटिशियन के तौर पर अपनी पहचान बना चुके कॉन्ग्रेस नेता राहुल गाँधी ने उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ पर निशाना साधा है। उन्होंने लखीमपुर खीरी में एक सपा कार्यकर्ता को परेशान की जाने की खबर का स्क्रीनशॉट पोस्ट करते ट्वीट किया कि प्रदेश में ‘हिंसा’ का नाम बदल कर उसे ‘मास्टर स्ट्रोक’ कर दिया गया है। दरअसल, सपा कार्यकर्ता को परेशान करने के आरोप में एक व्यक्ति को गिरफ्तार किए जाने और लखीमपुर खीरी पुलिस स्टेशन के सभी पुलिसकर्मियों को सस्पेंड किये जाने के बाद राहुल गाँधी का ध्यान इस तरफ गया है।

अपनी नासमझी के कारण राहुल गाँधी मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को निशाना बनाने की कोशिश कर रहे हैं। उनकी नामसझी और ‘एक भाषण के बाद एक छुट्टी’ वाले तरीके के कारण ही 2019 लोकसभा चुनावों में कॉन्ग्रेस 52 सीटों पर सिमट गई थी। दिलचस्प बात यह है कि राहुल गाँधी हमेशा की तरह ही इस राजनीतिक द्वंद्व में भी थोड़ी देर से आए हैं।

बता दें कि जिस तरीके से पश्चिम बंगाल में चुनाव के बाद हुई राजनीतिक हिंसा की घटनाएँ बेरोक-टोक जारी हैं, उसके ठीक विपरीत उत्तर प्रदेश की योगी आदित्यनाथ सरकार ने इस मामले में कड़ी कार्रवाई की है।

रिपोर्ट के मुताबिक, नामाँकन दाखिल करने के दौरान समाजवादी पार्टी के एक कार्यकर्ता की प्रस्तावक रही महिला कार्यकर्ता को परेशान किए जाने और महिला के कपड़े उतारने की घटना के अगले ही दिन सीएम योगी आदित्यनाथ ने लखीमपुर पुलिस स्टेशन के सभी पुलिसकर्मियों को निलंबित करने का आदेश दे दिया। इस घटना में थाना प्रभारी और सीओ तक को नहीं बख्शा गया और उन्हें भी निलंबित कर दिया गया।

समाजवादी पार्टी की प्रत्याशी रितु सिंह की शिकायत के आधार पर आरोपित यश वर्मा और अन्य अज्ञात बीजेपी कार्यकर्ताओं के खिलाफ आईपीसी की धारा 147, 171एफ, 354, 392 और 427 के तहत मामला दर्ज किया गया है। ताजा रिपोर्ट के मुताबिक, पुलिस ने यश वर्मा को गिरफ्तार भी कर लिया है। एएनआई की रिपोर्ट में कहा गया है कि आरोपित यश निर्दलीय उम्मीदवार का समर्थक है। वहीं, इंडिया टुडे के अनुसार, मामले में दूसरे आरोपित को भी दबोच लिया गया है।

दिलचस्प बात यह है कि उत्पीड़न की घटना पर कड़ी कार्रवाई करने के बावजूद कॉन्ग्रेस नेता सीएम योगी आदित्यनाथ पर निशाना साध रहे हैं। जबकि, पश्चिम बंगाल में भाजपा कार्यकर्ताओं और समर्थकों की बड़े पैमाने पर हत्या, बलात्कार और यातना के बारे में उन्होंने बात तक नहीं की है। जबकि, हाल ही में NHRC की कमेटी की रिपोर्ट को देखने के बाद कलकत्ता उच्च न्यायालय ने टीएमसी के चुनाव जीतने और ममता बनर्जी के मुख्यमंत्री बनने के बाद राज्य में हुई राजनीतिक हिंसा के खिलाफ तीखी टिप्पणी की थी।

कलकत्ता हाईकोर्ट ने कहा था, “याचिकाकर्ताओं द्वारा लिया गया स्टैंड से पता चलता है कि चुनाव के बाद हिंसा हुई थी और राज्य गलत रास्ते पर था। राज्य सरकार इन घटनाओं की पूरी तरह अनदेखी कर रही थी।” कोर्ट ने जाँच में पाया कि राज्य में चुनाव बाद हुई हिंसा में कई लोग मारे गए, कई महिलाओं का यौन शोषण किया गया, लोगों को गंभीर चोटें आईं। यहाँ तक कि नाबालिग लड़कियों तक को नहीं छोड़ा गया। हिंसा के पीड़ितों में से कईयों का आशियाना उजड़ गया और उन्हें पड़ोसी राज्यों में पलायन करना पड़ा।”

उच्च न्यायालय ने पश्चिम बंगाल सरकार पर तीखी टिप्पणी करते हुए कहा था, “आज तक राज्य सरकार ऐसा माहौल नहीं बना सकी है कि पीड़ितों में वो विश्वास जाग सके कि वो अपने घर वापस लौट सकें या अपना व्यवसाय कर सकें।” अदालत ने यह भी पाया कि पुलिस ने पीड़ितों की शिकायतें दर्ज करने की बजाय शिकायत करने वाले लोगों के खिलाफ ही केस दर्ज किया।

हाईकोर्ट ने अपने आदेश में कहा था, ”पश्चिम बंगाल की हिंसा के दौरान रजिस्टर्ड हुए केसों की जाँच में इतनी लापरवाही बरती है कि मामलों में शायद ही कभी कोई गिरफ्तारी हो। कुछ केस दर्ज ही नहीं हुए। ज्यादातर मामलों में आरोपित जमानत पर बाहर आ चुके हैं।” कोर्ट ने यह भी कहा कि जघन्य अपराधों के केस में पुलिस ने तभी केस दर्ज किया जब उस मामले में खुद हाईकोर्ट ने संज्ञान लिया।

हाई कोर्ट द्वारा इस तरह की तीखी टिप्पड़ियों के बाद भी राहुल गाँधी के कानों जूँ तक नहीं रेंगी। वह चुप ही रहे।

लखीमपुर खीरी में क्या हुआ

गुरुवार (08 जुलाई 2021) को ब्लॉक पंचायत की कैंडिडेट के साथ नामांकन दाखिल करने आई एक महिला नेता पर दो लोगों ने हमला कर दिया था। सपा नेता की प्रस्तावक रही महिला कार्यकर्ता के साथ नामांकन केंद्र पर कुछ लोगों ने मारपीट की और उसके कपड़े उतारने की कोशिश की। रिपोर्ट के मुताबिक, आरोपित निर्दलीय प्रत्याशी का समर्थक था।

इस वारदात का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो गया और इसको लेकर लोग अपना गुस्सा जता रहे थे। वीडियो में देखा जा सकता है कि समाजवादी पार्टी (सपा) की एक महिला कार्यकर्ता को उत्तर प्रदेश में स्थानीय चुनावों के लिए नामांकन दाखिल करते समय दो लोग हमला कर देते हैं। आरोपितों को उसके साथ छेड़छाड़ उसकी साड़ी उतारने की कोशिश करते देखा जा सकता है।

एक-दूसरे को ही पीट रहे रहे कॉन्ग्रेसी: कर्नाटक में अध्यक्ष शिवकुमार ने मारा थप्पड़, राजस्थान में भी हाथापाई

कर्नाटक कॉन्ग्रेस के अध्यक्ष डीके शिवकुमार का एक वीडियो सोशल मीडिया में वायरल हुआ है। इसमें वह अपनी ही पार्टी के एक कार्यकर्ता को थप्पड़ मारते दिख रहे हैं। शिवकुमार का कहना है कि Covid-19 प्रोटोकॉल का उल्लंघन होने पर उन्हें गुस्सा आया था। लेकिन सोशल मीडिया पर लोग इसे कॉन्ग्रेसी नेता का अहंकार बता रहे हैं।

घटना मांड्या की है। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक पार्टी के वरिष्ठ नेता और पूर्व मंत्री मादेगौड़ा के स्वास्थ्य की जानकारी लेने के लिए शिवकुमार मांड्या गए हुए थे। वायरल वीडियो में एक व्यक्ति उनके साथ चलता और उनके कंधे पर हाथ रखने की कोशिश करता दिख रहा है। इससे नाराज होकर शिवकुमार उस व्यक्ति को थप्पड़ मार देते हैं।

वीडियो वायरल होने पर शिवकुमार ने सफाई देते हुए कहा कि सोशल डिस्टेंसिंग का पालन न होने के कारण उन्हें गुस्सा आ गया था। जब शिवकुमार को यह पता चला कि उनका वीडियो मीडिया के पास है तो उन्होंने वीडियो डिलीट करने की माँग भी की।

हालाँकि यह पहली बार नहीं है जब कॉन्ग्रेस के वरिष्ठ नेता शिवकुमार ने अपना आपा खोया हो। इसके पहले भी वो अपने समर्थकों को ही सेल्फी लेने के लिए थप्पड़ मार चुके हैं। 2018 में कॉन्ग्रेस के चुनाव प्रचार के दौरान बेल्लारी में उन्होंने एक आदमी को थप्पड़ मार दिया था, क्योंकि वह उनके साथ सेल्फी लेना चाहता था।

राजस्थान में भी कॉन्ग्रेसियों के आपस में उलझने और हाथापाई का मामला सामने आया है। दैनिक भास्कर की रिपोर्ट के अनुसार राजसमंद में केंद्र सरकार के खिलाफ प्रदेश स्तरीय विरोध प्रदर्शन को लेकर बैठक बुलाई गई थी। इसी दौरान युवा कॉन्ग्रेस जिला उपाध्यक्ष दिलीप जोशी ने पार्टी पर कार्यकर्ताओं की अनदेखी का आरोप लगाया। इसके कारण विवाद इतना बढ़ गया कि हाथापाई की नौबत आ गई। राजसमंद के पार्टी प्रभारी पुष्पेंद्र भारद्वाज ने दिलीप जोशी को बाहर निकालने के आदेश दिए और उनके साथ धक्का-मुक्की की गई।

संजय गाँधी की ‘सितम’ वाली नसबंदी Vs CM योगी की ‘इनाम’ वाली नसबंदी: तब जबर्दस्ती थी, अब प्रोत्साहन पर जोर

उत्तर प्रदेश सरकार ने जनसंख्या नियंत्रण बिल का ड्राफ्ट वेबसाइट पर अपलोड कर दी है और इस तरह से भारत की सबसे बड़ी समस्याओं में से एक को काबू में करने के लिए देश के सबसे ज्यादा जनसंख्या वाले राज्य ने पहल शुरू कर दी है। राज्य विधि आयोग ने यूपी जनसंख्या (नियंत्रण, स्थिरीकरण व कल्याण) विधेयक-2021 (UP Population Bill-2021) का जो ड्राफ्ट डाला है, उसमें नसबंदी के लिए भी प्रोत्साहन की बात कही गई है।

उत्तर प्रदेश का नया जनसंख्या नियंत्रण कानून: नसबंदी कराने पर कई सुविधाएँ

इसमें प्रस्ताव दिया गया है कि दो से अधिक बच्चे होने पर सरकारी नौकरी से वंचित करने के साथ-साथ चुनाव लड़ने पर भी रोक लगाई जा सकती है। विधि आयोग ने इस ड्राफ्ट पर जनता की राय भी माँगी है, जिसे 19 जुलाई तक भेजा जा सकता है। 11 जुलाई को योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व वाली भाजपा सरकार नई जनसंख्या नीति भी जारी करने जा रही है। एक साल के भीतर जनप्रतिनिधियों को शपथ-पत्र देना होगा कि वो कानून का उल्लंघन नहीं कर रहे।

इतना ही नहीं, अगर शपथ-पत्र देने के बाद कोई जनप्रतिनिधि तीसरा संतान पैदा करता है तो उसका निर्वाचन रद्द किया जा सकता है। इसमें जो सबसे खास बात है, वो है नसबंदी को लेकर प्रोत्साहन। अगर परिवार का अभिभावक सरकारी नौकरी में कार्यरत है और नसबंदी करवाता है तो उसे अतिरिक्त इंक्रीमेंट, प्रमोशन, सरकारी आवासीय योजनाओं में छूट, पीएफ में एम्प्लॉयर कंट्रीब्यूशन बढ़ाने जैसी कई सुविधाएँ देने की सिफारिश की गई है।

दो बच्चों वाले दंपत्ति अगर सरकारी नौकरी में नहीं हैं तो उन्हें पानी, बिजली, हाउस टैक्स, होम लोन में छूट व अन्य सुविधाएँ देने का प्रस्ताव लाया गया है। वहीं जो अभिभावक एक संतान होने पर पर खुद से नसबंदी कराते हैं, उन अभिभावकों को संतान के 20 साल तक मुफ्त इलाज, शिक्षा, बीमा शिक्षण संस्था व सरकारी नौकरियों में प्राथमिकता देने की सिफारिश भी की गई है। हालाँकि, इसका उल्लंघन करने पर नौकरी से बरख़ास्त का प्रावधान लाया जा सकता है।

नई नीति के अनुसार, दो से अधिक बच्चे पैदा करने पर सरकारी नौकरियों में आवेदन और प्रमोशन का मौका नहीं मिलेगा। 77 सरकारी योजनाओं और अनुदान से भी वंचित रखने का प्रावधान है। ऐक्ट लागू होते समय प्रेगेनेंसी है या दूसरी प्रेगनेंसी के समय जुड़वा बच्चे होते हैं तो ऐसे केस कानून के दायरे में नहीं आएँगे। अगर किसी का पहला, दूसरा या दोनों बच्चे विकलांग हैं तो उसे भी तीसरी संतान पर सुविधाओं से वंचित नहीं किया जाएगा। तीसरे बच्चे को गोद लेने पर भी रोक नहीं रहेगी।

परिवार नियोजन के लिए पहले से चलता रहा है अभियान

ऐसा नहीं है कि नसबंदी पर प्रोत्साहन कोई नई बात है, बल्कि देश भर में केंद्र व राज्य सरकारें अक्सर नसबंदी के लिए प्रोत्साहन का अभियान चलाते रहती है। उत्तर प्रदेश में भी स्थानीय प्रशासन अपने हिसाब से सुविधाएँ देता है। अंतर इतना है कि नए कानून में उन सुविधाओं का दौरा बढ़ाया गया है। नसबंदी कराने पर लोगों को 3000 रुपए तक की धनराशि दी जाती है। नसबंदी कराने वालों को ई-भुगतान किया जाता है।

कई राज्यों में आशा व ANM (सहायक नर्स मिडवाइफ) कर्मचारियों को परिवार नियोजन के लिए लोगों को प्रोत्साहित करने के लिए लगाया जाता है। जिनका परिवार पूरा हो गया है, उन्हें जानकारी दी जाती है कि वो परिवार नियोजन की स्थायी सेवा कैसे लें। ‘जनसंख्या स्थिरता पखवारा’ मनाया जाता है। इस दौरान महिलाओं एवं पुरुषों को परिवार नियोजन के महत्व और फायदे समझाए जाते हैं। साथ ही मिलने वाली सुविधाओं के बारे में बताया जाता है।

इसीलिए, ये कह देना कि एकदम से जनसंख्या नियंत्रण कानून लाकर कोई जोर-जबरदस्ती की जा रही है, ये गलत है। विपक्षी नेताओं ने ये कहना शुरू कर दिया है कि उत्तर प्रदेश में जनसंख्या नियंत्रण के लिए बनाया जा रहा कानून मुस्लिमों को डराने के लिए है। संभल से सपा विधायक इक़बाल महमूद ने इसे मुस्लिमों के खिलाफ साजिश बताया था। जबकि सच्चाई ये है कि इस कानून में कहीं किसी धर्म-मजहब का उल्लेख ही नहीं है।

सपा विधायक का कहना है कि भारत में जनसंख्या बढ़ने के लिए मुस्लिम नहीं, बल्कि अनुसूचित जाति एवं जनजाति (SC/ST) समुदाय के लोग जिम्मेदार हैं। उन्होंने इसे असम में NRC की तरह बताया और संसद में इसी तरह का कानून लाने की चुनौती दी। ऐसे नेताओं से पूछा जाना चाहिए कि क्या सुविधाएँ धर्म/मजहब देख कर मिलेंगी? क्या करवाई यही देख कर होगी? ड्राफ्ट में ऐसा कुछ तो कहीं नहीं लिखा है।

जोर-जबरदस्ती क्या होती है, ये इन विपक्षी दलों को अपने ही गिरोह के कॉन्ग्रेस से पूछना चाहिए, जिसने आपातकाल लगा कर लोगों की जबरन नसबंदी कराई थी। आपातकाल के दौरान किस तरह संजय गाँधी के आदेश पर नसबंदी का क्रूर खेल खेला गया था, ये यादें अभी भी लोगों के जेहन में ताज़ा हैं। 1975 में आपातकाल लगाने के बाद नागरिकों के अधिकार ही निलंबित थे, ऐसे में भला वो जाएँ भी तो कहाँ।

संजय गाँधी का ‘नसबंदी अभियान’: जब हिटलर भी पीछे छूटा

संजय गाँधी की इस आक्रामकता के शिकार सबसे ज्यादा गरीब ही हुए थे। ख़बरें ऐसी भी आई थीं कि किसी गाँव को पुलिस ने घेर लिया और पुरुषों को घर से निकाल-निकाल कर जबरन उनकी नसबंदी करा दी गई। वरिष्ठ विज्ञान पत्रकार मारा विस्टेंडाल की मानें तो आश्चर्यजनक रूप से एक वर्ष के अंदर ही लगभग 62 लाख लोगों की नसबंदी कर दी गई थी। ये आँकड़े नाजियों द्वारा की गई नसबंदी से 15 गुना अधिक थे

न नर्सों को प्रशिक्षित किया गया था और न ही डॉक्टर गण इसके लिए तैयार थे। यही कारण रहा कि गलत सर्जरी होने के कारण 2 हजार लोगों को अपनी जान से हाथ धोना पड़ा था। कुछ ऐसा खौफ था! 70 के दशक से ही भारत में परिवार नियोजन कार्यक्रम शुरू किया गया, लेकिन आपातकाल वाली ये क्रूरता दुनिया में कहीं और नहीं देखी गई। आज जब नसबंदी वैकल्पिक है और इसे कराने पर सुविधाएँ मिल रही हैं, तो कुछ नेता वोट बैंक के लिए इसे मुस्लिमों से जोड़ रहे।

उत्तर प्रदेश के मुजफ्फरनगर को तो संजय गाँधी की इस नसबंदी क्रूरता का बड़ा दंश झेलना पड़ा था। कहा जाता है कि 18 अक्टूबर, 1976 को इस जबरन नसबंदी का विरोध करने पर 25 लोगों को मार डाला गया था, जिनमें अधिकतर मुस्लिम ही थे। यूपी के सशस्त्र बलों की फायरिंग में ये मारे गए थे। 32 वर्षीय मोहम्मद सिद्दीकी उन मृतकों में से एक थे। उनकी बीवी का कहना है कि जबरन नसबंदी के खिलाफ खासकर मुस्लिमों में बेहद गुस्सा था, इसीलिए मना करने के बावजूद वो बाहर विरोध के लिए निकले थे।

तब वहाँ के डीएम रहे विजेंद्र यादव ने संजय गाँधी के आदेश का पालन करवाने के लिए ये क्रूरता अपनाई थी। नतीजा ये हुआ कि खालापार में 25 लोगों को मौत की नींद सुला दिया गया। शामली के कैराना में भी इसी तरह की फायरिंग हुई थी। ये भी मुस्लिम बहुल इलाका है, जहाँ से हाल ही में कई आतंकी भी पकड़े गए हैं। ‘द हिन्दू’ ने अपनी एक रिपोर्ट में बताया था कि खालापार में आखिर हुआ क्या था।

दरअसल, पुलिस ने गाँव को घेर कर नसबंदी के लिए पुरुषों को निकलने को कहा। बदले में मस्जिद से भी घोषणा हुई कि मुस्लिम कभी इस सरकारी फरमान के आगे नहीं झुकेंगे। आलम ऐसा था कि पुलिस वालों को घूस दे-दे कर लोग बचना चाह रहे थे। एक 19 साल के लड़के ने जब भागने की कोशिश की तो पुलिस ने गोली मार दी। स्थिति ये थी कि कॉन्ग्रेस से जुड़ाव के कारण किसी नेता ने उनके लिए आवाज़ तक नहीं उठाई।

संजय गाँधी मुख्यमंत्रियों को टारगेट देते थे और उस टारगेट को वो पूरा भी करते थे, संजय गाँधी को खुश करने के लिए। उत्तर प्रदेश और बिहार इसमें सबसे आगे रहा था। जिन छात्रों के अभिभावकों ने नसबंदी नहीं कराई थी, उन्हें भी गिरफ्तार कर लिया गया। उत्तर प्रदेश में 240 ऐसे मामले सामने आए थे, जब जबरन नसबंदी के लिए हिंसा का इस्तेमाल किया गया। नसबंदी कर के लोगों को छोड़ दिया जाता था, खराब हाइजीन के कारण उन्हें बीमारी हो जाती थी या फिर उनकी मौत हो जाती थी।

‘मैं 13 साल की थी जब शुरू हुआ मेरा यौन शोषण’: 7 महिला एथलीट ने तमिलनाडु के कोच नागराजन पर लगाए आरोप

राष्ट्रीय स्तर की 19 वर्षीय एथलीट ने करीब दो महीने पहले तमिलनाडु के अपने कोच पी नागराजन पर यौन शोषण का आरोप लगाया था। इस घटना के दो महीने बाद 7 अन्य महिला एथलीटों ने अपने पूर्व कोच नागराजन पर यौन शोषण के आरोप लगाए हैं। इंडियन एक्सप्रेस ने अपनी रिपोर्ट में कहा है कि आरोप लगाने वाली सातों एथलीट ने 59 वर्षीय नागराजन से प्रशिक्षण लिया था। इनमें कुछ तो अब अंतरराष्ट्रीय स्तर की खिलाड़ी हैं। इन खिलाड़ियों का कहना है कि नागराजन द्वारा किए गए यौन शोषण का मामला कोई नया नहीं है, बल्कि यह वर्षों से चल रहा है।

यौन शोषण के मामले में पहला आरोप दो महीने पहले 26 मई 2021 को नेशनल लेवल की 19 वर्षीय एथलीट ने लगाया था। इसको लेकर राजनीतिक विश्लेषक और खेल कमेंटेटर टीएन रघु ने एक ट्वीट किया था। इसमें रघु ने राज्य के मुख्यमंत्री एमके स्टालिन को भी टैग किया था।

19 वर्षीय एथलीट द्वारा यौन शोषण के मामले की शिकायत किए जाने के बाद कोच नागराजन ने कथित तौर पर नींद की गोलियाँ खाकर खुदकुशी करने की कोशिश की थी। हालाँकि, वो बच गए और बाद में उन्हें गिरफ्तार कर लिया गया। पुलिस ने आरोपित के खिलाफ आईपीसी और पॉक्सो एक्ट के तहत कार्रवाई की है।

2005 से यौन शोषण

इस मामले में डिप्टी पुलिस कमिश्नर एस महेश्वरन ने बताया है कि यौन शोषण का मामला 2005 से चल रहा है। इस मामले में दर्ज की गई पहली शिकायत के मुताबिक, वर्ष 2013 से 2020 के बीच आरोपित कोच ने एथलीट का यौन शोषण किया था। उसके अलावा, उन्हें नागराजन के खिलाफ इसी तरह की सात और शिकायतें मिली हैं। महिलाओं और बच्चों के खिलाफ अपराधों की जाँच करने वाली विशेष शाखा की डीसीपी एच जयलक्ष्मी ने कहा, “हर शिकायत से आरोपित की हिंसक प्रवृत्ति का खुलासा हो रहा है।”

पीड़िता के बयान के आधार पर पुलिस ने कहा, “शिकायत करने वाली एथलीट समेत कई अन्य लड़कियाँ साल 2013 से नागराजन के पास ट्रेनिंग ले रही थीं। कई मौकों पर आरोपित (नागराजन) दिन की ट्रेनिंग के बाद बाकी लड़कियों को घर भेज देता था और पीड़िता को एक छोटे कमरे में ले जाकर फिजियोथेरेपी के बहाने से गलत तरीके से छूता था। पीड़िता के विरोध और विनती के बाद आरोपित ने उस धमकाया था कि वह उसे एथलेटिक्स में सफल होने में तभी मदद करेगा, जब वह उसके साथ सहयोग करेगी। दूसरी लड़कियों के साथ भी यही हुआ।”

बयान में यह भी कहा गया है कि आरोपित कोच नागराजन ने एथलीट को धमकाया था कि वह उसकी ट्रेनिंग रोक देगा और उसका करियर तबाह हो जाएगा। इंडियन एक्सप्रेस के मुताबिक, पुलिस ने बयान में कहा कि पीड़िता मानसिक तनाव से गुजर रही थी, इसीलिए उसने किसी से भी यौन उत्पीड़न की वारदात का जिक्र तक नहीं किया।

तमिलनाडु के कोच पी नागराजन पर यौन उत्पीड़न का आरोप लगाने वालों में शामिल एक अन्य एथलीट ने दावा किया है कि कोच ने 13 साल की उम्र से उसका यौन शोषण करना शुरू कर दिया था और यह सब करीब 7 साल तक चला।

अब 30 साल की हो चुकी पूर्व एथलीट ने इंडियन एक्सप्रेस को बताया, “जब मैं 8वीं कक्षा में थी तब नागराजन ने मुझसे मेरी लंबी कूद की तकनीक को और बेहतर बनाने के लिए कहा था। उन्होंने मुझे दूसरे लोगों से एक घंटा पहले आने को कहा था। इसलिए अगर सभी शाम 4 बजे आते थे तो मैं 3 बजे ही वहाँ पहुँच जाती थी। वह करीब 4 बजे मुझे कहते कि ऐसा दिखाओ जैसे वह मिलने आई हो। ठीक ऐसा जैसे मुझे कोई विशेष ट्रेनिंग मिल रही हो, लेकिन वह नहीं चाहते थे कि इसके बारे में कोई जाने, क्योंकि वे परेशान हो सकते थे। हलाँकि, मैं अभी भी टीम का हिस्सा थी और मैं अपने दोस्तों को खोना नहीं चाहती थी।”

एथलीट ने कहा कि नागराजन से एनओसी मिलने के बाद उसने दूसरे ट्रैक और फील्ड को ज्वाइन करने का फैसला किया। नागराजन ने उसके साथ जिस तरह का बर्ताव किया था उसके लिए उन्होंने सामना होने पर माफी भी माँगी थी। एथलीट ने बताया कि जब वो दूसरे क्लब में चली गईं तो उनकी मुलाकात अन्य एथलीटों से भी हुई, जिनके साथ भी इसी तरह दुर्व्यवहार हुआ था।

पूर्व एथिलीट ने कहा, “मैं सोच रही थी कि केवल मैं ही ऐसी हूँ, जिसके साथ हुआ… मुझे लगा था कि मेरे साथ ये सब रुक जाएगा। इस घटना ने मुझे तोड़कर रख दिया है। गाँवों से आने वाली लड़कियों की अपेक्षा मुझमें थोड़ी जागरुकता थी, लेकिन मुझे बहुत शर्म आती है कि मैं इतना साहसी नहीं थी।”

जिस तरीके से कई पूर्व खिलाड़ी अपने साथ हुए बर्ताव को साझा करने के लिए आगे आए हैं उससे अब इस खिलाड़ी को उम्मीद है कि ये सब बंद हो जाएगा। उसने कहा, “आखिरकार हमने उसे पकड़ लिया। मैं नहीं जानती हूँ कि उसका क्या होगा, लेकिन इतना जरूर है कि उसके चेहरे से नकाब उतर गया है। अब मुझे उम्मीद है कि वो फिर किसी लड़की को इस तरह से नहीं छुएगा।”