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कोरोना वैक्सीनेशन में NDA शासित स्टेट ने लगाया जोर, जहाँ-जहाँ विपक्ष की सरकार वहाँ-वहाँ डोज पड़े कम

केंद्र सरकार के वृहद टीकाकरण योजना का पहला दिन (21 जून 2021), मोदी सरकार की विफलता की कामना करने वालों के लिए चौंकाने वाला साबित हुआ। आधिकारिक आँकड़ें देखें तो एक दिन में देश में 86 लाख से अधिक लोगों को कोरोना का टीका लगा। यह आँकड़ा उनके लिए संतोषजनक होगा जो कभी यह कहते थे कि हमें ऐसी व्यवस्था करनी चाहिए जिससे एक दिन में 50 लाख लोगों को टीका लगाया जा सके। आँकड़ा केंद्र सरकार के लिए संतोषजनक होने के साथ-साथ गर्व का विषय भी होना चाहिए, क्योंकि यह साधारण आँकड़ा नहीं है। टीकाकरण में इस आँकड़े का महत्व इसलिए भी बढ़ जाता है कि विश्व में जनसंख्या के लिहाज से देखें तो सौ अधिक देश होंगे जिनकी आबादी 80 लाख या उससे कम होगी।

इस विषय पर पहले कई बार बात हो चुकी है कि कैसे पहले विपक्ष शासित राज्यों की ओर से यह माँग उठाई गई कि टीके की खरीद, टीकाकरण के नियम और संक्रमण रोकने सम्बंधित नीति-निर्धारण के लिए उन्हें निर्णय लेने की पर्याप्त स्वायत्तता मिलनी चाहिए। जब केंद्र सरकार ने बातचीत के बाद राज्यों को अधिकार दे दिए, उसके कुछ ही दिनों के बाद यह कहा गया कि केंद्र सरकार ने सब कुछ राज्यों के हवाले करके अपनी जिम्मेदारियों से हाथ धो लिया। इसे लेकर विपक्षी नेताओं ने प्रधानमंत्री को पत्र लिखे। साथ ही पश्चिम बंगाल सरकार टीकाकरण के विषय को लेकर सुप्रीम कोर्ट गई। केंद्र सरकार को सुप्रीम कोर्ट में एक वृहद टीकाकरण अभियान की रूपरेखा ही नहीं, बल्कि पूरी योजना पेश करनी पड़ी। इस विषय पर सुप्रीम कोर्ट की टिप्पणियों की भी बहुत चर्चा हुई। विपक्ष ने उन टिप्पणियों को सरकार के खिलाफ दिए जाने वाले फैसले के रूप में भी प्रस्तुत किया। 

जब प्रधानमंत्री मोदी ने एक वृहद टीकाकरण अभियान की घोषणा करते हुए यह कहा कि अट्ठारह वर्ष और उससे ऊपर देश के हर नागरिक को मुफ्त टीकाकरण का लाभ मिलेगा तब लगा कि केंद्र सरकार या प्रधानमंत्री की आलोचना के लिए विपक्ष के हाथ में अब बहुत कुछ नहीं बचेगा। इसके बावजूद राहुल गाँधी, ममता बनर्जी और रॉबर्ट वाड्रा की ओर से कुछ वक्तव्य आए, जो क्रिकेट की भाषा में कहा जाए तो बॉलर की उन अपील जैसे थे जिनके बारे में कमेंटेटर कहते हैं कि ये विश्वास में कम और उत्साह में अधिक थी। अब विपक्ष की सारी आशा इस बात पर टिकी थी कि केंद्र सरकार अपनी कोशिश में नाकाम रहे।

ऐसे में यह कहा जा सकता है कि वृहद टीकाकरण अभियान के पहले दिन आए आँकड़ों ने विपक्ष की आशाओं पर फिलहाल तो तुषारापात कर दिया है। 

मैं यहाँ विपक्ष की ऐसी सोच की बात क्यों कर रहा हूँ? इसके पीछे कारण है पहले दिन के आँकड़ों में समाए आँकड़े। यदि हम पहले दिन के आँकड़ों को देखें तो पाएँगे कि एनडीए शासित राज्यों में टीकाकरण का अभियान विपक्ष शासित राज्यों से अधिक मजबूत दिखाई दिया। एनडीए शासित केवल पाँच राज्य, मध्य प्रदेश, कर्नाटक, उत्तर प्रदेश, गुजरात और बिहार का योगदान 86 लाख में से 46.3 लाख का रहा जो पचास प्रतिशत से भी अधिक है। यदि इनके साथ असम और हरियाणा के आँकड़े भी मिला दें तो पाएँगे कि एनडीए शासित सात राज्यों का योगदान करीब 55 लाख रहा जो 63 प्रतिशत से भी अधिक है। अब यदि इन आँकड़ों की तुलना हम विपक्ष शासित बड़े राज्य जैसे महाराष्ट्र, पंजाब, राजस्थान, केरल और आंध्र प्रदेश से करें तो पाएँगे कि इन पाँच राज्यों में टीके का योग करीब 12.58 लाख आता है जो पहले दिन लगाए गए कुल टीकों का करीब 14.40 प्रतिशत है। ऐसा तब हो रहा है जब महाराष्ट्र और केरल कुल संक्रमण और एक्टिव केस के मामले में आज भी तीन प्रमुख राज्यों में से हैं। 

ऐसे में विपक्ष शासित राज्यों के आँकड़ों से क्या निष्कर्ष निकाले जाएँ? क्या यह माना जा सकता है कि विपक्ष कोरोना के विरुद्ध देश की लड़ाई में केंद्र सरकार के साथ कंधे से कंधा मिलकर काम करने के लिए तैयार है? प्रधानमंत्री मोदी की घोषणा हर राज्य के लिए एक दिन ही हुई थी। ऐसा भी नहीं कहा जा सकता कि कुछ राज्यों को केंद्र सरकार की टीकाकरण की नई नीति का पता बाकी राज्यों की अपेक्षा से देर से चला। इसके लिए विपक्ष कुछ भी तर्क दे सकता है पर उसके कर्मों से यह दिखाई दे रहा है कि कोरोना से लड़ाई की उसकी कोशिशों में कमियाँ हैं जिनके बारे में उसे विचार करने की आवश्यकता है। प्रश्न यही है कि लोकतांत्रिक शासन व्यवस्था में विपक्ष की जो भूमिका है, जिसके तहत उसे एक वैकल्पिक व्यवस्था प्रस्तुत करनी पड़ती है, उस कसौटी पर वर्तमान विपक्ष कभी खरा उतरेगा या उसका विश्वास इसी दर्शन पर टिका रहेगा कि सरकार के विरुद्ध दुष्प्रचार ही वैकल्पिक व्यवस्था है। 

टीकाकरण की शुरुआत अच्छी रही है। पहले दिन के आँकड़ें देखकर यह विश्वास हुआ है कि केंद्र सरकार के पास एक नीति है जो समझ के आधार पर खड़ी की गई है। शुरुआत को और मजबूत बनाकर उसे आगे ले जाते हुए टीकाकारण अभियान को अगले स्तर पर कैसे ले जाया जाएगा, वह देखने वाली बात होगी। चूँकि विपक्ष का विश्वास अभी तक दुष्प्रचार में दिखाई दे रहा है, ऐसे में यह देखना दिलचस्प होगा कि वह अपने लीक पर चलता है या आगे जाकर अपनी तरफ से कोई नई नीति प्रस्तुत करता है? यह देखना है कि विपक्ष कोरोना से लड़ता है या लड़ने का अभिनय करता है, जो अभी तक वह करता रहा है। यह देखना भी दिलचस्प रहेगा कि आगे चल कर केंद्र सरकार और उसकी टीकाकरण नीति के विरुद्ध विपक्षी दुष्प्रचार का स्वरुप क्या रहेगा? दुष्प्रचार इकोसिस्टम के हिस्सा रहे पत्रकारों के कुतर्कों पर आधारित रहेगा या कुछ तर्क वगैरह भी प्रस्तुत किए जाएँगे।

‘तुम्हारे शरीर के छेद में कैसे प्लग लगाना है, मुझे पता है’: पूर्व महिला प्रोफेसर का यौन शोषण, OpIndia की खबर पर एक्शन में NCW

तमिलनाडु की राजधानी चेन्नई में स्थित लोयोला कॉलेज की एक पूर्व महिला प्रोफेसर ने यौन शोषण करने वाले आरोपितों के खिलाफ 13 साल की लड़ाई के अनुभव के बारे में बताया था। अब राष्ट्रीय महिला आयोग (NCW) ने OpIndia की एक्सक्लूसिव रिपोर्ट का संज्ञान लेते हुए लोयोला कॉलेज के चेयरमैन को पत्र लिखा है। इस पत्र में इस मामले की जाँच कराने के साथ-साथ मद्रास हाईकोर्ट द्वारा तय नियमों के अनुसार कार्रवाई करने को कहा गया है।

दुनिया भर के कई इलाकों से ऐसी ख़बरें आती हैं, जहाँ काम पर जाने वाली महिलाओं के साथ उनके ऊपर के पदाधिकारियों ने यौन शोषण किया हो। कुछ इसी तरह का अनुभव लोयोला कॉलेज में प्रोफेसर रहीं जोसफिन जयशांति का भी है। कुछ प्रभावशाली लोगों ने उनका यौन शोषण किया और जितनी बार भी उन्होंने शिकायत की, कोई सुनवाई नहीं हुई। बाद में उन्हें कॉलेज प्रशासन ने निकाल बाहर किया।

2019 में उनके हक़ में मद्रास हाईकोर्ट ने फैसला दिया, लेकिन इसके बावजूद कॉलेज इसे मानने को तैयार नहीं है। न तो उनका यौन शोषण करने वालों पर कार्रवाई की गई और न ही उनका बकाया वेतनमान उन्हें दिया गया, जो लाखों में है। मीडिया आर्ट्स डिपार्टमेंट में लेक्चरर रहीं जोसेफिन ने बताया कि 2008 में डॉक्टर एस एंटोनी राजराजन के तमिल विभाग के हेड बनने के साथ समस्याएँ शुरू हुईं।

HOD के रूप में उनका व्यवहार पहले से ही सही नहीं था। जब जोसेफिन छुट्टी माँगती थीं तो वो एप्लिकेशन को फाड़ कर उनके मुँह पर फेंक देते थे। रोज उनके खिलाफ आपत्तिजनक शब्दों का इस्तेमाल किया जाता था और सभी के सामने अपमानित किया जाता था। HOD ने एक लॉज में उन्हें अपने साथ रहने के लिए जबरन बुलाया। साथ ही जबरदस्ती एक छात्र को उनके अंतर्गत रिसर्च स्कॉलर बनने को कहा।

जोसेफिन के अनुसार, उक्त HOD ने उनसे कहा था, “तुम अपने पति के बिना ऐसे ही पड़ी हुई हो, उससे अच्छा है कि मेरी कामनाओं की पूर्ति करो।” साथ ही सब के सामने ही वो कहते थे, “तुम्हारी शरीर में एक छेद है, उसमें प्लग कैसे लगाना है ये मैं जानता हूँ।” जब जोसेफिन ने उनका कहा मानने से इनकार कर दिया तो उनके खिलाफ मैनेजमेंट से शिकायत की गई। आरोप लगाया गया कि वो अपना काम ठीक से नहीं कर रहीं और गुटबाजी में लगी हैं।

राजन ने उनके काम की जगह बदल कर अपने ऑफिस में पास ही बिठा दिया और वहीं काम करने को मजबूर किया। एक बार तो स्थिति इतनी बिगड़ गई कि एक छात्र को उन्हें अस्पताल लेकर जाना पड़ा। कॉलेज की ‘एंटी सेक्सुअल हरैसमेंट कमिटी’ के समक्ष 2012 में उन्होंने शिकायत दर्ज कराई। कॉलेज के सेक्रेटरी अल्बर्ट विलियम्स ने उन पर शिकायत वापस लेने का दबाव बनाया। जोसेफिन के खिलाफ 60 आरोप लगा कर इसकी प्रति कॉलेज में बँटवाई गई।

2013 में जनवरी से मई तक उन्होंने कॉलेज प्रबंधन को 9 इमेल्स भेजे, लेकिन कोई सुनवाई नहीं हुई। राजराजन के खिलाफ पहले से ही भ्रष्टाचार का एक मामला लंबित था। उनके आरोपों की जाँच के लिए अलग से कमिटी नहीं बनाई गई। दबाव के बाद कमिटी बनाई गई, प्रिंसिपल बदला, लेकिन तब भी कोई कार्रवाई नहीं हुई। मद्रास हाईकोर्ट ने राजराजन को बरखास्त करने और जोसेफिन को मुआवजा देने का आदेश दिया, लेकिन कॉलेज ने ऐसा नहीं किया।

NCW ने लोयोला कॉलेज के चेयरमैन को लिखे गए अपने पत्र में ऑपइंडिया की खबर का जिक्र करते हुए कहा है कि अब तक हाईकोर्ट के आदेश का कॉलेज ने पालन नहीं किया है। आयोग ने कहा कि वो इस बात से परेशान है कि एक महिला के ससम्मान जीवन जीने के अधिकार को भंग किया गया। आयोग ने इस मामले में मद्रास हाईकोर्ट के आदेश का पालन कर कार्रवाई कर के सूचित करने के लिए कहा है।

जोसेफिन ने कहा कि कॉलेज प्रबंधन बार-बार ‘तय प्रक्रिया से’ काम करने की बात कहता रहा, लेकिन क्या यौन शोषण के आरोपित को ही उस प्रक्रिया के बारे में अँधेरे में रखना कहाँ तक उचित है? उन्होंने बताया कि आरोपित का न सिर्फ बचाव किया गया, बल्कि समाज में उसे प्रतिष्ठित व्यक्ति के रूप में प्रचारित भी किया गया। उन्होंने कहा कि वो इस मामले में आरोपितों को कोर्ट में घसीटेंगी और सज़ा दिला कर ही रहेंगी।

पहले बंगाल हिंसा, अब नारदा: ममता सरकार से जुड़े मामले, सुनवाई से अलग हो रहे पश्चिम बंगाल से आने वाले जज

बंगाल से जुड़े मामलों की सुनवाई से बंगाल से आने वाले जज खुद को एक-एक कर अलग कर रहे हैं। पहले इंदिरा बनर्जी ने खुद को बंगाल चुनाव बाद हिंसा वाले मामले से और अब नारदा स्टिंग केस से अनिरुद्ध बोस। बहुचर्चित नारदा स्टिंग केस में सुनवाई से मंगलवार (22 जून 2021) को सर्वोच्च न्यायालय के जस्टिस अनिरुद्ध बोस ने खुद को अलग कर लिया है। वह पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी और राज्य के कानून मंत्री मलय घटक द्वारा दायर याचिकाओं से अलग हुए हैं। बोस ने बताया कि वो खुद को इस मामले की सुनवाई से अलग कर रहे हैं।

ममता बनर्जी और मलय घटक द्वारा दायर याचिकाओं को सुनवाई के लिए जस्टिस हेमंत गुप्ता और अनिरुद्ध बोस की वैकेशन बेंच में लिस्टेड किया गया था। इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक, जैसे ही जस्टिस हेमंत गुप्ता और और जस्टिस अनिरुद्ध बोस की वैकेशन बेंच कार्यवाही शुरू करने के लिए इकट्ठी हुई। न्यायधीश हेमंत गुप्ता ने कहा कि मेरे भाई जस्टिस अनिरुद्ध बोस खुद को इन मामलों की सुनवाई से अलग कर रहे हैं।

पीठ की अध्यक्षता कर रहे न्यायमूर्ति हेमंत गुप्ता ने कहा कि इस मामले को चीफ जस्टिस एन वी रमणा के सामने रखा जाएगा, जो इसके बारे में निर्णय ले सकते हैं। गौरतलब है कि जस्टिस अनिरुद्ध बोस बोस सर्वोच्च न्यायालय में आने से पहले कोलकाता हाईकोर्ट के जज थे।

बता दें कि पश्चिम बंगाल राज्य, ममता बनर्जी और कानून मंत्री मलय घटक द्वारा दायर याचिकाओं में 9 जून 2021 के कोलकाता हाईकोर्ट के आदेश को चुनौती दी गई है। दरअसल, हाईकोर्ट ने नारदा मामले को स्थानांतरित करने के सीबीआई की याचिका के जवाब में राज्य सरकार को हलफनामा दाखिल करने से मना कर दिया था। सीबीआई ने गिरफ्तार टीएमसी नेताओं के मामलों को स्थानांतरित करने की माँग करते हुए कहा था कि राज्य भीड़तंत्र है।

जस्टिस इंदिरा बनर्जी भी ममता पर सुनवाई से खुद को अलग कर चुकीं

इससे पहले 19 जून 2021 को सुप्रीम कोर्ट की जस्टिस इंदिरा बनर्जी ने भी ममता सरकार के खिलाफ सुनवाई से खुद को अलग कर लिया था। उन्होंने राज्य में चुनाव बाद हुई हिंसा के मामले में सुनवाई से खुद को अलग करते हुए कहा था, मुझे इस मामले को सुनने में कुछ कठिनाई हो रही है। इसके साथ ही जस्टिस बनर्जी ने इस मामले को किसी दूसरी बेंच में लिस्टेड करने के लिए कहा था।

डासना मंदिर में घुसे संदिग्धों से जुड़े हैं धर्मांतरण वाले मौलानाओं के तार, सलीमुद्दीन कॉमन फैक्टर

उत्तर प्रदेश एटीएस ने धर्मांतरण कराने वाले एक गिरोह का पर्दाफाश करते हुए मुफ्ती काजी जहाँगीर आलम कासमी और मोहम्मद उमर गौतम को गिरफ्तार किया था। इनके तार गाजियाबाद के डासना देवी मंदिर में घुसे संदिग्ध विपुल विजयवर्गीय और कासिफ से जुड़ रहे हैं। इतना ही नहीं डासना मंदिर प्रकरण में गिरफ्तार हुए सलीमुद्दीन का नाम भी धर्मांतरण वाले प्रकरण में आ रहा है।

मीडिया रिपोर्टों के अनुसार धर्मांतरण प्रकरण में गिरफ्तार मौलानाओं की जानकारी विजयवर्गीय, कासिफ और सलीमुद्दीन से ही मिली थी। दैनिक जागरण ने उत्तर प्रदेश के एडीजी लॉ ऐंड ऑर्डर प्रशांत कुमार के हवाले से बताया है कि 2 जून को डासना मंदिर में घुसने की कोशिश करने के दौरान विपुल विजयवर्गीय उर्फ रमजान और कासिफ को पकड़ा गया था। इनके पास से सर्जिकल नाइफ बरामद की गई थी। आसिफ ने अपना नाम काशी गुप्ता बताया था।

मूलरूप से नागपुर के रहने वाले विपुल ने कुछ साल पहले ही धर्मान्तरण कर रमजान नाम रख लिया था। उसने गाजियाबाद में ही कासिफ की बहन से निकाह भी किया था। उस दौरान दोनों से पूछताछ के दौरान भी एटीएस द्वारा गिरफ्तार किए गए धर्मान्तरण के आरोपित उमर और जहाँगीर के नाम सामने आए थे। एटीएस के आईजी जीके गोस्वामी के मुताबिक इससे पहले भी दोनों को गिरफ्तार किया गया था, लेकिन ठोस सबूत नहीं होने के कारण छोड़ दिया जाता था।

डासना देवी मंदिर में घुसने की कोशिश में गिरफ्तार जीजा-साले रमजान और कासिफ को सलीमुद्दीन ने उकसाया था। सलीमुद्दीन को ये अपना आका मानते हैं। मसूरी पुलिस ने सलीमुद्दीन को 11 जून 2021 को गिरफ्तार कर लिया था। फिलहाल वह जेल से बाहर है। आज तक की रिपोर्ट के अनुसार उसने धर्मांतरण मसले में अपनी भूमिका से इनकार किया है।

सलीमुद्दीन ने ही 2015 में विपुल विजयवर्गीय का धर्मांतरण करवाकर उसे रमजान नाम दिया था। 2019 में रमजान की शादी उसने ही कासिफ की बहन से कराई थी। सलीमुद्दीन के के संबंध धर्मान्तरण के आरोपित मौलाना मोहम्मद उमर गौतम से हैं। उमर गौतम अपनी संस्था के जरिए सम्मेलन कर गैर मुस्लिमों में जहर घोलता था। ऐसे ही एक सम्मेलन में विजयवर्गीय उर्फ रमजान भी शामिल हुआ था। उमर भी गौतम करीब 30 साल पहले धर्मान्तरण कर मुस्लिम बना था। उसका असली नाम श्याम प्रताप सिंह था, जो कि उत्तर प्रदेश के फतेहपुर का रहने वाला है।

गौरतलब है कि उत्तर प्रदेश एटीएस ने सोमवार (21 जून 2021) को मूक बाधिर छात्रों व कमजोर आय वर्ग के गरीबों-असहायों को धन, नौकरी व शादी करवाने का प्रलोभन देकर धर्मान्तरण कराने वाले एक बड़े गिरोह के दो मौलानाओं मोहम्मद उमर गौतम और जहाँगीर कासिम को गिरफ्तार किया था। इन दोनों पर अब तक करीब 1000 मूक बधिर, महिलाएँ और बच्चों को निशाना बनाकर धर्म परिवर्तन कराने का आरोप है। इस मामले में यूपी पुलिस ने आईएसआई और विदेशी फंडिंग होने का शक भी जताया था।

इस बीच मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने भी इस मामले में कड़ा रुख अख्तियार करते हुए धर्मान्तरण के सभी आरोपितों के खिलाफ राष्ट्रीय सुरक्षा कानून के तहत कार्रवाई करने की बात कही है। उन्होंने जाँच एजेंसियों से मामले की तह तक जाने को कहा है।

LS स्पीकर के दफ्तर तक पहुँचा नुसरत जहाँ की शादी का झमेला, संसद में झूठी जानकारी देने का आरोप: सदस्यता समाप्त करने की माँग

बंगाली अभिनेत्री और बारासात से सांसद नुसरत जहाँ पर अपनी संसदीय एफिडेविट में झूठ बोलने का आरोप लगा है। भाजपा सांसद ने आरोप लगाया है कि उन्होंने अपनी शादी को लेकर झूठी जानकारी दी, इसीलिए उन्हें संसद से बरखास्त किया जाए। भाजपा सांसद संघमित्रा मौर्या ने इस सम्बन्ध में आवाज़ उठाई है। उन्होंने लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला को पत्र लिख कर कार्रवाई की माँग की है।

ज्ञात हो कि हाल ही में नुसरत जहाँ ने बयान जारी कर के कहा था कि निखिल जैन के साथ उनकी शादी कभी हुई ही नहीं थी और भारतीय कानून की नज़र में भी वो सिर्फ एक लिव-इन रिलेशनशिप था, विवाह नहीं। तुर्की में ये शादी हुई थी, जिसका यहाँ अलग-अलग समुदाय के लोगों के बीच होने वाली शादी वाला स्पेशल रजिस्ट्रेशन नहीं कराया गया था। नुसरत जहाँ ने इसी आधार पर कहा था कि शादी हुई ही नहीं तो तलाक का सवाल ही नहीं उठता है।

भाजपा सांसद मौर्या ने लोकसभा स्पीकर को लिखे पत्र में कहा, “नुसरत जहाँ के हालिया मीडिया बयानों के बाद पता चलता है कि उन्होंने जानबूझ कर लोकसभा सचिवालय को अपने शादी को लेकर झूठी जानकारी दी। ये एक अवैध, अनैतिक और गैर-जिम्मेदाराना व्यवहार है। उन्होंने जानबूझ कर गलत व भ्रामक जानकारी देने का हथकंडा अपना कर अपने मतदाताओं के साथ धोखा किया है। उन्होंने संसद और इसके सदस्यों का भी अपमान किया है।”

इस पत्र में दावा किया गया है कि बंगाली अभिनेत्री ने लोकसभा में ‘नुसरत जहाँ रूही जैन’ के रूप में शपथ ली है और कानून के हिसाब से अब उनकी सदस्यता मान्य नहीं होनी चाहिए। जून 25, 2019 को नुसरत जहाँ ने सांसद के रूप में शपथ ली थी और उस दौरान उन्होंने साड़ी पहनी हुई थी। साथ ही उनके माँग में सिन्दूर भी दिखा था। लोकसभा की वेबसाइट पर उनकी एफिडेविट मौजूद है और उनके शपथग्रहण का वीडियो भी सोशल मीडिया में है।

उत्तर प्रदेश के बदायूँ से भाजपा सांसद संघमित्रा मौर्या ने लोकसभाध्यक्ष से अनुरोध किया है कि ऐसी व्यवहार के कारण नुसरत जहाँ के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाए और इस मामले की जाँच संसद की ‘एथिक्स कमिटी’ से कराई जाए। उन्होंने याद दिलाया है कि जब इस्लामी कट्टरपंथियों ने नॉन-मुस्लिम से शादी करने और सिन्दूर को लेकर उन पर हमला किया था तो पार्टी लाइन से ऊपर उठ कर कई सांसदों ने उनका बचाव किया था।

हाल ही में खबर आई थी कि नुसरत जहाँ द्वारा बिजनेसमैन निखिल जैन के साथ शादी को अमान्य बताने के बाद अब मुस्लिम मौलाना उनके समर्थन में उतर आए हैं। नुसरत द्वारा निखिल संग शादी को अमान्य बताने को मौलाना कारी मुस्तफा ने सही ठहराया था। उन्होंने इस शादी को शादी नहीं बल्कि ‘नाजायज संबंध’ करार देते हुए कहा था कि वह (नुसरत) तौबा कर ‘कलमा’ पढ़ लें और ईमान में दाखिल हो जाएँ।

हिंदू से मुस्लिम बनाने वाले मौलानाओं पर लगेगा NSA, जब्त होगी संपत्ति: CM योगी का निर्देश- गिरोह की तह तक जाएँ

उत्तर प्रदेश की ATS ने धर्मांतरण का धंधा करने वाले दो मौलानाओं को गिरफ्तार किया है, जो अब तक 1000 से भी अधिक हिन्दुओं को बरगला कर उनका इस्लामी मतांतरण करा चुके हैं। इनका गिरोह दिव्यांगों को अपना शिकार बनाता था। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने जाँच एजेंसियों को निर्देश दिया है कि वो इस पूरी साजिश की तह तक जाएँ। गिरफ्तार दोनों मौलानाओं के खिलाफ ‘राष्ट्रीय सुरक्षा कानून (NSA)’ लगेगा।

साथ ही उनकी संपत्ति भी जब्त की जाएगी। जो भी लोग इस मामले में संलिप्त हैं, सीएम योगी ने उन पर गैंगस्टर एक्ट और अन्य कड़ी धाराओं के तहत कार्रवाई करने का निर्देश दिया है। मुफ्ती काजी जहाँगीर आलम कासमी और मोहम्मद उमर गौतम मूक-बधिर और गरीबों को धन, नौकरी और शादी का लालच देकर इस्लाम अपनाने को बरगलाते थे। इस गिरोह को पाकिस्तानी ख़ुफ़िया एजेंसी ISI से फंडिंग आती थी।

मौलानाओं के कब्जे से जो दस्तावेज जब्त हुए हैं, उससे उन्हें मिलने वाली बड़ी विदेशी फंडिंग का पता चलता है। ATS दोनों को अदालत के माध्यम से पुलिस कस्टडी में लेगी और कड़ी पूछताछ करेगी, जिसमें कई राज़ सामने आने की संभावना है। इस गिरोह ने कई लड़कियों को मुस्लिम बना कर उनका निकाह भी करवाया है। मुफ्ती काजी जहाँगीर आलम कासमी नई दिल्ली के जामिया नगर इलाके के जोगाबाई गाँव में रहता है, जबकि मोहम्मद उमर गौतम नई दिल्ली के जामिया नगर इलाके के बाटला हाउस का निवासी है।

ADG प्रशांत कुमार ने बताया कि ये दोनों ‘मोटिवेशनल थॉट्स’ के जरिए हिन्दुओं को बरगलाते थे। साथ ही ये उन्हें कट्टरपंथी भी बनाते थे। धर्मांतरण और विवाह का सर्टिफिकेट प्राप्त करने के लिए भी अवैध माध्यमों का सहारा लिया जाता था। नोएडा, कानपुर, मथुरा और देश के कई इलाकों में उनका ये ‘कारोबार’ फैला हुआ था। ‘इस्लामिक दावा सेंटर’ के तहत ये सब हो रहा था, जिसके दिल्ली स्थित दफ्तर को पुलिस ने सील कर दिया है।

बता दें कि उत्तर प्रदेश के नोएडा में ए़टीएस की टीम पुलिस ने धर्मांतरण कराने वाले दो मौलानाओं को गिरफ्तार किया है। इसमें से एक उमर गौतम पहले हिंदू ही था। वह करीब 30 साल पहले धर्मांतरण कर मुस्लिम बन गया था। इसके बाद से ही वो दिल्ली के जामिया नगर इलाके में इस्लामिक दावा सेंटर चला रहा था। यहीं से धर्मांतरण का सारा खेल खेला जाता है। ये दोनों अब तक 1,000 से अधिक लोगों का धर्मांतरण करा चुके हैं।

शादीशुदा इमरान अंसारी ने जैन लड़की का किया अपहरण, कई बार रेप: अजमेर दरगाह ले जा कर पहनाई ताबीज, पुलिस ने दबोचा

गुजरात में हाल ही में संशोधित हुए ‘धर्म स्वातंत्र्य विधेयक 2021’ के तहत दूसरा मामला सामने आया है। एक शादीशुदा व्यक्ति को इस मामले में गिरफ्तार किया गया है, जिस पर अपहरण और बलात्कार के अलावा जबरन इस्लामी धर्मांतरण के भी आरोप हैं। दक्षिणी गुजरात के वलसाड पुलिस ने ये कार्रवाई की है। आरोप है कि उसने 19 साल की एक युवती का अपहरण और बलात्कार किया। आरोपित का नाम इमरान अंसारी है।

इमरान मूल रूप से पश्चिम बंगाल का रहने वाला है। एक जैन लड़की के साथ उसने दोस्ती शुरू की, जो बाद में प्यार में बदल गई। फिर उसने धोखा देकर उस लड़की का अपहरण किया। वो पहले उसे राजस्थान के अजमेर लेकर गया और फिर मध्य प्रदेश का इंदौर लेकर चला गया। अजमेर में वो उसे लेकर दरगाह पर भी गया, जहाँ उसने पीड़िता को एक ताबीज़ पहनने के लिए दिया। फिर उसे पीड़िता को इंदौर चॉल में रखा हुआ था।

‘न्यूज़ 18 गुजराती’ की खबर के अनुसार, उसने इस दौरान पीड़िता को बार-बार अपने साथ शारीरिक सम्बन्ध बनाने के लिए मजबूर किया। कई बार जबरन शारीरिक सम्बन्ध बनाने के बाद उसने पीड़िता का जबरन इस्लामी धर्मांतरण भी कराने की कोशिश की, ताकि निकाह के लिए मजबूर कर सके। बाद में पता चला कि वो शादीशुदा है और उसने शादी की गली रात को ही अपनी बीवी को बताया था कि वो एक जैन लड़की के साथ रिलेशनशिप में है।

पुलिस को आशंका है कि इमरान अंसारी जो कुछ कर रहा था, उस बारे में उसकी पत्नी को सब पता था और उसने इसकी मौन सहमति भी दे रखी थी। पीड़िता जून 10, 2021 को अपने घर से गायब हो गई थी। परिजनों ने इसके बाद गुमशुदगी की रिपोर्ट दर्ज कराई। दोनों का मेडिकल टेस्ट कराया गया है। आरोपित की शादी जनवरी में ही हुई है। पीड़िता ने बताया कि आरोपित ने उसे धमकाया कि अगर उसने शारीरिक सम्बन्ध नहीं बनाए तो वो उसके भाई को मार डालेगा।

पुलिस ने बताया कि वो इस बात का पता लगा रहे हैं कि उसने पीड़िता के साथ निकाह किया है या नहीं। वो ताबीज के लिए उसे एक मौलवी के पास लेकर भी गया था। उस ताबीज को जबरन पीड़िता के गले बाँध दिया गया।

‘किसानों’ की आड़ में साजिश रच रही ISI, 26 जून के प्रदर्शन के दौरान हिंसा भड़काने के मँसूबे: रिपोर्ट

केंद्र सरकार के तीन कृषि कानूनों के खिलाफ लंबे समय से कथित किसान दिल्ली की सीमाओं पर प्रदर्शन कर रहे हैं। इन आंदोलनकारी ‘किसानों’ ने 26 जून 2021 को देशभर में बड़े पैमाने प्रदर्शन की योजना बनाई है। इसकी आड़ में पाकिस्तानी खुफिया एजेंसी आईएसआई भारत में अशांति फैलाने की साजिश रच रही है।

News18 की एक रिपोर्ट में बताया गया है कि किसान आंदोलन में घुसपैठ की फिराक में लगे आईएसआई ने इस बार नई साजिश रची है। वह प्रदर्शन के दौरान कानून-व्यवस्था कायम रखने के लिए तैनात सुरक्षा बलों को भड़काकर गड़बड़ी फैलाने की फिराक में है। इससे पहले ISI ने ने किसानों को भड़काकर हिंसा और गड़बड़ी फैलाने की साजिश रची थी।

संयुक्त किसान मोर्चा ने 26 जून 2021 को विभिन्न राज्यों में राजभवन के बाहर प्रदर्शन की योजना बनाई है। संयुक्त किसान मोर्चा में किसानों के 40 समूह शामिल हैं। रिपोर्ट के अनुसार, आईएसआई भारत में सुरक्षा एजेंसियों और प्रदर्शनकारियों के बीच टकराव बढ़ाकर उसका फायदा उठाना चाहता है।

रिपोर्ट में कहा गया है कि आईएसआई पिछले कुछ महीनों से अपने एजेंटों के साथ ‘किसान’ आंदोलन में घुसपैठ करने की फिराक में है। यह बात सामने आई है कि आईएसआई किसानों के खिलाफ सुरक्षा एजेंसियों को भड़काना चाहती है। इस साजिश के खुलासे के बाद एजेंसियाँ सतर्क हो गई हैं। सुरक्षा-व्यवस्था और सख्त कर दी गई है। खुफिया एजेंसियाँ ​​तमिलनाडु और केरल में संदिग्ध गतिविधियों पर लगातार नजर रख रही हैं।

‘आपातकाल’ की 46वीं वर्षगाँठ पर प्रदर्शन

पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गाँधी द्वारा देश में आपातकाल लागू किए जाने की 46वीं वर्षगाँठ के मौके पर 26 जून 2021 को आंदोलनकारी किसानों ने देश भर में प्रदर्शनों की योजना बनाई है। इन्होंने सितंबर 2020 में केंद्र द्वारा पारित नए कृषि कानूनों को निरस्त करने की माँग को लेकर देशभर के सभी राज्यों के सभी राजभवनों में ज्ञापन सौंपने की योजना बनाई है।

हालाँकि, कथित किसानों का यह प्रदर्शन यौन उत्पीड़न, बलात्कार और हत्या के मामलों को लेकर सवालों के घेरे में है। इन घटनाओ पर किसान नेताओं ने भी चुप्पी साध रखी है।

घर से फरार हुआ मूक-बधिर आदित्य, अब्दुल्ला बन कर लौटा: व्हाट्सएप्प-टेलीग्राम से ब्रेनवॉश, केरल से जुड़े तार

इस्लामी धर्मांतरण गिरोह कई वर्षों से दिव्यांगों को भी निशाना बनाता रहा था, जिसकी परत अब खुल रही है। ऐसी ही एक कहानी उत्तर प्रदेश के कानपुर स्थित काकादेव हितकारी नगर के आदित्य की है, जो इस गिरोह का शिकार बन गया। धर्मांतरण के बाद आदित्य जब घर लौटा तो वो आदित्य नहीं, अब्दुल्ला था। वो घर में ही चोरी-छिपे 5 वक़्त की नमाज अदा किया करता था। जब घर वालों को इसकी भनक लगी तो मार्च 10, 2021 को वो फरार हो गया।

इसके दो दिन बाद कल्याणपुरी थाने में परिजनों ने गुमशुदगी की रिपोर्ट दर्ज कराई। पुलिस ने उसकी तलाश शुरू की। इधर ATS ने मूक-बधिर लोगों का धर्मांतरण कराने वाले दो मौलानाओं को गिरफ्तार किया। हालाँकि, इसके एक दिन पहले ही आदित्य घर लौट चुका था। आदित्य को परिजन किसी से मिलने नहीं दे रहे हैं। वो खुद भी किसी से बात नहीं करना चाह रहा। आदित्य की माँ लक्ष्मी देवी ने अपने बेटे के कारण मूक-बधिर की भाषा सीखी थी।

लोगों ने बताया कि आदित्य के जन्म के बाद परिजन बेहद खुश थे और उसे पढ़ा-लिखा कर कुछ बनाने के सपने देख रहे थे, लेकिन बच्चे के मूक-बधिर होने की बात पता चली तो उन्हें धक्का लगा। माँ लक्ष्मी ने साइन लैंग्वेज सीखी। एक दिव्यांग स्कूल में नौकरी भी लग गई। बेटे के कारण वो इस भाषा में पारंगत हो गईं और यूट्यूब पर वीडियो भी अपलोड करने लगीं। आदित्य से वो इशारों में बात करती थीं।

आदित्य का एक भाई और एक बहन है। उन्होंने भी मूक-बधिर भाषा सीख ली थी, जिस कारण उन्हें भी आदित्य से बात करने में परेशानी नहीं होती थी। दोनों मौलानाओं ने पूछताछ में बताया कि नोएडा डेफ सोसाइटी में उन्होंने कई बच्चों का धर्मांतरण कराया। सोसाइटी के पेज पर लिखा है कि कानपुर स्थित ज्योति बधिर विद्यालय उनका आउटरिच पार्टनर है। इसी विद्यालय में आदित्य की माँ लक्ष्मी भी पढ़ाती थीं।

आदित्य की उम्र 24 साल है। उसके पिता वकील हैं। ये सब कुछ लॉकडाउन लगने के साथ शुरू हुआ, जब आदित्य मोबाइल का ज्यादा प्रयोग करने लगा। पूछने पर उसने बताया कि इंडोनेशिया, जापान, चीन और यूएसए के कई बच्चों से उसकी दोस्ती हो गई है। कई बार वह घर से बाहर चुपके से बात करने निकल जाता। रमजान का महीना शुरू होते ही उसने खाना-पीना छोड़ दिया। उसने बताया कि वो एक्सपेरिमेंट कर रहा है।

फिर वो उर्दू सीखने लगा। परिजनों ने मोबाइल खँगाला तो पता चला कि वो केरल के कुछ लोगों से संपर्क में है। केरल में इस्लामी कट्टरपंथियों की खबरें अक्सर आती थीं, इसीलिए माँ-बाप चिंतित रहने लगे। बाद में उसने बताया कि वो इस्लाम अपनाना चाहता है। फिर वो घर से फरार हो गया। बीच में एक बार थाने में शिकायत भी की गई थी, जिसके बाद आदित्य ने सुधरने का वादा किया था। उसे फिर से मोबाइल दे दिया गया, जिससे वो फिर उन कट्टरपंथियों के संपर्क में आ गया।

उसका जम कर ब्रेनवॉश किया गया था। इसके लिए व्हाट्सएप्प और टेलीग्राम जैसे एप्स का उपयोग किया गया। ‘इस्लामिक दावाह सेंटर’ से उसे धर्मांतरण का प्रमाण पत्र दिलाया गया। जब वो घर लौटा तो उसने बताया कि वो माँ की बीमारी के कारण लौटा है, लेकिन उसकी गतिविधियाँ अब भी संदिग्ध थीं। उसके माता-पिता ने चरमपंथियों से जुड़े कुछ दस्तावेज पुलिस को दिए हैं, जिसमें बाहरी फंडिंग के भी सबूत हैं।

बता दें कि उत्तर प्रदेश के नोएडा में ए़टीएस की टीम पुलिस ने धर्मांतरण कराने वाले दो मौलानाओं को गिरफ्तार किया है। इसमें से एक उमर गौतम पहले हिंदू ही था। वह करीब 30 साल पहले धर्मांतरण कर मुस्लिम बन गया था। इसके बाद से ही वो दिल्ली के जामिया नगर इलाके में इस्लामिक दावा सेंटर चला रहा था। यहीं से धर्मांतरण का सारा खेल खेला जाता है। ये दोनों अब तक 1,000 से अधिक लोगों का धर्मांतरण करा चुके हैं।

मुस्लिम युवती ने हिंदू से मंदिर में की शादी, भड़के रिश्तेदारों ने पहले पीटा फिर सिर मुंडवा गाँव में घुमाया

उत्तर प्रदेश के बाराबंकी जिले के फतेहपुर कोतवाली क्षेत्र के ररिया गाँव में अनाथ मुस्लिम युवती को हिंदू लड़के से विवाह करने की खौफनाक सजा मिली। युवती को चाचा और चचेरे भाइयों ने पहले जमकर पीटा। फिर सिर मुंडवाकर पूरे गाँव में घुमाया। घटना सोमवार (21 जून 2021) की है।

20 वर्षीय युवती के साथ इस तरह के शर्मनाक कृत्य के बाद पूरे गाँव आक्रोश फैल गया। घटना की सूचना पर पहुँची पुलिस पीड़िता को कोतवाली ले गई और उसकी तहरीर पर 8 लोगों के खिलाफ केस दर्ज कर लिया है। युवती के चाचा और चचेरे भाई समेत तीन को गिरफ्तार कर लिया गया है।

अम्मी और अब्बू की मौत के बाद से मुस्लिम युवती दादी के साथ रहती थी। उसने जिस हिन्दू से शादी की उसका नाम मिथुन है और वह भी अनाथ है। वह मजदूरी करता है। कुछ समय से दोनों के बीच प्रेम प्रसंग चल रहा था। रविवार (20 जून 2021) को दोनों ने एक मंदिर में शादी कर ली। शादी के बाद युवती अपने पति के घर चली गई।

युवती द्वारा हिंदू युवक से शादी करने की बात चलते ही उसके रिश्तेदार भड़क गए। रिपोर्ट के मुताबिक, पीड़िता ने थाने में दी गई शिकायत में बताया है कि सोमवार को सुबह 8 बजे के करीब चचेरे भाई अली हुसैन, नूर आलम, मोहम्मद शब्बीर और समी उसे अपने घर बुलाकर ले गए। इसके बाद वहाँ उसकी चाची नजीरा, शबनम और मोहम्मद यूनुस समेत कई आरोपितों ने उसे लात-घूँसे, चप्पल और डंडों से जमकर पीटा और उसका सिर मुंडवाकर गाँव में घुमाया।

जिस वक्त ये वारदात घटी उस दौरान पीड़िता का पति किसी काम से बाहर गया हुआ था। पीड़िता ने पुलिस को बताया है कि उसके परिवार के लोगों ने उसे जान से मारने की धमकी दी। चाचा ने कहा कि इसे जिंदा छोड़ना सही नहीं है। फिलहाल पीड़िता की शिकायत पर पुलिस ने विभिन्न धाराओं के तहत केस दर्ज कर लिया है।

इस मामले में बाराबंकी के एसपी ने बताया है कि थाना फतेहपुर ररिया गाँव का प्रकरण सामने आया है, जिसमें पीड़ित लड़की ने लिखित तहरीर दी है कि उसने अपनी मर्जी से मिथुन नाम के लड़के से मंदिर में शादी कर ली थी। इससे नाराज होकर उसके परिवार जनों ने उसके साथ अभद्रता की। मामले में तीन लोगों को गिरफ्तार कर लिया गया है और अन्य की तलाश की जा रही है।