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अब नुसरत जहाँ के ‘पति’ ने खोला मुँह, बताया- अगस्त की शूटिंग के बाद बदल गई, नवंबर में छोड़ा घर; कुछ पैसा भी बकाया

टॉलीवुड की मशहूर अभिनेत्री और तृणमूल कॉन्ग्रेस की सांसद नुसरत जहाँ इन दिनों अपनी शादी को अवैध बताने के कारण चर्चा में हैं। उन्होंने निखिल जैन के साथ अपनी सारी तस्वीरों को भी सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म इंस्टाग्राम से डिलीट कर दिया है। उनका कहना है कि निखिल जैन के साथ उनका रिश्ता भारतीय कानून के अनुसार मान्य नहीं है। वहीं निखिल का कहना है कि मामला कोर्ट में है वह इस पर ज्यादा कुछ नहीं कह सकते।

नुसरत के चौंकाने वाले बयान के बाद भाजपा नेता अमित मालवीय ने इसको लेकर सवाल उठाया है। बीजेपी आईटी सेल के प्रमुख ने इस संबंध में संसद में नुसरत जहाँ का एक वीडियो ट्वीट करते हुए सवाल उठाया,

“टीएमसी सांसद नुसरत जहाँ रूही जैन की अपनी व्यक्तिगत जिंदगी है। वह, किसके साथ शादी करती हैं, किसके साथ रहती हैं इससे किसी को मतलब नहीं होना चाहिए। लेकिन वह एक चुनी हुई जन प्रतिनिधि हैं। साथ ही संसद के रिकॉर्ड में निखिल जैन के साथ शादी की बात दर्ज है। ऐसे में क्या उन्होंने सदन में झूठ बोला है।”

निखिल जैन का बयान

एक्ट्रेस के साथ तुर्की में शादी करने वाले निखिल जैन का कहना है कि प्रेम में उन्होंने नुसरत को प्रपोज किया और दोनों ने साल 2019 में तुर्की में जाकर डेस्टिनेशन वेडिंग की। शादी का रिसेप्शन कोलकाता में हुआ था। अपने बयान में निखिल कहते हैं कि उन लोगों ने समाज में खुद को शादीशुदा कपल के तौर पर पेश किया। उनकी ओर से नुसरत को हर समर्थन देने की कोशिश की गई। हालाँकि कुछ समय बाद चीजें बदल गई।

निखिल कहते हैं कि नुसरत का बर्ताव अगस्त 2020 में फिल्म शूटिंग के बाद बदला। इस बीच उन्होंने कई बार नुसरत से कहा कि शादी को रजिस्टर करवा लेते हैं, लेकिन हर बार उनकी ये बात टाल दी गई। 5 नवंबर को नुसरत ने निखिल का फ्लैट अपने सामान के साथ छोड़ा और अपने Ballyguge फ्लैट पर शिफ्ट हो गईं। इसके बाद दोनों कभी पति-पत्नी बनकर नहीं रहे। नुसरत के जाने के बाद निखिल ने नुसरत से जुड़े दस्तावेज भी उनके पास भिजवा दिया। जब मीडिया में नुसरत के बाहर आने-जाने की खबरें छपी तो उन्हें ऐसा लगा जैसे उन्हें धोखा मिला है।

8 मार्च 2021 को इस मामले में अलीपुर कोर्ट के सामने शादी रद्द कराने के लिए एक सिविल सूट दायर हुआ और तबसे ये मामला कोर्ट में ही है। निखिल कहते हैं कि जब तक मामला कोर्ट में है वह कुछ नहीं कह सकते। उनके मुताबिक अगर नुसरत इस संबंध में कुछ न कहतीं तो उन्हें भी ये तथ्य नहीं बताने पड़ते।

निखिल ने बताया कि कैसे नुसरत का होम लोन कर्जा चुकाने के लिए वह अपने परिवार के अकाउंट से उनके अकाउंट में पैसे डालते थे। उन्हें लगता था कि ये पैसे वह धीरे-धीरे इन्टॉलमेंट में चुका देंगी। बयान में निखिल ने कहा है, “अगर उसके अकाउंट से मेरे परिवार के अकाउंट में कोई पैसा आया है तो वह केवल रीपेमेंट हैं जिसे अच्छी नीयत से उन्हें दिया गया था। कुछ पैसा अब भी बकाया है।”

नुसरत के सभी आरोपों को खारिज करते हुए निखिल ने इन्हें निराधार, अपमानजनक और सत्य से कोसों दूर कहा है। निखिल कहते हैं, “मेरे परिवार ने नुसरत को दोनों हाथों से बेटी की तरह प्यार दिया। उन्हें क्या मालूम था ये दिन देखना होगा।”

नुसरत जहां के आरोप

गौरतलब है कि इससे पहले नुसरत जहाँ ने कहा था कि कारोबारी निखिल जैन के साथ उनकी शादी तुर्की में हुई थी, जो भारतीय कानून के हिसाब से अमान्य है। ये पहली बार है जब निखिल जैन से अलग होने को लेकर उन्होंने चुप्पी तोड़ी थी। नुसरत ने अपने बयान में कहा कि वो भारतीय सरजमीं पर हैं, इसीलिए ‘तुर्किश मैरिज रेगुलेशन’ के तहत हुई ये शादी समारोह अमान्य है। साथ ही उन्होंने बताया कि ये एक इंटरफेथ मैरिज था, इसे भारत के ‘स्पेशल मैरिज एक्ट’ के तहत मान्यता नहीं दिलाई गई। निखिल जैन को लेकर नुसरत का कहना था कि जैन ने बिना उनकी जानकारी के उनके बैंक एकाउंट्स और उसके फंड्स का दुरुपयोग किया। उन्होंने कहा कि वो अब भी बैंक से इस सम्बन्ध में बात कर रही हैं और ज़रूरत पड़ने पर सबूत भी देंगी।

JNU की लाइब्रेरी में गुंडई को NSUI का साथ: सुरक्षाकर्मियों से मारपीट, तोड़फोड़ कर घुसे छात्रों पर FIR

जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय (जेएनयू) की भीमराव आंबेडकर लाइब्रेरी में तोड़फोड़ करने और सुरक्षाकर्मियों के साथ मारपीट करने के आरोप में कुछ छात्रों पर दिल्ली पुलिस ने एफआईआर दर्ज की है। विश्वविद्यालय प्रशासन ने भी इन छात्रों के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई का आदेश दिया है।

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार घटना मंगलवार (08 जून 2021) की बताई जा रही है। पुलिस के द्वारा दी गई जानकारी के अनुसार जेएनयू के 35-40 छात्र बीआर आंबेडकर लाइब्रेरी के बाहर जमा हो गए। Covid-19 के कारण लाइब्रेरी फिलहाल छात्रों के लिए बंद की गई थी। इसके बाद छात्रों ने विरोध करना शुरू का दिया और गार्ड से लाइब्रेरी खोलने के लिए कहा।

दिल्ली पुलिस द्वारा दर्ज की गई एफआईआर में साफ तौर पर कहा गया है कि लाइब्रेरी के बाहर जमा छात्रों ने गेट पर लाठी-डंडे बरसाए और वहाँ उपस्थित सुरक्षाकर्मियों के साथ बदतमीजी की। सुरक्षाकर्मियों ने छात्रों के इस समूह को लाइब्रेरी में घुसने से रोकने का प्रयास किया। लेकिन छात्रों ने एक छोटे से दरवाजे पर लगा ग्लास तोड़ दिया और जबरदस्ती लाइब्रेरी के अंदर घुस गए।

दिल्ली के वसंत कुंज पुलिस स्टेशन में पाँच छात्रों को नामजद करते हुए एफआईआर दर्ज की गई है और सीसीटीवी फुटेज के माध्यम से घटना में शामिल अन्य आरोपितों की पहचान की जा रही है। जेएनयू प्रशासन का कहना है कि लाइब्रेरी तोड़कर अंदर घुसे नामजद 5 आरोपितों समेत अन्य छात्रों ने कोविड प्रोटोकॉल का भी उल्लंघन किया। घटना की गंभीरता को देखते हुए 5 नामजद आरोपितों सहित अन्य के खिलाफ डैमेज टू पब्लिक प्रॉपर्टी ऐक्ट, डीडीएमए ऐक्ट, महामारी अधिनियम और आईपीसी की विभिन्न धाराओं के तहत मामला दर्ज किया गया है।   

इसके अलावा 10 जून को जेएनयू प्रशासन द्वारा सर्कुलर जारी किया गया। इसमें कहा गया कि दिल्ली सरकार द्वारा अभी भी Covid-19 कर्फ्यू नहीं हटाया गया है और न ही सरकार द्वारा सामान्य शैक्षणिक गतिविधियों के लिए कोई गाइडलाइन जारी की गई है। ऐसे में छात्रों ने कोविड प्रोटोकॉल्स का उल्लंघन किया है और सुरक्षाकर्मियों सहित अन्य लोगों के जीवन को खतरे में डाला है। सर्कुलर में कहा गया कि घटना में शामिल सभी छात्रों के खिलाफ विश्वविद्यालय के नियमों के अनुसार अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाएगी।

कॉन्ग्रेस के छात्र संगठन एनएसयूआई ने लाइब्रेरी खोलने की माँग कर रहे छात्रों का समर्थन किया। हालाँकि जेएनयू प्रशासन यह बता चुका है कि दिल्ली सरकार की ओर से फिलहाल शैक्षणिक कार्यों को शुरू करने के लिए कोई गाइडलाइन नहीं जारी की गई है, लेकिन फिर भी एनएसयूआई ने जेएनयू प्रशासन को ‘संघी’ कहकर यह आरोप लगाया कि प्रशासन जानबूझकर लाइब्रेरी बंद रखना चाहता है।

ज्ञात हो कि कोरोना वायरस संक्रमण की दूसरी लहर के दौरान जेएनयू में 74 छात्र और स्टाफ सदस्य संक्रमित हो गए थे। एक स्वास्थ्य अधिकारी ने नाम न छपने की शर्त पर बताया था कि जेएनयू से क्वारंटीन सेंटर में भर्ती किए गए अधिकांश छात्र और स्टाफ सदस्यों का ऑक्सीजन स्तर 40% से भी कम हो गया था। एक-दो को छोड़कर बाकी को ऑक्सीजन सपोर्ट पर रखना पड़ा था।   

‘शरीर पर गर्म पानी डालता, बेल्ट से पीटता, मूत्र पिलाता’: मार्टिन जोसेफ की दरिंदगी की शिकार बनी महिला की आपबीती सुन सिहर जाएँगे

केरल के कोच्चि में एक 24 वर्षीय महिला को उसके लिव-इन पार्टनर मार्टिन जोसेफ ने महीनों तक फ्लैट में बंद रखकर उसका यौन उत्पीड़न किया और तरह-तरह की प्रताड़नाएँ दीं। हाल में महिला किसी तरह उसके चंगुल से भागने में सफल हुई तो पुलिस को सारी आपबीती सुनाई। 

महिला की शिकायत पर एर्नाकुलम थाने में कई धाराओं में मुकदमा दर्ज किया गया है। द न्यू इंडियन एक्सप्रेस के अनुसार, महिला की शिकायत मिलने पर पुलिस ने मार्टिन के ख़िलाफ़ बलात्कार, महिला को गलत ढंग से बंधक बनाए रखने, आपराधिक धमकी देने और जान से मारने की धमकी देने के मामले में केस दर्ज किया है।

महिला का उत्पीड़न कोच्चि के मरीन ड्राइव में एक फ्लैट पर फरवरी 2020 से मार्च 2021 तक हुआ। मामला प्रकाश में तब आया जब पीड़ता की किसी दोस्त ने उसकी घाव की तस्वीरों को जारी किया।

पीड़िता एक फैशन डिजाइनर है। वह मार्टिन जोसेफ के साथ 15 फरवरी 2020 से लिव-इन में थी। मरीन ड्राइव आने से पहले दोनों कदवंतरा के एक फ्लैट में रुके थे। पीड़िता कहती है कि पहले मार्टिन ने उसे शेयर बाजार में 5 लाख रुपए निवेश करने के लिए राजी किया और फिर कारोबार करके उसे महीने में 40,000 देने की पेशकश की।

हालाँकि बाद में न तो मार्टिन ने पैसे दिए और न ही उसे इज्जत से रखा। पीड़िता कहती है कि पिछले एक साल में उसे शारीरिक और मानसिक तौर पर प्रताड़ित किया गया। उसे मारने की धमकियाँ दी गई। परेशान होकर पीड़िता ने दिसंबर 2020 में मार्टिन से अपना रिश्ता तोडकर जीवन में आगे बढ़ने का फैसला किया। लेकिन बाद में उसने सोचा कि एक और मौका देना चाहिए और इस तरह वह दोबारा उसके पास रुकी रही।

रिपोर्ट्स के अनुसार 20 फरवरी 2020 से 8 मार्च 2021 के बीच उसे फ्लैट में बंद रखा गया और उसके साथ हिंसा हुई। मार्टिन ने उसका रेप किया। उसकी नंगी तस्वीरें खींची और धमकाया कि अगर उससे कॉपरेट नहीं किया तो सारी तस्वीर उसके माँ-बाप को भेज देगा। 

पीड़िता बताती है कि उसे कई बार बेरहमी से मारा गया और पेशाब पीने के लिए भी जबरदस्ती की गई। बाद में कथित तौर पर उसे जलाया गया। पीड़िता के अनुसार मार्टिन उसे बेल्ट से मारता था। उस पर मिर्ची वाला गर्म पानी डाल देता था और शारीरिक व मानसिक तौर पर प्रताड़ित करता था। 

राज्य महिला अधिकार पैनल ने किया हस्तक्षेप

मामले के संज्ञान में आने के बाद इसे राज्य के वीमेन राइट्स पैनल द्वारा देखा जा रहा है। पुलिस को कार्रवाई करने और पीड़िता को सुरक्षा दिलाने के निर्देश दिए गए हैं। पीड़िता ने बताया कि उस पर शिकायत को वापस लेने का दबाव बनाया जा रहा था। लेकिन किसी तरह 8 अप्रैल को मामले में मुकदमा दर्ज हुआ।

पुलिस ने शिकायत के आधार पर आरोपित के ख़िलाफ़ लुकआउट नोटिस निकाला। मगर, मामले में महीने बीतने के बाद अब तक आरोपित का कुछ पता नहीं है। पुलिस ने उसकी खोजबीन के लिए एसआईटी गठित की है। इन्हें दो ग्रुप में बाँटकर त्रिशूर और कोजीकोड़े के कई स्थानों पर छापेमारी की गई है।

अग्रिम जमानत के लिए हाई कोर्ट में मार्टिन

इस बीच मार्टिन ने केरल हाईकोर्ट में अंतरिम जमानत के लिए याचिका डाली है। अपनी याचिका में उसने कहा कि वो सिर्फ 26 साल का है। महिला ने उससे अपना मैरिटल स्टेटस छिपाया और उसके साथ लिव इन में रही। बाद में जब रिश्ता खत्म हो गया तो रेप का केस फाइल कर दिया। उसकी ओर से याचिका दायर करते हुए वकील पी विजयभानू ने कहा कि उनके मुअक्किल पर ये सारे आरोप झूठे हैं। 

मार्टिन की इस याचिका को एर्नाकुलम की सत्र न्यायालय ने 18 मई को खारिज कर दिया था। अतिरिक्त सत्र न्यायालय के न्यायाधीश डी सुरेश कुमार ने मार्टिन की जमानत याचिका को खारिज करते हुए कहा कि नौ तस्वीरें हमलावर के हाथों पीड़ित की पीड़ा को दर्शाती हैं। बाद में 8 जून (मंगलवार) को हाई कोर्ट ने भी आरोपित की अग्रिम जमानत याचिका पर सुनवाई 11 जून तक के लिए स्थगित कर दी।

देसी बम से उड़ा था बांका में मदरसा, कंटेनर में रखा था विस्फोटक; दम घुटने से मरा मौलाना: रिपोर्ट्स

बिहार के बांका जिले के एक मदरसे में हुए ब्लास्ट की चल रही जाँच के बीच प्रशासन ने कुछ चौंकाने वाले खुलासे किए हैं। मीडिया रिपोर्टों में डीएम और एसपी के हवाले से बताया गया है कि यह मदरसा अवैध था। धमाका कंटेनर में रखे एक देसी बम के फटने से हुआ था। मौलाना के मौत की वजह दम घुटना बताया गया है।

प्रभात खबर की रिपोर्ट में बताया गया है कि कई टीम अलग-अलग बिंदुओं पर जाँच कर रही है। इसमें मुख्य रूप से सेंट्रल आइबी, एटीएस और एसआइटी शामिल है। डीएम सुहर्ष भगत और एसपी अरविंद कुमार गुप्ता ने गुरुवार (10 जून 2021) को प्रेस कॉन्फ्रेंस कर बताया कि आईडी ब्लास्ट के साक्ष्य नहीं मिले हैं। धमाका देसी बम से होने की बात सामने आई है।

मौके से बम बाँधने में इस्तेमाल किया जाने वाला सुतली, कील और कंटेनर का टुकड़ा बरामद हुआ है। बम कितना शक्तिशाली था यह एसएफएल रिपोर्ट आने के बाद ही स्पष्ट हो पाएगा। एसपी ने बताया कि जो देसी बम फटा वह मदरसे के एक कमरे में गेट के पास कंटेनर में रखा था। अभी तक मृत इमाम की संदिग्ध गतिविधियों को लेकर भी कोई सबूत नहीं मिले हैं। वहीं डीएम ने बताया कि इस मदरसे का रजिस्ट्रेशन नहीं था। यह 18-20 वर्षो से रैयती जमीन पर चल रहा था और 50-60 बच्चों को तालीम दी जा रही थी।

धमाके में मदरसे का इमाम मौलाना अब्दुल मोबीन घायल हो गया था। बाद में उसकी मौत हो गई। मौलाना मदरसे में ही रहता था। ब्लास्ट के बाद उसके साँस की नली धुँआ भर गया। दम घुटने और भारी मलबे में दबने की वजह से उसकी मौत हो गई। मामले में दो गाँव के बीच विवाद के एंगल से भी पड़ताल की जा रही है।

गौरतलब है कि बांका के नवटोलिया क्षेत्र में बने मदरसे में हुए विस्फोट की खबर 7 जून को आई थी। वहाँ नूरी मस्जिद इस्लामपुर परिसर के आगे एक मदरसे में सुबह 8 बजे बम विस्फोट होने से आसपास का इलाका थर्रा उठा था और मदरसा भी पूरी तरह से ध्वस्त हो गया था।

मीडिया रिपोर्टों में इस घटना को लेकर कई तरह के कयास लगाए जा रहे थे। कुछ स्थानीय लोगों के हवाले से बताया गया था कि मौलाना बम बनाता था और 3 युवक उसका सहयोग करते थे। क्षेत्र में छोटी-छोटी बात पर बमबारी होती थी। भागलपुर से बारूद लाकर काम किया जाता था। यह बात भी कही जा रही थी कि इस धमाके के तार बांग्लादेश से जुड़ सकते हैं और इसकी जाँच एनआईए (NIA) को सौंपी जा सकती है।

इस घटना के बाद से बिहार में सियासत भी काफी गरम है। विस्फी से बीजेपी विधायक हरिभूषण ठाकुर ने स्पष्ट शब्दों में कहा है कि इस घटना ने मदरसों की पोल खोल दी है। उन्होंने कहा कि सरकारी अनुदान लेकर मदरसे आतंकी तैयार कर रहे हैं। साथ ही इसे भारत के इस्लामीकरण के षड्यंत्र से भी जोड़ा।

‘प्रधानमंत्री मोदी के उठाए इस कदम में मैं भी भागीदार बनूँगा’: स्वामी रामदेव ने कहा- लगवाऊँगा कोरोना का टीका

इंडियन मेडिकल एसोसिएशन (IMA) के साथ विवाद के बीच स्वामी रामदेव ने ऐलान किया कि वे जल्द कोरोना वैक्सीन लगवाएँगे। उन्होंने अन्य लोगों से भी वैक्सीन लगवाने की अपील की। साथ ही कहा है कि आयुर्वेद और योग कोविड संक्रमण के ख़िलाफ सुरक्षा कवच के तौर पर काम करते हैं।

बाबा रामदेव ने कहा, “प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 21 जून से देश के हर राज्‍य में 18 साल से अधिक के नागरिकों को मुफ्त कोरोना वैक्‍सीन देने का ऐलान किया है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की ओर से उठाए गए इस कदम में मैं भी भागीदार बनूँगा।” उन्होंने कहा कि योग और आयुर्वेद को अपने जीवन में अपनाएँ योग बीमारियों के सामने एक ढाल की तरह है। योग कोरोना से होने वाली जटिलताओं से भी बचाता है।

बाबा रामदेव ने अपने पिछले बयानों पर हुए विवाद के मद्देनजर बात रखी। उन्होंने कहा कि उनका किसी भी संगठन या चिकित्सा पद्धति से बैर नहीं है, उनकी लड़ाई ड्रग माफियाओं से है। अच्छे डॉक्टरों को देवदूत बताते हुए कहा कि गैर जरूरी दवाइयों और इलाज के नाम पर किसी का भी शोषण नहीं किया जाना चाहिए। प्रधानमंत्री जन औषधि केंद्र की सराहना करते हुए कहा कि सरकार के इस कदम से लोगों को कम दामों में जेनेरिक दवाइयाँ आसानी से उपलब्ध कराई जा सकेंगी।

बता दें कि बाबा रामदेव ने इससे पहले कहा था कि उन्‍हें कोरोना वैक्‍सीनेशन की जरूरत नहीं है। बाद में उन्‍होंने अपने इस बयान पर स्‍पष्‍टीकरण दिया कि वह अभी हट्टे-कट्टे हैं। उनका हार्ट, बीपी, किडनी, लिवर और इम्‍युनिटी सब अभी ठीक है। उनकी बायोलॉजिकल उम्र सिर्फ 25 साल है। पहले कमजोर लोगों को वैक्‍सीन लगनी चाहिए। वह वैक्‍सीन के समर्थक हैं और सबसे अंत में टीका लगवाएँगे।

उल्लेखनीय है कि बाबा रामदेव पिछले दिनों एलोपैथी पर टिप्पणी के बाद से चर्चा में हैं। दरअसल, कुछ दिन पहले बाबा की एक वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हुई थी। वीडियो में उन्हें कहते सुना गया था कि एलोपैथी दवाओं के कारण ही कोरोना वायरस संक्रमण में कई मरीजों की जान गई। इस बयान पर इतना बवाल हुआ कि IMA ने उन्हें मानहानि नोटिस भेज दिया।

टिकरी बॉर्डर पर किसान आंदोलन में फिर से यौन उत्पीड़न की घटना क्या सन्देश देती है?

टिकरी बॉर्डर पर फिर से यौन उत्पीड़न के घटना की खबर है। खबर के अनुसार उपस्थित किसानों की सहायता के लिए बनाए गए एक अस्थाई अस्पताल में कोरोना और टीकाकरण को लेकर जागरूकता फैलाने अमेरिका से आई एक महिला ने इंस्टाग्राम पर अपनी पोस्ट में यह आरोप लगाया है कि अस्थाई अस्पताल में डॉक्टर के सहायक के रूप में काम कर रहे लोगों ने उसके साथ छेड़छाड़ और उसका यौन उत्पीड़न किया। पीड़िता ने यह आरोप भी लगाया कि जब उसने अस्पताल में कार्यरत डॉक्टर स्वाईमान सिंह को घटना की जानकारी दी तो उन्होंने अपने सहायकों के खिलाफ कार्यवाई करने से यह कहते हुए मना कर दिया कि पीड़िता तो कुछ दिनों के लिए अमेरिका से आई है, ये सहायक तो बहुत दिनों से काम कर रहे हैं, ऐसे में वे इनके खिलाफ कोई कदम नहीं उठा सकते।

इस अस्थाई अस्पताल का नाम पिंड कैलिफ़ोर्निया है।

जब से किसानों ने आंदोलन शुरू किया है, टिकरी में ऐसी यह दूसरी घटना है। पहली घटना करीब एक महीना पहले हुई थी, जिसमें पश्चिम बंगाल से आंदोलन करने आई एक युवती के साथ सामूहिक बलात्कार हुआ था। बाद में युवती की कोरोना संक्रमण से मृत्यु हो गई थी। अप्रैल महीने में हुई इस आपराधिक घटना में आम आदमी पार्टी के दो नेताओं सहित तीन लोगों के शामिल होने की खबर थी।

अधिकतर लोगों के लिए यह दुःख और शर्म की बात है। पर क्या सब इस घटना से शर्मिंदा होंगे? शायद नहीं। आंदोलनकारियों और आन्दोलनजीवियों की सहायता करने के लिए तत्पर लोगों के साथ ऐसा अपराध यदि एक बार हो तो माना जा सकता है कि आंदोलन में लिप्त लोगों को शायद ऐसे अपराध की आशा न होगी इसलिए ऐसी कोई संभावित घटना न हो, इसके लिए उन्होंने किसी तरह का इंतज़ाम करने के बारे में नहीं सोचा होगा। पर यदि ऐसा अपराध एक ही जगह दो बार हो जाए तब?

तब भी क्या आंदोलन के लिए लोगों को इकट्ठा करने का काम जिन्होंने किया है, वे अपनी जिम्मेदारियों से मुँह मोड़ सकते हैं? बलात्कार की पहली घटना का खुलासा भी तब हुआ, जब युवती की मृत्य हो गई। यदि ऐसा न होता तो शायद उस अपराध की जानकारी बाहर न आती। चिंता का विषय यह था कि जब बातें सामने आनी शुरू हुईं तब पता चला कि न केवल योगेंद्र यादव को बल्कि उनकी पत्नी को भी अपराध की जानकारी पहले से थी और पुलिस के पास जाने की जगह ये लोग लड़की के पिता को साधने में लगे रहे ताकि बातें बाहर न आएँ।

इस बार भी कुछ ऐसा ही हुआ है। जब पीड़िता ने डॉक्टर से शिकायत की तो उसका सीधा जवाब था कि वो आरोपियों के विरुद्ध इसलिए कुछ नहीं कर सकता क्योंकि ये लोग आंदोलन के लिए बहुत दिनों से काम करते रहे हैं। ऐसे में यह प्रश्न उठता है कि कैसे लोगों को लेकर ये आंदोलन चलाया जा रहा है? यह कैसा आंदोलन है, जिसमें एक महीने के अंतराल में यौन अपराध की दो घटनाएँ हो जाती हैं और दोनों बार आंदोलन चलाने वाले अपराध को छिपाने की कोशिश करते हैं?

पहली बार अपराध का पता देर से इसलिए चला क्योंकि कोशिश करके लड़की के पिता को कई दिनों तक चुप करवाया गया। एक कारण शायद यह भी था कि पीड़िता के पिता इस आशा में थे कि शिकायत करने के बाद जिम्मेदार लोग कार्रवाई करेंगे। दूसरी बार अपराध का खुलासा शायद इसलिए हो पाया क्योंकि पीड़िता अपने फैसले लेने के लिए भी स्वतंत्र थी और उसे बताने के लिए भी। दूसरी बार भी यदि कोई भारतीय महिला होती तो शायद अपराध की जानकारी इतनी जल्दी बाहर न आती।

इस तरह का अपराध होने के बाद आंदोलनकारियों के बचाव में सबसे बड़ा एक तर्क यह दिया जाता है कि अपराध के ऐसे आरोप इसलिए लगाए जा रहे हैं ताकि आंदोलन और किसानों को बदनाम किया जाए। यह कैसा तर्क है? यह कैसे संभव है कि एक भीड़ जो सफल आंदोलन चलाने का दावा करती है, उसे यह नहीं पता कि उसके बीच कौन लोग रह रहे हैं? कौन लोग हैं, जो लगातार रह रहे हैं?

कोई तो नियम होगा वहाँ आने-जाने और बराबर रहने वालों के लिए? खासकर ऐसी जगह, जहाँ लोग सात महीने से हैं और जहाँ यह तक सुनिश्चित किया गया है कि पाँव की मालिश करने के लिए मशीन आवश्यक है? जिन आंदोलन के लिए तरह-तरह की सुविधाएँ सुनिश्चित की गई हैं, वहाँ यह कैसे सुनिश्चित नहीं किया जा सका कि उपस्थिति रहने वाले हर व्यक्ति की जानकारी रहे?

आंदोलन से सहमत न रहने वाले भी नहीं चाहेंगे कि आंदोलन की जगह ऐसे अपराध हों पर उन लोगों को भी विचार करने की आवश्यकता है जो आंदोलन के प्रति अपना समर्थन दिखाने के लिए स्थल पर आना तो चाहते हैं पर आंदोलन की उनकी जानकारी किसी तरह के प्रोपेगंडा पर आधारित है।

जिस तरह की बातें और तर्क सुनाई या दिखाई देते हैं, उससे यह साफ़ हो जाता है कि किसान आंदोलन केवल किसानों और उनकी समस्याओं के बारे में नहीं रहा। इसके साथ कई और ग्रुप जुड़ गए हैं, जिनका अपना निहित स्वार्थ है। ऐसे में केवल किसानों को समर्थन देने की मंशा लेकर पहुँचने वाले लोग विरोध की जगह जाने के लिए स्वतंत्र हैं पर इसके साथ किस तरह का जोखिम जुड़ा हुआ है, उसकी भी समझ लेकर जाएँ तो व्यक्तिगत तौर पर उनके लिए सही रहेगा।

हिंदू महिला पर छिड़का केरोसिन, जलाकर मार डाला: 2 साल से शाहनवाज के साथ लिव इन में थी

केरल के अंचल में हिंदू महिला को जिंदा जलाकर मारने का मामला उजागर हुआ है। जानकारी के मुताबिक महिला अपने पहले पति से अलग होने के बाद पिछले 2 साल से प्रेमी के साथ लिव-इन में रहती थी। हाल में उनकी किसी बात को लेकर कहासुनी हुई और प्रेमी ने उसे आग के हवाले कर दिया। घटना मंगलवार (जून 8, 2021) शाम की है।

पुलिस के अनुसार, आरोपित युवक की पहचान शाहनवाज (Shanavas) के तौर पर हुई है। इसने एदामुलक्कल थुम्बिककुनिल निवासी 28 वर्षीय अथिरा को केरोसिन डालकर जला दिया। घटना को अंजाम देते वक्त उसका शरीर भी कई जगह से थोड़ा-थोड़ा जल गया। इसके कारण अंचल पुलिस ने उसे हिरासत में लिया और तिरुवनंतपुरम के मेडिकल कॉलेज अस्पताल में भर्ती करवाया।

स्थानीयों के अनुसार पहले उन्होंने अथिरा की चीखने की आवाजें सुनी। जब बाहर निकल कर देखा तो अथिरा आग की लपटों में लिपटी अपने घर से भाग रही थी। सबने मिलकर उसे जल्द से जल्द अस्पताल में भर्ती करवाया। मरने से पहले अथिरा ने डॉक्टरों और पुलिस को बताया कि शाहनवाज पहले से शादीशुदा था। उसी ने उस पर केरोसिन डाला और आग लगाई।

उल्लेखनीय है कि कुछ रिपोर्ट्स का कहना है कि अथिरा को केरोसिन से इसलिए जलाया गया क्योंकि वह सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म इंस्टाग्राम पर लगातार अपने वीडियो डालती थी जो शाहनवाज को पसंद नहीं था। पुलिस के अनुसार अथिरा और शाहनवाज में मंगलवार की शाम 7 बजे किसी बात पर कहासुनी हुई। इसी गुस्से में उसने महिला पर केरोसिन डाल आग लगा दी।

अब पुलिस इस मामले में अथिरा के आखिरी बयान के आधार पर आरोपित पर निगरानी बनाए हुए हैं। अभी तक की जाँच में सामने आया है कि दोनों पिछले दो साल से साथ रहते थे। इनकी एक 6 महीने की बच्ची है और दोनों की पहली शादी से 2-2 बच्चे थे।

कर्नाटक: VHP के विरोध के बाद मंदिरों के फंड से मस्जिद-मदरसों के इमाम को पैसे देने पर लगी रोक

कर्नाटक के दक्षिण कन्नड़ में विश्व हिंदू परिषद (VHP) ने हिंदू रिलीजियस एंडोमेंट डिपार्टमेंट के फंड से 41 मस्जिदों और मदरसों के इमामों को कोविड रिलीफ के रूप में भत्ते देने के सरकार के फैसले का विरोध किया। इसके बाद सरकार ने फैसला वापस ले लिया।

हाल ही में कर्नाटक सरकार ने मुजराई (हिंदू रिलीजियस एंडोमेंट डिपार्टमेंट) के तहत ‘सी’ श्रेणी के मंदिरों में सेवा करने वाले पुजारियों के साथ-साथ इमामों और मुअज्जिनों को 3,000 रुपए का राहत पैकेज देने की घोषणा की थी।

मंदिर के फंड का किसी दूसरी जगह इस्तेमाल किए जाने पर विहिप ने कड़ी आपत्ति जताई थी। विहिप ने इस संबंध में प्रदेश के मुजराई मंत्री कोटा श्रीनिवास पुजारी को एक ज्ञापन सौंपा था। इसमें कहा गया था, “हिंदू मंदिरों से प्राप्त धन का उपयोग केवल मंदिरों और हिंदू समुदाय के कल्याण के लिए किया जाना चाहिए।”

इस मामले में विवाद बढ़ने के बाद मुजराई मंत्री पुजारी ने इस फैसले को वापस लेने का आश्वासन दिया। एक आधिकारिक बयान जारी करते हुए पुजारी ने कहा, “विभिन्न हिंदू संगठनों से प्राप्त अनुरोधों के बाद मैंने अधिकारियों को धार्मिक बंदोबस्ती विभाग से दूसरे धार्मिक संस्थानों को दिए जाने वाले सभी पैकेज को तत्काल प्रभाव से रोकने का निर्देश दिया है।”

एक मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक, मंत्री पुजारी ने बताया कि राज्य में कुल 764 अन्य धार्मिक संस्थानों को हिंदू धार्मिक बंदोबस्ती विभाग से फंडिंग की गई थी, जिसे अब रोक दिया जाएगा।

इंडियन एक्सप्रेस से बात करते हुए विश्व हिंदू परिषद के संभागीय सचिव शरण पंपवेल ने कहा कि अगर सरकार लोगों को रिलीफ फंड और भत्ते देना चाहती है तो उसे कोई दूसरा प्रावधान करना चाहिए। विहिप नेता ने सुझाव दिया कि अगर कर्नाटक सरकार मौलवियों को पैसे देना चाहती है तो उसे वक्फ बोर्ड के मस्जिदों और मदरसों को अपने नियंत्रण में लेना चाहिए और उसके फंड का उपयोग इमामों के हित में करना चाहिए।

पंपवेल ने बताया कि हिंदू रिलीजियस एंडोमेंट डिपार्टमेंट के जरिए सरकार 150 से ज्यादा मस्जिदों और उनके इमामों को राहत पैकेज मुहैया करा रही है।

पार्टी जान कहती है – कोई भी स्कैम छोटा नहीं होता… और स्कैम से बड़ा कोई धर्म नहीं होता

किट से कॉन्ग्रेस पार्टी खुद को अलग नहीं रख पा रही है। आए दिन किसी न किसी किट से जुड़ी हुई मिलती है। अभी टूलकिट की चर्चा ख़त्म हो रही थी कि कोविड किट की चर्चा शुरू हो गई। खबर है कि पंजाब की कॉन्ग्रेस सरकार पर कोविड किट स्कैम का आरोप लगा है। दूसरा नाम देना चाहें तो इसे महामारी स्कैम भी कह सकते हैं।

दस बरस भी नहीं हुआ, जब जमाना अच्छा था और मोदी प्रधानमंत्री नहीं थे तब पार्टी स्कैम की महामारी के लिए जानी जाती थी। अब जमाना खराब है तो उसे महामारी स्कैम करना पड़ रहा है। स्कैम कितने का है, ये गिनती अभी चल रही है। चूँकि शुरुआती दिन हैं तो गिनती केवल आठ-दस करोड़ तक ही पहुँची है।

यह बात कई कॉन्ग्रेसियों के लिए निश्चित रूप से चिंताजनक होगी कि जिस पार्टी पर एक समय लाखों करोड़ के स्कैम के आरोप लगते थे, वह अब आठ-दस करोड़ पर आ गई है। वैसे कुछ कॉन्ग्रेसी यह सोचते हुए खुश होंगे कि; कुछ बुरा नहीं है, आठ-दस करोड़ का ही सही, स्कैम कर तो ले रहे हैं। इसका मतलब यह है कि स्कैम करने का पार्टी का टैलेंट अभी भी बना हुआ है। प्रैक्टिस बनी रही और भविष्य में मौका मिला तो पार्टी एक्सपेंशन कर लेगी।

जिनका इस बात में विश्वास है कि देश पर शासन कैसे करना है, यह केवल कॉन्ग्रेस को पता है, वे इस नए स्कैम के बाद यह मुहावरा याद करके खुश हो रहे होंगे कि; मरा हुआ हाथी भी सवा लाख का होता है। जिन्हें इस बात की चिंता सताए जा रही थी कि पार्टी धीरे-धीरे सिमटती जा रही है, वे यह सोचकर खुश होंगे कि कठिन समय में भी पार्टी की अपनी निपुणता में कोई कमी नहीं आई है। अवसर रहे तो उत्तम और न रहे तो अति उत्तम, क्योंकि तब अवसर का निर्माण कर स्कैम करने से पार्टी की निपुणता में और निखार आता है।

पार्टी पावर से दूर भले चली जाए, पर स्कैम से दूर नहीं जा सकती। यही पार्टी का दर्शन है और यही उसका सम्पूर्ण प्रदर्शन है। कभी-कभी तो लगता है जैसे पार्टी अगर अपने इस दर्शन से भटकने की कोशिश भी करती होगी तो कोई अदृश्य शक्ति उसे स्कैम के सामने धकेल देती होगी, यह कहते हुए कि; अपने दर्शन और अपने कर्म से दूर रह कर ग्रैंड ओल्ड पार्टी को खुद का अपमान करने का अधिकार नहीं है।

कभी-कभी यह भी लगता है जैसे पार्टी का कोई अलिखित नियम है, जिसके तहत हर कॉन्ग्रेसी को हिदायत होगी कि उसे पार्टी का प्रमुख सिद्धांत भूलने का अधिकार नहीं है और सिद्धांत यह है कि सूखा, बाढ़, तूफान, महामारी, आपदाएँ वगैरह अवसर लेकर आते हैं। ऐसे में अवसर की तलाश और उसका फायदा न उठाना पार्टी के खिलाफ बगावत मानी जाएगी। इसलिए हर कॉन्ग्रेसी को निष्ठा, संस्कृति, कर्त्तव्य और आदत के अनुसार अपने-अपने अवसर खोज लेने हैं।

इतिहास गवाह है कि ऐसा समय काम करने वालों के लिए कुछ नया करने का, काम न करने वालों के लिए कुछ नया न करने का और कॉन्ग्रेस के लिए स्कैम करने का होता है और वही इतिहास इस बात का भी गवाह है कि पार्टी के इस अलिखित नियम का पार्टी वालों ने सदा पालन किया है।

कोरोना के टीके को ही ले लीजिए। कॉन्ग्रेसी और उनके समर्थक पूछ रहे थे कि ऐसे कठिन समय में टीका निर्माता प्रॉफिट क्यों कमाना चाहते हैं? वे टीका मुफ्त में क्यों नहीं देते। उनकी इस बात को किसी ने कान नहीं दिया तो ये पूछने लगे कि केंद्र सरकार को राज्य सरकार से कम दाम में क्यों मिल रहा है? निर्माता सरकार से प्रॉफिट क्यों कमाना चाहते हैं? इन्हीं कॉन्ग्रेसियों की कैप्टन सरकार ने खुद यही टीके बेच कर वही प्रॉफिट कमा लिया, जो वह दूसरों को कमाते हुए नहीं देखना चाहती थी।

इसे कहते हैं कॉन्ग्रेसी-पना। दशकों का आजमाया फॉर्मूला। जब चाहे जहाँ चाहे, दूसरों पर आरोप लगा लो और खुद स्कैम कर डालो। जिस समय खुद कोई घोटाला कर रहे हो, उसी समय किसी और के ऊपर वैसे ही किसी घोटाले का आरोप लगा डालो, सामने वाला सफाई देना शुरू करे तो वही काम कर डालो, जिसका आरोप दूसरों पर लगा रहे थे।

पता नहीं राज्य सरकार की क्या मज़बूरी थी कि विपक्ष के शोर मचाने के बाद उन्होंने बिके हुए टीके वापस ले लिए। प्रेशर शायद आने वाले चुनाव का है। सरकार को शायद डर होगा कि इस स्कैम का विपक्षी दल इस्तेमाल करें या न करें, पार्टी का ही ओये गुरु, ठोको ताली ग्रुप तो पक्का कर लेगा। किए जा रहे स्कैम से पीछे हटना वैसे तो पार्टी की परंपरा और अनुशासन के खिलाफ है पर यदि पीछे हटने से पार्टी का फायदा हो तो ऐसा करना ही राजनीतिक और पारिवारिक इंटरेस्ट-सम्मत है। यही पार्टी के लिए सिद्धांत-सम्मत है।

यही सिद्धांत पार्टी को गाइड करते हुए बताते हैं कि; सरकार से काम हो या न हो, पार्टी के पास पावर रहे या न रहे, पार्टी के पास प्रेजिडेंट रहें या न रहें, आरोप लगे या न लगे, विरोध हो या न हो, महामारी आए या जाए, पर स्कैम होते रहने चाहिए। दशकों की मेहनत से पार्टी ने यह एक्सपर्टीज हासिल की है, ऐसे में उसका इस्तेमाल न करना उसकी राजनीति के मूल सिद्धांत और दर्शन के विरुद्ध है।

रैंडम स्कैम करो, योजनाबद्ध तरीके से करो या टूलकिट बनाकर करो, पर स्कैम करो क्योंकि स्कैम ही राजनीति है और राजनीति ही स्कैम है। लोग ताना दें या गाली, स्कैम नहीं रुकना चाहिए। कल रेल, खेल, ट्रांसपोर्ट, एयरपोर्ट, आकाश, पाताल, कोयला, हीरा, हवा बतास में करते थे, तो आज केवल यह सोचकर मत रुको कि ये विभाग तुम्हारे पास नहीं हैं। यह सोचकर भी मत रुको कि जो विभाग आज पास में हैं, उनमें केवल छोटा स्कैम किया जा सकता है। आज जो विभाग है, उसी में कर लो। कोई स्कैम छोटे या बड़े नहीं होते, स्कैम बस स्कैम होते हैं। यह लोकतंत्र है, ऐसे में आज जो विभाग पास नहीं हैं, वे कल पास होंगे और तब यही छोटे स्कैम करने की प्रैक्टिस ही काम आएगी।

‘अनुदान ले आतंकी तैयार करते हैं मदरसे’: मस्जिद के पास ब्लास्ट की गुत्थी अनसुलझी, बांग्लादेशी कनेक्शन के कयास

बिहार के बांका जिले की एक मस्जिद के पास स्थित मदरसे में हुए ब्लास्ट की गुत्थी अब तक नहीं सुलझी है। अब मामले की तहकीकात का जिम्मा बिहार एटीएस को मिला है। ब्लास्ट के तारे बांग्लादेश से जुड़े होने की बात कह, यह भी कयास जताया जा रहा है कि मामला NIA के हवाले किया जा सकता है।

दूसरी तरफ इस घटना के बाद से बिहार की सियासत भी गरम हो गई। विस्फी से बीजेपी के विधायक हरिभूषण ठाकुर ने तो स्पष्ट शब्दों में कहा है कि इस घटना ने मदरसों की पोल खोल दी है। उन्होंने कहा कि सरकारी अनुदान लेकर मदरसे आतंकी तैयार कर रहे हैं। साथ ही इसे भारत के इस्लामीकरण के षड्यंत्र से भी जोड़ा है।

फिलहाल, एटीएस की टीम इस संबंध में हर पहलू पर गंभीरता से जाँच में जुटी में है। कई सवाल हैं। मसलन, विस्फोटक की क्षमता क्या थी? घटना के पीछे कौन से लोग और संगठन थे? इनके तार कहाँ से जुड़े हैं? ये आइइडी ब्लास्ट है कि नही?

एटीएस टीम का नेतृत्व कर रहे इंसपेक्टर रंजीत सिंह ने बताया कि सभी पहलुओं पर जाँच चल रही है। टीम को अब तक कोई ठोस प्रमाण हाथ नहीं लगा है। पुलिस फोरेंसिक साइंस लेबोरेट्री (एफएसएल) के रिपोर्ट का इंतजार कर रही है। एफएसएल रिपोर्ट में धमाके के कारण का पता चलने के बाद इसके अनुसंधान का दायरा बढ़ाने को लेकर विचार किया जा सकता है। 

दैनिक भास्कर की रिपोर्ट के अनुसार, “जाँच एजेंसियों से जुड़े सूत्र बताते हैं कि ब्लास्ट की ये घटना दो ही सूरतों में हो सकती है। इसकी एक वजह ये हो सकती है कि विस्फोटक सामग्री मँगाकर मदरसा के अंदर ही हाई डेंसिटी बम बनाया जा रहा हो। दूसरी वजह यह हो सकती है कि कहीं से बम बनाकर लाया गया हो और उसे यहाँ स्टोर किया गया हो, फिर ट्रांसपोटेशन के दौरान यह ब्लास्ट कर गया हो।”

पूरे मामले में जहाँ आधिकारिक तौर पर पुलिस विभाग के बड़े अधिकारियों की ओर से कुछ भी कहने से बचा जा रहा है, वहीं संभव है कि आने वाले समय में इस केस को राष्ट्रीय जाँच एजेंसी (NIA) टेकओवर करे। एजेंसी सिर्फ गृह मंत्रालय की ओर से हरी झंडी मिलने का इंतजार कर रही है।

जाँच एजेंसियों से जुड़े सूत्र मीडिया को बताते हैं कि जिस तरह का यह धमाका है और जाँच के दौरान घटनास्थल पर जो विस्फोट से जुड़े सबूत मिले हैं, उसका कनेक्शन सीधे पश्चिम बंगाल के वर्धमान में हुए सीरियल ब्लास्ट से जुड़ रहा है। इनके अनुसार, बांका और वर्धमान में हुए विस्फोट में जिस एक्सप्लोसिव का इस्तेमाल हुआ, दोनों सेम है। इसी एंगल के मद्देनजर घटनास्थल पर जाँच करने पश्चिम बंगाल की पुलिस टीम भी आने वाली है, क्योंकि, वर्धमान में हुए विस्फोट का कनेक्शन बांग्लादेश से जुड़ा था।

बता दें कि विस्फोट की जाँच इससे पहले एटीएस ने शुरू की थी। बुधवार को आतंकवाद निरोधक दस्ता की टीम पटना से बांका पहुँची और घटनास्थल पर जाँच-पड़ताल की। इस बीच भागलपुर से डीआईजी सुजीत कुमार भी मौके पर पहुँचे और घटनास्थल का मुआयना करने के बाद उस जगह को सील करने का आदेश दिया। उन्होंने बताया कि अभी आवश्यक जाँच चल रही है। जल्द खुलासे होंगे। अपराधियों को किसी कीमत पर बख्शा नहीं जाएगा।

एडीजी जितेंद्र कुमार ने कहा पुलिस सभी बिंदुओं पर अनुसंधान कर रही है। एफएसएल ने घटनास्थल का निरीक्षण किया है। हमें रिपोर्ट का इंतजार है। छानबीन के लिए पटना से विशेष टीम को भी वहाँ भेजा गया है।

गौरतलब है कि बिहार के बांका के नवटोलिया क्षेत्र में बने मदरसे में हुए विस्फोट की खबर 7 जून को आई थी। वहाँ नूरी मस्जिद इस्लामपुर परिसर के आगे एक मदरसे में सुबह 8 बजे बम विस्फोट होने से आसपास का इलाका थर्रा उठा था और मदरसा भी पूरी तरह से ध्वस्त हो गया था। इसके बाद वहाँ से मौलाना और उसके घायल साथी गायब थे।

हालाँकि बाद में मौलाना अब्दुल सत्तार की मौत हुई और उसका शव कोई गाड़ी से गाँव के बाहर फेंककर भाग गया। पुलिस अब बाकी घायलों (मौलाना के साथियों) की तलाश कर रही हैं। अब तक की छानबीन में इनका कोई पता नहीं चल सका। घटना के बाद से ही गाँव के मर्द फरार हैं और औरतों ने मामले में चुप्पी साधी हुई है। पूरे गाँव में बस सन्नाटा है।

इस मामले में अब तक कोई सुराग न मिलने पर अलग-अलग कयास लग रहे हैं। कुछ स्थानीय लोगों का कहना है कि मौलाना बम बनाता था और 3 युवक उसका सहयोग करते थे। क्षेत्र में छोटी-छोटी बात पर बमबारी होती थी। भागलपुर से बारूद लाकर काम किया जाता था। पिछले साल शंकरपुर स्थित धर्मकाँटा पर बम ब्लास्ट हुआ था और पुलिस ने 7 अपराधियों को 65 हजार रुपए के साथ दबोचा था।

वहीं बीजेपी विधायक हरि भूषण ठाकुर ने कहा है कि ऐसे मदरसों में पढ़कर कोई डॉक्‍टर-इंजीनियर नहीं बनता। ये सरकार से अनुदान लेकर आतंकवादी बनाते हैं। उन्‍होंने कहा कि मस्जिद और मदरसे जैसी जगहों पर आतंकवाद की शिक्षा दी जाती है। वहाँ पढ़ाया जाता है कि कमजोर वर्ग को परेशान कर इस्लाम कबूल करने के लिए मजबूर करो।