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‘अनुदान ले आतंकी तैयार करते हैं मदरसे’: मस्जिद के पास ब्लास्ट की गुत्थी अनसुलझी, बांग्लादेशी कनेक्शन के कयास

बिहार के बांका जिले की एक मस्जिद के पास स्थित मदरसे में हुए ब्लास्ट की गुत्थी अब तक नहीं सुलझी है। अब मामले की तहकीकात का जिम्मा बिहार एटीएस को मिला है। ब्लास्ट के तारे बांग्लादेश से जुड़े होने की बात कह, यह भी कयास जताया जा रहा है कि मामला NIA के हवाले किया जा सकता है।

दूसरी तरफ इस घटना के बाद से बिहार की सियासत भी गरम हो गई। विस्फी से बीजेपी के विधायक हरिभूषण ठाकुर ने तो स्पष्ट शब्दों में कहा है कि इस घटना ने मदरसों की पोल खोल दी है। उन्होंने कहा कि सरकारी अनुदान लेकर मदरसे आतंकी तैयार कर रहे हैं। साथ ही इसे भारत के इस्लामीकरण के षड्यंत्र से भी जोड़ा है।

फिलहाल, एटीएस की टीम इस संबंध में हर पहलू पर गंभीरता से जाँच में जुटी में है। कई सवाल हैं। मसलन, विस्फोटक की क्षमता क्या थी? घटना के पीछे कौन से लोग और संगठन थे? इनके तार कहाँ से जुड़े हैं? ये आइइडी ब्लास्ट है कि नही?

एटीएस टीम का नेतृत्व कर रहे इंसपेक्टर रंजीत सिंह ने बताया कि सभी पहलुओं पर जाँच चल रही है। टीम को अब तक कोई ठोस प्रमाण हाथ नहीं लगा है। पुलिस फोरेंसिक साइंस लेबोरेट्री (एफएसएल) के रिपोर्ट का इंतजार कर रही है। एफएसएल रिपोर्ट में धमाके के कारण का पता चलने के बाद इसके अनुसंधान का दायरा बढ़ाने को लेकर विचार किया जा सकता है। 

दैनिक भास्कर की रिपोर्ट के अनुसार, “जाँच एजेंसियों से जुड़े सूत्र बताते हैं कि ब्लास्ट की ये घटना दो ही सूरतों में हो सकती है। इसकी एक वजह ये हो सकती है कि विस्फोटक सामग्री मँगाकर मदरसा के अंदर ही हाई डेंसिटी बम बनाया जा रहा हो। दूसरी वजह यह हो सकती है कि कहीं से बम बनाकर लाया गया हो और उसे यहाँ स्टोर किया गया हो, फिर ट्रांसपोटेशन के दौरान यह ब्लास्ट कर गया हो।”

पूरे मामले में जहाँ आधिकारिक तौर पर पुलिस विभाग के बड़े अधिकारियों की ओर से कुछ भी कहने से बचा जा रहा है, वहीं संभव है कि आने वाले समय में इस केस को राष्ट्रीय जाँच एजेंसी (NIA) टेकओवर करे। एजेंसी सिर्फ गृह मंत्रालय की ओर से हरी झंडी मिलने का इंतजार कर रही है।

जाँच एजेंसियों से जुड़े सूत्र मीडिया को बताते हैं कि जिस तरह का यह धमाका है और जाँच के दौरान घटनास्थल पर जो विस्फोट से जुड़े सबूत मिले हैं, उसका कनेक्शन सीधे पश्चिम बंगाल के वर्धमान में हुए सीरियल ब्लास्ट से जुड़ रहा है। इनके अनुसार, बांका और वर्धमान में हुए विस्फोट में जिस एक्सप्लोसिव का इस्तेमाल हुआ, दोनों सेम है। इसी एंगल के मद्देनजर घटनास्थल पर जाँच करने पश्चिम बंगाल की पुलिस टीम भी आने वाली है, क्योंकि, वर्धमान में हुए विस्फोट का कनेक्शन बांग्लादेश से जुड़ा था।

बता दें कि विस्फोट की जाँच इससे पहले एटीएस ने शुरू की थी। बुधवार को आतंकवाद निरोधक दस्ता की टीम पटना से बांका पहुँची और घटनास्थल पर जाँच-पड़ताल की। इस बीच भागलपुर से डीआईजी सुजीत कुमार भी मौके पर पहुँचे और घटनास्थल का मुआयना करने के बाद उस जगह को सील करने का आदेश दिया। उन्होंने बताया कि अभी आवश्यक जाँच चल रही है। जल्द खुलासे होंगे। अपराधियों को किसी कीमत पर बख्शा नहीं जाएगा।

एडीजी जितेंद्र कुमार ने कहा पुलिस सभी बिंदुओं पर अनुसंधान कर रही है। एफएसएल ने घटनास्थल का निरीक्षण किया है। हमें रिपोर्ट का इंतजार है। छानबीन के लिए पटना से विशेष टीम को भी वहाँ भेजा गया है।

गौरतलब है कि बिहार के बांका के नवटोलिया क्षेत्र में बने मदरसे में हुए विस्फोट की खबर 7 जून को आई थी। वहाँ नूरी मस्जिद इस्लामपुर परिसर के आगे एक मदरसे में सुबह 8 बजे बम विस्फोट होने से आसपास का इलाका थर्रा उठा था और मदरसा भी पूरी तरह से ध्वस्त हो गया था। इसके बाद वहाँ से मौलाना और उसके घायल साथी गायब थे।

हालाँकि बाद में मौलाना अब्दुल सत्तार की मौत हुई और उसका शव कोई गाड़ी से गाँव के बाहर फेंककर भाग गया। पुलिस अब बाकी घायलों (मौलाना के साथियों) की तलाश कर रही हैं। अब तक की छानबीन में इनका कोई पता नहीं चल सका। घटना के बाद से ही गाँव के मर्द फरार हैं और औरतों ने मामले में चुप्पी साधी हुई है। पूरे गाँव में बस सन्नाटा है।

इस मामले में अब तक कोई सुराग न मिलने पर अलग-अलग कयास लग रहे हैं। कुछ स्थानीय लोगों का कहना है कि मौलाना बम बनाता था और 3 युवक उसका सहयोग करते थे। क्षेत्र में छोटी-छोटी बात पर बमबारी होती थी। भागलपुर से बारूद लाकर काम किया जाता था। पिछले साल शंकरपुर स्थित धर्मकाँटा पर बम ब्लास्ट हुआ था और पुलिस ने 7 अपराधियों को 65 हजार रुपए के साथ दबोचा था।

वहीं बीजेपी विधायक हरि भूषण ठाकुर ने कहा है कि ऐसे मदरसों में पढ़कर कोई डॉक्‍टर-इंजीनियर नहीं बनता। ये सरकार से अनुदान लेकर आतंकवादी बनाते हैं। उन्‍होंने कहा कि मस्जिद और मदरसे जैसी जगहों पर आतंकवाद की शिक्षा दी जाती है। वहाँ पढ़ाया जाता है कि कमजोर वर्ग को परेशान कर इस्लाम कबूल करने के लिए मजबूर करो। 

लुटेरों की सीटी बजाने से लेकर आसिफ को ‘जॉनी-जॉनी’ पढ़ाने तक: ट्विटर पर ये पुलिस सबसे मजेदार, सुशांत के जीजा के पास है कमान

हरियाणा की फरीदाबाद पुलिस सोशल मीडिया पर लगातार चर्चा में है और इसकी वजह है कि वो अपराधियों के खिलाफ कार्रवाइयों की सूचना तो देते ही हैं, लेकिन साथ में उसमें मजाकिया छौंक भी लगाते हैं। दिवंगत अभिनेता सुशांत सिंह राजपूत के जीजा ओपी सिंह फरीदाबाद के पुलिस कमिश्नर हैं। फरीदाबाद पुलिस अपने ट्विटर हैंडल ‘@FBDPolice’ से खासी सक्रिय रहती है और अपनी कार्रवाई की जानकारी एक अलग अंदाज़ में देती है।

उदाहरण के लिए, जब आसिफ नाम का एक चोर पकड़ाया तो ‘जॉनी-जॉनी’ की तर्ज पर फरीदाबाद पुलिस ने पूरी कविता ही बना डाली – आसिफ़-आसिफ़, हाँ बाबा हाँ, चोरी किया? ना बाबा ना, तारीख़ भुगता, ना बाबा ना, पीओ बन गया, हाँ बाबा हाँ, जेल चलो फिर, ना बाबा ना…”। साथ ही पुलिस ने ‘बुरे काम का बुरा नतीजा’ हैशटैग लगाते हुए आसिफ की तस्वीर भी शेयर की, जिसमें वो पुलिस के शिकंजे में दिख रहा है।

इसी तरह जब एक ट्रैफिक पुलिस के हवलदार चतुर्भुज ने एक व्यक्ति का 53,000 रुपया गिरा पाकर उसे सौंप दिया तो उनकी तारीफ करते हुए फरीदाबाद पुलिस ने उनके हवाले से लिखा, “आजकल इधर-उधर, अंदर-बाहर, ऊपर-नीचे इतना न सीसीटीवी और मोबाइल कैमरा है कि लौटाने में ज़्यादा फ़ायदा है। आप भी यही करिए।” अपनी हर ट्वीट में पुलिस इमोजी का इस्तेमाल भी बड़े करीने से करती है।

जब दहेज़ के एक मामले में आरोपित गिरफ्तार हुआ तो फरीदाबाद पुलिस ने उसकी तस्वीर के साथ अपने हैंडल पर लिखा, “2 साल से फ़रार दहेज-लोभी भेड़िया गिरफ़्तार। चालू फ़ोटोग्राफर महेश ने कर डाली दो-दो शादी। क्लेश मचा तो 2nd वाली की कर दी फोटुओं वाली ही इंटरनेशनल बेइज्जती। मियाँ-बीवी का झगड़ा जो भी हो, मुक़दमा तो दहेज का ही दर्ज होता है। देखना है कि बरामद क्या-क्या होता है!”

जब कुछ लुटेरे गिरफ्तार हुए तो फरीदाबाद पुलिस ने लिखा, “कहता है फ़ैज़, इम्मी और आदिल कि लॉकडाउन में धंधा मंदा था इसीलिए लूट-लूट खेल रहे थे। असल में इन तीनों की बुद्धि मंद थी। पुलिस ने सीटी बजा दी है।

इसी तरह जब एक दिन में कई आरोपितों की गिरफ्तारियाँ हुईं तो उन सबकी तस्वीरें शेयर करते हुए पुलिस ने कविता की तर्ज पर लिखा, लाले की तिजोरी लबालब भरी, किसान की खेती हरी-भरी, आर्टिस्ट का मेक-अप दुरुस्त और पुलिस का लॉक-अप फ़ुल हो तो – मजा ही कुछ और है। अपराधियों को जेल भेजने को लेकर अक्सर ‘जेल-प्रवास’ जैसे शब्दों का इस्तेमाल किया जाता है।

इसी तरह फरीदाबाद पुलिस ने एक पति-पत्नी के झगड़ों को सुलझाने के बाद भी मजे लिए और ट्विटर हैंडल से लिखा, “गृह-त्याग के आधुनिक दृष्टांत। दो साल से एक भड़की पत्नी चम्पत थी और दो महीने से एक फटेहाल पति नौ-दो ग्यारह। हमेशा की तरह करे कोई, भरे पुलिस। मारे-मारे फिरे तो बच्चों की माँ हरदोई मिली और पत्नी का पति हैदराबाद। देखते हैं कितने दिन टिकते हैं।”

इसी तरह जब सुपरमैन का स्टीकर लगा टीशर्ट पहने अपराधी गिरफ्तार हुआ तो फरीदाबाद पुलिस ने कुछ इस अंदाज़ में जानकारी दी, “ये हैं गोलू। बिग-बॉस की फ़ील लेने के लिए पहले इसने सुपरमैन छाप वाला लत्ता ओढ़ लिया। फिर कहीं से देसी कट्टा ख़रीद लाया। इसकी चढ़ती कला को देखते हुए पुलिस ने इसे अपने घेरे में ले लिया है। जेल के सुरक्षित माहौल में उम्मीद है ये उम्दा फ़ील करेगा।”

कुछ पेशेवर चोर गिरफ्तार हुए तो ट्विटर हैंडल से लिखा गया, “इरफ़ान और लल्ला धरा गया चोरी के स्कूटी और मोटर साइकिल के साथ। पेशेवर चोर है। धंधा ही चोरी है। जेल जाना-आना आम बात।”

अपराधियों के लिए ये पुलिस “तू डाल-डाल, मैं पात-पात” वाला मुहावरा भी इस्तेमाल करती रही है। फरीदाबाद पुलिस जनसेवा के कार्य भी करती है और अक्सर ब्लड डोनेशन कैम्प्स और जागरूकता अभियान भी चलाती है। गाँजा के साथ गिरफ्तार अपराधियों से पूछती है कि भाई इतना क्यों पीते हो? पर्यावरण के लिए हजारों पेड़-पौधे लगाती है। मिसिंग लोगों के परिजनों को खोजने के लिए भी सोशल मीडिया का इस्तेमाल करती है।

ओपी सिंह खुद एक बुद्धिजीवी हैं, जो अपने लेखों के जरिए अक्सर अपनी बात रखते रहते हैं। उनका कहना है कि लोग चाहते हैं कि पुलिस एक ही समय में बाघ की तरह बहादुर हो, मदर टेरेसा की तरह निःस्वार्थ हो और नौकरों की तरह बात मानने वाली हो। वो पुलिस होने को एक चुनौती मानते हैं। ओपी सिंह अपने लेख के जरिए जूनियर अधिकारियों को सलाह भी देते हैं कि वो एक अच्छे पुलिसकर्मी कैसे बनें

IPS ओम प्रकाश सिंह (OP Singh) 1997 बैच के अधिकारी हैं। इससे पहले वह मुख्यमंत्री कार्यालय में कम्युनिटी पुलिस ऐंड आउटरीच विभाग में स्पेशल ऑफिसर के पद पर तैनात थे। महिलाओं के लिए सुरक्षित वातावरण बनाने के लिए भी उनका अभियान चल रहा है। ‘Say Yes to Sports’ ‘हौसलानामा’ और ‘जिन ढूँढा तिन पाइयाँ’ जैसी पुस्तकें लिख चुके हैं। सुशांत के लिए प्यार इतना कि आज भी उनके ट्विटर हैंडल की प्रोफ़ाइल और कवर पिक में वो अपने दिवंगत साले के साथ ही दिख रहे हैं।

8 बच्चे मर गए… और मुंबई की मेयर कह रहीं- भाजपा अगर भौंकना चाहती है तो भौंकने दो

मुंबई के मलाड में हुए हादसे को लेकर मेयर किशोरी पेडनेकर ने विवादित बयान दिया है। उन्होंने कहा है कि इस घटना के जिम्मेदारों को सामने आकर गुनाह कबूल करना चाहिए और इसके लिए बीएमसी को जिम्मेदार बता रही बीजेपी को भौंकने के लिए छोड़ देना चाहिए। उल्लेखनीय है कि मलाड में चार मंजिला इमारत ढहने से 8 बच्चों सहित 11 लोगों की मौत हो गई है।

समाचार एजेंसी एएनआई के अनुसार, पेडनेकर ने कहा, “मलाड (भवन ढहने की घटना) में जो हुआ उसके पीछे दोषियों को इसकी जिम्मेदारी लेनी चाहिए। किसका प्रशासन था, यह देखने से ज्यादा यह देखा जाना चाहिए कि इसके लिए कौन जिम्मेदार था। सब जिम्मेदार होते तो ऐसा नहीं होता।”

पेडनेकर ने आगे भाजपा के आरोपों पर सफाई देने की जगह कहा, “भाजपा अगर भौंकना चाहती है तो भौंकने दो। उन्हें लगता है कि सारी गलतियाँ शिवसेना की है और वे खुद बहुत साफ हैं।”

गौरतलब है कि बुधवार को मुंबई में हुई भारी बारिश के कारण पश्चिमी मलाड इलाके में हुए हादसे पर भाजपा ने शिवसेना के नेतृत्व वाली सरकार पर हमला बोला था। भाजपा के वरिष्ठ नेता राम कदम ने ट्वीट कर कहा था कि यह हादसा शिवसेना शासित बीएमसी की लापरवाही के कारण हुआ। यह हादसा नहीं हत्या है।

बता दें कि मलाड में भारी बारिश के बाद हुए हादसे में एक चार मंजिला इमारत गिरने से 11 लोगों की मौत हुई। इनके अलावा 7 लोग घायल हुए। वहीं 18 से अधिक को सुरक्षित बचा लिया गया। घटना के बाद मुंबई के संयुक्त सीपी (कानून एवं व्यवस्था) विश्वास नांगरे पाटिल ने कहा कि मुंबई पुलिस मकान मालिक और ठेकेदार के खिलाफ आईपीसी की धारा 304 (2) (गैर इरादतन हत्या) के तहत मामला दर्ज करेगी।

इस घटना के बाद मलाड पश्चिम के अतिरिक्त सीपी दिलीप सावंत ने कहा कि यह एक जी+2 बिल्डिंग थी, जो दूसरी बिल्डिंग पर गिर गई। वहीं, बृहन्मुंबई नगर निगम (बीएमसी) ने बताया कि खराब हालत वाले आस-पास के मकानों को खाली करा लिया गया है, ताकि किसी तरह की दुर्घटना को टाला जा सके।

‘आबादी कंट्रोल करें, जमीन कब्जाने की इजाजत नहीं’: 30 दिन पूरे होने पर अल्पसंख्यकों को CM सरमा का मैसेज

असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने गरीबी कम करने के लिए अल्पसंख्यक समुदाय से आबादी कंट्रोल करने को कहा है। साथ ही स्पष्ट किया है कि उनकी सरकार मंदिर, सतरा और वन भूमि पर अतिक्रमण नहीं होने देगी। बतौर मुख्यमंत्री 30 दिन पूरे होने पर गुरुवार (10 जून 2021) को उन्होंने यह बात कही।

सरमा ने अल्पसंख्यक समुदाय से अपील करते हुए कहा कि वे जनसंख्या नियंत्रण के लिए परिवार नियोजन की नीति अपनाएँ। उन्होंने कहा कि गरीबी का मुख्य कारण लगातार आबादी बढ़ना है। लिहाजा समुदाय के सभी प्रतिनिधियों को आगे आकर इस दिशा में सरकार का समर्थन करना चाहिए।

उन्होंने कहा, “सरकार गरीबों की सुरक्षा और उनके लिए काम करने के लिए प्रतिबद्ध है, लेकिन सरकार को भी जनसंख्या वृद्धि से निपटने के लिए अल्पसंख्यकों का पूरा सहयोग चाहिए क्योंकि इसी के कारण गरीबी और अशिक्षा की समस्याउत्पन्न हुई है। इसके पीछे एक ही कारण है, फैमिली प्लानिंग की कमी।”

सरमा ने यह भी कहा कि उनकी सरकार अल्पसंख्यकों महिलाओं को शिक्षित करने का भी काम करेगी जिससे समस्याओं का हल प्रभावी तरीके से निकाला जा सके। अल्पसंख्यक समुदाय के प्रतिनिधियों से कहा है कि वे जनसंख्या नियंत्रण के मामले में अपने लोगों को जागरूक करने का कार्य करें।

साथ ही मुख्यमंत्री ने कहा कि उनकी सरकार किसी भी हालत में मंदिरों, सतरा और जंगल की जमीन पर कोई अतिक्रमण स्वीकार नहीं करेगी। उन्होंने कहा कि अल्पसंख्यक समुदाय के प्रतिनिधियों ने भूमि अतिक्रमण नहीं किए जाने का भरोसा दिलाया है। ‘सतरा’ ऐसे धार्मिक केंद्र होत हैं जहाँ बड़ी संख्या में ब्रह्मचारी और गैर-ब्रह्मचारी भक्त और श्रद्धालु निवास करते हैं। इन सतरों के पास विशाल भूमि होती है जिसके कारण इनकी भूमि के अतिक्रमण की आशंका भी बनी रहती है। असम के ये सतरा वैष्णव समुदाय से जुड़े हुए हैं।

गौरतलब मुख्यमंत्री की जिम्मेदारी सँभालते ही सरमा ने गोरक्षा का समर्थन करते हुए साफ कर दिया था कि जहाँ हिन्दू रहते हैं और गौवंश की पूजा करते हैं, वहाँ किसी भी हालत में गौहत्या बर्दाश्त नहीं की जाएगी। इसके अलावा उन्होंने भाजपा के घोषणा-पत्र के अनुसार सरकारी भूमि, मंदिर और सतरा की भूमि से अवैध अतिक्रमण को हटाने का आदेश दिया। इसके बाद से कार्रवाई करते हुए प्रशासन लगभग 400 बीघा जमीन अतिक्रमण से मुक्त करा चुका है।

‘किसान आंदोलन’ में रेप: ₹25000 का इनामी AAP नेता अनिल मलिक धराया, वीडियो बना कर पीड़िता को किया था ब्लैकमेल

दिल्ली की टिकरी सीमा पर चल रहे ‘किसान आंदोलन’ में आई पश्चिम बंगाल की युवती के सामूहिक बलात्कार के मामले में पुलिस ने मुख्य आरोपित अनिल मलिक को गिरफ्तार कर लिया है। इस मामले में कुल 6 आरोपित हैं, जिनमें से 3 के सिर पर 25-25 हजार रुपए के इनाम हैं। हरियाणा की झज्जर पुलिस ने गुप्त सूचनाओं के आधार पर भिवानी से अनिल मलिक को धर-दबोचने में कामयाबी पाई।

अनिल मलिक के आम आदमी पार्टी (AAP) का कार्यकर्ता होने की बात भी पता चली थी। भाजपा नेताओं ने इस सम्बन्ध में दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल से स्पष्टीकरण भी माँगा है। इससे पहले भी किसान आंदोलन से जुड़े कार्यकर्ताओं पर यौन उत्पीड़न के आरोप लगते आए हैं। इनमें मोहम्मद जुबेर, वरुण चौहान (ट्रॉली टाइम्स का सदस्य), अंतरप्रीत सिंह (स्टूडेंट फॉर सोसायटी का नेता) और स्वराज फॉर यूथ का अध्यक्ष मनीष कुमार भी शामिल है।

अनिल मलिक तभी से फरार चल रहा है, जब इस मामले की FIR भी दर्ज नहीं हुई थी। ‘किसान सोशल आर्मी’ नाम से बनाए गए तम्बू को तोड़े जाने के बाद अन्य आरोपित भी इधर-उधर भूमिगत हो गए थे। उस समय तक किसान नेता ही इन्हें बचाने में लगे थे। FIR दर्ज होने से पहले एक आरोपित अनूप चानौत ने वीडियो फुटेज जारी कर खुद का बचाव किया था और बताया था कि कमिटी के लोगों ने पंचायत कर उसे छिप कर रहने को कहा है।

इस मामले में दो महिलाओं समेत 25 लोगों से पूछताछ हो गई है। त्वरित कार्रवाई के लिए एक SIT का गठन भी किया गया था। एक अन्य आरोपित अंकुर सांगवान की जमानत याचिका जिला अदालत में ख़ारिज हो गई, जिसके बाद उसने हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया है। इस मामले की सुनवाई बुधवार (जून 16, 2021) को होनी है। अनिल मलिक को 3 दिन के पुलिस रिमांड पर भी भेज दिया गया है।

पूछताछ में मलिक ने कबूल किया है कि उसने रेप का वीडियो बना लिया था और उसी के सहारे पीड़िता को ब्लैकमेल करता था। युवती से ट्रेन में और फिर ‘किसान आंदोलन’ के तम्बू में भी बलात्कार हुआ था। भिवानी के भीम स्टेडियम से गिरफ्तार मलिक ने स्वीकारा कि अनूप ने भी युवती के साथ रेप किया था और अंकुर ने छेड़खानी की थी। अनिल मलिक पहले फ़ौज में था लेकिन 2016 में रिटायर हो चुका है।

अनिल मलिक मूल रूप से झोझूंकला का रहने वाला है। उसकी गिरफ़्तारी की कार्रवाई इतनी गोपनीय थी कि किसी को भी भनक नहीं लगी। इस घटना के सामने आने के बाद पुलिस ने किसान नेताओं के सहयोग के लिए बैठकें की थीं, लेकिन इसका कोई नतीजा नहीं निकला। एक तरफ किसान नेता आरोपितों को बचाते रहे, वहीं दूसरी तरफ पीड़िता के पिता को साथ लाकर उन्हें न्याय दिलाने की बातें करते रहे।

मई 2021 में दिल्ली के टिकरी बॉर्डर स्थित ‘किसानों’ के प्रदर्शन स्थल पर बंगाल से आई युवती की कोरोना से मृत्यु के बाद युवती के पिता ने आरोप लगाया था कि उन्हें उनकी बेटी ने खुद फोन पर कहा था कि उसका शारीरिक शोषण किया गया था। गैंगरेप के इस मामले के आरोपितों में से दो आम आदमी पार्टी (AAP) के नेता हैं। ‘स्वराज पार्टी’ के योगेंद्र यादव को किसानों के टेंट में हुई इस घटना के बारे में पता था

वहीं अब टिकरी सीमा पर फिर से इसी तरह का एक मामला सामने आया है। वहाँ स्थित एक अस्थायी अस्पताल की नर्स ने प्रदर्शन के आयोजकों में से एक डॉक्टर सवाईमान सिंह के वॉलंटियर्स पर यौन शोषण का आरोप लगाया। इंस्टाग्राम पर अपनी दास्ताँ शेयर करते हुए पीड़िता ने बताया कि कैसे डॉक्टर सवाईमान सिंह और उनके अनुयायियों ने उसे प्रताड़ित किया। डॉक्टर सिंह के वॉलन्टियर्स ने उस पर अश्लील टिप्पणियाँ भी की।

‘हम इन्हें बिरादर मानते हैं और ये…’ : क्लबहाउस पर ईसाई समूह ने की लव जिहाद की बात, मुस्लिम समुदाय के लोग बिदके

क्लबहाउस चैट रूम में कुछ ईसाई समूहों द्वारा समुदाय विशेष के लोगों पर विवादस्पद टिप्पणी किए जाने के बाद मामले ने तूल पकड़ लिया है। ये विवाद सोमवार और मंगलवार को ‘क्रिश्चियन यूथ्स, दिस वे’ शीर्षक से आयोजित चर्चा को लेकर है। कहा जा रहा है कि चर्चा के एक सत्र में लव जिहाद जैसे मुद्दों पर बात कर मुस्लिम समुदाय को निशाना बनाया गया।

ईसाइयों को मानते हैं बिरादर: सुन्नी स्कॉलर

न्यू इंडियन एक्सप्रेस के अनुसार मामले में सुन्नी स्कॉलर बशीर फैजी देशमंगलम ने कहा, “सत्र की कुछ बातें न केवल मुस्लिम विरोधी थीं, बल्कि मानव विरोधी भी थीं। सार्वजनिक स्थलों पर ऐसी टिप्पणियों को सुनना बेहद चौंकाने वाला है।” उन्होंने चर्चा में उठे मुद्दों पर बोलते हुए कहा, “वक्ताओं ने प्रोफेसर टीजे जोसेफ के हाथ काटने जैसी घटनाओं का जिक्र किया, जिसकी सभी मुस्लिम संगठनों ने निंदा की थी। वे ‘लव जिहाद’ जैसे आरोप पर बात कर रहे थे जिसे कोर्ट और जाँच अधिकारी सब खारिज कर चुके हैं।”

फैजी के मुताबिक इस चर्चा के बाद ईसाई समुदाय के कई लोग सामने आकर बयानों की निंदा कर रहे हैं। एक पादरी ने इस तरह की टिप्पणियों पर माफी माँगी है और उनके साथ एकजुटता दिखाई है। उनके मुताबिक इन बातों के सामने आने के बाद सुन्नी स्कॉलरों के संगठन समस्त केरल जाम अय्यातुल उलेमा ने मुद्दों को सुलझाने के लिए ईसाइयों से बातचीत शुरू करने के प्रयास तेज कर दिए हैं। वह कहते हैं, “हम ईसाई समुदाय के लोगों को ऐतिहासिक और धार्मिक दृष्टि से बिरादर मानते हैं।”

तय पैटर्न को देख हुई लव जिहाद पर चर्चा

वहीं फादर नोबल थॉमस का कहना है कि चर्चा में उठा लव जिहाद का मुद्दा निराधार नहीं था। लेकिन हाँ, सभी अंतर्धार्मिक विवाहों को इस श्रेणी में नहीं रखा जा सकता है। वह एक पैटर्न का हवाला देते हुए कहते हैं कि पूरे राज्य में नजर आया एक तय पैटर्न उन्हें लव जिहाद पर संदेह करने को मजबूर करता है।

बता दें कि फादर नोबेल मनंतवाडी सूबा के जनसंपर्क अधिकारी हैं। उनका कहना है कि वर्तमान में हुई चर्चा को ऐतिहासिक पृष्ठभूमि में देखा जाना चाहिए। अपनी बात रखते हुए उन्होंने अर्मेनिया में ईसाइयों के नरसंहार और इस्लामिक स्टेट द्वारा की गई क्रूरताओं जैसी घटनाओं का जिक्र किया। उन्होंने कहा, “इसके अलावा, एमएम अकबर जैसे उपदेशक पिछले दो दशकों से हमारे धर्म का अपमान कर रहे हैं।”

वह कहते हैं, “ऐसा मानना है कि पूरे मुस्लिम समुदाय ने हादिया (विवाह) मामले में पॉपुलर फ्रंट ऑफ इंडिया (PFI) का समर्थन किया। इसके अलावा पनक्कड़ सादिक अली थंगल का अखबार में हागिया सोफिया को मस्जिद में बदलने का लेख भी भड़काऊ था।” 

मुस्लिम समुदायों में क्लबहाउस चर्चा के बाद आपसी बातचीत का मुद्दा गरमाने के बाद फादर नोबल कहते हैं कि वह इस मुद्दे पर गंभीरता से बात करेंगे अगर आगे भड़काऊ बयानबाजी न हो। उन्होंने ताजा उदाहरण देते हुए 80:20 के मुद्दे को उठाया और कहा कि सबको मालूम है न्याय उनके साथ होना है। लेकिन मुस्लिम समुदाय फर्जी दावे कर उन्हें लगातार ताना दे रहे हैं।

केरल कैथोलिक यूथ मूवमेंट ने ईसाई समूहों के बयान से किया किनारा

एक ओर जहाँ कुछ ईसाई समुदाय खुलकर समुदाय विशेष के ख़िलाफ़ अपने बयान दे रहे हैं। वहीं केरल कैथोलिक यूथ मूवमेंट इन समूहों द्वारा कही बातों का विरोध कर रहा है। एक बयान में, केसीवाईएम राज्य समिति ने उन समूहों की आलोचना की जो ‘कुछ राजनीतिक दलों के सांप्रदायिक एजेंडे को चलाने के लिए काम कर रहे हैं।’ ईसाई समूहों की चर्चा से किनारे करते हुए बयान में कहा गया है कि उत्तर भारत में ईसाई मिशनरियों पर अत्याचार और केंद्र सरकार की सांप्रदायिक नीतियाँ भी कैथोलिक चर्च की चिंताएँ हैं। लेकिन ये ईसाई समूह सिर्फ एक धर्म से संबंधित मुद्दों पर ध्यान केंद्रित करना चाहते हैं।

विधायक नजीब का CM को पत्र

इस मामले में विधायक नजीब कंथापुरम ने मुख्यमंत्री पिनराई विजयन से उन लोगों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई करने को कहा है जो सोशल मीडिया के जरिए सांप्रदायिक बँटवारा करने की कोशिश कर रहे हैं। एक पत्र में, नजीब ने कहा कि सोशल मीडिया पर पोस्ट, वीडियो और ऑडियो शेयर हो रहे हैं। जिनका उद्देश्य पिछले कुछ महीनों से ईसाई और मुस्लिम समुदायों के बीच दरार पैदा करना है।

पूरे मामले में किसी साजिश की ओर इशारा करते हुए विधायक ने कहा कि ऐसी हरकत का मकसद सिर्फ सांप्रदायिक सौहार्द और शांति को नष्ट करना है। पत्र में कहा गया, “केरल में सदियों से मौजूद शांति के माहौल को खराब नहीं किया जाना चाहिए और दोषियों को पकड़ने के लिए सभी प्रयास किए जाने चाहिए।”

5 लाख भारतीय शिकार, ₹150 करोड़ की ठगी: दिल्ली पुलिस ने चीनी गैंग का भंडाफोड़ कर 11 पकड़े

दिल्ली पुलिस की साइबर सेल ने ठगी के एक चीनी गिरोह का पर्दाफाश किया है। शुरुआती जाँच में पता चला है कि यह गिरोह ने करीब 5 लाख भारतीयों को शिकार बना चुका है। उनके डाटा के साथ-साथ दो महीने में करीब 150 करोड़ रुपए की ठगी कर चुका है। डीसीपी अन्येश रॉय ने बताया कि पैसे डबल करने का झाँसा देकर गिरोह लोगों को अपना शिकार बनाता था।

मामले में पुलिस ने दो सीए और एक तिब्बती महिला समेत 11 आरोपितों को गिरफ्तार किया है। आरोपितों ने लोगों को मल्टी लेवल मार्केटिंग के जरिए निवेश की रकम पर हाई रिटर्न का वादा किया था।

रॉय ने बताया, “5 लाख से अधिक पीड़ितों के साथ 150 करोड़ रुपए से अधिक की धोखाधड़ी की गई है। पुलिस कार्रवाई में बैंक में जमा 11 करोड़ रुपए की राशि को फ्रीज कर दिया गया है और 97 लाख रुपए नकद बरामद किए गए हैं।” पुलिस अधिकारी के मुताबिक, अब तक नकद और बैंक खातों से लगभग 12 करोड़ रुपए की रिकवरी की गई है। पुलिस कमिश्नर एसएन श्रीवास्तव के अनुसार, गुरुग्राम के जिस सीए के घर से 97 लाख रुपए नकद बरामद की गई है, उसने चीनियों के लिए 110 से अधिक फर्जी कंपनियाँ बना रखी थी।

पुलिस अधिकारी रॉय ने कहा कि साइबर ठग बड़ी संख्या में फेक एप्स ईजी प्लान, सन फैक्टरी, पावर बैंक आदि जैसे एप भारतीय बाजार में चला रहे थे। इनमें से कुछ तो Google Play Store पर भी लिस्टेड हैं। इनमें से एक पावर बैंक ऐप हाल ही में गूगल प्ले स्टोर पर चौथे नंबर पर ट्रेंड कर रहा था।

उन्होंने कहा कि फिलहाल साइबर ठगों के ठिकानों, उनके काम करने के तरीकों और उनके नेटवर्क को खँगाला जा रहा है। पुलिस के मुताबिक जाँच में इस बात का खुलासा हुआ है कि इस घोटाले में शामिल कुछ मोबाइल नंबर चीन से ऑपरेट हो रहे थे। ये नंबर बैंक खातों से जुड़े हुए थे।

डीसीपी ने कहा कि इस बड़े घोटाले में शामिल चीनी ठग व्हाट्सएप और टेलीग्राम जैसे कई एप्स के जरिए लोगों से संपर्क करते थे और इच्छुक व्यक्तियों को फर्जी बैंक खातों की खरीद, शेल कंपनियाँ बनाने, एप्स का प्रचार और उसे बढ़ावा देने के लिए काम करते थे।

साइबर सेल के डीसीपी के मुताबिक, पश्चिम बंगाल, एनसीआर क्षेत्र, बेंगलुरु, ओडिशा, असम और सूरत में इन साइबर ठगों का सुराग लगा है। ये ठग अपने टेलीग्राम चैनल्स के फॉलोवर्स का उपयोग कर ऐसे लोगों की भर्ती करते थे जो उनके लिए कुछ इंसेंटिव पर काम कर सकें।

पुलिस ने इस मामले में गिरफ्तार शेख रॉबिन के पास से 30 मोबाइल फोन जब्त किया है। उसने चीनी नागरिकों द्वारा शेल कंपनियों, डमी मोबाइल नंबरों और बैंक खातों के द्वारा धोखाधड़ी की सुनियोजित साजिश का खुलासा किया है।

शेख रॉबिन ने चीनियों के लिए खोले फर्जी बैंक अकाउंट

शेख रॉबिन से ही चीनियों ने टेलीग्राम के जरिए संपर्क किया था। उसी ने इन ठगों के लिए बैंक खाता खोला। देश के बाहर पूरी तरह से सुरक्षित बैठे इन ठगों के बैंक खातों में फंड ट्रांसफर करने की जिम्मेदारी शेख रॉबिन की थी। शेख रॉबिन 30 शेल कंपनियाँ चला रहा था।

जिस वक्त साइबर सेल ने उसे गिरफ्तार किया, उस दौरान उसके पास 29 बैंक अकाउंट और 30 एक्टिव मोबाइल फोन थे। उसी दौरान दिल्ली के रहने वाले उमाकांत आकाश जॉय, वेद चंद्र, हरिओम और अभिषेक मंसरमणि नाम के चार लोगों को भी गिरफ्तार किया गया। ये सभी चीनियों की फर्जी कंपनियों के निदेशक हैं।

पुलिस ने कहा कि एक अन्य आरोपित अरविंद को भी गिरफ्तार किया है, जिसने इन तीनों व्यक्तियों को शेल कंपनियों का निदेशक बनाया था। इन्हीं आरोपितों ने शेल कंपनीज बनाने के पीछे दो सीए अविक केडिया और रौनक के शामिल होने का खुलासा किया है। अविक केडिया 110 शेल कंपनियाँ चला रहा था।

पुलिस ने जाँच के आधार पर चीनियों को फर्जी कंपनियाँ और बैंक खाते उपलब्ध कराने में शामिल आरोपित शशि बंसल और मिथलेश शर्मा को भी गिरफ्तार किया है।

शुरू में कुछ रिर्टन देते थे

आरोपित निवेशकों को शुरुआत में कुछ रिर्टन देते थे। किसी ने 300 रुपए निवेश किए तो उसे 24 दिन में दो गुना पैसे दे देते थे। ये पीड़ित से और पैसा निवेश करवाते थे और अपने सर्किल के लोगों को निवेश करवाने के लिए कहते थे। कुछ समय बाद ये पीड़ित को पैसा देना बंद देते थे। ये पीड़ित के एप पर पैसा देने का मैसेज दिखा देते थे, जबकि पीड़ित के खाते में पैसे नहीं जाते थे। 

नए IT कानून को मोटा पोथा मत बनाइए: आज ट्विटर उठा रहा फायदा, कल कोई और उठाएगा

नए दौर और पुराने समय में अंतर होता है। ये साधारण सी बात समझने के लिए किसी रॉकेट साइंस की पढ़ाई जरूरी नहीं है। बस अपने अहंकार, अपनी ठसक को थोड़ी देर किनारे रखना होता है। ऐसा नहीं करने पर क्या होगा? इसे समझना है तो एक नजर हाल के भारत बनाम ट्विटर विवाद को देख लीजिए।

भारत ने ऑनलाइन चलने वाले प्रचार तंत्र से निपटने के लिए नए कायदे बनाए। भारत के इस “इनफॉर्मेशन टेक्नोलॉजी रेगुलेशन” में उतने ही छेद थे, जितनी किसी छकनी में हो सकते हैं। क्यों? क्योंकि ये पुराने दौर के किन्हीं बूढ़े लोगों का बनाया हुआ होगा, जिन्हें खुद सोशल मीडिया और वेबसाइट-ब्लॉग जैसी चीज़ें चलाने का कोई अनुभव ही नहीं था। इन कायदों की कितनी सुनवाई हुई, उस पर तो पूरा देश ही नेताजी पर हँस भी रहा है।

उदाहरण के तौर पर ऐसे समझ लीजिए कि अख़बारों के दौर का कोई आदमी शायद ऑनलाइन के कायदे बनाने बैठा था। जब अख़बारों का युग था, उस समय भी कई बार गलत ख़बरें छप जाती थीं। दस-बीस पन्ने के अखबार में कोई नाम गलत हो जाना, कोई संख्या या प्रतिशत गलत छप जाना, कोई बड़ी बात नहीं। मानवीय भूलों से भी ऐसा होता है।

इधर तो कई बार पक्षकारों पर जान बूझकर ऐसी गलतियाँ करने के आरोप भी रहे हैं। इसके वाबजूद जैसा एकाउंटिंग में होता है, वैसा “एरर बाय ओमीशन” (छूट जाने से हुई गलती) और “एरर बाय कमीशन” (जान बूझ कर घुसाई गई गलती) के लिए अलग-अलग नियम इतने वर्षों में नहीं बने थे। ऑनलाइन का काम इससे भी कहीं आगे होता है। अख़बारों की तरह यहाँ एक बार छप गया तो बदला नहीं जा सकता, की मजबूरी नहीं है। ऑनलाइन में सुधार करने की संभावना अधिकांश जगहों पर होती है।

तो होना क्या चाहिए था? होना ये चाहिए था कि सिंगापुर जैसी जगहों पर जो “प्रोटेक्शन फ्रॉम ऑनलाइन फॉल्सहुड एंड मैनीपुलेशन एक्ट” (पीओएफएमए 2019) जैसे नियम हैं, उनसे सीखकर भारत में नियम बनाए जाने चाहिए थे। उस स्थिति में किसी अख़बार या न्यूज़ चैनल के ऑनलाइन संस्करण में भी अगर कुछ गलत छपा है तो उसके लिए केवल माफीनामा नहीं आता। उसमें सुधार करके उसे दोबारा प्रकाशित करने की ऐसे संस्थानों की मजबूरी होती।

ऐसा कुछ हुआ नहीं और बिना दाँत वाले बाघ की तरह मंत्रालय की दहाड़ पर ट्विटर ने कोई ध्यान नहीं दिया। उल्टा ये जरूर हुआ कि फेसबुक की कंपनी व्हाट्सएप्प ने सरकार पर ही दबाव बनाने के लिए अदालतों की शरण ले ली! इसकी तुलना में सिंगापुर का पीओएफएमए 2019 भी ऐसा कानून है, जिसके लिए अदालत में जाया जा सकता है, लेकिन अभी तक फेसबुक, ट्विटर जैसी किसी कंपनी ने ऐसा करने की हिम्मत नहीं दिखाई है।

सिंगापुर के पीओएफएमए 2019 के बनने में आम लोगों ने भी अहम भूमिका निभाई थी। इस पूरी कवायद की तुलना भारत की नई शिक्षा नीति से करना भी अच्छा रहेगा। उन्होंने कोई 600-700 पन्नों का एक दस्तावेज जारी करके उस पर बहस आमंत्रित नहीं की।

ऐसी मोटी किताबों को कोई प्रिंट करवाएगा, फिर उसे पढ़ेगा, ऐसा मानना तो भारत के सरकारी बाबुओं के सपने में ही संभव है। न तो भारत के अधिकांश लोग 700 पन्ने का प्रिंट निकलवाने का आर्थिक खर्च झेलने में सक्षम होंगे, न ही उतना पढ़ कर उस पर अपने विचार रखने के लिए कोई समय निकलेगा। ये समझना भी मामूली सी बात थी लेकिन जैसे इसे नहीं समझा गया, कुछ वैसा ही “इनफॉर्मेशन टेक्नोलॉजी रेगुलेशन” के मामले में भी हुआ। बात इतनी कमियों पर ही रुकती तो भी कोई बात थी, लेकिन ऐसा भी नहीं हुआ।

कानूनों का स्पष्ट होना आवश्यक है। अगर किसी हिस्से की व्याख्या के लिए ही एक मुकदमा हो, और फैसले में जो व्याख्या आए उसके हिसाब से आगे काम होना हो, तो फिर तो मुक़दमे भी होंगे ही। भारतीय अदालतों में मुक़दमे में कितना वक्त लगता है, ये भी किसी से छुपा हुआ नहीं है।

अंग्रेजी कहावतों के हिसाब से मान लें कि इन्साफ में की गई देरी नाइंसाफी है, तो भारत की आम जनता को ये नाइंसाफी झेलनी भी होगी। इन सब के ऊपर से भ्रष्टाचार को भी जोड़ा जाए तो स्थिति और भयावह हो जाती है। जहाँ सिंगापुर के कानून मंत्री साफ़ कहते हैं कि हम किसी लॉबी के दबाव में नहीं आते, वहीं भारत के लिए हर बार ये बात लागू होती हो, ऐसा जरूरी नहीं लगता। हमें पता है कि भोपाल गैस लीक जैसे मामलों में अपराधी एंडरसन साफ़ निकल भागा था। कुल मिलाकर ये कहा जा सकता है कि भारत में कानूनों की दशा आम आदमी को बहुत विश्वसनीय तो नहीं लगती।

प्रश्न है कि ऐसी स्थिति में किया क्या जाए? इसका एक आसान तरीका है कि कम से कम कंप्यूटर और सूचना तकनीकों से जुड़े कानूनों को लगातार सुधार की श्रेणी में डाला जाए। जब तक एक कानून बन कर तैयार होगा, सूचना तकनीक की दुनिया एक कदम और आगे बढ़ चुकी होती है। ऐसे में इसमें लगातार बदलाव आवश्यक हैं।

सबसे पहले तो हमें इससे सम्बंधित कानूनों को कोई मोटा पोथा बनाने के बदले कम से कम, और स्पष्ट शब्दों में लिखने की तैयारी करनी होगी। कानूनी जानकारों को भी ये समझना होगा कि क्लिष्ट भाषा के बदले स्पष्ट सन्देश देने वाले कानूनों की जरूरत है। इसके साथ ही इसे जनता के बीच खुला रखना होगा और ऐसी व्यवस्था करनी होगी कि इस पर लगातार चर्चा जारी रह सके। अगर कोई नया बदलाव आता है, या कोई नई शिकायत या संभावना जताई जाती है तो विभाग के पास इस बात की व्यवस्था होनी चाहिए कि कोई उस सन्देश को सुने और उस पर कार्रवाई भी हो।

इस न्यूनतम सुधार के बिना जब हम सूचना तकनीक से जुड़े कानूनों की बात करते हैं तो वो बेमानी होगी। इसके साथ ही हमें विभागों का वर्गीकरण भी करना होगा। सूचना तकनीक के द्वारा होने वाले अपराध एक अलग श्रेणी में जाते हैं। इसमें साइबर ठगी, गुंडागर्दी, धमकाना, ब्लैकमेल जैसी चीज़ें आएँगी। यहाँ कई कानून बैंकों और पैसे के लेन-देन से भी जुड़े होंगे। इसकी तुलना में इन्टरनेट और सोशल मीडिया के इस्तेमाल के जरिए प्रचार और प्रोपगैंडा एक बिलकुल अलग मसला है।

प्रोपगैंडा का इस्तेमाल असंतोष बढ़ाने, आतंकी संगठनों की भर्ती, दंगे भड़काने, या चुनावों को प्रभावित करने में किया जा सकता है। ये एक अलग क्षेत्र है और प्रोपगैंडा के लिए अलग श्रेणी के कानूनों की जरूरत होगी। इन दोनों को अलग-अलग बाँटकर काम करना शुरू करना होगा।

बाकी समस्या ये भी है कि भारत में मुद्दे उठते तो हैं, मगर थोड़े ही दिनों में भुला भी दिए जाते हैं। भारत बनाम ट्विटर का मुद्दा भी अब करीब इस दौर में है कि इसे भुला दिया जाए। हम सीख कर आगे बढ़ेंगे, या भूलकर आगे बढ़ेंगे, ये भी देखने लायक बात होगी।

भारत के बाहर भी पंख फैला रहा Koo: ट्विटर को बैन करने के बाद भारतीय प्लेटफॉर्म पर नाइजीरिया की सरकार

ट्विटर को लेकर हुए हालिया विवाद और उसकी एकपक्षीय वैचारिक स्वतंत्रता का बड़ा फायदा भारतीय माइक्रो ब्लॉगिंग प्लेटफॉर्म ‘कू (Koo)’ को हुआ है। Koo को गूगल प्ले स्टोर से लगभग 5 मिलियन से ज्यादा यूजर्स डाउनलोड कर चुके हैं। इतना ही नहीं Koo अब भारत ही नहीं, विदेशों में भी पसंद किया जा रहा है।

हाल ही में ट्विटर को बैन करने वाले अफ्रीकी देश नाइजीरिया की सरकार ने Koo पर अपना अकाउंट बनाया है। इसकी जानकारी खुद Koo के को-फाउंडर और सीईओ अप्रमेय राधाकृष्णा ने ट्वीट कर दी है।

अप्रमेय ने अपने साथी और Koo के को-फाउंडर मयंक को टैग करते हुए लिखा, “Koo इंडिया पर नाइजीरिया की सरकार के ऑफिशियल हैन्डल का स्वागत है। अब (Koo) भारत के बाहर भी पंख फैला रहा है।“  

गुरुवार (10 जून) को नाइजीरिया की सरकार ने भारतीय माइक्रोब्लॉगिंग प्लेटफॉर्म कू पर अपना ऑफिशियल सोशल मीडिया (@nigeriagov) अकाउंट खोला। फिलहाल इस अकाउंट के 4,700 से अधिक फॉलोअर भी हो चुके हैं।

कू पर नाइजीरिया की सरकार का ऑफिशियल अकाउंट

ज्ञात हो कि नाइजीरिया के राष्ट्रपति ने अनिश्चितकाल के लिए Twitter को प्रतिबंधित करने का निर्णय लिया था। ‘गल्फ ऑफ गिनी’ में स्थित अफ़्रीकी मुल्क ने कहा कि ट्विटर उसके ‘कॉर्पोरेट अस्तित्व’ को ठेस पहुँचा रहा था, इसीलिए ये कार्रवाई की गई। Twitter ने वहाँ के राष्ट्रपति मुहम्मदु बुहारी के एक बयान को डिलीट कर दिया था, जिसके बाद ये कार्रवाई की गई।

नाइजीरिया द्वारा ट्विटर को बैन करने के बाद Koo के सीईओ अप्रमेय ने ही ट्वीट करके बताया था कि नाइजीरिया में भी Koo सोशल मीडिया यूजर्स के लिए उपलब्ध है। साथ ही अप्रमेय ने यह भी कहा था कि उनकी टीम Koo पर नाइजीरिया की स्थानीय भाषा उपलब्ध कराने पर भी विचार कर रही है।

उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ समेत कई केन्द्रीय मंत्री, मीडिया समूह, पत्रकार, लेखक, नेता और कई अभिनेता भी Koo पर सक्रिय हैं। हाल ही में कू ने 30 मिलियन डॉलर (लगभग 219.20 करोड़ रुपए) की फंडिंग प्राप्त की जिसके बाद कंपनी की वैल्यू 150 मिलियन डॉलर (1096 करोड़ रुपए) की हो गई है।

सुशांत सिंह राजपूत पर बनी फिल्मों की रिलीज पर रोक नहीं, ‘न्याय’ पर दिवंगत एक्टर के पिता की अपील हाई कोर्ट ने नहीं मानी

दिवंगत अभिनेता सुशांत सिंह राजपूत की जीवनी पर आधारित बताई जा रही फिल्मों की रिलीज पर रोक से दिल्ली हाई कोर्ट ने इनकार कर दिया है। सुशांत के पिता केके सिंह ने इस संबंध में अदालत का दरवाजा खटखटाया था। उन्होंने इन फिल्मों को निजता का उल्लंघन और सुशांत की मौत के मामले की जाँच प्रभावित होने का हवाला दिया था।

लेकिन दिल्ली हाई कोर्ट के जस्टिस संजीव नरूला ने बुधवार (9 जून 2021) को उनकी अपील खारिज कर दी। उन्होंने कहा कि ‘न्याय: द जस्टिस’ सुशांत से समानता नहीं दिखाती और यह उनकी बॉयोपिक नहीं है। इससे पहले अप्रैल में हाई कोर्ट ने इस याचिका पर नोटिस जारी की थी। फिल्म के डायरेक्टर और प्रोड्यूसर की दलीलों को सुनने के बाद फैसला सुरक्षित रख लिया गया था। यह फिल्म 11 जून को रिलीज होनी है।

केके सिंह ने ‘न्याय- द जस्टिस’, ‘आत्महत्या या हत्या: ए स्टार वाज लास्ट’ और ‘शशांक’ जैसी फिल्मों को लेकर याचिका दायर की थी। इन्हें सुशांत की कहानी वाली मीडिया रिपोर्टों का हवाला देते हुए कहा था कि इससे जाँच प्रभावित होगी।

निजता के अधिकार के उल्लंघन का हवाला देते हुए उन्होंने कहा था, “हाल के समाचार लेखों और फिल्मों के प्रकाशनों के आलोक में सुशांत के निजी जीवन, नाम/ छवि/ व्‍यंग्‍यचित्र/ जीवनशैली को बॉयोपिक के रूप में दर्शाया गया है। दिवंगत अभिनेता के निजी जीवन का ऐसा कोई भी प्रकाशन, निर्माण या चित्रण निजता के मौलिक अधिकार का ज़बरदस्त और जानबूझकर उल्लंघन है, जिसमें प्रचार का अधिकार शामिल है।”

सुशांत सिंह राजपूत 14 जून 2020 को मुंबई में अपने घर में मृत मिले थे। उनकी हत्या की गुत्थी अभी तक नहीं सुलझी है। सीबीआई इसकी जाँच कर रही है। वहीं, एनसीबी इस मामले में कई बॉलीवुड सितारों से पूछताछ कर चुकी है। हाल में कुछ मीडिया रिपोर्टों में बताया गया था कि सुशांत की गर्लफ्रेंड रही रिया चकवर्ती ने सारा अली खान के साथ ड्रग्स लेने की बात कबूली है। रिपोर्टों की माने तो नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो (NCB) ने रिया का यह बयान चार्जशीट में भी शामिल किया गया है। इसके मुताबिक सारा ने ही केदरनाथ के दौरान सुशांत को भी मारिजुआना की लत लगाई थी।