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भगवान विष्णु का मंदिर, कांचीपुरम के अथि वरदराजा: 40 साल में सिर्फ एक बार दर्शन, कारण – मुस्लिम आक्रान्ता

भारत के तमिलनाडु में स्थित है, कांचीपुरम। हिन्दू धर्म में सात ऐसे तीर्थ हैं, जो सबसे पवित्र माने जाते हैं। उनमें से एक है कांचीपुरम। कांचीपुरम का अर्थ है, ‘ब्रह्मा का निवास स्थान’। वेगवती नदी के किनारे स्थित, मंदिरों की भूमि कहे जाने वाले इस दिव्य स्थान में स्थित हैं कई ऐसे हिन्दू मंदिर, जिनका इतिहास युगों पुराना है और जो आज भी उसी रूप में पूज्य हैं, जिस रूप में हजारों साल पहले हुआ करते थे।

इन्हीं महान मंदिरों में से एक है, श्री वरदराजा पेरुमल मंदिर। इसे श्री देवराज स्वामी मंदिर के नाम से भी जाना जाता रहा है। मंदिर समर्पित है भगवान विष्णु को, जो अथि वरदराजा या वरदराजा स्वामी के रूप में पूजे जाते हैं। संभवतः पूरे विश्व में यह एकमात्र ऐसा स्थान है, जहाँ मंदिर के इष्टदेव 40 सालों में एक बार पूजे जाते हैं क्योंकि 40 साल में एक बार ही भगवान वरदराजा स्वामी की मूर्ति मंदिर परिसर में स्थित पवित्र अनंत सरोवर से बाहर आती है।

अंजीर के पेड़ की लकड़ी से बनी है भगवान श्री वरदराजा की मूर्ति

पौराणिक मान्यताओं के अनुसार माता सरस्वती नाराज होकर देवलोक से इस स्थान पर आ गई थीं। इसके बाद जब सृष्टि के रचयिता ब्रह्माजी उन्हें मनाने के लिए आए तो ब्रह्माजी को देखकर माता सरस्वती वेगवती नदी के रूप में बहने लगीं। ब्रह्माजी ने इस स्थान पर अश्वमेध यज्ञ करने का निर्णय लिया। उनके यज्ञ का विध्वंस करने के लिए माता सरस्वती, नदी के तीव्र वेग के साथ आईं। तब माता सरस्वती के क्रोध को शांत करने के लिए यज्ञ की वेदी से भगवान विष्णु, श्री वरदराजा स्वामी के रूप में प्रकट हुए।

अब चूँकि इस क्षेत्र में अंजीर के पेड़ों का एक विशाल जंगल था इसलिए इन्हीं अंजीर के पेड़ों की लकड़ी से देवों के शिल्पकार विश्वकर्मा जी ने श्री वरदराजा की प्रतिमा का निर्माण किया। अंजीर को ‘अथि’ के नाम से जाना जाता है, इसी कारण भगवान श्री वरदराजा को ‘अथि वरदराजा’ के रूप में जाना जाने लगा। विश्वकर्मा जी ने अथि वरदराजा की 12 फुट की मूर्ति का निर्माण किया था। 11वीं शताब्दी के दौरान मंदिर का निर्माण महान चोल शासकों ने कराया था और इसके बाद लगातार हिन्दू राजाओं द्वारा मंदिर का जीर्णोद्धार होता रहा।

मुस्लिम आक्रान्ताओं का हमला झेल चुका है मंदिर

23 एकड़ में बने इस मंदिर में 19 विमानम के अलावा 400 स्तंभों वाले मंडप हैं, जो श्री वरदराजा को समर्पित हैं। 16वीं शताब्दी तक मंदिर के गर्भगृह में श्री वरदराजा की मूर्ति विराजित थी और पूरे रीति-रिवाज के साथ उनकी पूजा हुआ करती थी। लेकिन पूरे भारत की तरह अंततः यह मंदिर भी मुस्लिम आक्रान्ताओं की भेंट चढ़ गया। मंदिर में जब मुस्लिम आक्रान्ताओं का आक्रमण हुआ, तब भगवान की मूर्ति को सुरक्षित रखने के लिए उसे मंदिर परिसर में स्थित अनंत सरोवर के अंदर डाल दिया गया।

फोटो साभार : कांचीपुरम ppraprashprashaprashasprashasaprashasanप्रशासन

40 सालों तक मंदिर बिना मूर्ति के रहा। जब अंततः मूर्ति नहीं मिली तब मंदिर में श्री वरदराजा की पत्थर की एक मूर्ति बनवाई गई और उसकी स्थापना मंदिर के गर्भगृह में की गई। सन् 1709 में किसी अज्ञात कारण से अनंत सरोवर का जल कम हुआ, जिससे भगवान अथि वरदराजा की वही पुरानी मूर्ति बाहर आ गई।

स्वयं ही सरोवर के भीतर चली गई थी मूर्ति

मंदिर के मुख्य पुजारी धर्मकर्ता के दो पुत्रों ने लकड़ी की उस मूर्ति को सरोवर से बाहर निकाला और मंदिर के गर्भगृह में उसकी स्थापना की लेकिन गर्भगृह में 48 दिन तक रहने के बाद मूर्ति पुनः सरोवर में चली गई। उसी दिन से यही तय किया गया कि मूर्ति को 40 सालों में एक बार निकाला जाएगा। ऐसी मान्यता है कि चूँकि मुख्य मूर्ति की अनुपस्थिति में पत्थर की एक नई मूर्ति की प्राण-प्रतिष्ठा पूरे विधि-विधान से की गई थी, इस कारण सनातन की मर्यादा का मान रखने के लिए भगवान श्री वरदराजा की पुरानी मूर्ति ने सरोवर के भीतर ही रहना स्वीकार किया, जिसकी पूजा गुरु बृहस्पति सरोवर के अंदर ही करते हैं।

21वीं शताब्दी में 2019 में मूर्ति सरोवर से बाहर आई थी। तब 48 दिनों का वरदार उत्सव मनाया गया था। 1 जुलाई से शुरू हुआ यह उत्सव 9 अगस्त तक चला था। इसके पहले 1979 में श्री वरदराजा की मूर्ति अनंत सरोवर से बाहर आई थी। अब आगामी 2059 में पुनः भगवान की मूर्ति सरोवर से बाहर आएगी, तब वरदार उत्सव का आयोजन किया जाएगा। एक सामान्य आयु वाला व्यक्ति अपने जीवन में एक या दो बार ही श्री वरदराजा के दर्शन का सौभाग्य प्राप्त कर सकता है।

कैसे पहुँचे?

कांचीपुरम पहुँचने के लिए सबसे नजदीकी हवाई अड्डा चेन्नई इंटरनेशनल एयरपोर्ट है, जो वरदराजा मंदिर से मात्र 58 किमी की दूरी पर है। इसके अलावा कांचीपुरम ट्रेन की सहायता से आसानी से पहुँचा जा सकता है। कांचीपुरम रेलवे स्टेशन से मंदिर की दूरी लगभग 4-5 किमी है। चेन्नई से ट्रेन के माध्यम से भी कांचीपुरम पहुँचा जा सकता है। चूँकि चेन्नई में कई रेलवे स्टेशन हैं, ऐसे में चेन्नई से कांचीपुरम पहुँचने के लिए कई अलग-अलग ट्रेनें विभिन्न समय पर कांचीपुरम पहुँचती हैं।

सड़क मार्ग से भी कांचीपुरम पहुँचना आसान है क्योंकि यहाँ सड़कों का एक बेहतर नेटवर्क है। चेन्नई से कांचीपुरम की सड़क मार्ग से दूरी लगभग 75 किमी है। इसके अलावा कांचीपुरम तमिलनाडु के कई शहरों और बेंगलुरू जैसे महानगरों से भी सड़क के माध्यम से जुड़ा हुआ है।

बेसिक शिक्षा विभाग के नवनियुक्त 69000 शिक्षकों के वेतन में लेटलतीफी पर होगी कार्रवाई: CM योगी

यूपी के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने बेसिक शिक्षा विभाग के प्राथमिक व उच्च प्राथमिक विद्यालयों में नवनियुक्त शिक्षकों का वेतन भुगतान समय से किए जाने के निर्देश दिए हैं। उन्होंने कहा कि नवनियुक्त शिक्षकों के दस्तावेजों का सत्यापन कार्य जल्दी पूरा किए जाए। सत्यापन में देरी होने पर संबंधित अधिकारियों पर कार्रवाई किए जाने के निर्देश भी दिए हैं। 

प्रदेश में शिक्षकों की कमी को पूरा करने के लिए योगी सरकार ने पिछले साल बेसिक शिक्षा विभाग में 69 हजार शिक्षकों की भर्ती की थी। इनको प्रदेश के 1.5 लाख से अधिक परिषदीय विद्यालयों में तैनाती दी गई है। दस्तावेजों के सत्यापन की वजह से शिक्षकों का वेतन निकालने में दिक्कत हो रही है। 

बेसिक शिक्षा विभाग की ओर से करीब 60 प्रतिशत नवनियुक्त शिक्षकों के दस्तावेजों का सत्यपान कार्य पूरा कर उनको वेतन दिया जा रहा है। शेष शिक्षकों को वेतन दिए जाने की माँग शिक्षक संगठनों ने मुख्यमंत्री से की थी। इस पर कड़ा रूख अपनाते हुए मुख्यमंत्री ने नवनियुक्त शेष शिक्षकों के दस्तावेजों का सत्यापन जल्द पूरा किए जाने के निर्देश अधिकारियों को दिए हैं।

उन्होने कहा कि शिक्षकों का समय पर उनके वेतन का भुगतान किया जाए। उन्होंने उच्च अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि वह जिलेवार शिक्षकों के सत्यापन कार्य की समीक्षा करें। जिन जिलों में सत्यापन कार्य धीमा चल रहा है। वहाँ संबंधित अधिकारी को समय पर सत्यापन पूरा करने के निर्देश दें। इसके बाद भी लापरवाही करने वाले अधिकारियों पर सख्त कार्रवाई करें। मुख्यमंत्री ने कोरोना काल में परिषदीय विद्यालयों में पठन पाठन कार्य सुचारू रूप से संचालित किए जाने के निर्देश भी दिए।

गौरतलब है कि बेसिक शिक्षा विभाग ने शिक्षकों की भर्ती करते समय हाई स्कूल, इंटरमीडिएट और टीईटी की मार्कशीट का सत्यापन किया, लेकिन उनके स्नातक और बीएड की मार्कशीट को उन विश्वविद्यालयों द्वारा सत्यापित किया जाना था, जहाँ से उन्होंने कोर्स किया था। विभागीय अधिकारियों ने कहा कि चूँकि विश्वविद्यालय कम स्टाफ के साथ काम कर रहा है, इसलिए सत्यापन में समय लग रहा है। राज्य में जारी महामारी को ध्यान में रखते हुए राहत दी गई है, जिससे कई विश्वविद्यालयों में प्रशासनिक कार्य बाधित है, जिससे डिग्री का सत्यापन करना असंभव हो गया है।

मुस्लिमों ने ही मस्जिद की दीवार पर दंगा भड़काने के लिए लिखे थे ‘जय श्री राम’: भैंसा पुलिस ने CCTV फुटेज से किया खुलासा

भैंसा के एएसपी किरण खरे ने कहा है कि मस्जिद की दीवारों पर ‘जय श्री राम’ लिखने वाले लोगों की सीसीटीवी फुटेज से पहचान कर ली गई है। आरोपितों में से एक की पहचान मोहम्मद अब्दुल कैफ के रूप में हुई है और दूसरा नाबालिग है।

घटना तेलंगाना के भैंसा की है। बता दें कि हाल ही में भैंसा में हिंदू समुदाय के खिलाफ दंगा भड़का था, जिसकी वजह से वहाँ पर सांप्रदायिक तनाव उत्पन्न हो गया था।

पुलिस अधिकारी का कहना है कि उन्हें शिकायत मिली थी कि 26 मई को स्थानीय मस्जिद की दीवारों पर कुछ बदमाशों ने ‘जय श्री राम’ लिख दिया था। शिकायत के बाद, पुलिस ने तुरंत मामले की जाँच की और संबंधित सीसीटीवी फुटेज एकत्र किए। इसके बाद दो संदिग्धों की पहचान कर उन्हें गिरफ्तार कर लिया गया।

मोहम्मद अब्दुल मजीद का बेटा मोहम्मद अब्दुल कैफ 20 साल का है और नाबालिग 14 साल का है। दोनों आरोपित मस्जिद के पास के इलाके में रहते हैं। आरोपित ने कहा कि नाबालिग लड़के ने बड़े लड़के द्वारा ऐसा करने का निर्देश दिए जाने के बाद ‘जय श्री राम’ लिखा। सीसीटीवी फुटेज के अलावा लिखावट भी संदिग्ध से मेल खाती है। पुलिस अधिकारी ने बताया कि आरोपितों ने अपना जुर्म कबूल कर लिया है।

गौरतलब है कि पिछले दिनों भैंसा में दो धार्मिक समूहों के बीच सांप्रदायिक झड़प हुई थी, जिसके परिणामस्वरूप दो घरों और नौ वाहनों को आग लगा दी गई थी। पथराव में कुछ पत्रकारों और पुलिसकर्मियों सहित 10 लोग घायल हो गए। पुलिस ने बाद में कहा था कि हिंसा दो व्यक्तियों के बीच एक बाइक दुर्घटना पर बहस के बाद हुई, जो बाद में दो धार्मिक समूहों के बीच लड़ाई में बदल गई और पूरे शहर में फैल गई।

रिपोर्ट्स में बताया गया कि कल करीब 8:30 बजे के बाद एक बाइक चालक और दूसरे समुदाय के व्यक्ति में जेलफेकार लेन (Zelfekar lane) पर बहस हुईं। जिसके बाद पूरी हिंसा भड़की। रिपोर्ट्स का कहना था कि हिंसा जुल्गीकार मस्जिद के आसपास हुई और एक बहस ने ही इसको भड़काया। बाद में जैसे ही पुलिस को पता चला सुरक्षाकर्मी फौरन घटनास्थल पर इकट्ठा हुए। इलाके में धारा 144 लगाई गई।

बाबा रामदेव के खिलाफ जंग में IMA के बाद अब FORDA भी कूदा: 1 जून को करेगा देशभर में विरोध प्रदर्शन

योग गुरु बाबा रामदेव और इंडियन मेडिकल एसोसिएशन (IMA) के बीच चल रहा विवाद अभी थमा भी नहीं था कि अब आवासीय डॉक्टरों के संगठन ने भी बाबा रामदेव के खिलाफ मोर्चा खोल दिया। फेडरेशन ऑफ रेसीडेंट डॉक्टर एसोसिएशन (FORDA) ने एलोपैथी और आधुनिक चिकित्सा के विषय में बाबा रामदेव द्वारा दिए गए वक्तव्य के खिलाफ 1 जून को राष्ट्रव्यापी ब्लैक डे प्रोटेस्ट करने का निर्णय लिया है।

FORDA ने शनिवार (मई 29, 2021) को जारी की गई अपनी प्रेस विज्ञप्ति में कहा कि कई कोरोना वॉरियर्स ने Covid-19 महामारी के दौरान अपनी क्षमता से ज्यादा कार्य किया है, लेकिन उनके इस योगदान के बावजूद बाबा रामदेव के द्वारा अमानवीय और अपमानजनक बयान दिया गया है। प्रेस विज्ञप्ति में यह भी कहा गया कि बाबा रामदेव के द्वारा दिए गए बयान के कारण भारत सरकार के टीकाकरण कार्यक्रम को ठेस पहुँची है और लोगों में टीके के प्रति हिचकिचाहट भी पैदा हुई है।

FORDA ने अपनी प्रेस विज्ञप्ति में कहा कि बाबा रामदेव के द्वारा ऐसे बयान दिए जाने के बाद भी अभी तक उनके खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं हुई है। FORDA ने कहा कि चूँकि हम सब कोविड महामारी से लड़ने का कार्य कर रहे हैं इसलिए हम बाबा रामदेव के बयान के खिलाफ 1 जून को राष्ट्रव्यापी ब्लैक डे प्रोटेस्ट करेंगे।

हालाँकि, यह ध्यान रखा जाएगा कि इस प्रोटेस्ट के दौरान मरीजों को कोई असुविधा न हो। साथ ही FORDA ने बाबा रामदेव के खिलाफ महामारी अधिनियम, 1897 की धाराओं के तहत कार्रवाई की माँग की है और कहा है कि बाबा रामदेव अपने बयान के लिए सार्वजनिक रूप से माफी माँगे।

ज्ञात हो कि फेडरेशन ऑफ रेसीडेंट डॉक्टर एसोसिएशन (FORDA) भारत में आवासीय डॉक्टरों का एक पेशेवर एसोसिएशन है जिसकी स्थापना जनवरी 2014 में दिल्ली में हुई थी। FORDA आवासीय डॉक्टरों की सुरक्षा, काम की अवधि और ड्यूटी के लिए बेहतर वातावरण के मुद्दे उठाता रहता है।

आपको बता दें कि बाबा रामदेव सोशल मीडिया में वायरल वीडियो में एलोपैथी और आधुनिक चिकित्सा पद्धति पर यह कहते हुए देखे गए कि एलोपैथिक दवाईयों के कारण देश में कई कोरोना वायरस से संक्रमित मरीजों की मौत हुई है।

एलोपैथी पर बाबा रामदेव के बयान के बाद IMA और बाबा रामदेव के बीच रार ठन गई। IMA ने न केवल बाबा रामदेव के खिलाफ दिल्ली में शिकायत दर्ज कराई बल्कि उन्हें 1000 करोड़ रुपए की मानहानि का नोटिस भी दिया। साथ ही IMA ने पीएम मोदी को पत्र लिखकर बाबा रामदेव के खिलाफ राजद्रोह का मुकदमा दर्ज करने की माँग की थी।

प्रोपेगेंडा पत्रकार राणा अयूब ने समाप्त किया Covid फंड रेजर कैम्पेन: भारी अनियमितता उजागर होने के बाद कार्रवाई से डरीं

पत्रकार राणा अयूब ने संभावित अनियमितताओं के सामने आने के बाद अपना Covid-19 के लिए फंड इकट्ठा करने का कैम्पेन समाप्त कर दिया। इस कैम्पेन के बारे में यह आशंका जताई जा रही थी कि इस कैम्पेन में राणा देश के FCRA कानूनों का उल्लंघन कर रही थीं।

केटो (ketto) पर बनाए गए फंड कैम्पेन में राणा आयूब ने लिखा कि विदेशी दान के लिए FCRA कानून के तहत योग्य भारतीय एनजीओ के साथ टाई-अप किया गया। राणा ने बताया कि इसके माध्यम से ग्रामीण क्षेत्रों को चिकित्सकीय उपकरण की आपूर्ति का लक्ष्य रखा गया। राणा ने कहा कि इसके बाद उनके खिलाफ कई प्रोपेगेंडा वेबसाइट द्वारा कैम्पेन चलाए गए।

राणा आयूब का फंड कैम्पेन

राणा आयूब ने कहा कि एक पत्रकार होने के नाते उनका कर्त्तव्य है कि उनको फॉलो करने वालों में उनके प्रति विश्वास बना रहे और उन्होंने हमेशा यह सुनिश्चित किया है कि भारत के टैक्स और अन्य कानूनों का पूरा पालन किया जाए।   

अपने फंड इकट्ठा करने वाले कैम्पेन को समाप्त करते हुए राणा आयूब ने लिखा कि वह दानदाताओं और अपने लिए किसी प्रकार की कोई असुविधा नहीं चाहती हैं इसलिए उन्होंने दान में जो भी मिला है उसे विदेशी दानदाताओं को वापस करने का निर्णय लिया गया है। हालाँकि राणा ने इसे राहत कार्यों को एक बड़ा झटका बताया है और कहा है कि ऐसे कठिन समय में ऐसा निर्णय लेना दुर्भाग्यपूर्ण है।

28 मई 2021 को समाप्त हुए इस फंड कैम्पेन के बारे में @parixit111 नाम के एक ट्विटर यूजर ने प्रश्न उठाया था और कैम्पेन के बारे में संभावित गड़बड़ी की आशंका जताई थी। यूजर ने ketto की दान रिसीप्ट पोस्ट की जिसमें स्पष्ट तौर पर लिखा हुआ था कि यह दान एक व्यक्ति के खाते में जाएगा और दान टैक्स में छूट के लिए भी मान्य नहीं होगा। इसका मतलब था कि यह दान किसी ट्रस्ट या संगठन के लिए नहीं था। अयूब ने यह स्वीकार किया कि वह अपने निजी खाते में दान ले रही थीं।

हाल ही में गुजरात के विधायक जिग्नेश मेवानी भी संदेह के दायरे में आए थे जब उन्होंने एक एनजीओ के लिए दान देने की अपील की थी। FCRA के तहत यह कहा गया है कि विदेशी दान लेने के लिए या तो एक संगठन के रूप में रजिस्टर होकर FCRA सर्टिफिकेट लेना होगा या फिर संबंधित प्राधिकरण से अनुमति प्राप्त करनी होगी। बाद में हाल के संशोधनों में यह कहा गया कि FCRA के तहत रजिस्टर्ड संगठन या ट्रस्ट किसी गैर- FCRA संगठन या ट्रस्ट के लिए दान एकत्र नहीं कर सकता है। हालाँकि हमने इस मामले में ketto से संपर्क करने की कोशिश की लेकिन हमें कोई जवाब नहीं मिला है।

पहले भी कई फंड कैम्पेन रहे संदेह के दायरे में :

राणा आयूब का यह पहला कैम्पेन नहीं है जो संदेह के दायरे में आया है। राणा ने 2 फंड कैम्पेन पहले भी चलाए थे। एक कैम्पेन महाराष्ट्र, बिहार और असम में राहत कार्यों के लिए चलाया गया था। इस कैम्पेन में 68 लाख रुपए इकट्ठा भी हुए थे। हालाँकि ketto ने बिना किसी उचित कारण के यह कैम्पेन समाप्त कर दिया था।

राणा आयूब के फंड कैम्पेन का पेज जो डिलीट हो चुका है
राणा आयूब के एक और फंड कैम्पेन का पेज

एक दूसरा फंड कैम्पेन 25 सितंबर 2020 को समाप्त हुआ था। इस फंड कैम्पेन में विदेशों से भी दान मिला था। इस कैम्पेन में सबसे बड़ी राशि 2000 पाउंड (लगभग 2,05,453 रुपए) थी, साथ ही 1500 डॉलर (लगभग 1,08,590 रुपए) तक का दान भी मिला था। ऐसी संभावना भी है कि वर्तमान में Covid-19 राहत कार्यों के लिए चलाए गए कैम्पेन की तरह ही पहले के कैम्पेन भी अनियमितता से भरे रहे होंगे। हालाँकि राणा अयूब की तरफ से कोई स्पष्टीकरण नहीं मिला है बजाय दूसरों पर आरोपों के।   

लक्षद्वीप में कानून का विरोध कर रहे मुस्लिमों के समर्थन में उतरे एक्टर पृथ्वीराज सुकुमारन, कहा- इन्हें सुनने की जरूरत है

केंद्र शासित प्रदेश लक्षद्वीप में कुछ कानूनों को मंजूरी देने के बाद से विवाद गहरा गया है। इस समय लक्षद्वीप के लोग इन कानूनों को लेकर विद्रोह पर उतर आए हैं। इसी बीच मलयाली फिल्म अभिनेता पृथ्वीराज सुकुमारन ने विरोध कर रहे लक्षद्वीप के मुस्लिमों का समर्थन किया है।

सोशल मीडिया पर ‘लक्षद्वीप बचाओ अभियान’ को लेकर वहाँ के प्रशासक को घेरा जा रहा है। दिसंबर 2020 में, भाजपा नेता प्रफुल खोड़ा पटेल लक्षद्वीप के नए प्रशासक बने थे। इन पर आरोप लगाया जा रहा है ​कि वह कानून लाकर अपने लोगों के जीवन को प्रभावित करने की कोशिश कर रहे हैं। पृथ्वीराज ने कहा कि लक्षद्वीप के लोगों को सुनने की जरूरत है और वे जो चाहते हैं उससे बेहतर कोई नहीं जानता।

अभिनेता पृथ्वीराज ने फेसबुक पोस्ट के जरिए लक्षद्वीप के साथ अपने संबंध और अनुभवों को साझा किया है। उन्होंने लिखा है, “द्वीपों के इस खूबसूरत छोटे समूह की मेरी पहली यादें स्कूल के समय से है, जब मैं 6ठी कक्षा में पढ़ता था। मैं डायरेक्टर सैची की फिल्म ‘अनारकली’ की शूटिंग के दौरान इस द्वीप पर आया था। मैंने यहाँ कवरती (Kavaratti) में 2 महीने सुखद पलों को जिया था। दो साल पहले मैं फिर से वहाँ फिल्म करने गया, जो मेरे निर्देशन में बनी पहली फिल्म लूसिफेर (LUCIFER) थी। इनमें से कुछ भी संभव नहीं होता, यदि लक्षद्वीप के लोग उग्र होते।”

बता दें कि मलयालम फिल्मों के मशहूर डायरेक्टर-राइटर के आर सच्चिदानंदन उर्फ सैची का पिछले साल 48 साल की उम्र में निधन हो गया था। उन्होंने बतौर डायरेक्टर साल 2015 में अपनी पहली मलयालम फिल्म ‘अनारकली’ बनाई थी। इस फिल्म में पृथ्वीराज सुकुमारन ने अहम भूमिका निभाई थी।

डायरेक्टर सैची साल 2015 में फिल्म ‘अनारकली’ के कलाकारों और अपनी टीम के साथ लक्षद्वीप द्वीप समूह के लिए उड़ान भरने ही वाले थे कि उन्हें एक हैरान कर देने वाली खबर मिली। दरअसल, उस दौरान लक्षद्वीप में अगाती, कवरती, बांगरम और थिन्नाकारा पर दृश्यों को शूट करने की अनुमति द्वीप के प्रशासक राजेश प्रसाद ने वापस ले ली थी।

सुन्नी स्टूडेंट्स फेडरेशन नामक एक समूह ने स्थानीय मस्जिद के इमाम द्वारा हस्ताक्षर की हुई एक याचिका प्रशासक को सौंपी थी, जिसमें कहा गया था कि सिनेमा गैर-इस्लामिक है। सैची ने कहा था, ”मुझे बताया गया है कि अगर शूटिंग शुरू हुई तो सांप्रदायिक दंगे हो सकते हैं।”

सैची ने आगे का था, “अगर मैंने (फिल्म की कास्ट) पृथ्वीराज, बीजू मेनन, प्रियल गोर और मिया जॉर्ज को इस प्रॉब्लम के बारे में बताया, तो वे तुरंत अपनी अगली फिल्मों के लिए रवाना हो जाएँगे। इसलिए मैं इस मुद्दे पर शांत रहा, केवल निर्माता राजीव नायर और प्रोडक्शन कंट्रोलर रोशन चित्तूर के साथ ​ही इस पर चर्चा की।”

टीम को अगले दिन कवरती पहुँचना था, लेकिन सैची को इस फैसले पर विचार करने के लिए और समय चाहिए था। इसलिए उसने कप्तान को जहाज की यात्रा की दिशा बदलने के लिए मना लिया। नाव अब बित्रा, किल्टन और अन्य द्वीपों को पार करते हुए अगले दिन कवरती पहुँचती।

फिर से एक प्रभावशाली संपर्क के माध्यम से सैची ने विदेश मंत्रालय के एक वरिष्ठ अधिकारी को सूचित किया। अधिकारी ने तुरंत प्रशासक को दिल्ली आने को कहा। इसलिए राजेश ने हेलीकॉप्टर से कवरती से कोच्चि के लिए और फिर दिल्ली के लिए उड़ान भरी।

बता दें कि इन कानूनों को मंजूरी देने के बाद से लक्षद्वीप विपक्षी नेताओं द्वारा भाजपा सरकार और लक्षद्वीप के प्रशासक की आलोचना की जा रही है। भारतीय द्वीप समूह के प्रशासक प्रफुल्ल पटेल के खिलाफ विपक्षी नेता और वहाँ स्थानीय लोग विद्रोह कर रहे हैं। इन कानूनों में पंचायत चुनाव लड़ने के लिए दो संतान का नियम, गाय और बैल के अवैध कत्ल पर बैन और पर्यटन को बढ़ाने के लिए शराब की बिक्री शुरू करने की बातें शामिल है।

‘मैं मना करती रही फिर भी उसने मुझे न्यूड किया’: निफ्ट के छात्र आरिब फकीह ने किया नाबालिग लड़कियों का यौन उत्पीड़न

मुंबई में आए दिन महिलाओं के प्रति बढ़ते अपराध की खबर सामने आती रहती है। ताजा मामला नवी मुंबई से है। गुरुवार (मई 27, 2021) को, एक ट्विटर यूजर (@breaking_a_rib) ने माइक्रोब्लॉगिंग प्लेटफॉर्म पर एक थ्रेड पोस्ट किया, जिसमें कोलकाता के निफ्ट के छात्र द्वारा यौन शोषण की शिकार हुई कई महिलाओं की आपबीती साझा की गई। छात्र की पहचान आरिब फकीह के रूप में हुई है। डेटिंग ऐप बंबल के मुताबिक आरिब 19 साल का है।

अरिब फकीह के बम्बल प्रोफाइल का स्क्रीनशॉट

इसमें उन्होंंने बताया कि आरिफ उन्हें किस तरह की मैसेज किया करता था। एक पीड़िता ने बताया कि वो आरिब से 2018 में मिली थी। उस समय आरिब ने क्लास के बाद सीढ़ियों पर उसे किस कर लिया था। हालाँकि, वो इससे हैरान रह गई, लेकिन उसने इसे नजरअंदाज कर दिया, क्योंकि उसे लगा कि वह एक अच्छा लड़का है।

पीड़िता ने बताया कि वह उससे मीठी-मीठी बातें किया करता था। जिससे वह काफी आकर्षित हो गई और वह अपने जीवन के सबसे बुरे दौर में पहुँच गई। वह परीक्षा में फेल होने लगी, वह अपनी जिंदगी के फैसले को लेकर कंफ्यूज रहने लगी और आरिब ने इसका फायदा उठाया।

फिर आरिब उसे डेट पर लेकर गया। यहाँ पर उसने कुछ तस्वीरें ली और उसे अपने स्पैम अकाउंट पर डाला, लेकिन पीड़िता ने इसे भी नजरअंदाज कर दिया। इसके 1-2 हफ्ते बाद वह उसे अपने घर ले गया और वहाँ पर उसने उसके साथ जबरन शारीरिक संबंध बनाने की कोशिश की। वह बार-बार मना करती रही लेकिन वह उसे न्यूड कर दिया।

पीड़िता ने आरिब के साथ एक और घटना शेयर करते हुए बताया कि उसे मिले हुए 2-3 दिन ही हुए थे। वो लोग ग्रॉसरी शॉप पर थे, तभी आरिब ने उससे कहा कि वह उसके लिए उसके भाई को भी मार सकता है। उसके कल्याण में ‘पावरफुल’ लोगों के साथ संपर्क हैं। पीड़िता ने उसे यह सोचकर नजरअंदाज कर दिया कि वह मजाक कर रहा है। आरिब ने पीड़िता के साथ कुछ लड़कियों के प्राइवेट डिटेल भी शेयर किया।

एक और पीड़िता ने आरिब के बारे में बताया कि वह उसे मिलने के लिए बुलाता था और टेनिस स्कर्ट पहन कर आने के लिए बोलता था। उसने उसे गले लगाने के लिए भी बोला। इसके अलावा आरिब ने उससे कहीं चल कर हैंग आउट करने के लिए बोला। पीड़िता ने बताया कि वह उस समय नाबालिग थी और आरिब यह बात जानता था।

एक अन्य नाबालिग पीड़िता ने बताया कि आरिब उसे मिलने के लिए बुलाता था, और गले मिलने के लिए बोलता था। मगर जब पीड़िता उससे बात करना बंद कर देती थी तो वह दूसरे अकाउंट से मैसेज करता था। पीड़िता ने उसके 6 अकाउंट ब्लॉक किए। 

पीड़ितों में से एक ने बताया, “24 जुलाई 2019 की बात है। अगर कोई उससे पूछे तो वह अभी भी इस बात से इनकार करेगा कि ऐसा कभी हुआ है, लेकिन उसने मुझसे निजी तौर पर इसके लिए माफी माँगी है। वह जानता है कि उसने क्या किया है। वह जानता है कि वह जो करता है वह एक पैटर्न है। यह हमेशा एक पैटर्न होता है। शराब। मेनुपुलेशन। जबरदस्ती। मैंने सोचा कि आरिब से मिलना ठीक है क्योंकि उसके सभी दोस्त घर पर थे और इससे हमारे बीच कुछ भी नहीं होगा।”

उसने आगे कहा, “मुझे अभी पता चला है कि उसने मेरे अलावा कई महिलाओं के साथ धोखा किया है। इससे पहले 2-3 महीने मैं उसके साथ थी। वह मुझे अपने साथ अकेले रहने के लिए मनाने की कोशिश करता है। मैं उसे मना करती हूँ। वह नकली गुस्सा दिखाता है और मैं अपनी दोस्तों के साथ बैठने के बजाय उसके साथ चली जाती हूँ।”

उसने आगे कहा, “सब कुछ बहुत जल्दी में बदल गया। इससे पहले कि मैं यह समझूँ, समय बीत जाता है और वह चाहता है कि सभी चले जाएँ। मैं उसके सबसे अच्छे दोस्तों के साथ जाना चाहती थी। मुझे सब कुछ याद है इतने नशे में होने के बावजूद मैं पास आउट होने वाली थी। मैं उसके दोस्त का हाथ पकड़ कर कह रही थी कि मुझे उस होटल में ले चलो जहाँ मैं अपनी माँ के साथ रुकी थी। आरिब जोर देकर कहता है, “मुझे शांत करो। और फिर, वे चला गया है। मैं अकेली रह गई। वह मुझे धक्का देकर वॉशरूम ले गया। मैंने कहा- नहीं। मैंने कई बार कहा- नहीं। उसने फिर भी मुझे न्यूड कर दिया। उस दिन बारिश हो रही थी। मुझे सब कुछ याद है।”

मुख्य सचिव को केंद्र वापस बुलाए जाने पर भड़कीं ममता, कहा- हम भी जा सकते हैं कोर्ट, सरकार का निर्णय असंवैधानिक

पश्चिम बंगाल में सरकार के मुख्य सचिव अलपन बंदोपाध्याय के ट्रांसफर के मामले में मुख्यमंत्री ममता बनर्जी, केंद्र सरकार के विरोध में खड़ी हो गई हैं। केंद्र सरकार ने शुक्रवार (28 मई) को मुख्य सचिव बंदोपाध्याय को रिलीव करने और उन्हें 31 मई 2021 को सुबह 10 बजे तक कार्मिक एवं प्रशिक्षण विभाग में रिपोर्टिंग करने के लिए कहा था। इसके बाद ममता बनर्जी ने मुख्य सचिव के ट्रांसफर का विरोध करते हुए इसे असंवैधानिक और अवैध बताया।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शुक्रवार (28 मई) को चक्रवात यास से हुए नुकसान का जायजा लेने के लिए ओडिशा और पश्चिम बंगाल का दौरा किया था। इस दौरान पीएम मोदी ने कालीकुंडा में दोनों राज्य की सरकारों के साथ चक्रवात को लेकर समीक्षा बैठक भी की थी।

रिपोर्ट्स के मुताबिक पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी और मुख्य सचिव अलपन बंदोपाध्याय एक ही परिसर में होने के बावजूद चक्रवात समीक्षा बैठक के लिए 30 मिनट की देरी से पहुँचे थे। ममता ने समीक्षा बैठक में प्रवेश करने के बाद चक्रवात के प्रभाव से संबंधित कागजात सौंपे और एक अन्य बैठक का हवाला देकर चली गईं।

इसके बाद केंद्र सरकार ने मुख्य सचिव बंदोपाध्याय के ट्रांसफर को लेकर सेंट्रल एडमिनिस्ट्रेटिव ट्रिब्यूलन (CAT) और कलकत्ता हाई कोर्ट में कैविएट दाखिल किया। केन्द्रीय कार्मिक, लोक शिकायत और पेंशन मंत्रालय के अंडर सेक्रेटरी अंशुमान मिश्रा के द्वारा हस्ताक्षरित आदेश में कहा गया है कि इंडियन एडमिनिस्ट्रेटिव सर्विस (कैडर) रूल्स, 1954 के नियम 6(1) के मुताबिक केन्द्रीय कैबिनेट की अपॉइंटमेंट कमेटी ने 1987 बैच के आईएएस अधिकारी अलपन बंदोपाध्याय को भारत सरकार के अंतर्गत नियुक्ति को अनुमति दे दी है।

पत्र में यह भी कहा गया है कि किसी भी असहमति की स्थिति उत्पन्न होने पर केंद्र सरकार का निर्णय प्रभावी होगा और संबंधित राज्य सरकार, केंद्र के इस निर्णय को लागू करेंगी।

हालाँकि, नियमानुसार कार्य होने के बाद भी पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने इस निर्णय को असंवैधानिक और गैर-कानूनी बताया। उन्होंने कहा कि यह संविधान के बेसिक स्ट्रक्चर को खत्म करने जैसा है। ममता बनर्जी ने कहा कि केंद्र और राज्यों को एक साथ मिलकर कार्य करना चाहिए। केंद्र सरकार द्वारा CAT एवं कलकत्ता हाई कोर्ट में कैविएट दाखिल किए जाने पर ममता बनर्जी ने कहा कि जब वो कोर्ट जा सकते हैं तो हम भी कोर्ट जा सकते हैं। यह कार्रवाई एकतरफा नहीं हो सकती।

शाकाहारी दूध पर स्विच करने पर 10 करोड़ किसानों को कौन देगा रोजगार: PETA के सुझाव पर अमूल ने दिया करारा जवाब

द पीपल फॉर द एथिकल ट्रीटमेंट ऑफ एनिमल्स (PETA) पिछले कई दिनों से भारतीय डेयरी कंपनी अमूल को निशाना बना रहा है। दरअसल, अमेरिकन एनिमल राइट्स ऑर्गनाइजेशन पेटा ने अंतरराष्ट्रीय बाजार में हो रहे बदलावों को लेकर अमूल के मैनेजिंग डायरेक्टर आरएस सोढ़ी को एक पत्र लिखकर डेयरी दूध के बजाए शाकाहारी दूध का प्रोडक्शन करने का आग्रह किया, जिसके बाद ट्विटर पर इसे लेकर बहस छिड़ गई है।

आरएस सोढ़ी ने इसको लेकर पेटा के सुझाव पर करारा जवाब दिया है। मैनेजिंग डायरेक्टर ने ट्विटर पर PETA से पूछा कि क्या शाकाहारी दूध पर स्विच करने से 100 मिलियन (10 करोड़) डेयरी किसान, जिनमें से 70 फीसदी भूमिहीन हैं, उनकी आजीविका चल जाएगी? क्या वो अपने बच्चों की स्कूल फीस भर सकेंगे और भारत में कितने लोग वास्तव में लैब में बना दूध खरीद सकते हैं?

सोढ़ी ने स्वदेशी जागरण मंच के राष्ट्रीय सह-समन्वयक अश्विनी महाजन के एक ट्वीट को रीट्वीट किया है। इस ट्वीट में लिखा है, ”क्या आप नहीं जानते कि ज्यादातर डेयरी किसान भूमिहीन हैं। इस विचार को लागू करने से कई लोगों की आजीविका का स्रोत खत्म हो जाएगा। ध्यान रहे दूध हमारे विश्वास में है, हमारी परंपराओं में, हमारे स्वाद में, हमारे खाने की आदतों में पोषण का एक आसान और हमेशा उपलब्ध स्रोत है।” मालूम हो कि अमूल भारतीय डेयरी सहकारी सोसाइटी है जिसका प्रबंधन गुजरात को-ऑपरेटिव मिल्क मार्केटिंग फेडरेशन करता है।

उन्होंने कहा कि पेटा चाहती है कि अमूल 100 मिलियन (10 करोड़) गरीब किसानों की आजीविका छीन ले और 75 वर्षों में किसानों के पैसे से बनाए गए अपने सभी संसाधनों को ज्यादा कीमतों पर समृद्ध बहुराष्ट्रीय कंपनियों (MNC) को सौंप दे, जिसे औसत निम्न मध्यम वर्ग वहन ही नहीं कर सकता। सोढ़ी ने कहा कि शाकाहारी दूध पर स्विच करने से मध्यम वर्ग को जो चीज आसानी से मिल पा रही है, वो मिलना मुश्किल हो जाएगी, क्योंकि कई लोग शाकाहारी दूध का खर्च नहीं उठा पाएँगे।

बता दें कि पेटा ने अपने पत्र में वैश्विक खाद्य निगम कारगिल की 2018 की रिपोर्ट का हवाला देते हुए दावा किया है कि दुनिया भर में डेयरी उत्पादों की माँग घट रही है, क्योंकि डेयरी को अब आहार का एक अनिवार्य हिस्सा नहीं माना जाता है। उसने कहा कि नेस्ले और डैनोन जैसी वैश्विक डेयरी कंपनियाँ बाजार में बदलाव के हिसाब से काम कर रही हैं और अमूल को भी ऐसा ही करना चाहिए। हम अमूल को फलते-फूलते शाकाहारी भोजन और दूध के बाजार से लाभ उठाने के लिए प्रोत्साहित करना चाहेंगे।

पेटा ने सुझाव दिया था कि अमूल को देश में उपलब्ध 45,000 विविध पौधों का उपयोग करना चाहिए और शाकाहारी वस्तुओं के लिए उभरते बाजार का लाभ उठाना चाहिए। हालाँकि, ट्विटर पर नेटिजन्स के निशाने पर आने के बाद पेटा ने अपने बयान में बदलाव करते हुए कहा कि सिर्फ अमूल को शाकाहारी खपत के मौजूदा रुझानों के बारे में सूचित कर रहा था और सहकारी को मौजूदा रुझानों के जवाब में स्मार्ट व्यवसाय विकल्प बनाने के लिए प्रोत्साहित कर रहा था।

एक्स-GF के चक्कर में अनस ने सरफराज, सादाब, मोहिद के साथ मिलकर युवक पर की फायरिंग, UP पुलिस ने चारों को दबोचा

उत्तर प्रदेश के मेरठ जिले के नौचंदी थाने में एक बड़ा अजीब मामला सामने आया है। यहाँ अनस नाम के युवक की पूर्व प्रेमिका के चक्कर में चार लड़के पकड़े गए। इन चारों ने जुनैद नाम के लड़के पर जानलेवा हमला किया था। इसी के बाद पुलिस ने सुसंगत धाराओं में चारों युवकों के विरुद्ध मामला दर्ज कर इन्हें दबोचा। मेरठ पुलिस के ट्विटर पर इस घटना की जानकारी मौजूद है।

जानकारी के अनुसार, शास्त्री नगर सेक्टर-11 निवासी जुनैद चौहान का एक युवती से प्रेम प्रसंग है। लेकिन युवती का पूर्व प्रेमी अनस इस बात को लेकर लगातार जुनैद को धमकी दे रहा था। जब तमाम धमकियों के बाद उसने लड़की से बात करनी बंद नहीं की, तो जुनैद के साथ युवती को भी जान से मारने को कहा गया।

इसके बाद बुधवार (मई 26, 2021) को अनस ने अपने कुछ साथियों के साथ मिलकर जुनैद के ऊपर आरटीओ पुल के पास जानलेवा हमला बोला। गोलीबारी में जुनैद की जान बाल बाल बची। पुलिस ने छानबीन के बाद 4 युवकों को पकड़ लिया। बाकियों के लिए दबिश अब भी जारी है।

नौचंदी के इंस्पेक्टर प्रेमचंद शर्मा का कहना है कि पुलिस अभी तक इस मामले में मुकदमा दर्ज करने के बाद चार आरोपितों की गिरफ्तारी कर चुकी है। हथियार बरामद किए गए हैं और  बाकी जाँच करके इनके खिलाफ सख्त कार्रवाई होगी।

बता दें कि गिरफ्तार हुए युवक की पहचान समद पुत्र सरफराज निवासी चमड़ा पैठ, लिसाड़ी गेट; अनस पुत्र मंजूर मलिक निवासी हुमायूँनगर, लिसाड़ी गेट; मोहिद उर्फ मोईन पुत्र शाहिद निवासी हुमायूँनगर;  सादाब उर्फ ऐडा मलिक निवासी मदीना मस्जिद जाकिर कॉलोनी के तौर पर हुई है।