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साँप को मारा और खा गया, तमिलनाडु के व्यक्ति ने कहा- कोरोना से बचने के लिए किया, लगा ₹7,500 का जुर्माना

तमिलनाडु के एक गाँव में कोरोना वायरस के इलाज के नाम पर साँप को खाने का मामला सामने आया है। सोशल मीडिया में वायरल हुए वीडियो में एक व्यक्ति साँप को खाते हुए देखा गया और साथ में वह दावा कर रहा है कि साँप को खाने से Covid-19 संक्रमण नहीं होता।

मामला तमिलनाडु के तिरुनेलवेलि जिले के पेरुमलपट्टी गाँव का है। वेदिवल नाम के एक व्यक्ति ने पहले एक खेत से साँप को पकड़ा और उसे मार दिया। इसके बाद उस व्यक्ति ने साँप को खाते हुए एक वीडियो बनाया। वीडियो में वेदिवल यह कहता हुआ देखा गया कि साँप Covid-19 संक्रमण के लिए एक बढ़ियाँ एंटीडोट (Antidote) है और ऐसा करने से इंसान कोरोना वायरस संक्रमण से बचा रहेगा।

हालाँकि, वीडियो वायरल होने के बाद पर्यावरणविदों का ध्यान इस घटना पर गया और उन्होंने पुलिस को इसकी सूचना दी। पुलिस ने वेदिवल पर कार्रवाई करते हुए उसे गिरफ्तार कर लिया और उस पर 7,500 रुपए का जुर्माना भी लगाया।

वेदिवल यही कहता रहा कि उसने कोरोना वायरस से बचने के लिए साँप को खाया। वेदिवल द्वारा साँप को खाने की घटना पर प्रतिक्रिया देते हुए कई विशेषज्ञों ने कहा कि ऐसा करना बेहद खतरनाक हो सकता है क्योंकि ऐसे जानवर विषैले होते हैं।   

कोरोना से अनाथ ​हुए बच्चों को मुफ्त शिक्षा, स्वास्थ्य बीमा, मासिक भत्ता और ₹10 लाख का फंड: PM मोदी ने की घोषणा

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी कोरोना महामारी की वजह से अनाथ हुए बच्चों की मदद के लिए आगे आए हैं। उन्होंने शनिवार (29 मई 2021) को पीएम केयर फंड से बच्चों की मुफ़्त शिक्षा के अलावा कई योजनाओं का ऐलान किया है। प्रधानमंत्री कार्यालय (PMO) के मुताबिक, कोरोना महामारी में माता-पिता गँवाने वाले बच्चों की ‘पीएम केयर्स फॉर चिल्ड्रेन’ योजना के तहत मदद की जाएगी। इसके तहत अनाथ बच्चों को मुफ्त शिक्षा दी जाएगी और उनका स्वास्थ्य बीमा भी किया जाएगा।

ऐसे बच्चों को 18 साल की उम्र से मासिक भत्ता (स्टाइपेंड) और 23 साल की उम्र में पीएम केयर्स से 10 लाख रुपए का फंड मिलेगा। सरकार ऐसे बच्चों के लिए निशुल्क शिक्षा सुनिश्चित करेगी। बच्चों को उच्च शिक्षा के लिए एजुकेशन लोन प्राप्त करने में सहायता की जाएगी और PM CARES लोन पर ब्याज का भुगतान सरकार करेगी। आयुष्मान भारत के तहत बच्चों को 18 साल तक 5 लाख रुपए का मुफ्त स्वास्थ्य बीमा मिलेगा और प्रीमियम का भुगतान पीएम केयर्स द्वारा किया जाएगा।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आज कहा, “बच्चे भारत के भविष्य हैं और हम उनकी सुरक्षा और सहायता के लिए सब कुछ करेंगे। उन्होंने आगे कहा कि समाज के रूप में यह हमारा कर्तव्य है कि हम अपने बच्चों की देखभाल करें और एक उज्ज्वल भविष्य की आशा करें।”

मालूम हो कि शुक्रवार (28 मई 2021) को सुप्रीम कोर्ट ने कहा था कि वह इसकी कल्पना तक नहीं कर सकती कि कोविड-19 महामारी के कारण इतने बड़े देश में कितने बच्चे अनाथ हो गए। इसके साथ ही कोर्ट ने राज्य के अधिकारियों को उनकी तत्काल पहचान करने तथा उन्हें राहत मुहैया कराने का निर्देश दिया था।

कोर्ट ने राज्य सरकारों को निर्देश देते हुए कहा था कि सड़कों पर भूख से तड़प रहे बच्चों की व्यथा समझने का प्रयास करें। जिला अधिकारियों द्वारा अदालतों के किसी भी अगले आदेश का इंतजार किए बिना फौरन उनकी देखभाल की जाए।

बता दें कि कोरोना संक्रमण की दूसरी लहर देश में बेहद घातक साबित हो रही है। इसकी वजह से भारत में कठिन परिस्थितियाँ उत्पन्न हो गई हैं। रोज लाखों मामले सामने तो आए ही, अब तक तीन लाख से अधिक लोगों की जान भी जा चुकी है। कोरोना से प्रभावितों में वे बच्चे भी शामिल हैं, जिन्होंने अपने माता-पिता को खो दिया।

चीन में Covid वैक्सीनेशन सेंटर के बाहर लोगों की भारी भीड़, टीके के लिए मची अफरातफरी: देखें वीडियो

दुनियाभर में कोरोना का संक्रमण फैलाने के बाद चीन कोरोना से सफलतापूर्वक निपटने का दावा करता है। वो अपने सभी लोगों का टीकाकरण करने का दावा भी करता है। लेकिन, वहाँ के कई शहरों से सामने आ रहे वीडियो उसकी अलग ही तस्वीर पेश करते हैं। ये वीडियो चीन की साम्यवादी सरकार की हकीकत की पोल खोलते हैं। इससे इस बात का पता चलता है कि चीन में किस तरह से टीके के लिए लोगों को संघर्ष करना पड़ रहा है।

हाल ही में एक चीनी मानवाधिकार कार्यकर्ता ने ट्विटर पर एक वीडियो शेयर किया था, जिसमें चीन के जियांग्शी प्रान्त के जिक्सियन काउंटी स्थित वैक्सीनेशन सेंटर के बाहर सैंकड़ों की संख्या में लोगों की भीड़ दिखाई दे रही है। उसमें देखा जा सकता है कि लोग किस कदर वैक्सीन के लिए एक-दूसरे के साथ धक्का-मुक्की करते हुए दिखाई दे रहे हैं।

गुआंगझोउ में अस्पताल के बाहर लगी हजारों की भीड़

एक अन्य वीडियो हांगकांग के उत्तर-पश्चिम में स्थित ग्वांगझू शहर का है, जहाँ एक अस्पताल के बाहर वैक्सीन लगवाने के लिए लोगों की लंबी-लंबी कतारें दिखाई दे रही हैं। उस वीडियो को एक साइकिल चला रहे युवक ने शूट किया था, जिसमें अस्पताल से दूर कई ब्लॉकों तक हजारों लोगों की लंबी लाइन थी। यह वीडियो करीब 2:12 मिनट का था।

बताया जा रहा है कि चीन के कई शहरों में कोरोना के नए मामले तेजी से बढ़े हैं और ग्वांगझू इन्हीं शहरों में शामिल है। वहाँ लोग टीकाकरण के लिए वैक्सीनेशन सेंटर पर गए थे, जिस कारण लंबी-लंबी कतारें लग गईं। कोरोना का संक्रमण बढ़ने के बाद चीन की सरकार ने लोगों को घरों में ही रहने का आदेश जारी किया है।

दक्षिणी चीन के ग्वांगडोंग प्रान्त में सरकार ने दिशा निर्देश जारी कर लिवान जिले की पाँच गलियों में रहने वाले लोगों के घरों से बाहर निकलने पर प्रतिबंध लगा दिया गया है। दिशा निर्देश के मुताबिक, हर घर से केवल एक व्यक्ति को हर दिन जरूरत का सामान खरीदने की अनुमति है।

वीडियो में वैक्सीनेशन सेटरों के बाहर हताश लोगों की भारी भीड़ चीन के कोरोना प्रबंधन के दावों की पोल खोलते हैं। अब तो चीन में बनी कोरोना की वैक्सीन पर भी सवाल उठने लगे हैं कि ये संक्रमण से बचाने में कारगर भी है या नहीं?

सेसेल्श ने दुनियाभर में सबसे अधिक टीकाकरण किया था। बावजूद इसके हाल ही वहाँ कोरोना के संक्रमण में वृद्धि हुई है। इससे चीन द्वारा बनाए गए टीके सिनोफॉर्म की विश्वसनीयता पर सवाल उठने शुरू हो गए हैं। दरअसल, सेसल्श ने भी अपने लोगों को चीनी वैक्सीन लगवाई थी। इसके अलावा यूएई और बहरीन में सिनोफार्म की दो खुराक संक्रमण को रोकने के लिए पर्याप्त नहीं थीं, जिसके बाद ये दोनों देश अपने लोगों को तीसरी खुराक देने पर विचार कर रहे हैं।

छत्तीसगढ़ की कॉन्ग्रेस सरकार ने वेतन में की ₹20000 की कटौती: कोरोना के दौर में 800 डॉक्टर दे सकते हैं इस्तीफा

छत्तीसगढ़ में कॉन्ग्रेस सरकार द्वारा वेतनमान घटाने के फैसले के बाद अब लगभग 800 बॉण्डेड डॉक्टर इस्तीफा देने पर विचार कर रहे हैं। हाल ही में छत्तीसगढ़ की भूपेश बघेल सरकार द्वारा अनुबंधित संविदा चिकित्सकों (बॉण्डेड डॉक्टर) का वेतनमान 75,000 रुपए से घटाकर 55,000 रुपए कर दिया गया। इसके बाद ही राज्य के लगभग 800 बॉण्डेड डॉक्टर सरकार से नाराज हैं और उन्होंने सामूहिक इस्तीफे की धमकी दी है।

दैनिक भास्कर की रिपोर्ट के अनुसार रायपुर के अंबेडकर अस्पताल में काम कर रहे बॉण्डेड डॉक्टरों ने बताया कि कुछ महीनों पहले किए गए आंदोलन के कारण उनका वेतनमान संविदा चिकित्सकों के बराबर किया गया लेकिन अब सरकारी आदेश के बाद बॉण्डेड डॉक्टरों का वेतनमान 75,000 रुपए से घटाकर 55,000 रुपए कर दिया गया है। इन बॉण्डेड डॉक्टरों का कहना है कि उन्हें संविदा चिकित्सक नहीं माना जा रहा है। इन डॉक्टरों ने बताया कि प्रदेश के कुल 800 ऐसे डॉक्टर हैं जो वेतनमान घटाने का आदेश वापस न लेने पर इस्तीफा दे सकते हैं।

वहीं छत्तीसगढ़ की भाजपा इकाई ने ट्वीट करके राज्य की कॉन्ग्रेस सरकार और मुख्यमंत्री भूपेश बघेल पर निशाना साधा है। छत्तीसगढ़ भाजपा ने ट्वीट करके कहा कि जहाँ एक ओर दूसरे राज्य में सरकारें डॉक्टरों को प्रोत्साहित करने का काम कर रही हैं, वहीं प्रदेश में कॉन्ग्रेस की भूपेश बघेल सरकार डॉक्टरों का मनोबल गिरा रही है।

अंबेडकर अस्पताल में पदस्थ डॉ. पुष्पेंद्र ने दैनिक भास्कर को बताया कि जब भी एमसीआई का निरीक्षण होता है तब बॉण्डेड डॉक्टरों को संविदा डॉक्टर बताकर मान्यता प्राप्त कर ली जाती है। कोविड वार्ड में ड्यूटी कर रहे डॉक्टर ने बताया कि लगातार बिना छुट्टी के ड्यूटी करने के कारण कई बार डॉक्टरों को समस्याओं का भी सामना करना पड़ा। साथ ही आंदोलन करने के बाद उन्हें सरकार की तरफ से अच्छी गुणवत्ता वाले पीपीई किट, ग्लव्स और मास्क मिल पाए।

हालाँकि, यह पहली बार नहीं है जब कोरोना वायरस संक्रमण के समय छत्तीसगढ़ की कॉन्ग्रेस सरकार पर लापरवाही के आरोप लगे हों। हाल ही में केन्द्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय ने टीकाकरण कार्यक्रम की रिव्यू मीटिंग में यह बताया था कि छत्तीसगढ़ और झारखंड में Covid-19 के टीके की बर्बादी की दर लगभग 30% है। झारखंड में जहाँ यह दर 37.3% है वहीं कॉन्ग्रेस शासित छत्तीसगढ़ में यह 30.2% है। इसका मतलब यह हुआ कि छत्तीसगढ़ में तीन में से एक वैक्सीन का डोज बर्बाद हो रहा है। हालाँकि दोनों ही राज्यों की सरकारों ने स्वास्थ्य मंत्रालय के आँकड़ों को नकार दिया।    

शाहरुख़ आपना फिलिम में बोला… दील से चाहो तो सारा कायोनात तुम्हारा

हर सयाना पाउलो कोएल्हो टाइप नहीं सोचता कि शाहरुखी अंदाज़ में दोनों हाथों को बाज के पंख की तरह फैलाए और बाईं तरफ लचक कर कहे; कहते हैं अगर किसी चीज को दिल से चाहो तो पूरी कायनात उसे तुमसे मिलाने की कोशिश में लग जाती है। हर सयाना अमिताभ बच्चन की तरह भी नहीं सोचता जो कहे कि; पूजनीय बाबूजी कहा करते थे कि अपने मन का हो तो अच्छा और यदि अपने मन का न हो तो और अच्छा क्योंकि तब ईश्वर के मन का हो रहा होता है। हर सयाना राहुल गाँधी की तरह भी नहीं होता कि बात-बात पर दर्शन बउके। वो संजय झा की तरह भी नहीं होता कि दार्शनिक दिखने के सुख के चक्कर में अपनी बालसुलभ बातों से राजनीतिक दर्शन का निर्माण कर ले।

अधिकतर भारतीय सयाने अपने साथ में ऐसा कॉमन सेंस रखते हैं जो दर्शन वगैरह पर भारी पड़ता है। ये वीर कॉमन सेंस पर दर्शन को तभी हावी होने देते हैं जब मौज लेना चाहते हैं। दरअसल दर्शन की बात को वे या तो मंदिर से जोड़कर देखते हैं या फिर चाय-पान की दुकान से जोड़ कर। इनका मानना है कि भारत का तीन चौथाई दर्शन मंदिरों में है और बाकी का चाय-पान की दुकान पर और इन स्थलों पर मिलने वाला दर्शन विशुद्ध और पूर्ण होता है। ऐसे में अगर कोई यह क्लेम करे कि दर्शन केवल किताबों में मिलता है तो पक्की बात है कि वह कुछ बेचने की कोशिश कर रहा है।

इन सयानों का विश्वास देसी घी और देसी कॉमन सेंस में होता है। ये कभी दर्शन ठेलने पर उतरे भी हैं तो सीधा एक ही बात कहते हैं; अपना चाहा कहाँ होता है? 

और मेरा विश्वास है कि ये सही कहते हैं। अपना चाहा कभी नहीं होता। मुझे तो लगता है कि मेरे कुछ चाहने पर पाउलो कोएल्हो वाली कायनात यह सोचते हुए ओवरटाइम करने लगती है कि; इसका चाहा नहीं होने देना है। कभी-कभी तो लगता है जैसे कायनात ने अपने मुनीम को ऑर्डर दे रखा है कि; इसकी चाहतों का एक एक्सेल शीट बनाकर रोज शाम मुझे मेल कर दिया करो। उसे पढ़कर मुझे इंस्योर करना है कि; इसकी चाहतों में से कुछ भी न होने पाए। ऐसा करने के लिए मुझे ऊपर से ऑर्डर है। 

यह सच है। ताज़ा चाहतों को ही ले लें। मैं चाहता था लॉकडाउन ख़त्म हो जाए तो सरकार ने पंद्रह दिनों के लिए लॉक डाउन बढ़ा दिया। मैं चाहता था सरकार ट्विटर पर बैन लगाए तो उसने केवल चेतावनी देकर छोड़ दिया। मैं चाहता था कि चेतन भगत विदेशी वैक्सीन के प्रमोशन में खुद को आइडियावान तार्किक बुद्धिजीवी बनाकर पेश न करें तो उन्होंने अपने तर्कों की मात्रा पैंतालीस प्रतिशत तक बढ़ा दी। मैं चाहता था कि राइट विंगर के वीर इकोसिस्टम को लेकर चिंता कम करें तो उसे लेकर चिंतित रहने वालों की संख्या चौसठ प्रतिशत तक बढ़ गई। मैं चाहता था कि आशुतोष अपने विश्लेषणों में महात्मा गाँधी को न लाएँ तो वे महात्मा के साथ-साथ सुभाष चंद्र बोस को भी लाने लगे। मैं चाहता था कि केजरीवाल हर पाँच किलोमीटर पर यू-टर्न लेना बंद कर दें तो उन्होंने हर एक किलोमीटर पर लेना शुरू कर दिया। 

मने कुल मिलाकर कायनात ओवरटाइम करते हुए मेरी चाहतों को धराशायी करने में लगी हुई है।

फिर एक समय मुझे लगा कि जाने दो। आखिर ऐसा केवल मेरे साथ थोड़े हो रहा है। और लोगों के साथ भी ऐसा ही हो रहा है। देश चाहता था कि कोरोना से राहत मिले तो उसकी दूसरी लहर आ गई। भाजपा चाहती थी कि बंगाल में उसकी सरकार बने तो ममता की बन गई। राहुल गाँधी चाहते थे कि मोदी और उनकी सरकार को बदनाम करने का उनका टूलकिटी प्रोग्राम चलता रहे तो टूलकिट ही लीक हो गया। सोनिया गाँधी चाहती हैं कि राहुल गाँधी प्रधानमंत्री बन जाएँ तो वे अपनी पार्टी का अध्यक्ष बनने से भी मना कर देते हैं। समर्थक चाहते हैं कि मोदी जी बंगाल में राष्ट्रपति शासन लगा दें तो वे वहाँ तूफान से नुकसान का जायजा लेने चले जाते हैं। केजरीवाल चाहते हैं कि उन्हें और ऑक्सीजन मिलता रहे तो सुप्रीम कोर्ट ऑक्सीजन ऑडिट करवा देता है। 

स्वामी चाहते हैं कि मोदी उनकी बात सुने तो वे ध्यान नहीं देते। ट्विटर चाहता था कि सरकार उससे डर जाए तो सरकार ने लताड़ दिया। जनता चाहती है कि पत्रकार केजरीवाल से सवाल पूछें तो पत्रकार उनकी और बड़ाई करने लगे। सचिन वझे चाहते थे कि उनका साम्राज्य चलता रहे तो वो धराशायी हो लिया। अनिल देशमुख चाहते थे कि हर महीने सौ करोड़ कमाएँ तो उन्हें पद से इस्तीफ़ा देना पड़ गया। राज्य सरकारें चाहती थीं कि खुद वैक्सीन खरीद लें तो उन्हें वैक्सीन नहीं मिली। बंगाल के अफसर चाहते थे कि उनके इलाके में तूफान आ जाए तो तूफ़ान वाया झारखंड, बिहार जा पहुँचा। IMA चाहता था कि रामदेव उससे माफ़ी माँगें तो उन्होंने सवाल खड़े कर दिए। IMA चाहता था कि सरकार उन्हें अरेस्ट कर ले, उन्होंने कह दिया; किसी का बाप भी अरेस्ट नहीं कर सकता।

मने पाउलो कोएल्हो वाली वही कायनात औरों के खिलाफ भी काम कर रही है।

इसी सप्ताह केआरके की चाहत के साथ भी ऐसा ही हुआ। वे चाहते थे कि उनके फैंस की तरह ही सलमान उन्हें फिल्म क्रिटिक समझें तो सलमान ने उन्हें अवांछित तत्व समझ लिया। वे चाहते थे सलमान खान एक्टिंग करें तो सलमान ने उन पर मुकदमा कर दिया। शायद यह सोचते हुए कि; तू चाहने वाला कौन है कि मैं एक्टिंग करूँ? या शायद यह सोचते हुए कि एक्टिंग भी कोई करने की चीज है? जब करने के लिए पीआर है, चैरिटी है, लॉबिंग है, मुकदमा है तो कोई एक्टिंग क्यों करे? 

अच्छा, ऐसा ही सलमान खान के साथ भी हुआ। वे चाहते हैं कि केआरके भी उन्हें यंग हीरो कहें तो केआरके उन्हें दद्दू कहते हैं। वे चाहते थे उनकी मूवी राधे को हिट समझा जाए तो लोग उसे फ्लॉप समझ लेते हैं। वे चाहते हैं लोग उनकी मूवीज को आर्ट वर्क समझें तो लोग उन्हें कचरा समझ लेते हैं। वे चाहते थे कि उनके समर्थन में आकर कोई राधे को अच्छी फिल्म बताए तो उनके अब्बा ने कहा कि; राधे इज नॉट अ ग्रेट मूवी। यह अलग बात है कि उनकी बात सुनकर तमाम लोग यह सोचते हुए अपना सिर खुजलाने लगे कि कहीं इनके कहने का मतलब यह तो नहीं कि राधे को छोड़कर सलमान की बाकी मूवीज ग्रेट हैं? 

मने आम आदमी हो, नेता हो या अभिनेता, कायनात ने सबको रगड़ कर रखा है। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी यही हाल है। हमास चाहता था कि इजराइल उसके रॉकेट से डर जाए तो इजराइल ने धुनक कर धर दिया। इमरान खान चाहते थे कि चीन से लोन मिल जाए तो चीन ने सिक्यूरिटी माँग लिया। चीन चाहता था कि बांग्लादेश क्वैड में न जाए तो बांग्लादेश ने उसे रगड़ दिया। बिल गेट्स चाहते थे कि उनके एक्स्ट्रा मैरिटल अफेयर्स छिपे रहें, उनकी इन्क्वाइरी हो गई। डॉक्टर फॉची चाहते थे कि उनकी इज़्ज़त पहले जैसी बची रहे तो वो बेइज़्ज़त हो रहे हैं। WHO चाहता है कि लोग उसे गंभीरता से लें तो लोग दुत्कार देते हैं। चीन चाहता है उसकी वैक्सीन की भी पूछ हो तो उसे कोई पूछता नहीं।

इतने सब के बीच केवल ममता बनर्जी हैं, जिनके केस में इसका उल्टा हुआ है। ऐसे में वे मेरी ये बातें सुन लें तो बोलेंगी; आरे तूमको कूछ नेही पता है। ऐसा नेही होता है। हामको देखो, हाम चाहता था पोश्चिम बोंगो का सीएम बनना अउर बन भी गया। जानता है क्यों? काहे कि हमारा साथ शाहरुख है। हमारा सोरकार का एम्बेसेडर। आरे ओही शाहरुख़ जो आपना फिलिम में बोला था कि; कहते है आगर कोई चीज को दील से चाहो तो सारा कायोनात उसको तुम्हारा साथ मिलाने का पूरा चेष्टा में लाग जाता है।

आर सुनो, इये पाउलो टाउलो का बात नेही है, इये शाहरुख़ का बात है।

बंगाल में चुनाव बाद हुई हिंसा पर पैनल ने सौंपी रिपोर्ट, कहा- महिलाओं पर भी हुआ जघन्य हमला

पश्चिम बंगाल में विधानसभा चुनाव के बाद हुई विभिन्न प्रकार की हिंसा की घटनाओं की जाँच के लिए केंद्र सरकार की ओर से बनाई गई चार सदस्यीय कमेटी ने शनिवार (मई 29, 2021) को अपनी रिपोर्ट सौंप दी है। सरकारी बयान के मुताबिक तथ्य उजागर करने वाली इस रिपोर्ट को शनिवार को केंद्रीय गृह राज्य मंत्री जी किशन रेड्डी के समक्ष प्रस्तुत किया गया।

सुप्रीम कोर्ट की अधिवक्ता मोनिका अरोड़ा के नेतृत्व वाले एक बुद्धिजीवियों और शिक्षकों के एक प्रतिनिधिमंडल ने तथ्यों को उजागर करने वाली रिपोर्ट ‘2021 में बंगाल में खेला’ नामक शीर्षक की अपनी रिपोर्ट को केंद्रीय गृह राज्य मंत्री को सौंपा। केंद्रीय गृह मंत्रालय ने बंगाल चुनाव के बाद हुई हिंसा को लेकर इस महीने की शुरुआत में राज्य सरकार से रिपोर्ट माँगी थी।

हिंसा का कारण जानने के लिए बनाई गई थी टीम

गृह मंत्रालय की इस चार सदस्यीय टीम को चुनाव के बाद हुई हिंसा के कारण जानने का काम सौंपा गया था। केंद्र ने राज्यपाल जगदीप धनखड़ से बंगाल की कानून-व्यवस्था की स्थिति को लेकर राज्य में 2 मई को आए चुनाव नतीजों को लेकर भड़की हिंसा को लेकर रिपोर्ट माँगी थी।

भारतीय जनता पार्टी का दावा है कि कई घटनाओं में उसके 6 कार्यकर्ताओं की जान गई है। भाजपा ने आरोप लगाया था कि टीएमसी समर्थक गुंडों ने उसके कई कार्यकर्ताओं की हत्या कर दी और महिला कार्यकर्ताओं पर हमला किया, घरों में तोड़-फोड़ की और दुकानों को लूटा।

हालाँकि, इन आरोपों को दरकिनार करते हुए ममता बनर्जी ने आरोप लगाया कि ऐसी हिंसा की घटनाएँ उन्हीं इलाकों में हुई, जहाँ पर भाजपा के कार्यकर्ताओं ने विधानसभा चुनावों में भारी मतों से जीत हासिल की है। मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने कहा था कि चुनाव के बाद हुई हिंसा में उनके 16 कार्यकर्ताओं की मौत हुई है। टीम ने दक्षिण 24 परगना और उत्तर 24 परगना जिलों का दौरा किया और मारे गए लोगों के परिवारों और आस-पास के लोगों से बातचीत की।

गौरतलब है कि पश्चिम बंगाल में 2 मई 2021 को चुनावी नतीजों में तृणमूल कॉन्ग्रेस (TMC) की जीत सुनिश्चित होने के बाद हिंसा भड़क उठी थी। विपक्ष खास कर बीजेपी समर्थक इस दौरान निशाने पर थे। बीजेपी से जुड़े जिन लोगों की हत्या की गई उनमें अभिजीत सरकार और हारन अधिकारी भी शामिल थे। हिंसा की सीबीआई जाँच या विशेष जाँच दल (SIT) के गठन को लेकर इनके परिजनों की ओर से दाखिल याचिका पर सुनवाई करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने बंगाल सरकार को नोटिस जारी किया था।

राज्य में कई जगहों पर हुई राजनीतिक हिंसा के बाद 146 सेवानिवृत्त अधिकारियों ने राष्ट्रपति राम नाथ कोविंद को पत्र लिखकर मामले में SIT गठित करने की माँग की थी। साथ ही राज्य में हुई इस व्यापक राजनीतिक हिंसा के मद्देनजर 2093 महिला वकीलों ने भी भारत के मुख्य न्यायाधीश एन वी रमन्ना को पत्र लिखकर मामले में संज्ञान लेने की अपील की थी।

ऑक्सीजन कंसेन्ट्रेटर कालाबाजारी मामले में गिरफ्तार ‘खान चाचा’ नवनीत कालरा को कोर्ट ने दी जमानत

कोरोना वायरस के कहर के बीच दिल्ली में ऑक्सीजन की कालाबाजारी करने के आरोपित बिजनेसमैन नवनीत कालरा को दिल्ली की अदालत ने शनिवार (29 मई 2021) को एक लाख रुपए के दो निजी मुचलके पर जमानत दे दी।

यह फैसला साकेत जिला कोर्ट के जस्टिस अरुण कुमार गर्ग ने कालरा और अभियोजन पक्ष के वकील की दलीलों को सुनने के बाद दिया है।

हालाँकि, सुनवाई के दौरान कालरा की जमानत अर्जी का विरोध करते हुए अतिरिक्त लोक अभियोजक अतुल श्रीवास्तव ने कहा कि कालरा गंभीर हालातों में लोगों को धोखा देकर लाभ कमाना चाहते थे।

उन्होंने कहा कि यह यह अभियोजन पक्ष का मामला था। कालरा ने दूसरे आरोपितों के साथ मिलकर महामारी के बीच ऑक्सीजन कंसेन्ट्रेटर को अधिक मूल्य पर बेचने की साजिश रची थी।

श्रीवास्तव ने तर्क दिया, “नवनीत कालरा एक ऑप्टिशियन है, लेकिन वह मेडिकल डिवाइसेस बेच रहा था। जबकि, इसकी उन्होंने कभी अनुमति तक नहीं ली थी। यह खान चाचा रेस्टोरेंट में चल रहा था, जहाँ कोई भी सावधानी नहीं बरती गई। यहाँ किसी भी तरह से गुणवत्ता पर नियंत्रण नहीं था। यह धोखा है। इन परिस्थितियों में नवनीत कालरा का इरादा केवल धोखा देकर लाभ अर्जित करना था।”

सुनवाई के दौरान अभियोजन पक्ष के वकील श्रीवास्तव ने ऑक्सीजन कंसेन्ट्रेटर की जाँच की एक रिपोर्ट भी पेश की, जिसमें मशीनों को खराब बताया गया था। उन्होने कहा कि इसके इस्तेमाल से फायदे की जगह लोगों को नुकसान हो सकता था।

अदालत में सुनवाई के दौरान दावा कि खुद केंद्र सरकार ने हाई कोर्ट में एक्सेप्ट किया था कि ऑक्सीजन कंसेन्ट्रेटर की कीमतें अन कंट्रोल्ड थीं। ऐसे में नवनीत कालरा पर जमाखोरी का मामला नहीं बनता है।

गौरतलब है कि इससे पहले दिल्ली में ‘खान चाचा’ रेस्टोरेंट समेत नवनीत कालरा के 3 होटलों से दिल्ली पुलिस ने 524 ऑक्सीजन कंसेन्ट्रेटर बरामद किया था। इसके बाद पुलिस ने नवनीत कालरा को गिरफ्तार कर लिया था।

HANU-MAN: तेलुगु सिनेमा की पहली सुपरहीरो फिल्म, 1 मिनट 18 सेकंड का टीजर मन मोह लेगा

जब इंडियन सुपरहीरो की बात आती है तो सबसे पहले हमारे ध्यान में ‘हनुमान’ जी का ही नाम आता है। अब इसी नाम से तेलुगु सिनेंमा में भी पहली सुपरहीरो फिल्म बनने जा रही है। टाइटल है- ‘HANU-MAN’

साउथ इंडियन डायरेक्टर प्रशांत वर्मा ने अपने जन्मदिन पर फिल्म के टाइटल पर टीजर अनाउंस किया है। टीजर में अलग-अलग बर्फीले पहाड़ों को देखा जा सकता है। टीजर के अंत में फिल्म का टाइटल अनाउंस किया गया। साथ ही इस महामारी में रीयल सुपरहीरो को ये टीजर डेडीकेट किया गया। आपको बता दें कि फिल्म के स्टार कास्ट ही घोषणा अभी नहीं की गई है लेकिन जल्द ही की जाएगी।

बात करें प्रशांत वर्मा की तो उन्होंने अपने करियर की शुरुआत फिल्म कल्कि और Zombie Reddy के डायरेक्शन से की है।  अब वो सुपरहीरो HANU-MAN को डायरेक्ट करने जा रहे हैं।

हनु-मान एक सुपरहीरो फिल्म है। प्रशांत वर्मा ने मोशन पोस्टर के जरिए टाइटल शीर्षक और लोगो (Logo) का खुलासा किया है। जैसा कि नाम से पता चलता है, हनु-मान कथित तौर पर पौराणिक कथाओं से प्रेरित है।

शीर्षक और लोगो को साझा करते हुए, प्रशांत वर्मा ने लिखा, “इस बार मैं अपनी पसंदीदा शैली के साथ आ रहा हूँ!! एक नए सिनेमाई ब्रह्मांड में गोता लगाने के लिए अपनी सीट बेल्ट बाँधें! ‘हनु-मान’ तेलुगु में पहली ओरिजिनल सुपरहीरो फिल्म।”

हनु-मान क्या है?

निर्देशक प्रशांत वर्मा ने फिल्म के शीर्षक की घोषणा करते हुए कहा कि यह एक नए सिनेमाई ब्रह्मांड की शुरुआत है, जो कई फिल्मों की ओर इशारा कर रहा है। मोशन पोस्टर हमें हिमालय की एक झलक देते हैं, जो काफी सुंदर है। उसे शब्दों में पिरोना संभव नहीं है। हनु-मान की कास्ट और क्रू का खुलासा होना बाकी है। प्रशांत ने घोषणा की कि यह फिल्म उन सभी सुपरहीरो (डॉक्टरों, नर्सों और स्वास्थ्य कर्मियों) को समर्पित है, जो फ्रंटलाइन पर कोविड-19 महामारी से लड़ रहे हैं।

कैमरा ऑन था और सांसद पेशाब कर रहे थे: जस्टिन ट्रुडो की पार्टी के ये जनाब पहले भी वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग में हुए थे नंगे

कनाडा के प्रधानमंत्री जस्टिन ट्रुडो की लिबरल पार्टी के एक सांसद जूम पर वर्चुअल मीटिंग के दौरान पेशाब करते हुए कैमरे में कैद हो गए। जिस वक्त ये शर्मनाक वाकया हुआ, उस दौरान सभी सदस्य अपने-अपने विचार रख रहे थे।

इस घटना के बाद सांसद विलियम अमोस (45 साल) ने गुरुवार (27 मई, 2021) को ट्विटर पर पोस्ट किए गए एक माफीनामे में लिखा, “पिछली रात हाउस ऑफ कॉमन्स की कार्यवाही में भाग लेने के दौरान, नॉन पब्लिक सेटिंग कर मैं पेशाब कर रहा था। उस दौरान मुझे यह महसूस नहीं हुआ कि मैं ऑन कैमरे पर था। मैं अपने कार्यों से बहुत शर्मिंदा हूँ, जिसके कारण वह असहज स्थिति बनी थी।”

कनाडाई सांसद ने एक ब्रेक लेने की घोषणा करते हुए कहा कि दोनों घटनाएँ अनजाने में हुई थीं, जिसकी वजह से वो काफी घबरा गए थे।

सांसद ने ट्विटर पर पोस्ट किए गए माफीनामे में लिखा, ”मुझे लगा कि मेरा कैमरा बंद है, लेकिन बाद में मुझे अपनी गलती का पता चला। यह पूरी तरह से अस्वीकार्य था। मैं अपनी इस करतूत के लिए शर्मिंदा हूँ। जो कुछ भी हुआ, उस पर मैं बेहद शर्मिंदगी महसूस कर रहा हूँ। इसके लिए मैं बिना शर्त माफी माँगता हूँ। मैं अस्थायी रूप से संसदीय सचिव के रूप में अपनी भूमिका से और अपने समिति के कर्तव्यों से अलग हो जाऊँगा, ताकि मैं सहायता माँग सकूँ।” हालाँकि सांसद ने ये स्पष्ट नहीं किया है कि वो किस तरह की सहायता चाहते हैं।

लिबरल पार्टी के सांसद ने आगे कहा कि वो अपने संसदीय क्षेत्र का प्रतिनिधित्व करते रहेंगे। उन्होंने कहा, “मैं संसद में अपने लोगों की आवाज बनने के लिए उनका आभारी हूँ। मैं अपने स्टाफ के समर्थन और अपने परिवार के प्यार के लिए बहुत आभारी हूँ।”

गौरतलब है कि ये कोई पहली बार नहीं है जब लिबरल पार्टी के सांसद ने ऐसा किया हो। पिछले महीने अप्रैल, 2021 में भी वो वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के दौरान न्यूड हो गए थे। इसका एक स्क्रीनशॉट सोशल मीडिया पर लीक होने के बाद लोगों का ध्यान अपनी ओर खींचा था।

पिछले महीने वर्चुअल कॉन्फ्रेंस में नग्न दिखने के बाद उन्होंने ट्वीट कर माफी माँगते हुए लिखा था, “मैंने आज वास्तव में एक दुर्भाग्यपूर्ण गलती की और जाहिर है कि मैं इससे शर्मिंदा हूँ। जॉगिंग करने के बाद जब मैं अपने कपड़े बदल रहा था, तो मेरा कैमरा गलती से चालू हो गया था। मैं सदन में अपने सभी सहयोगियों से तहे दिल से माफी माँगता हूँ। ऐसा दोबारा नहीं होगा।”

‘मेरे आगे कैटरीना कैफ लगेगी बुजुर्ग’: SRK की रेड चिलीज से कार्तिक आर्यन ने बनाई दूरी, स्क्रिप्ट और कास्टिंग से थे नाखुश

धर्मा प्रोडक्शन्स की ‘दोस्ताना’ फिल्म से बाहर होने के बाद बॉलीवुड कलाकार कार्तिक आर्यन ने अब शाहरुख खान के प्रोडक्शन हाउस रेड चिलीज से भी दूरी बना ली है। इस संबंध में अभी न ही रेड चिलीज ने कोई बयान दिया है और न ही कार्तिक ने लेकिन मीडिया में इस मामले पर कई खबर हैं। ये फिल्म अगले महीने शुरू होने वाली थी।

टाइम्स ऑफ इंडिया की रिपोर्ट कहती है कि कार्तिक आर्यन को फिल्म डायरेक्टर अजय बहल से आइडियाज को लेकर मसले थे। वह फिल्म की स्क्रिप्ट को लेकर खुश नहीं थे। रिपोर्ट के अनुसार, ये सब पिछले 15 दिनों में हुआ। कार्तिक ने अपनी दिक्कत बहल को बताई। इसके अलावा उन्हें फिल्म में कैटरीना कैफ को कास्ट करने को लेकर भी समस्या थी। उनका कहना था कि फिल्म एक लव स्टोरी है और फिल्म में कैटरीना कैफ उनके आगे बुजुर्ग (बड़ी) लगेंगी ।

गौरतलब है कि इससे पहले दोस्ताना फिल्म में कार्तिक आर्यन को क्रिएटिव इशूज होने के कारण धर्मा प्रोडक्शन्स ने उन्हें हमेशा के लिए बैन किया था। डीएनए के अनुसार, धर्मा प्रोडक्शन के एक करीबी सूत्र ने उन्हें बताया, “कार्तिक आर्यन को डेढ़ साल बाद ये बात समझ आई कि ‘दोस्ताना 2’ की स्क्रिप्ट में कोई खामी है और वो उसमें बदलाव चाहते हैं। कार्तिक के बर्ताव के मद्देनजर अब धर्मा प्रोडक्शन ने उनके साथ आगे कभी भी काम नहीं करने का फैसला किया है। इससे पहले 2019 में कार्तिक ने इसी स्क्रिप्ट पर फिल्म की 20 दिन की शूटिंग पूरी की थी।”

सूत्र ने बताया कि फिल्म की तारीखों को लेकर एक्टर स्पष्ट नहीं रहते थे, इस वजह से भी उन्हें बाहर का रास्ता दिखाया गया। सूत्र के अनुसार “धर्मा प्रोडक्शन के इतिहास में ऐसा कभी नहीं हुआ था कि एक अभिनेता कुछ दिन तक फिल्म में काम करने के बाद उसे छोड़कर चला जाए। यही कारण है कि प्रोडक्शन हाउस ने भविष्य में कार्तिक के साथ किसी भी प्रोजेक्ट पर काम नहीं करने का निर्णय लिया है।”