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बूचड़खानों (कानूनी) में गायों के कटने से दिक्कत नहीं, आपके दूध और पनीर से है: PETA का नया पशु ‘प्रेम’

हिपोक्रेसी का पर्याय बन चुकी संस्था पीपुल फॉर द एथिकल ट्रीटमेंट ऑफ एनिमल्स (PETA) एक बार फिर से विवादों में है। इस बार इस संस्था ने AMUL से पंगा लिया और उम्मीद के मुताबिक मुँह की खानी पड़ी। PETA ने अमूल को पत्र लिख कर vegan Milk के उत्पादन के लिए कहा था, लेकिन अमूल ने ऐसा जवाब दिया है कि PETA की बोलती ही बंद हो गई।

हालाँकि, बाद में पेटा ने इस पर अपनी सफाई दिया, जिसका लब्बोलुआब यह था कि हम गाय का दूध पीते हैं, इसलिए होती है गौ-हत्या… डेयरी से बूचड़खानों में सप्लाई होती है गाय। दरअसल, पेटा इंडिया ने 26 मई को कहा था, “अमूल अपने उत्पादों के उत्पादन के लिए ‘शाकाहारी दूध (vegan Milk ) बनाना शुरू कर सकता है।” एनजीओ ने दावा किया था कि भारतीय किसानों को शाकाहारी भोजन से काफी फायदा होगा।

अमूल के मैनेजिंग डायरेक्टर यह भी कहा, “पेटा चाहती है कि अमूल 100 मिलियन गरीब किसानों की आजीविका छीन ले और 75 वर्षों में किसानों के पैसे से बनाए गए सभी संसाधनों को genetically modified Soya के लिए अपने मार्केट को MNCs के हवाले कर दे, जो अपने उत्पादों को अत्यधिक कीमतों में बेचते हैं जिसे औसत निम्न मध्यम वर्ग बर्दाश्त नहीं कर सकता।”

गाय-बछड़ा प्रेम दिखाने वाले पेटा को कानूनी बूचड़खानों में गायों के कटने से कोई दिक्कत नहीं है। वो सिर्फ गैर-कानूनी बूचड़खानों के बंद करने की बात कर रहा है। पेटा इंडिया की विज्ञप्ति में मोटे आकलन के हवाले से कहा गया कि देश में अवैध या गैर लाइसेंसी बूचड़खानों की संख्या 30,000 से ज्यादा है। हालाँकि, कई लाइसेंसधारी बूचड़खानों में भी पशुओं को बेहद क्रूरतापूर्वक जान से मारा जाता है।

पेटा इंडिया ने सभी राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों से अनुरोध किया कि वे ऐसी पशुवधशालाओं को बंद कराएँ जिनके पास उपयुक्त प्राधिकरणों के लायसेंस नहीं हैं और जो कानून द्वारा निषिद्ध तरीकों का इस्तेमाल करती हैं।

पेटा ने सिर्फ अवैध या गैर लाइसेंसी बूचड़खानों में होने वाली पशुओं की हत्या पर तथाकथित दुख जताया है। लाइसेंसधारी बूचड़खानों में होने वाली हत्या से उसे कोई परहेज नहीं है। वास्तविकता यह है कि हमारे देश की अर्थव्यवस्था का आधार रहा है पशुपालन और कृषि। देश की तकरीबन 70% आबादी कृषि और पशुपालन पर निर्भर है। वास्तव में ये संस्था देश में जारी डेयरी फार्म की छवि खराब कर vegan Milk  जैसी बनावटी चीजों को बढ़ावा देना चाहती है।

PETA का मानना है कि दूध के व्यवसाय में जानवरों के साथ क्रूर व्यवहार किया जाता है, लेकिन शायद PETA नहीं जानता कि भारत में सदियों से पशु पालन होता आया है और यहाँ के किसान पशु-प्रेमी होते हैं, उन पर क्रूरता करने वाले नहीं। यहाँ एक बात और समझ में नहीं आती कि गौरक्षा के नाम पर हिंसा करने का आरोप भी हम पर लगता है और गायों के साथ क्रूरता करने के आरोपित भी हम ही हैं? 

ऐसे में सवाल यह भी उठता है कि PETA ने दावा किया था कि भारतीय किसानों को शाकाहारी भोजन से काफी फायदा होगा, पर कैसे? वैसे बेहतर यही होगा ये संस्था अपने मूल उद्देश्यों पर फोकस करें जो खुद जानवरों को बचाने के नाम पर उनकी हत्या कर देती है। यह वास्तविकता भी है, PETA एक विवादित संस्था है जो अपने फायदे के लिए किसी भी तरह के प्रोपेगेंडे को बढ़ावा देती है। 

आपको जानकर हैरानी होगी कि इस संस्था पर अमेरिका में मासूम जानवरों की जान लेने के आरोप लगते रहे हैं। यह भी स्पष्ट हो चुका है कि यह संस्था पशुओं को बचाने के नाम पर खुद इन पशुओं की हत्या कर देती है। वर्जीनिया डिपार्टमेंट ऑफ एग्रीकल्चर एंड कंज्यूमर सर्विसेज (VDACS) की रिपोर्ट के मुताबिक PETA ने साल 2019 में 1,593 कुत्तों, बिल्लियों और अन्य पालतू जानवरों को मार दिया था। वहीं 2018 में 1771 जानवरों की हत्या कर दी गई। इसी तरह 2017 में 1809, 2016 में 1411 और 2015 में 1456 जानवरों को मार दिया गया। रिपोर्ट के अनुसार 1998 से लेकर 2019 तक PETA ने 41539 जानवरों की हत्या कर दी।

इस संबंध में HUFFPOST नामक एक अमेरिकी वेबसाइट पर वर्ष 2017 में एक लेख प्रकाशित हुआ था जिसमें तथ्यों के साथ यह दावा किया गया था कि PETA ना सिर्फ खुद जानवरों को मारता है, बल्कि दूसरों को भी ऐसा करने के लिए प्रेरित करता है। इसके लिए PETA पशुओं से संबन्धित क़ानूनों का दुरुपयोग करता है। इस लेख के मुताबिक PETA ने अमेरिका के वर्जीनिया में वर्ष 2014 में एक पालतू कुत्ते को बिस्किट का लालच देकर अपने पास बुलाया और उसे पकड़ लिया। 

पेटा कई बार अपने पशु-प्रेम की आड़ में हिन्दू-विरोधी एजेंडा को बढ़ावा देती आई है। वैसे तो पेटा हर धर्म के ऐसे त्योहारों पर टिप्पणी करता है, जो किसी न किसी तरीके से पशुओं के अधिकारों का हनन करते हैं, लेकिन जब बात हिन्दू धर्म के त्योहारों की आती है, तो पेटा अपनी एजेंडावादी मानसिकता के चलते ऐसे मामलों में कुछ ज़्यादा ही दिलचस्पी दिखाता है।

जानवरों की रक्षा के आड़ में PETA इंडिया ने कई बार हिन्दू त्योहारों पर निशाना साधा है। ईद जैसे इस्लामिक त्योहारों पर, कटने वाले बकरों को लेकर PETA इंडिया की न सिर्फ ज़ुबान सिल जाती है, बल्कि हिन्दुओं को शाकाहारी बनने की शिक्षा देने वाला PETA समुदाय विशेष को जानवरों को काटने के तौर तरीके भी बताता है।

दारुल उलूम देवबंद: सुधार के लिए स्थापना… लेकिन महिलाओं की नौकरी से लेकर फोटो, इंश्योरेंस तक को बताया ‘हराम’

उत्तर प्रदेश का एक शहर है, देवबंद। जनसंख्या के लिहाज से देवबंद वैसे तो काफी छोटे शहरों में गिना जाता है लेकिन यह चर्चा में हमेशा रहता है, दारुल उलूम के लिए। मदरसा दारुल उलूम की स्थापना 30 मई 1866 को हुई थी। वैसे तो इस इस्लामिक संस्था की स्थापना का उद्देश्य मुस्लिमों (विशेषकर सुन्नी मुस्लिम) में सुधार करना था लेकिन इसकी विचारधारा अंततः कुरान और शरीयत के कड़ाई से पालन किए जाने पर आधारित हो गई। दारुल उलूम के अनुयायी इसे शुद्ध इस्लामी विचारधारा मानते हैं। दारुल उलूम देवबन्द की स्थापना हाजी आबिद हुसैन व मौलाना क़ासिम नानौतवी द्वारा की गई थी।

दारुल उलूम देवबंद से ही देवबंदी विचारधारा पूरी दुनिया भर में प्रचारित हुई। इसका उद्देश्य इस्लाम को उसके शुद्ध रूप में प्रसारित करना है। हालाँकि दारुल उलूम की देवबंदी विचारधारा को लेकर कई बार सवाल भी उठाए गए। द टाइम्स की 2007 की एक रिपोर्ट में कहा गया था कि ब्रिटेन में लगभग आधी मस्जिदें देवबंद विचारधारा के कब्जे में आ चुकी हैं।

रिपोर्ट में देवबंद के मजहबी नेता रियाद-उल-हक के बारे में बताया गया था कि हक हिंदुओं, यहूदियों और ईसाइयों के खिलाफ सशस्त्र जिहाद का समर्थक रहा है। इस रिपोर्ट में यह भी कहा गया था कि ब्रिटेन की लगभग 600 मस्जिदें उस देवबंदी विचारधारा के नियंत्रण में आ चुकी हैं, जिसके शीर्ष नेता ने अल्लाह के नाम पर रक्तपात करने का आह्वान किया था। 

दारुल उलूम देवबंद का सुधारवाद का दावा और उसके कुछ विरोधाभास

वैसे तो दारुल उलूम देवबंद मुस्लिमों के सुधार की बात करता है लेकिन जब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व वाली सरकार ने मुस्लिम महिलाओं के जीवन के सबसे बड़े श्राप ट्रिपल तलाक को खत्म करने का निर्णय लिया तो सबसे पहले दारुल उलूम ने ही इसका विरोध किया था और मोदी सरकार के इस निर्णय को मुस्लिमों के मजहबी मामलों में सरकार का हस्तक्षेप बताया था। दारुल उलूम ने कहा था कि सरकार का यह निर्णय न केवल मुस्लिम पुरुषों को निशाना बनाने के लिए लिया गया है बल्कि इसके द्वारा मुस्लिम महिलाओं के हित भी प्रभावित होंगे।

दारुल उलूम देवबंद एक ऐसे शिक्षण संस्थान के रूप में अपने आपको पेश करता है, जो उदारवादी विचारों का समर्थक है और मुस्लिमों को आधुनिक विश्व की व्यवस्थाओं के साथ तालमेल करके चलने के लिए प्रेरित करता है लेकिन इसी दारुल उलूम देवबंद ने अपने ही एक शीर्ष पदाधिकारी को सिर्फ इसलिए पद से हटा दिया था क्योंकि उसने पीएम मोदी की तारीफ की थी।

दारुल उलूम देवबंद के वाइस चांसलर रहे मौलाना गुलाम मोहम्मद वस्तानवी को संस्था की सर्वोच्च समिति मजलिसे-शूरा ने पद से हटा दिया था। यह निर्णय इसलिए लिया गया था क्योंकि वस्तानवी ने मुस्लिमों से कहा था की उन्हें 2002 के गुजरात दंगों को भूल जाना चाहिए और यह याद रखना चाहिए कि गुजरात में मुस्लिमों के साथ कोई भेदभाव नहीं हो रहा है। वस्तानवी के इस बयान के बाद देवबंद के छात्र और इस्लामिक शिक्षाविद उत्तेजित हो गए थे और वस्तानवी की बर्खास्तगी की माँग करने लगे थे।

कई बार यह प्रश्न उठा कि क्या दारुल उलूम देवबंद मात्र एक शिक्षण संस्थान है? क्योंकि देवबंदी स्कॉलर समी-उल-हक को ‘फादर ऑफ तालिबान’ कहा जाता है। और यही समी-उल-हक, दारुल उलूम हक्कानिया के दूसरे चांसलर थे।

दारुल उलूम हक्कानिया की स्थापना भी देवबंदी विचारधारा के आधार पर हुई थी। समी-उल-हक के दादा ने दारुल उलूम हक्कानिया की स्थापना की थी। हालाँकि समी-उल-हक के पिता मौलाना अब्दुल हक की शुरुआती तालीम दारुल उलूम हक्कानिया में ही हुई लेकिन अब्दुल हक ने भारत में दारुल उलूम देवबंद में ही अधिकतर इस्लाम की तालीम ली।

दारुल उलूम देवबंद के अजीबो-गरीब फतवे

इस्लामिक शिक्षा के अलावा दारुल उलूम अपने फतवों के लिए भी जाना जाता है। अक्सर ही दारुल उलूम के उलेमा फतवा देते हुए सुने जाते हैं। फरवरी 2018 में दारुल उलूम ने जीवन बीमा पॉलिसी खरीदना और अपनी संपत्तियों का बीमा करवाना इस्लाम के विरूद्ध माना था और फतवा दिया था कि ऐसी पॉलिसी खरीदना गैर-इस्लामिक है। दारुल उलूम देवबंद के उलेमाओं ने कहा था कि मनुष्य का जीवन और मृत्यु ‘अल्लाह’ के हाथ में है और इनके बारे में कोई भी बीमा कंपनी गारंटी नहीं ले सकती है।

दारुल उलूम देवबंद के वाइस चांसलर मुफ्ती अब्दुल कासिम नोमानी ने फतवा जारी करते हुए कहा था कि ‘फोटोग्राफी गैर-कानूनी और पाप’ है। नोमानी ने कहा था कि फोटोग्राफी गैर-इस्लामिक है और मुस्लिमों को अपनी फोटो नहीं खिंचवानी (जब तक कि किसी आईडी कार्ड के लिए इसकी आवश्यकता न हो) चाहिए। दारुल उलूम के इस फतवे के बाद जब यह मुद्दा उठाया गया कि सऊदी अरब में तो मक्का में भी फोटोग्राफी की अनुमति दी गई है तो नोमानी ने कहा था, “उन्हें यह करने दीजिए। हम इसकी इजाजत नहीं देते हैं। जरूरी नहीं कि जो भी वो (सऊदी अरब) करें, सब सही ही है।“

2010 में भी दारुल उलूम देवबंद अपने फतवों के बाद विवादों में आया था, जब तीन मौलवियों की बेंच ने महिलाओं के सरकारी या निजी क्षेत्रों में काम करने को ‘हराम’ कहा था। फतवा में कहा गया था कि इस्लामिक शरिया कानून के मुताबिक महिलाओं का सरकारी या निजी क्षेत्र में पुरुषों के साथ काम करना गैर-इस्लामिक और गैर-कानूनी है। फतवा में यह भी कहा गया था कि शरिया के अनुसार एक नौकरी वाली महिला को स्वीकार करना भी एक परिवार के लिए गैर-इस्लामिक है।

हालाँकि दारुल उलूम देवबंद की इस्लामिक शिक्षा मुख्य रूप से भारत, बांग्लादेश, पाकिस्तान और अफगानिस्तान में ही केंद्रित है लेकिन यह ब्रिटेन और दक्षिण अफ्रीका के कई हिस्सों में भी लोकप्रिय हो रहा है। यदि दारुल उलूम यह कहता है कि उसका उद्देश्य इस्लाम में सुधार लाना है और मुस्लिमों को बेहतर जीवन शैली की ओर प्रेरित करना है तो समय-समय पर उसके द्वारा दिए गए फतवे दारुल उलूम देवबंद के इस दावे पर प्रश्न चिन्ह खड़ा करते हैं।

भाई से ही निकाह करवा रहे थे घर वाले, इनकार किया तो परिवार ही बना काल: हत्या की छानबीन में जुटी इटली पुलिस

पाकिस्तानी मूल की एक 18 वर्षीय लड़की की हत्या की आशंका जताई जा रही है क्योंकि उसने अपने ‘कजिन’ (चचेरे भाई) से शादी करने से मना कर दिया और लड़की की हत्या के संदेह में हैं उसी के पाकिस्तानी परिवार के सदस्य। घटना इटली की है, जहाँ पुलिस अब उसकी लड़की की तलाश कर रही है।

पाकिस्तानी मूल की समन अब्बास इटली के उत्तरी शहर नोवेलारा में रहती थी। समन के परिवार के सदस्यों ने उसकी शादी पाकिस्तान में ही समन के किसी कजिन से करने का फैसला किया लेकिन समन ने इसका विरोध कर दिया था।

कैराबिनियरी (Carabibieri) पुलिस के स्टेफानो बोव ने बताया कि समन अब्बास की संभावित हत्या में उसका परिवार, उसके अंकल और दो कजिन संदेह के दायरे में हैं और ऐसी संभावना है कि इन सभी ने मिलकर गंभीर अपराध को अंजाम दिया है। बोव ने पत्रकारों को बताया कि पुलिस नहरों, कुओं और खेतों में समन की तलाश कर रही है।

मीडिया खबरों के मुताबिक समन ने पिछले साल दो बार पुलिस में अपने परिवार के सदस्यों की शिकायत की थी और समाज सेवी संगठनों की सहायता से वह नवंबर 2020 में शेल्टर होम भी चली गई थी। हालाँकि 11 अप्रैल को वह अपने घर वापस आ गई।

पुलिस 5 मई को समन के घर पहुँची लेकिन उन्हें वहाँ कोई नहीं मिला। इसके बाद पुलिस की आशंका बढ़ गई। जाँच में पता चला कि समन के परिवार के सदस्य बिना उसे अपने साथ लिए पाकिस्तान चले गए। समन अब्बास के घर के आसपास के कैमरों से ज्ञात हुआ कि 29 अप्रैल को समन के घर से 5 लोग फावड़ा, क्रोबार (एक प्रकार का वजन उठाने का औजार) और बाल्टी लेकर निकले और ढाई घंटे बाद लौटे। कैराबिनियरी पुलिस ने इन पाँचों के समन के परिवार के सदस्यों के रूप में पुष्टि की।  

कोरोना में अनाथ हुए बच्चों की ‘अभिभावक’ बनेगी योगी सरकार, ‘उत्तर प्रदेश मुख्यमंत्री बाल सेवा योजना’ की घोषणा

कोरोना वायरस के कहर के बीच हजारों लोगों को अपनी जान गँवानी पड़ी है। कई बच्चे अनाथ हुए, जिनके सामने रोजी-रोटी का संकट आ खड़ा हुआ है। ऐसे बच्चों की मदद के लिए उत्तर प्रदेश की योगी सरकार आगे आई है। सीएम योगी ने शनिवार को घोषणा की कि ‘उत्तर प्रदेश मुख्यमंत्री बाल सेवा योजना’ के तहत राज्य सरकार महामारी के कारण अनाथ बच्चों के लिए अभिभावक या केयर टेकर का काम करेगी।

मुख्यमंत्री कार्यालय ने इसको लेकर ऐलान किया है कि जिन बच्चों ने महामारी के कारण अपने माता-पिता या कानूनी अभिभावक दोनों को खो दिया है, उन्हें इस योजना में शामिल किया जाएगा।

इसके अलावा जिन बच्चों के घरों में इकलौता कमाने वाला शख्स महामारी के कारण नहीं रहा, उन्हें भी इस योजना में शामिल किया जाएगा।

योजना के अंतर्गत प्रदेश सरकार अभिभावक या केयर टेकर के जरिए हर बच्चे को 4,000 रुपए प्रति माह देगी।

सीएम ऑफिस ने जानकारी दी है कि 10 साल से कम उम्र के जिन बच्चों के अभिभावक या केयर टेकर नहीं होंगे, उन्हें भारत सरकार की सहायता से राज्य सरकार चिल्ड्रेंस होम में शरण देगी। रिपोर्ट के मुताबिक, मौजूदा वक्त में उत्तर प्रदेश में 0-10 साल के बच्चों के लिए मथुरा, लखनऊ, प्रयागराज, आगरा और रामपुर समेत पाँच राजकीय बाल गृह हैं।

इसके अलावा नाबालिग लड़कियों की देखरेख और उनकी पढ़ाई-लिखाई भारत सरकार द्वारा संचालित कस्तूरबा गाँधी स्कूलों में या राज्य सरकार द्वारा संचालित 18 अटल आवासीय विद्यालयों में से एक में की जाएगी। यहीं नहीं प्रदेश सरकार ने कोरोना के कारण अनाथ हुई लड़कियों की शादी के लिए भी 1,01,000 रुपए भी देगी। इसके अलावा, सरकार स्कूलों और कॉलेजों में पढ़ने वाले बच्चों को टैबलेट और लैपटॉप भी देगी।

पीएम केयर्स फंड से होगी बच्चों की मदद

कोरोना वायरस के चलते माता-पिता या अभिभावकों को खोने वाले बच्चों की मदद के लिए शनिवार (29 मई 2021) को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ऐलान किया कि ऐसे सभी बच्चों को ‘पीएम-केयर्स फॉर चिल्ड्रन’ योजना के तहत सहायता दी जाएगी।

प्रधानमंत्री ने घोषणा की कि ऐसे शोक संतप्त बच्चों को 18 साल का होने के पर पीएम केयर्स फंड से अगले पाँच वर्षों के लिए हर महीने वजीफा दिया जाएगा। इसके अलावा, 23 साल की उम्र में उन्हें 10 लाख रुपए का फंड मिलेगा।

‘तुम्हारे पास $ब्स हैं, अच्छा करोगी घबराओ मत… बहुत नंगी लड़कियाँ देखी हैं’ – मॉडल ने फोटोग्राफर समेत 9 के खिलाफ किया केस

मुंबई के अधेरी में रहने वाली 28 वर्षीय मॉडल अपर्णा ने हाल ही में Metoo का विवाद खड़ा करने के बाद जाने-माने फोटोग्राफर कॉलस्टन जूलियन के अलावा एक प्रसिद्ध फिल्म निर्माता के बेटे, एक बॉलीवुड टैलेंट मैनेजर समेत आठ लोगों के खिलाफ बांद्र पुलिस में रेप की शिकायत दर्ज कराई है। रेप केस की पुष्टि करते हुए मुंबई पुलिस के प्रवक्ता डिप्टी पुलिस कमिश्नर चैतन्य सिरिप्रोलू ने बताया कि मामले की जाँच की जा रही है।

मॉडल अपर्णा ने 12 अप्रैल 2021 को सोशल मीडिया पोस्ट के जरिए ये आरोप लगाया था कि एक प्रोजेक्ट पर काम करने के दौरान उसे शारीरिक और भावनात्मक रूप से प्रताड़ित किया गया था। उसने एक वरिष्ठ पुलिस अधिकारी को इस मामले में पत्र लिखकर आरोपित फोटोग्राफर के खिलाफ यौन उत्पीड़न और मारपीट का केस दर्ज करने की माँग की। बांद्रा पुलिस ने 26 मई को मामले में एफआईआर दर्ज की।

पुलिस सूत्रों के अनुसार, मॉडल ने अपनी शिकायत में कहा कि फोटोग्राफर जूलियन ने उसका फायदा उठाते हुए 2014 से 2018 के बीच बांद्रा में रेप किया था।

अपर्णा ने 10 मई 2021 को डिप्टी कमिश्नर (जोन एक्स, एमआईडीसी, अंधेरी ईस्ट) को लिखे पत्र में कहा था, “वह आदमी जिसने कई मॉडलों और अभिनेत्रियों के साथ ठीक उसी तरह से मारपीट की है, जैसे एक साइको सीरियल किलर करता है, लेकिन कोई भी उस पर चर्चा नहीं करना चाहता क्योंकि उसका काम अच्छा है? मारपीट को छोड़ दें तो उस मानसिक और मनोवैज्ञानिक आघात पर विचार करें, जो उसने वर्षों से झेले हैं। एमएफ ने मुझे बहुत समय पहले ब्लॉक कर दिया था और कभी भी मेरी कोई भी तस्वीर पोस्ट नहीं की थी, न किसी मैगजीन में छपवाई। इसलिए मैंने सोचा कि शायद यही सही समय है उनके “स्त*” की सराहना करने का।”

इसके अलावा मॉडल ने 12 अप्रैल को अपने इंस्टाग्राम पोस्ट में लिखा था कि उन्हें फैशन इवेंट्स और पार्टियों में शामिल होना इसलिए बंद करना पड़ा था क्यों जहाँ भी वो जाती थीं, वो (जूलियन) मिलता था, परेशान करता था और कहता था कि इस लड़के से बात मत करो, उससे बात मत करो।”

फोटोग्राफर ने आरोपों को नकारा

हालाँकि, फोटोग्राफर जूलियन ने एक सोशल मीडिया पोस्ट के जरिए आरोपों को झूठा करार दिया है। जूलियन ने लिखा, “मेरे संज्ञान में आया है कि एक सोशल मीडिया पोस्ट और उसके आधार पर न्यूज आर्टिकल किया जा रहा है। इनमें मेरे खिलाफ पूरी तरह से झूठे और द्वेषपूर्ण आरोप लगाए गए हैं। मेरे वकील आधिकारिक प्रक्रिया का पालन कर रहे हैं और कानूनी रूप से इन हालातों का जवाब दे रहे हैं।”

जूलियन के अलावा, मॉडल ने आठ अन्य लोगों पर अलग-अलग मौकों पर कथित तौर पर उनके साथ बलात्कार करने का आरोप लगाया है।

बहरहाल पुलिस ने मॉडल की शिकायत पर 9 आरोपितों के खिलाफ आईपीसी की धारा 376N (एक ही महिला से बार-बार बलात्कार करना), 354 (छेड़छाड़) और 34 (सामान्य इरादा) के तहत प्राथमिकी दर्ज की है। फिलहाल, पुलिस मामले की आगे जाँच कर रही है और सबूत जुटाने की कोशिश कर रही है।

KRK का पापा हूँ… गधा, डरा हुआ चूहा: सलमान-राधे-मानहानि से निकल बॉलीवुड की लड़ाई में अब गाली गलौज भी

अपनी बयानबाजी के कारण हमेशा विवादों में रहने वाले कमाल आर खान (KRK) पिछले दिनों तब चर्चा में आ गए थे जब फिल्म ‘राधे’ की रिलीज के बाद शुरू हुए इस विवाद में उनके खिलाफ सलमान खान ने मानहानि का मुकदमा दर्ज करवा दिया था। अब इस विवाद में सिंगर मीका सिंह की भी एंट्री हो गई है और उन्होंने केआरके को तीखा जवाब दिया है।

मीका बोले- मैं इसका पापा हूँ

सोशल मीडिया ट्विटर पर एक फैन के ट्वीट का जवाब देते हुए मीका सिंह ने लिखा, “ये सिर्फ बॉलीवुड के सभ्य, मशहूर और सॉफ्ट लोगों के साथ पंगा लेता है मगर बाप से नहीं लेगा। प्लीज मेरे बेटे को बोलो मुझे अनब्लॉकर करे प्लीज। मैं करण जौहर या अनुराग कश्यप नहीं हूँ, मैं इसका पापा हूँ।” इससे पहले मीका सिंह ने केआरके को ‘गधा’ और ‘डरा हुआ चूहा’ बताया।

वायरल हुआ था मीका का वीडियो

मीका सिंह का एक वीडियो भी सोशल मीडिया पर वायरल हुआ था। वीडियो में मीका सिंह ने कहा था, “केआरके पर केस कर सलमान भाई ने बहुत अच्छा किया है। मैं सलमान भाई से नाराज हूँ कि उन्होंने इतनी देर से ये फैसला लिया। आप फिल्म के बारे में जरूर बोलो लेकिन पर्सनल अटैक मत करो, ये बिल्कुल मेरा पड़ोसी है, जहाँ पर मेरा स्टूडियो है। अगर मेरे बारे में कभी भी कुछ भी गलत बोलेगा तो केस-वेस तो नहीं होगा, सीधा झापड़ होगा।”

क्या है पूरा मामला

गौरतलब है कि केआरके का दावा है कि सलमान खान ने फिल्म ‘राधे’ के निगेटिव रिव्यू के लिए उन पर मानहानि का केस किया। लेकिन सलमान खान की लीगल टीम का कहना है कि केआरके मानहानि के केस की जो वजह बता रहे हैं, वह गलत है। केआरके के खिलाफ मानहानि का केस इसलिए किया गया, क्योंकि उन्होंने सलमान को बदनाम करने के लिए कई तरह के आरोप लगाए हैं। उन्हें भ्रष्ट बताया है और उनकी संस्था बीइंग ह्यूमन पर धोखाधड़ी और पैसों की हेरफेर का आरोप लगाया है।

केस दर्ज होने के बाद KRK ने इस पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा था कि सलमान खान के हिसाब से उनकी फिल्म ‘राधे’ जबरदस्त हिट थी, लेकिन उनकी समीक्षा के बाद जनता फिल्म देखने गई ही नहीं और ये बुरी तरह फ्लॉप हो गई। KRK ने कहा कि जिस तरह उनका सलमान खान को ‘सल्लू दादाजी’ कहना बुरा लगा, ठीक उसी तरह उन्हें सलमान का फिल्म में खुद को ’22 साल का मोरल लौंडा’ कहलवाना भी बुरा लगा।

उन्होंने कहा कि फिल्म में जब दिशा पटानी से सलमान खान ने खुद को ‘भोलू, क्यूट बॉय’ कहलवाया, तो भी उन्हें बुरा लगा। KRK ने आगे कहा कि दिशा पटानी को तो पैसे देकर फिल्म में रोल दिया गया था, इसीलिए वो मजबूर थीं लेकिन हम तो मजबूर नहीं हैं।

पिछले दिनों केआरके ने अपने ट्वीट में कहा था कि उनको मारने की प्लानिंग की जा रही है। उन्होंने अपनी मौत की साजिश के पीछे करण जौहर, सलमान खान, आदित्य चोपड़ा, साजिद नाडियाडवाला, अक्षय कुमार को जिम्मेदार ठहराया था। कमाल आर खान (Kamaal R Khan) ने ट्वीट में लिखा था, “मैं आप सभी को बताना चाहता हूँ कि अगर मुझे कुछ भी हुआ तो इसके जिम्मेदार करण जौहर, सलमान खान, अक्षय कुमार, आदित्य चोपडा, साजिद नाडियाडवाला होंगे। इन लोगों ने मुझे खत्म करने का प्लान बना लिया है।”

100% स्कॉलरशिप सिर्फ मुस्लिमों को, केरल में IUML की माँग: हाईकोर्ट से 80-20% वाला फैसला रद्द होने के बाद बवाल

केरल में अल्पसंख्यक स्कॉलरशिप स्कीम को लेकर हाईकोर्ट से झटके के बाद राज्य सरकार मुश्किल में फँस गई है। हाईकोर्ट के फैसले से राज्य में मुस्लिम समुदाय बेहद नाराज़ हैं तो दूसरी तरफ ईसाइयों में खुशी की लहर है – और यही वहाँ की सरकार के लिए मुसीबत की जड़ है।

केरल में चल रहे इस सियासी ड्रामे के बीच इंडियन यूनियन मुस्लिम लीग (IUML) ने शनिवार (मई 29, 2021) को राज्य की LDF सरकार पर हाईकोर्ट को गलत जानकारी देने का आरोप लगाया और कहा कि केरल सरकार ने अदालत को गुमराह किया। IUML का मानना है कि इसी कारण अदालत ने आदेश पारित कर अल्पसंख्यक कल्याण योजनाओं में 80:20 के मौजूदा अनुपात को अमान्य घोषित कर दिया है।

IUML ने कहा कि मुस्लिम समुदाय की सामाजिक स्थिति अनुसूचित जाति समुदायों से भी खराब है। इसलिए आरक्षण के इस अनुपात को न सिर्फ बने रहना देना चाहिए बल्कि इसे बढ़ा कर 100% कर देना चाहिए।

‘पूरी छात्रवृत्ति मुस्लिमों को मिले’

केरल में मुसलमानों का प्रतिनिधित्व करने वाली सबसे बड़ी राजनीतिक पार्टी इंडियन यूनियन मुस्लिम लीग (IUML) ने माँग की है कि अनुपात खत्म कर दिया जाना चाहिए और पूरी छात्रवृत्ति मुसलमानों को मिलनी चाहिए। 

अंग्रेजी अखबार इंडियन एक्सप्रेस से बातचीत करते हुए IUML के राष्ट्रीय सचिव ई टी मोहम्मद बशीर ने कहा, “सरकार अदालत के सामने तथ्य पेश करने में विफल रही। राष्ट्रीय स्तर पर सच्चर समिति की रिपोर्ट के बाद छात्रवृत्ति शुरू हुई। साल 2006-11 के एलडीएफ शासन द्वारा मुस्लिमों के लिए बनाई गई एक योजना में संशोधन किया गया था ताकि लैटिन कैथोलिक और धर्मांतरित ईसाइयों को एक हिस्सा दिया जा सके। सरकार को अन्य अल्पसंख्यकों के लिए अलग योजनाएँ लानी चाहिए।”

मुस्लिम विद्वानों की संस्था समस्त केरल जमीयत-उल-उलेमा ने भी माँग की है कि अनुपात को समाप्त किया जाए और पूरी छात्रवृत्ति मुस्लिमों को दी जाए। बता दें कि केरल में जमीयत-उल-उलेमा, आईयूएमएल के अच्छे-खासे समर्थक हैं।

ईसाइयों ने फैसले का स्वागत किया

इस बीच चर्च चाहते हैं कि सरकार तुरंत आदेश को लागू करे। जैकोबाइट बिशप और चर्च ट्रस्टी जोसेफ मोर ग्रेगोरियस ने कहा, “ईसाइयों को अल्पसंख्यक कोचिंग केंद्रों में उनके उचित हिस्से से वंचित कर दिया जाता है। हमें उम्मीद है कि सरकार हमें न्याय से वंचित नहीं करेगी। हम उम्मीद करते हैं कि हमारे (ईसाई) मुद्दों को मुख्यमंत्री द्वारा संबोधित किया जाएगा।” ऑर्थोडॉक्स चर्च ने भी इस आदेश का स्वागत किया और कहा कि वह चाहते हैं कि विजयन अल्पसंख्यक दरियादिली के बीच ईसाइयों के अधिकारों की रक्षा के लिए निर्णय लें।

बता दें कि शुक्रवार (मई 28, 2021) को केरल हाईकोर्ट ने राज्य सरकार के 6 साल पुराने उस आदेश को रद्द कर दिया, जिसके तहत अल्पसंख्यक के नाम पर मुस्लिमों को 80 फीसदी स्कॉलरशिप दी जा रही थी, जबकि ईसाइयों की इसमें महज 20 फीसदी हिस्सेदारी थी। केरल हाई कोर्ट ने इस फैसले को असंवैधानिक करार दिया।

केरल हाई कोर्ट के फैसले के बाद मुस्लिम संगठनों ने कहा है कि सरकार को इसके खिलाफ अपील करनी चाहिए। जबकि दूसरी तरफ ईसाइयों ने इस फैसले का स्वागत किया है। इस बीच राज्य के मुख्यमंत्री पिनराई विजयन ने कहा है कि कोई भी फैसला हाई कोर्ट के ऑर्डर को पढ़ने के बाद ही लिया जाएगा। शनिवार को सीएम विजयन ने मीडिया से कहा कि कोर्ट के आदेश का अध्ययन करने के बाद ही कोई फैसला लिया जाएगा। उन्होंने कहा, “यह (अल्पसंख्यक छात्रवृत्ति) कई वर्षों से अस्तित्व में है। उच्च न्यायालय के आदेश की विस्तार से जाँच होनी चाहिए और उसके बाद सरकार अपना रुख तय करेगी।”

गौरतलब है कि केरल हाईकोर्ट ने शुक्रवार (मई 28, 2021) को फैसले में कहा था, “हम राज्य सरकार को राज्य अल्पसंख्यक आयोग के पास उपलब्ध नवीनतम जनसंख्या जनगणना के अनुसार राज्य के भीतर अधिसूचित अल्पसंख्यक समुदायों के सदस्यों को समान रूप से योग्यता-सह-साधन छात्रवृत्ति प्रदान करने के लिए आवश्यक और उचित सरकारी आदेश पारित करने का निर्देश देते हैं।”

फैसले में कहा गया कि सरकार को अल्पसंख्यकों के साथ भेदभाव करने का कोई अधिकार नहीं था। लेकिन यह एक ऐसा मामला है, जिसमें राज्य के भीतर ईसाई अल्पसंख्यक समुदाय के जनसंख्या अनुपात से उपलब्ध अधिकार को ध्यान में रखे बिना, राज्य मुस्लिम अल्पसंख्यक समुदाय को 80% छात्रवृत्ति प्रदान कर रहा है। कोर्ट के अनुसार, यह असंवैधानिक है और किसी भी कानून द्वारा समर्थित नहीं है।

5-6 साल तक लैब में काम, वुहान में ट्रायल, फिर दुनिया में तबाही: चीनी वैज्ञानिक ने खोली कोरोना वायरस पर अपने देश की पोल

कोरोना वायरस पूरी दुनिया में कोहराम मचा रहा है। कोरोना के नए-नए म्यूटेंट सामने आ रहे हैं, जो लोगों के लिए मुसीबत का सबब बन रहे हैं। इन चिंताओं के बीच कोरोना महामारी की शुरुआत जिस चीन से हुई थी, वह एक बार फिर से अंतरराष्ट्रीय स्तर पर घिरता नजर आ रहा है।

कोरोना वायरस महामारी को लेकर चीन पर आरोप लगते रहे हैं कि उसने इसकी जानकारी को दुनिया से छिपाया है। वहीं, एक बार फिर कोरोना को लेकर चीन का असली चेहरा दुनिया के सामने आया है। चीनी वायरोलॉजिस्ट डॉ ली-मेंग येन ने दावा किया है कि कोरोना वायरस को सरकार के नियंत्रण वाले एक प्रयोगशाला में तैयार किया गया था और ‘चीन ने जानबूझकर कोरोना वायरस को दुनिया में फैलाया है।’ चीनी व्हिसिल ब्लोअर और वायरोलॉजिस्ट ली-मेंग यान ने चीन से फरार होने के बाद एक बार फिर दावा किया है कि कोविड-19 को चीन की वुहान की लैब में ही बनाया गया था।

दरअसल, अमेरिकी खुफिया एजेंसी के हाथ में कुछ कागजात लगे हैं, जिसमें कहा गया है कि पाँच साल पहले से ही चीन कोरोना वायरस को तैयार कर रहा था और चीन तीसरे विश्व युद्ध की तैयारी में जुटा हुआ था, जिसे वो जैविक हथियारों के सहारे लड़ने वाला था। इस खुलासे ने चीन की पोल-पट्टी दुनिया के सामने खोलकर रख दी है।

चीन की मशहूर वैज्ञानिक और महामारी विशेषज्ञ ली मेंग येन ने अमेरिकन रिपोर्ट पर मुहर लगाते हुए कहा है कि ‘चीन ने जानबूझकर कोरोना वायरस को दुनिया में फैलाया है।’ न्यूज 18 से बात करते हुए चीन की महामारी विशेषज्ञ ली मेंग येन ने कहा, “ये खुफिया दस्तावेज पूरी तरह से सही हैं और चीन की साजिशों का पोल खोलने के लिए काफी है।”

चीनी वैज्ञानिक ने ही खोली पोल 

न्यूज 18 से बात करते हुए चीन की मशहूर वायरोलॉजिस्ट ली मेंग येन ने कहा, “हाँ, ये दस्तावेज ये साबित करने के लिए काफी है कि चीन काफी लंबे वक्त से जैविक हथियार तैयार कर रहा था, ताकि वो युद्ध में इसका इस्तेमाल कर सके और जैविक हथियार के जरिए चीन पूरी दुनिया पर जीत हासिल करना चाहता था।”

ली मेंग येन ने न्यूज 18 से बात करते हुए कहा, “हाँ, आपने जिस डॉक्यूमेंट का हवाला दिया है और मैंने मार्च महीने में जिस डॉक्यूमेंट को दुनिया के सामने रखा था, वो यही कहता है कि चीन पारंपरिक युद्ध से हटकर जैविक हथियारों का इस्तेमाल करने की कोशिश में था। इसके साथ ही चीन ने दुनिया के सामने कोरोना वायरस को लेकर गलत जानकारियाँ दी हैं, ताकि दुनिया को अँधेरे में रखा जा सके कि चीनी लैब से कोरोना वायरस नहीं निकला है।”

न्यूज 18 ने चीनी वैज्ञानिक से सवाल पूछा, “आपने कहा है कि इस वायरस को जानबूझकर रिलीज किया गया और ये हादसा नहीं था तो क्या इसे जानबूझकर फैलाया गया ताकि दुनिया का हेल्थ सिस्टम बर्बाद हो सके?” इस सवाल के जवाब में चीनी वैज्ञानिक ने कहा, “हाँ, इस वायरस का एक टार्गेट दुनिया के मेडिकल सिस्टम को बर्बाद करना भी था। दरअसल, 5-6 साल पहले चीनी अधिकारियों ने कहा था कि इस वायरस से मृत्यु दर काफी कम है लेकिन ये हेल्थ सिस्टम को पूरी तरह से तोड़ने में सक्षम है, ये समाज को काफी नुकसान पहुँचा सकता है।”’

उन्होंने कहा कि पिछले साल वुहान में इस वायरस का ट्रायल किया गया था, जिससे वुहान की स्थिति काफी खराब हो गई थी। बातचीत को समाप्त करते हुए, डॉ यान ने बताया कि चीन अब देशों को अपने सस्ते टीके खरीदने के लिए धमका रहा है।

बता दें कि डेली मेल ने शनिवार (29 मई 2021) को इसे लेकर सनसनीखेज खुलासा किया था। रिपोर्ट में कहा गया था कि चीन के वैज्ञानिकों ने वुहान इंस्टीट्यूट ऑफ वायरोलॉजी (Wuhan Institute of Virology) में कोविड-19 वायरस को तैयार किया है। वैज्ञानिकों को कोविड-19 सैंपल पर फिंगरप्रिंट मिले हैं। इसके अलावा दावा किया गया कि चीनी वैज्ञानिकों (Chinese Scientist) ने कोरोना वायरस को तैयार करने के बाद इसे रिवर्स-इंजीनियरिंग वर्जन से बदलने की कोशिश की, ताकि ऐसा लगे कि ये वायरस चमगादड़ से विकसित हुआ है। वहीं, अमेरिका और ब्रिटेन डब्ल्यूएचओ (WHO) पर इस मामले की जाँच के लिए दबाव बना रहे हैं।

बता दें कि महिला वीरोलॉजिस्ट डॉ. ली-मेंग यान ने इससे पहले भी कोरोना वायरस के मानव निर्मित होने का दावा किया था। डॉ. ली-मेंग ने दावा किया था कि कोरोना वायरस को एक सरकार के नियंत्रण वाले प्रयोगशाला में तैयार किया गया था और उनके पास अपने दावे को साबित करने के लिए वैज्ञानिक प्रमाण हैं। जिसे वह जल्द पेश करेंगी। हॉन्गकॉन्ग में काम करने वाली शीर्ष वैज्ञानिक ने दावा किया कि उन्होंने अपनी जाँच के दौरान एक कवर-अप ऑपरेशन का पता लगाया और कहा कि चीन की सरकार को सार्वजनिक रूप से स्वीकार करने से पहले ही वायरस के प्रसार की जानकारी थी। 

उल्लेखनीय है कि डॉक्टर ली मेंग यान ने हॉन्कॉन्ग छोड़ दिया है। वे हॉन्गकॉन्ग स्कूल ऑफ पब्लिक हेल्थ में कार्यरत थीं। WHO से सम्बद्ध लैब की को-डायरेक्टर ली मेंग यान ने चीन के डर से यह कदम उठाया। उन्होंने कोरोना से जुड़े खुलासे को लेकर अपनी जान को खतरा बताया था। यान ने आरोप लगाया था कि चीन को कोरोना वायरस संक्रमण और उससे उपजने वाले खतरों के बारे में पहले से पता था। ‘वर्ल्ड हेल्थ आर्गेनाईजेशन’ के एडवाइजर प्रोफेसर मलिक पेरिस के पास भी इसकी जानकारी होने और कुछ नहीं करने की बात भी उन्होंने कही थी।

ज्योति और नियाज अंसारी लिव-इन रिलेशनशिप में रहते थे… टोंटी पर सिर पटक-पटक कर मार डाला

महाराष्ट्र में मुंबई पुलिस ने शुक्रवार (28 मई 2021) को 24 घंटे के भीतर एक महिला की हत्या का मामला सुलझा लिय। ज्योति गावडे की हत्या के मामले में लिव-इन रिलेशनशिप में रहने वाले 19 वर्षीय आरोपित नियाज अली अंसारी को गिरफ्तार कर लिया गया है।

रिपोर्ट के मुताबिक, गुरुवार (27 मई 2021) को अंधेरी (ईस्ट) में मेट्रो रेल स्टेशन के नीचे स्थित एक सार्वजनिक शौचालय के अंदर नियाज अली अंसारी ने ज्योति गावडे (24) को खींच लिया और अंदर से दरवाजा बंद करने के बाद बेरहमी से उसकी हत्या कर दी। महिला के सिर पर गहरी चोट आई थी।

महिला की हत्या करने के बाद आरोपित नियाज अली अंसारी कोलकाता भागने की फिराक में था। इसीलिए वो ट्रेन में चढ़ने की कोशिश कर रहा था, उसी दौरान जोगेश्वरी से पुलिस ने उसे दबोच लिया है।

रिपोर्ट के मुताबिक, आरोपित ने महिला को पीटने के बाद पानी के नल पर उसका सिर कई बार पटक दिया, जिससे उसकी मौत हो गई। घटना का खुलासा उस वक्त हुआ, जब सार्वजनिक शौचालय में काम करने वाले एक व्यक्ति ने पुलिस को इस बात की सूचना दी। घटना शाम करीब 7.15 बजे घटी।

ज्योति गावडे के साथ आरोपित नियाज अली अंसारी मीरा रोड के नया नगर में सड़क किनारे रहते थे और कूड़ा उठाने के लिए रोजाना शहर जाते थे। 27 मई 2021 की शाम को भी करीब 7 बजे अंधेरी (ईस्ट) पहुँचने से पहले दोनों ने अलग-अलग स्थान की यात्रा की। इस दौरान उनके साथ एक और कपल भी था, जिनका सीसीटीवी के जरिए पुलिस ने पता लगा लिया।

सीसीटीवी से पकड़ा गया आरोपित

वारदात के बारे में जानकारी देते हुए अंधेरी पुलिस के सीनियर इंस्पेक्टर विजय बेलगे ने कहा, “सीसीटीवी फुटेज की मदद से पहले हमें उस कपल के बारे में जानकारी मिली, जिसके आधार पर हमने अंसारी को जल्द पकड़ लिया। ऐसा माना जा रहा है कि आरोपित अंसारी ने शौचालय में पानी के नल पर गावडे के सिर को पटक कर उसकी हत्या की है।”

पुलिस ने केस को बड़ा ही चैलेन्जिंग बताते हुए कहा कि पीड़ित और आरोपित के बारे में पहले से किसी प्रकार की कोई जानकारी नहीं थी। हालाँकि बाद में टेक्निकल इंटेलीजेंस की मदद से उन्हें ट्रैक कर लिया गया।

मेहुल चोकसी – भारत के कानून से भागा था, डोमिनिका की पुलिस ने कूटा: भगोड़े के सबूत लेकर दिल्ली से गया एक जहाज

पीएनबी घोटाले का आरोपित और भगोड़ा हीरा कारोबारी मेहुल चोकसी की डोमिनिका से पहली तस्वीर सामने आई है। मेहुल चोकसी डोमिनिका में क्रिमिनिल इन्वेस्टीगेशन डिपार्टमेंट (सीआईडी) की कस्टडी में है। उसे चार दिनों पहले गिरफ्तार किया गया था। मेहुल की जो तस्वीरें सामने आई हैं, उसमें वो जेल में बंद दिखाई दे रहा है।

अन्य कुछ और तस्वीरों में मेहुल चोकसी जेल से अपने हाथ को बाहर निकालकर दिखाता नज़र आ रहा है। तस्वीरों में दिख रहा है कि उसके हाथ पर चोट है। मेहुल चोकसी की ये तस्वीरें एंटीगुआ न्यूज़रूम की ओर से जारी की गई हैं। मेहुल चोकसी की तरफ से ये आरोप लगाया गया है कि उसके साथ डोमिनिका की जेल में मारपीट की गई है।

इसी बीच डोमिनिका के डगलस चार्ल्स एयरपोर्ट पर दिल्ली से रवाना हुआ एक विमान लैंड हुआ। इसके बाद से ऐसी अटकलें भी लगाई जा रही थी कि क्या मेहुल चोकसी को लेने के लिए विमान भेजा गया है? अब एंटीगुआ के प्रधानमंत्री गैस्टन ब्राउन ने स्थानीय रेडियो स्टेशन के साथ एक साक्षात्कार में इस बात की पुष्टि कर दी है कि भारत सरकार ने अदालत के दस्तावेजों के साथ डोमिनिका के लिए एक जेट भेजा है। यह दस्तावेज साबित करेगा कि मेहुल चोकसी भगोड़ा है और ये दस्तावेज बुधवार (जून 2, 2021) को डोमिनिका अदालत में दिखाए जाएँगे।

इससे पहले मेहुल चोकसी के वकील ने दावा किया था कि मेहुल चोकसी को एंटीगुआ से जबरन अगवा किया गया। उन्हें पीटा गया और उन्हें डोमिनिका ले जाया गया। भारत में मेहुल चोकसी के वकील विजय अग्रवाल ने कथित तौर पर उनके साथ ‘टॉर्चर’ किए जाने का आरोप लगाया था। उन्होंने कहा था, “जब तक पता नहीं चलता कि वो डोमिनिका कैसे पहुँचे, तब तक कोई भी कयास नहीं लगाने चाहिए। लेकिन मेरी समझ कहती है कि वो अपनी मर्जी से डोमिनिका नहीं पहुँचे हैं। इसलिए मुझे इसमें गड़बड़ दिख रही है। कोई इस बात की तरफ गौर नहीं कर रहा है कि आखिर वो डोमिनिका कैसे पहुँचे?”

इस पूरे मामले पर मेहुल चोकसी के वकील विजय अग्रवाल का बयान भी सामने आया है। उन्होंने कहा, “मेरे क्लाइंट एक इंसान हैं, कोई मोहरा नहीं हैं कि उन्हें कोई भी अपनी मर्जी से शतरंज के खेल की तरह घुमाते रहे। मेरा स्टैंड सही साबित हुआ है। मैं एंटीगुआ की यूनाइटेड प्रोग्रेसिव पार्टी के बयान की प्रशंसा करता हूँ कि एंटीगुआ को अपने हर नागरिक के अधिकारों की रक्षा करनी चाहिए।” उन्होंने आगे कहा, “मेरे क्लाइंट मेहुल चोकसी एंटीगुआ के नागरिक हैं और एंटीगुआ के संविधान के तहत सभी कानूनी संरक्षण के हकदार भी हैं।”

23 मई को एंटीगुआ से गायब हो गया था चोकसी

मेहुल चोकसी एंटीगुआ स्थित अपने घर से 23 मई की शाम को गायब हो गया था। बकायदा उसके लापता होने की रिपोर्ट भी दर्ज की गई थी। लेकिन 26 मई को उसे डोमिनिका में पकड़ लिया गया था। बताया जा रहा था कि वो क्यूबा भागने की फिराक में था, लेकिन रास्ते में ही उसे पकड़ लिया गया।

जिसके बाद खबर आई कि डोमिनिका मेहुल चोकसी को भारत प्रत्यर्पित करने के लिए सहमत हो गया है, जिससे इस भगोड़े बिजनेसमैन को भारत लाए जाने की सँभावनाएँ बढ़ गई हैं। एंटीगुआ के पीएम गैस्टन ब्राउन ने एएनआई को दिए एक इंटरव्यू में कहा था, “… डोमिनिका (मेहुल चोकसी के प्रत्यावर्तन के लिए) सहमत हो गया है। हम उसे वापस स्वीकार नहीं करेंगे … डोमिनिकन सरकार और कानून प्रवर्तन सहयोग कर रहे हैं, और हमने भारत सरकार को उसे भारत वापस लाने के लिए सूचित किया है।”

जनवरी 2018 से फरार है मेहुल चोकसी

जनवरी 2018 की शुरुआत में पंजाब नेशनल बैंक में करीब 13 हजार करोड़ रुपए का घोटाला होने का खुलासा हुआ था। इस मामले में 30 जनवरी 2018 को सीबीआई ने एफआईआर दर्ज की थी। लेकिन उससे पहले ही इस घोटाले के दो मुख्य आरोपित नीरव मोदी और मेहुल चोकसी भारत छोड़कर भाग गए थे। तब से ही दोनों आरोपियों के प्रत्यर्पण की कोशिश की जा रही है। नीरव मोदी ब्रिटेन में है और वहाँ के गृह मंत्रालय ने उसके प्रत्यर्पण को मंजूरी दे दी है। हालाँकि, इसके खिलाफ नीरव मोदी ने हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया है।