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‘हीरो के साथ सोना होगा, तब मिलेगा काम’: हिरोइन ने किया खुलासा, नहीं कर पाई थीं ‘बड़े अभिनेता’ की फिल्म

अभिनेत्री किश्वर मर्चेंट ने भारतीय मनोरंजन इंडस्ट्री में ‘कास्टिंग काउच’ को लेकर बात की है। उन्होंने बताया कि एक फिल्म के दौरान उन्हें एक अभिनेता के साथ सोने को कहा गया था। एक बड़े फिल्म निर्माता और एक बड़े अभिनेता के साथ उन्हें काम करने का मौका मिला था, लेकिन इन कारणों से उन्हें फिल्म छोड़नी पड़ी। ‘भेजा फ्राई 2’ और ‘हम तुम और शबाना’ फिल्म की अभिनेत्री फ़िलहाल अपनी प्रेगनेंसी के दौर से गुजर रही हैं।

40 वर्ष की उम्र में पहली बार माँ बनने जा रहीं किश्वर मर्चेंट ने कहा कि वो अपने करियर के शुरुआती दिनों में अपनी माँ के साथ एक बैठक के लिए गई थीं। वहीं उन्हें बताया कि फिल्म में काम करने के लिए उन्हें इसके हीरो के साथ सोना पड़ेगा। बकौल किश्वर मर्चेंट, उन्होंने इस ऑफर को ठुकरा दिया और चुपचाप वहाँ से लौट गईं। उन्होंने कहा, “मैं ऐसा नहीं कहूँगी कि ये बहुत होता है या सामान्य है। इंडस्ट्री बदनाम है लेकिन हर इंडस्ट्री में ये चीज होती है।”

TOI के ‘TellyStarsTalk Exclusive‘ में किश्वर मर्चेंट ने बताया कि उन्होंने बॉलीवुड अभिनेत्री बनने के लिए कड़ी कोशिश नहीं की क्योंकि उन्हें पता था कि उनका चेहरा इसके लिए फिट नहीं है और साथ ही डांस के मामले में वो कमजोर थीं। साथ ही, वो बिकनी पहनने को लेकर सहज नहीं थीं। उन्होंने बताया कि शादी के बाद उन्हें थोड़ी स्वतंत्रता मिली तो उन्होंने इसका फायदा उठाया, लेकिन TV एक साफ़-सुथरा कार्य है।

किश्वर मर्चेंट ने विक्की लालवानी के साथ इंटरव्यू में किया खुलासा (वीडियो साभार: TV Times)

किश्वर मर्चेंट ने TV के अभिनेता और गायब सुयश राय से शादी की है। उन्होंने बताया कि अपनी प्रेगनेंसी को लेकर वो न सिर्फ अच्छा महसूस कर रही हैं और खुश हैं, बल्कि थोड़ी नर्वस भी हैं। उन्होंने बताया कि फ़िलहाल बच्चे की कोई योजना नहीं थी, इसीलिए ये खबर आई तो वो और उनके पति चकित हो गए थे। इसके बाद दोनों पेरेंट्स बनने की तैयारी में लग गए। इसी बीच उन्हें थाइराइड हो गया और उनके माता-पिता कोविड पॉजिटिव हो गए।

किश्वर मर्चेंट ने बताया कि अब सब ठीक है। पिछले 23 वर्षो से मनोरंजन की दुनिया में सक्रिय किश्वर मर्चेंट ने उस जमाने के लोकप्रिय ‘शक्तिमान’ सीरियल में जूलिया का किरदार से अपनी पहचान बनाई थी। उसके बाद ‘बाबुल की दुआएँ लेती जा’, ‘देश में निकला होगा चाँद’, ‘कुटुंब’, ‘कसौटी ज़िंदगी की’, ‘काव्यांजलि’, ‘कसम से’, ‘एक हसीना थी’ और ‘मधुबाला’ में काम किया। वो सुयश राय के साथ ‘बिग बॉस 9 (2015)’ में भी दिखी थीं।

‘सरकार ने बंद करवा दी कॉरपोरेट वैक्सीनेशन’: सोशल मीडिया में झूठा दावा करते पकड़े गए एक्टर सिद्धार्थ

भारत में वैक्सीनेशन अभियान ने एक बार फिर रफ्तार पकड़ ली है। वहीं, कोरोना म​हामारी के दौरान मोदी सरकार को निशाना बनाने के लिए कुछ तथा​कथित बुद्धिजीवियों द्वारा एक से बढ़कर एक झूठ बोले जा रहे हैं। इनकी फेहरिस्त बेह​द लंबी है, जिसमें एक और नाम जुड़ा है तमिल अभिनेता​ सिद्धार्थ का।

सिद्धार्थ ने शुक्रवार (28 मई 2021) को ट्वीट किया, “सरकार द्वारा कॉरपोरेट वैक्सीनेशन अभियान को रोका जा रहा है।” ‘रंग दे बसंती’ फिल्म के अभिनेता ने ट्वीट कर पूछा कि क्या भारत में कॉरपोरेट्स घरानों को अपने कर्मचारियों को बड़े पैमाने पर टीकाकरण करने की अनुमति नहीं दी जानी चाहिए? इसके अलावा उन्होंने पूछा कि बड़े कॉरपोरेट्स घरानों को तेजी से वैक्सीनेशन की दिशा में अपनी क्षमताओं का इस्तेमाल करने की जिम्मेदारी दी जानी चाहिए?

सवाल पूछना कहीं से भी गलत नहीं है, लेकिन उससे पहले उस विषय पर रिसर्च करना बेहद जरूरी होता है। फिल्म प्रोड्यूसर, सिंगर और अभिनेता के रूप में अपनी पहचान बनाने वाले सिद्धार्थ द्वारा किया गया यह दावा पूरी तरह से गलत है। दरअसल, वर्तमान में कॉरपोरेट वैक्सीनेशन अभियान पर कोई भी प्रतिबंध नहीं है, जैसा कि वह दावा कर रहे हैं। वास्तव में कई कॉरपोरेट घराने पहले से ही अपने कर्मचारियों और उनके परिवार के सदस्यों को कोरोना वैक्सीन लगवा रहे हैं।

कॉरपोरेट घरानों ने अपने परिसर में वैक्सीनेशन अभियान चलाने के लिए विभिन्न अस्पतालों से करार (समझौता) भी किया है। कई कॉरपोरेट घराने अस्पताल भी चलाते हैं, वे वैक्सीनेशन अभियान के लिए खुद के अस्पतालों का इस्तेमाल कर रहे हैं।

बता दें कि भारत 20 करोड़ वैक्सीनेशन करने वाला अमेरिका के बाद दूसरा देश बन गया है। वैक्सीनेशन के इस अभियान में अब सरकार के साथ-साथ कॉरपोरेट जगत भी आगे आ गया है। देश की सबसे बड़ी प्राइवेट कंपनी रिलायंस इसे लीड कर रही है, इसके मद्देनजर वो 800 से ज्यादा शहरों में अपने 13 लाख से अधिक कर्मचारियों और उनके परिवार के सदस्यों का मुफ्त में वैक्सीनेशन कर रही है। ये सबसे बड़ा कॉरपोरेट वैक्सीन ड्राइव है। इसके तहत 15 जून तक सबको एक डोज लक्ष्य रखा गया है। जो पहले वैक्सीन ले चुके है उन्हें रिम्बर्समेंट मिलेगा। इसके अलावा कई दूसरे कॉरपोरेट भी अपने स्टाफ का वैक्सीनेशन करवा रहे हैं।

दिल्ली हाई कोर्ट ने वायर-क्विंट जैसों की याचिका को नहीं माना ‘अर्जेंट’, मोदी सरकार के IT नियमों को दी थी चुनौती

दिल्ली हाईकोर्ट ने नए सूचना प्रौद्योगिकी नियम 2021 को चुनौती देने वाली मीडिया संस्थानों की याचिका को 4 अगस्त तक के लिए स्थगित कर दिया है। जस्टिस डीएन पटेल व जस्टिस ज्योति सिंह की पीठ ने गुरुवार (मई 26, 2021) को इस पर सुनवाई की थी। इससे पहले इस मामले में मार्च में हाई कोर्ट ने केंद्र को नोटिस जारी किया था।

मीडिया संस्थानों ने अपनी याचिका में इस मामले को मौलिक अधिकारों से जोड़ते हुए अर्जेंट बताया था। हाई कोर्ट ने कहा कि ये मामला अर्जेंट नहीं है, इसलिए इसकी सुनवाई 4 अगस्त तक के लिए स्थगित की जाती है है। मालूम हो कि आईटी मंत्रालय ने डिजिटल व सोशल मीडिया नियम 2021 को हाल ही में लागू किया है। कथित तौर पर ये नए अधिसूचित नियम ऑनलाइन मीडिया पोर्टलों और प्रकाशकों, ओवर-द-टॉप (ओटीटी प्लेटफॉर्म) और सोशल मीडिया मध्यस्थों के कामकाज को नियंत्रित करने वाले हैं। 

इसका हवाला देते हुए मीडिया गिरोह के टॉप नामी पोर्टल द क्विंट, द वायर समेत कई डिजिटल न्यूज प्लेटफॉर्म ने इन नियमों को हाई कोर्ट में चुनौती दी है। इस याचिका को फाउंडेशन ऑफ इंडिपेंडेंट जर्नलिज्म के तहत दायर किया गया है। इसी संस्थान के अंतर्गत द वायर वेबसाइट काम करती है। इस मामले में द क्विंट की सह संस्थापक ऋतु कपूर भी याचिकाकर्ता हैं। इनके अलावा द न्यूज मिनट के एडिटर इन चीफ डी राजेंद्र और द वायर के फाउंडिग एडिटर एमके वेणु भी इस केस के याचिकाकर्ताओं में शामिल हैं।

इस केस में वरिष्ठ अधिवक्ता नित्या रामकृष्णन ने पहले याचिकाकर्ताओं के लिए नियमों के भाग 3 (जो डिजिटल मीडिया से संबंधित है) के तहत कठोर कदमों से अंतरिम सुरक्षा की माँग की थी। लेकिन पीठ ने कहा कि वह ऐसा अभी नहीं कर सकते। इसके साथ पीठ ने ये भी कहा कि यदि कोई कठोर कदम उठाया जाता है, तो याचिकाकर्ता तत्काल सुनवाई की माँग करने के लिए स्वतंत्र होंगे।

इस याचिका में नए नियमों को अनुच्छेद 19 (1) (ए) और अनुच्छेद 14 के विरुद्ध कहा गया और अभिव्यक्ति की आजादी का हवाला देकर कहा गया है कि प्रतिबंध केवल अनुच्छेद 19 (2) में उल्लेखित बातों के मुताबिक हो सकता है। द क्विंट जैसे न्यूज पोर्टल पहले ही इनके अधीन हैं, इसलिए ये नए नियम अनुच्छेद 19 (2) के हित में नहीं हो सकते। ये सब सिर्फ डिजिटल समाचार पोर्टलों की सामग्री को सीधे नियंत्रित करने की सरकार की एक चाल है।

बता दें कि सोशल मीडिया कंपनियों पर शिकंजा कसते हुए भारत सरकार ने नए आईटी नियम बनाए हैं, जो 26 मई से प्रभावी हो गए हैं। भारत सरकार के नए आईटी नियमों के खिलाफ मैसेजिंग एप व्हाट्सएप ने भी अदालत का दरवाजा खटखटाया है। वहीं सरकार ने सभी कंपनियों को नोटिस भेजकर पूछा है कि नियम का पालन अब तक क्यों नहीं किया गया? केंद्र सरकार ने डिजिटल मीडिया और ओटीटी प्लेटफॉर्मों को बुधवार से लागू हुए नए नियमों के अनुपालन पर ब्योरा देने के लिए 15 दिनों का समय दिया है।

Yaas पर पीएम मोदी की मीटिंग में 30 मिनट देर से पहुँचीं ममता बनर्जी… फिर आते ही बैठक छोड़कर चली गईं

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शुक्रवार (28 मई 2021) को पश्चिम बंगाल और ओडिशा में चक्रवाती तूफान यास (Cyclone Yaas) के कारण हुए नुकसान का हवाई सर्वेक्षण के जरिए जायजा लेने के बाद कालीकुंडा में राज्य सरकारों के साथ साइक्लोन को लेकर समीक्षा बैठक की। इस बैठक में पश्चिम बंगाल की सीएम ममता बनर्जी न केवल 30 मिनट देर से पहुंची बल्कि आनन-फानन मे बैठक छोड़कर चली भी गईं।

पीएम मोदी की मीटिंग में 30 मिनट देर से पहुंचीं ममता बनर्जी

रिपोर्ट्स के मुताबिक, पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी और मुख्य सचिव एक ही परिसर में होने के बावजूद चक्रवात समीक्षा बैठक के लिए 30 मिनट की देरी से पहुँचे। ममता ने समीक्षा बैठक में प्रवेश करने के बाद चक्रवात प्रभाव से संबंधित कागजात सौंपे और कहा कि उनकी अन्य बैठक हैं और ये कहकर चली गईं।

ममता बनर्जी ने कहा, ”पीएम ने मीटिंग बुलाई थी। हमें नहीं पता था कि दीघा में मेरी मीटिंग थी। मैं कलाईकुंडा गई और पीएम रिपोर्ट दी, दीघा विकास और सुंदरबन विकास के लिए क्रमश: 20,000 करोड़ रुपये और 10,000 करोड़ रुपये की माँग की। मैंने उनसे कहा था कि आप (राज्य के अधिकारी) मुझसे मिलना चाहते हैं। मैंने उनकी अनुमति ली और चली गई।”

ममता ने कहा, ”कल मैं प्रभावित इलाकों का हवाई सर्वेक्षण करूंगी।” उन्होंने कहा, ”राज्य में चक्रवात यास से हुई तबाही पर मुख्य सचिव ने प्रधानमंत्री को एक रिपोर्ट सौंपी है।”

मीटिंग में शुभेंदु अधिकारी को बुलाए जाने पर ‘भड़की’ थीं ममता

रिपोर्ट्स के मुताबिक, इस बैठक में बीजेपी विधायक शुभेंदु अधिकारी को भी बुलाया गया था, जिससे ममता बनर्जी भड़क गई थीं। मीटिंग में शुभेंदु अधिकारी को भी बुलाया गया, जिसको लेकर ममता बनर्जी ने आपत्ति जताई थी। मालूम हो कि ममता को विधानसभा चुनाव 2021 में नंदीग्राम सीट से शुभेंदु अधिकारी से करारी हार का सामना करना पड़ा था।

यास तूफान को लेकर प्रधानमंत्री मोदी की होनी वाली समीक्षा बैठक में राज्यपाल जगदीप धनखड़, मुख्यमंत्री ममता बनर्जी, पश्चिम बंगाल विधानसभा में विपक्ष के नेता शुभेंदु अधिकारी, केंद्रीय मंत्री धर्मेंद्र प्रधान और बंगाल से बीजेपी सांसद देवाश्री चौधरी को भी आमंत्रित किया गया था।

रिपोर्ट्स के मुताबिक, मुख्यमंत्री ने कहा कि यास (Yaas) तूफान से बंगाल में 1 करोड़ से अधिक लोग प्रभावित हुए हैं। इसके अलावा करीब 3 लाख घरों को नुकसान पहुँचा है। वहीं, इस तूफान से ओडिशा में करीब 6 लाख लोगों के प्रभावित होने की खबर है।

बता दें कि पीएम मोदी ने गुरुवार (27 मई 2021) को भी दिल्ली में चक्रवात से हुए नुकसान की समीक्षा के लिए एक बैठक की थी। प्रधानमंत्री कार्यालय ने एक प्रेस रिलीज में बताया था कि राज्य सरकारें तूफान यास (Yaas) के कारण हुए नुकसान के आकलन में अभी भी जुटी हुई हैं।

नारदा केस पर मीडिया से बात नहीं कर सकेंगे ममता के मंत्री-MLA: गिरफ्तारी, जमानत, जेल, हाउस अरेस्ट के बाद फिर से बेल

नारदा मामले में गिरफ्तार पश्चिम बंगाल के चारों नेताओं को कलकत्ता हाई कोर्ट ने जमानत दे दी है। हाई कोर्ट ने शुक्रवार (28 मई 2021) को इस शर्त पर अंतरिम जमानत दी कि चारों नेता केस को लेकर प्रेस में बयान नहीं देंगे या मीडिया में चर्चा नहीं करेंगे। जमानत के लिए दो लाख रुपए का निजी बॉन्ड और इतनी ही राशि के दो जमानतदार पेश करने को कहा गया है। साथ ही वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए इन्हें जाँच में शामिल होना होगा।

सीबीआई ने फिरहाद हकीम, मदन मित्रा, सुब्रत मुखर्जी और शोभन चटर्जी को 17 मई को गिरफ्तार किया था। हकीम और मुखर्जी बंगाल की मौजूदा ममता सरकार में मंत्री हैं। मित्रा सत्ताधारी तृणमूल कॉन्ग्रेस (TMC) के विधायक हैं, जबकि चटर्जी ममता की पूर्व सरकार में मंत्री रहे थे।

सीबीआई द्वारा गिरफ्तार की जाने के बाद उसी दिन (17 मई) सीबीआई की विशेष अदालत ने टीएमसी नेताओं को जमानत दे दी थी। लेकिन कुछ ही घंटों के भीतर हाई कोर्ट ने इस पर रोक लगाते हुए इन्हें न्यायिक हिरासत में प्रेसिडेंसी जेल भेजने के निर्देश दिए थे।

टीएमसी नेताओं को गिरफ्तार करने के बाद पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी भी सीबीआई दफ्तर पहुँच गई थीं और वहाँ 6 घंटे धरने पर बैठी रहीं। टीएमसी कार्यकर्ताओं ने भी जाँच एजेंसी के दफ्तर पर पत्थरबाजी की और बैरिकेड तोड़कर भीतर दाखिल होने की कोशिश की थी।

कलकत्ता हाई कोर्ट के निर्णय के खिलाफ आरोपित टीएमसी नेताओं के द्वारा पुनर्विचार याचिका दाखिल की गई। इस पर पहले कार्यवाहक चीफ जस्टिस राजेश बिंदल और जस्टिस अरिजित बनर्जी की बेंच ने सुनवाई की। जमानत देने को लेकर दोनों जज के बीच मतभेद उभरने के बाद इन नेताओं को हाउस अरेस्ट में रखने का निर्देश देकर मामला बड़ी पीठ को स्थानांतरित कर दिया गया था।

आखिरकार शुक्रवार को 5 जजों की बेंच ने आरोपित नेताओं को जमानत दे दी। सुनवाई करने वाली 5 जजों की बेंच में कार्यवाहक चीफ जस्टिस राजेश बिंदल, जस्टिस आईपी मुखर्जी, सौमेन सेन, अरिजित बनर्जी और हरीश टंडन शामिल थे। जमानत का विरोध करते हुए सीबीआई ने कहा कि अगर आज इस अराजकता की जाँच एक संवैधानिक न्यायालय द्वारा नहीं की गई तो कल ऐसी परिस्थितियाँ उत्पन्न होंगी कि एक अपराधी को गिरफ्तार करने के बाद उसके गुंडे सीबीआई कार्यालय का घेराव करना शुरू कर देंगे।  

क्या है नारदा स्टिंग मामला

बंगाल में साल 2016 के विधानसभा चुनाव से पहले नारदा स्टिंग टेप सार्वजनिक हुए था। स्टिंग ऑपरेशन कथित तौर पर नारदा न्यूज पोर्टल के मैथ्यू सैमुअल ने किया था। इस स्टिंग में 13 टीएमसी नेताओं को सहायता करने के बदले कथित तौर पर कंपनी के प्रतिनिधियों से रुपए लेते हुए देखा गया था। यह एक काल्पनिक कंपनी थी जिसे मैथ्यू सैमुअल ने ही टीएमसी नेताओं से संपर्क करने के लिए बनाया था।

‘स्वतंत्र वीर सावरकर’: वीर सावरकर पर फिल्म बनाएँगे महेश मांजरेकर, कहा – मैं उनके जीवन से हमेशा मंत्रमुग्ध रहा हूँ

जाने-माने फिल्म निर्देशक महेश मांजरेकर ने महान स्वतंत्रता सेनानी विनायक दामोदर सावरकर के जीवन पर फिल्म बनाने की घोषणा की है। वीर सावरकर की 138वीं जयंती के अवसर पर ये घोषणा की गई है। संदीप सिंह और अमित वाधवानी इस फिल्म का निर्माण करेंगे। फिल्म का नाम होगा – ‘स्वतंत्र वीर सावरकर’। महेश मांजरेकर खुद ऋषि विरमानी के साथ मिल कर इस फिल्म की लेख प्रक्रिया पूरी करेंगे।

महेश मांजरेकर निर्देशक होने के साथ-साथ एक उम्दा अभिनेता भी हैं। हाल ही में उन्हें जॉन अब्राहम अभिनीत ‘द मुंबई सागा’ में देखा गया था। हिन्दू राष्ट्रवाद के जनक माने जाने वाले वीर सावरकर पर फिल्म की घोषणा करते हुए उन्होंने कहा, “वीर सावरकर के जीवन और कार्यों को लेकर मैं हमेशा से मंत्रमुग्ध रहा हूँ। उनके नाम से मन में जिस प्रकार का भाव आता है, उससे स्पष्ट है कि उन्होंने बहुतों के जीवन को प्रभावित किया है।”

महेश मांजरेकर ने कहा कि एक निर्देशक के रूप में ये उनके लिए एक चुनौती की तरह है, लेकिन वो इसे स्वीकार करना चाहेंगे। ‘लीजेंड ग्लोबल स्टूडियो’ के मालिक संदीप सिंह ने कहा कि वीर सावरकर का सम्मान के साथ-साथ उनकी आलोचना भी बराबर तरीके से होती रही है। उन्होंने कहा कि वीर सावरकर को आज एक ‘ध्रुवीकरण वाला चरित्र’ बना दिया गया है, लेकिन ऐसा इसीलिए हुआ क्योंकि लोग उन्हें अच्छे से जानते नहीं हैं।

उन्होंने कहा कि इस तथ्य को कोई नहीं नकार सकता कि वीर सावरकर हमारे स्वतंत्रता संग्राम का एक अहम हिस्सा थे और हमारा प्रयास ये है कि हम उनकी जीवन यात्रा को दर्शकों के समक्ष पेश करें। इस फिल्म को लंदन और अहमदाबाद के अलावा अंडमान द्वीप पर शूट किया जाएगा। जहाँ सावरकर ने शुरुआती रिसर्च और 1857 पर पुस्तक लंदन में लिखा था, उन्हें 10 वर्षों तक अंडमान के कालापानी जेल में रखा गया था।

वहीं अहमदाबाद में 1937 में उन्होंने हिन्दू महासभा के अधिवेशन में ‘द्विराष्ट्र सिद्धांत’ की बात की थी। संदीप सिंह ने दावा किया कि ये फिल्म भारतीय स्वतंत्रता संग्राम और इतिहास को लेकर लोगों के नजरिए को बदल देगी। 1833 में महाराष्ट्र में जन्मे वीर सावरकर का भारतीय स्वतंत्रता संग्राम के अलावा हिन्दू राष्ट्रवाद की विचारधारा को आगे बढ़ाने में भी बड़ा योगदान रहा है। साथ ही वो एक धारदार लेखक भी थे।

महेश मांजरेकर इससे पहले संजय दत्त की अवॉर्ड विनिंग फिल्म ‘वास्तव (1999)’, संजय दत्त की ही ‘कुरुक्षेत्र (2000)’ गोविंदा की कॉमेडी फिल्म ‘जिस देश में गंगा रहता है (2000)’ और नाना पाटेकर की मराठी फिल्म ‘नटसम्राट (2016)’ सहित 2 दर्जन से भी अधिक फिल्मों का निर्देशन कर चुके हैं। फ़िलहाल वो सलमान खान की अगली फिल्म ‘अंतिम: द फाइनल ट्रुथ’ के निर्देशन में व्यस्त हैं। साथ ही वो ऑस्कर विनिंग ‘स्लमडॉग मिलियनेयर’ समेत 50 से अधिक फिल्मों में अपने अभिनय का जलवा बिखेर चुके हैं।

किन्नर से सुहैल अहमद शाह ने की सेक्स की डिमांड, 6 लोगों ने मिलकर कर दिया मर्डर

महाराष्ट्र के मुंबई में पुलिस ने 6 लोगों को सुहैल अहमद शाह की हत्या के आरोप में गिरफ्तार किया है। 36 वर्षीय सुहैल की हत्या कथित तौर पर किन्नर से यौन संबंध बनाने (सेक्स) की इच्छा जाहिर करने पर कर दी गई थी। घटना मुंबई के बैगनवाड़ी इलाके की है।

छह गिरफ्तार आरोपितों में से 4 एक ही परिवार के हैं। मीडिया रिपोर्टों में पुलिस के हवाले से बताया गया है कि सुहैल अहमद शाह बैगनवाड़ी में घायल अवस्था में मिला था। अस्पताल ले जाए जाने से पहले उसकी मौत हो गई थी।

पुलिस ने बताया है कि सुहैल ने किन्नर कैनाथ को नशे की हालत में फोन कर उसके साथ यौन संबंध बनाने की इच्छा जाहिर की थी। इसके बाद कैनाथ की दोस्त शहनाज अपने पति इरफान, बेटी आफरीन और बेटे अवैश समेत दो अन्य रिश्तेदारों आशु और समीर के साथ घटनास्थल पर पहुँचे। सभी ने सुहैल के साथ जमकर मारपीट की। इस दौरान आरोपितों में से एक ने उस पर चाकू से हमला कर दिया। इसके बाद सभी मौके से फरार हो गए। पुलिस के मुताबिक, घटनास्थल से चाकू भी बरामद किया गया है।

भाजपा सांसद रंजीता कोली पर राजस्थान में ईंट और रॉड से हमला, बेहोश हालत में पहुँचाई गईं अस्पताल

राजस्थान के भरतपुर में भाजपा सांसद रंजीता कोली पर गुरुवार (मई 27, 2021) को रात के समय अज्ञात बदमाशों ने हमला किया। हमले के समय रंजीता धरसोनी गाँव में कम्युनिटी हेल्थ सेंटर का दौरा करने पहुँची थी। हमले के बाद की तस्वीरों में देख सकते हैं कि उनकी गाड़ी के शीशे टूटे पड़े हैं और सीट पर ईंट-पत्थर भी दिख रहे हैं।

समाचार एजेंसी एएनआई के अनुसार सांसद रंजीता कोली ने बताया कि रात को करीब 11.30 बजे 5-6 लोगों ने उनकी कार पर हमला करते हुए पत्थरबाजी की। रंजीता कोली ने कहा कि वह जिले के सभी अस्पतालों का निरीक्षण करती हैं ताकि कोविड पॉजिटिव मरीजों का इलाज सुनिश्चित किया जा सके। उन्होंने कहा कि उन्हें किसी से कोई शिकायत नहीं है, मगर पुलिस इस पूरे मामले की जाँच करेगी।

रंजीता कोली के ट्विटर अकॉउंट से इस हमले की एक वीडियो शेयर की गई है। वीडियो में लिखा है, “आज रात भरतपुर के आरबीएम हॉस्पिटल का निरीक्षण करने के बाद सीएचसी वैर का निरीक्षण करने जा रहीं भरतपुर सांसद रंजीता कोली के काफिले पर धरसोनी गाँव के समीप हथियार बंद बदमाशों द्वारा हमला किया गया।”

सासंद की टीम ने ट्विटर पर बताया कि हमला इतना भयावह था कि सांसद अचेत होकर बेहोश हो गईं। पुलिस से संपर्क किया गया परंतु पुलिस को घटनास्थल तक पहुँचने में 45 मिनट लग गए। वहीं दूसरी ओर भरतपुर डीएम को लगातार फोन करने के बाद भी उन्होंने फोन नहीं उठाया। 

जानकारी के अनुसार रंजीता को गुरुवार रात हुए इस हमले में ज्यादा चोट नहीं आई है। हमलावर एक कार में आए थे। उन्होंने सांसद रंजीता कोली की कार को रोका और फिर पत्थरबाजी करने लगे। इस हमले में सरिए से कार की खिड़की के शीशे तोड़ दिए गए। जिसके बाद सांसद बेहोश हो गईं और उन्हें व उनके सहयोगियों को जिला अस्पताल ले जाया गया। गंभीर चोटें न होने के कारण उनको बाद में डिस्चार्ज मिल गया।

बता दें कि रंजीता कोली भरतपुर से पहली बार सांसद बनी हैं, जबकि उनके ससुर गंगाराम कोली तीन बार सांसद रह चुके हैं। सांसद रंजीता कोली ने बताया कि कोरोना के दौरान वह रोजाना जिले के सभी अस्पतालों की व्यवस्था को देखने के लिए निरीक्षण करती हैं, जिससे आमजन को समय पर इलाज मिल सके। वह कहती हैं कि उनकी किसी से भी रंजिश नहीं है, लेकिन अब इस पूरे मामले की जाँच पुलिस करेगी। उनका कहना है की यदि सुरक्षा गार्ड नहीं होते तो शायद आज वह जिंदा नहीं होती।

उइगर मुस्लिमों के बाद अब चीन के निशाने पर ईसाई? ‘ब्रेनवॉश’ के आरोप में पादरियों को किया गिरफ्तार, बाइबिल ऐप्स को हटाया

चीन पर उइगर मुस्लिमों के उत्पीड़न का आरोप तो लगता ही रहा है लेकिन अब कम्युनिस्ट सरकार द्वारा शासित देश पर ईसाइयों के शोषण का आरोप भी लगाया जा रहा है। हाल ही में कुछ मीडिया रिपोर्ट्स में बताया गया कि चीन में कुछ ईसाई पादरियों को ‘ब्रेनवॉश’ के आरोप में गिरफ्तार किया गया है। इसके अलावा चीन ने अपने ऐप स्टोर से बाइबिल से जुड़े कई एप्लीकेशन को हटा दिया है।

चीन में 20 मई 2021 को चार ईसाई पादरियों को, जो कि शैक्षणिक प्रोफेसर के तौर पर काम कर रहे थे, गिरफ्तार कर लिया गया। इसके अलावा तीन अन्य पादरियों को हेबेई प्रांत से गिरफ्तार किया गया। इन सभी पादरियों पर धार्मिक तरीकों का उपयोग करके ब्रेनवॉश करने का आरोप लगाया गया है। इसके अलावा 10 छात्रों को भी शाहेकियाओ प्रांत से गिरफ्तार किया गया है।

चीन में लागू हुए धार्मिक गतिविधियों से जुड़े नए कानून

1 मई 2021 को चीन में धार्मिक गतिविधियों से संबंधित नए कानून लागू हुए जो कई मायनों में कड़े और प्रतिबंधात्मक हैं। चीन में ईसाई पादरी को अब चाइनीज कैथोलिक बिशप कॉन्फ्रेंस द्वारा अप्रूव होना चाहिए जो कि चीन की कम्युनिस्ट सरकार द्वारा समर्थित है। इसके अलावा पद पर बने रहने के लिए आवश्यक है कि पादरी वर्ग चाइनीज कम्युनिस्ट पार्टी (CCP) के नेतृत्व का हमेशा समर्थन करता रहे।

कई मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार चीन ने अपने ऐप स्टोर से कई ऐसे एप्लीकेशन को हटा दिया है जो बाइबिल से संबंधित थे। इसके अलावा ईसाइयों के कई प्रभावी लोगों के वीचैट अकाउंट्स को भी डिलीट कर दिया गया है। चीन पर आरोप है कि ऐसा इसलिए किया जा रहा है जिससे ईसाइयों की ऑनलाइन उपस्थिति को सीमित किया जा सके।

चीन में हजारों की संख्या में तोड़े या बंद किए गए चर्च

चीन बाइबिल को भी बदलने की कोशिश कर रहा है और उसे चीन के हिसाब से ही बनाने के प्रयास में जुटा हुआ है। इसके अलावा रिपोर्ट्स में यह भी बताया गया है कि चीन के कई हिस्सों में हजारों की संख्या में चर्च या तो तोड़ दिए गए या बंद हो गए हैं। चीन के कई प्रांतों में 18 वर्ष से कम उम्र के बच्चों को चर्च में जाने का अधिकार भी नहीं है।

अंतरराष्ट्रीय धार्मिक स्वतंत्रता पर अमेरिकी कमीशन की 2021 की रिपोर्ट में यह बताया गया है कि ऐसे ईसाई बिशप चीन की हिरासत में हैं जिन्होंने चीनी कम्युनिस्ट सरकार द्वारा समर्थित कैथोलिक एसोसिएशन से जुड़ने से इनकार का दिया। ये ईसाई बिशप चीन की प्रताड़ना का शिकार हो रहे हैं।

चीन हमेशा से ही मानव और धार्मिक अधिकारों को कुचलने का आरोपी रहा है, चाहे वो शिनजियांग में उइगर मुस्लिम हों या फिर तिब्बती। हालाँकि विश्व समुदाय और कई मानव अधिकार संस्थाएं समय-समय पर चीन का विरोध करती रहती हैं और चीन द्वारा सरकार समर्थित मानव अधिकारों के दमन पर रिपोर्ट जारी करती रहती हैं लेकिन चीन इन रिपोर्ट्स को एक सिरे से नकार देता है और अपनी नीतियों पर अडिग रहता है।     

बेंगलुरु रेप वायरल वीडियो मामला: भाग रहा था 2 बांग्लादेशी, पुलिस ने टाँग में गोली मार कर दबोच लिया

बेंगलुरु में 22 साल की महिला के साथ दुष्कर्म करने वाले 5 आरोपितों में से 2 पर पुलिस को गोली चलानी पड़ी। कथित तौर पर शुक्रवार (28 मई) को दोनों ने पुलिस पर हमला बोलकर भागने की कोशिश की। दोनों को पकड़ने में पुलिस को उन पर फायरिंग करनी पड़ी।

जानकारी के अनुसार, पुलिस 28 मई की सुबह 5 बजे सभी आरोपितों को दोबारा क्राइम सीन पर लेकर गई थी। इसी दौरान दो आरोपितों रिदॉय बाबू (25) और सागर (23) ने फरार होने का प्रयास किया। कोई अन्य विकल्प न होने के कारण पुलिस को उन पर गोली चलानी पड़ी। घायल होने के कारण दोनों को अस्पताल में भर्ती करवाया गया है।

बता दें कि सोशल मीडिया पर एक वीडियो वायरल हुआ था, जिसमें कुछ लोग एक महिला को प्रताड़ित करते हुए उसका गैंगरेप करते दिख रहे थे। कहा जा रहा था कि पीड़िता नॉर्थ-ईस्ट की है, लेकिन बेंगलुरु पुलिस ने बताया है कि वो बांग्लादेशी है। उसकी ट्रैफिकिंग (मानव तस्करी) कर के उसे भारत लाया गया था। पुलिस ने इस मामले में 6 आरोपितों को चिह्नित कर के उनमें से 5 को गिरफ्तार करने में सफलता पाई।

बेंगलुरु सिटी के पुलिस कमिश्नर कमल कांत ने बताया कि शुरुआती जाँच के बाद बलात्कार और प्रताड़ना का मामला दर्ज कर लिया गया। पीड़िता को खोजने के लिए पुलिस की एक अलग टीम बनाई गई है। अब तक मिली सूचनाओं के अनुसार, सभी आरोपित बांग्लादेशी माने जा रहे हैं और पुलिस ने आशंका जताई है कि ये किसी गैंग का हिस्सा हैं।