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रूस से आया S-400 ही नहीं, ‘मेक इन इंडिया सिस्टम’ ने भी फेल किए पाकिस्तानी हमले: AKASH-L70 ने हर ड्रोन मार गिराया, जानिए कैसे देश में ही बने मिसाइलों से बचाने वाले कवच

8 मई, 2025 को पाकिस्तान ने जम्मू, अमृतसर, पठानकोट, जैसलमेर समेत कई भारतीय शहरों को अपना निशाना बनाया। उसने इन शहरों पर ड्रोन स्वार्म (ड्रोन का समूह) दागा। पाकिस्तान इसके जरिए भारत के सैन्य ठिकानों और रिहायशी इलाकों में नुकसान पहुँचाना चाहता था। इसका भारत ने करारा जवाब दिया, उन्होंने यह सभी हमले नाकाम कर दिए। भारत ने इसके अपनी उन्नत रक्षा प्रणालियों का इस्तेमाल किया। जहाँ रूस से लिए गए S-400 सिस्टम ने कई हमले नाकाम किए तो वहीं अधिकांश को जवाब भारतीय सिस्टमों ने ही दिया।

ऑपरेशन सिंदूर के बाद से S-400 और उसको भारतीय सेना में शामिल करने को लेकर काफी चर्चा हुई है। हालाँकि, इस चर्चा में भारतीय एयर डिफेन्स सिस्टम AKASH, उन्नत L-70 तोपों और MRSAM जैसे सिस्टमों के विषय में ज्यादा बात नहीं हुई। पाकिस्तान के इस हमले को नाकाम करने में इनका सबसे बड़ा रोल रहा है। पाकिस्तान ने हमला जरूर किया लेकिन यह इतने भी जबरदस्त नहीं थे कि इनके लिए हजारों करोड़ के S-400 जैसे सिस्टम का इस्तेमाल लगातार किया जाए। नीचे हम बता रहे हैं कि कौन-कौन से भारतीय सिस्टम इस्तेमाल हुए हैं।

AKASH मिसाइल सिस्टम

AKASH मिसाइल सिस्टम को DRDO ने विकसित किया है। यह एक सरफेस टू एयर मिसाइल (SAM) सिस्टम है। इसका मुख्य काम दुश्मन के हवाई हमले का जावाब देना है। यह दुश्मन के विमानों इसे भारत डायनामिक्स लिमिटेड (BDL) और भारत इलेक्ट्रॉनिक्स लिमिटेड (BEL) ने विकसित किया है। AKASH सिस्टम वर्ष 2009 में भारतीय सेना में शामिल है।

इसका इस्तेमाल थल सेना और वायु सेना, दोनों ही करती है। रिपोर्ट्स बताती हैं कि भारत के पास वर्तमान में 15000+ से अधिक AKASH मिसाइल हैं। एक AKASH सिस्टम की कीमत लगभग ₹2.5 करोड़ है। इसकी एक यूनिट में एक राडार और चार लॉन्चर होते हैं। इसमें शामिल राडार का नाम राजेन्द्र है।

यह दुश्मन के हवाई टारगेट को ट्रैक करता है। यह दुश्मन की मिसाइलें, लड़ाकू विमान और ड्रोन जैसे चीजों को ट्रैक करता है। इसके बाद AKASH सिस्टम में शामिल 3 लॉन्चर इन पर मिसाइलें दागते हैं। AKASH सिस्टम एक बार में 64 ऐसे टारगेट ट्रैक कर सकता है और उनमें से 12 को निपटा सकता है।

यह लगभग 50 किलोमीटर दूर से खतरे को ट्रैक कर सकता है और 18 किलोमीटर तक की ऊँचाई पर उड़ रहे किसी दुश्मन के किसी मिसाइल-विमान को गिरा सकता है। AKASH सिस्टम को भारत ने सीमाई इलाकों में तैनात किया हुआ है। यह भारत के कई एयरबेस और सीमाई पोस्ट पर तैनात है।

पाकिस्तान के हमलों को इसी सिस्टम ने बड़े पैमाने पर रोका है। AKASH मिसाइल सिस्टम ने पाकिस्तान द्वारा फायर किए गए ड्रोन मार गिराए हैं। सैन्य अधिकारीयों ने भी इसकी पुष्टि की है। उन्होंने कहा है कि इसका पूरा इस्तेमाल इस हमले में किया गया है।

MRSAM मिसाइल सिस्टम

भारत ने इस हमले में MRSAM सिस्टम भी इस्तेमाल किया हैं। यह भी सरफेस टू एयर मिसाइल (SAM) सिस्टम है लेकिन यह AKASH सिस्टम से अधिक दूरी तक मार करने में सक्षम है। इसे भी DRDO ने विकसित किया है। इसे इजरायल के साथ मिलाकर बनाया गया है।

MRSAM में सुपरसोनिक मिसाइल शामिल होती हैं। यह लगभग 70 किलोमीटर तक के लक्ष्यों को उड़ाने में सक्षम है। MRSAM को वर्तमान में भारतीय वायुसेना और नौसेना इस्तेमाल करते हैं। MRSAM को ट्रकों पर लगाया जा सकता है और इसे जहाजों पर भी लगाया जाता है। रिपोर्ट्स बताती हैं कि इसे भी भारत के वायुसेना के अड्डों पर भी तैनात की गई है।

MRSAM सिस्टम लगभग 2000 किलोमीटर का इलाका कवर करता है और इसमें आने वाले किसी हवाई खतरे को तुरंत उड़ा देता है। MRSAM को भी रिपोर्ट्स के अनुसार इस हमले में इस्तेमाल किया गया है। वायुसेना में MRSAM को 2021 में शामिल किया गया था। MRSAM को और भी विकसित करने पर वर्तमान में काम चल रहा है।

L-70 एंटी एयरक्राफ्ट गन

इन मिसाइल सिस्टम के अतिरिक्त भारत ने पाकिस्तानी ड्रोन गिराने के लिए बड़े पैमाने पर L-70 एंटी एयरक्राफ्ट गन भी इस्तेमाल की। यह स्वीडन की बोफोर्स कम्पनी ने बनाई है और इसका निर्माण भारत में ही लार्सन एंड टुब्रो कम्पनी करती है। भारत के पास ऐसी 1000 ऐसी एंटी एयरक्राफ्ट गन हैं।

भारत ने इन्हें राडार समेत अन्य कई तकनीकी मोर्चों पर मजबूत भी किया है। L-70 एंटी एयरक्राफ्ट गन अब ड्रोन हमले नाकाम में करने में भी बड़े स्तर पर सक्षम है। यह लगभग 4 किलोमीटर दूरी तक मार करती है। यह दुश्मन के ड्रोन को केवल फायर करके ही नहीं गिराती बल्कि उन्हें जाम भी कर देती है।

L-70 को भारत ने जम्मू-कश्मीर, पूर्वोत्तर राज्यों और अंतरराष्ट्रीय सीमा पर कई जगह लगा रखा है। L-70 के कई ड्रोन को गिराने के वीडियो भी सोशल मीडिया पर वायरल हुए हैं। कई विशेषज्ञों ने बताया है कि जम्मू के ऊपर हुए अधिकांश हमले इसी एंटी एयरक्राफ्ट गन ने नाकाम किए हैं।

DRDO का काउंटर UAS सिस्टम

पाकिस्तान के हमले को नाकाम करने के लिए DRDO का कौन्ते UAS सिस्टम भी इस्तेमाल किया गया है। आधिकारिक तौर भी इस बात की पुष्टि की जा चुकी है। DRDO ने D4 नाम से एक ड्रोन विरोधी सिस्टम तैयार किया है। इसका नाम D4 है। इसे एक ट्रक पर लगाया जाता है।

इसका निर्माण BEL करती है। BEL ने इसके बारे में बताया है कि यह काउंटर ड्रोन सिस्टम (डी4 सिस्टम) उड़ते हुए ड्रोन (माइक्रो/स्मॉल यूएवी) को तुरंत खोजने, पता लगाने, ट्रैकिंग और न्यूट्रलाइजेशन (सॉफ्ट/हार्ड किल) करने में सक्षम है। DRDO का यह सिस्टम भी फायर के अलावा ड्रोन को जाम करके गिरा सकता है।

यह एकदम नई तकनीक है लेकिन इसे भी कई जगह तैनात किया जा चुका है।

इन भारतीय सिस्टम के अलावा भारत ने शिल्का, ZU-23 और S-400 समेत कई ऐसे ही एयर डिफेन्स तकनीकों का इस्तेमाल पाकिस्तान के खिलाफ किया है। इसके चलते पाकिस्तान कोई भी नुकसान भारतीय शहरों को नहीं पहुँचा पाया है। हालाँकि, भारत द्वारा किए गए हमलों में लाहौर का एयर डिफेन्स तबाह कर दिया गया है।

कोयला खदान ही नहीं… ऑस्ट्रेलिया में अब समंदर वाले पोर्ट पर भी अडानी ग्रुप का कब्जा: सिंगापुर की कंपनी से हुआ सौदा, कैश की जगह शेयरों में की लेनदेन

अडानी पोर्ट्स एंड स्पेशल इकोनॉमिक जोन लिमिटेड ने सिंगापुर की कारमाइकल रेल एंड पोर्ट सिंगापुर होल्डिंग्स से एबॉट पॉइंट पोर्ट होल्डिंग्स की 100% हिस्सेदारी खरीदते हुए उसका अधिग्रहण कर लिया है। यह सौदा 17,244 करोड़ रुपये का है और इसे नकद के बजाय शेयरों के आदान-प्रदान (FDI-ODI शेयर स्वैप) के जरिए पूरा किया गया।

रिपोर्ट्स के मुताबिक, सौदे की शेयर खरीद और सदस्यता समझौता 17 अप्रैल 2025 को साइन किया गया, लेकिन इसे पूरा होने के लिए नियामक और शेयरधारकों की मंजूरी की जरूरत है। इस अधिग्रहण से अडानी पोर्ट्स की वैश्विक उपस्थिति मजबूत होगी, क्योंकि एबॉट पॉइंट पोर्ट ऑस्ट्रेलिया के उत्तरी क्वींसलैंड में एक प्रमुख निर्यात टर्मिनल है।

एबॉट पॉइंट पोर्ट का अधिग्रहण इसलिए भी खास है, क्योंकि ये ऑस्ट्रेलिया के उन चंद पोर्ट्स में से है, तो तट (2.75 किमी) से सबसे नजदीक गहरे पानी का पोर्ट है। यानी यहाँ से बड़े मालवाहक जहाज कोयले का परिवहन कर सकते है। इसके अलावा इस पोर्ट प्वॉइंट तक जाने के लिए विशेष तौर पर एक रेलवे लाइन भी बनाई गई है, जिससे सामान आसानी से पहुँचाया जा सकता है।

बता दें कि ऑस्ट्रेलिया में अडानी की कंपनी के पास कोयले के खदान भी है। ऐसे में ये अधिग्रहण कंपनी के लिए बेहद फायदे का सौदा साबित हो सकता है।

इस सौदे के लिए सिरिल अमरचंद मंगलदास ने कानूनी सलाह दी। सिरिल अमरचंद की टीम का नेतृत्व रुतविज पंड्या, परिधि अडानी, सुभलक्ष्मी नस्कर और मोल्ला हसन ने किया, जिन्हें कई सहयोगियों ने सहायता दी। पिछले साल भी सिरिल अमरचंद ने अडानी पोर्ट्स को गोपालपुर पोर्ट और एस्ट्रो ऑफशोर के अधिग्रहण में सलाह दी थी।

यह सौदा सेबी (ICDR) नियमों के तहत प्राथमिकता आधार पर शेयर जारी करके किया गया। अडानी पोर्ट्स भारत की सबसे बड़ी पोर्ट और लॉजिस्टिक्स कंपनी है, जो 13 स्थानों पर मौजूद है। यह अधिग्रहण अडानी समूह की पूर्वी और पश्चिमी तटों पर समानता की रणनीति का हिस्सा है।

भारत ने 1 ही रात में गिराए 50+ पाकिस्तानी ड्रोन, फाइटर जेटों को भी मिसाइल से उड़ाया: 15 शहरों पर हमले करने की कोशिश पूरी तरह नाकाम, ‘सुदर्शन’ देश की सुरक्षा में तैनात

पहलगाम आतंकी हमले के बाद पाकिस्तान के आतंकी ठिकानों को भारत ने ‘ऑपरेशन सिंदूर’ के जरिए धवस्त किया। भारत के हमले से पाकिस्तान में लगी आग के बाद पाकिस्तानी फौज लगातार LOC पर फायरिंग कर शांति समझौते को तोड़ रही है। इस बीच भारतीय सेना ने पुष्टि की है कि 8 और 9 मई 2025 देर रात और सुबह पाकिस्तान द्वारा भारत में कई स्थानों पर किए गए हमलों के प्रयासों को सफलतापूर्वक विफल कर दिया गया है। पाकिस्तान के 3 फाइटर जेट समेत उसकी दर्जनों मिसाइल और 50 से अधिक ड्रोन को हवा में ही साफ कर दिया।

पाकिस्तान ने मुख्य रूप से उत्तरी और पश्चिमी भारत के 15 महत्वपूर्ण शहरों और सैन्य ठिकानों को निशाना बनाने की कोशिश की थी। पाकिस्तान ने जिन शहरों पर हमले किए थे, उनमें मुख्य रुप से अमृतसर, पठानकोट, जम्मू, और भुज शामिल थे। इसके अलावा पाकिस्तान ने उधमपुर, सांबा, जम्मू, अखनूर, नगरोटा सहित कई क्षेत्रों को ड्रोन के जरिए निशाना बनाया था, जिसका जवाब भारतीय सेना की वायु रक्षा इकाइयों और सुरक्षा बलों ने मुँहतोड़ दिया है। जानकारी के मुताबिक L-70 गन, जेडयू-23 मिमी, शिल्का सिस्टम और कुछ एडवांस काउंटर-यूएएस उपकरणों के जरिए भारतीय सेना ने पाकिस्तानी ड्रोन को खत्म किया। इसके अलावा पाकिस्तान ने जम्मू-कश्मीर के कुपवाड़ा, बारामूला, उरी, पुंछ, मेंढर और राजौरी सेक्टरों में मोर्टार और भारी कैलिबर आर्टिलरी का इस्तेमाल किया और LOC पर गोलीबारी तेज की, जिसका जवाब भारतीय सेना ने दिया।

भारतीय सेना के प्रवक्ता ने एक आधिकारिक बयान में कहा, “कल रात (8 मई 2025) से, हमने पाकिस्तान की ओर से कई उकसाने वाले ड्रोनऔर मिसाइल हमलों के प्रयासों को देखा। हमारी मजबूत और बहुस्तरीय रक्षा प्रणाली ने इन सभी खतरों को समय पर पहचान कर निष्प्रभावी कर दिया। किसी भी नागरिक या सैन्य संपत्ति के नुकसान की कोई खबर नहीं है। हमारे जवान पूरी तरह से सतर्क हैं और देश की सुरक्षा के लिए प्रतिबद्ध हैं।”

सेना के सूत्रों के अनुसार, भारत की वायु रक्षा प्रणाली, जिसमें स्वदेशी रूप से विकसित आकाश मिसाइल प्रणाली और अन्य आधुनिक रडार प्रणालियाँ शामिल हैं, ने पाकिस्तानी मिसाइलों और ड्रोनों को सीमा के पास ही नष्ट कर दिया। इसके अलावा, सीमा सुरक्षा बल (BSF) और अन्य सुरक्षा एजेंसियों ने घुसपैठ की कोशिशों को भी विफल कर दिया। माना जा रहा है कि S-400 ‘सुदर्शन कवच‘ जैसी एडवांस निगरानी प्रणालियों ने इन हमलों के प्रयासों का पता लगाने और उन्हें नाकाम करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। यह प्रणाली उच्च-रिज़ॉल्यूशन इमेजिंग और थर्मल सेंसर से लैस है, जो दुश्मन की गतिविधियों की सटीक जानकारी प्रदान करती है।

भारतीय वायु सेना (IAF) ने पाकिस्तान के भीतर कुछ चिन्हित लक्ष्यों को सफलतापूर्वक निशाना बनाया है। जानकारी के मुताबिक, इन लक्ष्यों में पाकिस्तानी वायु रक्षा रडार स्टेशन और लॉजिस्टिक्स ठिकाने शामिल थे। यह कार्रवाई पाकिस्तान द्वारा किए गए हमलों के जवाब में ‘उसी क्षेत्र और उसी तीव्रता’ के सिद्धांत पर आधारित थी।

कुल मिलाकर, पाकिस्तान के भारत में हमले करने के सभी प्रयास विफल रहे हैं। जबकि पाकिस्तान के हमले दिशाहीन और नाकाम साबित हुए हैं, भारत की जवाबी कार्रवाई सटीक और प्रभावी रही है, जिसने दुश्मन के सैन्य ढाँचे को नुकसान पहुँचाया है। सीमा पर तनाव अभी भी बना हुआ है, लेकिन भारतीय सेना पूरी तरह से किसी भी स्थिति से निपटने के लिए तैयार है।

बलूचिस्तान ने भी उड़ाई पाकिस्तानी फौज की धज्जियाँ… BLA ने ट्रक बम से उड़ाया, गैस पाइपलाइन में भी विस्फोट: 6 जगह ताबड़तोड़ हमले; बलोच बोले- हमें मिल गई आजादी

आतंकवादियों को पनाह देकर उन्हें पालने पोसने वाले इस्लामिक स्टेट पाकिस्तान की खैर मुश्किल में है। भारत से बैर लेकर एक ओर लाहौर और इस्लामाबाद को अपने निशाने पर ले लिया तो वहीं दूसरी ओर दशकों से मन में आजादी की ज्वाला लिए बलोच लिबरेशन आर्मी (BLA) ने भी मौका देखकर पाकिस्तान पर धावा बोल दिया है।

बलूचिस्तान के प्रसिद्ध लेखक और बलूच लोगों की अधिकारों के लिए लड़ने वाले करने वाले मीर यार बलूच ने दावा किया है कि BLA ने पाकिस्तान के डेरा बुगती के गैस क्षेत्रों पर हमला कर दिया था। इस जगह पर 100 से भी अधिक गैस के कुएँ बने हैं। ये पाकिस्तान के लिए गैस आपूर्ति की मुख्य जगहों में से एक है।

इसके अलावा BLA ने पाकिस्तान की सेना की अलग अलग चौकियों पर हमला कर दिया। BLA का दावा है कि उनकी सेना ने पाकिस्तान के कब्जे वाले बलूचिस्तान के कीच, मुस्तंग, कच्ची और जामरान समेत अलग अलग 6 जगहों पर हमले किए हैं। रिमोट कंट्रोल बम और अन्य हथियारों के जरिए किए गए हमलों में पाक सेना को नुकसान भी हुआ है।

इसके साथ ही मीर यार ने सोशल मीडिया पर पोस्ट लिखकर संयुक्त राष्ट्र से बलूच को स्वतंत्र राष्ट्र घोषित करने की माँग की है।

अपनी पोस्ट में मीर यार बलूच ने लिखा, “हमने अपनी आजादी का ऐलान कर दिया है। पाकिस्तान का अंत निकट है। हम भारत से अनुरोध करते हैं कि नई दिल्ली में बलूचिस्तान का दूतावास बनाने की अनुमति दें। साथ ही UN से अनुरोध है कि वे ‘डेमोक्रेटिक रिपब्लिक ऑफ बलूचिस्तान’की आझादी को मान्यता देकर सदस्य देशों की बैठक के साथ समर्थन दें।”

बलूचिस्तान की स्वतंत्रता के लिए लेखक मीर यार काफी सक्रिय भूमिका में नजर आते हैं। एक्स पर वह भारत और बलूचिस्तान की दोस्ती की तस्वीरें साझा करते रहते हैं। एक अन्य पोस्ट में मीर यार ने पाकिस्तान के सैन्य ट्रक को उड़ाने की वीडियो साझा की है। इसमें 14 पाकिस्तानी सैनिकों के मारे जाने का दावा किया गया है।

मझधार में पाकिस्तान

भारतीय सेना ने 7 मई 2025 को ‘ऑपरेशन सिंदूर’ से पाकिस्तान और पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर में बसे 9 आतंकी ठिकानों को मिसाइल अटैक कर ध्वस्त कर दिया। इसमें जैश-ए-मोहम्मद के सरगना मसूद अजहर के घर के 14 लोगों समेत जैश, लश्कर- ए-तैयबा और हिजबुल मुजाहिद्दीन के लगभग 100 आतंकियों के मारे जाने की बात सामने आई। इससे बौखलाए पाकिस्तान ने भारत पर जवाबी हमले किए लेकिन भारतीय सैन्य प्रणालियों ने सभी हमलों को नाकाम कर दिया।

अब पाकिस्तान को एक तरफ भारत की अभेद सैन्य शक्तियों का सामना करना पड़ रहा है। वहीं बलोच ने भी मौका देखकर आजादी का मोर्चा खोल दिया है। इससे पाकिस्तानी सेना को देश के बाहर के साथ अपने मुल्क के अंदर भी जंग लड़नी पड़ रही है।

भारत की मिसाइलों से दहला पाकिस्तान का जर्रा-जर्रा, प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ के घर से मात्र 20KM दूर गिरा बम: इस बार लाहौर, कराची समेत 9 शहर लिए निशाने पर

भारत ने पाकिस्तान पर जवाबी कार्रवाई करते हुए 300 किलोमीटर तक अंदर मौजूद ज्यादातर अहम ठिकानों पर जबरदस्त हमले किये जिससे पाकिस्तान थर्रा उठा। 8 मई की रात पाकिस्तान की राजधानी इस्लामाबाद समेत 9 अहम शहरों पर भारत ने मिसाइलों और ड्रोन की बौछार कर दी। एबटाबाद जहाँ कभी आतंकवादी ओसाम बिन लादेन छिपा हुआ था उस शहर पर भी मिसाइल दागे गए।

इतना ही नहीं एलओसी पर हो रहे गोलीबारी और ड्रोन अटैक का भी जबरदस्त जवाब दिया। न सिर्फ पाकिस्तान के ड्रोन और मिसाइल अटैक को निरस्त किया बल्कि ताबड़तोड़ जवाबी कार्रवाई करते हुए पाकिस्तान की नाक में दम कर दिया। भारत ने जिन शहरों पर हमले किये उसमें इस्लामाबाद, लाहौर, कराची, सियालकोट, पेशावर, बहावलपुर शामिल हैं। भारत की वायु सेना. नौसेना और थल सेना ने कदम से कदम मिलाते हुए पूरे ऑपरेशन को अंजाम दिया।

कराची पर जबरदस्त हमला

अरब सागर में तैनात विमान वाहक पोत आईएनएस विक्रांत ने कराची पर बड़ा हमला किया और एक के बाद एक कई मिसाइलें और ड्रोन दागे। पाकिस्तान की आर्थिक राजधानी कहा जाने वाला शहर कराची पर अटैक से पाकिस्तान तिलमिला उठा है। ये पाकिस्तान का अहम बंदरगाह है जो भारत से करीब 350 किलोमीटर दूर है।

इस्लामाबाद- लाहौर पर अटैक

भारत के गोले राजधानी इस्लामाबाद तक पहुँच गए। यहाँ राष्ट्रपति, पीएम कार्यालय, सुप्रीम कोर्ट, संसद भवन जैसे अहम संस्थान हैं। वहीं पाकिस्तानी पंजाब का अहम शहर लाहौर भारत के निशाने पर रहा।

पेशावर और रावलपिंडी पर हमला

खैबर पख्तूनख्वा प्रांत की राजधानी पेशावर कई मायने में पाकिस्तान के लिए अहम है। भारत के ड्रोन ने यहाँ स्थित पाकिस्तानी सैन्य ठिकानों पर हमला किया। वहीं रावलपिंडी पाकिस्तानी सेना का मुख्यालय है। भारत ने पाकिस्तानी सेना के गढ़ पर हमला कर ये साबित किया कि हम घर में घुस कर मारेंगे.

सियालकोट पर जवाबी कार्रवाई

पाकिस्तान के पंजाब प्रांत के उत्तर पूर्व में स्थित सियालकोट पाकिस्तानी फौज के लिए काफी अहम है और व्यावसायिक शहर भी है। ये अमृतसर से 100 किलोमीटर दूर है जबकि जम्मू से 47 किलोमीटर दूर है। भारत ने जवाबी कार्रवाई में पाकिस्तान के अंदर 300 किलोमीटर से ज्यादा दूर शहरों पर भी बम बरसाए। इसके अलावा गुजरांवाला, अटॉक, मिआनो, खेनजूं, बहावा जैसे शहरों में भी धमाके हुए. यहाँ तक कि पाकिस्तान के एयरबोर्न वार्निंग एंड कंट्रोल सिस्टम यानी AWACS को भी नष्ट कर दिया।

8 मई को देर रात रक्षा मंत्रालय ने बयान जारी कर कहा, “केवल पाकिस्तान ही ये फैसला ले सकता है कि वो भारत के साथ तनाव कम कर सकता है या नहीं क्योंकि भारत ने पहलगाम हमले का जवाब दिया था। इससे पहले भारत ने जम्मू से जैसलमेर तक पाकिस्तान के ड्रोन और मिसाइल हमले को नाकाम कर दिया. भारतीय एयर डिफेंस सिस्टम सुदर्शन ने इन हमलों को नाकाम किया है. पाकिस्तान के हमले को देखते हुए जम्मू कश्मीर, पंजाब, राजस्थान, गुजरात, हिमाचल समेत कई राज्यों के कई शहरों में ब्लैक आउट किया गया था. भारतीय सुरक्षाबलों ने पाकिस्तान के अत्याधुनिक विमान F-16 और JF-17 को मार गिराए. भारत ने 7 मई को कई शहरों में पाकिस्तानी वायु रक्षा प्रणालियों को निशाना बनाया था

जिस ‘द आयरिश टाइम्स’ ने चलाया पाकिस्तान का प्रोपेगेंडा, उसी में लेख लिख कर भारतीय राजदूत ने लगाई लताड़: ऑपइंडिया को बताया – ये हमेशा चलाते हैं हिन्दू विरोधी एजेंडा

आयरलैंड में भारत के राजदूत अखिलेश मिश्रा ने पहलगाम में हुए आतंकवादी हमले पर ‘द आयरिश टाइम्स’ के संपादकीय की तीखी आलोचना की। उन्होंने अखबार पर हिंसा की स्पष्ट रूप से निंदा न करने और इसके बजाय आतंकवादियों तथा उनके समर्थकों को अप्रत्यक्ष रूप से संरक्षण देने का आरोप लगाया। अखिलेश मिश्रा ने ‘द आयरिश टाइम्स’ के दृष्टिकोण को पक्षपातपूर्ण और संवेदनहीन बताया।

मंगलवार (6 मई, 2025) को भारत के राजदूत अखिलेश मिश्रा ने ‘द आयरिश टाइम्स’ द्वारा फैलाए गए दुष्प्रचार का एक विस्तृत खंडन प्रकाशित किया। उन्होंने इस पर गहरी निराशा व्यक्त करते हुए कहा कि अखबार ने पहलगाम आतंकवादी हमले के संदर्भ में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की कथित ‘तलवारें लहराने’ की आलोचना पर तो ज़ोर दिया, लेकिन हमले के पीड़ितों के प्रति संवेदना या एकजुटता दिखाने में पूरी तरह विफल रहा।

‘X’ (पूर्व में ट्विटर) पर एक पोस्ट साझा करते हुए भारत के राजदूत अखिलेश मिश्रा ने कहा, “पहलगाम में हुए आतंकवादी हमले पर ‘द आयरिश टाइम्स’ के दुर्भावनापूर्ण संपादकीय पर अखिलेश मिश्रा का जवाब – यह लेख आतंकवाद की स्पष्ट निंदा करने और निर्दोष पीड़ितों के प्रति सहानुभूति जताने की बजाय, प्रधानमंत्री मोदी पर ‘तलवारें लहराने’ का आरोप लगाता है और भारत की तुलना पाकिस्तान से करता है, जिससे आतंकवादियों और उनके प्रायोजकों को अप्रत्यक्ष रूप से कवर फायर मिलता है।”

‘द आयरिश टाइम्स’ के संपादक को लिखे एक पत्र में भारत के राजदूत अखिलेश मिश्रा ने कहा कि जम्मू कश्मीर के पहलगाम में हुए आतंकवादी हमले पर अखबार के संपादकीय में न केवल पेशेवर निष्पक्षता का अभाव है, बल्कि यह आयरलैंड के आम नागरिकों और नेताओं, विशेषकर ताओसीच माइकल मार्टिन द्वारा भारत के प्रति व्यक्त की गई सहानुभूति के भी विपरीत है। मिश्रा ने उल्लेख किया कि मार्टिन ने स्पष्ट रूप से कहा था कि आयरलैंड इस दुखद घटना के मद्देनज़र भारत के लोगों के साथ एकजुटता में खड़ा है।

राजदूत अखिलेश मिश्रा ने अपने पत्र में यह स्पष्ट किया कि यूरोपीय संघ की अध्यक्ष उर्सुला वॉन डेर लेयेन और संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद सहित अंतर्राष्ट्रीय समुदाय ने पहलगाम आतंकी हमले की कड़े शब्दों में निंदा की है। उन्होंने ‘द आयरिश टाइम्स’ के संपादकीय में महत्वपूर्ण विवरणों की अनुपस्थिति को भी उजागर किया, विशेष रूप से उन बयानों की, जिनमें हमले के अपराधियों को जवाबदेह ठहराने की संयुक्त राष्ट्र की अपील शामिल थी। मिश्रा ने आलोचना की कि अखबार ने इन गंभीर पहलुओं को दरकिनार करते हुए जम्मू और कश्मीर में भारत सरकार की नीतियों पर ध्यान केंद्रित करना चुना।

राजदूत अखिलेश मिश्रा ने ‘द आयरिश टाइम्स’ को संबोधित अपने पत्र में जोर देकर कहा कि पहलगाम आतंकी हमले की वैश्विक स्तर पर कड़ी निंदा की गई है। उन्होंने उल्लेख किया कि यूरोपीय संघ की अध्यक्ष उर्सुला वॉन डेर लेयेन इस हमले की निंदा करने वाली पहली वैश्विक नेताओं में से थीं, और संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद ने भी सर्वसम्मति से इस नृशंस कृत्य की आलोचना करते हुए अपराधियों, आयोजकों, वित्तपोषकों और प्रायोजकों को न्याय के कटघरे में लाने की आवश्यकता पर बल दिया। मिश्रा ने आलोचना की कि ‘द आयरिश टाइम्स’ ने संयुक्त राष्ट्र के इस महत्वपूर्ण बयान को अपने संपादकीय में नज़रअंदाज़ कर दिया।

उन्होंने कहा कि यह अत्यंत दुर्भाग्यपूर्ण है कि निर्दोष पीड़ितों के साथ खड़े होने के बजाय अखबार ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर ‘तलवारें लहराने’ का आरोप लगाया और भारत की पाकिस्तान से तुलना की—एक ऐसा देश जिसे संयुक्त राष्ट्र द्वारा नामित आतंकवादियों को शरण देने और ओसामा बिन लादेन को वर्षों तक छिपाने के लिए जाना जाता है। मिश्रा ने यह भी रेखांकित किया कि 2019 में अनुच्छेद 370 हटने के बाद जम्मू और कश्मीर में महत्वपूर्ण प्रगति हुई है, जिसमें तेज़ आर्थिक विकास, विदेशी निवेश में वृद्धि और पर्यटन क्षेत्र का विस्तार शामिल है।

पत्र में ‘द आयरिश टाइम्स’ की इस धारणा को भी गलत बताया गया कि जम्मू कश्मीर में प्रत्यक्ष शासन और सुरक्षा उपायों के चलते स्थानीय लोगों को ‘झटका’ लगा है। मिश्रा ने स्पष्ट किया कि इसके विपरीत, इन कदमों ने क्षेत्र में स्थायित्व और समृद्धि को बढ़ावा दिया है।

राजदूत अखिलेश मिश्रा ने ‘द आयरिश टाइम्स’ को लिखे पत्र में बताया कि 2019 में भारतीय संविधान से अस्थायी अनुच्छेद 370 के हटाए जाने के बाद जम्मू और कश्मीर में अभूतपूर्व आर्थिक और अवसंरचनात्मक विकास हुआ है। उन्होंने बताया कि इस क्षेत्र में घरेलू और विदेशी निवेश में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है, पर्यटन तेज़ी से बढ़ा है, और एक पूर्ण लोकतांत्रिक राजनीतिक प्रक्रिया का पुनरुद्धार हुआ है। इसका प्रमाण 2024 में हुए स्वतंत्र और निष्पक्ष चुनाव हैं, जिसमें 63.9 प्रतिशत मतदान के साथ लोगों ने लोकतांत्रिक सरकार चुनी।

मिश्रा ने आगे कहा कि पहलगाम में हुए इस्लामिक आतंकी हमले के बाद भारत में गहरा आक्रोश है। पूरा देश—जिसमें कश्मीर घाटी के नागरिक, सभी राजनीतिक दल, विपक्षी नेता, प्रमुख मुस्लिम नेता और नागरिक समाज शामिल हैं—सरकार के उस संकल्प के साथ खड़ा है, जिसके तहत इस जघन्य हमले के अपराधियों और साजिशकर्ताओं को न्याय के कठघरे में लाया जाएगा।

आयरलैंड में भारत के राजदूत ने ऑपइंडिया से की बात

ऑपइंडिया को ईमेल पर दी गई प्रतिक्रिया में आयरलैंड में भारत के राजदूत अखिलेश मिश्रा ने ‘द आयरिश टाइम्स’ पर भारत के प्रति ‘बेहद नकारात्मक’ रवैया अपनाने का आरोप लगाया। अखिलेश मिश्रा ने कहा कि भले ही अखबार की भारत से जुड़ी अधिकांश खबरें समाचार एजेंसियों से ली जाती हैं, लेकिन इसके संपादकीय और राय लेख लगातार एकतरफा रहे हैं, जिनमें भारत की आलोचना और विशेष रूप से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के प्रति कठोर टिप्पणियाँ प्रमुख रही हैं। उन्होंने इस रुख को भारत की छवि खराब करने और उसके खिलाफ पक्षपातपूर्ण बयानबाज़ी को बढ़ावा देने का ‘सुनियोजित प्रयास’ बताया।

राजदूत मिश्रा ने स्पष्ट किया कि भारतीय दूतावास ने ‘द आयरिश टाइम्स‘ को बार-बार इस तरह की मोदी-विरोधी और भारत-विरोधी सामग्री प्रकाशित करने पर चेताया है। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि अखबार न केवल पक्षपाती है, बल्कि ‘हिंदुओं की भावनाओं के प्रति संवेदनहीन’ भी रहा है।

भारतीय राजदूत अखिलेश मिश्रा ने ‘द आयरिश टाइम्स’ पर एक बार फिर तीखा हमला बोलते हुए कहा कि हाल ही में प्रकाशित संपादकीय ‘भारत और पाकिस्तान पर आयरिश टाइम्स का दृष्टिकोण व्यापक संघर्ष से बचना चाहिए’ के अलावा, आयरिश मीडिया आउटलेट ने 2024 के लोकसभा चुनाव से पहले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के खिलाफ एक हिटजॉब भी प्रकाशित की थी। इस लेख का शीर्षक था – “भारतीय चुनाव पर आयरिश टाइम्स का दृष्टिकोण, मोदी ने अपनी पकड़ मजबूत की”, जिसमें भारत पर ‘असहिष्णु हिंदू-प्रथम बहुसंख्यकवाद’ को बढ़ावा देने का आरोप लगाया गया।

अखबार ने दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल के पक्ष में तर्क प्रस्तुत करते हुए दावा किया कि भारत की ‘लोकतांत्रिक साख को भारी नुकसान पहुँचा है’ और प्रधानमंत्री मोदी की तुलना तुर्की के इस्लामवादी नेता रेसेप तैय्यप एर्दोआन से की। उस समय भी राजदूत अखिलेश मिश्रा ने इन आरोपों को निराधार बताते हुए ‘द आयरिश टाइम्स’ के प्रचार और पूर्वाग्रह से भरे रुख की कड़ी निंदा की थी।

अगस्त 2023 में ‘द आयरिश टाइम्स’ ने एक और मोदी-विरोधी संपादकीय प्रकाशित किया था, जिसमें उसने बिना पर्याप्त तथ्यों के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्र सरकार को मणिपुर में जातीय हिंसा भड़काने के लिए दोषी ठहराया। इस लेख में न केवल मैतेई हिंदू समुदाय को बदनाम किया गया, बल्कि कुकी ईसाई समूहों की संलिप्तता, विशेष रूप से म्यांमार और मणिपुर से मिज़ोरम और बांग्लादेश के माध्यम से होने वाली अफीम और सिंथेटिक ड्रग्स की तस्करी में उनकी भूमिका को नजरअंदाज किया गया। इसके अलावा, अखबार ने ‘दक्षिणपंथी हिंदू चरमपंथियों से मुस्लिम अल्पसंख्यकों को खतरा’ जैसे भ्रामक आरोप लगाए, जबकि इस्लामी हिंसा के कई मामलों को पूरी तरह दरकिनार कर दिया।

राजदूत अखिलेश मिश्रा ने उस समय भी इस पक्षपातपूर्ण और भ्रामक संपादकीय का स्पष्ट और तथ्यात्मक जवाब दिया था। उन्होंने बताया कि उनके जवाब  द आयरिश टाइम्स की वेबसाइट के “संपादक को पत्र” खंड में प्रकाशित तो हुए, लेकिन अखबार ने उनके पत्रों को “गंभीर रूप से विकृत” कर प्रस्तुत किया। जब ऑपइंडिया ने पूछा कि क्या अखबार ने उन खंडनों का कोई उत्तर दिया या अपने दृष्टिकोण में कोई बदलाव किया, तो अखिलेश मिश्रा ने स्पष्ट किया कि न तो अखबार ने कोई प्रतिक्रिया दी, न ही भारत और विशेष रूप से हिंदू समुदाय के प्रति अपने पूर्वाग्रही और संवेदनहीन दृष्टिकोण को बदला।

ऑपइंडिया द्वारा पूछे गए एक अन्य सवाल के जवाब में अखिलेश मिश्रा ने बताया कि पाकिस्तान समर्थित आतंकवादियों द्वारा 26 निर्दोष लोगों की धार्मिक आधार पर हत्या किए जाने वाले पहलगाम आतंकी हमले को लेकर आयरलैंड के प्रधानमंत्री ने भारत और पीड़ितों के प्रति संवेदना और एकजुटता प्रकट की थी।

हालाँकि, जब पाकिस्तान में भारत द्वारा की गई आतंकवाद विरोधी कार्रवाई ‘ऑपरेशन सिंदूर’ पर आयरलैंड की आधिकारिक प्रतिक्रिया के बारे में पूछा गया, तो उन्होंने कहा कि ‘अब तक आयरिश पक्ष ने ऑपरेशन सिंदूर पर कोई बयान जारी नहीं किया है।’

आयरिश टाइम्स या पाकिस्तान टाइम्स: पीड़ित को ही दिखाता है उपद्रवी

28 अप्रैल को प्रकाशित द आयरिश टाइम्स  के संपादकीय ‘भारत और पाकिस्तान पर आयरिश टाइम्स का दृष्टिकोण व्यापक संघर्ष से बचना चाहिए’ की भारत में तीव्र आलोचना हुई, विशेष रूप से आयरलैंड में भारतीय राजदूत अखिलेश मिश्रा द्वारा, जिन्होंने इसे ‘पाकिस्तानी प्रचार’ के अनुरूप बताया। उन्होंने स्पष्ट किया कि संपादकीय ने भारत को पाकिस्तान प्रायोजित इस्लामी आतंकवाद का शिकार होने के बावजूद एक हमलावर के रूप में दिखाया, जबकि पाकिस्तान को एक भयभीत पीड़ित की तरह पेश किया गया।

संपादकीय में पाकिस्तान के ‘जिम्मेदारी से इनकार’ और ‘स्वतंत्र अंतरराष्ट्रीय जाँच’ में सहयोग की बात तो की गई, लेकिन भारत की ओर से वर्षों से आतंकवाद पर प्रस्तुत किए गए ठोस सबूतों की पूरी तरह से अनदेखी की गई। उदाहरणस्वरूप, 26/11 मुंबई हमलों के बाद भारत ने पाकिस्तान को लश्कर-ए-तैय्यबा और जमात-उल-दावा प्रमुख हाफ़िज़ सईद की संलिप्तता के साथ कई डोजियर सौंपे।

मार्च 2012 में पाकिस्तानी न्यायिक आयोग को भारत आकर गवाहों के बयान दर्ज करने की अनुमति भी दी गई थी, लेकिन इसके बावजूद पाकिस्तान की अदालतों ने सईद को दोषमुक्त कर दिया। इसी तरह, पठानकोट (2016) और पुलवामा (2019) आतंकी हमलों में भी भारत ने पाकिस्तान को सबूत सौंपे, जिसमें हमलावरों की पहचान, DNA नमूने और वित्तीय दस्तावेज शामिल थे, लेकिन पाकिस्तान ने न तो कोई कार्रवाई की, न ही जाँच में सहयोग दिया।

राजदूत अखिलेश मिश्रा ने यह भी इंगित किया कि द आयरिश टाइम्स को यह अपेक्षा है कि भारत पाकिस्तान को सबूत देता रहे, जबकि पाकिस्तान उनका वर्षों तक उपयोग न करे, उन्हें खारिज कर दे या आतंकवादियों की मौजूदगी से ही इनकार कर दे। उन्होंने कहा कि यह नजरिया इस हकीकत को नजरअंदाज करता है कि पाकिस्तान की धरती से सक्रिय इस्लामी आतंकी संगठनों को वहाँ की सरकार, सेना और ISI का संरक्षण प्राप्त है, जो उन्हें भारत के खिलाफ प्रॉक्सी के रूप में इस्तेमाल करते हैं।

संपादकीय ने अनुच्छेद 370 और 35A के निरसन पर भी विरोध जताते हुए कहा कि मोदी सरकार ने भारत के एकमात्र मुस्लिम-बहुल राज्य की सीमित स्वायत्तता छीन ली। अखिलेश मिश्रा ने इस पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि द आयरिश टाइम्स ने कश्मीर की धार्मिक जनसांख्यिकी के इतिहास को तोड़-मरोड़ कर पेश किया और यह बताना उचित नहीं समझा कि 1990 के दशक में कश्मीरी हिंदुओं को जिहादी हिंसा के चलते उनके ही घरों से मार-भगाया गया था। उन्होंने स्पष्ट किया कि अनुच्छेद 370 और 35A का हटाया जाना मुस्लिम समुदाय पर अत्याचार नहीं, बल्कि एक संवैधानिक सुधार था। जिसे भारत के सर्वोच्च न्यायालय ने भी बरकरार रखा है।

अखिलेश मिश्रा के अनुसार, यह वही हिंदू-विरोधी मानसिकता है जो कश्मीरी पंडितों के पलायन और हाल के पहलगाम आतंकी हमले दोनों की जड़ में है। उन्होंने द आयरिश टाइम्स के रुख को भारत और विशेष रूप से हिंदुओं के प्रति पूर्वाग्रही, पक्षपातपूर्ण और ऐतिहासिक तथ्यों की अनदेखी करने वाला बताया।

द आयरिश टाइम्स के संपादकीय में लेख के अंत में यह दावा किया गया कि “पहलगाम पर तनाव में भयावह वृद्धि, विभाजन के समय से चली आ रही कटु सांप्रदायिक विभाजन का परिणाम है, जिससे दोनों देशों के बीच पूर्ण युद्ध की आशंका है।” इस कथन की तीखी आलोचना करते हुए भारत ने इसे वास्तविकता से पूरी तरह विपरीत बताया।

राजदूत अखिलेश मिश्रा और अन्य विश्लेषकों ने स्पष्ट किया कि भारत और पाकिस्तान के बीच बढ़ता तनाव सांप्रदायिक विभाजन का नहीं, बल्कि पाकिस्तान द्वारा प्रायोजित इस्लामी आतंकवाद और हिंदुओं तथा अन्य समुदायों के प्रति उसकी गहरी घृणा का परिणाम है। यह भावना हाल ही में पाकिस्तानी सेना प्रमुख जनरल असीम मुनीर द्वारा सार्वजनिक रूप से दोहराई गई थी।

भारत में हिंदू बहुल आबादी के बीच मुसलमानों, सिखों और अन्य धार्मिक समुदायों के साथ शांतिपूर्ण सह-अस्तित्व की एक समृद्ध परंपरा रही है। इसके विपरीत, इस्लामी गणराज्य पाकिस्तान ने 1947 के बाद से लगातार अपने हिंदू और अन्य अल्पसंख्यकों के खिलाफ हत्या, बलात्कार, उत्पीड़न और व्यवस्थित भेदभाव किया है।

“ऑपरेशन सिंदूर” के जरिए भारत ने यह स्पष्ट संकेत दिया है कि अब वह अपने नागरिकों की धार्मिक पहचान के आधार पर लक्षित हत्याओं को बर्दाश्त नहीं करेगा और न ही ‘अमन की आशा’ (शांति की आशा) के नाम पर चुप्पी साधेगा। यह कार्रवाई पाकिस्तान और इस्लामी आतंकवाद को समर्थन देने वाले तत्वों के लिए एक कड़ा संदेश था।

(यह खबर मुख्य रूप से हमारे यहाँ ऑपइंडिया इंग्लिश टीम की श्रद्धा पांडे ने लिखी है।)

CJI ने राष्ट्रपति और PM को भेजी जस्टिस यशवंत वर्मा के खिलाफ जाँच रिपोर्ट, कैश मिलने की पुष्टि फिर भी इस्तीफा देने से किया इनकार: चल सकता है महाभियोग

भारत के मुख्य न्यायाधीश (CJI) संजीव खन्ना ने आंतरिक जाँच समिति की रिपोर्ट राष्ट्रपति और प्रधानमंत्री को भेज दी है। समिति का गठन जस्टिस यशवंत वर्मा के घर में लगी आग में नकदी मिलने के दावों की जाँच के लिए किया गया था।

समिति की रिपोर्ट के साथ जस्टिस वर्मा की प्रतिक्रिया भी राष्ट्रपति और प्रधानमंत्री को भेजी गई। हालाँकि रिपोर्टों में यह स्पष्ट नहीं है कि जस्टिस वर्मा ने अपनी प्रतिक्रिया में क्या कहा है। इससे पहले खबरें आई थी कि आंतरिक जाँच समिति ने जस्टिस वर्मा के घर आगजनी में कैश जलने की बात सही पाई है।

सुप्रीम कोर्ट की ओर से 8 मई 2025 को जारी बयान में कहा गया है, “मुख्य न्यायाधीश ने आंतरिक जाँच प्रक्रिया के तहत राष्ट्रपति और प्रधानमंत्री को 3 मई 2025 की 3 सदस्यीय कमेटी की रिपोर्ट की कॉपी और जस्टिस यशवंत वर्मा का 6 मई 2025 का पत्र/जवाब भेजा दिया है।”

आंतरिक जाँच समिति में पंजाब और हरियाणा हाई कोर्ट के चीफ जस्टिस शील नागू, हिमाचल हाई कोर्ट के चीफ जस्टिस जीएस संधावालिया और कर्नाटक हाई कोर्ट की जस्टिस अनु शिवरामन शामिल थे। इन्होंने 25 मार्च को जाँच शुरू की थी। जस्टिस वर्मा के घर में 14 मार्च 2025 को आग लगी थी। उसके बाद बेहिसाब कैश बरामद होने की बात सामने आई थी। जले हुए नोटों की तस्वीरें और वीडियो भी सामने आए थे।

जिस समिति ने इस मामले की जाँच की है उसमें पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश शील नागू हिमाचल हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस GS संधावालिया और कर्नाटक उच्च न्यायालय की मुख्य न्यायाधीश अनु सिवारमन शामिल थे। 25 मार्च को समिति ने जाँच की प्रक्रिया शुरू की थी और 4 मई को उन्होंने सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश को रिपोर्ट सौंप दी थी। बताया जाता है कि जब आग लगी थी तब जज अपनी पत्नी के साथ मध्य प्रदेश में थे, जबकि घर में उनकी बुजुर्ग माँ और बेटी मौजूद थी।

जले हुए कैश का वीडियो भी सामने आया था। हालाँकि, दिल्ली पुलिस ने बताया था कि इसके वीडियो जिन पुलिसकर्मियों ने बनाए थे वो उनके फोन से डिलीट करवा दिए गए, ताकि ये गलत जगह न पहुँच जाए। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह तक ने कहा था कि बिना CJI की अनुमति के जज के विरुद्ध FIR दर्ज करने के अधिकार पुलिस के पास नहीं हैं। हालाँकि, अब भी जस्टिस यशवंत वर्मा ने इस्तीफा देने से इनकार कर दिया है, जबकि जाँच समिति ने माना है कि उनके यहाँ से कैश मिला।

ऐसे में अगर वो दोषी पाए जाते हैं तो उन्हें महाभियोग की प्रक्रिया के तहत भी हटाया जा सकता है। उप-राष्ट्रपति जगदीप धनखड़ ने भी इस मामले को लेकर सार्वजनिक रूप से बयान दिया था और न्यायपालिका की साख पर बट्टा बताते हुए कहा था कि जो भी मामला है वो बाहर आना चाहिए।

सत्यपाल मलिक की ‘वफादारी’ पर पाकिस्तान फिदा, आतंकी मुल्क की संसद में गूँजा नाम: पहलगाम अटैक से पल्ला झाड़ने के लिए The Wire को दिए इंटरव्यू का इस्तेमाल, जानिए क्या कहा था?

भारत में कुछ ऐसे तत्व हैं, जिन्हें अपनी सरकार से दिक्कत है, सेना से दिक्कत है, और यहाँ तक कि हमारे देश की संस्कृति और परंपराओं से भी दिक्कत है। असल में ‘The Wire’ पर पत्रकार करण थापर ने जम्मू कश्मीर के पूर्व राज्यपाल सत्यपाल मलिक का इंटरव्यू लिया, जिसके बाद उनकी चर्चा पाकिस्तान के संसद में भी हो रही है। बता दें कि 22 अप्रैल को जम्मू कश्मीर के पहलगाम में आतंकी हमले के 13 दिन बाद भारत ने पाकिस्तान में 9 आतंकी ठिकानों को निशाना बनाया, जिसे ‘ऑपरेशन सिंदूर’ नाम दिया गया है।

ऐसे संवेदनशील समय में जब पूरा देश एक होकर अपनी सेना व सरकार के साथ खड़ा है, सत्यपाल मलिक ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के लिए ‘बेशर्म’ और ‘डरपोक’ जैसे शब्दों का इस्तेमाल किया, साथ ही लिखा कि उन्हें पहलगाम हमले के लिए माफ़ी माँगनी चाहिए। उन्होंने प्रधानमंत्री के इस्तीफे तक की माँग कर दी। उन्होंने कहा कि पीएम मोदी जनता की परवाह नहीं करते, उनकी सरकार को ‘निर्दयी’ और ‘संवेदनहीन’ तक बता दिया। करण थापर ने कहा कि पीएम मोदी देश को डरा रहे हैं, वहीं सत्यपाल मलिक ने कह डाला कि भारत युद्ध झेल ही नहीं सकता है।

साफ़ है, ये दोनों महानुभाव खुलकर हर उस एजेंडे को आगे बढ़ा रहे हैं, जो पाकिस्तान चाहता है। शायद तभी तो पाकिस्तान की संसद में इनकी चर्चा हो रही है। पाकिस्तान की संसद में एक महिला सांसद ने कहा, “लोग सवाल कर रहे हैं। भारत अधिकृत जम्मू कश्मीर के पूर्व राज्यपाल सत्यपाल मलिक ने कहा है कि ये तो बड़ा सुरक्षित इलाक़ा है, यहाँ फौज और पुलिस होनी चाहिए थी लेकिन एक अहलकार नहीं था। उन्होंने मोदी सरकार से उन्होंने सवाल किया।” (नोट: पाकिस्तान वाले जम्मू कश्मीर को ‘भारत अधिकृत’ कहते हैं जबकि उन्होंने प्रदेश का एक हिस्सा अवैध रूप से कब्जा रखा है)

इसके अलावा उक्त महिला सांसद ने एंकर करण थापर का भी नाम लेते हुए कहा कि उनके शो में सत्यपाल मलिक ने कहा है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को शर्म आनी चाहिए और सुरक्षा चूक के लिए माफ़ी माँगनी चाहिए। पाकिस्तान की महिला सांसद ने आगे कहा कि भारत के भीतर से सवाल उठ रहे हैं और उन सवालों को दबाया जा रहा है। बता दें कि सत्यपाल मलिक राज्यपाल पद से हटने के बाद से लगातार मोदी सरकार पर हमलावर रहे हैं, और झूठ फैलाने का कोई मौका नहीं छोड़ते।

कोई माँग रहा सबूत तो कोई कह रहा चील-कौवे मारे, किसी को ‘सिंदूर’ शब्द से ही दिक्कत: पाकिस्तान पर कार्रवाई के बाद भारत में बिलबिला कर निकल रहे ‘पाकिस्तानपरस्त’

जम्मू-कश्मीर के पहलगाम की बैसारन घाटी में 22 अप्रैल, 2025 को हुए आतंकी हमलों के जवाब में भारतीय सेना ने मंगलवार (6 मई, 2025) की रात ‘ऑपरेशन सिंदूर’ चलाकर पाकिस्तान में बसे 9 आंतकी ठिकानों को ध्वस्त कर दिया। पूरा देश इस बात पर जश्न मना रहा है। 24 हिंदुओं समेत कुल 26 पर्यटकों की मौत पर हुए एक्शन में लगभग 100 आतंकियों को मार गिराया गया।

जहाँ एक ओर पूरे देश में पहलगाम के हमले के बदले को लेकर खुशी का माहौल है। पहलगाम हमले के बाद गमगीन देश संतोष में है, क्योंकि ‘न्याय’ हुआ है। वहीं, दूसरी ओर विपक्ष के राजनेताओं को भारतीय सेना के इस शौर्य पर भी संदेह है। जिन्हें संदेह नहीं है, उन्हें इस मिशन के नाम से परेशानी हो रही है।

कॉन्ग्रेस नेता पृथ्वीराज चौहान ने सरकार पर साधा निशाना

‘ऑपरेशन सिंदूर’ से कई कॉन्ग्रेस नेता परेशान दिख रहे हैं। जहाँ एक ओर नेता प्रतिपक्ष और कॉन्ग्रेस के मुखिया राहुल गाँधी और अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने एक साथ सामने आकर इस ऑपरेशन की सराहना की थी तो वहीं दूसरी ओर कई अन्य कॉन्ग्रेसी नेताओं को इस ऑपरेशन के नाम या काम में खामियाँ नजर आईं।

महाराष्ट्र के पूर्व मुख्यमंत्री और वरिष्ठ कॉन्ग्रेस नेता पृथ्वीराज चौहान ने केंद्र सरकार पर निशाना साधते हुए कह दिया कि ‘ऑपरेशन सिंदूर’ नाम रखकर सरकार इसका भावनात्मक लाभ ले रही है। चौहान ने कहा, “युद्ध विमानों, बंदूकों और बमों का उपयोग करके लड़ा जाता है, भावनाओं या प्रतीकात्मकता से नहीं।”

हालाँकि, पृथ्वीराज चौहान के इस बयान से कॉन्ग्रेस पार्टी ने किनारा कर लिया। कॉन्ग्रेस नेता पवन खेड़ा ने ही चौहान के बयान को गलत बता दिया। खेड़ा ने कहा, “इस समय किसी को भी मिशन पर टिप्पणी नहीं करनी चाहिए। सरकार कोई भी कदम उठाए, कॉन्ग्रेस पार्टी पूरी मजबूती के साथ उनके साथ खड़ी है।”

राशिद अल्वी ने फिर माँगे सबूत

कॉन्ग्रेस के नेता राशिद अल्वी भी भारतीय सेना के इस मिशन की सफलता पर सवाल खड़े करने में पीछे नहीं रहे। उन्होंने यह तक पूछ डाला कि ऑपरेशन में क्या हर एक आतंकवादी मारा गया है?

राशिद अल्वी ने ‘ऑपरेशन सिंदूर’ को सबसे न्यूनतम जवाब माना है। उन्होंने कहा, “क्या सभी आतंकवादी खत्म हुए? मोदी ने कहा था कि आतंकवादियों का नामोनिशान मिटा देंगे। अगर यह हुआ तो अच्छा है।” बता दें कि राशिद अली पहले भी सर्जिकल स्ट्राइक पर सबूत माँग चुके हैं।

उदित राज ने नाम पर जताई आपत्ति

उनके अलावा कॉन्ग्रेस के ही वरिष्ठ नेता उदित राज ने भारतीय सेना के इस मिशन के नाम पर ही आपत्ति जताई। उदित राज ने कहा,”सिंदूर एक विशेष धर्म से संबंधित है। बेहतर होता कि मिशन का कोई और नाम दिया होता।”

उदित ने यह भी कहा कि सरकार को ‘ऑपरेशन सिंदूर’ के बारे में स्पष्टता रखनी चाहिए। पाकिस्तान के पीएम का संसद में 3 राफेल मार गिराने पर भी अपना पक्ष रखना चाहिए और बताना चाहिए कि पाक पीएम झूठे हैं। कॉन्ग्रेसियों के अलावा ‘झारखंड मुक्ति मोर्चा’ (JMM) की राज्यसभा सांसद महुआ माजी को भी ‘ऑपरेशन सिंदूर’ का नाम नहीं पसंद आया। उन्होंने कहा कि ऑपरेशन सिंदूर को ज्यादा महत्व नहीं दिया जाना चाहिए।

माजी ने कहा, “जब तीनों सेनाओं को अपने लक्ष्य और समय चुनने की छूट दी गई तो भी प्रधानमंत्री मोदी ने इसका नाम ‘ऑपरेशन सिंदूर’ रख दिया, इसलिए इसमें कुछ राजनीति ज़रूर है, नाम कुछ और भी हो सकता था।” माजी ने इसके बाद पाकिस्तान की परमाणु धमकी को भी दोहराया।

इमरान मसूद ने कहा, पाकिस्तान हँस रहा

इनके अलावा सहारनपुर से कॉन्ग्रेस सांसद इमरान मसूद ने भी ‘ऑपरेशन सिंदूर’ की सफलता पर सवाल उठा दिए। उन्होंने सरकार से इस मिशन का पूरा हिसाब माँग लिया। मसूद ने कहा, “हमने बार-बार कहा कि आतंकवाद के खिलाफ लीपा-पोती नहीं सख्त एक्शन होना चाहिए, जो सेना ने करके दिखाया।” इसके अलावा एक न्यूज चैनल से बातचीत करते हुए इमरान मसूद ने सर्जिकल स्ट्राइक पर भी कहा, “पाकिस्तान हमारे हम लोग का मजाक उड़ाता है। उनका कहना है कि सर्जिकल स्ट्राइक में हिंदुस्तानियों ने हमारे तीन कौवे मार दिए। इससे पूरी दुनिया में हमारा मजाक बन गया है।”

विपक्ष को पहले मौका मिला था कि पहलगाम पर कोई कड़ा एक्शन नहीं लिया गया। अब जब सरकार ने एक्शन ले लिया तो उसमें भी उन पर सवाल खड़े कर दिये। कुल मिलाकर विपक्ष को एक्शन तो चाहिए था लेकिन उस एक्शन को हजम करना नहीं आ पाया।

लाहौर का एयर डिफेन्स सिस्टम उड़ाया, 15 सैन्य ठिकानों पर पाकिस्तानी हमले किए नाकाम: ‘ऑपरेशन सिंदूर’ के बाद ‘आतंकी मुल्क’ ने देर रात दागे थे ड्रोन-मिसाइल, सब फुस्स

भारत ने पाकिस्तान के भीतर गुरुवार (8 मई, 2025) की सुबह कई सैन्य ठिकानों को निशाना बनाया है। भारत ने इस हमले में लाहौर के एयर डिफेन्स सिस्टम और राडार तबाह कर दिए हैं। यह हमला पाकिस्तान के भारतीय सैन्य ठिकानों पर किए गए हमले के जवाब में किया गया है। भारत ने स्पष्ट कर दिया है कि वह ऐसी सभी हरकतों का माकूल जवाब देगा।

इस संबंध में सरकार ने एक आधिकारिक बयान जारी किया है। इसमें लिखा गया, “7-8 मई 2025 की रात को पाकिस्तान ने ड्रोन और मिसाइलों का उपयोग करके अवंतीपुरा, श्रीनगर, जम्मू, पठानकोट, अमृतसर, कपूरथला, जालंधर, लुधियाना, आदमपुर, भटिंडा, चंडीगढ़, नल, फलोदी, उत्तरलाई और भुज सहित उत्तरी और पश्चिमी भारत में कई सैन्य ठिकानों पर हमला करने की कोशिश की। इन हमलों को इंटिग्रेटेड काउंटर UAS ग्रिड और एयर डिफेंस सिस्टम द्वारा बेअसर कर दिया गया।”

भारत ने बताया कि इन हमलों के मलबे अब कई जगह से बरामद किए जा रहे हैं जो इनका सबूत हैं। भारत ने लाहौर में किए गए हमले के विषय में बताया, “आज सुबह भारतीय सशस्त्र बलों ने पाकिस्तान में कई स्थानों पर एयर डिफेंस रडार और सिस्टम को निशाना बनाया। भारत ने भी पाकिस्तान की ही तरह उसी तीव्रता से जवाब दिया है। विश्वसनीय जानकारी के अनुसार, लाहौर में एयर डिफेंस सिस्टम को बेकार कर दिया गया है।”

इसी बयान में बताया गया कि पाकिस्तान ने जम्मू-कश्मीर के कुपवाड़ा, बारामूला, उरी, पुंछ, मेंढर और राजौरी सेक्टरों में मोर्टार और भारी तोपों का इस्तेमाल करते हुए LOC पर बिना उकसावे के गोलीबारी बढ़ा दी है। सरकार ने बताया है कि इस गोलीबारी में तीन महिलाओं और पाँच बच्चों समेत सोलह निर्दोष लोगों की जान चली गई है। सरकार ने बताया है कि इस कार्रवाई का जवाब सेना ने माकूल तरीके से दिया है। भारत ने साफ़ कर दिया है कि वह तनाव घटाने का पक्षधर है लेकिन पाकिस्तानी फ़ौज को भी शांत होना पड़ेगा।

गौरतलब है कि भारत ने 7 मई, 2025 को रात में ऑपरेशन सिंदूर चलाया था। इस स्ट्राइक में भारत ने पाकिस्तान और पाकिस्तान अधिकृत जम्मू-कश्मीर के भीतर 9 ठिकानों को निशाना बनाया था। यह लश्कर-ए-तैयबा और जैश-ए-मुहम्मद जैसे आतंकी संगठनों के अड्डे थे। इनमें 80 से अधिक इस्लामी आतंकी मारे गए थे। इसके बाद से पाकिस्तान ने भारत में ड्रोन हमले किए और सीमा पर गोलीबारी की। इनका ही जवाब भारत ने दिया है।