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बिकनी और बोल्ड सीन में सहज नहीं, परिवार और इस्लामिक संस्कृति नहीं देता इजाजत: एक्ट्रेस हिबा नवाब

टेलीविजन धारावाहिक “जीजा जी छत पर हैं” और “जीजा जी छत पर कोई है” की अदाकारा हिबा नवाब ने कहा है कि वो एक मुस्लिम परिवार से आती हैं और उनके समाज की संस्कृति अलग है। इसलिए वो खुले कपड़े पहनने से परहेज करती हैं।

हिबा ने ई-टाइम्स को दिए एक इंटरव्यू में अपने ड्रेसेज को लेकर खुलकर बात करते हुए कहा, “रिवीलिंग कपड़े नहीं पहनने का मेरा अपना निर्णय है। मुस्लिम परिवार से आती हूँ, जहाँ की संस्कृति अलग है। थोड़ी विरोधी स्वभाव की हूँ, लेकिन ये मेरे परिवार का फैसला है, मैं इससे आगे नहीं बढ़ूँगी।”

अपने परिवार और मुस्लिम समुदाय को लेकर हिबा ने इंटरव्यू के दौरान कहा, “कई बार मेरे कपड़ों को लोग ठीक नहीं समझते हैं और चाहते हैं कि मैं दूसरे तरीके से कपड़े पहनूँ। थोड़ी विद्रोही स्वभाव की हूँ, लेकिन अपने परिवार की भावनाओं को आहत नहीं करना चाहती। बिकनी पहनना, क्लीवेज दिखाने जैसा नहीं करना चाहती। यह मेरा अपना फैसला है और इसका कोई विरोध भी नहीं है।”

उत्तर प्रदेश के बरेली से आने वाली हिबा नवाब बोल्ड सीन और वेब शोज को लेकर कहती हैं, “मैं वेब शोज करना तो चाहती हूँ, लेकिन उनके बोल्ड सीन और उसके कंटेंट को देखकर सहज महसूस नहीं करती हूँ। जब भी वेब शोज को लेकर कोई भी ऑफर उनके पास आता है तो सबसे पहले मैं बोल्ड और किसिंग सीन के बारे में पूछती हूँ और हाँ कहते ही इनकार कर देती हूँ। न तो खुद को सहज पाती हूँ और न ही मेरा परिवार इसके लिए इजाजत देता है।”

खुद को फूडी बताते हुए हिबा कहती हैं कि उन्हें खाना तो खूब पसंद, लेकिन वजन बढ़ने का डर हमेशा सताता है। वो खाने के बारे में काफी बातें कर सकती हैं। एक्ट्रेस के मुताबिक, वो लोगों को इंस्पायर करते हैं, इसलिए जैसी सलाह वो लोगों को देती हैं, वैसा ही उन्हें भी करना चाहिए।

गौरतलब है कि “जीजाजी छत पर हैं” टीवी शो में “इलाइची जी” के किरदार में नजर आने वाली हिबा नवाब के रोल को खूब पसंद किया गया है। वहीं जीजाजी छत पर कोई है में वो डबल रोल में नजर आई हैं।

IAS ऑफिसर रणबीर शर्मा ने मोबाइल तोड़ा, थप्पड़ मारा… अब माँगी माफी: घूस लेते इसी ऑफिसर को ACB ने पकड़ा था

छत्तीसगढ़ के सूरजपुर जिले में लागू लॉकडाउन के दौरान कलेक्टर ने एक युवक को थप्पड़ मारा, फोन तोड़ दिया और पुलिस ने उसकी पिटाई कर दी। घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद कलेक्टर ने अपने व्यवहार के लिए माफी माँगी है।

सूरजपुर जिले के पुलिस अधिकारियों ने बताया कि युवक की पहचान अमन मित्तल (23) के रूप में हुई है। उसके खिलाफ लॉकडाउन के कथित उल्लंघन के लिए मामला दर्ज किया गया है। वीडियो में कलेक्टर एक युवक को थप्पड़ मारते और पुलिस वालों से पिटवाते नजर आ रहे हैं। कलेक्टर ने वीडियो रिकॉर्डिंग के संदेह में युवक का मोबाइल भी पटक कर तोड़ दिया। इसके वायरल होने के बाद सोशल मीडिया पर लोग उनके खिलाफ एफआईआर से लेकर उन्हें सस्पेंड तक करने की माँग कर रहे हैं।

घटना शनिवार (मई 22, 2021) दोपहर की है, जब कलेक्टर लॉकडाउन का पालन कराने खुद गश्त पर निकले थे। इसी दौरान उनकी मुलाकात एक युवक से हुई। कलेक्टर ने उससे कुछ पूछा और फिर जाने दिया। वे खुद भी अपनी कार की ओर बढ़ने लगे। तभी उन्हें कुछ अंदेशा हुआ और घूम कर तेजी से युवक के पास पहुँचे। उसका मोबाइल माँगा और उसे सड़क पर पटक दिया। फिर युवक को एक जोरदार थप्पड़ लगाया।

वीडियो में एक युवक हाथ में एक पर्ची पकड़ा हुआ है और वह कलेक्टर को दिखाने की कोशिश कर रहा है। तभी वह मोबाइल पर उन्हें कुछ दिखाता है। यह देखते ही कलेक्टर रणबीर शर्मा उसका फोन ज़ोर से जमीन पर दे मारते हैं और युवक को एक तमाचा जड़ देते हैं। इससे पहले कि युवक कुछ बोल पाता कलेक्टर जवानों को उसे मारने का आदेश देते हैं और जवान एक के बाद एक लड़के पर लाठियाँ बरसाने लगते हैं। इसके बाद कलेक्टर यह कहते हुए गाड़ी में जाकर बैठ गए कि इसके खिलाफ एफआईआर कराओ।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक युवक अपने पिता और माता के लिए दवाई लेने मेडिकल स्टोर के लिए निकला था। इसी दौरान भैयाथान चौक के पास जिला कलेक्टर रणवीर शर्मा ने उसे रुकवा लिया। युवक ने बताया कि वह दवाई लेने जा रहा है। इसकी पुष्टि करने के लिए उसने दवाई की पर्ची भी दिखाई लेकिन कलेक्टर ने उसकी नहीं सुनी और चाँटा मार दिया।

वीडियो के वायरल होने के बाद कलेक्टर रणबीर शर्मा ने अपने बयान में कहा, “उसने कहा कि वह टीकाकरण के लिए बाहर गया था, लेकिन उनके पास कोई उचित दस्तावेज नहीं था। बाद में उसने कहा कि वह अपनी दादी से मिलने जा रहा है। जब उसने दुर्व्यवहार किया तो मैंने गुस्से में उसे थप्पड़ मार दिया। वह 23-24 साल का था, 13 साल का नहीं। मुझे खेद है और अपने व्यवहार के लिए क्षमा चाहता हूँ।”

मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक कलेक्टर शर्मा पर साल 2015 में रिश्वतखोरी का आरोप भी लग चुका है। उन्हें एक पटवारी से 10 हजार रुपए रिश्वत लेने के आरोप में एंटी करप्शन ब्यूरो ने गिरफ्तार किया था। शर्मा उस समय भानुप्रतापपुर में सब डिवीजनल मजिस्ट्रेट थे। उस समय शर्मा का ट्रांसफर भी किया गया था।

2024 के लोकसभा चुनाव की बात करना जल्दबाजी है फिर भी हमें बात करनी होगी: जानिए क्यों?

नरेंद्र मोदी के अलावा अटल बिहारी वाजपेयी ही एकमात्र भाजपा नेता थे जो भारत के प्रधानमंत्री बन सके और अपना एक कार्यकाल पूरा कर सके। वाजपेयी को भी अपने कार्यकाल के दौरान वैसा ही विरोध और प्रोपेगेंडा झेलना पड़ा जो नरेंद्र मोदी ने अपने पहले कार्यकाल के दौरान झेला और दूसरे कार्यकाल में भी (और भी व्यवस्थित और प्रखर रूप में) झेल ही रहे हैं। 

उदाहरण के लिए 1999 में जब वाजपेयी सत्ता में आए तो यह दावा किया गया कि ‘ईसाई खतरे में हैं’ और ऐसा ही कुछ नैरेटिव मोदी के 2014 में सत्ता में आने के बाद चलाया गया। इसके अलावा भी कई ऐसे संयोग हैं। मोदी के कार्यकाल में जहाँ राफेल लड़ाकू विमान की खरीद में घोटाले की बात प्रचारित की गई, ठीक वैसे ही आरोप वाजपेयी के शासनकाल में हथियारों और ताबूत की खरीद में भी लगे थे। कॉन्ग्रेस ने मोदी के द्वारा की गई बालाकोट एयर स्ट्राइक पर प्रश्न उठाया था, वहीं वाजपेयी के कार्यकाल में कारगिल विजय पर भी संदेह उत्पन्न किया गया। 

मोदी के द्वारा ‘अच्छे दिन’ के वादों को झूठ बताया गया जैसे वाजपेयी के ‘इंडिया शाइनिंग’ को बताया गया था। मोदी पर यह आरोप लगाया गया कि मोदी सरकार ने कुछ उद्योगपतियों (सूट-बूट की सरकार का तंज) के लिए ही काम किया है, जबकि वाजपेयी से पूछा गया कि आम आदमी को क्या मिला? ऐसी कई समानताएँ हैं लेकिन ध्यान देने योग्य बात यह है कि वाजपेयी को हराने के लिए जो रणनीति बनाई गई थी वही मोदी के लिए भी उपयोग में लाई गई। विरोधियों को यह लगा कि इतिहास एक बार फिर दोहराया जाएगा और जैसे वाजपेयी 2004 में हार गए वैसे ही 2019 में मोदी भी सत्ता से बाहर हो जाएँगे।   

इस बात का गवाह है एक विरोधी का यह विश्वास।

2016 मे मैंने बताया था कि कैसे मोदी ऐसे ही एक व्यवस्थित प्रोपेगेंडा का सामना कर रहे हैं और अपनी रणनीति बनाते समय उनके मन में क्या चलता होगा? मैंने कुछ ऐसा लिखा था,

“2014 का जनादेश ऐसा प्रतीत हो सकता है कि अब मोदी, गाँधी परिवार के पीछे पड़ेंगे और अनेकों फ्री मार्केट आधारित नीतियों का निर्माण करेंगे लेकिन उनकी नीतियाँ निर्धारित होंगी 2004 के परिणामों से। 2014 और 2015 में होने वाली राजनैतिक घटनाओं ने यह तो साफ कर दिया कि मोदी के सामने 2014 को दोहराने की चुनौती नहीं है बल्कि 2004 में जो हुआ उसे रोकने की है क्योंकि विरोधियों ने जो वाजपेयी के साथ किया वही अब भी कर रहे हैं।“

अब 5 साल बाद मैं फिर से यह सब 2024 के लोकसभा चुनावों के मद्देनजर लिख रहा हूँ। क्योंकि अचानक से Covid-19 संक्रमण की दूसरी लहर के दौरान एक बार फिर से यह चर्चा उठ रही है। हालाँकि सौभाग्य से संक्रमण कम हो रहा है लेकिन संक्रमण की इस दूसरी लहर ने जो नुकसान किया है वह लंबे समय तक रहेगा।

विरोधी खुश हैं। लोगों के मरने और व्यवस्था के चरमरा जाने के बाद भी वो अपनी खुशी को छुपाने का प्रयास नहीं कर रहे हैं। एक बड़े अंतराल के बाद इन विरोधियों को मौतें और तबाही देखने को मिली है जिसका वो सालों से इंतजार कर रहे थे। एक ऐसा अवसर जब वो कह सकें, “देखो मैंने कहा था कि फासीवाद अपने साथ यही लाएगा।“

2014 में मोदी के सत्ता में आने के बाद से ही लिबरल्स और विरोधियों ने मौत और तबाही के मंजर का डर दिखाया। कभी ईसाइयों और उनके चर्चों पर हमले का डर तो कभी भारत की गलियों में मुसलमानों की लिंचिंग का डर। इसके अलावा कहा गया कि हर जगह महिलाओं का बलात्कार (‘गाय सुरक्षित हैं’ तो याद ही होगा आपको) हो रहा है और विमुद्रीकरण (नोटबंदी) में लाइन में खड़ा हुआ हर दूसरा आदमी मर रहा है। हालाँकि इस नैरेटिव से किसी को अंतर नहीं पड़ा लेकिन अंततः चीन के इस वुहान वायरस ने विरोधियों को वो मौका दे ही दिया क्योंकि इस बार हुई मौतें और नुकसान वास्तविक है। 

इसलिए उनके टूलकिट में वायरस से जुड़ी सभी चीजों को मोदी और उनकी नीतियों से जोड़ देने की बात कही गई है। क्योंकि यदि ‘फासीवाद ही वायरस इन्फेक्शन’ का कारण है कहा जाएगा तो यह इंस्टाग्राम की पीढ़ी को भी हजम नहीं होगा। वैसे देखा जाए यो यह वायरस वामपंथ की देन है।  

अब इस बात पर आते है कि यह सब 2024 के लोकसभा चुनावों में किस प्रकार असर करेगा। पहली बात तो यह कि फिलहाल इस विषय पर कुछ भी कहना या विश्लेषण करना जल्दबाजी होगी क्योंकि इस वायरस की कोई भविष्यवाणी नहीं की जा सकती है और इसी कारण हम यह नहीं कह सकते आगे क्या होने वाला है।

हालाँकि, एक बात तो स्पष्ट है कि यदि पिछली बार मोदी ने यह तय किया था कि जो वाजपेयी के साथ 2004 में हुआ वह उनके साथ नहीं होगा तो 2024 में भी मोदी निश्चित रूप से यह ध्यान में रखेंगे कि उनके साथ वो सब न हो जो मनमोहन के साथ 2014 में हुआ।

मोदी समर्थकों के लिए मनमोहन से मोदी की तुलना अस्वीकार्य हो सकती है, तो यह सही है कि मोदी की तुलना मनमोहन से नहीं हो सकती है जैसी कि मोदी और वाजपेयी में संभव है। लेकिन यहाँ दो व्यक्तिव की तुलना नहीं बल्कि दो चुनौतियों की तुलना की गई है। 2019 में मोदी के सामने वही चुनौतियाँ थीं जो वाजपेयी के सामने एक कार्यकाल के बाद उत्पन्न हुई थीं लेकिन 2024 में मोदी के सामने दो कार्यकाल पूरा करने वाले प्रधानमंत्री की चुनौतियाँ होंगी।

हालाँकि यह प्रश्न उठाया जा सकता है कि आखिर तुलना मनमोहन सिंह से क्यों की गई, जो इंदिरा गाँधी से भी की जा सकती थी। मैं यह मान कर चल रहा हूँ कि अब के समय में ऐसा कुछ नहीं होने वाला जो इंदिरा गाँधी के कार्यकाल में हुआ था। पाकिस्तान के साथ युद्ध, संस्थाओं पर नियंत्रण और आपातकाल। जितना मोदी समर्थक यह चाहते हैं कि इन घटनाओं में से कम से कम दो तो होनी ही चाहिए लेकिन मैं (कम से कम एक तो होना चाहिए) मानता हूँ कि फिलहाल ऐसा कुछ होने वाला नहीं है। इसलिए मैं इंदिरा गाँधी से मोदी के कार्यकाल की तुलना नहीं कर रहा हूँ।

मोदी को यह सुनिश्चित करना होगा कि 2014 में कॉन्ग्रेस की हार के जो कारक सामने आए वो 2024 में मोदी सरकार पर लागू न हों। हालाँकि यह आसान है क्योंकि 2014 में कॉन्ग्रेस बड़े घोटालों के कारण हारी थी लेकिन मोदी सरकार पर भ्रष्टाचार का कोई आरोप नहीं है। राफेल डील में घोटाले के झूठे नैरेटिव के बावजूद मोदी की छवि पर कोई प्रभाव नहीं पड़ा और आगे भी यह छवि बेदाग ही रहने वाली है लेकिन अब यह घोटालों और भ्रष्टाचार से भी कहीं अधिक है। 

मैं मानता हूँ कि भ्रष्टाचार का आरोप मात्र एक उत्प्रेरक था मुख्य कारण नहीं, जिसके कारण कॉन्ग्रेस चुनाव हार गई। कॉन्ग्रेस जिन कारणों से हारी उनके बारे में आगे बताया गया है।

कॉन्ग्रेस का अपना इकोसिस्टम :

पूरा भ्रष्टाचार विरोधी आंदोलन कॉन्ग्रेस के द्वारा बनाए गए इकोसिस्टम का एक आइडिया ही था। लेकिन इस इकोसिस्टम ने बाद में यह सोचा कि कॉन्ग्रेस से सत्ता में हिस्सेदारी करने से अच्छा है कि खुद ही सत्ता प्राप्त की जाए। 2011-12 के अरब आंदोलन के बाद इस इकोसिस्टम को यह उम्मीद मिली कि भारत में भी सत्ता परिवर्तन हो सकता है। हालाँकि, जल्दी ही इकोसिस्टम का यह भ्रम टूट गया और दिल्ली (आम आदमी पार्टी के रूप में) के अलावा भारत के दूसरे हिस्से में यह इकोसिस्टम सफल नहीं हो सका। हालाँकि, तब तक इस इकोसिस्टम ने कॉन्ग्रेस के खिलाफ माहौल बना दिया था।  

अहंकार और अस्वीकार्यता :

कॉन्ग्रेस की पराजय में उसके नेताओं का अहंकार और वास्तविक परिस्थितियों के विषय में उनकी अस्वीकार्यता महत्वपूर्ण कारक बने। कॉन्ग्रेस के नेताओं ने अहंकार में अन्ना हजारे जैसे लोगों को सर से पाँव तक भ्रष्टाचारी बता दिया। वहीं जमीनी स्तर पर काम कर रहे कार्यकर्ताओं द्वारा मिली हकीकत को भी नकारते हुए कॉन्ग्रेस के शीर्ष नेतृत्व ने ‘सब कुछ ठीक है’ का रवैया अपनाया। इसके अलावा कॉन्ग्रेस द्वारा चलाया गया ‘भगवा आतंक’ का प्रोपेगेंडा हिन्दुत्व के मुद्दे को और हवा दे गया।

विकल्प के रूप में मोदी :

कॉन्ग्रेस देश में लगातार विजयी रही क्योंकि उसके पीछे कारण था किसी भी विकल्प की अनुपस्थिति (TINA-There Is No Alternative). लेकिन मोदी ने गुजरात में मुख्यमंत्री के तौर पर किए गए कार्यों, अपनी भाषण शैली और अपनी सशक्त छवि के कारण देश को यह भरोसा दिलाया कि वही एक विकल्प हैं। मोदी, कॉन्ग्रेस या उसके किसी भी नेता का एक बड़ा विकल्प बनकर उभरे।

2014 में जो कॉन्ग्रेस के साथ हुआ वह 2024 में मोदी के साथ न हो इसके लिए मोदी सरकार को अपने इकोसिस्टम को खुश रखना होगा और सभी सुझावों को सुनना होगा लेकिन भाजपा का इकोसिस्टम या दक्षिण पंथ (Right Wing) है कहाँ?

अब यह ‘राइट विंग इकोसिस्टम’ बहस का विषय है और इस पर एक पूरी पुस्तक लिखी जा सकती है। लेकिन हम इस तरह से समझ सकते हैं कि भाजपा को उन लोगों का ध्यान रखना चाहिए जो दूसरों को प्रभावित कर सकते हैं। पार्टी और सरकार को यह विचार करना चाहिए कि ऐसे लोग नाखुश या दुखी किन कारणों से हो सकते हैं। हालाँकि सुब्रमण्यम स्वामी जैसे लोगों पर ध्यान नहीं दिया जाना चाहिए लेकिन हर किसी को नजरअंदाज करना एक बड़ा नुकसान कर सकता है।

फिलहाल कोई भी ऐसा नहीं है जो मोदी के विकल्प के रूप में उभर सके। इकोसिस्टम भी अब यह जान चुका है कि उसे अब दोबारा कॉन्ग्रेस के खिलाफ नहीं जाना चाहिए। अब यह इकोसिस्टम राहुल गाँधी को एक राष्ट्रीय नेता बनाना चाहता है। हालाँकि यहाँ दो परिस्थितियाँ हैं, या तो यह इकोसिस्टम यह जानता है कि राहुल को नेता बनाने का कोई फायदा नहीं या फिर इकोसिस्टम अभी भी इसी आशा में है कि राहुल गाँधी नेतृत्व कर सकते हैं।

लेकिन यदि लोग परिवर्तन की इच्छा रखेंगे तो ऐसा नेता भी उपयोगी दिखाई देगा। 2014 के दौरान भ्रष्टाचार परिवर्तन का वाहक बना था लेकिन मोदी के लिए दुर्भाग्य से यह वायरस लोगों में परिवर्तन की इच्छा को जगा सकता है। यह आवश्यक नहीं कि सभी यह मानते हों कि मोदी निजी तौर पर इन सब के लिए जिम्मेदार हैं या कोई और इस महामारी से बेहतर तरीके से निपट सकता है लेकिन ‘बदलाव होना चाहिए’ यह प्रवृत्ति 2024 में लोगों के बीच घर कर सकती है।    

पूरा कॉन्ग्रेस-लेफ्ट इकोसिस्टम 2024 तक इस बदलाव की झूठी उम्मीदों को जिन्दा रखने की पूरी कोशिश करेगा। फासीवाद का रोना रोकर भी जो अवसर न मिल पाया, इस इकोसिस्टम को वह अवसर कोरोना वायरस में दिखाई दिया है।

लेकिन मोदी के पास समय और ताकत दोनों हैं कि वो परिवर्तन ला सकें और ‘परिवर्तन होना चाहिए’ इस भ्रम को दूर कर सकें।

नोट: हिंदी में अनुवादित यह लेख मूल रूप से इंग्लिश में लिखा गया है जिसे इस लिंक पर क्लिक करके पढ़ा जा सकता है।

‘समय बीत रहा’ चीन के खिलाफ खड़ा हो अंतरराष्ट्रीय समुदाय: तिब्बत की निर्वासित सरकार का आह्वान

तिब्बत की निर्वासित सरकार अथवा सेंट्रल तिब्बतन एडमिनिस्ट्रेशन (CTA) के शीर्ष राजनैतिक नेता पेनपा सेरिंग ने शुक्रवार (मई 21, 2021) को चीन द्वारा तिब्बतियों के ‘सांस्कृतिक नरसंहार’ की आशंका जताई और अंतरराष्ट्रीय समुदाय से चीन के खिलाफ एकजुट होने की माँग की।

टाइम्स ऑफ इंडिया की रिपोर्ट के मुताबिक CTA के नवनिर्वाचित अध्यक्ष पेनपा सेरिंग ने कहा कि वह चीन के साथ शांति संधि करना चाहते हैं लेकिन चीन की वर्तमान नीतियाँ तिब्बत के लिए खतरा हैं। सेरिंग ने भारत के धर्मशाला स्थित CTA के मुख्यालय से कहा कि अंतरराष्ट्रीय समुदाय को 2022 के बीजिंग विंटर ओलंपिक के पहले चीन के अत्याचारों के खिलाफ एकजुट हो जाना चाहिए क्योंकि समय बीत रहा है और बाद में लड़ने का कोई मतलब नहीं।  

मानवाधिकार समूह और तिब्बत के निवासी लगातार चीन पर सांस्कृतिक प्रतिबंध लगाने और क्षेत्र में सरकारी सहयोग से हान समुदाय को बसाने का आरोप लगाते रहते हैं। सेरिंग ने कहा कि हालाँकि वह बहुसंस्कृतिवाद के विरोधी नहीं हैं लेकिन एक बहुसंख्यक समुदाय द्वारा सरकार के सहयोग से अल्पसंख्यक समुदाय पर आधिपत्य स्थापित किया जा रहा है। सेरिंग ने कहा कि यदि चीन को नहीं रोका गया तो वह कुछ भी कर सकता है।

अगले दलाई लामा एक स्वतंत्र देश में जन्म लेंगे

CTA के अध्यक्ष पेनपा सेरिंग ने कहा कि वह तिब्बत के मुद्दे पर बातचीत करने के लिए चीन की सरकार तक पहुँचने का पूरा प्रयास कर रहे हैं, लेकिन यदि चीन की सरकार कोई ठोस सहयोग नहीं करती है तो तिब्बत का मुद्दा अंतरराष्ट्रीय मंचों पर उठाया जाता रहेगा। मीडिया से बात करते हुए सेरिंग ने कहा कि अपनी इच्छा के अनुसार अगले दलाई लामा एक स्वतंत्र देश में जन्म लेना चाहते हैं।

सेरिंग ने कहा कि चीन 15वें दलाई लामा को लेकर क्यों परेशान है जबकि 14वें दलाई लामा ही अभी जीवित हैं और चीन जाना चाहते हैं। चीन कहता है कि अगला दलाई लामा चुनने का अधिकार उसके पास ही है। सेरिंग ने यह भी कहा कि चीन को पहले बौद्ध धर्म के बारे में जान लेना चाहिए।

तिब्बतियों के पास है अपना दलाई लामा चुनने का अधिकार

आपको बता दें कि चीन और CTA के मध्य 2010 से ही वार्ता बंद है। पिछले कुछ सालों में तिब्बत के मुद्दे को अच्छा-खासा अंतरराष्ट्रीय समर्थन प्राप्त हुआ है। पिछले साल ही नवंबर में सेरिंग के पूर्वाधिकारी लोबसांग सांगे ने अमेरिका की यात्रा की थी। इसके एक महीने के बाद ही अमेरिकी कॉन्ग्रेस ने तिब्बत पॉलिसी एण्ड सपोर्ट एक्ट पास किया। इस एक्ट में तिब्बतियों को अपना दलाई लामा चुनने और तिब्बत की राजधानी ल्हासा में अमेरिकी दूतावास स्थापित करने का अधिकार दिया गया है।

1950 में चीन के सैनिकों ने तिब्बत पर अधिकार कर लिया था। 1959 में तिब्बती धर्मगुरु दलाई लामा निर्वासित हो गए थे। कई तिब्बती भी निर्वासित होकर भारत आ गए थे। इसके बाद ही CTA की स्थापना हुई थी। CTA की धर्मशाला में अपनी कार्यकारी, विधायी और न्यायिक संस्थाएँ हैं। वर्तमान में लगभग 1,50,000 तिब्बती निर्वासन में जी रहे हैं।

चीन हमेशा से ही तिब्बत में उसके द्वारा किए जा रहे मानवाधिकारों के उल्लंघन के आरोपों को नकारता रहा है। हालाँकि, इस समय तिब्बत विश्व के कुछ बेहद संवेदनशील इलाकों में से एक है। चीन की सरकार ने इस क्षेत्र में पत्रकारों, राजनयिकों या बाहरी लोगों की यात्रा को प्रतिबंधित कर रखा है।

भगोड़े जाकिर नाईक से जानें ‘ऊँट के पेशाब’ पीने के फायदे: बालों की समस्या, त्वचा रोग, हेपेटाइटिस या कैंसर… सबका 1 ईलाज

भारतीय कानून से बचकर विदेश में शरण लेने वाले भगौड़े जाकिर नाईक का एक वीडियो सामने आया है। वीडियो में इस्लाम के हिसाब से वह ऊँट के पेशाब को पीने के फायदे गिना रहा है। हास्यास्पद बात ये है कि इस्लामी कट्टरपंथी गौमूत्र पीने पर हिंदुओं का मजाक बनाते रहे हैं जबकि उनके मजहब में ऊँट के पेशाब पीने को स्वास्थ्यवर्धक बताया गया है।

हुडा टीवी पर नाईक का वीडियो 7 जनवरी 2021 को अपलोड हुआ था। इस चैनल पर 4.87 लाख सब्सक्राइबर हैं। इस वीडियो में जाकिर अपने दर्शकों के ही सवालों का जवाब दे रहा है जिन्होंने कुरान के मुताबिक ऊँट के पेशाब और दूध के फायदे पूछे थे। वीडियो में 4 मिनट 56 सेकेंड के बाद देखा जा सकता है कि नाईक कहता है, “ऐसी बहुत सी रिसर्च हैं जो इस बात की पुष्टि करती हैं कि इंसान के लिए ऊँट के पेशाब पीने के कई फायदे हैं। ”

अपने दावों को सही साबित करने के लिए वह पर्शियन फिजिशियन इब्न सिना के दावों का उदाहरण देता है। वह कहता हैं, “सभी मूत्रों में सबसे अधिक लाभकारी ऊँटों का मूत्र होता है। आज प्रयोगशाला परीक्षण करने के बाद हमें पता चलता है कि ऊँट के मूत्र में पोटेशियम और एल्बुमिनस प्रोटीन होते हैं। हम जानते हैं कि इसमें यूरिक एसिड, सोडियम और क्रिएटिन के अंश भी होते हैं।

ऊँट के पेशाब पीने के फायदे :

जाकिर नाईक कहता है कि डॉ. अब्दुल फतेह महमूद इदरीस द्वारा किए गए शोध के अनुसार, ऊँट के मूत्र का उपयोग कुछ त्वचा रोगों में किया जा सकता है। वैज्ञानिक शोधों ने साबित किया है कि मूत्र बालों को चमकदार और घना बनाता है। इसका उपयोग रूसी की रोकथाम में भी किया जाता है।

इसके बाद जाकिर, डॉ. अहलाम अल अवदी नामक एक अन्य मुस्लिम माइक्रोबायोलॉजिस्ट द्वारा किए गए ‘शोध’ का उदाहरण देता है। वह बताता है कि डॉ. अवदी के शोध से पता चला कि ऊँट का मूत्र त्वचा रोगों और रूसी के अलावा हेपेटाइटिस को भी ठीक कर सकता है।

डॉ. खुर्शीद का हवाला देते हुए जाकिर नाईक ने दावा किया कि ऊँट के मूत्र में कैंसर रोधी गुण होते हैं। इसका उपयोग कैंसर के उपचार में किया जा सकता है। इसके बाद अपनी बात रखते हुए इस्लामी उपदेशक ने अपने मुस्लिम अनुयायियों से कुरान की हर बात पर आँख बंद करके विश्वास करने और हदीसों की बातों पर सहमत होने का आग्रह किया। 

वह जोर देकर आगे कहता है, “आप हमेशा बाद में शोध कर सकते हैं। लेकिन विज्ञान यह निर्धारित करने का मानदंड नहीं है कि आपको हदीस पर विश्वास करना चाहिए या नहीं। अगर हदीस प्रामाणिक है, तो हम उस पर विश्वास करते हैं, भले ही विज्ञान उस पर विश्वास करे या नहीं।”

गौमूत्र पीने के नहीं कोई फायदे, जानवरों का मल मूत्र सेवन कर सकते हैं मुसलमान :

अपने अनुयायियों से नाईक ने आगे कहा कि वह लोग गौमूत्र का मजाक न उड़ाएँ क्योंकि ऊँट का पेशाब और गौमूत्र दोनों शुद्ध होते हैं। हालाँकि, आगे नाईक ने ये मानने से इंकार किया कि गौमूत्र से कोई लाभ होता है। उसके मुताबिक इस पर वैज्ञानिक शोध नहीं हैं। नाईक ने फारसी चिकित्सक इब्न सिना का उदाहरण देते हुए कहा कि मुसलमान किसी भी जानवर या पक्षी के मूत्र या मल का सेवन कर सकते हैं। ये उनके लिए (हलाल) है। 

वह कहता है, “(मुसलमानों में) ऊँट का पेशाब पीना एक आम बात है। यह अरब (दुनिया) में सदियों से होता आ रहा है। हिंदुओं में गौमूत्र पीने की भी यही प्रथा है। लेकिन, इसके लिए कोई वैज्ञानिक प्रमाण नहीं मिले। मैं यह नहीं कह सकता कि यह अच्छा है या बुरा। लेकिन इस्लामी विद्वानों के अनुसार, हाँ, आप इसे पी सकते हैं।” इसके बाद जाकिर ने आगे हिंदू देवताओं और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का मखौल उड़ाया और प्राचीन भारत में विज्ञान की प्रगति को खारिज कर दिया।

ऊँट के पेशाब पीने की कहानी :

वीडियो के अंत में, जाकिर नाईक ने सहीह-अल-बुखारी की हदीस के 5686 पद का हवाला दिया। इसमें बताया गया है, “मदीना की जलवायु कुछ लोगों को सूट नहीं करती थी, इसलिए पैगंबर ने उन्हें अपने ऊँटों का पालन करने और उनका दूध और मूत्र (दवा के रूप में) पीने का आदेश दिया। इसके बाद वह लोग चरवाहे और ऊँटों के पीछे लग गए, और जब तक उनका शरीर स्वस्थ न हो गया तब तक उनका दूध और मूत्र पिया। लेकिन बाद में उन्होंने चरवाहे को मार डाला और ऊँटों को भगा दिया। जब पैगंबर तक ये बात पहुँची तो उन्होंने कुछ लोगों को उनकी खोज में भेजा। जब वह लाए गए तो उनके हाथ और पैर काे काट दिए गया। वहीं उनकी आँखों में लोहे के गर्म टुकड़े डाल दिए गए।”

हिंदुओं को ईसाई बनाने के लिए अस्पतालों का इस्तेमाल करने वाले थे IMA प्रमुख, अब बाबा रामदेव पर निशाना: जानिए क्या है मामला

कोरोना संक्रमण में इलाज के बावजूद हो रही मौतों पर बाबा रामदेव का एक वीडियो वायरल होने के बाद इंडियन मेडिकल एसोसिएशन (IMA) ने उनके खिलाफ कड़ा रुख अख्तियार किया है। वायरल वीडियो में रामदेव कहते हैं कि एलोपैथी दवाएँ खाने से लाखों लोगों की मौत हुई। इसको लेकर आईएमए ने केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय को चिट्ठी लिखकर रामदेव के खिलाफ कार्रवाई करने की माँग की है। उन्होंने कहा अगर स्वास्थ्य मंत्रालय इस पर संज्ञान नहीं लेता, तो वह कोर्ट जाएँगे।

आईएमए ने विशेष रूप से दो बयानों पर आपत्ति जताई। वायरल वीडियो में रामदेव ने कहा, ”एलोपैथी ऐसी बेकार साइंस है कि पहले इनकी हाइड्रोऑक्सीक्लोरोक्वीन फेल हो गई, फिर रेमडेसिविर फेल हो गई। फिर एंटीबायोटिक्स इनके फेल हो गए, स्टेरॉयड फेल हो गए। प्लाज्मा थेरेपी के ऊपर भी बैन लग गया। आइवरमेक्टिन भी फेल हो गई। बुखार के लिए फैबिफ्लू दे रहे हैं, वो भी फेल है।”

रामदेव ने आगे कहा, ”लोग कह रहे हैं कि यह क्या तमाशा हो रहा है। ऐसा इसलिए है क्योंकि आप बॉडी का तापमान उतार देते हो, लेकिन शरीर के अंदर उस वायरस को खत्म नहीं कर रहे हो। इसी कारण बुखार हो रहा है उसका निवारण तो तुम्हारे पास है नहीं। इसलिए मैं जो बात कह रहा हूँ, उस पर हो सकता है कि कुछ लोग बड़ा विवाद खड़ा करें।” उन्होंने कहा कि लाखों लोगों की मौत एलोपैथी की दवा खाने से हुई है। जितने लोगों की मौत अस्पताल न जाने और ऑक्सीजन नहीं मिलने से हुई है, उससे कहीं ज्यादा मौतें एलोपैथी की वजह से हुई है। स्टेरॉयड की वजह से हुई है।

बाबा रामदेव के इन बयानों पर IMA ने कहा, ”भारतीय दंड संहिता की धारा 188 के साथ महामारी रोग अधिनियम की धारा 3 के तहत, रामदेव पर कई लोगों के जीवन को खतरे में डालने और एलोपैथी दवाओं को लेकर झूठी अफवाह फैलाने के लिए उन पर मुकदमा चलाया जाना चाहिए। दवाओं को लेकर उनका बयान हास्यास्पद और बचकाना है। ये दवाओं पर किए गए उनके कथित गहन अध्ययन को दर्शाता है।”

डॉ JA जयलाल और ईसाई प्रेम

IMA द्वारा जारी इस पत्र पर आईएमए के राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ जे ए जयलाल और मानद महासचिव डॉ जयेश एम लेले के हस्ताक्षर थे। ये वही डॉ जयलाल हैं, जो इस साल की शुरुआत में खुद ही कुछ ऐसा बोल गए, जिससे एक विवाद में फँस गए थे, जब उन्होंने कहा था कि वह हिंदुओं को ईसाई धर्म में परिवर्तित करने के लिए अस्पतालों का इस्तेमाल करना चाहते थे।

डॉ जयलाल ने कहा था कि वे चाहते हैं कि IMA ‘जीसस क्राइस्ट के प्यार’ को साझा करे और सभी को भरोसा दिलाए कि जीसस ही व्यक्तिगत रूप से रक्षा करने वाले हैं। उन्होंने कहा था कि चर्चों और ईसाई दयाभाव के कारण ही विश्व में पिछली कई महामारियों और रोगों का इलाज आया।

उन्होंने ईसाई संस्थाओं में भी गॉस्पेल (ईसाई सन्देश) को साझा करने की ज़रूरत पर बल दिया था। उन्होंने IMA में अपने अध्यक्षीय भाषण में भी कहा था कि आज जो भी हैं वह ‘सर्वशक्तिमान ईश्वर जीसस क्राइस्ट’ का गिफ्ट है और कल जो होंगे, वे भी उनका ही गिफ्ट होगा। उन्होंने इस दौरान मदर टेरेसा के उद्धरण का जिक्र किया था, जिन पर पहले से ही ईसाई धर्मांतरण के आरोप लगते रहे हैं। ‘क्रिस्चियन टुडे’ के इंटरव्यू में भी उन्होंने बताया कि कैसे महामारी के बावजूद ईसाई मजहब आगे बढ़ रहा है।

इसके अलावा, डॉक्टर JA जयलाल यहीं पीछे नहीं रहते। उन्होंने आरोप लगाया था कि मोदी सरकार इसलिए आयुर्वेद में विश्वास करती है, क्योंकि उसके सांस्कृतिक मूल्य और पारंपरिक आस्था हिंदुत्व में है। उन्होंने दावा किया कि पिछले 3-4 वर्षों से आधुनिक मेडिसिन की जगह आयुर्वेद को लाने की कोशिश हो रही है। उन्होंने कहा कि आयुर्वेद, यूनानी, होमियोपैथी और योग इत्यादि की जड़ें संस्कृत में हैं, जो हिंदुत्व की भाषा है।

केजरीवाल जनता में झूठ और भ्रम फैलाना बंद करें: जावड़ेकर ने पूछा- आखिर ये 50 लाख वैक्सीन की खुराक कहाँ से आई?

कोरोना वैक्सीनेशन को लेकर दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल लगातार केंद्र सरकार पर सवाल खड़ा करते रहे हैं। मगर इस बार सरकार ने केजरीवाल को जवाब दिया है। केंद्रीय मंत्री प्रकाश जावड़ेकर ने कहा है कि दिल्ली के मुख्यमंत्री वैक्सीनेशन पर राजनीति कर रहे हैं। उन्हें जनता में झूठ फैलाना बंद करना चाहिए।

प्रकाश जावड़ेकर ने बताया कि कल ही केजरीवाल ने कहा कि दिल्ली में वैक्सीन की 50 लाख खुराक की आपूर्ति की गई है, जिस पर खुद केजरीवाल ने बयान दिया है। आने वाले दिनों में दिल्ली को और भी खुराक दी जाएँगी। उन्होंने कहा, “मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल वैक्सीन के नाम पर राजनीति करना बंद करें। केंद्र सरकार हर राज्य को वैक्सीन उपलब्ध करवा रही है और आगे भी उपलब्ध करवाएगी। इसलिए, मुख्यमंत्री केजरीवाल जनता में झूठ और भ्रम फैलाना बंद करें।”

उन्होंने दिल्ली सीएम से पूछा कि आखिर ये 50 लाख वैक्सीन की खुराक आई कहाँ से? उन्होंने कहा, “केजरीवाल को बहाने बनाना बंद कर देना चाहिए। अब तक देश में 20 करोड़ से ज्यादा वैक्सीन दी जा चुकी है। ये सभी केंद्र ने उपलब्ध करवाई हैं। केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री हर्षवर्धन ने प्लान तैयार किया है कि कैसे सभी वयस्कों को दिसंबर से पहले टीका लगाया जाए।”

दिल्ली में बंद हुआ 18+ से ऊपर लोगों को वैक्सीनेशन

मालूम हो कि दिल्ली में शनिवार ( 22 मई 2021) से युवाओं (18 से 44 साल) के लिए वैक्सीनेशन सेंटर बंद कर दिए गए हैं। मुख्यमंत्री ने अरविंद केजरीवाल इस मामले पर हाथ खड़े कर दिए। 

उन्होंने आज प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा, ”हमें दुख है कि युवाओं के लिए वैक्सीनेशन सेंटर बंद करने पड़ रहे हैं। केंद्र से हमने और वैक्सीन की माँग की है। जैसे ही वैक्सीन मिलेगी, दोबारा सेंटर खोलेंगे।”

उन्होंने कहा, “दिल्ली को ढाई करोड़ वैक्सीन की जरूरत है। मई में दिल्ली को 16 लाख वैक्सीन दी गई और जून में इसे घटाकर 8 लाख कर दिया गया है। ऐसा केंद्र की तरफ से कहा गया है। अगर इसी गति से वैक्सीन मिली तो वैक्सीन लगाने में हमें 30 महीने लग जाएँगे।”

मुख्यमंत्री ने आगे कहा कि वैक्सीन की कमी की वजह से देश में बहुत मुश्किल हालात पैदा हो गए हैं। कोरोना से लोगों की जान बचाने के लिए वैक्सीन ही एक मात्र उपाय है। सीएम के इसी बयान के बाद शाम को केंद्रीय मंत्री ने इस पर बयान जारी किया।

आसिफ को दिए क्लीनचिट की सरपंच ने बताई सच्चाई, कहा- दबाव में कहा था ऐसा: देखें वीडियो

नूँह जिला स्थित खेड़ा खलीलपुर गाँव के आसिफ नाम के व्यक्ति की रविवार (मई 16, 2021) को कुछ लोगों ने हत्या कर दी। इसे मेवात के कुछ लोगों व इस्लामी कट्टरवादियों ने सोशल मीडिया पर ‘हिंदुओं द्वारा मॉब लिंचिंग’ के तौर पर प्रचारित करके सांप्रदायिक रूप देने का प्रयास किया गया। इन पोस्ट्स व ट्वीट्स में आसिफ को बिल्कुल निर्दोष और सीधा-सादा बताया गया। वहीं गाँव सरपंच संतलाल ने भी हाल ही में सामने आए एक वीडियो में आसिफ को नेक और ईमानदार इंसान बताया। उन्होंने कहा कि 5 साल के कार्यकाल में आसिफ का कोई भी ऐसा काम सामने नहीं नहीं आया, जिसके तौर पर कहा जाए कि वह बदमाश था।

हालाँकि अब संतलाल का एक और वीडियो सामने आया है, जिसमें वह अपनी पुरानी बातों से मुकरते नजर आ रहे हैं। उन्होंने कहा कि वहाँ पर सिर्फ मुस्लिम समुदाय के लोग और कुछ ऐसे पत्रकार बैठे थे जो हिंदुओं के खिलाफ जहर उगल रहे थे, इसलिए उन्होंने माहौल को शांतिपूर्ण रखने के लिए ऐसी बातें कही। हालाँकि उन्होंने बाद में इस तरह का बयान देने की बात को नकार दिया।

उन्होंने कहा, “मैं गाँव का सरपंच होने के नाते पीड़ित परिवार से मिलने गया। वहाँ पर पहले से ही कुछ पत्रकार बैठ कर हिंदुओं के खिलाफ जहर उगल रहे थे। मैंने कोशिश की कि इसको रोकूँ लेकिन पीड़ित परिवार को देखते हुए मैंने उसको नहीं रोका। मैंने वह बयान इसलिए दिया कि गाँव में भाईचारा बना रहे।”

सरपंच ने बताया कि उन्हें आसिफ के ऊपर के केस के बारे में पता नहीं था। अब उनके संज्ञान में आया है कि उसके ऊपर 4-5 मुकदमे दर्ज हैं। उन्होंने बताया कि SDM ने मामले में कमिटी गठित की है। इसमें 10 हिंदू समुदाय से हैं और 5 मुस्लिम समुदाय से। कमेटी को यह जिम्मेदारी सौंपी गई है कि कमेटी के सदस्य गाँव में जाकर अपने अपने समुदाय के लोगों को समझाएँगे।

गौरतलब है कि आसिफ पर आरोप है कि करीब 10 साल पहले अपने ही गाँव में एक स्कूल के कार्यक्रम में लड़कियों के कपड़े बदलते हुए वीडियो बनाने के आरोप में पकड़ा गया था। तब ग्रामीणों ने आपस में सुलह करा दिया था। लेकिन, तभी से ही आसिफ और लड़की के परिजनों के बीच कटुता का भाव पैदा हो गया था और आए दिन झगड़े होते थे। हालाँकि इस मामले में सरपंच का कहना है कि यह घटना उनके कार्यकाल से पहले का है। 2010 में सोहना के अभयपुर गाँव में हुई हत्या की एक वारदात में भी आसिफ का नाम आया था। 

ABVP के दिल्ली विश्वविद्यालय यूनिट के अध्यक्ष सत्येंद्र अवाना के अनुसार, फरीदाबाद में निकिता तोमर की जिन बदमाशों ने ‘लव जिहाद’ प्रकरण में हत्या की थी, वो भी आसिफ की गैंग के सदस्य थे।उन्होंने बताया कि आसिफ लूटपाट करता था, जिसका केस आज भी उत्तर प्रदेश पुलिस में चल रहा है और वो डेढ़ साल की जेल भी काट के आया था। जबकि सोशल मीडिया पर हिन्दू आतंकवाद और मॉब लिंचिंग वाला नैरेटिव फैलाते हुए ऐसा दिखाया जा रहा है जैसे ‘जय श्रीराम’ न बोलने पर युवक की हत्या की गई है।

तीसरे चरण से पहले छोटे बच्चों के माँ-बाप का हो जाएगा कोविड टीकाकरण, 31 मई के पहले खत्म करेंगे दूसरी लहर: CM योगी

उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने आज (22 मई) इटावा और सैफई का दौरा किया। मीडिया से चर्चा करते हुए सीएम योगी ने कहा कि सरकार कोरोना वायरस संक्रमण की तीसरी लहर से पहले 10 साल से कम उम्र के बच्चों के माता-पिता का टीकाकरण कर देगी।

इटावा में दौरे पर आए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि उनकी सरकार राज्य में Covid-19 की तीसरी लहर को लेकर गंभीर है। बच्चों को संक्रमण के खतरे से हर हाल में सुरक्षा की जाएगी। सीएम आदित्यनाथ ने कहा कि संक्रमण की तीसरी लहर आने से पहले ही 10 साल से कम आयु के बच्चों के माता-पिता का हर हाल में टीककरण किया जाएगा जिससे बच्चों के संक्रमित होने पर उनके माँ-बाप उनकी सहायता के लिए साथ रह सकें।

इसके अलावा सीएम आदित्यनाथ ने कहा कि उत्तर प्रदेश सरकार 31 मई से पहले कोरोना वायरस संक्रमण की दूसरी लहर को कम कर देगी। साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि प्रदेश के सभी मेडिकल यूनिवर्सिटी और कॉलेजों में 300 बेड वाले पीडियाट्रिक वार्ड बनाए जाएंगे। साथ जिला अस्पतालों में भी 25-25 बेड के पीडियाट्रिक वार्ड शुरू होंगे।

इसके अलावा सीएम आदित्यनाथ ने यह भी घोषणा की कि जिलों में न्यायिक अधिकारियों, उनके परिजनों और मीडियाकर्मियों के लिए टीकाकरण केंद्रों की स्थापना की जाएगी। उन्होंने बताया कि लखनऊ और नोएडा में इसकी शुरुआत कर दी गई है और हाई कोर्ट की इलाहाबाद और लखनऊ बेंच में भी टीकाकरण किया जा रहा है। इसके अलावा सीएम आदित्यनाथ ने गाँवों को कोरोना मुक्त बनाने के लिए अभियान चलाने का निर्देश भी दिया।

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने सैफई स्थित उत्तर प्रदेश आयुर्विज्ञान विश्वविद्यालय का निरीक्षण किया। विश्वविद्यालय के निरीक्षण के बाद सीएम आदित्यनाथ प्रशासनिक भवन में अधिकारियों के साथ बैठक में शामिल हुए।  

अस्पताल में डॉक्टर ने कॉन्ग्रेस विधायक के लिए नहीं छोड़ी कुर्सी तो जमकर हुई बहसबाजी: वीडियो वायरल

वैशाली जिले के महुआ अनुमंडल अंतर्गत राजापाकर के अतिरिक्त प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र चकसिकंदर से एक चौंकाने वाला सामने आया है। यहाँ कॉन्ग्रेस विधायक प्रतिमा कुमारी अस्पताल का निरीक्षण करने के लिए पहुँची थीं। इस दौरान जब विधायक अस्पताल के चिकित्सक के दफ्तर पहुँचीं तो उन्हें डॉक्टर ने अपनी कुर्सी देने से मना कर दिया। इससे वहाँ अजीबोगरीब स्थिति पैदा हो गई।

ऐसे में विधायक ने अस्पताल में तैनात चिकित्सक डॉक्टर श्याम बाबू सिंह को प्रोटोकॉल का हवाला दिया। इस पर भी डॉक्टर मानने को तैयार नहीं हुए। उन्होंने कहा कि उन्हें ऐसा कोई आदेश नहीं मिला है और न ही बताया गया है। इसलिए वे अपनी कुर्सी नहीं देंगे। डॉक्टर की यह बात सुनकर विधायक चौंक गईं। दोनों के बीच काफी देर तक इसे लेकर बहस होती रही।

आखिर में डॉक्टर ने विधायक प्रतिमा कुमारी को अपनी कुर्सी नहीं दी। ऐसे में कोई अन्य विधायक के लिए दूसरी कुर्सी लेकर आया और वे इस पर बैठीं। इस पूरे मामले को लेकर कॉन्ग्रेस विधायक ने सीएम नीतीश कुमार पर हमला बोला है। उन्होंने कहा कि सीएम कमजोर हो चुके हैं। इसी वजह से अस्पताल के डॉक्टरों को प्रोटोकॉल के बारे में पता नहीं है। 

विधायक ने कहा कि जब नीतीश सरकार में जनप्रतिनिधि का सम्मान नहीं हो रहा है तो आम आदमी के साथ क्या हो रहा होगा। उन्होंने कहा कि यह सरकार विपक्षियों को जनप्रतिनिधि तक मानने के लिए तैयार नहीं है। इसी कारण अस्पताल में प्रोटोकॉल का पालन नहीं हो रहा है।

गौरतलब है कि कुछ दिनों पहले भोपाल के जेपी अस्पताल से कॉन्ग्रेस नेता और पूर्व मंत्री पीसी शर्मा द्वारा की गई अभद्रता का एक वीडियो सामने आया था। इसके बाद एक और वीडियो उज्जैन के माधव नगर अस्पताल से सामने आया, जिसमें मध्य प्रदेश कॉन्ग्रेस की प्रवक्ता नूरी खान डॉक्टर से अभद्रता करते नजर आईं।

कॉन्ग्रेस नेता कथित तौर पर अस्पताल में व्यवस्था देखने पहुँची थीं। इस दौरान अस्पताल के ही डॉक्टर से किसी बात पर उनकी बहस शुरू हो गई। डॉक्टर ने उनसे पूछा कि आप कौन हैं, कोविड गाइडलाइन का ध्यान रखिए। इस पर कॉन्ग्रेस नेता ने कहा, “मैं कौन हूँ, आपको जल्द ही पता लग जाएगा।”