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कमलनाथ के ‘मेरा भारत कोविड’ वाले बयान पर CM शिवराज का पलटवार, सोनिया गाँधी से पूछा- क्या यह देशद्रोह नहीं?

कोरोना संकट के बीच कॉन्ग्रेस की ओछी राजनीति लगातार जारी है। मध्य प्रदेश के पूर्व सीएम कमलनाथ के ‘मेरा भारत कोविड’ और ‘इंडियन कोरोना’ जैसे शब्दों पर पलटवार करते हुए मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कमलनाथ पर संकट के समय घटिया राजनीति करने का आरोप लगाया है।

सीएम शिवराज ने कमलनाथ पर निशाना साधते हुए कहा कि मैं सोनिया गाँधी से पूछना चाहता हूँ कि इस तरह का ओछा बयान देने वाले नेता के खिलाफ वह कोई कार्रवाई करेंगी? शिवराज सिंह ने सवाल किया कि क्या यह बयान देशद्रोह नहीं है?

उन्होंने कहा कि हम सभी दिन रात कोरोना संक्रमण से निपटने के लिए चैन की साँस नहीं ले रहे हैं। ऐसे में उम्मीद थी कि संकट के इस समय में कम से कम देश एक होगा और राजनीतिक दल इसे राजनीति का अखाड़ा नहीं बनाएँगें।

कमलनाथ का बयान मनोबल तोड़ने वाला

मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कॉन्ग्रेस नेता कमलनाथ के ‘इंडियन कोरोना’ वाले बयान को मनोबल तोड़ने वाला बताते हुए कहा कि उन्हें इससे काफी तकलीफ हुई है। सीएम ने कहा कि ‘मेरा भारत कोविड’ और ‘इंडियन कोरोना’ जैसे बयान क्या ऐसा करना कॉन्ग्रेस को शोभा देता है? क्या ये कमलनाथ को शोभा देता है? क्या सोनिया गाँधी को शोभा देता है?

मुख्यमंत्री ने आगे कहा कि कमलनाथ के इस बयान से क्या विदेशों में रहने वाले भारतीयों का मनोबल नहीं टूटेगा? उनके सम्मान को ठेस नहीं लगेगी? कमलनाथ मुख्यमंत्री रहने के साथ ही केंद्रीय मंत्री भी रहे हैं, फिर भी ऐसा घटिया व्यवहार कर रहे हैं।

क्या कहा था कमलनाथ ने

गौरतलब है कि मध्य प्रदेश के पूर्व कॉन्ग्रेसी सीएम कमलनाथ ने क​हा था कि दुनिया भर में देश की पहचान ‘इंडियन कोरोना’ से बन गई है। इसकी शुरुआत चीनी कोरोना से हुई थी, लेकिन अब यह ‘इंडियन वेरिएंट’ कोरोना है। आज भारत के राष्ट्रपति और प्रधानमंत्री COVID-19 के भारतीय वेरिएंट से डरते हैं। यह कौन सा टूलकिट है? हमारे वैज्ञानिक इसे ‘इंडियन वेरिएंट’ कह रहे हैं। सिर्फ बीजेपी के सलाहकार ही नहीं मान रहे हैं।

सैनिक छावनी महू से 2 सगी बहनें कौसर और हिना जासूसी में गिरफ्तार: पाकिस्तान भेज रही थी अहम जानकारी

मध्य प्रदेश ​के इंदौर जिले के सैनिक छावनी महू इलाके से दो सगी बहनें कौसर और हिना को गिरफ्तार किया गया है। इन पर सैनिक छावनी की गुप्त सूचनाएँ पाकिस्तान भेजने का संदेह है। बताया जा रहा है कि ये युवतियाँ सोशल मीडिया पर फर्जी आईडी के जरिए पाकिस्तान के पूर्व सैनिक और नागरिकों के सम्पर्क में थीं। बताया जा रहा है कि युवती जिन पाकिस्तानी नागरिकों से बात करती थी, उनका पाकिस्तानी खुफिया एजेंसी आईएसआई से लिंक है।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक इंदौर आईजी हरिनारायण चारी ने दोनों युवतियों को पुलिस द्वारा हिरासत में लेने की पुष्टि की है। युवतियों को हिरासत में लेने के बाद देश भर की एजेंसियाँ सक्रिय हो गई हैं। एटीएस, आईबी, इंदौर पुलिस, मिलिट्री इंटेलिजेंस अपने-अपने स्तर पर जाँच में जुट गई हैं।

खबरों में दावा किया जा रहा है कि दोनों युवतियाँ सैन्य छावनी क्षेत्र की जानकारी पाकिस्तान पहुँचा रही थी। कुछ दिन पहले ये रोड पर चलते हुए पाकिस्तान में फोन पर बात कर रही थीं। इसी दौरान सेना के गोपनीय विभाग ने उसके फोन पर फ्रीक्वेंसी पकड़ ली थी। तभी से इन पर नजर रखी जा रही थी।

जानकारी के मुताबिक कौसर और हिना नाम की इन युवतियों की उम्र 32 और 28 साल है। दोनों बहनें कई जगह नौकरी कर चुकी हैं। वे कहीं ज्यादा दिनों तक नहीं रहती थीं। हिना महू में बिजली कंपनी में कांट्रेक्टर के पोस्ट पर काम करती रही। बिजली कंपनी से मिली सूचना के मुताबिक हिना 6 महीने से कंप्यूटर ऑपरेटर के तौर पर प्राइम वन एजेंसी के जरिए काम कर रही थी।

दूसरी बहन महू में बतौर शिक्षिका काम कर रही थी। उनके फोन व अन्य इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों को जब्त कर लिया गया है। उनसे आगे की पूछताछ की जा रही है। पुलिस ने उनके पास से लैपटॉप, मोबाइल फोन जब्त किया है। यह भी बताया जा रहा है कि इन्हें मॉरीशस से फंडिंग हो रही थी। इनके पिता सेना में नौकरी करने के बाद इंदौर में एसबीआई की एक शाखा में सुरक्षाकर्मी थे, लेकिन उनकी मृत्यु हो चुकी है। दोनो बहनें एक साल से अधिक समय से पाकिस्तान के साथ संपर्क में रहने के लिए सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर फर्जी आईडी का उपयोग कर रही थी।

मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक युवतियों को कुछ समय पहले महू में आर्मी की इमारतों और ट्रेनिंग सेंटर के आसपास फोटोग्राफी करते हुए देखा गया था इसके बाद एक फेक आईडी बनाकर इन्हें टारगेट किया गया था। रिपोर्ट्स के मुताबिक, पाकिस्तान के एक एजेंट ने कहा था कि वह बड़ी बहन से शादी करेगा। लड़की ने यह भी कहा कि वह उस आदमी से शादी करना चाहती है जिसके साथ वह सोशल मीडिया के जरिए संपर्क में आई थी।

‘कॉन्ग्रेस टूलकिट’ मामला: BJP नेता संबित पात्रा को छत्तीसगढ़ पुलिस का नोटिस, पूछताछ को बुलाया

कॉन्ग्रेस के कथित टूलकिट मामले में भाजपा प्रवक्ता संबित पात्रा को रायपुर पुलिस ने पूछताछ के लिए नोटिस जारी किया है। पात्रा को रविवार (23 मई) को शाम 4 बजे व्यक्तिगत तौर पर या वर्चुअली पेश होने के लिए कहा गया है। छत्तीसगढ़ NSUI के प्रदेश अध्यक्ष आकाश शर्मा की शिकायत पर रायपुर सिविल लाइन पुलिस ने एफआईआर दर्ज की और संबित पात्रा को पूछताछ के लिए नोटिस भेजा है।

छत्तीसगढ़ NSUI के प्रदेश अध्यक्ष आकाश शर्मा द्वारा भाजपा प्रवक्ता संबित पात्रा और राज्य के पूर्व मुख्यमंत्री रमन सिंह पर शिकायत दर्ज कराई गई है। शिकायत में दोनों भाजपा नेताओं पर यह आरोप लगाया गया है कि संबित पात्रा कॉन्ग्रेस के लेटरहेड के माध्यम से फर्जी दस्तावेज शेयर कर रहे हैं और टूलकिट के बहाने कॉन्ग्रेस पर झूठ आरोप लगा रहे हैं। वहीं रमन सिंह पर समुदायों के बीच तनाव उत्पन्न करने का आरोप लगाया गया है।

छत्तीसगढ़ NSUI की इस शिकायत के आधार पर रायपुर के सिविल लाइन थाना में एफआईआर दर्ज की गई है। साथ ही भाजपा नेता संबित पात्रा को रविवार (23 मई) को शाम 4 बजे पूछताछ के लिए पेश होने का नोटिस भेजा गया है। इस नोटिस में संबित पात्रा को या तो व्यक्तिगत तौर पर या वर्चुअल माध्यम से पेश होने के लिए कहा गया है। नोटिस में आदेश का पालन न करने पर वैधानिक कार्रवाई की चेतावनी भी दी गई है। ज्ञात हो कि संबित पात्रा के खिलाफ आईपीसी की धारा 504, 505(1) BC, 469 और 188 के तहत मामला दर्ज किया गया है।  

भाजपा नेता संबित पात्रा को भेजा गया नोटिस

आपको बता दें कि कुछ दिनों पहले कॉन्ग्रेस का कथित टूलकिट लीक हुआ जिसमें कोरोना वायरस के समय केंद्र की मोदी सरकार और उसके मंत्रियों को बदनाम करने के दिशा-निर्देश दिए गए हैं। इसके अलावा इस टूलकिट में विदेशी मीडिया से साँठ-गाँठ की बातें भी कही गई हैं। टूलकिट में हिंदुओं के महान पर्व कुंभ को भी बदनाम करने की साजिश की गई है।

इस टूलकिट के लीक होने के बाद से ही भाजपा नेताओं ने आरोप लगाए कि कॉन्ग्रेस भी देश के खिलाफ साजिश में शामिल है। इसके अलावा कॉन्ग्रेस पर यह भी आरोप लगाया गया है कि कोरोना वायरस के संक्रमण के इस दौर में सरकार की सहायता करने के स्थान पर कॉन्ग्रेस राजनीति कर रही है और चाइनीज वायरस के लिए ‘इंडियन स्ट्रेन’ जैसे शब्दों का उपयोग कर रही है। हालाँकि कॉन्ग्रेस इस टूलकिट को फर्जी बता रही है।

इसी क्रम में कॉन्ग्रेस ने ट्विटर को भी ईमेल किया था जिसके बाद ट्विटर ने टूलकिट से संबंधित कई ट्वीट्स में ‘मैनिपुलेटेड मीडिया’ टैग लगाया था। इनमें से अधिकांश ट्वीट भाजपा नेताओं के थे। इस मुद्दे पर सरकार ने ट्विटर को सख्त हिदायत दी थी कि टूलकिट मैनिपुलेटेड है या नहीं, यह जाँच एजेंसियाँ तय करेंगी।

हालाँकि, कॉन्ग्रेस ने इस मुद्दे पर एफआईआर दर्ज कराने की बात कही थी। इसके बाद ही टूलकिट मुद्दे पर प्रखरता से अपनी बात रखने वाले भाजपा नेता संबित पात्रा के खिलाफ कॉन्ग्रेस शासित छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर में शिकायत दर्ज कराई गई।

शाहिद अफरीदी की वो बेटी जो देखती थीं हिंदुस्तानी सीरियल, उनका निकाह पक्का: शाहीन अफरीदी होंगे शौहर

पाकिस्तानी ऑलराउंडर और पूर्व कप्तान शाहिद अफरीदी ने अपनी बेटी अक्सा और तेज गेंदबाज शाहीन के निकाह की खबरों पर विराम लगा दिया है। मी​डिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, शाहिद अफरीदी ने शनिवार (22 मई 2021) को खुलासा किया कि वह 20 साल के शाहीन शाह अफरीदी को अपना दामाद बनाने वाले हैं।

जियो टीवी को दिए एक इंटरव्यू में शाहिद (Shahid Afridi) से स्टार पेसर शाहीन (Shaheen Shah Afridi) और उनकी बेटी की सगाई को लेकर सवाल किया गया। इस पर उन्होंने कहा कि अल्लाह ने अगर चाहा तो भविष्य में यह युवा गेंदबाज उनका दामाद बनेगा। शाहीन के पैरेंट्स भी इस रिश्ते को लेकर काफी उत्साहित हैं।

पाकिस्तान के पूर्व खिलाड़ी ने आगे कहा, ”इससे पहले शाहीन का मेरी बेटी से कोई रिश्ता नहीं था। हम अफरीदियों की 8 जनजातियाँ होती हैं। शाहीन और मैं दोनों अलग-अलग जनजाति से हैं।”

शाहिद अफरीदी ने 7 मार्च 2021 को ट्वीट किया था, ”शाहीन के परिवार वालों ने मेरी बेटी के लिए हमारे परिवार से संपर्क किया। दोनों के परिवार वाले संपर्क में हैं, जोड़ियों तो ऊपर से बनती हैं, अल्लाह ने अगर चाहा तो ये मैच भी होगा। मैदान पर और बाहर लगातार सफलता के लिए मेरी दुआएँ शाहीन के साथ हैं।”

मालूम हो कि पाकिस्तानी खिलाड़ी ने खुद सामने आकर इस पूरे मामले पर अपनी चुप्पी तोड़ी है। शाहीन शाह अफरीदी का निकाह शाहिद अफरीदी की बड़ी बेटी अक्सा से होने वाला है। हालाँकि, पहली बार जब दोनों की शादी की खबरें उड़ी थीं, तब ये कहा गया था कि अभी अक्सा की पढ़ाई जारी है। लिहाजा शादी में 2 साल का वक्त है।

गौरतलब है कि साल 2019 में शाहिद अफरीदी ने खुलेआम एक चैट शो में खुद स्वीकार किया था कि अपनी बेटी को हिंदू परंपरा का अनुसरण करता देख उन्हें इतना गुस्सा आया कि उन्होंने कोहनी मारकर अपने घर का टीवी ही तोड़ दिया था। इसे सुन शो की होस्ट और वहाँ बैठे पाकिस्तानी दर्शक ताली पीट-पीटकर हँसने लगे। इन्हें देखकर अंदाजा लगाया जा सकता था कि हिंदू परंपरा उनके लिए किसी मजाक से कम नहीं है और उसका ‘विरोधी’ किसी हीरो से।

बता दें कि अफरीदी की 5 बेटियाँ हैं अक्सा, अंशा, अजवा, अस्मारा और अरवा। इस शो में अफरीदी ने ये भी कहा था कि पहले स्टारप्लस के ड्रामे बहुत चला करते थे, तो वे अपनी बेगम को मना करता था कि उन्हें ये सब देखना हो तो अकेले में देखा करें। बच्चों को अपने साथ न बिठाया करें। वीडियो के शुरू होने के मात्र 30 सेकेंड में ही अफरीदी के हाव-भाव देखकर समझा जा सकता है कि उनकी दिक्कत ये नहीं थी कि उनकी बेगम बच्चों के आगे ड्रामा/सीरियल देख रही थीं, बल्कि उनकी दिक्कत ये थी कि वो बच्चों के सामने हिंदुस्तानी सीरियल देख रही थी।

मोदी सरकार की ‘प्रधानमंत्री रिसर्च फेलोशिप’ योजना में जामिया मिलिया इस्लामिया विश्वविद्यालय के 6 शोधार्थियों का चयन

जामिया मिलिया इस्लामिया विश्वविद्यालय (JMI) के छह रिसर्च स्कॉलर्स को मोदी सरकार की दिसंबर 2020 की लैटरल एंट्री स्कीम के तहत प्रतिष्ठित प्रधानमंत्री रिसर्च फेलोशिप के लिए चुना गया है।

जामिया मिलिया इस्लामिया (जेएमआई) विश्वविद्यालय ने एक बयान में कहा कि मोदी सरकार ने पीएमआरएफ योजना के तहत छह छात्रों – फौजिया तबस्सुम, मोमिना, अजरा मलिक, फिरोज खान, आलिया तैयब और आशी सैफ को सेलेक्ट किया है। जिन रिसर्च स्कॉलर्स का चयन किया गया है कि ये सिविल इंजीनियरिंग, इलेक्ट्रिकल इंजीनियरिंग, सेंटर फॉर नैनोसाइंस एंड नैनो टेक्नोलॉजी और सेंटर फॉर इंटरडिसिप्लिनरी रिसर्च इन बेसिक साइंसेज के विभागों से थे।

छह छात्रों के चयन पर खुशी जाहिर करते हुए जामिया की कुलपति नजमा अख्तर ने कहा कि छह में से पाँच शोधार्थी छात्राएँ हैं। उन्होंने कहा कि इससे पता चलता है कि ये कितना अच्छा काम कर रहे थे।

चांसलर ने आगे कहा, “मुझे उम्मीद है कि यह दूसरे छात्रों, खासकर विश्वविद्यालय की लड़कियों को साइंस और रिसर्च में प्रेरित करेगा। जामिया अपने छात्रों को सफलता की नई उँचाइयों तक पहुँचाने के लिए कड़ी मेहनत करता है।” इसके साथ ही उन्होंने विश्वविद्यालय के स्कॉलर्स की इस बड़ी उपलब्धि के लिए पीएमआरएफ के समन्वयक जेएमआई के प्रोफेसर अब्दुल कयूम अंसारी की भी प्रशंसा की है।

गौरतलब है कि पीएमआरएफ योजना के तहत जिन छात्रों को सेलेक्ट किया गया है, उन्हें पहले दो साल के लिए हर महीने 70,000 रुपए मिलेंगे। तीसरे वर्ष के लिए 75,000 रुपए, चौथे और पाँचवें वर्ष के लिए क्रमशः 80,000 रुपए की प्रति माह फेलोशिप मिलेगी।

इसके अलावा हर फेलो को साल में रिसर्च के लिए 2 लाख रुपए का अनुदान मिलेगा। ऐसे में हर रिसर्चर को पाँच साल में 10 लाख रुपए का अनुदान मिलेगा। इससे पहले मई 2020 में, जामिया के दो छात्रों – मरिया खान और अबगीना शब्बीर, दोनों को सेंटर फॉर नैनोसाइंस एंड नैनो टेक्नोलॉजी (CNN) से फेलोशिप के लिए चुना गया था।

कब शुरू हुई यह योजना

मेधावी छात्रों को रिसर्च के क्षेत्र में लाने के लिए भारत सरकार ने 2018 में प्रधान मंत्री रिसर्च फेलोशिप (पीएमआरएफ) योजना शुरू की थी। इसके तहत सेलेक्टेड छात्र को आईआईटी, आईआईएसईआर और आईआईएससी में पीएचडी के लिए सीधे एडमिशन मिलता है।

इस योजना का उद्देश्य देश की जरूरतों को देखते हुए प्रतिभाओं को पीएचडी के लिए आकर्षित करना है। पीएमआरएफ योजना के तहत देश के सभी आईआईटी, आईआईएसईआर, इंडियन इस्टीट्यूट ऑफ साइंस, बेंगलुरु समेत कुछ केंद्रीय विश्वविद्यालय और एनआईटी शामिल हैं, जो विज्ञान और प्रौद्योगिकी डिग्री देते हैं।

म्यांमार: तख्तापलट का विरोध करने वाले 1,25,900 शिक्षकों को सेना ने किया निलंबित, छात्र बोले- लोकतंत्र बहाली पर ही जाएँगे स्कूल

म्यांमार में सैन्य तख्तापलट के बाद इसी साल जून से स्कूलों में नए शिक्षा सत्र की शुरुआत होने जा रही है। इस बीच सेना ने तख्तापलट का विरोध करते हुए सविनय अवज्ञा आंदोलन में शामिल हुए 1,25,000 शिक्षकों को निलंबित कर दिया है। इस बात की जानकारी म्यांमार शिक्षक संघ के एक अधिकारी ने दी है।

निलंबन की यह कार्रवाई सेना ने नया शिक्षा सत्र शुरू होने के कुछ दिन पहले की है। शिक्षकों का मानना है कि मिलिट्री तख्तापलट ने देश के लोकतांत्रिक सुधारों को संकीर्ण कर दिया है।

शिक्षक संघ के एक अधिकारी ने कहा कि शनिवार तक कुल 125,900 स्कूल शिक्षकों को निलंबित कर दिया गया था। हालाँकि उन्होंने निलंबित शिक्षकों का नाम बताने से इनकार कर दिया है। दो साल पुराने आँकड़ो के मुताबिक, म्यांमार में 4,30,000 स्कूली शिक्षक थे।

शिक्षकों के समूह के अनुसार, लगभग 19,500 विश्वविद्यालय के कर्मचारियों को भी निलंबित कर दिया गया है।

शिक्षक संघ के एक अधिकारी जो कि खुद भी एक शिक्षक हैं उनका कहना है कि ये सिर्फ लोगों को काम पर वापस आने की धमकी देने वाला है। क्योंकि अगर हकीकत में इतने लोगों को निलंबित कर दिया गया तो सारी व्यवस्था चरमरा जाएगी।

अधिकारी के मुताबिक, निलंबित शिक्षकों को सैन्य शासन की ओर से कहा गया था कि अगर वो आंदोलन की जगह काम पर वापस लौटते हैं तो उनपर से सभी आरोपों को हटा लिया जाएगा।

म्यांमार के सरकारी समाचार पत्र ग्लोबल न्यू लाइट ऑफ म्यांमार ने शिक्षकों और छात्रों से स्कूलों में लौटने का आह्वान किया है ताकि शिक्षा प्रणाली फिर से शुरू हो सके।

वहाँ की चुनी गई नेता आंग सान सू की की गिरफ्तारी और सैन्य तख्तापलट के बाद से इस दक्षिण पूर्व एशियाई देश में अराजकता का माहौल है।

अपने बच्चों को स्कूल नहीं भेजेंगे पैरेंट्स

म्यामार में जून से नया शिक्षा सत्र शुरू हो रहा है, लेकिन बच्चों के परिजनों ने उसका बायकॉट करने का मन बना लिया है।

तख्तापलट का विरोध कर रहे 42 वर्षीय मिंट की 14 साल की एक बेटी है, वो कहते हैं, “मैं अपनी बेटी का नामांकन नहीं करने जा रहा हूँ क्योंकि मैं उसे सैन्य तानाशाही से शिक्षा नहीं देना चाहता। मुझे उसकी सुरक्षा की भी चिंता है।”

सुरक्षा बलों द्वारा सैकड़ों लोगों की हत्या करने वाले विरोध प्रदर्शनों में सबसे आगे रहने वाले छात्रों ने भी कक्षाओं का बहिष्कार करने की योजना बनाई है।

18 साल के ल्विन ने कहा, “मैं केवल तभी स्कूल जाऊँगा जब हमें हमारा लोकतंत्र वापस मिल जाएगा।”

म्यांमार की शिक्षा प्रणाली पहले से ही इस क्षेत्र में सबसे खराब थी। पिछले साल हुए एक वैश्विक सर्वेक्षण में यह 93 देशों में से 92 वें स्थान पर थी।

म्यांमार संकट के पीछे चीन का हाथ

म्यांमार में फरवरी, 2021 में हुए सैन्य तख्तापलट के पीछे चीन की साजिश माना जाता है। 15 मार्च, 2021 की रिपोर्ट के मुताबिक, म्यांमार में हुए सैन्य तख्तापलट के पीछे चीन का हाथ है। तख्तापलट का विरोध कर रहे लोगों को कड़ी सजा देने की वकालत चीन ने की थी। इसके अलावा म्यांमार में तख्तापलट का सारी दुनिया ने विरोध किया था, लेकिन चीन ने वहाँ सैन्य शासन का समर्थन किया था। इससे साबित होता है कि उसकी लोकतंत्र में कोई आस्था नहीं है।

Tuaktae के बाद अब Yaas चक्रवात का खतरा: PM मोदी ने की हाई लेवल मीटिंग, नेवी-आर्मी दोनों तैनात

तौकते (Tauktae) तूफान के पश्चिम भारत में कहर मचाने के बाद अब पूर्वी भारत में “Yaas” चक्रवाती तूफान का खतरा मंडरा रहा है। इसके 26 मई 2021 को भारत के पूर्वी तट ओडिशा और सुंदरबन से टकराने की आशंका मौसम विभाग ने जताई है।

इस बीच चक्रवात “Yaas” की आहट को देखते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी रविवार (23 मई 2021) को हाई लेवल मीटिंग की। इस दौरान वरिष्ठ अधिकारियों और राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण के प्रतिनिधियों, दूरसंचार, बिजली, नागरिक उड्डयन, पृथ्वी विज्ञान मंत्रालयों के सचिव बैठक में शामिल रहे।

बैठक में केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह भी मौजूद रहे। इस बीच संभावित Yaas चक्रवाती तूफान को देखते हुए इंडियन आर्मी ने टास्क फोर्स को ओडिशा और बंगाल में तैनात कर दिया है। वहीं नेवी ने भी तूफान के खतरे से निपटने के लिए राहत और बचाव की 8 टीमों और गोताखोरों की 4 टीमों को ओडिशा और पश्चिम बंगाल में तैनात कर दिया है। इसके अलावा विशाखापत्तनम में आईएनएस डेगा, चेन्नई में आईएनएस रजाली को भी मोर्चे पर तैनात कर दिया गया है।

ओडिशा सरकार ने भी कसी कमर

नवीन पटनायक सरकार ने खतरे को देखते हुए ओडिशा डिजास्टर रैपिड एक्शन फोर्स की 22 सदस्यीय टीम को तैनात कर दिया है। रिपोर्ट के मुताबिक, बंगाल की खाड़ी में कम दवाब का क्षेत्र बन गया है, जिससे यह तूफान आ रहा है।

शुक्रवार, 21 मई 2021 को मौसम विभाग ने इस तूफान के बेहद गंभीर चक्रवाती तूफान में बदलने की भविष्यवाणी की थी।

इस बीच एनडीआरएफ के डीजी सत्य प्रधान ने जानकारी दी है कि “Yaas” तूफान के मद्देनजर एनडीआरएफ की 18 टीमों को ओडिशा के बालासोर, भद्रक, केंद्रापाड़ा, जाजपुर, जगतसिंहपुर और मयूरभंज में तैनात किया गया है। इसके अलावा टीमों को स्टैंडबाय पर रखा गया है।

आईएमडी भुवनेश्वर के उपनिदेशक ने “Yaas” तूफान को लेकर कहा कि बंगाल की पूर्व-मध्य खाड़ी के ऊपर कम दबाव का क्षेत्र बना हुआ है। अगले 12 घंटों के दौरान इसके उत्तर-पश्चिम दिशा की ओर बढ़ने की संभावना है। चक्रवाती तूफान 24 मई तक तेज होगा और 26 मई को उत्तर ओडिशा, पश्चिम बंगाल और बांग्लादेश तट पर पहुँचेगा।

जयपुर के एक अस्पताल में वेंटिलेटर पर 20 दिन में 442 मौतें, कोरोना से नहीं… साफ-सफाई की कमी से

कोरोना की दूसरी लहर जहाँ देश भर में कहर बरपा रही है, वहीं राजस्थान से लगातार लापरवाही की खबर सामने आ रही हैं। ताजा मामला राजधानी जयपुर का है। दैनिक भास्कर की रिपोर्ट के मुताबिक जयपुर में प्रदेश के सबसे बड़े कोविड अस्पताल आरयूएचएस में महज 20 दिन के भीतर वेंटिलेटर पर 442 लोगों की मौत हो गई। आपको जान कर हैरानी होगी कि इनकी जान कोविड के कारण नहीं, एन्डोट्रिकियल (endotracheal) ट्यूब की सफाई न होने की वजह से हुए इन्फेक्शन के कारण गई है। 

जानकारी के मुताबिक एन्डोट्रिकियल ट्यूब की सफाई दिन में 5-6 बार होनी चाहिए, मगर यहाँ पर उसे दो दिन में 3 बार ही साफ किया जा रहा है। सफाई न होने के कारण ब्लैक फंगस और बैक्टीरियल इन्फेक्शन हो रहा है और मरीजों की जानें जा रही हैं।

एन्डोट्रेकियल ट्यूब की एक बार की सफाई में मात्र 2-3 मिनट लगते हैं। पूरे दिन में 6 बार सफाई पर 12 से 18 मिनट लगेंगे। मगर अस्पताल प्रशासन अपने 12-18 मिनट बचाने के लिए हजारों जिंदगियों के साथ खिलवाड़ कर रहा है।

यहाँ पर इलाज करा रहे परिजनों का कहना है कि वेंटिलेटर की सफाई नहीं की जाती, ट्यूब नहीं बदली जाती। डॉक्टर भी समय पर देखने के लिए नहीं आते हैं। और तो और, स्टाफ की तरफ से कहा जाता है कि जब भी जरूरत हो तो उसे बुला लिया करें। वह काम के चक्कर में यहाँ-वहाँ रहता है, कम ही दिखाई देता है।

आरयूएचएस के बोर्ड ऑफ मेंबर रहे डॉ. नागेंद्र शर्मा ने भास्कर को बताया कि ट्यूब नियमित साफ न करने पर एन एरोबिक बैक्टीरियल इन्फेक्शन, ब्लैक फंगस, मल्टी ड्रग रेसिस्टेंट बैक्टीरियल इन्फेक्शन का डर बना रहता है। एक्सपर्ट का कहना है कि ट्यूब में गंदगी के कारण छाती में कई तरह के संक्रमण हो सकते हैं। ट्यूब में सक्शन न हो तो यह ब्लॉक हो सकती है और मरीज की जान चली जाती है।

उल्लेखनीय है कि कोरोना की दूसरी लहर देश में लोगों को तेजी से संक्रमित कर रही है। रोजाना कोरोना के नए मामले रिकॉर्ड तोड़ रहे हैं। इसके बावजूद राजस्थान सरकार आँखें मूँदकर बैठी है और अपनी नाकामियों के लिए केंद्र सरकार को जिम्मेदार ठहरा रही है।

गौरतलब है कि केंद्र को कोसने वाली कॉन्ग्रेस शासित राजस्थान में पीएम केयर फंड के तहत प्राप्त 1500 वेंटिलेटर में से ज्यादातर डिब्बों में बंद पड़े हैं। ये वेंटिलेटर राज्य सरकार को 10 महीने पहले मिले थे। इन 1,500 वेंटिलेटरों में से 230 खराब हैं। कोरोनो महामारी के बावजूद इनकी साल भर से ना तो रिपेयरिंग हुई है, ना ही इन्हें बदला गया है। बताया गया कि जोधपुर में तो पीएम केयर फंड के 100 में से एक भी वेंटिलेटर को चालू नहीं किया गया है। इसके अलावा पहले से खरीद कर प्रदेश के अस्पतालों में लगाए गए 164 वेंटिलेटर भी काम नहीं कर रहे। वहीं, डॉक्टरों का कहना है कि मरीजों के हिसाब से अभी भी प्रदेश में 1000 और वेंटिलेटर्स की जरूरत है।

इसके अलावा राजस्थान में कुल 11.5 लाख (करीब 7 फीसदी) वैक्सीन के डोज खराब हो गए हैं। चुरू जिले में सबसे ज्यादा 39.7 प्रतिशत वैक्सीन बर्बाद हो गई। इस मामले में 24.60 फीसदी के साथ हनुमानगढ़ दूसरे नंबर पर है, जबकि 17.13 प्रतिशत वैक्सीन भरतपुर में बेकार हो गई है। वैक्सीन बर्बादी के मामले में यह जिला तीसरे नंबर पर है। वहीं 16.71 फीसदी वैक्सीन को बर्बाद करके कोटा चौथे नंबर पर है।

मध्य प्रदेश में आदिवासी बहुल इलाके में कोविड-19 ड्यूटी के दौरान ईसाई धर्म का प्रचार करती पकड़ी गईं नर्स

मध्य प्रदेश के रतलाम जिले में 22 मई को सरकारी ड्यूटी के दौरान धर्म प्रचार का मामला सामने आया है। स्थानीय रिपोर्टों के अनुसार, बाजाला के आदिवासी बहुल विकास खंड में एक नर्स को कोविड -19 महामारी के बीच लोगों को आहार योजनाओं के बारे में सूचित करने के बहाने ईसाई धर्म का प्रचार करने वाले प्रचार पुस्तिका के साथ पकड़ा गया। नर्स को स्थानीय निवासियों ने पकड़ लिया और पुलिस और प्रशासन को उसकी हरकत से अवगत कराया।

नर्स के पास से बरामद पैम्फलेट (साभार: acntimes)

प्रारंभिक जाँच में पुलिस ने धार्मिक प्रचार-प्रसार के आरोपों को सही पाया। उल्लेखनीय है कि मध्य प्रदेश में कोविड-19 प्रसार को नियंत्रित करने के लिए डोर-टू-डोर सर्वेक्षण किया जा रहा है। सरकार ने अभियान के लिए एएनएम, नर्सों, आँगनबाड़ी और आशा कार्यकर्ताओं की टीमों को तैनात किया है।

आरएसएस कार्यकर्ताओं ने नर्स को पकड़ा

नर्स की पहचान बाजना में रैपिड रिस्पॉन्स टीम की संध्या तिवारी के रूप में की गई। शनिवार (मई 22, 2021) को, राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के कार्यकर्ताओं को नर्स के बारे में पता चला, जो सरकारी ड्यूटी के दौरान ईसाई धर्म का प्रचार-प्रसार कर रही थी। जब वह क्षेत्र में सर्वेक्षण कर रही थीं तो लोगों ने धार्मिक प्रचार पर आपत्ति जताई। आरएसएस और अन्य हिंदू संगठन भी मौके पर पहुँचे।

सोशल मीडिया पर वायरल हुआ नर्स का वीडियो

सोशल मीडिया पर एक वीडियो वायरल हो रहा है, जिसमें नर्स से पूछताछ की जा रही है। भाजपा नेता सोमेश पालीवाल द्वारा शेयर किए गए एक वीडियो में आप देख सकते हैं कि जब नर्स से बार-बार पूछा जाता है कि वो डाइट प्लान चार्ट के साथ धार्मिक पर्चे क्यों बाँट रही हैं तो उन्होंने कार्यकर्ता से कहा कि वो फालतू का मुद्दा न बनाएँ।

जब कार्यकर्ता ने नर्स को बताने के लिए जोर दिया कि वो ऐसा क्यों कर रही हैं, तो उन्होंने कहा कि वह सभी को यीशु के बारे में नहीं बता रही थीं ‘केवल उन लोगों को बता रही थीं, जिन्हें इसकी आवश्यकता है’ और दावा किया कि वह डाइट प्लान भी बता रही थीं, इसलिए वह जो कर रही थीं, उसमें कुछ भी गलत नहीं था। इसके बाद कार्यकर्ता ने आसपास के लोगों से पूछा कि क्या वे अपने क्षेत्र में ऐसा उपदेश चाहते हैं, जिससे उन्होंने इनकार किया और उसके कार्यों पर आपत्ति जताई।

नर्स एक घंटे से अधिक समय तक पुलिस से बहस करती रही

पुलिस जब उन्हें थाने ले आई और उनसे पूछताछ की तो वह करीब एक घंटे तक पुलिस से बहस करती रहीं कि उन्होंने कुछ भी गलत नहीं किया है। तहसीलदार भगवानदास ठाकुर भी थाने पहुँचे और नर्स पर लगे आरोपों की जानकारी ली। घटना की रिपोर्ट सैलाना की सब डिविजनल मजिस्ट्रेट (एसडीएम) कामिनी ठाकुर को भेजी गई, जिसमें तहसीलदार ने कहा कि शिकायत शुरुआती तौर पर सही पाई गई। एसडीएम ठाकुर ने कहा कि उन्हें शिकायत मिली है और प्रारंभिक जाँच में इसे सही पाया गया है। इसे आगे की कार्रवाई के लिए कलेक्टर को भेज दिया गया है।

बाँटे जा रहे पर्चे का कंटेंट

नर्स जो पर्चे बाँट रही थीं, उसमें ईसाई धर्म टीवी चैनल शो, वेबसाइटों और बहुत कुछ की जानकारी थी। इसमें प्रार्थना आदि की भी जानकारी थी। नर्स झूठे दावे कर रही थीं कि यीशु से प्रार्थना करके लोग खुद को कोविड-19 संक्रमण से बचा सकते हैं।

नर्स के पास से बरामद पैम्फलेट (साभार: VivekBJaiswal/Twitter)

हिंदुओं को ईसाई धर्म में परिवर्तित करने के लिए IMA प्रमुख की आलोचना

हाल ही में, इंडियन मेडिकल एसोसिएशन के प्रमुख डॉ जेए जयलाल को ईसाई धर्म फैलाने के लिए आलोचना का सामना करना पड़ा। वह ईसाई धर्म अपनाने के लिए अस्पतालों का उपयोग करना चाहते थे। डॉ जयलाल ने कहा था कि वे चाहते हैं कि IMA ‘जीसस क्राइस्ट के प्यार’ को साझा करे और सभी को भरोसा दिलाए कि जीसस ही व्यक्तिगत रूप से रक्षा करने वाले हैं।

डॉ जेए जयलाल ने कहा था कि चर्चों और ईसाई के दया भाव के कारण ही विश्व में पिछली कई महामारियों और रोगों का इलाज आया। डॉ जयलाल चाहते थे कि उनकी पेशेवर योग्यताएँ और हाल ही में इंडियन मेडिकल एसोसिएशन के प्रमुख के रूप में प्राप्त पद का उपयोग ईसाई मिशनरियों द्वारा किए जाने वाले ईसाई प्रचार को आगे बढ़ाने के लिए किया जाए।

राजस्थान के झुंझुनू में शादी में शामिल 95 लोग संक्रमित, दुल्हन के पिता की मौत: दौसा में 341 बच्चे कोरोना+

पूरे देश में कोरोना वायरस का कहर देखने को मिल रहा है। सरकार ने लोगों से कोरोना गाइडलाइन्स का पालन करने की अपील की है। कई राज्यों में लॉकडाउन लगा है। राजस्थान सरकार ने राज्य में शादी समारोहों को लेकर कड़े कदम उठाए हैं, लेकिन झुंझुनू के स्यालू कला जैसे गाँव वालों को यह बात कुछ देरी से समझ आई। जब यहाँ शादी की खुशी मातम में बदल गई। यहाँ एक ही दिन में 95 लोग कोरोना पॉजिटिव पाए गए और कोरोना से सबसे पहले मरने वाले दुल्हन के पिता थे।

अब इस गाँव में सन्नाटा पसरा है, कोई बच्चा गिल्ली डंडा नहीं खेल रहा है, कोई शोर-गुल नहीं है, कोई बकबक नहीं है, बस सुनसान सड़कें हैं, घरों के दरवाजे बंद हैं, लोग खिड़की से झाँकते हैं या छत से टकटकी लगाकर देखते हैं। स्यालू कला गाँव अपने सबसे बुरे सपने को जी रहा है।

इंडिया टुडे की रिपोर्ट के मुताबिक स्थानीय निवासी सुरेंद्र शेखावत ने कहा, “जब से हमने टेस्ट दिया तब से पूरा गाँव स्तब्ध है। लगभग 95 लोगों का कोविड टेस्ट पॉजिटिव आया। इससे पहले 25 अप्रैल को तीन शादियाँ हुई थीं। किसी को विश्वास नहीं हुआ था कि कोरोना भी कोई चीज है। सैंपल देने के बाद लोग इधर-उधर घूमते रहे। लेकिन लोग अब चिंतित हैं और घर के अंदर रहते हैं।”

25 अप्रैल को, गाँव में तीन शादियाँ हुईं और सब कुछ अच्छे से खत्म हुआ। जैसे ही उत्सव समाप्त हुआ, बीमारी ने अपना जाल फैला दिया और पहला शिकार दुल्हन के पिता पप्पू सिंह थे। पप्पू के भाई रामवीर सिंह ने कहा, “हमें नहीं पता कि अब हम क्या करें। हम फिर कभी पहले जैसे नहीं रहेंगे, हमारा भाई चला गया। उनकी तीन बेटियाँ हैं। उसकी रिपोर्ट निगेटिव आई थी, लेकिन वह अस्वस्थ महसूस कर रहा था।”

सुरेंद्र ने बताया कि कैसे गाँव उजड़ सा गया है। उन्होंने कहा, “अब यहाँ कोई नहीं आता। आप (रिपोर्टर) सबसे पहले आए। लोगों के टेस्ट पॉजिटिव आने के बाद बहुत कम लोग आ रहे हैं, गाँव के नाम से लोग डरे हुए हैं।” 

वहीं राजस्थान के दौसा जिले में 341 बच्चे कोरोना से संक्रमित पाए गए हैं। इन बच्चों की उम्र 18 साल से कम है। एक मई से 21 मई के दौरान दौसा में 341 बच्चे संक्रमित मिले हैं। दौसा जिलाधिकारी ने कहा कि पिछले 20 दिनों में 341 बच्चे भले ही कोरोना संक्रमित पाए गए हों लेकिन इनमें से कोई भी गंभीर नहीं है। 

राजस्थान में ग्रामीण इलाकों में कोरोना की रोकथाम के लिए अब राजस्थान सरकार जागी है। स्वास्थ्य अधिकारी गाँव-गाँव और डोर-टू-डोर जाकर लोगों के कोरोना टेस्ट कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि कोरोना की संभावित तीसरी लहर को लेकर व्यापक स्तर पर तैयारियाँ की जा रही है। जिला अस्पताल को अलर्ट कर रखा है।

गौरतलब है कि इससे पहले प्रदेश के डूंगरपुर से 18 वर्ष से कम के 300 से अधिक बच्चों के Covid-19 संक्रमित पाए जाने की खबर सामने आई थी। बताया गया कि पिछले 10 दिनों में ही डूंगरपुर में लगभग 315 बच्चे संक्रमित हुए हैं। डूंगरपुर के सीएमएचओ डॉ. राजेश शर्मा ने रिपब्लिक चैनल को बताया कि जिले में 12 से 22 मई के बीच 0-19 साल के 315 बच्चे संक्रमित हुए हैं। डॉ. शर्मा के अनुसार सभी बच्चों को होम आइसोलेट करके उनका उपचार चल रहा है।

हाल ही में डूंगरपुर से ही खबर आई थी कि जिले की एक स्थानीय मस्जिद में लॉकडाउन के नियमों को तोड़ कर बड़ी संख्या में मुस्लिम इकट्ठा हुए थे। खबर शुक्रवार (14 मई) की है। ज्ञात हो कि राजस्थान की अशोक गहलोत सरकार ने राज्य में 14 दिनों का कड़ा लॉकडाउन लगा रखा है। इसके बावजूद भी मस्जिद में कई मुस्लिम बड़ी संख्या में ईद की नमाज के लिए जुटे थे।