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बंगाल: मतगणना के दिन BJP कार्यकर्ताओं की हुई हत्या की SIT/CBI जाँच की माँग, ममता सरकार को SC का नोटिस

सुप्रीम कोर्ट ने एक रिट याचिका पर सुनवाई करते हुए मंगलवार (मई 18, 2021) को पश्चिम बंगाल सरकार को नोटिस जारी किया है। याचिका में दो मई को चुनाव परिणाम वाले दिन टीएमसी सदस्यों द्वारा कथित तौर पर दो भाजपा कार्यकर्ताओं की हत्या के संबंध में SIT या CBI से जाँच कराने का निर्देश देने की माँग की गई है।

याचिका में कहा गया है कि सरकार और प्रशासन की शह पर ही विपक्षी कार्यकर्ताओं के खिलाफ हिंसा हुई। इसलिए, सुप्रीम कोर्ट दोनों हत्याओं और हिंसा के दूसरे मामलों की जाँच सीबीआई को सौंपे या फिर इसके लिए विशेष जाँच दल (SIT) का गठन करे।

जस्टिस विनीत शरण और जस्टिस वीआर गवई की पीठ ने मृतक भाजपा कार्यकर्ता अभिजीत सरकार के भाई विश्वजीत सरकार और हरेण अधिकारी की विधवा द्वारा दायर इस याचिका पर राज्य सरकार को जवाब दाखिल करने के लिए कहा है। पीठ ने इस मामले में केंद्र सरकार को भी याचिका की प्रति सौंपने के लिए कहा है। 

याचिका में कहा गया है, “भीड़ ने उनके गले में सीसीटीवी कैमरा का तार बाँध दिया, उनका गला घोंट दिया और उसे ईंटों और डंडों से पीटना शुरू कर दिया। उन्होंने उसका सिर फोड़ दिया और उनकी माँ के सामने उसे बेरहमी से मार डाला। उन्होंने अपने बेटे को अपनी आँखों के सामने कत्ल होते देख कर बेहोश हो गई और मौके पर ही गिर गई।”

बता दें कि 2 मई को जब पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव के नतीजे आ रहे थे, तभी कोलकाता में बीजेपी के दो कार्यकर्ताओं अभिजीत सरकार और हरेण अधिकारी की हत्या कर दी गई थी। मामले में तृणमूल कॉन्ग्रेस के कार्यकर्ताओं के शामिल होने का आरोप है। अभिजीत सरकार ने अपनी हत्या से पहले फेसबुक लाइव पर अपनी जान को खतरे की बात भी बताई थी। आरोप है कि स्थानीय पुलिस ने तृणमूल कॉन्ग्रेस के कार्यकर्ताओं की तरफ से की जा रही हिंसा पर अपनी आँखें बंद रखी। जिसके चलते अभिजीत और हरेण की हत्या हो गई।

सुप्रीम कोर्ट में अभिजीत सरकार के भाई बिश्वजीत सरकार और हरेण अधिकारी की पत्नी स्वर्णलता अधिकारी ने याचिका दाखिल की है। दोनों की तरफ से वरिष्ठ वकील महेश जेठमलानी ने जस्टिस विनीत सरन और बी आर गवई की बेंच में दलीलें रखीं। जेठमलानी ने कहा कि सरकार और पुलिस ने हिंसा को बढ़ावा दिया। इन घटनाओं के प्रत्यक्षदर्शी गवाह भी मौजूद हैं। लेकिन जाँच में लीपापोती की जा रही है। 

इसलिए, यह जरूरी है कि इन घटनाओं की सुप्रीम कोर्ट की निगरानी में निष्पक्ष जाँच हो। याचिकाकर्ताओं के वकील ने आगे कहा, “अभिजीत सरकार का शव आज तक उनके परिवार को नहीं सौंपा गया है। हम यह भी माँग करते हैं कि शव का अभी दाह संस्कार न किया जाए। उसका पोस्टमार्टम हो और उसकी वीडियोग्राफी भी करवाई जाए।” 

जजों ने थोड़ी देर की सुनवाई के बाद याचिका पर नोटिस जारी कर दिया। याचिकाकर्ताओं ने पश्चिम बंगाल सरकार, राज्य के पुलिस महानिदेशक, केंद्र सरकार और राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग को प्रतिवादी बनाया है। कोर्ट ने याचिकाकर्ताओं के वकील को यह निर्देश दिया कि वह याचिका की कॉपी प्रतिवादियों को सौंप दें, ताकि वह जवाब दे सकें। मामले पर मंगलवार (मई 25, 2021) को अगली सुनवाई होगी।

हत्या के मामले में सुशील कुमार की अंतरिम बेल याचिका खारिज, कोर्ट ने पूछा- केस गंभीर नहीं तो भाग क्यों रहे?

23 वर्षीय पहलवान सागर राणा की हत्या मामले में फरार चल रहे ओलंपिक विजेता सुशील कुमार की अंतरिम बेल याचिका को दिल्ली की रोहिणी कोर्ट ने आज (मई 18, 2021) खारिज कर दिया है। इससे पहले रोहिणी कोर्ट इस केस में सुशील कुमार और उनके साथियों के ख़िलाफ़ गैर जमानती वारंट जारी कर चुकी है।

जानकारी के मुताबिक, रोहिणी कोर्ट में सुशील की ओर सीनियर एडवोकेट सिद्धार्थ लूथरा और बुजुर्ग वकील आरएस जाखड़ ने दलील दी। उन्होंने सुशील के हवाले से कहा कि उनका (सुशील का) केस में कोई लेना-देना नहीं है। दलीलें सुनने के बाद कोर्ट ने पूछा कि अगर मामला इतना गंभीर नहीं है तो फिर सुशील कुमार क्यों भाग रहे हैं। पुलिस जाँच में सहयोग करें।

सुशील कुमार के वकीलों ने क्या कहा?

वकीलों ने सुशील के हवाले से कहा कि पुलिस ने उनके विरुद्ध दुर्भावनापूर्ण तरीके से केस बनाया है। साथ ही इस मामले में कई तथ्य भी छिपाए गए हैं। दलील में सुशील की ओर से कहा गया, “मैं एक अंतराष्ट्रीय स्तर का खिलाड़ी हूँ। पद्मश्री समेत देश के तमाम प्रतष्ठित पदकों और सम्मानों से सुसज्जित हूँ। ओलिंपिक में दो बार पदक जीतने वाला खिलाड़ी हूँ। मुझे छत्रसाल स्टेडियम में मेरे आधिकारिक कर्तव्यों के वहन के लिए आवास मिला हुआ है, जहाँ मैं अपने परिवार के साथ रहता हूँ।” 

सुशील का कहना है कि उनकी वजह से किसी को कोई चोट नहीं लगी। पुलिस ने मामले में हेरफेर की। उनका मत ये भी है कि घायल व्यक्ति ने उनके विरुद्ध कोई बयान नहीं दिया है। इसके अलावा कार से जो हथियार मिले हैं वो भी उनके नहीं है। सुशील के वकील ने कहा कि इंजरी गन से नहीं हुई, फायरिंग हवा में की गई। मकसद हत्या का नहीं था इसलिए 302 आईपीसी नहीं लगनी चाहिए।

सुशील पर 1 लाख रुपए का इनाम

गौरतलब है कि 5 मई को छत्रसाल स्टेडियम में हुई घटना के बाद से सुशील कुमार फरार हैं। पुलिस ने उसके ऊपर एक लाख रुपए का इनाम घोषित किया है। वहीं उसके पीए अजय को पकड़ने पर 50 हजार रुपए देने की घोषाणा की है। इससे पहले सुशील कुमार के ख़िलाफ़ लुकआउट नोटिस भी जारी हुआ था। वहीं, उससे पूर्व मामले में 24 साल के प्रिंस दलाल को गिरफ्तार किया गया था। दलाल को डबल बैरेल लोडेड बंदूक के साथ दबोचा गया था।

वैक्सीन की दोनों डोज ली, मौत की अफवाह उड़ी… आखिरकार कोरोना से हार गए डॉ. केके अग्रवाल

पद्मश्री से सम्मानित मशहूर कार्डियोलॉजिस्ट डॉ. केके अग्रवाल का सोमवार रात (17 मई 2021) 12 बजे कोरोना संक्रमण से निधन हो गया। हैरानी की बात यह है कि उन्होंने वैक्सीन की दोनों डोज ली हुई थी। फिर भी वह कोरोना संक्रमित हुए और आखिरी वक्त में उनकी हालत ऐसी हो गई कि उन्हें बचाने के लिए वेंटिलेटर तक की जरूरत पड़ गई।

वैक्सीन लगवाने के बाद बीवी से बातचीत की वीडियो हुई थी वायरल

याद दिला दें कि कुछ दिन पहले डॉ केके अग्रवाल की वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हुई थी। जिसमें उनकी पत्नी अकेले-अकेले वैक्सीन लगवाने पर उन पर नाराज हो रही थीं और वह अपनी पत्नी को लगातार मनाने की कोशिश कर रहे थे। उनकी पत्नी ने फोन पर कहा था, “बहुत अजीब हो यार तुम। मुझे साथ क्यों नहीं ले गए।” इस दौरान वह बार-बार कह रहे थे, “मैं तो बस पता करने गया था उन्होंने कहा कि अभी लगवा लो।”

इसके अलावा उनके कोविड संक्रमित होने के बाद भी एक वीडियो सामने आई थी। वीडियो में वह अपना कोविड एक्सपीरियंस शेयर कर रहे थे। अपनी वीडियो में उन्होंने ये भी स्पष्ट किया था कि यदि वैक्सीन के बाद भी कोरोना होता है तो आपको गंभीर निमोनिया हो सकता है। लेकिन वैक्सीन से मत डरिए, ये कोरोना से बचाता है।

संक्रमित होने के बाद कहा- निमोनिया हो गया है, लेकिन शो मस्ट गो ऑन

वीडियो में उन्होंने कहा था, “मैं भी संक्रमण से गुजर रहा हूँ। मुझे कोविड निमोनिया हो गया है, जो कि बढ़ रहा है। इसके बावजूद मुझे राज कपूर के शब्द याद आते हैं- द शो मस्ट गो ऑन… पिक्चर अभी बाकी है। लोग उन्हें शो मैन मानते हैं, लेकिन वो शो मैन नहीं, बल्कि धरती के सबसे प्रैक्टिकल इंसान थे। शो मस्ट गो ऑन। मेरे जैसे लोग ऑक्सीजन पर भी क्लासेस लेंगे और लोगों को बचाने की कोशिश करेंगे। मैं केके अग्रवाल नहीं, मैं मेडिकल प्रोफेशन में हूँ। हमारा जॉब है जुगाड़ू ओपीडी बनाना। मतलब आप 100-100 पेशेंट बुलाना, जिनमें एक तरह के लक्षण हों। उन्हें 15 मिनट में कंसल्टेशन देकर भेज दीजिए। इसी तरह माइल्ड और दूसरे केसेज को इकट्ठा बुलाइए, लेकिन अब वन-टू-वन कंसल्टेशन का समय चला गया है।”

गौरतलब है कि डॉ केके अग्रवाल का निधन आज हुआ। मगर, उनकी मौत की अफवाहें पहले से भी उड़ा दी गई थीं। 14 मई को उनके परिवार ने इनका खंडन किया था और बताया था कि डॉ अग्रवाल गंभीर बीमारी से जूझ रहे हैं, लेकिन फिलहाल उनकी स्थिति स्थिर है। अफवाहों पर विश्वास न करें।

पद्मश्री से थे सम्मानित

केके अग्रवाल IMA के पूर्व राष्ट्रीय अध्यक्ष होने के अलावा हार्ट केयर फाउंडेशन के भी प्रमुख थे। 2005 में उन्हें भारतीय चिकित्सा क्षेत्र में दिया जाने वाला सबसे प्रतिष्ठित बीसी रॉय पुरस्कार से सम्मानित किया गया था। साल 2005 में ही उन्हें विश्‍व हिंदी सम्‍मान, डॉक्‍टर डीएस मुंगेकर नेशनल आईएमए अवॉर्ड, नेशनल साइंस कम्‍युनिकेशन अवॉर्ड, फिक्‍की हेल्‍थकेयर पर्सनालिटी ऑफ द ईयर अवॉर्ड और राजीव गाँधी एक्‍सीलेंस अवॉर्ड भी मिले। इसके बाद वर्ष 2010 में भारत सरकार ने उन्‍हें पद्मश्री से सम्‍मानित किया गया। वे लिम्का बुक ऑफ रिकॉर्ड में भी शामिल थे।

श्रीकृष्ण को मानते थे पहला काउंसलर

दिल्ली से स्कूली शिक्षा लेने के बाद उन्होंने नागपुर यूनिवर्सिटी से 1979 में एमबीबीएस की डिग्री ली। फिर एमडी करके वह डॉक्टरी पेशे में बने रहे। न्होंने कई किताबें लिखी है। इसमें से एक का नाम-एलोवेदा है। अपनी इस किताब में उन्होंने भारत की प्राचीनतम चिकित्‍सीय पद्धति आयुर्वेद और मॉर्डन चिकित्‍सा पद्धति का समावेश किया। बाद में उनकी किताब के कई चैप्‍टर इंटरनेशनल प्रेस में भी पब्लिश हुए। वह मानते थे कि महाभारत के श्री कृष्‍ण विश्‍व के सबसे पहले काउंसलर थे। उन्‍होंने ये भी कहा था कि महाभारत हमारे मन में आते कई सवालों का एकमात्र जवाब है।

वैक्सीन के बाद कोरोना से मौत के तीन कारण

बता दें कि डॉ केके अग्रवाल के निधन के बाद लोगों के मन में वैक्सीन को लेकर फिर संशय उठ गए है। कई लोगों को लगने लगा होगा कि ये वैक्सीन के कारण हुआ या कई लोगों को लग रहा होगा कि वैक्सीन का कोई प्रभाव नहीं है, तो लगवाएँ क्यों। ऐसे में हमें डॉ केके अग्रवाल के बयान को याद करने की जरूरत है जिसमें उन्होंने बताया था कि अगर वैक्सीन के बाद कोरोना बढ़ रहा है तो उसकी क्या वजह है। अपनी स्थिति को लेकर वह बोले थे कि उन्हें निमोनिया हो गया है जो बढ़ रहा है। डॉक्टरों का मानना है कि कभी कभी पर्याप्त एंटीबॉडीज नहीं बनने के कारण भी वैक्सीन लगवाने के बावजूद संक्रमित होने का खतरा रहता है।

ऑस्ट्रेलिया में रहने वाले 111 साल के बुजुर्ग ने खोला अपनी लंबी उम्र का राज, तोड़ा जैक लॉकेट का रिकॉर्ड

ऑस्ट्रेलिया में रहने वाले 111 वर्षीय बुजुर्ग व्यक्ति डेक्सटर क्रूगर ने दुनिया के सामने अपने लंबे जीवन का रहस्य बताया है। रिटायर्ड पशुपालक ने दावा किया है कि वह मुर्गे के दिमाग (Chicken Brain) को खाने की वजह से इतने लंबे समय से जीवित हैं।

रिपोर्ट्स के मुताबिक, उन्होंने सोमवार (17 मई 2021) को प्रथम विश्व युद्ध के वेटरन जैक लॉकेट (Jack Lockett) के सबसे अधिक उम्र तक जीने के रिकॉर्ड को तोड़ दिया। जैक लॉकेट का साल 2002 में निधन हो गया था, वह 111 साल और 123 दिन के थे।

डेक्सटर अभी 111 वर्ष और 124 दिन के हैं। उन्होंने ऑस्ट्रेलियाई ब्रॉडकास्टिंग कॉर्पोशन (एबीसी) को दिए इंटरव्यू में बताया कि पोल्ट्री फार्म में मुर्गे का दिमाग खाने की वजह से उनकी उम्र लंबी है। इस समय वह ग्रामीण क्वींसलैंड के रोमा कस्बे में स्थित एक नर्सिंग होम में रहते हैं।

क्रूगर ने कहा, ”मुर्गे का दिमाम। आप जानते हैं, इनका एक सिर होता है और उसके भीतर एक दिमाग होता है। वो छोटी सी चीज खाने में बहुत ही टेस्टी लगती है।” वहीं, क्रूगर के 74 वर्षीय बेटे ग्रेग ने अपने लंबे जीवन के लिए अपने पिता की सरल जीवनशैली को क्रेडिट दिया।

नर्सिंग होम के मैनेजर मेलानी कैल्वर्ट ने बताया कि क्रूगर यहाँ रहने वाले लोगों में सबसे ज्यादा तेज दिमाग वाले व्यक्ति हैं। वह, फिलहाल अपनी आत्मकथा लिख रहे हैं। कैल्वर्ट ने बताया कि 111 साल का होने के बावजूद उनकी याददाश्त काफी तेज है।

बता दें कि ‘ऑस्ट्रेलियन बुक रिकॉर्ड्स’ के फाउंडर जॉन टेलर पुष्टि की कि क्रूगर अब तक के सबसे बुजुर्ग ऑस्ट्रेलियाई व्यक्ति बन गए हैं। इससे पहले यह रिकॉर्ड ऑस्ट्रेलिया की सबसे बुजुर्ग महिला क्रिस्टीनी कुक के नाम पर थी। इनका साल 2002 में 114 साल और 148 दिन की उम्र की निधन हो गया था।

ख़लीफ़ा मियाँ… किसाण तो वो हैं जिन्हें हमणे ट्रक की बत्ती के पीछे लगाया है

बॉर्डर पर जय किसान सभा। लॉकडाउन और धूप के कारण कुम्हलाए लोग ऊँघ रहे हैं। कुछ खड़े होकर दिल्ली की ओर देख रहे हैं। कई सप्ताह से व्यवस्था डगमगाई सी हुई है। इनसे दूर एक टेंट में नेता और उप नेता चिंतन में व्यस्त हैं।

उप नेता; उस्ताद जी, हमने सब ट्राई कर लिया। भाषण दिया, धमकी दी, गाँवों से लाने के लिए लोगों से ज़बरदस्ती कर ली, ट्रैक्टर रैली की, मसाज करवाया, लंगर खाए, गीत गाया, भांगड़ा किया… चुप रहे, माने कृषि सम्बंधित सारी चालें चल लीं पर ये गोरमिंट तो सुण ई नई रई। इधर गर्मी बढ़ती जा रही है। आँखें बंद किए चिंतन-ग्रस्त नेता बोला; ये तो है। पर तू चिंता न कर। ऊपर से ऑर्डर ना भी आया तो अपणे पास और भी बहुत त्रीके हैं गोरमिंट से अपणी माँग मनवाने के।

उप नेता बोला; ओर कोण सा तरीक़ा बच रहा उस्ताद जी? नेता बोला; बस तू चुप हो ले और देख कि कल मैं क्या करता हूँ। उप नेता ने अपने नेता की गंभीरता पर एक नज़र डाली और धरने के शुरुआती दिनों से लेकर अब तक एक-एक करके चली गई सारी चालें मन ही मन याद किया। फिर इस प्रश्न पर पहुँचा कि; करने के लिए बचा क्या है अब? ये कल क्या करने वाला है? आत्मदाह तो नई कर लेगा?

नेता ने उसे कुछ सोचते हुए देख लिया और मन में इस लघु चिंतन पर सवाल पूछने की तैयारी करने लगा। वो पूछने ही वाला था कि; तू भी कभी-कभी सोचता है क्या? तब तक उप नेता सतर्क हो गया और उसने सोचना बंद कर दिया।

दूसरे दिन नेता मंच पर पहुँचा। सामने ‘किसानों’ की भीड़ थी। भीड़ को देखकर उसने ताजे-ताजे रिकी पोंटिंग को बोल्ड किए हरभजन सिंह की तरह अपने दोनों हाथ हवा में उठाए और बोला; भाइयों यह सरकार किसाणों का खून चूसती ई जा रही है। हम इतने दिनों तक धरणे पर बैठे, ट्रैक्टर रैली की, लाल क़िला फ़तह किया, ख़लीफ़ा मियाँ से ट्वीट करवाया, भांगड़ा किया… लेकिन इस सरकार के काण के नीचे जूं नई रेंक रई। अब समय आ गया है कि हमें हमारी ताक़त दिखानी होगी।

नीचे से एक आवाज़ आई, ख़लीफ़ा मियाँ नई मियाँ ख़लीफ़ा।

नेता बोला; हाँ वई, हैं तो एक ही नाम। ख़लीफ़ा आगे लगे चाहे पीछे। पर बात वो ना है। बात ये है कि अब समय आ गया है कि हम अपणी ताक़त दिखाएँ। नीचे से एक आवाज़ और आई; तो अभी तक क्या दिखा रहे थे? जो दिखाया वो ताक़त नई थी? नेता झेंप गया। बोला; ऐसा नई है। ताक़त तो वो भी थी। पर अब कुछ और करना है।

किसी ने पूछा; क्या करना है? नेता बोला; अब हमें एग्रिकल्चर धरणा देणा पड़ेगा। आज यहाँ मैं सरकार को चेतावनी दे रहा हूँ कि उसणे क़ानून वापस ना लिए तो हम एग्रिकल्चर धरणा करेंगे।

थोड़ी देर के लिए लोग आपस में खुसर-फुसर करने लगे। नेता समझ गया कि उसकी बात लोगों को समझ नहीं आई। उसने घोषणा की; एग्रिकल्चर धरणे से मेरा मतलब है कि जब तक सरकार सारे क़ानून वापस नहीं लेती तब तक हम खेती बंद कर देंगे।

वहाँ उपस्थित चैनल के संवाददाता, कैमरामैन और यूट्यूबर ब्रेकिंग न्यूज़ की तैयारी करने लगे। सबने मन ही मन कहा; ये लगा मास्टर स्ट्रोक। अब सरकार को पता चलेगा कि किसान की ताक़त क्या होती है।

इधर शाम को अपने टेंट में नेता और उप नेता खुद को दर्शन के हवाले किए बैठे बात कर रहे थे। सामने टेबल पर गिलास रखे हुए थे जिनमें लस्सी रखी थी। उप नेता बोला; उस्ताद जी, आपने तो किसाणों को ट्रक की नई बत्ती के पीछे लगा दिया। आप तो बिलकुल ट्रक ड्राइवर की तरह स्मार्ट हो।

नेता बोला; तू इत्ते सालों से है साथ हमारे और फिर भी मुझे ट्रक ड्राइवर समझता है? अरे बेवक़ूफ़ हम ग़ाज़ीपुर बॉर्डर पर बैठे हैं टिकरी बॉर्डर पर नई। उप नेता झेंप गया। बोला; सोरी उस्ताद जी सोरी। मैं भूल गया था कि आप तो किसाण हो। फिर अचानक उसे लगा कि उससे फिर गलती हो गई। उसने सुधारते हुए कहा; मेरा मतलब किसाण नेता उस्ताद जी।

नेता मुस्कुराते हुए बोला; नेता! केवल नेता ! किसाण तो वो हैं जिन्हें हमणे ट्रक की बत्ती के पीछे लगाया है।

कॉन्ग्रेस के इशारे पर भारत के खिलाफ विदेशी मीडिया की रिपोर्टिंग, ‘दोस्त पत्रकारों’ का मिला साथ: टूलकिट से खुलासा

सोशल मीडिया पर एक टूलकिट कॉन्ग्रेस के नाम से वायरल हो रहा है, जिसके बारे में भाजपा नेताओं का कहना है कि ये वो दस्तावेज है, जिसके माध्यम से कॉन्ग्रेस ने अपने नेताओं को कोरोना काल में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और कुम्भ मेला को बदनाम करने के तरीके समझाए हैं। ये टूलकिट दिखाता है कि कॉन्ग्रेस पार्टी किस तरह एक महामारी के वक़्त भी राजनीति का घिनौना खेल खेलने से बाज़ नहीं आती है।

जहाँ एक तरफ कॉन्ग्रेस पार्टी इसे फेक बताते हुए इसे फ़ैलाने वालों के खिलाफ केस करने की बात कह रही है, वहीं इसके कंटेंट कुछ और ही कहानी कहते हैं। ऑपइंडिया भी इस टूलकिट के कॉन्ग्रेस द्वारा बनाए जाने की पुष्टि नहीं करता, लेकिन जो आरोप लगे हैं और चीजें सामने आई हैं उनका विश्लेषण आवश्यक है। सबसे बड़ी बात तो ये है कि हिन्दुओं के एक ऐसे पवित्र त्यौहार को बदनाम करने की कोशिश कीगई, जिसका समय पूर्व समापन कर दिया गया और प्रतीकात्मक ही रखा गया।

वहाँ सारे नियम-कानून का पालन करते हुए श्रद्धालु जुटे थे, लेकिन उसे बदनाम करने के लिए ‘सुपर स्प्रेडर’ का नाम दिया गया। जबकि ईद को लेकर चुप्पी साध लेने और उसमें जुटी अव्यवस्थित भीड़ को ‘सुखद मिलन समारोह’ बता प्रचारित किया गया। एक और बड़ी बात ये है कि नैरेटिव बनाने, बिगाड़ने और मोड़ने का ये सारा खेल ‘दोस्त पत्रकारों’ की मदद से किया जा रहा था, खासकर अंतरराष्ट्रीय मीडिया के साथ साँठगाँठ कर के।

इस ‘टूलकिट’ में कहा गया है कि अंतरराष्ट्रीय मीडिया पहले ही कुम्भ को ‘सुपर स्प्रेडर’ घोषित कर चुकी है। साथ ही ‘सामान सोच वाले’ देशी/विदेशी पत्रकारों के साथ मिल कर इस नैरेटिव को आगे बढ़ाने की बात की गई है। कोरोना आपदा काल में मदद के नाम पर भी पहले पीड़ितों की गुहार को ‘दोस्त पत्रकारों’ की मदद से वायरल करवाना था, फिर उनसे कॉन्ग्रेस को टैग करवाना था। पत्रकारों और ‘प्रभावशाली लोगों’ की मदद को तरजीह देने की बात भी की गई।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की छवि बिगाड़ने के लिए किस तरह से विदेशी मीडिया के साथ हाथ मिलाया गया था, वो भी देखिए। भारत में विदेशी मीडिया संस्थानों के कॉरेस्पोंडेंट्स के माध्यम से पीएम मोदी को सभी समस्याओं के लिए जिम्मेदार ठहराया गया। विदेशी मीडिया में लेख लिखने वाले भारतीय प्रोपेगंडा पत्रकारों को पॉइंट्स दिए गए, ताकि वो मोदी सरकार को बदनाम कर सकें। स्थानीय पत्रकारों को जलती चिताओं और लाशों की तस्वीरें देकर रिपोर्ट बनवा उसे वायरल करवाने की भी साजिश थी।

ये खतरनाक इसीलिए है क्योंकि इससे साफ़ हो गया है कि वैश्विक मीडिया में भारत को लेकर एकपक्षीय रिपोर्टिंग हो रही थी और कॉन्ग्रेस पार्टी के इशारे पर देश और प्रधानमंत्री को बदनाम किया जा रहा था। अंतरराष्ट्रीय मीडिया पहले से ही भाजपा के प्रति घृणा का भाव रखता रहा है। अब समझ में आ रहा है कि वो ‘निष्पक्ष रिपोर्टिंग’ के नाम पर कॉन्ग्रेस द्वारा दिए जाने वाले कंटेंट्स प्रकाशित कर रहे थे और सच्चाई से कोसों दूर थे।

इस ‘टूलकिट’ में जिस तरह आसानी से पूरी साजिश का ब्यौरा दिया गया है, उससे लगता नहीं कि कॉन्ग्रेस को किसी बात का भय था। वो आश्वस्त हैं कि मीडिया और प्रोपेगंडा पत्रकार उनकी तरफ से ही बैटिंग करेंगे। वहीं अंतरराष्ट्रीय मीडिया पहले से ही पश्चिमी जगह की विदेश नीतियों के हिसाब से लिखता रहा है। ये वही मीडिया है, जिसने झूठा नैरेटिव फैलाया था कि ईराक के पास मास डिस्ट्रक्शन वेपन हैं।

सीरिया में सिविल वॉर वाला झूठ फैला कर ये छिपा दिया गया कि किस तरह अमेरिका वहाँ असद सरकार को उखाड़ फेंकने के लिए आतंकियों की ही मदद कर रहा था। आजकल तो अमेरिका का मीडिया वहाँ की डेमोक्रेट पार्टी का प्रोपेगंडा विंग बना हुआ है। डोनाल्ड ट्रम्प को हराने के लिए न जाने कितने प्रपंच रचे गए। कॉन्ग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गाँधी भारत के आंतरिक मामलों में अमेरिकी हस्तक्षेप के पहले भी पक्षधर रहे हैं।

कॉन्ग्रेस के ‘डेटा एनालिटिक्स यूनिट’ के हेड प्रवीण चक्रवर्ती ने ‘द इकोनॉमिस्ट’ का एक झूठ फैलाया था कि भारत में कोरोना से 10 लाख लोग मर चुके हैं। जबकि भारत में कोरोना से होने वाली मौतों की संख्या 2,78,814 है। साफ़ है कि मोदी सरकार के खिलाफ वैश्विक मीडिया और कॉन्ग्रेस पार्टी गठबंधन बना कर चल रहे हैं। जनता का विश्वास जीतने में असफल रही पार्टी अब विदेशी ताकतों के सहारे नरेंद्र मोदी की सरकार को बदनाम करने में लगी है।

महाराष्ट्र में दो स्थानों से 14000 जिलेटिन की छड़ें, 4000 डेटोनेटर और अन्य विस्फोटक जब्त: जाँच जारी

महाराष्ट्र में दो अलग-अलग स्थानों से 14000 जिलेटिन की छड़ें, 4000 डेटोनेटर और अन्य विस्फोटक सामग्री जब्त की गई। राज्य के भिवंडी में सोमवार (मई 17, 2021) को विस्फोटकों की एक बड़ी खेप बरामद की गई है। यहाँ से जिलेटिन की छड़ें और डेटोनेटर जब्त किया गया। छापेमारी में, पुलिस ने जिलेटिन की 12,000 छड़ें और 3,008 डेटोनेटर जब्त किए। यह कार्रवाई ठाणे पुलिस की क्राइम ब्रांच यूनिट-1 ने की। पुलिस ने कहा कि जिलेटिन की छड़ें 60 बक्से में पैक की गई थीं और प्रत्येक बॉक्स में 190 छड़ें थीं।

जानकारी के मुताबिक करिवली गाँव स्थित मित्तल उद्यम में विस्फोटकों का बड़ा भंडार रखे जाने की सूचना मिलने पर छापेमारी करने के लिए एक टीम गठित की गई। उसके बाद, पुलिस ने 53 वर्षीय एक व्यक्ति को गिरफ्तार किया, जिसकी पहचान गुरुनाथ काशीनाथ म्हात्रे के रूप में हुई है।

डीसीपी क्राइम लक्ष्मीकांत पाटिल ने कहा, “आरोपित पेशे से निर्माण सामग्री आपूर्तिकर्ता और खदान ठेकेदार है और कलवार, भिवंडी में रहता है। उसने दो कमरों में विस्फोटक रखा था। दोनों कमरे करिवली गाँव में महेश स्टोन चॉल के पास स्थित हैं और एक दूसरे से सटे हुए हैं।” उन्होंने बताया कि आरोपित को कोर्ट में पेश कर 22 मई तक पुलिस रिमांड पर लिया गया है।

अधिकारी ने बताया कि उन्होंने जब्त विस्फोटकों को वाडा में एक सुरक्षित घर में रखा है। भोईवाड़ा पुलिस स्टेशन में आईपीसी की धारा 286 आर/डब्ल्यू विस्फोटक पदार्थ अधिनियम 1908 की धारा 5 के तहत मामला दर्ज किया जा रहा है। मामले में आगे की जाँच जारी है।

महाराष्ट्र के अमरावती से विस्फोटक बरामद

ग्रामीण पुलिस ने आतंकवाद विरोधी प्रकोष्ठ और स्थानीय अपराध शाखा इकाई के साथ सोमवार (मई 17, 2021) को महाराष्ट्र के अमरावती जिले के तिवासा तालुका के घोटा में स्थित एक फार्म गोदाम से 1300 जिलेटिन की छड़ें और 835 डेटोनेटर जब्त किए

आरोपित युवराज उद्धव नखले (42) को अवैध रूप से विस्फोटक रखने के आरोप में हिरासत में लिया गया है। छापेमारी में जिलेटिन स्टिक, डेटोनेटर और विस्फोटक से लैस ट्रैक्टर समेत 4 लाख के विस्फोटक जब्त किए गए। घोटा गाँव के के रहने वाले आरोपित ने विस्फोटक की आपूर्ति के लिए ईश्वर मोहोद का नाम लिया है। अन्य आरोपितों की गिरफ्तारी के लिए छापेमारी की जा रही है।

CNN ने पाकिस्तानी पत्रकार आदिल राजा को यहूदी विरोधी ट्वीट्स के बाद दिखाया बाहर का रास्ता, खत्म किए सारे सम्बन्ध

अंतर्राष्ट्रीय समाचार आउटलेट सीएनएन ने पाकिस्तानी स्तंभकार आदिल राजा को बर्खास्त कर दिया है। यह कार्रवाई आदिल राजा के ‘एक और हिटलर की जरूरत है’ वाले ट्वीट के बाद की गई है। उसके हिटलर समर्थक बयान ने परोक्ष रूप से एक और यहूदी नरसंहार का आह्वान किया, जिसके बाद अमेरिकी बहुराष्ट्रीय मीडिया संगठन ने उनके साथ संबंध तोड़ने का फैसला किया।

Adeel Raja
आदिल रजा द्वारा किया गया ट्वीट

सीएनएन ने बाद में एक बयान जारी कर विवादास्पद फ्रीलांसर के साथ संबंध तोड़ने की जानकारी दी। बयान में कहा गया है, “आदिल राजा की रिपोर्टिंग ने इस्लामाबाद से कुछ समाचार एकत्र करने के प्रयासों में योगदान दिया। हालाँकि, उनके इन घृणित बयानों को देखते हुए, वह किसी भी क्षमता में सीएनएन के साथ फिर से काम नहीं करेंगे।”

बता दें कि आदिल राजा 2013 से सीएनएन के साथ फ्रीलांस कंट्रीब्यूटर के रूप में कार्यरत था। उसने रविवार (मई 16, 2021) दोपहर लगभग 12:45 बजे हिटलर समर्थक टिप्पणी को ट्वीट किया और काफी आलोचना होने के बाद इसे डिलीट कर दिया। कई सोशल मीडिया यूजर्स ने उनके ट्वीट को यहूदी विरोधी बताया और फ्रीलांसर को यहूदियों के खिलाफ नफरत फैलाने और परोक्ष रूप से उनके नरसंहार का आह्वान करने के लिए लताड़ा।

‘एक और हिटलर की जरूरत’ वाले ट्वीट के बाद से आदिल के अन्य ट्वीट्स के स्क्रीनशॉट भी सोशल मीडिया पर वायरल हुए। इन्हीं में से एक में उसने कहा था कि वह फीफा विश्व कप के फाइनल में जर्मनी का समर्थन इसलिए कर रहा था, क्योंकि एडॉल्फ हिटलर जर्मन था और उसने ‘यहूदियों के साथ अच्छा किया’ था। बता दें कि द्वितीय विश्व युद्ध के दौरान हिटलर ने जर्मनी में यहूदियों का नरसंहार किया था।

यहीं नहीं आदिल के अंदर भारत के प्रति इतना जहर भरा है कि वह फिलिस्तीन के हालात की तुलना कश्मीर से करता है। 15 मई 2021 को उसने ट्वीट किया कि फिलिस्तीन में जैसा यहूदी (इजराइल) कर रहे हैं, वैसा ही ‘भारतीय हिंदू अधिकृत कश्मीर में कर रहे हैं’। यहाँ उसने कश्मीर को ‘अधिकृत कश्मीर’ कहा, जबकि ‘अधिकृत कश्मीर’ भारत का एक अभिन्न अंग है जो कि पाकिस्तान और चीन द्वारा अवैध रूप से कब्जा किए गए कश्मीर का हिस्सा है।

हाल ही में इजराइल और फिलिस्तीन के बीच हिंसक झड़प शुरू होने के बाद से ही पाकिस्तान में इजराइल के खिलाफ नफरत उफान मार रही है। आदिल से पहले पाकिस्तानी एक्ट्रेस वीना मलिक ने भी हिटलर को कोट करते हुए यहूदियों के नरसंहार की बात की थी।

‘मेरी माँ ने पूछा राहुल गाँधी की गर्लफ्रेंड कब बन गई’: फिफ्टी शेड्स वाली डकोटा की तस्वीर दिखा नेटिजन्स ने लिए मजे

कॉन्ग्रेस पूर्व अध्यक्ष राहुल गाँधी को लेकर सोशल मीडिया पर लोग अक्सर चुटकी लेते रहते हैं। उन पर मीम बना बनाकर उसे तमाम जगह शेयर किया जाता है। साथ ही अगर वह बोलने में कहीं कोई गलती कर दें तो भी यूजर्स उन्हें ट्रोल करने से पीछे नहीं हटते। 

इन दिनों भी कॉन्ग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गाँधी के नाम पर सोशल मीडिया पर एक तस्वीर वायरल हो रही है। ये तस्वीर वैसे तो अमेरिकन सीरीज फिफ्टी शेड्स ऑफ ग्रे से ली गई है। लेकिन सोशल मीडिया यूजर इसमें नजर आने वाले एक्टर को राहुल गाँधी बताकर सवाल कर रहे हैं।

दरअसल, ये सारा मामला एक भारतीय यूजर अनु के ट्वीट से शुरू हुआ। जिसने @meandwh नाम के ट्विटर अकाउंट से शेयर की गई एक्ट्रेस Dakota Johnson और एक्टर Jammie Dornan की तस्वीर पर कमेंट किया। अनु ने इस तस्वीर पर चुटकी लेते हुए लिखा, “मैंने यह तस्वीर अपनी माँ को दिखाई, जिसे देख उन्होंने पूछा कि राहुल गाँधी की गर्लफ्रेंड कब बन गई?”

इसके बाद इस तस्वीर पर राहुल गाँधी से जोड़कर ट्वीट किए जाने लगे। कई भारतीयों ने तस्वीर पर प्रतिक्रिया दी। एक ने लिखा, “राहुल गाँधी की भी गर्लफ्रेंड हैं लेकिन मेरी नही है।” सुपर्णा ने लिखा, “मुझे नहीं पता कि आखिर ये ईसाई राहुल गाँधी जैसा क्यों लग रहा है।”

एक ट्विटर यूजर ने चुटकी लेते हुए कहा, “राहुल गाँधी ये कैसा बर्ताव है।”

अन्य यूजर ने कहा, “हाय राहुल गाँधी, आप डकोटा जॉनसन को जानते हैं?”

सृष्टि ने लिखा, “राहुल गाँधी ये सब क्या है तुम भूल गए मैं तुम्हारी पत्नी हूँ।”

नव्या पूनिया समेत कई अन्य यूजर्स ने भी कहा कि ये शख्स राहुल जैसा लगता है।

बता दें कि तस्वीर में जिस जैमी को राहुल गाँधी बताकर कॉन्ग्रेस नेता की चुटकी ली जा रही है, वह आयरिश एक्टर हैं। उन्होंने फिफ्टी शेड्स सीरिज में काम किया है। जिसकी स्टोरी लाइन से लेकर साउंडट्रैक्स को रिलीज के समय काफी सराहा गया था।

उल्लेखनीय है कि राहुल गाँधी की तुलना जैमी से बहुत समय से होती रही है। समय-समय पर एक्टर की तस्वीर शेयर कर लोग उसे राहुल गाँधी की तस्वीर बता देते हैं। 2015 में भी जब फिल्म आई थी, तब लोगों ने मजाक उड़ाते हुए कहा था कि उन्हें लगता है फिफ्टी शेड्स ऑफ ग्रे में राहुल गाँधी हैं।

पुराने ट्वीट में जैमी की राहुल से तुलना

‘केरल मॉडल’ वाली शैलजा को जगह नहीं, दामाद मुहम्मद रियास को बनाया मंत्री: विजयन कैबिनेट में CM को छोड़ सभी चेहरे नए

केरल में वामपंथी नेता पिनराई विजयन मई 2016 में पहली बार मुख्यमंत्री बने थे। इस साल हुए विधानसभा चुनावों में वे दोबारा जनादेश हासिल करने में कामयाब रहे। लेकिन इस बार उन्होंने अपनी पुरानी सरकार के सभी मंत्रियों को बदल दिया है।

वैसे टिकट बँटवारे में जिस तरह विजयन ने अपने पसंदीदा उम्मीदवारों को तरजीह दी थी, उससे ही ही साफ़ हो गया था कि अब CPI(M) में ‘विजयन युग’ शुरू हो चुका है। लेकिन, सभी मंत्रियों को एक साथ किनारे किए जाने का अनुमान किसी ने नहीं लगाया था। नई कैबिनेट में विजयन ने अपने दामाद मुहम्मद रियास सहित 11 मंत्री बनाए हैं। सारे चेहरे नए हैं।

पिछले मंत्रिमंडल के एक भी सदस्य को मुख्यमंत्री पिनराई विजयन ने अबकी जगह नहीं दी है। उन्हें न सिर्फ मुख्यमंत्री, बल्कि पार्टी के संसदीय दल का नेता भी चुना गया। CPI(M) के प्रवक्ता एएन शमशीर ने कहा कि केरल का न्य मंत्रिमंडल युवाओं और वरिष्ठों के मेल से बना है। इससे पहले केरल की वामपंथी पार्टियों में वीएस अच्युतानंदन का सिक्का चला करता था। कोरोना से हुई तबाही, सोना तस्करी और सबरीमाला पर श्रद्धालुओं के आक्रोश के बावजूद विजयन सत्ता में वापसी करने में सफल रहे।

सबसे बड़ी बात तो ये है कि पिछली सरकार में केरल की स्वास्थ्य मंत्री रहीं केके शैलजा को भी इस बार कैबिनेट में जगह नहीं मिली है। मीडिया के वामपंथी वर्ग ने चुनाव के दौरान जम कर उनका इंटरव्यू लिया था और उनकी तारीफों के पुल बाँधे थे। यहाँ तक कि केंद्र सरकार को भी कोरोना से निपटने के ‘केरल मॉडल’ अपनाने की सलाह दी गई थी। हालाँकि कुछ दिनों बाद ही इस मॉडल का जनाजा निकल गया था। 3,62,313 सक्रिय संक्रमितों के साथ केरल इस मामले में तीसरे स्थान पर बना हुआ है।

निपाह वायरस से निपटने का श्रेय भी वामपंथी मीडिया ने केके शैलजा को ही दिया था। सवाल ये है कि अगर वो इतनी ही कार्यकुशल थीं तो उनकी ही पार्टी की सरकार उनकी सेवा क्यों नहीं लेना चाहती? CPI(M) ने ये कह कर बचाव किया है कि टीम को पूरी तरह बदल देना उसकी नीति रही है लेकिन विजयन के फिर से मुख्यमंत्री बनने को लेकर उसके पास कोई जवाब नहीं। केरल में अधिकतम 21 मंत्री हो सकते हैं।

77 वर्षीय मुख्यमंत्री पिनराई विजयन ने अपने कैबिनेट में दामाद पीए मुहम्मद रियास को भी जगह दी है, जो CPI(M) के यूथ विंग ‘डेमोक्रेटिक यूथ फेडरेशन’ के राष्ट्रीय अध्यक्ष भी हैं। 44 वर्षीय रियास को वामपंथियों के गढ़ कोझिकोड के बेपोर से टिकट दिया गया था। इससे पहले 2009 में वो इसी इलाके से लोकसभा चुनाव हार चुके हैं। जून 15, 2020 को 44 वर्षीय मुहम्मद रियास ने विजयन की बेटी वीणा से शादी रचाई थी।

केरल की प्रमुख सत्ताधारी पार्टी ने कहा है कि किस मंत्री को कौन सा विभाग मिलेगा, ये मुख्यमंत्री ही तय करेंगे। कहा जा रहा है कि कैबिनेट के सभी नाम भी विजयन ने ही तय किए हैं। LDF गठबंधन में CPI व अन्य छोटे दल भी हैं, जिन्हें मंत्रिमंडल में शेयर मिला। इस चुनाव में वरिष्ठ वामपंथी नेताओं ईपी जयराजन, एके बालन, थॉमस इस्साक और जी सुधाकरन को किनारे कर उनका टिकट काट दिया गया था, जिससे विजयन के एकछत्र शासन का रास्ता साफ़ हुआ।