इजराइल और फिलिस्तीन के बीच शुरू हुआ विवाद अब जंग में तब्दील हो चुका है। इजराइल की सेना और फिलिस्तीन के आतंकी संगठन हमास की ओर से हमले जारी हैं। इसी बीच सोशल मीडिया पर इजराइल का एक वीडियो वायरल हो रहा है।
दरअसल, यह वीडियो फिलिस्तीन के आतंकी संगठन हमास द्वारा किए गए हमले का है। आप इस वीडियो में देख सकते हैं कि किस तरह एक बेबस पिता और अपनी नवजात बेटी को रॉकेट के हमले से बचाने के लिए हाथ पैर मारता हुआ नजर आ रहा है। उसके दिमाग में केवल अपने जिगर के टुकड़े की जान कैसे बचाई जाए, यही चल रहा है।
इस खौफनाक मंजर में वह अपनी बेटी को सीने से चिपकाए हुए हैं, ताकि उसे कोई खरोंच भी न आए। बच्ची इस दुनिया में नफरत फैलाने वाले इस्लामिक आतंकी संगठन और हमला करने वालों से बिल्कुल अंजान है। उसने तो अभी तक ठीक से आँखें भी नहीं खोली हैं, वो तो इस पल को भी महसूस नहीं कर सकती है कि उसके पिता उसे बचाने के लिए कितना छटपटा रहे हैं।
वीडियो के मुताबिक, इजराइल में यह पिता अपनी नवजात बेटी के साथ गाड़ी से कहीं जा रहे थे। तभी पिता ने आसमान में एक रॉकेट को फटते हुए देखा। इससे वह काफी डर जाते हैं और गाड़ी से उतर सड़क के बीचों-बीच एक सेफ जगह पर अपनी बच्ची को सीने से लगाकर बैठ जाते हैं।
Put yourself in this father’s shoes.
You’re driving with your newborn baby. Suddenly, you find yourself under rocket fire.
As rockets explode, your only thought is: keep your baby safe.
बच्ची को गोद में उठाए पिता की नजरें केवल आसमानी आफत की ओर हैं। उनके चेहरे पर डर साफ नजर आ रहा है। वह एक बार अपनी मासूम बेटी की तरफ देख रहे हैं, दूसरी तरफ आसमान में हो रहे रॉकेट के हमलों को।
कुछ पल के लिए आप अपने आपको इस पिता की जगह रख कर देखिए। मौत को इतने करीब देखकर आपके भी रोंगटे खड़े हो जाएँगे। खासकर जब आपके साथ आपकी जान आपका बच्चा भी हो। आप कितने भी सुविधा संपन्न क्यों न, लेकिन ऐसे समय में अपने आपको बेहद बेबस और लाचार महसूस करेंगे।
हालाँकि, इजराइल अपने देश के नागरिकों की रक्षा के लिए हमास के रॉकेट हमलों की जवाबी कार्रवाई में एयर स्ट्राइक कर रहा है। इजराइल आतंकियों को उनके बेवजह किए गए हमलों का कड़ा जवाब दे रहा है, लेकिन अपनों की जिंदगी, प्यार और मौत का खौफ यहाँ के नागरिकों को हर पल सता रहा है। बता दें कि यह वीडियो इजराइल डिफेंस फोर्स ने अपने आधिकारिक ट्विटर अकाउंट पर शेयर की है।
अहमदाबाद के जुहापुरा में एक कब्रिस्तान (मुस्लिम कब्रिस्तान) में जमा हुई मुस्लिमों की भीड़ ने अहमदाबाद पुलिस के एक अधिकारी को भीड़ की तस्वीरें और वीडियो बनाने के लिए पीट दिया। उनका मोबाइल फोन भी छीन लिया गया। अहमदाबाद की वेजलपुर पुलिस ने इस मामले में केस दर्ज किया है। अब तक पाँच लोगों को गिरफ्तार किया जा चुका है।
रिपोर्ट्स के मुताबिक, गिरफ्तार किए गए पाँचों आरोपी मोहम्मद अहमद उर्फ राजा सिद्दीकी, मजहर खान पठान, फिरोज मोहम्मद शेख, इफ्तेखार कल्याणी, सुल्तान और परवेज शब्बीर शेख हैं। ये पाँचों मुस्लिम कब्रिस्तान में भीड़ के साथ जमा हुए थे। वे कथित तौर पर ईद के मौके पर कब्र पर फूल चढ़ाने आए थे।
रिपोर्ट के मुताबिक, स्पेशल ब्राँच में एएसआई कृष्णकुमार भवसिंह कब्रिस्तान पहुँचे और ईद के लिए उमड़ी भीड़ की तस्वीरें लेने लगे। इसी दौरान भीड़ में से कुछ लोगों ने उन्हें देख लिया और उन पर हमला कर उनका मोबाइल फोन छीन लिया।
जब पुलिस अधिकारी अपनी ड्यूटी कर रहा था, तो भीड़ के कुछ लोगों ने कहा, “यह आदमी भीड़ की तस्वीर ले रहा है, उसे पीटकर उसका फोन छीन लो। क्या हुआ अगर वो एक पुलिसकर्मी है।” फिर क्या था उकसावे के बाद इकट्ठी हुई मुस्लिम भीड़ ने पुलिसकर्मी को पीट दिया। हालाँकि, किसी तरह से एएसआई अपनी जान बचाकर वहाँ से निकल गए।
बाद में उन्होंने पुलिस में शिकायत दर्ज कराई। शुरुआती जाँच में पता चला है कि कुछ आरोपितों के खिलाफ पहले से केस दर्ज हैं। वहीं बाकियों की तलाश कर पुलिस उनकी गिरफ्तारी की कोशिश कर रही है।
गौरतलब है कि कोरोना वायरस के बढ़ते केस के बीच गुजरात सरकार ने वायरस के प्रसार को रोकने के लिए बड़ी सभाओं पर रोक लगा रखी है। इसी कड़ी में एएसआई भव सिंह अपने सीनियर अधिकारियों के आदेश का पालन करते हुए कब्रिस्तान पहुँच थे, जहाँ कोरोना प्रोटोकॉल का उल्लंघन किया जा रहा था। वहाँ पर भारी भीड़ देख उसका सबूत इकट्ठा करने के इरादे से उन्होंने भीड़ की फोटो खींची, लेकिन भीड़ ने फोटो खींचते देख कर उन पर हमला कर दिया।
इजराइल और फिलिस्तीन के बीच खूनी संघर्ष सातवें दिन भी जारी है। इसी बीच इजराइल डिफेंस फोर्स (IDF) ने रविवार (16 मई 2021) को 30 से अधिक सेंट्रल हमास और फिलिस्तीनी इस्लामिक जिहाद (Palestinian Islamic Jihad) के आतंकियों के नाम और तस्वीरें जारी की हैं, जो गाजा में हवाई हमले में मारे गए हैं। आईडीएफ का कहना है कि उसने आतंकी समूहों के दर्जनों निचले क्रम के गुर्गों को भी मार गिराया है।
IDF releases names and in style cases photos of 30+ “central” Hamas and Palestinian Islamic Jihad members killed so far in the fighting. The IDF says it has killed dozens more lower ranking operatives. pic.twitter.com/EciKT06FGL
शनिवार (15 मई 2021) की रात एक टेलीविजन को दिए बयान में प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने गाजा में इजराइल की सैन्य कार्रवाई को सही ठहराते हुए कहा, ”इजराइल अपने शहरों में इस्लामिक आतंकी संगठन हमास द्वारा किए गए हमलों को बर्दाश्त नहीं करेगा। हम पर हमला करने वालों को करारा जवाब दिया जाएगा। हमारा ऑपरेशन अभी जारी है और जब तक जरूरी होगा, ये जारी रहेगा।”
नेतन्याहू ने ट्वीट करके कहा, ”गाजा ऑपरेशन न्यायसंगत और नैतिक है, लड़ाई कुछ दिन अभी और जारी रहेगी। यह संघर्ष तब शुरू हुआ जब हमास ने सोमवार (10 मई 2021) की शाम को अकारण ही यरूशलेम पर रॉकेट दागे।”
As always, Israel is doing everything possible to protect our civilians and keep Palestinian civilians out of harm’s way. We demonstrated this yet again today when we warned civilians to vacate the building used by the Hamas terror intelligence.
नेतन्याहू ने आगे कहा, “मैं दुनिया को याद दिलाना चाहता हूँ कि हमारे शहरों पर फायरिंग कर हमास दोहरा युद्ध अपराध कर रहा है। वे हमारे नागरिकों को निशाना बना रहे हैं और फिलिस्तीनी नागरिकों के पीछे छिप रहे हैं। हमास उन्हें प्रभावी ढंग से मानव ढाल के रूप में इस्तेमाल कर रहे हैं।”
I want to remind the world that in firing on our cities, Hamas is committing a double war crime. They’re targeting our civilians and hiding behind Palestinian civilians, effectively using them as human shields.
इजराइल के पीएम ने कहा कि 5 दिन हो गए हैं, जब पिछले हफ्ते हमास ने बिना किसी कारण के हमले में येरूशलम और अन्य इजराइली शहरों पर रॉकेट दागे थे। इसके कारण लाखों इजराइलियों को बम शेल्टर्स में जाने को मजबूर किया गया था, क्योंकि हमारे शहरों पर मिसाइलों की बारिश हुई थी।”
PM Benjamin Netanyahu: “It has been 5 days since Hamas brazenly fired rockets at Jerusalem and other Israeli cities in a totally unprovoked attack. This past week, millions of Israelis were forced into bomb shelters as missiles rained down on our cities.”https://t.co/ToeJPuwMCBpic.twitter.com/qCuvnfYkIB
पीएम ने कहा कि हमास को हराना न केवल इजराइल के हितों की रक्षा करता है, बल्कि यह उन सभी के हितों की रक्षा करता है जो मध्य पूर्व में शांति, स्थिरता और सुरक्षा चाहते हैं। उन्होंने अंतरराष्ट्रीय समुदाय में इजराइल के कई दोस्तों को धन्यवाद दिया, जिन्होंने आत्मरक्षा में इजराइल द्वारा की गई कार्रवाई का पुरजोर समर्थन किया है।
उन्होंने कहा, “मैं अमेरिका के राष्ट्रपति जो बाइडेन को धन्यवाद देना चाहता हूँ और मैं यूरोपीय देशों सहित कई देशों को धन्यवाद देना चाहता हूँ, जिन्होंने अपनी सरकारी इमारतों पर एकजुटता में इजराइल का झंडा फहराया।” नेतन्याहू ने बाइडन को आत्मरक्षा के अधिकार का अमेरिका द्वारा बिना शर्त दिए गए समर्थन के लिए भी धन्यवाद दिया।
No one should have any equivocation about the choice that is so clear here and I want to thank @POTUS Biden for his clear and unequivocal support. You cannot equate a democracy that values life with a terror organization that glorifies death.
We will not allow our Jewish citizens to be lynched or to live in fear of murderous Arab gangs. We will not tolerate the torching of synagogues and the torching of property.
नेतन्याहू ने बताया कि इजराइल के शहरों में लोद से लेकर बैट यम, अक्को से हाइफा तक देखी गई हिंसा भयानक है। उन्होंने कहा कि उनका देश अपने नागरिकों के खिलाफ नरसंहार बर्दाश्त नहीं करेगा। उन्होंने कहा कि वो प्रार्थना स्थलों और सरकारी संपत्ति का कोई नुकसान बर्दाश्त नहीं करेंगे।
इजराइल-फिलिस्तीन में बढ़ते तनाव के बीच अमेरिकी राष्ट्रपति जो बायडेन के इजराइल को समर्थन वाले बयान से कट्टरपंथी इस्लामी संगठन बौखला गए हैं। इस बीच अमेरिकी-इस्लामी संबंधों की परिषद (CAIR) ने बायडेन प्रशासन की प्रतिक्रिया के विरोध में व्हाइट हाउस के वार्षिक ईद समारोह का बायकॉट करने का ऐलान किया है।
काउंसिल ऑन अमेरिकन-इस्लामिक रिलेशंस (सीएआईआर) ने इस मामले में ऐलान किया, “सीएआईआर फिलिस्तीनी नागरिकों पर इजरायली हमलों के बायडेन प्रशासन के बचाव के जवाब में व्हाइट हाउस के ईद समारोह का बायकॉट करेगा।” ट्वीट के साथ CAIR ने गाजा में तबाही की एक तस्वीर भी शेयर की है और लिखा है, “राष्ट्रपति बायडेन, क्या आपका टीवी आपको गाजा में इन बच्चों को दिखाता है? क्या उनकी हत्या आपकी निंदा के लायक है?”
इस्लामिक समूह ने कहा कि वह हिंसा पर अमेरिका के रूख से निराश और परेशान है। सीएआईआर के राष्ट्रीय कार्यकारी निदेशक निहाद अवाद ने कहा, “राष्ट्रपति बायडेन के पास इन अन्यायों को रोकने के लिए राजनीतिक शक्ति और नैतिक अधिकार है। हम उनसे पीड़ितों के पक्ष में खड़े होने का आग्रह करते हैं, पीड़ा पहुँचाने वाले के नहीं।”
निहाद अवाद ने मीडिया को दिए बयान में कहा, “CAIR अन्य अमेरिकी मुस्लिम संगठनों के साथ-साथ राष्ट्रपति बायडेन के ईद समारोह में भाग लेने की योजना को रद्द करता है। हम बायडेन प्रशासन के साथ अच्छे विवेक के साथ ईद नहीं मना सकते हैं, क्योंकि वो इजराइल की रंगभेदी सरकार द्वारा गाजा में पुरुषों, महिलाओं और बच्चों के ऊपर अंधाधुंध बमबारी में न केवल मदद करते हैं, बल्कि उसे उकसाते हैं और सही ठहराते हैं। राष्ट्रपति बायडेन के पास इन अन्यायों को रोकने के लिए राजनीतिक शक्ति और नैतिक अधिकार है।”
क्या कहा था बायडेन ने
इजराइल-फिलिस्तीन के बीच जारी जंग पर अमेरिकी राष्ट्रपति जो बायडेन ने 12 मई को कहा था कि इजरायल को अपनी रक्षा करने का अधिकार है, जब उसके क्षेत्र में हजारों रॉकेट दागे जाते हैं। उन्होंने पत्रकारों के सवालों के जवाब में यह बात कही थी।
Biden: “Israel has a right to defend itself when you have thousands of rockets flying into your territory.” pic.twitter.com/GfzL9gcjgi
— The Post Millennial (@TPostMillennial) May 12, 2021
बायडेन ने कहा कि उन्होंने इजराइल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू के साथ बातचीत की और उम्मीद है कि जल्द से जल्द हिंसा समाप्त हो जाएगी।
बायडेन ने हमास और अन्य आतंकवादी समूहों द्वारा येरुशलम और ते अवीव पर रॉकेट हमलों की निंदा की थी। उन्होंने इजराइल की सुरक्षा और नागरिकों की रक्षा करते हुए अपनी और अपने लोगों की रक्षा करने के इजराइल के अधिकार के लिए अपना अटूट समर्थन व्यक्त किया। साथ ही उन्होंने स्थाई शांति बहाल करने की दिशा में संयुक्त राज्य अमेरिका के प्रोत्साहन से भी अवगत कराया था।
इजराइल और फिलिस्तीन के बीच जारी जंग का फायदा उठाकर कट्टरपंथी असामाजिक तत्व सोशल मीडिया के जरिए जम्मू-कश्मीर में शांति भंग करने की कोशिश कर रहे हैं। इस मामले में जम्मू-कश्मीर पुलिस ने इजराइल-फिलिस्तीन संघर्ष से जुड़ी संवेदनशील कंटेंट पोस्ट कर घाटी में शांति भंग करने की कोशिश करने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की चेतावनी दी है।
J&K Police is keeping a very close watch on elements who are attempting to leverage the unfortunate situation in Palestine to disturb public peace and order in the Kashmir valley. We are a professional force and are sensitive to public anguish.
— Kashmir Zone Police (@KashmirPolice) May 15, 2021
जम्मू-कश्मीर पुलिस के इस सुझाव के बावजूद कुछ कट्टर या धर्म में पागल हुए लोग इजराइल-फिलिस्तीन के नाम पर घाटी में जहर घोलने में जुट गए। इजरायल के विरोध में नारे-प्रदर्शन या ग्रैफिटी बनाते श्रीनगर से 20 और शोपियाँ से 1 नागरिक को पुलिस ने गिरफ्तार किया है।
ग्रैफिटी बनाने वाला इंसान “We Are Palestine” नाम से एक ग्रैफिटी बना रहा था, जिसमें फिलिस्तीन का झंडा लिए एक महिलो को रोते हुए दिखाया गया था। कानून व्यवस्था से जुड़े मुद्दों पर श्रीनगर में 20 लोगों के खिलाफ मामला दर्ज किया गया है।
शनिवार को एक प्रेस विज्ञप्ति जारी कर जम्मू-कश्मीर पुलिस ने कहा कि वह उन तत्वों पर कड़ी नजर रख रही है जो कश्मीर घाटी में शांति और व्यवस्था को बिगाड़ने के लिए “फिलिस्तीन में दुर्भाग्यपूर्ण स्थिति का लाभ उठाने का प्रयास” कर रहे हैं।
Srinagar Police arrested 20 individuals in connection with violation of Corona Curfew under section 51 DM Act. Two protests were held in Srinagar Friday on Palestine Issue. They were identified on basis of videography done during the protests. @JmuKmrPolice@KashmirPolice
गौरतलब है कि येरुशलम के मुद्दे पर हाल ही में फिलिस्तीन और इजराइल के बीच संघर्ष बढ़ा है। फिलिस्तीनी आतंकी संगठन हमास के हमलों के जवाब में इजराइली डिफेंस फोर्स ने गाजा पट्टी पर बमबारी शुरू कर दी है। इसी का फायदा उठाकर कट्टरपंथी कश्मीर की शाँति भंग करने की कोशिश कर रहे हैं।
आईजी कश्मीर, विजय कुमार ने कहा, “हम एक पेशेवर पुलिस फोर्स हैं और जनता की पीड़ा के प्रति संवेदनशील भी हैं। लेकिन, जम्मू-कश्मीर पुलिस के पास कानून व्यवस्था को दुरुस्त रखने की भी कानूनी जिम्मेदारी है। जनता के गुस्से और सनकीपने को जम्मू-कश्मीर की सड़कों पर हिंसा, अराजकता और अव्यवस्था के रूप में ट्रिगर नहीं करने दिया जाएगा।”
But J&K police has a legal responsibility to ensure law and order as well. It, however, wouldn’t allow cynical encashment of the public anger to trigger violence, lawlessness and disorder on Kashmir streets. Expressing opinion is a freedom but engineering and inciting violence on
— Kashmir Zone Police (@KashmirPolice) May 15, 2021
जम्मू-कश्मीर पुलिस का कहना है कि लोगों को अपनी राय व्यक्त करने का अधिकार है, लेकिन कोविड -19 महामारी के दौरान कोई विरोध प्रदर्शन नहीं कर सकते। देश के कई हिस्सों की तरह जम्मू और कश्मीर भी कोविड-19 संक्रमण की दूसरी लहर से जूझ रहा है और 24 मई तक केंद्र शासित प्रदेश में कर्फ्यू लागू कर दिया गया है।
streets is unlawful. All irresponsible social media comments that results in actual violence and breaking of law including Covid protocol will attract legal action. IGP Kashmir urges cooperation of all citizens.@JmuKmrPolice
— Kashmir Zone Police (@KashmirPolice) May 15, 2021
आईजी कश्मीर विजय कुमार ने कहा कि राय व्यक्त करना आजादी है, लेकिन सड़कों पर हिंसा भड़काना गैरकानूनी है। उन्होंने कहा, “लापरवाही भरे सोशल मीडिया पोस्ट के परिणामस्वरूप हिंसा फैल सकती है। ऐसे में कोविड प्रोटोकॉल और कानून तोड़ने वालों के खिलाफ कड़ी कानूनी कार्रवाई होगी।”
हाल ही में उइगर ह्यूमन राइट्स प्रोजेक्ट (UHRP) द्वारा चीन के शिनजियांग प्रांत में बसे हुए उइगर मुस्लिम इमामों और अन्य मजहबी प्रतिनिधियों के उत्पीड़न पर एक रिपोर्ट जारी की गई। ‘Islam Dispossessed: China’s Persecution of Uyghur Imams and Religious Figures’ नाम की इस रिपोर्ट में बताया गया है कि चीन ने 2014 से कम से कम 630 उइगर इमामों और अन्य मुस्लिम प्रतिनिधियों को बंधक बना कर रखा है। इसके अलावा रिपोर्ट में यह दावा भी किया गया है कि 18 मौलवी या तो सजा के दौरान ही मर गए या फिर सजा से आजाद होने के तुरंत बाद।
जस्टिस फॉर ऑल के साथ तैयार की गई इस रिपोर्ट में UHRP द्वारा 2014 से लेकर अब तक शिनजियांग प्रांत के तुर्किक इमामों और अन्य हजहबी हस्तियों के 1,046 मामलों के डाटासेट को संकलित किया गया है। डाटासेट में संकलित सभी केसों में से 428 इमामों को सामान्य जेल भेज गया है जबकि 202 इमामों या अन्य मजहबी मुस्लिम हस्तियों को कंसंट्रेशन कैम्प या जिन्हें चीन ‘Re-Education’ कैम्प कहता है, वहाँ भेजा गया है। डिटेन्शन या सजा में रहते हुए अथवा सजा से आजाद होने के तुरंत ही बाद लगभग 18 की मौत हो चुकी है।
डिटेन्शन या सजा का कारण
रिपोर्ट में चीन की कम्युनिस्ट सरकार द्वारा इमामों तथा अन्य मुस्लिम प्रतिनिधियों के विरुद्ध डिटेन्शन या सजा के कारणों के बारे में भी बताया गया है। इनमें से लगभग 46% सजा डिटेन्शन के मामले मजहब से जुड़ाव, मजहब से जुड़े अवैध मटेरियल जैसे साहित्य, वीडियो इत्यादि और बच्चों को मजहब की शिक्षा देने से संबंधित हैं। इसके अलावा अलगाववाद, कट्टरवाद, अवैध शिक्षा और यहाँ तक कि प्रार्थना करने को भी डिटेन्शन या सजा का आधार बनाया गया है।
उइगर इमामों और अन्य मुस्लिम प्रतिनिधियों पर लगाए गए आरोप (फोटो : UHRP)
90 साल का इमाम भी 2017 से है डिटेन्शन में
UHRP की रिपोर्ट में कुछ इमामों और इस्लामिक कार्यकर्ताओं की केस स्टडी कर उनके मामले के बारे में बताया गया है। 90 वर्षीय अबिदिन आयप एक स्थानीय मस्जिद में 30 सालों तक इमाम रहे और शिनजियांग इस्लामिक इंस्टीट्यूट में प्रोफेसर के तौर पर भी रहे। रिपोर्ट में बताया गया है कि अबिदिन को जनवरी से अप्रैल 2017 के बीच ‘कट्टरपंथी विचारों के उत्तराधिकारी’ के आरोप में डिटेन्शन कैम्प में रखा गया है।
अबिदिन के अलावा एक और इमाम है जिसे 25 सालों की सजा दी गई है। अब्लाजान बेकरी, काराकाश मस्जिद में हातिप या शुक्रवार के इमाम थे। बेकरी को नियम का उल्लंघन करने के लिए 2017 में गिरफ्तार कर लिया गया और 25 साल की सजा दी गई।
ऐसे ही कई मामले हैं जहाँ मामलों में अदालतों द्वारा भी कोई पुख्ता जानकारी प्राप्त नहीं हो सकी लेकिन फिर भी आरोपित बनाए गए इमामों या मुस्लिम प्रतिनिधियों को कई सालों की सजा सुनाई गई है।
उइगर स्त्रियों का नर्क से बदतर जीवन
चीन के शिनजियांग प्रांत में न केवल पुरुषों बल्कि उइगर महिलाओं को भी अलग-अलग तरह के कैम्पों में रखा जाता है। कुछ महीनों पहले शिनजियांग में नजरबंद डिटेन्शन कैम्पों में उइगर महिलाओं की स्थिति पर रिपोर्ट जारी की गई थी। इस रिपोर्ट में बताया गया था कि कैम्पों में महीनों तक रहने वाली महिलाओं ने आरोप लगाया कि चीनी अधिकारी इन कैम्पों के माध्यम से एक तरह से संगठित बलात्कार व्यवस्था बनाते हैं जहाँ वो (चीनी पुरुष) रात बिताने के लिए खूबसूरत उइगर महिलाओं को चुनते हैं और इसके लिए भुगतान भी करते हैं।
कई महिलाओं ने अपनी आपबीती बताते हुए कहा कि हर रात महिलाओं को जेलों या कैम्पों से बाहर निकाल जाता है और उनके साथ बलात्कार किया जाता है। कई बार तो इन महिलाओं का गैंगरेप किया जाता है। कैम्प में रहने वाली महिलाओं के अनुसार बलात्कार के अलावा इन डिटेन्शन कैम्पों में महिलाओं को करंट भी दिया जाता है।
कई एक्स्पर्ट्स ने यह भी दावा किया है कि शिनजियांग प्रांत में लगभग 16,000 मस्जिदों को तोड़ दिया गया है जो कि कुल मस्जिदों का लगभग दो तिहाई है। शिनजियांग प्रांत में उइगर मुस्लिम समुदाय से जुड़ी हजारों मस्जिदों के तोड़े जाने की खबर मीडिया रिपोर्ट्स में आईं। इन रिपोर्ट्स में बताया गया कि चीन की कम्युनिस्ट सरकार पुनर्निर्माण के नाम पर मस्जिदों को तोड़ रही है और उनकी इस्लामिक पहचनों को नष्ट कर रही है।
इन मीडिया रिपोर्ट्स में यह बताया गया कि मस्जिदों में इस्लाम से जुड़े सभी प्रकार के निर्माण जैसे डोम, मीनारों और मस्जिदों के हरे रंग को खत्म किया जा रहा है। इनमें से कई मस्जिदें स्थानीय मुसलमानों के लिए महत्वपूर्ण हैं लेकिन चीन की कम्युनिस्ट सरकार इन मस्जिदों की एक-एक इस्लामिक पहचान को समाप्त कर रही है।
चीन का मानना है कि शी जिनपिंग के राष्ट्रपति बनने से पहले उइगर कट्टरपंथियों द्वारा धारदार हथियारों से हमले आम हुआ करते थे लेकिन बाद में चीन की कम्युनिस्ट सरकार ने शिनजियांग प्रांत के इन मुस्लिम कट्टरपंथियों पर अपना शिकंजा कसा। चीन के स्टेट इंटरनेट इनफॉर्मेशन ऑफिस (SIIO) के अनुसार उइगर के कट्टरपंथी इस पूरे क्षेत्र में जिहाद समर्थित साहित्य और आतंकी वीडियो प्रसारित करते थे। जिहाद और इस्लामिक कट्टरपंथ पर आधारित यह मटेरियल पूरे चीन में बढ़ रहा था जिसका प्रभाव बड़ा ही खतरनाक था।
चीन का उत्तर-पश्चिमी शिनजियांग प्रांत सांस्कृतिक रूप से तुर्किक (Turkic) समुदायों का निवास स्थान है। इनमें तुर्किश, कजाख, किर्गिज, उइगर और उज्बेक आदि शामिल हैं। शिनजियांग के इन निवासियों में एक बड़ी जनसँख्या मुसलमानों की है जो पिछले कुछ समय से चीन की कम्युनिस्ट सरकार के निशाने पर हैं।
सालों से इस क्षेत्र में कुरान को बदलने, बुर्का पहनने और दाढ़ी रखने पर पाबंदी की खबरें आ रही हैं। हालाँकि कई बार अंतरराष्ट्रीय समुदाय इस मुद्दे पर चीन की आलोचना कर चुका है लेकिन जैसा कि चीन हमेशा से करता आया है, इस मुद्दे पर भी अंतरराष्ट्रीय आलोचनाओं को सिरे से नजरअंदाज कर देता है।
उइगरों का निवास स्थान है चीन का उत्तर-पश्चिमी क्षेत्र (फोटो : ब्रिटानिका)
आपको बता दें कि उइगर ह्यूमन राइट्स प्रोजेक्ट (UHRP) शोध के माध्यम से उइगर मुस्लिमों के अधिकारों की वकालत करता है और अंतरराष्ट्रीय मानव अधिकार मानकों के हिसाब से उइगर मुस्लिमों के अधिकारों से संबंधित रिपोर्ट प्रकाशित करता है।
आंध्र प्रदेश की सत्ताधारी वाईएसआर कॉन्ग्रेस के बागी सांसद रघुराम कृष्णम राजू ने हिरासत में टॉर्चर करने का आरोप सीआईडी पर लगाया है। नर्सापुरम से सांसद राजू को सीआईडी ने शुक्रवार (14 मई 2021) को देशद्रोह के आरोप में गिरफ्तार किया था। उन्हें जब मजिस्ट्रेट के पास पेश किया गया तो उनके वकील ने दावा किया कि उन पर पुलिस ने थर्ड डिग्री का इस्तेमाल किया। इसकी वजह से अब वे चलने में भी सक्षम नहीं हैं।
वकील ने यह भी कहा कि कुछ महीने पहले ही उनकी बाइपास सर्जरी हुई थी। लिहाजा टॉर्चर किए जाने के बाद उनकी मेडिकल जाँच बेहद जरूरी है। वकील के मुताबिक राजू को 14 मई की रात 11 बजे के करीब उनके गुंटूर स्थित आवास से गिरफ्तार किया गया था। उस वक्त वे सोने जा रहे थे। अचानक पाँच लोग उनके कमरे में दाखिल हुए। उनलोगों ने रूमाल से अपना चेहरा ढक रखा था। वकील के अनुसार उन्हें सांसद ने बताया कि उनलोगों ने रस्सी से उनके पैर बाँध दिए। इसके बाद एक ने छड़ी से और दूसरे ने रबर की मोटी छड़ी से उनके पैर पर वार किए।
टॉर्चर करने के बाद उनलोगों ने उन्हें चलने का आदेश दिया। उन्हें चलता देख दोबारा उन्हें प्रताड़ित किया गया। जब वे चलने में सक्षम नहीं रहे तो उनलोगों ने उन्हें कमरे में छोड़ दिया। मजिस्ट्रेट ने वकील की बातें सुनने के बाद वाई सिक्योरिटी सुरक्षा की मौजूदगी में उनकी मेडिकल जाँच के निर्देश दिए हैं।
सीआईडी के एडिशनल एसपी ने बताया है कि राजू के खिलाफ गैर-जमानती वारंट जारी किया गया था। YSRCP सांसद कृष्णम राजू आंध्र प्रदेश में धर्मांतरण में लिप्त ईसाई मिशनरियों के खिलाफ लगातार आवाज उठाते रहे हैं। पूर्व में अपनी ही पार्टी के कार्यकर्ताओं और नेताओं से जान का खतरा होने की बात भी वे कह चुके हैं।
राजू की गिरफ्तारी तब हुई है जब उन्होंने 27 अप्रैल को CBI की विशेष अदालत से मुख्यमंत्री जगन मोहन रेड्डी की जमानत रद्द करने की माँग की थी। उन्होंने कहा था कि जगन मोहन रेड्डी ने जमानत की शर्तों का उल्लंघन किया है। उन्हें आईपीसी की धारा 50(2), 124(A), 153 और 505 के तहत नोटिस देने के बाद गिरफ्तार किया गया। राजू के परिजनों ने गिरफ़्तारी का विरोध भी किया। बावजूद उन्हें गिरफ्तार करके गुन्टूर के सीआईडी ऑफिस ले जाया गया।
ट्विटर पर पायल मेहता नाम की एक यूजर ने कृष्णम राजू की हिरासत की तस्वीरें पोस्ट की हैं जिनमें कृष्णम राजू के पैरों में निशान देखे जा सकते हैं।
राजू ने अपनी ही पार्टी से जान को ख़तरा बताते हुए केन्द्रीय सुरक्षा की माँग की थी। उन्होंने जून 2020 में कहा था कि पार्टी के विधायक और समर्थक लगातार उन्हें जान से मार डालने की धमकी दे रहे हैं और राज्य सरकार तथा स्थानीय प्रशासन उनकी शिकायतों पर ध्यान नहीं दे रहा है। मई 2020 में एक न्यूज़ डिबेट में उन्होंने कहा था कि आंध्र प्रदेश में मिशनरी के लोग खुलेआम धर्मांतरण हो रहा है।
जब आंध्र प्रदेश में तिरुपति तिरुमला देवस्थानम बोर्ड (TTD) ने मंदिर की संपत्ति को नीलाम करने का निर्णय लिया था तब राजू ने हिन्दुओं की भावनाओं को देखते हुए इसके ख़िलाफ़ आवाज़ उठाई थी। हाउस-साइट डिस्ट्रीब्यूशन और बालू बेचने में हुए भ्रष्टाचार को लेकर भी उन्होंने मंदिर प्रशासन पर सवाल खड़े किए थे] जिसके बाद उनकी अपनी ही पार्टी विधायकों के साथ तीखी बहस हुई थी।
आंध्र प्रदेश में धर्मांतरण के मुद्दे पर राजू ने एक चौंकाने वाला खुलासा करते हुए कहा था कि प्रदेश में सरकारी आँकड़ों में भले ईसाइयों की संख्या 2.5% बताई जाती है, लेकिन वास्तविकता में यह 25% से कम नहीं है। गौरतलब है कि आंध्र प्रदेश में धर्मांतरण को लेकर साल 2019 में खबर आई थी कि जगन मोहन रेड्डी सरकार की जन-कल्याणकारी योजनाओं को रफ़्तार देने पर फोकस नहीं है। वह लोगों को मुफ़्त में चीजें देने की नीति पर ज़्यादा ध्यान केंद्रित कर रहे हैं। इससे न सिर्फ़ सार्वजनिक संपत्ति को भारी क्षति पहुँच रही है, बल्कि राज्य में धर्मांतरण को भी बढ़ावा मिल रहा है।
15 मई को भाजपा आईटी सेल के प्रमुख अमित मालवीय ने कोरोना वायरस संक्रमण को नियंत्रित करने का दावा करने वाली बृहन्मुंबई महानगर पालिका (BMC) के ‘मुंबई मॉडल’ पर निशाना साधते हुए कहा कि ‘मुंबई मॉडल’ और कुछ नहीं बल्कि कोरोना वायरस संक्रमण से हुई मौतों पर पर्दा डालना है। उन्होंने अपने ट्वीट में मार्च 2020 से अप्रैल 2021 और 1 फरवरी 2021 से 30 अप्रैल 2021 तक के आँकड़ों को बताया है।
The “Mumbai Model” is nothing more than window dressing Covid deaths.
Deaths due to other reasons in Mumbai during first wave -12%
During second wave the figure is staggeringly high at 39.4%!
For Rest of Maharashtra, figures during both waves, have remained more or less same. pic.twitter.com/UCKv3SsYA1
अमित मालवीय ने अपने ट्वीट में बताया कि संक्रमण की पहली लहर के दौरान मुंबई में ‘अन्य कारणों से होने वाली मौतें’ 12% थीं लेकिन दूसरी लहर में इनका अनुपात अचानक से बढ़कर 39.4% हो गया। उन्होंने बताया कि इस दौरान शेष महाराष्ट्र के लिए इन आँकड़ों में थोड़ा बहुत अंतर ही था।
अमित मालवीय ने अपने ट्वीट में महाराष्ट्र के पूर्व मुख्यमंत्री और विपक्ष के नेता देवेन्द्र फड़नवीस के द्वारा लिखा गया पत्र भी पोस्ट किया। फड़नवीस ने यह पत्र 8 मई 2021 को राज्य के मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे को लिखा था। इस पत्र में कहा गया था कि राज्य सरकार कोरोना वायरस के आँकड़ों को छुपा रही है और पीआर एजेंसियों और सेलिब्रिटीज की सहायता से संक्रमण के काबू में होने का झूठा नैरेटिव बना रही है। फड़नवीस ने विशेष तौर पर BMC पर Covid-19 से हुई मौतों के आँकड़ों में हेरफेर करने का आरोप लगाया और पत्र में इससे संबंधित डाटा भी दिया।
पिछले 24 घंटों में महाराष्ट्र में कोरोना वायरस संक्रमण के 34,848 नए मामले आए जबकि इसी दौरान स्वस्थ होने वालों की संख्या 59,073 रही। संक्रमण के मामले जरूर कम हो रहे हैं लेकिन रोजाना मौतें अभी भी ज्यादा हैं। महाराष्ट्र में पिछले 24 घंटों में 960 मौतें हुई हैं।
Maharashtra reports 34,848 new #COVID19 cases, 59,073 discharges and 960 deaths in the last 24 hours
Total cases 53,44,063 Death toll 80,512 Total discharges 47,67,053
इजरायली डिफेंस फोर्स (IDF) ने शनिवार (मई 15, 2021) शाम एयरस्ट्राइक कर उस 12 मंजिला अपार्टमेंट (गाजा टावर) को तबाह कर दिया, जहाँ अमेरिकी मीडिया एसोसिएट प्रेस (AP) और कतर के मीडिया हाउस अल जजीरा सहित कई समाचार समूहों के ऑफिस थे। हमले से पहले IDF ने एक अनाउंसमेंट किया। इसमें लोगों से अपने घर खाली करने के लिए कहा गया। ठीक एक घंटे बाद इजराइल के फाइटर प्लेन ने बमबारी शुरू कर दी। कुछ ही सेकेंड में 12 मंजिला बिल्डिंग तबाह हो गई।
अब एक वीडियो सामने आया है, जिसमें अल-जला टॉवर का मालिक लाइव टीवी पर एक इजरायली अधिकारी से अनुरोध करता है कि बिल्डिंग पर बमबारी करने से पहले पत्रकारों को अपने उपकरण लेने दें। इस दौरान उन्होंने पैगंबर मोहम्मद की भी दुहाई दी, लेकिन इजरायल के अधिकारी ने उनकी एक न सुनी और क्षण भर बाद, हवाई हमलों ने गाजा की इमारत को ध्वस्त कर दिया, जिसमें अल जजीरा और MEE सहित कई अंतरराष्ट्रीय मीडिया के ऑफिस थे।
WATCH: The owner of al-Jalaa tower pleads with an Israeli officer on live TV to let journalists collect their gear before he bombs it.
Moments later, Israeli air strikes demolish the #Gaza building that housed several international media offices, including #AlJazeera and MEE pic.twitter.com/Sf5PM3UN7P
इस वीडियो में आप देख सकते हैं कि बिल्डिंग का मालिक इजरायल के अधिकारी से 10 मिनट का वक्त माँगता है। वो कहता है कि चार लोग बिल्डिंग के अंदर कैमरा और बाकी उपकरण लेने के लिए अंदर गए हैं, कृपया तब तक रुक जाएँ। उन्होंने कहा कि वो लोग बीच लाइव में हैं। हालाँकि इजरायल के अधिकारी ने एक मिनट भी देने से इनकार कर दिया और कहा कि कोई भी बिल्डिंग के अंदर न जाएँ। उनका कहना था कि वो बिल्डिंग को खाली करने के लिए पहले ही एक घंटा दे चुके हैं।
इस दरम्यान बिल्डिंग का मालिक लगातार कहता रहा कि उसे बिल्डिंग से कोई लेना-देना नहीं है, उन्हें बिल्डिंग के साथ जो करना है करे, वो बस उन लोगों को उपकरण इकट्ठा कर वापस आने दें। इस दौरान बिल्डिंग के मालिक ने पैगंबर मुहम्मद की भी दुहाई दी। अंत में इजरायल के अधिकारी ने पूछा कि बिल्डिंग में कोई है तो नहीं, जिसके जवाब में उन्होंने कहा कि नहीं, बिल्डिंग में कोई नहीं है। इसके बाद हवाई हमले से बिल्डिंग को उड़ा दिया गया।
बता दें कि हमले के बाद ट्विटर के माध्यम से इजरायल डिफेंस फोर्स ने जानकारी दी कि क्यों उस इमारत को निशान बनाया, जहाँ अल-जजीरा समेत अन्य मीडिया समूहों के कार्यालय थे। इजरायल डिफेंस फोर्स (@IDF) ने ट्वीट करके बताया कि हमास गाजा की ऊँची इमारतों का उपयोग इजरायल के खिलाफ संचार साधने, कमांड-कंट्रोल, हमले की प्लानिंग और खुफिया सूचनाओं को इकट्ठा करने के लिए कर रहा है और जब हमास इन इमारतों को सैन्य उपयोग में ले रहा है तो ये इमारतें निश्चित तौर पर सैन्य लक्ष्य भी बन जाती हैं।
डिफेंस फोर्स ने कहा कि इजरायल द्वारा पहले भी ऐसी इमारतों को निशाना बनाया गया है लेकिन पहले यह सुनिश्चित किया जाता है कि नागरिकों को किसी भी प्रकार का नुकसान न हो। इस बार भी इजरायल की सुरक्षा सेना ने इमारत को खाली करने का संदेश पहले ही दे दिया था और चेतावनी देने के लिए ‘रूफ नॉकर’ बम गिराए जो किसी प्रकार का कोई नुकसान नहीं करते हैं अपितु केवल चेतावनी देते हैं।
उत्तर प्रदेश में एक बार फिर लॉकडाउन की अवधि बढ़ा दी गई है। पहले यह 17 मई तक थी, जिसे अब बढ़ाकर 24 मई तक कर दिया गया है। शनिवार (मई 15, 2021) शाम योगी मंत्रिमंडल की बैठक में यह फैसला लिया गया। बैठक में यह फैसला लिया गया कि इस दौरान सिर्फ जरूरी सेवाओं पर पाबंदी नहीं रहेगी। लोगों को अस्पताल, राशन और मेडिकल स्टोर की सुविधा मिलती रहेगी। बैठक के दौरान पंजीकृत पटरी दुकानदारों को 1000 रुपए मासिक देने का फैसला भी लिया गया है। इससे 1 करोड़ लोगों को लाभ मिलेगा।
योगी सरकार ने शनिवार को कहा कि BPL कार्ड होल्डर और गरीबों को सूखा राशन दिया जाएगा। जिनके कार्ड नहीं बने हैं या नहीं बन पाए हैं उन गरीबों के कार्ड भी बनाएगी साथ ही उत्तर प्रदेश की योगी सरकार इन्हें 3 महीने का राशन देगी। इससे 15 करोड़ लोगों को लाभ मिलेगा।
इससे पहले सरकार ने 17 मई तक राज्य में वीकेंड कोरोना कर्फ्यू बढ़ाया था। लेकिन अभी संक्रमण फैल रहा है और लॉकडाउन की वजह से कोरोना के मामलों में कुछ गिरावट आई है तो सरकार ठिलाई नहीं बरतना चाहती इसलिए ये फैसला लिया गया है। उत्तर प्रदेश में बीते 30 अप्रैल से कोरोना कर्फ्यू लागू है। शुरुआत में सरकार ने इसे तीन दिन के लिए 3 मई तक लगाया था, लेकिन कोविड के तेजी से बढ़े मामलों के बाद इसे 6 मई तक के लिए बढ़ाया गया और फिर इसे 17 मई तक के लिए बढ़ा दिया गया था।
पिछले 24 घंटे में आए 12,547 नए मामले
हालाँकि राहत की बात यह है कि यूपी में कोविड केस में लगातार कमी आ रही है। साथ ही रिकवर मरीजों की संख्या में बढ़ोत्तरी हो रही है। बीते 24 घंटों में कोरोना संक्रमण के 12,547 नए मामले सामने आए हैं। जबकि 28,404 लोग स्वस्थ होकर डिस्चार्ज हुए हैं। वहीं, 281 मरीजों की मौत हो गई है। बता दें कि प्रदेश में एक्टिव केस की संख्या 1,77,643 है।
यूपी के शहरी इलाकों में कोरोना मरीजों की संख्या कम हो रही है, साथ ही रिकवरी रेट भी बढ़ रहा है। लेकिन गाँवों में तेजी से बढ़ते कोरोना मामले सरकार के माथे पर बल ला रहे हैं। इसलिए यूपी सरकार कोरोना चेन को तोड़ने के लिए लगातार लॉकडाउन अवधि बढ़ाती जा रही है। कोरोना वायरस से लड़ रहे उत्तर प्रदेश में अब ब्लैक फंगस के केस बढ़ने लगे हैं। कानपुर, लखनऊ, मथुरा समेत कई जिलों में ब्लैक फंगस के मामले सामने आए हैं। यूपी में अब तक ब्लैक फंगस से चार से ज्यादा मरीजों की मौत हो चुकी है। बढ़ रहे मामलों को देखते हुए योगी सरकार ने लोगों के लिए एडवाइजरी जारी की है।
कहाँ-कहाँ अटैक करता है ब्लैक फंगस?
विशेषज्ञों ने बताया कि कोविड के बाद ब्लैक फंगस या म्यूकरमाइकोसिस लोगों को घेर रहा है। इस रोग में काले रंग की फंगस नाक, साइनस, आँख और दिमाग में फैलकर उन्हें नष्ट कर रही है और मरीजों की जान पर बन रही है। ब्लैक फंगस के कोई लक्षण नजर आए तो तत्काल सरकारी अस्पताल में या किसी अन्य विशेषज्ञ डॉक्टर को दिखाएँ। नाक, कान, गले, आँख, मेडिसिन, चेस्ट या प्लास्टिक सर्जन विशेषज्ञ को तुरंत दिखाएँ ताकि जल्दी इलाज शुरू हो सके।