Home Blog Page 3796

पूछताछ से तिलमिलाई कॉन्ग्रेस, कोर्ट के निर्देश पर AAP और BJP नेताओं से भी दिल्ली पुलिस कर चुकी है पूछताछ

दिल्ली पुलिस ने दिल्ली उच्च न्यायालय के आदेश पर चल रही जाँच में कोविड-19 दवाओं की अवैध खरीद और वितरण के आरोपों को लेकर आज (मई 14, 2021) युवा कॉन्ग्रेस अध्यक्ष श्रीनिवास बीवी से पूछताछ की। पुलिस पहले ही इस मामले में कुछ AAP और भाजपा नेताओं से पूछताछ कर चुकी है।

दिल्ली पुलिस क्राइम ब्रांच की एक टीम श्रीनिवास बीवी से पूछताछ करने भारतीय युवा कॉन्ग्रेस के मुख्यालय पहुँची। पूछताछ का मकसद उस राहत सामग्री के स्रोत के बारे में पता लगाना था जिसका संगठन लोगों की मदद के लिए इस्तेमाल कर रहा है।

कॉन्ग्रेस पार्टी ने पूछताछ पर नाराजगी जताई और ‘न्यूट्रल’ पत्रकारों ने कोविड-19 सहायता वितरित करने के लिए किसी की जाँच करने की उपयुक्तता पर सवाल उठाया। यह ध्यान देना आवश्यक है कि इसी मामले में भाजपा नेताओं से भी पूछताछ की गई है। 11 मई को दिल्ली बीजेपी नेता हरीश खुराना ने जानकारी दी थी कि दिल्ली पुलिस ने उनसे भी पूछताछ की थी।

खुराना ने कहा था, “मैंने उन्हें अपना बयान दिया और कहा कि मैंने कभी जमाखोरी नहीं की। मैंने आधिकारिक चैनलों के माध्यम से लोगों की दवाओं तक पहुँच बनाने में मदद की। उन्होंने मुझे उच्च न्यायालय के आदेश की एक प्रति दिखाई, जिसके आधार पर जाँच हो रही है।” उसी दिन, दिल्ली पुलिस अपराध शाखा ने AAP विधायक दिलीप पांडे से भी कोविड की दवाओं के कथित अवैध वितरण आदि के संबंध में पूछताछ की थी।

दिल्ली पुलिस द्वारा पूछताछ दिल्ली उच्च न्यायालय के आदेश के अनुसार की जा रही है, जिसने उन्हें COVID-19 दवाओं के कथित अवैध वितरण में राजनेताओं की संलिप्तता की जाँच करने के लिए कहा। दिल्ली पुलिस भाजपा सांसद गौतम गंभीर को तलब कर सकती है, जो कोरोना वायरस प्रकोप की दूसरी लहर के दौरान लोगों की मदद करने में भी सबसे आगे हैं।

हृदुआ फाउंडेशन के अध्यक्ष डॉ. दीपक सिंह ने दिल्ली उच्च न्यायालय में एक याचिका दायर की थी, जिसमें कथित ‘मेडिकल माफिया-राजनेता गठजोड़’ और राजनेताओं द्वारा COVID दवाओं के अवैध वितरण की सीबीआई जाँच की माँग की गई थी। याचिकाकर्ता ने गंभीर, श्रीनिवास, साथ ही भाजपा नेताओं सुजय विखे, गौतम गंभीर और शिरीष चौधरी, कॉन्ग्रेस नेता प्रियंका गाँधी वाड्रा और कॉन्ग्रेस विधायक मुकेश शर्मा, एनसीपी नेता शरद पवार और रोहित पवार का उल्लेख किया था। इसमें उनके द्वारा वितरित किए गए रेमडेसिविर का उदाहरण दिया गया था। याचिका में राष्ट्रीय सुरक्षा कानून, 1980 के अनुसार कोविड-19 दवाओं की कालाबाजारी में लिप्त होने और विधायकों और सांसदों को अयोग्य ठहराने के लिए ऐसे व्यक्तियों को हिरासत में लेने के लिए भी अपील की गई थी।

अदालत ने 4 मई को एफआईआर और सीबीआई जाँच की याचिका को खारिज कर दिया था, लेकिन दिल्ली पुलिस से इस मुद्दे की जाँच करने के लिए कहा था। अदालत ने पुलिस से कहा था कि राजनेताओं द्वारा कथित तौर पर सीधे रेमडेसिविर की खरीद और उन्हें कोविड-19 मरीजों को वितरित करने के मामलों पर ध्यान दें और यदि कोई अनियमितता मिलती है तो प्राथमिकी दर्ज करे। अदालत ने राज्य को एक सप्ताह के भीतर स्थिति रिपोर्ट दाखिल करने को कहा और मामले को सुनवाई के लिए 17 मई को सूचीबद्ध किया।

कैप्टन अमरिंदर सिंह की ईदी: मुस्लिम बहुल मलेरकोटला को बनाया पंजाब का नया जिला

मुस्लिम बहुल मलेरकोटला पंजाब का 23वाँ जिला बन गया है। मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह ने ईद के मौके पर इसकी घोषणा की। उन्होंने कहा कि अरसे से लंबित इस माँग को पूरा कर दिया गया है। ईद-उल-फितर के मौके पर लोगों को बधाई देने के लिए राज्य स्तर पर ऑनलाइन आयोजित कार्यक्रम को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री ने मलेरकोटला में 500 करोड़ रुपए की लागत से मेडिकल कॉलेज, एक महिला कॉलेज, एक नया बस स्टैंड और एक महिला पुलिस थाना बनाने की भी घोषणा की।

मुस्लिम बहुल कस्बा मलेरकोटला अब तक संगरूर जिले का हिस्सा था। यह संगरूर जिला मुख्यालय से करीब 30 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है। नए जिले की घोषणा करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि मैं जानता हूँ कि यह लंबे समय से लंबित माँग रही है। उन्होंने कहा कि देश की आजादी के वक्त पंजाब में 13 जिले थे। सिंह ने कहा कि मलेरकोटला शहर, अमरगढ़ और अहमदगढ़ नए जिले की सीमा में आएँगे।

बाद में एक ट्वीट में मुख्यमंत्री ने कहा, “यह साझा करते हुए खुशी हो रही है कि ईद-उल-फितर के पाक मौके पर मेरी सरकार ने घोषणा की है कि मलेरकोटला राज्य का नवीनतम जिला होगा। 23वें जिले का विशाल ऐतिहासिक महत्व है। जिला प्रशासनिक परिसर के लिए उचित स्थान का तत्काल पता लगान का आदेश दिया है। मलेरकोटला को जिला का दर्जा देना कॉन्ग्रेस का चुनाव से पहले किया गया एक वादा था।”

बता दें कि 1966 में जब पंजाब का विभाजन हुआ था तब 13 जिले हुआ करते थे, जो अब बढ़ कर 23 हो गए हैं। मुख्यमंत्री ने बताया कि मेडिकल कॉलेज के लिए वक्फ बोर्ड ने 25 एकड़ जमीन दी है। मलेरकोटला में लड़कियों के कॉलेज के लिए 12 करोड़ और बस स्टैंड के लिए 10 रुपए आवंटित करने की घोषणा भी सीएम ने की।

वर्चुअल कार्यक्रम को संबोधित करते हुए सीएम ने कहा कि उनकी ईद के मौके पर मलेरकोटला में आने की बहुत इच्छा थी, लेकिन कोरोना संक्रमण के कारण वह आ नहीं सके। उन्होंने कहा कि मलेरकोटला पटियाला रियासत का हिस्सा रहा है और उनके बुज़ुर्गों के मालेरकोटला के नवाब के साथ बहुत अच्छे संबंध रहे हैं। 

उन्होंने मालेरकोटला के विकास के 6 करोड़ रुपए का अनुदान देने की भी घोषणा की। कहा कि बहुत जल्द मालेरकोटला में जिला उपायुक्त की तैनाती कर दी जाएगी। कार्यक्रम को पंजाब कॉन्ग्रेस के प्रधान सुनील जाखड़, कैबिनेट मंत्री बेगम रजिया सुलताना ने भी संबोधित किया।

1971 में भारतीय नौसेना, 2021 में इजरायली सेना: ट्रिक वही-नतीजे भी वैसे, हमास ने ‘Metro’ में खुद भेज दिए शिकार

इजरायल और फलस्तीन के संघर्ष लगातार तेज होता जा रहा है। इस बीच इजरायल ने एक ऐसी रणनीतिक युद्धकला का प्रदर्शन किया है, जिसने 1971 में भारत और पाकिस्तान के बीच हुए युद्ध की ताजा कर दी है। उस समय इस रणनीति से जिस तरह के नतीजे भारतीय नौसेना ने हासिल किए थे, अब उसी तरह के परिणाम इजरायल को भी मिले हैं।

द येरुशलम पोस्ट के अनुसार इजरायल ने इस रणनीति की सहायता से गाजा पट्टी में फलस्तीनी आतंकी संगठन हमास के ‘मेट्रो’ को निशाना बनाया। कई किलोमीटर में फैले इस टनल को तबाह कर उसे भारी नुकसान पहुँचाया है। हमास सुरंगों के इस नेटवर्क का उपयोग गाजा पट्टी में आवागमन के दौरान इजरायली वायुसेना के हमले से बचने और हथियारों को सुरक्षित रखने के लिए करता रहा है।

हाल ही में इजरायल डिफेंस फोर्स (IDF) ने कहा कि इजरायल की वायुसेना इजरायल की सुरक्षा के लिए प्रतिबद्ध रहते हुए हमास पर लगातार कार्रवाई कर रही है, लेकिन जमीनी कार्रवाई की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता। इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने भी गुरुवार को कहा कि हमास के खिलाफ इजरायल की कार्रवाई चलती रहेगी और आगे आने वाले समय यह और भी कड़ी होगी।

इसी क्रम में इजरायल डिफेंस फोर्स के ट्विटर हैन्डल से कहा गया, “IDF की वायु और थल सेना गाजा पट्टी पर हमला कर रही है।” IDF के इस ट्वीट के बाद वाशिंगटन पोस्ट और ABC समेत विश्व भर के मीडिया समूहों ने यह खबर चलाना प्रारंभ कर दिया कि इजरायल की जमीनी सेना गाजा पट्टी में घुस चुकी है और अब इस संघर्ष के और अधिक बढ़ने के आसार हैं।

अंतरराष्ट्रीय मीडिया में इजरायल की जमीनी सेना के द्वारा हमला करने की खबर तेजी से आने के बाद हमास ने अपने फर्स्ट लाइन डिफेंस फोर्स को गाजा पट्टी में बनी सुरंगों में भेज दिया, जहाँ इजरायल की जमीनी सेना से लड़ने के लिए हथियार सुरक्षित रखे गए थे। इन हथियारों में एंटी-टैंक मिसाइल और मोर्टार स्क्वाड भी शामिल थे।

यहाँ इजरायल की रणनीति काम कर गई। इजरायल की सेना गाजा पट्टी के बॉर्डर पर अवश्य थी, लेकिन उसने गाजा पट्टी की बॉर्डर को क्रॉस नहीं किया था। मीडिया की भ्रामक खबर के झाँसे में आकर हमास के आतंकी भूमिगत सुरंगों में जाने के बाद इजरायली वायु सेना के निशाने पर आ गए और कुछ ही मिनटों के अंदर इजरायल के विमानों ने सुरंगों को निशान बनाते हुए बड़ा हमला कर दिया।

द येरुशलम पोस्ट के अनुसार हमास की ‘मेट्रो’ कही जाने वाली ये सुरंगें 2014 में इजरायल और हमास के बीच हुए संघर्ष के बाद बनाई गई थीं। गाजा पट्टी में कई किलोमीटर तक फैली इन सुरंगों को बनाने का उद्देश्य था इजरायल के विमानों को चकमा देना और हथियारों को सुरक्षित रखना।

1971 के भारत-पाकिस्तान युद्ध के दौरान भी भारत द्वारा ऐसी ही एक रणनीति अपनाई गई थी। पाकिस्तान ने अपने सबमरीन ‘गाजी’ को बंगाल की खड़ी में तैनात किया था। उसका मकसद था भारतीय एयरक्राफ्ट कैरियर ‘विक्रांत’ को नष्ट करना। लेकिन भारतीय नौसेना ने आईएनएस राजपूत का इस्तेमाल कर पाकिस्तान को चकमा दे दिया। उसे यह एहसास कराया गया कि ‘विक्रांत’ विशाखापट्टनम में है।

विशाखापट्टनम में भारी मात्रा में राशन, माँस और ताजी सब्जियों के ऑर्डर भी दिए गए ताकि पाकिस्तानी जासूसों को लगे कि वहाँ कोई बड़ा भारतीय नौसेनिक बेड़ा मौजूद है। पाकिस्तान इस झाँसे में आ गया और उसका सबसे खतरनाक सबमरीन गाजी नष्ट हो गया।

तब मरीचझापी नरसंहार, अब जान बचाते हजारों बंगालियों का पलायन: सिर्फ वोटर बदले हैं, बंगाल की राजनीतिक वही है

राजनीति को सैद्धांतिक रूप से समझने वाले यह जानते हैं कि एक संस्था के तौर पर राज्य शासन तंत्र में सबसे मजबूत और शक्तिशाली होता है। इसीलिए लोकतन्त्र में यह सुनिश्चित किया जाता है कि किसी एक ही व्यक्ति या एक ही दल का वर्चस्व राज्य की इस शक्ति पर हमेशा के लिए न हो जाए। अगर ऐसा होता है तो निरंकुशता बढ़ती है। और अगर सत्ता में बैठा दल या व्यक्ति निरंकुश हो जाए तो समाज विकृत होने में और बिखरने में देर नहीं लगती।

पश्चिम बंगाल में यही हुआ है। सांप्रदायिक लामबंदी के दम पर सत्ता में आई टीएमसी और दंभ से भरी हुई मुख्यमंत्री ममता बनर्जी समाज की समरसता को बनाए रखने में न सिर्फ असफल हुई बल्कि उसे तार-तार करने में कोई कसर नहीं छोड़ी। आज जो बंगाल में हो रहा है, वो बंगाल में पहले वामपंथियों और फिर टीएमसी की शासन सत्ता में फैलाई गई वैमनस्यता और घृणा की पुरानी राजनीति की परिणति है।

ध्यातव्य हो कि गत कुछ वर्षों में पश्चिम बंगाल में शासन व्यवस्था पूर्ण रूप से विफल रही है। इसका जीता जागता उदाहरण है बंगाल में होती आ रही हिंसा जो कि पूर्ण रूप से राजनीति से प्रेरित ज्ञात होती है। खास कर ममता सरकार द्वारा सरकार के विरोध में आवाज उठाने वाले लोगों को जानबूझ कर निशाना बनाया जा रहा है, उनके घरों को तोड़ा जा रहा है, ऐसा करने से रोकने पर परिवार जनों को मारा जा रहा है तथा महिलाओं के साथ दुष्कर्म किया जा रहा है।

आश्चर्य की बात यह है कि इतना कुछ घटित होने के बावजूद मीडिया चैनल, पत्रकार तथा समाज के तथाकथित बुद्धिजीवी लोग मुक दर्शक बने हुए हैं। शायद उनके के लिए विध्वंसक गतिविधियाँ एवं हत्याएँ भी राज्य तथा सरकारें देख कर मायने रखती हैं।

बंगाल की वर्तमान परिदृश्य को देखकर वर्ष 1972 की घटनाएँ याद आती हैं, जब सत्ता में आने के बाद मुख्यमंत्री सिद्धार्थशंकर रे ने भी राजनितिक विरोधियों को सबक सिखाने में सरकारी तंत्र का इस्तेमाल किया था। उस समय की तत्कालीन सरकार द्वारा भी चुन-चुन कर सरकार विरोधी लोगों को मारा जाता था, वही झलक आज भी देखने को मिल रही है।

वर्ष 1979 में हुए मरीचझापी नरसंहार को भी नहीं भुला जा सकता है, जब एक तरफ 26 जनवरी 1979 को सम्पूर्ण देश धूम-धाम से गणतंत्र दिवस मना रहा था, वहीं दूसरी ओर लेफ्ट सरकार द्वारा सुनियोजित तरीके से मरीचझापी द्वीप को चारों तरफ से घेर कर सारी आवश्यक सामग्री के आयात पर रोक लगा कर एवं पीने वाले पानी के मुख्य स्रोत में जहर मिला कर लोगों को भूखे प्यासे मरने पर मजबूर कर दिया गया था।

इन सरकारों में बस फर्क इतना है कि तब कॉन्ग्रेस बाद में कम्युनिस्ट पार्टी की सरकार थी और अब लेफ्ट सरकार को सत्ता से बेदखल कर सरकार में आई ममता बनर्जी की तृणमूल कॉन्ग्रेस की सरकार है। वर्तमान की ममता सरकार बंगाल में हो रही खुलेआम गुंडई एवं नरसंहार पर लगाम लगाने में पूरी तरह से विफल है।

तृणमूल कॉन्ग्रेस जबसे पुनः सत्ता में आई है, तबसे पश्चिम बंगाल में हिंसा काफी बढ़ गई। आज के समय में राष्ट्रवादी सोच रखने वाले लोगों को बंगाल से असम की ओर पलायन होने पर मजबूर होना पड़ रहा है। यही कारण है कि पिछले कुछ दिनों में हजारों परिवार पलायन कर गए हैं। हालाँकि पलायन वाली स्थिति समय समय पर भारत में उत्पन्न होती रही है। चाहे वो भारत पाकिस्तान विभाजन के समय हो या पूर्वी बंगाल विभाजन का समय या फिर कश्मीरी पंडितों का कश्मीर से पलायन की घटना हो और अब पश्चिम बंगाल में हो रहे पलायन।

अभी की स्थिति को देख कर पूर्व में घटित घटनाओं का अंदाज लगाया जा सकता है। समझा जा सकता है कि कैसे पहले की घटनाओं को दबा दिया जाता होगा, जब वर्तमान में प्रेस की स्वतंत्रता एवं मीडिया में इतनी पारदर्शिता (सोशल मीडिया के कारण) होने के बावजूद खबरें दबा दी जाती हैं। ऐसे में केंद्र सरकार को दखल देते हुए लोगों को पलायन से रोकने के लिए हस्तक्षेप करना चाहिए।

एक ओर उपरोक्त घटनाएँ घटित हो रही हैं, वहीं दूसरी ओर उसी पश्चिम बंगाल में हिंदुओं को निशान बनाया जा रहा है। हिंदुओं के पवित्र मंदिरों को ध्वस्त किया जा रहा है, मूर्तियाँ तोड़ी जा रही हैं। जबकि दशहरा के दौरान एक समुदाय विशेष को खुश करने के लिए बंगाल की प्रसिद्ध काली/दुर्गा पूजा पर पाबंदी लगा दी जाती है। और आम जनता चुपचाप तमाशा देखने को मजबूर हो जाती है। यदि कोई इसके खिलाफ आवाज उठाने की कोशिश करता भी है तो उसे चुप करने के लिए उस पर हमला करवा दिया जाता है या उसे जान से मरवा दिया जाता है ताकि अन्य लोग ऐसा करने से पहले कई बार सोचें।

बंगाल की जनता वामपंथ की रक्तरंजित खेल से ऊब कर एक दशक पहले विकल्प के रूप में ममता बनर्जी को अपने मुख्यमंत्री के रूप में चुना था। शायद उस समय लोगों को इस बात का अंदेशा नहीं था कि जिसे वो विकल्प के रूप में चुन रहे हैं, वो भी वैसे ही निकलेगी बल्कि उससे भी कई कदम आगे, जैसा वो लोग पूर्व में भुगतते आ रहे थे।

पश्चिम बंगाल में मौजूदा ममता सरकार छात्रों पर भी निरंकुश शासक वाली रवैया अपनाती रही है। आवाज उठाने वाले छात्र संगठनों के कार्यलयों को ध्वंस करना, उनके कार्यकर्ताओं को मारना इनके लिए आम बात है। जब हम बात करते है लोकतंत्र की तो बंगाल को देख कर लगता है कि लोकतान्त्रिक शक्ति का दुरुपयोग करके पुलिसिया कारवाई करके लोगों की आवाज दबाने के अलावा कोई दूसरा काम नहीं करती है।

एक तरफ सम्पूर्ण देश में लोग कोरोना महामारी की वजह से अपनी जानें गवाँ रहे हैं, वही दूसरी ओर बंगाल में लोग कोरोना के साथ-साथ तृणमूल कॉन्ग्रेस के गुंडों के हाथों अपनी जानें गवाँ रहे हैं। मुख्य विपक्षी दल भाजपा ने इतनी हत्याओं के बाद अब बंगाल में धरण देने की बात कही है, यह हैरानी की बात है।

हैरानी की बात तो खैर यह भी है कि जो राजनीतिक दल बंगाल चुनाव 2021 में अपनी खाता तक नहीं खोल पाए, वो आत्ममंथन करने की जगह ममता बनर्जी की पुनः सत्ता में वापसी की जश्न मना रहे। खैर मुझे अभी भी आशा है कि लोकतंत्र की चतुर्थ स्तम्भ कही जाने वाली मीडिया में इस मुद्दे को भी उतना ही प्रमुखता से दिखाया जाएगा जितना अन्य राज्यों से संबंधित खबरें दिखाई जाती हैं। अन्यथा यह देश के लिए बहुत ही दुर्भाग्य का विषय होगा कि जिस विषय को ज्यादा आकर्षण मिलना चाहिए, उसे दिखाने की जगह दबा दिया जा रहा है।

लेखक: प्रियांक देव

अस्पतालों में कम पड़ने लगे बेड तो कर्नाटक के गृह मंत्री ने अपने घर को बना दिया कोविड केयर सेंटर

कर्नाटक में कोरोना वायरस की दूसरी लहर के भयावह रूप लेने के कारण वहाँ के अस्पतालों में बेड की कमी होने लगी है। ऐसे में सराहनीय कदम उठाते हुए राज्य के गृह मंत्री बसवराज बोम्मई ने हावेरी जिले के शिगगाँव स्थित अपने घर को ही 50 बेड के कोविड केयर हॉस्पिटल में बदल दिया है।

रिपोर्ट्स के मुताबिक, बीजेपी के वरिष्ठ नेता बसवराज बोम्मई, जो कि गृह मंत्री होने के साथ ही कानून और विधायी मामलों के मंत्री भी हैं, उन्होंने शहर के अस्पतालों में बेड की कमी को दूर करने के लिए अपने घर को मिनी अस्पताल में बदल दिया है। गुरुवार (13 मई 2021) को बोम्मई ने शिगगाँव में एक पूरी तरह से विकसित कोविड-केयर सेंटर स्थापित करने के लिए अपना घर अधिकारियों को सौंप दिया।

बता दें कि शिगगाँव उत्तरी कर्नाटक का एक छोटा सा शहर है और बसवराज बोम्मई राज्य विधानसभा में शिगगाँव निर्वाचन क्षेत्र का प्रतिनिधित्व करते हैं। गृह मंत्री के निवास स्थान पर जरूरी चिकित्सा सुविधाओं के साथ 50 बेड स्थापित किए गए हैं। इस कोविड सेंटर के सभी बेड पर ऑक्सीजन की सुविधा मौजूद है। अगले कुछ दिनों में यहाँ और ऑक्सीजन कंसेन्ट्रेटर लाए जाएँगे। कोरोना मरीजों के इलाज के लिए प्रत्येक बेड्स में ऑक्सीजन फैसिलिटी को इंस्टाल किया जाएगा।

गुरुवार (13 मई 2021) को बोम्मई ने भी कोविड सेंटर का दौरा कर सुविधाओं का निरीक्षण किया। इसके अलावा कोरोना मरीजों के इलाज के लिए मंत्री ने 25 ऑक्सीजन कंसेन्ट्रेटर शिगगाँव पब्लिक हॉस्पिटल को भी दिया। वरिष्ठ बीजेपी नेता ने कहा, “कोविड मौतों की संख्या बढ़ रही है। इसलिए अतिरिक्त बेड की व्यवस्था की गई है। शिगगाँव तालुक अस्पताल में एक और 46 बेड के अस्पताल की व्यवस्था की जाएगी।”

गौरतलब है कि गुरुवार को कर्नाटक में कोरोना के 35,297 नए मामले दर्ज किए गए, जिनमें से 15,191 अकेले बेंगलुरु शहर से हैं। बेंगलुरु में 161 लोगों की मौत भी हुई, जो राज्य में सबसे ज्यादा है। कोविड -19 से 34,000 से अधिक लोग स्वस्थ हुए हैं, जबकि गुरुवार को 344 मरीजों की मौत भी हुई।

खालिस्तान समर्थक ‘खालसा एड’ को हैरी पॉटर की लेखिका जेके रोलिंग ने दिया मोटा दान

हैरी पॉटर की रचना करने वाली ब्रिटिश लेखिका जेके रोलिंग के चैरिटेबल संगठन ‘द वॉलन्ट चैरिटेबल ट्रस्ट’ ने खालिस्तानी समर्थक खालसा एड को भारत में Covid-19 राहत कार्यों के नाम पर अच्छा-खासा दान दिया है। खालसा एड ने ट्विटर पर इसकी सूचना देते हुए लिखा कि जेके रोलिंग के चैरिटेबल ट्रस्ट से मिले ‘सिक्स फिगर डोनेशन’ के लिए संगठन आभारी है। इस पर प्रतिक्रिया देते हुए रोलिंग ने उन लोगों को धन्यवाद दिया जिन्होंने उनकी बच्चों की किताब The Ickabog खरीदा है।

पिछले कई दिनों से खालसा एड भारत में कोरोना वायरस संक्रमण से लड़ने में सहायता का दावा कर रहा है और इसके लिए लोगों से डोनेशन की अपील भी कर रहा है।

हमने विस्तार में रिपोर्ट दी थी कि खालसा एड पर खालिस्तानी संगठन बब्बर खालसा इंटरनेशनल (BKI) से जुड़े होने का आरोप है। दिसंबर 2012 में NIA ने इस संबंध में मामला भी दर्ज किया था। खालसा एड पर आरोप है कि वह BKI से जुड़े कुछ संगठनों में से एक है और BKI के भारतीय सदस्यों को आतंकी गतिविधियों के लिए फंडिंग करता है। बब्बर खालसा हिंसा के द्वारा भारत में एक स्वतंत्र सिख राज्य स्थापित करने का उद्देश्य रखता है और भारत में कई आतंकी हमलों के लिए भी जिम्मेदार है। ट्रम्प प्रशासन ने भी BKI को अमेरिका के हितों के लिए खतरा बताया था।   

इसके अलावा खालसा एड ने स्वयं यह स्वीकार किया था कि संगठन संघर्ष प्रभावित सीरिया में राहत कार्यों के नाम पर दान लेने के बाद भी सीरिया गया ही नहीं था। संगठन केरल और बांग्लादेश में भी राहत कार्यों का दावा करता है, किन्तु संगठन की आर्थिक जानकारियों में कहीं भी इन स्थानों में संगठन के द्वारा किए गए किसी भी राहत कार्य का कोई उल्लेख नहीं है।

एक व्यक्ति ने खालसा एड के प्रमुख रवि सिंह पर राहत कार्यों के नाम पर लोगों से दान लेने का आरोप लगाया है। उस व्यक्ति के अनुसार गरीबों की सहायता और कई स्थानों पर पीड़ितों के नाम पर खालसा एड और उसके सीईओ लोगों से सहायता लेते हैं और उसका थोड़ा सा हिस्सा ही राहत कार्यों में खर्च करते हैं। दान में प्राप्त राशि का एक बड़ा हिस्सा निजी और दूसरे अन्य उद्देश्यों के लिए खर्च किया जाता है। आरोप लगाने वाले व्यक्ति का कहना है कि खालसा एड के प्रोजेक्ट्स में कई धांधलियाँ हैं और उनकी कार्यप्रणाली में कोई भी पारदर्शिता नहीं है।  

20 साल से जर्जर था अंग्रेजों के जमाने का अस्पताल: RSS स्वयंसेवकों ने 200 बेड वाले COVID सेंटर में बदला

जब भी देश को संकट का सामना करना पड़ा है, राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) ने हमेशा मदद के लिए हाथ बढ़ाया है। इंडिया टुडे में प्रकाशित एक रिपोर्ट में कहा गया है कि इस बार संघ ने कर्नाटक में ब्रिटिश युग के एक बड़े अस्पताल को पुनर्जीवित करने में मदद के लिए कदम आगे बढ़ाया है। राज्य को कोरोना वायरस प्रकोप के नए सिरे से सामना करना पड़ रहा है।

भारत गोल्ड माइन्स लिमिटेड अस्पताल (BGML अस्पताल) दो दशकों से अधिक समय से जर्जर अवस्था में पड़ा था। यह अस्पताल 1880 में डॉ. टीजे ओ’डोनेल और उनके भाई जेडी ओ’डोनेल द्वारा स्थापित किया गया था और इसमें 800 बिस्तरों की क्षमता है। 20वीं सदी की शुरुआत में यह एशिया के सबसे बड़े अस्पतालों में से एक था।

कर्नाटक के कोलार जिले में COVID-19 के लगातार बढ़ते केस को देख कर सांसद एस मुनीस्वामी ने महसूस किया कि बढ़ते मामलों को नियंत्रित करने के लिए एक नया अस्पताल स्थापित करने में अधिक समय लगेगा। इसके बजाय उन्होंने ब्रिटिश-युग के अस्पताल को फिर से चालू करने और संचालित करने का फैसला किया, जो 20 से अधिक वर्षों से निष्क्रिय पड़ा हुआ था। उन्होंने अस्पताल को जल्दी से ठीक करने और इसे एक COVID केयर सेंटर में बदलने के लिए स्वयंसेवकों की सेवाएँ ली।

मोल्डरिंग अस्पताल को COVID-19 सेंटर में बदलने की अपनी योजना पर चर्चा करते हुए, मुनिस्वामी ने कहा, “संघ परिवार और अन्य संगठनों के साथ विचार-विमर्श करने के बाद, हमने 200+ बेड का कोविड केयर सेंटर स्थापित करने का निर्णय लिया। इसे तैयार करने के लिए भाजपा और आरएसएस के लगभग 250 स्वयंसेवकों ने कड़ी मेहनत की। अब चारपाई और बिजली का काम हो गया है और अस्पताल 2-3 दिनों के भीतर चालू हो जाना चाहिए।”

मुनिस्वामी ने केंद्रीय कोयला और खान मंत्री प्रह्लाद जोशी को पत्र लिखकर जिला प्रशासन को इस बड़े अस्पताल को कोविड केयर सेंटर के रूप में उपयोग करने की अनुमति माँगी थी। अधिकारियों के अनुसार, एक समय यह एशिया के सबसे बड़े अस्पताल में से एक था। बिजली और एक्स-रे यूनिट पाने वाले पहले पाने वालों में से एक था।

स्वयंसेवकों ने ऐसे बदली सूरत

लगभग 20 वर्षों से निष्क्रिय पड़े अस्पताल को COVID-19 सेंटर में बदलने के लिए आरएसएस और भाजपा के स्वयंसेवकों ने अस्पताल की सफाई का जिम्मा अपने ऊपर ले लिया। केजीएफ में आरएसएस कार्यकर्ता प्रवीण एस के अनुसार, अस्पताल से 400 ट्रैक्टर से अधिक कचरा हटाया गया।

प्रवीण ने यह भी कहा कि आरएसएस के स्वयंसेवकों के सामने सबसे बड़ी चुनौती अस्पताल की सफाई करना था। उन्होंने कहा, “जब हम पहली बार यहाँ आए थे, तब अस्पताल जीर्ण-शीर्ण अवस्था में था। अस्पताल के चारों ओर फैले हुए चमगादड़ और 2-3 इंच मिट्टी के टीले थे। यह जालों से भरा हुआ था। जब हमने इस कार्य को अपने हाथ में लिया तो कई लोगों को संदेह था कि क्या हम इस कार्य को पूरा कर पाएँगे। हालाँकि आरएसएस, भाजपा, विहिप, सेवा भारती, जन जागरण समिति के स्वयंसेवक अस्पताल की सफाई के अपने संकल्प में अडिग थे। हमने यह काम 27 अप्रैल को शुरू किया था और सात मई तक पाँच एकड़ के इस परिसर की पूरी सफाई का काम पूरा कर लिया गया।”

वर्तमान में, एक अस्पताल के रूप में सुविधा को पूरी तरह कार्यात्मक बनाने के लिए काम चल रहा है। अस्पताल में आईसीयू सुविधाओं के साथ चार कमरे होंगे। बिजली और पाइपलाइन का काम जोरों पर चल रहा है। अधिकारियों ने 140 साल पुरानी लोहे की चारपाई का उपयोग करने का भी फैसला किया है।

प्रवीण ने इंडिया टुडे के साथ एक इंटरव्यू में बताया, “चारपाई लगभग 140 साल पुरानी है और इसका वजन 100 किलो से अधिक है। वे पर्याप्त रूप से मजबूत हैं और उसे उठाने के लिए कम से कम 3-4 लोगों की आवश्यकता होती है। हालाँकि फोर्जिंग सभी पुरानी तकनीकें हैं, फिर भी आप एक और सदी या उससे अधिक के लिए चारपाई का उपयोग कर सकते हैं।”

₹995 में Sputnik V, पहली डोज रेड्डीज लैब वाले दीपक सपरा को: जानिए, भारत में कोरोना के कौन से 8 टीके

कोरोना की रूसी वैक्सीन स्पूतनिक (Sputnik V) की कीमत पर सस्पेंस खत्म हो गया है। डॉक्टर रेड्डी लेबोरेटरीज ने इसकी कीमत का ऐलान कर दिया है। भारत में रूसी वैक्सीन को बनाने वाली कंपनी के मुताबिक स्पूतनिक V की कीमत 948 रुपए + 5% जीएसटी होगी। इसका मतलब है कि 948 रुपए के अलावा इस पर 5% जीएसटी यानी 47.40 रुपए जीएसटी चार्ज किया जाएगा। इस तरह एक डोज 995.40 रुपए की पड़ेगी। बयान में कहा गया है कि जब स्पूतनिक-V वैक्सीन का निर्माण भारत में शुरू होगा, तब उसकी कीमत कम होगी।

जुलाई से देश में स्पूतनिक-V का उत्पादन

स्पूतनिक-V वैक्सीन को लेकर सरकार का कहना है कि इस महीने के अंत तक 30 लाख और स्पूतनिक-V टीके की खुराक भारत पहुँचेगी। साथ ही सरकार की देश में इस टीके का उत्पादन शुरू करने के लिए रेड्डी लेबोरेटरी के अलावा पाँच अन्य कंपनियों के साथ बातचीत चल रही है। इनमें हेटेरो बॉयोफॉर्मा, विरचोव बॉयोटैक, स्टेलिस बॉयोफॉर्मा, ग्लैंड बॉयोफॉर्मा तथा पैनाशिया बॉयोटैक शामिल हैं। सरकार की कोशिश है कि जुलाई से देश में निर्मित स्पूतनिक वी वैक्सीन मिलनी शुरू हो जाएगी। Sputnik V की पहली डोज दीपक सपरा को लगी है। वे रेड्डीज लैब में कस्‍टम फार्मा सर्विसेज के ग्‍लोबल हेड हैं। उन्‍हें हैदराबाद में वैक्‍सीन की पहली डोज दी गई।

देश में भले ही अभी दो वैक्सीन से टीकारण अभियान चल रहा है, मगर सीरम की कोविशील्ड और भारत बायोटेक की कोवैक्सीन के अलावे आने वाले कुछ समय में और भी वैक्सीन उपलब्ध हो जाएँगी, जिस पर फिलहाल काम चल रहा है। सरकार ने 8 वैक्सीन की संभावित लिस्ट पेश की है। हम आपको बताते हैं कि भारत को किन 8 वैक्सीन से उम्मीद है और वे अभी किस स्टेज में हैं और कहाँ बन रही हैं।

1. कोवैक्सीन: इस वैक्सीन को भारत बॉयोटेक ने नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ वायरोलॉजी और इंडियन काउंसिल ऑफ मेडिकल रिसर्च (ICMR) के साथ मिलकर तैयार किया है। फॉर्मेलीन जैसे केमिकल्स की मदद से वैक्सीन इम्यून सिस्टम को कोरोना वायरस के खिलाफ एंटीबॉडीज बनाने में मदद करती है। इसमें निष्क्रिय वायरस को बहुत कम मात्रा में एल्युमीनियम आधारित कंपाउंड के साथ मिलाया गया है, जिसे एड्जुवेंट कहते हैं। यह इम्यून सिस्टम को वैक्सीन के साथ प्रतिक्रिया करने के लिए प्रेरित करता है।

2. बायोलॉजिकल ई: हैदराबाद की बायोलॉजिकल ई लिमिटेड को इसकी प्रोटीन सबयूनिट BECOV2A वैक्सीन के लिए आपातकालीन इस्तेमाल की अनुमति मिल गई है। इसमें छोटे शुद्ध टुकड़े होते हैं, जिनका चुनाव असरदार और मजबूत इम्यून रिस्पॉन्स तैयार करने के लिए खास तौर पर किया जाता है। ऐसा इसलिए, क्योंकि ये फ्रेगमेंट्स कोविड-19 नहीं फैला सकते। सबयूनिट वैक्सीन को सुरक्षित माना जाता है। साथ ही इस तरह की वैक्सीन को बनाना सस्ता और आसान होता है। साथ ही ये पूरे वायरस या बैक्टीरिया वाली वैक्सीन की तुलना में ज्यादा स्थिर होती हैं।

3. कोविशील्ड: वायरल वेक्टर आधारित इस वैक्सीन में एंटीजन नहीं होते। ये इनका उत्पादन करने के लिए शरीर के सेल्स का ही इस्तेमाल करती है। इसमें संशोधित वायरस यानी वेक्टर होता है। अगर वायरस की सतह पर स्पाइक प्रोटीन पाया जाता है, तो यह एंटीजन के लिए जेनेटिक कोड लेकर इंसानी सेल में जाता है। एडेनोवायरस समेत कई वायरस को वेक्टर के तौर पर विकसित किया गया है।

4. स्पूतनिक V: नॉन-रेप्लिकेटिंग वायरल वेक्टर वैक्सीन में दो इंसानी एडेनोवायरस- Ad5 और Ad6 का इस्तेमाल किया गया है। एडेनोवायरस कोशिकाओं से टकराते हैं और उनकी सतह पर मौजूद प्रोटीन पर पकड़ बना लेते हैं। एक बार शरीर में इंजेक्ट होने के बाद, ये वैक्सीन वायरस हमारी कोशिकाओं को संक्रमित करना शुरू कर देते हैं। इसके बाद इंसानी सेल एंटीजन ऐसे तैयार करना शुरू कर देता है, जैसे वह उसका अपना ही प्रोटीन है।

5. जायडस कैडिला: अहमदाबाद की कंपनी अपनी प्लासमिड डीएनए वैक्सीन ZyCoV-D के साथ तैयार है। न्यू्क्लिक वैक्सीन किसी बीमारी के खिलाफ इम्यून प्रतिक्रिया को प्रेरित करने के लिए वायरस या बैक्टीरियम के जेनेटिक मटेरियल का इस्तेमाल करती हैं। वैक्सीन का जेनेटिक मटेरियल पैथोजन से खास प्रोटीन बनाने के लिए आदेश जारी करता है। बाद में इस प्रोटीन को इम्यून सिस्टम पहचान लेता है और वायरस के खिलाफ प्रतिक्रिया के लिए तैयार करता है।

6. नोवावैक्स: अमेरिका की कंपनी नोवावैक्स ने भारतीय वैक्सीन निर्माता सीरम इंस्टीट्यूट के साथ साझेदारी की है। यह बायोलॉजिकल ई कैंडिडेट की तरह ही प्रोटीन सबयूनिट कोविड-19 वैक्सीन NVX-CoV2373 है।

7. जीनोवा: पुणे की कंपनी जीनोवा बायोफार्मास्यूटिकल्स की mRNA वैक्सीन को मँजूरी मिल गई है। इस वैक्सीन में mRNA मैसेंजर का इस्तेमाल हुआ है, जो स्पाइक प्रोटीन बनाने के लिए जेनेटिक सीक्वेंस लेकर जाता है। खास बात है कि शरीर के प्राकृतिक एनजाइम्स mRNA मॉलेक्यूल को तोड़ देंगे। इसके चलते इसे लिपिड नैनोपार्टिकल्स से बने बबल में रखा गया है। यह सेल की झिल्लियों से मिलता-जुलता है और RNA को मेजबान सेल तक पहुँचाता है। यहाँ mRNA ऐसे काम करता है, जैसे वो सेल का ही हिस्सा है। इसके बाद सेल इसके प्रोटीन का इस्तेमाल कर संदेश को पढ़ता है और स्पाइक प्रोटीन बनाता है। बाद में इसे होस्ट सेल से निकाला जाता है और इम्यून सिस्टम इसकी पहचान करता है।

8. इंट्रानेजल: भारत बायोटेक ने एडेनोवायरस वेक्टर्ड इंट्रानेजल वैक्सीन का सुझाव दिया है। सरकार ने मौजूदा वैक्सीन कार्यक्रम के लिए ऐसी 10 करोड़ वैक्सीन डोज का ऑर्डर दिया है।

केंद्र ने जानकारी दी है कि वह फाइजर (Pfizer), मॉडर्ना (Moderna) और जॉनसन एंड जॉनसन (Johnson & Johnson) जैसे वैश्विक निर्माताओं से वैक्सीन सप्लाई के लिए चर्चा कर रही है। भारत की कोविड-19 टास्क फोर्स के प्रमुख डॉक्टर वीके पॉल ने कहा, “हमने निर्माताओं के साथ संपर्क किया है और अगस्त-दिसंबर के बीच वैक्सीन उपलब्धता को लेकर जानकारी माँगी है।”

उन्होंने कहा, “इस दौरान भारत के लिए 216 करोड़ डोज उपलब्ध हो जाएँगे। हम जैसे आगे बढ़ेंगे सभी के लिए वैक्सीन उपलब्ध हो जाएगी।” उन्होंने कहा कि सरकार ने ‘औपचारिक’ रूप से फाइजर, मॉडर्ना और जे एंड जे से संपर्क साधा है। साथ ही भारत ने इनकी अलग-अलग तरीकों से सहयोग करने की भी बात कही है। तीनों फार्मा कंपनियों ने कहा है कि वे साल 2021 की तीसरी तिमाही में ही बातचीत कर सकेंगे। पॉल ने कहा है कि भारत को उम्मीद है कि तीनों निर्माता घरेलू निर्माताओं तक टेक्नोलॉजी ट्रांसफर करेंगे, ताकि टीके की उपलब्धता को बढ़ाया जा सके।

3500 गाँव-40000 हिंदू पीड़ित, तालाबों में डाले जहर, अब हो रही जबरन वसूली: बंगाल हिंसा पर VHP का चौंकाने वाला दावा

पश्चिम बंगाल में हिंसा को लेकर विश्व हिंदू परिषद (VHP) ने चौंकाने वाले दावे किए हैं। गुरुवार (14 मई 2021) को प्रेस को जारी बयान में संगठन ने कहा है कि इस हिंसा से बंगाल के 3500 से ज्यादा गाँव प्रभावित हुए हैं। 40 हजार से अधिक हिंदू पीड़ित हैं। इनमें बड़ी संख्या अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति (SC/ST) के लोगों की है।

वीएचपी के केंद्रीय महामंत्री मिलिंद परांडे ने न्यायपालिका और हिंदू समाज से इसका संज्ञान लेने का आह्वान किया है। प्रेस रिलीज में उन्होंने दावा किया है कि हिंसा के दौरान बंगाल में कई जगह महिलाओं पर बर्बर अत्याचार हुआ। खेतों, दुकानों और घरों को नष्ट कर दिया गया। लूट और मारपीट नहीं करने के एवज में उनसे जबरन पैसा वसूला जा रहा। मछली व्यवसाइयों के तालाबों में जहर डाल दिया गया। संगठन ने दावा किया है कि इन सभी अत्याचारों में मुख्य रूप से कट्टरपंथी इस्लामिक जिहादियों के शामिल होने की बात सामने आई है।

परांडे ने कहा है कि कई जगहों पर हिंदुओं से उनके आधार, वोटर और राशन कार्ड समेत कई महत्वपूर्ण दस्तावेज छीन लिए गए। पुलिस पर मूकदर्शक बने रहने का आरोप लगाते हुए इनके नुकसान की भरपाई तथा पुनर्वास की समुचित व्यवस्था करने की माँग की है। साथ ही हिंसा के पीड़ितों पर किए गए झूठे मुकदमे निरस्त करने और छीने गए दस्तावेज दोबारा उपलब्ध करने की माँग रखी है। पीड़ितों की मदद के लिए हिंदू समाज से भी आगे आने की अपील की है।

विहिप द्वारा बंगाल हिंसा पर जारी बयान

इससे पहले VHP ने बंगाल हिंसा को लेकर राष्ट्रपति को पत्र लिखा था। इसमें टीएमसी गुंडों की हिंसा पर रोक के लिए राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद से तत्काल हस्तक्षेप की माँग की गई थी।

विहिप के केंद्रीय कार्याध्यक्ष आलोक कुमार ने दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की माँग करते हुए पत्र में लिखा था, “पश्चिम बंगाल में चुनाव परिणाम आने के बाद से सत्तारूढ़ दल के कार्यकर्ताओं एवं जिहादियों ने जिस प्रकार हिंसा का तांडव चला रखा है, उससे पूरा देश चिंतित है।पश्चिमी बंगाल के न्यायप्रिय नागरिकों को दंगाइयों के हाथों में सौंप दिया गया है। यह सब मुस्लिम लीग के ‘डायरेक्ट एक्शन’ की याद दिलाता है।”

बंगाल में दो मई को चुनावी नतीजों में टीएमसी की जीत सुनिश्चित होने के बाद हिंसा के मामले सामने आए थे। विपक्षी दलों खासकर बीजेपी के कार्यकर्ताओं, उनके घरों और दफ्तरों को निशाना बनाया गया था। इसके बाद विहिप ने राज्य सरकार से तत्काल कार्रवाई की माँग की थी।

‘मस्जिद में धुआँ भर गया, शव पड़े थे’: काबुल में धमाका, इमाम समेत 12 नमाजी की मौत

अफगानिस्तान के उत्तरी काबुल में मस्जिद के पास जुमे की नमाज के दौरान बम विस्फोट हुआ। पुलिस ने बताया कि इस धमाके में 12 नमाजी मारे गए। मरने वालों में मस्जिद के इमाम मुफ्ती नैमन भी शामिल हैं। अभी तक 15 लोगों के घायल होने की बात कही जा रही है।

रिपोर्ट्स के मुताबिक प्रवक्ता फिरदौस फरामार्ज़ ने बताया कि मस्जिद में नमाज शुरू होने के बाद यह विस्फोट हुआ। अभी हमले की जिम्मेदारी किसी ने नहीं ली है। लेकिन पुलिस ने शुरुआती जाँच में पाया है कि शायद इमाम को निशाना बनाने के लिए यह हमला हुआ था।

बता दें कि कुछ दिन पहले ही तालिबान और अफगान सरकार ने तीन दिन के युद्ध विराम का ऐलान किया था। लेकिन आज ईद वाले दिन और युद्ध विराम की घोषणा के दूसरे दिन यह धमाका हो गया।

मुहिबुल्लाह साहेबजादा नाम के एक नमाजी ने बताया कि जैसे ही उन्होंने मस्जिद में कदम रखा वैसे ही ये धमाका हुआ। वह बच्चों समेत कई लोगों के चिल्लाने की आवाज सुनकर सन्न हो गए। थोड़ी देर में मस्जिद में धुआँ भर गया। जब माहौल शांत हुआ तो कई शव मस्जिद में पड़े थे। इनमें एक बच्चा भी था।

1 हफ्ते पहले लड़कियों के स्कूल के बाहर हुआ था धमाका

अभी तक होने वाले ज्यादातर हमलों की जिम्मेदारी स्थानीय IS संगठन लेता रहा, बावजूद इसके तालिबान और सरकार एक-दूसरे पर इल्जाम लगाते हैं। हाल में एक ऐसा हमला पिछले हफ्ते हुआ था। उस समय 90 से ज्यादा लोग मारे गए थे। इनमें ज्यादातर स्कूली लड़कियाँ थीं। तालिबान ने इस हमले में अपनी किसी प्रकार की संलिप्ता से इनकार करके हमले की निंदा की थी।

रिपोर्ट्स के मुताबिक अफगानिस्तान की राजधानी काबुल के पश्चिमी इलाके में 8 मई शाम को एक के बाद एक तीन बम धमाके हुए। ब्लास्ट में स्कूल से निकल रही लड़कियों को मिलाकर 90 से ज्यादा जान गई थी। घटना के वक्त स्कूल की छुट्‌टी हुई थी। स्कूल के एक टीचर ने दावा किया कि पहले एक कार में धमाका हुआ। फिर दो और धमाके हुए।