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1600 रॉकेट-600 टारगेट: हमास का युद्ध विराम प्रस्ताव ठुकरा बोला इजरायल- अब तक जो न किया वो करेंगे

फलस्तीनी आतंकी संगठन हमास के युद्ध विराम की अपील को इजरायली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने ठुकरा दिया है। इजरायल की सरकार ने कहा है कि आने वाले 6 महीने या साल भर में वे कुछ ऐसा करेंगे जो उन्होंने अब तक नहीं किया। हमास के वरिष्ठ नेता मौसा अबू मरजूक ने गुट के 9 कमांडरों के मरने के बाद रूसी विदेश मंत्री (मध्य पूर्व के मुद्दों को देखने वाले) मिखाइल बोगदानोव से फोन पर युद्ध विराम का प्रस्ताव रखा था।

टाइम्स ऑफ इजरायल की एक रिपोर्ट के मुताबिक अबू मरजूक इससे पहले दूसरी टोन में बात कर रहा था। वह हमास का वरिष्ठ नेता है। उसने एक हालिया साक्षात्कार में कहा था, “यूरोपीय लोगों ने हमसे संपर्क किया और कहा कि हम शॉर्ट रेंज की मिसाइलों को दागना बंद कर दें, वरना वे गाजा के पुनर्निर्माण में भाग नहीं लेंगे। मैंने उनसे कहा कि हम अपनी छोटी दूरी की मिसाइलों को रोकेंगे और इसकी जगह लंबी दूरी की मिसाइलों का इस्तेमाल करेंगे।”

मरजूक के प्रस्ताव के बाद इजरायली सेना ने साफ किया है कि इस बार वे युद्ध विराम नहीं चाहते। इजरायली सरकार ने भी सीजफायर से साफ मना करते हुए कहा कि अभी ये संघर्ष खत्म नहीं होगा। एक लोकल समाचार साइट से एक कैबिनेट मंत्री ने कहा, “हमारे हर निशाने पर हमला बोलने के बाद यदि उन लोगों ने सरेंडर नहीं किया तो हम ग्राउंड ऑपरेशन लॉन्च करेंगे।”

एक रिपोर्ट में इजरायली सेना के खुफिया विभाग से मिले संकेतों के आधार पर बताया गया है कि संघर्ष शुरू ​होने के बाद से इजरायल पर 1600 से ज्यादा रॉकेट दागे गए हैं। जवाब में गाजा में करीब 600 ठिकानों को इजरायली सेना अब तक निशाना बना चुकी है। बताया जाता है इजरायल डिफेंस फोर्स चीफ ऑफ स्टाफ लेफ्टिनेंट जनरल अवीव कोहावी के पास ग्राउंड अटैक के लिए ड्राफ्ट तैयार कर भेजा गया है। जनरल से मँजूरी मिलने पर इसे नेतन्याहू और उनकी कैबिनेट के पास भेजा जाएगा। 

एक कैबिनेट मंत्री ने बताया है कि ये सब कुछ दिनों में शांत नहीं होगा। इजरायल इसे नहीं रोकेगा और न ही उसका ऐसा करने में दिलचस्पी है। उनके मुताबिक ये सब सही हो रहा है और तब तक चलता रहेगा जब तक फलस्तीन मान नहीं जाता कि कि हमला करना उसकी गलती थी। बिलकुल वैसे, जिस तरह हिजबुल्ला नेता हसन नसरल्लाह ने 2006 में द्वितीय लेबनान युद्ध के बाद किया था। 

मालूम हो कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडन और इंगलैंड के प्रधानमंत्री बोरिस जॉनसॉन लगातार दोनों पक्षों से शांत होने की अपील कर रहे हैं। वहीं तुर्की के राष्ट्रपति रेसेप तैयप एर्डोगन लगातार मुस्लिम नेताओं से बात करके इजरायल को सबक सिखाने की अपील कर रहे हैं।

इस बीच बुधवार को हुए संघर्ष में इजरायल में एक 5 साल के मासूम ने अपनी जान गवा दी। वहीं गाजा में ईद से पहले 14 मंजिला इमारत नष्ट कर दी गई। IDF ने बताया में कि उन्होंने हमास के नेताओं, सरकारी इमारतों, बैंक मिलाकर कई जगह स्ट्राइक की, जिसमें 9 कमांडरों की तरह हमास के 60 अधिकारी मारे गए।

जानकारी के मुताबिक, गाजा में हमले के कारण मरने वालों की संख्या 83 और घायल की संख्या 480 पहुँच गई है। इजरायल में एक बच्चे समेत 7 लोगों की मौत हुई है। इजरायल के लॉड शहर में इस संघर्ष के भयावह परिणाम नजर आ रहे हैं। अरब लोगों ने कथित तौर पर वहाँ पुलिस पर पत्थर फेंके और एक यहूदी पर बुरी तरह हमला किया। स्थिति देखते हुए प्रधानमंत्री ने वहाँ इमरजेंसी लगा दी है।

क्या पीएम केयर्स से पंजाब को भेजे वेंटिलेटर थे खराब? GOI ने बताई फरीदकोट के अस्पताल की सच्चाई

केंद्र सरकार ने उन खबरों को ‘निराधार’ बताया है जिनमें पंजाब के एक अस्पताल को पीएम केयर्स (PM CARES) फंड से खराब वेंटिलेटर दिए जाने का दावा किया जा रहा था। मामला फरीदकोट के गुरु गोबिंद सिंह मेडिकल कॉलेज ऐंड हॉस्पिटल (GGSMC) से जुड़ा है।

अस्पताल को मिले वेंटिलेटर्स का इस्तेमाल नहीं होने की खबरें सामने आने के बाद बाबा फरीद यूनिवर्सिटी ऑफ हेल्थ साइंसेज के वीसी ने कहा था कि आपूर्ति किए गए ज्यादातर वेंटिलेटर खराब हैं। पीएम केयर्स फंड से अस्पताल को 80 वेंटिलेटर आपूर्ति किए जाने की बात कही गई थी। दावा किया गया था कि इनमें से 71 खराब हैं। इनकी गुणवत्ता इतनी घटिया है कि एक-दो घंटे इस्तेमाल किए जाने पर ये बंद हो जाते हैं। साथ ही अस्पताल के डॉक्टरों का यह भी दावा ​था कि इनका इस्तेमाल करना मरीजों की जान जोखिम में डालना होगा।

गुरुवार (13 मई 2021) को केंद्र ने एक बयान जारी कर इन दावों को आधारहीन बताया। बताया कि फरीदकोट के अस्पताल में इंफ्रास्ट्रक्चर की कमी की वजह से वेंटिलेंटर खराब हुए हैं। बयान में कहा गया है, “मीडिया में कुछ ऐसी खबरें आई हैं कि भारत सरकार ने जीजीएस मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल, फरीदकोट, पंजाब को (पीएम केयर्स की मदद से) जो वेंटिलेटर भेजे थे, वे तकनीकी खामियों की वजह से बेकार पड़े हैं। निर्माताओं द्वारा बिक्री के बाद तकनीकी मदद नहीं मिलने के कारण इसका समाधान नहीं हो सका है। ये रिपोर्ट्स निराधार लगती हैं।”

बयान में कहा गया है कि मीडिया की खबरों में कहा जा रहा है कि एग्वा (AGVA) निर्मित 80 वेंटिलेटर में से 71 वेंटिलेटर अस्पताल में बेकार पड़े हैं। केंद्र ने बताया है कि पीएम केयर्स फंड के तहत इस अस्पताल को 88 वेंटिलेटर की आपूर्ति भारत इलेक्ट्रॉनिक्स लिमिटेड (BEL) और 5 की एग्वा ने की थी। ये वेंटिलेटर सफलतापूर्वक अस्पताल में स्थापित कर शुरू किए गए थे। इस संबंध में अस्पताल के अधिकारियों ने अंतिम स्वीकृति प्रमाण-पत्र भी दिया था।

साथ ही यह भी बताया है कि मीडिया रिपोर्टों के उलट बीईएल ने सूचना दी है कि ज्यादातर वेंटिलेटर खराब नहीं हैं। उनके इंजीनियर कई मौकों पर फरीदकोट के अस्पताल जा चुके हैं और जो भी छोटी-मोटी परेशानी आई थी उसे दुरुस्त कर दिया गया था।

बयान के अनुसार 12 मई को भी बीईएल के इंजीनियर फरीदकोट के अस्पताल गए थे। कुछ चीजों को रिप्लेस कर 5 वेंटिलेटर को अस्पताल अधिकारियों के सामने चालू कर दिखाया था। इन इंजीनियरों के अनुसार अस्पताल में बुनियादी सुविधाओं की कमी मसलन, सेंट्रल ऑक्सीजन गैस पाइपलाइन में दबाव की समस्या के कारण इस तरह की दिक्कते पैदा हो रही है।

सरकार का कहना है कि अगर वेंटिलेटर्स को सही तरीके से ऑपरेट किया गया तो ये बहुत ही अच्छे से कार्य करेंगे। केंद्र सरकार ने यह भी कहा कि कोरोना के इस दौर में बीईएल सभी राज्यों को हर प्रकार की तकनीकी सहायता देगा। गौरतलब है कि यह मामला तब सामने आया था जब आप के कुलतार सिंह संधवान ने मंगलवार को बेकार पड़ी वेंटिलेटर्स की तस्वीरों को ट्वीट किया था। मामले के तूल पकड़ने के बाद वीसी ने खराब वेंटिलटर्स मिलने का दावा किया था।

फिलिस्तीन का साथ मतलब ‘मानवता’ का समर्थक… कंगना ‘नफरत फैलाने वाली’: ऐसे फँसे इरफान पठान

इजरायल-फिलिस्तीन के बीच जारी संघर्ष के बीच पूर्व क्रिकेटर इरफान पठान ने खुद को मानवता का समर्थक बताते हुए बॉलीवुड अभिनेत्री कंगना रनौत पर निशाना साधा है।

दरअसल, इरफान ने 11 मई को फिलिस्तीन के समर्थन में ट्वीट करते हुए लिखा था, ”अगर आपमें जरा भी मानवता है तो फिलिस्तीन में जो हो रहा है आप उसका समर्थन नहीं करेंगे।” #SaveHumanity’

इसके बाद कंगना ने अपनी इंस्टाग्राम स्टोरी में विधायक दिनेश चौधरी का एक ट्वीट शेयर किया था, जिसमें कहा गया था, ”इरफान पठान को दूसरे देश से तो इतना लगाव है लेकिन खुद के देश में बंगाल पर एक ट्वीट नहीं कर पाए।”

इरफान ने खुद को बताया ‘मानवता’ का समर्थक, कंगना पर साधा निशाना

कंगना की इसी पोस्ट के जवाब में इरफान पठान ने खुद को मानवता का समर्थक बताते हुए कंगना को नफरत फैलाने वाला करार दिया।

इरफान ने लिखा, मेरे सभी ट्वीट या तो मानवता या देशवासियों के लिए होते हैं, एक ऐसे व्यक्ति के दृष्टिकोण से जिसने भारत का उच्चतम स्तर पर प्रतिनिधित्व किया है। इसके विपरीत मुझे कंगना जैसे लोग मिलते हैं, जिनके अकाउंट नफरत फैलाने के लिए सस्पेंड हो जाते हैं और कुछ अन्य पेड अकाउंट भी केवल नफरत के होते हैं। #planned

आपको बता दें कि बंगाल विधानसभा के चुनावी नतीजों के बाद टीएमसी कार्यकर्ताओं की राजनीतिक हिंसा पर बोलने के लिए ट्विटर ने अपने ‘नियमों के उल्लंघन’ का हवाला देते हुए कंगना रनौत का अकाउंट सस्पेंड कर दिया था।

‘प्रे फॉर फिलिस्तीन’ का समर्थन कर घिरे इरफान

कई यूजर्स ने इरफान से केवल फिलिस्तीन के समर्थन में खड़े होने के दोहरे रवैये को लेकर सवाल उठाए जबकि इस संघर्ष में फिलिस्तीनी आतंकी संगठन हमास के हमले में कई इजरायली नागरिक भी मारे गए हैं, जिनमें से एक भारत की सौम्य संतोष भी हैं।

वहीं कुछ यूजर्स ने इरफान से बंगाल में हिंदुओं के खिलाफ हिंसा पर चुप रहने और फिलिस्तीन के लिए बोलने पर भी सवाल उठाए।

11 मई से जारी इजरायल-फिलिस्तीन संघर्ष में दोनों पक्षों के लोगों के मारे जाने की खबरें हैं।

‘इजरायल पर शाहीन मिसाइल दागो… ‘क़िबला-ए-अव्वल’ (अल-अक्सा मस्जिद) को आजाद करो’: इमरान खान पर दबाव

पाकिस्तान के लोग बेहद महत्वाकांक्षी हैं। हमास और इस्लामी आतंकवादियों द्वारा इजरायल पर जारी हमलों के बीच पाकिस्तान न केवल फिलिस्तीन के समर्थन में खड़ा है, बल्कि अपने प्रधानमंत्री से भी यह कह रहा है कि वो दुनिया को दिखा दें कि वह परमाणु शक्ति संपन्न राष्ट्र है।

पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान खान ने बुधवार (मई 12, 2021) को फिलिस्तीन के लोगों के प्रति अपना समर्थन दोहराने के लिए ट्विटर का सहारा लिया, जिसमें इजरायल द्वारा किए जा रहे अत्याचारों की निंदा की गई। बुधवार को, इमरान खान ने ट्विटर पर खुद को पाकिस्तान के प्रधानमंत्री के रूप में पेश किया और अमेरिकी बुद्धिजीवी नोम नोम चोमस्की के एक पुराने लेख से एक अंश ट्वीट करते हुए कहा कि वह गाजा और फिलिस्तीन के साथ एकजुटता से खड़े हैं।

दरअसल, दिसंबर 2012 के एक लेख में चोम्स्की ने यह उद्धरण दिया था। गाजा के एक व्यक्ति ने तख्ती पर लिखा था, “तुम मेरा पानी ले लो, मेरे जैतून के पेड़ को जला दो, मेरे घर को नष्ट कर दो, मेरी नौकरी ले लो, मेरी जमीन चुरा लो, मेरे पिता को कैद कर लो, मेरी माँ को मार दो, मेरे देश पर बमबारी करो, हम सबको भूखा रखो, हम सभी को अपमानित करो, लेकिन मुझे दोष देना है, मैंने रॉकेट वापस मार दिया।”

हालाँकि एक पाकिस्तानी नागरिक इस बात से परेशान था कि जब प्रधानमंत्री (इमरान) भी सिर्फ ट्वीट ही करेंगे तो फिर परमाणु शक्ति संपन्न देश होने का क्या फायदा। उसने लिखा, “खान साहब, अगर आपने भी सिर्फ ट्वीट ही करनी है तो न्यूक्लियर पावर कंट्री के पीएम होने का क्या फायदा?”

इजरायल पर परमाणु हमले की चर्चा करते पाकिस्तानी

एक अन्य पाकिस्तानी ने इस बात पर ध्यान देने की कोशिश की कि कैसे सिर्फ इजरायल पर परमाणु बम से हमला एक अच्छा विचार नहीं हो सकता है। इसके बाद अहमद शेख ने बताया कि वह यह नहीं कह रहा कि पाकिस्तान परमाणु बम का इस्तेमाल करे, लेकिन इमरान खान इजरायल को डरा-धमका तो सकते हैं। अपनी बात तो मनवा सकते हैं ना। परमाणु शक्ति होना आम बात नहीं है।

एक अन्य पाकिस्तानी यूजर ने पूछा कि पाकिस्तान को किसी और के युद्ध में क्यों शामिल होना चाहिए। उस पर शेख ने कहा कि यह मुसलमानों की लड़ाई है और मुसलमानों के साथ खड़ा होना उनकी पहली प्राथमिकता होनी चाहिए।

एक अन्य पाकिस्तानी, बिलाल ने रक्षा के लिए आवंटन पर सवाल उठाया, जबकि वर्तमान में मिसाइलों का उपयोग नहीं किया जा रहा है।

इजरायल पर मिसाइलों का उपयोग करने के लिए उत्साहित पाकिस्तानी

बिलाल ने खान से पूछा, “क्या हमारे पास ये परमाणु बम और मिसाइल हैं जो शादियों में सजावट के रूप में उपयोग करते हैं?” उसने दावा किया कि पाकिस्तान रक्षा पर इतना पैसा खर्च करता है, लेकिन आज उनका ‘क़िबला-ए-अव्वल’ (अल-अक्सा मस्जिद) ’दूसरों’ के हाथों में है और इसलिए खान को शर्म आनी चाहिए।

इसके जवाब में एक अन्य पाकिस्तानी ट्विटर यूजर ने कहा कि देश को परमाणु बम का उपयोग करने की आवश्यकता नहीं है, लेकिन ऐसे अन्य हथियार हैं जिनका उपयोग फिलिस्तीन के आतंकवादियों की मदद के लिए किया जा सकता है।

पाकिस्तानी इजरायल पर शाहीन का उपयोग करना चाहते हैं

एक पाकिस्तानी यूजर ने माँग की कि खान इजरायल के खिलाफ शाहीन 3 सरफेस-टू-सरफेस पर मार करने वाली मिसाइल का इस्तेमाल करें। इसकी प्रभावी फायरिंग रेंज 2,500-3,000 किलोमीटर है। हास्यास्पद यह है कि पाकिस्तान के लाहौर से इजरायल के यरुशलम की दूरी 5,000 किलोमीटर से थोड़ी कम है। अगर फायर किया जाता है, तो शाहीन 3 मिसाइल ईरान में कहीं गिरने की संभावना है।

एक अन्य पाकिस्तानी यूजर ने मिसाइल उत्साही को धैर्य रखने के लिए कहा कि जैसे ही पाकिस्तान आक्रामकता दिखाता है, इज़राइल विश्व युद्ध शुरू कर देगा। एक अन्य पाकिस्तानी यूजर ने खुशी जताते हुए कहा कि वो पाकिस्तान की प्रधानमंत्री नहीं है, इमरान खान हैं और यह भावनात्मक होने का समय नहीं है।

इमरान खान की तारीफ में ट्वीट

ट्विटर यूजर ने कहा कि खान 22 करोड़ पाकिस्तानियों के बारे में सोच रहे हैं और इसलिए भावनात्मक रूप से कोई कदम नहीं उठा रहे हैं।

अन्य पाकिस्तानी यूजर्स ने भी खान को केवल निंदा करने के लिए नहीं, बल्कि ‘कुछ करने के लिए’ और बहादुरी दिखाने के लिए कहा।

इस बीच, पाकिस्तान फिलहाल कर्ज से जूझ रहा है। दिसंबर 2020 में समाप्त हुए 6 महीनों में पाकिस्तान के बाहरी ऋण में 3 बिलियन अमरीकी डालर की वृद्धि हुई। इसका कुल बाह्य ऋण 115.7 बिलियन अमरीकी डॉलर है।

इज़राइल-फिलिस्तीन संघर्ष

इजरायल और फिलिस्तीन के बीच संघर्ष तब बढ़ गया जब फिलिस्तीनी आतंकवादी यूनिट हमास ने यरुशलम में कई रॉकेट दागे, और इजरायली रक्षा बलों ने तरह तरह से जवाब दिया। मौजूदा संघर्ष के पीछे मुख्य कारण शेख जर्राह संपत्ति विवाद है। बता दें कि यह एक विवाद है जो पूर्वी यरूशलेम के पड़ोस से लगभग 300 फिलिस्तीनियों के निष्कासन का कारण बन सकता है।

अब पाकिस्तानी इजरायल पर परमाणु हमला करना चाहता है।

ईद से पहले हैदराबाद-मुंबई में उमड़ी भीड़, कोरोना प्रोटोकॉल-सोशल डिस्टेंसिंग भूले: Video

देश भर में कोरोना वायरस संक्रमण लगातार बढ़ता जा रहा है। इसे देखते हुए कई राज्यों में लॉकडाउन जैसी पाबंदियाँ लागू की गई हैं। लेकिन ईद के कारण इसकी जमकर धज्जियाँ उड़ाई जा रही है। खरीदारी करने के लिए लोग निकल रहे हैं जिससे बाजारों में भीड़ दिखाई दे रही है। कोरोना प्रोटोकॉल की धज्जियाँ उड़ाई जा रही है। सोशल डिस्टेंसिंग का ख्याल नहीं रखा जा रहा है। कई लोगों के चेहरे पर मास्क भी नहीं दिखाई दे रहा है।

ईद से पहले देश के कई शहरों से ऐसी तस्वीरें आई हैं जो भविष्य के लिए चिंताजनक हैं। हैदराबाद के चारमीनार इलाके में लॉकडाउन से पहले ईद की खरीदारी करने के लिए ऐसी भीड़ उमड़ी कि सोशल डिस्टेंसिंग की धज्जियाँ उड़ गई। दो गज की दूरी तो छोड़िए, दो कदम की दूरी भी बमुश्किल दिख रही है।

भीड़ में महिला, पुरुष, बच्चे सभी दिखे। कोरोना की जिस लहर से बचने के लिए डबल फेस मास्क की लगाने की सलाह दी जा रही है, वहीं यहाँ ज्यादातर महिलाएँ सिर्फ चुन्नी या हिज़ाब से नाक मुँह को ढँकी दिखीं। कई महिलाओं की चुन्नी भी नाक से नीचे है और कई लोगों का नाक-मुँह ना तो मास्क से कवर है, ना ही किसी कपड़े से। ऐसे में ज़रा सोचिए कि यहाँ कोरोना का कैसा विस्फोट हो सकता है? हालात काबू करने के लिए तेलंगाना में आज से अगले 10 दिनों के लिए लॉकडाउन लगाया गया है। बता दें कि हैदराबाद के चारमीनार बाजार के पास 5 मई को भी कोविड प्रोटोकॉल्स की खुलेआम धज्जियाँ उड़ाई गई थी।

मुंबई में ईद की शॉपिंग करने पहुँचे हजारों

अब देश की आर्थिक राजधानी मुंबई के हालात देखिए। भिंडी बाजार में ईद की शॉपिंग करने हजारों लोग पहुँचे। ये परवाह किए बगैर कि बाजार से घर लौटेंगे, तो अपने साथ कोरोना को भी घर ला सकते हैं। अपने साथ-साथ दूसरों की जान भी जोखिम में डाल सकते हैं, लेकिन त्योहार के आगे इन्हें कुछ सूझ नहीं रहा है। प्रदेश में लॉकडाउन लगा है। उसका भी ख्याल नहीं रहा। महाराष्ट्र में लॉकडाउन बढ़ाकर एक जून तक लागू कर दिया गया है।

यूपी में भी ईद की खरीदारी के लिए बड़ी संख्या में लोग बाजार में घूमते हुए दिखाई दे रहे हैं। फिरोजाबाद के मुस्लिम इलाकों में सुबह 10:30 बजे ही बाजार खुल गया। बाजार में ईद की खरीदारी के लिए भीड़ नजर आने लगी। सोशल डिस्टेंसिंग की धज्जियाँ तो उड़ी ही। कई लोग बिना मास्क के भी नजर आए। शायद लोग त्योहार के जश्न में लोग कोरोना का डर भी भूल रहे हैं और आंशिक लॉकडाउन के नियम-कायदे भी। ये वो लोग हैं जो कल कोरोना विस्फोट के जिम्मेदार हो सकते हैं। सरकार और सिस्टम कोराना को कंट्रोल करने में लगी है। आपको बता दें कि प्रदेश में 17 मई तक के लिए कोरोना कर्फ्यू लगाया गया है।

दिल्ली के सीलमपुर बाजार में भी ईद की शॉपिंग के लिए लोगों की भीड़ उमड़ पड़ी। ईद-उल-फितर त्योहार के चलते कपड़े, जूते-चप्पल, किराना और यहाँ तक कि गिफ्ट सेंटरों पर भी लोगों की भीड़ रही। वहीं, सैलून की दुकानों पर भीड़ कम नहीं थी।गाइडलाइन तो दूर की बात एक-दूसरे से चिपक कर लोग बैठे हुए थे। लॉकडाउन की वजह से कोरोना की रफ्तार धीमी पड़ी है। आशंका है कि ईद की ये भीड़ फिर इसे तेज कर सकती है।

‘बददिमाग, कुंठित…’: जिस ट्विटर पर सस्पेंड वहीं ट्रेंड कर रहीं कंगना, इजरायल के समर्थन पर भड़के कट्टरपंथी

ट्विटर अकाउंट सस्पेंड होने के बाद बॉलीवुड अभिनेत्री कंगना रनौत इन दिनों इंस्टाग्राम के जरिए अपनी बात रख रही हैं। उन्होंने इजरायल की तारीफ करते हुए एक पोस्ट किया। इसके बाद कट्टरपंथियों ने उन्हें ऐसे ट्रोल किया गया कि वे ट्विटर पर न होने के बावजूद ट्रेंड करने लगीं।

अपनी स्टोरी में कंगना ने लिखा, “अपने देश और लोगों को कट्टरपंथी इस्लामिक आतंकवाद से बचाने के लिए यह हर देश का मौलिक अधिकार है। भारत इजरायल के साथ खड़ा है। जिन्हें लगता है कि आतंकवाद का जवाब धरना और कड़ी निंदा करके देना चाहिए, उन्हें इजरायल से सीखना चाहिए।”

अगली स्टोरी में उन्होंने कहा, “वे आतंकवाद फैलाएँगे। अगर आपने उसका मजबूती से जवाब दिया, तो वे रोने लगेंगे और विक्टिम बन जाएँगे। अगर आप सिर्फ धरना देंगे तो वे आपकी संसद और फाइव स्टार होटल्स पर हमला करेंगे- यही कट्टरपंथी इस्लामिक आतंकवाद है।”

इन स्टोरी के अपडेट होने के बाद से अलग-अलग प्लेटफॉर्म पर कंगना को लेकर प्रतिक्रियाएँ आ रही हैं। ट्विटर पर उनके विचारों का विरोध करने वाले लोग उनका हैशटैग चलाकर उन्हें इंस्टाग्राम से भी ब्लॉक करने की जुगत में लगे हैं। लगातार उनके अकाउंट को शेयर कर उसे रिपोर्ट करने की अपील हो रही है।

एक यूजर ने उनकी स्टोरी का स्क्रीनशॉट शेयर कर लिखा, “क्या बददिमाग, कुंठित और इस्लामोफोबिक कंगना रनौत जानती है कि असली आतंकवाद क्या है? रमजान की सबसे पाक रात लैलत-अल-कद्र में 300 रोजेदार घायल हुए थे और इस मूर्ख के लिए निहत्थे रोजेदार क्रूर आतंकवादी थे? वाह।”

नबरीसा नाम की ट्विटर यूजर ने फलस्तीनियों को मासूम करार देते हुए कहा, “कंगना रनौत मुझे नहीं लगता कि तुम्हे फिर कभी आतंकवाद के बारे में बात करनी चाहिए, क्योंकि यह पाखंड है। तुमने आज जो चीजें पोस्ट की हैं, वे आतंकवाद, नाजीवाद और हत्याओं की तरह तुम्हारा मैल दिखाती हैं। जो तुमने कहा, वही आतंकवाद भी कहेगा। तुम्हे शर्म आनी चाहिए कि तुम मासूमों की हत्या करने वालों का समर्थन कर रही हो। इससे फर्क नहीं पड़ता कि तुम किसे जमीन का हकदार बता रही हो, बल्कि इससे पड़ता है कि तुम बेगुनाहों की हत्याओं को सही बता रही हो। थू है तुम पर।”

बता दें कि कंगना ने हालिया स्टोरीज में हमास का उदाहरण देते हुए कहा कि आज दुनिया भर के मुसलमान इस्लाम के लिए हमास के जिहादियों और आतंकियों का समर्थन कर रहे हैं। लेकिन किसी हिंदू या मुस्लिम ने एक बार भी बंगाल में हुए हिंदू नरसंहार पर कुछ नहीं किया और न ही तब बोला जब पाकिस्तान या बांग्लादेश में उन्हें हर रोज मारा जाता है। ये हिंदू मुस्लिम जयचंदों की हकीकत है। वह हिंदुओं को नपुंसक समझते हैं। वहीं मुस्लिमों के लिए बस ये बात महत्वपूर्ण है कि कोई आसमानी किताब को फॉलो करता हो। इसके अलावा उनके लिए इस्लामी देश हैं, लेकिन हिंदुओं के लिए सिर्फ भारत है।

अपनी स्टोरी में कंगना ने नक्शे के जरिए समझाया है कि कैसे यहूदियों के पास सिर्फ उनका एक छोटा देश है। आसपास सारे इस्लामिक राष्ट्र है। कंगना कहती हैं कि इतने इस्लामी देशों के बीच रहने के लिए हिम्मत चाहिए। भारत, इजरायल और उन सभी के साथ है जो इस्लामी कट्टरपंथ से लड़ रहे हैं।

जहाँ CISF पर हमला-BJP वर्करों की हत्या, उस कूच बिहार में बंगाल के गवर्नर: असम भी जाएँगे, ममता नाराज

पश्चिम बंगाल के गवर्नर जगदीप धनखड़ कूच बिहार पहुँच गए हैं। वे राजनीतिक हिंसा के पीड़ितों से मिलेंगे। उन्होंने कहा है कि संविधान की रक्षा और उसका पालन करवाना उनका दायित्व है। कूच बिहार से मतगणना के बाद बीजेपी के दो कार्यकर्ताओं की हत्या की खबर आई थी।

मिंटू बर्मन की कथित तौर पर पीट-पीट कर हत्या कर दी गई थी। वहीं कूच बिहार के सीतलकूची में माइक मोइत्रा नाम के भाजपा कार्यकर्ता की मतगणना के बाद हत्या कर दी गई थी। सीतलकूची वही जगह है जहाँ अप्रैल में मतदान के दिन केंद्रीय औद्योगिक सुरक्षा बल (CISF) पर 300-350 की भीड़ ने हमला किया था। हथियार छीनने की कोशिश की थी। सीआईएसएफ ने ‘आत्मरक्षा’ में गोली चलाई थी जिसमें चार उपद्रवी मारे गए थे।

सीतलकुची में ही मतदान के दिन 18 साल के आनंद बर्मन की गोली मार दी गई थी। कूच बिहार के पुलिस अधीक्षक (एसपी) देबाशीष धर ने उस समय कहा था, “मृतक आनंद बर्मन, 18 वर्ष का हो चुका था। वह पहली बार मतदान करने आया था।” उसे तब गोली मारी गई थी जब वह वोट गिराने के लिए मतदान केंद्र के बाहर कतार में खड़ा था।

10 मई को धनखड़ ने बताया था कि राज्य के हालात बेहद चिंताजनक हैं। राजनीतिक बदले की हिंसा, आगजनी, लूट की घटनाएँ डराने-धमकाने और जबरन वसूली तक पहुँच गई है। उन्होंने प्रभावित इलाकों में जाने की जानकारी देते हुए कहा था कि इसमें राज्य सरकार सहयोग नहीं कर रही। उन्होंने कहा था, “अपने संवैधानिक दायित्वों के तहत मैंने प्रभावित इलाकों का दौरा करने का फैसला किया है। इस संबंध में राज्य सरकार से आवश्यक इंतजाम करने को कहे। लेकिन, राज्य सरकार की प्रतिक्रिया बेहद दुर्भाग्यपूर्ण थी।”

राज्यपाल ने पड़ोस के असम जाने की बात भी कही है। बंगाल में चुनाव बाद भड़की हिंसा के कारण हजारों लोग अपना घर छोड़कर असम चले गए थे। वहाँ शिविरों में उन्होंने शरण ले रखी है। बंगाल की मुख्यमंत्री और तृणमूल कॉन्ग्रेस (TMC) की मुखिया ममता बनर्जी ने इस पर आपत्ति जताई है। उन्होंने राज्यपाल पर राजनैतिक मर्यादाओं के उल्लंघन का आरोप लगाया है। गवर्नर के कूच बिहार दौरे को लेकर भी उन्होंने कहा है कि यह नियमों का उल्लंघन है। राज्यपाल अपनी शक्तियों का गलत इस्तेमाल कर रहे हैं।

गौरतलब है कि पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनावों में दो मई को टीएमसी की जीत सुनिश्चित होते ही हिंसा भड़क उठी थी। विपक्षी दलों खासकर बीजेपी के कार्यकर्ताओं, उनके घरों और दफ्तरों को निशाना बनाया गया था। हिंसा का आरोप सत्ताधारी टीएमसी के गुंडों पर हैं। मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने भी पिछले दिनों राजनीतिक हिंसा में अलग-अलग दलों के 16 लोगों की मौत की बात स्वीकार की थी।

कोरोना हो तो कब, संक्रमित न हुए हों तो कब… 2 डोज वैक्सीन के बीच कितना हो गैप: NTAGI ने दिया हर सवाल का जवाब

देश भर में कोरोना वायरस के कहर से उबरने के लिए वैक्सीनेशन अभियान चल रहा है। लेकिन, कोरोना संक्रमित व्यक्ति को वैक्सीन का डोज कब लेना चाहिए, इसको लेकर बनी भ्रम की स्थिति को दूर करते हुए केंद्र सरकार के पैनल ने सुझाव दिया है कि संक्रमित मरीजों के स्वस्थ होने के करीब 6 महीने के बाद ही टीके का डोज लेना चाहिए।

टाइम्स ऑफ इंडिया की रिपोर्ट के मुताबिक, सरकारी पैनल ने कोविशील्ड वैक्सीन के दो डोज के बीच कम से कम 12-16 हफ्ते का गैप रखने का सुझाव दिया है। बता दें कि वर्तमान में कोविशील्ड की दो डोज के बीच 4 से 8 हफ्ते का गैप दिया जाता है।

हालाँकि, कोवैक्सीन के टीके के लिए इस तरह का कोई सुझाव नहीं दिया गया है। टाइम्स ऑफ इंडिया के सूत्रों के मुताबिक, “नेशनल टेक्निकल एडवाइजरी ग्रुप ऑफ इम्युनाइजेशन” (NTAGI) ने कोविशील्ड के लिए ये सुझाव गुरुवार को दिया है। अब वो इस सुझाव को वैक्सीन प्रशासन के राष्ट्रीय विशेषज्ञ समूह को भेजेगा।

इसके अलावा गर्भवती महिला को कोई भी टीका लगवाने का ऑफर दिया जा सकता है। सरकारी पैनल के मुताबिक, डिलिवरी के बाद महिला कभी भी वैक्सीन का डोज ले सकेगी।

इस बीच ड्रग्स कंट्रोलर जनरल ऑफ इंडिया ने कोवैक्सीन बनाने वाली कंपनी भारत बायोटेक को 2 से 18 साल की आयु के लोगों के लिए टीकों के दूसरे क्लीनिकल ट्रायल को मंजूरी दी है। भारत बायोटेक यह ट्रायल पूरी तरह से स्वस्थ 525 वालंटियर्स पर करेगा।

DGCI की प्रेस रिलीज

खास बात यह है कि पैनल ने यह सिफारिश ऐसे वक्त में की है, जब कोरोना की दूसरी लहर के कारण वैक्सीन की सप्लाई में कुछ कमी देखने को मिल रही है। लाइव हिंदुस्तान की रिपोर्ट में कहा गया है कि इससे पहले मार्च में केंद्र सरकार ने कोविशील्ड की पहली और दूसरी डोज के बीच के अतंर को बढ़ाकर 6 से 8 सप्ताह करने के लिए कहा था।

कोरोना के कारण अनाथ हुए बच्चों को शिवराज सरकार देगी ₹5000 प्रति माह, फ्री शिक्षा और राशन भी

मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने घोषणा की है कि कोरोना काल में माता-पिता को खोने वाले बच्चों को राज्य सरकार हर माह 5000 रुपए पेंशन के तौर पर देगी। इसके अलावा ऐसे बच्चों को नि:शुल्क शिक्षा और परिवार को फ्री राशन मुहैया कराया जाएगा। यदि ऐसे परिवार के लोग काम करने के इच्छुक होंगे तो सरकार उन्हें अपनी गारंटी पर लोन भी देगी। 

सीएम ने ट्वीट कर कहा, “महामारी ने कई परिवारों को तोड़कर रख दिया। कई परिवार ऐसे हैं, जिनके बुढ़ापे का सहारा छिन गया और कुछ ऐसे बच्चे हैं, जिनके सिर से पिता का साया उठ गया है। वे बच्चे, जिनके पिता, अभिभावक का साया उठ गया और कोई कमाने वाला नहीं है, इन परिवारों को ₹5000 प्रतिमाह पेंशन दी जाएगी।”

दूसरे ट्वीट में उन्होंने कहा, “ऐसे सभी बच्चों की शिक्षा का नि:शुल्क प्रबंध किया जाएगा, ताकि वे अपनी पढ़ाई-लिखाई जारी रख सकें। पात्रता ना होने के बावजूद भी ऐसे परिवार को फ्री राशन दिया जाएगा, ताकि भोजन का इंतजाम हो सके।”

उन्होंने कहा है, “यदि ऐसे परिवार में कोई सदस्य ऐसा है या हमारी जिस बहन के पति नहीं रहे और वो कोई काम-धंधा करना चाहें तो सरकार की गारंटी पर बिना ब्याज के उन्हें ऋण उपलब्ध करवाया जाएगा, ताकि फिर से वे जीवन यापन के लिए अपना काम-धंधा प्रारंभ कर सकें।”

उन्होंने लिखा, “ऐसे दु:खी परिवारों को हम बेसहारा नहीं छोड़ सकते हैं। उनका सहारा हम हैं, प्रदेश की सरकार है। ऐसे बच्चों को भी चिंता करने की जरूरत नहीं है। वे प्रदेश के बच्चे हैं, प्रदेश उनकी देखभाल करेगा, प्रदेश उनकी चिंता करेगा।”

बता दें कि देश में जहाँ कोरोना की दूसरी लहर से हाहाकार मचा है, वहीं मध्यप्रदेश भी इसके प्रकोप से अछूता नहीं है। बुधवार को राज्य से कोरोना के 8 हजार पॉजिटिव केस आए। वहीं 10 से ज्यादा हजार लोग ठीक भी हुए। जानकारी के मुताबिक राज्य में अब तक 7 लाख लोग संक्रमण की चपेट में आए हैं। इनमें से 5 लाख ठीक हुए हैं, जबकि 6,679 लोगों की मौत हुई है। वर्तमान में वहाँ 1.09 लाख मरीज हैं जिनका इलाज चल रहा है।

बंगाल-असम में कॉन्ग्रेस की हार ISF और AIUDF के कारण: CWC मीटिंग में हार का ठीकरा गठबंधन पार्टियों पर

5 राज्यों के विधानसभा चुनावों में कॉन्ग्रेस के बुरे प्रदर्शन के बाद कॉन्ग्रेस वर्किंग कमेटी (CWC) की 10 मई को हुई बैठक में हार का ठीकरा गठबंधन पार्टियों पर फोड़ा गया। CWC की बैठक में कॉन्ग्रेस के प्रभारी जितिन प्रसाद ने बंगाल की हार के लिए वहाँ ISF के साथ हुए गठबंधन को जिम्मेदार माना, जबकि असम में हुई हार के लिए दिग्विजय सिंह समेत पार्टी नेताओं ने बदरुद्दीन अजमल के साथ जुड़ने पर सवाल उठाया।

बैठक में पार्टी के कई नेताओं ने विभिन्न प्रदेशों में आगे से गठबंधन का निर्णय लेने के लिए केंद्रीय समिति बनाने का सुझाव दिया। कथित तौर पर, बैठक में ऐसे कई सदस्य थे जिन्होंने दोनों राज्यों- बंगाल और असम में हुए पार्टी गठबंधन पर सवाल खड़े किए। बंगाल में सबने पीरजादा अब्बास सिद्दीकी की पार्टी और लेफ्ट के साथ जुड़ने को कॉन्ग्रेस की हार का कारण माना। 

वहीं असम में AIUDF के साथ जुड़ने को गलत समझा गया। बैठक में कहा गया कि असम और पश्चिम बंगाल में जहाँ AIUDF और ISF के साथ गठबंधन से भाजपा को ध्रुवीकरण करने का मौका मिला, वहीं केरल में करारी शिकस्त का कारण ओवर कॉन्फिडेंस था।

सबकी बातें सुनने के बाद कॉन्ग्रेस अध्यक्ष सोनिया गाँधी ने चुनावी राज्यों में हार के लिए एक कमेटी के गठन का फैसला किया। ये कमेटी चुनावी राज्यों में जाएगी और पार्टी के कार्यकर्ता, उम्मीदवारों से लेकर राज्य के शीर्ष नेतृत्व से बातचीत कर रिपोर्ट तैयार करेगी और कॉन्ग्रेस अध्यक्ष को सौंपेगी।

सोनिया गाँधी ने बैठक में कहा कि यदि पार्टी वास्तविक सच्चाई का सामना नहीं करती है तो सही पाठ नहीं सीख पाएगी। वह बोलीं, “हमें ये समझना होगा कि आखिर केरल और असम में हम मौजूदा सरकारों को हटाने में क्यों विफल हुए और क्यों बंगाल में हमारे हाथ कुछ नहीं आया। ये हमारे लिए असहज करने वाला सबक है। लेकिन अगर हम सच्चाई का सामना नहीं करेंगे, तथ्य नहीं देखेंगे तो सही सीख नहीं ले पाएँगे… ये परिणाम बताते हैं कि हमें अपनी चीजों को सही करना होगा।”

बैठक में 5 राज्यों के पार्टी प्रभारी मौजूद रहे। बंगाल से जितिन प्रसाद, असम के जीतेंद्र प्रसाद और केरल के तारीक अनवर, तमिलनाडू और पुडुचेरी के लिए दिनेश गुड्डू ने अपनी अपनी बात रखी। सूत्रों के मुताबिक, बैठक में दिग्विजय सिंह ने भी असम में AIUDF के साथ गठबंधन पर सवाल उठाए और याद दिलाया कि वह हमेशा से AIUDF के साथ गठबंधन का विरोध करते रहे।

इस दौरान गुलान नबी आजाद ने सिंह का समर्थन किया और बंगाल में ISF के साथ गठबंधन पर आपत्ति जाहिर की। वहीं पार्टी नेता आनंद शर्मा ने कहा CWC को हर प्रोग्रेसिव, लोकतांत्रिक, गैर भाजपाई पार्टियों को एक साथ आने का आह्वान करना चाहिए और आत्मनिरीक्षण को पार्टी के विरुद्ध नहीं मानना चाहिए।

बता दें कि 10 मई को हुई CWC की बैठक में कॉन्ग्रेस अध्यक्ष के चुनाव पर भी बात हुई। कुछ लोगों ने दोबारा से राहुल गाँधी को ही कॉन्ग्रेस अध्यक्ष बनाने की बात कही। वहीं सोनिया गाँधी ने कहा, ‘‘जब हम गत 22 जनवरी को मिले थे तो हमने फैसला किया था कि कॉन्ग्रेस के अध्यक्ष का चुनाव जून के मध्य तक पूरा हो जाएगा। चुनाव प्राधिकरण के प्रमुख मधुसूदन मिस्त्री ने चुनाव कार्यक्रम तय किया है वेणुगोपाल कोविड 19 और चुनाव नतीजों पर चर्चा के बाद इसे पढ़ेंगे।”