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कोरोना काल में पत्र लेखन प्रधान राजनीतिक चालें और विरोध की संस्कृति

विपक्ष की ओर से प्रधानमंत्री को एक और पत्र लिखकर पत्र लेखन प्रधान राजनीति को आगे बढ़ा दिया गया। लोकतांत्रिक व्यवस्था का यही आधार है कि विपक्ष अपनी ओर से प्रशासन और व्यवस्था की एक वैकल्पिक योजना नागरिकों के सामने रखे।  इससे पहले उद्धव ठाकरे, भूपेश बघेल और ममता बनर्जी चीनी वायरस से फैले संक्रमण के विरुद्ध लड़ने को लेकर पत्र लिख चुके थे जिसमें क्रमशः कोविड को प्राकृतिक आपदा घोषित करने से लेकर टीकाकरण में कमजोर, अनुसूचित जातियों और जनजातियों को आरक्षण और पश्चिम बंगाल में उत्पादित ऑक्सीजन पर पश्चिम बंगाल का पहला अधिकार होने जैसी माँगें थीं। डॉक्टर मनमोहन सिंह प्रधानमंत्री को पहले ही पत्र लिख चुके हैं जिसका उत्तर स्वास्थ्य मंत्री डॉक्टर हर्षवर्धन ने दिया था।

तीसरे चरण के टीकाकरण की घोषणा, कोविड से लड़ाई में राजनीतिक दखल का अलग ही रूप

जबसे तीसरे चरण के टीकाकरण की घोषणा हुई है, कोविड के विरुद्ध देश की लड़ाई में राजनीतिक दखल ने एक अलग ही रूप ले लिया है। राज्यों द्वारा टीका बनाने वाली कंपनियों को दिया जाने वाला ऑर्डर, टीके का मूल्य, टीके में किसी वर्ग को आरक्षण, विदेशी टीकों के आयात को लेकर माँगें या फिर कांग्रेस शासित राज्यों द्वारा एक मई से तीसरे चरण का अभियान शुरू न करने को लेकर घोषणा, लगभग हर बात में राजनीति साफ झलकती रही है। सत्ता में वापसी के बाद ममता बनर्जी केंद्र सरकार की नीतियों के विरुद्ध सुप्रीम कोर्ट पहले ही जा चुकी हैं।  

दूसरी ओर टीका बनाने वाली कंपनियों को ऑर्डर देने की बात हो या तीसरे चरण के टीकाकरण अभियान की शुरुआत, भाजपा शासित राज्यों की ओर से कोई शिकायत नहीं आई। इस मामले में केंद्र सरकार और इन राज्यों के बीच एक न्यूनतम तालमेल बना हुआ है। सबसे बड़ी विडंबना यह है कि केंद्र विरोधी हर मुख्यमंत्री अपने पत्र में यह लिखना नहीं भूलता/भूलती कि महामारी की इस विकट स्थिति से निकलने के लिए सबको मिलकर काम करने की आवश्यकता है।

यह कैसा मिलकर काम करना है कि इसकी आवश्यकता पर जोर देने वाले पत्र लिखने के साथ-साथ न्यायालय भी चले जाते हैं। एक विडंबना और है कि इन्हीं विपक्षी नेताओं ने देश में बनने वाली जिन वैक्सीन के खिलाफ बार-बार बयान देकर जनता के मन में भ्रम पैदा किया, वही अब जनता के लिए उन्हीं वैक्सीन को जल्द से जल्द देने के इंतजाम को लेकर खुद चिंतित हैं पर सब कुछ केंद्र से करवाना चाहते हैं।  

जिन माँगों को लेकर अब बारह दलों के नेताओं ने पत्र लिखा है उनमें से कुछ माँगें पहले भी उठाई गई हैं। दरअसल ममता बनर्जी मुख्यतः जिन दो माँगों को लेकर उच्चतम न्यायालय गई हैं, जिनमें एक; सबको मुफ्त टीका देने की माँग और दूसरी; यूनिवर्सल वैक्सीनेशन की माँग भी इस पत्र में है। उसके अलावा मुख्यतः यह माँग उठाई गई है कि टीकाकरण से संबंधित सारी योजना केंद्र अपने हाथ में ले।

यह वही विपक्ष है जो अभी कुछ माह पूर्व ही केंद्र सरकार की आलोचना इस बात के लिए कर रहा था कि कोविड से लड़ने में केंद्र ने राज्यों को स्वतंत्रता नहीं दी है। कि ऐसी स्वतंत्रता न रहने की वजह से ही राज्य अपने अनुसार नियम और योजनाएँ नहीं बना पा रहे। यही विपक्ष अपनी सरकारों के लिए केंद्र से अधिकार माँग रहा था। यह और बात है कि जब केंद्र द्वारा यह स्वतंत्रता मिल गई तो राज्यों का प्रदर्शन कैसा रहा, वह पूरे देश ने देखा।

दरअसल विपक्ष यह चाहता है कि उसके द्वारा चलाई जा रही राज्य सरकारों को अधिकार तो मिले पर उन्हें किसी बात के जिम्मेदार न बनाया जाए। लगता है जैसे टीके की खरीद, उसका मूल्य और योजना के अनुसार टीकाकरण चलाने की बात पर विपक्ष शासित राज्य खुद पर विश्वास नहीं कर पा रहे और फिर से यह जिम्मेदारी केंद्र पर डालना चाहते हैं। इन विपक्षी नेताओं ने अपने पत्र में लिखा कि वे केंद्र सरकार की नीतियों और गलतियों की चर्चा विस्तार में नहीं करना चाहते। दरअसल वे विस्तार में ऐसी कोई चर्चा करने लायक होते तो अवश्य करते। यह विश्वास करने योग्य बात नहीं कि जो विपक्ष बिना बात के प्रधानमंत्री और केंद्र सरकार की आलोचना करता है या उन्हें नीचा दिखाना चाहता है वह उन्हें लज्जित करने का कोई भी मौका अपने हाथ से जाने देगा।

पत्र में एक और माँग सेंट्रल विस्टा प्रोजेक्ट को लेकर उठाई गई है और कहा गया है कि सरकार इस प्रोजेक्ट को तुरंत रोके और उसमें लगने वाले पैसे को यूनिवर्सल वैक्सीनेशन प्रोग्राम में लगाए। इस प्रोजेक्ट को रोकने की माँग बार-बार अलग-अलग मंचों पर उठाई जा रही है और इस माँग को आगे रखकर एक नैरेटिव बनाने की कोशिश की जा रही है कि; सरकार के पास कोविड से लड़ने के पैसे नहीं है और यह जबरदस्ती ऐसा प्रोजेक्ट लेकर आगे बढ़ रही है। 

सेंट्रल विस्टा प्रोजेक्ट को रोकने की यह माँग मीडिया की ओर से उठी थी और अब इसे विपक्षी नेताओं के पत्र में भी जगह मिल रही है। जबकि सरकार इस प्रोजेक्ट को इसलिए नहीं रोकना चाहती क्योंकि उसका मानना है कि समय पर प्रोजेक्ट करना सरकारी काम का हिस्सा होना चाहिए। इसके अलावा उसका मानना है कि इससे किराए के मद में होने वाले सरकारी खर्च में प्रतिवर्ष कमी आएगी। मोदी सरकार आने से पहले सरकारी योजनाओं को समय पर पूरा न करना सरकारी कार्य प्रणाली का एक अहम् हिस्सा था और यह बताने की जरूरत नहीं कि पत्र लिखने वाले ये नेता उन सरकारों को चलाते थे, जिन सरकारों की कार्य संस्कृति इस सोच से संक्रमित थी।  

यहाँ एक प्रश्न और उठता है कि क्या देश में और परियोजनाएँ रुक गई हैं? जब महामारी के चलते अर्थव्यवस्था अच्छा न कर रही हो तो इंफ्रास्ट्रक्चर के प्रोजेक्ट रोकना कहाँ तक तार्किक है? बुद्धिजीवियों से भरे विपक्ष के लिए यह समझना क्या इतना ही मुश्किल है कि वह पत्र लिखकर इस तरह के प्रोजेक्ट को रोकने की माँग कर दे? और माँगों में एक माँग है बेरोजगारों को 6000 प्रति महीने मिले, जो शायद राहुल गाँधी के न्याय योजना से प्रेरित है और शायद इस आशा से उठाई गई है कि कहीं सरकार इस माँग को मान ही ले तो कान्ग्रेस पार्टी के लिए राहुल गाँधी को अपना अध्यक्ष घोषित करने में सुभीता हो जाएगा। 

वैसे विपक्षी नेताओं के इस पत्र पर विपक्ष के विपक्ष की और से कपिल सिबल की प्रतिक्रिया आई जो काफी हद तक तार्किक लगी कि यह समय राजनीति करने का नहीं है। यह समय ऐसा है जिसमें सबको मिलकर इस महामारी को हराना है। किसकी गलती थी और किसकी सही, इसकी चर्चा महामारी पर जीत के बाद कर लेंगे। ऐसा शायद केवल कपिल सिबल ही नहीं, एक आम भारतीय भी सोच रहा है। 

इजरायल में सौम्या की मौत पर केरल CM की श्रद्धांजलि… फिर किया पोस्ट एडिट: BJP ने लगाया ‘कट्टरपंथियों’ से डरने का आरोप

इजरायल और फिलिस्तीन के बीच संघर्ष में केरल की एक महिला की मौत के बाद राज्य में राजनीतिक ध्रुवीकरण तेज हो गया है। बीजेपी ने आरोप लगाया है कि मुख्यमंत्री पिनराई विजयन और पूर्व मुख्यमंत्री और कॉन्ग्रेस के महासचिव ओमान चरमपंथियों के डर से अपनी फेसबुक पोस्ट में बदलाव करने को मजबूर होना पड़ा।

बीजेपी नेता शोभा सुरेंद्रन ने ट्वीट किया कि केरल में स्थिति इतनी खतरनाक हो गई है कि दोनों नेताओं को एक मलयाली की हत्या पर दुख व्यक्त करते हुए अपनी पोस्ट एडिट करनी पड़ी क्योंकि वे धार्मिक कट्टरपंथियों से डरते हैं।

बीजेपी ने लेफ्ट और कॉन्ग्रेस पर लगाया धार्मिक कट्टरपंथियों से डरने का आरोप

संघ परिवार ने आरोप लगाया कि सीएम पिनराई विजयन ने सौम्या संतोष की हत्या पर की गई अपनी पोस्ट से एक पैराग्राफ हटा दिया। वहीं चांडी की पहले की पोस्ट में कहा गया था कि ‘चरमपंथियों’ के हमले में सौम्या मारी गई थीं।’ लेकिन बाद में सोशल मीडिया में विरोध बढ़ने के बाद ‘चरमपंथ’ शब्द को हटा दिया गया। बीजेपी के प्रदेश अध्यक्ष के. सुदंरन ने पूछा कि क्या सत्ताधारी पार्टी और विपक्ष सौम्या की हत्या पर इसलिए चुप हैं क्योंकि हमास चरमपंथी उनके सहयोगी हैं।

सोशल मीडिया में फिलिस्तीन के समर्थकों ने कॉन्ग्रेस को याद दिलाया कि इंदिरा गाँधी के प्रधानमंत्री रहने के दौरान भारत के फिलिस्तीन के साथ कितने करीबी संबंध थे। उन्होंने इंदिरा के साथ फिलिस्तीन लिबरेशन ऑर्गनाइजेशन (पीएलओ) के नेता यासिर अराफात की पुरानी तस्वीरें पोस्ट कीं।

सीपीएम ने की इजरायल की निंदा, फिलिस्तान के समर्थन की अपील

वहीं सीपीएम पोलित ब्यूरो ने फिलिस्तीन पर इजरायल के हमले के खिलाफ एक बयान जारी किया है। इसमें कहा गया है, ”गाजा पट्टी पर इजरायल द्वारा किए गए हवाई हमले कई फिलिस्तीनी नागरिकों की मौत का कारण बने।”

बयान में कहा गया है, “इजरायल फिलिस्तीनियों पर हमला करके पूर्वी यरुशलम के पूर्ण कब्जे की ओर बढ़ रहा है, जो यहाँ यहूदी बस्तियों के लिए रास्ता बनाने की कोशिशों का विरोध कर रहे थे।” इसमें कहा गया है कि “नेतन्याहू, जो लगातार इजरायल चुनावों में बहुमत हासिल करने में विफल रहे थे, उन्होंने अपने तुच्छ राजनीतिक लाभ के लिए ये हमले शुरू किए।”

बयान में कहा गया है, ”सीपीएम इन कृत्यों की निंदा करती है और भारत सरकार से फिलिस्तीन के लोगों का समर्थन करने की माँग की।” वहीं मुख्यमंत्री पिनराई विजयन ने विदेश मंत्री एस. जयशंकर को सौम्या के शव को वापस लाने के लिए खत लिखा।

केरल में मुस्लिम संगठनों ने गाजा क्षेत्र में हिंसा बढ़ने के बाद अपना विरोध प्रदर्शन तेज कर दिया है। कई संगठनों ने ईद-उल-फितर मनाते हुए फिलिस्तीन के लोगों के खड़े होने की अपील की है। भारत में फिलिस्तीन के राजदूत अदनान अबुल हयाजा, फिलिस्तीन के साथ एकजुटता व्यक्त करने के लिए ईद-उल-फितर के दिन कोझिकोड में मुस्लिम यूथ लीग द्वारा आयोजित किए जाने वाले ऑनलाइन समारोह में मुख्य अतिथि होंगे।

‘मर जाओ थंडर वुमन’… इजराइल के समर्थन पर गैल गैडोट पर टूटे कट्टरपंथी, ‘शाहीन बाग की दादी’ के लिए कभी चढ़ाया था सिर पर

इजराइल-हमास और फिलिस्तीनी इस्लामी जिहादियों में जारी लड़ाई के बीच हॉलीवुड में “थंडर वुमन” के नाम से जानी जाने वाली इजराइली अभिनेत्री गैल गैडोट ने ट्वीट कर अपने देश में शांति की कामना की है।

गैल गैडोट ने ट्वीट किया कि उनके देश (इजराइल) में युद्ध चल रहा है और ऐसे में उन्हें अपने परिवार, दोस्तों और इजराइल के लोगों की चिंता है। उन्होंने ट्वीट किया, “यह एक दुष्चक्र है जो बहुत लंबे समय से चल रहा है। इजराइल को एक स्वतंत्र और सुरक्षित राष्ट्र के रूप में जीने का हक है। हमारे पड़ोसियों को भी ये अधिकार है। मैं पीड़ितों और उनके परिवारों के लिए प्रार्थना करती हूँ। मैं इस अकल्पनीय शत्रुता को खत्म करने की प्रार्थना करते हुए अपने नेताओं से इस समस्या का समाधान ढूँढने का निवेदन करती हूँ। ताकि हम कंधे से कंधा मिलाकर शांति से रह सकें।”

ये हर व्यक्ति का अधिकार है कि वो अपने देश के प्रति अपना समर्पण दिखा सके। हालाँकि, लिबरल्स और कट्टरपंथी इस्लामियों को एक्ट्रेस की ये बात अच्छी नहीं लगी। उन्होंने ट्विटर पर अभिनेत्री गैल गैडोटा के खिलाफ गुस्से और नफरत भरे ट्वीट करने शुरू कर दिए। अभिनेत्री पर नरसंहार का समर्थन करने का आरोप लगाया गया।

इस तथ्य के बावजूद कि फिलिस्तीनी आतंकवादी इजराइल पर रॉकेट और मिसाइलों से हमला कर रहे थे, इस्लामियों ने इजराइल पर ही “टेलीविज़न और डॉक्यूमेंटेड एथनिक क्लींजिंग” करने का आरोप लगाया।

कट्टरपंथी इस्लामियों ने गैल गैडोट की फिल्मों का बॉयकॉट करने की माँग करते हुए उन्हें कातिल करार दिया।

इतना ही नहीं कुछ कट्टर इस्लामियों ने यह भी दावा किया कि इजराइल कोई देश ही नहीं है। इसलिए उसे “मेरा देश” नहीं कहा जा सकता है। बता दें कि गैल गैडोट ने कहा था मेरा देश युद्ध में है।

एक ट्विटर यूजर ने फिलिस्तीन के प्रति अपना दर्द शेयर करते हुए अपने देश में शांति की कामना के लिए गैल गैडोट के मरने की कामना कर डाली।

कुछ ने इस अवसर का इस्तेमाल यहूदियों के खिलाफ नफरत फैलाने के लिए भी किया।

वहीं कुछ “लिबरल्स” को गैल गैडोट द्वारा अपने देश के लिए शांति की कामना करना “बेकार” लगा।

बता दें कि यह सब हमास द्वारा इजराइल के लोगों पर किए गए आतंकी हमले से ध्यान भटकाने के लिए किया जा रहा है। गौरतलब है कि गैडोट ने मॉडलिंग और अभिनय में कदम रखने से पहले दो साल के लिए इजराइली डिफेंस फोर्सेज में एक सैनिक के तौर पर कार्य किया था।

खास बात यह है कि गैडोट वही अभिनेत्री हैं, जिन्होंने दिसंबर 2020 में ‘शाहीन बाग वाली दादी’ बिलकिस बानो की सराहना की थी, जो कि फरवरी 2020 में हिंदू विरोधी दंगों और सीएए के विरोध प्रदर्शनों का एक चेहरा थीं।

हालाँकि, गैडोट ने जल्द ही बिलकिस का समर्थन करने वाली अपनी इंस्टाग्राम पोस्ट को डिलीट कर दिया था।

इजराइल-फिलिस्तीन संघर्ष

इजराइल और फिलिस्तीन के बीच संघर्ष तब बढ़ गया, जब फिलिस्तीनी आतंकवादी संगठन हमास ने यरुशलम पर कई रॉकेट दागे, जिसका इजराइली रक्षा बलों ने मुँहतोड़ जवाब दिया। मौजूदा संघर्ष का मुख्य कारण शेख जर्राह का संपत्ति विवाद है। ये एक ऐसा संपत्ति विवाद है जो कि पूर्वी यरूशलेम के पड़ोस से लगभग 300 फिलिस्तीनियों को बाहर निकालने का कारण बन सकता है।

‘रमजान के महीने में इजरायली सेना लोगों को बेघर कर रही’ – फिलिस्तीन के समर्थन में नोरा फतेही

बॉलीवुड में अपने डांस के कारण चर्चा मे रहने वाली नोरा फतेही ने हाल में फिलिस्तीन के लिए आवाज उठाई। अभिनेत्री ने इंस्टाग्राम पर अपनी स्टोरी शेयर करते हुए समझाया कि आखिर इजरायल ने यरुशलम में क्या किया। उन्होंने हालिया घटनाओं को अन्याय करार देते हुए इसके विरुद्ध प्रदर्शन की बात कही।

नोहा फतेही ने शेख जर्राह के लोगों पर बात करते हुए समझाया कि कोई भी व्यक्ति नस्लवाद, समानता, लैंगिक समानता, महिला अधिकार या भ्रष्टाचार जैसे मुद्दों पर बात करने के लायक नहीं है, यदि वह फिलिस्तीनियों पर हुए अत्याचार को नकारता है। उन्होंने कहा कि किसी को यह चुनने का अधिकार नहीं है कि किसके मानवाधिकार दूसरों की तुलना में अधिक महत्वपूर्ण हैं। 

Israel-Palestine Conflict: Nora Fatehi Raises Concerns Over Violence Against Palestinians

अपनी स्टोरी में नोरा ने एक पोस्टर शेयर किया जिसमें इजरायली फोर्स, जो नोरा के मुताबिक फिलिस्तीनियों को उनके घर से बाहर करना चाहते हैं, उनके विरुद्ध प्रोटेस्ट करने की बात थी। इसमें 11 मई की तारीख लिखी देखी जा सकती है।

जानकारी के मुताबिक प्रदर्शन का प्रमुख उद्देश्य हिंसा रोकने से है, जिसमें सैंकड़ों लोग घायल हुए। उनकी लास्ट स्टोरी में ये भी बताया गया किस तरह फिलिस्तीनियों पर हुआ हमला किसी भी रूप में उन्हें स्वीकार्य नहीं है।

Israel-Palestine Conflict: Nora Fatehi Raises Concerns Over Violence Against Palestinians

उन्होंने अपने सभी फॉलोवर्स से पूर्वी यरूशलेम में शेख जर्राह के फिलिस्तीनियों के साथ एकजुटता से खड़े होने का आग्रह किया। उन्होंने लिखा, “विश्व को फिलिस्तीन के शेख जर्राह के लोगों के साथ एकजुटता दिखानी चाहिए। इजरायली सेना वहाँ लोगों को रमजान के महीने और महामारी में घरों से बाहर कर रहे हैं। वहाँ हिंसा हो रही है, वो भी अधिकतर बच्चों के साथ। ये अंतरराष्ट्रीय युद्ध अपराध है और अमानवीय है।”

आगे उन्होंने सभी विश्व नेताओं से फिलिस्तीनियों के मानवाधिकारों की रक्षा करने का भी आह्वान किया। फिर नोरा फतेही ने मस्जिद अल अक्सा हिंसा पर और प्रकाश डाला, जहाँ उनके अधिकारों के उल्लंघन के खिलाफ शांतिपूर्वक विरोध प्रदर्शन के लिए एक विशाल फिलिस्तीनी भीड़ पर हमला किया गया था। नोरा का कहना है कि यरुशलम पर हुआ हमला कुछ समय में प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष तौर से विश्व के लोगों को प्रभावित करेगा।

बता दें कि नोरा फतेही के इन स्टोरीज के बाद सोशल मीडिया पर अलग बहस शुरू हो गई है। कुछ लोग हैं, जो इसके लिए फतेही को सराह रहे हैं। उनका कहना है कि भारत में अकेली अभिनेत्री हैं जो फिलिस्तान को समर्थन कर रही हैं। बाकियों को इनसे कुछ सीखना चाहिए। कम से कम इनमें इंसानियत तो हैं। वहीं कुछ कह रहे हैं कि नोरा भारत से कमाई करने के बाद भी इजरायल के विरुद्ध बोल रही हैं। इसलिए उनको वहीं चले जाना चाहिए।

कोरोना के नाम पर 37 करोड़ रुपए का लोन: मुस्तफा ने गिरफ्तार होने से पहले खरीदे फेरारी, बेंटले और लैम्बोर्गिनी

अमेरिका में कैलिफोर्निया के इरविने में फोनी बिजनेस के लिए कोरोना रिलीफ लोन लिया गया। 5 मिलियन डॉलर (लगभग 37 करोड़ रुपए) का लोन लेने वाले मुस्तफा कादिरी (38 वर्ष) ने हालाँकि लोन के नाम पर फर्जीवाड़ा किया। अब उसे गिरफ्तार किया गया है।

इस मामले में अभियोजन पक्ष ने सोमवार (10 मई 2010) को कहा कि आरोपित ने कोरोना रिलीफ लोन को बेफिजूल की छुट्टियों और फेरारी, बेंटले और लैम्बोर्गिनी कार खरीदने में खर्च कर दिया। उसे पिछले हफ्ते ही पुलिस ने गिरफ्तार किया था।

गौरतलब है कि कोरोना रिलीफ योजना को पिछले कोरोना वायरस के कारण तबाह हो चुके छोटे व्यापारियों की मदद करने के लिए शुरू किया गया था।

अमेरिका के अटॉर्नी ऑफिस की तरफ से इस बात की जानकारी दी गई है कि बैंक फ्रॉड, वायर फ्रॉड, पहचान छुपाने और मनी लॉन्ड्रिंग समेत कई मामलों में गिरफ्तार कादरी को फिलहाल दोषी नहीं पाया गया है। इस केस में कादरी का पक्ष रखने वाले अटॉर्नी बिलाल ए एस्साइली ने फिलहाल कुछ भी कहने से इंकार कर दिया है।

अभियोजन पक्ष ने दावा किया है कि क्वादरी ने तीन बैंकों में चार कंपनियों के नाम पर गलत तरीके से पीपीपी लोन के लिए अप्लाई किया था। जबकि, वास्तव में वो कंपनियाँ हैं ही नहीं। अभियोग के अनुसार आवेदन में परिवर्तित बैंक रिकॉर्ड, फर्जी टैक्स रिटर्न और कर्मचारियों के बारे में जानकारी शामिल है।

इतना ही नहीं अभियोजन अधिकारी ने दावा किया है कि आरोपित मुस्तफा कादरी ने फ्रॉड के लिए किसी दूसरे के नाम, सोशल सिक्योरिटी नंबर और हस्ताक्षर का इस्तेमाल किया था।

जाँच अधिकारियों का कहना है कि मुस्तफा ने 5 मिलियन का लोन हासिल किया था, जिसे उसने घूमने, स्पोर्ट्स कार खरीदने पर खर्च कर दिया। फेडरल एजेंट ने कादरी द्वारा खरीदी गई फेरारी, बेंटले और लैम्बोर्गिनी कार के साथ उसके बैंक खाते से 2 मिलियन (करीब 15 करोड़ रुपए) जब्त कर लिया है।

अमेरिका की जिला जज जोसफिन एल स्टेटन ने मामले की अगली सुनवाई को 29 जून तक के लिए बढ़ा दिया है। वहीं कादरी को 100,000 डॉलर (करीब 73 लाख रुपए) के बॉन्ड पर जमानत दे दी है।

कोविड कर रहा पुरुषों के प्राइवेट पार्ट को प्रभावित, बढ़ा रहा ‘नपुंसकता’, नई स्टडी में दावा

कोविड-19 से उबरने के बाद लंबे समय तक लोगों में कई स्वास्थ्य संबंधित समस्याएँ नजर आ सकती हैं लेकिन एक हालिया स्टडी में पता चला है कि कोरोना वायरस पुरुषों के पेनिस पर भी असर डाल रहा है। कोविड की वजह से पुरुषों में इरेक्टाइल डिस्फंक्शन (नपुंसकता) की समस्या पैदा हो रही है, जो लंबे समय तक उनकी यौन क्षमता को प्रभावित कर सकती है।

यूनिवर्सिटी ऑफ मियामी के शोधकर्ताओं द्वारा वर्ल्ड जनरल ऑफ मेंस हेल्थ में प्रकाशित शोध के मुताबिक कोरोना वायरस पुरुषों के पेनिस पर भी असर डाल रहा है। शोधकर्ताओं ने कोविड से संक्रमित हो चुके और इससे संक्रमित न होने वाले पुरुषों की ऊतक संरचना में भी अंतर पाया।

रिसर्च के मुताबिक, कोविड खून की नसों को नुकसान पहुँचा सकता है, जिससे शरीर के कई हिस्सों में खून की सप्लाई को नुकसान पहुंच सकता है, जिनमें पेनिस में स्पंज जैसे ऊतक भी शामिल हैं।

कोविड संक्रमित होने के बाद पुरुषों में दिखी नपुंसकता की समस्या

यूनिवर्सिटी ऑफ मियामी मिलर स्कूल ऑफ मेडिसिन के रिप्रोडक्टिव यूरोलॉजी प्रोग्राम के एसोसिएट प्रोफेसर और निदेशक रंजीथ रामासामी ने इस स्टडी का नेतृत्व किया। रामासामी ने कहा, “हमने देखा है कि पुरुष कोविड से संक्रमित होने के बाद इरेक्टाइल डिस्फंक्शन (नपुंसकता) की शिकायत करने लगे हैं।” उन्होंने कहा कि नपुंसकता “वायरस का प्रतिकूल प्रभाव हो सकता है”।

शोधकर्ताओं ने दो ऐसे पुरुषों पर शोध किया जिन्हें 6-8 महीने पहले कोविड हो चुका था। कोविड प्रभावित इन दोनों में से एक वायरस की वजह से अस्पताल में भर्ती हो चुका था जबकि दूसरे में कोरोना के हल्के लक्षण थे, लेकिन इनमें से किसी को कभी इरेक्टाइल डिसइंफेक्शन (नपुंसकता) की शिकायत नहीं थी।

शोधकर्ताओं को कोविड संक्रमित दो पुरुषों के लिंग के ऊतक में वायरस के अवशेष दिखाई दिए। डॉ. रामासामी ने कहा: “हमारे पायलट अध्ययन में, हमने पाया कि जो पुरुष पहले इरेक्टाइल डिसइंफेक्शन (नपुंसकता) की शिकायत नहीं करते थे, उन्हें कोविड-19 संक्रमण की शुरुआत के बाद बहुत गंभीर इरेक्टाइल डिसइंफेक्शन (नपुंसकता) की समस्या विकसित हो गई।”

कोविड-19 से रक्त वाहिकाओं को होने वाले नुकसान को एंडोथेलियल डिसफंक्शन के रूप में जाना जाता है। रामासामी ने कहा, “कोविड वायरस एंडोथेलियल कोशिकाओं में मौजूद होता है, जो पेनिस को रक्त की आपूर्ति करता है,। उन्होंने कहा, “हमें लगता है कि वायरस पेनिस में रक्त के प्रवाह को प्रभावित कर रहा है, जिससे नपुंसकता हो रही है।”

रामासामी ने कहा कि कोविड संक्रमित होने के बाद अगर किसी को भी इरेक्टाइल डिसइंफेक्शन (नपुंसकता) की समस्या नजर आए तो इसे अस्थाई मानकर टालने के बजाय तुरंत डॉक्टर से संपर्क करना जरूरी है, क्योंकि ये समस्या लंबे समय तक या हमेशा के लिए बनी रह सकती है।

फिलिस्तीनी आतंकी ठिकाने का 14 मंजिला बिल्डिंग तबाह, ईद से पहले इजरायली रक्षा मंत्री ने कहा – ‘पूरी तरह शांत कर देंगे’

इजरायल और फिलिस्तीन के बीच चल रहे खूनी संघर्ष में गाजा में मौतों का आँकड़ा 65 पहुँच गया। इजरायल में भी 7 लोगों के मरने की खबर है। अलजजीरा की खबर बताती है कि गाजा में हुई बमबारी में हमास का कमांडर बसीम इस्सा मारा गया। इसके अलावा वहाँ की तीन बिल्डिंग तबाह हो गई और हमास के सुरक्षा प्रतिष्ठानों को भी उड़ा दिया गया।

अलजजीरा की पत्रकार अरवा इब्राहिम के अनुसार 14 मंजिला यह बिल्डिंग कई मीडिया हाउस का ठिकाना था। जबकि इजरायल डिफेंस फोर्स की मानें तो इस बिल्डिंग में हमास मिलिट्री इंटेलिजेंस का ऑफिस था। इसी बिल्डिंग से खुफिया सैन्य गतिविधियों का संचार-संदेश किया जा रहा था।

गाजा के स्वास्थ्य मंत्रालय ने बताया कि अब तक वहाँ 16 बच्चों समेत 65 लोगों की मौतें हुई है। मंत्रालय ने कहा कि हमले में 365 लोग घायल हुए, जिनमें 86 बच्चे और 39 महिलाएँ भी शामिल हैं।

गाजा के हालिया हमले के बाद इजरायल में भी एक 5 साल के बच्चे की मरने और कम से कम 20 लोगों के घायल होने की खबर है। टाइम्स ऑफ इजरायल के अनुसार, गाजा की ओर से बुधवार रात दागा गया रॉकेट खिड़की को तोड़कर निकला और वहाँ मौजूद नाबालिग के सिर में गहरी चोट आई। घटना के कई घंटे बाद बच्चे को मृत घोषित कर दिया गया। वहीं उसकी माँ अब भी घायल है।

बच्चे की मृत्यु के बाद इजरायल में मौत की गिनती 7 हो गई है। इनमें 5 इजरायली, एक भारतीय और एक IDF सैनिक शामिल हैं। घटना के मद्देनजर इजरायली रक्षा मंत्री ने बेनी गैट्स ने बुधवार (मई 12, 2021) शाम को बयान जारी करके बताया कि वे ऐसे हमले तब तक नहीं रोकेंगे, जब तक दुश्मन पूरी तरह शांत नहीं होते।

उन्होंने कहा, “हमारी सेना के गाजा पट्टी और फिलिस्तीन में हमले बंद नहीं होंगे। हम अब तब तक रुकने को तैयार नहीं हैं, जब तक दुश्मन को पूरी तरह शांत नहीं कर देते। इसके बाद ही अमन बहाली पर कोई बात होगी। इजरायल अब लंबे समय तक शांति कायम करने के उपाय करके ही रहेगा।”

इधर, इजरायली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने बताया कि बुधवार को गाजा में 15 लोग मारे गए। इनमें एक ब्रिगेड कमांडर भी था। वह कहते हैं, “ये केवल शुरुआत है। हम उन्हें ऐसे मारेंगे, जैसा उन्होंने सपने में भी न सोचा हो।”

हमास के नेता हानिया ने भी इस बाबत बयान दिया। उनका कहना है कि अगर इजरायल जंग बढ़ाना ही चाहता है तो हम भी रुकने को तैयार नहीं हैं। उन्होंने चेतावनी दी है कि वे इजरायलियों की जिंदगी नर्क कर देंगे।

इजरायली सेना के मुताबिक बुधवार की सुबह कम से कम 180 रॉकेट दागे गए। जिसके बदले में IDF ने गाजा पट्टी में हमास अधिकारियों, उनके हथियारों और इन्फ्रास्ट्रक्चर को निशाना बनाते हुए हमला बोला। इजरायली पुलिस ने जानकारी दी कि अब तक 374 लोगों की गिरफ्तारी की जा चुकी है।

अंतरराष्ट्रीय समूह कर रहे शांति की अपील

कथित तौर पर अब तक इस संघर्ष में इजरायल की ओर से 350 से ज्यादा हवाई हमले सेना को निशाना बनाते हुए, हुए हैं। वहीं गाजा के इस्लामी गुट की ओऱ से अब तक 1000 रॉकेट लॉन्च किए जा चुके हैं। स्थिति देख साफ पता चल रहा है कि यरुशलम की अल अक्सा मस्जिद पर जुमे की नमाज से शुरू हुआ संघर्ष अब युद्ध में तब्दील होता जा रहा है। इस बीच अंतरराष्ट्रीय समुदाय दोनों पक्षों से तनाव कम करने की अपील कर रहे हैं।

अंतरराष्ट्रीय समुदायों को चिंता है कि कहीं स्थिति हाथ से न निकल जाए। संयुक्त राष्ट्र के मध्य पूर्व शांति राजदूत टॉर वेनेसलैंड ने कहा कि दोनों पक्ष इसे व्यापक युद्ध की ओर ले जा रहे हैं। संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंटोनियो गुतारेस ने कहा है कि वे हिंसा को लेकर काफी चिंतित हैं।

जर्मनी ने इजरायल पर हो रहे हमलों की निंदा करते हुए कहा कि इन हमलों को कहीं से कहीं तक उचित नहीं ठहराया जा सकता। वहीं तुर्की के राष्ट्रपति रेसेप तैयप एर्दोगन ने रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन से कहा कि फिलिस्तीनियों के प्रति इजरायल के रवैये के खिलाफ अंतरराष्ट्रीय समुदाय को उसे कड़ा और कुछ अलग सबक सिखाना चाहिए।

बता दें कि अलजजीरा की ओर से हैरी फॉसेट दक्षिणी इजरायल से रिपोर्ट कर रहे हैं। उन्हें वहाँ लोकल रिपोर्ट से पता चला है कि इजरायल का विचार एयर स्ट्राइक के साथ साथ ग्राउंड पर भी फोर्स इस्तेमाल करने का बन रहा है। वह कहते हैं, “इजरायल ने ऐसा 2014 से नहीं किया। इसमें इजरायली सैनिकों की जान जाने का डर है। इसलिए ये निर्णय इतना आसान नहीं है। लेकिन ऐसा लग रहा है कि ये विकल्प भी उनके पास है।”

महाराष्ट्र: डिप्टी CM अजित पवार की ‘छवि चमकाने’ के वास्ते, उद्धव सरकार उनके सोशल मीडिया अकाउंट्स पर खर्च करेगी 6 करोड़ रुपये

पैसों की कमी से जूझ रही महाराष्ट्र सरकार ने उपमुख्यमंत्री अजित पवार के सोशल मीडिया अकाउंट्स को हैंडल करने के लिए करीब 6 करोड़ रुपये खर्च किए हैं। पवार के पास वित्त और योजना विभाग भी हैं।

टाइम्स ऑफ इंडिया की रिपोर्ट के मुताबिक, राज्य के सामान्य प्रशासन विभाग ने बुधवार (12 मई) को सोशल मीडिया खातों को संभालने के लिए एक बाहरी एजेंसी की नियुक्ति के तौर-तरीकों पर अंडर-सेक्रेटरी आरएन मुसाले द्वारा हस्ताक्षरित एक आदेश को लागू कर दिया। इस एजेंसी को यह भी कार्य दिया गया है कि वह अजित पवार द्वारा लिए गए फैसलों को आम लोगों तक पहुँचाना सुनिश्चित करे।

मुसाले के आदेश के मुताबिक बाहरी एजेंसी अजित पवार के ट्विटर हैंडल और फेसबुक, ब्लॉगर, यूट्यूब और इंस्टाग्राम अकाउंट्स को हैंडल करेगी। इसके अलावा वह साउंड क्लाउड, वॉट्सऐप बुलेटिन, टेलीग्राम चैनल और एसएमएस को भी संभालेगी। बाहरी एजेंसी की नियुक्ति उप मुख्यमंत्री के सचिवालय और सूचना और जनसंपर्क महानिदेशालय के परामर्श से की जाएगी।

‘अजित पवार के फैसलों को आम लोगों तक पहुँचाए एजेंसी’

आदेश में उल्लेख किया गया है कि महाराष्ट्र के सूचना और जनसंपर्क महानिदेशालय (DGIPR) में सोशल मीडिया को संभालने के लिए पेशेवर और तकनीकी क्षमता का अभाव है, इसलिए यह महसूस किया गया कि यदि किसी बाहरी एजेंसी को काम पर रखा गया तो यह उचित होगा। मुसाले ने अपने आदेश में कहा, ‘यह सुनिश्चित करना बाहरी एजेंसी की जिम्मेदारी होगी कि महत्वपूर्ण निर्णय और संदेश लोगों तक पहुंचे और वे उपमुख्यमंत्री के साथ ट्विटर हैंडल, फेसबुक, ब्लॉगर, यूट्यूब, इंस्टाग्राम, साउंड क्लाउड, वॉट्सऐप और टेलीग्राम चैनल पर संवाद करने में सक्षम हों।’

सामान्य प्रशासन विभाग (GAD) ने निर्देश दिया है कि बाहरी एजेंसी का चुनाव केवल उन एजेंसियों में से होना चाहिए जो पहले से ही सूचना और जनसंपर्क महानिदेशालय (DGIPR) के पैनल पर हैं, और यह सुनिश्चित करना कि सोशल मीडिया पर संदेश त्रुटिरहित हों, सूचना और जनसंपर्क महानिदेशालय की जिम्मेदारी होगी। इस आदेश में कहा गया है कि अगर जरूरत पड़ी सूचना और जनसंपर्क महानिदेशालय (DGIPR) उस एजेंसी को और पैसा उपलब्ध करा सकता है जोकि पहले ही मुख्यमंत्री कार्यालय (CMO) के लिए काम कर रही है। ये भी सुनिश्चित करना होगा कि मुख्यमंत्री कार्यालय और उपमुख्यमंत्री कार्यालय से जारी संदेश एक जैसे न हों।

‘अजित पवार की इमेज चमकाने के लिए बाहरी एजेंसी की जरूरत क्यों?’

संयोग से मुख्यमंत्री कार्यालय ने अपने सोशल मीडिया अकाउंट को संभालने के लिए पहले ही जुलाई 2020 में एक बाहरी एजेंसी नियुक्त की थी। एक वरिष्ठ अधिकारी के मुताबिक एजेंसी की नियुक्ति करते समय ई-टेंडरिंग की प्रक्रिया का पालन किया गया था।

वहीं एक वरिष्ठ नौकरशाह ने अजित पवार की इमेज चमकाने के लिए एक बाहरी एजेंसी की नियुक्ति पर सवाल उठाए। उन्होंने पूछा, ”हमारे पास एक सूचना और जनसंपर्क महानिदेशालय है जिसमें करीब 1200 कर्मचारी हैं और जिसका सालाना बजट 150 करोड़ रुपए है। तो हमें उपमुख्यमंत्री की छवि चमकाने के लिए किसी बाहरी एजेंसी की क्या जरूरत है?”

2022 में भारत 10.1% के ग्रोथ रेट साथ चीन को पछाड़ तीव्र वृद्धि दर हासिल करने वाली होगी अर्थव्यवस्था

भारत इस समय कोरोनो वायरस की दूसरी लहर से जूझ रहा है। इसी बीच संयुक्त राष्ट्र ने मंगलवार (11 मई 2021) को अपने बयान में कहा कि भारत की जीडीपी (सकल घरेलू उत्पाद) वृद्धि दर 2022 में 10.1 प्रतिशत रहने का अनुमान है।

वह उस समय दुनिया के प्रमुख देशों में तीव्र वृद्धि दर हासिल करने वाली अर्थव्यवस्था होगी। इसमें यह भी कहा गया है कि 2022 में यह वृद्धि दर चीन के मुकाबले भी अधिक होगी। रिपोर्ट में चीन की वृद्धि दर 2022 में 5.8 प्रतिशत रहने का अनुमान लगाया गया है, जो 2021 में 8.2 प्रतिशत की संभावना से कम है।

हालाँकि, संयुक्त राष्ट्र ने यह भी कहा कि 2021 का वृद्धि परिदृश्य अभी काफी नाजुक दिख रहा है। इसका कारण देश में माहामारी का तेजी से फैलना है। संयुक्त राष्ट्र ने विश्व आर्थिक स्थिति और संभावना (डब्ल्यूईएसपी) रिपोर्ट की मध्यावधि समीक्षा में कहा कि भारत की वृद्धि दर 2022 में 10.1 प्रतिशत रहेगी। यह जनवरी में जारी रिपोर्ट में 5.9 प्रतिशत वृद्धि के मुकाबले लगभग दोगुनी है। वहीं, मध्यावधि रिपोर्ट में भारत की वद्धि दर 2021 में 7.5 प्रतिशत रहने का अनुमान लगाया गया है, जबकि 2020 में इसमें 6.8 प्रतिशत की गिरावट का अनुमान था।

वहीं, नोमुरा के डॉ. अरुदीप नंदी का कहना है कि कोरोनो वायरस के प्रकोप के कारण अर्थव्यवस्था में मंदी है और यह कम गंभीर है। भारत में कोरोनो वायरस के खिलाफ जारी जंग के बीच Nomura India Business Resumption Index (एनआईबीआरआई) नौ मई को समाप्त सप्ताह में महामारी पूर्व स्तर के 64.5 प्रतिशत पर पहुँच गया है। इस सप्ताह इसमें 5 प्रतिशत की और गिरावट आई है।

NIBRI में गिरावट के लिए देश में कोरोना महामारी को फैलने से रोकने के लिए 20 से अधिक राज्यों ने ‘लॉकडाउन’ और अन्य पाबंदियाँ लगाने को जिम्मेदार ठहराया जा सकता है, जो अनुक्रमिक विकास पर प्रभाव डाल रहे हैं।

डॉ. अरुणदीप नंदी भारत की स्थिति को लेकर उत्साहित हैं, उन्होंने कहा कि इस बार जीडीपी पर प्रभाव पिछले वर्ष की तुलना में कम होगा। ईटी नाउ को दिए एक इंटरव्यू में उन्होंने कहा कि पिछले साल के लॉकडाउन में भारत लगभग 55 प्रतिशत के स्तर से नीचे था। वहीं, इस वर्ष मंदी अपेक्षाकृत कम है, क्योंकि सूचकांकों से पता चलता है कि भारत 35 प्रतिशत पूर्व-महामारी के स्तर से नीचे है।

COVID-19 की दूसरी लहर के कारण अर्थव्यवस्था में मंदी कैसे सीमित होगी। इस पर उन्होंने बताया कि कोरोना की पहली लहर से हम सभी अंजान थे। इस दौरान सभी कोरोना वायरस के प्रकोप से भयभीत थे। इसने अर्थव्यवस्था को तबाह कर दिया। हालाँकि, दूसरी लहर में उनका तर्क है कि इस बार अर्थव्यवस्था को नुकसान सीमित होने की संभावना है।

बता दें कि ‘नोमुरा इंडिया बिजनेस रिजम्पशन इंडेक्स’ (एनआईबीआरआई) में उल्लेखनीय गिरावट यह संकेत देता है कि विभिन्न राज्यों में ‘लॉकडाउन’ से तिमाही दर तिमाही आधार पर वृद्धि दर पर असर पड़ेगा।

‘हमास और फिलिस्तीनी इस्लामिक जिहादियों को चुकानी होगी भारी कीमत’: बेंजामिन नेतन्याहू ने दिए बड़े हमले के संकेत

फिलिस्तीन और इजरायल के बीच अब आर-पार की जंग छिड़ गई है। मंगलवार (मई 11, 2021) को फिलिस्तीन के हमास संगठन ने अब तक का सबसे बड़ा हमला बोलते हुए इजराइल पर 1000 से अधिक रॉकेट दागे। तो वहीं इजराइल ने मंगलवार को गाजा पर हवाई हमले कर दो बहुमंजिला इमारतों को निशाना बनाया। इस बीच इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू का कहना है कि इजरायली सैन्य अभियान ने गाजा आतंकवादियों को बड़ा झटका दिया है। उन्होंने चेतावनी दी कि यह लड़ाई कुछ समय के लिए जारी रहेगी।

मंगलवार देर रात एक राष्ट्रीय स्तर पर प्रसारित भाषण में, उन्होंने कहा कि हमास और फिलिस्तीनी इस्लामिक जिहाद के आतंकी समूहों को इजरायल के नागरिकों पर अपने हमलों के लिए भारी कीमत चुकानी होगी। उन्होंने कहा कि इजरायल एक गहन अभियान के साथ आगे बढ़ेगा, लेकिन मिशन को पूरा करने में ‘समय लगेगा’ और इजरायल के निवासियों को अधिकारियों द्वारा जारी किए गए सभी सुरक्षा निर्देशों का पालन करना चाहिए।

रक्षा मंत्री बेनी गैंट्ज़ और आईडीएफ चीफ ऑफ स्टाफ अविव कोहवी के साथ बयान देते हुए, नेतन्याहू ने फिलिस्तीनी आतंकवादी समूहों को दोषी ठहराते हुए कहा, “उनका खून उनके हाथों पर है।”

हमले के एक दिन बाद प्रधानमंत्री ने कहा कि हवाई हमले से तीन घातक परिणाम आए, जिसमें एक भारतीय नर्स की मौत भी शामिल है। उन्होंने कहा, “हम एक दुश्मन के सामने एकजुट होते हैं। हम सभी मृतकों के लिए शोक मनाते हैं और घायलों के लिए प्रार्थना करते हैं और आईडीएफ बलों के साथ खड़े हैं।”

इजरायल के रक्षा मंत्री का बयान

नेतन्याहू के बाद रक्षा मंत्री गैंट्ज़ ने बोलते हुए कहा कि इज़रायल रक्षा बल सभी को सुरक्षित रखता है, यहूदी और अरब समान हैं। इसके अलावा उन्होंने देश के भीतर दो समुदायों के बीच शांत रहने का भी आह्वान किया। 

हालाँकि, रक्षा मंत्री ने बताया कि प्रतिशोध लिया जाएगा और आईडीएफ ने ‘पाइप लाइन में कई लक्ष्यों को’ पहचान लिया है कि वह गाजा में स्ट्राइक कर सकता है। उन्होंने कहा कि इजरायल पर फायर करने के उनके लापरवाह फैसले के कारण आतंकी संगठन बुरी तरह से प्रभावित हुए हैं और आगे भी होते रहेंगे।

IDF चीफ ने प्रतिक्रिया दिया

आईडीएफ चीफ कोहवी ने स्पष्ट किया कि इजरायली सेना केवल एन्क्लेव में फिलिस्तीनी आतंकवादी समूहों को कड़ी टक्कर दे रही है और पिछले डेढ़ दिनों में 500 से अधिक टारगेटेड स्ट्राइक किए हैं।

कोहवी ने दोहराया, “हम सबसे गंभीर तरीके से आतंकी समूहों पर प्रहार करने के लिए दृढ़ हैं।” सेना ने शुरू में यह माना कि इजरायल राज्य के विनाश के लिए समर्पित एक आतंकवादी संगठन हमास, इस समय इजरायल के साथ पूर्ण रूप से संघर्षरत नहीं था। हालाँकि, पिछले दो दिनों में उस आकलन में बदलाव आया जब फिलिस्तीनी आतंकी समूहों ने दो घटनाओं को अंजाम दिया, अल-अक्सा हमले के बाद यरूशलेम में अशांति और इजरायल पर हमला करने के लिए शेख जर्राह से फिलिस्तीनी परिवारों को बेदखल करना।

इसी घटना पर बोलते हुए, इज़रायल की आंतरिक सुरक्षा एजेंसी शिन बेट के प्रमुख नादव अरगमन ने घोषणा की कि आतंकवादी संगठनों द्वारा हिंसा के बाद ‘अब बात करने का समय नहीं है।’

इजरायल पर हमला

हमास आतंकी समूह, जो वर्तमान में गाजा पर शासन करता है, ने दावा किया कि इजरायल पर एक हिंसक हमले में एक बार में 130 से अधिक रॉकेट लॉन्च किए गए थे। इजरायली बलों के मुताबिक, फिलिस्तीन इस्लामिक जिहाद के आतंकवादी भी इजरायल पर हमला करने वाले रॉकेट लॉन्च कर रहे हैं।

इजरायल आतंकी ठिकाने पर जवाबी हमले में लगा हुआ है जिसके परिणामस्वरूप हमास के दो शीर्ष नेता मारे गए। एक अपडेट देते हुए नेतन्याहू ने बताया कि सेना ने अब तक गाजा पट्टी में सैकड़ों ठिकानों को निशाना बनाया है और आश्वासन दिया है कि छापेमारी जारी रहेगी।