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जहर खाकर मर गई एक और हिंदू बेटी… कॉलेज जाती तो रोककर छेड़खानी करता था रिजवान-भेजता था गंदे मैसेज: पुलिस से शिकायत करने पर कहा- तुम्हारे पूरे परिवार को मार डालूँगा

उत्तर प्रदेश के इटावा में एक हिन्दू छात्रा ने जहर खाकर आत्महत्या कर ली। छात्रा रिजवान नाम के युवक की प्रताड़ना से परेशान हो गई थी। छात्रा के पुलिस के पास शिकायत करने के बाद रिजवान ने उसे घर जाकर धमकाया भी। इससे तंग आकर पीड़िता ने अपनी जान ले ली। पुलिस ने अब इस विषय में FIR दर्ज कर रिजवान और उसके भाई को गिरफ्तार किया है।

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, यह घटना इटावा के ऊसराहार थाना क्षेत्र के एक गाँव की है। यहाँ एक 19 वर्षीय छात्रा में बीएससी सेकेंड इयर में पढ़ती थी। उसके पिता और भाई दिल्ली में नौकरी करते हैं। घर पर माँ और बेटी ही रहती थीं। 25 अप्रैल 2025 को छात्रा के भाई और पिता गाँव पहुँचे।

तब पीड़िता ने खुद पर बीती परेशानी की जानकारी दी। छात्रा के भाई ने बताया कि 24 अप्रैल 2025 को रिजवान ने बहन को धमकी दी थी कि तुम्हारे पूरे परिवार को मार देंगे। बहन ने पिता को सूचना दी, जिसके बाद रिजवान के परिजनों से शिकायत की। लेकिन उसके परिवार वाले पिता को ही धमकाने लगे।

26 अप्रैल 2025 को छात्रा के पिता ने थाने में रिजवान और उसके दो साथियों के खिलाफ तहरीर दी। पिता ने तहरीर में बताया, “रिजवान आए दिन मेरी बेटी के मोबाइल पर अश्लील मैसेज भेजता है। जबरदस्ती मिलने के लिए बुलाता है। इनकार करने पर भाई को मारने की धमकी भी देता है। बेटी साइकिल से कॉलेज जाती है तो रास्ते में रोककर उसके साथ छेड़खानी करता है।”

छात्रा के भाई ने कहा कि पुलिस से शिकायत के बाद रिजवान बहन को धमकाने के लिए घर तक पहुँच गया। जिससे परेशान होकर बहन ने 26 अप्रैल 2025 की रात को जहर खाकर जान दे दी। छात्रा की मौत के बाद गाँव में तनाव का माहौल है। इसके बाद पुलिस ने FIR दर्ज की और रिजवान तथा उसके भाई सलमान को गिरफ्तार कर लिया।

शनिवार (03 अप्रैल 2025)को शव गाँव पहुँचते ही ग्रामीणों ने पुलिस के खिलाफ प्रदर्शन शुरु किया। ग्रामीणों ने घटना के बाद थानाध्यक्ष मंसूर अहमद के खिलाफ कार्रवाई प्रदर्शन किया है और कार्रवाई की माँग की है। हिंदू संगठन भी मामले को लेकर आक्रोश में हैं।

पीड़िता का अंतिम संस्कार करवाया गया है। वहीं लापरवाही बरतने के चलते मंसूर अहमद को लाइन हाजिर कर दिया गया है। इलाके में तनाव के चलते भारी पुलिस बल तैनात किया गया है।

‘दत्तात्रेय गोत्री-कौल ब्राह्मण’ राहुल गाँधी नहीं रहे हिंदू, शंकराचार्य ने किया बहिष्कृत: बोले अविमुक्तेश्वरानंद- मनुस्मृति को नहीं मानने वाला हमारे धर्म का नहीं, मंदिरों में न मिले प्रवेश

उत्तराखंड के रुद्रप्रायग स्थित ज्योतिर्मठ के शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद ने राहुल गाँधी को हिन्दू धर्म से निष्कासित किए जाने का ऐलान किया है। संसद में मनुस्मृति के विरुद्ध दिए गए उनके बयान के कारण शंकराचार्य ने ये ऐलान किया। उन्होंने कहा कि प्रयागराज में महाकुंभ हो रहा था और धर्म-संसद में सनातनधर्मियों के प्रश्न आते थे जिनका जवाब सभासदों द्वारा दिया जाता था। उसी दौरान राहुल गाँधी को लेकर प्रश्न आया था। बकौल अविमुक्तेश्वरानंद, राहुल गाँधी ने कहा था कि बलात्कारी बाहर घूम रहे हैं और पीड़िता बिटिया अंदर रहने को मजबूर हैं।

ज्योतिषपीठ के शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद ने कहा कि घटना पर चर्चा से उन्हें कोई आपत्ति नहीं है और पीड़िता को पीड़ा को समझकर संसद में उठाना अच्छी बात है और संवेदनशील व्यक्ति इसे लेकर प्रश्न उठाएगा। हालाँकि, उन्होंने आगे कहा कि राहुल गाँधी ने इस पीड़ा को व्यक्त करते हुए आगे कहा कि बलात्कारी को संरक्षण देना हमारे संविधान में नहीं लिखा है, फिर उन्होंने सत्तापक्ष की तरफ उँगली दिखाकर कहा कि ‘तुम्हारी किताब’ में ऐसा लिखा है। शंकराचार्य ने पूछा कि वो किताब कौन सी है?

अविमुक्तेश्वरानंद ने कहा, “राहुल गाँधी ने अगले वाक्य में ख़ुद साफ़ कर दिया कि मनुस्मृति में ऐसा लिखा है। मनुस्मृति इस संसार का पहला संविधान है, हम हिन्दू इसे मानते हैं। उससे ही प्रेरणा लेकर कई संविधान रचे गए, हम आज भी उसके अनुसार अपना जीवन चलाते हैं। इसकी किसी बात से आप सहमत न हो सकते हैं या हो सकता है कि कुछ आपको समझ में न आ रहा हो या परिस्थितियों में बदलाव के कारण कोई बात आपको अच्छी नहीं लग रही हो और आप कहें कि आप इसे नहीं मान पा रहे हैं।”

अविमुक्तेश्वरानंद ने मनुस्मृति को आक्षेप करने का विरोध करते हुए कहा कि राहुल गाँधी के बयान से साफ़ हो गया कि राहुल गाँधी इसे अपनी किताब नहीं मानते, अगर वो हिन्दू होते तो इसे अपनी किताब मानते। अविमुक्तेश्वरानंद ने सभी 18 स्मृतियों को हिन्दुओं की किताब बताते हुए इन्हें धर्मशास्त्र करार दिया। उन्होंने कहा कि जो मनुस्मृति को अपनी किताब नहीं मानता वो हिन्दू नहीं हो सकता, उनके हिन्दू होने में समस्या है। शंकराचार्य ने स्पष्ट कहा कि राहुल गाँधी को हिन्दू धर्म का न माना जाए और मंदिरों में प्रवेश न दिया जाए।

याद दिला दें कि राहुल गाँधी ने दिसंबर 2024 में कहा था कि भाजपा के लिए संविधान से ऊपर मनुस्मृति है। वहीं पिछले साल राजद की प्रवक्ता प्रियंका भारती द्वारा ‘इंडिया टीवी’ के एक शो में मनुस्मृति के पन्ने फाड़ने के बाद इसे लेकर विवाद हो गया था। इसे दलित विरोधी पुस्तक बताया गया, जबकि डॉ आंबेडकर ने संविधान निर्माण के दौरान मनु महाराज द्वारा महिलाओं को संपत्ति में अधिकार दिए जाने की प्रशंसा की थी। इस विवाद के बाद मनुस्मृति की बिक्री भी बंपर तरीके से बढ़ गई थी।

त्रिपुरा के रेलवे स्टेशन पर धड़ाधड़ पकड़े जा रहे बांग्लादेशी घुसपैठिए, आखिर ये घुसते कैसे हैं: गिरफ्तारी के बाद इनका क्या होता है?

उत्तरपूर्व का राज्य बीते कई दशकों से अवैध घुसपैठ का दंश झेलता रहा है। यह घुसपैठ पिछले डेढ़ वर्षो में तेजी से बढ़ी है। घुसपैठ करने वाले रोहिंग्या मुस्लिम और बांग्लादेशी नागरिक हैं जो भारत और बांग्लादेश के बीच कई जगह पर खुली सीमा का फायदा यह घुसपैठिए उठाते हैं।

अगस्त, 2024 में बांग्लादेश में शेख हसीना के सत्ता से बाहर होने के बाद से यह स्थिति और भी बिगड़ी है। इस्लामी हिंसा के बाद बांग्लादेश की सत्ता पर कब्जा जमाने वाले ‘मुख्य सलाहकार’ मोहम्मद यूनुस की देखरेख में अब वहाँ इस्लामी कट्टरपंथ को बढ़ावा मिल रहा है। इस बीच बांग्लादेश के हालात खराब हो रहे हैं, इसके चलते बड़ी संख्या में घुसपैठिए भारत आते हैं।

लेकिन इस बीच त्रिपुरा में घुसपैठियों पर लगातार एक्शन चल रहा है। त्रिपुरा पुलिस की ओर से साझा किए गए एक डाटा के अनुसार, 1 जनवरी 2024 से 28 फरवरी 2025 के बीच त्रिपुरा में 816 बांग्लादेशी और 79 रोहिंग्या मुस्लिम अवैध रूप से भारत में प्रवेश करते हुए पकड़े गए।

त्रिपुरा पुलिस ने बताया कि अगस्त, 2025 में शेख हसीना के सत्ता से हटने के बाद 483 अवैध घुसपैठिए त्रिपुरा में घुसे। इसके अलावा त्रिपुरा के अगरतला और बाकी रेलवे स्टेशन पर बड़ी संख्या में बांगलादेशी घुसपैठिए देश के अलग-अलग हिस्सों के लिए जाने की तैयारी करते हुए गिरफ्तार हुए हैं।

इन सब संकेतों से है कि बांग्लादेशी घुसपैठिए और रोहिंग्या हमारे देश में आने के लिए त्रिपुरा को अपना एंट्री पॉइंट बना रहे हैं और फिर यहाँ से बड़े मेट्रोपोलिटन शहरों में पहुँच रहे हैं। त्रिपुरा में घुसने के बाद इनका अगला लक्ष्य पुणे, दिल्ली, मुंबई और सूरत जैसे शहरों को जाना होता है।

जवाहरलाल नेहरू यूनिवर्सिटी की ओर से प्रकाशित हुई एक रिसर्च रिपोर्ट में यह बात भी सामने आई जिसमें अवैध बांग्लादेशी और रोहिंग्याओं के देश की राजधानी दिल्ली में भी सामाजिक-आर्थिक प्रभाव पर अध्ययन किया गया है। इस अध्ययन में रोहिंग्या घुसपैठियों और अवैध बांग्लादेशियों के रहने की जगहों पर भी रिपोर्ट तैयार की गई है।

दिल्ली पहुँचे से पहले अवैध घुसपैठियों के एंट्री प्वाइंट

इस सूची में त्रिपुरा तीसरे स्थान पर है, जिसमें बताया गया है कि 8.7 प्रतिशत घुसपैठिये दिल्ली तक पहुँचने के लिए इस पूर्वोत्तर राज्य का इस्तेमाल करते हैं। 2016 के अनुमान के अनुसार, भारत में दो करोड़ से भी अधिक बांग्लादेशी घुसपैठिए रह रहे हैं।

त्रिपुरा ने घुसपैठियों को पकड़ने के लिए बनाई MTF

त्रिपुरा में अवैध घुसपैठियों को पकड़ने के लिए एक विशेष ‘मोबाइल टास्क फोर्स’ (एमटीएफ) बनाई गई है। इसे पहली बार 1970 में बनाया गया था। तब यह हर जिले के एसपी की निगरानी में बनाई गई थी। 5 वर्ष बाद, 1975 में ‘मोबाइल टास्क फोर्स’ को एक अलग यूनिट के तौर पर घुसपैठियों को गिरफ्तार करने के लिए स्थापित किया गया।

मोबाइल टास्क फोर्स के उद्देश्य है-

  1. घुसपैठियों की पहचान करना।
  2. अवैध घुसपैठियों पर मुकदमे दायर करना।
  3. भारत में आए बांग्लादेशी घुसपैठियों को वापस भेजना।
  4. प्रत्येक व्यक्ति की नागरिकता के बारे में जाँच करना।
  5. संदिग्ध नागरिकता का सर्टिफिकेट लिए लोगों के बारे में जाँच करना।
  6. देश के अंदर किसी भी तरह की मजहबी कट्टरवाद या देश- विरोधी गतिविधियों में बांग्लादेशियो की मौजूदगी की जाँच करना।
  7. सीमा पार होने वाले अपराधों की जानकारी एकत्र करना।

‘मोबाइल टास्क फोर्स’ का संचालन त्रिपुरा के पुलिस महानिदेशक (डीजीपी), केंद्रीय गृह मंत्रालय और त्रिपुरा के गृह एवं राजनीतिक विभाग से मिले निर्देशों के आधार पर किया जाता है। इस बात पर गौर करना जरूरी है कि असम समझौते के अनुसार, 25 मार्च 1971 के बाद बांग्लादेशी जो अवैध रूप से भारत में आए हैं उन्हें ‘घुसपैठिया’ माना जाता है।

अवैध घुसपैठियों के त्रिपुरा में पकड़े जाने के बाद क्या होता है

त्रिपुरा में अवैध घुसपैठियों को पकड़ने के लिए मोबाइल टास्क फोर्स के अलावा बॉर्डर सिक्योरिटी फोर्स (BSF) और राज्य पुलिस के पास भी शक्तियाँ और मंजूरी है। BSF के एक सूत्र द्वारा दी गई जानकारी के अनुसार, त्रिपुरा में अगर BSF किसी अवैध प्रवासी को पकड़ती है तो वह उसे स्थानीय पुलिस को सौंप देती है।

इसके बाद आरोपित के खिलाफ प्राथमिकी (FIR) दर्ज की जाती है। स्टैंडर्ड ऑपरेटिंग प्रोसीजर (SOP) यह कहता है कि घुसपैठियों को पुलिस के हवाले किया जाए। त्रिपुरा पुलिस उन अवैध घुसपैठियों को 1920 के भारत में प्रवेश के अधिनियम की धारा 4 के तहत गिरफ्तार कर सकती है।

भारत में अवैध रूप से घुसने के आरोपित पर 2025 के इमीग्रेशन और विदेशी अधिनियम, जिसे पहले फॉरेनर्स एक्ट 1946 के तौर पर जाना जाता था, के तहत मुकदमा चलाया जा सकता है। यहाँ पर ये बताना जरूरी है कि केंद्रीय गृह मंत्रालय ने राज्य और केंद्र शासित प्रदेशों में अवैध घुसपैठियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई करने की शक्तियाँ दी हैं।

लेकिन असम की तरह त्रिपुरा में अवैध बांग्लादेशियों के लिए अब तक कोई स्थायी हिरासत केंद्र (डिटेंशन सेंटर) नहीं बने हैं। न ही वहाँ पर कोई सुव्यवस्थित विदेशी न्यायाधिकरण प्रणाली है। ऐसे में अगर कोई घुसपैठिया पकड़ा जाता है तो उसे स्थानीय कोर्ट में पेश किया जाता है। मुकदमे के दौरान आरोपित को जेल में रखा जाता है।

ऑपइंडिया ने त्रिपुरा के एक पुलिस के एक उच्च अधिकारी से बात की। नाम न छापने की शर्त पर उन्होंने इस पूरी प्रक्रिया के विषय में हमें बताया। उन्होंने बताया कि स्थानीय कोर्ट अवैध प्रवासियों द्वारा किए गए अपराधों की गंभीरता के आधार पर जुर्माना और कैद की सजा सुनाती है। घुसपैठिए इसके बाद जेल में उस सजा को काटते हैं और सजा पूरी होने तक वहीं रहते हैं।

सजा पूरी करने के बाद बांग्लादेशी घुसपैठियों को आवश्यक स्टैंडर्ड ऑपरेटिंग प्रोसीजर (SOP) के आधार पर उनके देश वापस भेज दिया जाता है। इसके तहत उन्हें सीमा पर तैनात बॉर्डर गार्ड बांग्लादेश (BGB) के हवाले किया जाता है।

पुलिस अधिकारी ने यह भी बताया कि अगर घुसपैठिए के पास उन्हें बांग्लादेशी साबित करने के जरूरी दस्तावेज नहीं होते हैं तो उनको वापस भेजना काफी मुश्किल हो जाता है। ऐसी परिस्थितियों में, BGB भी इस तरह के व्यक्ति को स्वीकार करने से मना कर देती है।

इस तरह के घुसपैठियों के लिए जब तक बांग्लादेशी अधिकारियों के साथ पूरा मामला नहीं सुलझता, तब तक उन्हें अस्थायी डिटेंशन सेंटर्स में स्थानांतरित कर दिया जाता है।

बांग्लादेश वापस भेजे गए लोगों की संख्या

एक समस्या यह भी है कि भारत और बांग्लादेश के बीच भारत में घुसने वाले अवैध प्रवासियों को वापस भेजने के लिए कोई संधि या समझौता नहीं हुआ है। समझौता न होने की वजह से ही कम संख्या में बांग्लादेशी घुसपैठिया वापस भेजे जा सके हैं। हालाँकि, इसके बावजूद त्रिपुरा ने 2022 से 31 अक्टूबर 2024 के बीच 1746 बांग्लादेशियों को डिपोर्ट किया है।

त्रिपुरा, बांग्लादेश के साथ तीन दिशाओं से 856 किलोमीटर लंबी सीमा साझा करता है। इस सीमा में कई ऐसे भी हिस्से हैं जहाँ पर अब तक स्थानीय मसलों के कारण सीमा (बाड़) नहीं बनाई जा सकी है। ऐसे में अवैध प्रवासी, जो भारत के लिए एक खतरा हैं वह पकड़े जाने के डर के बिना त्रिपुरा को ही भारत में आने का जरिया बना रहे हैं।

भूख से माता-पिता-बहन की मौत, खुद 128 साल जीवित रहे: कौन थे योग गुरु शिवानंद बाबा, क्यों उनके निधन को PM मोदी ने बताया ‘अपूरणीय क्षति’

वाराणसी में रह रहे लोकप्रिय योग गुरु शिवानंद बाबा का 128 वर्ष की उम्र में निधन हो गया है। माना जाता है कि वो इस धरती पर सबसे उम्रदराज़ व्यक्ति थे। शनिवार (3 मई, 2025) को उनका निधन हुआ। उन्हें मार्च 2022 में तत्कालीन राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद के हाथों पद्मश्री का सम्मान प्राप्त हुआ था। BHU के अस्पताल में उन्होंने अंतिम साँस ली। डॉ देवाशीष ने बताया कि रात के साढ़े 8 बजे उन्होंने अंतिम साँस ली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी उनके निधन पर दुःख जताया है।

पीएम मोदी ने ‘X’ पर लिखा, “योग साधक और काशी निवासी शिवानंद बाबा जी के निधन से अत्यंत दुःख हुआ है। योग और साधना को समर्पित उनका जीवन देश की हर पीढ़ी को प्रेरित करता रहेगा। योग के जरिए समाज की सेवा के लिए उन्हें पद्मश्री से सम्मानित भी किया गया था। शिवानंद बाबा का शिवलोक प्रयाण हम सब काशीवासियों और उनसे प्रेरणा लेने वाले करोड़ों लोगों के लिए अपूरणीय क्षति है। मैं इस दुःख की घड़ी में उन्हें श्रद्धांजलि देता हूँ।”

बता दें कि शिवानंद बाबा अन्न ग्रहण नहीं करते थे। वो योग साधना में दक्ष थे। इस उम्र में भी वो प्रयागराज में आयोजित महाकुंभ में स्नान करने के लिए पहुँचे थे। दुर्गाकुंड स्थित आश्रम पर उनका पार्थिव शरीर लाया गया। शिष्यों द्वारा हरिश्चंद्र घाट पर उनका अंतिम संस्कार हुआ। शिवानंद बाबा ने पूरी उम्र ब्रह्मचर्य का पालन किया। वो लंबे समय से भेलूपुर स्थित कबीरनगर में रह रहे थे। 8 अगस्त, 1896 में पश्चिम बंगाल के श्रीहट्टी में एक भिक्षुक गोस्वामी परिवार में जन्मे शिवानंद बाबा के परिवार को विभाजन के बाद देश छोड़ना पड़ा था। आज ये जगह बांग्लादेश में है।

उनके माता-पिता भीख माँगकर जीवन-यापन चलाते थे। उनके परिवार ने उन्हें नवद्वीप के रहने वाले बाबा ओंकारनंद गोस्वामी के सुपुर्द कर दिया, जिनसे उन्हें आध्यात्मिक शिक्षा मिली। वो मात्र 6 वर्ष के थे जब माता-पिता और बहन तीनों भूख से चल बसे। उनकी कहानी संघर्ष भरी है। वो वाराणसी में अपने मताधिकार का प्रयोग करना नहीं भूलते थे। शिवानंद बाबा अपने स्वास्थ्य का राज बताते हुए कहते थे कि इच्छा ही समस्त समस्याओं की जड़ है, उन्हें न किसी चीज से लगाव है और न तनाव।

बताया जाता है कि वह स्वतंत्रता सेनानी सुभाष चंद्र बोस के काफी करीब रहे थे। दोनों के बीच बेहद ही अच्छा रिश्ता था। बताया जाता है कि दोनों हमउम्र थे और एक ही एरिया में रहते थे। इसके अलावा यह भी दावा किया जाता है कि उन्होंने राष्ट्रपिता महात्मा गाँधी को काफी करीब से देखा है। 1977 में वृंदावन चले गए। दो साल वृंदावन में रहने के बाद 1979 में वाराणसी आ गए। तब से यहीं रह रहे थे। आने वाले हर शख्स को बाबा खुद अपने हाथों से खाना परोस कर खिलाते हैं। विश्वमारी के दौरान कोरोना टीका लगाने के बाद उन्होंने स्वास्थ्यकर्मियों को आशीर्वाद भी दिया था।

कर्नाटक की कॉन्ग्रेस सरकार ने फाजिल के परिवार को दिए ₹25 लाख, इसी पैसे से हिंदुवादी सुहास शेट्टी की हत्या के लिए अब्दुल सफवान गैंग को दी ‘सुपारी’: पुलिस जाँच के हवाले से रिपोर्ट में बताया

कर्नाटक के मंगलुरु में हिन्दू कार्यकर्ता सुहास शेट्टी की हत्या के लिए ₹3 लाख दिए गए थे। यह रकम आदिल ने अब्दुल सफवान गैंग को दी थी। फिरौती का यह पैसा कर्नाटक की कॉन्ग्रेस सरकार से मिले मुआवजे से दिया गया था। यह सारी बातें पुलिस की जाँच में सामने आई हैं। आदिल अपने भाई की मौत का बदला सुहास शेट्टी की हत्या से लेना चाहता था।

न्यूज 18 की एक रिपोर्ट के अनुसार, कर्नाटक की कॉन्ग्रेस सरकार ने 2023 में मोहम्मद फाजिल नाम के एक शख्स की मौत के बाद ₹25 लाख का मुआवजा दिया था। उसकी हत्या का आरोप सुहास शेट्टी पर था। फाजिल का भाई आदिल इसका बदला सुहास शेट्टी की हत्या करवा के लेना चाहता था।

रिपोर्ट बताती है कि इसके लिए आदिल ने अब्दुल सफवान नाम के गुंडे से सम्पर्क किया था। अब्दुल सफवान भी किसी बात को लेकर सुहास शेट्टी से बदला लेना चाहता था। आदिल ने इसके बाद सुहास शेट्टी की हत्या के लिए ₹5 लाख में अब्दुल सफवान से डील की। अब्दुल सफवान को आदिल ने ₹3 लाख इस काम के लिए पहले ही दिए।

सुपारी का यह पैसा कॉन्ग्रेस सरकार के मुआवजे के ₹25 लाख में से दिया गया था। यह भी पता चला है कि इस हत्या की साजिश एक महीने पहले से रची जा रही थी। इसके लिए अब्दुल सफवान ने कई और लड़कों को भी अपने गैंग में शामिल कर लिया था।

पुलिस ने स्पष्ट किया है कि यह बदला लेने के लिए किया गया मर्डर है। पुलिस कमिश्वर अनुपम अग्रवाल ने बताया है कि हत्या की साजिश को 8 लोगों के ग्रुप ने मिलकर अंजाम दिया था। पुलिस ने इस हत्या के मामले में अब्दुल सफ़वान, मोहम्मद मुजामिल, मोहम्मद रिजवान, कलंधर शफी, आदिल महरूफ, नियाज, रंजीत और नागराज को गिरफ्तार किया है।

पुलिस कमिश्नर ने यह भी बताया है कि अब्दुल पर साल 2023 में हमला किया गया था। इसी के बाद से उसने बदला लेने की ठान ली थी। गौरतलब है कि 1 मई 2025 को हिंदू कार्यकर्ता सुहास शेट्टी की हत्या कर दी गई थी। सुहास शेट्टी की हत्या 1 मई, 2025 को मंगलुरु के बाजपे इलाके में कर दी गई थी।

अब्दुल सफवान के गैंग ने घेर कर तलवारों से काट कर सुहास शेट्टी की हत्या की थी। अस्पताल ले जाते वक्त सुहास शेट्टी की मौत हो गई थी। भाजपा ने ₹25 लाख का मुआवजा सुहास शेट्टी के परिवार को दिया था।

बांग्लादेश से पहले खुद घुसा चाँद मियाँ, फिर भारत में घुसपैठियों को बसाने के लिए चलाने लगा गैंग: ₹25 हजार में एंट्री-रोजगार भी, दिल्ली पुलिस ने 44 को पकड़ा

दिल्ली पुलिस ने बांग्लादेशी घुसपैठियों के एक गैंग का भंडाफोड़ किया है। इस बांग्लादेशी गैंग के दिल्ली से लेकर चेन्नई तक कनेक्शन सामने आए हैं। ये गैंग फर्जी दस्तावेजों के जरिए घुसपैठियों को भारत में रोजगार मुहैया कराता था। इस मामले में दिल्ली पुलिस ने अब तक कुल 44 लोगों को गिरफ्तार किया है। गैंग का सरगना चाँद मियाँ है।

पुलिस के अनुसार, गिरफ्तार किए गए लोगों में से 33 बांग्लादेशी नागरिक हैं और 5 भारतीय एजेंट हैं। इनमें 33 बांग्लादेशी घुसपैठिए हैं। यह गैंग फर्जी दस्तावेज बनवाने और रहने की व्यवस्था कराने और ट्रांसपोर्टेशन में मदद करता था।

गिरफ्तार लोगों के पास से 11 फर्जी आधार कार्ड, आईडी प्रूफ के साथ दो बांग्लादेशी दस्तावेज,एक कंप्यूटर और 4 हार्ड डिस्क, एक कलर प्रिंटर और फिंगरप्रिंट स्कैनर, 8 मोबाइल फोन और सिम कार्ड बरामद हुए हैं। इसके अलावा इनके पास से लगभग ₹20 हज़ार बरामद किए गए हैं।

दिल्ली पुलिस की जाँच में सामने आया कि गैंग के सदस्य बांग्लादेशी नागरिकों को अवैध रूप से सीमा पार कराकर भारत में लाते थे। फिर यहाँ उनके लिए फर्जी दस्तावेज तैयार करवाते थे। इसके बाद उन्हें किराए का मकान दिलवा कर दिल्ली, बंगलुरु, चेन्नई जैसे बड़े शहरों में रोजगार भी मुहैया कराते थे।

पुलिस ने बताया है कि इनके चलते घुसपैठियों को पुलिस या सरकारी एजेंसी की नजर से बचने में आसानी होती थी। यह गैंग दिल्ली के सीमापुरी, संगम विहार, शाहीन बाग, महिपालपुर जैसे इलाकों में सक्रिय था। इन इलाकों में बांग्लादेशी नागरिक रहते हैं।

पुलिस के मुताबिक, गैंग का सरगना चाँद मियाँ दिल्ली के संगम विहार इलाके में रह रहा था। पुलिस की जाँच में सामने आया कि वह खुद भी बांग्लादेशी नागरिक है। जो पिछले 5 साल से पहले अवैध रूप से भारत आया था।

इसके बाद उसने एक पूरा नेटवर्क तैयार किया जो 3 साल से बांग्लादेशी घुसपैठियों को बसा रहा है। चाँद मियाँ पश्चिम बंगाल, मेघालय और त्रिपुरा के बेनापोल सीमा के ज़रिए बांग्लादेशियों को अवैध तरीके से भारत में घुसपैठ करवाता था। वह इस काम के ₹25 हजार लेता था।

दिल्ली पुलिस के DCP रवि कुमार सिंह ने बताया कि 12 मार्च 2025 को पुलिस को सूचना मिली कि एक बांग्लादेशी नागरिक असलम उर्फ मसूम मोहम्मद तैमूर नगर में अवैध रूप से रह रहा है। पूछताछ में उसने बताया कि वह बांग्लादेश के नोआखाली का रहने वाला है और हाल ही में भारत में आया है।

असलम से पूछताछ के चलते ही सरगना चाँद मियाँ तक पहुँचा जा सका। पुलिस ने सभी सबूतों के आधार पर खोजबीन शुरु की। कनेक्शन जोड़ते हुए मुख्य सरगना चाँद मियां को विजयवाड़ा से गिरफ्तार कर लिया गया। इसके बाद पूरे नेटवर्क का पर्दाफाश हो गया। बाकी साथियों को भी पुलिस ने हिरासत में लिया। पुलिस का कहना है कि गिरफ्तारियों की संख्या बढ़ सकती है।

  • दिल्ली पुलिस की जाँच में एक और चौंकाने वाला खुलासा हुआ है। यह भी बताया गया कि कुछ बांग्लादेशी घुसपैठिए ट्रांसजेंडर का वेश धारण कर दिल्ली की सड़कों, रेलवे स्टेशनों और ट्रेनों में जबरन पैसे वसूलते थे। कई ने तो कानून और समाज धोखा देने को सर्जरी और हार्मोनल इलाज से पहचान तक छिपा ली थी।

ये लोग विशेष रूप से भीड़भाड़ वाले इलाकों में काम करते थे और खुद को पहचान छिपाने के लिए नकली पहचान पत्रों का इस्तेमाल करते थे। पुलिस का मानना है कि यह गैंग केवल दिल्ली तक सीमित नहीं था बल्कि इसकी पहुँच देश के दक्षिणी राज्यों तक थी।

शिमला की संजौली मस्जिद को पूरी तरह ‘समतल’ करने का कोर्ट ने दिया आदेश, वक्फ बोर्ड नहीं दिखा पाया ‘कागज’: 3 मंजिले पहले ही गिराने को कहा था, मुस्लिम बोले- ऊपरी अदालत में जाएँगे

हिमाचल प्रदेश की राजधानी शिमला में बनी अवैध संजौली मस्जिद को पूरी तरह से गिराया जाएगा। यह आदेश शिमला नगर निगम आयुक्त कोर्ट ने दिया है। कोर्ट ने यह आदेश मस्जिद की जमीन का मालिकाना हक़ साबित ना होने पर दिया है। पूरी मस्जिद अवैध पाई गई है। इससे पहले अक्टूबर, 2024 में मस्जिद की तीन मंजिलें गिराने का आदेश दिया था।

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, शनिवार (3 मई, 2025) को शिमला नगर निगम आयुक्त कोर्ट ने संजौली मस्जिद मामले में सुनवाई की। इस दौरान कोर्ट ने मामले में वक्फ बोर्ड से मस्जिद के कागज दिखाने को कहा। वक्फ बोर्ड सुनवाई के दौरान मस्जिद के मालिकाना हक के कोई भी कागज नहीं दिखा पाया।

वक्फ बोर्ड ने दावा किया कि मस्जिद 70 वर्षों से अधिक पुरानी है। लेकिन वक्फ बोर्ड इस पाँच मंजिला अवैध मस्जिद का नक्शा, NOC और बाक़ी कागज भी नहीं दिखा पाया। वक्फ बोर्ड कोर्ट में दावा कर रहा था कि संजौली मस्जिद का ढाँचा पुरानी मस्जिद को तोड़ कर बनाया गया है।

नई मस्जिद के निर्माण के लिए ली गई कोई भी अनुमति वक्फ बोर्ड के पास नहीं थी। कोर्ट ने वक्फ बोर्ड से पूछा कि अगर आपने पुरानी मस्जिद तोड़ी तो नई बनाने को अनुमति क्यों नहीं ली। वहीं सुनवाई के दौरान यह भी सामने आया कि पुरानी मस्जिद गिराने के बाद यह जमीन सरकार के पास चली गई, जिस पर नया निर्माण अवैध कब्जा है।

वक्फ बोर्ड बीते लगभग 15 वर्षों से इस मस्जिद को लेकर मुकदमा लड़ रहा था। मस्जिद के अवैध कब्जे के खिलाफ केस लड़ रहे वकील ने बताया कि वक्फ बोर्ड ने इस जमीन पर लैंड माफिया की तरह कब्ज़ा कर लिया था और पाँच मंजिला मस्जिद शहर के बीच खड़ी कर दी थी।

इन सब दावों के बाद ही कोर्ट ने आदेश दिया कि संजौली मस्जिद को पूरी तरह से गिरा दिया जाए। कोर्ट ने इसके लिए क्या समयसीमा तय की है, यह स्पष्ट नहीं हुआ है। वहीं वक्फ बोर्ड ने कहा है कि वह इस फैसले के खिलाफ ऊपरी अदालत में जाएँगे। उनका दावा है कि रिकॉर्ड में मस्जिद दर्ज है लेकिन वह अपडेट नहीं हुआ है।

इससे पहले अक्टूबर, 2024 में शिमला के इसी आयुक्त कोर्ट ने मस्जिद की तीन ऊपरी मंजिले अवैध पाई थीं। इन्हें तोड़ने का आदेश कोर्ट ने दिया था। इनको तोड़ने की प्रक्रिया तब से चल रही है। मस्जिद की सच्चाई एक विवाद के बाद सामने आई थी।

शिमला में एक झगड़े के बाद मुस्लिम युवक एक स्थानीय युवक को पीट कर इस मस्जिद में छुप गए थे। इसके बाद कई दिनों तक हिमाचल प्रदेश में हिंदूवादी संगठनों ने प्रदर्शन किया था। इस मस्जिद को लेकर भी इसके बाद ही याचिकाएँ डाली गई थीं। स्थानीय लोगों ने कहा था कि यह मस्जिद पूरी तरह अवैध है।

राम मंदिर में घुस गई मुस्लिम महिला, सिर और चेहरे को नीले कपड़े से ढँक रखा था: बहस करने पर पुलिस ने हिरासत में लिया, परिवार ने बताया ‘मानसिक विक्षिप्त’

यूपी पुलिस ने राम मंदिर से एक मुस्लिम महिला को हिरासत में लिया है। उसकी गतिविधियाँ संदिग्ध लग रही थीं। उक्त महिला का नाम इरिम है, जो श्रद्धालुओं के साथ दर्शन के बहाने भीतर जा रही थी। जाँच एजेंसियाँ उसके बारे में खँगाल रही हैं।

उक्त महिला मंदिर के भीतर भी चली गई थी, लेकिन लौटते समय एग्जिट पर पुलिस ने उसे रोक लिया। उसने सिर और चेहरे पर नीले रंग का कपड़ा बाँध रखा था, वो पुलिस को भी पलट कर जवाब दे रही थी। महाराष्ट्र के वर्धा की रहने वाली उस महिला के परिजनों का कहना है कि वो मानसिक बीमार है और इधर-उधर घूमती रहती है। उसे महिला थाने में रखकर परिजनों को सूचित किया गया।

बता दें कि इससे पहले 6 जनवरी को कैमरे वाले चश्मे से तस्वीर खींचकर जासूसी करते हुए एक शख्स को गिरफ्तार किया गया था। गुजरात का व्यापारी जयकुमार ऐसा करते हुए सभी चेकपॉइंट्स को पार कर चुका था। इसी तरह 3 मार्च को अब्दुल नामक एक आतंकी धराया था, जो हैण्ड ग्रेनेड से राम मंदिर पर हमले की साजिश रच रहा था।

वहीं ताज़ा मामले में फ़िलहाल महिला के बारे में कुछ आपत्तिजनक पता नहीं चला है। बता दें कि अयोध्या का राम मंदिर आतंकियों के निशाने पर रहा है, पाकिस्तान तक से इसे लेकर कई बयान आ चुके हैं। जब सुप्रीम कोर्ट ने बाबरी ढाँचे वाली जगह पर राम मंदिर बनाए जाने का फ़ैसला बनाया था, क्योंकि ये साबित हो गया था कि वहाँ बाबर के सेनापति मीर बाकी ने राम मंदिर को ध्वस्त करके मस्जिद बनवाई थी।

‘गोधरा ट्रेन को जलने से रोक सकते थे’: गुजरात HC ने 9 पुलिसकर्मियों की बर्खास्ती को बरकरार रखा, कहा – काम में लापरवाही और अनदेखी की

गोधरा ट्रेन अग्निकांड में लापरवाही के कारण 9 पुलिस अधिकारियों की बर्खास्तगी को 24 अप्रैल की सुनवाई में भी गुजरात उच्च न्यायालय ने बरकरार रखा।

गौरतलब है कि 27 फरवरी 2002 की सुबह साबरमती एक्सप्रेस के S6 कोच में यात्रा कर रहे 58 हिंदू तीर्थयात्रियों को मुस्लिम भीड़ ने जलाकर मार दिया था। मरने वालों में 27 महिलाएँ और 10 बच्चे भी शामिल थे। यह नरसंहार गुजरात के गोधरा स्टेशन के पास हुआ था।

कोर्ट ने कहा कि बर्खास्त हुए पुलिसकर्मी अगर अनदेखी और लापरवाही न दिखाते तो इस घटना को रोका जा सकता था।

गुजरात हाईकोर्ट ने कहा, “अगर याचिकाकर्ता अहमदाबाद पहुँचने के लिए साबरमती एक्सप्रेस से ही सफर करते तो शायद गोधरा कांड को रोका जा सकता था। याचिकाकर्ताओं ने अपने काम में लापरवाही और अनदेखी की। ये सभी आरोप सिद्ध हो चुके हैं।”

साबरमती एक्सप्रेस को जलाने के लिए मुस्लिम जिम्मेदार

गोधरा में साबरमती ट्रेन अग्निकांड में 31 इस्लामी दंगाई दोषी पाए गए थे। 11 आरोपितों को 1 मार्च, 2011 को विशेष फास्टट्रैक कोर्ट ने मृत्युदंड दिया।

इनके नाम अब्दुल रज्जाक कुरकुर, इस्माइल सुलेजा, जब्बीर बिनयामीन बेहरा, रमजानी बिनयामीन बेहरा, महबूब हसन, सिराज बाला, इरफान कलंदर, इरफान पटाडिया, हसन लालू, महबूब चंदा और सलीम जर्दा हैं।

इनकी मौत की सज़ा को अक्टूबर 2017 में आजीवन कारावास में बदल दिया गया। अन्य दोषियों में से 20 को भी आजीवन कारावास की सजा सुनाई गई।

उनके नाम सुलेमान अहमद हुसैन, अब्दुल रहमान अब्दुल माजिद धनतिया, कासिम अब्दुल सत्तार, इरफान सिराज पदो घांची, अनवर मोहम्मद मेहदा, सिद्दीक, मेहबूब याकूब मीठा, सोहेब यूसुफ अहमद कलंदर, सौकत, सिद्दीक मोहम्मद मोरा, अब्दुल सत्तार इब्राहिम गद्दी असला, अब्दुल रऊफ अब्दुल माजिद ईसा, यूनुस अब्दुलहक समोल, इब्राहिम अब्दुल रजाक अब्दुल सत्तार समोल, सौकत यूसुफ इस्माइल मोहन, बिलाल अब्दुल्ला इस्माइल बादाम घांची, फारूक, अयूब अब्दुल गनी इस्माइल पटालिया, सौकत अब्दुलाह मौलवी इस्माइल बादाम, एमडी हनीफ हैं।

इन 31 कट्टरपंथियों की सज़ा उन सभी षड्यंत्रकारियों को आईना दिखाती रहेगी जो हिंदू तीर्थयात्रियों की योजनाबद्ध हत्या को महत्वहीन बनाने की कोशिश करते हैं।

अब्दुल सफवान, मुजामिल, रिजवान, सफी समेत 8 ने की सुहास शेट्टी की हत्या… ₹5 लाख में मर्डर की डील: 2 बुर्का वाली पर भी हो रही जाँच

कर्नाटक के मंगलुरु में हिंदू कार्यकर्ता सुहास शेट्टी की हत्या मामले में पुलिस ने 8 लोगों को गिरफ्तार किया है। सुहास शेट्टी की हत्या अब्दुल सफवान गैंग ने की थी। हत्या की पहले से पूरीसाजिश रची गई थी और इसके ;लिए ₹5 लाख की फिरौती भी ली गई थी।

कर्नाटक के मंगलुरु में 3 मई 2025 को राज्य के गृह मंत्री डॉ जी परमेश्वरा ने प्रेस वार्ता करते हुए इस पूरे मामले की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि सभी आरोपितों को मंगलुरु जिले के विभिन्न क्षेत्र से गिरफ्तार किया गया है। इनसे अभी पूछताछ की जा रही है।

पुलिस कमिश्वर अनुपम अग्रवाल ने बताया है कि हत्या की साजिश को 8 लोगों के ग्रुप ने मिलकर अंजाम दिया था। इनमें मुख्य आरोपित शांतिगुड्डे निवासी अब्दुल सफ़वान है, जो कि पेशे से ड्राइवर है। इसके साथ मोहम्मद मुजामिल जो कि सऊदी अरब में सेल्समैन की नौकरी करती है। इसकी चार महीने पहले ही शादी हुई थी।

हत्या में शामिल इसी का साथी जोकाटे निवासी मोहम्मद रिजवान भी सऊदी अरब में नौकरी करता है। इनके अलावा कुरसुगुड्डे निवासी कलंधर शफी, रंजीत नागराज और मृतक फासिल के भाई आदिल महरूफ भी हत्या में शामिल हैं।

पुलिस कमिश्नर ने आगे बताया कि सुहास की मौत की साजिश अब्दुल सफ़वान ने रची थी। उन्होंने बताया है कि अब्दुल पर साल 2023 में हमला किया गया था। इसी के बाद से उसने बदला लेने की ठान ली थी। इसकी प्लानिंग करते हुए उसने अपने साथी आदिल महरूफ को भी जोड़ लिया, जो कि मृतक फाज़िल का भाई था।

सुहास को मारने के लिए ₹5 लाख रुपये में डील की गई थी। इसके लिए ₹3 लाख रुपये पहले ही दे दिए गए थे। इसके अलावा सुहास की हत्या हत्या फाजिल की मौत का बदला लेने के मंसूबे से की गई थी। पुलिस कमिश्वर ने बताया कि सफवान और आदिल महरूफ के इरादे मिलते-जुलते थे। दोनों को बदला लेना था। इसलिए उन्होंने साथ मिलकर काम किया और हत्या की।

हत्या का वायरल वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है। इस संबंध में पुलिस कमिश्वर ने कहा है कि वीडियो में दिख रही दो बुर्का पहनी महिलाएँ एक आरोपित की रिश्तेदार हैं। उन्हें भी हिरासत में लेकर पूछताछ की जाएगी।

गौरतलब है कि 1 मई 2025 को हिंदू कार्यकर्ता सुहास शेट्टी की हत्या कर दी गई थी। यह हत्यारे स्विफ्ट गाड़ी और पिकअप में बैठकर आए थे। उन्होंने सुहास शेट्टी के ऊपर तलवारों और धारदार हथियारों से हमला कर दिया था। इसके बाद भी बदमाश उन पर जानलेवा हमला करते रहे। इस हत्या के बाद हिन्दू संगठनों ने मंगलुरु में प्रदर्शन किया था।

भाजपा ने सुहास शेट्टी के परिवार को ₹25 लाख की आर्थिक सहायता देने का ऐलान किया है। उन्होंने कॉन्ग्रेस सरकार पर आरोप लगाया है कि वह हिन्दुओं के साथ हत्या के बाद खड़ी नहीं होती।