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कोरोना के कारण उत्तराखंड सरकार ने रद्द की इस वर्ष की चार धाम यात्रा, 14 मई से होनी थी शुरुआत

इस साल की चार धाम यात्रा रद्द कर दी गई है। उत्तराखंड के मुख्यमंत्री तीरथ सिंह रावत ने इसकी जानकारी देते हुए कहा कि देश में बढ़ रहे कोरोना वायरस के संक्रमण के चलते यह निर्णय लिया गया है। मुख्यमंत्री रावत ने कहा, “उत्तराखंड सरकार के द्वारा इस वर्ष चार धाम यात्रा रद्द करने का निर्णय लिया गया है। देश में Covid-19 के बढ़ते संक्रमण के चलते यह निर्णय लिया गया है कि चार धाम मंदिरों में सिर्फ पुजारी ही पूजा और विभिन्न अनुष्ठान करेंगे।“

हालाँकि मंदिर के कपाट तय समय पर ही खुलेंगे। इस वर्ष 14 मई से चार धाम यात्रा शुरू होने वाली थी। उत्तराखंड में प्रत्येक वर्ष आयोजित होने वाली इस यात्रा में देश के कोने-कोने से श्रद्धालु शामिल होते हैं। इसके अंतर्गत केदारनाथ, बद्रीनाथ, गंगोत्री और यमुनोत्री की यात्रा श्रद्धालुओं द्वारा की जाती है।

पिछले कुछ दिनों से वामपंथी और लिबरल मीडिया गिरोह चार धाम यात्रा और उत्तराखंड की भाजपा सरकार के खिलाफ प्रोपेगेंडा चला रहे थे। इनमें द वायर और द लॉजिकल इंडियन जैसे मीडिया समूह सबसे आगे हैं। द वायर ने लिखा कि हरिद्वार कुम्भ मेला में हुई आलोचना के बाद भी उत्तराखंड की सरकार चार धाम यात्रा की अनुमति दे रही है।

द लॉजिकल इंडियन ने भी चार धाम यात्रा को एक गलत निर्णय बताया। इसके अलावा इंडियन एक्स्प्रेस भी कुम्भ मेला पर उत्तराखंड सरकार की आलोचना कर चुका है, जबकि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के हस्तक्षेप के बाद कुम्भ को प्रतीकात्मक बना दिया गया था।

गौरतलब है कि पिछले साल भी चार धाम यात्रा के दौरान कड़े प्रतिबंध थे। इसके कारण 2019 में आए 38 लाख श्रद्धालुओं के मुकाबले साल 2020 में मात्र 4 लाख श्रद्धालुओं ने चार धाम यात्रा में भाग लिया था। इस साल Covid-19 के बढ़ते संक्रमण के कारण चार धाम यात्रा को रद्द ही कर दिया गया है।

स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय के आँकड़ों के अनुसार उत्तराखंड में 28 अप्रैल को 6054 नए संक्रमित मरीज मिले। राज्य में वर्तमान में 45,383 सक्रिय मरीज हैं। 28 अप्रैल को ही 3485 मरीज स्वस्थ हुए।

दुकान पर ‘उपलब्ध नहीं’ का बोर्ड, फोन पर- 20 हजार एडवांस दो… होम डिलिवरी के बाद 15 हजार: दिल्ली में ऑक्सीजन वेंडर्स ऐसे कर रहे खेल

एक तरफ कोरोना महामारी का कहर जारी है, वहीं दूसरी ओर इस आपदा के समय में एक और बीमारी बड़ी तेजी से पनप रही है। यह है- झूठ, धोखेबाजी, बेईमानी और कालाबाजारी। इस मुश्किल में वक्त कई लोग ऐसे हैं जो इंसानियत को शर्मसार करते हुए कोविड मरीजों और उनके परिजनों को धोखा देने और लूटने में जरा भी नहीं हिचक रहे हैं।

एक वायरल ट्विटर थ्रेड ने ​राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में ऑक्सीजन सिलिंडर की कालाबाजारी पर से पर्दा उठा दिया है। इसके मुताबिक दुकानों पर उपलब्ध नहीं है का साइनबोर्ड लगाकर रखने वाले वेडर्स फोन पर मनचाही कीमत में सिलिंडर मुहैया कराने का दाव कर रहे हैं।

ट्विटर पर विनायक त्रिपाठी नामक यूजर ने लिखा है, “कल मैंने ऑक्सीजन सिलिंडर के लिए ‘रणवीर’ नामक व्यक्ति से बात की। जब मैंने कहा मुझे तुरंत सिलिंडर चाहिए। उसके बाद उसने मुझे कॉल किया और कहा कि आप 20 हज़ार एडवांस भेज दो। मैं 4 घंटे में होम डिलिवरी करवा दूँगा। 15 हज़ार सिलेंडर मिलने के बाद देना।”

विनायक ने आगे लिखा है, “मेरे यह कहने पर कि मैं आकर ले जाता हूँ क्यूँकि हमारे पास समय नहीं है, रणवीर ने खुलेआम कहा कि अगर आप एड्रेस पर जाओगे तो उसके गेट पे हमने साफ़-साफ़ ‘Not Available’ लिखा है क्योंकि हम पुलिस और सरकार से बच के बेच रहे हैं। चाहिए तो मेरे अकाउंट में एडवांस भेजना होगा।”

विनायक ने लिखा है, “मैंने कहा पैसे देने में कोई समस्या नहीं है, लेकिन मुझे उसकी रसीद कैसे मिलेगी? इस पर उसने बड़ी बेशर्मी से कहता है कि हम ब्लैक में दे रहे हैं और आपको लेना है लो, वरना मेरे पास लोगों की लाइन लगी हुई है। यह कह उसने कॉल काट दी।”

आगे विनायक ने बताया है, “फिर उसने मुझे एक महिला के बैंक अकाउंट का स्क्रीनशॉट भेजा। साथ में वॉयस नोट- सर कल से 150 सिलिंडर डिलिवर करवा चुका हूँ, आपको लेना है तो एडवांस भेजिए नहीं तो कोई ज़ोर-ज़बरदस्ती नहीं है।”

उन्होंने लिखा है, “दुःख की इस घड़ी में आम जनता से लेकर सभी बड़े चेहरे एक-दूसरे की मदद के लिए एकजुट हैं और इस जैसे लोग मजबूरी का फ़ायदा उठा ऑक्सीजन की कालाबाज़ारी करने में लगे हुए हैं। प्रशासन को इसका संज्ञान ले इस व्यक्ति पर त्वरित कार्यवाही कर इसे ‘Cheating, Epidemic Disease & Essential Commodities Act’ के तहत गिरफ़्तार करना चाहिए।”

गौरतलब है कि 27 अप्रैल को दिल्ली हाई कोर्ट ने ऑक्सीजन सिंलिंडरों की कालाबाजारी रोकने में नाकाम रहने के लिए दिल्ली सरकार को फटकार लगाई थी। विनायक जैसों की आपबीती दिल्ली की केजरीवाल सरकार की निष्क्रियता का एक और सबूत है।

RSS कार्यकर्ता की मौत को लेकर ‘लोकसत्ता’ और ‘इंडियन एक्सप्रेस’ ने किया फैक्टचेक, बेटी ने वीडियो के जरिए दिया जवाब

नागपुर के 85 वर्षीय RSS स्वयंसेवक नारायण भाऊराव दाभाडकर के निधन के बाद जहाँ परिवार शोक में है, वहीं कुछ मीडिया संस्थानों ने उनके बलिदान को फेक न्यूज़ साबित करने की कोशिश की है। उन्होंने अस्पताल में अपना बेड किसी अन्य कोविड मरीज को दे दिया था और वापस घर आ गए थे। 3 दिन बाद उनकी मृत्यु हो गई थी। उन्होंने ये बलिदान दिया, ताकि उनसे लगभग आधी उम्र के एक व्यक्ति की जान बच जाए।

जब सोशल मीडिया पर उनके इस बलिदान की खूब चर्चा हुई और लोगों ने सराहना करते हुए उन्हें नमन किया तो एक मराठी मीडिया संस्थान ने इस खबर को झूठा साबित करने का प्रयास किया। ‘लोकसत्ता’ ने एक ‘फैक्टचेक’ कर इस खबर को गलत बता दिया, लेकिन उसने गलत अस्पताल से संपर्क कर लिया। नारायण भाऊराव को उन्हें जानने वाले लोग ‘दाभाडकर काका’ कह कर सम्बोधित करते थे।

‘लोकसत्ता’ का कथित फैक्टचेक नागपुर के एक तथाकथित समाजसेवक शिवम थावरे की इंदिरा गाँधी हॉस्पिटल के सुपरिटेंडेंट अजय प्रसाद से हुई बातचीत पर आधारित है। इंदिरा गाँधी हॉस्पिटल ने कहा कि उनके यहाँ नारायण भाऊराव दाभाडकर नाम का कोई मरीज भर्ती ही नहीं हुआ था। ये स्पष्ट नहीं है कि उसने सरकारी इंदिरा गाँधी हॉस्पिटल से संपर्क किया या नागपुर म्युनिसिपल कॉर्पोरेशन के इंदिरा गाँधी रुग्णालय में।

इंदिरा गाँधी रुग्णालय में नारायण भाऊराव दाभाडकर भर्ती थे। उनकी बेटी ने अब एक वीडियो जारी कर चीजें साफ़ की हैं। लेखिका शेफाली वैद्य ने नारायण भाऊराव की बेटी आश्वारी दाभाडकर का वीडियो शेयर किया, जिसमें उन्होंने बताया है कि उनके पिता इंदिरा गाँधी म्युनिसिपल हॉस्पिटल में एडमिट थे और उनकी हालत दिनोंदिन बिगड़ती ही जा रही थी। डॉक्टरों ने उन्हें उनकी हालत के बारे में बताया भी था।

बेटी के अनुसार, जब उनके पिता अस्पताल में भर्ती थे तो उन्होंने बाहर बेड के लिए हंगामा सुना। तभी उन्होंने फैसला किया कि वे तो अपनी ज़िंदगी जी चुके है, इसलिए उनके द्वारा लिए गए बेड के कारण कहीं किसी युवा की जान न चली जाए। ये बताते-बताते आश्वारी दाभाडकर रो पड़ीं। उधर इंदिरा गाँधी रुग्णालय ने भी इस बात की पुष्टि की है कि नारायण भाऊराव दाभाडकर वहाँ भर्ती थे और उनका इलाज हो रहा था।

‘इंडियन एक्सप्रेस’ की शीलू चिमुरकर को दिए गए एक बयान में हॉस्पिटल के इंचार्ज डॉक्टर ने कहा, “दाभाडकर को अप्रैल 22 को शाम 5:55 में एडमिट किया गया था। उन्हें कैजुअल्टी वॉर्ड में एक ऑक्सीजन बेड पर रखा गया था। हमने परिजनों से कहा था कि अगर स्थिति बिगड़ती रही तो उन्हें किसी बेहतर अस्पताल में ले जाना पड़ेगा। वे तैयार भी हो गए थे। शाम को 7:55 में उन्होंने डिस्चार्ज होने की अनुमति माँगी।”

हॉस्पिटल के इंचार्ज डॉक्टर ने कहा कि उन्हें कारण तो नहीं पता, लेकिन उन्हें बेहतर अस्पताल में ले जाने के लिए ज़रूर कहा गया था। उनके दामाद अमोल पाचपोर ने डिस्चार्ज लेटर पर हस्ताक्षर किए, जिसके बाद उन्हें डिस्चार्ज किया गया। ‘इंडियन एक्सप्रेस’ की भी इस खबर में हॉस्पिटल के बयान के बावजूद भ्रम फैलाया गया और दाभाडकर के एक परिजन से बयान के लिए दबाव बनाया गया, जबकि वो खुद कोरोना संक्रमित हैं।

मुंबई के पूर्व CP परमबीर सिंह पर SC/ST एक्ट के तहत केस, उद्धव सरकार में गृहमंत्री रहे देशमुख के ‘वसूली’ को किया था उजागर

पूर्व मुंबई पुलिस कमिश्नर परमबीर सिंह की मुश्किलें बढ़ती नजर आ रही हैं। महाराष्ट्र पुलिस के ही एक इंस्पेक्टर भीमराव घडगे की शिकायत पर उनके खिलाफ SC/ST एक्ट के तहत मामला दर्ज किया है। एफआईआर विदर्भ के अकोला जिले में दर्ज की गई है। पुलिस इंस्पेक्टर भीमराव घडगे की शिकायत पर परमबीर सिंह, डीसीपी पराग मनेरे और 31 अन्य पुलिसकर्मियों के खिलाफ केस दर्ज किया गया है।

रिपोर्ट्स के मुताबिक, परमबीर और अन्य पुलिसकर्मियों पर 27 धाराओं में एफआईआर दर्ज हुई है। इनमें आपराधिक षड्यंत्र, सबूतों को नष्ट करने और अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति (अत्याचार निवारण अधिनियम), 1989 भी शामिल हैं। अकोला पुलिस ने जीरो एफआईआर दर्ज कर केस ठाणे शहर पुलिस को हस्तांतरित कर दिया है।

इंस्पेक्टर घडगे ने अपनी शिकायत में सिंह और अन्य अधिकारियों के खिलाफ भ्रष्टाचार के कई आरोप लगाए हैं। यह मामला तब का है जब वे ठाणे पुलिस में तैनात थे। घडगे 2015-2018 तक ठाणे पुलिस कमिश्नरेट में तैनात थे। उनका आरोप है कि इस दौरान परमबीर सिंह के अधीन कई अधिकारी भ्रष्टाचार में लिप्त था। उन्होंने यह भी दावा किया है कि सिंह ने उनसे कुछ ऐसे लोगों के खिलाफ चार्जशीट दाखिल नहीं करने को कहा था, जिन पर एफआईआर दर्ज थी। घडगे का आरोप है कि पिछड़ी जाति के होने के कारण उनके साथ दुर्व्यवहार किया गया।

घडगे फिलहाल अकोला पुलिस नियंत्रण कक्ष में तैनात हैं। उनका आरोप है कि परमबीर सिंह के निर्देशों को मानने से इनकार करने पर उनके खिलाफ पाँच प्राथमिकी दर्ज कर उन्हें निलंबित कर दिया गया। अपने आरोपों को लेकर उन्होंने मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे और राज्य के गृहमंत्री को पत्र भी लिख है।

गौरतलब है कि मुंबई पुलिस कमिश्नर पद से हटाए जाने के बाद परमबीर सिंह ने सीएम उद्धव ठाकरे को एक पत्र लिखा था। इसमें उस समय राज्य के गृहमंत्री रहे अनिल देशमुख पर निलंबित इंस्पेक्टर सचिन वाजे के जरिए वसूली का आरोप लगाया था। उन्होंने दावा किया था कि देशमुख ने वाजे को सौ करोड़ रुपए की वसूली का टारगेट दे रखा था। शुरुआत में टालमटोल के बाद बाद देशमुख को इन आरोपों के कारण इस्तीफा देना पड़ा था। पिछले दिनों सीबीआई ने इस मामले में उनके खिलाफ एफआईआर दर्ज की थी। वहीं वाजे इस समय एंटीलिया बम केस में एनआईए की गिरफ्त में है।

मिली रेमडेसिविर की 52000 शीशियाँ, बताया मात्र 2500: दिल्ली हाई कोर्ट ने गलत आँकड़ों पर AAP सरकार को फटकारा

एंटी-वायरल ड्रैग रेमडेसिविर की अनुपलब्धता को लेकर दिल्ली हाई कोर्ट ने अरविंद केजरीवाल सरकार को फटकार लगाई है। इस ड्रग का प्रयोग सामान्य या गंभीर स्थिति वाले कोरोना संक्रमितों के इलाज के लिए किया जा रहा है। फ़िलहाल इसकी सप्लाई काफी कम है और माँग कई गुना ज्यादा। इस दौरान हाई कोर्ट ने गलत आँकड़े पेश करने के लिए भी AAP सरकार की क्लास लगाई।

दिल्ली सरकार ने दावा किया था कि उसे रेमडेसिविर ड्रग की मात्र 2500 शीशियाँ ही दी गई थीं, जबकि वास्तविकता में उसे 52,000 शीशियाँ उपलब्ध कराई गई थीं। दिल्ली हाई कोर्ट ने कहा कि ऑक्सीजन सिलिंडरों और दवाओं की जमाखोरी से इन चीजों की बनावटी अनुपलब्धता का माहौल बनता है, जबकि असल में ये उपलब्ध होते हैं। उच्च न्यायालय ने चेताया कि लोग इस तरह की हरकतों में न उलझें।

मंगलवार (अप्रैल 27, 2021) को दिल्ली उच्च-न्यायालय ने AAP सरकार से प्रदेश में हुए RT-PCR टेस्ट्स के आँकड़े भी माँगे थे। चूँकि दिल्ली में RT-PCR टेस्ट्स की संख्या घट रही है और कई प्राइवेट लैब्स को ये टेस्ट करने से मना कर दिया गया है, इसलिए हाई कोर्ट ने अरविंद केजरीवाल की सरकार से इसका कारण भी पूछा है। हाई कोर्ट ने दिल्ली में ऑक्सीजन की कमी की भी चर्चा की और कहा कि एक दिन भी दिल्ली में एलोकेशन की सही मात्रा में ऑक्सीजन नहीं पहुँची।

कोर्ट ने लंबी दूरी को इसका कारण बताया। उसने केंद्र सरकार से कहा कि लॉजिस्टिक्स को लेकर आ रही समस्याओं को केंद्र सरकार को देखना चाहिए। साथ ही दिल्ली सरकार से शवों को ले जाने के लिए DTC के बसों के इस्तेमाल पर विचार करने को कहा। इसी बीच अपोलो अस्पताल में एक मरीज की मौत के बाद उसके परिजनों ने जम कर हंगामा और तोड़फोड़ की। कोर्ट ने दिल्ली में कोरोना वायरस संक्रमण की चर्चा करते हुए इस घटना का भी जिक्र किया। कोर्ट ने कहा कि ऐसी घटनाओं से उन स्वास्थ्यकर्मियों का मनोबल कम होता है, जो बिना थके-रुके लोगों की सेवा कर रहे हैं।

हाईकोर्ट ने कहा, “हमें उम्मीद है कि इस तरह की घटनाओं की पुनरावृत्ति नहीं होगी। पुलिस-प्रशासन को ऐसी प्रतिकूल घटनाओं को दिमाग में रखते हुए इसके प्रति सतर्क रहना चाहिए और इन्हें रोकने के लिए कार्य करना चाहिए।” ये घटना दिल्ली के सरिता विहार की है, जहाँ मरीज के परिजनों ने हॉस्पिटल कर्मचारियों, डॉक्टरों और नर्सों पर हमले किए। दिल्ली हाई कोर्ट में कोरोना से जुड़े कई मामलों की सुनवाई हो रही है।

कोलकाता में बम फेंकने के साथ शुरू हुआ बंगाल में आखिरी चरण का मतदान, BJP प्रत्याशी ने कहा- मुझे रैली में मारी गई थी गोली

पश्चिम बंगाल में गुरुवार (अप्रैल 29, 2021) को 8वें और आखिरी चरण की सीटों के लिए वोट डाले जा रहे हैं। सुबह 7 बजे से ही मतदान की प्रक्रिया शुरू हो गई। इस चरण में 35 विधानसभा सीटों पर मतदान हो रहा है। इसके साथ ही 5 राज्यों में विधानसभा चुनाव के लिए मतदान संपन्न हो जाएगा। 2 मई को मतगणना होगी। आज शाम 7:30 के बाद विभिन्न खबरिया चैनल अपने-अपने एग्जिट पोल्स के साथ भी सामने आएँगे।

मालदा से भाजपा उम्मीदवार गोपाल चंद्र साहा ने भी मतदान किया। उन्होंने बताया कि अप्रैल 18 को साहापुर में एक सार्वजनिक रैली हुई थी, जिसमें उन्हें गोली मारी गई थी। उन्हें अस्पताल ले जाया गया, जहाँ इलाज के बाद वो ठीक हुए। साहा ने कहा कि इस साजिश के पीछे कॉन्ग्रेस या TMC के लोग थे। उन्होंने कहा कि पश्चिम बंगाल में जंगलराज है। बता दें कि मालदा पहले से ही एक संवेदनशील इलाका रहा है।

पश्चिम बंगाल में पहले चरण का मतदान मार्च 27 को हुआ था। इसके बाद  1, 6, 10, 17, 22 और 26 अप्रैल को बाकी के चरणों के मतदान हुए। आज मतदान संपन्न होने के साथ ही 294 सीटों के सभी उम्मीदवारों की किस्मत मतपेटी में बंद हो जाएगी। पश्चिम बंगाल में आखिरी चरण में सुबह 9:31 बजे तक 16% मतदान हो चुका था।

हर चरण की तरह आठवें चरण में भी हिंसा की खबरें आ रही है। नॉर्थ कोलकाता के महजाति सदन ऑडिटोरियम में बम फेंके गए। चुनाव आयोग ने इस घटना पर रिपोर्ट तलब की है। बीरभूम में पोलिंग बूथ संख्या 188 पर EVM में कुछ तकनीकी खराबी के कारण वोटिंग आधे घंटे की देरी से शुरू हुआ। काशीपुर-बेलगछिया में अभिनेता मिथुन चक्रवर्ती ने भी मतदान किया। पीएम मोदी ने भी लोगों से लोकतंत्र के इस त्योहार में भाग लेने की अपील की है।

‘माँ के लिए लेकर आया ऑक्सीजन सिलेंडर, VIP के लिए छीनकर ले गई यूपी पुलिस’: जानिए, वायरल वीडियो की हकीकत

टाइम्स ऑफ इंडिया (TOI) के पत्रकार दीपक लवानिया ने बुधवार (28 अप्रैल 2021) को ट्विटर पर एक वीडियो साझा किया। दावा किया कि एक व्यक्ति अपनी माँ के लिए लाए ऑक्सीजन सिलेंडर पुलिस से नहीं ले जाने की गुहार लगाता रहा। लवानिया का दावा था कि पुलिस ने आगरा के निजी अस्पताल से ऑक्सीजन सिलेंडर जब्त कर उसे ‘एक वीआईपी को सप्लाई’ कर दिया। उनके मुताबिक यह यह घटना मंगलवार शाम को हुई थी।

इसके बाद के ट्वीट में, लवानिया ने दावा किया है कि वह आदमी और उसकी माँ जो गंभीर हालत में थे, अब ‘उनका कोई पता’ नहीं है।

यूपी पुलिस ने किया वायरल वीडियो के दावे का खंडन

यूपी पुलिस ने लवानिया के दावों का खंडन किया है। आगरा के एसपी ने कहा कि उपरोक्त वीडियो उपाध्याय हॉस्पिटल का है। कुछ दिनों पहले आगरा में ऑक्सजीन की कमी की वजह से, कुछ लोग अपनों के इलाज के लिए निजी सिलेंडर हॉस्पिटल को दे रहे थे। दो लोग जो सिलेंडर लेकर जा रहे हैं वे वास्तव में खाली थे। पुलिस से निवेदन करता नजर आ रहा व्यक्ति कोविड मरीज का रिश्तेदार है और वास्तव में अपनी माँ के लिए सिलेंडर प्राप्त करने के लिए पुलिसवालों से मदद माँग रहा था।

इस सप्ताह की शुरुआत में, सोशल मीडिया पर एक संदेश वायरल हुआ था जिसमें दावा किया गया था कि गाजियाबाद की एक लड़की ने अपने गुल्लक से पीएम केयर फंड में 5,000 रुपए का दान दिया था, लेकिन खुद ही ऑक्सीजन के इंतजार में मर गई थी। हालाँकि, लड़की के पिता ने खुलासा किया कि उनकी बेटी जीवित और स्वस्थ है और उसे अस्पताल से छुट्टी दे दी गई है।

चीनी कोरोना वायरस महामारी की दूसरी लहर के बीच, भारत में ऑक्सीजन आपूर्ति संकट पैदा हो गया है। हालाँकि, इस समस्या से निपटने की कोशिश जा रही है, क्योंकि प्लान्ट्स में ऑक्सीजन उत्पादन बढ़ाया गया है। साथ ही सरकार ने पूरे भारत में ऑक्सीजन के परिवहन में मदद करने के लिए क्रायोजेनिक टैंक आयात किए हैं। भारतीय रेलवे ‘ऑक्सीजन एक्सप्रेस’ भी चला रही है और ऑक्सीजन संकट से निपटने के लिए इंडियन एयरफोर्स ऑक्सीजन को एयरलिफ्ट कर रही है।

PFI पर बैन की तैयारी में केंद्र सरकार: सुप्रीम कोर्ट को बताया- SIMI से जुड़े हैं इसके पदाधिकारियों के तार

केंद्र सरकार ‘पॉपुलर फ्रंट ऑफ इंडिया (PFI)’ को प्रतिबंधित करने की तैयारी कर रही है। इस कट्टरपंथी इस्लामी संगठन को पहले ही कई राज्यों में बैन किया जा चुका है। बुधवार (अप्रैल 28, 2021) को सुप्रीम कोर्ट को ये जानकारी दी गई। मुख्य न्यायाधीश एनवी रमन्ना, जस्टिस सूर्यकांत और जस्टिस एएस बोपन्ना की पीठ को सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने अपनी सूचनाओं के हवाले से ये जानकारी दी। सीएए विरोधी हिंसा और दिल्ली दंगों के दौरान भी इस संगठन का नाम आया था।

तुषार मेहता सुप्रीम कोर्ट में उत्तर प्रदेश सरकार का प्रतिनिधित्व कर रहे थे। उन्होंने बताया कि केरल का पत्रकार सिद्दीकी कप्पन PFI से जुड़ा हुआ है। इस संगठन के कई पदाधिकारी पहले से ही प्रतिबंधित संगठन ‘स्टूडेंट्स इस्लामिक मूवमेंट ऑफ इंडिया (SIMI)’ से सम्बन्ध रखते हैं।

इसके बाद सुप्रीम कोर्ट ने तुषार मेहता से पूछा कि क्या PFI को प्रतिबंधित किया गया है? मेहता ने बताया कि ये कई राज्यों में प्रतिबंधित है। साथ ही उन्होंने जानकारी दी, “जहाँ तक मुझे सूचना है, केंद्र सरकार ने भी इसे प्रतिबंधित करने की प्रक्रिया चालू कर दी है।” इसके बाद पीठ ने नोट किया कि PFI को अब तक प्रतिबंधित नहीं किया गया है।

ये पूरा मामला हाथरस केस से जुड़ा हुआ है। पिछले साल हाथरस में एक दलित युवती की हत्या के बाद जबरदस्त विरोध-प्रदर्शन की आड़ में व्यापक हिंसा की साजिश रची गई थी। इसी दौरान कप्पन को भी वहाँ जाते हुए गिरफ्तार किया गया था।

सिद्दीकी कप्पन का कहना है कि वो कई बीमारियों से जूझ रहा है। सुप्रीम कोर्ट ने निर्देश दिया कि उसे दिल्ली के किसी अच्छे अस्पताल में बेहतर इलाज के लिए शिफ्ट किया जाए। सुप्रीम कोर्ट ने ‘मूलभूत मानवाधिकार’ की बात करते हुए यूपी सरकार को सिद्दीकी कप्पन के बेहतर इलाज का निर्देश दिया। ‘केरल यूनियन ऑफ वर्किंग जर्नलिस्ट्स (KUWJ)’ और कप्पन की पत्नी ने उसकी रिहाई के लिए याचिका दायर की है।

सुप्रीम कोर्ट ने सिद्दीकी कप्पन से कहा कि वो अपनी गिरफ्तारी को चुनौती देने या फिर अन्य प्रकार की राहत के लिए उपयुक्त संस्था से संपर्क करे। सिद्दीकी कप्पन सहित PFI से जुड़े 4 आरोपितों के खिलाफ मामला दर्ज किया गया था। उसके खिलाफ IPC और UAPA की विभिन्न धाराएँ लगाई गई हैं। उसके अलावा मुजफ्फरनगर से अतिकुर रहमान, बहराइच से मसूद अहमद और रामपुर से आलम को गिरफ्तार किया गया था।

कॉन्ग्रेस शासित पाँच राज्य कोरोना से बेहाल, लेकिन पी चिदंबरम को चाहिए डॉ. हर्षवर्धन की इस्तीफा, लोगों को विद्रोह के लिए उकसाया

कॉन्ग्रेस ने केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री हर्षवर्धन के एक बयान को लेकर बुधवार (अप्रैल 28, 2021) को उन पर निशाना साधा और उन्हें मंत्री पद से बर्खास्त करने की माँग की। पार्टी के वरिष्ठ नेता और पूर्व वित्त मंत्री पी चिदंबरम ने यह भी कहा कि भारत के सभी लोगों को मूर्ख समझ रही सरकार के खिलाफ जनता को विद्रोह कर देना चाहिए। 

उन्होंने ट्वीट किया, ”मैं केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री हर्षवर्धन के बयान से आक्रोशित हूँ। मैं उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के उस बयान से भी आक्रोशित हूँ कि प्रदेश में टीके की कोई कमी नहीं है।” चिदंबरम ने कहा कि जनता को उस सरकार के खिलाफ विद्रोह करना चाहिए जो यह मानकर चल रही है कि भारत के सभी लोग मूर्ख हैं।

पूर्व केंद्रीय मंत्री ने सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि क्या सभी टीवी चैनल झूठे व्यूजुअल्स चला रहे हैं? क्या सभी न्यूजपेपर्स की खबरें गलत हैं? क्या सभी डॉक्टर्स झूठ बोल रहे हैं? परिवार के सदस्य क्या गलत बयान दे रहे हैं? सभी तस्वीरें क्या झूठी हैं? 

वहीं, कॉन्ग्रेस प्रवक्ता सुप्रिया श्रीनेत ने भी सरकार पर हमला बोला। उन्होंने कहा, ”अस्पतालों में उपचार नहीं मिल रहा है। ऑक्सीजन की कमी बरकरार है। लोग त्राहिमाम कर रहे हैं। श्मशान और कब्रिस्तानों में जगह नहीं बची है। इस स्थिति के बावजूद स्वास्थ्य मंत्री कहते हैं कि इस साल स्थिति पिछले साल से बेहतर है।”

उन्होंने आरोप लगाया, ”ऐसा लगता है कि वो मानवता का मूल धर्म भूल चुके हैं। सत्ता के अहंकार में इतने चूर हैं कि वो लोगों की वेदना भूल गए हैं।” सुप्रिया ने कहा, ”हर्षवर्धन के अंदर नैतिकता नहीं है कि इस्तीफा देंगे। इनको तत्काल बर्खास्त किया जाना चाहिए।” गौरतलब है कि केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री हर्षवर्धन मंगलवार को एक वेबिनार में कहा था कि 2021 में देश पिछले साल की तुलना में महामारी को हराने के लिए अधिक अनुभव के साथ मानसिक और भौतिक रूप से बेहतर तैयार है।

बता दें कि कोरोना की दूसरी लहर से पूरा देश जूझ रहा है। कहीं ऑक्सीजन की कमी है तो कहीं मरीजों के लिए अस्पतालों में बेड कम पड़ने लगे हैं। हर दिन कोरोना संक्रमित मरीजों की संख्या रिकॉर्ड तोड़ रही है और देश की स्वास्थ्य सेवाओं पर भारी दबाव पड़ रहा है, जिससे अफरा-तफरी दिखाई दे रही है। ऐसे में हालात ने सोचने पर मजबूर कर दिया है कि आखिर ऐसा क्‍या हुआ कि करोना ने इतना खतरनाक रूप धारण कर लिया और पिछले साल से भी इस साल की स्थिति ज्‍यादा खराब हो गई।

जब पिछले कुछ महीनों पर नजर डालते हैं तो पता चलता है कि कोरोना संक्रमण के मामले कम आने से कई राज्यों ने मान लिया था कि अब कोरोना जा चुका है। कोरोना के मरीज न होने के कारण राज्‍य सरकारों ने जो कोविड सेंटर पिछली बार तैयार किए थे उसे बंद कर दिया। वहाँ लगे वेंटिलेटर और मशीनों को पैक कर दिया गया। जब जनवरी में वैक्सीनेशन की शुरुआत हुई तो इसको कोरोना पर अंतिम प्रहार माना गया। लेकिन इसके साथ ही शुरू हुई लापरवाही और सियासत।

कॉन्ग्रेस शासित राज्यों ने वैक्सीन को लेकर सियासत शुरू की। केंद्र सरकार पर हमले होने लगे। जहाँ महाराष्ट्र की उद्धव सरकार वसूली और अन्य मामलों पर ध्यान देने लगी, तो वहीं दिल्ली की केजरीवाल सरकार को पंजाब और उत्तर प्रदेश का विधानसभा चुनाव नजर आने लगा। इस सियासी बिसात पर किसान नेताओं को आगे किया गया और दिल्ली को बंधक बना लिया गया। कृषि कानूनों के विऱोध के नाम पर सियासत को प्राथमिकता दी गई और कोरोना को नजरअंदाज किया जाने लगा। इसका नतीजा हुआ कि कोरोना ने फिर वापसी की।

दिल्ली राष्ट्रीय राजधानी है, तो मुंबई देश की आर्थिक राजधानी है। यहाँ की गतिविधियों का असर पूरे देश पर पड़ता है। कोरोना की दूसरी लहर ने सबसे पहले इन दो शहरों को अपने आगोश में लिया। इसके बाद छत्तीसगढ़ में हालता बिड़ने लगे। राजस्थान और अन्य राज्यों में कोरोना संक्रमण के मामले बढ़ने लगे। 1 अप्रैल, 2021 के बाद से इतनी तेजी से संक्रमण हुआ कि पूरे देश में हाहाकार मच गया। कॉन्ग्रेस शासित महाराष्ट्र, छत्तीसगढ़ और राजस्थान में हालात काफी बिगड़ गए। पूरे देश के कोरोना संक्रमण के कुल मामलों में आधे से अधिक कॉन्ग्रेस शासित पाँच राज्यों में है। मगर कॉन्ग्रेस के वरिष्ठ नेता पी चिदंबरम अपनी पार्टी के राज्यों में सुधार करने की बजाय स्वास्थ्य मंत्री हर्षवर्धन पर निशाना साध रहे हैं और जनता को विद्रोह के लिए उकसा रहे हैं।

मोदी सरकार ने महामारी के मामले में जरूरी चीजों से लैस करने के लिए पेशेवर तरीके से कदम उठाए हैं। महामारी की दूसरी लहर के नागरिकों की दिक्कतों और कष्टों को हल्के में नहीं लिया जा सकता है। केंद्र ने कहा, रेमडेसिविर की माँग बढ़ने पर सेंट्रल औषधि मानक नियंत्रण संगठन ने सात मैन्युफैक्चरर्स की 22 मैन्युफैक्चरिंग साइट को अनुमति दी। साथ ही 12 अप्रैल को तत्काल अतिरिक्त मैन्युफैक्चरिंग साइट को मंजूरी दी है। सरकार ने कहा कि हर संभव कदम उठाए जा रहे हैं।

आइए जानते हैं मोदी सरकार ऑक्सीजन के लिए क्या कर रही है ?

  • 7 अप्रैल, 2020 को मेडिकल ऑक्सीजन के उत्पादन के लिए 24 घंटे में लाइसेंस देने का इंतजाम किया।
  • अप्रैल-मई 2020 में 1,02,400 ऑक्सीजन सिलेंडर राज्यों को दिए गए।
  • 20 सितंबर, 2020 को लिक्विड मेडिकल ऑक्सीजन के दाम निर्धारित किए गए।
  • 5 जनवरी, 2021 को 162 PSA प्लांट लगाने के लिए 201 करोड़ रुपये आवंटित किए गए।
  • 16 अप्रैल, 2021 को 50, 000 एमटी ऑक्सीजन के लिए ग्लोबल टेंडर दिए गए।
  • 18 अप्रैल, 2021 को ऑक्सीजन के औद्योगिक इस्तेमाल पर रोक लगाई गई और ग्रीन कॉरिडोर बनाकर ऑक्सीजन एक्सप्रेस की शुरुआत की गई।
  • 22 अप्रैल, 2021 को ‘ऑपरेशन ऑक्सीजन’ की शुरुआत की गई।
  • 25 अप्रैल, 2021 को हर जिले में ऑक्सीजन प्लांट लगाने का फैसला लिया गया।

WTF! लड़की ने टॉयलेट सीट में आइसक्रीम, कैंडी डालकर दोस्तों के लिए बना दिया जूस: Video वायरल

कोरोना वायरस के कारण केवल भारत में हाहाकार नहीं मचा बल्कि विदेशों में लोग इस संक्रमण से बुरी तरह प्रभावित हैं। लोग कोशिश कर रहे हैं कि जितना स्वच्छता अपनाई जाए उतना बेहतर है। हालाँकि, इस बीच सोशल मीडिया पर एक बड़ी अजीब वीडियो वायरल हुई है। वीडियो में हाइजिन का ख्याल रखना तो दूर एक लड़की टॉयलेट पॉट में अपने मेहमानों के लिए फ्रूट ड्रिंक तैयार कर रही है।

ये वीडियो 3 मिनट 7 सेकेंड की है। हम देख सकते हैं कि लड़की कैसे पहले पॉट में भरे पानी को कपड़ा लगाकर बंद करती है। फिर उसमें तमाम बर्फ डालती है। इसके बाद आइसक्रीम डालती है। उसमें कैंडी ऐड करती है। फिर फ्लश टैंक में कुछ रंग बिरंगी कैंडी डालती है। उसे जूस ऐड करती है। कोल्ड ड्रिंक मिलाती है। 

वीडियो में सुन सकते हैं कि लड़की ये सब करते हुए वीडियो बनाने वालों को ये भी कह रही है कि ये बहुत अच्छा तरीका है। देखो रंग भी कितना बढ़िया आ रहा है। इसके बाद टैंक बंद करके वह उसे खुद टेस्ट करती है। उसे अच्छा बताती है। फिर फ्लश ऑन कर देती है। उसका दोस्त इस तरीके को गजब बताता है और तीनों मिलकर उसे सर्व करने के लिए ग्लास में सेपरेट कर लेते हैं।

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बाद में यह ड्रिंक बाहर खड़े साथियों को पिला दी जाती है। सब चीयर्स करके इसे खुशी खुशी पीना शुरू करते हैं, तभी वह बताती है कि उसने ये कैसे बनाया। सब जाकर टॉयलेट सीट देखते हैं और ड्रिंक को उसी में डाल देते हैं। लड़की सफाई देती रहती है कि उसने ये बनाने से पहले पॉट को क्लिन किया था। हालाँकि, दोस्तों का मुँह देख कर साफ पता चल रहा है कि उनके साथ कितना घटिया मजाक हुआ है।

इस वीडियो को द एना शो नाम के फेकबुक अकॉउंट पर 21 अप्रैल को अपलोड किया गया। अब तक इस पर 39 हजार रिएक्शन हैं। 57 हजार से ज्यादा कमेंट हैं। टाइमलाइन पर लिखा है कि ये वीडियो मनोरंजन के लिहाज से बनाई गई। लेकिन लोग इसे देख अपना गुस्सा उतार रहे हैं।

एडवर्ड नाम के यूजर ने पूछा कि वो खुद एक लाइंसेस वाला प्लंबर है और उसे ये बहुत बेहूदा लगा। उसने पूछा, “क्या तुम जानती हो इस टॉयलेट सीट पर कितने संक्रमण होंगे? कोई मतलब नहीं कि तुमने इसे साफ किया या नहीं। ये इसके लिए नहीं बनी।” वहीं कई यूजर ने इसे घटिया करार देते हुए कहा कि ये कोई मेंटल इशू है। क्या हो अगर बच्चे इसे देख घर पर करने लगे?

बता दें कि इंटरनेट आज के जमाने में हर यूजर पर एक गहरा प्रभाव छोड़ता है। कोई अजीब ट्रेंड यहाँ शुरू होता है कि लोग उसी पर वीडियो बनाने लगते हैं। इस समय कोरोना संक्रमण बुरी तरह फैला है। अगर कोई भी यूजर ऐसे घिनौने मजाक करने की सोचता है तो सोचिए दूसरे की सेहत से कितना बड़ा खिलवाड़ होगा।

पिछले वर्ष भी ऐसे मामले उजागर हुए थे। कोरोना चैलेंज के नाम पर युवक टॉयलेट सीट चाट रहा था। कुछ दिन बाद पता चला कि वह कोरोना संक्रमित हो गया है। ऐसे ही एक अन्य टिकटॉक स्टार ने फ्लाइट में टॉयलेट सीट को चाटा था और खुशी से विक्ट्री साइन बनाती भी दिखी थी।।