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मंसाराम अस्पताल में हुई अचानक ऑक्सीजन की कमी, 35 कोरोना मरीजों की जान खतरे में: दिल्ली पुलिस की तेजी ने बचाई जान

देश भर में कोरोना संक्रमण तेजी से फैल रहा है। ऐसी परिस्थिति में हर राज्य में अस्पतालों में बेड और ऑक्सीजन की कमी होती जा रही है। ताजा मामला देश की राजधानी का है। दिल्ली के नांगलोई नजफगढ़ रोड स्थित मंसाराम अस्पताल में अचानक ऑक्सीजन की कमी हो जाने से यहाँ भर्ती 35 कोरोना मरीजों की जान खतरे में पड़ गई।

रिपोर्ट्स के मुताबिक, रविवार दोपहर करीब 1:30 बजे मंसाराम अस्पताल के डायरेक्टर राजेश डबास ने पुलिस को फोन करके कहा कि यहाँ 35 कोविड मरीज ऑक्सीजन सपोर्ट पर हैं। उनकी ऑक्सीजन सप्लाई लगभग खत्म होने वाली है। राजेंद्र डबास ने यह भी बताया कि उन्होंने कई अथॉरिटीज से मदद माँगी, लेकिन कहीं से कोई भी जवाब नहीं मिला।

बताया जा रहा है कि एडिशनल डीसीपी सुधांशु धामा ने कई अधिकारियों के साथ तुरंत संपर्क साधा और इस बारे में उनसे बातचीत की। एसीपी आशीष के निर्देशन में निहाल विहार से दो टीमों को निर्देश दिया गया कि वो तुरंत मुंडका और बवाना में जाकर ऑक्सीजन सिलेंडर की व्यवस्था करें।

10 ऑक्सीजन सिलेंडर आधे घंटे के अंदर पहुँचाए गए। इसके बाद 10 और सिलेंडर सहित कुल लगभग 20 ऑक्सीजन सिलेंडर पहुँचाए गए। दिल्ली पुलिस की त्वरित कार्रवाई से आज 35 कोरोना मरीजों की जान बच गईं।

बता दें कि मंसाराम अस्पताल के डायरेक्टर ने 35 कोविड मरीजों की जान बचाने के लिए उपलब्ध कराए गए ऑक्सीजन सिलेंडर के लिए दिल्ली पुलिस को धन्यवाद दिया है।

पश्चिम बंगाल: लापता भाजपा कार्यकर्ता का शव झाड़ी में मिला, पार्टी ने टीएमसी के गुंडों पर लगाया हत्या का आरोप

पश्चिम बंगाल में विधानसभा चुनाव के बीच हिंसा की घटनाएँ थमने का नाम नहीं ले रही हैं। इसी कड़ी में रविवार को नादिया जिले में रोआवारी गाँव के मंडलपारा में भाजपा कार्यकर्ता का शव मिला है। यह क्षेत्र चकदहा विधानसभा क्षेत्र के अंतर्गत आता है, जहाँ पाँचवें चरण के तहत मतदान हुआ है।

मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, मृतक की पहचान दिलीप कार्तनिया के रूप में हुई है, जो भाजपा के सक्रिय कार्यकर्ता थे। वह शनिवार को बूथ स्तर पर पार्टी के लिए काम कर रहे थे। बताया जा रहा है कि पोलिंग के दिन कुछ अज्ञात बदमाशों ने कार्तनिया को धमकी दी थी। बाद में लगभग 11 बजे उन्हें किसी अज्ञात ने बुलाया तो वे घर से चला गए, लेकिन फिर नहीं लौटे।

भाजपा कार्यकर्ता का शव रविवार सुबह उनके घर के पीछे झाड़ियों से बरामद किया गया। चश्मदीदों ने बताया कि दिलीप कीर्तानिया की नाक, कान और मुँह से खून बह रहा था। उनकी हालत को देखते हुए उन्हें तुरंत चकदाहा स्टेट जनरल अस्पताल ले जाया गया, जहाँ डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया।

जब दिलीप की मौत की खबर उसके परिवार के सदस्यों को दी गई, तो उन्होंने अस्पताल के बाहर धरना दिया। परिजनों का आरोप है कि दिलीप को बेरहमी से पीटा गया है और चोट लगने से उनकी मौत हो गई। दिलीप कीर्तानिया के परिवार वालों ने दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की माँग की। बाद में हालात को काबू करने के लिए पुलिस अधिकारियों की टीम अस्पताल पहुँची और शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया।

हत्या पर राजनीतिक दलों की बयानबाजी शुरू

घटना के बाद आक्रोशित भाजपा कार्यकर्ताओं और पार्टी के नेताओं ने सड़क जाम कर दिलीप कीर्तानिया को न्याय दिलाने की माँग की। भाजपा कार्यकर्ताओं ने पलापारा पुलिस स्टेशन की ओर आने वाली ट्रेनों को भी रोक दिया। भाजपा ने तृणमूल कॉन्ग्रेस के गुंडों पर हत्या का आरोप लगाया है।

भाजपा नेता जयप्रकाश मजूमदार ने कहा, “यह तृणमूल कॉन्ग्रेस की संस्कृति है। उन्होंने भाजपा के पोलिंग एजेंट को बुलाया और उसकी हत्या कर दी। भाजपा का समर्थन करना टीएमसी की नजर में अपराध है। उन्हें विपक्षी दलों के खिलाफ ऐसे अपराध करने के लिए उनकी पार्टी हाईकमान द्वारा निर्देशित किया जाता है। यही कारण है कि निचले स्तर के कार्यकर्ता अपने तरीके से काम कर रहे हैं। हम दोषियों को सजा दिलाने की माँग कर रहे हैं।”

वहीं टीएमसी नेता और पूर्व मंत्री तापस रॉय ने आरोपों को खारिज कर दिया। उन्होंने आरोप लगाया, “2019 के लोकसभा चुनाव के बाद राज्य में भाजपा ने हत्या की राजनीति शुरू की। वे राजनीति में इतने निचले स्तर तक गिरकर खुशी महसूस करते हैं। वो इस हत्या की जाँच के बिना किसी नतीजे पर कैसे पहुँच सकते हैं? वे टीएमसी पर आरोप कैसे लगा सकते हैं? जाँच होने दीजिए। सच्चाई सामने आ जाएगी। ”

भाजपा के पोलिंग एजेंट को टीएमसी के गुंडों ने बेरहमी से पीटा

दूसरी घटना शनिवार की है, बताया जा रहा है कि उत्तर 24 परगना जिले के हरोआ विधानसभा क्षेत्र में अपना वोट डालने जा रहे अजीत धर नाम के एक भाजपा पोलिंग एजेंट पर कथित तौर पर एक टीएमसी कार्यकर्ताओं ने हमला कर दिया। रिपब्लिक टीवी की रिपोर्ट के मुताबिक टीएमसी के गुंडों ने भाजपा नेता का कॉलर पकड़कर उसे भाजपा को वोट नहीं देने की धमकी दी थी। भाजपा का आरोप है कि मारपीट में पार्टी के पोलिंग एजेंट के सिर में फ्रैक्चर हुआ था। अजीत धर ने बताया कि उनके सिर पर टीएमसी कार्यकर्ताओं ने लाठियों से हमला किया था।

भाजपा कार्यकर्ता को इलाज के लिए बर्धमान मेडिकल कॉलेज में भर्ती कराया गया है। टीएमसी कार्यकर्ता ने भाजपा एजेंट से पूछा कि वह कहाँ जा रहा था और उसने अम्फान चक्रवात के दौरान तृणमूल सरकार से पैसे क्यों लिए। इसी को लेकर भाजपा के पोलिंग एजेंट और TMC गुंडों के बीच गर्मागर्मी हुई। भाजपा के एक अन्य पोलिंग एजेंट सुब्रतो घोष ने बताया कि उसने देखा है कि टीएमसी कार्यकर्ताओं ने धर पर हमला किया था। हमले के बाद वह पोलिंग स्टेशन तक पहुँच ही नहीं सके।

‘कॉन्ग्रेसी’ साकेत गोखले ने फैलाया झूठ: रेमडेसिविर की आपूर्ति पर महाराष्ट्र सरकार द्वारा ब्रुक फार्मा के निदेशक के उत्पीड़न का किया बचाव

कॉन्ग्रेस समर्थक साकेत गोखले ने एक बार फिर से फेक न्यूज फैलाने का काम किया है। गोखले ने बेबुनियाद ट्वीट्स की सीरीज में आरोप लगाया कि भाजपा ने महाराष्ट्र में अपने पार्टी कार्यालय में 4.75 करोड़ रुपए की रेमडेसिविर (Remdesivir) की जमाखोरी की है।

साकेत गोखले ने यह आरोप मुंबई पुलिस द्वारा शनिवार को दमन स्थित ब्रुक फार्मा कंपनी के रेमडेसिविर सप्लायर को हिरासत में लेने और सवाल पूछे जाने के बाद लगाया। बीजेपी की महाराष्ट्र इकाई ने कंपनी से  रेमडेसिविर को महाराष्ट्र में लोगों को आपूर्ति करने का आदेश दिया था, लेकिन पुलिस ने कंपनी के निर्देशक को हिरासत में ले लिया। हालाँकि, देवेंद्र फडणवीस द्वारा सवाल उठाए जाने के बाद उसे रिहा कर दिया गया। गोखले द्वारा विपक्षी पार्टी पर लगाए गए गंभीर आरोपों का कोई सबूत नहीं है और उस दावे का सच्चाई से कोई लेना-देना नहीं है।

साकेत गोखले का दावा

गोखले ने सवाल किया कि कैसे देवेंद्र फडणवीस जैसे ‘निजी व्यक्ति’ गुजरात से रेमडेसिविर का स्टॉक खरीद सकते हैं, जब बिक्री केवल सरकार को करने की अनुमति है?

देवेंद्र फडणवीस ने मीडिया से बात करते हुए कहा था, “चार दिन पहले, हमने ब्रुक फार्मा को महाराष्ट्र में रेमडेसिविर इंजेक्शन के स्टॉक की आपूर्ति करने का अनुरोध किया था। उन्होंने कहा कि वे अनुमति नहीं दे सकते थे। मैंने केंद्रीय मंत्री मनसुख मंडाविया से बात की और खाद्य एवं औषधि प्रशासन (एफडीए) से रेमडेसिविर सप्लाई के लिए अनुमति ली, जिसके बाद आज रात (अप्रैल 17, 2021) लगभग नौ बजे, पुलिस ने उन्हें गिरफ्तार कर लिया है।”

महाराष्ट्र में विपक्षी दल द्वारा राज्य में कोविड -19 के उपचार में प्रयुक्त महत्वपूर्ण दवा की तीव्र कमी को देखते हुए यह व्यवस्था की गई थी। इससे यह भी स्पष्ट है कि केंद्रीय रसायन और उर्वरक राज्य मंत्री ने महाराष्ट्र को दवा पहुँचाने की मंजूरी दी थी, इसलिए यह सरकार के लिए अज्ञात ‘निजी डील’ नहीं था।

गोखले ने यहाँ पर भूगोल के कम ज्ञान को भी प्रदर्शित किया। ब्रुक प्लांट दादरा नगर हवेली और दमन दीव में स्थित है, न कि गुजरात में, जैसा कि साकेत गोखले ने दावा किया।

इसी ट्वीट में गोखले ने एक और बेबुनियाद दावा किया कि पार्टी कार्यालय में बीजेपी द्वारा रेमडेसिविर स्टॉक जमा किया जा रहा है। महाराष्ट्र के पूर्व मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने कहा कि पुलिस उपायुक्त (डीसीपी) मंजूनाथ सिंगे ने उन्हें बताया कि उनके पास इनपुट थे कि कुछ निर्यातकों के पास 60,000 रेमडेसिविर की शीशियाँ थीं और वे केवल उसी की जाँच के लिए जा रहे हैं। लेकिन वहाँ जाकर उन्होंने गिरफ्तारी कर ली।

एनसीपी नेता नवाब मलिक के ढकोसले को आगे बढ़ाते हुए, गोखले ने अपने अगले ट्वीट में आरोप लगाया कि केंद्र सरकार ने महाराष्ट्र सरकार को रेमडेसिविर की आपूर्ति रोक दी है।

भाजपा नेताओं ने जल्द ही इस निराधार आरोप को खारिज करने में तनिक भी देर नहीं लगाई। बीजेपी सांसद मनोज कोटक ने महाराष्ट्र और गुजरात की संबंधित राज्य सरकारों की एफडीए द्वारा जारी की गई दो समान चिट्ठियों की तस्वीरें साझा की हैं, जिसमें कहा गया है कि केंद्र की इस मामले में कोई भूमिका नहीं है।

मुंबई भाजपा के प्रवक्ता सुरेश नखुआ ने भी क्रमशः गुजरात और महाराष्ट्र सरकार द्वारा पत्र साझा किए और कहा कि एमवीए सरकार संकट से निपटने के लिए पर्याप्त नहीं है।

अपने अंतिम ट्वीट में गोखले ने गैर-एनडीए दलों के नेताओं को टैग किया और उनसे अनुरोध किया कि यदि भाजपा अन्य राज्यों में इसी तरह की योजना चला रही है, तो इसकी जाँच करें। इस मामले की जाँच की माँग करने के साथ ही उन्होंने केंद्र सरकार पर हमला करते हुए कहा, “मोदी सरकार की मिलीभगत से फडणवीस बीजेपी कार्यालयों में जमाखोरी करते हुए महाराष्ट्र के रेमडेसिविर आपूर्ति को भुना रहे हैं।”

हालाँकि, यह जानना अनिवार्य है कि महाराष्ट्र सरकार की विलंबता की वजह से विपक्ष को मौजूदा संकट से निपटने के लिए मजबूर होना पड़ा। FDA के एक अधिकारी ने स्वीकार किया कि वे प्रत्यक्ष बिक्री के लिए कुछ निर्माताओं को आपातकालीन स्वीकृति देने के लिए अभी भी योजना चरण में थे। लेकिन अभी यह बातचीत के चरण में है। ब्रुक को अभी तक मार्केटिंग स्वीकृति नहीं दी गई है।

भारत में वर्तमान में सात ऐसी कंपनियाँ हैं, जो रेमडेसिविर इंजेक्शन का निर्माण कर रही हैं। रेमडेसिविर इंजेक्शन के उत्पादन के लिए इन कंपनियों का अमेरिका की Gilead Sciences के साथ अग्रीमन्ट है। इन कंपनियों की उत्पादन क्षमता फिलहाल 33.80 लाख इंजेक्शन प्रति महीने की है।

देश में बढ़ते कोरोनावायरस के संक्रमण के बीच केंद्र सरकार ने रेमडेसिविर इंजेक्शन और रेमडेसिविर ऐक्टिव फार्मास्युटिकल इनग्रेडिएंट्स (API) के निर्यात को फिलहाल रोकने का निर्णय लिया है। इसके अलावा मरीजों को रेमडेसिविर की सहज उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए भी सरकार महत्वपूर्ण कदम उठाने जा रही है। रेमडेसिविर का उपयोग कोविड-19 के ईलाज में होता है।

अमेरिका के न्यूयॉर्क का अनोखा मामला, अपने ही वयस्क बच्चों से शादी करना चाहते हैं माता-पिता: फेडरल कोर्ट में याचिका

अमेरिका के न्यूयॉर्क से एक अनोखा मामला सामने आया है। यहाँ एक माता-पिता अपने वयस्क बच्चे से शादी करना चाहते हैं। इसके लिए उन्होंने कानूनी तौर पर मैनहट्टन फेडरल कोर्ट में कानूनी कागजात दाखिल किए हैं और इसे ‘व्यक्तिगत स्वायत्तता’ का मामला बताया है।

अपनी इस व्यक्तिगत स्वायत्तता के पीछे के कारण को समझाते हुए माता-पिता ने कहा कि यह आवेदन समाज के एक बड़े हिस्से के लिए नैतिक, सामाजिक और जैविक रूप से खिलाफ है। लेकिन वे चाहते हैं कि इसके लिए कानून बने ताकि इस अनाचार प्रथा में कोई रुकावट ना हो।

न्यूयॉर्क पोस्ट की रिपोर्ट के मुताबि​क, माता-पिता ने अपने अनोखे आवेदन को समझाते हुए कहा, ”विवाह के स्थायी बंधन के जरिए दो व्यक्ति चाहे उनके बीच कोई भी रिश्ता हो, वे भाव, अंतरंगता (अंतरंग होने की अवस्था) और आध्यात्मिकता के उच्चतम शिखर को हासिल कर सकते हैं।”

दाखिल आवेदन में यह स्पष्ट किया गया है कि होने वाले पति-पत्नी वयस्क हैं और इसके साथ ही उन्होंने यह भी साझा किया है कि आपस में उनका रिश्ता माता-पिता और बच्चे का है। हालाँकि, मैनहट्टन के इस परिवार और वैवाहिक कानून एटॉर्नी एरिक रुबेल का कहना है कि ऐसा कभी संभव नहीं है।

बता दें कि इस अनोखे आवेदन को दाखिल करने वाले माता-पिता ने अपनी और अपने बच्चे के पहचान का खुलासा नहीं किया है। इस बात की जानकारी भी नहीं दी गई है कि अभिभावक और बच्चे की उम्र, लिंग आदि क्या है।

कोर्ट में दाखिल आवेदन के मुताबिक, पहचान जाहिर न करने के पीछे सबसे बड़ी वजह यह है कि अभिभावक की यह माँग समाज के एक बड़े हिस्से को पसंद नहीं आएगी और इसका प्रतिकूल असर पड़ेगा।

गौरतलब है कि न्यूयॉर्क के कानून के अनुसार अपने किसी सगे संबंधी के साथ यौन संबंध बनाने पर 4 साल तक की जेल की सजा हो सकती है। इस नजरिये से देखा जाए तो यह वहाँ आपराधिक मामला बनता है। इसके अलावा अपने रिलेटिव से शादी को भी यहाँ अमान्य माना जाता है।

‘गोरखपुर कांड’ के आरोपित डॉ कफील खान कोरोना के इलाज के लिए ‘स्टेरॉयड’ के इस्तेमाल की सलाह दे फिर फँसे

उत्तर प्रदेश के गोरखपुर में 2017 में हुए ऑक्सीजन कांड के आरोपित डॉ कफील खान अब सोशल मीडिया पर लोगों को कोरोना से बचने की सलाह दे रहे हैं। बिना चिकित्सकीय देखरेख के इस्तेमाल पर जिन दवाओं से गंभीर नुकसान हो सकता है कफील खान उसे लोगों को खुद से लेने की सलाह दे रहे हैं।

खान द्वारा दिए गए सुझाव का स्रोत कनाडा के एक डॉ जैन चागला हैं, जो संक्रामक रोगों के विशेषज्ञ हैं।

हालाँकि, ऑपइंडिया एक जिम्मेदार मीडिया प्लेटफॉर्म होने के कारण आपसे ये अनुरोध करता है कि किसी भी दवाओं का इस्तेमाल करने से पहले चिकित्सक से परामर्श जरूर लें।

सोशल मीडिया पर डॉ कफील की जानकारी के बाद लोगों ने स्टेरॉयड के जोखिमों के बारे में उन्हें याद दिलाया, जिसके बाद उन्होंने एक अन्य ट्वीट करते हुए कहा कि “डेक्सामेथासोन” को केवल प्रशिक्षित डॉक्टर देखरेख में ही सेवन किया जाना चाहिए। हालाँकि, तब तक बहुत देर हो चुकी थी और ट्वीट को सैकड़ों रीट्वीट और हजारों लाइक मिल चुके थे।

बता दें कि वर्ष 2017 में गोरखपुर के बीआरडी मेडिकल कॉलेज में ऑक्सीजन की आपूर्ति में कमी के कारण 72 शिशुओं की मृत्यु हो गई थी। इसके बाद प्रशासन ने इलाज में लापरवाही बरतने के कारण उन्हें निलंबित कर दिया। बाद में डॉ कफील खान को गिरफ्तार भी किया गया था।

दो साल बाद उत्तर प्रदेश पुलिस ने जाँच के बाद लापरवाही और भ्रष्टाचार के आरोपों को वापस ले लिया था। लेकिन, डॉक्टर कफील खान पर निजी क्लीनिक चलाने समेत दो अन्य आरोप लगाए गए। मामले में उन्हें 9 महीने जेल में बिताने के बाद 2018 में रिहा कर दिया गया था।

इससे पहले सोशल मीडिया पर झूठी खबरें फैलाने के मामले में विभागीय जाँच के बाद उन्हें क्लीन चिट दे दी गई थी। उत्तर प्रदेश सरकार ने अक्टूबर में गलत सूचना फैलाने और निलंबन की अवधि में भी जबरन एक अस्पताल में घुसकर रोगियों के इलाज की कोशिश करने के मामले में नया जाँच शुरू की थी।

योगी सरकार रेमडेसिविर इंजेक्शन के जमाखोरों के खिलाफ सख्त, NSA के तहत होगी कार्रवाई

योगी सरकार ने यूपी में रेमडेसिविर इंजेक्शन के साथ पकड़े गए आरोपितों के खिलाफ सख्त कार्रवाई करने का फैसला किया है। इसके बाद से ही उत्तर प्रदेश एसटीएफ और लोकल पुलिस की टीमें जमाखोरों तथा कालाबाजारी करने वालों की तलाश में जुट गई हैं।

रिपोर्ट्स के मुताबिक, योगी आदित्यनाथ सरकार ने 265 रेमडेसिविर इंजेक्शन के साथ पकड़े गए 3 व्यक्तियों के खिलाफ कड़े राष्ट्रीय सुरक्षा कानून (एनएसए) के प्रावधानों के तहत सजा देने का फैसला किया है। सरकारी प्रवक्ता ने कहा, “राज्य सरकार ने पुलिस को ऐसे लोगों के खिलाफ सख्त कार्रवाई करने का निर्देश दिया है, जो कोविड-19 दवाओं की कालाबाजारी करते हैं।”

वहीं, पुलिस कमिश्नर असीम अरुण ने कहा कि संकट के इस समय में कोई भी गैरकानूनी गतिविधि बर्दाश्त नहीं की जाएगी। आरोपितों को सख्त से सख्त सजा दी जाएगी। उन्होंने कहा कि यह मानवता के खिलाफ एक अपराध है। हम गुरुवार को रेमडेसिविर इंजेक्शन के साथ गिरफ्तार किए गए तीनों आरोपितों के खिलाफ एनएसए लगाकर कार्रवाई करेंगे।

उन्होंने आगे कहा कि राज्य सरकार अपने लोगों को रेमडेसिविर दवाएँ और अन्य कोविड से संबंधित दवाओं की उपलब्धता की सुविधा को आसान बनाने के लिए प्रतिबद्ध है। इस बीच एसटीएफ के सूत्रों ने कहा कि वे कोविड से जुड़ी दवाओं की कालाबाजारी पर अंकुश लगाने का प्रयास कर रहे हैं।

बता दें कि कानपुर की स्पेशल टास्क फोर्स (एसटीएफ) ने गुरुवार को 265 रेमडेसिविर इंजेक्शन के साथ 3 लोगों को गिरफ्तार किया गया था, जो इसकी कालाबाजारी करने में शामिल थे। रेमडेसिविर एक मुख्य दवा है, जिसका उपयोग कोरोना वायरस के उपचार में किया जाता है। लोगों की परेशानी का फायदा उठाकर कुछ लोग इसे ऊँचे दामों में बेच रहे हैं।

गौरतलब है कि सीएम योगी आदित्यनाथ ने शनिवार को कहा कि उत्तर प्रदेश में ऑक्सीजन की आपूर्ति को बेहतर करने के लिए अलग-अलग स्थानों पर 10 नए ऑक्सीजन प्लाँट स्थापित किए जाएँगे। इसमें डीआरडीओ का सहयोग मिल रहा है। उन्होंने कहा, लखनऊ स्थित अवध शिल्प ग्राम में एच.ए.एल. के सहयोग से एक नया सर्व सुविधायुक्त कोविड हॉस्पिटल तैयार किया जाएगा। स्वास्थ्य विभाग एच.ए.एल. से समन्वय स्थापित कर इस अतिमहत्वपूर्ण कार्य को तत्काल क्रियाशील करे।

पिता से बच्चों की रक्षा करने के लिए माँ बनी हत्यारन, तीन मासूमों को चाकू घोंपकर मौत के घाट उतारा

अमेरिका में एक महिला को अपने तीन छोटे बच्चों की हत्या करने के आरोप में गिरफ्तार किया गया है। लिलियाना कैरिलो (30) ने जेलर द्वारा लिए गए एक इंटरव्यू में अपने बेटे टेरी (2 साल) और बेटियों जोआना (3 साल) और सिएरा (6 महीने) की हत्या की बात कबूल की। तीनों बच्चे कैरिलो और उनके पिता एरिक डेंटन के साथ लॉस एंजिल्स के रेसेडा के एक अपार्टमेंट में रहते थे।

पिछले हफ्ते उसके तीन बच्चों के शव अपार्टमेंट से बरामद किए गए थे। अधिकारियों ने बताया कि शनिवार (10 अप्रैल 2021) को तुलेयर काउंटी में इस जघन्य घटना को अंजाम देने के बाद आरोपी महिला लिलियाना कैरिलो वहाँ से फरार हो गई थी। अधिकारियों ने काफी दूर तक उसका पीछा किया और आखिरकार उसे गिरफ्तार कर लिया गया।

‘लॉस एंजिलिस टाइम्स’ की खबर के मुताबिक, परिवार अदालत के दस्तावेजों के हवाले से बताया गया कि महिला के पति एरिक डेंटन ने 1 मार्च को तीनों बच्चों का संरक्षण माँगा था। मामले में 14 अप्रैल को सुनवाई होने वाली थी।

अखबार के साथ इंटरव्यू में डेंटन ने कहा कि कैरिलो ने मनोरोगी की तरह बर्ताव करना शुरू कर दिया था, जिसके कारण बच्चों के संरक्षण को लेकर कैरिलो के साथ उसका विवाद चल रहा था। रविवार को वह डेंटन को बच्चे सौंपने वाली थी।

वहीं, लॉस एंजिलिस पुलिस के अधिकारी लेफ्टिनेंट राउल जोवेल ने बताया कि बच्चों की दादी शनिवार सुबह जब काम से घर लौटी तो उसने घर पर बच्चों के शव देखे। साथ ही उन्होंने देखा कि उनकी माँ घर पर नहीं है।

पुलिस ने बताया कि शुरुआती जाँच में यह बात सामने आई है कि तीनों बच्चों की चाकू घोंपकर हत्या की गई है। उन्होंने बताया कि कैरिलो को तुलेयर काउंटी में पोंडेरोसा इलाके से गिरफ्तार किया गया जो बेकर्सफील्ड से करीब 100 मील उत्तर में है।

इंडिया टुडे में प्रकाशित खबर के मुताबिक, कैलिफोर्निया से बच्चों की माँ ने कहा कि मैंने अपने बच्चों की हत्या इसलिए की, क्योंकि मैं उन्हें उनके पिता से बचाना चाहती थी। केर्न काउंटी में लेर्डो प्री-ट्रायल फैसिलिटी में एक इंटरव्यू के दौरान कैरिलो ने KGET-TV को बताया, “मैंने उन्हें मार डाला। मैंने ये सब धीरे-धीरे किया। मुझे नहीं पता कि मैं इसे कैसे एक्सप्लेन करूँ।”

लिलियाना कैरिलो ने आगे कहा कि वह अपना शेष जीवन जेल में ही बिताना चाहती हैं। वह चाहती थीं कि उनके बच्चे जीवित रहें। लेकिन मैं उन्हें जीवन भर हर पल प्रताड़ित होते नहीं देखना चाहती थी।

बता दें कि इसी वर्ष मार्च में बच्चों के संरक्षण को लेकर एरिक डेंटन ने कैरिलो पर मनोरोगी होने का आरोप लगाया था। बदले में, कैरिलो ने उसके खिलाफ शिकायत दर्ज कराई थी कि डेंटन एक शराबी है और उसके साथ दुर्व्यवहार करता है।

दूसरी लहर सँभल नहीं रही, ठाकरे सरकार कर रही तीसरी की तैयारी: महाराष्ट्र के युवराज ने बताया सरकार का फ्यूचर प्लान

महाराष्ट्र के कैबिनेट मिनिस्टर और मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे के बेटे आदित्य ठाकरे ने कहा है कि राज्य में जल्दी ही कोरोना वायरस की तीसरी लहर आ सकती है। उन्होंने यह भी कहा कि तीसरी लहर कितनी खतरनाक होगी अथवा दूसरी लहर की तुलना में उसकी स्थिति कैसी होगी, इसका अंदाजा लगाना फिलहाल मुश्किल है। आदित्य ठाकरे का यह बयान ऐसे समय आया है जब महाराष्ट्र पूरे देश में कोरोना वायरस से सबसे ज्यादा प्रभावित है और दूसरी लहर में ही राज्य की अधिकांश स्वास्थ्य सुविधाएँ चरमरा गई हैं।

एनडीटीवी साॅल्यूशन समिट में चर्चा करते हुए आदित्य ठाकरे ने कहा कि हम कोरोनावायरस की तीसरी लहर के लिए तैयारी कर रहे हैं। उन्होनें आँकड़े देते हुए कहा कि राज्य में पाँच लाख बिस्तर तैयार हैं और उनमें से लगभग 70% बिस्तर ऑक्सीजन से युक्त हैं। उन्होंने यह भी कहा कि हम जो निर्णय ले रहे हैं वह टास्क फोर्स के सुझाव पर लिए जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि यह निर्णय मेडिकल फैक्ट्स और विज्ञान पर आधारित हैं न कि राजनीति पर।  

हालाँकि ठाकरे का यह बयान विरोधाभाषी नजर आता है क्योंकि उन्हीं की सरकार के मंत्री ऑक्सीजन की कमी का रोना रो चुके हैं और केन्द्र सरकार पर दोषारोपण भी कर चुके हैं। महाराष्ट्र में ऑक्सीजन की कमी के हालातों देखते हुए उद्योगपति और रिलायंस इंडस्ट्रीज के मालिक मुकेश अंबानी ने महाराष्ट्र की सहयता की पेशकश की है। रिलांयस की जामनगर रिफाइनरी से महाराष्ट्र को 100 टन ऑक्सीजन मुफ्त में दी जा रही है।

इसके अलावा महाराष्ट्र में कई ऐसे केस आए जहाँ संक्रमितों को ऑक्सीजन की कमी के कारण अपनी जान से हाथ धोना पड़ा। यदि आदित्य ठाकरे के अनुसार सरकार तीसरी लहर से लड़ने की तैयारी कर रही है तो फिलहाल उसे अपने संसाधनों को दूसरी लहर की तबाही से राज्य को बचाने में लगाना चाहिए।

महाराष्ट्र में सरकारी अस्पतालों की हालत कितनी खराब है, यह किसी से छिपा नहीं है। महामारी की दूसरी लहर में पूरे राज्य में लोगों को अस्पतालों में बेड मिलना ​मुश्किल हो रहा है। महाराष्ट्र के एक ही परिवार के 3 लोगों को अस्पताल में बेड न मिलने पर अलग-अलग जगहों पर भर्ती कराना पड़ा था। इसके चलते अंतिम समय में भी परिवार के लोग एक-दूसरे को नहीं देख पाए।

आदित्य ठाकरे के बयान पर आश्चर्य इसलिए भी होता है क्योंकि स्वयं उनके पिता और राज्य के मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को चिट्ठी लिखी थी और यह अनुरोध किया था कि केंद्र सरकार Covid-19 को एक प्राकृतिक आपदा घोषित कर दे।

कुछ दिनों पहले एक वीडियो सामने आया था जहाँ एक व्यक्ति अपने कोरोनावायरस से संक्रमित पिता को अस्पताल में भर्ती करने की मिन्नतें कर रहा था। वीडियो में उक्त व्यक्ति यह कहता हुआ पाया गया कि “या तो मेरे पिता को अस्पताल में बेड दीजिए, नहीं तो उन्हें कोई इंजेक्शन देकर मार डालिए।”  

प्रवासी मजदूरों के सवाल पर आदित्य ठाकरे ने कहा कि राज्य में प्रवासी मजदूर बेहतर स्थिति में हैं जबकि सच तो यह है कि एक बार फिर से प्रवासी मजदूर राज्य छोड़ने के लिए मजबूर हैं और राज्य में 15 दिनों का कर्फ्यू लगने लगाए जाने के कारण मजदूर अपने घरों को लौटने के लिए मजबूर हैं। घर लौट रहे प्रवासी मजदूरों ने महाराष्ट्र पुलिस पर वसूली का आरोप  भी लगाया है। यह बात भी सामने आ चुकी है कि BMC के अधिकारी मुंबई इंटरनेशनल एयरपोर्ट पर बाहरी देशों से आए लोगों को 7 दिन के अनिवार्य क्वारंटाइन में रखने की बजाय उनसे 10-12 हजार रुपए लेकर उन्हें एयरपोर्ट से निकलने में मदद कर रहे हैं।

महाराष्ट्र के अस्पतालों में न सिर्फ बेड्स, बल्कि वेंटिलेटर्स और ऑक्सीजन की भी भारी कमी है। दवाएँ नहीं मिल रहीं। ऑक्सीजन और मेडिकल सप्लाइज की उपलब्धता के लिए मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे ने भारतीय सेना से मदद के लिए गुहार लगाई है। राज्य में ज़रूरी आवागमन को छोड़ कर बाकी सारी चीजें पहले ही प्रतिबंधित की जा चुकी है। प्रवासी मजदूर वापस लौट रहे हैं।

ऐसे में भी यदि महाराष्ट्र के मंत्री आदित्य ठाकरे यह कह रहे हैं कि राज्य सरकार कोरोनावायरस की तीसरी लहर के लिए तैयारी कर रही है तो उन्हें पुनर्विचार करने की आवश्यकता है।

पिछले 24 घंटों में महाराष्ट्र में 67,000 से अधिक संक्रमित मरीज सामने आए हैं। इसी दौरान लगभग 419 लोगों को अपनी जान गँवानी पड़ी है। राज्य में कुल मरीजों की संख्या 40 लाख के करीब पहुँच रही है और सक्रिय मरीज भी साढ़े छः लाख के लगभग हैं। ऐसे में महाराष्ट्र के मंत्री आदित्य ठाकरे, मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे और महाराष्ट्र सरकार को यही सुझाव दिया जाना चाहिए कि फिलहाल कोरोनावायरस की तीसरी तीसरी लहर की प्रतीक्षा न करते हुए उन्हें अपने संसाधनों को दूसरी लहर से लड़ने में लगा देने चाहिए।  

10 ऑक्सीजन निर्माण संयंत्र, हर जिले में क्वारंटीन केंद्र, बढ़ती टेस्टिंग: कोविड से लड़ने के लिए योगी सरकार की पूरी रणनीति

उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में राज्य सरकार ने कोविड-19 के बढ़ते संक्रमण से लड़ने के लिए कमर कस ली है। सरकार ने यह निर्णय लिया है कि लखनऊ में 5 क्वारंटीन केंद्र स्थापित किए जाएँगे। इसके अलावा योगी सरकार ने यह भी निर्णय लिया है कि महाराष्ट्र जैसे राज्यों से वापस आने वाले प्रवासी मजदूरों को क्वारंटीन करने के लिए प्रत्येक जिले और गाँव में क्वारंटीन केंद्र बनाए जाएँ।

लखनऊ के 5 केंद्रों में से 2 तैयार :

लखनऊ में बनने वाले 5 क्वारंटीन केंद्रों में से 2 केंद्र तैयार हो चुके हैं और यहाँ 250 बिस्तरों की व्यवस्था भी की जा चुकी है। ये क्वारंटीन केंद्र मोहल्लागंज के राधास्वामी सत्संग व्यास स्थल और कंकहा के सरदार वल्लभ भाई पटेल इंस्टीट्यूट में बनाए गए हैं। इसके अतिरिक्त तीन अन्य क्वारंटीन केंद्र BBD विश्वविद्यालय, अवध शिल्प ग्राम और शकुंतला देवी विश्वविद्यालय में बनेंगे। राज्य सरकार इन केंद्रों में आवश्यक चिकित्सा सुविधा मुहैया कराएगी।

रेलवे स्टेशन, बस स्टैन्ड और एयरपोर्ट पर किया जाएगा टेस्ट :

राज्य के बाहर से आने वाले यात्रियों के लिए सरकार रेलवे स्टेशन, एयरपोर्ट और बस स्टैन्ड पर ही एंटीजेन और RT-PCR टेस्ट की व्यवस्था कर रही है। यदि किसी व्यक्ति में कोविड-19 के लक्षण दिखाई देते हैं तो उसे क्वारंटीन केंद्रों में रखा जाएगा। यदि किसी व्यक्ति के पास होम आइसोलेशन की सुविधा नहीं है तो उसे भी क़्वारण्टीन केंद्रों में ही ईलाज के लिए रखा जाएगा।

राज्य भर में 35 घंटों का सप्ताहांत लॉकडाउन :

राज्य में 17 अप्रैल को शाम 8 बजे से लॉकडाउन शुरू हो रहा है जो 19 अप्रैल को 7 बजे सुबह तक रहेगा। उत्तरप्रदेश सरकार के सूचना सहायक मुख्य सचिव नवनीत सहगल ने बताया कि लॉकडाउन के दौरान सिर्फ सैनिटाइजेशन, स्वच्छता और आपात सेवाएँ ही जारी रहेंगी।

सहगल ने यह भी बताया कि सरकार प्रत्येक जिलों में कोविड-19 अस्पतालों की संख्या को बढ़ा रही है और साथ ही राज्य में L-2 और L-3 अस्पताल भी बढ़ाए जा रहे हैं।   

ऑक्सीजन निर्माण संयंत्रों की स्थापना :

18 अप्रैल को मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने राज्य में 10 ऑक्सीजन निर्माण संयंत्रों की स्थापना का आदेश दिया। इन संयंत्रों की संस्थापना में डीआरडीओ सहयोग प्रदान करेगा। अगले दो हफ्तों में यह संयंत्र कार्यशील हो जाएँगे। उन्होंने जिम्मेदार अधिकारियों से सभी अस्पतालों में ऑक्सीजन की सप्लाई को सुनिश्चित करने के लिए कहा है। साथ ही उन्होंने चिकित्सकीय शिक्षा डीजी को आदेशित किया है कि जहाँ भी ऑक्सीजन की कमी के कारण आईसीयू बिस्तर उपलब्ध नहीं हैं वहाँ तुरंत ही ऑक्सीजन की व्यवस्था की जाए। SGPGI में 20,000 लीटर की क्षमता का ऑक्सीजन संयंत्र शुरू हो चुका है।

टेस्ट और वैक्सीनेशन की बढ़ती रफ्तार :

ACS, चिकित्सा एवं स्वास्थ्य, अमित मोहन प्रसाद ने बताया कि राज्य में टेस्ट को बढ़ाने के सभी प्रयास जारी हैं। उन्होंने कहा कि पिछले 24 घंटों में उत्तर प्रदेश में 2,15,790 टेस्ट हुए हैं। राज्य में अब तक 3,80,29,865 कोविड-19 टेस्ट हो चुके हैं। वैक्सीनेशन में भी राज्य आगे बढ़ने का पूरा प्रयास कर रहा है। उत्तर प्रदेश में अब तक 1,05,62,121 डोज दिए जा चुके हैं। जिनमें से 89,97,344 लोगों को वैक्सीन का पहला डोज दिया जा चुका है जबकि 15,64,777 लोगों को कोविड-19 वैक्सीन के दोनों डोज दिए जा चुके हैं।  

17 अप्रैल को उत्तर प्रदेश में 19,383 नए संक्रमित मरीज मिले जबकि 7,381 मरीज स्वस्थ होकर अपने घरों को गए। इसके अलावा कोरोनावायरस के संक्रमण के कारण 120 लोगों की मृत्यु हुई।

अनुसूचित जाति के ‘मल्लाह’ को ठग बता फँसे आमिर खान, कोर्ट ने थमाया ‘ठग्स ऑफ हिंदोस्तान’ पर नोटिस

बॉलीवुड अभिनेता आमिर खान अपनी फिल्म ‘ठग्स ऑफ हिंदोस्तान’ में समुदाय विशेष की भावनाओं को ठेस पहुँचाने के मामले में फँस गए हैं। इस केस में शिकायतकर्ता हंसराज चौधरी की पुनरीक्षण याचिका को स्वीकार करते हुए उत्तर प्रदेश के जौनपुर जिला जज मदनपाल सिंह ने अभिनेता आमिर खान समेत चार अन्य को कोर्ट ने नोटिस जारी किया है।

कोर्ट ने सभी आरोपितों को 24 मई को कोर्ट में अपना पक्ष रखने का आदेश दिया है। साल 2018 में दीवाली के मौके पर रिलीज हुई ठग्स ऑफ हिंदोस्तान में आमिर खान के अलावा अमिताभ बच्चन, कैटरीना कैफ और फातिमा सना शेख ने मुख्य भूमिका निभाई थी। हालाँकि, यह फिल्म पर्दे पर मुँह के बल गिरी थी। लेकिन, इसकी वजह से आमिर खान मुश्किल में फँस गए हैं।

जौनपुर के हरईपुर लाइन बाजार निवासी हंसराज चौधरी ने फिल्म के निर्माता आदित्य चोपड़ा, निर्देशक विजय कृष्णा और आमिर खान के खिलाफ परिवाद दायर किया है। याचिकाकर्ता ने दावा किया है कि फिल्म में ‘मल्लाह’ जाति को ‘फिरंगी मल्लाह’ के नाम से संबोधित किया गया था। इससे उनकी भावनाओं को ठेस पहुँची है। परिवादी ने दावा किया है कि फिल्म की टीआरपी बढ़ाने, मुनाफा कमाने के लिए दुर्भावना पूर्ण तरीके से फिल्म का ऐसा नाम रखा गया था। गौरतलब है कि मल्लाह समुदाय अनुसूचित जाति की कैटेगरी में आते हैं।

इसमें निषाद समाज को ‘फिरंगी’ और ‘ठग’ सिद्ध किया गया है। हालाँकि, मजिस्ट्रेट कोर्ट ने परिवाद को खारिज कर दिया था। कोर्ट ने कहा था कि फिल्म सिर्फ मनोरंजन के लिए बनाई जाती हैं। इसकी घटनाएँ और पात्र काल्पनिक होते हैं। बाद में जिला जज कोर्ट में बहस के बाद कोर्ट ने कहा कि परिवाद को अस्वीकृत करने के लिए कोई खास कारण या सबूतों का अभाव होना चाहिए, क्योंकि तलबी के स्तर पर सबूतों के मेटिकुलस परीक्षण नहीं हो सकता है।

खास बात यह है कि जिला कोर्ट ने इस मामले में राज्य सरकार को भी एक पक्ष बनाया है। इसलिए कोर्ट ने राज्य सरकार को भी नोटिस जारी किया है। वहीं कोर्ट की नोटिस को लेकर अभी तक आमिर खान या किसी अन्य की ओर से कोई प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।