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‘गोरखपुर कांड’ के आरोपित डॉ कफील खान कोरोना के इलाज के लिए ‘स्टेरॉयड’ के इस्तेमाल की सलाह दे फिर फँसे

उत्तर प्रदेश के गोरखपुर में 2017 में हुए ऑक्सीजन कांड के आरोपित डॉ कफील खान अब सोशल मीडिया पर लोगों को कोरोना से बचने की सलाह दे रहे हैं। बिना चिकित्सकीय देखरेख के इस्तेमाल पर जिन दवाओं से गंभीर नुकसान हो सकता है कफील खान उसे लोगों को खुद से लेने की सलाह दे रहे हैं।

खान द्वारा दिए गए सुझाव का स्रोत कनाडा के एक डॉ जैन चागला हैं, जो संक्रामक रोगों के विशेषज्ञ हैं।

हालाँकि, ऑपइंडिया एक जिम्मेदार मीडिया प्लेटफॉर्म होने के कारण आपसे ये अनुरोध करता है कि किसी भी दवाओं का इस्तेमाल करने से पहले चिकित्सक से परामर्श जरूर लें।

सोशल मीडिया पर डॉ कफील की जानकारी के बाद लोगों ने स्टेरॉयड के जोखिमों के बारे में उन्हें याद दिलाया, जिसके बाद उन्होंने एक अन्य ट्वीट करते हुए कहा कि “डेक्सामेथासोन” को केवल प्रशिक्षित डॉक्टर देखरेख में ही सेवन किया जाना चाहिए। हालाँकि, तब तक बहुत देर हो चुकी थी और ट्वीट को सैकड़ों रीट्वीट और हजारों लाइक मिल चुके थे।

बता दें कि वर्ष 2017 में गोरखपुर के बीआरडी मेडिकल कॉलेज में ऑक्सीजन की आपूर्ति में कमी के कारण 72 शिशुओं की मृत्यु हो गई थी। इसके बाद प्रशासन ने इलाज में लापरवाही बरतने के कारण उन्हें निलंबित कर दिया। बाद में डॉ कफील खान को गिरफ्तार भी किया गया था।

दो साल बाद उत्तर प्रदेश पुलिस ने जाँच के बाद लापरवाही और भ्रष्टाचार के आरोपों को वापस ले लिया था। लेकिन, डॉक्टर कफील खान पर निजी क्लीनिक चलाने समेत दो अन्य आरोप लगाए गए। मामले में उन्हें 9 महीने जेल में बिताने के बाद 2018 में रिहा कर दिया गया था।

इससे पहले सोशल मीडिया पर झूठी खबरें फैलाने के मामले में विभागीय जाँच के बाद उन्हें क्लीन चिट दे दी गई थी। उत्तर प्रदेश सरकार ने अक्टूबर में गलत सूचना फैलाने और निलंबन की अवधि में भी जबरन एक अस्पताल में घुसकर रोगियों के इलाज की कोशिश करने के मामले में नया जाँच शुरू की थी।

योगी सरकार रेमडेसिविर इंजेक्शन के जमाखोरों के खिलाफ सख्त, NSA के तहत होगी कार्रवाई

योगी सरकार ने यूपी में रेमडेसिविर इंजेक्शन के साथ पकड़े गए आरोपितों के खिलाफ सख्त कार्रवाई करने का फैसला किया है। इसके बाद से ही उत्तर प्रदेश एसटीएफ और लोकल पुलिस की टीमें जमाखोरों तथा कालाबाजारी करने वालों की तलाश में जुट गई हैं।

रिपोर्ट्स के मुताबिक, योगी आदित्यनाथ सरकार ने 265 रेमडेसिविर इंजेक्शन के साथ पकड़े गए 3 व्यक्तियों के खिलाफ कड़े राष्ट्रीय सुरक्षा कानून (एनएसए) के प्रावधानों के तहत सजा देने का फैसला किया है। सरकारी प्रवक्ता ने कहा, “राज्य सरकार ने पुलिस को ऐसे लोगों के खिलाफ सख्त कार्रवाई करने का निर्देश दिया है, जो कोविड-19 दवाओं की कालाबाजारी करते हैं।”

वहीं, पुलिस कमिश्नर असीम अरुण ने कहा कि संकट के इस समय में कोई भी गैरकानूनी गतिविधि बर्दाश्त नहीं की जाएगी। आरोपितों को सख्त से सख्त सजा दी जाएगी। उन्होंने कहा कि यह मानवता के खिलाफ एक अपराध है। हम गुरुवार को रेमडेसिविर इंजेक्शन के साथ गिरफ्तार किए गए तीनों आरोपितों के खिलाफ एनएसए लगाकर कार्रवाई करेंगे।

उन्होंने आगे कहा कि राज्य सरकार अपने लोगों को रेमडेसिविर दवाएँ और अन्य कोविड से संबंधित दवाओं की उपलब्धता की सुविधा को आसान बनाने के लिए प्रतिबद्ध है। इस बीच एसटीएफ के सूत्रों ने कहा कि वे कोविड से जुड़ी दवाओं की कालाबाजारी पर अंकुश लगाने का प्रयास कर रहे हैं।

बता दें कि कानपुर की स्पेशल टास्क फोर्स (एसटीएफ) ने गुरुवार को 265 रेमडेसिविर इंजेक्शन के साथ 3 लोगों को गिरफ्तार किया गया था, जो इसकी कालाबाजारी करने में शामिल थे। रेमडेसिविर एक मुख्य दवा है, जिसका उपयोग कोरोना वायरस के उपचार में किया जाता है। लोगों की परेशानी का फायदा उठाकर कुछ लोग इसे ऊँचे दामों में बेच रहे हैं।

गौरतलब है कि सीएम योगी आदित्यनाथ ने शनिवार को कहा कि उत्तर प्रदेश में ऑक्सीजन की आपूर्ति को बेहतर करने के लिए अलग-अलग स्थानों पर 10 नए ऑक्सीजन प्लाँट स्थापित किए जाएँगे। इसमें डीआरडीओ का सहयोग मिल रहा है। उन्होंने कहा, लखनऊ स्थित अवध शिल्प ग्राम में एच.ए.एल. के सहयोग से एक नया सर्व सुविधायुक्त कोविड हॉस्पिटल तैयार किया जाएगा। स्वास्थ्य विभाग एच.ए.एल. से समन्वय स्थापित कर इस अतिमहत्वपूर्ण कार्य को तत्काल क्रियाशील करे।

पिता से बच्चों की रक्षा करने के लिए माँ बनी हत्यारन, तीन मासूमों को चाकू घोंपकर मौत के घाट उतारा

अमेरिका में एक महिला को अपने तीन छोटे बच्चों की हत्या करने के आरोप में गिरफ्तार किया गया है। लिलियाना कैरिलो (30) ने जेलर द्वारा लिए गए एक इंटरव्यू में अपने बेटे टेरी (2 साल) और बेटियों जोआना (3 साल) और सिएरा (6 महीने) की हत्या की बात कबूल की। तीनों बच्चे कैरिलो और उनके पिता एरिक डेंटन के साथ लॉस एंजिल्स के रेसेडा के एक अपार्टमेंट में रहते थे।

पिछले हफ्ते उसके तीन बच्चों के शव अपार्टमेंट से बरामद किए गए थे। अधिकारियों ने बताया कि शनिवार (10 अप्रैल 2021) को तुलेयर काउंटी में इस जघन्य घटना को अंजाम देने के बाद आरोपी महिला लिलियाना कैरिलो वहाँ से फरार हो गई थी। अधिकारियों ने काफी दूर तक उसका पीछा किया और आखिरकार उसे गिरफ्तार कर लिया गया।

‘लॉस एंजिलिस टाइम्स’ की खबर के मुताबिक, परिवार अदालत के दस्तावेजों के हवाले से बताया गया कि महिला के पति एरिक डेंटन ने 1 मार्च को तीनों बच्चों का संरक्षण माँगा था। मामले में 14 अप्रैल को सुनवाई होने वाली थी।

अखबार के साथ इंटरव्यू में डेंटन ने कहा कि कैरिलो ने मनोरोगी की तरह बर्ताव करना शुरू कर दिया था, जिसके कारण बच्चों के संरक्षण को लेकर कैरिलो के साथ उसका विवाद चल रहा था। रविवार को वह डेंटन को बच्चे सौंपने वाली थी।

वहीं, लॉस एंजिलिस पुलिस के अधिकारी लेफ्टिनेंट राउल जोवेल ने बताया कि बच्चों की दादी शनिवार सुबह जब काम से घर लौटी तो उसने घर पर बच्चों के शव देखे। साथ ही उन्होंने देखा कि उनकी माँ घर पर नहीं है।

पुलिस ने बताया कि शुरुआती जाँच में यह बात सामने आई है कि तीनों बच्चों की चाकू घोंपकर हत्या की गई है। उन्होंने बताया कि कैरिलो को तुलेयर काउंटी में पोंडेरोसा इलाके से गिरफ्तार किया गया जो बेकर्सफील्ड से करीब 100 मील उत्तर में है।

इंडिया टुडे में प्रकाशित खबर के मुताबिक, कैलिफोर्निया से बच्चों की माँ ने कहा कि मैंने अपने बच्चों की हत्या इसलिए की, क्योंकि मैं उन्हें उनके पिता से बचाना चाहती थी। केर्न काउंटी में लेर्डो प्री-ट्रायल फैसिलिटी में एक इंटरव्यू के दौरान कैरिलो ने KGET-TV को बताया, “मैंने उन्हें मार डाला। मैंने ये सब धीरे-धीरे किया। मुझे नहीं पता कि मैं इसे कैसे एक्सप्लेन करूँ।”

लिलियाना कैरिलो ने आगे कहा कि वह अपना शेष जीवन जेल में ही बिताना चाहती हैं। वह चाहती थीं कि उनके बच्चे जीवित रहें। लेकिन मैं उन्हें जीवन भर हर पल प्रताड़ित होते नहीं देखना चाहती थी।

बता दें कि इसी वर्ष मार्च में बच्चों के संरक्षण को लेकर एरिक डेंटन ने कैरिलो पर मनोरोगी होने का आरोप लगाया था। बदले में, कैरिलो ने उसके खिलाफ शिकायत दर्ज कराई थी कि डेंटन एक शराबी है और उसके साथ दुर्व्यवहार करता है।

दूसरी लहर सँभल नहीं रही, ठाकरे सरकार कर रही तीसरी की तैयारी: महाराष्ट्र के युवराज ने बताया सरकार का फ्यूचर प्लान

महाराष्ट्र के कैबिनेट मिनिस्टर और मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे के बेटे आदित्य ठाकरे ने कहा है कि राज्य में जल्दी ही कोरोना वायरस की तीसरी लहर आ सकती है। उन्होंने यह भी कहा कि तीसरी लहर कितनी खतरनाक होगी अथवा दूसरी लहर की तुलना में उसकी स्थिति कैसी होगी, इसका अंदाजा लगाना फिलहाल मुश्किल है। आदित्य ठाकरे का यह बयान ऐसे समय आया है जब महाराष्ट्र पूरे देश में कोरोना वायरस से सबसे ज्यादा प्रभावित है और दूसरी लहर में ही राज्य की अधिकांश स्वास्थ्य सुविधाएँ चरमरा गई हैं।

एनडीटीवी साॅल्यूशन समिट में चर्चा करते हुए आदित्य ठाकरे ने कहा कि हम कोरोनावायरस की तीसरी लहर के लिए तैयारी कर रहे हैं। उन्होनें आँकड़े देते हुए कहा कि राज्य में पाँच लाख बिस्तर तैयार हैं और उनमें से लगभग 70% बिस्तर ऑक्सीजन से युक्त हैं। उन्होंने यह भी कहा कि हम जो निर्णय ले रहे हैं वह टास्क फोर्स के सुझाव पर लिए जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि यह निर्णय मेडिकल फैक्ट्स और विज्ञान पर आधारित हैं न कि राजनीति पर।  

हालाँकि ठाकरे का यह बयान विरोधाभाषी नजर आता है क्योंकि उन्हीं की सरकार के मंत्री ऑक्सीजन की कमी का रोना रो चुके हैं और केन्द्र सरकार पर दोषारोपण भी कर चुके हैं। महाराष्ट्र में ऑक्सीजन की कमी के हालातों देखते हुए उद्योगपति और रिलायंस इंडस्ट्रीज के मालिक मुकेश अंबानी ने महाराष्ट्र की सहयता की पेशकश की है। रिलांयस की जामनगर रिफाइनरी से महाराष्ट्र को 100 टन ऑक्सीजन मुफ्त में दी जा रही है।

इसके अलावा महाराष्ट्र में कई ऐसे केस आए जहाँ संक्रमितों को ऑक्सीजन की कमी के कारण अपनी जान से हाथ धोना पड़ा। यदि आदित्य ठाकरे के अनुसार सरकार तीसरी लहर से लड़ने की तैयारी कर रही है तो फिलहाल उसे अपने संसाधनों को दूसरी लहर की तबाही से राज्य को बचाने में लगाना चाहिए।

महाराष्ट्र में सरकारी अस्पतालों की हालत कितनी खराब है, यह किसी से छिपा नहीं है। महामारी की दूसरी लहर में पूरे राज्य में लोगों को अस्पतालों में बेड मिलना ​मुश्किल हो रहा है। महाराष्ट्र के एक ही परिवार के 3 लोगों को अस्पताल में बेड न मिलने पर अलग-अलग जगहों पर भर्ती कराना पड़ा था। इसके चलते अंतिम समय में भी परिवार के लोग एक-दूसरे को नहीं देख पाए।

आदित्य ठाकरे के बयान पर आश्चर्य इसलिए भी होता है क्योंकि स्वयं उनके पिता और राज्य के मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को चिट्ठी लिखी थी और यह अनुरोध किया था कि केंद्र सरकार Covid-19 को एक प्राकृतिक आपदा घोषित कर दे।

कुछ दिनों पहले एक वीडियो सामने आया था जहाँ एक व्यक्ति अपने कोरोनावायरस से संक्रमित पिता को अस्पताल में भर्ती करने की मिन्नतें कर रहा था। वीडियो में उक्त व्यक्ति यह कहता हुआ पाया गया कि “या तो मेरे पिता को अस्पताल में बेड दीजिए, नहीं तो उन्हें कोई इंजेक्शन देकर मार डालिए।”  

प्रवासी मजदूरों के सवाल पर आदित्य ठाकरे ने कहा कि राज्य में प्रवासी मजदूर बेहतर स्थिति में हैं जबकि सच तो यह है कि एक बार फिर से प्रवासी मजदूर राज्य छोड़ने के लिए मजबूर हैं और राज्य में 15 दिनों का कर्फ्यू लगने लगाए जाने के कारण मजदूर अपने घरों को लौटने के लिए मजबूर हैं। घर लौट रहे प्रवासी मजदूरों ने महाराष्ट्र पुलिस पर वसूली का आरोप  भी लगाया है। यह बात भी सामने आ चुकी है कि BMC के अधिकारी मुंबई इंटरनेशनल एयरपोर्ट पर बाहरी देशों से आए लोगों को 7 दिन के अनिवार्य क्वारंटाइन में रखने की बजाय उनसे 10-12 हजार रुपए लेकर उन्हें एयरपोर्ट से निकलने में मदद कर रहे हैं।

महाराष्ट्र के अस्पतालों में न सिर्फ बेड्स, बल्कि वेंटिलेटर्स और ऑक्सीजन की भी भारी कमी है। दवाएँ नहीं मिल रहीं। ऑक्सीजन और मेडिकल सप्लाइज की उपलब्धता के लिए मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे ने भारतीय सेना से मदद के लिए गुहार लगाई है। राज्य में ज़रूरी आवागमन को छोड़ कर बाकी सारी चीजें पहले ही प्रतिबंधित की जा चुकी है। प्रवासी मजदूर वापस लौट रहे हैं।

ऐसे में भी यदि महाराष्ट्र के मंत्री आदित्य ठाकरे यह कह रहे हैं कि राज्य सरकार कोरोनावायरस की तीसरी लहर के लिए तैयारी कर रही है तो उन्हें पुनर्विचार करने की आवश्यकता है।

पिछले 24 घंटों में महाराष्ट्र में 67,000 से अधिक संक्रमित मरीज सामने आए हैं। इसी दौरान लगभग 419 लोगों को अपनी जान गँवानी पड़ी है। राज्य में कुल मरीजों की संख्या 40 लाख के करीब पहुँच रही है और सक्रिय मरीज भी साढ़े छः लाख के लगभग हैं। ऐसे में महाराष्ट्र के मंत्री आदित्य ठाकरे, मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे और महाराष्ट्र सरकार को यही सुझाव दिया जाना चाहिए कि फिलहाल कोरोनावायरस की तीसरी तीसरी लहर की प्रतीक्षा न करते हुए उन्हें अपने संसाधनों को दूसरी लहर से लड़ने में लगा देने चाहिए।  

10 ऑक्सीजन निर्माण संयंत्र, हर जिले में क्वारंटीन केंद्र, बढ़ती टेस्टिंग: कोविड से लड़ने के लिए योगी सरकार की पूरी रणनीति

उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में राज्य सरकार ने कोविड-19 के बढ़ते संक्रमण से लड़ने के लिए कमर कस ली है। सरकार ने यह निर्णय लिया है कि लखनऊ में 5 क्वारंटीन केंद्र स्थापित किए जाएँगे। इसके अलावा योगी सरकार ने यह भी निर्णय लिया है कि महाराष्ट्र जैसे राज्यों से वापस आने वाले प्रवासी मजदूरों को क्वारंटीन करने के लिए प्रत्येक जिले और गाँव में क्वारंटीन केंद्र बनाए जाएँ।

लखनऊ के 5 केंद्रों में से 2 तैयार :

लखनऊ में बनने वाले 5 क्वारंटीन केंद्रों में से 2 केंद्र तैयार हो चुके हैं और यहाँ 250 बिस्तरों की व्यवस्था भी की जा चुकी है। ये क्वारंटीन केंद्र मोहल्लागंज के राधास्वामी सत्संग व्यास स्थल और कंकहा के सरदार वल्लभ भाई पटेल इंस्टीट्यूट में बनाए गए हैं। इसके अतिरिक्त तीन अन्य क्वारंटीन केंद्र BBD विश्वविद्यालय, अवध शिल्प ग्राम और शकुंतला देवी विश्वविद्यालय में बनेंगे। राज्य सरकार इन केंद्रों में आवश्यक चिकित्सा सुविधा मुहैया कराएगी।

रेलवे स्टेशन, बस स्टैन्ड और एयरपोर्ट पर किया जाएगा टेस्ट :

राज्य के बाहर से आने वाले यात्रियों के लिए सरकार रेलवे स्टेशन, एयरपोर्ट और बस स्टैन्ड पर ही एंटीजेन और RT-PCR टेस्ट की व्यवस्था कर रही है। यदि किसी व्यक्ति में कोविड-19 के लक्षण दिखाई देते हैं तो उसे क्वारंटीन केंद्रों में रखा जाएगा। यदि किसी व्यक्ति के पास होम आइसोलेशन की सुविधा नहीं है तो उसे भी क़्वारण्टीन केंद्रों में ही ईलाज के लिए रखा जाएगा।

राज्य भर में 35 घंटों का सप्ताहांत लॉकडाउन :

राज्य में 17 अप्रैल को शाम 8 बजे से लॉकडाउन शुरू हो रहा है जो 19 अप्रैल को 7 बजे सुबह तक रहेगा। उत्तरप्रदेश सरकार के सूचना सहायक मुख्य सचिव नवनीत सहगल ने बताया कि लॉकडाउन के दौरान सिर्फ सैनिटाइजेशन, स्वच्छता और आपात सेवाएँ ही जारी रहेंगी।

सहगल ने यह भी बताया कि सरकार प्रत्येक जिलों में कोविड-19 अस्पतालों की संख्या को बढ़ा रही है और साथ ही राज्य में L-2 और L-3 अस्पताल भी बढ़ाए जा रहे हैं।   

ऑक्सीजन निर्माण संयंत्रों की स्थापना :

18 अप्रैल को मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने राज्य में 10 ऑक्सीजन निर्माण संयंत्रों की स्थापना का आदेश दिया। इन संयंत्रों की संस्थापना में डीआरडीओ सहयोग प्रदान करेगा। अगले दो हफ्तों में यह संयंत्र कार्यशील हो जाएँगे। उन्होंने जिम्मेदार अधिकारियों से सभी अस्पतालों में ऑक्सीजन की सप्लाई को सुनिश्चित करने के लिए कहा है। साथ ही उन्होंने चिकित्सकीय शिक्षा डीजी को आदेशित किया है कि जहाँ भी ऑक्सीजन की कमी के कारण आईसीयू बिस्तर उपलब्ध नहीं हैं वहाँ तुरंत ही ऑक्सीजन की व्यवस्था की जाए। SGPGI में 20,000 लीटर की क्षमता का ऑक्सीजन संयंत्र शुरू हो चुका है।

टेस्ट और वैक्सीनेशन की बढ़ती रफ्तार :

ACS, चिकित्सा एवं स्वास्थ्य, अमित मोहन प्रसाद ने बताया कि राज्य में टेस्ट को बढ़ाने के सभी प्रयास जारी हैं। उन्होंने कहा कि पिछले 24 घंटों में उत्तर प्रदेश में 2,15,790 टेस्ट हुए हैं। राज्य में अब तक 3,80,29,865 कोविड-19 टेस्ट हो चुके हैं। वैक्सीनेशन में भी राज्य आगे बढ़ने का पूरा प्रयास कर रहा है। उत्तर प्रदेश में अब तक 1,05,62,121 डोज दिए जा चुके हैं। जिनमें से 89,97,344 लोगों को वैक्सीन का पहला डोज दिया जा चुका है जबकि 15,64,777 लोगों को कोविड-19 वैक्सीन के दोनों डोज दिए जा चुके हैं।  

17 अप्रैल को उत्तर प्रदेश में 19,383 नए संक्रमित मरीज मिले जबकि 7,381 मरीज स्वस्थ होकर अपने घरों को गए। इसके अलावा कोरोनावायरस के संक्रमण के कारण 120 लोगों की मृत्यु हुई।

अनुसूचित जाति के ‘मल्लाह’ को ठग बता फँसे आमिर खान, कोर्ट ने थमाया ‘ठग्स ऑफ हिंदोस्तान’ पर नोटिस

बॉलीवुड अभिनेता आमिर खान अपनी फिल्म ‘ठग्स ऑफ हिंदोस्तान’ में समुदाय विशेष की भावनाओं को ठेस पहुँचाने के मामले में फँस गए हैं। इस केस में शिकायतकर्ता हंसराज चौधरी की पुनरीक्षण याचिका को स्वीकार करते हुए उत्तर प्रदेश के जौनपुर जिला जज मदनपाल सिंह ने अभिनेता आमिर खान समेत चार अन्य को कोर्ट ने नोटिस जारी किया है।

कोर्ट ने सभी आरोपितों को 24 मई को कोर्ट में अपना पक्ष रखने का आदेश दिया है। साल 2018 में दीवाली के मौके पर रिलीज हुई ठग्स ऑफ हिंदोस्तान में आमिर खान के अलावा अमिताभ बच्चन, कैटरीना कैफ और फातिमा सना शेख ने मुख्य भूमिका निभाई थी। हालाँकि, यह फिल्म पर्दे पर मुँह के बल गिरी थी। लेकिन, इसकी वजह से आमिर खान मुश्किल में फँस गए हैं।

जौनपुर के हरईपुर लाइन बाजार निवासी हंसराज चौधरी ने फिल्म के निर्माता आदित्य चोपड़ा, निर्देशक विजय कृष्णा और आमिर खान के खिलाफ परिवाद दायर किया है। याचिकाकर्ता ने दावा किया है कि फिल्म में ‘मल्लाह’ जाति को ‘फिरंगी मल्लाह’ के नाम से संबोधित किया गया था। इससे उनकी भावनाओं को ठेस पहुँची है। परिवादी ने दावा किया है कि फिल्म की टीआरपी बढ़ाने, मुनाफा कमाने के लिए दुर्भावना पूर्ण तरीके से फिल्म का ऐसा नाम रखा गया था। गौरतलब है कि मल्लाह समुदाय अनुसूचित जाति की कैटेगरी में आते हैं।

इसमें निषाद समाज को ‘फिरंगी’ और ‘ठग’ सिद्ध किया गया है। हालाँकि, मजिस्ट्रेट कोर्ट ने परिवाद को खारिज कर दिया था। कोर्ट ने कहा था कि फिल्म सिर्फ मनोरंजन के लिए बनाई जाती हैं। इसकी घटनाएँ और पात्र काल्पनिक होते हैं। बाद में जिला जज कोर्ट में बहस के बाद कोर्ट ने कहा कि परिवाद को अस्वीकृत करने के लिए कोई खास कारण या सबूतों का अभाव होना चाहिए, क्योंकि तलबी के स्तर पर सबूतों के मेटिकुलस परीक्षण नहीं हो सकता है।

खास बात यह है कि जिला कोर्ट ने इस मामले में राज्य सरकार को भी एक पक्ष बनाया है। इसलिए कोर्ट ने राज्य सरकार को भी नोटिस जारी किया है। वहीं कोर्ट की नोटिस को लेकर अभी तक आमिर खान या किसी अन्य की ओर से कोई प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।

हिंदू धर्म-अध्यात्म की खोज में स्विट्जरलैंड से भारत पैदल: 18 देश, 6000 km… नंगे पाँव, जहाँ थके वहीं सोए

भारत का सनातन धर्म सदैव से ही दूसरे देशों में रहने वाले खोजी प्रवृत्ति के लोगों को आकर्षित करता आया है। भारत के योग, ध्यान और अध्यात्म से प्रेरित होकर न जाने कितने ही विदेशी भारत आते हैं। उनमें से एक हैं बेन बाबा, जो स्विट्जरलैंड के रहने वाले हैं और पेशे से वेब डेवलपर हैं।

हरिद्वार के महाकुंभ से बेन बाबा का वीडियो वायरल हो रहा है। बेन स्विट्जरलैंड से पैदल ही भारत के लिए निकल पड़े और 18 देशों को पार करके 4 साल बाद भारत पहुँचे हैं। फिलहाल बेन हिमाचल प्रदेश में रहते हैं। ट्विटर पर भी उनका एक वीडियो शेयर किया जा रहा है, जिसमें वह अपनी यात्रा के बारे में बताते हैं।

वेब डिजाइनर से बेन बाबा तक का सफर

33 वर्षीय बेन स्विट्जरलैंड में वेब डिजाइनर थे और वहाँ अच्छी खासी कमाई भी करते थे लेकिन उन्होंने बताया कि उन्हें वहाँ कभी सुख की प्राप्ति नहीं हुई। भौतिक सुख तो उनके पास बहुत था किन्तु बेन आध्यात्मिक और आत्मिक सुख प्राप्त करना चाहते थे। जिस सुख की तलाश बेन कर रहे थे उन्हें वह भारतीय संस्कृति, सभ्यता, योग और अध्यात्म के माध्यम से प्राप्त हुआ।

इसी सुख को प्राप्त करने के लिए बेन स्विट्जरलैंड की आराम भरी जिंदगी छोड़ कर भारत की ओर निकाल पड़े। 4 साल के लंबे सफर और 18 देशों की सीमाओं को नापकर बेन भारत पहुँचे और यहाँ उन्होंने सनातन धर्म और योग का प्रचार-प्रसार प्रारंभ कर दिया और बन गए ‘बेन बाबा’।

6000 किमी का सफर और 18 देश

बेन बाबा ने बताया कि उन्होंने स्विट्जरलैंड से भारत तक पहुँचने के लिए 6 हजार किमी से अधिक का सफर पैदल ही तय किया। उनकी इस यात्रा में उन्होंने तुर्की, ईरान, आर्मेनिया, जॉर्जिया, रूस, किर्गिस्तान, उज्बेकिस्तान, चीन और पाकिस्तान समेत 18 देशों की सीमाओं को पार किया।

भारतीय संस्कृति, योग और ध्यान से है प्रेम

बेन बाबा ने बताया कि उन्होंने स्विट्जरलैंड में ही भारतीय संस्कृति, योग, ध्यान और अध्यात्म के विषय में पढ़ना प्रारंभ कर दिया था। इसमें उन्हें जिस सुख की अनुभूति हुई, उसके कारण उन्होंने स्विट्जरलैंड और वहाँ की विलासितापूर्ण जिंदगी को छोड़ दिया। बेन बाबा भारत में भ्रमण करके मंदिरों, मठों और धर्मस्थलों में भारतीय संस्कृति और सनातन धर्म का अध्ययन कर रहे हैं। बेन पतंजलि संस्थान से योग भी सीख रहे हैं। बेन न केवल फर्राटेदार हिन्दी बोलते हैं बल्कि उन्हें गंगा आरती करते हुए देखा जा सकता है।

पूरा सन्यासियों का जीवन जीते हैं बेन बाबा

बेन बाबा का कोई ठिकाना नहीं है। जहाँ भी थक जाते हैं, वहीं अपना डेरा जमा लेते हैं। जंगल, फुटपाथ और निर्जन स्थानों पर भी रात बिता चुके हैं। बाबा भिक्षा माँग कर अपना पेट भरते हैं। नंगे पैर ही सफर करते हैं। हरिद्वार में भी वो गंगा के किनारे टहलते हुए दिखाई दिए।

किताबों के उपयोग से हिन्दी सीखने वाले बेन बाबा भारत में धर्म और अध्यात्म में रमे हुए हैं लेकिन उनके जीवन का उद्देश्य है सनातन धर्म और योग का प्रचार करना। उनका कहना है कि भविष्य में वह अपने देश स्विट्जरलैंड लौट कर अपने लोगों को धर्म और अध्यात्म के मार्ग पर ले जाने का प्रयास करेंगे।  

जिसने उड़ाया साधु-संतों का मजाक, उस बॉलीवुड डायरेक्टर को पाकिस्तान का FREE टिकट: मिलने के बाद ट्विटर से ‘भागा’

फिल्म निर्माता-निर्देशक हंसल मेहता सोशल मीडिया पर अपने विवादित पोस्ट को लेकर अक्सर चर्चा में रहते हैं। हालाँकि, इस बार विवादों में घिरने के बाद उन्होंने अपना ट्वीटर अकाउंट प्राइवेट कर लिया है। दरअसल, कुंभ मेले में स्नान के लिए गए साधुओं का मजाक उड़ाने के बाद, मेहता ने रविवार को ट्विटर पर एक सवाल किया। इसमें पूछा गया था कि क्या नए कोरोनो वायरस के मामले में पाकिस्तान की स्थिति भारत की तुलना में खराब है? निश्चित रूप से वह यह बताने की कोशिश कर रहे थे कि भारत की तुलना में पाकिस्तान के हालात बेहतर हैं।

इसको लेकर एक नेटीजन (सोशल मीडिया पर खासा एक्टिव रहने वाले और मीम्स बनाने वाले यूजर्स) ने फटाफट उन्हें पाकिस्तान के लिए फर्स्ट क्लास की टिकट ऑफर कर दी। वह यह जानना चाहता था कि अगर मेहता सच में हमारे पड़ोसी देश की स्थिति को बेहतर मानते हैं, तो वह निश्चित ही देश से बाहर जाने के लिए सहमत होंगे।

हंसल मेहता के ट्वीट का स्क्रीनशॉट

यूजर ने मेहता से कहा कि अगर आप वहाँ हमेशा के लिए जाना चाहते हैं, तो वो तत्काल फ्लाइट का फर्स्ट क्लास का टिकट बुक करवा के दे देगा। इस पर मेहता तंज कसते हुए कहते हैं कि पहले टिकट भेजो, या उसके लिए उनके बैंक की डिटेल चाहिए होगी। इसके बाद यूजर ने शर्त रखी कि अगर आप पाकिस्तान से वापस लौटते हैं, तो आपको टिकट की रकम का 10 गुना देना होगा। इसको लेकर मेहता ने कहा कि पहले पैसे भेजो, बाद में शर्त रखना।

इतनी बात के बाद हर कोई यह जानकर हैरान हो गया कि यूजर ने वास्तव में हंसल मेहता के नाम पर 20 अप्रैल 2021 के लिए मुंबई से दुबई और दुबई से पाकिस्तान जाने के लिए टिकट बुक की हुई है।

अपने ट्विटर अकाउंट पर यूजर ने टिकट का स्क्रीनशॉट शेयर किया है। नेटिजेंस अभी भी फिल्म निर्माता के जवाब का इंतजार कर रहे हैं।

वामपंथी मीडिया की भाषा बोलते हुए प्रसिद्ध फिल्म निर्माता हंसल मेहता ने साल 2019 के कुंभ मेले की मण्डली की एक पुरानी फोटो साझा करते हुए नागा साधुओं का मजाक उड़ाया था।

मेहता ने साल 2019 कुंभ मेले की मण्डली की एक पुरानी फोटो साझा की थी।

हालाँकि, इसके बाद से हंसल मेहता ने अपने अकाउंट को प्राइवेट कर लिया है।

दुबई से होकर पाकिस्तान जाने वाली मेहता की फ्लाइट 20 अप्रैल, 2021 को निर्धारित है। मेहता के पाकिस्तान जाने या फिर कागजों में उनका नाम रजिस्टर होने पर हम आपसे सभी जानकारी साझा करेंगे।

फिर केंद्र की शरण में केजरीवाल, PM मोदी से माँगी मदद: 7000 बेड और ऑक्सीजन की लगाई गुहार

दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने राजधानी में कोरोना की चिंताजनक स्थिति पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को चिट्ठी लिखी है। केजरीवाल ने पीएम मोदी से केंद्र सरकार के अस्पतालों में 10,000 में से कम से कम 7,000 बेड कोरोना मरीजों के लिए रिजर्व करने और तुरंत ऑक्सीजन मुहैया कराने की अपील की है।

केजरीवाल ने लिखा, “दिल्ली में कोरोना की स्थिति बेहद गंभीर हो गई है। कोरोना बेड्स और ऑक्सीजन की भारी कमी है। लगभग सभी ICU बेड्स भर गए हैं। अपने स्तर पर हम सभी प्रयास कर रहे हैं। आपकी मदद की जरूरत है। दिल्ली में केंद्र सरकार के अस्पतालों में लगभग 10 हजार बेड हैं। इनमें से केवल 1800 बेड कोरोना के लिए रिजर्व किए गए हैं। स्थिति की गंभीरता को देखते हुए आपसे विनती है कि कम से कम 7000 बेड कोरोना मरीजों के लिए रिजर्व किए जाएँ। दिल्ली में ऑक्सीजन की भारी कमी हो रही है। हमें ऑक्सीजन भी तुरंत मुहैया कराई जाए।”

केजरीवाल ने आगे लिखा, “DRDO दिल्ली में ICU के 500 बेड बना रहा है। इसके लिए आपका बेहद शुक्रिया। ये बढ़ाकर 1000 कर दिए जाएँगे तो बड़ी मेहरबानी होगी। इस महामारी में अभी तक हमें केंद्र सरकार से काफी सहयोग मिला है। मैं उम्मीद करता हूँ कि इन विषयों पर भी आप हमारी मदद जरूर करेंगे।”

केजरीवाल ने गृह मंत्री से की बात

इससे पहले मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने गृह मंत्री अमित शाह से फोन पर बात की और उन्हें कोरोना के बढ़ते मामलों को लेकर दिल्ली के हालातों पर जानकारी दी। उन्होंने कहा, “मैंने आज केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह से फोन पर बात की है और इस गंभीर स्थिति में ऑक्सीजन, बेड और अन्य आवश्यक सुविधाओं की आपूर्ति के लिए अनुरोध किया है।” 

मुख्यमंत्री ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा कि दिल्ली सरकार के अस्पतालों में बहुत कम आईसीयू बेड उपलब्ध हैं। केजरीवाल ने कहा, “हमें तुरंत बेड और ऑक्सीजन की आपूर्ति की आवश्यकता है। दिल्ली सरकार अगले 3 दिनों में 6,000 बेड तैयार कर लेगी। कई स्कूलों, खेल परिसरों और अन्य सरकारी भवनों को कोविड केयर सेंटर में बदला जाएगा।”

पिछले 24 घंटे में संक्रमण दर 24 से बढ़कर 30 प्रतिशत हो गया है। कोरोना के लिए जो बेड रिजर्व है वह काफी तेजी से खत्म हो रहे हैं। आईसीयू बेड की दिल्ली में कमी हो गई है। 100 से भी कम आईसीयू बेड खाली हैं। ऑक्सीजन की भी दिल्ली में काफी कमी है। 

भारत के सबसे बड़े कोविड सेंटर को दोबारा खोला जाएगा

कोरोना वायरस के मामलों में अभूतपूर्व वृद्धि के मद्देनजर दक्षिण दिल्ली में स्थित देश के सबसे बड़े कोविड-19 सेंटर राधा स्वामी सत्संग ब्यास को दोबारा खोला जाएगा, जिसे फरवरी में बंद कर दिया गया था। गृहमंत्री अमित शाह की पहल पर छतरपुर स्थित राधा स्वामी सत्संग परिसर में दस हजार बेड क्षमता का कोविड केयर सेंटर बनकर तैयार हुआ था। 

छतरपुर में स्थित आध्यात्मिक संगठन के प्रबंधन ने इस बात की पुष्टि की है कि सेंटर को दोबारा खोला जाएगा। राधा स्वामी सत्संग ब्यास सेंटर के सचिव विकास सेठी ने कहा कि सरकार सेंटर को जल्द ही दोबारा खोलने की योजना बना रही है।

कुल 10,200 बिस्तरों वाले इस केन्द्र का उद्घाटन पिछले साल पाँच जुलाई को किया गया था। भारत-तिब्बत सीमा पुलिस इसका संचालन कर रही थी। 1,700 फीट लंबाई और 700 फीट चौड़ाई वाले इस केन्द्र का आकार मोटे तौर पर फुटबॉल के 20 मैदानों के बराबर है। इसमें 200 कक्ष हैं। प्रत्येक कक्ष में 50 बिस्तर हैं।

इससे पहले केजरीवाल ‘बेड की कोई कमी नहीं है’ का राग अलाप रहे थे, मगर अब केंद्र की शरण में पहुँच गए हैं। गौरतलब है कि पिछले साल भी दिल्ली में कोरोना वायरस की रोकथाम के लिए खुद गृहमंत्री अमित शाह ने मोर्चा सँभाला था। दिल्ली में कोरोना के बिगड़े हालात को संभालने के लिए अमित शाह ने 4 आईएएस अधिकारियों- अवनीश कुमार, मोनिका प्रियदर्शिनी, गौरव सिंह राजावत और विक्रम सिंह मलिक के COVID-19 के प्रबंधन में सहायता करने के लिए तुरंत दिल्ली में तबादले का निर्देश दिया था।

इसके साथ ही गृहमंत्री ने दिल्ली सरकार के दो वरिष्ठ IAS अधिकारियों एससीएल दास और एसएस यादव को केंद्र के साथ जुड़ने का निर्देश दिया। गृह मंत्री अमित शाह के निर्देश पर आईसीएमआर दिल्‍ली में कोविड 19 टेस्टिंग के लिए मोबाइल वैन उपलब्‍ध कराने में दिल्‍ली सरकार की मदद की थी।

‘पंडित मुक्त’ गाँव वाला वीडियो वायरल होने के बाद भाजपा नेता सुहैल पाशा ने दिया पार्टी से इस्तीफा

हिंदू और खासकर ‘पंडित’ विरोधी वीडियो वायरल होने के बाद उत्तराखंड के देहरादून से भाजपा के अल्पसंख्यक मोर्चा के पूर्व जिलाध्यक्ष सुहैल पाशा ने पार्टी से शुक्रवार को इस्तीफा दे दिया। वह जीवनगढ़ गाँव की प्रधान के पति हैं।

भाजपा के मुस्लिम नेता द्वारा हिंदुओं को धमकाने का यह वीडियो बुधवार (14 अप्रैल ) को पछवादून खबर ने जारी किया, जिसमें सुहैल पाशा जीवनगढ़ गाँव को पंडितों से मुक्त करने का दावा कर रहे हैं। उन्होंने दावा किया, “जीवनगढ़ कभी पंडितों का केंद्र कहा जाता था। लेकिन, आज यह पंडितों से मुक्त होने की कगार पर है।”

वीडियो में सुहैल पाशा ने धमकी दी कि अगर क्षेत्र में होली समारोह आयोजित किया जाता है, तो वह मुसलमानों को “पिट बाजार” के बीच में नमाज करने के लिए कहेंगे। पाशा ने चेतावनी दी है कि वह एक साइनबोर्ड लगाएँगे और मुसलमानों को बाजार में ईद की नमाज अदा करने के लिए कहेंगे।

पूर्व बीजेपी नेता ने कहा, “हमारे पास पहले से ही एक मस्जिद है। हमें बाजार में ऐसा (नमाज) करने की कोई आवश्यकता नहीं है, लेकिन हम अराजकता पैदा करने के लिए ऐसा करेंगे।”

वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद बजरंग दल, विश्व हिंदू परिषद, उत्तराखंड प्रगति मंच समेत कई संगठनों ने आगे आकर सुहेल पाशा के खिलाफ कार्रवाई की माँग की। संगठनों ने आरोप लगाया कि ब्राह्मण समुदाय के खिलाफ पाशा की टिप्पणियों ने उनकी धार्मिक भावनाओं को आहत किया है।

सुहैल पाशा का इस्तीपा पत्र

अराजकता फैलाने की धमकी वाले वीडियो के विरोध में देहरादून में हरबर्टपुर चौक पर प्रदर्शन किया गया। इस दौरान प्रदर्शनकारियों ने सुहैल पाशा के पुतले फूँके। आंदोलनकारियों ने चेतावनी दी कि एक जिला-स्तर के नेता द्वारा ऐसी टिप्पणियों को बर्दाश्त नहीं करेंगे। उन्होंने आरोपित नेता के खिलाफ कड़ी कार्रवाई नहीं होने पर विरोध प्रदर्शन तेज करने की चेतावनी भी दी है।

हिंदू विरोधी कमेंट के बाद सुहैल पाशा ने पार्टी से दिया इस्तीफा

हिंदू विरोधी वीडियो वायरल होने के बाद कड़ी आलोचना का सामना कर रहे भाजपा नेता ने शुक्रवार को पार्टी से इस्तीफा दे दिया। अपने इस्तीफे में सुहैल पाशा ने दावा किया कि उनका यह वीडियो एडिटेड है और इसे दुर्भावना के चलते वायरल किया गया है। ताकि यह दिखाया जा सके कि उन्होंने “समाज के एक विशेष वर्ग के खिलाफ अपमानजनक टिप्पणी की है।”

पाशा ने अपनी सफाई में कहा कि उन्होंने यह टिप्पणी एक परिवार के खिलाफ की थी, जिसने दाखपत्थर ग्राम पंचायत की जमीन पर कब्जा कर लिया था। पूर्व भाजपा नेता ने कहा कि उन्होंने उस परिवार को बाहर करने को कहा था, न कि ब्राह्मण समुदाय को।

सुहेल पाशा ने अपने त्याग पत्र में आगे दावा किया कि यह वीडियो उनके खिलाफ साजिश है। उन्होंने इस मामले की निष्पक्ष जाँच और “असली” दोषियों को सजा देने की माँग की। राज्य के बीजेपी प्रमुख से अपना इस्तीफा मंजूर करने की अपील करते हुए सुहैल पाशा ने जोर देकर कहा कि उन्होंने मुस्लिम बहुल क्षेत्र में पार्टी को मजबूत बनाया है।