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महाराष्ट्र में कोरोना ने ली डॉक्टर पिता-पुत्र की जान, अस्पताल में जिंदगी और मौत से लड़ रही माँ: अंतिम समय में मुश्किल से मिला बेड

कोरोना वायरस से आए दिन होने वाली मौतों ने लोगों के दिल में खौफ भर दिया है। कितने घरों में अँधेरा छा गया है और कितने परिवार इस वायरस की वजह से बर्बाद हो चुके हैं। माथे पर चिंता की लकीरें और दम तोड़तीं साँसें परिवार के लोगों को बेबसी की जंजीरों में जकड़े हुए हैं। हर कोई अपने परिवार की कुशलता के लिए भगवान से प्रार्थना कर रहा है।

इसी बीच महाराष्ट्र के कल्याण में रहने वाले डॉक्टर पिता-पुत्र की मौत ने सबको झकझोर कर रख दिया है। वहीं, डॉक्टर के परिवार के एक और सदस्य अस्पताल में जिंदगी और मौत की जंग लड़ रहे हैं। हालाँकि, अभी तक यह स्पष्ट नहीं हो पाया है कि दोनों को वैक्सीन लगाई गई थी या नहीं, क्योंकि पिछले एक साल से वो दोनों कोविड मरीजों को देख रहे थे।

महाराष्ट्र में सरकारी अस्पतालों की हालत कितनी खराब है, यह किसी से छिपा नहीं है। महामारी की दूसरी लहर में पूरे राज्य में लोगों को अस्पतालों में बेड मिलना ​मुश्किल हो रहा है। ताजा मामला ग्रेटर मुंबई का है, जहाँ एक ही परिवार के 3 लोगों को अस्पताल में बेड न मिलने पर अलग-अलग जगहों पर भर्ती कराना पड़ा। इसके चलते अंतिम समय में भी परिवार के लोग एक-दूसरे को नहीं देख पाए।

दरअसल, डॉ. नागेंद्र मिश्रा (58) और उनके बेटे डॉ. सूरज (28) के परिवार को अस्पताल में बेड नहीं मिल पाया। जिसके चलते उन सभी को अलग-अलग क्षेत्रों के अस्पताल में भर्ती कराया गया। डॉ. नागेंद्र को ठाणे के वेदांत अस्पताल में भर्ती कराया गया था। शुक्रवार (16 अप्रैल, 2021) को उनके जन्मदिन के दिन ही उनका निधन हो गया। इस दौरान उनके पास ना तो उनका बेटा था और ना ही उनकी पत्नी। उनके बेटे सूरज को एक प्राइवेट अस्पताल में बेड मिला था, वो वहाँ अपनी अंतिम साँसें ले रहा था, जिसे ये तक पता नहीं था कि अब उसके पिता इस दुनिया में नहीं रहे। डॉ. नागेंद्र की पत्नी वसई-विरार क्षेत्र के एक अस्पताल में हैं, जहाँ उनकी हालत गंभीर बताई जा रही है।

बताया जा रहा है कि डॉ. नागेंद्र मिश्रा टिटवाला के पास कांदिवली में अपना खुद का क्लिनिक चलाते था। उनके बेटे सूरज का भी भिवंडी के बाप गाँव में एक क्लिनिक था। लेकिन कोरोना माहमारी में लोगों की जान बचाने वाले ये पिता- पुत्र खुद को नहीं बचा पाए। इनका परिवार गांधारी क्षेत्र, कल्याण (वेस्ट) में रहता है। सूरज की शादी पिछले साल नवंबर में हुई थी। डॉ. नागेंद्र का दूसरा बेटा भी डॉक्टर है।

टाईम्स ऑफ़ इंडिया ने मृतकों के रिश्तेदारों से बात की। उन्होंने बताया कि डॉ. नागेंद्र मिश्रा ने 6 दिन पहले कोविड का टेस्ट कराया था, उनकी रिपोर्ट पॉजिटिव आई थी। एक अन्य रिश्तेदार ने कहा, “इसके बाद से उनकी हालत लगातार बिगड़ती गई। पहले पिता ने और कुछ घंटे बाद उनके बेटे सूरज ने दम तोड़ दिया। सूरज की माता की हालत में भी कोई सुधार देखने को नहीं मिल रहा है। वो अस्पताल में जिन्दगी और मौत से लड़ रही हैं।

बरेली के बाद अजमेर में इकट्ठी हुई कट्टरपंथी मुस्लिमों की भीड़, महंत नरसिंहानंद पर कार्रवाई न होने पर दी प्रदर्शन की धमकी

पैगम्बर मुहम्मद पर टिप्पणी करने के मामले में गाजियाबाद के डासना देवी मंदिर के महंत यति नरसिंहानंद सरस्वती के खिलाफ कट्टरपंथी इस्लामियों ने एक बार फिर से आवाज उठाई है। इसी कड़ी में शुक्रवार को राजस्थान की अजमेर शरीफ दरगाह बाजार में जुमे की नमाज के बाद बड़ी संख्या में कट्टरपंथी मुसलमानों की भीड़ इकट्ठा हुई। मुस्लिमों ने नरिसंहानंद सरस्वती की गिरफ्तारी की माँग की।

टाइम्स ऑफ इंडिया की रिपोर्ट के मुताबिक, आंदोलनकारियों ने हाथों में बैनर ले रखे थे और नारेबाजी कर रहे थे। इस आंदोलन का नेतृत्व गद्दी नशीन खादिम सरवर चिश्ती ने किया।

चिश्ती ने कट्टरपंथी इस्लामी भीड़ को संबोधित करते हुए आरोप लगाया कि सभी को पता है कि फासीवादी ताकतों के इशारे पर डासना देवी के मंदिर के महंत ने देश में सांप्रदायिक शांति भंग करने के लिए ये टिप्पणी की है। चिश्ती ने यति नरसिंहानंद सरस्वती की तत्काल गिरफ्तारी की माँग की है।

अजमेर दरगाह के निजाम गेट पर इकट्ठी हुई इस्लामी भीड़ ने इस बात पर अफसोस जताया कि पैगंबर मुहम्मद पर टिप्पणी के मामले में दरगाह पुलिस थाने में एफआईआर करने के बाद भी कोई कार्रवाई नहीं की गई। भीड़ ने धमकी दी है कि अगर यति नरसिंहानंद सरस्वती के खिलाफ कार्रवाई नहीं हुई तो बड़े पैमाने पर विरोध प्रदर्शन किया जाएगा। इसके अलावा इस्लामी भीड़ ने इस्लाम के किसी भी अपमान के खिलाफ कानून बनाने की माँग की।

बता दें कि यति नरसिंहानंद सरस्वती ने जबसे कथित तौर पर पैगंबर मुहम्मद के खिलाफ टिप्पणी की है तब से मुसलमान उनके खिलाफ कार्रवाई की माँग कर रहे हैं।

हालाँकि, कट्टरपंथी इस्लामियों के इस कृत्य के बाद अब देशभर के हिंदू संत भी यति नरसिंहानंद सरस्वती के समर्थन में आ गए हैं।

बरेली में भी इकट्ठी हुई थी कट्टरपंथियों की भीड़

9 अप्रैल को उत्तर प्रदेश के बरेली में शुक्रवार की नमाज के बाद इस्लामिया ग्राउंड में लाखों कट्टरपंथी मुसलमान इकट्ठा हुए थे और यति नरसिंहानंद के खिलाफ कार्रवाई की माँग की थी। उस दौरान भी मौलानाओं ने डासना देवी मंदिर के महंत का सिर काटने की तकरीरें की।

पंजाब के किसान डायरेक्ट पेमेंट से खुश, राज्य की कॉन्ग्रेसी सरकार आढ़तियों के जरिए MSP का पैसा चाहती थी देना

पंजाब के किसानों के अनाज की कीमतें सीधे उनके खातों में आनी शुरू हो गई हैं। इसके लिए हाल ही में फूड कॉर्पोरेशन ऑफ इंडिया ने पंजाब सरकार से जमीनों का रिकॉर्ड माँगा था, ताकि किसानों के खातों में सीधे एमएसपी की रकम जमा की जा सके।

अमरिंदर सिंह सरकार ने केंद्र को जानकारी दी थी कि पंजाब के आधे किसान केवल फसलों के उत्पादक हैं, जमीनों के मालिक नहीं। इस पर केंद्र सरकार ने पंजाब को हरियाणा के मॉडल को अपनाने की सलाह दी थी, जहाँ एमएसपी की रकम जमा कराने के लिए जमीनों की जगह उत्पादकों की जानकारी का इस्तेमाल किया गया है। अब से मंडी तक लाई गई फसलों की कीमत आधार कार्ड के जरिए अदा की जाएगी।

खाद्य, नागरिक आपूर्ति और उपभोक्ता मामले विभाग के निदेशक रवि भगत ने कहा कि परीक्षणों के बाद बड़ी संख्या में किसानों ने अपने बैंक खातों में एमएसपी भुगतान प्राप्त करने लगे हैं।

डायरेक्ट पेमेंट सिस्टम को लेकर भारतीय किसान यूनियन (बीकेयू) दकौंडा के महासचिव और किसान नेता जगमोहन सिंह ने नई व्यवस्था को किसानों के जीवन में एक बड़ा दिन करार दिया है। उन्होंने कहा कि ऐसा पहली बार है, जब दूसरों पर निर्भर हुए बिना ही किसानों के हाथों में पैसा आ रहा है।

सरकार की नई व्यवस्था से लोगों के चेहरों पर खुशी के भाव हैं। राजपुरा के निकट नीलपुर गाँव के रहने वाले दलीप कुमार (39 वर्ष) डायरेक्ट पेमेंट की व्यवस्था को बेस्ट बताते हुए कहते हैं, “यह सबसे अच्छी प्रणाली है। हमारे खाते में हमारी फसल का भुगतान हो रहा है, इससे बेहतर क्या हो सकता है?”

इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक, दलीप ने कहा कि वह बीते 15 साल के कृषि कर रहे हैं। उन्होंने मंडी के लिए 10 एकड़ में खेती की है। वह 40 एकड़ में खेती करते हैं और आने वाले दिनों में शेष गेहूँ खरीद के लिए ले जाएँगे। दलीप कहते हैं कि ऐसा पहली बार उनके साथ हो रहा है कि 1,975 रुपए प्रति क्विंटल के हिसाब से एमएसपी उन्हें मिलेगी।

पुरानी व्यवस्था के बारे में दलीप बताते हैं, “पहले आढ़तिए हमें चेक दिया करते थे। फसल को मंडी में ले जाने के बाद सब कुछ एजेंट के हाथ में होता था। फसलों के लेनदेन में काफी समय लगता था, क्योंकि आढ़तिया हमेशा कुछ न कुछ बहाना बनाता ही रहता था। ताकि भुगतान को रोका जा सके।”

इससे पहले डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर (डीबीटी) के जरिए एमएसपी (न्यूनतम समर्थन मूल्य) का भुगतान करने पर केंद्र और पंजाब सरकार में ठन गई थी। इसके बाद केंद्र सरकार ने पंजाब सरकार को चेतावनी दी थी कि वह एमएसपी का पैसा सीधे किसानों के खाते में भेजे, यदि सरकार किसानों के खाते में सीधे पैसा नहीं भेजती है तो राज्य में खाद्यान्न की खरीद बंद कर दी जाएगी। बता दें कि पंजाब सरकार आढ़तियों के जरिए एमसपी का पैसा देना चाहती थी। 

’47 लड़कियाँ लव जिहाद का शिकार सिर्फ मेरे क्षेत्र में’- पूर्व कॉन्ग्रेसी नेता और वर्तमान MLA ने कबूली केरल की दुर्दशा

केरल के पुंजर से विधायक पूर्व कॉन्ग्रेसी नेता पीसी जॉर्ज ने कहा कि अकेले उनके निर्वाचन क्षेत्र में 47 लड़कियाँ लव जिहाद का शिकार हुईं हैं। उनका कहना है कि यह नहीं पता है कि लड़कियों को इस्लाम में कैसे बदला गया और फिर उसके बाद उन्हें कहाँ ले जाया गया। उन्होंने यह भी कहा कि वह लव जिहाद के लिए मजहब को दोषी नहीं ठहरा रहे हैं, लेकिन देश में अभी भी चरमपंथी हैं।

उन्होंने कहा कि वह पिछले कुछ समय से इस मुद्दे को करीब से देख रहे हैं और ज्यादातर मामले एराटुपेटा में थे। जॉर्ज ने कहा कि पीड़ितों में 12 हिंदू हैं और 35 ईसाई हैं। उन्होंने यह भी कहा कि वह किसी भी शिकायत को लेकर आगे नहीं जा रहे हैं या अदालत का दरवाजा खटखटा रहे हैं क्योंकि इनमें से ज्यादातर लड़कियों के परिवार आत्महत्या करने की कगार पर हैं। उन्होंने यह भी कहा कि वह आश्वस्त हैं कि लव जिहाद अभी भी मौजूद है। जॉर्ज ने कहा कि जेसना, जो 2018 में चाची के घर जाते वक्त लापता हो गई थी, वह लव जिहाद का शिकार है।

गौरतलब है कि पिछले दिनों पीसी जॉर्ज ने राज्य में ‘लव जिहाद’ की वास्तविकता को न सिर्फ स्वीकार किया, बल्कि ये भी कहा कि भारत को अब ‘हिन्दू राष्ट्र’ घोषित किया जाना चाहिए। उन्होंने दावा किया कि देश के सभी मुस्लिम मिल कर भारत को एक इस्लामी मुल्क बनाने का लक्ष्य लेकर चल रहे हैं। इसे रोकने के लिए ठोस कदम उठाना आवश्यक है। 

उन्होंने आदिवासियों के कल्याण के लिए कार्य करने वाली NGO ‘HDRC इंडिया’ द्वारा आयोजित एक कार्यक्रम में कहा कि भारत को तुरंत ‘हिन्दू राष्ट्र’ घोषित किया जाना चाहिए, क्योंकि मुस्लिम समाज 2030 तक इसे इस्लामी मुल्क बनाने के काम पर लगा हुआ है। PC जॉर्ज ने कहा कि ये काम तेज़ी से चल रहा था, लेकिन बीच में PM मोदी ने जिस तरह से नोटबंदी की, उससे ये प्रक्रिया धीमी हो गई। उन्होंने कहा था, “लव जिहाद वास्तविक है।”

इस दौरान PC जॉर्ज ने फ्रांस सहित अन्य यूरोपियन देशों का उदाहरण देते हुए कहा कि जिस तरह से ईसाई देश में घुसपैठ कर मुस्लिम जबरन इस्लाम कबूल करवा रहे हैं, ताकि उन्हें इस्लामी मुल्क बनाया जा सके- ये भयावह है। उन्होंने पूछा कि क्या भारत को किसी समुदाय विशेष के पास जाने दिया जा सकता है? उन्होंने कहा कि इस विषय पर विचार-विमर्श की आवश्यकता है और किसी को तो आवाज़ उठानी ही पड़ेगी।

बता दें कि पिछले 31 वर्षों में 7 बार विधायक चुने जाने वाले प्लनथोट्टाथिल चाको जॉर्ज 2011-15 में कॉन्ग्रेस की सरकार के दौरान केरल विधानसभा के चीफ व्हिप भी रहे हैं। उन्होंने 1 बार KEC (1980), 1 बार JNP (1982), 3 बार KEC-M (1996, 2001, 2006), 1 बार निर्दलीय (2011) और 2016 में केरल कॉन्ग्रेस (M) से चुनाव जीता। उन्होंने 4 मलयालम फिल्मों में भी काम किया है, जिनमें से एक में उन्हें CM, एक में नेता प्रतिपक्ष और एक में पुलिस अधिकारी का किरदार मिला था।

रात में काम, सिर्फ पुरुष करें अप्लाई: महिलाओं को नौकरी के लिए केरल हाईकोर्ट का विज्ञापन के उलट फैसला

केरल हाईकोर्ट ने शुक्रवार (16 अप्रैल 2021) को कहा कि अगर कोई महिला योग्य है तो उसे कार्य की प्रकृति के आधार पर रोजगार के अधिकार से वंचित नहीं किया जा सकता। जस्टिस अनु शिवरामन ने कहा, ”किसी योग्य उम्मीदवार को सिर्फ इस आधार पर नियुक्त करने से इनकार नहीं किया जा सकता कि वह एक महिला है और रोजगार की प्रकृति के अनुसार उसे रात में काम करना होगा। जबकि महिला का योग्य होना ही उसकी नौकरी के लिए सुरक्षात्मक प्रावधान है।”

कोर्ट ने केरल मिनरल्स एंड मेटल्स लिमिटेड की नौकरी के लिए जारी उस अधिसूचना को पलट दिया, जिसमें सिर्फ पुरुषों को आवेदन करने की अनुमति दी गई थी। कोर्ट ने कहा कि इस तरह की अधिसूचना भारतीय संविधान के अनुच्छेद 14, 15 और 16 के प्रावधानों का उल्लंघन करती है, जबकि फैक्ट्रीज एक्ट 1948 के प्रावधान महिलाओं को कार्यस्थल पर शोषण से बचाने के लिए हैं।

ट्रेजा जोसफीन सेफ्टी एंड फायर इंजीनियरिंग में ग्रेजुएट हैं। वह केरल मिनरल्स एंड मेटल्स लिमिटेड में ग्रेजुएट इंजीनियर ट्रेनी (सेफ्टी) के रूप में कार्यरत हैं। 25 वर्षीय ट्रेजा ने कंपनी में उपलब्ध सेफ्टी ऑफिसर के स्थायी पद के लिए आवेदन के लिए जारी अधिसूचना को चुनौती दी थी। इस अधिसूचना में कहा गया था कि केवल पुरुष उम्मीदवार ही इस पद के लिए आवेदन कर सकते हैं।

याचिकाकर्ता ने अधिसूचना को चुनौती देते हुए कहा कि यह भेदभावपूर्ण है और इस तरह के प्रावधान सेफ्टी ऑफिसर के स्थायी पद के लिए नियुक्ति का उल्लंघन करते हैं। इसके साथ ही उन्होंने कोर्ट से प्रार्थना की कि फैक्ट्रीज एक्ट, 1948 की धारा 66 (1) (बी) में जो प्रावधान भारतीय संविधान के अनुच्छेद 14, 15 और 16 का उल्लंघन करते हैं, उन सभी प्रावधानों को असंवैधानिक घोषित किया जाए। उक्त प्रावधानों के अनुसार किसी भी महिला को केवल सुबह 6 बजे से शाम के 7 बजे तक ही फैक्टरी में काम करने की इजाजत है।

इस पर अदालत ने कहा कि हमें कार्यस्थल को बेहतर और समानता वाला बनाना है, ना कि परिस्थितियों का हवाला देकर महिलाओं को रोजगार के मौकों से वंचित करना है। हमें आधी आबादी को हर क्षेत्र में ज्यादा से ज्यादा अवसर देना है।

अदालत ने आगे कहा, ”दुनिया आगे बढ़ रही है और जब समाज में और देश के आर्थिक विकास में महिलाओं की सबसे ज्यादा जरूरत है तो उन्हें घर के कामों में लगा दिया गया है। हम एक ऐसे मुकाम पर पहुँच गए हैं, जहाँ आर्थिक विकास के क्षेत्र में महिलाओं के योगदान को किसी भी इंडस्ट्री द्वारा नजरअंदाज नहीं किया जा सकता है। महिलाओं को स्वास्थ्य सेवा, उड्‌यन और सूचना प्रौद्योगिकी सहित कई उद्योगों में सभी समय पर काम करने के लिए लगाया जा रहा है।”

केरल हाईकोर्ट ने अपने फैसले में आगे कहा, “कई पेशों में तो चौबीसों घंटे काम करने की आवश्यकता होती है और इस तरह की चुनौतियों का सामना कर महिलाओं ने यह साबित किया है कि वे हर समय किसी भी तरह का कार्य करने में सक्षम हैं। हमें इस तथ्य पर विचार करना होगा कि फैक्ट्रीज एक्ट, 1948 ऐसे समय में अधिनियमित किया गया था, जब किसी महिला को किसी भी प्रकृति का काम करना पड़ता था। इसलिए ऐसा देखा जाता था कि कारखानों में रात के समय महिला का शोषणकारी और अधिकारों का उल्लंघन किया जाता।”

कोर्ट ने कहा कि हालाँकि फैक्ट्रीज एक्ट, 1948 की धारा 66 (1) (बी) केवल एक सुरक्षात्मक प्रावधान है, इसे केवल एक संरक्षण के रूप में संचालित और प्रयोग किया जा सकता है। यह प्रावधान ऐसी महिला को नौकरी देने से या काम करने से इनकार करने का बहाना नहीं हो सकता है, जिसे इस तरह के संरक्षण की आवश्यकता नहीं है।

गौरतलब है कि भारतीय संविधान के अनुच्छेद 14 के अनुसार, भारत सरकार किसी भी व्यक्ति के साथ भेदभाव नहीं करेगी। अनुच्छेद 14 के साथ अनुच्छेद 15 भी जुड़ा है। इसमें कहा गया है, “राज्य किसी नागरिक के खिलाफ सिर्फ धर्म, मूल, वंश, जाति, लिंग, जन्मस्थान या इनमें से किसी के आधार पर कोई भेद नहीं करेगा।”

वहीं भारतीय संविधान के अनुच्छेद 16 में सार्वजनिक पदों पर अवसर की समानता से संबंधित प्रावधान किए गए हैं। अनुच्छेद 16(2) के अनुसार, राज्य के अधीन किसी भी पद के संबंध में धर्म, मूलवंश, जाति, लिंग, उद्भव, जन्मस्थान, निवास या इसमें से किसी के आधार पर न तो कोई नागरिक अपात्र होगा और न उससे भेद किया जाएगा।

बंगाल: बूथ पर ही BJP पोलिंग एजेंट की मौत, TMC गुंडों ने ‘भाजपा को वोट क्यों’ कह शर्ट पकड़ धक्का दिया

पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव के पाँचवें चरण में भी हिंसा के साथ मतदान की शुरुआत हुई है। राज्य की 6 जिलों की 45 सीटों पर सुबह 7:00 बजे से वोटिंग की शुरुआत हो गई है। मतदान वाले क्षेत्रों में लगातार हिंसा की खबरें आ रही हैं।

उत्तर 24 परगना के कमरहटी विधानसभा क्षेत्र में भाजपा पोलिंग एजेंट की मतदान केंद्र के अंदर ही मौत की खबर है। कमरहटी में 107 नंबर बूथ पर भाजपा के पोलिंग एजेंट की अचानक मौत पर चुनाव आयोग ने रिपोर्ट माँगी है। मृतक भाजपा के पोलिंग एजेंट के भाई का कहना है, “उनका नाम अभिजीत सामंत है। किसी ने उनकी मदद नहीं की, यहाँ इलाज की कोई सुविधा नहीं है।”

वहीं कमरहटी बूथ पर टीएमसी नेता मदन मित्रा और सुरक्षा बल के बीच बहस भी हुई। टीएमसी नेता मदन मित्रा कमरहटी बूथ का दौरा करने पहुँचे, जहाँ बवाल हो गया। उन्होंने कहा, “मुझे मतदान केंद्र में प्रवेश करने का पूरा अधिकार है। उन्होंने (केंद्रीय बलों) ने मेरी जेब की भी तलाशी ली, जिसमें मैं देवी की तस्वीरें ले जा रहा था। यह एक लोकतांत्रिक देश है। मैं मुख्य चुनाव आयुक्त से मिलने जा रहा हूँ।”

इसके साथ ही उत्तरी 24 परगना जिले के हरोआ निर्वाचन क्षेत्र से ऐसी ही एक घटना में भाजपा पोलिंग एजेंट को टीएमसी के बाहुबलियों द्वारा धमकी दी गई। हरोआ के एक मतदान केंद्र से सामने आए वीडियो में साफ तौर पर देखा जा सकता है कि वोट डालने जा रहे बीजेपी कार्यकर्ताओं को टीएमसी कार्यकर्ताओं ने धमकाया। इस दौरान भगवा पार्टी को वोट देने के लिए बीजेपी नेता का शर्ट पकड़ कर धमकी दी। टीएमसी कार्यकर्ता ने बीजेपी नेता की शर्ट पकड़ कर धमकाया कि उसने चक्रवात अम्फान के दौरान तृणमूल सरकार से पैसे क्यों लिए।

रिपब्लिक टीवी के मुताबिक बंगाली में दो नेताओं के बीच बातचीत इस प्रकार है:- 

TMC: कहाँ जा रहे हो और किस लिए जा रहे हो?

BJP: पहले मेरी कमीज छोड़ो। मैं मतदान करने जा रहा हूँ।

TMC: तुम मतदान करने जा रहे हो या मतदान एजेंट के रूप में दस्तावेज जमा करने जा रहे हो?

BJP: पहले मेरी कमीज छोड़ो।

TMC: नहीं, मैं नहीं छोड़ता। क्या कर लोगे?

TMC: तुमने अम्फान चक्रवात के दौरान तृणमूल पार्टी से पैसे लिए और वोट भाजपा को दे रहे हो? (बीजेपी एजेंट को धक्का देते हुए) फिर तुमने अम्फान के दौरान पैसे क्यों लिए?

ममता की ऑडियो क्लिप को लेकर चुनाव आयोग से मिला भाजपा प्रतिनिधिमंडल

ममता बनर्जी की कथित ऑडियो को लेकर आज भाजपा प्रतिनिधिमंडल चुनाव आयोग से मिला। आयोग से मिलने के बाद भाजपा नेता शिशिर बाजोरिया ने कहा कि जहाँ तक टेप की प्रमाणिकता का सवाल है, टीएमसी सांसद डेरेक ओ ब्रायन और सुखेंदु शेखर रॉय ने इसकी पुष्टि की है। उन्होंने कहा कि टेप का एकमात्र उद्देश्य ध्रुवीकरण बनाना था। आयोग से अपील की गई है कि इसकी जाँच करें और एसआईटी का गठन करे।

बता दें कि इससे पहले नादिया से टीएमसी और बीजेपी कार्यकर्ताओं के बीच हिंसा की खबर सामने आई थी। वहीं बर्दवान जिला में दो भाजपा एजेंट का सिर फोड़ दिया गया। घायलों को बर्दवान मेडिकल कॉलेज अस्पताल में भर्ती कराया गया। इसके अलावा पश्चिम बंगाल के मीनाखान बूथ पर कथित तौर पर क्रूड बम फेंका गया। टीएमसी ने आईएसएफ कैडर पर बम फेंकने का आरोप लगाया था।

गाँव के ही 11 लोगों ने 6 घंटे तक किया गैंगरेप, 2 दिन तक बेहाश रही पीड़िता: झारखंड के पाकुड़ से सब गिरफ्तार

झारखंड के पाकुड़ से मानवता को शर्मसार कर देने वाली घटना सामने आई है। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, मुफ्फसिल थाना इलाके के एक गाँव में शौच के लिए गई 35 वर्षीय विवाहित महिला के साथ 11 युवकों ने गैंगरेप की घटना को अंजाम दिया।

यह घटना मंगलवार (13 अप्रैल 2021) की बताई जा रही है। 11 आरोपितों ने बारी-बारी से 6 घंटे तक (रात 10 बजे से सुबह 4 बजे तक) अनुसुचित जनजाति की महिला के साथ सामूहिक दुष्कर्म किया। इसके बाद पीड़िता को बेहोशी की हालत में उसके घर के पास छोड़ दिया।

दो दिन बाद जब महिला को होश आया, तो उसने आरोपितों के खिलाफ पुलिस में शिकायत दर्ज कराई। पुलिस ने इस मामले में सभी 11 आरोपितों को गिरफ्तार कर लिया है।

पीड़िता ने पुलिस को बताया कि सभी आरोपित खेत में बैठकर शराब पी रहे थे। वह उन्हें देख नहीं पाई और शौच के लिए चली गई। वहाँ दो-तीन युवकों ने आकर उसे पकड़ लिया और गमछे से उसका मुँह बंद कर दिया। इसके बाद सभी 11 आरोपितों ने खदान के पीछे खलिहान में ले जाकर उसके साथ बारी-बारी से दुष्कर्म किया।

पीड़िता ने आगे बताया कि आरोपितों ने उसे धमकी दी थी कि अगर वह इस घटना की शिकायत पुलिस से करेगी, तो वे उसे जान से मार देंगे। महिला के लिखित आवेदन पर मुफ्फसिल थाना में धारा 376 के तहत सभी 11 आरोपितों के खिलाफ केस दर्ज कर लिया गया है।

पीड़ित महिला इस मामले में गाँव के ही विप्लव पहाड़िया, सुजीत पहाड़िया, तपन पहाड़िया, कालू पहाड़िया, झाड़ू पहाड़िया, मंडल पहाड़िया, चिचींग पहाड़िया, ओरमूल पहाड़िया, मोटू पहाड़िया, रघू पहाड़िया एवं शिशू पहाड़िया को आरोपित बनाया है। मुफ्फसिल पुलिस ने इस मामले में सभी नामजद 11 आरोपितों को गिरफ्तार कर लिया है।

वहीं, एसडीपीओ (SDPO) अजीत कुमार विमल ने शुक्रवार को बताया कि 35 वर्षीय महिला के साथ गैंगरेप करने का मामला सामने आया है। पीड़िता की लिखित शिकायत के आधार पर मामला दर्ज करते हुए सभी 11 आरोपितों को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया गया है। पुलिस आगे की छानबीन में जुट गई है।

कुंभ हो प्रतीकात्मक… PM मोदी की अपील पर महामंडलेश्वर स्वामी अवधेशानंद ने कहा- ‘जीवन की रक्षा ही सबसे बड़ा पुण्य’

कोरोना का संक्रमण तेजी से फैल रहा है, जिससे देशभर के कई हिस्से बुरी तरह से प्रभावित हुए हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आज ट्वीट कर जानकारी दी है कि उन्होंने कोरोना के संबंध में जूना अखाड़ा के महामंडलेश्वर अवधेशानंद सरस्वती से फोन पर बात की है। पीएम ने स्वामी अवधेशानंद से कुंभ के शाही स्नान को प्रतीकात्मक रखने की अपील की है।

प्रधानमंत्री ने ट्वीट कर जानकारी दी कि उन्होंने स्वामी अवधेशानंद से फोन पर बात कर कुंभ मेले में गए सभी साधु-संतों के स्वास्थ्य के बारे में जानकारी ली। उन्होंने आगे बताया कि सभी साधुओं ने प्रशासन को पूरा सहयोग करने को कहा है, जिसके लिए उन्हें धन्यवाद।

इस मामले में जूना अखाड़ा के महामंडलेश्वर स्वामी अवधेशानंद सरस्वती ने ट्विटर पर जानकारी दी कि वो प्रधानमंत्री के इस आह्वान का सम्मान करते हैं। उन्होंने ट्वीट किया, “जीवन की रक्षा महत पुण्य है। मेरा धर्म परायण जनता से आग्रह है कि कोविड की परिस्थितियों को देखते हुए भारी संख्या में स्नान के लिए न आएँ एवं नियमों का निर्वहन करें!”

उन्होंने हिंदुओं से अपील करते हुए स्नान को प्रतीकात्मक रखने और मेले में भीड़ जमा नहीं करने की अपील की है। स्वामी अवधेशानंद ने आगे कहा कि कोरोना संकट के बीच जीवन की रक्षा ही सर्वोपरि है।

इससे पहले गुरुवार को पंचायती निरंजनी अखाड़ा ने 17 अप्रैल तक कुंभ मेले के समापन की घोषणा की थी। अखाड़ा ने यह फैसला हरिद्वार में कोरोना वायरस के बढ़ते मामलों के बाद लिया था।

न्यूज 24 से बात करते हुए पंचायती निरंजनी अखाड़ा के रवींद्र पुरी महाराज ने जानकारी दी, “यह महामारी का समय है। गुजरात, महाराष्ट्र और भारत के अन्य हिस्सों से यहाँ साधुओं से पूछकर हमने एक निर्णय लिया है। सभी को अपने-अपने स्थान पर लौटने को कहा गया है। हरिद्वार की हालत बिगड़ती जा रही है। केवल कुछ साधु 27 अप्रैल को स्नान करेंगे। हमने सभी से वापस जाने का अनुरोध किया है। ”

उन्होंने आगे कहा, “कोरोनावायरस के मामलों में तेजी से हो रही वृद्धि के कारण यह निर्णय लिया गया है। हम चाहते हैं कि हम सब सुरक्षित रहें। इससे हमें सोशल डिस्टेंसिंग के दिशानिर्देशों का पालन करने में मदद मिलेगी।”

यह पूछे जाने पर कि क्या यह उनका निजी फैसला है या उन्होंने इसे किसी के दवाब में लिया है? इस पर रवींद्र पुरी महाराज ने स्पष्ट किया, “हम पर किसी का भी दवाब नहीं है। यह कोई व्यक्तिगत मामला नहीं है। यह एक सामाजिक मुद्दा है, जो बड़ी संख्या में लोगों को प्रभावित करेगा। हमने लोगों की भलाई के लिए फैसला लिया है।” हालाँकि उन्होंने ये भी स्पष्ट किया कि पंचायती निरंजनी अखाड़ा से जुड़े लगभग 50 साधु 27 अप्रैल को स्नान करेंगे।

बता दें कि कुंभ मेले में 4 शाही स्नान और 9 गंगा स्नान शामिल हैं। इसी कड़ी में 27 अप्रैल को चौथा शाही स्नान आयोजित होगा।

दीप सिद्धू को जमानत: दिल्ली कोर्ट का फैसला, 26 जनवरी हिंसा मामले में हैं मुख्य आरोपित

कृषि कानूनों के विरोध में किसानों द्वारा 26 जनवरी 2021 के दिन निकाली गई ट्रैक्टर परेड के दौरान लाल किले पर व दिल्ली के अंदर हुई हिंसा के मामले में मुख्य आरोपित दीप सिद्धू को दिल्ली की अदालत ने जमानत दे दी है।

दीप सिद्धू पर भीड़ को उकसाने का आरोप है। दिल्ली पुलिस ने सिद्धू को 9 फरवरी को हरियाणा के करनाल से गिरफ्तार किया था। गणतंत्र दिवस पर दिल्ली में लाल किले पर हुई हिंसा के संबंध में दर्ज एफआईआर में दीप सिद्धू और अन्य के नाम शामिल हैं। इन सभी पर हिंसा करने का आरोप है। दिल्ली पुलिस के मुताबिक, 26 जनवरी को कुछ लोगों ने लाल किले में हुई हिंसा के बाद एक धार्मिक झंडा फहराया था। उनमें से कुछ की पहचान की गई है, जिनमें से दीप सिद्धू मुख्य आरोपित है।

बता दें कि 8 अप्रैल, 2021 को दिल्ली पुलिस ने दीप सिद्धू की जमानत का विरोध किया था। पुलिस के मुताबिक, दीप सिद्धू न सिर्फ उस दिन हिंसा में शामिल था बल्कि एक दिन पहले उसने पूरी साजिश भी रची थी। लोनी का रूट लेकर वह लालकिला पहुँचा था।

इतना ही नहीं दीप सिद्धू ने लोगों को धार्मिक झंडा फहराने के लिए भी उकसाया था। इसके लिए 25 जनवरी को सिंघु बॉर्डर पर बाकायदा एक मीटिंग की गई थी। 26 जनवरी को सिद्धू लाल किले पर दोपहर 1 बजकर 54 मिनट पर पहुँच गया था। इस हिंसा में 144 पुलिसकर्मी गंभीर रूप से घायल हुए थे।

सिद्धू की जमानत याचिका का विरोध करते हुए, अभियोजक ने दावा किया कि रिहा होने पर, सिद्धू सबूत नष्ट कर देगा क्योंकि जब वह गिरफ्तार हुआ था तो उसने दो फोन नष्ट कर दिए थे।

आरोपित दीप सिद्धू के वकील ने क्या कहा?

आरोपित दीप सिद्धू के वकील अभिषेक गुप्ता ने कहा था कि जाँच एजेंसी के पास ऐसे कोई सबूत नही हैं कि लालकिले पर हुई हिंसा में दीप सिद्धू शामिल था। जाँच एजेंसी ने दीप सिद्धू के खिलाफ 1 लाख रुपए का इनाम रख दिया। जाँच एजेंसी न्यूज रिपोर्ट के आधार पर ऐसा कैसे कर सकती है? अभिषेक गुप्ता ने कहा था कि दीप सिद्धू किसी भी किसान संगठन से जुड़ा हुआ नहीं है। ट्रैक्टर रैली के लिए सिद्धू की तरफ से कोई भी घोषणा या आह्वान नहीं किया गया था। दीप सिद्धू ने लालकिला जाने के लिए भी नहीं कहा था।

गौरतलब है कि 26 जनवरी को हजारों की संख्या में प्रदर्शनकारी किसान बैरिकेट्स को तोड़ कर राष्ट्रीय राजधानी में दाखिल हो गए थे और आईटीओ सहित अन्य स्थानों पर उनकी पुलिस कर्मियों से झड़पें हुई थीं। कई प्रदर्शनकारी ट्रैक्टर चलाते हुए लाल किला पहुँच गए और ऐतिहासिक स्मारक में प्रवेश कर गए तथा उसकी प्राचीर पर एक धार्मिक झंडा लगा दिया। इस हिंसा में 500 से अधिक पुलिसकर्मी घायल हो गए थे, जबकि एक प्रदर्शनकारी की मौत हो गई थी।

दिल्ली पुलिस ने इस हिंसा के सिलसिले में राकेश टिकैत, योगेंद्र यादव, राजिंदर सिंह, मेधा पाटकर, बूटा सिंह, दर्शन पाल और बलबीर सिंह राजेवाल समेत 38 किसान नेताओं के खिलाफ नामजद एफआईआर दर्ज की है। दिल्ली पुलिस ने गणतंत्र दिवस पर हुई हिंसा के मामले में अब तक 152 लोगों को गिरफ्तार किया गया है। पुलिस ने भारतीय दंड संहिता (IPC) की धारा 124 ए (राजद्रोह) के तहत मामला दर्ज किया है और पंजाबी अभिनेता दीप सिद्धू और गैंगस्टर से सामाजिक कार्यकर्ता बने लक्खा सिधाना को मुख्य आरोपित बनाया है।

‘अनुसूचित जाति वाले भिखारी, चंद पैसों के लिए BJP के पीछे-पीछे’ – TMC नेता सुजाता खान 24 घंटे में EC को देगी जवाब

चुनाव आयोग ने तृणमूल कॉन्ग्रेस (TMC) की नेता सुजाता मंडल खान को अनुसूचित जाति के खिलाफ विवादित बयान को लेकर नोटिस जारी किया है। आयोग ने नोटिस मिलने के 24 घंटे के अंदर सुजाता मंडल खान को इसका जवाब देने को कहा है। ऐसा नहीं करने पर उनके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी और उनसे तृणमूल के स्टार प्रचारक का दर्जा भी छीना जा सकता है। नोटिस में कहा गया है कि उन्हें यह भी बताना चाहिए कि उनसे ‘स्टार प्रचारक’ का दर्जा वापस क्यों नहीं लिया जाना चाहिए।

मुख्तार अब्बास नकवी की अगुवाई वाले भाजपा के प्रतिनिधि दल की ओर केंद्रीय चुनाव आयोग से शिकायत की गई थी। केंद्रीय अल्पसंख्यक कल्याण मंत्री मुख्तार अब्बास नकवी इस मामले में चुनाव आयोग से पिछले दिनों मिले थे। उन्होंने पूरे मामले की शिकायत करने के साथ ही कहा कि राज्य में चुनाव के दौरान इस तरह की बयानबाजी कर आचार संहिता का उल्लंघन किया गया है।

चुनाव आयोग में अपनी शिकायत दर्ज करवाने के बाद बीजेपी नेता दुष्यंत गौतम ने कहा था कि पीएम नरेंद्र मोदी ने जितनी भी योजना लागू की उसमें कोई भेदभाव नहीं किया गया। कांग्रेस और टीएमसी का मानना है कि संसाधनों पर अल्पसंख्यकों का हक है। बीजेपी के साथ दलित वर्ग जुट रहा है। हम चुनाव आयोग से टीएमसी पर कार्रवाई की माँग करते है। टीएमसी की मान्यता भी रद्द होनी चाहिए।

क्या बोली थी सुजाता मंडल?

बता दें कि कुछ दिनों पहले एक टीवी चैनल को दिए गए इंटरव्यू में आरामबाग विधानसभा सीट से टीएमसी प्रत्याशी सुजाता मंडल ने बयान दिया था कि अनुसूचित जाति के लोग स्वभाव से भिखारी होते हैं। ममता बनर्जी ने उनके लिए इतना कुछ किया, लेकिन फिर भी चंद पैसों के लिए वो बीजेपी के पीछे-पीछे हो रहे हैं। वो बीजेपी को अपना वोट बेच रहे हैं।  खान ने कहा था, “एक कहावत है कि कुछ स्वभाव से भिखारी होते हैं तो कुछ परिस्थितियों के कारण। अनुसूचित जाति के लोग स्वभाव से भिखारी होते हैं।”     

उल्लेखनीय है कि पिछले दिनों चुनाव प्रचार के दौरान अपने संबोधन में पीएम ने टीएमसी नेता सुजाता मंडल के ‘भिखारी’ वाले बयान को लेकर टीएमसी की सोच पर सवाल उठाया था। उन्होंने कहा था, “एक वीडियो सामने आया है जिसमें दीदी की करीबी एक नेता ने अनुसूचित जाति के लोगों का बहुत बड़ा अपमान किया है। उन्होंने कहा कि बंगाल में जो अनुसूचित जाति है, Schedule Caste समुदाय है वो भिखारियों की तरह व्यवहार करती है।” आगे पीएम ने दीदी से पूछा था, “क्या SC समुदाय के मेरे भाई बहनों और उनके बच्चों से आप, आपकी पार्टी, आपके नेता इतनी नफरत करते हैं?”