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छत्तीसगढ़ में फिर नक्सली हमला, पुलिस के 2 जवानों का गला रेता: 23 दिनों में तीसरी घटना

छत्तीसगढ़ में नक्सली हमलों की वारदात बढ़ती जा रही है। अब पिछले 3 दिनों में यहाँ तीसरा नक्सली हमला सामने आया है। सुकमा जिले के भेज्जी थाने से सिर्फ आधा किलोमीटर दूर पुलिस के दो जवानों की हत्या कर दी गई। ये घटना ऐसे समय सामने आई है, जब बीजापुर में अर्धसैनिक बलों के 22 जवानों की नक्सलियों द्वारा हत्या का ग़म देश भूला नहीं है। ताज़ा मामले में दोनों मृतक भेज्जी पुलिस थाने में ही तैनात थे।

थाने के पास ही एक पुलिस कैम्प भी है। गुरुवार (अप्रैल 15, 2021) को दोनों जवान बाइक से बाजार की तरफ जा रहे थे, तभी इनका रास्ता रोक कर किसी ने धारदार हथियार से गला रेत डाला और फ़रार हो गए। इस हमले को लेकर ग्रामीणों ने भी चुप्पी साधी हुई है। एसपी केएल ध्रुव ने बस इतना कहा है कि मामले की जाँच की जा रही है। मृतक जवानों की पहचान पुनेम हड़मा और धनीराम कश्यप के रूप में हुई है।

मीडिया ने ग्रामीण सूत्रों के हवाले से अंदेशा जताया है कि इस हमले के पीछे नक्सलियों की ‘स्मॉल एक्शन टीम’ का हाथ हो सकता है। इस दस्ते में दो-चार नक्सली ही होते हैं लेकिन वो खतरनाक हथियारों से छोटे हमले करते हैं। ये टीमें कैम्प से बाहर निकलने वाले पुलिसकर्मियों पर नजर रखती है। ये नक्सली ग्रामीणों के बीच ही आम आदमी बन कर रहते हैं और इनके प्रभाव के कारण इन्हें चिह्नित कर पाना बड़ा मुश्किल होता है।

जहाँ ये घटना हुई, वहाँ पुलिसकर्मी अक्सर बाजार के काम के लिए जाया करते हैं। पुलिस को सूचना मिली थी कि दोनों जवान सड़क पर पड़े हुए हैं, जिसके बाद वो मौके पर पहुँची। दोनों जवान पड़े हुए थे और उनके गले से खून लगातार निकल रहा था। पुलिस जब तक पहुँची, तब तक उनकी मौत हो चुकी थी। अब पुलिस गाँव वालों की मदद से ही नक्सलियों को चिह्नित कर के दोषियों को पकड़ने में लगी हुई है।

इससे पहले बीजापुर में पट्रोलिंग करते जवानों को यू-शेप व्यूह बना कर फँसाया गया था और उनके निकलने के रास्ते को जाम कर के ताबड़तोड़ फायरिंग की गई थी। 23 जवान बलिदान हो गए थे। एक जवान राकेश्वर सिंह का अपहरण कर लिया गया था, लेकिन फिर सरकार के प्रयासों के बाद छोड़ दिया गया। इसी तरह 3 अप्रैल को छत्तीसगढ़ के बस्तर डिवीजन के बीजापुर जिले में नक्सलियों के सथ मुठभेड़ में 5 जवान बलिदान हो गए थे। 9 नक्सली भी मार गिराए गए थे।

जिन ब्राह्मणों के खिलाफ भड़काता था लालू, उसकी रिहाई के लिए उन्हीं से पूजा-पाठ करवा रहे बेटे: बेल पर सुनवाई

राजद सुप्रीमो लालू यादव फ़िलहाल चारा घोटाला के 4 मामलों में जेल की सज़ा भुगत रहा है। उसकी जमानत याचिका पर शनिवार (अप्रैल 17, 2021) को झारखंड हाईकोर्ट में सुनवाई भी होनी है। उससे पहले उसके बेटे और बिहार के पूर्व उप-मुख्यमंत्री तेजस्वी यादव ने देवघर स्थित बाबा बैद्यनाथ धाम और वासुकीनाथ धाम में प्रार्थना की। तेज प्रताप नवरात्र कर रहे हैं। वरिष्ठ कॉन्ग्रेस नेता कपिल सिब्बल बतौर अधिवक्ता लालू की तरफ से दलीलें पेश करेंगे।

CBI लालू यादव को जमानत देने के विरोध में है और वो भी मजबूती से अपना पक्ष रखेगी। उच्‍च न्‍यायालय में जस्टिस अपरेश कुमार सिंह की अदालत में सूचीबद्ध इस मामले में शुक्रवार को ही सुनवाई होनी थी, लेकिन कोरोना संक्रमण से बचाव के लिए अदालत का आज सैनिटाइजेशन किया जाना है, इसीलिए इसे 1 दिन आगे बढ़ा दिया गया। इधर तेजस्वी यादव मंदिर-मंदिर घूम कर अपने पिता के लिए प्रार्थनाएँ कर रहे हैं।

इसी दौरान उन्होंने कामाख्या मंदिर में भी अपने पिता के लिए पूजा-अर्चना कराई। खास बात ये है कि इसके लिए उन्हें उन्हीं ब्राह्मणों की ज़रूरत पड़ी, जिन्हें उनके पिता भला-बुरा कहते थे। सितम्बर 2015 में बिहार विधानसभा के चुनाव प्रचार के दौरान पूर्व-मुख्यमंत्री ने इसे अगड़ी बनाम पिछड़ी जाति का जंग करार दिया था। उसने इसे महाभारत की लड़ाई बताते हुए यादवों को होश में रह कर एकता बनाए रखने की सलाह दी थी।

लालू यादव ने जोर देते हुए कहा था कि यादवों को खास कर के ब्राह्मणों के खिलाफ एकजुट रहने की ज़रूरत है। साथ ही उसने RSS को भी ब्राह्मणों की टीम करार दिया था। उसने अपने परिवार के पारंपरिक गढ़ यादव बहुल राघोपुर में ये बातें कही थीं, जो वैशाली जिले में पड़ता है। इस रैली में मंच पर मौजूद छोटू छलिया नामक गायक ने ‘सवर्ण बनाम पिछड़े’ के कई गाने भी गए थे। लालकृष्ण आडवाणी का रथ रोकने की बात की गई।

ध्यान देने वाली बात ये है कि उस दौरान जिन चुनावी रैलियों में लालू यादव बार-बार मोकामा के जिस विधायक अनंत सिंह को गिरफ्तार करवाने का क्रेडिट लेकर वाहवाही लूटता था, वही अनंत सिंह आज राजद में हैं और पार्टी ने उन्हें कई जिम्मेदारियाँ भी दी थीं। अब लालू यादव जेल में है। CBI का तर्क है कि 7 साल की आधी सज़ा पूरी होने में अभी 3 साल बाकी है, ऐसे में उसे जमानत नहीं दी जा सकती है।

कुछ दिन पहले लालू यादव की बेटी रोहिणी सिंह ने भी लिखा था, “रमज़ान का पाक महीना शुरू हो रहा है! इस साल हमने भी फैसला किया है कि पूरे महीने अपने पापा के सेहतयाबी और सलामती के लिए रोज़े रखूँगी! पापा की हालत में सुधार हो और जल्दी न्याय मिल सके, इसकी भी दुआ करूँगी! साथ ही मुल्क में अमन चैन हो, इसलिए ईश्वर/अल्लाह से कामना करूँगी।” इस पर लोगों ने उनकी क्लास भी लगाई थी।

सोशल मीडिया पर नागा साधुओं का मजाक उड़ाने पर फँसी सिमी ग्रेवाल, यूजर्स ने उनकी बिकनी फोटो शेयर कर दिया जवाब

बॉलीवुड अभिनेत्री सिमी ग्रेवाल सोशल मीडिया पर नागा साधुओं की फोटो शेयर करने के बाद से यूजर्स के निशाने पर आ गई हैं। दरअसल, उन्होंने कुंभ मेले में स्नान करने गए नागा साधुओं का मजाक उड़ाते हुए ट्वीट किया, ”विदेशी भी हँसते होंगे कि कुंभ मेले में साधुओं ने कहाँ पर मास्क पहना हुआ है।”

इसको लेकर सोशल मीडिया यूजर्स ने सिमी को करारा जवाब देते हुए बिकनी में उनकी पुरानी फोटो का स्क्रीनशॉट शेयर कर दिया। यूजर्स ने लिखा कि दिक्कत ये नहीं कि आपने पूरे कपड़े नहीं पहने हैं। लेकिन आपने अपना मुँह कवर नहीं किया हुआ है, जबकि आपके पास दो एक्स्ट्रा लार्ज मास्क हैं।

सिमी ने यूजर्स की प्रतिक्रिया पर झल्लाते हुए ट्वीट किया। उन्होंने लिखा, ”मेरे ट्वीट को कुछ लोगों ने दिल पर ले लिया है। ये कैसे अपना बचाव कर रहे हैं, परेशान हैं और असहिष्णु हैं। खासतौर पर भक्त। सभी गंभीर हो रहे हैं। यह थोड़ा बुरा है। 90% ने सही भावना में जवाब दिया, जबकि अन्य 10% ने इसे लेकर नकारात्मक और विवादास्पद जबाव दिया। इन्हें सोच-समझ कर बोलने की आदत नहीं है।”

उन्होंने आगे कहा, “इस विवादित ट्वीट को हटा रही हूँ। इन दिनों हमारे चारों ओर काफी उदासी और नकारात्मकता है। मैं इसे नहीं देखना चाहती। लेकिन उन सभी का शुक्रिया, जिन्होंने मेरा साथ दिया।” बता दें कि बॉलीवुड की कई फिल्मों में भी सिमी ने बिकनी सीन्स दिए हुए हैं।

कोरोना के खिलाफ लड़ाई में आगे आए अखाड़े, कुम्भ समाप्ति की घोषणा: जमातियों से तुलना करने वालों को झटका

कोरोना वायरस के प्रसार को देखते हुए साधुओं के अखाड़ों ने कुम्भ की समाप्ति की घोषणा की है। उत्तराखंड और हरिद्वार को कोरोना वायरस से सुरक्षित रखने और इसके लिए जारी सरकारी दिशा-निर्देशों का पालन ठीक से हो, इसीलिए अखाड़ों ने ये फैसला लिया है। निरंजनी अखाड़ा, आनंद अखाड़े ने ये घोषणा की है। दोनों अखाड़ों ने अप्रैल 17 को कुम्भ की समाप्ति की घोषणा की। सचिव महंत रवींद्र पुरी ने ये ऐलान किया।

उन्होंने कहा कि यह अखाड़ा परिषद का फैसला नहीं है, बल्कि यह उन अखाड़े का निजी फैसला है। उन्होंने बताया कि अधिकतर अखाड़ों की यही राय है लगभग सबने कुम्भ समापन की घोषणा कर दी है। वहीं आचार्य महामंडलेश्वर निरंजनी अखाड़ा कैलाश नंदगिरी ने दोनों अखाड़ों के मामले में कहा की कोरोना की वजह से अखाड़ा 17 तारीख को कुंभ समाप्ति की घोषणा करेगा। लोगों ने भी इसका स्वागत किया है।

रवींद्र पुरी ने कहा, “27 अप्रैल के शाही स्नान को 40-50 पंथी स्नान करेंगे और स्नान करके वापस चले जाएँगे।” यह घोषणा सिर्फ पंचायती अखाड़े की ओर से है। निरंजनी अखाड़े के बाद बाकी 5 सन्यासी अखाड़े भी अपने यहाँ कुंभ समाप्ति की घोषणा कर सकते हैं। जबकि अभी 27 अप्रैल का शाही स्नान होना है। इस शाही स्नान में अब केवल 3 बैरागी, दो उदासीन और एक निर्मल अखाड़ा ही रह जाएगा।

इस तरह से आम लोग इस कुम्भ में नहीं जाएँगे, बस कुछ चुने हुए साधुओं के प्रतिनिधि ही शाही स्नान करेंगे। ठीक वैसे ही, जैसे मंदिरों में पुजारियों को तो पूजा-पाठ व दैनिक कार्य करने की अनुमति है लेकिन भक्तों को वहाँ फ़िलहाल न जाने की सलाह दी गई है। शुक्रवार (अप्रैल 16, 2021) को उत्तराखंड के मुख्यमंत्री तीरथ सिंह रावत ने भी उच्च-स्तरीय बैठक बुलाई है, जिसमें कोरोना की ताज़ा स्थिति पर चर्चा होगी।

इसमें कुम्भ, बाहरी व्यक्तियों के राज्य में प्रवेश, नाइट कर्फ्यू की अवधि बढ़ाने और दफ्तरों में उपस्थिति को लेकर फैसला किया जाएगा। कुम्भ की समाप्ति को लेकर अखाड़ों ने जिस तरह से फैसला लिया है, उससे इसकी तुलना तबलीगी जमात से करने वालों को भी झटका लगा है। CEAT कंपनी के चेयरमैन हर्ष गोयनका, शिवसेना नेता संजय राउत और अभिनेत्री सिमी ग्रेवाल जैसों ने कुम्भ और वहाँ जा रहे साधुओं का मजाक बनाया था।

जमातियों की तरह यहाँ न तो किसी ने कहीं थूका, न सरकारी दिशा-निर्देशों का उल्लंघन किया, न मेडिकल टीम या पुलिस पर हमला किया और न ही धर्म/मजहब को आधार बना कर अफवाहें फैलाईं। फिर भी जमातियों से इनकी तुलना की जा रही थी। पिछले साल यही लोग जमातियों के बचाव में लगे हुए थे। अब अखाड़े खुद सामने आकर स्थिति की गंभीरता को समझते हुए फैसले ले रहे हैं। उत्तराखंड में कोरोना की स्थिति कई अन्य राज्यों से बेहतर है।

कुल सक्रिय कोरोना मरीजों की संख्या के मामले में उत्तराखंड फ़िलहाल देश के सभी राज्यों व केंद्रशासित प्रदेशों की सूची में 19वें स्थान पर है और यहाँ फ़िलहाल 12,484 सक्रिय कोरोना मरीज हैं। राजधानी देहरादून में 5151 सक्रिय कोरोना मरीज हैं, जबकि हरिद्वार में 3612 कोरोना मामले सक्रिय हैं। पिछले 1 दिन में राज्य में 2220 नए केस सामने आए हैं। राज्य में कोरोना ने अब तक 1802 लोगों की जान ली है।

दिल्ली सरकार के App पर हॉस्पिटल में कई बेड्स खाली, हकीकत में एक भी नहीं: CM केजरीवाल ने झूठ बोला?

दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल दावा कर रहे हैं कि प्रदेश में हॉस्पिटल बेड्स की कमी नहीं है, लेकिन जमीनी स्थिति इसके एकदम उलट है। सोशल मीडिया पर कुछ अस्पतालों से बात करने के बाद लोगों ने अपनी बात सामने रखी। कई लोगों ने अपने परिवार या रिश्तेदारों के व्यक्तिगत अनुभव के आधार पर इस महामारी के दौरान कोविड बेड्स के उपलब्ध न रहने की बात बताई। स्थिति सचमुच भयावह दिख रही है।

सोशल मीडिया पर शेयर किए गए ऑडियो के अनुसार, दिल्ली सरकार के एप पर ‘श्री बालाजी एक्शन मेडिकल इंस्टीटूशन’ में 5 बेड्स खाली होने की बात बताई जा रही थी, लेकिन जब वहाँ कॉल किया गया तो पता चला कि एक भी बेड खाली नहीं है। अस्पताल की तरफ से बताया गया कि एप पर क्या बताया जा रहा है, इस बारे में उन्हें कुछ नहीं पता, लेकिन वहाँ मरीजों की भर्ती को लेकर वेटिंग लिस्ट चल रही है।

इसी तरह अप्रैल 15 को ही ‘प्राइमस सुपर स्पेशलिटी हॉस्पिटल’ में 18 खाली बेड्स होने की बात एप पर बताई गई, लेकिन जब अस्पताल में कॉल कर के पूछा गया तो पता चला कि कोविड मरीज के लिए एक भी बेड खाली नहीं है। अस्पताल की तरफ से कहा गया कि एप्लीकेशन में ऐसा क्यों दिखा रहा, उन्हें नहीं पता। इसी तरह एप पर ‘शांति मुकुंद हॉस्पिटल’ में 68 बेड्स खाली होने की बात कही गई, लेकिन अस्पताल ने कहा कि ये दूसरे मरीजों के लिए है।

इसी तरह ‘मैक्स स्मार्ट गुजरमल मोदी हॉस्पिटल’ में एप पर 7 बेड्स खाली दिखाए जा रहे थे, लेकिन वहाँ फोन करने पर बताया गया कि क्वारंटाइन के लिए भी बेड नहीं हैं। ‘दीपचंद बंधू अस्पताल’ से भी यही जवाब आया। जबकि एप पर यहाँ भी 30 बेड्स खाली दिखाए जा रहे थे। अस्पताल की रिसेप्शनिस्ट ने कहा कि दिन भर उपलब्ध बेड्स की संख्या में बदलाव होते रहते हैं, इसीलिए एप पर खाली बेड्स की संख्या दिखाई गई होगी।

जिस दिन के ये आँकड़े हैं और फोन कॉल्स किए गए, उसी दिन ये खबर भी आई थी कि अरविंद केजरीवाल ने दिल्ली के अस्पतालों में 5000 बेड्स खाली होने की बात कही है। दिल्ली सरकार अब तक 14 प्राइवेट और 6 सरकारी अस्पतालों को डेडिकेटेड कोविड फैसिलिटी में कन्वर्ट कर चुकी है। कहा गया था कि सोमवार (अप्रैल 12, 2021) को कोरोना के इलाज के लिए 2653 नए बेड्स जोड़े गए, जिससे कुल संख्या 14,900 हो गई।

दिल्ली में वीकेंड कर्फ्यू लगाया जा चुका है। साथ ही AAP सुप्रीमो ये भी कह रहे हैं कि जब तक जरूरी न हो, तब तक लोग अस्पतालों का रुख न करें। मीनाक्षी ठाकुर नामक ट्विटर यूजर ने लिखा कि वो एक दिन में ही ऐसे 6 लोगों से मिलीं, जो दिल्ली के अस्पतालों में एक अदद बेड पाने के लिए संघर्ष कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि जब वास्तविकता यही है, तो दिल्ली सरकार हजारों बेड्स खाली होने की बात क्यों कह रही है?

कई ट्विटर इन्फ्लुएंसर्स ने कहा कि उनकी टाइमलाइन पर लोगों की लंबी लाइन लगी हुई है, जो दिल्ली के अस्पताल में बेड्स के लिए गुहार लगा रहे हैं। ऐसा नहीं है कि दिल्ली में ये स्थिति अचानक से आ गई है। पिछले साल 2020 में किस तरह से केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह को मैदान में उतरना पड़ा था, सबने देखा। फिर स्थिति ठीक हुई थी। अर्धसैनिक बलों ने फैसिलिटीज की व्यवस्था की। उसके बाद स्थिति फिर जस की तस हो गई।

जून 2020 के पहले हफ्ते में ही जहाँ एक तरफ दिल्ली सरकार प्रदेश के अस्पतालों में बेड्स की कमी न होने की बात कह रही थी, कई बड़े अस्पतालों ने बताया था कि वो पूरी क्षमता के साथ भरे पड़े हैं। NDTV की पड़ताल में मैक्स हॉस्पिटल्स, फोर्टिस हॉस्पिटल्स और होली फैमिली हॉस्पिटल ने बेड उपलब्ध न होने की जानकारी दी थी। जबकि उस समय भी दिल्ली सरकार का स्मार्टफोन एप दर्जनों बेड्स खाली होने के आँकड़े दे रहा था।

फ़िलहाल दिल्ली में कोरोना के 54,309 सक्रिय मामले हैं। पिछले 1 दिन में ही यहाँ 16,699 नए कोविड-19 मरीज सामने आए हैं। 1 दिन में ठीक होने वाली की संख्या (13,014) नए मरीजों की संख्या से कम है। प्रदेश में पिछले 1 दिन में कोरोना से 112 नई मौतें हुईं, जिससे मृतकों का कुल आँकड़ा 11,652 तक पहुँच गया। दिल्ली में प्रत्येक 10 लाख में 39,575 कोरोना पॉजिटिव हो चुके हैं। पिछले एक सप्ताह में प्रतिदिन 1.7% की औसत से मरीजों की संख्या में वृद्धि हो रही है।

पाकिस्तान के उकसावे का सैन्य जवाब देने से पीछे नहीं हटेगा मोदी का नया भारत: अमेरिकी खुफिया रिपोर्ट

अमेरिका में कॉन्ग्रेस को दी गई रिपोर्ट में अमेरिकी इंटेलिजेंस कम्युनिटी ने कहा है कि पाकिस्तान के द्वारा भारत विरोधी गतिविधियों के बाद उसे सैन्य स्तर पर जवाब देने की संभावना में वर्तमान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अपने पिछले समकक्षों से कहीं आगे हैं।

अमेरिकी कॉन्ग्रेस के समक्ष रखी गई वार्षिक संकट आकलन रिपोर्ट (Annual Threat Assessment Report) में राष्ट्रीय सुरक्षा के निदेशक कार्यालय (ODNI) ने भारत और पाकिस्तान के मध्य किसी भी प्रकार के युद्ध की संभावना से पूरी तरह इनकार किया है। लेकिन यह शंका व्यक्त की है कि दोनों देशों के बीच का संकट निकट भविष्य में और भी गहराता जाएगा।  

रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि भारत अपने पड़ोसियों के साथ सामान्य संबंध स्थापित करना चाहता है। लेकिन जब तक पाकिस्तान आतंक और हिंसा मुक्त वातावरण सुनिश्चित नहीं करता, तब तक भारत उससे किसी भी प्रकार का कोई मैत्री संबंध नहीं रखेगा।

ODNI की रिपोर्ट में यह बात विशेष रूप से कही गई है कि पाकिस्तान के प्रति सैन्य कार्रवाई करने में पिछले राष्ट्राध्यक्षों की तुलना में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भारत ज्यादा मुखर है। पाकिस्तान द्वारा भारत में कोई भी आतंकी हमला अथवा कश्मीर के अंदर अशान्ति की परिस्थितियाँ दो परमाणु हथियार संपन्न देशों के मध्य संभावित संघर्ष का कारण बन सकती हैं। अगस्त 2019 में जम्मू-कश्मीर में अनुच्छेद 370 के उन्मूलन और राज्य को दो केंद्र शासित प्रदेशों में बाँटने के बाद से ही दोनों देशों की राजधानियों में एक-दूसरे के हाई कमिश्नर नहीं हैं।

ODNI की रिपोर्ट की रिपोर्टर के अनुसार, अफगानिस्तान में लड़ाई के समय ईराक और सीरिया अमेरिकी सेना के प्रमुख चिंता का विषय थे। लेकिन परमाणु संपन्न भारत और पाकिस्तान के बीच संघर्ष की स्थिति पूरे विश्व के लिए अभी भी चिंता का विषय है। यह रिपोर्ट भविष्य की परिघटनाओं के निकटवर्ती और दूरगामी प्रभाव पर आधारित होती है। वाशिंगटन में जारी होने वाली यह रिपोर्ट नीति-निर्माताओं को विश्व भर में अमेरिकी सैन्य संयोजन के लिए सहायता करती है।

द प्रिंट की ‘ज्योति’ में केमिकल लोचा ही नहीं, हिसाब-किताब में भी कमजोर: अल्पज्ञान पर पहले भी करा चुकी हैं फजीहत

प्रोपेगेंडा पोर्टल ‘द प्रिंट’ की पत्रकार ज्योति मल्होत्रा अपने अजीबोगरीब बयानों के कारण चर्चा में हैं। पहले तो उन्होंने कोरोना के दौरान ली जाने वाली दवा रेमेडिसविर (Remdesivir) को लेकर इस बात से आपत्ति जताई कि वो ‘केमिकल एंड फर्टिलाइजर्स’ मंत्रालय के अंतर्गत आता है। अब सोशल मीडिया पर उन्हें एक और कन्फ्यूजन के लिए ट्रोल किया गया है। उन्हें समझाया गया कि केमिकल विभाग, स्वास्थ्य मंत्रालय के अंतर्गत नहीं आता है।

जिस कन्वर्सेशन के कारण ज्योति मल्होत्रा चर्चा में हैं, वो ट्विटर पर पायल मेहता के साथ हुई। पायल ने PIB का महत्वपूर्ण अपडेट शेयर किया, जिसमें लिखा था कि भारत सरकार के पत्तन, पोत और जलमार्ग राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) और रसायन एवं उर्वरक राज्य मंत्री श्री मनसुख मंडाविया ने रेमेडिसविर दवा के सभी मौजूदा विनिर्माताओं और अन्य हितधारकों के साथ बैठक के बाद केंद्र सरकार ने रेमडेसिविर के उत्पादन को बढ़ाने का फैसला लिया है।

रेमेडिसविर के सात विनिर्माताओं की मौजूदा कुल स्थापित क्षमता 38.80 लाख शीशी प्रतिमाह है। छह विनिर्माताओं को 10 लाख शीशी प्रतिमाह की उत्पादन क्षमता वाले सात अतिरिक्त स्थलों के लिए फास्ट ट्रैक अनुमति दी गई है। वहीं अन्य 30 लाख शीशी प्रतिमाह उत्पादन प्रक्रिया में है। इससे विनिर्माण क्षमता में लगभग 78 लाख शीशी प्रतिमाह बढ़ोतरी हो जाएगी। निर्यात के लिए रखी गई रेमेडिसविर की 4 लाख शीशी घरेलू जरूरतों को पूरा करने के लिए विनिर्माताओं को दी गईं।

इस पर ज्योति मल्होत्रा पूछने लगीं कि एंटी-कोविड ड्रग रेमडेसिविर के एक्सपोर्ट को प्रतिबंधित करने के फैसले से शिपिंग मंत्री का क्या लेना-देना है? साथ ही उन्होंने पूछा कि स्वास्थ्य मंत्री कहाँ हैं? इस पर पायल ने उन्हें बताया कि मंडाविया ‘केमिकल एंड फर्टिलाइजर्स’ मंत्री भी हैं। यही विभाग ही है। फिर ज्योति ने लिखा कि क्या रेमडेसिविर केमिकल या फर्टिलाइजर है, कोई इससे अच्छा तर्क होना चाहिए।

पायल ने उन्हें समझाया, “चूँकि ये एक दवा है, इसलिए फार्मासिटिकल्स विभाग के अंतर्गत आता है। ये विभाग केमिकल एंड फर्टिलाइजर्स मंत्रालय के तहत आता है।” साथ ही उन्होंने समझाने के लिए सरकारी वेबसाइट का लिंक भी शेयर किया। फिर ज्योति ने उन्हें समझाने के लिए धन्यवाद देते हुए लिखा कि वो जीवन जीती हैं और सीखते जाती हैं। लेकिन, तब तक उनकी किरकिरी हो चुकी थी और लोगों को उनके अल्पज्ञान का थाह लग चुका था।

2020 में अप्रैल माह में ही मल्होत्रा ने प्रधानमंत्री की आर्थिक सलाहकार समिति की पूर्व सदस्य शमिका रवि के साथ बातचीत की थी। इसमें कोरोना को लेकर हालिया स्थिति और इससे निपटने के लिए लगे लॉकडाउन पर चर्चा की गई थी। उस बातचीत में अन्य देशों में कोरोना से निपटने की नीतियों पर भी बात हुई थी। अब लोगों ने मल्होत्रा को याद दिलाया है कि कैसे वह मिलियन में जीरो की संख्या को लेकर कन्फ्यूज्ड हो गई थीं।

शमिका ने कहा था कि नीतियों को तैयार करने वाला माहौल स्थिर नहीं है। उन्होंने बताया था कि कैसे हर देश इस महामारी से अलग-अलग तरीके से निपट रहा था। उन्होंने उदाहरण दिया था कि जिस चीन में एक मिलियन मरीजों की संख्या का अंदाज़ा लगाया गया था, वहाँ सिर्फ 85,000 ही मिले। इस पर मल्होत्रा ने कहा था, “लेकिन ये मिलियन से ज्यादा दूर नहीं है।” अब आप उनके गणित ज्ञान का अंदाज़ा लगा लीजिए।

1 मिलियन का अर्थ होता है 10 लाख और 85,000 उससे काफी कम संख्या है। उन्होंने 1 मिलियन को उस संख्या से नजदीक बता दिया था, जिससे वो पौने 12 गुना ज्यादा है। शमिका भी ये बात सुन कर कुछ देर शॉक्ड हो गई थी। अव्वल तो ये हुआ कि ‘द प्रिंट’ ने इस मामले में हास्यास्पद स्पष्टीकरण जारी किया।

इसमें कहा गया कि ज्योति मल्होत्रा का मतलब 8,50,000 से था, न कि 85,000 से, इसीलिए उन्होंने इसे 1 मिलियन के करीब बताया। बता दें कि अब भी चीन में कुल कोरोना संक्रमितों की संख्या 1,03,000 है, जो 1 मिलियन से लगभग 10 गुना कम है। फिर इस स्पष्टीकरण का क्या मलतब? इस तरह से ज्योति मल्होत्रा का ‘नॉट टू फार’ 9.15 लाख से पीछे रह गया था। अब उन्होंने रेमडेसिविर पर ज्ञान दिया है।

महाराष्ट्र में कोरोना की आड़ में कई धंधे, घर लौट रहे प्रवासी कामगारों से ‘वसूली’ कर रही पुलिस

महाराष्ट्र में कोरोना की दूसरी लहर से पैदा हुए सकंट का फायदा उठाकर कमाई करने के लगातार मामले सामने आ रहे हैं। घर लौट रहे प्रवासी मजदूरों ने महाराष्ट्र पुलिस पर वसूली का आरोप लगाया है। राज्य में 15 दिनों का कर्फ्यू लगने लगाए जाने के कारण मजदूर अपने घरों को लौटने के लिए मजबूर हैं।

एक टैक्सी ड्राइवर ने बताया, “कर्फ्यू लगने के बाद आजीविका की समस्या उत्पन्न हो गई है। हम अपने घरों की ओर लौट रहे हैं। पिछले साल भी हम लॉकडाउन के दौरान अपने घरों को लौट गए थे। लेकिन स्थिति सुधरने के बाद हम फिर से वापस आ गए। पिछले साल की तरह इस साल भी पुलिस हमसे जबरन वसूली कर रही है।”  

इसी तरह महाराष्ट्र से वापस लौट रहे एक प्रवासी मजदूर सनाउल्लाह खान ने बताया, “हम पुणे से आ रहे हैं। एक बस ने हमसे 2500-3000 रुपए लिए। महाराष्ट्र बॉर्डर पर हमें बस से उतारकर दो गाड़ियों में बैठने को कहा गया। बॉर्डर चेक प्वाइंट पर पुलिस और परिवहन विभाग के लोगों ने भी हमें अनदेखा कर दिया।”

दो जीपों में सवार 50 से ज्यादा प्रवासी मजदूर इंदौर बाइपास के पास देखे गए जो जबलपुर जा रहे थे। इनलोगों को इंदौर की राउ थाना पुलिस ने एक एनजीओ की मदद से बचाया।

समाजसेवी शैलेश कुमावत ने बताया, “यहाँ खाने और विश्राम करने के साथ डॉक्टर और दवाइयों की भी व्यवस्था की गई है। आवश्यकता पड़ने पर हम अस्पताल से भी मदद लेते हैं। यहाँ आने वाले मजदूर थके हुए होते हैं। लिहाजा स्थानीय पुलिस की सहायता से हमने उनके लिए कुछ व्यवस्थाएँ की हैं।”  

मंगलवार (13, अप्रैल) को महाराष्ट्र की उद्धव ठाकरे सरकार ने राज्य में कोरोना वायरस के बढ़ते संक्रमण को रोकने के लिए धारा 144 लगाने का आदेश दे दिया। सरकार के इस कदम से महाराष्ट्र में रहने वाले मजदूरों में घबड़ाहट का माहौल निर्मित हो गया। इसके बाद ये मजदूर महाराष्ट्र छोड़कर अपने राज्यों की ओर निकलने लगे।

इससे पहले खबर आई थी कि मुंबई में कई टूर एंड ट्रैवल ऑपरेटर लोगों को 300 रुपए में कोविड 19 की नेगेटिव रिपोर्ट दे रहे हैं। रिपोर्ट के अनुसार, मुंबई में लॉकडाउन जैसी पाबंदियों के बाद कई लोग अपने घर लौटने को मजबूर हैं। कई राज्यों ने महाराष्ट्र से लौटने वालों के लिए कोविड-19 RT-PCR की नेगेटिव रिपोर्ट अनिवार्य कर दिया है। लोगों की इसी मजबूरी का फायदा उठाकर टूर एंड ट्रैवल्स वालों ने नया धंधा शुरू किया है। यहाँ वे यात्रियों को 300 रुपए में कोरोना की नेगेटिव रिपोर्ट उपलब्ध कराते हैं, वो भी बिना टेस्ट के।

यह बात भी सामने आ चुकी है कि BMC के अधिकारी मुंबई इंटरनेशनल एयरपोर्ट पर बाहरी देशों से आए लोगों को 7 दिन के अनिवार्य क्वारंटाइन में रखने की बजाय उनसे 10-12 हजार रुपए लेकर उन्हें एयरपोर्ट से निकलने में मदद कर रहे हैं। मिड-डे ने खुलासा किया था कि एयरपोर्ट पर बीएमसी अधिकारियों को इसलिए तैनात किया गया कि वो कोरोना से सबसे ज्यादा प्रभावित देश जैसे- ब्रिटेन, यूरोप, मिडिल ईस्ट और साउथ अफ्रीका, से आए यात्रियों का 7 दिन का क्वारंटाइन सुनिश्चित करें, लेकिन अधिकारी उनसे पैसों की लेन-देन कर उन्हें छोड़ रहे हैं।

सुशांत पर फेक न्यूज के लिए AajTak को ऑन एयर माँगनी पड़ेगी माफी, ₹1 लाख जुर्माना: NBSA ने खारिज की याचिका

‘न्यूज़ ब्रॉडकास्टिंग स्टैण्डर्ड अथॉरिटी (NBSA)’ ने समाचार चैनल ‘आजतक’ की समीक्षा याचिका को खारिज कर दी है। चैनल से कहा है कि वह शुक्रवार (अप्रैल 23, 2021) शाम 8 बजे सुशांत सिंह राजपूत की मौत के मामले में गलत सूचना देने के लिए माफीनामा का प्रसारण करे। NBSA ने इस संबंध में अक्टूबर 2020 में जो आदेश दिया था, उस पर फिर से मुहर लगाई है। ‘आज तक’ ने ब्रॉडकास्टिंग के नियमों का उल्लंघन किया था।

दरअसल, चैनल ने सुशांत सिंह राजपूत के अंतिम शब्द बताकर जिन चीजों का प्रसारण किया था, वो गलत थे। ‘आजतक’ को फुल स्क्रीन पर बड़े शब्दों में लिख कर इस माफीनामे का प्रसारण करना होगा और बैकग्राउन्ड से उसे साफ आवाज में पढ़ना होगा। चैनल को 1 लाख रुपए का जुर्माना भरने को भी कहा गया है। ‘आजतक (AajTak)’ के खिलाफ फिल्म निर्माता निलेश नवलखा ने शिकायत दायर की थी। माफीनामे का टेक्स्ट इस प्रकार होगा:

“आजतक इसके लिए माफी माँगता है कि सुशांत सिंह राजपूत की आत्महत्या से जुड़े मामलों की रिपोर्टिंग करते समय हमने चैनल पर कुछ ट्वीट्स चलाए थे। चैनल ने झूठा दावा किया था कि वो सुशांत सिंह राजपूत के अंतिम ट्वीट्स थे। ऐसा कर हमने प्रसारण संबंधी नियमों का उल्लंघन किया है। ये दिशा-निर्देश कहते हैं कि खबरों की एक से अधिक सूत्रों से पुष्टि करनी चाहिए। गलती होने पर फैक्ट्स को तुरंत सुधारा जाना चाहिए।”

इससे पहले ‘आजतक’ को अक्टूबर 27, 2020 को माफी माँगने को कहा गया था, लेकिन चैनल ने समीक्षा के लिए याचिका दायर कर दी थी। NBSA ने कहा कि ‘आजतक’ की याचिका में उसके पक्ष में कुछ था ही नहीं। कुछ अन्य चैनलों को भी इस मामले में गलत रिपोर्टिंग करते हुए पकड़ा गया था और उन्हें माफी माँगने को कहा गया था। ‘आजतक’ ने पिछले आदेश का पालन नहीं किया, इसलिए अब उसे नई तारीख पर माफी माँगनी होगी।

आजतक ने दिवंगत अभिनेता सुशांत सिंह राजपूत के कथित आखिरी ‘ट्वीट्स’ पर उनकी मौत के दो दिन बाद 16 जून को ख़बर प्रकाशित की थी। ‘आज तक’ ने यह लेख अपने आधिकारिक ट्विटर हैंडल से भी साझा किया था। आज तक ने जो लिंक साझा किया था उसके भीतर इस बात का दावा किया गया था कि सुशांत ने कथित तौर पर आत्महत्या के संकेत दिए थे। बाद में बिना किसी स्पष्टीकरण के यह ख़बर (ट्वीट) हटा ली गई थी।

फ्रांस ने अपने नागरिकों और कंपनियों को पाकिस्तान छोड़ने की दी सलाह, पैगंबर के कार्टून पर हिंसा के बाद गृहयुद्ध से हालात

फ्रांस ने अपने नागरिकों और कंपनियों को अस्थायी तौर पर पाकिस्तान छोड़ने की सलाह दी है। पाकिस्तान में गृह युद्ध की स्थिति को देखते हुए फ्रांसीसी दूतावास ने यह सलाह दी है। फ्रांस विरोधी तहरीक-ए-लब्बैक पाकिस्तान (टीएलपी) के हिंसक प्रदर्शनों के बाद पाकिस्तान के कई हिस्सों में हिंसा की खबर के बाद ये सलाह दी गई है। अपने नागरिकों को भेजे ईमेल में दूतावास ने लिखा है कि खतरे को देखते हुए उन्हें और फ्रांस की कंपनियों को पाकिस्तान छोड़ने की सलाह दी जाती है।

पाकिस्तानी अखबार डॉन से फ्रांसीसी दूतावास के सूचना विभाग के वर्निक वैंगर (Veronique Wagner) ने कहा, “प्रदर्शनों के कारण फ्रांसीसी नागरिकों पर आए संकट के चलते हमने अपने नागरिकों को पाकिस्तान छोड़ने की सलाह दी है।“

फ्रांस में अक्टूबर 2020 में एक 45 वर्षीय शिक्षक की गला रेत कर हत्या कर दी गई थी। इसके बाद फ्रांस के राष्ट्रपति ने अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता की बात करते हुए पत्रिकाओं द्वारा पैगंबर मोहम्मद के कार्टून बनाए जाने के अधिकार को भी समर्थन दिया था। तब से ही पाकिस्तान में फ्रांस विरोधी प्रदर्शन चल रहे हैं।

हाल ही में पाकिस्तान की सरकार ने टीएलपी को बैन करने का निर्णय लिया है। टीएलपी एक इस्लामिक कट्टरपंथी समूह है। यह पाकिस्तान में ईशनिंदा कानून के समर्थन में प्रदर्शन करता रहता है। टीएलपी के इस्लामिक कट्टरपंथ के कारण ही पाकिस्तान में अल्पसंख्यकों पर प्रमुख रूप अत्याचार हो रहा है। टीएलपी पाकिस्तान में हो रही फ्रांस विरोधी हिंसाओं के पीछे प्रमुख रूप से जिम्मेदार है और पाकिस्तान में फ्रांसीसी दूतावास के निष्कासन की माँग कर रहा है।

सोमवार को टीएलपी के नेता साद रिजवी को गिरफ्तार किया गया था। रिजवी ने टीएलपी की माँगों को पूरा करने के लिए 20 अप्रैल का समय दिया था। रिजवी की गिरफ़्तारी के बाद पाकिस्तान में हिंसक प्रदर्शन बढ़ गए, जिनमें 2 पुलिसवालों की जान गई और लगभग 370 लोग घायल हो गए। पाकिस्तान के एक मंत्री शेख राशिद का बयान आया था कि वे पैगंबर के सम्मान की रक्षा के पक्ष में हैं, किन्तु टीएलपी की माँगों को स्वीकार करने पर पाकिस्तान की छवि एक कट्टरपंथी देश के रूप में हो जाएगी।

गुरुवार को ट्विटर पर #FrenchLeavePakistan ट्रेंड करता रहा। सितंबर 2020 में जब चार्ली हेब्दो ने पैगंबर मोहम्मद के कार्टून को पुनः प्रकाशित किया तब पेरिस में उसके कार्यालयों पर एक पाकिस्तानी नागरिक द्वारा हमला किया गया और उसने दो लोगों को चाकू मार दी थी।

रिजवी की गिरफ़्तारी के बाद हुई हिंसा से जुड़ी कई खबरें और वीडियो सोशल मीडिया में वायरल हो रहे हैं।