Home Blog Page 3883

‘आरोग्य सेतु’ की शर्त पर उमर खालिद को जमानत… पर जेल में ही रहेगा दिल्ली हिंदू विरोधी दंगों का आरोपित

दिल्ली की एक अदालत ने JNU के पूर्व छात्र नेता उमर खालिद को जमानत दे दी है। उसके खिलाफ दिल्ली दंगों में संलिप्तता को लेकर खजूरी ख़ास थाने में मामला दर्ज किया गया था। कोर्ट ने कहा कि इस मामले में जाँच पूरी हो चुकी है और चार्जशीट भी दायर हो गया है, ऐसे में अब सुनवाई में लंबा समय लगने की संभावना है। उमर खालिद को 10 अक्टूबर 2020 को जुडिशल कस्टडी में लिया गया था।

इस मामले में उमर खालिद के खिलाफ 25 फरवरी 2020 को एफआईआर दर्ज की गई थी। यह मामला उत्तर-पूर्वी दिल्ली के खजूरी खास में हिंसा से जुड़ा है। यह दूसरी एफआईआर थी (FIR No. 101/2020) जिसके तहत बीते साल 1 अक्टूबर को उसे गिरफ्तार किया गया था।

जेएनयू के पूर्व छात्र नेता और दिल्ली के हिंदू विरोधी दंगों के आरोपित को जमानत देते हुए कड़कड़डूमा कोर्ट एडिशनल जज विनोद यादव ने कहा, “उमर खालिद को सिर्फ इसलिए अनंतकाल तक जेल में कैद कर के नहीं रखा जा सकता क्योंकि इस मामले में अभी दंगाई भीड़ में शामिल और लोगों को चिह्नित किया जाना है और कई अन्य गिरफ्तारियाँ भी होनी हैं।” उन्होंने 20 हजार के निची मुचलके और हर सुनवाई पर हाजिर होने की शर्त पर उसे जमानत दी। जेल से रिहाई पर अपना नंबर खजूरी खास थाने के एसएचओ को मुहैया कराने को कहा। साथ ही यह भी सुनिश्चित करने को कहा कि मोबाइल दुरुस्त हो और उसमें ‘आरोग्य सेतु’ एप डाउनलोड किया गया हो।

जमानत की शर्त यह भी है कि उमर खालिद सबूतों के साथ छेड़छाड़ का प्रयास नहीं करेगा और साथ ही गवाहों को प्रभावित करने की कोशिश भी नहीं करेगा। साथ ही वो अपने आसपास के इलाकों में शांति और भाईचारे का माहौल बना कर रखेगा।

ये मामला चाँदबाग पुलिया के नजदीक मेन करावल नगर रोड पर हुई हिंसा से जुड़ा हुआ है। ये दंगा मुख्य आरोपित ताहिर हुसैन के इशारे पर हुआ था। खालिद की तरफ से दलील दी गई कि उस दौरान वो वहाँ उपस्थित ही नहीं था और न ही उसके और ताहिर के बीच बैठक के कोई प्रत्यक्ष सबूत हैं। उसके खिलाफ दलील दी गई कि उसके द्वारा उकसाई गई भीड़ दूसरे समुदाय के लोगों और संपत्ति को अधिकाधिक नुकसान पहुँचाना चाहती है।

3 महीने पहले ही आरोप पत्र का संज्ञान लेते हुए कोर्ट ने कहा था कि प्रथम दृष्टया जाँच निष्कर्षों के अनुसार, JNU के छात्र नेता रहे उमर खालिद और AAP के पार्षद रहे ताहिर हुसैन ने मिल कर नॉर्थ-ईस्ट दिल्ली दंगों की साजिश रची थी– ये मानने के वाजिब आधार हैं। चीफ मेट्रोपोलिटन मजिस्ट्रेट दिनेश कुमार ने ये बातें कही थी। कोर्ट ने कहा था कि ये बयान ये दिखाने के लिए पर्याप्त है कि उक्त अवधि में उमर खालिद दिल्ली दंगों के मुख्य आरोपित ताहिर हिस्सें से लगातार संपर्क में था।

यह जानना जरूरी है कि इस मामले में जमानत मिलने के बावजूद उमर खालिद अभी जेल से बाहर नहीं निकल पाएगा। इस मामले में एफआईआर दर्ज होने से पहले ही एक अन्य मामले (FIR 59) में वह हिरासत में लिया जा चुका था। इस मामले में उसके खिलाफ UAPA की धाराएँ भी लगाई गई हैं। यानी, FIR 59 में जमानत नहीं मिलने तक वह जेल में ही रहेगा।

कोरोना से जंग में मुकेश अंबानी ने गुजरात की रिफाइनरी का खोला दरवाजा, फ्री में महाराष्ट्र को दे रहे ऑक्सीजन

देश में कोरोना वायरस के बढ़ते संक्रमण के कारण स्वास्थ्य सुविधाओं पर भारी दबाव पड़ रहा है। ऐसे में देश के सबसे अमीर उद्योगपति और रिलायंस इंडस्ट्रीज लिमिटेड के मालिक मुकेश अंबानी सहायता के लिए आगे आए हैं। अपनी रिफाइनरी की ऑक्सीजन की सप्लाई उन्होंने अस्पतालों को मुफ्त में शुरू की है। इसकी शुरुआत महाराष्ट्र से हुई है। राज्य को रिलायंस से 100 टन ऑक्सीजन की सप्लाई की जाएगी।

गुजरात के जामनगर में रिलायंस की रिफाइनरी है। यह दुनिया की सबसे बड़ी रिफाइनरी है। इस रिफाइनरी में उत्पादित ऑक्सीजन की सप्लाई महाराष्ट्र को की जाएगी और वो भी बिना किसी मूल्य के। महाराष्ट्र के शहरी विकास मंत्री एकनाथ शिंदे ने भी ट्वीट कर इसकी पुष्टि की है। जामनगर की रिफाइनरी से महाराष्ट्र को 100 टन ऑक्सीजन की सप्लाई की जाएगी, जिससे कोरोना वायरस से गंभीर रूप से संक्रमित मरीजों को इसका लाभ मिल सकेगा।

जामनगर में रिलायंस की रिफाइनरी में एक अधिकारी ने भी नाम न छापने की शर्त पर बताया कि जामनगर से ऑक्सीजन महाराष्ट्र भेजी जा रही है। रिफाइनरी में उत्पादित ऑक्सीजन का एक हिस्सा मेडिकल उपयोग के लिए तैयार किया जा रहा है। महाराष्ट्र कोरोना वायरस संक्रमण से सबसे ज्यादा प्रभावित है। ऐसे में मुकेश अंबानी और रिलायंस का यह निर्णय कोरोना वायरस से लड़ने में महाराष्ट्र के लिए बेहद मददगार साबित होगा।

महाराष्ट्र में कोरोना वायरस के बढ़ते संक्रमण के कारण स्वास्थ्य सुविधाएँ भी असंतुलित हो रही हैं। राज्य में ऑक्सीजन की कमी से कई मरीजों की जानें भी जा चुकी हैं। महाराष्ट्र ने केंद्र सरकार से राज्य में पड़ोसी राज्यों से ऑक्सीजन की सप्लाई बढ़ाने की अपील की थी। बढ़ते संक्रमण के कारण मध्य प्रदेश और गुजरात जैसे राज्यों में भी ऑक्सीजन की माँग तेजी से बढ़ रही है।

महाराष्ट्र में बुधवार को कोरोना वायरस के 58,952 नए संक्रमित मरीज मिले, जिससे कुल मरीजों का आँकड़ा बढ़कर 35,78,160 हो गया। राज्य में सक्रिय मरीजों की संख्या भी 6,12,070 है।

‘वाइन की बोतल, पाजामा और मेरा शौहर सैफ’: करीना कपूर खान ने बताया बिस्तर पर उन्हें क्या-क्या चाहिए

बॉलीवुड अभिनेत्री करीना कपूर खान ने अपना ‘बेडरूम सीक्रेट’ खोला है, जो सोशल मीडिया में खासा चर्चा का विषय बन रहा है। करीना कपूर ने कहा कि वो जब भी बिस्तर पर जाती हैं तो उन्हें 3 चीजें चाहिए होती हैं- पाजामा, वाइन की एक बोतल और शौहर सैफ अली खान। पटौदी खानदान की बहू ने यह बात दोस्त तान्या घावरी से डिस्कवरी प्लस के शो ‘Star VS Food’ की शूटिंग के दौरान हुई बातचीत में कही।

बता दें कि सैफ अली खान और करीना कपूर की शादी को 8 वर्ष हो चुके हैं। उससे पहले ये दोनों 5 साल रिलेशनशिप में भी रहे थे। करीना कपूर का शो ‘Star VS Food’ गुरुवार (अप्रैल 15, 2021) से ही डिस्कवरी प्लस पर आ रहा है। इस शो में ही बात करते हुए करीना ने जब अपने ‘बेडरूम सीक्रेट’ बताया तो वहाँ मौजूद सभी लोग ठहाके लगा कर हँस पड़े। करीना कपूर अपने जवाब पर खुश भी नजर आईं।

अपनी पीठ थपथपाते हुए ‘3 इडियट्स’ और ‘बजरंगी भाईजान’ में काम कर चुकी अभिनेत्री ने कहा, “मुझे लगता है इससे बेहतर जवाब और कुछ नहीं हो सकता है। मुझे इसके लिए इनाम मिलना चाहिए।” इस शो में मलाइका अरोड़ा, अर्जुन कपूर, करण जौहर, प्रतीक गाँधी भी नजर आने वाले हैं। इस शो के जरिए बॉलीवुड में ‘बेबो’ नाम से पुकारी जाने वाली करीना OTT प्लेटफॉर्म पर डेब्यू कर रही हैं।

करीना कपूर ने इस शो का प्रोमो अपने इंस्टाग्राम हैंडल पर भी शेयर किया

करीना कपूर इससे पहले किसी पाकविद्या वाले शो में भी नजर नहीं आई थीं। वीडियो में करीना कुछ घिसती नजर आती हैं और उनके मुँह से निकलता है- मेरे हाथ दुखने लगे। फिर निर्देशक करण जौहर की आवाज सुनाई देती है कि मैं अपना चेहरा खराब नहीं करना चाहता। इस शो में सभी सेलेब्रिटी अपने-अपने किचेन में खाना पकाने की तैयारी करते दिखेंगे। अब देखना है कि इसे दर्शकों की कैसी प्रतिक्रिया मिलती है।

तिहाड़ के 3468 कैदी ‘लापता’, कोरोना के कारण इमरजेंसी पेरोल पर जेल से बाहर निकले थे 6740

कोरोना महामारी के कारण पैदा हुए हालात की वजह से तिहाड़ जेल में बंद 6,740 कैदियों को इमरजेंसी पेरोल पर रिहा किया गया था। मीडिया रिपोर्टों के अनुसार इनमें से 3,468 ‘लापता’ हैं। अब जेल प्रशासन ने इनका पता लगाने के लिए दिल्ली पुलिस से कहा है। लापता कैदियों के बारे में जेल प्रशासन के पास कोई सूचना भी नहीं है। इन कैदियों की संख्या 3000 से ऊपर है।

कोविड-19 के प्रारंभ के समय ही जेल में बंद कैदियों की सुरक्षा के लिए भी कई प्रयास हुए थे। इन्हीं प्रयासों की श्रृंखला में 2020 में तिहाड़ जेल में कैदियों की संख्या को कुछ हद तक सीमित करने के लिए 6740 कैदियों को आपातकालीन पेरोल पर रिहा किया गया था। रिहा किए गए इन कैदियों में से कई कैदी कैंसर, एचआईवी, किडनी और दमा की गंभीर बीमारियों से पीड़ित थे। इनमें से 3468 कैदी वापस लौट कर नहीं आए।

जिन कैदियों को रिहा किया गया उनमें से 1,184 सजायाफ्ता कैदी थे। इन्हें शुरुआत में आठ हफ्तों के लिए पेरोल पर रिहा किया गया था। यह समय परिस्थिति के हिसाब से बढ़ती गई। आखिर में इन कैदियों को 7 फरवरी से 6 मार्च के बीच सरेंडर करने के लिए कहा गया था। कई कैदी वापस आ गए किन्तु इनमें से 112 कैदी अभी भी लापता हैं।

इसी प्रकार 5556 विचाराधीन कैदियों को आपातकालीन पेरोल पर रिहा किया गया। इन्हें मार्च के अंत तक सरेंडर करने के लिए कहा गया था। इनमें से भी 2200 कैदी ही लौट कर आए। कई कैदी तिहाड़ के अलावा मंडोली और रोहिणी जेल से भी रिहा किए गए थे।

तिहाड़ जेल प्रशासन ने न लौटने वाले कैदियों की लिस्ट दिल्ली पुलिस को दे दी है। प्रशासन के निवेदन पर अब दिल्ली पुलिस इन लापता कैदियों की तलाश करेगी।

पिछले साल कोरोना वायरस के संक्रमण के प्रारंभ होने के बाद सुप्रीम कोर्ट के सुझाव पर जेल में कैदियों की संख्या को कम करने के लिए कई राज्यों ने समितियों का निर्माण किया। दिल्ली में भी उच्च न्यायालय की जज हिमा कोहली की अध्यक्षता में एक समिति का निर्माण हुआ जिसकी सलाह पर तिहाड़ और अन्य जेलों से कैदियों को आपातकालीन पैरोल पर रिहा करने के सुझाव पर अमल किया गया।

तिहाड़ जेल दक्षिण एशिया की सबसे बड़ी जेल है जिसकी क्षमता लगभग 10,000 कैदियों को रखने की है। अब तक यहाँ कुल 174 कैदी और 300 स्टाफ सदस्य कोरोना वायरस से संक्रमित हो चुके हैं।

‘अब या तो गुस्ताख रहेंगे या हम, क्योंकि ये गर्दन नबी की अजमत के लिए है’: तहरीक फरोग-ए-इस्लाम की लिस्ट, नरसिंहानंद को बताया ‘वहशी’

देश भर में उत्तर प्रदेश के गाजियाबाद के डासना स्थित शिव-शक्ति धाम के महंत यति नरसिंहानंद सरस्वती के खिलाफ मुस्लिम कट्टरपंथियों का गुस्सा उबाल पर है। दिल्ली के AAP विधायक अमानतुल्लाह खान ने उन्हें धमकी दी। हरियाणा के पानीपत स्थित यमुनानगर में हिन्दू-मुस्लिम सामने आ गए थे। अब तहरीक फरोग-ए-इस्लाम ने एक बैठक कर महंत नरसिंहानंद को ‘साधुनुमा वहशी’ बताया।

दिल्ली में हुई इस प्रेस कॉन्फ्रेंस में कई मौलवी शामिल हुए, जो इस संस्था से जुड़े हुए थे। उन्होंने कहा, “वो चाहते हैं कि वे गुस्ताखी करते रहें और हम बर्दाश्त करते रहेंगे, कोई फर्क नहीं पड़ने वाला। हमने फैसला किया है कि हम अपने नबी की इज्जत और अजमत के लिए हर कुर्बानी देंगे। इसलिए, इस रमजान-ए-मुबारक में अपनी नबी की इज्जत को महफूज करने के लिए और उनके गुस्ताखों को सज़ा दिलाने के लिए जेल भरो आंदोलन चलाएँगे।”

बड़ी बात ये है कि इस मौलवियों ने कहा कि ऐसा कोई एक ‘गुस्ताख़’ नहीं है, बल्कि ‘गुस्ताखों’ की एक पूरी की पूरी सूची उनके पास है। इस दौरान उन्होंने उन ‘गुस्ताखों’ के बारे में कागजात भी दिखाए। मौलवियों ने कहा कि ये तो वो जेल में रहें, या फिर हम नहीं रहेंगे। कट्टरवादियों ने कहा कि उनके सिर पर जो गर्दनें हैं, वो उनके नबी की अजमत के लिए है। उन्होंने ऐलान किया कि देश भर के मुस्लिम इस ‘जेल भरो आंदोलन’ में हिस्सा लेंगे।

मौलवियों ने कहा कि मुल्क-ए-हिंदुस्तान में 2014 में भाजपा की सरकार आने के साथ ही पैगम्बर-ए-इस्लाम और अल्लाह के प्रति ‘गुस्ताखियों’ का दौर शुरू हुआ है। मौलवियों ने कहा कि वोटों के ध्रुवीकरण और हिन्दू-मुस्लिम को बाँटने के लिए ये सब हो रहा है। उन्होंने कहा कि वे सब कुछ बर्दाश्त कर सकते हैं, लेकिन नबी की इज्जत से खिलवाड़ नहीं। मौलवियों ने कहा, “अब या तो हम रहेंगे या फिर गुस्ताख।”

उन्होंने कहा कि अब मुस्लिमों का अंदाज कुछ भी हो, लेकिन सब साथ है। साथ ही कहा कि ‘जेल भरो आंदोलन’ के दौरान मुस्लिमों पर लाठी-गोलियाँ चलेंगी, लेकिन हिंदुस्तान की जेलें भर जाएगी। साथ ही कहा कि कोविड-19 का भी कोई ख्याल नहीं किया जाएगा। उन्होंने कहा कि जब बात नबी की हो तो किसका क्या फायदा-नुकसान है, ये नहीं देखा जाएगा। साथ ही NDA सरकार को ‘जंगलराज’ करार दिया।

‘हम ट्विटर पर तुम्हारी गालियाँ सुनने के लिए बैठे हुए हैं’: एजाज खान के साथ रिश्तों पर पवित्रा पुनिया ने ट्रोल्स को सुनाई

बिग बॉस 14 में एजाज खान के साथ अपने क्लोज रिलेशन को लेकर चर्चा बटोरने वाली पवित्रा पुनिया ने इंस्टाग्राम पर वीडियो जारी की है। वीडियो में उन्होंने भद्दे कमेंट करने वालों के लिए कहा कि उन्हें लोगों की बातों से कुछ फर्क नहीं पड़ता।

वीडियो में पवित्रा ने ट्रोलर्स को कहा, “नहीं, मतलब हमारी लाइफ में या किसी की लाइफ में क्या चल रहा है, क्या नहीं चल रहा है, कौन किस तकलीफ से गुजर रहा है। लोगों को क्या परेशानी हो सकती है। कुछ फर्क ही नहीं पड़ता यार। आओ, सीधा गालियाँ देना शुरू कर दो। मतलब सच में? हम ट्विटर पर तुम्हारी गालियाँ सुनने के लिए बैठे हुए हैं, ऐसा है क्या?”

https://www.instagram.com/reel/CNpDisDBQoP/?utm_source=ig_embed

टीवी अभिनेत्री पवित्रा पुनिया अपने सोशल मीडिया हैंडल्स पर काफी सक्रिय हैं और बात चाहे निजी जिंदगी को लेकर हो या फिर बिग बॉस पर एजाज खान से बने अपने रिश्ते के बारे में, वह हर मामले पर खुल कर बोलती हैं। उनकी इस वीडियो को लेकर भी यूजर्स उनकी तारीफ कर रहे हैं। अभी तक इसे 27 हजार से ज्यादा लोग लाइक कर चुके हैं।

मालूम हो कि कुछ महीने पहले भी पवित्रा ने इसी तरह ट्रोलर्स को उनके और एजाज के रिश्ते के बारे में कुछ न बोलने को कहा था। 27 फरवरी को पवित्रा ने ट्वीट किया, “प्यारे ट्रोलर्स…नफरत फैलाना बंद करो। मेरे और एजाज के रिश्ते पर ऐसी टिप्पणी किसी कीमत पर स्वीकार्य नहीं है। हम एक-दूसरे को सच्चा प्यार करते हैं। इसलिए हमें नफरत फैलाने वालों के अप्रूवल की जरूरत नहीं। हमारे लिए दुआ करें।”

बता दें कि पवित्रा और एजाज ने कुछ समय पहले एक इंटरव्यू में अपने रिलेशन की पुष्टि की थी। पवित्रा ने कहा था कि वह दोनों एक-दूसरे को डेट कर रहे हैं और रिलेशनशिप में हैं। पवित्रा ने अपने और एजाज के रिश्ते को एक खूबसूरत एहसास कहा था। वहीं, एजाज ने कहा था कि अभी शादी के लिए बहुत पापड़ बेलने हैं। उन्होंने कहा, “शादी इंशाअल्लाह होगी और बहुत सही वक़्त पर होगी। हम दोनों इस मामले में इंतजार कर रहे हैं और सब कुछ सही रहा तो इसी साल शादी भी हो जाएगी। अभी हमारे घर वाले बहुत फैले हुए हैं। पहले उन्हें समेट लें, फिर इस बारे में सोचेंगे।” 

चीन के लिए बैटिंग या 4200 करोड़ रुपए पर ध्यान: CM ठाकरे क्यों चाहते हैं कोरोना घोषित हो प्राकृतिक आपदा?

कोरोना के लगातार बढ़ते संक्रमण के बीच महाराष्ट्र सरकार ने राज्य में नागरिकों की सामान्य गतिविधियों पर एक मई तक प्रतिबंध लगा दिया। आदेश के अनुसार लोगों को बिना ठोस कारणों के सार्वजनिक स्थानों पर जाने पर प्रतिबंध रहेगा। आवश्यक सुविधाओं के अलावा लगभग सब कुछ बंद रहेगा। व्यावहारिकता की दृष्टि से ये प्रतिबंध भले ही कर्फ़्यू जैसे हैं पर सरकार इसे लॉकडाउन नहीं कहना चाहती।

सरकार ने केवल आवश्यक सुविधाओं को जारी रखने की अनुमति दी है। इसके अलावा धारा 144 का भी सहारा लिया है जिसे 15 अप्रैल की रात से लागू करके 1 मई तक रखा जाएगा। सरकार ने सार्वजनिक परिवहन के साधन जैसे रेल, बस के चलते रहने की घोषणा की पर साथ ही मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे ने लोगों से घर में रहकर काम करने की अपील की है। साथ ही मिल और फ़ैक्ट्रियों के लिए एक दिशा निर्देश भी जारी किया ताकि कोरोना संक्रमण पर क़ाबू करने में मदद मिले। इसके अलावा एक महत्वपूर्ण फ़ैसले में सरकार ने विभिन्न क्षेत्रों में संक्रमण से प्रभावित होने वाले नागरिकों के लिए 5476 करोड़ रुपए का एक राहत पैकेज की घोषणा की है।

राज्य सरकार के अचानक उठाए गए इन कदमों से लगा जैसे सरकार इस प्रतीक्षा में थी कि संक्रमण से आ रहे आँकड़े एक खास जगह तक चढ़ें तब वह जागे। इसके पहले इस महामारी को रोकने के सरकार के प्रयासों को पूरे भारत ने एक वर्ष तक देखा है। पिछले पूरे वर्ष भर कोरोना के रोज़ आने वाले नए केस में महाराष्ट्र का योगदान किसी से छिपा नहीं है। दूसरी लहर के शुरुआत में भी राज्य का योगदान प्रतिदिन आने वाले आँकड़ों में क़रीब 60% रहा। उसके अलावा महामारी की आड़ में खेली गई राजनीति और मुंबई पुलिस के कारनामे अब तक जग प्रसिद्ध हो चुके हैं। वैक्सीन की तथाकथित कमी की बात सरकार में शामिल दलों के नेताओं द्वारा सार्वजनिक तौर पर उठाई गई, ये बात अलग है कि केंद्र सरकार ने दो टूक जवाब दिया कि वैक्सीन की कोई कमी नहीं है।

पर इन सारी बातों के बीच जो सबसे महत्वपूर्ण बात सामने आई वह है मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे की वह चिट्ठी जो उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को लिखी है। लगभग 5500 करोड़ के इस राहत पैकेज की घोषणा के साथ ही उद्धव ठाकरे ने प्रधानमंत्री को लिखी अपनी चिट्ठी में उनसे अनुरोध किया कि केंद्र सरकार COVID19 को एक प्राकृतिक आपदा घोषित कर दे।

ऐसे किसी अनुरोध के पीछे उद्देश्य क्या हो सकता है? ऐसे अनुरोध के पीछे ऊपरी तौर पर तो एक ही उद्देश्य जान पड़ता है, और वो यह है कि यदि केंद्र सरकार COVID19 को प्राकृतिक आपदा घोषित कर दे तो राज्य सरकार के लिए एसडीआरएफ (स्टेट डिज़ैस्टर रिलीफ़ फंड) में इकट्ठा हुए क़रीब 4200 करोड़ रुपए को खर्च करने का रास्ता खुल जाएगा।

मुख्यमंत्री ठाकरे को पता है कि आपदा प्रबंधन अधिनियम 2005 (Disaster Management Act 2005) के अनुसार बनाए गए इस फंड में जमा हुए धन का इस्तेमाल केवल प्राकृतिक आपदा जैसे, बाढ़, सूखा, सुनामी, भूकंप, भूस्खलन, हिमस्खलन इत्यादि के समय ही किया जा सकता है। क़ानून के अनुसार इस फंड में केंद्र सरकार का योगदान 75% और राज्य सरकार का योगदान 25% रहता है। नियम के अनुसार जब तक केंद्र सरकार इस महामारी को प्राकृतिक आपदा नहीं बताएगी, तब तक राज्य सरकार फंड में जमा हुए राशि का इस्तेमाल नहीं कर सकेगी।

पर क्या यहाँ केवल फंड में रखे धन के उपयोग की बात है? प्रश्न यह है कि यदि केंद्र सरकार अपने किसी आदेश से COVID19 को एक प्राकृतिक आपदा घोषित कर दे तो उस अंतरराष्ट्रीय बयान पर क्या प्रभाव पड़ेगा जिसके तहत इस महामारी के लिए चीन को ज़िम्मेदारी ठहराया जाता रहा है? न केवल अमेरिका या यूरोपीय देश बल्कि तमाम एशियाई और अफ्रीकी देशों का मानना है कि इस महामारी के लिए चीन ज़िम्मेदार है। आस्ट्रेलियाई दृष्टिकोण भी जग ज़ाहिर है। दूसरी ओर भारत में भी इसे लेकर एक तीव्र धारणा रही है कि इसके पीछे चीन से निकले वाइरस का ही हाथ है। तमाम वैज्ञानिक, अंतरराष्ट्रीय मीडिया, बुद्धिजीवी और सरकारी प्रतिनिधि इस बात पर ज़ोर देते रहे हैं कि इसे वुहान वाइरस के नाम से ही जाना जाए।

ऐसे में क्या मुख्यमंत्री ठाकरे को अनुमान है कि उनकी बात मानकर यदि केंद्र सरकार इसे प्राकृतिक आपदा घोषित कर देती है तो उस अंतरराष्ट्रीय मान्यता को कितनी बड़ी ठेस लगेगी जो विश्व समुदाय ने पिछले एक वर्ष में स्थापित की है? न केवल भारतीयों को पर विश्व भर में रह रहे भारतीय मूल के लोगों के उस विश्वास का क्या होगा जिसे मन में लिए हुए वे रोज़ इस महामारी से लड़ रहे हैं? क्या ठाकरे की यह माँग उचित है जिसकी वजह से न केवल इतने बड़े अंतरराष्ट्रीय समुदाय के बयान को ठेस पहुँचेगी बल्कि चीन उनकी इस बात को अपने प्रॉपगैंडा के लिए इस्तेमाल करेगा?

देश में राजनीतिक लड़ाई लड़ते हुए हम बार-बार क्यों भूल जाते हैं कि इन लड़ाई से उपजे बयानों का लाभ पाकिस्तान या चीन पहले भी उठाते रहे हैं? मुख्यमंत्री ठाकरे केंद्र सरकार से जो चाहते हैं, वह क्या केवल एक फंड में पड़े धन के इस्तेमाल की बात है या उससे आगे भी कुछ है? भारत की विदेश नीति पर उनकी इस माँग के असर का उन्हें रत्ती भर भी भान है? कहीं ऐसा तो नहीं कि उद्धव ठाकरे को अपनी इस माँग से न केवल उठने वाले प्रश्नों का पूर्वानुमान है बल्कि उसकी वजह से बनने वाले अंतरराष्ट्रीय बयान की भी समझ है और उनकी इस माँग के पीछे यही कारण है?

ऐसा क्यों है कि राज्य सरकारें पिछले पाँच वर्षों में केंद्र सरकार के प्रति ऐसा रवैया अपनाती रही हैं जिसके संभावित दूरगामी प्रभाव और परिणाम का उन्हें ज़रा भी भान नहीं रहता? जिसका हमारे संघीय ढाँचे पर बुरा प्रभाव पड़ सकता है? वैसे तो ये वे साधारण प्रश्न हैं जिन्हें बीच-बीच में पूछा जाता रहा है पर उद्धव ठाकरे की इस चिट्ठी से जो प्रश्न उठता है वह गंभीर है और उसके संभावित गंभीर परिणामों पर बहस की आवश्यकता है।

कोरोना पर कुंभ और दूसरे राज्यों को कोसा, खुद रोड शो कर जुटाई भीड़: संजय राउत भी निकले ‘नॉटी’

शिवसेना के मुख्य प्रवक्ता और सांसद संजय राउत अक्सर अपने बयानों के कारण सुर्ख़ियों में रहते हैं। अब वे अपने कर्म से चर्चा में हैं। ज्यादा दिन नहीं हुए जब उन्होंने महाराष्ट्र में कोरोना के भयावह हालात के लिए दूसरे राज्यों को कोसा था। हरिद्वार में चल रहे कुंभ के मत्थे संक्रमण का दोष डाला था। लेकिन, अब वे खुद महामारी के इस हालात में रोड शो कर भीड़ जुटाते पकड़े गए हैं।

राउत ने रोड शो भी अपने राज्य में नहीं किया है। इसके लिए वे पड़ोस के कर्नाटक चले गए। वहाँ के बेलगाम में अपनी पार्टी द्वारा समर्थित प्रत्याशी के समर्थन में बड़ा रोड शो किया। यहाँ शिवसेना ने ‘महाराष्ट्र एकीकरण समिति (MES)’ के उम्मीदवार को समर्थन दे रखा है। इससे दोनों राज्यों में विवाद भी बढ़ रहा है।

राउत ने प्रत्याशी शुभम शेलके के लिए प्रचार किया और इसमें भारी भीड़ जुटी। शिवसेना मुखपत्र ‘सामना’ के एग्जीक्यूटिव एडिटर का कहना है कि जब वो रैली के लिए पहुँचे तो देखा कि उनका मंच क्षतिग्रस्त कर दिया गया था, इसलिए उन्होंने रोड शो निकाला। उन्होंने बुधवार (अप्रैल 14, 2021) को ये रोड शो निकाला। बेलगाम लोकसभा क्षेत्र में 17 अप्रैल को उपचुनाव होने हैं।

इस सीट पर भाजपा का कब्ज़ा था। लेकिन सांसद सुरेश अंगाड़ी की कोरोना के कारण हुई मौत के उपचुनाव हो रहे हैं। यहाँ मराठी भाषी लोगों की जनसंसख्या ज्यादा है। जनवरी में सीएम उद्धव ठाकरे महाराष्ट्र-कर्नाटक के विवादित हिस्सों को केंद्रशासित प्रदेश घोषित करने की बात कर के पहले ही आग में घी डाल चुके हैं। राउत ने कहा कि वे पार्टी सुप्रीमो उद्धव के इशारे पर यहाँ आए हैं और प्रशासन के इशारे पर उनके मंच को तहस-नहस कर डाला गया।

सोशल मीडिया पर लोगों ने संजय राउत के दोहरे रवैये पर निशाना साधा है, क्योंकि उन्होंने हाल ही में कुंभ को लेकर विवादित बयान दिया था। उन्होंने कहा था कि हरिद्वार के कुंभ से लौटने वाले श्रद्धालु कोरोना वायरस के कैरियर हो सकते हैं, जिससे बड़ी तबाही होने की आशंका है। उन्होंने दावा किया था कि हमारे पर्व-त्योहारों पर पाबंदियाँ लगाना शिवसेना के लिए दर्द भरा है, लेकिन लोगों की जान बचाने के लिए ऐसा किया गया।

लोगों ने संजय राउत से पूछा कि क्या उनकी रैली से कोरोना नहीं फैलेगा? एक तरफ वो कुंभ पर सवाल दाग रहे हैं, दूसरी तरफ खुद रैली कर रहे हैं। जबकि कुंभ में हिस्सा लेने के लिए कोरोना नेगेटिव सर्टिफिकेट ज़रूरी है और वहाँ सारे दिशा-निर्देशों के पालन के लिए पुलिस बल भी तैनात किया गया है। वहीं दूसरी तरफ महाराष्ट्र पूरे देश में कोरोना का हॉटस्पॉट बना हुआ है, लेकिन राउत दूसरों को ज्ञान बाँच रहे हैं।

राउत ने यह भी कहा था, ”महाराष्‍ट्र में कोरोना इसलिए बढ़ रहा है, क्‍योंकि और राज्‍यों से लोग यहाँ आते हैं। हमारे यहाँ आज गुड़ी पड़वा है, मुख्‍यमंत्री ने नियंत्रण लगाया है। हमें क्‍या आनंद मिलता है कि हमारे त्‍योहार पर इस तरह से नियंत्रण लगाया जाए? लोग भी गुस्‍सा करते हैं। लेकिन हमने किया है। ये हिम्‍मत है सरकार की।”

महाराष्ट्र के कैबिनेट मंत्री असलम शेख को भी यही राग अलापते हुए देखा गया था। एक वीडियो में बातचीत के दौरान उन्होंने कुंभ मेले में आने वाले तीर्थयात्रियों की तुलना तबलीगी जमात से की। कुंभ मेले से लौटने वाले श्रद्धालुओं को संभावित खतरे के रूप में बताते हुए उन्होंने कहा, ”आगामी त्योहारों के लिए सख्त एसओपी (केंद्र से मानक प्रचालन प्रक्रिया) होंगे। अन्यथा, आप देख सकते हैं कि हरिद्वार कुंभ के लिए सरकार द्वारा अनुमति देने के कारण COVID-19 मामलों में कैसे वृद्धि हुई है। ये वही लोग हैं जिन्होंने तब्लीगी जमात को बदनाम किया और उन पर कोरोना महामारी फैलाने का आरोप लगाया।”

‘ये अत्याचारी CM है… मरीज सीधे भर्ती नहीं हो सकते’: UP में कोरोना के नाम पर किए जा रहे झूठे दावे की खुली पोल

उत्तर प्रदेश में कोरोना की बढ़ती रफ्तार के बीच प्रशासन को लेकर झूठी खबरें फैलाने का काम तेजी से हो रहा है। हाल में सोशल मीडिया पर कई जगह दावा किया गया कि यूपी में कोविड-19 मरीजों को अस्पतालों में भर्ती होने के लिए संबंधित जिले के सीएमओ से अनुमति पत्र लेनी होगी।

इस दावे को भारत समाचार के एडिटर इन चीफ ब्रजेश मिश्रा समेत कई लोगों ने अपने ट्विटर हैंडल से शेयर किया गया।

ब्रजेश मिश्रा ने लिखा, “यूपी में कोरोना के किसी गंभीर मरीज को भर्ती होना है तो उसे सम्बंधित जिले के CMO से अनुमति पत्र लेना होगा। ऐसे लटकाने-अटकाने-भटकाने वाले आदेश जनता पर अत्याचार के समान है। कोरोना मरीज अस्पताल मे सीधे भर्ती नहीं हो सकते। सरकार को चाहिए की ऐसे आदेश वापस ले। पहले जीवन बचाना ज़रूरी है।”

वहीं वंशिका जनचेतना फाउंडेशन ने कहा, “ये अत्याचारी सीएम है जिसने शव के ढेर लगने के बाद अब यूपी में कोरोना के किसी गंभीर मरीज को भर्ती के लिए उत्पीड़न- करने वाले आदेश दिए, जिससे आम जनता इन्हें वोट दे पछता रही है। अत्याचारी योगी आदित्यनाथ राज में कोरोना मरीज सीधे भर्ती नहीं हो सकते, जिले के सीएमओ से अनुमति पत्र लेना होगा।”

एक अन्य यूजर ने योगी सरकार पर सवाल उठाते हुए कहा, “अच्छी बात है ,पर इस आदेश के बारे में क्या बोलोगे कि यूपी में कोरोना के किसी गंभीर मरीज को भर्ती होना है तो उसे सम्बंधित जिले के CMO से अनुमति पत्र लेना होगा। क्या योगी सरकार मेडिकल माफिया के आगे असहाय है या पतन की पहली सीढ़ी पर कदम रख चुकी है ?”

सोशल मीडिया में हो रहे दावों की हकीकत

महामारी के समय में ऐसे दावों की सच्चाई बताने के लिए उत्तर प्रदेश सरकार के आधिकारिक फैक्ट चेकिंग हैंडल ने स्वयं संज्ञान लिया। इन्फो यूपी फैक्ट चेक नाम के वेरिफाइड ट्विटर हैंडल से बताया गया है कि ये दावें फर्जी हैं। कोरोना संक्रमित मरीज को इंटिग्रेटेड कोविड एंड कमांड कंट्रोल रूम की मदद से एम्बुलेंस से लेकर टेस्ट और अस्पताल में भर्ती करने की व्यवस्था की जाती है। इसके लिए कहीं सीएमओ से अनुमति की आवश्यकता नहीं है।

मालूम हो कि उत्तर प्रदेश में पिछले 24 घंटे में कोरोना के 22 हजार 439 नए केस आए हैं। सिर्फ लखनऊ में 5183 केस आए हैं। प्रयागराज में 1888, वाराणसी में 1859 और कानपुर में 1263 मामले दर्ज हुए हैं। ऐसी स्थिति में महामारी को लेकर झूठी जानकारियाँ फैलाकर लोगों को भ्रम में रखना स्थिति को और चिंताजनक बना सकता है। ऐसे में कई सक्रिय यूजर्स सच्चाई को जानने के बाद, झूठ फैलाने वालों को फॉलो न करने की अपील कर रहे हैं।

‘वीडियो और तस्वीरों ने कोर्ट की अंतरात्मा को हिला दिया है…’: दिल्ली दंगों में पिस्टल लहराने वाले शाहरुख को जमानत नहीं

दिल्ली हाई कोर्ट ने दिल्ली दंगों के आरोपित शाहरुख पठान को जमानत देने से इनकार कर दिया है। शाहरुख पर फरवरी 2020 में दिल्ली के सीएए विरोधी दंगों के दौरान पिस्टल लहराते हुए पुलिसकर्मी पर फायरिंग का आरोप है। जाफराबाद में हेड कॉन्स्टेबल पर पिस्टल ताने शाहरुख की तस्वीरें भी सामने आई थी।

जस्टिस सुरेश कैत की एकल पीठ ने इस मामले में पेश किए गए वीडियो फुटेज को देखने के बाद उसे जमानत नहीं दी। कोर्ट ने कहा, “इस अदालत के सामने रखे गए वीडियो क्लिपिंग और तस्वीरों ने इस कोर्ट की अंतरात्मा को हिला दिया है कि याचिकाकर्ता कानून और व्यवस्था को अपने हाथों में कैसे ले सकता है।”

न्यायालय के आदेश में कहा गया है कि सरकारी पक्ष के अभियोजक (पब्लिक प्रोसिक्यूटर) ने सबूत के तौर पर जो वीडियो और फोटो कोर्ट में पेश किए, उनसे स्पष्ट है कि शाहरुख पठान के हाथ में पिस्टल था और वह वीडियो में गोली चलाते हुए देखा जा सकता है।  

दोनों पक्षों की दलीलों को सुनने के बाद न्यायालय ने कहा कि यह मामला अत्यंत गंभीर है। न्यायालय ने यह भी कहा कि भले ही अपीलकर्ता (शाहरुख पठान) ने शिकायतकर्ता अथवा किसी अन्य व्यक्ति को मारने की मंशा से फायरिंग न की हो, लेकिन यह स्वीकार करना असंभव है कि अपीलकर्ता को यह ज्ञात नहीं था कि उसकी यह हरकत किसी को भी गंभीर नुकसान पहुँचा सकती है।  

पठान की जमानत याचिका खारिज करते हुए जस्टिस सुरेश कुमार कैत ने कहा, “न्यायालय में प्रस्तुत सबूतों से यह ज्ञात होता है कि आरोपित दंगों में संलिप्त था और इन सबूतों में उसके अपराध की गंभीरता स्पष्ट तौर पर दिखाई देती है। इस कारण न्यायालय द्वारा अपीलकर्ता को जमानत नहीं दी जा सकती है।“

शाहरुख पठान ने दिल्ली उच्च न्यायालय में जमानत के लिए याचिका दायर की थी। पठान का कहना था कि उसे दंगों का ‘पोस्टर बॉय’ बना दिया गया, जबकि उसकी किसी को जान से मारने की कोई मंशा नहीं थी। इससे पहले अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश अमिताभ रावत ने भी उसकी अंतरिम जमानत याचिका खारिज कर दी थी। शाहरुख को पिछले साल 24 फरवरी को पकड़ा गया था।