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टीवी सीरियल में राम का किरदार निभाने वाले गुरमीत चौधरी खोलेंगे 1000 बेड का अस्पताल: पटना और लखनऊ होंगे पहला पड़ाव

टीवी के पॉपुलर शो ‘रामायण’ में भगवान श्री राम का किरदार निभाने वाले अभिनेता गुरमीत चौधरी ने ट्विटर के माध्यम से सूचना दी कि वह पटना और लखनऊ में 1000 बिस्तरों का अल्ट्रा मॉडर्न अस्पताल खोलने जा रहे हैं। उन्होंने यह भी कहा कि अन्य शहरों में भी उनकी ऐसी ही कुछ योजनाएँ हैं।

जनवरी में गुरमीत चौधरी ने सोशल मीडिया के माध्यम से जानकारी दी थी कि वह अयोध्या में बनने वाले प्रभु श्री राम के भव्य मंदिर के लिए अपना योगदान देंगे। अब उन्होंने पटना और लखनऊ में अस्पताल भी खोलने का निर्णय लिया है।

गुरमीत ने कहा था, “आप सब ने मुझे भगवान राम के किरदार में देखा था। इसके अलावा भी मैंने कई किरदार निभाए लेकिन मुझे यह भरोसा है कि मैं आज जो भी हूँ वह उन्हीं की वजह से हूँ। रामायण मेरा टीवी पर पहला शो था। मैं आपका हृदय से धन्यवाद करता हूँ और आज मैं आप सबसे कुछ शेयर करना चाहता हूँ।“

गुरमीत कोरोनावायरस के इस संक्रमण के दौरान भी सोशल मीडिया के माध्यम से लोगों की मदद करते हुए नजर आते हैं। वह सोशल मीडिया के माध्यम से लोगों को ऑक्सीजन और अन्य महत्वपूर्ण दवाईयाँ उपलब्ध कराने के लिए खासे सक्रिय हैं।

गुरमीत चौधरी ने 2008 में टेलीविजन के बेहद पॉपुलर शो ‘रामायण’ में भगवान राम का किरदार निभाया था जो बहुत प्रसिद्ध हुआ था। अभिनेत्री देबिना बनर्जी ने माता सीता का किरदार निभाया था। बाद में 2011 में गुरमीत और देबिना ने शादी कर ली थी।

हम्पी के बादावी लिंग मंदिर के पुजारी श्री कृष्ण भट्ट का निधन: 40 साल से 3 मीटर ऊँचे शिवलिंग की करते थे सेवा

रविवार (25 अप्रैल 2021) को श्रीकृष्ण भट्ट का देहावसान हो गया। भट्ट ने कर्नाटक के हम्पी के बादावी लिंग मंदिर में 40 वर्षों से पुजारी के रूप में सेवा की। विश्व हिन्दू परिषद के सदस्य गिरीश भारद्वाज ने ट्विटर पर श्री कृष्ण भट्ट के निधन का समाचार दिया।

विभिन्न सोशल मीडिया मंचों में ईश्वर भक्ति और सनातन धर्म के प्रति समर्पण को दिखाने के लिए उनकी फोटो शेयर की जाती थी। इन तस्वीरों में श्री कृष्ण भट्ट शिवलिंग की सेवा करते हुए देखे जाते थे।

94 वर्षीय श्री कृष्ण भट्ट कर्नाटक के शिवमोग्गा जिले के तीर्थाहल्ली तालुक के एक गाँव के रहने वाले थे। वह हम्पी के सत्यनारायण मंदिर में एक पुजारी के तौर पर नियुक्त हुए थे। बाद में वह आनगुंडी रॉयल परिवार के द्वारा हम्पी के बादावी लिंग मंदिर के पुजारी बनाए गए। भट्ट पिछले 40 सालों से निरंतर मंदिर में सेवा करते आए थे। वह शाम होने तक मंदिर में ही रहते थे।  

बादावी के लिंग मंदिर और श्री कृष्ण भट्ट की सबसे खास बात यह थी कि भट्ट 3 मीटर ऊँचे शिवलिंग में चढ़कर उसकी साफ सफाई करते थे। मंदिर में हमेशा ही पानी भरा रहता था और वहाँ कोई सीढ़ी या शिवलिंग की साफ सफाई के लिए कोई साधन भी नहीं था। ऐसे में भट्ट शिवलिंग में चढ़कर वहाँ भस्म और विभूति इत्यादि अर्पित करते। भक्त भी इसे सहर्ष ही स्वीकार करते थे।

हम्पी के ही विरूपाक्ष मंदिर के वरिष्ठ पुजारी शिव भट्ट ने न्यू इंडियन एक्स्प्रेस से चर्चा करते हुए कहा था कि शिवलिंग पर चढ़ने के अलावा कोई दूसरा रास्ता ही नहीं है। इसे कोई भी अपवित्रता से जोड़ कर नहीं देख सकता क्योंकि यह श्रद्धा और समर्पण से जुड़ा है। बादावी का लिंग मंदिर विजयनगर के राय वंश के द्वारा 15वीं शताब्दी में बनाया गया था।

हम्पी के बादावी लिंग मंदिर के गर्भ गृह की छत में कई छेद हैं। ये छेद बहमनी के सुल्तानों के इस्लामिक आक्रमण के कारण बन गए थे। इसी कारण मंदिर में 500 सालों तक पूजा-पाठ नहीं हो सकी। 1980 के दौरान मंदिर में पूजा प्रारंभ हुई। इन्हीं छेदों के कारण मंदिर के गर्भ गृह में सूर्य का प्रकाश आता रहता है। इससे उत्पन्न होने वाली मनमोहक छटा श्रद्धालुओं को मंदिर तक खींच लाती है।   

हालाँकि श्रद्धालुओं को मंदिर के गर्भ गृह में प्रवेश करने की अनुमति नहीं है। अभी तक श्रीकृष्ण भट्ट ही मंदिर से जल लाकर श्रद्धालुओं पर छीट दिया करते थे। अब श्रीकृष्ण भट्ट के परलोक गमन के बाद बादावी में एक शून्य उत्पन्न हुआ है, भक्ति और समर्पण का शून्य।

महाराष्ट्र-दिल्ली में 10 में से 1 PSA प्लांट ही हुआ स्थापित: उद्धव-केजरीवाल की लापरवाही की सजा भुगत रहे लोग

कोरोना महामारी की दूसरी लहर में जब दिल्ली और महाराष्ट्र ऑक्सीजन की कमी से जूझ रहा है। महाराष्ट्र की उद्धव सरकार और दिल्ली की केजरीवाल सरकार अगर समय रहते ऑक्सीजन की कमी पर ध्यान देती तो ऐसे हालात देखने को नहीं मिलते। दरअसल, 8 महीने (पहला सत्र सितंबर 2020) पहले विधान परिषद में राज्य के हर जनपद में एक ऑक्सीजन प्लांट लगाने का सुझाव दिया गया था। सत्र में डॉ. रंजीत पाटिल ने कहा था कि कोविड-19 के कारण ऑक्सीजन आपूर्ति की स्थिति विकट होने वाली है।

हालाँकि, उस दौरान उनके सुझाव पर वित्त मंत्री अजीत पवार ने 10 ऑक्सीजन प्लांट लगाने की घोषणा भी की थी, लेकिन इसे अमल में नहीं लाया गया। आपको जानकार हैरानी होगी कि पीएम केयर से पैसा अलॉट होने के बावजूद महाराष्ट्र में 10 में से केवल 1 ही ऑक्सीजन प्लांट लगाया गया, जिसके चलते राज्य में आज कोरोना महामारी के कारण हाहाकार मचा हुआ है।

हाल ही में देश में ऑक्सीजन की कमी को देखते हुए केंद्र सरकार ने बड़ा निर्णय लिया है। इसके तहत आगामी दिनों में राज्यों में 162 ऑक्सीजन प्लांट की स्थापना की जाएगी। भारत सरकार द्वारा 162 पीएसए ऑक्सीजन प्लांट स्वीकृत किए गए हैं, जिसमें से 33 प्लांट पहले ही स्थापित हो चुके हैं। इसमें 5 मध्य प्रदेश में, 4 हिमाचल प्रदेश में, चंडीगढ़, गुजरात और उत्तराखंड में 3-3, बिहार, कर्नाटक और तेलंगाना में 2-2 और आंध्र प्रदेश, छत्तीसगढ़, दिल्ली, हरियाणा, केरल, महाराष्ट्र, पुदुचेरी, पंजाब और उत्तर प्रदेश में एक-एक प्लांट बनाया गया है।

ज्ञात हो कि, महाराष्ट्र में कोरोना का कहर जारी है। राज्य में हर रोज कोरोना के नए मामले रिकॉर्ड तोड़ रहे हैं। बीते 24 घंटे में राज्य में कोरोना के 67,160 नए केस सामने आए। इस दौरान 676 लोगों की जान चली गई। राज्य में अब कोरोना के 6,94,480 एक्टिव केस हो गए हैं। वहीं मुंबई में पिछले 24 घंटों में कोरोना के 5,888 नए मामले सामने आए हैं।

वहीं, देश की राजधानी दिल्‍ली में भी ऑक्सीजन की कमी के कारण लोग अस्पतालों में दम तोड़ रहे हैं। महाराष्ट्र की तरह दिल्ली सरकार ने भी वही लापरवाही की है, जिसकी सजा आज निर्दोष लोग भुगत रहे हैं। दरअसल, कोरोना महामारी के संकट के बीच रविवार (25 अप्रैल 2021) को दिल्‍ली के मुख्‍यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने केंद्र सरकार पर कम ऑक्‍सीजन आवंटित करने वाला आरोप लगाया है।

केजरीवाल ने कहा, “दिल्ली में 700 टन ऑक्सीजन की जरूरत है, हमें केंद्र सरकार से 480 टन ऑक्सीजन आवंटित हुआ है और कल केंद्र सरकार ने 10 टन और आवंटित किया, अब तक दिल्ली को कुल 490 टन ऑक्सीजन आवंटित हुआ है, लेकिन ये पूरा आवंटन भी दिल्ली में नहीं आ रहा है। शनिवार को केवल 330-335 टन ऑक्सीजन ही दिल्ली पहुँची है।”

लेकिन सच्चाई इससे इतर है। मालूम हो कि दिल्ली में केजरीवाल सरकार को 8 ऑक्सीजन प्लांट लगाने थे, जिसमें से सिर्फ एक ही लगाया गया है, जिसके चलते राजधानी में बेकाबू कोरोना की रफ़्तार बढ़ती ही जा रही है। वे अपनी गलती मानने की बजाय केंद्र पर अपनी नाकामियों का ठीकरा फोड़ रहे हैं।

 

बता दें कि दिल्ली में शनिवार को बीते 24 घंटे में कोरोना के 24,103 नए मामले सामने आए। चिंता की बात ये है कि यहाँ ही दिन में रिकॉर्ड 357 मौतें हुईं। ये अब तक का सबसे बड़ा आँकड़ा है। इतना ही नहीं, दिल्ली में पॉजिटिविटी रेट भी बढ़कर 32.27% हो गया है।

UP में 18+ वालों के लिए कोरोना वैक्सीन है FREE: CM योगी ने 1 करोड़ डोज का दिया ऑर्डर

1 मई से भारत में 18 वर्ष से अधिक की आयु के सभी वयस्कों को कोरोना वायरस का टीका लगाया जाएगा। इसका उद्देश्य है देश में अधिक से अधिक लोगों को टीके की खुराक देना। इसी क्रम में उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने जानकारी दी कि राज्य सरकार ने 1 मई से प्रारंभ हो रहे टीकाकरण के लिए 1 करोड़ वैक्सीन का ऑर्डर दिया गया है। इसके अलावा भारत सरकार द्वारा भी वैक्सीन की खुराक उपलब्ध कराई जाएगी।

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने ट्वीट करके यह जानकारी दी कि आगामी 1 मई से होने वाले टीकाकरण के लिए 1 करोड़ वैक्सीन के ऑर्डर भारत बायोटेक और सीरम इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया (एसआईआई) को दे दिए गए हैं। राज्य की योगी सरकार ने कोविशील्ड की 50 लाख खुराक और कोवैक्सीन की 50 लाख खुराक का ऑर्डर दोनों ही कंपनियों को दिया है। उन्होंने यह भी बताया कि वैक्सीन की इन खुराकों के अतिरिक्त भारत सरकार द्वारा भी डोज उपलब्ध कराए जाएँगे।

आपको बता दें कि उत्तर प्रदेश सरकार ने राज्य में 18 वर्ष से अधिक आयु के लोगों को मुफ्त में वैक्सीन उपलब्ध कराने का निर्णय लिया है। मुफ्त टीकाकरण की जानकारी देते हुए मुख्यमंत्री आदित्यनाथ ने कहा था, “प्यारे प्रदेशवासियों, आज मंत्रिपरिषद की बैठक में यह निर्णय लिया गया है कि उत्तर प्रदेश में 18 वर्ष से अधिक आयु के सभी प्रदेशवासियों का कोरोना टीकाकरण उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा निःशुल्क कराया जाएगा।“

इसके अलावा उत्तर प्रदेश की योगी सरकार राज्य में ऑक्सीजन की आपूर्ति को निर्बाध बनाए रखने और दवाईयों की उपलब्धता को सुनिश्चित बनाए रखने के लिए लगातार प्रयासरत है। प्रदेश में ‘ऑक्सीजन मॉनिटरिंग सिस्टम‘ शुरू हो चुका है, जिसके तहत पूरे राज्य में ऑक्सीजन आपूर्ति की लाइव मॉनिटरिंग 24 घंटे होगी।

‘बांग्लादेश को बनाएँगे तालिबान स्टेट’: हिफाजत-ए-इस्लाम के गिरफ्तार कट्टरपंथी नेताओं से हुआ खुलासा

बांग्लादेश के कट्टरपंथी इस्लामिक संगठन हिफाजत-ए-इस्लाम के नेता मैनुउल हक और अन्य नेताओं ने स्वीकार किया है कि वो सत्ता में आने के बाद बांग्लादेश को अफगानिस्तान की तरह एक तालिबान स्टेट में बदल देना चाहते हैं।

हक को पिछले हफ्ते ही ढाका पुलिस ने हिंसा भड़काने, हत्या के प्रयास और हमला करके तोड़फोड़ करने के आरोप में गिरफ्तार किया है। हक ने अन्य नेताओं के साथ मिलकर एक संगठन ‘रैबेतातुल वैजिन बांग्लादेश’ बनाया था जिसका उद्देश्य है सरकार को सत्ता से हटा कर तालिबान स्टेट स्थापित करना।  

इस्लामिक शक्तियों, कट्टरपंथी इस्लामिक संगठनों जैसे हिफाजत-ए-इस्लाम और जमात-ए-इस्लामी से फंड लेने वाले हक के संगठन द्वारा ‘वाज़ महफ़िल’ का आयोजन किया जाता रहा है जिनके माध्यम से इस्लाम के प्रचार-प्रसार के नाम पर उग्रवाद को बढ़ावा दिया जाता रहा है। हक और उसका संगठन पाकिस्तान से भी उग्रवादी नेताओं को वक्ता के तौर पर बुलाता रहता है।

गिरफ्तार किए गए कई नेताओं ने बताया कि वो मदरसा के छात्रों का उपयोग सरकारी संपत्ति को नष्ट करने में करते हैं। उनके अनुसार हिफाजत-ए-इस्लाम ही वह प्रभावशाली मंच है जो बांग्लादेश में आवामी लीग को सत्ता से बेदखल कर सकता है।

मैनुउल हक के अलावा हिफाजत-ए-इस्लाम और जमात-ए-इस्लामी के 14 अन्य नेता गिरफ्तार किए गए हैं। इन सभी को पिछले कई सालों में और इस साल मार्च में हुई हिंसाओं के आरोप में गिरफ्तार किया गया है। कुरान और हदीस की जानकारी रखने वाले अधिकारियों की तीन जाँच टीमें बनाई गई हैं जो इन नेताओं से पूछताछ कर सकें।

इन कट्टरपंथी इस्लामिक नेताओं द्वारा 2013 में और अब इसी साल मार्च में बांग्लादेश की शेख हसीना की सरकार के विरुद्ध षड्यंत्र करने का काम किया था। यही जानकारी ढाका मेट्रोपॉलिटन पुलिस की जासूसी शाखा के संयुक्त आयुक्त महबूब आलम ने भी न्यूज एजेंसी IANS को दी।  

मैनुउल हक की गिरफ्तारी :

हिरासत में लिया गया मैनुउल हक कट्टरपंथी इस्लामिक संगठन हिफाजत-ए-इस्लाम का संयुक्त सचिव है। हक पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की बांग्लादेश यात्रा के दौरान हिन्दू विरोधी हिंसा भड़काने का आरोप है।

26-28 मार्च के दौरान बांग्लादेश में हुई हिंसा में शामिल लगभग 300 लोगों की गिरफ्तारी हो चुकी है। हिफाजत-ए-इस्लाम जुनैद बाबूनगरी ने एक वीडियो संदेश जारी करके मैनुउल हक और हिफाजत-ए-इस्लाम के सचिव अजीजुल हक समेत दूसरे मजहबी नेताओं की बिना शर्त रिहाई की माँग की है।

अमृतसर में ऑक्सीजन की कमी से मरे 6 मरीज: पंजाब की कॉन्ग्रेसी सरकार ने प्राइवेट अस्पताल को जिम्मेदार ठहरा पल्ला झाड़ा

पंजाब के अमृतसर में शनिवार को ऑक्सीजन की कमी की वजह से कोविड-19 से पीड़ित छह गंभीर रूप से बीमार लोगों की मौत हो गई। अब अस्पताल प्रशासन ने इस बात का दोष जिला प्रशासन पर ये कहते हुए मढ़ा है कि उसने ऑक्सीजन की आपूर्ति के लिए सरकारी अस्पतालों को तरजीह दी।

जिस नीलकंठ अस्पताल में मरीजों की मौत हुई, वहाँ के मैनेजिंग डायरेक्टर सुनील देवगन ने कहा कि जिला प्रशासन ने सप्लायरों से ऑक्सीजन सिलेंडेरों को जिला अस्पतालों के लिए खरीदा था। प्राइवेट अस्पतालों में (ऑक्सीजन) की कमी के लिए यही जिम्मेदार है।

देवगन ने कहा कि परिवारों को ऑक्सजीन की कमी के बारे में सूचित किया गया था और उन्हें किसी और अस्पताल में शिफ्ट किए जाने का विकल्प दिया गया था।

देवगन ने बताया कि मरीजों की मौत के बावजूद अस्पताल को केवल पाँच सिलेंडरों की सप्लाई की गई। अस्पताल के चेयरमैन ने दावा किया कि तीन मुख्य ऑक्सीजन आपूर्तिकर्ताओं ने बताया था कि सरकारी अस्पतालों को प्राथमिकता दी जा रही है।

देवगन ने आरोप लगाया, ”प्राइवेट अस्पतालों को ऑक्सीजन सप्लाई से रोकने के लिए ऑक्सीजन इकाइयों के बाहर भारी पुलिस बल तैनात किए गए हैं।”

पंजाब सरकार ने प्राइवेट अस्पताल पर लगाया आरोप

इन दावों को खारिज करते हुए एक आधिकारिक प्रवक्ता ने दावा किया कि बिना किसी पूर्वाग्रह के निजी अस्पतालों को ऑक्सीजन की आपूर्ति की जा रही है और शुक्रवार रात को सरकारी अस्पताल ऑक्सीजन की कमी से जूझ रहे थे।

पंजाब के मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह ने अमृतसर के डेप्युटी कमिश्नर (डीसी) को इस मामले में जाँच शुरू करने को कहा है। अस्पताल अथॉरिटी को फटकार लगाते हुए उन्होंने आरोप लगाया कि प्रथम दृष्टया लगता है कि अस्पताल ने सभी प्राइवेट अस्पतालों को दिए गए आदेश का उल्लंघन किया है, जिसमें ऑक्सीजन की कमी होने पर मरीजों को सरकारी मेडिकल कॉलेजों में शिफ्ट करने को कहा गया था।

अमृतसर के डेप्युटी कमिश्नर गुरप्रीत सिंह खैरा ने भी अस्पताल को सही समय पर कदम न उठाने का जिम्मेदार ठहराया। शुक्रवार को प्राइवेट अस्पतालों के साथ हुई बैठक में नीलकंठ अस्पताल द्वारा ऑक्सीजन की कमी की घोषणा पर प्रतिक्रिया देते हुए खैरा ने कहा, ”हमने प्राइवेट अस्पतालों से कहा था कि अगर उनके पास ऑक्सीजन की कमी है तो वे किसी भी गंभीर हालत वाले मरीज को या उन मरीजों को न भर्ती करें, जिन्हें ऑक्सीजन की जरूरत है क्योंकि हम जीएमसीएच (सरकारी मेडिकल कॉलेज अस्पतालों) के लिए केवल कुछ सिलिंडरों की व्यवस्था कर सकते हैं, जहाँ ज्यादा मरीज भर्ती हैं।”

उन्होंने आरोप लगाया, ”(ऑक्सीजन) सिलेंडरों की आवश्यक संख्या की व्यवस्था के लिए निजी अस्पताल जिम्मेदार हैं। अगर नीलकंठ अस्पताल के पास सप्लाई की कमी थी, तो उन्हें मरीजों को दूसरे अस्पतालों में रेफर करना चाहिए था।”

पंजाब के मंत्री ओपी सैनी ने भी एक मीडिया संबोधन में आरोप लगाया, ”अमृतसर के नीलकंठ अस्पताल अथॉरिटी को ऑक्सीजन कमी का मामला प्रशासन के संज्ञान में लाना चाहिए था।”

एक आधिकारिक प्रवक्ता ने कहा, ”डीसी ने दो सदस्यीय समिति का गठन किया है, जिसमें पीसीएस ऑफिसर, डॉ. रजत ओबेरॉय, जोकि मृत्यु विश्लेषण समिति के भी प्रमुख हैं, और अमृतसर के एक सिविल सर्जन शामिल हैं।”

अमृतसर के सिविल सर्जन चरनजीत सिंह ने भी मामले की जाँच का भरोसा का दिलाते हुए कहा कि भविष्य में ऐसी घटनाओं को नहीं होने दिया जाएगा।

पुरुषों की तुलना में महिलाएँ कोरोना से लड़ने में ज्यादा मजबूत: महाराष्ट्र के सीरो सर्वे में खुलासा

कोरोना महामारी से जूझ रही मुंबई की बृहन्मुंबई महानगर पालिका (बीएमसी) ने शनिवार (24 अप्रैल, 2021) को तीसरी सीरो सर्वे रिपोर्ट जारी की। सीरो सर्वे में खुलासा हुआ है कि महिलाओं में पुरुषों की तुलना में कोरोना से लड़ने के लिए ज्यादा एंटीबॉडी हैं।

रिपोर्ट्स के मुताबिक, पुरुषों में 35.02 प्रतिशत और महिलाओं में 37.12 प्रतिशत एंटीबॉडी पाई गई हैं। इस सर्वे में झुग्गी बस्तियों में रहने वालों में 41.6 प्रतिशत एंटीबॉडी मिली हैं। सीरो सर्वे में कुल 24 वार्ड से 10,197 लोग की जाँच की गई, जिसमें 36.30 प्रतिशत लोगों में एंटीबॉडी विकसित हुई है।

बीएमसी ने पिछले साल जुलाई में पहला और अगस्त में दूसरा सीरो सर्वे कराया था। इसके बाद मार्च 2021 में सभी 24 वार्डों में तीसरा सीरो सर्वे कराया गया। बीएमसी की ओर से जारी बयान में कहा गया है कि इस बार उन लोगों का सीरो सर्वे किया गया है, जिन्होंने अभी तक कोरोना का टीका नहीं लगवाया है। 

झुग्गी बस्तियों में 41.6 फीसदी एंटीबॉडी मिली

बताया जा रहा है कि सैंपलों की जाँच बीएमसी के कस्तूरबा अस्पताल की मॉलिक्यूलर बायोलॉजी लैबोरेटरी में कराई गई है। इस सर्वे में झुग्गी बस्तियों में 41.6 प्रतिशत एंटीबॉडी मिली है, जबकि जुलाई में हुए पहले सर्वे में इन बस्तियों में 57 प्रतिशत और अगस्त में हुए दूसरे सीरो सर्वे में 45 प्रतिशत एंटीबॉडी पाई गई थी। तीसरे सीरो सर्वे में पॉश इलाकों में रहने वालों में 28.5 प्रतिशत एंटीबॉडी पाई गई है।

मालूम हो कि कोरोना की दूसरी लहर में मुंबई में 90 फीसदी कोरोना संक्रमित हाउसिंग सोसायटी में मिल रहे हैं। इससे पता चलता है कि पिछले सर्वे की तुलना में इस बार हाउसिंग सोसायटियों में रहने वालों लोगों की रोग प्रतिकारक क्षमता में वृद्धि हुई है। तीसरे सीरो सर्वे में बिल्डिगों में रहने वालों में 28.5 फीसदी एंटीबॉडी पाई गई है। पहले हुए पहले सर्वे में इन लोगों में 28 फीसदी और दूसरे सर्वे में 18 फीसदी एंटीबॉडी पाई गई थी।

महाराष्ट्र में लगातार आ रहे सबसे ज्यादा केस

महाराष्ट्र में शनिवार को कोरोना के 67,160 नए मामले सामने आए थे। इसके अलावा 676 लोगों की मौतें दर्ज की गईं। राज्य में कोरोना से मृत्यु दर 1.51 प्रतिशत है, जबकि मौजूदा समय में 41,87,675 लोग होम क्वारंटाइन हैं। इसके अलावा 29,246 लोग इंस्टीट्यूशनल क्वारंटाइन में हैं। यहाँ सक्रिय मामलों की संख्या 6,94,480 है। इसके बाद दिल्ली दूसरे नंबर पर है, जहाँ कोरोना से शनिवार को सबसे अधिक 348 मरीजों की जान गई है।

5 घंटे में 6 चैनलों पर 17 बार केजरीवाल का चेहरा… 150 करोड़ के विज्ञापन से नहीं छुप पाया दिल्ली में मौत का खेल

दिल्ली में कोरोना का कहर चरम पर है। कोविड-19 वैसे तो महामारी है लेकिन इस पर अंकुश लगाने के लिए राज्य प्रशासन को जिस राजनीतिक इच्छाशक्ति के साथ जमीन पर काम करना था, उसमें दिल्ली की AAP सरकार एकदम फिसड्डी रही है।

कोविड-19 महामारी के बीच दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने एक काम लेकिन बखूबी किया है – अपना चेहरा चमकाना – विज्ञापनों के जरिए!

25 अप्रैल 2021 की बात करें तो सिर्फ एक चैनल इंडिया टुडे पर ही केजरीवाल लगातार बैटिंग करते जा रहे हैं – एकदम नॉटआउट। सुबह 9 बजकर 56 मिनट से उनकी बैटिंग 2 बजकर 51 मिनट तक चली है – विज्ञापन के जरिए नाबाद!

इसके अलावा न्यूज नेशन, TV9 भारतवर्ष, इंडिया TV, रिपब्लिक भारत और न्यूज 24 पर भी CM केजरीवाल का विज्ञापन बराबर आया।

धरने-प्रदर्शन करने वाले केजरीवाल अब दिल्ली के CM अरविंद केजरीवाल बन चुके हैं। लेकिन धरने-प्रदर्शन के कारण TV मीडिया के चेहरे वाले छवि से अभी तक वो निकल नहीं पाए हैं – ऐसा प्रतीत होता है। यह इसलिए क्योंकि और कोई कारण नहीं, जब पूरी दिल्ली में ऑक्सीजन हाहाकार मचा हुआ है, तब केजरीवाल TV पर विज्ञापनों के जरिए नजर आ रहे हैं।

सोशल मीडिया पर उनका यह विज्ञापनी रूप लोगों को पसंद नहीं आ रहा है। मीम के जरिए लोग दिल्ली की जनता (वोटरों को) धृतराष्ट्र तक की संज्ञा दे रहे हैं। जबकि कुछ तो उनके पिछले 20 दिन की कुंडली निकाल कर फोटो/ग्राफिक्स बना कर फैला रहे हैं, सच्चाई बता रहे हैं।

CM केजरीवाल ने 3 महीने में विज्ञापनों पर लुटाए ₹150 करोड़

RTI से पता चला है कि जनवरी 2021 में केजरीवाल सरकार द्वारा विज्ञापनों पर 32.52 करोड़ रुपए, फरवरी में 25.33 करोड़ रुपए और मार्च में 92.48 करोड़ रुपए खर्च किए गए थे। ऐसे हालात में जब कोरोना की दूसरी लहर से राष्ट्रीय राजधानी की स्वास्थ्य सेवाएँ चरमरा रही हैं, केजरीवाल सरकार ने औसतन हर दिन 1.67 करोड़ रुपए विज्ञापन पर खर्च किए हैं।

8 ऑक्सीजन प्लांट के लिए लिया पैसा, बनवाया मात्र 1

केन्द्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय के रिकॉर्ड को देखें तो केंद्र सरकार ने पीएम केयर्स फंड से दिसंबर 2020 में ही केजरीवाल सरकार को ऑक्सीजन के लिए राशि मुहैया कराई थी। केंद्र सरकार द्वारा यह राशि दिल्ली में 8 PSA (Pressure Swing Absorption) ऑक्सीजन प्लांट स्थापित करने के लिए दी गई थी। केजरीवाल सरकार पैसा तो ले लिया लेकिन अब तक मात्र 1 ही ऑक्सीजन प्लांट स्थापित किया।

‘फाँसी पर चढ़ा देंगे’ – केजरीवाल सरकार की निष्क्रियता पर दिल्ली HC

दिल्ली स्थित जयपुर गोल्डन हॉस्पिटल ने दिल्ली में ऑक्सीजन की कमी को लेकर दिल्ली उच्च न्यायालय में याचिका दाखिल की थी। वरिष्ठ वकील सचिन दत्ता ने दिल्ली की केजरीवाल सरकार की अक्षमता पर प्रश्न उठाते हुए कहा कि दिल्ली सरकार के अधिकारी उस समय नदारद रहे, जब अस्पताल में मरीज ऑक्सीजन की कमी से मरते रहे। उन्होंने बताया कि शुक्रवार (23 अप्रैल) को पूरा दिन दिल्ली सरकार के अधिकारियों से संपर्क करने का प्रयत्न किया लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हुई।

इस जानकारी के बाद दिल्ली हाई कोर्ट के जज ने कहा – “कोई भी अधिकारी ऑक्सीजन की आपूर्ति में बाधा डालेगा तो हम फाँसी पर चढ़ा देंगे।”

PM CARES फंड से देशभर में स्थापित किए जाएँगे 551 PSA ऑक्सीजन जेनरेशन प्लांट: गृहमंत्री अमित शाह ने दी सूचना

देशभर में कोरोना वायरस की दूसरी लहर के कहर के बीच हो रही ऑक्सीजन की किल्लत से निपटने के केंद्र सरकार ने बड़ा कदम उठाया है। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने कोरोनो वायरस महामारी के बीच ऑक्सीजन की निर्बाध आपूर्ति को सुगम बनाने के लिए 551 पीएएसए प्लांट लगाने की घोषणा की।

गृह मंत्री ने ऑक्सीजन जेनरेशन प्लांट लगाने के बड़े फैसले की घोषणा करते हुए ट्वीट किया, “ऑक्सीजन संकट पर अंकुश लगाने और लोगों की मदद करने को लेकर बड़ा फैसला। मैं पीएम केयर के माध्यम से देश भर में सार्वजनिक स्वास्थ्य सुविधाओं में 551 पीएसए ऑक्सीजन जेनरेशन प्लांट स्थापित करने के लिए धन आवंटित करने के लिए पीएम नरेंद्र मोदी जी को धन्यवाद देता हूँ।”

प्रधानमंत्री कार्यालय द्वारा जारी प्रेस विज्ञप्ति के अनुसार, पीएम CARES फंड के तहत देशभर में 551 PSA मेडिकल ऑक्सीजन जेनरेशन प्लांट स्थापित करने के लिए सैद्धांतिक मंजूरी दे दी गई है।

ये ऑक्सीजन जेनरेशन प्लांट देशभर के जिला मुख्यालयों में स्थित सरकारी अस्पतालों में स्थापित किए जाएँगे। अस्पतालों में ऑक्सीजन की निर्बाध आपूर्ति सुनिश्चित करने के लिए इन प्लांट्स को चालू करने के लिए तेजी से कार्रवाई की जा रही है। इसकी खरीद स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय के अधीन की जाएगी।

इन-हाउस कैप्टिव ऑक्सीजन जेनरेशन फैसिलिटी जिले और अस्पतालों के मेडिकल ऑक्सीजन की डेली जरूरतों को पूरा करेगा। इसके अलावा, लिक्विड ऑक्सीजन (LMO) कैप्टिव ऑक्सीजन बनाने के लिए “टॉप अप” के रूप में काम करेगा।

ऑक्सीजन की माँग और आपूर्ति के अंतर को कम करने के लिए इससे पहले उठाए गए कदमों के बारे में जानकारी देते हुए, विज्ञप्ति में कहा गया है, “पीएम केयर्स फंड के अंतर्गत इसी साल देशभर के जन स्वास्थ्य विभागों में पीएसए मेडिकल जेनरेशन प्लांट की स्थापना के लिए केंद्र सरकार द्वारा 201.58 करोड़ रुपए का फंड जारी किया गया था।”

उसके अलावा अब 551 पीएसए ऑक्सीजन प्लांट सार्वजनिक स्वास्थ्य प्रणाली को और मजबूत करेंगे।

‘मरो हिन्दुओं! मोदी, संघ, समर्थकों के लिए दर्दनाक मौत की दुआ’: वो लोग जो कोरोना काल में भी कर रहे नफरत की खेती

भारत में कोरोनावायरस के संक्रमण की दूसरी लहर सारे रिकॉर्ड तोड़ रही है। पिछले कई दिनों से लगातार रोजाना 3 लाख से अधिक संक्रमित मरीज मिल रहे हैं। राज्यों की स्वास्थ्य सुविधाओं पर भारी दबाव आ रहा है। ऐसे में देश के सभी नागरिक अपने स्तर पर लोगों की सहायता कर रहे हैं। कोई सोशल मीडिया के माध्यम से तो कोई जमीनी स्तर पर, अपनी जान जोखिम में डाल कर। लेकिन इस संकट की घड़ी में भी कुछ ऐसे लोग हैं जो पीएम मोदी और आरएसएस के लोगों की मौत की प्रार्थना कर रहे हैं।

अपने को भरतीय टेलीविजन की अभिनेत्री कहने वाली और एक्टिविस्ट मोना अम्बेगाँवकर ने आरएसएस के सदस्यों, संघ के समर्थकों और चौकीदार (पीएम मोदी ने 2019 के लोकसभा चुनावों के दौरान खुद को जनता चौकीदार बताया था) के लिए एक दर्दनाक मौत की इच्छा जाहिर की है। मोना ने लिखा, “मैं अब इस ‘नीच आदमी’ को और श्राप नहीं दे सकती। मैं खुद को इन संघी गुंडों के समर्थकों, उनके अम्ब्रेला संगठन (आरएसएस) और चौकीदार-तड़ीपार जोड़ी के लिए एक दर्दनाक मौत की दुआ माँगने से नहीं रोक पा रही हूँ। जिन ‘a—holes’ हिंदुओं ने इन्हें वोट दिया है, अब मरो।“

मोना अम्बेगाँवकर के ट्वीट का स्क्रीनशॉट

एक और ट्विटर यूजर ने अपनी बेहद आपत्तिजनक भाषा का प्रयोग करते हुए लिखा, “मोदी और उसके संघी प्रेमियों की मौत की दुआ करना पूरी तरह से जायज है।“

ट्वीट का स्क्रीनशॉट

F#@kBJP नाम के इस ट्विटर हैन्डल से लगातार पीएम मोदी के लिए आपत्तिजनक बातें कही गईं और लगातार कानूनी व्यवस्था और शासन के विरुद्ध लोगों को उकसाने का कार्य किया गया। इस ट्विटर हैन्डल से कहा गया कि मोदी किसी अगले जन्म में सजा नहीं भुगतेगा। यह सत्ता में रहने वालों की बनाई हुई एक कल्पना है जिससे आम आदमी शासकों के महलों को न जलाएँ। इसने कहा, “हमें गुस्सा दिखाना चाहिए और और हमारा गुस्सा ऐसा हो कि ये डर से काँप जाएँ। हम किसी कर्म के न्याय की प्रतीक्षा में बैठे नहीं रह सकते हैं।”  

ट्वीट का स्क्रीनशॉट

@rtrRavirao नाम के ट्विटर हैन्डल से कहा गया कि मौत इनके लिए कम है। इनके लिए एक भयानक दर्द और कष्ट की दुआ की जानी चाहिए।

@rtrRavirao नाम के ट्विटर यूजर के ट्वीट का स्क्रीनशॉट

हालाँकि, यह सब जिस आरएसएस या भाजपा के सदस्यों की मौत की दुआ कर रहे हैं वही जमीनी स्तर पर लोगों की सहायता कर रहे हैं। ये वहीं विचार हैं जिनके कारण पश्चिम बंगाल और केरल में कितने ही आरएसएस के सदस्यों और भाजपा कार्यकर्ताओं की हत्याएँ हुईं।

राजनैतिक और सामाजिक द्वेष लोगों को इतना अंधा कर देता है कि वो एक लोकतान्त्रिक तरीके से चुने गए प्रधानमंत्री के लिए भी सार्वजनिक मंचों पर मौत की दुआ माँग रहे हैं। हालाँकि, ये वामपंथी-कॉन्ग्रेसी गिरोह पहली बार नहीं कर रहा है इससे पहले भी चाहे किसान आंदोलन हो या कोई और मंच कई बार ये लोग अपनी ऐसी मंसा जाहिर कर चुके हैं।