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बेटी के साथ रेप का बदला? पीड़ित पिता ने एक ही परिवार के 6 लोगों की लाश बिछा दी, 6 महीने के बच्चे को भी नहीं छोड़ा

फिल्मों में तो आपने रेप का बदला लेते कई किरदारों को देखा होगा। आंध्र प्रदेश के विशाखापत्तनम में असल जीवन में भी एक व्यक्ति ने कुछ ऐसा ही कर डाला। एक पिता के दिल में बेटी के साथ बलात्कार के बदले की आग इस तरह जल रही थी, कि उसने एक के बाद एक 6 लाशें बिछा दीं। सभी मृतक एक ही परिवार के हैं। इस परिवार के एक सदस्य ने कातिल की बेटी के साथ रेप किया था।

विशाखापत्तनम के जाट्टादा गाँव में गुरुवार (अप्रैल 15, 2021) को हुई इस घटना के बाद इलाके में सनसनी फ़ैल गई है और पुलिस तक के हाथ-पाँव फूल गए। पुलिस-प्रशासन भौंचक है कि इतना बड़ा कांड हुआ कैसे। पुलिस इस मामले की जाँच कर रही है। जिस व्यक्ति ने रेप किया था, वो अभी भी फरार है और उसे पुलिस पकड़ नहीं सकी है। पुलिस ने दोनों परिवारों के बीच पुरानी दुश्मनी होने की बात कही है।

इस घटना की जानकारी मिलते ही न सिर्फ पुलिस मौके पर पहुँची, बल्कि वहाँ ग्रामीणों की भारी भीड़ भी जमा हो गई। पुलिस ने हत्या आरोपित को हिरासत में ले लिया है और उससे पूछताछ की जा रही है। साथ ही इस सामूहिक हत्याकांड में प्रयुक्त हथियार भी बरामद करने में पुलिस को सफलता मिली है। मृतकों में 2 महिलाएँ, 2 बच्चे और 1 पुरुष शामिल हैं। रेप आरोपित की भी तलाश की जा रही है।

बच्चों में एक 2 साल का और एक मात्र 6 महीने का था। हत्या आरोपित की पहचान अप्पलराजू के रूप में हुई है। दोनों परिवार आस-पड़ोस में ही रहते थे। विशाखापत्तनम के ACP वी श्रीपद राव ने बताया कि ये हत्याएँ सुबह 6 बजे की गईं। पेंडुर्थी मंडल के जाट्टादा गाँव में मृतकों को अपने घर में खून से लथपथ पाया गया। 2018 से ही दोनों परिवारों में बातचीत बंद थी। रेप आरोपित की पहचान विजय के रूप में हुई है।

मृतकों में उसकी पत्नी, 2 बच्चे, पिता और 2 चाचियाँ हैं। पुलिस इस मामले को शुरुआती जाँच में संपत्ति विवाद का मान कर चल रही है। अगस्त 2020 में इसी इलाके में एक व्यक्ति ने संपत्ति विवाद में अपने बेटे की ही हथौड़े से मार-मार कर हत्या कर दी थी। ‘द हंस इंडिया’ की खबर के अनुसार, इसी परिवार के 4 अन्य लोगों की हत्या मधुरवाड़ा के आदित्य फार्च्यून टॉवर में हुई है। शक है कि हत्या के बाद इसे आत्महत्या का रूप दिया गया।

ESPN की क्रांति, धार्मिक-जातिगत पहचान खत्म: दिल्ली कैपिटल्स और राजस्थान रॉयल्स के मैच की कॉमेंट्री में रिकॉर्ड

15 अप्रैल को ESPN क्रिकइन्फो ने निर्णय लिया कि अब उसके द्वारा क्रिकेट कवरेज और मैच कॉमेंट्री में ‘लैंगिक असमानता’ को बढ़ावा देने वाले शब्दों का उपयोग नहीं किया जाएगा। उदाहरण के लिए ESPN के द्वारा ‘बैट्समैन’ के स्थान पर ‘बैटर’ और ‘मैन ऑफ द मैच’ के स्थान पर ‘प्लेयर ऑफ द मैच’ जैसे शब्दों का उपयोग होगा।

ESPN के इस ‘क्रांतिकारी’ निर्णय के पीछे उद्देश्य है कि क्रिकेट के क्षेत्र में भी ‘लैंगिक समानता’ स्थापित हो। ESPN क्रिकइन्फो के श्रेष्ठ शाह ने अन्य ‘संगठनों’ से यह अपील की है कि वे भी ESPN के साथ क्रांति की राह पर चल निकलें।    

अब प्रश्न यह उठता है कि क्या यह निर्णय कुछ दो-चार शब्दों को बदलने तक ही सीमित रहेगा अथवा यह ‘क्रांति की आग’ पूरे क्रिकेट समाज में व्याप्त असमानतावादी भावों को जला कर राख कर देगी। ऐसे में यह अंदाजा लगाया गया कि ‘बैट्समैन’ को ‘बैटर’ करने और ‘मैन ऑफ द मैच’ को ‘प्लेयर ऑफ द मैच’ करने के अतिरिक्त और क्या-क्या बदलाव संभव हैं जो ESPN इस समाज को उपहार स्वरूप दे सकता है।

दिल्ली कैपिटल्स और राजस्थान रॉयल्स के आज (15 अप्रैल 2021) के मैच के विषय में ESPN क्या बदलाव कर सकता है, इसके विषय में कुछ चर्चा की जा सकती है।

शुरुआत में ही ‘इंडियन प्रीमियर लीग’ के स्थान पर ‘ग्लोबल प्रीमियर लीग’ का उपयोग किया जा सकता है। ऐसा इसलिए क्योंकि आईपीएल में केवल भारतीय खिलाड़ी नहीं खेलते अपितु दुनिया भर के खिलाड़ी खेलते हैं। ‘इंडियन’ शब्द एक्सट्रीम राष्ट्रवाद का परिचायक न बन जाए, इसलिए ‘इंडियन’ शब्द की जगह ‘ग्लोबल’ शब्द का उपयोग ESPN द्वारा किया जाएगा।

ESPN ‘मा फलेषु कदाचन’ पर विश्वास करता है, अतः मैच का परिणाम मायने नहीं रखता। मैच में हर कोई विजेता ही है, भले ही मैच कोई भी जीते किन्तु पॉइंट टेबल में जो भेदभाव होगा, उसके विषय में ESPN की क्या राय है, यह अभी निश्चित नहीं है!  

‘कप्तान’ के स्थान पर ‘जन-प्रतिनिधि’ का उपयोग संभव है क्योंकि ‘कप्तान’ शब्द से ‘अधिनायकवाद’ अथवा ‘स्वघोषित नायकवाद’ की बदबू आती है। ‘कप्तान’ एक ऐसा शब्द लगता है, मानो कि टीम का कप्तान ही सब कुछ है और वर्तमान सरकार की भाँति वह भी निरंकुश हो गया है।

‘टॉस’ को भी बदल दिया जाएगा और कहा जाएगा कि ‘देखते हैं, सिक्का क्या चाहता है?’ भले ही सिक्का एक निर्जीव है लेकिन उसे ऊपर उछालना सही नहीं माना जा सकता है।  

‘जन-प्रतिनिधियों’ का केवल प्रारंभिक नाम ही लिया जाएगा। जैसे ऋषभ, संजू, आजिंक्य इत्यादि। ऐसा इसलिए क्योंकि सरनेम से ‘जातिगत’ और ‘धार्मिक’ पहचान को बढ़ावा मिल सकता है। अच्छा हुआ कि गौतम गंभीर क्रिकेट से रिटायर हो गए अन्यथा उनका तो पहला नाम ही ‘ब्राह्मणवादी’ है और सनातन धर्म के एक ऋषि से जुड़ा हुआ है। ऐसे में ESPN के समक्ष एक महान संकट आ खड़ा होता।  

हालाँकि ESPN के सामने कई और मुद्दे भी हैं। जैसे ‘सिक्का क्या चाहता है’ वाली परंपरा में भी सिक्का ही उपयोग किया जाता है, जो पूंजीवाद का प्रतीक है। उस पर जो ‘जन-प्रतिनिधि’ होता है, वह यदि ‘हेड्स’ कहता है तो इसका तात्पर्य यही हुआ कि वह ‘टेल’ जो कि ‘हेड’ की तुलना में नीचे होता है, उसे नकार रहा है और ‘हेड’ का चयन करके उच्च सत्तात्मक प्रवृत्ति को बढ़ावा दे रहा है। इस पर विचार मंथन किया जा रहा है और शीघ्र ही ‘सिक्का क्या चाहता है’ परंपरा को सकुशल बिना ऊँच-नीच के सम्पूर्ण करने के लिए नए शब्दों का आविष्कार किया जाएगा। 

हालाँकि राजस्थान रॉयल्स के जन-प्रतिनिधि संजू ने सिक्के की इच्छा जानने के लिए उसे यात्रा पर भेजा किन्तु दिल्ली कैपिटल्स के जन-प्रतिनिधि ने हेड्स ही चुना। सिक्के ने भी अपनी पूंजीवादी प्रवृत्ति के अनुसार हेड्स ही चुना। इस प्रकार संजू से पहले बल्लेबाजी करने का अवसर छीन लिया गया और यह अवसर ऋषभ को ही प्राप्त हुआ।

इसके बाद आगे की कॉमेंट्री मैच शुरू के बाद प्रारंभ की जाएगी।  

दिल्ली में वीकेंड कर्फ्यू: शुक्रवार 10 बजे से सोमवार सुबह 6 बजे तक होंगी पाबंदियाँ, जरूरी सेवा से जुड़े लोगों को मिलेगा पास

राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में कोविड-19 के बढ़ते मामलों को देखते हुए आज (अप्रैल 15, 2021) मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल और उपराज्यपाल अनिल बैजल ने बैठक कर कुछ बड़े फैसले लिए। बैठक के बाद सीएम केजरीवाल ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में बताया कि दिल्ली की स्थिति को नियंत्रित करने के लिए शुक्रवार रात 10 बजे से सोमवार सुबह 6 बजे तक के लिए वीकेंड कर्फ्यू लगाया जाएगा। इस दौरान जरूरी सेवाओं से जुड़े लोगों और शादी-विवाह जैसे कार्यक्रमों के लिए लोगों को पास दिए जाएँगे।

समाचार एजेंसी एएनआई के अनुसार, केजरीवाल ने कहा, “दिल्ली सरकार ने वीकेंड कर्फ्यू लगाने का फैसला लिया है। हम जरूरी सेवाओं से जुड़े लोगों और शादियों के लिए लोगों को कर्फ्यू पास देंगे। मॉल, जिम, स्पा, ऑडिटोरियम को बंद करने के निर्देश दिए जा रहे हैं। सिनेमा हॉल 30 प्रतिशत क्षमता पर चल सकते हैं।”

प्रेस कॉन्फ्रेंस में केजरीवाल ने कहा, “दिल्ली में कोरोना वायरस तेजी से बढ़ रहा है। इसके बावजूद अस्पतालों में 5 हजार से ज्यादा बेड खाली हैं। कुछ अस्पतालों के अंदर अगर बेड भर गए हैं और अगर आप किसी खास अस्पताल में जाना हैं तो दिक्कत हो सकती है। बीमार व्यक्ति को को कहीं न कहीं बेड मिलना चाहिए, चाहे वो प्राइवेट हो या सरकारी अस्पताल हो।”

बता दें, इससे पहले कोरोना संक्रमण के बढ़ते मामलों के मद्देनजर दिल्ली सरकार ने यहाँ नाइट कर्फ्यू का ऐलान किया था। सरकार ने कहा था कि नाइट कर्फ्यू दिल्ली में 6 अप्रैल से 30 अप्रैल तक रात 10 बजे से सुबह 5 बजे तक लागू रहेगा।

दिल्ली में 1 दिन में आए कोरोना के 17 हजार मामले

महाराष्ट्र, छत्तीसगढ़ की तरह दिल्ली में भी कोरोना भयावह रूप ले रहा है। बुधवार को यहाँ 17, 282 कोरोना मरीज सामने आए हैं, जबकि 9, 952 ठीक हुए और 104 की मौत हो गई। इन्हीं आँकड़ों के साथ यहाँ कुल मरीजों की संख्या 767438 हो गई है, जिनमें से 705162 ठीक हो गए हैं और 11540 की मौत हो गई है। फिलहाल राजधानी में 50736 सक्रिय मरीज हैं।

बंगाल में कॉन्ग्रेस प्रत्याशी रिजाउल हक की कोरोना से मौत: 1 दिन में 5892 केस, हाईकोर्ट ने DM-SP को दिया आदेश

पश्चिम बंगाल के मुर्शिदाबाद में कोरोना संक्रमण के कारण एक कॉन्ग्रेस प्रत्याशी की मौत हो गई। जिले के समशेरगंज विधानसभा सीट से कॉन्ग्रेस उम्मीदवार रिजाउल हक ने कोलकाता के एक निजी अस्पताल में इलाज के दौरान अपना दम तोड़ा। संक्रमित होने के बाद से रिजाउल का इलाज प्राइवेट अस्पताल में चल रहा था।

राज्य के कॉन्ग्रेस सचिव रोहन मित्रा ने स्वंय पार्टी के प्रत्याशी रिजाउल हक के निधन की जानकारी दी। रोहन ने ट्वीट कर बताया, “मुर्शिदाबाद जिले की समशेरगंज विधानसभा से कॉन्ग्रेस उम्मीदवार रिजाउल हक का निधन कल रात कोरोना की वजह से हो गया! हम जिस वास्तविकता का सामना कर रहे हैं, उसको समझिए, इस साल जिंदा बचिए।”

बता दें कि कोरोना काल में हो रहे बंगाल विधानसभा चुनाव के बीच रिजाउल हक की मौत मतदान के पाँचवे चरण से पहले हुई है। राज्य में लेफ्ट और कॉन्ग्रेस के गठबंधन के बावजूद समशेरगंज सीट पर दोनों आमने-सामने थे। लेफ्ट ने इस क्षेत्र से मोदस्सर हुसैन को टिकट दिया था, वहीं कॉन्ग्रेस ने रिजाउल हक को चुनावी मैदान में उतारा था।

उल्लेखनीय है कि देश के अन्य राज्यों की तरह बंगाल में भी कोरोना संक्रमण तेजी से फैल रहा है। बुधवार को वहाँ 5,892 नए मामले दर्ज किए गए जबकि 24 मौतें भी हुईं।

कोलकाता हाईकोर्ट ने जिलाधिकारियों से राजनीतिक कार्यक्रमों में कोरोना स्थिति पर नजर रखने को कहा है। अदालत ने कहा कि बंगाल में चुनावी कार्यक्रम के दौरान कोरोना नियमों का सख्ती से पालन कराने की जिम्मेदारी जिलाधिकारी और चुनाव अधिकारियों की है, सोशल डिस्टेंसिंग का पालन कराने के लिए धारा 144 भी लागू कर दें।

‘बेड दीजिए, नहीं तो इंजेक्शन देकर उन्हें मार डालिए’: महाराष्ट्र में कोरोना+ पिता को लेकर 3 दिन से भटक रहा बेटा

महाराष्ट्र में कोरोना के कारण स्थिति बेहाल है और राज्य में संक्रमितों की संख्या हर दिन बढ़ती ही जा रही है। 1 मई तक राज्य सरकार पहले ही कर्फ्यू का ऐलान कर चुकी है। अस्पतालों की स्थिति इतनी खराब है कि लोग हैदराबाद जाकर इलाज करा रहे। इन सबके बीच एक व्यक्ति का वीडियो सामने आया है, जिसमें वो अपने कोरोना पॉजिटिव पिता को अस्पताल में भर्ती करने के लिए मिन्नतें कर रहा है।

वीडियो में उक्त व्यक्ति कहता, “या तो मेरे पिता को अस्पताल में बेड दीजिए, नहीं तो उन्हें कोई इंजेक्शन देकर मार डालिए।” उक्त व्यक्ति की पहचान किशोर नाहरशेटीवर के रूप में हुई है। वो मंगलवार (अप्रैल 13, 2021) की दोपहर से ही अपने बीमार पिता का इलाज कराने की मशक्कत कर रहे हैं, लेकिन अस्पताल में बेड नहीं मिल रहा। इसके लिए वो दो राज्यों का चक्कर काट चुके हैं, लेकिन फायदा नहीं हुआ।

किशोर ने पहले तो महाराष्ट्र के अस्पतालों की खाक छानी, फिर पिछले 24 घंटों में तेलंगाना में भी कई अस्पतालों के चक्कर लगाए। उन्होंने वरोड़ा और फिर चंद्रपुर के अस्पताल में प्रयास किया पर उनके पिता का इलाज नहीं हो सका। यहाँ तक कि प्राइवेट अस्पतालों में भी उन्हें अपने पिता के लिए बेड नहीं मिली। वो रात के 1:50 बजे फ्लाइट लेकर तेलंगाना पहुँचे थे, 3 बजे वहाँ पहुँच गए – लेकिन उनका काम नहीं हुआ।

आज सुबह ही वो तेलंगाना से लौटे हैं और महाराष्ट्र में बेड के इंतजाम के लिए अस्पतालों का चक्कर काट रहे हैं। उनके पिता जिस एम्बुलेंस में हैं, उसके भीतर लगा ऑक्सीजन भी अब ख़त्म हो रहा है। उन्होंने कहा कि वो इस तरह से अपने पिता को घर भी लेकर नहीं जा सकते। चंद्रपुर में सोमवार को कोरोना के 850 मामले सामने आए थे। जिले में अब भी 7000 सक्रिय कोरोना मरीज हैं।

महाराष्ट्र के अस्पतालों में न सिर्फ बेड्स, बल्कि वेंटिलेटर्स और ऑक्सीजन की भी भारी कमी है। दवाएँ नहीं मिल रहीं। ऑक्सीजन और मेडिकल सप्लाइज की उपलब्धता के लिए मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे ने भारतीय सेना से मदद के लिए गुहार लगाई है। राज्य में ज़रूरी आवागमन को छोड़ कर बाकी सारी चीजें पहले ही प्रतिबंधित की जा चुकी है। प्रवासी मजदूर वापस लौट रहे हैं।

ट्रेनों और स्टेशनों पर खचाखच भीड़ है। महाराष्ट्र में फ़िलहाल कोरोना के 6,12,070 सक्रिय संक्रमित मरीज हैं। देश के कुल सक्रिय कोरोना संक्रमितों का 41.58% इसी राज्य में है। पिछले 1 दिन में यहाँ 58,992 नए केस सामने आए हैं। पुणे, मुंबई, ठाणे, नागपुर और नासिक क्रमशः राज्य में कोरोना से सबसे ज्यादा प्रभावित जिले हैं। कोरोना महाराष्ट्र में अब तक 58,804 लोगों की जान ले चुका है।

…स्कर्ट वाली का रेप हो जाता: कंपनी ने Pak कर्मचारी को निकाला, कोर्ट ने कहा – ‘मूर्ख है, बर्खास्त मत करो, रख लो’

ब्रिटेन के लंकाशायर में स्काई कंपनी के 44 वर्षीय एक पाकिस्तानी कर्मचारी ने अपनी महिला सहकर्मी को बताया कि अगर यह पाकिस्तान होता तो स्कर्ट पहनने वाली लड़कियों का बलात्कार हो जाता। यह घटना जून 2019 की है, जब लंकाशायर के एक शॉपिंग मॉल से शॉपिंग के बाद दो किशोर लड़कियाँ स्कर्ट पहन कर वहाँ से गुजर रही थीं। उसी दौरान राजा मिन्हास नाम के रिटेल सलाहकार ने किशोरियों पर यह टिप्पणी की।

इस दौरान वह अपनी सहकर्मी क्लेमेट्टी से स्काई कंपनी के प्रोडक्ट को लेकर बातचीत कर रहा था। मिन्हास ने क्लेमेट्टी से ये भी कहा, “सामान्य तौर पर जो लड़कियाँ छोटे स्कर्ट पहनती हैं, उसी के कारण उनका रेप होता है और उसके लिए वही जिम्मेदार होती हैं।”

दोनों के बीच करीब 10-15 मिनट तक गर्मागर्म बहस चली। यह बात कंपनी के बॉस तक पहुँची तो पाकिस्तानी युवक मिन्हास को सामान्य व्यवहार के नियमों का उल्लंघन करने के मामले में उसे नौकरी से बर्खास्त कर दिया गया।

मूल रूप से पाकिस्तान के रहने वाले मिन्हास ने पुलिस को बताया, “मैंने दो लड़कियों को जाते हुए पीछे से देखा था, दोनों लड़कियों को गलत तरीके से कपड़े पहनाए गए थे। आप उनके शरीर की बनावट को उन कपड़ों में देख सकते थे। यदि यह पाकिस्तान होता तो लोग देख रहे होते और यह बलात्कार के लिए एक खुले निमंत्रण की तरह होता।”

मामला कोर्ट में पहुँचा तो रोजगार न्यायाधिकरण के न्यायाधीश रॉबिन्सन ने आरोपित की बर्खास्तगी को अनुचित बताते हुए उसे खारिज कर दिया। कोर्ट ने कहा कि मिन्हास ने क्लेमेट्टी के साथ चर्चा के दौरान सामान्य रूप से लोगों की पोशाक पर मूर्खतापूर्ण टिप्पणी की थी।

कोर्ट ने अपने फैसले में यह भी कहा कि दोनों कर्मचारी एक-दूसरे से बात कर रहे थे। क्लेमेट्टी ने खुद से कोई शिकायत नहीं की थी और न ही कोर्ट को कोई सबूत दिया। जब मामला सामने आया तो उसे विश्वास ही नहीं हुआ कि ये इतना आगे जाएगा। आरोपित को कोर्ट ने दुराचार का दोषी ठहराया है, क्योंकि उससे बातचीत के दौरान क्लेमेट्टी को लगता था कि वो उसके सामने किस तरह के कपड़े पहनकर आए।

कोर्ट का कहना था, “मिन्हास ने कभी भी बलात्कार की घटनाओं की आलोचना नहीं की। यह उसका अपना विचार था कि एक खास तरह का पहनावा पुरुषों के व्यवहार को प्रभावित कर सकता है।”

क्लेमेट्टी ने इस मामले में कहा, “लड़कियों को वही पहनना चाहिए जो उन्हें अच्छा लगे। किसी को भी इस आधार पर बलात्कार के बारे में बात नहीं करनी चाहिए कि कोई क्या पहनता है।”

TMC सांसद महुआ मोइत्रा ने हिंदू नव वर्ष पर शुभकामनाओं को ‘कट्टरता’ से जोड़ा

तृणमूल कॉन्ग्रेस (TMC) की सांसद महुआ मोइत्रा को सेक्युलरिज्म के चक्कर में अब हिंदू नववर्ष भी कट्टरपंथ लगने लगा है। उनके अनुसार बीजेपी द्वारा हिंदू नव वर्ष की शुभकामनाएँ देना ‘कट्टरता’ है।

महुआ मोइत्रा का ट्वीट

चैत्र नवरात्रि के पहले दिन 12 अप्रैल 2021 को हिंदू कैलेंडर के अनुसार नया साल विक्रम संवत 2078 शुरू हुआ। बहुत सारे हिंदू नए साल का जश्न चैत्र महीने में इसकी शुरुआत पर मनाते हैं। ठीक इसी तरह बहुत सारे हिंदू, विशेष रूप से गुजरात में कार्तिक महीने में दिवाली के अगले दिन को नए साल के रूप में मनाते हैं। यही कारण है कि हिंदू धर्म में अलग-अलग समुदाय साल के अलग-अलग दिनों को नए साल के रूप में मनाते हैं। इसके अलावा भारत के विभिन्न हिस्सों में, हिंदू कैलेंडर के महीनों में भी भिन्नता देखने को मिलती है। जबकि देश के कुछ हिस्सों में यह चैत्र है, कुछ में वैशाख से शुरू हो गया है, जो बंगाल, असम और त्रिपुरा में लोगों के लिए नया साल है।

लेकिन, ऐसा प्रतीत होता है कि टीएमसी सांसद महुआ मोइत्रा इस बात से नाखुश थीं कि भाजपा ने हिंदुओं को नए साल की शुभकामनाएँ दी है। इतना ही नहीं वह शुभकामनाओं को ‘रेडिकलाइजेशन’ कह रही हैं।

बंगालियों को लेकर उन्होंने दावा किया कि पश्चिम बंगाल और बांग्लादेश में नए साल की शुभकामनाएँ ‘पोइला बैसाख’ से शुरू होती हैं, न कि ‘हिंदू नव वर्ष‘ से। पश्चिम बंगाल और बांग्लादेश की संस्कृतियाँ एक हैं और बांग्लादेश एक इस्लामिक राष्ट्र है।

महुआ द्वारा हिंदू नववर्ष को कट्टरता से जोड़ने पर सोशल मीडिया पर कई लोगों ने टीएमसी सांसद की क्लास लगा दी।

कुछ ने यह भी बताया कि बांग्लादेश में जो लोग पोइला बैशाख मनाते हैं, वो वास्तव में हिंदू हैं।

कुछ लोगों ने इसे हिंदुत्व को लेकर उनकी अज्ञानता बताई।

हिंदू नव वर्ष का जश्न मनाने वालों को ‘कट्टर’ बताने की कोशिश में किए गए इस ट्वीट से महुआ की हिंदू घृणा दिखती है।

कचरे की गाड़ी में रख कर श्मशान पहुँचाए जा रहे कोरोना संक्रमितों के शव: छत्तीसगढ़ से Video वायरल

कोरोना संक्रमण के बढ़ते कहर ने व्यापक स्तर पर अमानवीयता को जन्म दे दिया है। यही वजह है कि पहले महाराष्ट्र जैसे राज्य में संक्रमितों के शव को कूड़े के बैग में लपेटे देखा गया और अब ऐसी ही दिल दहलाने वाली तस्वीर छत्तीसगढ़ से आई है। ताजा तस्वीरों में देखा जा सकता है संक्रमित मरीजों का शव कूड़े वाली गाड़ी में रख कर दाह संस्कार के लिए श्मशान लाया गया है।

जानकारी के मुताबिक, पूरी घटना राजनंदगाँव की है। वीडियो में देख सकते हैं कि चार कर्मचारी पीपीई किट पहने हुए हैं और कोरोना से संक्रमित मरीज के शव को कूड़े की गाड़ी में से निकाल कर श्मशान घाट पर उतार रहे हैं।

घटना की वीडियो वायरल होने के बाद जब इस पूरे मामले पर मुख्य चिकित्सा स्वास्थ्य अधिकारी (सीएमएचओ) से पूछा गया तो उन्होंने कहा कि शव वाहन की व्यवस्था करने की जिम्मेदारी नगर पंचायत और मुख्य चिकित्सा अधिकारी (सीएमओ) की होती है।

वहीं राजनंदगाँव प्रेस क्लब के निदेशक अजय सोनी ने कहा कि कोरोना वायरस के बढ़ते मामलों और बेड की कमी से निपटने के लिए, राजनंदगाँव प्रेस क्लब को कोविड केंद्र में तब्दील किया गया है। यहाँ असिम्प्टोमेटिक मरीजों का मुफ्त इलाज चल रहा है। मरीजों के लिए 30 बेड की व्यवस्था की गई है। उनकी देखभाल के लिए प्रेस क्लब में स्वास्थ्यकर्मी भी हर समय उपस्थित रहेंगे।

बता दें कि कोरोना कहर की तेज रफ्तार के बीच छत्तीसगढ़ भी उन राज्यों में से एक है, जहाँ संक्रमितों की संख्या लगातार बढ़ रही है। ताजा आँकड़ों के मुताबिक इस समय वहाँ 1 लाख से ज्यादा एक्टिव केस हैं। बुधवार को भी राज्य में 14 हजार केस दर्ज किए गए, जबकि 120 लोगों ने अपनी जान गँवाई। इसके साथ राज्य में कुल कोरोना संक्रमितों की संख्या 4 लाख 86 हजार पार कर गई है। मरने वाले भी 5000 से ज्यादा हैं। 

राज्य में प्रशासन की लापरवाही और स्वास्थ्य सुविधाओं की हकीकत उजागर करते हुए पिछले दिनों एक और वीडियो रायपुर के अस्पताल से वायरल हुई थी। वीडियो में देखा गया था कि राज्य की राजधानी में स्थित मुख्य सरकारी अस्पताल में कोरोना मरीजों की लाशें भरी पड़ी हैं।

इसके अलावा आईसीयू और ऑक्सीजन उपकण बेड भी फुल हैं। नए कोरोना मरीजों के लिए अस्पताल में बिल्कुल भी जगह नहीं बची है। पिछले सप्ताह अस्पताल की एक वीडियो वायरल हुई थी, जिसमें साफ तौर पर लाशों को इधर-उधर बिखरे हुए दिखाया गया था। रायपुर सरकारी अस्पताल की स्थिति इस वक्त बेहद खराब हो चुकी है।

नम्बी नारायणन मामले में सुप्रीम कोर्ट ने दिया CBI जाँच का आदेश: 27 साल पहले ‘देशद्रोह’ का आरोप लगा तबाह कर दिया था जीवन

सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार (अप्रैल 15, 2021) को केरल के वैज्ञानिक नम्बी नारायणन पर 1994 में लगे देशद्रोह के आरोप और उसके बाद हुई उनकी प्रताड़ना के मामले में CBI जाँच के आदेश दिए हैं। नारायणन ‘भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO)’ के वैज्ञानिक हुआ करते थे। उनका शुरू से मानना रहा है कि इस मामले में पुलिस की साजिश के कारण उन्हें फँसाया गया। वरिष्ठ वैज्ञानिक ने देश की सर्वोच्च न्यायालय के आदेश का स्वागत किया है।

उन्होंने कहा कि वो इस फैसले से खुश हैं, क्योंकि देश को क्रायोजेनिक तकनीक पाने में जो देरी हुई, उसके पीछे एक बहुत बड़ी साजिश थी और इसके तहत ही उन्हें फँसाया गया। तिरुवनंतपुरम में रह रहे नम्बी नारायणन ने कहा कि वो इस मामले में किसी केंद्रीय एजेंसी की जाँच चाहते थे। विदेशी ताकतों के लिए जासूसी का आरोप लगा कर नारायणन को देशद्रोही बताया गया था। इस मामले में गठित हाई लेवल कमिटी ने अपनी रिपोर्ट तैयार की है।

सुप्रीम कोर्ट में केंद्र सरकार ने भी याचिका लगा कर पुलिसकर्मियों द्वारा जाँच में गलती की गुंजाइश से इनकार नहीं किया है। ऐसे में इस मामले में पहले ही निर्दोष करार दिए जा चुके नम्बी नारायणन को राहत मिली है। कोर्ट ने केरल सरकार को पहले ही आदेश दिया था कि वो बतौर मुआवजा उन्हें 50 लाख रुपए सौंपे। केंद्र सरकार ने 5 अप्रैल को इस मामले की त्वरित सुनवाई की अपील की और इसे राष्ट्रीय मुद्दा बताया।

जस्टिस एएम खानविलकर की पीठ ने हाई लेवल कमिटी की रिपोर्ट को स्वीकार किया और CBI को आगे इस मामले की जाँच करने को कहा। इस मामले में मालदीव की दो महिलाओं और भारत के 2 वैज्ञानिकों पर गुप्त दस्तावेजों को विदेश भेजे जाने का आरोप लगा था। सितम्बर 14, 2018 को जाँच पैनल का गठन किया गया था। कोर्ट ने माना था कि नम्बी नारायणन इस दौरान अत्यधिक अवमानना से गुजरे।

इस मामले में असीम प्रताड़ना देने के लिए कोर्ट ने दोषी अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई का निर्देश भी दिया था। न्यायालय ने माना था कि वरिष्ठ वैज्ञानिक की प्रतिष्ठा को ठेस पहुँचाया गया और उनके मानवाधिकार का उल्लंघन हुआ। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि हिरासत में लिए जाने के बाद उन्हें जिस ‘कुटिल घृणा’ का सामना करना पड़ा, उसके लिए केरल के बड़े पुलिस अधिकारी जिम्मेदार थे। अब इस मामले की जाँच CBI करेगी।

इससे कई साल पहले 1996-97 में ही CBI ने पाया था कि इस मामले की जाँच करने वाले केरल पुलिस के अधिकारियों ने ही सारी गड़बड़ी की है। CBI ने उन अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई के लिए भी केरल सरकार को लिखा था। CPI (M) के ईके नायनार तब केरल के मुख्यमंत्री थे। वामपंथी सरकार ने उन अधिकारियों के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं की और सुप्रीम कोर्ट के आदेश के इंतजार का बहाना बनाया। सुप्रीम कोर्ट का जजमेंट आने के बाद भी एक दशक तक कोई कार्रवाई नहीं हुई।

फिरोज खान बाल काटता था… खोल रखा था सलून, महाराष्ट्र पुलिस ने इतना मारा कि मौत हो गई

महाराष्ट्र के औरंगाबाद में कोविड-19 पाबंदियों का उल्लंघन करने पर एक हेयर सैलून मालिक को अपनी जान गँवानी पड़ी। कथित तौर पर दो पुलिसकर्मियों ने बुधवार (अप्रैल 14, 2021) दोपहर उसकी खुली दुकान देखने के बाद उसे इतना प्रताड़ित किया कि उसने अस्पताल पहुँचने से पहले दम तोड़ दिया।

घटना के बाद इलाके में पुलिस की इस हरकत पर बड़े पैमाने पर विरोध होने लगा। नतीजन पुलिस कमिश्नर निखिल गुप्ता को स्वयं मामले पर संज्ञान लेकर दोनों पुलिसकर्मियों का उस्मानपुर पुलिस थाने से कंट्रोल रूम में ट्रांस्फर करना पड़ा। 

दोनों पुलिस वालों की पहचान इंस्पेक्टर दिलीप तारे और सब इंस्पेक्टर प्रवीण वाघ के तौर पर हुई। पुलिस कमिश्नर का कहना है कि उन्होंने घटना पर संज्ञान लेकर निष्पक्ष जाँच शुरू कर दी है। इस जाँच को क्राइम बैच के इंस्पेक्टर अविनाश अघाव हेड करेंगे। अगर जाँच में कोई पुलिसकर्मी या अधिकारी दोषी पाया गया तो उसके विरुद्ध उचित कार्रवाई होगी।

टाइम्स ऑफ इंडिया की रिपोर्ट के अनुसार, हेयर सलून के मालिक का नाम फिरोज खान था। घटना के बाद उनके परिजनों और स्टाफ ने बताया कि दोपहर में सैलून खुला देखने के बाद पुलिस ने फिरोज को बाहर बुलाया, जब वह गए तो पुलिस उन्हें मारने लगी। इस दौरान पूरी घटना सीसीटीवी में भी कैद हुई।

परिजनों के अनुसार, हल्ले-गुल्ले में खान दुकान के शटर पर जा गिरे और उनके सिर पर चोट आ गई। बेहोशी की अवस्था में उन्हें सरकारी अस्पताल ले जाया गया लेकिन वहाँ डॉक्टरों ने बताया कि फिरोज पहले ही दम तोड़ चुके थे।

अस्पताल से फिरोज का शव लेने के बाद सभी परिजन उस्मानपुर पुलिस थाने गए और दोनों पुलिसकर्मियों के ख़िलाफ़ मर्डर केस दर्ज करवाने की माँग की। देखते ही देखते सारी घटना सोशल मीडिया पर वायरल हो गई और शहर के विभिन्न कोनों से लोग आकर थाने के सामने विरोध करने लगे।

इसी दौरान नगर सांसद इम्तियाज जलील भी घटनास्थल पर पहुँचे। उन्होंने मृतक के परिवार को सांत्वना देते हुए प्रदर्शन कर रहे लोगों को शांत कराया। इसके बाद बॉडी को GMCH ले जाया गया, जहाँ पहले पोस्टमॉर्टम हुआ और बाद में शव परिजनों को सौंप दिया गया।