बिहार में शुक्रवार (23 अप्रैल 2021) की सुबह एक बड़े हादसे में एक ही परिवार के 9 लोगों की मौत हो गई। हादसा पटना से सटे दानापुर के समीप बने पीपा पुल पर हुआ। एनडीआरएफ, एसडीआरएफ और स्थानीय गोताखोरों की मदद से मृतकों के शव गंगा नदी से निकाले जा चुके हैं।
रिपोर्ट्स के मुताबिक सारण (छपरा) जिले के अकिलपुर निवासी मदन सिंह के पुत्र राकेश का 21 अप्रैल को तिलक हुआ था। 26 अप्रैल को शादी होनी है। उनका परिवार दानापुर के चित्रकुटनगर में रहता है। पटना में गंभीर कोरोना संक्रमण को देखते हुए उनकी शादी का कार्यक्रम गाँव से हो रहा था। तिलक के बाद मदन सिंह के रिश्तेदार और परिवार के लोग दानापुर आ रहे थे। इसी दौरान सुबह के करीब छह बजे पीपा पुल की रेलिंग तोड़ते हुए पिकअप वैन गंगा नदी में गिर गई।
हादसे के दौरान वैन की छत पर सवार सुजीत कुमार सिंह, मनोज सिंह और किताब राय ने कूदकर अपनी जान बचा ली। हादसे पर दुख जताते हुए मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने मृतकों के परिवार को 4-4 लाख रुपए की अनुग्रह राशि देने का ऐलान किया है। साथ ही पटना के जिलाधिकारी ने दानापुर में हुए हादसे की जाँच के आदेश दिए हैं।
बता दें कि दानापुर के पीपा पुल की हालत काफी जर्जर है। यहाँ पहले भी कई हादसे हो चुके हैं। इससे पहले एक ट्रैक्टर पुल से गंगा में गिर गया था। दानापुर की साइड में पुल के अप्रोच रोड का निर्माण भी सही तरीके से नहीं किया गया है। यह पुल स्टील प्लेट से बना है, जिसके चलते यहाँ हमेशा वाहनों के फिसलने की आशंका हमेशा रहती है। शुक्रवार को हुए इस हादसे की वजह भी यही बताई जा रही है।
हरियाणा के पानीपत में पति-पत्नी के पवित्र रिश्ते को झकझोर कर रख देने वाली घटना सामने आई है। यहाँ एक अपाहिज महिला ने अपने पति पर रूह को कँपा देने वाले अंदाज में शारीरिक और मानसिक प्रताड़ना देने का आरोप लगाया है।
रिपोर्ट्स के मुताबिक, पानीपत में हाथ-पैर से अपाहिज एक महिला ने अपने पति पर आरोप लगाया है कि वह उसके प्राइवेट पार्ट में शराब, नींबू और फिटकरी डालता है। साथ ही उसने पति पर अप्राकृतिक संबंध बनाने का भी आरोप लगाया है। पीड़िता ने अपने पति के खिलाफ महिला थाने में शिकायत दर्ज कराई है।
पीड़िता ने पुलिस पर लगाया कार्रवाई न करने का आरोप
पीड़िता ने साथ ही पुलिस की कार्यशैली को भी कटघरे में खड़ा करते हुए कहा है कि उसके साथ हुई इतनी निर्दयता के बावजूद पुलिस प्रशासन उसके पति के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं कर रहा है।
रिपोर्ट के मुताबिक, डीएसपी सतीश कुमार वत्स ने महिला की शिकायत मिलने की पुष्टि की है। उन्होंने कहा कि शिकायत के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी।
14 साल पहले हुई थी पीड़िता की शादी
पीड़िता की शादी 14 साल पहले पानीपत के एक गाँव के निवासी अरुण नामक शख्स से हुई थी। पीड़िता और अरुण के दो बच्चे हैं।
पीड़िता का आरोप है कि शादी के बाद से ही पति की प्रताड़ना का सिलसिला भी शुरू हो गया था। लेकिन उसका पति अब नीचता की सारी हदें पार कर चुका है। पीड़िता ने पुलिस से अपने पति के खिलाफ कड़ी कार्रवाई करने की अपील की है।
पिछले 24 घंटे में पूरे देश से 3.32 लाख कोरोना के नए मामले सामने आए हैं। हर राज्य की सरकार कोरोना से निपटने के लिए सख्त पाबंदियाँ लगा रही है। इस बीच भारतीय किसान यूनियन (BKU) के प्रवक्ता राकेश टिकैत की आवाजाही जारी है। गाजीपुर बॉर्डर पर इफ्तार पार्टी के बाद अब वे हिसार पहुँचकर धमकी दे रहे हैं कि किसी ने उन्हें छेड़ा तो उसकी सुताई होगी।
बार एसोसिएशन के धरने को संबोधित करते हुए राकेश टिकैत ने शुक्रवार (अप्रैल23, 2021) को हरियाणा में कहा कि अगर हमें छेड़ने का प्रयास किया गया तो हम भी सुताई करेंगे। उनके मुताबिक सुताई शब्द का मतलब उनके गाँव के लोग काफी अच्छे से समझते हैं।
कोविड-19 सिर्फ़ एक चाल
हरि भूमि की रिपोर्ट के मुताबिक राकेश टिकैत ने आरोप लगाया कि इस आंदोलन को तोड़ने के लिए नई-नई चाल चली जा रही है। कोविड-19 भी वही चाल है। कोविड-19 का किसान आंदोलन से क्या मतलब। जिसे दिक्कत होगी वह अस्पताल में जाकर इलाज करवा लेगा।
टिकैत ने कहा, “जहाँ हम धरना दे रहे हैं वह हमारा घर है, हमारी कॉलोनी है। हम इसे किसी भी सूरत में माँगे पूरी नहीं होने तक खाली नहीं करेंगे… यह शाहीन बाग नहीं है जो डरा-धमकाकर खाली करवा लोगे। जहाँ तक क्लीन स्वीप अभियान चलाने की बात चल रही है तो मैं बता देना चाहता हूँ कि सरकार ने अगर ऐसी कोई गलती की तो पूरे देश में सुताई अभियान चलेगा। हरियाणा में तो पहले से ही यह अभियान चल रहा है।”
टिकैत ने हिसार कोर्ट परिसर में वकीलों द्वारा किसानों के समर्थन में दिए जा रहे धरने को संबोधित करते हुए आरोप लगाया कि देश बेचने की कोशिश हो रही है। लेकिन वह ऐसा नहीं होने देंगे। उनका आंदोलन देश को बचाने का आंदोलन है। पहले देश को बचाने के लिए बुजुर्गों ने लड़ाई लड़ी, लेकिन अब का आंदोलन साइलेंट है।
टिकैत ने कहा कि कृषि कानून के बाद बिजली और दूध एग्रीमेंट को लेकर सरकार बिल आएगी। धीरे-धीरे देश के विश्वविद्यालयों को भी ठेके पर दे दिया जाएगा। इसके बाद जो शिक्षक सवा लाख ले रहा है उसे 30,000 में काम करना होगा। टिकैत के मुताबिक, केंद्र सरकार के ख़िलाफ़ समाज के सभी वर्गों को मिलकर आंदोलन में शामिल होना होगा।
टीका लगवाएँगे, टेस्ट नहीं कराएँगे
किसान नेता ने कोरोना वैक्सीन पर कहा कि बॉर्डर पर बैठे किसान इंजेक्शन लेंगे, लेकिन कोरोना टेस्ट नहीं कराएँगे। इंजेक्शन भी तब लगवाएँगे, जब आधे इंजेक्शन पुलिसकर्मी लगवाएँगे। उन्हें सरकार पर बिल्कुल भरोसा नहीं है। उन्होंने कोरोना की गंभीरता पर सवाल उठाते हुए पूछा अगर कोरोना इतना खतरनाक है तो कुछ लोग बंगाल में रैली क्यों कर रहे हैं। कोरोना को एक तरह का बुखार ही मान सकते हैं। लोगों को ऑक्सीजन नहीं मिल रही तो वहाँ की सरकार को इस्तीफा देना चाहिए।
बक्कल उतारने की दे चुके हैं धमकी
बता दें कि कोरोना महामारी के बीच किसान आंदोलन खत्म न करने की जिद्द पर अड़े किसान नेता राकेश टिकैत इससे पहले बक्कल उतारने वाले बयान दे चुके हैं। 26 जनवरी को जब उन्होंने रैली निकालने से रोने के लिए प्रशासन कोशिश कर रहा था तो उन्होंने कहा था कि अगर ट्रैक्टर को रोका गया तो उसका इलाज होगा। अगर किसी ने रोका तो उसकी बक्कल उतार दी जाएगी।
बॉलीवुड अभिनेता सलमान खान की आगामी फिल्म ‘राधे: योर मोस्ट वॉन्टेड भाई’ (Radhe: Your Most Wanted Bhai) का ट्रेलर गुरुवार (अप्रैल 22, 2021) को रिलीज कर दिया गया। सलमान खान पर आरोप लगा है कि उन्होंने अबकी बार तेलुगु अभिनेता अल्लू अर्जुन के स्टाइल और गाने को कॉपी किया है। बता दें कि मुख्यतः तेलुगु फिल्मों में काम करने वाले अल्लू अर्जुन के फैंस मलयालम और हिंदी बेल्ट में भी हैं।
इससे पहले भी सलमान खान पर आरोप लगते रहे हैं कि उन्होंने तेलुगु फिल्मों से स्टाइल और गाने कॉपी किए हैं। उनकी कई फ़िल्में तेलुगु फिल्मों का रीमेक भी रही हैं। इससे पहले उन्होंने ‘रेडी’ फिल्म में तेलुगु गाने ‘रिंगा-रिंगा’ की तर्ज पर ‘ढिंकचिका’ बनाया था। अब फैंस ने आरोप लगाया है कि उन्होंने 2017 में आई अल्लू अर्जुन की फिल्म Duvvada Jagannadham (DJ) के गाने ‘सिटी मार’ को कॉपी किया है।
बता दें कि बॉक्स ऑफिस पर 115 करोड़ रुपए का कारोबार करने वाले DJ अल्लू अर्जुन की सुपरहिट फिल्मों में से एक है, जिसका संगीत देवी श्री प्रसाद ने दिया था। इसके ‘सिटी मार’ गाने का ऑडियो और वीडियो, दोनों ही बड़े हिट हुए थे। अल्लू अर्जुन और पूजा हेगड़े के डांस मूव्स की भी खासी प्रशंसा हुई थी। वहीं जिस गाने को इसका हिंदी वर्जन बताया जा रहा है, उसमें सलमान दिशा पाटनी के साथ डांस करते हुए दिखेंगे।
अब लोगों को इस गाने के फुल वर्जन का इंतजार है, ताकि वो जान सकें कि सलमान खान ने इसमें कुछ ओरिजिनल किया भी है या नहीं। ट्विटर पर यूजर्स ने लिखा कि फिल्मों तक तो ठीक था, अब बॉलीवुड ने गानों को भी कॉपी करना शुरू कर दिया है। एक यूजर ने लिखा कि इलेक्ट्रिक डांस करने वाले अल्लू अर्जुन की तुलना में सलमान खान के डांस स्टेप्स मजाकिया हैं। ‘राधे’ में रणदीप हुड्डा, जैकी श्रॉफ और गोविन्द नामदेव जैसे कलाकार भी हैं।
वैसे सलमान खान का दक्षिण की फिल्मों को कॉपी करने का इतिहास पुराना है। उनकी फ़िल्में जुड़वा (1997), बंधन (1998), बीवी नंबर 1 (1999), हेलो ब्रदर (1999), हर दिल जो प्यार करेगा (2000), हम तुम्हारे हैं सनम (2002), तेरे नाम (2003), दिल ने जिसे अपना कहा ( 2004), क्योंकि (2005), नो एंट्री (2005), शादी कर के फँस गया यार (2006), वान्टेड (2009), रेडी (2011), बॉडीगार्ड (2011), जय हो (2014) और किक (2014) दक्षिण की फिल्मों की कॉपी थी।
यूट्यूब की बात करें तो zee5 नाम के चैनल पर अपलोड हुआ राधे का ट्रेलर देख लोगों ने इसकी कास्टिंग पर सवाल उठाए। लोगों ने पूछा कि दिशा पटानी, सलमान खान की बेटी की उम्र की हैं, लेकिन फिर भी वो उनकी हीरोइन हैं। इसी तरह जैकी श्राफ को इस फिल्म में दिशा का भाई बनाया गया है। इस पर भी लोगों ने चुटकी लेते हुए पूछा है कि क्या ये फिल्म टाइगर श्रॉफ देखेंगे। एक डायलॉग को लेकर लोगों का कहना है कि भाई ने इस बार फिजिक्स के साथ बॉयोलॉजी और केमेस्ट्री को भी बिगाड़ दिया है।
‘द प्रिंट’ के कंसल्टिंग एडिटर ने गुरुवार (22 अप्रैल 2021) को एक ट्वीट किया। यह कॉलेज की उनकी सहपाठी रही शाओली रूद्रा की मौत से जुड़ा था।
विज ने ट्वीट किया, “मेरी कॉलेज की साथी शाओली रुद्र की Covid-19 के चलते मृत्यु हो गई। विभिन्न स्वास्थ्य समस्याओं के कारण उसकी रोग प्रतिरोधक क्षमता बहुत कम थी। लेकिन मोदी सरकार ने उसे वैक्सीन के योग्य नहीं समझा, क्योंकि उसकी आयु 45 वर्ष से कम थी। उसने अपने जैसे लोगों को वैक्सीन देने के लिए कई बार ट्वीट करके सहायता भी माँगी। निष्ठुर सरकार।“ अपनी साथी की मृत्यु के शोक के समय भी शिवम विज ने अपना राजनैतिक एजेंडा नहीं छोड़ते हुए केंद्र सरकार को कोसा।
द प्रिन्ट के सलाहकार संपादक ने शाओली रुद्र का वह ट्वीट भी रिट्वीट किया जिसमें उन्होंने बृहन्मुंबई महानगर पालिका (बीएमसी) से गंभीर रोगों से पीड़ित 45 वर्ष से कम आयु के लोगों को वैक्सीनेट करने की माँग कर रही थी। रुद्र ने 4 अप्रैल को ट्वीट किया था जिसमें उन्होंने कहा था कि वैक्सीन उन सभी को दी जानी चाहिए जो गंभीर रूप से बीमार हैं।
शिवम विज के ट्वीट का स्क्रीनशॉट
कोरोना वायरस के इस संक्रमण में भी कई वामपंथी और लिबरल पत्रकार भारत के वैक्सीनेशन कार्यक्रम पर हमला करते रहते हैं। इसी क्रम में शिवम विज ने शाओली रुद्र की मौत के लिए मोदी सरकार और उनकी खराब नीतियों को जिम्मेदार ठहराया। उसने यह भी कहा कि यदि रुद्र को कोरोना वायरस की वैक्सीन दे दी जाती तो उसकी जान बचाई जा सकती थी।
हालाँकि शाओली की कजिन तारिणी बरात ने द प्रिन्ट के शिवम विज को ट्विटर पर टैग करते हुए बताया कि शाओली की मौत Covid से नहीं, बल्कि उसकी बीमारी की गंभीर परिस्थितियों के कारण हुई है।
तारिणी बरात के ट्वीट का स्क्रीनशॉट
यह जानने के बाद कि शाओली की मौत Covid-19 से नहीं हुई और न ही इसके लिए मोदी सरकार को दोषी ठहराया जा सकता है, शिवम विज ने अपना ट्वीट डिलीट कर दिया।
शिवम विज ने किया ट्वीट डिलीट
कोविड-19 संक्रमण पर पहले भी भ्रामक खबर
भारत बायोटेक की वैक्सीन ‘कोवैक्सीन’ के तीसरे फेज के ट्रायल के दौरान हरियाणा के मंत्री अनिल विज ने वैक्सीन का डोज लिया था। उसके कुछ दिनों के बाद ही अनिल विज कोरोना से संक्रमित हो गए थे। इसके बाद वामपंथी और मोदी विरोधी तंत्र ने भारत की स्वदेशी वैक्सीन कोवैक्सीन पर सवाल उठाने शुरू कर दिए थे।
शेखर गुप्ता के द प्रिन्ट के सलाहकार संपादक शिवम विज ने भी कोवैक्सीन के खिलाफ भ्रामक प्रचार किया था और अप्रत्यक्ष रूप से यह कहने की कोशिश की थी वैक्सीन के कारण ही हरियाणा के मंत्री संक्रमित हुए।
भारत सरकार द्वारा 9,300 मीट्रिक टन ऑक्सीजन निर्यात करने और देश में ऑक्सीजन की कमी को अनदेखा करने की भ्रामक खबरें फैलाने वाले मीडिया समूह मनी कंट्रोल ने दो दिन बाद फिर से फेक न्यूज का सहारा लिया है। इस बार उसने कोविड-19 वैक्सीन के मूल्य निर्धारण को लेकर भारत बायोटेक और सीरम इंस्टीट्यूट के बारे में अपनी भ्रामक रिपोर्ट प्रस्तुत की है।
बुधवार (21 अप्रैल 2021) को प्रकाशित एक रिपोर्ट के मुताबिक, मनी कंट्रोल ने अपने लेख में कहा, “बाजार में कोविड वैक्सीन की कीमत 1000 रुपए, भारत बायोटेक कोवैक्सीन के लिए चाहता है अधिक से अधिक कीमत”
यह हेडलाइन स्पष्ट नहीं है। इससे ऐसा प्रतीत होता है कि भारत बायोटेक अपनी COVID-19 कोवैक्सीन के लिए अधिकतम मूल्य चाहता है, ताकि इस महामारी में वह अपने लाभ को बढ़ा सके, जहाँ हजारों लोग अपना जीवन खो रहे हैं। मनी कंट्रोल इस लेख में एक सोर्स आधारित अफवाह के साथ भारत बायोटेक को लेकर भ्रामक दावे कर रहा है कि वह कोरोना संकट में अधिक लाभ कमाना चाहता है। इसलिए निजी बाजार में COVID-19 वैक्सीन की कीमत 1,000 रुपए है।
मनीकंट्रोल का लेख
कोरोना संकट के बीच ऐसे भ्रामक दावों को फैलाने का कारण केवल लोगों के बीच भय का बीज बोना था। उनका कहना है कि भारत बायोटेक इस महामारी में भी लोगों से लाभ लेने के लिए अपनी कोशिशों में जुटी हुई है। हालाँकि, सच्चाई इससे परे है। मनी कंट्रोल का यह लेख में वास्तविकता के उलट दुर्भावना से प्रेरित प्रतीत होता है।
मनी कंट्रोल का यह लेख
मनी कंट्रोल ने अपने लेख में LiveMint का हवाला देते हुए स्पष्ट किया है। उन्होंने भारत बायोटेक (Bharat Biotech) के अध्यक्ष एवं प्रबंध निदेशक डॉ. कृष्णा एला के बयान को कोट करते हुए लिखा, “वे वैक्सीन की लागत निकालने के लिए इसकी अधिक कीमत लेना चाहेंगे।”
हालाँकि, उन्होंने आगे इसका उल्लेख नहीं किया कि लाइवमिंट की रिपोर्ट में डॉ. एला ने यह भी कहा था कि भारत बायोटेक ने सरकार से ट्रायल के लिए कोई पैसा नहीं माँगा है और न ही वैक्सीन निर्माण क्षमता बढ़ाने के लिए उन्हें कोई सलाह दी है।
यहाँ दो बातें ध्यान देनी होगी। पहली – वैक्सीन के लिए अधिकतम कीमत की माँग करके भारत बायोटेक ज्यादा से ज्यादा लाभ कमाने की कोशिश कर रहा है। दूसरी – वैक्सीन की अधिक कीमत वसूलना चाहते हैं ताकि वैक्सीन बनाने की लागत को वसूल सकें। यह दोनों बातें अलग-अलग हैं, एकदम अलग संदर्भ में है।
इस संदर्भ के परिप्रेक्ष्य में एक सही हेडलाइन कैसे होनी चाहिए, इसके लिए कोई भी LiveMint के शीर्षक का नमूना ले सकता है।
LiveMint की हेडलाइन
सीधे शब्दों में कहें तो, मनी कंट्रोल अपनी हेडलाइन को सनसनीखेज बनाना चाहता था, ताकि वह लोगों को यह आभास करा सके कि भारत बायोटेक कोरोना संकट काल में भी लोगों की बजाय अपने मुनाफे पर ध्यान दे रहा है। जबकि जिस LiveMint की खबर को उसने सोर्स मान कर अपने यहाँ खबर प्रकाशित की, उसका शीर्षक एकदम सही है।
कोरोना काल में भी मीडिया गिरोह अपने प्रोपेगेंडा से बाज नहीं आ रहा, वह झूठ फैला ही रहा है। बता दें कि 21 अप्रैल को भारत सरकार ने यह आरोप सिरे से खारिज कर दिया था कि जनवरी 2021 से मार्च 2021 तक भारत ने 9884 मीट्रिक टन ऑक्सीजन का निर्यात किया था। मीडिया की मुख्य धारा में भी यह रिपोर्ट दी जा रही थी कि भारत ने 31 मार्च 2021 तक लगभग 9300 मीट्रिक टन ऑक्सीजन का निर्यात किया है। NDTV, News18 और मनी कंट्रोल जैसे मीडिया समूहों ने भारत के ऑक्सीजन निर्यात से संबंधित तथ्यों को अनदेखा करके भ्रामक रिपोर्ट प्रस्तुत की थी। हालाँकि, वास्तविक तथ्यों के सामने आने के बाद मनीकंट्रोल ने अपनी रिपोर्ट डिलीट कर दी थी।
20 अप्रैल 2021 को मनी कंट्रोल ने यह दावा किया कि 2021 के पहले तीन महीनों में भारत ने 9300 मीट्रिक टन ऑक्सीजन का निर्यात किया। हालाँकि, मनी कंट्रोल ने यह नहीं बताया कि निर्यातित ऑक्सीजन मेडिकल ऑक्सीजन है या नहीं। इस कारण रिपोर्ट में ऑक्सीजन की स्थिति चिंताजनक दिखाई दी।
कोरोना वायरस की सेकेंड वेव ने पूरे देश में तबाही मचा रखी है। हालात को कंट्रोल करने के लिए आसमान के प्रहरी भारतीय वायुसेना मैदान में उतर गई है। वायुसेना ने मरीजों के लिए जीवनरक्षक मेडिकल ऑक्सीजन को एयरलिफ्ट कर उन जगहों पर पहुँचाने का बीड़ा उठा लिया है, जहाँ इसकी कमी है। इसका मकसद ऑक्सीजन सप्लाई में तेजी लाना है।
C-17 and IL-76 aircraft airlifted cryogenic oxygen containers from Air Force Station Hindan to Panagarh for recharging, in support of the fight against Covid-19. Similar airlift tasks are underway across the country. pic.twitter.com/1GMdOBRqWY
इंडियन एयरफोर्स के C-17 और IL-17 विमान मेडिकल ऑक्सीजन टैंकरों को एयरलिफ्ट कर देश के अलग-अलग हिस्सों में पहुँचा रहे हैं। एयरफोर्स ने एक बयान में कहा है कि मिशन के तहत आईएएफ के C-17 और IL-17 ने दो खाली क्रायोजेनिक ऑक्सीजन कंटेनरों को एयरलिफ्ट किया और IL-17 विमान से पश्चिम बंगाल के पन्नागढ़ से खाली कंटेनर को एयरलिफ्ट किया। तीनों टैंकरों में ऑक्सीजन की फिलिंग करने के बाद इसे फिर से एयरलिफ्ट किया जाएगा।
इंडिया टीवी की रिपोर्ट के मुताबिक, ऑक्सीजन टैंकरों के साथ ही वायुसेना सिलेंडर, दवाओं और आवश्यक मेडिकल उपरणों की भी आपूर्ति कर रही है। इससे पहले वायु सेना ने ट्वीट किया था, “कोविड-19 के खिलाफ लड़ाई में वायु सेना का परिवहन बेड़ा सहयोग कर रहा है। देशभर में चिकित्सा सुविधाओं को पहुँचाने और कोविड अस्पतालों के निर्माण के लिए वह चिकित्साकर्मियों, उपकरणों और दवाओं को एयरलिफ्ट कर रहा है।”
The IAF transport fleet is supporting the fight against Covid-19. Air lift of medical personnel, critical equipment and medicines is underway for Covid Hospitals and facilities across the country. pic.twitter.com/eBHv2yicyR
आज तक की रिपोर्ट के मुताबिक, कोरोना संकट से देश को बचाने के लिए भारतीय वायुसेना जर्मनी से 23 मोबाइल ऑक्सीजन जनरेशन प्लांट भी एयरलिफ्ट करेगी। इससे पहले कोविड की टेस्टिंग में तेजी लाने के लिए वायुसेना ने लेह में कोविड सेटअप को एयरलिफ्ट कर पहुँचाया था।
बता दें कि केंद्र सरकार ने कहा है कि देश में ऑक्सीजन की कमी नहीं है, लेकिन इसकी सप्लाई में काफी दिक्कतें सामने आ रही हैं। दूर-दराज के क्षेत्रों में सड़क के रास्ते ऑक्सीजन आपूर्ति में काफी समय बर्बाद हो जाता है।
महाराष्ट्र में कोरोना की दूसरी लहर ने तबाही मचा रखी है। इससे राज्य की बुनियादी स्वास्थ्य सुविधाएँ बुरी तरह से प्रभावित हुई हैं। पिछले कुछ हफ्तों से प्रदेश में हर दिन 50,000 से अधिक संक्रमितों के नए मामले सामने आ रहे हैं। महामारी से निपटने के महाविकास आघाड़ी सरकार की अक्षम कोशिशों के कारण स्थितियाँ गंभीर हो गई हैं। चाहे वह हाल ही में ऑक्सीजन पर टकराव की स्थिति हो या अस्पतालों का मामला हो। हर जगह तीन पैरों की सरकार ने अपनी अक्षमता का ही प्रदर्शन किया है।
महाराष्ट्र में बीते कुछ महीनों के दौरान अस्पतालों में हादसे के कई मामले सामने आए हैं। ऐसी ही 4 घटनाओं की लिस्ट नीचे है।
विरार: कोविड केयर अस्पताल में आग से 13 मौतें
शुक्रवार (23 अप्रैल 2021) की रात मुंबई के विरार पश्चिम स्थित विजय वल्लभ कोविड केयर अस्पताल के ICU लगी भीषण आग में कम से कम 13 मरीजों की जलकर मौत हो गई। जानकारी सामने आई थी कि कोरोना मरीजों की जहरीले धुएँ की वजह से मौत हुई। इस मामले में विजय वल्लभ अस्पताल के अधिकारी डॉ. दिलीप शाह ने कहा था, “आज सुबह लगभग 3 बजे गहन चिकित्सा इकाई में आग लगने से 13 लोगों की मौत हो गई है। गंभीर हालत वाले 21 मरीजों को दूसरे अस्पताल में भेज दिया गया है।”
रिपोर्ट के अनुसार, 3 बजे के बाद अस्पताल के आईसीयू में आग लगी थी, जहाँ 17 संक्रमितों की इलाज किया जा रहा था। जानकारी मिलते ही मौके पर पहुँची फायर ब्रिगेड की टीम ने आग बुझाया, लेकिन तब तक 13 लोगों की मौत हो गई थी। इस हादसे को लेकर महाराष्ट्र के स्वास्थ्य मंत्री राजेश टोपे ने एक विवादास्पद बयान दिया और दावा किया कि विरार अस्पताल में आग एक राष्ट्रीय समाचार नहीं है।
#WATCH Virar fire incident, not national news…says Maharashtra Health Minister Rajesh Tope
13 people have lost their lives in a fire incident at Vijay Vallabh COVID care hospital in Maharashtra’s Virar pic.twitter.com/hNZEHIbnLp
टोपे ने कहा, “हम ऑक्सीजन की आपूर्ति के बारे में बात करेंगे। हम रेमडेसिविर की कमी के बारे में बात करेंगे। हम इस घटना के बारे में भी बात करेंगे। हालाँकि, यह एक राष्ट्रीय समाचार नहीं है।”
नासिक: ऑक्सीजन लीक में 24 मरीजों की मौत
देशभर में अस्पताल और कोविड केयर सेंटर मेडिकल ऑक्सीजन की कमी के चलते मरीजों की जान जा रही है। जीवनरक्षक ऑक्सीजन की भारी कमी के बीच महाराष्ट्र के नासिक स्थित डॉ. जाकिर हुसैन अस्पताल में टैकर से ऑक्सीजन सप्लाई के दौरान हुए लीकेज से 24 मरीजों की मौत हो गई थी। बता दें की लीकेज के कारण अस्पताल में करीब 30 मिनट तक O2 की सप्लाई बाधित थी।
पिछले महीने मुंबई के भांडुप इलाके में एक मॉल में भीषण आग लग गई थी, जिसके टॉप फ्लोर पर सनराइज हॉस्पिटल का कोविड अस्पताल था। जिस समय आग लगी, उस दौरान 76 COVID-19 मरीज अस्पताल में भर्ती थे। इस दौरान कथित तौर पर 10 लोगों की मौत हो गई थी।
सीएनएन न्यूज 18 को ड्रीम मॉल के मिले दस्तावेजों के मुताबिक मॉल में अग्नि सुरक्षा के मानकों का पालन नहीं किया गया था। इससे पहले, बीएमसी ने अग्नि सुरक्षा मानदंडों को लेकर मुंबई के मॉल्स पर एक आकलन किया था, और ड्रीम मॉल उन 29 मॉलों में से एक था, जिन्हें असुरक्षित घोषित किया गया था, क्योंकि ये फायर सेफ्टी नॉर्म्स को पूरा नहीं करते थे।
भंडारा में 10 शिशुओं की जलकर हुई थी मौत
महाराष्ट्र में विदर्भ के अंतर्गत आने वाले भंडारा जिले के एक अस्पताल के सिक न्यूबोर्न केयर यूनिट (एसएनसीयू) में आग लगने से 1 से 2 महीने के 10 नवजात शिशुओं की मौत हो गई थी। यूनिट में कुल सत्रह बच्चे थे, लेकिन उनमें से केवल सात को बचाया जा सका था। ज्यादातर नवजातों की मौत दम घुटने के कारण हुई थी। एक बच्चे को गंभीर चोटें आई थीं और दो अन्य को मामूली चोटें आई थीं। घटना के बाद अस्पताल ने स्पष्टीकरण देते हुए कहा था कि ज्यादातर की मौत धुआँ निगलने के कारण हुई थी।
Ten children died in a fire that broke out at Sick Newborn Care Unit (SNCU) of Bhandara District General Hospital at 2 am today. Seven children were rescued from the unit: Pramod Khandate, Civil Surgeon, Bhandara, Maharashtra pic.twitter.com/bTokrNQ28t
सरकार को जवाब देना चाहिए कि इन मौतों की जिम्मेदारी कौन लेगा
महाराष्ट्र में बीते 4 महीनों में अस्पतालों में आग लगने और लीक की 4 घटनाएँ हुई हैं। इन घटनाओं में जितनी भी मौतें हुई हैं, उनमें मरने वाले अधिकतर कोरोना मरीज थे। सरकार से यह सवाल किए जाने की आवश्यकता है कि आखिर इन घटनाओं में होने वाली मौतों के लिए कौन जिम्मेदार है।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कोरोना वायरस संक्रमण की स्थिति पर सभी राज्यों के मुख्यमंत्रियों के साथ चर्चा की, जिसमें दिल्ली के सीएम अरविंद केजरीवाल ने भी हिस्सा लिया। लेकिन, उन्होंने नियमों का उल्लंघन करते हुए इस बैठक का लाइव प्रसारण कर दिया। केजरीवाल ने कहा कि उन्हें विश्वास है कि अगर कोरोना से लड़ने की दिशा में कोई राष्ट्रीय योजना होगी तो सभी राज्य सरकारें केंद्र के साथ मिल कर उस दिशा में काम करेगी।
बता दें कि पिछले 1 वर्ष से भी अधिक समय से लगातार कोरोना पर योजनाएँ बन रही हैं और उसे लागू किया जा रहा है, तभी देश पहली लहर से भी बाहर निकला था और अब तक 13.54 करोड़ लोगों का टीकाकरण भी हो चुका है। बैठक में अरविंद केजरीवाल कोरोना के कारण दिवंगत आत्माओं की शांति की बातें कर रहे थे। जबकि वो खुद PM के साथ बैठक के प्रोटोकॉल का उल्लंघन कर रहे थे।
स्थिति ये आ गई कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को उन्हें टोकना पड़ा। पीएम ने AAP सुप्रीमो को याद दिलाया कि अब तक की जो परंपरा रही है, प्रोटोकॉल रहा है – ये उसके बिलकुल ही खिलाफ हो रहा है। उन्होंने कहा कि ऐसा पहली बार हो रहा है, जब कोई मुख्यमंत्री इस तरह की ‘इन हाउस मीटिंग’ का लाइव प्रसारण कर रहा है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि सब को संयम का पालन करना चाहिए। उन्होंने इस हरकत को अनुचित बताया।
इसके बाद दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल इस बैठक का ‘शोक सभा’ की तरह प्रयोग करते हुए कोरोना से मृत लोगों की आत्माओं की शांति से लेकर उनके परिजनों को दुःख सहने की क्षमता देने के लिए ईश्वर से प्रार्थना की बातें करने लगे। केजरीवाल ने कहा, “अगर मेरी तरफ से कोई गुस्ताखी हो गई है, अगर मैंने कुछ कठोर बोल दिया हो या मेरे आचरण में कोई गलती हो तो मैं उसके लिए आपसे माफ़ी चाहता हूँ।”
When @PMOIndia clearly says it’s not ok to go live when it’s a Closed door meeting between the prime minister and state Cm’s on such imp and sensitive issue & @ArvindKejriwal says he will keep in mind as he never intended to hurt any one or go against the protocols … pic.twitter.com/5hF12R3eIT
अरविंद केजरीवाल ने हाथ जोड़ कर ये बाते कहीं। अंत में उन्होंने प्रधानमंत्री की सराहना करते हुए कहा कि उनकी तरफ से जो भी प्रेजेंटेशन दिए गए, वो काफी अच्छे थे और जो भी निर्देश दिए गए हैं, उनका पालन करेंगे। इस बैठक में दिल्ली के सीएम का पूरा ध्यान अपने भाषण और खुद की बातों के लाइव प्रसारण पर था। नियमों का उल्लंघन और ऊपर से इतने संवेदनशील समय में राजनीति करने के लिए उनकी आलोचना हो रही है।
इस हरकत के बाद सरकारी सूत्रों ने केजरीवाल पर राजनीति करने का आरोप मढ़ा। केजरीवाल ने पीएम से हुई अपनी बातचीत का प्रसारण कर दिया, जो कि नहीं होना था। बाकी लोगों को भी इसकी जानकारी नहीं थी कि अरविंद केजरीवाल क्या कर रहे हैं। किसी को सूचना दिए बगैर पीएम के साथ हुई बैठक में अपनी बात का सीएम ने प्रसारण किया। टेलीविजन वाले भी नहीं समझ पाए कि आखिर ये फुटेज आ कहाँ से रही है।
अल्जीरिया के जाने-माने प्रोफेसर 53 वर्षीय सैद जबेलखिर (Said Djabelkhir) को तीन साल कैद की सजा सुनाई गई है। सोशल मीडिया पोस्ट्स के जरिए ‘इस्लाम का अपमान’ करने के आरोप में उन्हें सजा दी गई है। इस साल की शुरुआत में हदीस (पैगंबर मोहम्मद की शिक्षा) और इस्लाम की कुछ परंपराओं पर सवाल उठाने के बाद उन पर ‘मजहब और इस्लामी परंपराओं का मजाक’ बनाने का आरोप लगा था।
Sidi Bel Abbs विश्वविद्यालय के एक शिक्षक और 7 वकीलों की ‘इस्लाम के अपमान’ की शिकायत के बाद प्रोफेसर जबेलखिर पर मुकदमा चलाया गया। शिकायतकर्ताओं का आरोप था कि उनके फेसबुक पोस्ट के कारण इस्लामी भवनाएँ आहत हुईं।
जमानत पर चल रहे प्रोफेसर ने सजा पर आश्चर्य व्यक्त किया है। न्यूज एजेंसी AFP से चर्चा करते हुए प्रोफेसर जबेलखिर ने कहा कि वह कोर्ट ऑफ कैसेशन में अपील करेंगे। उन्होंने यह भी कहा कि वे एक प्रोफेसर हैं न कि एक इमाम। लिहाजा उन्हें कारणों, तर्कों और तथ्यों पर विचार करना होता है और उन्हें अपनी अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता का अधिकार भी है। शोधकर्ता ने कहा कि यह दुर्भाग्य की बात है कि वह अल्जीरिया में शोध करते हैं।
अल्जीरिया के प्रोफेसर का ‘अपराध’
इस्लाम पर दो पुस्तकें लिखने वाले प्रोफेसर सैद जबेलखिर ने जैसे ही इस्लाम की कुछ परपराओं और हदीसों पर प्रश्न उठाया वो इस्लामिक कट्टरपंथियों के निशाने पर आ गए। प्रोफेसर जबेलखिर ने ईद पर जानवरों की कुर्बानी पर प्रश्न उठाया था और मुस्लिम समाज में छोटी बच्चियों से शादी को भी गलत ठहराया था।
प्रोफेसर जबेलखिर ने यह भी कहा कि कुरान में लिखा हुआ सब कुछ सही नहीं है। उन्होंने कश्ती नूह का उदाहरण देते हुए कहा कि कई मुसलमान कुरान में लिखी हर बात को सही मान रहे हैं। प्रोफेसर के अनुसार मुस्लिम इतिहास और मिथक का अंतर नहीं समझ पा रहे हैं। AFP से चर्चा के दौरान प्रोफेसर जबेलखिर ने कहा कि कुरान के द्वारा आधुनिक समय की अपेक्षाओं, आवश्यकताओं और प्रश्नों का कोई समाधान नहीं मिल सकता।
प्रोफेसर को जान से मारने की धमकी
न्यूज अरब के अनुसार प्रोफेसर जबेलखिर को जान से मारने की धमकियाँ भी मिल रही हैं। शिकायतकर्ता ने कहा कि प्रोफेसर जबेलखिर के विचारों ने उसे मनोवैज्ञानिक नुकसान पहुँचाया है। अपने बचाव में प्रोफेसर जबेलखिर ने कहा कि उनका उद्देश्य इज़्तिहाद (व्याख्या) है, न कि जिहाद।
प्रोफेसर जबेलखिर को 2019 में भी जान से मरने की धमकी मिली थी, जब उन्होंने रमजान में रोजा की आवश्यकता पर प्रश्न उठाया था। प्रोफेसर ने कहा था कि मुस्लिमों के लिए रोजा जरूरी नहीं है और इसके स्थान पर मुस्लिमों को खाना और पैसों को गरीबों को दान करना चाहिए। उन्होंने यह भी कहा कि सामान्य परिस्थितियों में तो पैगंबर के सभी साथियों ने भी उपवास नहीं किया था।
अल्जीरिया का ईशनिंदा कानून
अल्जीरिया की 99% जनसंख्या सुन्नी मुसलमानों की है और अल्जीरिया का संविधान भी इस्लाम को राज्य धर्म के रूप में स्वीकार करता है। लेकिन संविधान के अनुच्छेद 36 में आस्था की स्वतंत्रता है। हालाँकि संविधान के इन प्रावधानों के बाद भी अल्जीरिया में धार्मिक स्वतंत्रता पर कई प्रतिबंध हैं। अल्जीरिया में लेखन, पेंटिंग, विचार अथवा किसी अन्य माध्यम से इस्लाम या पैगंबर की कथित अवहेलना पर तीन से पाँच साल की सजा और अर्थदंड का प्रावधान है।