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राहुल गाँधी अब नहीं करेंगे चुनावी रैली: 4 राज्य में जम कर की जनसभा, बंगाल में हार देख कोरोना का बहाना?

सभी चुनावी राज्यों में रैलियों को संबोधित करने के बाद राहुल गाँधी ने सोशल मीडिया के माध्यम से यह घोषणा की कि अब वह पश्चिम बंगाल में किसी भी चुनाव रैली में शामिल नहीं होंगे। उन्होंने ट्विटर के माध्यम से इसकी जानकारी दी।  

राहुल गाँधी ने कोविड-19 की खराब होती परिस्थितियों का हवाला देते हुए कहा कि वह अब पश्चिम बंगाल में बचे तीन चरण के चुनाव में होने वाली अपनी सभी रैलियों को रद्द करते हैं। उन्होंने बाकी नेताओं से भी चुनावी रैलियों पर पुनर्विचार करने के लिए कहा है।

यहाँ ध्यान देने योग्य बात यह है कि अपनी बहन प्रियंका गाँधी वाड्रा के साथ राहुल ने कई राज्यों में कई चुनाव रैली की हैं जबकि कोरोनावायरस का संक्रमण तब भी बढ़ ही रहा था।

4 अप्रैल को 2021 को राहुल गाँधी ने केरल में एक चुनाव रैली को संबोधित किया था। केरल सर्वाधिक संक्रमित मरीजों की संख्या में भारत में दूसरे स्थान पर है। 4 अप्रैल को केरल में 11 लाख से अधिक कुल संक्रमित मरीज और 28,000 सक्रिय मरीज थे। उसके बाद केरल में 18 अप्रैल को सक्रिय मरीजों की संख्या बढ़कर 80,000 हो गई।

तमिलनाडु में भी 28 मार्च 2021 को राहुल गाँधी की एक बड़ी जनसभा हुई। उस समय तमिलनाडु में कुल सक्रिय मरीजों की संख्या 13,070 थी। आज तमिलनाडु में सक्रिय मरीजों की संख्या लगभग 65,000 है।

इस वीडियो में प्रियंका गाँधी वाड्रा को असम से बिदाई देने के लिए कॉन्ग्रेस द्वारा जुटाई गई लोगों की भीड़ दिखाई दे रही है।

असम, तमिलनाडु, केरल और केंद्र शासित प्रदेश पुडुच्चेरी में चुनाव संपन्न हो चुके हैं।

पश्चिम बंगाल में कॉन्ग्रेस, लेफ्ट पार्टियों के साथ गठबंधन में है लेकिन उनके सरकार बनाने की संभावनाएँ न के बराबर हैं। आशंका तो यह भी व्यक्त की जा रही है कि कॉन्ग्रेस और उसके गठबंधन को 2016 के चुनावों से भी कम सीटें प्राप्त होंगी।  

बांग्लादेश से लाई गई किशोरी से करवा रहे थे देह व्यापार: मिजानूर, अजमिरा खातून और मुर्तजा शेख गिरफ्तार

एटीएस से मिली सूचना के आधार पर एसओजी पुलिस ने बांग्लादेश से गुजरात के सूरत लाई गई किशोरी को रेलवे स्टेशन इलाके में मुक्त करवा कर मानव तस्कर गिरोह से जुड़े एक महिला समेत तीन बांग्लादेशी नागरिकों को गिरफ्तार किया है। ये लोग किशोरी के परिवार को रुपए का लालच देकर दलालों के मार्फत अवैध रूप से भारत लाए थे और यहाँ उससे देह व्यापार करवाया जा रहा था।

पुलिस ने बताया कि गिरोह का मुख्य सूत्रधार बांग्लादेश के नडाइल जिले के माधव पासा गाँव का मूल निवासी मिजानूर शेख उर्फ शरीफुल, उसकी बीबी अजमिरा खातून व नडाइल जिले के ही पस्तोहनिया गाँव का निवासी मुर्तजा शेख मिल कर मानव तस्करी का गिरोह चलाते हैं।

वे बांग्लादेश के नाइडल जिले के अति गरीब परिवारों की मजबूरी का फायदा उठा कर उन्हें अपने जाल में फँसाते हैं और गरीब परिवार की मासूम लड़कियों को भारत में काम दिलवाने और उनके परिजनों को रुपए का लालच देकर वे किशोरियों व युवतियों को भारत लाते हैं। फिर यहाँ उनसे देह व्यापार करवा कर उनका शोषण करते हैं। वे अब तक बांग्लादेश से न जाने कितनी किशोरियों और युवतियों को मानव तस्करी के जरिए भारत में लाकर देह व्यापार के दलदल में धकेल चुके हैं। उनके और कितने साथी व गिरोह सक्रिय है! इस बारे में पूछताछ की जा रही है।

दलाल ने मात्र 4,000 में सीमा पार करवाई 

पुलिस के मुताबिक, पीड़ित किशोरी भी बांग्लादेश के नडाइल जिले की रहने वाली है। उसके परिवार को रुपए का लालच देकर यहाँ लाया गया। मिजानुर और अजमिरा ने उसे बांग्लादेश से सूरत लाने का काम मुर्तजा को सौंपा था और उसे पन्द्रह हजार रुपए दिए थे। मुर्तजा ने बांग्लादेशी दलाल जिलाल को सीमा पार करवा कर भारत में घुसपैठ करने के लिए चार हजार रुपए दिए थे। भारत में घुसने के बाद वह कोलकाता होते हुए पीड़ित किशोरी को सूरत ले आया था और उसे मिजानुर और उसकी बीबी के हवाले कर दिया था।

रेलवे स्टेशन इलाके में करवाते थे देह व्यापार 

मिजानुर और अजमिरा किशोरी को अपने साथ रखते थे और उससे देह व्यापार करवाते थे। वे रेलवे स्टेशन और अन्य स्थानों पर ग्राहकों की तलाश में जाते और उसकी देह का सौदा कर रुपए वसूलते थे। जिसमें से बहुत कम उसके परिजनों को देते थे। उनके बारे में एटीएस से एसओजी को सूचना मिलने पर एसओजी ने पड़ताल शुरू की। शुक्रवार को मुखबिरों से उनके रेलवे स्टेशन इलाके में स्थित सिटी बस स्टैंड पर होने की पुख्ता सूचना मिलने पर एसओजी ने कार्रवाई की। एसओजी ने किशोरी को मुक्त करवाकर चिल्ड्रन हेल्प लाइन को सौंप दिया और उनके खिलाफ महिधरपुरा थाने में मामला दर्ज किया। बांग्लादेशी दलाल जिलाल को वांछित घोषित किया है।

सभी तरह के फर्जी पहचान पत्र मिले 

मिजानूर और उसकी बीबी अजमिरा दोनों शहर के निकट खोलवड़ गाँव में कामरेज रोड पर स्थित पंचवटी कॉम्प्लेक्स में रहते हैं। उन्होंने भारत के मतदाता पहचान पत्र, पैन कार्ड, आधार कार्ड, ड्राइविंग लाइसेंस समेत सभी तरह के फर्जी पहचान पत्र बना रखे हैं। लंबे समय से वे अवैध रूप से भारत में रह रहे हैं। भरूच में मदीना मस्जिद के पास रहने वाले मुर्तजा ने भी अपने सभी तरह के फर्जी पहचान पत्र बना रखे हैं। वह भी लंबे समय से अवैध रूप से भारत में रह रहा है। पुलिस को इनके पास कार्ड बरामद हुए है। शातिर मुर्तजा पहले भी 2013 में फर्जी दस्तावेज बना कर अवैध रूप से भारत में रहने के आरोप में ओलपाड़ थाने में पकड़ा गया था। लेकिन बाद में फिर लौट आया था।

छत्तीसगढ़ में कोविड अस्पताल में आग, 5 की मौत: मरीजों-परिजनों को खुद ही बचानी पड़ी जान

शनिवार (17 अप्रैल 2021) को छतीसगढ़ की राजधानी रायपुर के एक निजी अस्पताल में आग लगने से कोरोना वायरस से संक्रमित 5 मरीजों की मौत हो गई। एक मरीज की मौत आग से जलने जबकि 4 अन्य मरीजों की मौत दम घुटने से हुई। बताया जा रहा है कि अस्पताल में आग लगने की स्थिति से निपटने के लिए कोई सेफ्टी मैनेजमेंट नहीं था।

रायपुर के पचपेड़ी नाका स्थित राजधानी अस्पताल को कोविड अस्पताल में परिवर्तित किया गया था। दो फ्लोर के इस अस्पताल में हादसे के दौरान 50 मरीज भर्ती थे। शनिवार को आईसीयू वार्ड के पंखे में हुए शॉर्ट सर्किट के कारण कोविड वार्ड में आग लग गई। आग के कारण सभी कमरों में धुआँ भर गया।

इस घटना में आग से झुलसने के कारण एक मरीज की मौत हो गई जबकि ऑक्सीजन सप्लाई सिस्टम फेल होने के कारण दम घुटने से चार अन्य मरीजों की मृत्यु हुई है। मरने वालों में रमेश साहू, एल. ईश्वर राव, वंदना गजमाला, देवकी सोनकर और भाग्यश्री शामिल हैं।

छत्तीसगढ़ में रायपुर का राजधानी अस्पताल (फोटो : दैनिक भास्कर)

चीफ मेडिकल अधिकारी डॉ. मीरा बघेल ने दैनिक भास्कर को सूचना दी कि घटना के बाद 29 मरीजों को अलग-अलग सरकारी और निजी अस्पतालों में ले जाया गया है जबकि 10 मरीजों को यशोदा अस्पताल में भर्ती किया गया है।

अस्पताल प्रबंधन की लापरवाही

राजधानी अस्पताल की इस घटना में अस्पताल प्रबंधन की लापरवाही सामने आ रही है। शुरुआत में आग लगने के दौरान ही अस्पताल प्रबंधन ने कोई गंभीरता नहीं दिखाई, जिससे आग बढ़ती गई। मरीजों के साथ आए हुए परिजनों ने काँच तोड़कर धुआँ निकलने की जगह बनाई। प्रशासन के विलंब से पहुँचने के कारण मरीजों के परिजनों को स्वयं ही मरीजों की व्यवस्था करनी पड़ी।

अस्पताल में आग लगने के बाद की स्थिति को नियंत्रित करने के लिए कोई सेफ्टी मैनेजमेंट सिस्टम नहीं था। दैनिक भास्कर की रिपोर्ट के अनुसार स्वास्थ्य विभाग ने किसी भी कोविड अस्पताल से सुरक्षा संबंधी कोई जानकारी नहीं ली थी। इस घटना के बाद स्वास्थ्य विभाग सक्रिय हुआ।  

परिजनों को स्वयं करनी पड़ी मरीजों की व्यवस्था (फोटो : दैनिक भास्कर)

आपको बता दें कि छत्तीसगढ़ में कोरोना वायरस का संक्रमण लगातार बढ़ता जा रहा है। पिछले 24 घंटों के दौरान राज्य में 16,000 से अधिक संक्रमित मरीज मिले और 158 संक्रमितों की मौत हुई। इसके साथ ही छत्तीसगढ़ में सक्रिय मरीजों की संख्या बढ़कर 1,30,400 हो गई है।

रामनवमी के अवसर पर अयोध्या न आएँ, घरों में पूजा-अर्चना करें: रामनगरी के साधु-संतों का फैसला, नहीं लगेगा मेला

अयोध्या के सबसे बड़े पर्व के रूप में रामनवमी को मनाया जाता है। यहाँ रामलला के लिए बधाई गीत गाए जाते हैं। आस्था की डगर पर चलते हुए लाखों श्रद्धालु अलग-अलग स्थानों से अयोध्या पहुँचते हैं और श्रद्धा में सराबोर हो सब कुछ भूल जाते हैं। यूँ कहें कि रामनवमी के अवसर पर अयोध्या हर्ष और उत्साह के रूप में हर किसी को अपनी ओर खींचती है और हर कोई खिंचा चला आना भी चाहता है, लेकिन कोरोना वायरस के संक्रमण का ऐसा दौर है कि अब उसी रामनवमी पर अयोध्या के सभी बड़े संत-महंत लोगों से अपील कर रहे हैं कि लोग अयोध्या आने के बजाय अपने घरों में ही भगवान की पूजा और आराधना करें।

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग से अयोध्या के संतों से विकास भवन में वार्ता की। वार्ता के बाद संत समाज ने राम भक्तों से अपील की है कि वे रामनवमी के अवसर पर अयोध्या न आएँ और अपने घरों में पूजा-अर्चना करें।

मणिराम छावनी के उत्तराधिकारी महंत कमल नयन दास ने कहा कि कोरोना संक्रमण की स्थिति भयावह होती चली जा रही है। ऐसे में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से बात हुई है। मुख्यमंत्री ने आग्रह किया है कि इस बार रामनवमी मेला के लिए श्रद्धालु अयोध्या ना आएँ और अपने घरों में ही रहकर भगवान का जन्मोत्सव मनाएँ। कोरोना संक्रमण से बचाव के लिए सभी उपायों को अपनाएँ। क्योंकि जान है, तो जहान है।

जिलाधिकारी अनुज कुमार झा ने कहा कि कोरोना संक्रमण के खतरे को देखते हुए अयोध्या के धार्मिक स्थलों पर श्रद्धालुओं की भीड़ नही होने देंगे। पाँच से ज्यादा श्रद्धालु धार्मिक स्थलों पर नहीं रह सकते हैं। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने संतों के साथ वीसी कर निर्णय लिया है। राम नवमी के दौरान अयोध्या में बाहरी लोगों के प्रवेश पर रोक लगेगी। जरूरत पड़ी तो सीमाएँ भी सील हो सकती हैं।

उन्होंने कहा कि अयोध्या में जो लोग बाहर से आएँगे, उनका कोविड टेस्ट होगा। रिपोर्ट नेगेटिव होने पर ही प्रवेश मिलेगा। राम नवमी पर मेला नहीं लगेगा क्योंकि भीड़ नहीं इकट्ठी करनी है। साधु-संत मंदिरों में रामलला का जन्मोत्सव मनाएँ। अयोध्या में नाइट कर्फ्यू पर विचार चल रहा है। बताते चलें कि पिछले वर्ष भी कोरोना संक्रमण के खतरे को देखते हुए रामनवमी मेला नहीं लगा था। अयोध्या की सीमाएँ सील की गई थीं।

रोजा वाले वकील की तारीफ, रमजान के बाद तारीख: सुप्रीम कोर्ट के जज चंद्रचूड़, पेंडिग है 67 हजार+ केस

शुक्रवार (16, अप्रैल) को सुप्रीम कोर्ट के जज डीवाई चंद्रचूड़ ने सुनवाई के दौरान एक वकील से कहा कि वो रमजान के दौरान बिना पानी की एक बूँद भी पिए पूरे दिन उपवास करने की उनकी क्षमता की प्रशंसा करते हैं। इसके बाद जस्टिस चंद्रचूड़ ने वकील को राहत देते हुए सुनवाई को स्थगित कर दिया।

जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़ और जस्टिस एमआर शाह की पीठ इलाहाबाद उच्च न्यायालय के 29 नवंबर 2019 के निर्णय के विरुद्ध दाखिल स्पेशल लीव पिटीशन (एसएलपी) पर सुनवाई कर रहे थी। उच्च न्यायालय के इस निर्णय में याचिककर्ता को हत्या का दोषी ठहराया गया था और उसे उम्रकैद की सजा दी गई थी।

याचिककर्ता के वकील ने पीठ से समय माँगते हुए कहा, “रमजान चल रहा है और कोविड-19 का संकट भी है। क्या आप कृपया रमजान के बाद इस मामले को सूचीबद्ध कर सकते हैं?”

लाइव लॉ के अनुसार वकील के इस निवेदन पर जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़ ने कहा, “आई एम सॉरी, आप पहले ही बता देते तो हम मामले को स्थगित कर सकते थे। आप कृपया जाइए और आराम करिए। मैं बिना पानी की एक बूँद भी पिए पूरे दिन उपवास रहने की क्षमता की प्रशंसा करता हूँ।“

इसके बाद जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़ की पीठ ने याचिककर्ता के वकील को राहत देते हुए एसएलपी पर हो रही सुनवाई को स्थगित कर दिया और एसएलपी पर आगामी सुनवाई के लिए 10 मई 2021 की तारीख को सूचीबद्ध कर दिया।

एकदम सरकारी आँकड़ा

सुप्रीम कोर्ट में पेंडिंग केस की बात करें तो यह 4 अप्रैल 2021 तक 67279 के आँकड़े तक पहुँच गई थी। एक रोचक बात और… सुप्रीम कोर्ट में रामलला विराजमान की तरफ से जो वकील पेश हुए थे, उनका नाम के पराशरण है। बहस से समय 92 साल के थे। तब पराशरण ने घंटों खड़े होकर बहस की थी। अदालत में जजों ने उनकी उम्र को देखते हुए उन्हें बैठ कर बहस करने की सहूलियत दी, लेकिन पराशरण ने कहा कि इंडियन बार की जो परंपरा है, वह उसी हिसाब से चलेंगे।

’24 घंटे सोते हैं मोदी, खुद अमित शाह ने खोली पोल’ – AAP ने शेयर किया वीडियो – फैक्ट चेक

केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह शनिवार (अप्रैल 17, 2021) को बंगाल के छठवें चरण के लिए चुनाव प्रचार करने पहुँचे। अमित शाह ने पहले अमदंगा में रोड शो किया। फिर नादिया जिला के छपरा में सभा को संबोधित किया। इसी सभा के वीडियो क्लिप का एक छोटा सा हिस्सा शेयर कर आम आदमी पार्टी (AAP) ने झूठ फैलाने की कोशिश की।

आम आदमी पार्टी ने अपने आधिकारिक ट्विटर हैंडल से वीडियो क्लिप को शेयर करते हुए लिखा, “अमित शाह ने खोली मोदी जी की पोल- कहा 24 घंटे सोते हैं मोदी जी। काश! मोदी जी 24 घंटे ना सोते तो कुछ जानें बच सकती थीं।”

AAP के ट्वीट का स्क्रीनशॉट (अलाय-बलाय छाप कर डिलीट करना इनकी पुरानी आदत, इसलिए स्क्रीनशॉट)

सच क्या है?

हमने इस क्लिप की सच्चाई जानने के लिए पूरी वीडियो सुनी। इसमें उन्होंने टीएमसी प्रमुख ममता बनर्जी पर जमकर निशाना साधा है। नदिया जिले के छपरा में आयोजित सभा के दौरान शाह ने कहा, “ये भतीजा कल्याण करने वाली सरकार है। मोदी जी 24 घंटा सोचते हैं कि देश के गरीबों का कल्याण हो और दीदी 24 घंटा सोचती हैं कि मेरा भतीजा कब मुख्यमंत्री बने। एक तरफ गरीबों का, हर जनता का कल्याण करने वाली है मोदी सरकार है और दूसरी ओर अपने भतीजे का कल्याण सोचने वाली दीदी।”

अमित शाह के भाषण के इस हिस्से को आप वीडियो में 5:35 से 6:09 के बीच सुन सकते हैं। आम आदमी पार्टी ने ‘सोचते’ को ‘सोते’ बता कर जनता के बीच झूठ फैलाने की कोशिश की।

अमित शाह ने कहा, “बंगाल में बीजेपी सरकार बनते ही हम मतुआ, नामशूद्र समाज के लोगों सम्मान के साथ भारत का नागरिक बनाएँगे। दीदी को जितना विरोध करना है, वो करें, हम सीएए के तहत शरणार्थियों को भारत की नागरिकता देंगे। भतीजा कल्याण में व्यस्त ममता दीदी की विदाई का समय आ गया है। ममता दीदी की विदाई धूमधाम से होनी चाहिए। बड़े नेता की विदाई बड़े मार्जिन से होनी चाहिए।

अमित शाह ने कूचबिहार मामले पर भी ममता बनर्जी को जम कर घेरा। उन्होंने कहा, “अभी-अभी इनकी एक ऑडियो क्लिप आई। उत्तर बंगाल के कूचबिहार में 4 लोग मारे गए। दीदी कह रही हैं कि उनका अंतिम संस्कार मत करना। मैं आउँगी उनको ट्रक में रखेंगे, उनको घुमाएँगे और वोट बटोरेंगे। अरे दीदी शर्म करो। मृतक लोगों पर राजनीति करना चाहती हो। जो मर गए हैं, उनका शोक मनाने के बजाय आप उनके नाम पर वोट बटोरना चाहती हैं।” इसे आप वीडियो में 12:28 से 13:10 के बीच सुन सकते हैं।

वैसे ये पहली बार नहीं है जब आम आदमी पार्टी ने इस तरह से झूठ फैला कर जनता को मूर्ख बनाने की कोशिश की है। हाल ही में केजरीवाल सरकार ने दिल्ली का विकास कितने अच्छे तरीके से किया है, यह दिखाने के लिए आम आदमी पार्टी ने ‘अप्रैल फूल’ की पूर्व संध्या पर दो अलग-अलग स्थानों की तस्वीर को चाँदनी चौक का बताकर लोगों को मूर्ख बना दिया।

दरअसल, आम आदमी पार्टी ने आधिकारिक ट्विटर हैंडल से दो तस्वीरों को मिक्स करके ट्वीट किया, जिसमें दिल्ली के चाँदनी चौक को पहले और बाद के तौर पर दिखाया गया था। पहली इमेज में सँकरी गलियाँ और भीड़-भाड़ वाली गली को दिखाया गया है। दूसरी तस्वीर में चौड़ी और साफ-सुथरी सड़क और चारों तरफ हरियाली दिखाई गई थी।

एक परिवार के 4 लोग सिर्फ 15 दिन में… पुणे में कोरोना के कारण एक-एक कर जली सबकी चिता

पुणे से एक दिल दहलाने वाली खबर है। कोरोना वायरस (Coronavirus) संक्रमण ने एक पूरे खानदान को खत्म कर दिया है। महाराष्ट्र में कोरोना लगातार जानलेवा हो रहा है। पुणे के एक परिवार में जब संक्रमण पहुँचा तो उसने चार लोगों की जान ले ली।

पिछले पंद्रह दिनों में एक-एक कर जाधव परिवार के चार लोग मौत के हवाले हो गए। माँ अलका जाधव, भाई रोहित जाधव, अतुल जाधव और बहन वैशाली गायकवाड की कोरोना से मौत हो गई। पूजा के कार्यक्रम में यह परिवार इकट्ठा हुआ था। पूजन के कार्यक्रम के बाद घर में कोरोना का संक्रमण एक-दूसरे को फैलता गया और देखते ही देखते जाधव परिवार खत्म होता गया।

कोरोना से एक ही परिवार के चार लोगों की मौत होने से पूरे इलाके में दहशत का माहौल है। सिर्फ 15 दिनों में परिवार के 4 लोगों की मौत से कोरोना के खतरे का अंदाजा लगाया जा सकता है।

पूजा में शामिल हुए थे

जाधव परिवार ने कुछ दिनों पहले घर में पूजा का आयोजन किया था। इस पूजा के कार्यक्रम में घर के सभी सदस्य सम्मिलित हुए। इनमें से किसी एक से सबको एक के बाद एक कोरोना का संक्रमण होता गया। धीरे-धीरे सबकी तबीयत बिगड़ती गई और फिर जब तक परिवार एक धक्के से सँभलता कि दूसरा धक्का आ जाता और देखते ही देखते सिर्फ 15 दिनों में पूरा परिवार तबाह हो गया, बर्बाद हो गया।

बहन वैशाली के पति अरुण गायकवाड ने बताया कि 15 मार्च को उनके ससुर की जनवरी में हुई मौत के बाद कुछ रस्में करने के लिए पूरा परिवार इकट्ठा हुआ था। भारतीय वायु सेना में काम करने वाले गायकवाड ने बताया, “हम उनके घर पर इकट्ठे हुए थे। मेरे साले रोहित को सर्दी और खाँसी थी। उसकी हालत बिगड़ती गई और टेस्ट में वह कोरोना पॉजिटिव पाया गया। इसके बाद एक-एक कर परिवार के 17 लोग कोरोना पॉजिटिव हुए, जिसमें मेरी पत्नी, बेटी, दूसरा साला और सास शामिल थीं।”

गायकवाड ने रुँधे गले से कहा, “28 मार्च को मेरी पत्नी की हालत खराब हो गई। मुझे उसके लिए ICU बेड लेने के लिए काफी दौड़ना पड़ा। 30 मार्च को उसकी मौत हो गई। 3 अप्रैल को रोहित की मौत हो गई। मेरी सास ने 4 अप्रैल को दम तोड़ दिया और मेरे दूसरे साले अतुल का तीन दिन पहले निधन हो गया।” 

उन्होंने कहा कि यह एक दु:स्वप्न की तरह है। एक तरफ जहाँ परिवार के बीमार सदस्यों के लिए दवाइयों और बिस्तर की व्यवस्था के लिए जूझ रहे थे, वहीं दूसरी तरफ उसी समय में परिवार के मृत सदस्य के अंतिम संस्कार की भी व्यवस्था कर रहे थे। गायकवाड ने कहा, “मैं लोगों से इस महामारी को हल्के में नहीं लेने की अपील करता हूँ। नियमों का पालन करें और अपना और अपने परिवार के सदस्यों का ख्याल रखें।”

पुणे में कोरोना की स्थिति भयंकर

पुणे में कोरोना की स्थिति भयंकर से भयंकर होती जा रही है। हर रोज कोरोना संक्रमितों की संख्या में वृद्धि होती जा रही है। भारत में सबसे ज्यादा एक्टिव पॉजिटिव केस पुणे में हैं। भारत में जो तीन सबसे बुरी तरह प्रभावित शहर हैं, वे तीनों महाराष्ट्र से ही हैं। मुंबई, पुणे, नागपुर, नासिक पिछले एक महीने में सबसे ज्यादा कोरोना संक्रमितों की संख्या में एक से लेकर चार नंबर तक कायम हैं।

पुणे में कोरोना की इसी भयानक वास्तविकता को ध्यान में रखते हुए सभी हाउसिंग सोसाइटियों पर बाहर से किसी भी आने वाले व्यक्ति को प्रवेश देने पर पाबंदी लगाई गई है। लॉकडाउन सख्त कर दिया गया है और कर्फ्यू के नियमों को तोड़ने पर कार्रवाई की जाएगी।

Exclusive: महाराष्ट्र में हजारों टन दाल बर्बाद, ठाकरे सरकार की बड़ी लापरवाही – केंद्र ने भेजा, रखे-रखे सड़ गया

मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे द्वारा शासित महाराष्ट्र कोरोना महामारी से सबसे ज्यादा त्रस्त है। महामारी की शुरुआत से अब तक राज्य में संक्रमितों की संख्या 3 मिलियन पर पहुँच गई है। कोविड की पहली लहर के बाद दूसरी लहर में भी देश में सबसे अधिक संक्रमित महाराष्ट्र से हैं। ऐसे हालात में केंद्र और राज्य को मिलकर काम करने की जरूरत थी, ताकि मुश्किल वक्त में जनता की मदद की जा सके। लेकिन, उद्धव सरकार ऐसा करने में असफल रही है।

इसकी पोल खोलते हुए मुलुंड के विधायक मिहिर कोटेचा ने एक वीडियो शेयर किया है। इसमें यह दिखाया गया है कि राज्य की खराब नीतियों के कारण चना दाल और अन्य दालों की भारी बर्बादी हो रही है। जिन दालों की आपूर्ति केंद्र ने की थी, अब उसमें कीड़े पड़ गए हैं। बता दें कि छगन भुजबल महाराष्ट्र सरकार में खाद्य और नागरिक आपूर्ति, उपभोक्ता मामलों के कैबिनेट मंत्री हैं।

कोटेचा वीडियो में कहते हैं कि अगस्त-सितंबर से दालें गोदामों में पड़ी हुई हैं, जो खराब हो गई हैं। उनके मुताबिक, अक्टूबर में ही एक दुकान में 1,800 किलो दाल खराब हो चुकी थी। दूसरी जगहों पर 3,00,000 किलो चना दाल खराब हुई है। विधायक ने कहा कि पिछले तीन महीने से महाराष्ट्र सरकार, खासकर छगन भुजबल इतने व्यस्त हैं कि जवाब नहीं दे रहे हैं। उन्होंने दावा किया कि राज्य सरकार की गलत नीतियों के कारण अब तक 180 करोड़ रुपए की दाल बर्बाद हो गई है।

ऑपइंडिया को भारत सरकार का एक नोट मिला है, जिसमें दिखाया गया है कि महाराष्ट्र सरकार ने प्रधानमंत्री गरीब कल्याण योजना के तहत दी गई दालों के बचे होने की जानकारी केंद्र सरकार को देने में देरी की। जबकि, दूसरे राज्यों में दालों को बर्बादी से बचाने के लिए केंद्र ने इजाजत दे दी थी।

नोट में यह विस्तार से बताया गया है कि दालों के वितरण की शुरुआत में ही उपभोक्ता मामलों के विभाग ने राज्यों/केंद्रशासित प्रदेशों के साथ विभिन्न वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए दालों को बर्बादी से बचाने के लिए अग्रलिखित निर्देश दिए थे। 22 जुलाई 2020 को आयोजित वीडियो कॉन्फ्रेंस में यह निर्णय लिया गया था कि PMGKAY-1 के तहत बचे हुए दालों/चना को राज्यों को आत्मनिर्भर भारत योजना बढ़ावा देने के लिए PMGKAY-2 के तहत वितरित किया जाना चाहिए।

2 सितंबर 2020 को आयोजित संयुक्त वीडियो कॉन्फ्रेंस में यह निर्णय लिया गया था कि जो भी खाद्यान्न/दालें बाँटे जाने के बाद बची रहेंगी, उन्हें बाद में PMGKAY-2 के तहत उसका आवंटन या उसे उठाया जाएगा। 22 सितंबर को आयोजित वीडियो कॉन्फ्रेंस में एक बार फिर से राज्यों को बताया गया था कि वो आवंटन के अनुसार NAFED को इसकी जानकारी दें ताकि अन्न की बर्बादी से बचा जा सके।

नोट के अनुसार, 26 नवंबर 2020 को आयोजित वीडियो कॉन्फ्रेंस में महाराष्ट्र सरकार ने केंद्र सरकार को जानकारी दी थी कि उसके पास PMGKAY-1 के तहत 910 MT और आत्मनिर्भर भारत के तहत 804 MT खाद्यान्न बचा हुआ था। इसलिए केंद्र सरकार को PMGKAY-2 के तहत दालों को एडजस्ट करना चाहिए। इतना ही नहीं PMGKAY-2 के तहत दालों के आवंटन के लिए महाराष्ट्र सरकार ने विशेष अनुरोध में भी देरी की थी। महाराष्ट्र ने प्रसंस्कृत चना दाल वितरित करने का अनुरोध किया था। इस कारण आवंटन में थोड़ा विलंब हुआ।

PMGKAY-2 के तहत दालों के आवंटन के बाद राज्यों को 18 दिसंबर 2020 को जानकारी दी गई थी कि वे केंद्र को वितरण और राज्य के पास बचे हुए दालों की ऑडिट रिपोर्ट दें। बार-बार कहने के बाद दूसरे राज्यों ने ऑडिट रिपोर्ट भेजने के बाद बची हुई दालों के उपयोग की अनुमति भी माँग ली थी।

यहाँ वो लिस्ट है, जिसमें राज्यों ने बचे हुए दालों के उपयोग के लिए अनुरोध किया था।

केंद्र सरकार द्वारा जारी नोट का एक भाग

केंद्र सरकार ने अन्य राज्यों को बची हुई दालों के उपयोग के लिए अपनी मंजूरी दे दी थी, लेकिन महाराष्ट्र इसमें पीछे रह गया। केंद्र ने 18 दिसंबर 2020 को राज्यों को सूचित कर उनसे ऑडिट रिपोर्ट माँगा था। इस दौरान दूसरे राज्य मार्च 2021 तक की बची दालों की ऑडिट रिपोर्ट देने के बाद उसके इस्तेमाल का अनुरोध भी कर लिया था। केवल महाराष्ट्र ने ही इसमें देरी की।

दिसंबर में माँगी ऑडिट रिपोर्ट अप्रैल में दिया जवाब

भारत सरकार के नोट के मुताबिक, महाराष्ट्र ने 6 अप्रैल 2021 को केंद्र सरकार को पत्र लिखा था, जिसमें यह बताया गया था कि 6441.922 मीट्रिक टन दाल/चना PMGKAY I-II और आत्मनिर्भर भारत के तहत पूरा बचा हुआ है। उद्धव सरकार का ये पत्र 8 अप्रैल केंद्र को मिला। 13 अप्रैल को केंद्र सरकार ने इसका अनुमोदन कर दिया, जिसके बाद 15 अप्रैल 2021 को महाराष्ट्र सरकार ने अपनी प्रतिक्रिया भेजी। केंद्र की अनुमति के मुताबिक महाराष्ट्र को सूचित किया गया था कि वह 6441.922 मीट्रिक टन बची हुई दालों का उपयोग कर सकता है।

इस मामले में अहम बात यह है कि केंद्र ने 18 दिसंबर 2020 को महाराष्ट्र को बचे हुए दालों की जानकारी देने को कहा था, लेकिन महाराष्ट्र सरकार ने 6 अप्रैल 2021 तक केंद्र सरकार को बची दालों की जानकारी देने में समय लिया। वीडियो में यह बात स्पष्ट हो गई है जिन दालों का उपयोग जरूरमंदों की मदद के लिए किया जा सकता था, वो हजारों मीट्रिक टन दालें बर्बाद हो गईं।

महाराष्ट्र सरकार को इस बात का जवाब देना चाहिए कि महामारी के समय में भी हजारों टन दालें क्यों बर्बाद हो गईं। आखिर महाराष्ट्र सरकार ने बची दालों की जानकारी देने के लिए दिसंबर से अप्रैल तक का समय क्यों लिया?

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Remdesivir का जो है सप्लायर, उसी को महाराष्ट्र पुलिस ने कर लिया अरेस्ट: देवेंद्र फडणवीस ने बताई पूरी बात

महाराष्ट्र में कोरोना वायरस संक्रमण के खिलाफ कारगर दवा रेमडेसिविर (Remdesivir) पर राजनीति गरमा गई है। महाराष्ट्र के पूर्व मुख्यमंत्री और भारतीय जनता पार्टी के नेता देवेंद्र फडणवीस ने आरोप लगाया है कि रेमडेसिविर सप्लायर को महाराष्ट्र पुलिस परेशान कर रही है।

देवेंद्र फडणवीस ने कहा है कि राज्य की पुलिस दमन स्थित रेमडेसिविर सप्लायर को सिर्फ इसलिए परेशान कर रही है क्योंकि वहाँ के सप्लायर ने बीजेपी नेताओं के अनुरोध पर राज्य को एंटी वायरल ड्रग रेमडेसिविर का स्टॉक देने पर राजी हो गए थे। हालाँकि महाराष्ट्र पुलिस ने इन आरोपों को खारिज कर दिया है। उन्होंने कहा है कि वह बस स्टॉक की जाँच के लिए निकले थे ताकि कालाबाजारी ना हो।

देवेंद्र फडणवीस ने मीडिया से बात करते हुए कहा, “चार दिन पहले, हमने ब्रुक फार्मा को महाराष्ट्र में रेमडेसिविर इंजेक्शन के स्टॉक की आपूर्ति करने का अनुरोध किया था। उन्होंने कहा कि वे अनुमति नहीं दे सकते थे। मैंने केंद्रीय मंत्री मनसुख मंडाविया से बात की और खाद्य एवं औषधि प्रशासन (एफडीए) से रेमडेसिविर सप्लाई के लिए अनुमति ली, जिसके बाद आज रात (अप्रैल 17, 2021) लगभग नौ बजे, पुलिस ने उन्हें गिरफ्तार कर लिया है।”

महाराष्ट्र के पूर्व मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने कहा कि पुलिस उपायुक्त (डीसीपी) मंजूनाथ सिंगे ने उन्हें बताया कि उनके पास इनपुट थे कि कुछ निर्यातकों के पास 60,000 रेमडेसिविर की शीशियाँ थीं और वे केवल उसी की जाँच के लिए जा रहे हैं। लेकिन वहाँ जाकर उन्होंने गिरफ्तारी कर ली।

फडणवीस ने बताया कि (फार्मा कंपनी के मालिक से) बात करने पर पता चला कि उन्हें धमकी दी गई है। इस बारे में देवेंद्र फडणवीस ने डीसीपी और एडिशनल सीपी से बात कर उन्हें तुरंत छोड़ने की माँग की। फडणवीस ने महाविकास अघाड़ी (MVA) सरकार में एनसीपी (NCP) कोटे से मंत्री नवाब मलिक (Nawab Malik) पर महाराष्ट्र में रेमडेसिविर  की मौजूदा स्थिति को लेकर झूठ बोलने का आरोप लगाया। फडणवीस ने कहा कि नवाब मलिक को सिर्फ कोरी राजनीति करना और नैरेटिव सेट करना आता है, उन्हें राज्य के लोगों की जान से कोई लेना-देना नहीं है।

देवेंद्र फडणवीस ने कहा कि उन्होंने डीसीपी मंजूनाथ सिंगे को अनुमति पत्र दिखाया और बताया कि रेमडेसिविर की सप्लाई के लिए उन्होंने बोला है। लेकिन डीसीपी ने कहा कि इससे पहले उन्हें (पुलिस को) सूचित नहीं किया गया था। देवेंद्र फडणवीस ने कहा कि ये जो भी कुछ राज्य की सरकार पुलिस के साथ मिलकर कर रही है, वो गलत है।

देवेंद्र फडणवीस के आरोपों को डीसीपी मंजूनाथ सिंगे ने गलत बताया है। उन्होंने कहा है कि पुलिस ने किसी भी रेमडेसिविर सप्लायर को गिरफ्तार नहीं किया है बल्कि उन्हें बस पूछताछ के लिए बुलाया था, क्योंकि एंटी वायरल दवा की व्यापक कालाबाजारी के इनपुट्स मिले थे।

गौरतलब है कि केंद्र सरकार ने रेमडेसिविर इंजेक्शन और उससे जुड़े सभी प्रकार के इनग्रेडिएंट्स के निर्यात पर फिलहाल रोक लगा दी है। कोरोना वायरस के बढ़ते संक्रमण के बीच सरकार ने यह निर्णय लिया है कि जब तक देश में कोविड-19 की स्थिति नहीं सुधरती है, तब तक रेमडेसिविर के निर्यात पर रोक लगी रहेगी।

बमबारी, अपहरण, मारपीट और वोटर्स को धमकाने की 7 घटनाएँ: पश्चिम बंगाल में पाँचवे चरण के चुनाव में हिंसा का लेखा-जोखा

पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव में अब तक हुई हिंसा को देखते हुए चुनाव आयोग ने सुरक्षा व्यवस्था को और भी चाक-चौबंद करने का निर्णय लिया। इसके बाद भी शनिवार (17, अप्रैल) को संपन्न हुए पाँचवे चरण के मतदान के दौरान हिंसा की कई घटनाएँ देखी गईं।  

भाजपा नेता के घर पर बमबारी :

शुक्रवार की रात को कल्याणी विधानसभा के सुगुना में भाजपा के बूथ अध्यक्ष के घर पर कुछ उपद्रवियों ने बम से हमला किया जिसके कारण भाजपा नेता के घर की दीवार नष्ट हो गई। Zee 24 घंटा में इसकी जानकारी दी गई। घटना के 12 घंटे बीत जाने के बाद भी जिंदा क्रूड बम वहीं पड़े हुए थे। हालाँकि, स्थानीय लोगों ने पुलिस प्रशासन को इसकी सूचना दे दी थी।

वीडियो : यूट्यूब /24 घंटा

भाजपा का पोलिंग एजेंट लापता, तृणमूल कॉन्ग्रेस के सदस्यों पर आरोप :

शनिवार को उत्तरी 24 परगना के मिनखान तहसील में भाजपा के पोलिंग एजेंट भानू भुईया के लापता होने की खबर आई। भाजपा के अनुसार भानू जब सुबह पोलिंग स्टेशन जा रहा था तब उसे तृणमूल कॉन्ग्रेस के सदस्यों द्वारा बूथ में प्रवेश करने से रोका गया। उसके बाद से ही पार्टी भानू को खोज नहीं पा रही है। भाजपा ने टीएमसी के सदस्यों पर अपने पोलिंग एजेंट के अपहरण का आरोप लगाया है और चुनाव आयोग से हस्तक्षेप करने की माँग करने का निर्णय लिया है।

वीडियो : एबीपी न्यूज

भाजपा के पोलिंग एजेंट के साथ तृणमूल कॉन्ग्रेस के सदस्यों द्वारा मारपीट :  

रिपब्लिक टीवी की रिपोर्ट के अनुसार उत्तरी 24 परगना जिले के हरोआ विधानसभा क्षेत्र में टीएमसी के सदस्यों द्वारा भाजपा के पोलिंग एजेंट अजीत धर के साथ मारपीट की गई। रिपोर्ट के अनुसार भाजपा को वोट करने के लिए टीएमसी के सदस्यों ने धर को धमकाया। भाजपा ने आरोप लगाया है कि अजीत धर के साथ लाठी-डंडों से मारपीट की गई है जिससे उनके सिर पर गहरी चोट लगी है। धर को बर्धमान मेडिकल कॉलेज में ईलाज के लिए भर्ती किया गया है। टीएमसी के सदस्यों ने भाजपा के पोलिंग एजेंट धर को रुकवाया और पूछा कि धर ने अम्फान के दौरान तृणमूल सरकार से पैसे क्यों लिए। एक दूसरे भाजपा एजेंट सुब्रत घोष ने भी घटना की पुष्टि की।  

भाजपा कार्यकर्ता की दुकान में तोड़फोड़, एजेंट पर हमला :

News 18 बांग्ला की रिपोर्ट के अनुसार कल्याणी विधानसभा क्षेत्र के गयेशपुर में एक भाजपा कार्यकर्ता की दुकान में तोड़फोड़ की गई। भाजपा का आरोप है कि टीएमसी के सदस्यों ने ही दुकान पर हमला किया है। इसके अलावा एक भाजपा एजेंट को भी पोलिंग बूथ में घुसने से रोका गया। कल्याणी से भाजपा प्रत्याशी अंबिका राय ने बताया कि उनके पोलिंग एजेंट को बूथ में घुसने से रोका गया और उसके साथ मारपीट की गई। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि टीएमसी के गुंडे बूथ कैप्चरिंग के माध्यम से लोकतान्त्रिक प्रक्रिया को रोकना चाहते हैं।

वीडियो : न्यूज 18

टीएमसी सदस्यों पर वोटर्स को धमकाने का आरोप, केन्द्रीय बल मामले में हुए सक्रिय :

शनिवार को भाजपा और लेफ्ट-कॉन्ग्रेस-आईएसएफ के गठबंधन ने आरोप लगाया कि टीएमसी के सदस्य मतदाताओं को डरा रहे हैं और उन्हें वोट डालने से रोक रहे हैं। मामला सान्तिपुर विधानसभा के हरिपुर क्षेत्र का है।

इस मामले के सामने आने के बाद केन्द्रीय सुरक्षा बलों की एक टीम को चुनाव संपन्न कराने के लिए भेज गया। ABP न्यूज के द्वारा शेयर किए गए विजुअल में देखा गया कि सुरक्षा जवान पोलिंग बूथ की सुरक्षा के लिए डटे हुए हैं। सितलकुची की घटना को देखते हुए केन्द्रीय सुरक्षा बलों की अतिरिक्त टुकड़ियों को सुरक्षा व्यवस्था में तैनात किया गया था।

वीडियो : एबीपी न्यूज

भाजपा और टीएमसी के सदस्यों में झड़प, महिला को जमीन पर पटका गया :

शांतिनगर के साल्ट लेक क्षेत्र में तृणमूल कॉन्ग्रेस और भाजपा के कार्यकर्ताओं में भारी झड़प हुई। टीएमसी ने कहा कि भाजपा के प्रत्याशी सब्यसाची दत्ता के आने के बाद वहाँ माहौल तनावपूर्ण हुआ जबकि भाजपा ने आरोप लगाया कि टीएमसी के सदस्य उन्हें वोट डालने से रोक रहे थे। झड़प में दोनों गुटों ने एक-दूसरे पर पत्थर और ईंट चलाए। एक महिला के साथ भी बुरी तरह से मारपीट की गई।

वीडियो : यूट्यूब/24 घंटा

निर्दलीय प्रत्याशी ने टीएमसी सदस्यों का बंदूक लेकर पीछा किया :

पश्चिम बंगाल में पाँचवे चरण के मतदान के दौरान चकदहा विधानसभा क्षेत्र में एक निर्दलीय प्रत्याशी ने बंदूक लेकर टीएमसी सदस्यों को दौड़ा लिया। आरोपित की पहचान कौशिक भौमिक के रूप में हुई है। हालाँकि, भौमिक ने यह आरोप लगाया कि तृणमूल कॉन्ग्रेस के सदस्यों ने भाजपा एजेंट पर हमला किया था और उस पर यह बंदूक फेंकी। उसने दावा किया कि वह यह बंदूक पुलिस थाने में जमा करने जा रहा था।

टीएमसी के सदस्यों का पीछा करते हुए बंदूक नीचे गिर गई और पुलिस द्वारा जब्त कर ली गई। ABP न्यूज के द्वारा शेयर किए गए वीडियो में भौमिक को उसके घर से गिरफ्तार करते हुए देखा जा सकता है।

वीडियो क्रेडिट : एबीपी न्यूज