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बदरुद्दीन अजमल की रैलियों में ‘जादुई पानी’ के लिए मची रही धक्का-मुक्की, समर्थकों का दावा- ठीक होती हैं बीमारियाँ

असम में विधानसभा चुनाव संपन्न हो गए हैं। राज्य में कॉन्ग्रेस ने इस बार बदरुद्दीन अजमल की AIUDF के साथ गठबंधन किया था, जो कट्टरवादी मुस्लिम नेता माने जाते हैं। चुनाव के दौरान अजमल का ‘जादुई पानी (Healing Water)’ खासा चर्चा में रहा, जिसे लेने के लिए कई मुस्लिम लाइन लगाते हैं। उनकी चुनावी रैलियों में अजमल के आशीर्वाद के लिए लोगों ने उस पानी के लिए गजब की धक्का-मुक्की मचाई।

उनके समर्थकों का मानना है कि इस पानी से बड़ी से बड़ी समस्याएँ दूर हो जाती हैं और बीमारियाँ भी चमत्कारिक रूप से ठीक हो जाती हैं। असम के धुबरी जिले में अजमल की एक जनसभा हुई थी, जिसका वीडियो वायरल हो रहा है। इसमें देखा जा सकता है कि बदरुद्दीन अजमल एक कंटेनर में रखी हुई ‘जादुई पानी’ को लोगों के ऊपर छींट कर उन्हें आशीर्वाद दे रहे हैं। कइयों का मानना है कि वो वोट के लिए इस तरह के हथकंडे अपना रहे हैं।

हालाँकि, ये पहली बार नहीं है कि अजमल ने इस तरह की तिकड़म अपनाई हो। 2016 में हुए असम विधानसभा चुनाव में भी उन्होंने अपनी रैलियों में ये तिकड़म आजमाया था और 2019 लोकसभा चुनाव में भी इस पानी की चर्चा हुई थी। मौलवियों का कहना है कि अजमल किसी को नहीं कहते हैं कि वो उनका ‘जादुई पानी’ ले लें। उन्होंने दावा किया कि अजमल के समर्थकों और अनुयायियों ने दबाव डाला कि वो उन्हें इस तरह का पानी दें।

चूँकि, बदरुद्दीन अजमल भी कभी एक मौलाना थे, इसीलिए मुस्लिमों को उन पर इतना विश्वास है। गुवाहाटी स्थित दक्षिणगाँव शाही जामा मस्जिद के पेशे इमाम मोफीदुल इस्लाम ने कहा कि अजमल पहले से ही मजहबी गतिविधियाँ चलाते रहे हैं। उन्होंने कहा कि लोग उनसे भी इसी तरह की पानी की माँग करते हैं, लेकिन वो हमेशा इनकार कर देते हैं। लेकिन, साथ ही उन्होंने ये भी कहा कि अगर अत्यधिक विश्वास करके कुछ माँगते हैं तो फिर वो उन्हें जो चाहिए वो दे देते हैं।

उन्होंने कहा कि जनता के दबाव के कारण अजमल को ऐसा करना पड़ रहा है। हालाँकि, असम में भाजपा के नेता मोइमुल अजमल ने कहा कि बदरुद्दीन अजमल द्वारा ये सब कुछ मुस्लिम वोटरों को रिझाने के लिए किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि अजमल सोशल मीडिया पर भी ऐसा ही कर रहे हैं और इन चीजों का विरोध होना चाहिए। उन्होंने इसे मजहब के नाम पर वोट माँगना करार दिया और कहा कि चुनाव आयोग को इस पर कार्रवाई करनी चाहिए।

कुछ दिनों पहले बदरुद्दीन अजमल ने जनसंख्या नियंत्रण पर बोलते हुए कहा था, “करंट नहीं है। बिजली नहीं है। अब इंसान हैं वो भी। गरीब जब रात को उठेगा। मियाँ-बीवी हैं। दोनों जवान हैं। तो फिर रात को क्या करेंगे? वो बच्चे ही तो पैदा करेंगे।” हाल ही में उनके बेटे अब्दुर रहीम अजमल ने विवाद पैदा करते हुए कहा था, “इस बार यह गरीब लोगों की सरकार होगी। सरकार में दाढ़ी, टोपी और लुंगी वाले पुरुष होंगे।”

असम में हाल में संपन्न हुए चुनाव में 82% वोटर टर्नआउट हुआ। 3 चरणों में मतदान संपन्न कराया गया। पिछले चुनाव के मुकाबले इस बार 2.68% कम वोटिंग हुई। असम में लगातार तीन बार मुख्यमंत्री बनने वाले कॉन्ग्रेस के तरुण गोगोई अब दिवंगत हो चुके हैं। ओपिनियन पोल्स का भी कहना है कि सर्वानंद सोनवाल के नेतृत्व वाली भाजपा की सरकार लौट रही है। भाजपा नेता हिमंत बिस्वा सरमा भी खासे लोकप्रिय हैं।

अस्थायी शमशान… 1 ही चिता… और जला डाले 8 हिन्दुओं के शव: महाराष्ट्र में कोरोना से स्थिति बदतर, नहीं मिल रही सूखी लकड़ियाँ

महाराष्ट्र में कोरोना के कारण स्थिति बिगड़ती ही जा रही है। हालत इतनी खराब है कि श्मशान में मृतकों को जलाने के लिए चिताएँ नहीं मिल रही हैं। ताज़ा मामला बीड जिले का है, जहाँ कोरोना से 8 लोगों की मौत हुई थी। प्रशासन ने आठों शवों को एक अस्थायी श्मशान में एक ही चिता पर जला डाला। स्थानीय लोगों के विरोध के कारण अम्बाजोगई कस्बे में स्थित शव दाहगृह में कोविड-19 के मरीजों के शवों का अंतिम संस्कार किए जाने का विरोध हुआ था।

इसीलिए, प्रशासन ने एक अस्थायी श्मशान की व्यवस्था की। ये जगह कस्बे से दूर स्थित है। ‘दैनिक जागरण’ की खबर के अनुसार, अम्बाजोगई नगर परिषद के प्रमुख अशोक सबाले ने बुधवार (अप्रैल 7, 2021) को जानकारी दी कि पठाण मांडवा रोड पर जहाँ मृत कोरोना मरीजों के अंतिम-संस्कार की व्यवस्था की गई है, वो कस्बे से 2 किलोमीटर की दूरी पर है। उन्होंने दावा किया कि जलाते वक़्त शवों के बीच उचित दूरी रखी गई थी।

उन्होंने दावा किया कि मंगलवार को मजबूरी में आठ शवों को एक ही चिता पर जलाना पड़ा। उन्होंने कहा कि जिस तेज़ी से संक्रमण फ़ैल रहा है, उससे लगता है कि अभी और मौतें होने की आशंका है। अस्थायी श्मशान को विस्तार देकर इसे वॉटरप्रूफ बनाने के लिए भी कदम उठाए जा रहे हैं। जलगाँव में स्थिति इतनी खराब है कि यहाँ के भुसावल में मृतकों को जलाने के लिए लकड़ियाँ कम पड़ रही हैं।

‘TV9 भारतवर्ष’ की खबर के अनुसार, तापी नदी के पास मौजूद श्मशान भूमि में हर दिन आम तौर पर 10 से 15 मृतकों का अंतिम संस्कार किया जाता है, लेकिन अब ये संख्या रोज़ बढ़ती ही जा रही है। आसपास के गाँवों से सूखी लकड़ियाँ मँगवाई जा रही हैं। शवों की लाइन इतनी लंबी है कि अंतिम-संस्कार के लिए परिजनों को इंतजार करना पड़ रहा है। अंबाजोगाई प्रखंड में 4 दिनों में 500 के आसपास नए पॉजिटिव केस सामने आए हैं।

विश्व हिन्दू परिषद (VHP) के राष्ट्रीय प्रवक्ता विनोद बंसल ने इस घटना पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा, “महाराष्ट्र की बीड जिले में 8 COVID-19 संक्रमित हिन्दू शवों को प्रशासन ने एक ही चिता में जला दिया। दलील दी गई कि जगह कम थी। ये शव यदि मुस्लिमों या ईसाइयों के होते तब भी क्या एक ही कब्र में दफनाने की जुर्रत किसी की होती?” उन्होंने महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे से इसका जवाब माँगा।

बीड में फ़िलहाल कोरोना के 4946 सक्रिय मामले हैं। पिछले 1 दिन में यहाँ कोरोना के 597 नए मामले सामने आए हैं। पूरे महाराष्ट्र में कोरोना के फ़िलहाल 5,01,559 सक्रिय केस हैं और 56,652 की मौत हो चुकी है। पिछले एक दिन में यहाँ से 59,907 नए केस सामने आए हैं। वहीं 40 लोगों को इस संक्रमण की वजह से जान गँवानी पड़ी। पूरे भारत में भी अब सक्रिय कोरोना संक्रमितों की संख्या 9 लाख के पार हो गई है।

‘नरसिंहानंद की गर्दन काटने वाले को ₹51 लाख इनाम, बेच डालूँगा घर, जमीन व जेवर’: मोहम्मद दानिश गिरफ्तार

एक शख्स ने वीडियो बना कर गाजियाबाद के डासना स्थित शिव-शक्ति पीठ के महंत यति नरसिंहानंद सरस्वती की गर्दन काटने की धमकी दी थी। अब मेरठ पुलिस ने उसे गिरफ्तार कर लिया है। ये वीडियो स्थानीय रेलवे रोड थाना क्षेत्र के मकबरा डिग्गी निवासी युवक मोहम्मद दानिश ने बनाया था, जिसमें उसने घोषणा की थी कि जो महंत यति नरसिंहानंद सरस्वती की गर्दन काट कर ले आएगा, उसे वो 51 लाख रुपए का इनाम देगा।

पुलिस ने वीडियो इंटरनेट पर वायरल होने के एक घंटे के भीतर कार्रवाई की और उसे धर-दबोचा। दानिश ने घोषणा की थी कि वो अपना घर, जमीन और जेवर बेच कर महंत यति सरस्वती की गर्दन काटने वाले को इनाम देगा। उसने कहा था कि अगर इन सबके बावजूद रुपए कम पड़ जाते हैं तो वो खुद को बेच डालेगा। कैंट ASP सूरज राय ने बताया कि आरोपित को गिरफ्तार कर के आगे की कार्रवाई की जा रही है।

युवा हिंदू वाहिनी के महानगर अध्यक्ष अंकित शर्मा ने कहा कि मोहम्मद दानिश ने माहौल खराब करने की कोशिश की है, इसीलिए उसके खिलाफ सख्त से सख्त कार्रवाई की जाए। वीडियो में युवक ने कहा था, “हमारे नबी के बारे में ऐसी बात कही गई, जिसे सुन कर पूरी दुनिया के हिन्दू-मुस्लिम-सिख-ईसाई शर्मिंदा हैं। आप एक बात तो समझते कि आप किससे टक्कर ले रहे हैं। आपने जिनके बारे में ऐसी बात कही, वो पूरी दुनिया को चलाने वाला है, पूरी कायनात को बनाने वाले हैं।”

दानिश ने आगे कहा था, “गाजियाबाद में आपका मंदिर है। मुझे आपसे मिलने का मौका भी न मिले, हमें आपकी शक्ल भी नहीं देखनी है। हमें आपकी गर्दन उतारनी है, लेकिन हम ये करेंगे नहीं। लेकिन, जो ऐसा करेगा उसे 51 लाख रुपए देंगे। आपने इसके बारे में ऐसी बात कही, उसके बारे में दुनिया जानती है और जिससे पूरा निजाम चल रहा है। इस बात को सोच कर और ये देख कर हम कितने आक्रोशित हैं।”

इससे पहले AAP विधायक अमानतुल्लाह खान ने लिखा था, “हमारे नबी की शान में गुस्ताखी हमें बिल्कुल बर्दाश्त नहीं। इस नफरती कीड़े की जुबान और गर्दन दोनों काट कर इसे सख्त से सख्त सजा देनी चाहिए। लेकिन हिंदुस्तान का कानून हमें इसकी इजाजत नहीं देता।” कई इस्लामी कट्टरपंथी सोशल मीडिया में उसके समर्थन में उतर आए थे। ट्विटर पर उसके समर्थन में ट्रेंड भी चलाया गया था। अमानतुल्लाह ने स्वामी नरसिंहानंद को ‘मजहबी कीड़ा’ बताया था।

‘मूवी माफिया का आतंक… अक्षय कुमार तक मेरी तारीफ कॉल-मैसेज से करते हैं, खुल कर नहीं’: कंगना रनौत

फिल्म अभिनेत्री कंगना रनौत की नई फिल्म का ट्रेलर हाल ही में रिलीज किया गया, जिसके बाद फिल्म का एक गाना भी आया। इसी आसपास में आलिया भट्ट की ‘गंगूबाई काठियावाड़ी’ नामक फिल्म का ट्रेलर भी आया। आलिया के लिए सार्वजनिक शुभकामनाओं की झड़ी लग गई। जबकि कंगना रनौत को बॉलीवुड से शायद ही किसी ने बधाई दी हो। अब कंगना ने ‘मूवी माफिया’ के डर और अक्षय कुमार से मिली शुभकामना को लेकर बात की है।

हिंदी फिल्म इंडस्ट्री में नेपोटिज्म के खिलाफ खुल कर खड़ी होने वाली कंगना रनौत ने कहा कि बॉलीवुड एक ऐसी शत्रुतापूर्ण माहौल वाली इंडस्ट्री है, जहाँ उनकी तारीफ में अगर कोई एक शब्द भी कह दे, तो वो मुसीबत में पड़ जाएगा। उन्होंने बताया कि कई बड़ी फ़िल्मी हस्तियों ने प्राइवेट में मैसेज भेज कर ‘थलाईवी’ को लेकर उनकी प्रशंसा की, लेकिन यही लोग सार्वजनिक रूप से ऐसा नहीं कर सकते हैं।

कंगना रनौत ने लिखा, “मुझे इन बड़ी हस्तियों से कई सीक्रेट कॉल्स और मैसेज मिले। लेकिन, ये लोग आलिया भट्ट और दीपिका पादुकोण की खुलेआम तारीफ कर सकते हैं पर मेरी नहीं। ऐसा करने से ये मुसीबत में आ जाएँगे। ये मूवी माफिया का ही आतंक है।” उन्होंने कहा कि कला की इस इंडस्ट्री में प्राथमिकता कला को ही दी जानी चाहिए, सत्ता और राजनीति के खेल को नहीं। उन्होंने कहा कि उनके राजनीतिक विचार और अध्यात्म के प्रति उनका झुकाव के कारण उन्हें निशाना नहीं बनाया जाना चाहिए।

उन्होंने कहा कि अगर इन कारणों से उन्हें निशाना बनाया जाता है, प्रताड़ित किया जाता है और अलग-थलग कर दिया जाता है तो स्पष्ट है कि वो जीत कर दिखाएँगी। कंगना आजकल ‘थलाईवी’ के अलावा भी कई कारणों से चर्चा में हैं। हाल ही में कंगना रनौत के माता-पिता ने कोरोना वैक्सीन की दूसरी डोज भी ली है। संजय राउत पर लगे प्रताड़ना के आरोपों को लेकर भी उन्होंने शिवसेना पर निशाना साधा।

उनकी फिल्म ‘थलाईवी’ का ट्रेलर न सिर्फ तमिलनाडु, बल्कि पूरे भारत में धूम मचा रहा है। फिल्म के हिंदी ट्रेलर को यूट्यूब पर अब तक लगभग 2 करोड़ लोग देख चुके हैं और 7 लाख से भी अधिक लोगों ने लाइक किया है। वहीं तमिल भाषा में इसे 1.3 करोड़ लोगों ने देखा है और 2.5 लाख ने लाइक किया है। तेलुगु भाषा में इस फिल्म के ट्रेलर को 50 लाख लोगों ने देखा है और लगभग 1 लाख ने लाइक किया है। ट्रेलर को रिलीज हुए मात्र 15 दिन ही हुए हैं।

जले व जख्म के 60 निशान, प्राइवेट पार्ट को भी नहीं छोड़ा… 5 साल की बच्ची से रेप और हत्या: सौतेला पिता एलेक्स गिरफ्तार

केरल के सेंटर त्रावणकोर स्थित पतनमतिट्टा (Pathanamthitta) में सोमवार (अप्रैल 5, 2021) को 5 साल की एक बच्ची की मौत हो गई। शुरुआती ऑटोप्सी रिपोर्ट में कुछ भयावह खुलासे हुए हैं। पता चला है कि उसका यौन शोषण हुआ था और उसे प्रताड़ना भी दी गई थी। पुलिस ने बच्ची के 23 वर्षीय सौतेले पिता एलेक्स को गिरफ्तार किया है। बच्ची अपने परिवार के साथ पतनमतिट्टा के कुम्बझा इलाके में रहती थी।

5 साल की बच्ची के चहेरे और शरीर के अन्य हिस्सों में जख्म और जले के कई निशान मिले, यहाँ तक कि उसके प्राइवेट पार्ट्स में भी। इनमें से कुछ जख्म तो कई दिन पुराने हैं। आरोपित ने पुलिस को दिए अपने बयान में बताया है कि वो कई महीनों से अपनी सौतेली बेटी का यौन शोषण कर रहा था और उसे प्रताड़ित कर रहा था। कोट्टायम मेडिकल कॉलेज हॉस्पिटल में बच्ची का पोस्टमॉर्टम किया गया।

बच्ची के शरीर पर चोट व जख्म के 60 निशान थे। इनमें जले के निशान के अलावा चाकू गहरा धँसा कर काटने के निशान भी हैं। परिवार में बच्ची की माँ और दादी भी थी। परिवार मूल रूप से तमिलनाडु का रहने वाला है। वो लोग यहाँ किराए पर रह रहे थे। बच्ची की माँ घरेलू मजदूर है। सोमवार को दोपहर 2:30 बजे जब वो घर लौटी तो उसने अपनी बच्ची को बेहोश पड़ा हुआ देखा। उसका पति नशे में धुत बच्ची के बगल में ही सोया हुआ था।

जब उसने अपने पति से बच्ची के बारे में पूछा तो वो अचानक से हिंसक हो उठा और उसने महिला के साथ भी मारपीट शुरू कर दी। महिला ने पुलिस को दिए अपने बयान में ये सब बताया है। बच्ची को इसके बाद पड़ोसियों की मदद से एक नजदीकी क्लिनिक में ले जाया गया। इसके बाद उसे पतनमतिट्टा जनरल हॉस्पिटल लेकर जाया गया, जहाँ डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया। सौतेले पिता की प्रताड़ना से बच्ची की छाती कुचली हुई थी, जिसे डॉक्टरों ने मौत की वजह बताया।

पड़ोसी की एक महिला ने कहा कि उसे बच्ची की दादी ने बताया कि पहले भी बच्ची की पिटाई की गई थी, जिसके बाद उसे 6 महीनों तक अस्पताल में रहना पड़ा था। परिवार को उसके इलाज में काफी रुपए खर्च करने पड़े थे। बच्ची की माँ ने भी कहा कि एलेक्स उसकी बेटी को नियमित रूप से प्रताड़ित करता था। आरोपित ने पुलिस स्टेशन से फरार होने की भी कोशिश की। वो मैरिजुआना से लेकर कई अन्य प्रकार के ड्रग्स का तस्कर भी है।

आरोपित नशे का आदी है। उसे अप्रैल 5, 2021 तक के लिए न्यायिक कस्टडी में भेज दिया गया है। वो तमिलनाडु लौटना चाहता था और इसीलिए महिला के साथ मारपीट करता था, क्योंकि उसकी पत्नी केरल में ही रहना चाहती थी। उसने गिरफ़्तारी के बाद हिंसक होकर पुलिस जीप के शीशे तोड़ डाले। लॉकअप में से भागने की कोशिश की, लेकिन पुलिस ने ग्रामीणों के साथ मिल कर उसे फिर धर-दबोचा।

जब उसे टॉयलेट ले जाया जा रहा था, तभी उसने हथकड़ी के साथ ही भागने की कोशिश की थी। उसके पास से ड्रग्स भी जब्त हुए हैं। पुलिस ने इस मामले में IPC की धारा-302 (हत्या) के साथ-साथ ‘यौन अपराधों से बच्चों का संरक्षण अधिनियम, 2012, (POCSO)’ की धारा 5(6) के तहत FIR दर्ज की है। साथ ही उसके खिलाफ ‘जुवेलिन जस्टिस एक्ट’ की धारा-75 (बच्चे के साथ क्रूरता) के तहत भी मामला दर्ज हुआ है।

2 मई के बाद कुछ भी असंभव नहीं: ममता बनर्जी के साथ कॉन्ग्रेस और लेफ्ट दोनों? अधीर रंजन चौधरी का इशारा

पश्चिम बंगाल में ज्यों-ज्यों विधानसभा चुनाव के चरण दर चुनाव ख़त्म हो रहे हैं, वैसे-वैसे ममता बनर्जी की तृणमूल कॉन्ग्रेस (TMC) फँसती हुई दिख रही है। ये पार्टी और भाजपा-विरोधी अन्य नेताओं के बयानों से ही झलक रहा है। अब कॉन्ग्रेस पार्टी ने कहा है कि चुनाव परिणाम के बाद अगर TMC के साथ जाने की नौबत आती है, तो ये असंभव नहीं है। यानी, परिणाम के बाद नए समीकरण निकल कर आ सकते हैं।

पश्चिम बंगाल में कॉन्ग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष अधीर रंजन चौधरी ने चुनाव परिणाम के बाद TMC के साथ जाने की संभावनाओं को असंभव नहीं बताया है। वो सिर्फ कॉन्ग्रेस नहीं, बल्कि कॉन्ग्रेस-लेफ्ट-ISF गठबंधन की बात कर रहे थे। उनकी मानें तो ममता बनर्जी के खिलाफ कई दशकों से लड़ रहा लेफ्ट अब उन्हें ही समर्थन दे सकता है। लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष अधीर रंजन चौधरी ने कहा, “राजनीति, संभावनाओं की कला है।”

उन्होंने प्रुशिया (प्राचीन जर्मनी) के मिनिस्टर प्रेजिडेंट ओटो वॉन बिस्मार्क के 150 साल पुराने इस बयान का जिक्र कर के बंगाल राजनीति का पारा गरमा दिया है। उनसे पूछा गया था कि अगर ममता बनर्जी बहुमत से थोड़ा पीछे रह जाती हैं तो क्या कॉन्ग्रेस उनका समर्थन करेगी? हालाँकि, उन्होंने इसे एक काल्पनिक सवाल बताते हुए कहा कि संयुक्त मोर्चा अकेले अपने दम पर सरकार बनाने का लक्ष्य लेकर चल रहा है।

उन्होंने कहा कि उन्हें नहीं पता है कि अगर संयुक्त मोर्चा को ज़रूरत पड़ती है तो कौन-कौन उसका समर्थन करेगा? उन्होंने कहा कि अगर ममता बनर्जी हारती है तो कहाँ जाएँगी, ये उन्हें नहीं पता। मालदा (साउथ) से कॉन्ग्रेस के सांसद ABA गनी खान चौधरी पहले ही कह चुके हैं कि परिणाम के बाद TMC और कॉन्ग्रेस साथ आ सकते हैं। राजनीतिक समीकरण की बात करें तो बंगाल में सरकार बनाने के लिए 148 सीटें लाने की ज़रूरत होती है।

कॉन्ग्रेस के कुछ नेताओं ने कहा कि उत्तरी और सेन्ट्रल बंगाल में मुस्लिम वोटरों को लुभाने के लिए गनी ने ये बातें कही हैं। इससे वो मुस्लिमों को ये संदेश देने की कोशिश कर रहे हैं कि भाजपा को सत्ता से बाहर रखने के लिए कॉन्ग्रेस पार्टी कुछ भी करेगी। राज्य में तीन चरण के चुनाव हो चुके हैं और चौथे चरण से पहले उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह राज्य में धुआँधार चुनाव-प्रचार कर रहे हैं।

इससे पहले अधीर रंजन चौधरी ने कहा था कि अगर TMC उनके द्वारा बताई गई 22 सीटों पर अपने उम्मीदवारों को वापस ले लेती है तो फिर कॉन्ग्रेस उसका समर्थन करेगी। उन्होंने मुर्शिदाबाद में सत्ताधारी पार्टी से ‘फेवर’ माँगा। इससे पहले ममता बनर्जी ने भी UPA अध्यक्ष सोनिया गाँधी को पत्र लिख कर विपक्षी नेताओं की एकता का निवेदन की थी। भाजपा इसे उनकी हार की बौखलाहट बता रही है।

इंडिया टुडे ने हरिद्वार कुंभ मेला पर फैलाई फेक न्यूज, केंद्र सरकार ने फैक्ट चेक कर प्रोपेगेंडा किया ध्वस्त

इंडिया टुडे ने 6, अप्रैल 2021 को फेक न्यूज से सजी हुई एक रिपोर्ट प्रकाशित की जिसमें यह कहा गया कि केंद्र सरकार ने चिंता जताई है कि हरिद्वार का कुम्भ मेला कोरोना वायरस के वृहद फैलाव का कारण बन रहा है। रिपोर्ट की हेडलाइन थी, “Kumbh Mela becoming a super-spreader event, hope SOP is followed: Centre”. अर्थात “कुम्भ मेला सुपर स्प्रेडर बन रहा है, आशा है कि सभी स्टैन्डर्ड ऑपरेशन प्रोसीजर फॉलो किए जा रहे हैं : केंद्र”

इस हेडलाइन से यही समझ में आता है कि कुम्भ मेला कोविड-19 का हॉटस्पॉट बन चुका है। इंडिया टुडे की रिपोर्ट प्रकाशित होने के पश्चात स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय ने ट्विटर के माध्यम से रिपोर्ट को ‘गलत और फेक’ बताया। 

इंडिया टुडे द्वारा प्रकाशित खबर का स्क्रीनशॉट

केंद्र सरकार ने हरिद्वार कुम्भ मेला के विषय में क्या कहा और कैसे इंडिया टुडे ने उसे तोड़-मरोड़ कर प्रस्तुत किया

इंडिया टुडे की रिपोर्ट स्वास्थ्य मंत्रालय की 6, अप्रैल को की गई प्रेस कॉन्फ्रेंस पर आधारित थी। प्रेस कॉन्फ्रेंस के अंत में एक पत्रकार द्वारा प्रश्न पूछा गया कि क्या महाकुम्भ कोरोना वायरस का हॉटस्पॉट बन रहा है और क्या मेला को निर्धारित समय से पहले समाप्त करने की कोई योजना है?  

इस प्रश्न का उत्तर देते हुए स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय के सचिव राजेश भूषण ने कहा कि साढ़े तीन से चार महीने तक चलने वाले महा कुम्भ की अवधि घटाकर एक महीने कर ही दी गई है ऐसे में किसी नैरेटिव के चलते तथ्यों को अनदेखा नहीं करना चाहिए। जहाँ तक रही मेला के कोरोना वायरस के हॉटस्पॉट बनने की बात तो केंद्र सरकार ने महीने भर पहले ही मेला उत्सव के लिए स्टैन्डर्ड ऑपरेटिंग प्रोसीजर (SOP) बना दिया था।

राज्य सरकार के साथ मिलकर सभी प्रोटोकॉल पर विस्तृत चर्चाएँ हो चुकी हैं। प्रेस कॉन्फ्रेंस में यह भी कहा गया कि हमें आशा है कि राज्य सरकार जमीनी स्तर पर एसओपी को लागू कर रही है और यह सुनिश्चित कर रही है कि उत्सव के दौरान एसओपी का पालन हो। यहाँ ध्यान देने योग्य बात यह है कि कहीं भी यह नहीं कहा गया कि कुम्भ मेला कोरोना वायरस का बड़ा प्रसारक बन गया है अथवा ऐसा होने की कोई संभावना भी है लेकिन इंडिया टुडे की रिपोर्ट तो कुछ और ही कहती है।

फेक न्यूज फैलाने के बाद भी इंडिया टुडे का एजेंडा बरकरार रहा

मंत्रालय के फैक्ट चेक किए जाने के बाद भी इंडिया टुडे का एजेंडा बरकरार रहा। बिना किसी स्पष्टीकरण के इंडिया टुडे ने अपनी रिपोर्ट बदल दी। हालाँकि मीडिया समूह द्वारा सिर्फ हेडलाइन ही बदली गई जबकि रिपोर्ट का यूआरएल वैसा ही रहा।

रिपोर्ट में कई जगह कुम्भ मेला का कोरोना वायरस के बड़े प्रसारक के रूप में वर्णन किया जाता रहा। केंद्र सरकार द्वारा ‘सुपर स्प्रेडर’ शब्द का उपयोग नहीं किए जाने के बाद भी इंडिया टुडे लगातार इस शब्द का उपयोग करता रहा।

कुम्भ मेला की अवधि घटाकर एक महीने की गई है, मेला में शामिल होने के लिए निगेटिव कोविड टेस्ट रिपोर्ट की आवश्यकता है और एसओपी के कड़े प्रोटोकॉल्स जैसे तथ्यों को भुला कर इंडिया टुडे का जोर इस बात पर ही रहा कि कुम्भ मेला कोरोना वायरस का बड़ा प्रसारक बन रहा है।

इंडिया टुडे द्वारा बदली गई रिपोर्ट का स्क्रीनशॉट

हालाँकि, इंडिया टुडे के अनुसार उसकी रिपोर्ट न्यूज एजेंसी एएनआई के किसी सूत्र की जानकारी पर आधारित थी। एएनआई के इस अज्ञात सूत्र के अनुसार सरकार कुम्भ मेला को लेकर सतर्क है और यह सुनिश्चित कर रही है कि कुम्भ मेला के दौरान सभी पक्ष प्रोटोकॉल्स का पूरी तरह पालन करें।

यहाँ ध्यान देने योग्य बात यह है कि प्रेस कॉन्फ्रेंस और ट्विटर पर किए गए फैक्ट चेक के माध्यम से स्वास्थ्य मंत्रालय ने साफ कर दिया है कि कुम्भ मेला सही तरीके से सम्पूर्ण होगा और कहीं भी सरकार ने कुम्भ मेला के लिए ‘सुपर स्प्रेडर’ जैसे शब्दों का उपयोग ही नहीं किया है।

केरल में लेफ्ट के हिंसा में कॉन्ग्रेस सहयोगी दल IUML के कार्यकर्ता की गई जान: बंगाल में गठबंधन के कारण साधी चुप्पी

केरल के कूत्तुपरम्बा में हुई चुनावी हिंसा में एक युवक की मौत हो गई। डेक्कन हेराल्ड की रिपोर्ट के अनुसार सीपीएम के कार्यकर्ताओं के साथ फर्जी मतदान को लेकर हुई हिंसा में इंडियन यूनियन मुस्लिम लीग (IUML) के यूथ लीग का 22 वर्षीय कार्यकर्ता मंसूर गंभीर रूप से घायल हो गया था, जिसकी बाद में कोझिकोड के एक अस्पताल में मौत हो गई।

रिपोर्ट्स के अनुसार 6 अप्रैल 2021 को हुए मतदान के दौरान आईयूएमएल के युवा कार्यकर्ता मंसूर और मोहसिन की झड़प सीपीएम के कार्यकर्ताओं के साथ हो गई। यह झड़प फर्जी मतदान के आरोपों के बाद शुरू हुई। इसके बाद सीपीएम कार्यकर्ताओं ने दोनों भाइयों के घर पर बम फेंक दिया और उनके घर में घुस गए। हिंसक कार्यकर्ताओं ने मोहसिन पर हमला करने का प्रयास किया। जिसका मंसूर ने विरोध किया। इसी दौरान हुई हिंसा में वह गंभीर रूप से घायल हो गया। उसे कोझिकोड के एक अस्पताल में भर्ती करवाया गया जहाँ उसकी मौत हो गई।

पुलिस ने बताया है कि मंसूर का भाई मोहसिन भी हमले में घायल हुआ है। एक सीपीएम कार्यकर्ता को हिरासत में ले लिया गया है और 11 अन्य लोगों की जानकारी भी हासिल कर ली गई है।

बता दें कि यूथ लीग, आईयूएमएल का ही यूथ विंग है। आईयूएमएल केरल में कॉन्ग्रेस के नेतृत्व वाली यूनाइटेड डेमोक्रेटिक फ्रंट (UDF) की एक सहयोगी है। इस घटना पर अभी तक कॉन्ग्रेस का कोई बयान नहीं आया है। युवा कार्यकर्ता की हत्या में जिस सीपीआई(एम) का नाम आ रहा है वह पश्चिम बंगाल में कॉन्ग्रेस की सहयोगी है। केरल के कन्नूर जिले के कूत्तुपरम्बा में सीपीएम के सहयोगी एलजेडी और आईयूएमएल के बीच मुकाबला है।

पश्चिम बंगाल में भाजपा और टीएमसी के खिलाफ कॉन्ग्रेस ने लेफ्ट से हाथ मिलाया है। बंगाल में तीसरे मोर्चे के तौर पर कॉन्ग्रेस, लेफ्ट और इंडियन सेक्युलर फ्रंट (आइएसएफ) एक साथ आए हैं। वहीं केरल के अंदर कॉन्ग्रेस, लेफ्ट के खिलाफ आईयूएमएल, केरल कॉन्ग्रेस और अन्य पार्टियों के साथ गठबंधन में है। दो राज्यों में कॉन्ग्रेस की इस अजीब स्थिति से यह ज्ञात होता है कि कॉन्ग्रेस के पास अब विकल्पों की भारी कमी है। कमोबेश यही स्थिति लेफ्ट की भी है।

शुरुआत कठिन चीजों से करें, खाली समय को खाली न समझें: जानिए परीक्षा पे चर्चा पर पीएम मोदी ने छात्रों से क्या कहा?

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 7, अप्रैल को शाम 7 बजे ‘परीक्षा पे चर्चा’ कार्यक्रम के तहत छात्रों, शिक्षकों और अभिभावकों से वर्चुअल चर्चा की। पीएम मोदी ने कहा कि यह परीक्षा पे चर्चा का पहला वर्चुअल संस्करण है। उन्होंने कहा कि कोरोना वायरस के कारण उन्हें इस बार छात्रों से मिलने के लिए वर्चुअल साधन का उपयोग करना पड़ रहा है। पीएम मोदी ने कहा कि यह मात्र परीक्षा पे चर्चा नहीं है। बहुत कुछ बातें हो सकती हैं, हल्का-फुल्का माहौल बनाया जा सकता है। इसके माध्यम से एक नया आत्मविश्वास पैदा किया जा सकता है।

डर को समाप्त करने के प्रश्न पर पीएम मोदी ने कहा कि डर परीक्षा का नहीं अपितु उस माहौल का है जो छात्रों के आसपास बना दिया गया है कि परीक्षा ही सब कुछ है। इसके विषय में पीएम मोदी ने कहा कि जिंदगी में यह आखिरी मुकाम नहीं है।

जीवन में सरलता और कठिन परिस्थितियों के संबंध में पीएम मोदी ने कहा कि वे इस संबंध में थोड़ी अलग राय रखते हैं। उन्होंने कहा, “अभिभावक बच्चों से कहते हैं कि पहले सरल प्रश्नों को हल करो किन्तु मैं पढ़ाई को लेकर कहता हूँ कि पहले कठिन विषयों पर ध्यान देना चाहिए क्योंकि शुरुआत में ऊर्जा बनी रहती है। पीएम मोदी ने अपना उदाहरण देते हुए कहा कि वे सुबह कठिन चीजों से ही शुरुआत करते हैं।

खाली समय के विषय में पीएम मोदी ने बच्चों से कहा कि खाली समय को खाली न समझें अपितु खाली समय एक खजाना है। उन्होंने कहा कि खाली समय होना चाहिए अन्यथा जिंदगी एक रोबोट के जैसी हो जाएगी। उन्होंने खाली समय के सदुपयोग करने की बात कही।

अभिभावकों से बच्चों के विषय में चर्चा करते हुए पीएम मोदी ने कहा कि बच्चों पर मूल्यों को थोपने की बजाय मूल्यों को जीकर प्रेरित करें। ऐसा इसलिए क्योंकि आवश्यक नहीं कि अभिभावक जो कहें, बच्चे वही करें किन्तु बड़े जो भी करेंगे बच्चे उसे देखते हैं और उसे दोहराने के लिए लालयित रहते हैं।

पीएम मोदी ने कहा कि सपने देखना अच्छा है किन्तु सपनों को लेकर बैठे रहना और सपनों के लिए सोते रहना सही नहीं है। उन्होंने बच्चों को स्किल का महत्व समझते हुए कहा कि बच्चों को दसवीं और बारहवीं से ही अपने आसपास के जीवन को ऑब्जर्व करना सीखना चाहिए। इसके साथ ही उन्होंने ट्रेनिंग और स्किल का महत्व भी समझाया।  

परीक्षा हॉल में बेहतर प्रदर्शन के लिए पीएम मोदी ने कहा कि यदि मन अशांत रहा या घबराहट से भरा रहा तो संभव है कि प्रश्नपत्र सामने आते ही सब भूल जाएं किन्तु इसके स्थान पर वर्तमान पर फोकस करना चाहिए और सारी दुविधाओं को परीक्षा हॉल के बाहर ही छोड़ देना चाहिए।

बच्चों को सफलता का मंत्र समझते हुए पीएम मोदी ने कहा कि छात्र जो पढ़ते हैं, वह कभी भी सफलता और विफलता का पैमाना नहीं हो सकता है बल्कि छात्र जीवन में जो करेंगे वह उनकी सफलता और असफलता को निर्धारित करेगा।

हर साल प्रधानमंत्री परीक्षा की अवधि के दौरान छात्रों से संवाद करते हैं जिससे वो छात्रों में आत्मविश्वास उत्पन्न कर सकें एवं उनके मन से परीक्षा और सामाजिक दबाव के डर को निकाल सकें। इस बार कोरोना वायरस के संकट के चलते यह कार्यक्रम वर्चुअली आयोजित किया गया।

मुस्लिमों से वोट की अपील पर ममता बनर्जी को नोटिस, चुनाव आयोग ने 48 घंटे में माँगा जवाब

चुनाव आयोग ने आचार संहिता के उल्लंघन को लेकर पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री और टीएमसी प्रमुख ममता बनर्जी को नोटिस जारी किया है। चुनाव आयोग ने ममता बनर्जी को अगले 48 घंटे में नोटिस का जवाब देने को कहा है। बता दें कि बीजेपी नेता और केंद्रीय मंत्री मुख्तार अब्बास नकवी की अगुवाई वाली बीजेपी प्रतिनिधिमंडल ने मंगलवार (अप्रैल 6, 2021) को चुनाव आयोग से मुलाकात कर ममता बनर्जी की शिकायत की थी।

बीजेपी ने अपनी शिकायत में कहा था कि ममता बनर्जी के खिलाफ आरोप लगाया है कि उन्होंने चुनाव प्रचार के दौरान मुस्लिम वोटरों से एकजुट होकर अपना वोट टीएमसी को डालने की अपील की थीं। चुनाव आयोग ने नोटिस जारी करते हुए कहा है कि ममता बनर्जी की टिप्पणी ने आदर्श आचार संहिता के प्रावधानों का उल्लंघन किया है। ममता बनर्जी ने यह टिप्पणी हुगली जिले के तारकेश्वर में की थी।

चुनाव आयोग से मिलने के बाद मुख्तार अब्बास नकवी ने मीडिया से बात करते हुए कहा था कि पश्चिम बंगाल में आचार संहिता का उल्लंघन हुआ है। टीएमसी प्रमुख और मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने कहा है कि मुसलमानों को एकजुट होकर टीएमसी को वोट करना चाहिए। हमने चुनाव आयोग से अनुरोध किया है कि ममता बनर्जी के खिलाफ केस दर्ज कर कार्रवाई की जाए।

पीएम मोदी ने भी साधा निशाना

प्रधानमंत्री नेरंद्र मोदी ने मंगलवार (अप्रैल 6, 2021) को पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी पर करारा हमला बोला और दावा किया कि वोटों का बिखराव ना हो इसके लिए मुसलमानों से एकजुट हो जाने की उनकी अपील स्पष्ट करती है कि तृणमूल कॉन्ग्रेस विधानसभा चुनाव की जंग हार गई है। प्रधानमंत्री ने राज्य में दो चुनावी रैलियों को संबोधित करते हुए दावा किया यदि उन्होंने इसी प्रकार सभी हिन्दुओं को एकजुट हो जाने और भाजपा को मत देने की अपील की होती तो उन्हें निर्वाचन आयोग के आठ-दस नोटिस मिल गए होते और देश भर के अखबारों में उनके खिलाफ संपादकीय छप जाते।

क्या कहा था ममता बनर्जी ने?

चुनाव आयोग के नोटिस के मुताबिक ममता बनर्जी ने कहा था “मैं अपने अल्पसंख्यक भाइयों और बहनों से हाथ जोड़कर निवेदन कर रही हूँ, शैतान व्यक्ति जिसने बीजेपी से पैसा लिया था, को सुनने के बाद अल्पसंख्यक मतों को विभाजित न करें। वह भाजपा के प्रेषितों में से एक हैं, जो भाजपा का साथी है। अल्पसंख्यक वोटों को विभाजित करने के लिए सीपीएम और बीआईपी के लोग बीजेपी द्वारा दिए गए पैसों के साथ साथ घूम रहे हैं।”