महाराष्ट्र सरकार ने अपने पूर्व गृह मंत्री अनिल देशमुख के खिलाफ सीबीआई जाँच के बॉम्बे हाईकोर्ट के आदेश को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी है। उद्धव सरकार की ओर से अभिषेक मनु सिंघवी पैरवी करेंगे। बताया जा रहा है कि अनिल देशमुख ने भी सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया है।
100 करोड़ की वसूली के मामले में बॉम्बे हाईकोर्ट में मुंबई के पूर्व पुलिस कमिश्नर परमबीर सिंह ने अनिल देशमुख के खिलाफ सीबीआई जाँच के लिए याचिका दाखिल की थी। सोमवार को हाईकोर्ट ने परमबीर सिंह की याचिका पर सुनवाई करते हुए देशमुख के खिलाफ सीबीआई जाँच का आदेश दिया था। फैसला आते ही महाराष्ट्र के गृह मंत्री अनिल देशमुख ने मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे को अपना इस्तीफा सौंप दिया था।
Maharashtra Government moves Supreme Court challenging the Bombay High Court order in which it ordered the CBI probe against former Home Minister, Anil Deshmukh, for his alleged involvement in corruption, levelled by former Mumbai Police Commissioner Param Bir Singh
कोर्ट ने सोमवार को कहा, “हम इस बात पर सहमत हैं कि अदालत के सामने आया यह अभूतपूर्व मामला है। देशमुख गृह मंत्री हैं जो पुलिस का नेतृत्व करते हैं। स्वतंत्र जाँच होनी चाहिए। सीबीआई को प्रारंभिक जाँच 15 दिन के भीतर पूरी करनी होगी और फिर आगे की कार्रवाई पर फैसला लेना होगा।”
पीठ ने 52 पन्नों के अपने फैसले में कहा कि अनिल देशमुख के खिलाफ परमबीर सिंह के आरोपों ने राज्य पुलिस में नागरिकों के भरोसे को दाँव पर लगा दिया है। अदालत ने कहा कि एक सेवारत पुलिस अधिकारी द्वारा राज्य के गृह मंत्री के खिलाफ लगाए गए ऐसे आरोपों को बिना जाँच के नहीं रहने दे सकते। जहाँ इसमें जाँच की जरूरत होगी, वहाँ की जाएगी।
वहीं गृह मंत्री का पद संभालते ही दिलीप वलसे पाटिल ने कहा कि वह यह सुनिश्चित करेंगे कि पुलिस प्रशासन के कामकाज में कोई राजनीतिक दखल न हो। उन्होंने कहा कि प्राथमिकता महिला सुरक्षा की होगी।
उत्तर प्रदेश के गाजियाबाद में एक हिन्दू लड़की पर हमला करने का मामला सामने आया है। इस मामले में मसूरी थाने की पुलिस ने पीड़िता की तहरीर के बाद आरोपितों अमान मलिक और शादाब के खिलाफ IPC की धारा-324 (खतरनाक हथियार से हमला कर जख्मी करना) और धारा-307 (हत्या का प्रयास) के तहत मामला दर्ज किया है। ये घटना कुशलिया बम्बा गंगनहर के पास हुई, जो थाने से दक्षिण दिशा में 4 किलोमीटर की दूरी पर है।
मुख्य आरोपित अमान मलिक पिलखुआ थाना क्षेत्र के सादिकपुर का रहने वाला है और उसके अब्बा का नाम इरफ़ान है। FIR में पीड़िता की माँ ने बताया है कि गंगनहर के नाहल झाल के पास उनकी बेटी और अमान में कहासुनी हुई। वहाँ अमान मलिक ने छात्रा से पूछा कि वो उससे बात क्यों नहीं करती है? आरोप है कि इसके बाद शादाब ने लड़की का हाथ पकड़ा और मलिक ने जान लेने की नीयत से ताबड़तोड़ चाकू से वार किए।
पीड़िता की माँ ने अपनी तहरीर में बताया है कि इस हमले में उनकी बेटी का हाथ कट गया और कमर भी जख्मी हो गया। ये घटना सोमवार (अप्रैल 5, 2021) को दोपहर 1:30 बजे हुई। FIR के अनुसार, राहगीरों ने लड़की को घायल अवस्था में देखा तो पुलिस को सूचित किया, जिसके बाद उसे अस्पताल में भर्ती कराया गया। पीड़िता की उम्र करीब 18 वर्ष बताई गई है। माँ ने कहा कि उन्होंने FIR में वही लिखवाया है, जो उनकी बेटी ने उन्हें बताया।
माँ के बयान के बाद पुलिस ने दर्ज की FIR
इस मामले के बारे में बताते हुए गाजियाबाद के एसपी (देहात) नीरज कुमार ने कहा, “ये घटना नाहल चौकी के अंतर्गत हुई। दोनों आरोपित लड़की के जानने वाले थे, जिनके साथ वो वहाँ गई थी। इनमें कुछ वाद-विवाद हुआ। इसके बाद अमान ने चाकू से वार कर के उसे जख्मी किया और धक्का देकर भाग गया। राहगीरों ने उसे बचाया। लड़की की हालत फ़िलहाल ठीक है। पुलिस ने त्वरित कार्रवाई कर के उसी रात अभियुक्तों को गिरफ्तार किया।”
ऑपइंडिया से बात करते हुए पीड़ित किशोरी के चाचा उमेश कुमार ने कहा कि परिजन पहले ही मीडिया में सार्वजनिक रूप से सारी चीजें बता चुके हैं। उन्होंने कहा कि वो यूपी पुलिस की कार्रवाई से संतुष्ट हैं क्योंकि आरोपित जेल जा चुके हैं। उमेश कुमार ने कहा, “ये एकतरफा प्यार का मामला नहीं है। हमें कुछ और नहीं चाहिए। हमारी बच्ची ठीक है, यही बहुत है।” लड़की के चाचा ने कहा कि जो हुआ सो हुआ, अब परिवार आगे की तरफ देख रहा है।
थाना मसूरी क्षेत्र में कल दिनांक 05 -4- 21 में हुई घटना के संबंध में पुलिस अधीक्षक ग्रामीण की वीडियो बाईट। pic.twitter.com/ePChAX0GeV
छात्रा के परिजनों का कहना है कि अमान का व्यवहार और हरकतें सही नहीं थीं, जिसके कारण लगभग 1 साल पहले भी उसने अमान से बातचीत बंद कर दी थी। अमान ने उस दौरान भी उसे और उसके परिवार को अंजाम भुगतने की धमकी दी थी। इससे डरी-सहमी किशोरी जबरन दोस्ती में बँधी हुई थी। ख़बरों में कहा जा रहा है कि दोनों आरोपित लड़की का अपहरण कर डासना गंगनहर पर लेकर गए थे।
केंद्र सरकार द्वारा लाए गए तीन नए कृषि कानूनों के खिलाफ ‘किसान’ दिल्ली की सीमा पर पिछले कई महीनों से प्रदर्शन कर रहे हैं। लेकिन भारतीय किसान यूनियन (BKU) के नेता राकेश टिकैत के नेतृत्व में किया जा रहा यह विरोध प्रदर्शन धीरे-धीरे दम तोड़ता जा रहा है।
मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, हाल ही में किसान नेता राकेश टिकैत अपने दो दिवसीय दौरे (4 और 5 अप्रैल) पर गुजरात पहुँचे। यहाँ वह ‘किसान’ आंदोलन में पर्याप्त समर्थन जुटाने में असफल दिखे। एक रिपोर्ट के अनुसार, अंबाजी और पालनपुर में अपनी निर्धारित यात्रा के पहले दिन वह अपने कार्यक्रम में केवल 100 लोग ही जुटा पाए। इसमें भी ज्यादातर उनके समर्थक नहीं थे।
इस दौरान टिकैत ने गुजरात के किसानों को विरोध प्रदर्शन के लिए ट्रैक्टरों का उपयोग करने की सलाह दी। उन्होंने कहा, “ये वाहन किसानों के टैंक हैं और दिल्ली में पुलिस बैरिकेड हटाने के लिए इनका अच्छा उपयोग किया गया था। किसान अपने ट्रैक्टरों का उपयोग करके गुजरात में आंदोलन करेंगे। गाँधीनगर के घेराव और सड़कों को अवरुद्ध करने का समय आ गया है। यदि जरूरत पड़ी तो हम बैरिकेड भी तोड़ेंगे।”
उन्होंने आगे कहा कि गुजरात के किसानों को भी बड़ी संख्या में विरोध प्रदर्शन में शामिल होना चाहिए, ताकि देश को विश्वास हो कि इस राज्य के किसान भी नए कानूनों के खिलाफ हैं, जहाँ से बड़े नेता आते हैं। हालाँकि, राकेश टिकैत इस बात को भाँप चुके थे कि उनका प्रदर्शन दम तोड़ रहा है। इसलिए उन्हें कहना पड़ा कि दिल्ली के बॉर्डर से प्रदर्शनकारी स्थल छोड़ कर नहीं गए हैं, वे अभी अपने खेतों में काम करने गए हैं।
टिकैत ने रविवार को इन दावों को खारिज करते हुए कहा कि किसान खेतों में काम करने के लिए गए हैं और जब केंद्र सरकार पश्चिम बंगाल चुनाव से मुक्त हो जाएगी तो वे लौट आएँगे। उनकी इन बातों से यह अनुमान लगाया जा सकता है कि दिल्ली में किसानों की संख्या प्रदर्शन स्थल से घट रही है।
वहीं किसान नेता के रोड शो में बेहद कम संख्या में लोगों के पहुँचने पर सोशल मीडिया पर उन पर तंज भी कसे गए। ट्वीटर पर एक यूजर ने कहा कि ये तो पुलिस का रोड शो लगता है। एक अन्य यूजर ने कहा कि इतना भारी जनसैलाब न कभी देखा है और ना ही कभी देखूँगा। बता दें कि नवंबर 2020 से ‘किसान’ दिल्ली की सीमा पर मोदी सरकार द्वारा लाए गए नए कृषि कानूनों के विरोध में प्रदर्शन कर रहे हैं।
उत्तर प्रदेश का माफिया विधायक मुख्तार अंसारी आज (अप्रैल 6, 2021) पंजाब की रोपड़ जेल से यूपी लाया जा रहा है। पिछले दो साल से वह स्वास्थ्य स्थिति का हवाला दे-दे कर प्रदेश में आने से बच रहा था, लेकिन यूपी प्रशासन की लगातार कोशिशों के बाद उसे और पंजाब की कॉन्ग्रेस सरकार को झुकना पड़ा। एंबुलेंस में ही सही, मगर अपराध जगत का खूँखार गैंगस्टर मुख्तार वापस लाया जा रहा है। पूरे 100 लोगों की टीम उसे वापस लेकर यूपी आ रही है।
मुख्तार की यूपी में वापसी योगी सरकार की एक बड़ी सफलता है। उसके विरुद्ध प्रदेश भर में 52 मामले दर्ज हैं। इनमें से 18 तो धारा 302 के तहत ही हैं। लेकिन ऐसे इतिहास के बावजूद कुछ बुद्धिजीवी हैं, जो मुख्तार जैसे अपराधी के लिए भावनात्मक माहौल बनाने में जुटे हैं। इंडिया मुस्लिम हिस्ट्री नाम का ट्विटर अकॉउंट इस काम में सबसे आगे है। वह मुख्तार के कुकर्मों पर बात करने की बजाय ये बता रहा है कि मुख्तार संभव है कि कुछ लोगों के लिए एक अभिशाप हो, लेकिन वह स्वतंत्रता सेनानियों के परिवार से आता है।
न्यूज क्लिक और सिफी डॉट कॉम में स्तंभकार और लेखक होने का दावा करने वाला ये ट्विटर हैंडल मुख्तार के लिए लिखता है, “मुख्तार अंसारी भले ही कुछ लोगों के लिए अभिशाप हो लेकिन वह स्वतंत्रता सेनानियों के परिवार से आता है। उसके दादा मुख्तार अहमद अंसारी कॉन्ग्रेस के अध्यक्ष थे और दिल्ली के सबसे बड़े डॉक्टरों में एक थे। उसके दादा के एक भाई बहुत बड़े हकीम थे।”
ट्वीट के अनुसार, डॉ अंसारी ने AICC के मुख्य सचिव के तौर पर कई बार सेवा दी, वह 1927 में भारतीय नेशनल कॉन्ग्रेस के अध्यक्ष भी थे। वह उनमें से थे, जिन्होंने जामिया मिलिया इस्लामिया की स्थापना की और बतौर चांसलर भी यहाँ अपनी सेवा दी।
अब इंडिया मुस्लिम हिस्ट्री के ऐसे ट्वीट के बाद सोशल मीडिया यूजर्स ने सवाल दागने शुरू कर दिए हैं। कई सोशल मीडिया अकॉउंट ने ये तर्क और ट्वीट की मार्मिक भाषा देख पूछा है, “उसकी पारिवारिक पृष्ठभूमि देख कर उसे अपराध करने की आजादी मिल जाती है क्या? उसके दादा अगर स्वतंत्रता सेनानी थे तो फिर ये सही है क्या कि वो भाजपा विधायक को सरे आम गोली मारे या वो वसूली, डकैती, हत्या करे?” एक यूजर ट्वीट पर पूछता है, “आप कहना क्या चाहते हो। मुख्तार को जेल की बजाय स्वतंत्रा सेनानी की पेंशन मिलनी चाहिए? ”
Haan toh usska family background dekh kar usse Crime karne ki aazadi mil jaati hai. BJP ke MLA ko sar-e-aam LMG se goli maarne ki aazadi mil jaati hai. Extortion, dakaiti, murder, etc..karne ki aazadi mil jaati hai Cause usske Grandfather freedom fighter they. Kya logic hai.
गौरतलब है कि मुख्तार अंसारी अकेला ऐसा खूँखार अपराधी नहीं है, जिस पर कार्रवाई होता देख उसके फैमिली बैकग्राउंड को सोशल मीडिया पर रखा गया हो। बुरहान वानी से लेकर ओसामा बिन लादेन के समय भी यही हुआ था। उनके पिता का काम, पाठकों को बता कर एक ऐसा भावनात्मक माहौल तैयार करने की कोशिश हुई थी, मानो गलती बुरहान वानी या फिर ओसामा बिन लादेन की नहीं बल्कि उस शख्स की है, जिसने उन पर गोली चलाई।
Dawood Ibrahim may be an underworld don & terrr0rist to most Indian people, but he hails from a family of Mumbai policeman. pic.twitter.com/LZOojtwhzV
आज मुख्तार के तमाम गुनाहों को दरकिनार करके इंडिया मुस्लिम हिस्ट्री का ये ट्वीट किस हिसाब से जायज है, शायद ये कोई न बता पाए। सिर्फ़ शुरुआत में ये कह देने भर से संभव है कि वह कुछ लोगों के लिए अभिशाप हो… पूरा ट्वीट न्यूट्रल नहीं हो जाता। अगर ऐसे अपराधी के पारिवारिक बैकग्राउंड को लोगों तक पहुँचाने की इतनी इच्छा है तो फिर भाषा में इतनी नर्मी क्यों?
दुनिया का सबसे बड़ा आतंक का कारोबार करने वालों में दाउद इब्राहिम मुंबई पुलिस में एक कॉन्सटेबल का बेटा था। तो क्या इस आधार पर दाऊद के हर किए पर पानी डाल दिया जाए या फिर ये बात कह-कह कर कर दाऊद के पिता को ही बदनाम किया जाए!
कौन कितना पढ़ा लिखा है, किस समाज से आता है, उसके परिवार वाले क्या करते हैं, वो अपने में कितना सुधार कर सकता है… ये सारी बातें किसी छोट-मोटे अपराधी को सही रास्ते पर लाने के लिहाज से हों, तो इंसानियत के नाते समझ आती है। लेकिन बुरहान वानी, ओसामा बिन लादेन जैसे आतंकियों के बाद मुख्तार अंसारी जैसे गैंगस्टर के लिए ये कहना कि उसके पिता क्या करते थे, दादा क्या करते थे… ये सारी बात सिर्फ ये दर्शाती है कि व्यक्ति विशेष उस अपराधी से कितनी संवेदना रख रहा है, वो भी सिर्फ इसलिए क्योंकि वह एक ऐसे मजहब से है, जिसका महिमंडन करना ही आज के समय का ‘सेकुलरिज्म’ है।
फ्रंटलाइन कार्यकर्ताओं का मजाक उड़ाने के एक साल बाद ‘कॉमेडियन ’कुणाल कामरा ने मंगलवार (अप्रैल 6, 2021) को बताया कि उन्हें और उनके माता-पिता को कोरोना वायरस के संक्रमण का पता चला है।
एक ट्वीट में, कामरा ने लिखा, “मेरे माता-पिता कोविड पॉजिटिव हैं और वे नजदीक के अस्पताल में हैं। मैं भी कोविड पॉजिटिव हूँ और घर में क्वारंटाइन हूँ। मैंने उन सभी से बात की, जिनसे मैं संपर्क में था। मैं और मेरा परिवार जल्द ही ठीक हो जाएगा।” उन्होंने आगे जोर दिया, “कृपया कोरोना के दूसरी लहर को बहुत गंभीरता से लें और सावधान रहें।”
गौरतलब है कि स्टैंड-अप कॉमेडियन ने पिछले साल मार्च में महामारी की शुरुआत के दौरान भारत के फ्रंटलाइन वर्कर्स का मजाक उड़ाया था। पिछले साल राष्ट्र के नाम अपने संबोधन में, पीएम नरेंद्र मोदी ने 22 मार्च, 2020 को सुबह 7 से 9 बजे तक ‘जनता कर्फ्यू’ का आह्वान किया था। उन्होंने इस बात पर जोर दिया था कि इसका मतलब होगा कि बीमारी को फैलने से रोकने के लिए लोगों द्वारा खुद पर लगाया गया कर्फ्यू।
तब युवा और बूढ़े, अमीर और गरीब, समाज के सभी वर्गों के लोग अपनी बालकनी और बरामदे से ताली बजाते और घंटी बजाते हुए निकले थे और महामारी से जूझ रहे फ्रंटलाइन योद्धाओं की सराहना की थी। हालाँकि, कुछ लोगों को यह रास नहीं आया था कि जनता राष्ट्र के साथ एकजुट है। ऐसे लोगों का तब इसका विरोध किया था।
ट्वीट का स्क्रीनशॉट
पीएम नरेंद्र मोदी के लिए कामरा का नफरत जगजाहिर है। कुणाल कामरा ने भाजपा पर निशाना साधने के लिए फ्रंटलाइन कार्यकर्ताओं को अपमानित करने की कोशिश की थी। एक ट्विटर पोस्ट में, उन्होंने लिखा था, ‘कल के लिए तैयारी’ और फ्रंटलाइन के वर्करों का मजाक उड़ाने के लिए मिडिल फिंगर दिखाया था।
पश्चिम बंगाल में चल रहे तीसरे चरण के मतदान के बीच साउथ 24 परगना के आरमबाग में महिलाओं के एक समूह ने तृणमूल कॉन्ग्रेस के बूथ एजेंट पर आज (अप्रैल 6, 2021) हमला बोला। इस घटना के कुछ दिन पहले ही बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने महिलाओं को सुरक्षाबल पर रसोई के औजारों (‘Haatha kunthi‘) से हमला करने की बात कही थी।
रिपोर्ट्स के अनुसार, पूरी घटना पोलिंग स्टेशन 230, सुभयपुर हरिजन प्राथमिक विद्यालय की है। यहाँ महिलाओं का एक समूह आया और टीएमसी एजेंट बाबर अली खान को खींचकर बाहर कर दिया। कथित तौर पर इन महिलाओं ने CSF की मौजूदगी में ही बाबर अली को ‘हाथा कुंठी’ से भी पीटा।
Mamata Didi appealed to woman voters in villages to Chase outsiders away with ‘hata-khunti’ .
Women voters heeded her advice and chased away TMC polling-agent Babar Ali Khan in Arambag out of the booth with ‘hata, khunti’
एबीपी आनंद की रिपोर्ट के अनुसार, सुरक्षाबलों द्वारा रोकने के बावजूद महिलाएँ टीएमसी के बूथ एजेंट को मारती रहीं। किसी तरह वह उनसे बच पाया और पुलिस अधिकारियों की वैन में जाकर बैठा। जब उससे पूछा गया कि क्यो वो पोलिंग बूथ पर वापस जाना चाहता है, तो उसने अपनी निजी सुरक्षा का हवाला दिया। इसके बाद वह घटनास्थल से चला गया।
घटना के बारे मे बात करते हुए खान ने कहा, “पुलिस मुझे यहाँ बचा रही है। लेकिन वे मुझे सीएसएफ की उपस्थिति में ही मार रही थीं। वह मुझे नहीं बचा पाए। इन पुलिसकर्मियों ने मेरी जान बचाई।”
बता दें कि बंगाल में तीसरे चरण के मतदान में हिंसा पहले से अधिक बढ़ गई है। तृणमूल कॉन्ग्रेस ने कहीं पर अपने ऊपर हुई बमबारी का आरोप लगाया तो कहीं टीएमसी पर मतदाताओं को वोट देने से रोकने के आरोप लगे।
गौरतलब है कि इस घटना से कुछ दिन पहले बंगाल के लोगों के मन में बीजेपी के ख़िलाफ़ डर भरते हुए ममता बनर्जी ने एक रैली में कहा था, “अपने घर से समूहों में निकलो, अगर वे किसी को छुएँ, खासकर महिलाओं को तो, लाखों की संख्या में माँएँ अपने रसोई के औजार लेकर निकलें।” ममता ने आगे कहा, “अगर वह किसी आदमी पर हमला बोले, तो बुजुर्गों का समूह एकजुट हो।” वह बोलीं, “मैं देखना चाहती हूँ ये खेल (हिंसा का) कौन जीतेगा, कौन हारेगा।”
शुक्रवार (2 अप्रैल) को अलीपुरद्वार जिले के फलकता में एक चुनावी रैली के दौरान, ममता बनर्जी ने दावा किया था कि तृणमूल कॉन्ग्रेस को हराने के लिए केंद्रीय सुरक्षाकर्मी भाजपा के साथ काम कर रहे हैं। यहाँ जनता को हिंसा का आइडिया देते हुए सीएम ने कहा, “उनकी बात मत सुनो। यदि वे आपको डराने की कोशिश करते हैं, तो, आपको एकजुट होना होगा और उन्हें बर्तन, लाठी और झाड़ू से भगाना होगा।”
उत्तर प्रदेश की अमरोहा पुलिस ने धर्मांतरण के उद्देश्य से अपहृत नाबालिग को बरामद कर लिया है। मुख्य आरोपित को भी गिरफ्तार कर लिया गया है। कोतवाली क्षेत्र के गाँव निवासी नर्सरी संचालक ने जनपद संभल के हयातनगर थाना क्षेत्र के सरायतरीन मंगलपुरा निवासी अफजल पुत्र मोहम्मद अहमद सैफी व एक अज्ञात के खिलाफ धर्मांतरण के लिए नाबालिग बेटी के अपहरण का आरोप लगाते हुए कोतवाली में मुकदमा दर्ज कराया था।
अफजल दिल्ली में कारपेंटर का काम करता था। वह पीड़िता के पिता के नर्सरी में पौधे खरीदने आया करता था। रविवार (अप्रैल 4, 2021) सुबह पुलिस ने आरोपित अफजल को गिरफ्तार कर लिया। साथ ही नाबालिग को भी बरामद कर लिया गया है। मुख्य आरोपित को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया गया है।
पुलिस ने रविवार को दावा किया कि बरामद की गई नाबालिग लड़की ने उन्हें बताया था कि अफजल ने उसे यह कह कर फुसलाया था कि वह हिंदू है और उसका नाम अरमान कोहली है। उसे दिल्ली के उस्मानपुर इलाके से तब गिरफ्तार किया गया, जब वह रविवार को लड़की के साथ एक रिश्तेदार के घर जा रहा था।
अमरोहा के हसनपुर कोतवाली के स्टेशन हाउस ऑफिसर (SHO) संजय तोमर ने बताया,
“दो दिन पहले 16 वर्षीय एक लड़की का अपहरण करने वाले व्यक्ति के बारे में शिकायत दर्ज की गई थी। आरोपित के खिलाफ आईपीसी की धारा 363, 366 और राज्य के धर्मांतरण विरोधी कानून 2020 के तहत प्राथमिकी दर्ज की गई थी।”
तोमर ने कहा कि धर्मांतरण विरोधी कानून लगाया गया था क्योंकि लड़की के पिता ने अफजल पर अपनी बेटी को धर्म परिवर्तन के लिए अगवा करने का आरोप लगाया था।
पूछताछ के दौरान, नाबालिग लड़की ने पुलिस को बताया कि वे पिछले कुछ महीनों से संपर्क में थे। उसने कहा कि आरोपित ने उसे यह कह कर फुसलाया कि उसका नाम अरमान कोहली है और वह हिंदू है। उसने यह भी कहा कि अफजल ने उसका धर्म परिवर्तन कराने की कोशिश की।
लड़की के परिवार के अनुसार, वह दो दिन पहले किसी काम के लिए घर से निकली थी, लेकिन वापस नहीं आई। बाद में स्थानीय लोगों ने बताया कि उसे एक युवक के साथ देखा गया था, जिसके बाद परिवार ने पुलिस में शिकायत दर्ज कराई। अमरोहा के सर्कल ऑफिसर सतीश चंद्र पांडे ने कहा, “आरोपित को जेल भेज दिया गया है जबकि लड़की का मेडिकल परीक्षण कराया जा रहा है।”
देश में कोरोना संक्रमितों की संख्या लगातार बढ़ रही है क्योंकि वैश्विक महामारी की दूसरी लहर चालू हो गई है। देश के 5 राज्यों में चुनाव हो रहे हैं। देश के सबसे ज्यादा जनसंख्या वाले उत्तर प्रदेश में पंचायत चुनाव होने हैं। रेलवे और विमान सेवाएँ चालू हैं। ऐसे में, क्या आपको पता है कि देश के कुछ सक्रिय कोरोना संक्रमितों में से 68.94% उन 5 राज्यों में हैं, जहाँ कॉन्ग्रेस की सरकार है या पार्टी सरकार में साझीदार है।
और हाँ, इन 5 राज्यों में चुनाव नहीं हैं। ये राज्य हैं- महाराष्ट्र, छत्तीसगढ़, पंजाब, राजस्थान और झारखंड। महाराष्ट्र और छत्तीसगढ़ पूरे देश में सक्रिय कोरोना मामलों का गढ़ बना हुआ है। देश में फ़िलहाल कोरोना के कुल 7,85,787 सक्रिय मामले हैं, जिनमें से 5,41,740 इन्हीं 5 राज्यों में हैं। अकेले महाराष्ट्र में कोरोना के 4,51,375 सक्रिय मरीज हैं, जो देश के कुल सक्रिय संक्रमितों का 57.44% बैठता है।
अगर महाराष्ट्र और छत्तीसगढ़ के सक्रिय कोरोना मामलों को मिला दें तो ये आँकड़ा 4,95,671 हो जाता है। यानी देश के कुल सक्रिय मामलों का 63.08% के बराबर। ये दोनों राज्य टॉप पर बैठे हुए हैं। यहाँ न सिर्फ कोरोना, बल्कि कई दूसरी समस्याएँ भी सिर उठा कर खड़ी हैं। आगे हम कोरोना के इन आँकड़ों के बारे में बात करेंगे, लेकिन पहले महाराष्ट्र और छत्तीसगढ़ के सरकारों की मौजूदा स्थिति को समझते हैं।
महाराष्ट्र में कॉन्ग्रेस सत्ताधारी गठबंधन में NCP के बाद तीसरे नंबर की पार्टी है। राज्य की सरकार पहले सुशांत सिंह राजपूत की संदिग्ध मौत के बाद जनता के निशाने पर आई, जिसके बाद उसका पूरा समय अपनी पुलिस की पीठ थपथपाने में गया। अब उसी पुलिस के कई अधिकारी सरकार के खिलाफ खड़े हैं। एक अधिकारी एंटीलिया केस में NIA की गिरफ्तार में है। राज्य के गृह मंत्री को हाल ही में इस्तीफा देना पड़ा है।
जहाँ तक छत्तीसगढ़ की बात है, वहाँ कॉन्ग्रेस की अकेले दम पर सरकार है। मुख्यमंत्री भूपेश बघेल कॉन्ग्रेस के प्रथम परिवार के वफादार सिपहसालारों में से एक बन कर उभरे हैं और अपनी ऊर्जा के कारण कई राज्यों में चुनाव प्रचार में लगे हुए हैं। नक्सली हमले में 22 जवानों के मारे जाने के बाद राज्य की कानून-व्यवस्था सवालों के घेरे में है। स्वास्थ्य मंत्री TS सिंह देव सुरगुजा के ‘महाराज’ हैं। मध्य प्रदेश के एक महाराज की तरह ये भी कभी CM पद के दावेदार थे। लिहाजा बघेल के साथ खटपट की खबरें भी समय-समय पर आती रहती हैं।
महाराष्ट्र में कोरोना के कारण मौतें भी उतनी हुई हैं, जिसकी एक चौथाई मौतें भी किसी अन्य राज्य में नहीं हुईं। यहाँ कोरोना से 56,033 लोग मरे हैं। देश में कोरोना से अब तक 1,65,585 मरीज काल की गाल में समाए हैं। इस तरह से देश में कोरोना से हुई मौतों का 33.83% अकेले महाराष्ट्र का आँकड़ा है। दूसरे नंबर पर आने वाले तमिलनाडु में 12,789 मौतें हुईं। आप महाराष्ट्र और तमिलनाडु के इस आँकड़े के बीच का अंतर देखिए- 4.38 गुना ज्यादा।
5 कॉन्ग्रेस शासित राज्यों में कोरोना के कारण अब तक 71,562 लोगों की मौत हुई है। इस तरह से देश में कोरोना संक्रमण महामारी के कारण 43.21% मौतें अकेले कॉन्ग्रेस शासित 5 राज्यों में हुईं। ये वो 5 राज्य हैं, जहाँ 2020 में सत्ता नहीं बदली। यहाँ भारत में कोरोना का पहला मामला सामने आने के पहले से ही कॉन्ग्रेस की सरकारें हैं। ऐसा नहीं है कि इन राज्यों ने बाकियों से ज्यादा टेस्टिंग कर ली है।
‘केरल मॉडल’ कैसे फुस्स हुआ, हमें पता है। वामपंथियों ने मीडिया और अंतरराष्ट्रीय प्रोपेगेंडा मशीनरी के जरिए प्रचार किया था कि केरल में कोरोना को सबसे सटीक तरीके से नियंत्रित किया गया और वहाँ से न सिर्फ भारत, बल्कि दुनिया को सीख लेनी चाहिए। सच्चाई ये है कि अब तक राज्य में 11,37,591 कोरोना केससामने आ चुके हैं, जो देश में आए 1,26,86,830 मामलों का 8.96% है। इस मामले में महाराष्ट्र के बाद वह दूसरे स्थान पर है।
केरल में कोरोना के कुल 28,370 सक्रिय मामले हैं और ये इस मामले में महाराष्ट्र, छत्तीसगढ़ और कर्नाटक के बाद चौथे नंबर पर काबिज है। अर्थात, स्थिति अभी भी बहुत बेहतर नहीं है। वो भी तब, जब जनसंख्या के मामले में केरल से ऊपर देश के 12 अन्य राज्य हैं। देश में सबसे ज्यादा टेस्टिंग उत्तर प्रदेश (3.6 करोड़) और पिछड़ा माने जाने वाले बिहार (2.4 करोड़) ने की है। इसके बाद कर्नाटक (2.2 करोड़) का नंबर आता है।
इन तीनों ही राज्यों में भाजपा की सरकारें हैं। टेस्टिंग के मामले में झारखंड और पंजाब का प्रदर्शन काफी खराब रहा है। जहाँ झारखंड में मात्र 59.7 लाख लोगों की ही कोरोना टेस्टिंग की गई है, पंजाब में ये आँकड़ा 61 लाख है। इस मामले में दोनों राज्य आसपास ही हैं। जम्मू-कश्मीर (62.5 लाख) और असम (73 लाख) जैसे राज्यों में इन राज्यों से ज्यादा टेस्टिंग हुई है। टेस्टिंग के मामले में टॉप-10 में एक ही कॉन्ग्रेस शासित राज्य है और वो है महाराष्ट्र, जहाँ स्थिति सबसे ज्यादा बदतर है।
सक्रिय कोरोना मामलों में कॉन्ग्रेस शासित राज्यों में स्थिति भयावह (साभार: https://www.covid19india.org/)
केंद्र सरकार के प्रयासों का नतीजा है कि आज देश में 8.31 करोड़ लोगों का टीकाकरण हो चुका है। लेकिन याद कीजिए स्वदेशी कोरोना वैक्सीन को लेकर भ्रम कौन फैला रहा था। जो लोग कल तक वैक्सीन को लेकर अफवाहें फैला कर इसके प्रति लोगों के मन में नकारात्मक भाव भर रहे थे, वही अब पूछ रहे हैं कि भारत ने 75 देशों को वैक्सीन देकर उनकी मदद क्यों की? ये वही छत्तीसगढ़ की सरकार है, जिसने कहा था कि वैक्सीन को लेकर जनता को सलाह देने का आत्मविश्वास उसमें नहीं है।
आज इसी छत्तीसगढ़ ने वैक्सीन की कमी बता कर केंद्र सरकार से इसकी और खेप भेजने का निवेदन किया है। जब कॉन्ग्रेस जैसी बड़ी पार्टी का मुखिया (अघोषित) और उसके नेता कोरोना जैसे त्रासदी के बीच भी नकारात्मकता फैलाते हैं तो वो भूल जाते हैं कि इसका बुरा असर उन राज्यों पर भी पड़ने वाला है, जहाँ उनकी सरकार है। जबकि पीएम मोदी ने बार-बार सभी मुख्यमंत्रियों के साथ बैठक की, उनकी बातें सुनीं, सलाहों का लेन-देन हुआ और हर कुछ सप्ताह के अंतराल पर उन्हें अगले कदम के लिए विश्वास में लिया गया।
आँकड़े खुद गवाही दे रहे हैं कि दुष्प्रचार का नुकसान कॉन्ग्रेस शासित राज्यों की जनता को भुगतना पड़ रहा है, जबकि नेता तो चुनाव प्रचार और अदालत से फटकार खाने में व्यस्त हैं। पंजाब के आँकड़ों को देखते हुए ‘किसान आंदोलन’ की याद आनी स्वाभाविक है, जहाँ तबलीगी जमातियों की तरह हर नियम-कानून को धता बताया गया और कई महीनों तक अराजकता होती रही। परिणाम ये कि राज्य सक्रिय कोरोना मामलों में टॉप-5 में है।
(सभी आँकड़े खबर लिखे जाने तक उपलब्ध हुए डेटा के हिसाब से हैं। आँकड़े ‘Covid19India‘ नामक वेबसाइट से लिए गए हैं।)
एंटीलिया बम कांड और मनसुख हिरेन की मौत के मामले में हर दिन नए खुलासे हो रहे हैं। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, एनआईए की टीम सोमवार देर रात सचिन वाजे को लेकर CSMT स्टेशन पहुँची और 4 मार्च के सीन को रीक्रिएट किया।
एनआईए की टीम ने CCTV फुटेज के साथ सबूतों को पुख्ता करने के लिए प्लेटफॉर्म नंबर 4 और 5 पर रेड टेपिंग कर वाजे को चलवाया। इस दौरान पुणे से गई फॉरेंसिक टीम भी वहाँ मौजूद थी। फॉरेंसिक टीम ने वाजे के मूवमेंट को रिकॉर्ड भी किया। इसकी एनालिसिस कर टीम एक दो से दिन में अपनी रिपोर्ट NIA को सौंपेगी।
एनआईए की टीम सचिन वाजे के साथ सीएसटी स्टेशन पर (फोटो: एएनआई)
बताया जा रहा है कि मनसुख की हत्या के समय मुंबई पुलिस का अधिकारी (अब निलंबित) सचिन वाजे ठाणे भी गया था। वाजे यह जानता था कि अगर वह गाड़ी से जाएगा तो किसी न किसी सीसीटीवी में कैद हो जाएगा, जिससे उसका झूठ सबके सामने आ सकता है। इसलिए वह पैदल ही कमिश्नर ऑफिस से निकला और सीएसएमटी स्टेशन गया, यहाँ से उसने ठाणे के लिए ट्रेन पकड़ी थी। रिपब्लिक टीवी के मुताबिक, सीसीटीवी कैमरों से बचने के लिए सचिन वाजे मुंबई पुलिस मुख्यालय की दीवार से भी कूद गया था। फुटेज से इसका खुलासा हुआ है।
Sachin Vaze’s March 4 visuals OUT: Jumped wall to avoid CCTV cameras; took CST-Thane train https://t.co/LHD2z7L3KH
एनआईए के सूत्रों ने बताया कि 30 मार्च को उन्हें जानकारी मिली थी कि वाजे लोकल ट्रेन पकड़ कर सीएसएमटी स्टेशन से ठाणे गया था। इसके बाद NIA ने सीएसटी स्टेशन जाकर CCTV फुटेज का पता लगाना शुरू कर दिया, जिसके बाद इस मामले से जुड़े कई सबूत उनके हाथ लगे।
सूत्रों के अनुसार, सचिन 4 मार्च को शाम 7 बजे सीएसएमटी स्टेशन पर दिखाई दिया था। उसके बाद वह ठाणे के लिए ट्रेन लेने करीब 8.10 बजे स्टेशन पहुँचा था। इसके बाद उसने बुकी नरेश से खरीदे गए सिम कार्ड का इस्तेमाल कर एक फोन कॉल किया। बुकी नरेश वर्तमान में एनआईए की हिरासत में है।
एनआईए के एक अधिकारी ने बताया कि उन्हें संदेह है कि वाजे ने फिर रात 8 बजकर 31 मिनट पर तावड़े बन कर मनसुख को फोन कर बाहर बुलाया था। टीम इस बात की जाँच कर रही है कि आखिर कौन-कौन वाजे के साथ घोडबंदर रोड पर था, जहाँ मनसुख को बुलाया गया था? क्या मनसुख को मारने के बाद वाजे ने बॉडी को ठिकाने लगाने को बोला था? क्या वाजे ने जिंदा मनसुख को हत्यारों के हवाले कर दिया था?
ABP की रिपोर्ट के अनुसार एनआईए को उसकी जाँच में यह भी पता चला है कि मनसुख की हत्या होने के बाद वाजे फिर ठाणे स्टेशन पर आया और ट्रेन पकड़ कर करीब 10 बजकर 30 मिनट पर भायखला स्टेशन पहुँचा, लेकिन भायखला रेलवे स्टेशन से वो टिप्सी बार के पास रात करीब 11 बजकर 45 मिनट पर पहुँचा था। भायखला स्टेशन उतरने के बाद वाजे की एक बड़े और नामी व्यक्ति के साथ मीटिंग हुई थी और मीटिंग खत्म होने के बाद वाजे टिप्सी बार पर रेड मारने पहुँचा था।
सचिन वाजे के सारे पैसे सँभालती थी मीना जॉर्ज
NIA के सूत्रों के मुताबिक मीना जॉर्ज ही सचिन वाजे के सारे पैसों को सँभालने का काम करती थी। मीना जॉर्ज ने मुंबई से सटे मीरा रोड इलाके में एक फ्लैट किराए पर ले रखा था। मीना जॉर्ज नाम की महिला सचिन वाजे के न सिर्फ पैसों का हिसाब रखती थी, बल्कि मुंबई के वर्सोवा इलाके में मौजूद DCB बैंक में सचिन वाजे और मीना जॉर्ज का ज्वाइंट वेंचर अकाउंट और लॉकर भी मौजूद था। सचिन वाजे की गिरफ्तारी के बाद महज 4000 रुपये छोड़ कर इस अकाउंट के लॉकर से सारी रकम निकाल ली गई थी।
महाराष्ट्र के गृह मंत्री अनिल देशमुख का इस्तीफा
गौरतलब है कि इस मामले में सोमवार को मुंबई के पूर्व पुलिस कमिश्नर परमबीर सिंह के आरोपों के बाद महाराष्ट्र के गृह मंत्री अनिल देशमुख ने अपना इस्तीफा दे दिया। परमबीर सिंह ने आरोप लगाया था कि अनिल देशमुख ने सचिन वाजे को सौ करोड़ रुपए वसूली का टारगेट दिया था। इसके अलावा परमबीर सिंह ने देशमुख पर कई अन्य आरोप भी लगाए थे।
क्या है एंटीलिया मामला
बता दें कि निलंबित पुलिस अधिकारी वाजे ने खुद 25 फरवरी को उद्योगपति मुकेश अंबानी के आवास एंटीलिया के पास पार्क किए गए विस्फोटक से भरे स्कॉर्पियो में धमकी भरा पत्र रखा था। एनआईए ने खुलासा किया कि वाजे पहले स्कॉर्पियो के अंदर धमकी भरा पत्र रखना भूल गया था और बाद में इसे रखने के लिए वापस आया था।
रिपोर्ट्स के मुताबिक, जाँच के दौरान, एनआईए अधिकारियों ने पाया कि वाजे ने एंटीलिया के पास बम से लदे वाहन को पार्क करने से लेकर धमकी भरे पत्र को कार के अंदर रखने तक की पूरी कवायद को खुद से कॉर्डिनेट किया था। एनआईए अधिकारियों ने निष्कर्ष पर पहुँचने के लिए मुलुंड टोल कलेक्शन प्वाइंट से सीसीटीवी फुटेज प्राप्त किया।
पश्चिम बंगाल के तीन जिलों हुगली, हावड़ा और दक्षिण 24 परगना की 31 सीटों पर आज (6 अप्रैल 2021) वोट डाले जा रहे हैं। इस दौरान अब तक कई जगहों से हिंसा की खबरें आईं हैं।
धर्मपुर के बूथ नंबर 53 में भाजपा प्रत्याशी स्वप्नदास गुप्ता के बूथ एजेंट पर हमला हुआ है। वहीं डायमंड हार्बर विधानसभा के डगीरा गाँव में बूथ नंबर 143 और 180 पर हुई कुछ घटनाओं को लेकर भाजपा ने तृणमूल कॉन्ग्रेस पर आरोप लगाया है कि उनके गुंडे मतदाताओं को वोट डालने से रोक रहे हैं। भाजपा प्रत्याशी दीपक हालदार ने इस संबंध में चुनाव आयोग को शिकायत भी की है।
#WestBengalPolls | TMC goons are not allowing people to cast their votes at booth no. 180, 143 Dagira Baduldanga. I have complained to the Election Commission officials: Dipak Haldar, BJP candidate from Diamond Harbour, South 24 Parganas pic.twitter.com/ZFBGH0BfLa
हुगली जिले के तारकेश्वर विधानसभा में बीजेपी एजेंट को बूथ में न घुसने देने की घटना सामने आई। यहाँ भाजपा प्रत्याशी स्वप्नदास के पहुँचने के बाद वह अपने बूथ एजेंट का हाथ पकड़ कर उसे अंदर लेकर गए। न्यूज 18 बंगला के अनुसार, भाजपा कार्यकर्ता ने स्वप्नदास गुप्ता को बताया कि उसे एक हफ्ते से डराया जा रहा है और मौत की धमकियाँ भी मिल रही हैं।
स्वप्नदास गुप्ता ने इस बारे में बताया कि उनके बूथ एजेंट को अंदर जाने नहीं दिया गया या वह किसी कारण बूथ पर नहीं पहुँच पाए, इसकी वह जाँच कर रहे हैं। इस बीच बारुईपुर पूर्बा विधानसभा के भाजपा प्रत्याशी चंदन मंडल ने गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि उनके पार्टी एजेंट्स को 8 इलेक्शन बूथ पर जाने से रोका गया।
उल्लेखनीय है कि तीसरे चरण के मतदान के बीच केवल आपसी झड़प के मामले सामने नहीं आए बल्कि हत्या की घटनाएँ भी दर्ज की गई। बीरभूम के दुबराजपुर इलाके में बीजेपी के बूथ उपाध्यक्ष पतिहार डोम का कत्ल कर दिया गया, जिसके बाद बीजेपी ने टीएमसी कार्यकर्ताओं पर मर्डर का आरोप लगाया।
इधर हुगली के गोघाट इलाके में बीजेपी कार्यकर्ता की माँ का मर्डर कर दिया गया है। बीजेपी ने आरोप लगाते हुए कहा कि टीएमसी के गुंडों ने हत्या की है। हालाँकि, टीएमसी ने मर्डर के आरोपों से इनकार किया है।
जानकारी के मुताबिक, यहाँ कल रात टीएमसी और भाजपा कार्यकर्ताओं में हिंसा हुई थी। पुलिस ने सूचना मिलने पर दो लोगों को हिरासत में लिया, जहाँ किसी पक्ष ने तब शिकायत नहीं लिखवाई। लेकिन आज सुबह झड़प में चोट लगने के कारण जब भाजपा कार्यकर्ता की माँ की मौत हुई, तो बीजेपी ने इसका आरोप टीएमसी पर मढ़ा।
TMC ने लगाए ISF बमबारी के आरोप
तृणमूल कॉन्ग्रेस ने भी घुमरी में उनके ऊपर बमबारी करने के लिए इंडियन सेकुलर फ्रंट (ISF) पर आरोप लगाया है। पार्टी का कहना है कि आईएसएफ ने उन्हें चोट पहुँचाई। टीएमसी के सौकात मोल्ला ने कहा,
“घुमरी में आईएसएफ-कॉन्ग्रेस और लेफ्ट गठबंधन के निर्देशों पर सुबह-सुबह बमबारी हुई। इसाक मोल्ला, अराजक तत्व है और वही इस हमले के पीछे है। हमारी पार्टी के कई नेता भी इसमें घायल हुए हैं। उन्हें अस्पताल में भर्ती करवाया गया है। कुछ 12-14 बम हम पर फेंके गए।”
टीएमसी नेता ने इस हमले को एक सुनियोजित बताया है। साथ ही ये कहा है कि इसका मकसद लोगों के मन में डर भरना था ताकि वह वोट देने न आएँ। बता दें कि पश्चिम बंगाल के तीसरे चरण में मतदान की प्रक्रिया अभी जारी है। कुल 31 विधानसभा के लिए आज 10,871 मतदान केंद्रों पर वोट पड़ रहे हैं। 78.52 लाख मतदाता इस चरण में हैं।