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’47 लड़कियाँ लव जिहाद का शिकार सिर्फ मेरे क्षेत्र में’- पूर्व कॉन्ग्रेसी नेता और वर्तमान MLA ने कबूली केरल की दुर्दशा

केरल के पुंजर से विधायक पूर्व कॉन्ग्रेसी नेता पीसी जॉर्ज ने कहा कि अकेले उनके निर्वाचन क्षेत्र में 47 लड़कियाँ लव जिहाद का शिकार हुईं हैं। उनका कहना है कि यह नहीं पता है कि लड़कियों को इस्लाम में कैसे बदला गया और फिर उसके बाद उन्हें कहाँ ले जाया गया। उन्होंने यह भी कहा कि वह लव जिहाद के लिए मजहब को दोषी नहीं ठहरा रहे हैं, लेकिन देश में अभी भी चरमपंथी हैं।

उन्होंने कहा कि वह पिछले कुछ समय से इस मुद्दे को करीब से देख रहे हैं और ज्यादातर मामले एराटुपेटा में थे। जॉर्ज ने कहा कि पीड़ितों में 12 हिंदू हैं और 35 ईसाई हैं। उन्होंने यह भी कहा कि वह किसी भी शिकायत को लेकर आगे नहीं जा रहे हैं या अदालत का दरवाजा खटखटा रहे हैं क्योंकि इनमें से ज्यादातर लड़कियों के परिवार आत्महत्या करने की कगार पर हैं। उन्होंने यह भी कहा कि वह आश्वस्त हैं कि लव जिहाद अभी भी मौजूद है। जॉर्ज ने कहा कि जेसना, जो 2018 में चाची के घर जाते वक्त लापता हो गई थी, वह लव जिहाद का शिकार है।

गौरतलब है कि पिछले दिनों पीसी जॉर्ज ने राज्य में ‘लव जिहाद’ की वास्तविकता को न सिर्फ स्वीकार किया, बल्कि ये भी कहा कि भारत को अब ‘हिन्दू राष्ट्र’ घोषित किया जाना चाहिए। उन्होंने दावा किया कि देश के सभी मुस्लिम मिल कर भारत को एक इस्लामी मुल्क बनाने का लक्ष्य लेकर चल रहे हैं। इसे रोकने के लिए ठोस कदम उठाना आवश्यक है। 

उन्होंने आदिवासियों के कल्याण के लिए कार्य करने वाली NGO ‘HDRC इंडिया’ द्वारा आयोजित एक कार्यक्रम में कहा कि भारत को तुरंत ‘हिन्दू राष्ट्र’ घोषित किया जाना चाहिए, क्योंकि मुस्लिम समाज 2030 तक इसे इस्लामी मुल्क बनाने के काम पर लगा हुआ है। PC जॉर्ज ने कहा कि ये काम तेज़ी से चल रहा था, लेकिन बीच में PM मोदी ने जिस तरह से नोटबंदी की, उससे ये प्रक्रिया धीमी हो गई। उन्होंने कहा था, “लव जिहाद वास्तविक है।”

इस दौरान PC जॉर्ज ने फ्रांस सहित अन्य यूरोपियन देशों का उदाहरण देते हुए कहा कि जिस तरह से ईसाई देश में घुसपैठ कर मुस्लिम जबरन इस्लाम कबूल करवा रहे हैं, ताकि उन्हें इस्लामी मुल्क बनाया जा सके- ये भयावह है। उन्होंने पूछा कि क्या भारत को किसी समुदाय विशेष के पास जाने दिया जा सकता है? उन्होंने कहा कि इस विषय पर विचार-विमर्श की आवश्यकता है और किसी को तो आवाज़ उठानी ही पड़ेगी।

बता दें कि पिछले 31 वर्षों में 7 बार विधायक चुने जाने वाले प्लनथोट्टाथिल चाको जॉर्ज 2011-15 में कॉन्ग्रेस की सरकार के दौरान केरल विधानसभा के चीफ व्हिप भी रहे हैं। उन्होंने 1 बार KEC (1980), 1 बार JNP (1982), 3 बार KEC-M (1996, 2001, 2006), 1 बार निर्दलीय (2011) और 2016 में केरल कॉन्ग्रेस (M) से चुनाव जीता। उन्होंने 4 मलयालम फिल्मों में भी काम किया है, जिनमें से एक में उन्हें CM, एक में नेता प्रतिपक्ष और एक में पुलिस अधिकारी का किरदार मिला था।

रात में काम, सिर्फ पुरुष करें अप्लाई: महिलाओं को नौकरी के लिए केरल हाईकोर्ट का विज्ञापन के उलट फैसला

केरल हाईकोर्ट ने शुक्रवार (16 अप्रैल 2021) को कहा कि अगर कोई महिला योग्य है तो उसे कार्य की प्रकृति के आधार पर रोजगार के अधिकार से वंचित नहीं किया जा सकता। जस्टिस अनु शिवरामन ने कहा, ”किसी योग्य उम्मीदवार को सिर्फ इस आधार पर नियुक्त करने से इनकार नहीं किया जा सकता कि वह एक महिला है और रोजगार की प्रकृति के अनुसार उसे रात में काम करना होगा। जबकि महिला का योग्य होना ही उसकी नौकरी के लिए सुरक्षात्मक प्रावधान है।”

कोर्ट ने केरल मिनरल्स एंड मेटल्स लिमिटेड की नौकरी के लिए जारी उस अधिसूचना को पलट दिया, जिसमें सिर्फ पुरुषों को आवेदन करने की अनुमति दी गई थी। कोर्ट ने कहा कि इस तरह की अधिसूचना भारतीय संविधान के अनुच्छेद 14, 15 और 16 के प्रावधानों का उल्लंघन करती है, जबकि फैक्ट्रीज एक्ट 1948 के प्रावधान महिलाओं को कार्यस्थल पर शोषण से बचाने के लिए हैं।

ट्रेजा जोसफीन सेफ्टी एंड फायर इंजीनियरिंग में ग्रेजुएट हैं। वह केरल मिनरल्स एंड मेटल्स लिमिटेड में ग्रेजुएट इंजीनियर ट्रेनी (सेफ्टी) के रूप में कार्यरत हैं। 25 वर्षीय ट्रेजा ने कंपनी में उपलब्ध सेफ्टी ऑफिसर के स्थायी पद के लिए आवेदन के लिए जारी अधिसूचना को चुनौती दी थी। इस अधिसूचना में कहा गया था कि केवल पुरुष उम्मीदवार ही इस पद के लिए आवेदन कर सकते हैं।

याचिकाकर्ता ने अधिसूचना को चुनौती देते हुए कहा कि यह भेदभावपूर्ण है और इस तरह के प्रावधान सेफ्टी ऑफिसर के स्थायी पद के लिए नियुक्ति का उल्लंघन करते हैं। इसके साथ ही उन्होंने कोर्ट से प्रार्थना की कि फैक्ट्रीज एक्ट, 1948 की धारा 66 (1) (बी) में जो प्रावधान भारतीय संविधान के अनुच्छेद 14, 15 और 16 का उल्लंघन करते हैं, उन सभी प्रावधानों को असंवैधानिक घोषित किया जाए। उक्त प्रावधानों के अनुसार किसी भी महिला को केवल सुबह 6 बजे से शाम के 7 बजे तक ही फैक्टरी में काम करने की इजाजत है।

इस पर अदालत ने कहा कि हमें कार्यस्थल को बेहतर और समानता वाला बनाना है, ना कि परिस्थितियों का हवाला देकर महिलाओं को रोजगार के मौकों से वंचित करना है। हमें आधी आबादी को हर क्षेत्र में ज्यादा से ज्यादा अवसर देना है।

अदालत ने आगे कहा, ”दुनिया आगे बढ़ रही है और जब समाज में और देश के आर्थिक विकास में महिलाओं की सबसे ज्यादा जरूरत है तो उन्हें घर के कामों में लगा दिया गया है। हम एक ऐसे मुकाम पर पहुँच गए हैं, जहाँ आर्थिक विकास के क्षेत्र में महिलाओं के योगदान को किसी भी इंडस्ट्री द्वारा नजरअंदाज नहीं किया जा सकता है। महिलाओं को स्वास्थ्य सेवा, उड्‌यन और सूचना प्रौद्योगिकी सहित कई उद्योगों में सभी समय पर काम करने के लिए लगाया जा रहा है।”

केरल हाईकोर्ट ने अपने फैसले में आगे कहा, “कई पेशों में तो चौबीसों घंटे काम करने की आवश्यकता होती है और इस तरह की चुनौतियों का सामना कर महिलाओं ने यह साबित किया है कि वे हर समय किसी भी तरह का कार्य करने में सक्षम हैं। हमें इस तथ्य पर विचार करना होगा कि फैक्ट्रीज एक्ट, 1948 ऐसे समय में अधिनियमित किया गया था, जब किसी महिला को किसी भी प्रकृति का काम करना पड़ता था। इसलिए ऐसा देखा जाता था कि कारखानों में रात के समय महिला का शोषणकारी और अधिकारों का उल्लंघन किया जाता।”

कोर्ट ने कहा कि हालाँकि फैक्ट्रीज एक्ट, 1948 की धारा 66 (1) (बी) केवल एक सुरक्षात्मक प्रावधान है, इसे केवल एक संरक्षण के रूप में संचालित और प्रयोग किया जा सकता है। यह प्रावधान ऐसी महिला को नौकरी देने से या काम करने से इनकार करने का बहाना नहीं हो सकता है, जिसे इस तरह के संरक्षण की आवश्यकता नहीं है।

गौरतलब है कि भारतीय संविधान के अनुच्छेद 14 के अनुसार, भारत सरकार किसी भी व्यक्ति के साथ भेदभाव नहीं करेगी। अनुच्छेद 14 के साथ अनुच्छेद 15 भी जुड़ा है। इसमें कहा गया है, “राज्य किसी नागरिक के खिलाफ सिर्फ धर्म, मूल, वंश, जाति, लिंग, जन्मस्थान या इनमें से किसी के आधार पर कोई भेद नहीं करेगा।”

वहीं भारतीय संविधान के अनुच्छेद 16 में सार्वजनिक पदों पर अवसर की समानता से संबंधित प्रावधान किए गए हैं। अनुच्छेद 16(2) के अनुसार, राज्य के अधीन किसी भी पद के संबंध में धर्म, मूलवंश, जाति, लिंग, उद्भव, जन्मस्थान, निवास या इसमें से किसी के आधार पर न तो कोई नागरिक अपात्र होगा और न उससे भेद किया जाएगा।

बंगाल: बूथ पर ही BJP पोलिंग एजेंट की मौत, TMC गुंडों ने ‘भाजपा को वोट क्यों’ कह शर्ट पकड़ धक्का दिया

पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव के पाँचवें चरण में भी हिंसा के साथ मतदान की शुरुआत हुई है। राज्य की 6 जिलों की 45 सीटों पर सुबह 7:00 बजे से वोटिंग की शुरुआत हो गई है। मतदान वाले क्षेत्रों में लगातार हिंसा की खबरें आ रही हैं।

उत्तर 24 परगना के कमरहटी विधानसभा क्षेत्र में भाजपा पोलिंग एजेंट की मतदान केंद्र के अंदर ही मौत की खबर है। कमरहटी में 107 नंबर बूथ पर भाजपा के पोलिंग एजेंट की अचानक मौत पर चुनाव आयोग ने रिपोर्ट माँगी है। मृतक भाजपा के पोलिंग एजेंट के भाई का कहना है, “उनका नाम अभिजीत सामंत है। किसी ने उनकी मदद नहीं की, यहाँ इलाज की कोई सुविधा नहीं है।”

वहीं कमरहटी बूथ पर टीएमसी नेता मदन मित्रा और सुरक्षा बल के बीच बहस भी हुई। टीएमसी नेता मदन मित्रा कमरहटी बूथ का दौरा करने पहुँचे, जहाँ बवाल हो गया। उन्होंने कहा, “मुझे मतदान केंद्र में प्रवेश करने का पूरा अधिकार है। उन्होंने (केंद्रीय बलों) ने मेरी जेब की भी तलाशी ली, जिसमें मैं देवी की तस्वीरें ले जा रहा था। यह एक लोकतांत्रिक देश है। मैं मुख्य चुनाव आयुक्त से मिलने जा रहा हूँ।”

इसके साथ ही उत्तरी 24 परगना जिले के हरोआ निर्वाचन क्षेत्र से ऐसी ही एक घटना में भाजपा पोलिंग एजेंट को टीएमसी के बाहुबलियों द्वारा धमकी दी गई। हरोआ के एक मतदान केंद्र से सामने आए वीडियो में साफ तौर पर देखा जा सकता है कि वोट डालने जा रहे बीजेपी कार्यकर्ताओं को टीएमसी कार्यकर्ताओं ने धमकाया। इस दौरान भगवा पार्टी को वोट देने के लिए बीजेपी नेता का शर्ट पकड़ कर धमकी दी। टीएमसी कार्यकर्ता ने बीजेपी नेता की शर्ट पकड़ कर धमकाया कि उसने चक्रवात अम्फान के दौरान तृणमूल सरकार से पैसे क्यों लिए।

रिपब्लिक टीवी के मुताबिक बंगाली में दो नेताओं के बीच बातचीत इस प्रकार है:- 

TMC: कहाँ जा रहे हो और किस लिए जा रहे हो?

BJP: पहले मेरी कमीज छोड़ो। मैं मतदान करने जा रहा हूँ।

TMC: तुम मतदान करने जा रहे हो या मतदान एजेंट के रूप में दस्तावेज जमा करने जा रहे हो?

BJP: पहले मेरी कमीज छोड़ो।

TMC: नहीं, मैं नहीं छोड़ता। क्या कर लोगे?

TMC: तुमने अम्फान चक्रवात के दौरान तृणमूल पार्टी से पैसे लिए और वोट भाजपा को दे रहे हो? (बीजेपी एजेंट को धक्का देते हुए) फिर तुमने अम्फान के दौरान पैसे क्यों लिए?

ममता की ऑडियो क्लिप को लेकर चुनाव आयोग से मिला भाजपा प्रतिनिधिमंडल

ममता बनर्जी की कथित ऑडियो को लेकर आज भाजपा प्रतिनिधिमंडल चुनाव आयोग से मिला। आयोग से मिलने के बाद भाजपा नेता शिशिर बाजोरिया ने कहा कि जहाँ तक टेप की प्रमाणिकता का सवाल है, टीएमसी सांसद डेरेक ओ ब्रायन और सुखेंदु शेखर रॉय ने इसकी पुष्टि की है। उन्होंने कहा कि टेप का एकमात्र उद्देश्य ध्रुवीकरण बनाना था। आयोग से अपील की गई है कि इसकी जाँच करें और एसआईटी का गठन करे।

बता दें कि इससे पहले नादिया से टीएमसी और बीजेपी कार्यकर्ताओं के बीच हिंसा की खबर सामने आई थी। वहीं बर्दवान जिला में दो भाजपा एजेंट का सिर फोड़ दिया गया। घायलों को बर्दवान मेडिकल कॉलेज अस्पताल में भर्ती कराया गया। इसके अलावा पश्चिम बंगाल के मीनाखान बूथ पर कथित तौर पर क्रूड बम फेंका गया। टीएमसी ने आईएसएफ कैडर पर बम फेंकने का आरोप लगाया था।

गाँव के ही 11 लोगों ने 6 घंटे तक किया गैंगरेप, 2 दिन तक बेहाश रही पीड़िता: झारखंड के पाकुड़ से सब गिरफ्तार

झारखंड के पाकुड़ से मानवता को शर्मसार कर देने वाली घटना सामने आई है। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, मुफ्फसिल थाना इलाके के एक गाँव में शौच के लिए गई 35 वर्षीय विवाहित महिला के साथ 11 युवकों ने गैंगरेप की घटना को अंजाम दिया।

यह घटना मंगलवार (13 अप्रैल 2021) की बताई जा रही है। 11 आरोपितों ने बारी-बारी से 6 घंटे तक (रात 10 बजे से सुबह 4 बजे तक) अनुसुचित जनजाति की महिला के साथ सामूहिक दुष्कर्म किया। इसके बाद पीड़िता को बेहोशी की हालत में उसके घर के पास छोड़ दिया।

दो दिन बाद जब महिला को होश आया, तो उसने आरोपितों के खिलाफ पुलिस में शिकायत दर्ज कराई। पुलिस ने इस मामले में सभी 11 आरोपितों को गिरफ्तार कर लिया है।

पीड़िता ने पुलिस को बताया कि सभी आरोपित खेत में बैठकर शराब पी रहे थे। वह उन्हें देख नहीं पाई और शौच के लिए चली गई। वहाँ दो-तीन युवकों ने आकर उसे पकड़ लिया और गमछे से उसका मुँह बंद कर दिया। इसके बाद सभी 11 आरोपितों ने खदान के पीछे खलिहान में ले जाकर उसके साथ बारी-बारी से दुष्कर्म किया।

पीड़िता ने आगे बताया कि आरोपितों ने उसे धमकी दी थी कि अगर वह इस घटना की शिकायत पुलिस से करेगी, तो वे उसे जान से मार देंगे। महिला के लिखित आवेदन पर मुफ्फसिल थाना में धारा 376 के तहत सभी 11 आरोपितों के खिलाफ केस दर्ज कर लिया गया है।

पीड़ित महिला इस मामले में गाँव के ही विप्लव पहाड़िया, सुजीत पहाड़िया, तपन पहाड़िया, कालू पहाड़िया, झाड़ू पहाड़िया, मंडल पहाड़िया, चिचींग पहाड़िया, ओरमूल पहाड़िया, मोटू पहाड़िया, रघू पहाड़िया एवं शिशू पहाड़िया को आरोपित बनाया है। मुफ्फसिल पुलिस ने इस मामले में सभी नामजद 11 आरोपितों को गिरफ्तार कर लिया है।

वहीं, एसडीपीओ (SDPO) अजीत कुमार विमल ने शुक्रवार को बताया कि 35 वर्षीय महिला के साथ गैंगरेप करने का मामला सामने आया है। पीड़िता की लिखित शिकायत के आधार पर मामला दर्ज करते हुए सभी 11 आरोपितों को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया गया है। पुलिस आगे की छानबीन में जुट गई है।

कुंभ हो प्रतीकात्मक… PM मोदी की अपील पर महामंडलेश्वर स्वामी अवधेशानंद ने कहा- ‘जीवन की रक्षा ही सबसे बड़ा पुण्य’

कोरोना का संक्रमण तेजी से फैल रहा है, जिससे देशभर के कई हिस्से बुरी तरह से प्रभावित हुए हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आज ट्वीट कर जानकारी दी है कि उन्होंने कोरोना के संबंध में जूना अखाड़ा के महामंडलेश्वर अवधेशानंद सरस्वती से फोन पर बात की है। पीएम ने स्वामी अवधेशानंद से कुंभ के शाही स्नान को प्रतीकात्मक रखने की अपील की है।

प्रधानमंत्री ने ट्वीट कर जानकारी दी कि उन्होंने स्वामी अवधेशानंद से फोन पर बात कर कुंभ मेले में गए सभी साधु-संतों के स्वास्थ्य के बारे में जानकारी ली। उन्होंने आगे बताया कि सभी साधुओं ने प्रशासन को पूरा सहयोग करने को कहा है, जिसके लिए उन्हें धन्यवाद।

इस मामले में जूना अखाड़ा के महामंडलेश्वर स्वामी अवधेशानंद सरस्वती ने ट्विटर पर जानकारी दी कि वो प्रधानमंत्री के इस आह्वान का सम्मान करते हैं। उन्होंने ट्वीट किया, “जीवन की रक्षा महत पुण्य है। मेरा धर्म परायण जनता से आग्रह है कि कोविड की परिस्थितियों को देखते हुए भारी संख्या में स्नान के लिए न आएँ एवं नियमों का निर्वहन करें!”

उन्होंने हिंदुओं से अपील करते हुए स्नान को प्रतीकात्मक रखने और मेले में भीड़ जमा नहीं करने की अपील की है। स्वामी अवधेशानंद ने आगे कहा कि कोरोना संकट के बीच जीवन की रक्षा ही सर्वोपरि है।

इससे पहले गुरुवार को पंचायती निरंजनी अखाड़ा ने 17 अप्रैल तक कुंभ मेले के समापन की घोषणा की थी। अखाड़ा ने यह फैसला हरिद्वार में कोरोना वायरस के बढ़ते मामलों के बाद लिया था।

न्यूज 24 से बात करते हुए पंचायती निरंजनी अखाड़ा के रवींद्र पुरी महाराज ने जानकारी दी, “यह महामारी का समय है। गुजरात, महाराष्ट्र और भारत के अन्य हिस्सों से यहाँ साधुओं से पूछकर हमने एक निर्णय लिया है। सभी को अपने-अपने स्थान पर लौटने को कहा गया है। हरिद्वार की हालत बिगड़ती जा रही है। केवल कुछ साधु 27 अप्रैल को स्नान करेंगे। हमने सभी से वापस जाने का अनुरोध किया है। ”

उन्होंने आगे कहा, “कोरोनावायरस के मामलों में तेजी से हो रही वृद्धि के कारण यह निर्णय लिया गया है। हम चाहते हैं कि हम सब सुरक्षित रहें। इससे हमें सोशल डिस्टेंसिंग के दिशानिर्देशों का पालन करने में मदद मिलेगी।”

यह पूछे जाने पर कि क्या यह उनका निजी फैसला है या उन्होंने इसे किसी के दवाब में लिया है? इस पर रवींद्र पुरी महाराज ने स्पष्ट किया, “हम पर किसी का भी दवाब नहीं है। यह कोई व्यक्तिगत मामला नहीं है। यह एक सामाजिक मुद्दा है, जो बड़ी संख्या में लोगों को प्रभावित करेगा। हमने लोगों की भलाई के लिए फैसला लिया है।” हालाँकि उन्होंने ये भी स्पष्ट किया कि पंचायती निरंजनी अखाड़ा से जुड़े लगभग 50 साधु 27 अप्रैल को स्नान करेंगे।

बता दें कि कुंभ मेले में 4 शाही स्नान और 9 गंगा स्नान शामिल हैं। इसी कड़ी में 27 अप्रैल को चौथा शाही स्नान आयोजित होगा।

दीप सिद्धू को जमानत: दिल्ली कोर्ट का फैसला, 26 जनवरी हिंसा मामले में हैं मुख्य आरोपित

कृषि कानूनों के विरोध में किसानों द्वारा 26 जनवरी 2021 के दिन निकाली गई ट्रैक्टर परेड के दौरान लाल किले पर व दिल्ली के अंदर हुई हिंसा के मामले में मुख्य आरोपित दीप सिद्धू को दिल्ली की अदालत ने जमानत दे दी है।

दीप सिद्धू पर भीड़ को उकसाने का आरोप है। दिल्ली पुलिस ने सिद्धू को 9 फरवरी को हरियाणा के करनाल से गिरफ्तार किया था। गणतंत्र दिवस पर दिल्ली में लाल किले पर हुई हिंसा के संबंध में दर्ज एफआईआर में दीप सिद्धू और अन्य के नाम शामिल हैं। इन सभी पर हिंसा करने का आरोप है। दिल्ली पुलिस के मुताबिक, 26 जनवरी को कुछ लोगों ने लाल किले में हुई हिंसा के बाद एक धार्मिक झंडा फहराया था। उनमें से कुछ की पहचान की गई है, जिनमें से दीप सिद्धू मुख्य आरोपित है।

बता दें कि 8 अप्रैल, 2021 को दिल्ली पुलिस ने दीप सिद्धू की जमानत का विरोध किया था। पुलिस के मुताबिक, दीप सिद्धू न सिर्फ उस दिन हिंसा में शामिल था बल्कि एक दिन पहले उसने पूरी साजिश भी रची थी। लोनी का रूट लेकर वह लालकिला पहुँचा था।

इतना ही नहीं दीप सिद्धू ने लोगों को धार्मिक झंडा फहराने के लिए भी उकसाया था। इसके लिए 25 जनवरी को सिंघु बॉर्डर पर बाकायदा एक मीटिंग की गई थी। 26 जनवरी को सिद्धू लाल किले पर दोपहर 1 बजकर 54 मिनट पर पहुँच गया था। इस हिंसा में 144 पुलिसकर्मी गंभीर रूप से घायल हुए थे।

सिद्धू की जमानत याचिका का विरोध करते हुए, अभियोजक ने दावा किया कि रिहा होने पर, सिद्धू सबूत नष्ट कर देगा क्योंकि जब वह गिरफ्तार हुआ था तो उसने दो फोन नष्ट कर दिए थे।

आरोपित दीप सिद्धू के वकील ने क्या कहा?

आरोपित दीप सिद्धू के वकील अभिषेक गुप्ता ने कहा था कि जाँच एजेंसी के पास ऐसे कोई सबूत नही हैं कि लालकिले पर हुई हिंसा में दीप सिद्धू शामिल था। जाँच एजेंसी ने दीप सिद्धू के खिलाफ 1 लाख रुपए का इनाम रख दिया। जाँच एजेंसी न्यूज रिपोर्ट के आधार पर ऐसा कैसे कर सकती है? अभिषेक गुप्ता ने कहा था कि दीप सिद्धू किसी भी किसान संगठन से जुड़ा हुआ नहीं है। ट्रैक्टर रैली के लिए सिद्धू की तरफ से कोई भी घोषणा या आह्वान नहीं किया गया था। दीप सिद्धू ने लालकिला जाने के लिए भी नहीं कहा था।

गौरतलब है कि 26 जनवरी को हजारों की संख्या में प्रदर्शनकारी किसान बैरिकेट्स को तोड़ कर राष्ट्रीय राजधानी में दाखिल हो गए थे और आईटीओ सहित अन्य स्थानों पर उनकी पुलिस कर्मियों से झड़पें हुई थीं। कई प्रदर्शनकारी ट्रैक्टर चलाते हुए लाल किला पहुँच गए और ऐतिहासिक स्मारक में प्रवेश कर गए तथा उसकी प्राचीर पर एक धार्मिक झंडा लगा दिया। इस हिंसा में 500 से अधिक पुलिसकर्मी घायल हो गए थे, जबकि एक प्रदर्शनकारी की मौत हो गई थी।

दिल्ली पुलिस ने इस हिंसा के सिलसिले में राकेश टिकैत, योगेंद्र यादव, राजिंदर सिंह, मेधा पाटकर, बूटा सिंह, दर्शन पाल और बलबीर सिंह राजेवाल समेत 38 किसान नेताओं के खिलाफ नामजद एफआईआर दर्ज की है। दिल्ली पुलिस ने गणतंत्र दिवस पर हुई हिंसा के मामले में अब तक 152 लोगों को गिरफ्तार किया गया है। पुलिस ने भारतीय दंड संहिता (IPC) की धारा 124 ए (राजद्रोह) के तहत मामला दर्ज किया है और पंजाबी अभिनेता दीप सिद्धू और गैंगस्टर से सामाजिक कार्यकर्ता बने लक्खा सिधाना को मुख्य आरोपित बनाया है।

‘अनुसूचित जाति वाले भिखारी, चंद पैसों के लिए BJP के पीछे-पीछे’ – TMC नेता सुजाता खान 24 घंटे में EC को देगी जवाब

चुनाव आयोग ने तृणमूल कॉन्ग्रेस (TMC) की नेता सुजाता मंडल खान को अनुसूचित जाति के खिलाफ विवादित बयान को लेकर नोटिस जारी किया है। आयोग ने नोटिस मिलने के 24 घंटे के अंदर सुजाता मंडल खान को इसका जवाब देने को कहा है। ऐसा नहीं करने पर उनके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी और उनसे तृणमूल के स्टार प्रचारक का दर्जा भी छीना जा सकता है। नोटिस में कहा गया है कि उन्हें यह भी बताना चाहिए कि उनसे ‘स्टार प्रचारक’ का दर्जा वापस क्यों नहीं लिया जाना चाहिए।

मुख्तार अब्बास नकवी की अगुवाई वाले भाजपा के प्रतिनिधि दल की ओर केंद्रीय चुनाव आयोग से शिकायत की गई थी। केंद्रीय अल्पसंख्यक कल्याण मंत्री मुख्तार अब्बास नकवी इस मामले में चुनाव आयोग से पिछले दिनों मिले थे। उन्होंने पूरे मामले की शिकायत करने के साथ ही कहा कि राज्य में चुनाव के दौरान इस तरह की बयानबाजी कर आचार संहिता का उल्लंघन किया गया है।

चुनाव आयोग में अपनी शिकायत दर्ज करवाने के बाद बीजेपी नेता दुष्यंत गौतम ने कहा था कि पीएम नरेंद्र मोदी ने जितनी भी योजना लागू की उसमें कोई भेदभाव नहीं किया गया। कांग्रेस और टीएमसी का मानना है कि संसाधनों पर अल्पसंख्यकों का हक है। बीजेपी के साथ दलित वर्ग जुट रहा है। हम चुनाव आयोग से टीएमसी पर कार्रवाई की माँग करते है। टीएमसी की मान्यता भी रद्द होनी चाहिए।

क्या बोली थी सुजाता मंडल?

बता दें कि कुछ दिनों पहले एक टीवी चैनल को दिए गए इंटरव्यू में आरामबाग विधानसभा सीट से टीएमसी प्रत्याशी सुजाता मंडल ने बयान दिया था कि अनुसूचित जाति के लोग स्वभाव से भिखारी होते हैं। ममता बनर्जी ने उनके लिए इतना कुछ किया, लेकिन फिर भी चंद पैसों के लिए वो बीजेपी के पीछे-पीछे हो रहे हैं। वो बीजेपी को अपना वोट बेच रहे हैं।  खान ने कहा था, “एक कहावत है कि कुछ स्वभाव से भिखारी होते हैं तो कुछ परिस्थितियों के कारण। अनुसूचित जाति के लोग स्वभाव से भिखारी होते हैं।”     

उल्लेखनीय है कि पिछले दिनों चुनाव प्रचार के दौरान अपने संबोधन में पीएम ने टीएमसी नेता सुजाता मंडल के ‘भिखारी’ वाले बयान को लेकर टीएमसी की सोच पर सवाल उठाया था। उन्होंने कहा था, “एक वीडियो सामने आया है जिसमें दीदी की करीबी एक नेता ने अनुसूचित जाति के लोगों का बहुत बड़ा अपमान किया है। उन्होंने कहा कि बंगाल में जो अनुसूचित जाति है, Schedule Caste समुदाय है वो भिखारियों की तरह व्यवहार करती है।” आगे पीएम ने दीदी से पूछा था, “क्या SC समुदाय के मेरे भाई बहनों और उनके बच्चों से आप, आपकी पार्टी, आपके नेता इतनी नफरत करते हैं?”

ड्रामा क्वीन, चिंदी, गैंग, गिद्ध… कार्तिक आर्यन के समर्थन में कंगना ने करण जौहर को धो डाला

बॉलीवुड अभिनेता कार्तिक आर्यन को करण जौहर के धर्मा प्रोडक्शन ने “अनप्रोफेशनल बिहैवियर” का आरोप लगाकर फिल्म दोस्ताना 2 से बाहर कर दिया और उन्हें ब्लैक लिस्ट भी कर दिया, जिससे भविष्य में वो कभी भी धर्मा प्रोडक्शन के साथ काम नहीं कर पाएँगे। अब इस मामले में बॉलीवुड की क्वीन कंगना रनौत ने कार्तिक के साथ खड़े होते हुए करण जौहर को कड़ी फटकार लगाई।

कंगना ने बैक टू बैक कई ट्वीट कर लिखा, “कार्तिक आर्यन अपने दम पर यहाँ तक पहुँचे हैं, वह अपने दम पर ऐसा करता रहेगा। पापा जो और उनके नेपो गैंग क्लब से मेरी ये विनती है कि उसे अकेला छोड़ दें। सुशांत की तरह उसके पीछे पड़कर उसे फाँसी पर लटकने के लिए मजबूर ना करो। गिद्धों उसे अकेला छोड़ दो और दफा हो जाओ चिंदी नेपोज (भाई-भतीजावाद)।”

अपने अगले ट्वीट में कंगना ने कार्तिक सलाह दी कि उन्हें इन चिल्लरों से डरने की जरूरत नहीं है। कंगना ने लिखा, “गंदे आर्टिकल्स लिखने और तुम्हारे एटीट्यूड को खराब बताने वाले एनाउंसमेंट करने के बाद ये लोग गरिमामय मौन धारण करना चाहते हैं। इन लोगों ने सुशांत सिंह राजपूत के बारे में भी ड्रग एडिक्शन और गैर जिम्मेदाराना रवैये की बातें फैलाकर ऐसा ही व्यवहार किया था।”

कार्तिक के समर्थन में तीसरा ट्वीट करते हुए कंगना लिखती हैं, “हम आपके साथ हैं, जिसने आपको नहीं बनाया वह आपको नहीं तोड़ सकता, आज आप सभी कोनों से खुद को अकेला और टारगेटेड महसूस कर रहे होंगे। ऐसा महसूस करने की जरूरत नहीं है, हर कोई इस ड्रामा क्वीन ‘जो’ को जानता है, अपनी हुनर पर भरोसा करें और अनुशासित रहें। बहुत प्यार।”

गौरतलब है कि दोस्ताना-2 2008 में आई ब्लॉकबस्टर फिल्म दोस्ताना का सीक्वल है, जिसमें अभिषेक बच्चन, जॉन अब्राहम और प्रियंका चोपड़ा ने एक्टिंग की था। दोस्ताना को तरुण मनसुखानी ने निर्देशित किया था। जबकि, दोस्ताना-2 का निर्देशन कोलिन डी कनुहा द्वारा किया जा रहा है और इसमें कार्तिक आर्यन के साथ जान्हवी कपूर और लक्ष्मण लालवानी प्रमुख भूमिका में थे। लेकिन अब प्रोडक्शन हाउस को आर्यन की जगह लेने के लिए एक अभिनेता की तलाश करनी होगी। यह फिल्म टीवी अभिनेता लक्ष्या के लिए बॉलीवुड डेब्यू होने जा रही है।

रोजा-सहरी के नाम पर ‘पुलिसवाली’ ने ही आतंकियों को नहीं खोजने दिया, सुरक्षाबलों को धमकाया: लगा UAPA, गई नौकरी

जम्मू-कश्मीर के कुलगाम जिले की एक विशेष पुलिस अधिकारी (SPO) को ‘आतंकवाद का महिमामंडन करने’ और सरकारी अधिकारियों को उनके कर्तव्य का निर्वहन करने से ‘रोकने’ के आरोप में गिरफ्तार कर सेवा से बर्खास्त कर दिया गया है। महिला पुलिसकर्मी पर UAPA के तहत मामला दर्ज किया गया है।

पुलिस प्रवक्ता ने शुक्रवार (अप्रैल 16, 2021) को बताया कि दक्षिण कश्मीर जिले में फ्रिसल इलाके की निवासी सायमा अख्तर को अवैध गतिविधि रोकथाम कानून के तहत गिरफ्तार किया गया है। उन्होंने बताया कि सुरक्षा बलों को फ्रिसल गाँव के कारेवा मोहल्ले में आतंकवादियों की मौजूदगी की खुफिया जानकारी मिली थी, जिसके बाद वहाँ तलाशी अभियान चलाया गया। प्रवक्ता ने बताया कि अभियान के दौरान अख्तर ने आतंकवादियों को खोज रही टीम को अपना काम करने से रोका।

उन्होंने बताया कि जैसे ही सुरक्षाबलों ने तलाशी लेने के लिए कुछ घरो में जाने की कोशिश की तो वहाँ कुछ महिलाओं ने शोर मचाना शुरू कर दिया और पुलिस को अपना काम करने से रोका। इन महिलाओं की अगुवाई साइमा अख्तर नाम की एक महिला कर रही थीं, जो खुद जम्मू कश्मीर पुलिस में SPO के तौर पर काम कर रही थीं।

पुलिस के अनुसार साइमा के उकसावे पर भीड़ उग्र हो गई और पुलिस को अपना ऑपरेशन बीच में ही रोकना पड़ा। इसके चलते इलाके से कुछ संदिग्ध शायद भागने में कामयाब भी हुए। लेकिन घटना यहाँ ख़त्म नहीं हुई।

उन्होंने कहा, “महिला ने तलाश अभियान चला रहे दल को रोका और वह हिंसक हो गई। महिला ने आतंकवादियों के हिंसक कृत्यों का महिमामंडन करने वाले बयान भी दिए।” प्रवक्ता ने बताया कि सायमा अख्तर ने अपने फोन से एक वीडियो बनाया और ‘तलाशी अभियान बाधित करने के इरादे से’ उसे सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर शेयर किया। उन्होंने बताया कि मामले को संज्ञान में लेते हुए महिला को गिरफ्तार कर लिया गया और सेवा से बर्खास्त कर दिया गया।

वायरल वीडियो में क्या है?

बता दें आरोपित द्वारा बनाए गए वीडियो में दिख रहा है एक महिला सैन्यकर्मी पर चिल्ला रही थी। उसका कहना था कि कम से कम रमजान के दौरान तो सुरक्षाकर्मी छानबीन ना करें। महिला द्वारा सैन्य कर्मियों को वीडियो में ‘बाहरी’ बुलाया जाना सुना जा सकता है।

अंग्रेजी अखबार द इंडियन एक्सप्रेस के अनुसार वीडियो में  महिला ने कहा- “तुम बार-बार क्यों आते हो? उन घरों में जाओ, जहाँ आतंकवादी हैं। आप हमें हमारी सेहरी (रमज़ान के दौरान सुबह का भोजन) भी नहीं करने दे रहे हैं। यदि आपको हमारे घर की तलाशी लेनी है, तो पहले अपने जूते निकालें। मेरी माँ की तबीयत ठीक नहीं है। अगर उसके साथ कुछ होता है, तो आप देखभाल करेंगे।”

वीडियो में देखा जा सकता है महिला के रोकने पर सैन्य कर्मी चिल्लाया। इस पर महिला ने कहा कि वे उसे डरा नहीं सकते। उसने कहा, “अपना मुँह बंद करें। हम डरने वाले नहीं हैं। यह हमारा कश्मीर है। आप बाहर से आए हैं। जो कुछ भी आप करना चाहते हैं, वह करें, अगर वे (आतंकवादी) यहाँ होते तो अब तक आपके सीने में गोलियाँ उतार चुके होते।”

पुलिस ने बताया कि इस मामले में पुलिस थाना यारीपोरा में भारतीय दंड संहिता की धारा 353 (लोक सेवक को कर्तव्य का निर्वहन करने से रोकने के लिए बल प्रयोग या हमला करना) और अवैध गतिविधि रोकथाम कानून की धारा 13 के तहत प्राथमिकी दर्ज की गई है तथा मामले की जाँच जारी है। जानकारी के मुताबिक साइमा को गिरफ्तार करके जेल भेजा गया है और मामले में शामिल बाकी लोगों की पहचान कर गिरफ्तारी की तैयारी भी की जा रही है।

‘नए कश्मीर’ में महिलाओं को भी नहीं बख्शा जा रहा: महबूबा मुफ्ती

पीपुल्स डेमोक्रेटिक पार्टी (पीडीपी) प्रमुख महबूबा मुफ्ती ने आतंकवाद का महिमामंडन करने के कारण महिला एसपीओ को गिरफ्तार किए जाने के मामले में कहा कि ‘नए कश्मीर में जुल्मों से महिलाओं को भी नहीं बख्शा’ जा रहा है।

मुफ्ती ने बयान में कहा, “सायमा अख्तर को उसके घर में बार-बार अकारण तलाशी लिए जाने के कारण उचित प्रश्न उठाने पर यूएपीए के तहत आरोपित बनाया गया। यह समझा जा सकता है कि सायमा की माँ के बीमार होने के कारण उसकी चिंता और बढ़ गई। नए कश्मीर में क्रूरता से महिलाओं को भी नहीं बख्शा जा रहा।”

दक्षिण कश्मीर में इस समय सुरक्षा बलों का अभियान चरम पर है और अमरनाथ यात्रा को देखते हुए यहाँ आए दिन आतंकियों को तलाश किया जा रहा है। ऐसे में इस तरह के विरोध प्रदर्शनों से इन अभियानों पर असर पड़ सकता है। इसलिए पुलिस ने अपनी ही एक कर्मी के खिलाफ इतना सख्त फैसला लिया।

पश्चिम बंगाल में 5वें चरण की वोटिंग शुरू: 2 BJP एजेंट का सिर फोड़ा, बम फेंका गया

पश्चिम बंगाल में पाँचवें चरण के चुनाव के तहत 6 जिलों की 45 सीटों पर वोट डाले जा रहे हैं। जिन सीटों पर आज वोट डाले जा रहे हैं, उनमें उत्तर 24 परगना की 15 सीटें भी शामिल हैं। इसके अलावा भाजपा का गढ़ माने जाने वाले जलपाईगुड़ी, दार्जिलिंग और कालिम्पोंग में भी पार्टी उम्मीदवारों की किस्मत का फैसला होगा। नादिया के 9 सीटों पर भी वोटिंग चल रही है।

इस बीच नादिया से टीएमसी और बीजेपी कार्यकर्ताओं के बीच हिंसा की खबर सामने आ रही है। घटना की सूचना के बाद मौके पर भारी सुरक्षा बलों की तैनाती कर दी गई है। वहीं बर्दवान जिला में दो भाजपा एजेंट का सिर फोड़ दिया गया है।

घायलों को बर्दवान मेडिकल कॉलेज अस्पताल में भर्ती कराया गया है। जानकारी के मुताबिक बर्दवान उत्तर विधानसभा क्षेत्र के सराइटिकुरी के 72 नंबर बूथ पर भारतीय जनता पार्टी के एजेंट को बूथ में प्रवेश करने से रोक दिया गया था। जिसके बाद हुई झड़प में ये घटना घटी। पार्टी ने टीएमसी पर आरोप लगाया है। हालाँकि फिलहाल टीएमसी की तरफ से कोई प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।

इसके अलावा पश्चिम बंगाल के मीनाखान बूथ पर कथित तौर पर क्रूड बम फेंका गया। टीएमसी ने आईएसएफ कैडर पर बम फेंकने का आरोप लगाया है।

अगर भौगोलिक आधार पर देखा जाए तो इस चरण में उत्तरी बंगाल की 13 सीटों का फैसला होना है, जो बीजेपी के गढ़ के रूप में देखी जा रही है। वहीं दक्षिणी बंगाल की सीटों पर तृणमूल कॉन्ग्रेस का प्रभाव मजबूत है। दक्षिणी बंगाल की कुछ सीटों पर सीपीएम भी ताकत दिखा सकती है।

चुनाव प्रचार के दौरान भारतीय जनता पार्टी सत्ताधारी तृणमूल के खिलाफ लगातार भ्रष्टाचार के आरोप लगाती रही है। वहीं टीएमसी की तरफ से बीजेपी को ‘बाहरी’ ठहराने की कोशिश की गई है। इस चरण में कुल 319 प्रत्याशियों की किस्मत का फैसला होना है, जिसमें 39 महिलाएँ भी शामिल हैं।

ये हैं हाईप्रोफाइल कैंडिडेट

हाईप्रोफाइल प्रत्याशियों की बात करें तो दमदम सीट से टीएमसी के प्रत्याशी और राज्य सरकार में मंत्री ब्रत्य बासू शामिल हैं। उनके सामने सीपीएम ने पलाश दास तो बीजेपी ने बिमल शंकर नंदा को उतारा है। वहीं कमारहाटी सीट से टीएमसी के हैवीवेट प्रत्याशी मदन मित्रा मैदान में हैं। उनके सामने बीजेपी के अनिंद्य राजू बनर्जी हैं तो सीपीएम की तरफ से सायनदीप मित्रा हैं।

बिधान नगर सीट पर टीएमसी के सुजीत बोस और बीजेपी के सब्यसाची दत्त में मुकाबला है। वहीं राजारहाट सीट से टीएमसी ने सिंगर अदिति मुंशी को मैदान में उतारा है। उनके सामने पश्चिम बंगाल बीजेपी के प्रवक्ता सामिक भट्टाचार्य हैं।

दार्जिलिंग में इस बार चुनावी समीकरण 2019 के मुकाबले 2021 में पूरी तरह से बदला हुआ नजर आ रहा है। इसकी वजह है गोरखा जनमुक्ति मोर्चा। विमल गुरुंग के नेतृत्व में मोर्चा ने इस बार टीएमसी के साथ मिलकर चुनाव लड़ने का फैसला किया है। जबकि साल 2019 में मोर्चा ने बीजेपी के साथ मिलकर चुनाव लड़ा था। दार्जिलिंग जिला के सिलीगुड़ी में वाम मोर्चा के स्टार उम्मीदवार वरिष्ठ नेता और पूर्व मंत्री अशोक भट्टाचार्य भी ताल ठोक रहे हैं।

पश्चिम बंगाल में विधानसभा चुनावों में भारी मतदान करने के लिए देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ट्वीट करके मतदाताओं से अपील की है। पीएम ने ट्वीट में लिखा है कि वो अपील करते हैं कि मतदाता बड़ी संख्या में चुनावों के लिए मतदान करें। इसके साथ ही उन्होंने पहली बार मतदान करने वालों को अपने मताधिकार का प्रयोग करने का अनुरोध किया है।