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BJP नेता के घर हमला करने वाले 3 आतंकी ढेर, हमले में जान गवाँने वाले पुलिसकर्मी का ईद के बाद सजना था सेहरा

जम्मू-कश्मीर के नौगाम के अरीबाग में भाजपा नेता अनवर खान के घर पर आतंकी हमला करने वाले 3 आतंकवादियों को आज (अप्रैल 2, 2021) मार गिराया गया। पुलिस को इनके पास से गायब हुए हथियार भी मिले। आईजीपी विजय कुमार ने बताया, “कल बीजेपी नेता के घर पर हुए हमले में शामिल आतंकवादियों को मार ​दिया गया है। पुलिस का हथियार भी बरामद हो गया।”

पुलिस अधिकारी ने बताया कि ये हमला लश्कर-ए-तैयबा और अलबद्र ने मिलकर किया था। हमले में शामिल तीन आतंकियों को मार दिया गया, जबकि 2 आतंकियों को जल्द पकड़ लिया जाएगा। बता दें कि 1 अप्रैल 2021 को भाजपा नेता के घर पर हुए आंतकी हमले में एक पुलिस के जवान रमीज राजा की मौत हो गई थी

अपने पिता के नक्शेकदम पर चलते हुए रमीज ने पिछले साल ही पुलिस ज्वाइन की थी। गुरुवार दोपहर जब उनका पार्थिव शरीर तिरंगे में लिपट के गाँव आया तो हर व्यक्ति फफक कर रो पड़ा। दो दिन पहले ही रमीज का निकाह तय हुआ था। ईद के बाद उसे अपनी दुल्हन लेकर आनी थी। घर में शादी की तैयारियाँ चल रही थीं।

दैनिक जागरण में प्रकाशित खबर के अनुसार, रमीज की माँ नसीमा अपने बेटे के लिए रो रोकर कहती हैं, “जिन्होंने मेरे रमीज को शहीद किया है, उन्होंने हम सभी को जीते जी कत्ल कर दिया है। कहते हैं कि मेरे बेटे को मुजाहिदों ने मारा है, यह कौन से मुजाहिद हैं। मेरा बेटा भी तो मुजाहिद ही था, वह भी इसी कौम की खातिर, इसी कश्मीर के लिए पुलिस में भर्ती हुआ था। मेरा खाविंद (पति) भी पुलिस में ही था। मेरे बेटे को शहीद करने वाले कभी भी मुजाहिद नहीं हो सकते। मैं तो उसके लिए सेहरा सजा रही थी।”

रमीज के एक साथी ने बताया की वह बहुत मजाकिया था। वह किसी से नहीं डरता ता। जब भी सब उसे कहते कि थोड़े संजीदा हो जाओ तो वह कहता, “मैं खुशीपोरा का हूँ, खुश रहूँगा, हँसूगा-हँसाऊँगा। संजीदा नहीं रह सकता।”

रमीज के जनाजे में उमड़ी भीड़ (साभार: दैनिक जागरण)

उल्लेखनीय है कि कल भाजपा नेता के आवास पर हुए आतंकी हमले में रमीज गोली लगने से घायल हुए थे। बाद में अस्पताल ले जाते वक्त रास्ते में उनकी मौत हो गई। गुरुवार को ही उनका शव तिरंगे में लिपटकर उनके गाँव खुशी पोरा पहुँचा, जहाँ देखते ही देखते बच्चों से लेकर बुजुर्गों तक हुजूम उमड़ गया। आसपास की दुकानें बंद हो गईं और सबकी मौजूदगी में उन्हें उनके पैतृक गाँव के कब्रिस्तान में सुपुर्द-ए-खाक किया गया।

CM ममता के ‘भाईपो’ के क्षेत्र में BJP प्रत्याशी पर लाठी-डंडों से हमला, घेर कर की गई मारपीट: TMC के गुंडों पर आरोप

बंगाल विधानसभा चुनाव के दौरान भाजपा नेताओं पर हमले अब भी नहीं थम रहे हैं। डायमंड हार्बर से भाजपा प्रत्याशी दीपक हल्दर और उनके समर्थकों पर लठियों से हमला किया गया है। हल्दर तीसरे चरण के मतदान से पहले हरिदेवपुर में चुनाव प्रचार कर रहे थे। उन्होंने टीएमसी के सदस्यों पर हमले करने का आरोप लगाया है। ये वही क्षेत्र है, जहाँ से मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के भतीजे अभिषेक सांसद हैं।

हल्दर ने आरोप लगाया कि जब वे चुनाव प्रचार से लौट रहे थे तब कुछ लोगों ने उन्हे घेर लिया और उनके साथ मारपीट शुरू कर दी। उन्हें डायमंड हार्बर के अस्पताल में भर्ती कराया गया है।

टीएमसी छोड़ भाजपा में शामिल हुए थे दीपक हल्दर

बंगाल विधानसभा चुनावों के पहले ही हल्दर टीएमसी छोड़ कर भाजपा में शामिल हुए थे। इसके बाद भाजपा ने उन्हें डायमंड हार्बर से अपना प्रत्याशी घोषित किया था। हल्दर ने आरोप लगाया था कि उन्हें जनता के लिए कार्य करने से रोक जा रहा है, जिस कारण वे टीएमसी से अलग हो रहे हैं।

बैरकपुर से भाजपा सांसद अर्जुन सिंह ने सोशल मीडिया के माध्यम से हल्दर पर हुए हमले की निंदा की है। अर्जुन सिंह ने यह भी आरोप लगाया है कि हल्दर पर हमला करने वाले लोग अभिषेक बनर्जी के पाले हुए टीएमसी के गुंडे हैं। अभिषेक बनर्जी बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के भतीजे हैं और डायमंड हार्बर उनका गढ़ माना जाता है। TMC पर उनका नियंत्रण होने के कारण भाजपा अक्सर ‘भाईपो (भतीजा) राजनीति’ का आरोप लगाती रही है।

इससे पहले बंगाल में भाजपा की वरिष्ठ नेता लॉकेट चटर्जी पर हमला हुआ था। पूर्व क्रिकेटर और भाजपा प्रत्याशी अशोक डिंडा भी एक हमले में घायल हो गए थे। इसके अलावा नंदीग्राम में ममता बनर्जी के विरुद्ध चुनाव लड़ने वाले भाजपा प्रत्याशी शुभेन्दु अधिकारी के काफिले पर भी हमला हुआ था। हाल ही में चुनाव प्रचार के दौरान गृह मंत्री अमित शाह ने कहा था कि बंगाल में भाजपा के 130 से ज्यादा कार्यकर्ताओं की हत्या हो चुकी है।

चुनाव के बीच रांगिया में फहराया Pak झंडा, गुस्से में लोगों ने ‘पाकिस्तान मुर्दाबाद’ के नारे लगा जला डाला

असम में विधानसभा चुनाव के लिए वोटिंग हो रही है। ऐसे में वहाँ माहौल बिगाड़ने के लिए रांगिया जिले के गोरुकुची क्षेत्र में असामाजिक तत्वों ने सड़क के किनारे पाकिस्तान का झंडा फहरा दिया। घटना 1 अप्रैल सुबह की है। उस दौरान विधानसभा चुनाव के लिए दूसरे चरण के तहत मतदान चल रहा था। रिपोर्ट्स के मुताबिक पाकिस्तानी झंडा बाँस के डंडे से बाँध कर मिट्टी के ऊँचे टीले पर लगाया गया था।

इसको लेकर राजनीति भी तेज हो गई है। पार्टियाँ एक-दूसरे को इसके लिए आरोपी ठहराने में जुटी हुई हैं। विपक्षी पार्टियों ने बीजेपी पर आरोप लगाया है कि वह इसके लिए मुख्य मुद्दों से लोगों का ध्यान भटकाना चाहती है। जबकि यह किसने किया, यह स्पष्ट नहीं हो सका है।

लोगों ने पाकिस्तानी झंडा जला निकाला गुस्सा

इस मामले में स्थानीय लोगों का कहना है कि गोरुकुची के लोगों के बीच सांप्रदायिक फूट डालने के लिए यह घटिया काम किया गया है। एक स्थानीय नागरिक ने कहा कि रांगिया के लोग हर समुदाय के साथ शांति के साथ रहते हैं। इसलिए पाकिस्तानी झंडे वाली बात वोटों के लिए लोगों को बाँटने की साजिश मात्र है।

एक स्थानीय नागरिक ने मीडिया से बात करते हुए बताया, “जब हम यहाँ आए तो यह झंडा लहरा रहा था। हम रांगिया के लोग अच्छी तरह से जानते हैं कि कौन सी पार्टी इस तरह का काम कर सकती है।”

पाकिस्तानी झंडा मिलने के बाद लोगों का गुस्सा फूट पड़ा। उन्होंने इस झंडे को जला दिया। इस दौरान स्थानीय नागरिकों ने पाकिस्तान मुर्दाबाद के नारे भी लगाए। इसका वीडियो भी सोशल मीडिया पर वायरल हो गया है।

गौरतलब है कि रांगिया कामरुप जिले में स्थित छोटा सा गाँव है। 2011 की जनगणना के मुताबिक यहाँ की जनसंख्या 26,389 है। यह स्थान श्रीपुर देवालय मंदिर के लिए प्रसिद्ध है। मान्यता है कि देवी सती के शरीर का भाग यहाँ गिरा था। तभी से यह स्थान शक्तिपीठ के रूप में विख्यात है।

लव जिहाद विरोधी कानून पर गुजरात विधानसभा की मुहर: घर वापसी में बाधक नहीं, शादी के बाद जबरन धर्मांतरण निषिद्ध

लव जिहाद और जबरन धर्मांतरण को रोकने के लिए गुजरात विधानसभा ने नया बिल पास किया है। ‘गुजरात धार्मिक स्वतंत्रता (संशोधन) अधिनियम 2021’ गुरुवार (1 अप्रैल 2021) को सदन में पास हुआ। इस बिल में शादी के जरिए जबरन धर्मांतरण या इस तरह की शादी में सहयोग करने पर दंड का प्रावधान किया गया है। यदि कोई अपने पूर्वजों के धर्म में वापसी करना चाहेगा तो उसमें यह बिल बाधक नहीं होगा

इस बिल में अधिकतम 10 साल तक की जेल की सजा और विवाह द्वारा धोखाधड़ी या जबरन धर्म परिवर्तन के लिए अधिकतम 5 लाख रुपए जुर्माने का प्रावधान है। यह बिल गुजरात फ्रीडम ऑफ रिलिजन एक्ट-2003 में संशोधन कर राज्य सरकार लेकर आई है।

गुजरात के गृह मंत्री प्रदीप सिंह जडेजा ने बताया कि नए बिल में बहला-फुसलाकर, धमकी, लालच और भय दिखाकर अन्य धर्म की युवती से विवाह और धर्मांतरण के लिए 3 से 5 साल तक की सजा का प्रावधान है। इस तरह के मामलों में 2 लाख रुपए जुर्माने का भी प्रावधान किया गया है। नाबालिग और अनुसूचित जाति-जनजाति के मामले में 7 साल की सजा हो सकती है।

सदन में बिल को पेश करते हुए गृह मंत्री जडेजा ने कहा कि यह कानून हिन्दू लड़कियों को धर्मांतरण के उद्देश्य से विवाह के कुचक्र से बचाने के लिए बनाया जा रहा है। उन्होंने यह भी कहा कि हिन्दू लड़कियों से शादी करने और फिर उनका धर्म परिवर्तन कराने के लिए अंतर्राष्ट्रीय माध्यमों से फंडिंग हो रही है। गुजरात के उप-मुख्यमंत्री नितिन पटेल ने भी कहा कि यह कानून किसी समुदाय विशेष के लिए नहीं बनाया गया है। यह कानून सभी पर समान रूप से लागू होता है।

गौरतलब है कि विधानसभा में ही कॉन्ग्रेस विधायक इमरान खेडावाला ने इस बिल की प्रति फाड़ डाली थी। कॉन्ग्रेस MLA ने इसे बीजेपी का नया हथकंडा बताते हुए कहा था कि इसे स्वीकार नहीं किया जाना चाहिए। खेडावाला ने यह भी दावा किया कि विधेयक में जिहाद शब्द का इस्तेमाल कर एक समुदाय को निशाना बनाया गया है।

खेडावाला ने बाद में मीडिया से बात करते हुए कहा था कि वह शादी से पहले या धोखे से करवाए गए जबरन धर्मांतरण को बढ़ावा नहीं देते। उनके अनुसार इस कृत्य के लिए विधेयक में जितनी सजा लिखी है उससे ज्यादा मिलनी चाहिए। उन्होंने कहा कि ऐसे अपराध के लिए सऊदी अरब के शरिया कानून जैसी सजाएँ होनी चाहिए।

लव जेहाद के विरुद्ध इस तरह क कानून बनाने वाला गुजरात तीसरा राज्य है। इससे पहले उत्तर प्रदेश और मध्य प्रदेश भी लव जेहाद को रोकने के लिए कानून बना चुके है। उत्तर प्रदेश में फरवरी में धर्मांतरण विरोधी बिल राज्य विधानसभा द्वारा पास कर दिया गया था। मध्य प्रदेश में भी हाल ही में धर्मांतरण विरोधी कानून लागू हुआ है।

यूरिन में इन्फेक्शन, मुनव्वर राणा दिल्ली AIIMS में भर्ती: घुटने का भी चल रहा इलाज, चलने-फिरने में होती है दिक्कत

शायर मुनव्वर राणा को दिल्ली के एम्स में भर्ती करवाया गया है। मुनव्वर राणा की बेटी सौम्या ने गुरुवार को बताया कि यूरिन में इन्फेक्शन की वजह से उनके पिता की तबीयत पिछले दिनों ज्यादा खराब हो गई थी। इसके बाद उन्हें पहले लखनऊ के मेदांता अस्पताल में भर्ती कराया गया था। वहाँ हालत में सुधार नहीं होने पर उन्हें मंगलवार को दिल्ली एम्स ले जाया गया।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, गंभीर हालत होने के चलते शायर का इलाज लगातार डॉक्टरों की देखरेख में चल रहा है। बताया जा रहा है कि 68 वर्षीय शायर राणा गले के कैंसर से भी पीड़ित हैं। साल 2017 में उनके सीने में तेज दर्द उठा था। उनके फेफड़ों और गले में इंफेक्शन भी हुआ था, जिसके बाद उन्हें एसजीपीजीआई में भर्ती कराया गया था।

राणा के घुटने का भी इलाज चल रहा है। पिछले 7 सालों में कई बार उनके घुटने का ऑपरेशन हो चुका है, लेकिन इसके बाद भी उन्हें चलने-फिरने में दिक्कत हो रही थी। बता दें कि राणा को 2014 में साहित्य अकादमी पुरस्कार से भी नवाजा जा चुका है।

वैसे मुनव्वर राणा हाल के समय में अपनी शायरी से ज्यादा हिंदुओं और मोदी सरकार से घृणा की वजह से चर्चा में रहे हैं। इसी साल जनवरी में किसानों को उकसाने की कोशिश करते हुए उन्होंने एक ट्वीट किया था। इसमें कहा था, “इस मुल्क के कुछ लोगों को रोटी तो मिलेगी, संसद को गिरा कर वहाँ कुछ खेत बना दो। अब ऐसे ही बदलेगा किसानों का मुकद्दर, सेठों के बनाए हुए गोदाम जला दो। मैं झूठ के दरबार में सच बोल रहा हूँ, गर्दन को उड़ाओ, मुझे या जिंदा जला दो।”

इसी तरह बिहार चुनाव में एनडीए की जीत के बाद उन्होंने ओवैसी को जमकर खरी-खोटी सुनाई थी। इसी तरह फ्रांस में शिक्षक का गला रेतने वाले हमलावर का बचाव करते हुए कहा था, “अगर उसकी जगह मैं होता तो मैं भी वही करता। किसी को इतना मजबूर न करो कि वह कत्ल करने के लिए तैयार हो जाए।”

40 देशों की समिट में Pak को बुलाया ही नहीं, US राजदूत ने भी किया किनारा: अमेरिका से मिला ‘डबल झटका’

भारत के साथ व्यापार को लेकर खुद ही फैसले लेकर खुद ही उसे पलट रहे पाकिस्तान को अब संयुक्त राष्ट्र अमेरिका से ‘डबल झटका’ मिला है। पहला, अमेरिकी राष्ट्रपति जो बायडेन की मेजबानी वाली ‘क्लाइमेट लीडर्स समिट’ में पाकिस्तान को न्योता नहीं दिया गया है। दूसरा, US क्लाइमेट एन्वॉय जॉन केरी अपने एशिया ट्रिप में भारत तो आएँगे, लेकिन पाकिस्तान का दौरा नहीं करेंगे।

क्लाइमेट समिट अप्रैल 22-23, 2021 को होना है। ये समिट वर्चुअल रूप से ही होगा। इसमें जलवायु संकट के लिए किए जा रहे प्रयासों में तेज़ी लाने पर चर्चा की जाएगी। दुनिया भर के 40 वैश्विक नेता इस समिट का हिस्सा बनेंगे। भारत के अलावा बांग्लादेश भी इसमें शामिल होगा, लेकिन पाकिस्तान नहीं। इस साल नवंबर में स्कॉटलैंड के ग्लासगो में ‘UN क्लाइमेट चेन्ज कॉन्फ्रेंस (COP26)’ का आयोजन भी होना है।

क्लाइमेट चेन्ज के दुष्प्रभावों के मामले में पाकिस्तान दुनिया का 5वाँ सबसे कमजोर मुल्क है, लेकिन इसके बावजूद उसे न्योता न मिलने से वहाँ के नेता और अधिकारी बौखलाए हुए हैं। पाकिस्तान के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ज़ाहिद हाफिज चौधरी ने कहा कि पाकिस्तान के ‘बिलियन ट्री सुनामी’ प्रोजेक्ट को वर्ल्ड इकोनॉमिक फोरम से लेकर कई अंतरराष्ट्रीय मंचों पर प्रशंसा मिली। उन्होंने कहा कि इस समिट में वो देश शामिल हो रहे हैं, जो 80% कार्बन एमिशन के लिए जिम्मेदार हैं।

विशेषज्ञों का कहना है कि अफगानिस्तान मुद्दे को छोड़ दें तो पाकिस्तान का अमेरिका के लिए कोई महत्व नहीं है। इसीलिए, विश्व के इन 40 नेताओं में इमरान खान का नाम शामिल नहीं है। पाकिस्तान द्वारा तालिबान को समर्थन देने से भी अमेरिका खफा है। पाकिस्तान को अमेरिका ने कड़ा सन्देश भी दिया है। स्पेशल एन्वॉय जाल्में ख़लीलजाद ने भी अपने पिछले इस्लामाबाद दौरे में विदेश मंत्री की जगह पाकिस्तान के सेना प्रमुख से मुलाकात की थी।

अब अमेरिकी राजदूत जॉन केरी भारत और बांग्लादेश आ रहे हैं, लेकिन वो पाकिस्तान नहीं जाएँगे। अब पाकिस्तान का विदेश मंत्रालय ये कह कर इज्जत बचा रहा है कि वो कार्बन एमिशन के मामले में काफी निचले पायदान पर है, इसीलिए इस समिट में उसे नहीं बुलाया गया। पाकिस्तान का कार्बन एमिशन 1% से भी कम है। भारत पर 2050 तक नेट जीरो एमिशन लक्ष्य का दबाव भी है। केरी का दौरा गुरुवार (अप्रैल 1, 2021) से शुरू हुआ।

इस दौरान उन्हें UAE, भारत और बांग्लादेश जाना है। 9 दिनों तक चलने वाली इस दौरे में अबुधाबी, नई दिल्ली और ढाका उनका ठिकाना बनेगा। केरी ने तीनों देशों के दौरे को लेकर ट्वीट भी किया। भारत ने कहा है कि वो पेरिस समझौते का पालन करते हुए 2030 तक कार्बन एमिशन को 2005 के स्तर से 30-35% कम करेगा। साथ ही वो ग्रीन व रिन्यूएबल एनर्जी के प्रयोग को बढ़ावा देने में लगा हुआ है। भारत ने ‘इंटरनेशनल सोलर अलायन्स’ भी बनाया है।

बताते चलें कि पाकिस्तान की सरकार वहाँ की इस्लामी कट्टरवादियों के सामने झुक गई है। 1 दिन पहले ही वहाँ की केंद्रीय कैबिनेट ने ‘इकोनॉमिक कोआर्डिनेशन कमिटी (ECC)’ के उस प्रस्ताव को ठुकरा दिया, जिसमें भारत से कॉटन और शुगर इम्पोर्ट करने की बात कही गई थी। उससे 1 दिन पहले ही पाकिस्तान ने भारत से होने वाले व्यापार पर से पाबंदी हटाई थी। 2019 में अनुच्छेद-370 के प्रावधानों को निरस्त किए जाने के बाद पाकिस्तान ने बौखलाहट में ये निर्णय लिया था।

सवाल: जय श्रीराम से ममता बनर्जी को चिढ़ क्यों, TMC सांसद का जवाब: अंतिम संस्कार में ‘छैयां छैयां’ बजे तो परेशानी होगी ही

इस बार पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव में एक तरफ बीजेपी ने अपनी पूरी ताकत झोंक दी है, वहीं दूसरी तरफ ममता बनर्जी तीसरी बार सरकार बनाने की उम्मीद कर रही हैं। ममता बनर्जी पिछले 10 वर्षों से बंगाल की सत्ता में हैं, इस बार वह सत्ता-विरोधी और हिंदुत्व की लहर का सामना कर रही हैं। हाल ही में बरखा दत्त को दिए एक इंटरव्यू में तृणमूल कॉन्ग्रेस (TMC) सांसद डेरेक ओ ब्रायन ने बताया कि ममता बनर्जी को जय श्रीराम के नारों से चिढ़ क्यों होती है?

बरखा दत्त ने ब्रायन से पूछा कि आखिर ममता जय श्रीराम के नारों से क्यों चिढ़ जाती हैं। उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि नेताजी सुभाष चंद्र बोस की 125वीं जयंती के मौके पर कोलकाता के विक्टोरिया मेमोरियल में आयोजित पराक्रम दिवस समारोह के दौरान वह जय श्रीराम का नारा लगाए जाने से काफी नाराज हो गई थीं। इसके अलावा 2019 में लोकसभा चुनाव के दौरान ममता जय श्रीराम के नारों से इतनी गुस्सा हो गई थीं कि उन्होंने काफिला रोककर भाजपा कार्यकर्ताओं को खरी-खोटी सुनाई थी।

इस सवाल का जवाब देते हुए ब्रायन ने कहा कि ममता बनर्जी ने सुभाष चंद्र बोस की जयंती समारोह के दौरान अपना आपा नहीं खोया। टीएमसी नेता ने कहा कि उन्हें जय श्रीराम के नारों से कोई दिक्कत नहीं है, लेकिन समस्या यह है कि इसका उपयोग कहाँ और किस तरीके से किया गया था।

इसके बाद टीएमसी नेता ने एक अजीब तुलना करते हुए कहा कि मलाइका अरोड़ा और शाहरुख खान पर फिल्माये गाने ‘चल छैयां छैयां छैयां’ में कुछ भी गलत नहीं है, लेकिन अगर यह उनके दोस्त के पिता के अंतिम संस्कार में बजाया जाता है, तो उन्हें इससे परेशानी होगी।

हालाँकि, यह स्पष्ट नहीं हो पाया कि ब्रायन ने अपने दोस्त के पिता के अंतिम संस्कार के लिए ममता बनर्जी के काफिले की तुलना करना क्यों उचित समझा। हिंदुओं के लिए जय श्रीराम बेहद पवित्र है। इससे स्प्ष्ट होता है कि वह इसके महत्व को नहीं समझते हैं। वह इसे कुछ इस तरह से अपमानजनक मानते हैं जैसे एक अंतिम संस्कार में बॉलीवुड गाने का बजना है। उन्हें तो शायद यह भी महसूस नहीं हुआ कि जय श्रीराम की तुलना बॉलीवुड गाने के साथ करना कितना अनुचित है। जय श्रीराम न केवल एक नारा है, बल्कि यह लोगों की धार्मिक आस्था से जुड़ा हुआ है। यह एक जाप है जो हिंदुओं को खासा प्रिय है।

बता दें कि नेताजी सुभाष चंद्र बोस की 125वीं जयंती के मौके पर कोलकाता के विक्टोरिया मेमोरियल में आयोजित पराक्रम दिवस समारोह के दौरान ममता बनर्जी भाजपा कार्यकर्ताओं द्वारा जय श्रीराम का नारा लगाए जाने से काफी नाराज हो गई थीं। उस समय पीएम मोदी भी मंच पर ही मौजूद थे और ममता ने गुस्सा जाहिर करते हुए भाषण देने से भी इनकार कर दिया था। उन्होंने पीएम सहित वहाँ मौजूद अन्य विशिष्ट लोगों के सामने आरोप लगाते हुए कहा था, ”सरकारी कार्यक्रम का एक सम्मान होना चाहिए। किसी को कार्यक्रम में बुलाकर बेइज्जती करना ठीक नहीं है।”

इससे पहले 2019 लोकसभा चुनाव के प्रचार के दौरान ममता का काफिला गुजरने के दौरान कुछ लोगों ने जय श्रीराम के नारे लगा दिए थे। इस पर वह बौखला गई थीं। उन्होंने काफिला रोककर और गाड़ी से उतरकर उन लोगों को खरी-खोटी सुनाई और पुलिस अधिकारियों को नारा लगाने वालों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई का निर्देश दिया था।

‘गरीब जब रात को जागेगा तो क्या करेगा? बच्चे ही पैदा करेगा न?’: जनसंख्या पर बोले मौलाना बदरुद्दीन – गरीबों को TV दो

असम में कॉन्ग्रेस के गठबंधन में मौलाना बदरुद्दीन अजमल इस विधानसभा चुनाव में ‘किंगमेकर’ बन कर उभरने के ख्वाब देख रहे हैं। अब उन्होंने जनसंख्या बढ़ने व इसके नियंत्रण को लेकर अपनी ‘महत्वपूर्ण’ राय दी है। उन्होंने कहा कि इसका एक ही समाधान है और वो है ‘तालीम’ अर्थात शिक्षा, क्योंकि जब वो पढ़-लिख लेंगे तो खुद अपने अच्छे-बुरे को समझेंगे। अजमल ने कहा कि गरीबी बहुत बड़ी समस्या है और इसे दूर किए बिना जनसंख्या नियंत्रण नहीं हो पाएगा।

बदरुद्दीन अजमल ने पूछा कि गरीबों को उनके मनोरंजन के लिए क्या दिया गया है? उन्होंने कहा कि इन गरीबों के पास देखने के लिए टेलीविजन नहीं है, रहने के लिए घर नहीं है और हवा के लिए पंखा नहीं है। उन्होंने कहा, “करंट नहीं है। बिजली नहीं है। अब इंसान हैं वो भी। गरीब जब रात को उठेगा। मियाँ-बीवी हैं। दोनों जवान हैं। तो फिर रात को क्या करेंगे? वो बच्चे ही तो पैदा करेंगे।” अजमल ने ‘लल्लनटॉप’ से बात करते हुए ये सब कहा।

ऐसा नहीं है कि ये सिर्फ बदरुद्दीन अजमल की ही सोच है। वो तो भला सांसद हैं। यूपीए काल में भारत के केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री भी ऐसा ही सोचते थे। अगस्त 2009 में खबर आई थी कि भारत के तत्कालीन केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री गुलाम नबी आजाद मानते हैं कि देर रात तक टीवी देखना जनसंख्या नियंत्रण के लिए एक अच्छा उपाय है। उन्होंने गाँवों में बिजली पहुँचाने के परिप्रेक्ष्य में ऐसा कहा था। उन्होंने कहा था, “जब बिजली ही नहीं है, फिर बच्चे पैदा करने के सिवा करने को और कुछ है ही क्या?”

उन्होंने कहा था कि जब गाँवों तक बिजली पहुँचेगी तो लोग देर रात तक टीवी देखेंगे और सो जाएँगे, जिसके बाद उनके पास बच्चे पैदा करने का मौका ही नहीं होगा। ये उस देश के मंत्री का बयान था, जिसके बारे में अनुमान लगाया गया है कि कुछ वर्षों बाद वहाँ चीन से ज्यादा जनसंख्या होगी, दुनिया में सबसे ज्यादा। 70 के दशक में संजय गाँधी जबरिया फैमिली प्लानिंग योजना लेकर आए थे। कई अविवाहित और गरीबों की तब पकड़-पकड़ के नसबंदी कर दी गई थी।

माहिद बना मोहित, दोस्ती के बाद किया रेप… फिर दोस्तों से करवाया गैंगरेप: मना करने पर एसिड से जलाने की धमकी

महाकाल की नगरी उज्जैन में लव जिहाद का मामला सामने आया है। एक मुस्लिम लड़के ने नाम बदल कर पहले एक नाबालिग लड़की को अपनी दोस्ती के जाल में फँसाया और उसके बाद उससे दुष्कर्म किया।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, पीड़िता मध्य प्रदेश के बड़वानी की रहने वाली है। वह काम करने महाराष्ट्र के मालेगाँव गई थी, जहाँ उसकी मुलाकात उत्तर प्रदेश के औरैया में रहने वाले मुस्लिम युवक माहिद से हुई। माहिद ने पीड़िता को अपना नाम मोहित (ताकि हिंदू पहचान हो) बताकर उससे दोस्ती कर ली। इसके बाद वह उसे अपने साथ मालेगाँव से पुणे, दिल्ली और फिर औरैया ले गया। अलग-अलग शहरों में उसने अपने दोस्तों के साथ मिलकर लड़की का रेप किया।

यह मामला प्रकाश में तब आया, जब नाबालिग के गर्भवती होने पर माहिद ने उसे बस में बिठाकर उसकी बहन के पास उज्जैन भेज दिया। यहाँ जिला अस्पताल में लड़की ने एक दिव्यांग बच्चे को जन्म दिया, जिसकी बाद में मौत हो गई। इसी अस्पताल में हिंदू जागरण मंच की कार्यकर्ता की परिचित भी भर्ती थी।

पीड़िता ने उसे बताया कि माहिद नाम के मुस्लिम युवक ने उससे नाम बदलकर दोस्ती की। उसके बाद उसने उसके साथ दुष्कर्म किया और अपने दोस्तों से भी उसका रेप करवाया। इस दौरान जब वह गर्भवती हो गई तो उन्होंने उसे उसकी बहन के पास उज्जैन भेज दिया।

पीड़िता ने बताया कि माहिद उसे जान से मारने और एसिड फेंकने की धमकी भी देता था। लड़की की दर्द भरी दास्तां सुनने के बाद हिंदू जागरण मंच के कार्यकर्ताओं ने उसकी मदद की। कार्यकर्ताओं ने लड़की से फोन करवा कर माहिद को बुलवाया और उसकी जमकर पिटाई करने के बाद उसे पुलिस के हवाले कर दिया।

ASI रशीद खान ने बताया कि मामले की जाँच की जा रही है। मामला कई शहरों से जुड़ा हुआ है, इसलिए शून्य पर केस दर्ज कर (जीरो एफआईआर) इसे बड़वानी ट्रांसफर किया जा रहा है।

बता दें कि मध्य प्रदेश में लव जिहाद और जबरन धर्मांतरण रोकने का नया कानून लागू हो गया है। राज्य सरकार ने शनिवार (27 मार्च 2021) को ‘मध्य प्रदेश फ्रीडम ऑफ रिलीजन एक्ट, 2020’ का नोटिफिकेशन जारी किया था। इस धर्मांतरण विरोधी कानून में शादी के बाद बलपूर्वक धर्म-परिवर्तन को गंभीर अपराध माना गया है और इसके लिए 10 वर्षों की सजा का प्रावधान किया गया है।

DMK सुप्रीमो स्टालिन के दामाद के 4 ठिकानों पर IT रेड, ससुर के हैं सबसे करीबी सलाहकार: पार्टी ने बताया राजनीति से प्रेरित

तमिलनाडु में DMK (द्रविड़ मुनेत्र कड़गम) के मुखिया MK स्टालिन के दामाद सबारेसन के आवास और दफ्तर स्थित 4 ठिकानों पर आयकर (IT) विभाग ने शुक्रवार (अप्रैल 2, 2021) को छापेमारी की। वो तमिलनाडु के दिवंगत मुख्यमंत्री करूणानिधि की पोती सेंथराइ के पति हैं। सबारेसन के जिस घर पर छापेमारी हुई, वो राजधानी चेन्नई के ईस्ट कोस्ट रोड के नीलंकरई में स्थित है। उनके ठिकानों पर छापेमारी अभी भी जारी है।

वहीं उनका दफ्तर तेनमपेट में स्थित है। बताया जा रहा है कि IT विभाग इन दोनों ठिकानों के अलावा दो अन्य जगहों पर भी छापेमारी कर रहा है। सबारेसन को MK स्टालिन का सबसे करीबी सहयोगी और सलाहकार माना जाता है। साथ ही वो पार्टी के प्रमुख रणनीतिकारों में से भी एक हैं। वो कई सालों से ये भूमिका निभा रहे हैं, लेकिन मीडिया से दूर लो प्रोफाइल इमेज ही मेंटेन करने में विश्वास रखते हैं।

इनकम टैक्स के करीब 25 अधिकारी सबारेसन और सेंथराइ के ठिकानों पर तलाशी अभियान चला रहे हैं। शुक्रवार की सुबह से ही ये कार्रवाई चालू है। सबारेसन गुरुवार को कोयम्बटूर में थे लेकिन छापेमारी की खबर के बाद वो चेन्नई लौट आए हैं। इससे पहले तिरुवन्नामलाई में DMK के बड़े नेता EV वेलु के ठिकानों पर छापेमारी हुई थी। वेलु वहाँ से चुनाव लड़ रहे हैं। जब ये छापेमारी हुई, तब स्टालिन उसी क्षेत्र में उनके लिए चुनाव प्रचार कर रहे थे।

वेलु ने 1993 में अरुणाई इंजीनियरिंग कॉलेज की स्थापना की थी। वहाँ भी छापेमारी हुई। इसके अलावा उनके गेस्ट हाउस में भी तलाशी अभियान चलाया गया था, जहाँ एमके स्टालिन रुके थे। DMK का कहना है कि स्टालिन जिस कमरे में रुके थे, उसमें रेड डालना अलोकतांत्रिक और अनुचित है। पार्टी ने इसे राजनीतिक रूप से प्रेरित कार्रवाई बताते हुए कहा कि IT विभाग को वहाँ कुछ नहीं मिला। पार्टी ने आरोप लगाया कि भाजपा इन संस्थानों का राजनीतिक धमकी के लिए उपयोग कर रही है।

तमिलनाडु में अप्रैल 6 को विधानसभा चुनाव होने हैं और मुख्य मुकाबला DMK व सत्ताधारी AIADMK में है। जहाँ DMK ने कॉन्ग्रेस को साझीदार बनाया है, वहीं AIADMK राजग गठबंधन का हिस्सा है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मौसी फ़िलहाल तमिलनाडु में ही चुनाव प्रचार कर रहे हैं और 1 दिन पहले ही उन्होंने मिनाक्षी मंदिर में पूजा-अर्चना की है। ओपिनियन पोल्स में स्टालिन की पार्टी को बहुमत मिलते हुए दर्शाया गया था।