Home Blog Page 3931

अब बुलंदशहर में मिला साधु का शव: गला रेत कर की गई बेरहमी से हत्या, यूपी पुलिस अलर्ट पर

होली के दिन उत्तर प्रदेश के बुलंदशहर में एक साधु की लाश मिली है। स्वराज्य की रिपोर्ट के अनुसार साधु की लाश मंदिर के पास के एक खेत में मिली है। पुलिस ने घटना के बारे में जानकारी दी है कि किसी धारदार हथियार से गला रेत कर साधु की हत्या की गई है। घटना के बाद से इलाके में पुलिस को हाई अलर्ट पर रखा गया है।

50 वर्षीय साधु अशोक कुमार एक सप्ताह पहले ही सलेमपुर के कैलावन गाँव से मंदिर में आए थे। होली के दिन उनकी लाश बुलंदशहर के शिकारपुर के ढकवाले मंदिर के पास एक सरसों के खेत से मिली। क्षेत्र के एसएसपी संतोष कुमार ने आश्वासन दिया कि हत्या की सभी पहलुओं पर जाँच की जाएगी। लाश को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया गया है।

गौरतलब है कि हाल ही में 22 मार्च को काँग्रेस शासित छत्तीसगढ़ में एक नागा साधु के साथ पुलिस द्वारा बर्बरता की गई थी। पुलिस ने न केवल उस साधु की पिटाई की बल्कि उसके 1.25 लाख रुपए नगद, मोबाईल फोन और बर्तन भी छीन लिए और उसे पुलिस स्टेशन के बाहर फेंक दिया गया।  

पिछले हफ्ते ही उत्तर प्रदेश के इस्लामनगर में एक साधु की लाश मिली थी जिसके सिर को कुचल दिया गया था और उसके प्राइवेट पार्ट को भी जलाने का प्रयत्न किया गया था।

सचिन वाजे ने सबूत मिटाने के लिए लैपटॉप, प्रिंटर को हथौड़े से तोड़कर नदी में फेंका, NIA ने तीन घंटे में कर लिया बरामद

एंटीलिया केस में निलंबित एपीआई सचिन वाजे की मुश्किलें कम होने का नाम नहीं ले रही हैं। 28 मार्च को राष्ट्रीय जाँच एजेंसी इस केस में सबूत जुटाने के लिए वाजे को लेकर मीठी नदी के पास गई। इस दौरान NIA को नदी से गोताखोरों की मदद से कई महत्वपूर्ण सुराग हाथ लगे।

मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक नदी से जाँच अधिकारियों ने दो सीपीयू, एक लैपटॉप, 2 डिजिटल वीडियो रिकॉर्डर और 2 गाड़ियों के रजिस्ट्रेशन की नंबर प्लेट मिली है। हिंदुस्तान टाइम्स ने NIA के हवाले से कहा है कि पूछताछ के दौरान सचिन वाजे ने वारदात को अंजाम देने में इस्तेमाल किए गए सामानों को दिखाने के लिए मान गया था। जांच अधिकारियों का कहना है कि वाजे ने सबूतों को मिटाने की कोशिश की थी।

तीन घंटे की मशक्कत के बाद मिले अहम सबूत

एंटीलिया केस और मनसुख हीरेन की मौत की जाँच कर रही NIA अहम सबूत जुटाने के लिए सचिन वाजे को लेकर 28 मार्च की दोपहर 3:15 पर मीठी नदी के किनारे गई, जहाँ वाजे ने नदी में सबूतों को दफन कर दिया था। 10 गोताखोरों की टीम ने 3 घंटे की कड़ी मशक्कत के बाद उन सबूतों को ढूँढ निकाला, जिन्हें वाजे ने हथौड़े से तोड़कर नष्ट करने की कोशिश की थी। NIA का मानना है कि ये सबूत इस केस में अहम कड़ी हो सकते हैं।

वाजे ने सबूतों को हथौड़े से नष्ट करने की कोशिश की

NIA के मुताबिक सचिन वाजे ने लैपटॉप प्रिंटर को हथौड़े से तोड़कर मीठी नदी में फेंक दिया था। NIA अधिकारी ने हिंदुस्तान टाइम्स को बताया कि वाजे के पास इस केस से जुड़े सारे सबूत हैं, लेकिन जब उसे लगा कि मामले की जाँच दूसरी एजेंसी के पास चली गई है तो उसने इन्हें नष्ट करने की कोशिश की।

पंजाब में BJP विधायक अरुण नारंग के साथ मार-पिटाई के मामले में 4 BKU नेता गिरफ्तार, 20 और हमलावरों की हुई पहचान

पंजाब के मलोट शहर में भाजपा विधायक अरुण नारंग के साथ पिटाई के मामले में चार हमलावरों को गिरफ्तार कर लिया गया है। भाजपा के अबोहर से विधायक अरुण नारंग पर हुए हमले के आरोप में पुलिस ने 20 और आरोपितों की पहचान करके उनके नाम एफआईआर में दर्ज कर दिया है।

इसी मामले में रविवार को राज्यपाल वीपी सिंह बदनौर ने विधायक पर हुए हमले की निंदा करते हुए मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह से इस मामले में सरकार की ओर से की जा रही कार्रवाई की रिपोर्ट भी माँगी है।

पंजाब पुलिस ने 28 मार्च को भारतीय किसान यूनियन (बीकेयू-सिधूपुर) के मुख्तार के अध्यक्ष सुखदेव सिंह और 26 अन्य लोगों के खिलाफ मलोट शहर में भाजपा विधायक अरुण नारंग की हत्या के प्रयास का मामला दर्ज किया। रिपोर्ट्स के अनुसार, घटनास्थल पर मौजूद कथित प्रदर्शनकारियों ने नारंग पर उस वक्त हमला किया, जब वह एक प्रेस कॉन्फ्रेंस के लिए गए थे।

जैसे ही वह अपनी कार से बाहर निकले, अरुण नारंग की बेरहमी से पिटाई की गई और उनके कपड़े फाड़ दिए गए। घटनास्थल पर मौजूद भाजपा कार्यकर्ता और पुलिस ने उन्हें किसी तरह बचाया और प्राथमिक उपचार के लिए सिविल अस्पताल अबोहर ले गए।

जब ऑपइंडिया ने विधायक नारंग से बात की, तो उन्होंने कहा कि दोषियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की गई है और पार्टी कानून के अनुसार आवश्यक कार्रवाई करेगी। बीकेयू नेता राकेश टिकैत ने दावा किया है कि किसान हमले के पीछे नहीं थे।

पंजाब पुलिस ने BKU के अब तक सुरजीत सिंह, नेम पाल सिंह, बलदेव सिंह (बोधिवाला खरक गाँव) और गुरमीत सिंह (खान कलां) के रूप में पहचान किए गए चार लोगों को गिरफ्तार कर लिया है।

बता दें कि शेष आरोपितों की गिरफ्तारी के लिए छापेमारी जारी है। शनिवार को पाँच किसान नेताओं सहित जिन सात लोगों को नामजद किया गया था वह सभी अभी फरार हैं।

हरिद्वार कुम्भ मेला में भिक्षुकों को मिल रहा रोजगार, पुलिस की एक पहल ने बदल दी 24 भिखारियों की जिंदगी

यदि आप बॉलीवुड की फिल्में देखेंगे तो अधिकांश फिल्मों में आपको पुलिसकर्मियों का किरदार नकारात्मक ही मिलेगा। उत्तराखंड पुलिस ने अपनी एक पहल से इस भ्रम को तोड़ दिया। उत्तराखंड में हरिद्वार कुम्भ मेला पुलिस ने डीजीपी अशोक कुमार के नेतृत्व में 24 भिक्षुकों के जीवन को पूरी तरह बदल दिया। डीजीपी कुमार ने कुम्भ प्रारंभ होते ही क्षेत्र में मौजूद भिक्षुकों को समाज की मुख्य धारा में लाने का निर्णय कर लिया था। आज सभी 24 भिक्षुक रोजगार प्राप्त कर चुके हैं।

पहला कदम : व्यक्तित्व परिवर्तन

इस अभियान के तहत मेला पुलिस जब हरि की पौड़ी पहुँची तब सबसे पहले सभी भिक्षुकों को भिक्षुक गृह में शिफ्ट किया गया जहाँ उनके रूप-रंग को पूरी तरह बदल दिया गया। इसके पश्चात सभी भिक्षुकों का कोविड-19 एवं अन्य चिकित्सकीय टेस्ट कराए गए। उन्हें आवश्यक इलाज भी दिया गया। जिसके बाद उन्हें रोजगार देने की प्रक्रिया प्रारंभ कर दी गई। हरिद्वार के कुम्भ मेला पुलिस के फेसबुक पेज से यह जानकारी प्राप्त हुई।

आवश्यक दस्तावेज एवं बैंक अकाउंट :

पुलिस ने वैरिफिकेशन करके सबसे पहले भिक्षुकों के आवश्यक दस्तावेज जैसे आधार कार्ड और बैंक खातों की कार्यवाही पूरी की। उसके पश्चात कुछ भिक्षुक अपने घर वापस जाना चाहते थे जिन्हे पुलिस टीम के सहयोग से उनके घर पहुँचाया गया। शेष भिक्षुकों के वैरिफिकेशन का कार्य पूरा हो जाने पर उन्हें पुलिस स्टेशन में ही रोजगार मुहैया कराया गया।

पहली तनख्वाह :


हाल ही में 16 भिक्षुकों को पहली तनख्वाह के रूप में 10,000 रुपए उनके ने बैंक खातों में जमा किए गए। कुछ भिक्षुकों ने वह राशि अपने घर भेज दी जबकि कुछ ने राशि का एक हिस्सा समाज सेवा के लिए दान कर दिया। अभी तक 24 भिक्षुक रोजगार प्राप्त करके एक बेहतर जीवन जी रहे हैं। पुलिस अब और भिक्षुकों को इस अभियान से जोड़ रही है।

कुम्भ मेला आईजी संजय गुँजयाल ने कहा कि इस पहल से कुम्भ मेला समाप्त होने के पश्चात भिक्षुक किसी न किसी उद्योग के अंदर रोजगार में संलग्न होंगे। नौकरी का एक महीना पूरा करने वाले भिक्षुकों को आईजी द्वारा सम्मानित किया गया। उन्होंने यह भी कहा कि पुलिस की इस पहल से समाज में और विशेषकर भिक्षुकों के जीवन में परिवर्तन देखने को मिलेगा।

पाकिस्तान में 100 साल पुराने मंदिर पर हमला: 1800 हिन्दुओं की जनसंख्या वाले रावलपिंडी में 74 साल बाद हुई थी पूजा

पाकिस्तान के रावलपिंडी शहर में हाल ही में एक लगभग 100 साल पुराने हिन्दू मंदिर पर हमला किया गया और उसमें आग लगाने का भी प्रयास किया गया। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार रावलपिंडी में शनिवार की रात को ‘पुराना किला माता मंदिर’ में लगभग एक दर्जन की संख्या में युवकों ने हमला कर दिया। हाल ही में मंदिर की मरम्मत का कार्य पूरा हुआ था और 25 मार्च को उद्घाटन हुआ था। पाकिस्तान में हिन्दू मंदिरों पर हमले का यह पहला मामला नहीं है।

TOI की रिपोर्ट के अनुसार 25 मार्च को शरणार्थी ट्रस्ट संपत्ति बोर्ड (ETPB) ने इस हिन्दू मंदिर का प्रबंधन स्थानीय प्रशासन को सौंप दिया था। फरवरी में इस मंदिर में अवैध कब्जा करने वाले कुछ मुस्लिम परिवारों को हटाकर ईटीपीबी ने मंदिर को अपने नियंत्रण में ले लिया था और तभी से इस मंदिर की मरम्मत का कार्य चल रहा था। आरोप है कि मंदिर से हटाए गए कब्जेदारों ने ही मंदिर पर हमला कर उसे जलाने का प्रयास किया है।

रावलपिंडी में हिंदुओं की जनसंख्या मात्र 1800 है। 74 साल बाद पुनः हाल ही में दोबारा ‘माता मंदिर’ पूजा शुरू हुआ था, घंटे-घड़ियाल बजे थे, जो रावलपिंडी में हिंदुओं के लिए एक महत्वपूर्ण आस्था का केंद्र था। सहायक सुरक्षा अधिकारी सैयद रजा अब्बास जैदी की शिकायत पर स्थानीय बानी पुलिस थाने में 10-15 अज्ञात युवकों के विरुद्ध केस दर्ज कर लिया गया है। हिन्दू संगठनों ने मंदिर पर किए गए हमले की निंदा की है।

ट्विटर पर प्रेम राठी (@PremRathee) नाम के व्यक्ति ने भी अपने ट्विटर अकाउंट से इस घटना की जानकारी दी है। साथ ही उसने घटना से संबंधित एक छोटा सा वीडियो भी शेयर किया है जिसमें हमले के बाद मंदिर की स्थिति को देखा जा सकता है।

पाकिस्तान में हिन्दू मंदिरों किया गया यह कोई पहला हमला नहीं है। इस्लामिक देश पाकिस्तान में हिन्दू मंदिरों पर हमले होना और उन्हें नष्ट किया जाना आम घटना की तरह ही है। भीमपुरा, कराची में एक प्राचीन हिन्दू मंदिर को ध्वस्त कर दिया गया था और देवी-देवताओं की मूर्तियों को बाहर फेंक दिया गया था।

इससे पहले अक्टूबर 2020 में सिंध के बदीन में हिन्दू मंदिर में तोड़-फोड़ की घटना की जानकारी सामने आई थी जिसमें मोहम्मद इस्माइल शैदी नामक व्यक्ति को गिरफ्तार किया गया था।  
पिछले वर्ष ही खैबरपख्तूनख्वा के करक जिले में सैकड़ों लोगों ने एक हिन्दू मंदिर को आग के हवाले कर दिया था। इस मामले में 350 लोगों के खिलाफ एफआईआर दर्ज हुई थी जिसमें जमीयत उलेमा-ए-इस्लामी के नेता रहमत खटक का नाम भी था। इस घटना के बाद इमरान खान की बहुत आलोचना हुई थी।

हालाँकि, आलोचना से पाकिस्तान की सरकार कोई फर्क नहीं पड़ता है। अल्पसंख्यकों के मुद्दे पर भारत की सरकार की आलोचना करने वाले इमरान खान को अपने देश में अल्पसंख्यकों के हितों का ध्यान रखने की आवश्यकता है। आए दिन हिन्दू मंदिरों और हिन्दू समुदाय पर होने वाले हमले पाकिस्तान में अल्पसंख्यकों की दुर्दशा की कहानी कहते हैं और पाकिस्तान की न्याय व्यवस्था पर भी प्रश्न उठाते हैं।

महाराष्ट्र की अघाड़ी सरकार में खटपट: जल्द हो सकता है बड़ा सियासी उलटफेर, क्या गिर सकती है उद्धव सरकार?

महाराष्ट्र में जल्द बड़ा सियासी उलटफेर देखने को मिल सकता है। दरअसल, महाराष्ट्र के गृह मंत्री अनिल देशमुख पर शिवसेना और एनसीपी (NCP) में बयानबाजी ने जहाँ एक ओर राज्य में सत्ताधारी महाविकास अघाड़ी गठबंधन में खटास के संकेत दिए हैं। वहीं, एनसीपी सुप्रीमों शरद पवार की केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह से मुलाकात को उद्धव सरकार के लिए खतरे की घंटी के रूप में देखा जा रहा है।

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, इस मुलाकात पर अमित शाह ने यह कहकर सस्पेंस और बढ़ा दिया है कि हर बात सार्वजनिक नहीं की जाती। शाह का यह बयान बहुत कुछ बयाँ करता है। संभव है कि आने वाले दिनों में महाराष्ट्र की राजनीति कोई नया मोड़ ले।

बताया जा रहा है कि अहमदाबाद में बीजेपी के करीबी गुजराती कारोबारी के कॉरपोरेट हाउस पर एनसीपी के दोनों नेताओं शरद पवार और प्रफुल्ल पटेल की अमित शाह के साथ शुक्रवार शाम को बैठक हुई। हालाँकि, आज पवार के हॉस्पिटल में भर्ती होने को भी कुछ लोग नए अटकलों के रूप में ले रहे हैं तो कुछ इसे सामान्य स्वास्थ्य समस्या ही बता रहे हैं।

इधर , सियासी जानकार शिवसेना के मुखपत्र ‘सामना’ में देशमुख पर लगाए आरोपों और उन्हें ‘ऐक्सिडेंटल’ गृह मंत्री बताने को इसी मुलाकात के बाद उपजे राजनीतिक द्वंद्व के रूप में देख रहे हैं।

शिवसेना नेता संजय राउत ने रविवार (मार्च 28, 2021) को ‘सामना’ में महाराष्ट्र के गृह मंत्री अनिल देशमुख पर सवाल उठाया। उन्होंने लिखा कि सचिन वाजे वसूली कर रहा था और राज्य के गृहमंत्री अनिल देशमुख को इसकी जानकारी नहीं थी? NCP के सीनियर नेताओं जयंत पाटिल और दिलीप वलसे पाटिल ने यह पद लेने से इनकार किया था, इसलिए शरद पवार ने देशमुख को गृह मंत्री बना दिया।

सौ सुनार की एक लोहार की ऐसा बर्ताव गृहमंत्री का होना चाहिए

संजय राउत ने आगे लिखा, “अनिल देशमुख ने कुछ वरिष्ठ अधिकारियों से बेवजह पंगा लिया। गृहमंत्री को कम से कम बोलना चाहिए। बेवजह कैमरे के सामने जाना और जाँच का आदेश जारी करना अच्छा नहीं है। सौ सुनार की एक लोहार की ऐसा बर्ताव गृहमंत्री का होना चाहिए। पुलिस विभाग का नेतृत्व सिर्फ सैल्यूट लेने के लिए नहीं होता है। वह प्रखर नेतृत्व देने के लिए होता है। प्रखरता ईमानदारी से तैयार होती है, ये भूलने से कैसे चलेगा?”

वहीं, अनिल देशमुख ने बताया कि उन पर लगे भ्रष्टाचार और वसूली से जुड़े आरोप की जाँच अब हाईकोर्ट के रिटायर्ड जज करेंगे। देशमुख ने कहा, “जो आरोप मुझ पर पूर्व मुंबई पुलिस कमिश्नर ने लगाए थे, मैंने उसकी जाँच कराने की माँग की थी। मुख्यमंत्री और राज्य शासन ने मुझ पर लगे आरोपों की जाँच उच्च न्यायालय के रिटायर्ड जज के द्वारा कराने का निर्णय लिया है। जो भी सच है वह सामने आएगा।”

महाराष्ट्र में बिहार पैटर्न दोहराया जा सकता है

मुंबई के पूर्व पुलिस आयुक्त परमबीर सिंह के लेटर बम से शिवसेना-एनसीपी की दोस्ती में दरार पड़ती दिखाई दे रही है। इससे न केवल एनसीपी बल्कि शिवसेना की छवि को भी बड़ा झटका लगा है। इस पूरी पिक्चर में कॉन्ग्रेस गायब है। जाहिर है कि शिवसेना अपनी छवि बचाने के लिए इस चक्रव्यूह से निकलना चाहेगी। ऐसे में कयास लगाया जा रहा है कि महाराष्ट्र में बिहार पैटर्न दोहराया जा सकता है।

बता दें कि बिहार में महागठबंधन की सरकार बनने के बाद नीतीश कुमार ने राजद से नाता तोड़कर भाजपा के साथ वापस सरकार बना ली थी। माना जा रहा है कि शिवसेना एक बार पुन: पूर्व सहयोगी पार्टी भाजपा से हाथ मिला सकती है। ऐसे में कॉन्ग्रेस-राकांपा अलग-थलग पड़ जाएँगे। हालाँकि, होली से एक दिन पहले एनसीपी सुप्रीमो शरद पवार ने गृहमंत्री अमित शाह से मुलाकात कर इन अटकलों को और हवा दे दी है।

‘बंगाल की यह बेटी, किसी की माँ, किसी की बहन… मर चुकी है’: TMC के गुंडों के पिटाई से घायल BJP कार्यकर्ता की माँ की मौत

पश्चिम बंगाल में टीएमसी के गुंडों द्वारा भाजपा कार्यकर्ता की बुजुर्ग माँ की बेरहमी से पिटाई करने के एक महीने बाद उनकी मौत हो गई है। बताया जा रहा है कि गंभीर चोटें लगने की वजह से बुजुर्ग महिला ने दम तोड़ दिया

भाजपा आईटी सेल के प्रमुख अमित मालवीय ने इस संवदेनशील मामले को लेकर ट्वीट किया है। उन्होंने लिखा, ”बंगाल की यह बेटी, किसी की माँ, किसी की बहन… मर चुकी है। टीएमसी के लोगों ने उन पर क्रूरतापूर्ण हमला किया गया था, लेकिन ममता बनर्जी ने उनके लिए दया का भाव भी प्रकट नहीं किया। उनके परिवार के घावों को कौन ठीक करेगा? टीएमसी की हिंसा की राजनीति ने बंगाल की आत्मा को चोट पहुँचाई है।”

राजनीतिक बदले की दुर्भावना से प्रेरित होकर 26 फरवरी, 2021 को रात के 1:30 बजे नॉर्थ दमदम शहर स्थित निमता के वार्ड संख्या-6 में टीएमसी के गुंडों ने इस घटना को अंजाम दिया था। उन्होंने भाजपा कार्यकर्ता गोपाल मजूमदार और उनकी बुजुर्ग माँ शोभा मजूमदार पर बंदूक के पिछले भाग से हमला किया गया था। तृणमूल कॉन्ग्रेस के गुंडों पर आरोप है कि उन्होंने गोपाल मजूमदार के घर में घुसकर पहले अपशब्दों का इस्तेमाल किया। उसके बाद पूछने लगे कि भाजपा में उक्त कार्यकर्ता की क्या भूमिका है।

पीड़ित के अनुसार, कुछ गुंडे घर के बाहर भी खड़े थे, जिन्हें वो पहचान नहीं पाए। उन्होंने बताया था कि गुंडों ने उनकी माँ को धक्का देकर गिरा दिया था और मारपीट के बाद घर से निकलकर चले गए।

घटना के बाद गोपाल मजूमदार ने बताया था, ”मैं भाजपा की मंडल कमिटी का सदस्य हूँ। सबसे पहले तो उन्होंने हाथों का इस्तेमाल कर के मुझे मारा, फिर रिवॉल्वर के हुड का इस्तेमाल करके मेरे सिर पर जोरदार वार किया। जब मैं जमीन पर गिर गया तो उन्होंने मुझे लात-घूसों से मारना शुरू कर दिया।”

वहीं, एक स्थानीय व्यक्ति का कहना है कि इस क्षेत्र में TMC के गुंडों के आतंक का बोलबाला है और गोपाल मजूमदार के बाद उन्होंने अन्य भाजपा कार्यकर्ताओं को भी निशाना बनाया है।

west bengal mother bjp worker thrashed by tmc dies shobha majumdar

PM मोदी के विरोध में हिफाजत-ए-इस्लाम ने माँ काली और भगवान कृष्ण की मूर्ति तोड़ी: 10 की मौत, धू-धू कर जले पुलिस स्टेशन

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की ढाका यात्रा से खफा वहाँ का चरमपंथी इस्लामी आतंकी संगठन हिफाजत-ए-इस्लाम बांग्लादेश में खून की होली खेल रहा है। पीएम मोदी के वापस लौटते ही इस संगठन ने चटगाँव स्थित ब्राम्हनबरिया में जमकर हिंसा की। हिफाजत के समर्थकों ने कई मंदिरों को तोड़ने के बाद अब यहाँ मंदिर में रखी माँ काली और भगवान श्रीकृष्ण की मूर्तियों को तोड़ दिया है।

इस्लामी चरमपंथियों के इस दंगे में 10 से भी ज्यादा लोगों की अब तक मौत हो चुकी है। इन्होंने प्रधानमंत्री शेख हसीना वाजेद के पार्टी कार्यालय समेत पुलिस स्टेशन, आम दफ्तरों और बसों में जमकर तोड़फोड़ की। बांग्लादेश में चरमपंथियों ने एक ट्रेन के 15 डिब्बों को तहस-नहस कर दिया। कट्टरपंथी इस्लामी आतंकियों का खौफ ऐसा कि गाँव, शहर, पुलिस स्टेशन और ऑफिस धू-धू कर जलते रहे। लेकिन, फायर ब्रिगेड की टीम चाहकर भी वहाँ नहीं जा सकी।

श्री श्री आनंदमयी काली मंदिर पर हमला

श्री श्री आनंदमयी काली मंदिर कमेटी के अध्यक्ष आशीष पॉल ने बताया कि हम डोल पूर्णिमा के अवसर पर मंदिर में पूजा कर रहे थे। इसी दौरान हिफाजत-ए-इस्लाम के करीब 200 से 300 हथियारबंद लोग मंदिर का गेट तोड़कर अंदर घुस आए। हमने काली माँ की मूर्ति को बचाने का प्रयास किया, लेकिन उन्होंने हमें ढकेलकर काली माँ की मूर्ति को तोड़ दिया।

पीएम मोदी की बांग्लादेश यात्रा के विरोध में यह इस्लामी चरमपंथी संगठन बीते 4 दिन से बंग्लादेश की सड़कों पर हिंदुओं का खून बहा रहा है। वहाँ के गृहमंत्री ने इन्हें चेतावनी देते हुए कहा है कि किसी को भी बलवा करने की इजाजत नहीं है। हिफाजत अगर अपनी हिंसा नहीं रोकता है तो सरकार सख्त कार्रवाई करने के लिए बाध्य होगी।

इससे पहले बीते 17 मार्च को हिफाजत ए इस्लाम के नेतृत्व में हजारों की भीड़ ने समानगंज जिले के ‘शल्ला उपजिला’ इलाके के नवागाँव में हमला कर दिया था। हजारों चरमपंथियों गांव में 88 घरों और 8 मंदिरों को नष्ट कर दिया था।

मामला केवल इतना था कि हिफाजत के नेता की सोशल मीडिया पर आलोचना कर दी थी। मौलाना ने अपने भाषण में बंगबंधु मुजीबुर रहमान की मूर्ति लगाने का विरोध किया था। हद तो तब हो गई जब इस्लामी चरमपंथियों के दवाब में आकर पुलिस ने हिंदू युवक को ही गिरफ्तार कर लिया।

2010 में बने इस संगठन को पाकिस्तान की कुख्यात खुफिया एजेंसी आईएसआई और सऊदी अरब के शेखों का समर्थन हासिल है। वही इसे फंडिग करते हैं। 2017 में इसी संगठन ने ग्रीक देवी की मूर्ति बांग्लादेश के सर्वोच्च न्यायालय में देखने के बाद प्रदर्शन किया था। संगठन का कहना था कि बांग्लादेश में इस्लाम को कमजोर करने के लिए ये एक साजिश है। बाद में वह मूर्ति न्यायालय से हटानी पड़ी थी।

केजरीवाल की बढ़ी चिन्ताएँ, दिल्ली में एलजी ही होंगे सुप्रीम बॉस: GNCTD विधेयक को राष्ट्रपति ने दी मंजूरी

दिल्ली सरकार और उपराज्यपाल के बीच अधिकारों को परिभाषित करने वाले विधेयक को राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद की मंजूरी मिल गई है। इसी के साथ राष्ट्रीय राजधानी में सरकार के बजाय उप राज्यपाल की ताकतों में और इजाफा हो गया है।

केंद्र सरकार ने इस कानून के लिए गजट नोटिफिकेशन जारी कर दिया है। राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र दिल्ली सरकार (संशोधन) विधेयक, 2021 के मुताबिक अब दिल्ली की निर्वाचित सरकार को किसी भी प्रकार के निर्णय से पहले उपराज्यपाल से सलाह लेनी पड़ेगी। कहा जा रहा है इससे केजरीवाल सरकार की चिन्ताएँ बढ़ गई हैं।

इसको लेकर केंद्रीय गृह राज्यमंत्री जी किशन रेड्डी ने कहा था कि इस कानूनी संशोधन से केंद्रशासित राज्य में शासन के कामकाज को लेकर सरकार की जवाबदेही सुनिश्चित होगी।

पिछले हफ्ते ही संसद में पारित हुआ था विधेयक

राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र में राज्यपाल की शक्तियों में इजाफा करने वाले इस विधेयक को 22 मार्च को लोकसभा और 24 मार्च को राज्यसभा से पारित किया गया था। इसे केजरीवाल ने लोकतंत्र के लिए काला दिन करार दिया था।

मुख्यमंत्री के संवैधानिक अधिकार रहेंगे सुरक्षित

केंद्रीय गृह राज्यमंत्री जी किशन रेड्डी ने इस विधेयक पर हो रही आशंकाओं को निर्मूल बताते हुए कहा था कि इसके कोई राजनीतिक अर्थ नहीं हैं। इसे केवल वर्तमान अधिनियम की खामियों को दूर करने के लिए लाया गया है। इन संशोधनों से निर्वाचित सरकार के संवैधानिक अधिकारों पर कोई आँच नहीं आएगी।

इसको लेकर दिल्ली के उप मुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया ने कहा था, ‘विधेयक के पास होने से पता चलता है कि भाजपा सरकार सीएम अरविंद केजरीवाल और उनके कामों से कितना असुरक्षित महसूस कर रही है। लोग इस बात को कहने लगे हैं कि अरविंद केजरीवाल, मोदी के विकल्प हो सकते हैं। ये बिल मुख्यमंत्री केजरीवाल को आगे बढ़ने से रोकने के लिए लाया गया है।’

केंद्र सरकार ने इसके लिए गजट नोटिफिकेशन जारी कर दिया है। राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र दिल्ली सरकार (संशोधन) विधेयक, 2021 के मुताबिक अब दिल्ली की निर्वाचित सरकार को किसी भी प्रकार के निर्णय से पहले उपराज्यपाल से सलाह लेनी पड़ेगी।

मैनचेस्टर यूनाइटेड की होली की शुभकामनाओं पर भड़के लोग: ‘हिंदुओं’ को ‘Happy Holi’ कहने पर हुई आलोचना

फुटबाल की दुनिया के सबसे प्रसिद्ध और बेहतरीन फुटबाल क्लब मैनचेस्टर यूनाइटेड ने सोशल मीडिया के माध्यम से अपने ‘हिन्दू समर्थकों’ को होली की शुभकामनाएँ दी। क्लब की इस पोस्ट के बाद सोशल मीडिया में आलोचना का दौर प्रारंभ हो गया। एक बड़े वर्ग ने कहा कि होली सिर्फ हिंदुओं का त्योहार नहीं है।

28, मार्च को फुटबाल क्लब यूनाइटेड ने ट्वीट करके अपने ‘हिन्दू समर्थकों’ को होली की शुभकामनाएँ दी। क्लब ने लिखा, “हमारे हिन्दू समर्थकों के लिए एक रंग-बिरंगी होली।” इस कैप्शन के साथ ‘हैप्पी होली’ के संदेश वाली एक फोटो भी पोस्ट की गई।

मैनचेस्टर यूनाइटेड की इस पोस्ट के बाद एक बड़े वर्ग के द्वारा क्लब की यह कह कर आलोचना की गई कि होली केवल हिंदुओं का त्योहार नहीं है।

एक यूजर ने तो ‘शेम ऑन यू’ लिखकर क्लब की आलोचना की।

हालाँकि, क्लब के इस पोस्ट पर की गई आलोचना सही नहीं है। यह सत्य है कि होली केवल हिन्दू नहीं मनाते बल्कि पूरी दुनिया में यह त्योहार अन्य पंथों के लोग भी पूरे हर्ष और उल्लास के साथ मनाते हैं किन्तु यह भी सत्य है कि होली एक हिन्दू त्योहार है जो भगवान विष्णु के नृसिंह अवतार की हिरण्यकश्यप पर महान विजय के उपलक्ष्य में मनाया जाता है।

होली पर आधारित विकिपीडिया पेज का स्क्रीनशॉट।

लेकिन, यहाँ आलोचना की वजह यह थी कि जैसे क्रिसमस ईसाईयों का त्यौहार है लेकिन अब सब मनाते हैं। इसलिए सामान्यतया कोई नहीं कहता कि सिर्फ ईसाईयों को क्रिसमस की शुभकामनाएँ। तो यहाँ सिर्फ हिन्दू मेंशन करके शुभकामना देना ही क्लब के आलोचना की मुख्य वजह बनी।