Home Blog Page 3932

लॉकडाउन नहीं, कोरोना के टेस्ट, ट्रैक, ट्रीट की रणनीति पर करना होगा काम: मुख्यमंत्रियों के साथ चर्चा में पीएम मोदी के सुझाव

देश में कोरोना वायरस के बढ़ते संक्रमण के बीच आज प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सभी राज्यों के मुख्यमंत्रियों के साथ बातचीत की और कोविड-19 के संबंधों में राज्यों की स्थिति का जायजा लिया। साथ ही प्रधानमंत्री मोदी ने राज्यों को कोरोना वायरस के संकट से निपटने के लिए कुछ सुझाव भी दिए। यह बैठक वर्चुअली आयोजित हुई।

प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि आज की समीक्षा में कुछ बातें हमारे सामने स्पष्ट हैं। उन पर हमें विशेष ध्यान देने की जरूरत है। उन्होंने कहा कि देश फ़र्स्ट वेव के समय की पीक को क्रॉस कर चुका है, और इस बार ये ग्रोथ रेट पहले से भी ज्यादा तेज है।

महाराष्ट्र, छत्तीसगढ़, पंजाब, मध्यप्रदेश और गुजरात समेत कई राज्यों पर पीएम मोदी ने कहा कि ये राज्य फ़र्स्ट वेव की पीक को भी क्रॉस कर चुके हैं। कुछ और राज्य भी इस ओर बढ़ रहे हैं। हम सबके लिए ये चिंता का विषय है। इसके लिए हमें माइक्रो कन्टेनमेंट जोन पर फोकस करना होगा।

लोगों के व्यवहार में हुए परिवर्तन के विषय में पीएम मोदी ने कहा कि इस बार लोग पहले की अपेक्षा बहुत अधिक कैजुअल हो गए हैं। अधिकतर राज्यों में प्रशासन भी कैजुअल नज़र आ रहा है। ऐसे में कोरोना केस की इस अचानक बढ़ोत्तरी ने मुश्किलें पैदा की हैं।

हालाँकि, उन्होंने यह भी कहा कि इन तमाम चुनौतियों के बावजूद हमारे पास पहले की अपेक्षा बेहतर अनुभव है, संसाधन हैं और वैक्सीन भी है। जनभागीदारी के साथ-साथ हमारे परिश्रमी डॉक्टर्स और हेल्थ-केयर स्टाफ ने स्थिति को संभालने में बहुत मदद की है और आज भी कर रहे हैं।

देश के युवाओं से सहयोग की अपेक्षा करते हुए पीएम मोदी ने कहा कि युवा अपने आसपास जो भी व्यक्ति 45 साल के ऊपर के हैं, उन्हें वैक्सीन लगवाने में हर संभव मदद करें। उन्होंने 11 अप्रैल से 14 अप्रैल की अवधि को टीका उत्सव के रूप में मनाने की सलाह दी।

पीएम मोदी ने कहा कि टेस्टिंग को बढ़ाकर ही कोरोना वायरस के संकट से बाहर निकला जा सकता है। उन्होंने कहा कि आरटी-पीसीआर टेस्ट को अधिक मात्रा में बढ़ाए जाने की आवश्यकता है।

प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि हमें कोरोना वायरस से लड़ने में टेस्ट, ट्रैक और ट्रीट की रणनीति पर बल देना होगा। हालाँकि उन्होंने लॉकडाउन की संभावनाओं से पूरी तरह इनकार किया है। उन्होंने कहा कि इसके स्थान पर टेस्टिंग बढ़ाने की ओर ध्यान दिया जाए।

भारत में कोरोना वायरस संक्रमण लगातार बढ़ता जा रहा है। गुरुवार को देश भर में 1,26,789 नए संक्रमण के मामले सामने आए। इसके साथ ही भारत में केसों की कुल संख्या बढ़कर 12,928,574 हो गई है। देश में ऐक्टिव केसों की संख्या भी बढ़कर लगभग नौ लाख हो चुकी है।

ज्ञानवापी मस्जिद परिसर के ASI सर्वेक्षण को मंजूरी मिलने पर भड़के ओवैसी, कहा- इतिहास दोहराया जाएगा

काशी विश्वनाथ मंदिर और ज्ञानवापी मस्जिद केस में सर्वेक्षण के लिए वाराणसी जिला अदालत से मंजूरी मिलने के बाद AIMIM के अध्यक्ष असदुद्दीन ओवैसी ने कोर्ट के फैसले की वैधता पर संदेह जताया है।

ओवैसी ने कहा कि ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड और मस्जिद कमेटी को इस आदेश पर तुरंत अपील करके इसपर सुधार करवाना चाहिए। ओवैसी ने ASI पर भी आरोप लगाया है कि वो हिंदुत्व के हर प्रकार के झूठ के लिए दाई की तरह काम कर रही है।

उन्होंने, बाबरी मामले पर सुप्रीम कोर्ट के फैसले का हवाला दिया। उन्होंने कहा कि संस्कृति मंत्रालय से जुड़ी सरकारी एजेंसी जहाँ तक है धोखाधड़ी करेगी और इतिहास दोहराया जाएगा जैसा बाबरी मामले में हुआ था। वह बोले कि किसी भी व्यक्ति को मस्जिद की प्रकृति बदलने का कोई अधिकार नहीं है। 

अपने ट्विटर पर ओवैसी ने कहा, बाबरी मस्जिद को ध्वस्त करने का आपराधिक कृत्य करने वाले लोगों को गले लगा लिया गया है और ये लोग भारत को 1980-90 के हिंसा के समय में वापस ले जाने के लिए यहीं नहीं रुकेंगे और काल्पनिक इतिहास पर लगातार कलह करेंगे।

ओवैसी ने पीएम मोदी से भी कहा कि उन्हें धार्मिक स्थलों के धर्मांतरण निषेध कानून 1991 (Places of Worship Act 1991) को लागू करने की आवश्यकता है। अपने ट्वीट में ओवैसी ने पीएम से कहा, “उन्हें हस्तक्षेप करने की हिम्मत करनी चाहिए। जब हमने बाबरी के बारे में अपनी निराशा व्यक्त की, तो कई लोगों ने हमें बात बंद करने को कहा। अब तुम सब कहाँ हो?”

बता दें कि वाराणसी कोर्ट ने आज अपना फैसला सुनाते हुए ज्ञानवापी परिसर में ASI को सर्वेक्षण करने की मंजूरी दे दी है।  कोर्ट ने कहा है कि सर्वेक्षण का सारा खर्चा सरकार करेगी। कोर्ट ने ASI को भी यह सुनिश्चित करने को कहा है कि मस्जिद को कोई नुकसान न हो।

इंदिरा गाँधी की हत्या में शामिल केहर सिंह का बेटा DSGMC चुनावों में अकाली दल का उम्मीदवार: ‘शहीद’ बताकर माँगा आशीर्वाद

6 अप्रैल को शिरोमणि अकाली दल के नेता मनजिंदर सिंह सिरसा ने घोषणा की कि वह आगामी दिल्ली सिख गुरुद्वारा प्रबंधन कमेटी (DSGMC) चुनावों में ग्रेटर कैलाश क्षेत्र से केहर सिंह के बेटे चरणजीत सिंह को उम्मीदवार के तौर पर उतार रहे हैं। ज्ञात हो कि केहर सिंह इंदिरा गाँधी की हत्या की साजिश का आरोपित था। इंदिरा गाँधी के हत्यारों में से एक बेअंत सिंह ने केहर सिंह की भतीजी से शादी की थी।

मनजिंदर सिंह सिरसा के फेसबुक पोस्ट का स्क्रीनशॉट

फेसबुक के अपने पोस्ट में सिरसा ने लिखा, “शिरोमणि अकाली दल के उम्मीदवार के रूप में शहीद भाई केहर सिंह के बेटे चरणजीत सिंह का नाम आगे करते हुए हम गर्व महसूस कर रहे हैं। वह ग्रेटर कैलाश से चुनाव लड़ेंगे और डीएसजीमसी का अंग बनने के लिए उन्हें आपके आशीर्वाद की जरूरत है।”

केहर सिंह की कहानी :  

31, अक्टूबर 1984 को बेअंत सिंह और सतवन्त सिंह द्वारा तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गाँधी की हत्या कर दी गई थी। ऑपरेशन ब्लू स्टार का बदला लेने के लिए गाँधी की हत्या की गई थी। ऑपरेशन ब्लू स्टार एक सैन्य ऑपरेशन था जिसमें कई खालिस्तानी मारे गए थे जिसमें खालिस्तानियों का सरगना जरनैल सिंह भिंडरावाला भी शामिल था। हालाँकि, उस घटना के बाद से पंजाब से उग्रवाद का सफाया करने में कई साल लग गए थे।

केहर सिंह, बेअंत सिंह को स्वर्ण मंदिर ले गया था, इंदिरा गाँधी की हत्या की शपथ दिलाने :

रजिस्टर गार्ड में 12 फरवरी 1985 को एक रिपोर्ट प्रकाशित हुई जिसमें यह बताया गया था कि केहर सिंह, बेअंत सिंह को स्वर्ण मंदिर ले गया जहाँ उसने बेअंत सिंह को इंदिरा गाँधी की हत्या करने की शपथ दिलाई।

द रजिस्टार गार्ड अखबार का एक हिस्सा

बेअंत सिंह की पत्नी बिमल कौर खालसा ने केहर सिंह के विरुद्ध अपने बयान में कहा कि 17 अक्टूबर 1984 को बेअंत सिंह और केहर सिंह ने घर की छत पर इंदिरा गाँधी की हत्या की साजिश रची। वहाँ सतवन्त सिंह भी मौजूद था। 20 अक्टूबर 1984 को बेअंत सिंह और केहर सिंह अपने परिवार के साथ स्वर्ण मंदिर गए जहाँ बेअंत सिंह ने इंदिरा गाँधी की हत्या की शपथ ली।

Portraits of Kehar Singh, Beant Singh and Satwant Singh involved in the murder of Indira Gandhi at Golden Temple (Image: The Hindu)

सुप्रीम कोर्ट के जजमेंट में यह बताया गया था कि ऑपरेशन ब्लू स्टार के केहर सिंह अक्सर बेअंत सिंह के घर पहुँचता था। इस दौरान दोनों स्वर्ण मंदिर परिसर में अकाल तख्त के नष्ट होने की बात करते लेकिन बिमल के आने पर चुप हो जाते थे।

केहर सिंह एक उग्र विचार वाला व्यक्ति था। न्यायालय ने निर्णय सुनाते हुए कहा था कि उसके मन में इंदिरा गाँधी के लिए बहुत नफरत थी। यह नफरत इसलिए थी क्योंकि ऑपरेशन ब्लू स्टार के दौरान स्वर्ण मंदिर में अकाल तख्त नष्ट हो गया था। केहर सिंह ने बेअंत सिंह और सतवन्त सिंह को भी बहकाया। न्यायालय ने बताया कि केहर सिंह, बेअंत सिंह को स्वर्ण मंदिर भी ले गया।

तत्कालीन पीएम गाँधी की हत्या के बाद केहर सिंह ने कहा था कि जो भी पंथ के सामने खड़ा होगा उसका यही हश्र होगा। जाँच के बाद सभी आरोपितों के विरुद्ध भारतीय दंड संहिता और आर्म्स ऐक्ट के तहत कई धाराएँ लगाई गईं। 6 जनवरी 1989 को केहर सिंह को फाँसी दे दी गई थी।  

‘कृष्ण प्रेम हैं, उनके साथ प्रेम में होने के अलावा कोई और रास्ता नहीं’: सदगुरु ने माँ यशोदा-श्रीकृष्ण के संबंधों पर दिया जवाब

सोशल मीडिया पर सदगुरु जग्गी वासुदेव की एक वीडियो वायरल होने के बाद से बवाल है। भगवान कृष्ण के भक्त सदगुरु के उस वीडियो पर नाराज हैं, जिसमें वह कहते हैं कि यशोदा माँ एक समय के बाद कृष्ण की माँ नहीं रह गई थीं बल्कि वह गोपी बन गई थीं। अब, इसी वीडियो के लिए सदगुरु ने कृष्ण भक्तों से माफी माँगी है। उन्होंने समझाया है कि हकीकत में वह क्या कहना चाहते थे।

अपने ट्वीट में उन्होंने लिखा, “कृष्ण प्रेम हैं। वह प्रेम का अवतार हैं। उनके साथ प्रेम में होने के अलावा कोई और रास्ता नहीं है।” ट्वीट के साथ शेयर वीडियो में सदगुरु बताते हैं कि विवादित वीडियो में जो उन्होंने कहा, उसका असली अर्थ क्या था।

वीडियो की शुरुआत एक महिला से होती है जो वायरल वीडियो के बारे में, साथ ही उस पर आने वाली टिप्पणियों पर सवाल पूछती है। इसके जवाब में सदगुरु कहते हैं कि उन्हें उस वीडियो के वायरल होने के बारे में पता है। वह लीला प्रोग्राम से है। इस कार्यक्रम का आयोजन, कृष्ण के लिए की जाने वाली प्रशंसा और भक्ति के कारण किया गया था, जो कि योग की सबसे चंचल और शानदार रंगीन अभिव्यक्ति हैं।

उन्होंने बताया कि लीला प्रोग्राम 8 दिनों का था और वीडियो वहीं से लेकर इस तरह एडिट की गई, जैसे वह पवित्र रिश्ते को बदनाम कर रहे हों। उन्होंने बताया कि जब शुरुआत में वह कहते हैं कि यशोदा पहले श्रीकृष्ण की माँ थी, लेकिन बाद में प्रेमिका बन गई थी, तो यहाँ पर प्रेमिका का अर्थ सिर्फ किसी के साथ हमबिस्तर होना नहीं है।

वह कहते हैं कि जो लोग उनसे सवाल कर रहे हैं, उन्हें यही नहीं मालूम कि कृष्ण ‘प्रेम’ थे और उनकी प्रेमिका होना कोई गलत नहीं है। वह कहते हैं कि हर कोई उनका प्रेमी हो सकता है और कुछ भी नहीं, लेकिन दुखद ये है कि ऐसे सवाल करने वालों के लिए प्रेमिका की अवधारणा बस कामुकता से है और वह इसलिए इतने दुखी हैं।

उन्होंने समझाया कि प्रेमी होने के अलावा कोई और रास्ता कृष्ण तक पहुँचने का नहीं है। इसलिए जब उन्हें (यशोदा) पता चलता है कि जिस बच्चे पर वह अधिकार मानती हैं, उस पर मोहित हैं, वह धीरे-धीरे बड़ा हो रहा है और उसके जो गुण हैं उनके साथ वह उससे तभी जुड़ी रह सकती है जब वह उसके साथ प्रेम में हो और वह थीं भी। किसी के साथ प्रेम में होना… वास्तविकता में भी यही है कि वो व्यक्ति बहुत प्यारा है, वहाँ कोई कामुकता नहीं होती। सिर्फ़ हाथ में हाथ डालकर बैठना ही सबकुछ होता है। 

सदगुरु कहते हैं, “वह (भौतिक प्रेमी) जब शारीरिक तौर पर साथ आते हैं, वैसे ही हो जाते हैं। यहाँ कृष्ण प्रेम के अवतार हैं। कैसे कोई उनसे प्यार नहीं कर सकता। उनकी माँ, उनके दादी, दोस्त, पुरुष, महिला, बच्चे, पशु सब कोई उन्हें चाहते हैं। यही तरीका है उन्हें पाने का। अगर आप किसी को प्रेम करते हैं तो आप उसके प्रेमी हो जाते हैं।”

वह कृष्ण भक्तों से आगे माफी माँगते हुए कहते हैं, “कुछ लोग अगर सच में मेरी बात से दुखी हुए हैं तो मैं उनसे माफी माँगता हूँ। लेकिन दूसरे लोग शरारती हैं और उन्होंने वीडियो को वैसे ही एडिट किया है। उन लोगों के लिए जो वाकई प्रशंसक हैं और कृष्ण को प्रेम करते हैं, मैं उनके लिए दोबारा वही शब्द प्रयोग करता हूँ कि आप निश्चिंत रहिए मैंने उनके बारे में इस संबंध में कुछ नहीं कहा।”

सदगुरु दोबारा बताते हैं कि जो लोग वास्तव में यह मानते हुए आहत हुए हैं कि उन्होंने कुछ गलत कहा है, तो उन्हें इस बारे में खेद है और उन्होंने वास्तव में ऐसा कुछ नहीं कहा है। वह आगे कहते हैं कि जो लोग इसे गलत तरीके से ले रहे हैं, कम से कम भगवान कृष्ण के बारे में बात करते समय, उन्हें अपने दिल में कुछ प्रेम लाना चाहिए और उन्हें नफरत भरे अभियान नहीं चलाने चाहिए।

सदगुरु ने माँ यशोदा और श्रीकृष्ण के लिए क्या विवादित कहा?

सदगुरु की वायरल वीडियो में उन्हें कहते सुना जा सकता है,

“यशोदा, कृष्ण की पालक माँ। वो अपने पुत्र के साथ गहरे प्रेम में थीं। वो कृष्ण को सिर्फ़ बेटा नहीं, उससे बढ़कर मानती थीं। जब कृष्ण छोटे थे, तो ये सब (प्यार) उस छोटे से बच्चे के लिए था। लेकिन जब वो (कृष्ण) बड़े हुए तो काफ़ी तेज़ी से बढ़े। उनका विकास अभूतपूर्व था। कोई भी माँ अपनी ममता को इस तरह के विकास के साथ समायोजित नहीं कर सकती। इसलिए कृष्ण के 5-6 साल के होते-होते यशोदा का मातृत्व कहीं खो गया। उसके बाद वो उनकी माँ नहीं रह सकती थीं। वह एक तरह से उनकी प्रेमिका बन गईं। उन्होंने बस उनसे प्रेम किया। तो यशोदा का कृष्ण के साथ संबंध इस तरह से बढ़ा कि वो भी गोपियों में से एक बन गईं। वो भी रास का हिस्सा थीं। वो राधा को पसंद नहीं करती थीं क्योंकि उन्हें लगता था कि ये लड़की बहुत तेज है।”

वायरल वीडियो में सदगुरू ने आगे कहा,

“एक गाँव की लड़की से सामान्य व्यवहार अपेक्षित होता है। वह छोटे से ही बहुत बाहर जाने वाली थी। इसलिए यशोदा को लगा कि ये लड़की उनके बेटे पर हक जमा लेगी…कृष्ण कभी नहीं आए। अपनी माँ से मिलने भी नहीं। कई बार उन्होंने मथुरा की नदी को क्रॉस किया लेकिन कभी वृंदावन नहीं आए क्योंकि वह नहीं चाहते थे कि वहाँ के वासियों को पता चले कि एक गाय चराने वाले लड़के पर विश्व में धर्म की पुन: स्थापना का जिम्मा उठा लिया है… तो ऐसे यशोदा राधा के साथ गोपी बन गईं क्योंकि कृष्ण अब उनके बेटे नहीं थे। कृष्ण की आभा ने उन पर भी अपनी छाप छोड़ दी थी।”ो

शादी के लिए लड़की पर इस्लाम अपनाने का दबाव बनाने वाले राजा खान पर केस दर्ज: MP में ग्रूमिंग जिहाद का एक और मामला

मध्य प्रदेश में हाल ही में ‘मप्र धार्मिक स्वतंत्रता अधिनियम 2021’ लागू हुआ है। इसके तहत धोखाधड़ी अथवा बलपूर्वक धर्मांतरण को गंभीर अपराध माना गया है और इसके लिए भारी जुर्माने के साथ 10 वर्ष तक की कैद का प्रावधान भी किया गया है। हालाँकि, एक महीने के अंदर भोपाल में ही धर्मांतरण के 10 केस सामने आए हैं। TV9 की एक रिपोर्ट के अनुसार 20 साल की एक लड़की ने राजा खान नाम के एक युवक के विरुद्ध रिपोर्ट दर्ज कराई है। लड़की का आरोप है कि राजा ने धर्म बदलकर शादी करने की शर्त पर उसके साथ अवैध संबंध बनाए।

घटना की पूरी जानकारी :

रिपोर्ट के अनुसार 20 वर्षीय लड़की और राजा के बीच सोशल मीडिया साइट के माध्यम से दोस्ती हुई। पाँच वर्षों तक साथ रहने के बाद दोनों ने शादी का निर्णय लिया लेकिन दोनों के समुदाय अलग होने के कारण शादी में अड़चनें आ रही थी। इसके बाद राजा ने अपना धर्म परिवर्तन करने की बात कही। 24, मार्च को दोनों दिल्ली चले गए और वहाँ 10 दिन तक एक किराए के कमरे में रहे। इस दौरान लड़की ने राजा से शादी के बारे में पूछा तब राजा ने लड़की पर इस्लाम अपनाने का दबाव बनाया। जब लड़की ने मना कर दिया तब राजा ने शादी से इनकार कर दिया।  

इसके बाद दोनों भोपाल लौट आए और लड़की ने सारी घटना अपने परिवार वालों को बताई। शाहजहाँनाबाद थाने में राजा के खिलाफ आईपीसी की धारा 376 के तहत मुकदमा दर्ज किया गया और उसे हिरासत में ले लिया गया।

मुस्तफा ने छुपाई अपनी पहचान :

एक दूसरे मामले में इंदौर में द्वारकापुरी पुलिस ने गब्बर उर्फ मुस्तफा को ग्रूमिंग जिहाद के केस में गिरफ्तार किया है। मामला तब सामने आया जब अस्पताल में आरोपी से उसका पहचान पत्र माँगा गया। इसके बाद उसकी गर्भवती पत्नी को पता चला कि उसके पति का नाम गब्बर नहीं बल्कि मुस्तफा है।

मध्य प्रदेश में ग्रूमिंग जिहाद :

दिसंबर में मध्यप्रदेश में ही उज्जैन में ग्रूमिंग जिहाद का केस आया था जब 35 वर्षीय एक महिला ने वसीम अकरम नाम के व्यक्ति पर धोखाधड़ी, बलात्कार और ब्लैकमेल करने का आरोप लगाया था। महिला के अनुसार अकरम ने अपनी हिन्दू पहचान बताई थी। इस केस में उज्जैन के मुन्नीनगर पुलिस थाने में अकरम के खिलाफ केस दर्ज हुआ था।

भाजपा के सत्ता में आते ही बनाएँगे ‘एंटी-रोमियो स्क्वाड’, TMC के रोमियो होंगे जेल में: बंगाल में गरजे योगी आदित्यनाथ

पश्चिम बंगाल में जनसभा को संबोधित करते हुए उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि यदि भारतीय जनता पार्टी बंगाल में सरकार बनाती है तो यूपी की तरह यहाँ भी ‘एंटी-रोमियो स्क्वाड’ बनाया जाएगा और तृणमूल कॉन्ग्रेस (टीएमसी) के सभी ‘रोमियो’ जेल में होंगे।

हुगली के कृष्णरामपुर में चुनावी जनसभा में आदित्यनाथ ने कहा कि भाजपा द्वारा सरकार में आने के बाद प्रदेश में बहन-बेटियों की सुरक्षा के लिए एंटी-रोमियो स्क्वाड बनाया जाएगा और टीएमसी के सभी रोमियो जेल में होंगे।

उन्होंने यह भी कहा कि 2 मई को चुनाव परिणाम आने के बाद दीदी (ममता बनर्जी) भी ‘जय श्री राम’ कहना प्रारंभ कर देंगी।

सीएए विरोधी दंगों का जिक्र करते हुए मुख्यमंत्री आदित्यनाथ ने कहा कि यूपी के अंदर सीएए के विरोध में दंगा करने वालों के पोस्टर लगाए गए और उनकी संपत्ति से दंगों में हुए नुकसान की भरपाई की गई किन्तु ममता बनर्जी बंगाल में ऐसा नहीं कर सकती क्योंकि वो दंगाईयों को अपने वोट बैंक के रूप में देखती हैं। उन्होंने कहा कि सीएए विरोधी दंगों के दौरान टीएमसी के लोग दंगाईयों का समर्थन कर रहे थे।

2017 में उत्तर प्रदेश में हुए विधानसभा चुनावों में भाजपा ने महिलाओं की सुरक्षा के लिए प्रदेश के अंदर एंटी-रोमियो स्क्वाड बनाने की बात कही थी। यूपी में भाजपा की सरकार बनने के तुरंत बाद ही एंटी-रोमियो स्क्वाड का गठन हुआ जिसका कार्य था महिलाओं के खिलाफ होने वाली छेड़खानी और अभद्र व्यवहार को रोकना। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ शुरू से ही उत्तर प्रदेश के अंदर कानून व्यवस्था को लेकर सख्त रहे हैं।

पश्चिम बंगाल में आठ चरणों में मतदान होना है जिसमें तीन चरणों का मतदान सम्पन्न हो चुका है। चौथे चरण का मतदान 10 अप्रैल को होगा। वोटों की गिनती 2 मई को की जाएगी।  

नक्सलियों के चंगुल से कोबरा कमाण्डो राकेश्वर सिंह हुए रिहा, पत्नी ने कहा- ‘मैं सरकार का आभार व्यक्त करती हूँ’

छत्तीसगढ़ के बीजापुर में नक्सली हमले के बाद अगवा किए गए कोबरा कमाण्डो राकेश्वर सिंह को नक्सलियों ने छोड़ दिया है। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, पुलिस सूत्रों से पता चला है कि राकेश्वर सिंह मन्हास को जंगल के रास्ते वापस लाया गया और इस समय वह सीआरपीएफ कैंप पहुँच गए हैं।

इस बीच उनकी पत्नी मीनू ने सरकार का आभार व्यक्त किया है। मीनू ने कहा, “आज का दिन मेरे जीवन का सबसे खुशनुमा दिन है। मुझे आशा थी कि वह वापस आएँगे। मैं इसके लिए सरकार का आभार व्यक्त करती हूँ।” न्यूज तक की रिपोर्ट के अनुसार, राकेश्वर सिंह मन्हास अब सीआरपीएफ अधिकारियों के साथ हैं और उनका मेडिकल एग्जामिनेशन हो रहा है।

बता दें कि बीजापुर हमले के बाद दो स्थानीय पत्रकारों को एक गुमनाम कॉल आई थी। कॉल में कहा गया था कि सीआरपीएफ जवान उनके कब्जे में है, जिसे वह कोई नुकसान नहीं पहुँचाएँगे।

शुरू में इन दावों का बीजापुर के पुलिस अधीक्षक ने खंडन किया। लेकिन, बाद में नक्सलियों ने राकेश्वर की फोटो जारी करके साबित कर दिया कि कोबरा जवान उन्हीं की गिरफ्त में है। नक्सलियों ने फोटो जारी करने के साथ माँग की, कि सरकार बातचीत के लिए मध्यस्थ की नियुक्ति करे, जिसके बाद राकेश्वर को छोड़ दिया जाएगा। इस पर राकेश्वर के भाई ने कहा कि उन्हें इस फोटो पर भरोसा नहीं है। नक्सली राकेश्वर का वीडियो अथवा ऑडियो जारी करें।

बता दें कि 3 अप्रैल 2021 को सुरक्षाबलों और नक्सलियों के बीच हुई मुठभेड़ के बाद नक्सलियों द्वारा प्रेस नोट जारी करके हमले की पुष्टि की गई थी। इस मुठभेड़ में 23 जवान बलिदान हुए थे। वहीं घटना के बाद से कोबरा जवान राकेश्वर सिंह लापता थे। जम्मू स्थित राकेश्वर का परिवार लगातार उनकी रिहाई के लिए पीएम मोदी से गुहार लगा रहा था।

अवैध रोहिंग्या घुसपैठियों को राहत देने से सुप्रीम कोर्ट का इनकार, कहा- नियत प्रक्रिया के तहत होगा डिपोर्टेशन

जम्मू में अवैध रोहिंग्या प्रवासियों के डिटेन्शन और उन्हें वापस म्याँमार भेजने के निर्णय के विरुद्ध दायर की गई याचिका में अंतरिम आदेश पारित करने से इनकार कर दिया है। यह याचिका एडवोकेट प्रशांत भूषण द्वारा दाखिल की गई थी।

सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि इस मुद्दे पर अवैध रोहिंग्याओं के पक्ष में अंतरिम राहत प्रदान करना संभव नहीं है। कोर्ट ने यह भी कहा कि अवैध प्रवासियों के डिपोर्टेशन से संबंधित पूरी प्रक्रिया का पालन करने के बाद ही रोहिंग्याओं को म्याँमार भेजा जाए।

चीफ जस्टिस एसए बोबड़े, जस्टिस एएस बोपन्ना और जस्टिस वी रामासुब्रमनियम की बेंच ने मोहम्मद सलीमुल्लाह की याचिका पर निर्णय देते हुए कहा कि कोर्ट जम्मू में अवैध प्रवासियों के लिए बने सेंटर्स में डिटेन किए गए रोहिंग्या प्रवासियों को छोड़ने का निर्णय नहीं दे सकता बल्कि नियत प्रक्रिया के अनुसार उनके डिपोर्टेशन की अनुमति देता है। अवैध रोहिंग्या प्रवासियों को बचाने की याचिका में सलीमुल्लाह की ओर से प्रशांत भूषण सुप्रीम कोर्ट में पेश हुए।

23, मार्च को सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई के दौरान रोहिंग्याओं की म्याँमार में स्थिति से संबंधित इंटरनेशनल कोर्ट ऑफ जस्टिस (ICJ) के निर्णय का हवाला दिया था जबकि यह तथ्य सर्वविदित है कि आईसीजे का निर्णय आमतौर पर भारतीय न्याय व्यवस्था पर कोई प्रभाव नहीं डाल सकता है।

सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कहा कि रोहिंग्याओं का डिपोर्टेशन अनुच्छेद 21 का उल्लंघन नहीं :

भारत सरकार का पक्ष रखते हुए सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कहा कि डिपोर्टेशन कानून के द्वारा निर्मित नियत प्रक्रिया के अनुसार ही होगा अतः यह संविधान के अनुच्छेद 21 का किसी भी प्रकार से उल्लंघन नहीं करेगा। मेहता ने यह भी कहा कि रोहिंग्याओं के लिए ‘रिफ़्यूजी’ के स्थान पर ‘अवैध प्रवासी’ शब्द उपयोग किया जाना चाहिए।

जम्मू-कश्मीर सरकार की ओर से हरीश साल्वे इस केस में शामिल हुए। उन्होंने कहा कि चूँकि भारत ने अवैध प्रवासियों से संबंधित अंतर्राष्ट्रीय संधि पर हस्ताक्षर नहीं किया है अतः ‘non-refoulment (यह अवैध प्रवासियों को उनके मूल स्थान पर वापस भेजने से संबंधित है)’ का सिद्धांत भारत पर लागू नहीं होता है।

चीफ जस्टिस ने कहा कि कोर्ट यह मानता है कि म्याँमार में रोहिंग्याओं की स्थिति अच्छी नहीं है लेकिन इस मुद्दे पर कुछ भी करना न्यायालय के अधिकार क्षेत्र से बाहर है। उन्होंने यह भी कहा कि म्याँमार में अवैध रोहिंग्या प्रवासियों के साथ म्याँमार में क्या होगा, उसे सुप्रीम कोर्ट नहीं रोक सकता है।  

रोड शो के बीच जया बच्चन को आया गुस्सा, सेल्फी लेने वाले TMC समर्थक को मारा धक्का: Video वायरल

पश्चिम बंगाल के हावड़ा में तृणमूल कॉन्ग्रेस के लिए प्रचार करने गई जया बच्चन का एक वीडियो सोशल मीडिया में शेयर हो रहा है। वीडियो में जया बच्चन एक टीएमसी समर्थक को धक्का देते दिख रही हैं।

वायरल वीडियो में साफ नजर आ रहा है कि चुनाव रैली में जया बच्चन अपने समर्थकों का पहले अभिवादन करती हैं, लेकिन तभी एक टीएमसी समर्थक उनकी गाड़ी के सामने आ जाता है और सेल्फी लेने लगता है, जिससे वह गुस्सा हो जाती हैं और उसे जोरदार धक्का मार देती हैं।

बता दें कि जया बच्चन ने गुरुवार (8 अप्रैल) को शिवपुर और दक्षिण हावड़ा में तृणमूल कॉन्ग्रेस के उम्मीदवारों के समर्थन में रोड शो किया। इसके बाद वह उत्तर हावड़ा पहुँचीं और टीएमसी उम्मीदवार गौतम चौधरी के समर्थन में रोड शो करके वोट माँगे। इसी बीच वहाँ लोगों का हुजूम उमड़ा और उक्त घटना घटी।

सोशल मीडिया पर जया बच्चन की यह वीडियो तेजी से शेयर हो रही है। अभी तक इस पर टीएमसी की ओर से न ही कोई बयान आया है और न ही जया बच्चन ने कुछ कहा है। मीडिया में इस वीडियो को देख कयास लग रहे हैं कि विपक्षी दल इस मामले को मुद्दा बनाकर न केवल जया बच्चन को बल्कि पूरी टीएमसी को घेर सकता है।

गौरतलब है कि जया बच्चन का ऐसा पब्लिकली आपा खोना कोई नई बात नहीं है। जया बच्चन का सार्वजनिक जगहों पर गुस्सा फूटता रहता है। पिछले साल भोपाल में वह पारिवारिक सदस्यों के साथ बर्थडे सेलीब्रेशन के लिए गई हुईं थीं। वहाँ जब एक स्टाफ सदस्य ने उनके परिवार के साथ तस्वीर लेनी चाही तो उन्होंने इस पर आपत्ति उठा दी। उन्होंने कहा कि ये उनका प्राइवेट टाइम है। इसके अलावा कई बार उन्हें अन्य मौकों पर भी तस्वीर खींच रहे कैमरापर्सन पर नाराजगी जाहिर करते देखा गया है।

देशमुख और महाराष्ट्र सरकार की CBI जाँच रोकने की याचिका खारिज, SC ने कहा- आप एजेंसी का चयन नहीं कर सकते

महाराष्ट्र में कई दिनों से चल रहे ड्रामे के बीच एक और बड़ी खबर आई है। महाराष्ट्र सरकार और राज्य के पूर्व गृहमंत्री अनिल देशमुख की याचिका सुप्रीम कोर्ट ने खारिज कर दी है। इस याचिका में बॉम्बे हाई कोर्ट के उस निर्णय को चुनौती दी गई थी जिसके तहत अनिल देशमुख के विरुद्ध भ्रष्टाचार के आरोपों की सीबीआई द्वारा प्रारंभिक जाँच का आदेश दिया गया था। बॉम्बे हाई कोर्ट ने मुंबई पुलिस के आयुक्त रहे परमबीर सिंह द्वारा राज्य के तत्कालीन गृह मंत्री अनिल देशमुख पर भ्रष्टाचार के गंभीर आरोपों के बाद उनके विरुद्ध सीबीआई की प्रारंभिक जाँच को मंजूरी दी थी।  

जस्टिस संजय किशन कौल और हेमंत गुप्ता की बेंच ने याचिका खारिज करते हुए कहा, “आरोपित व्यक्ति और उस पर लगे गंभीर आरोपों को देखते हुए यह आवश्यक है कि एक स्वतंत्र जाँच एजेंसी इस मामले की जाँच करे। इस मामले में मात्र प्रारंभिक जाँच का ही आदेश दिया गया है अतः हम इस मामले में कोई हस्तक्षेप नहीं करना चाहते हैं।”

सुनवाई के दौरान जस्टिस कौल ने कहा कि यह मुद्दा जनता के विश्वास का है। इस केस में जिन दो लोगों की संलिप्तता है वे एक साथ काम करते आए हैं और दोनों ही ऊँचे पदों पर रह चुके हैं। ऐसे में किसी स्वतंत्र एजेंसी द्वारा इस मामले की जाँच किया जाना अति आवश्यक है।

महाराष्ट्र सरकार की ओर से पक्ष रखते हुए अभिषेक मनु सिंघवी ने कहा कि चूँकि अनिल देशमुख गृहमंत्री के पद से अपना इस्तीफा दे चुके हैं, ऐसे में किसी बाहरी एजेंसी द्वारा राज्य के मामलों की जाँच किया जाना अनुचित है।

अनिल देशमुख की ओर से कपिल सिब्बल सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई के दौरान मौजूद रहे। उन्होंने कहा कि बॉम्बे हाई कोर्ट को पहले देशमुख का पक्ष सुनना चाहिए था। न्यायालय ने बिना सुने ही सीबीआई की प्रारंभिक जाँच का निर्णय दे दिया।

दोनों वकीलों की दलीलों को सुनने के बाद सुप्रीम कोर्ट की बेंच ने प्रश्न किया कि आखिर सीबीआई की जाँच में समस्या ही क्या है? जस्टिस कौल ने यह भी कहा, “आप एजेंसी का चयन नहीं कर सकते।”

मुंबई के पूर्व पुलिस आयुक्त परमबीर सिंह ने महाराष्ट्र के गृह मंत्री अनिल देशमुख पर निलंबित पुलिस अधिकारी सचिन वाजे के जरिए मुंबई के प्रतिष्ठानों से प्रति महीने 100 करोड़ रुपए की वसूली का आरोप लगाया था। इस पर बॉम्बे हाईकोर्ट ने मामले में सीबीआई को प्रारंभिक जाँच करने को कहा था।