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होली की धूम: देखें ब्रज से लेकर उज्जैन तक की मनोहारी छटा, पढ़ें PM मोदी, CM योगी सहित नेताओं ने रंगोत्सव पर क्या कहा

आज भारत भर में होली का त्योहार पूरे हर्ष और उल्लास के साथ मनाया जा रहा है। भारत के प्रमुख मंदिरों में भी धूम-धाम से होली मनाई जा रही है। वृंदावन, महाकालेश्वर समेत देश के कई मंदिरों में भक्त अपने आराध्य के संग होली मनाने के लिए एकत्र हुए हैं। इस अवसर पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और राष्ट्रपति रामनाथ कोविन्द समेत कई अन्य नेताओं ने लोगों को शुभकामनाएँ दी हैं।

होली के त्योहार का भगवान श्री कृष्ण से बड़ा ही गहरा संबंध है। यही कारण है कि ब्रज धाम की होली अपने आप में ही दिव्य और अलौकिक है। भगवान श्री कृष्ण से जुड़े क्षेत्रों जैसे नंदगाँव, मथुरा, वृंदावन, गोवर्धन और राधारानी के क्षेत्र बरसाने की होली विश्व प्रसिद्ध है और दुनिया भर से लोग यहाँ होली खेलने के लिए आते हैं।

आज वृंदावन के बाँके बिहारी मंदिर में भी होली का उत्सव मनाया जा रहा है। भारत के कोने-कोने से भक्त बाँके बिहारी मंदिर पहुँचे हुए हैं। इस मंदिर में भगवान श्री कृष्ण का विग्रह त्रिभंग अवस्था में है जिस कारण उन्हें बाँके बिहारी कहा जाता है।

इसी प्रकार उज्जैन में भी महाकालेश्वर मंदिर में विशेष पूजा का आयोजन किया गया तथा श्रद्धालुओं ने भगवान शिव और माता पार्वती बनकर होली मनाई।

प्रधानमंत्री मोदी ने देशवासियों को होली की शुभकामनाएँ देते हुए कहा कि आनंद, उमंग, हर्ष और उल्लास का यह त्योहार हर किसी के जीवन में नए जोश और नई ऊर्जा का संचार करे।

राष्ट्रपति कोविन्द ने भी होली की शुभकामनाएँ दी। उन्होंने कहा, “होली के शुभ अवसर पर सभी देशवासियों को शुभकामनाएँ। रंगों का त्‍योहार होली, सामाजिक सौहार्द का पर्व है और लोगों के जीवन में खुशी, उत्‍साह व आशा का संचार करता है। मेरी कामना है कि उमंग और उल्‍लास का यह पर्व हमारी सांस्‍कृतिक विविधता में निहित राष्‍ट्रीय चेतना को और शक्ति प्रदान करे।”

भारत के गृह मंत्री अमित शाह ने भी होली के अवसर पर ट्वीट करके कहा, “समस्त देशवासियों को ‘होली’ के पावन पर्व की हार्दिक शुभकामनाएँ। रंग-उमंग, एकता और सद्भावना का यह महापर्व आप सभी के जीवन में सुख, शांति और सौभाग्य लाए।”

उत्तरप्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने होली को असत्य पर सत्य की विजय का महोत्सव बताया और सभी को होली की शुभकामनाएँ दी।

इतिहास का वह दौर जब होली ईद-ए-गुलाबी या आब-ए-पाशी हो गई थी


होली – इसका मतलब यह पहचानना है कि जीवन दरअसल बहुत उल्लासमय प्रक्रिया है। इस दिन देश भर में लोग एक-दूसरे को रंगों से सराबोर कर देते हैं। इस दिन लोग सिर से पाँव तक अलग-अलग रंगों में रंगे होते हैं, जो यह दर्शाता है कि जीवन का मूल तत्व है, उल्लास।

इस पर्व का वर्णन अनेक पुरातन धार्मिक पुस्तकों में मिलता है। इनमें प्रमुख हैं, जैमिनी के पूर्व मीमांसा-सूत्र और कथा गार्ह्य-सूत्र। नारद पुराण और भविष्य पुराण जैसे पुराणों की प्राचीन हस्तलिपियों और ग्रंथों में भी इस पर्व का उल्लेख मिलता है। विंध्य क्षेत्र के रामगढ़ स्थान पर स्थित ईसा से 300 वर्ष पुराने एक अभिलेख में भी इसका उल्लेख किया गया है। संस्कृत साहित्य में वसन्त ऋतु और वसन्तोत्सव अनेक कवियों के प्रिय विषय रहे हैं।

इसके अतिरिक्त प्राचीन चित्रों, भित्तिचित्रों और मंदिरों की दीवारों पर इस उत्सव के चित्र मिलते हैं। विजयनगर की राजधानी हंपी के 16वीं  शताब्दी के एक चित्रफलक पर होली का आनंददायक चित्र उकेरा गया है। इस चित्र में राजकुमारों और राजकुमारियों को दासियों सहित रंग और पिचकारी के साथ राज दम्पत्ति को होली के रंग में रंगते हुए दिखाया गया है। 16वीं शताब्दी की अहमदनगर की एक चित्र आकृति का विषय वसंत रागिनी ही है। इस चित्र में राजपरिवार के एक दंपत्ति को बगीचे में झूला झूलते हुए दिखाया गया है। साथ में अनेक सेविकाएँ नृत्य-गीत व रंग खेलने में व्यस्त हैं। वे एक दूसरे पर पिचकारियों से रंग डाल रहे हैं।

मध्यकालीन भारतीय मंदिरों के भित्तिचित्रों और आकृतियों में होली के सजीव चित्र देखे जा सकते हैं। उदाहरण के लिए इसमें 17वीं शताब्दी की मेवाड़ की एक कलाकृति में महाराणा को अपने दरबारियों के साथ चित्रित किया गया है। शासक कुछ लोगों को उपहार दे रहे हैं, नर्तकियाँ नृत्य कर रही हैं और इस सबके मध्य रंग का एक कुंड रखा हुआ है। बूंदी से प्राप्त एक लघुचित्र में राजा को हाथी दाँत के सिंहासन पर बैठा दिखाया गया है जिसके गालों पर महिलाएँ गुलाल मल रही हैं।

आज भले ही कुछ लोग विभेद करने की कोशिश करें लेकिन प्राचीन काल से ही भारत भूमि का ये प्रसिद्ध त्यौहार हर धर्म-वर्ग के लोगों को लुभाता रहा है। सुप्रसिद्ध पर्यटक अलबरूनी ने भी अपने ऐतिहासिक यात्रा संस्मरण में होलिकोत्सव का वर्णन किया है। भारत के अनेक इस्लामी कवियों ने अपनी रचनाओं में इस बात का उल्लेख किया है कि होलिकोत्सव केवल हिंदू ही नहीं दूसरे मजहब वाले भी मनाते हैं। सबसे प्रामाणिक इतिहास की तस्वीरें हैं मुगल काल की और इस काल में होली के किस्से उत्सुकता जगाने वाले हैं।

अकबर का अपने रानियों के साथ तथा जहाँगीर का नूरजहाँ के साथ होली खेलने का वर्णन मिलता है। अलवर संग्रहालय के एक चित्र में जहाँगीर को होली खेलते हुए दिखाया गया है। शाहजहाँ के समय तक होली खेलने का मुग़लिया अंदाज़ ही बदल गया था।

इतिहास में वर्णन है कि शाहजहाँ के ज़माने में होली को ईद-ए-गुलाबी  या आब-ए-पाशी (रंगों की बौछार) कहा जाता था। अंतिम मुगल बादशाह बहादुर शाह ज़फ़र के बारे में प्रसिद्ध है कि होली पर उनके मंत्री उन्हें रंग लगाने जाया करते थे। मध्ययुगीन हिन्दी साहित्य में दर्शित कृष्ण की लीलाओं में भी होली का विस्तृत वर्णन मिलता है।

भारत की विविधता, संस्कृति, लोक कला, साहित्य को समेटती होली: हर राज्य में उल्लास का अलग है रंग

भारत में होली का उत्सव अलग-अलग प्रदेशों में भिन्नता के साथ मनाया जाता है। ब्रज की होली आज भी सारे देश के आकर्षण का बिंदु होती है। बरसाने की लठमार होली काफ़ी प्रसिद्ध है। इसमें पुरुष महिलाओं पर रंग डालते हैं और महिलाएँ उन्हें लाठियों तथा कपड़े के बनाए गए कोड़ों से पीटती हैं। इसी प्रकार मथुरा और वृंदावन में भी 15 दिनों तक होली का पर्व मनाया जाता है। कुमाऊँ की गीत बैठकी में शास्त्रीय संगीत की गोष्ठियाँ होती हैं। यह सब होली के कई दिनों पहले शुरू हो जाता है।

गोपियों संग होली खेलते माधव (साभार-exotic india)

इस पर्व का वर्णन अनेक पुरातन धार्मिक पुस्तकों में मिलता है। इनमें प्रमुख हैं, जैमिनी के पूर्व मीमांसा-सूत्र और कथा गार्ह्य-सूत्रनारद पुराण और भविष्य पुराण जैसे पुराणों की प्राचीन हस्तलिपियों और ग्रंथों में भी इस पर्व का उल्लेख मिलता है। विंध्य क्षेत्र के रामगढ़ स्थान पर स्थित ईसा से 300 वर्ष पुराने एक अभिलेख में भी इसका उल्लेख किया गया है। संस्कृत साहित्य में वसन्त ऋतु और वसन्तोत्सव अनेक कवियों के प्रिय विषय रहे हैं।

प्राचीन काल के संस्कृत साहित्य में होली के अनेक रूपों का विस्तृत वर्णन है। श्रीमद्भागवत महापुराण में रसों के समूह रास का वर्णन है। अन्य रचनाओं में ‘रंग’ नामक उत्सव का वर्णन है जिनमें हर्ष की प्रियदर्शिका व रत्नावली तथा कालिदास की कुमारसंभवम् तथा मालविकाग्निमित्रम् शामिल हैं। कालिदास रचित ‘ऋतुसंहार’ में पूरा एक सर्ग ही ‘वसन्तोत्सव’ को अर्पित है। भारवि, माघ और अन्य कई संस्कृत कवियों ने वसन्त की खूब चर्चा की है। चंद बरदाई द्वारा रचित हिंदी के पहले महाकाव्य ‘पृथ्वीराज रासो’ में होली का वर्णन है। भक्तिकाल और रीतिकाल के हिन्दी साहित्य में होली और फाल्गुन माह का विशिष्ट महत्व रहा है।

आदिकालीन कवि विद्यापति से लेकर भक्तिकालीन सूरदास, रहीम, रसखान, पद्माकर, जायसी, मीराबाई, कबीर और रीतिकालीन बिहारी, केशव, घनानंद आदि अनेक कवियों को यह विषय प्रिय रहा है। महाकवि सूरदास ने वसन्त एवं होली पर 78 पद लिखे हैं। पद्माकर ने भी होली विषयक प्रचूर रचनाएँ की हैं। इस विषय के माध्यम से कवियों ने जहाँ एक ओर नितान्त लौकिक नायक नायिका के बीच खेली गई अनुराग और प्रीति की होली का वर्णन किया है, वहीं राधा कृष्ण के बीच खेली गई प्रेम और छेड़छाड़ से भरी होली के माध्यम से सगुण साकार भक्तिमय प्रेम और निर्गुण निराकार भक्तिमय प्रेम का निष्पादन कर डाला है।

सूफ़ी संत हज़रत निज़ामुद्दीन औलिया, अमीर खुसरो और बहादुर शाह ज़फ़र जैसे मुस्लिम संप्रदाय का पालन करने वाले कवियों ने भी होली पर सुंदर रचनाएँ लिखी हैं जो आज भी जन सामान्य में लोकप्रिय हैं। आधुनिक हिंदी कहानियों प्रेमचंद की राजा हरदोल, प्रभु जोशी की अलग अलग तीलियाँ, तेजेंद्र शर्मा की एक बार फिर होली, ओम प्रकाश अवस्थी की होली मंगलमय हो तथा स्वदेश राणा की होली में होली के अलग अलग रूप देखने को मिलते हैं। भारतीय फ़िल्मों में भी होली के दृश्यों और गीतों को सुंदरता के साथ चित्रित किया गया है। इस दृष्टि से शशि कपूर की उत्सव, यश चोपड़ा की सिलसिला, वी शांताराम की झनक झनक पायल बाजे और नवरंग इत्यादि उल्लेखनीय हैं।

भारतीय शास्त्रीय, उपशास्त्रीय, लोक तथा फ़िल्मी संगीत की परम्पराओं में होली का विशेष महत्व है। शास्त्रीय संगीत में धमार का होली से गहरा संबंध है, हालाँकि ध्रुपद, धमार, छोटे व बड़े ख्याल और ठुमरी में भी होली के गीतों का सौंदर्य देखते ही बनता है। कथक नृत्य के साथ होली, धमार और ठुमरी पर प्रस्तुत की जाने वाली अनेक सुंदर बंदिशें जैसे चलो गुंइयां आज खेलें होरी कन्हैया घर आज भी अत्यंत लोकप्रिय हैं। ध्रुपद में गाये जाने वाली एक लोकप्रिय बंदिश है खेलत हरी संग सकल, रंग भरी होरी सखी  भारतीय शास्त्रीय संगीत में कुछ राग ऐसे हैं जिनमें होली के गीत विशेष रूप से गाए जाते हैं। बसंत, बहार, हिंडोल और काफ़ी ऐसे ही राग हैं।

होली पर गाने-बजाने का अपने आप वातावरण बन जाता है और जन-जन पर इसका रंग छाने लगता है। उपशास्त्रीय संगीत में चैती, दादरा और ठुमरी में अनेक प्रसिद्ध होलियाँ हैं। होली के अवसर पर संगीत की लोकप्रियता का अंदाज़ इसी बात से लगाया जा सकता है कि संगीत की एक विशेष शैली का नाम ही होली है, जिसमें अलग अलग प्रांतों में होली के विभिन्न वर्णन सुनने को मिलते है जिसमें उस स्थान का इतिहास और धार्मिक महत्व छुपा होता है।

जहाँ ब्रजधाम में राधा और कृष्ण के होली खेलने के वर्णन मिलते हैं वहीं अवध में राम और सीता के जैसे होली खेलें रघुवीरा अवध में। राजस्थान के अजमेर शहर में ख्वाजा मोईनुद्दीन चिश्ती की दरगाह पर गाई जाने वाली होली का विशेष रंग है। उनकी एक प्रसिद्ध होली है आज रंग है री मन रंग है, अपने महबूब के घर रंग है री। इसी प्रकार शंकर जी से संबंधित एक होली में दिगंबर खेले मसाने में होली  कह कर शिव द्वारा श्मशान में होली खेलने का वर्णन मिलता है। भारतीय फिल्मों में भी अलग अलग रागों पर आधारित होली के गीत प्रस्तुत किये गए हैं जो काफी लोकप्रिय हुए हैं। ‘सिलसिला’ के गीत रंग बरसे भीगे चुनर वाली, रंग बरसे और ‘नवरंग’ के आया होली का त्योहार, उड़े रंगों की बौछार, को आज भी लोग भूल नहीं पाए हैं।

हरियाणा की धुलंडी में भाभी-देवर के बीच छेड़ने-पिटाने की प्रथा है। हालाँकि, यह छेड़-छाड़ हँसी-ठिठोली के रूप में प्रतीकात्मक तौर पर होती है, न कि इसकी सामान्य परिभाषा के हिसाब से। बंगाल की दोल जात्रा चैतन्य महाप्रभु के जन्मदिन के रूप में मनाई जाती है। जुलूस निकलते हैं और गाना-बजाना भी साथ रहता है। इसके अतिरिक्त महाराष्ट्र की रंग पंचमी में सूखा गुलाल खेलने, गोवा के शिमगो में जुलूस निकालने के बाद सांस्कृतिक कार्यक्रमों का आयोजन तथा पंजाब के होला मोहल्ला में सिक्खों द्वारा शक्ति प्रदर्शन की परंपरा है।

तमिलनाडु की कमन पोडिगई मुख्य रूप से कामदेव की कथा पर आधारित वसंतोत्सव है जबकि मणिपुर के याओसांग में योंगसांग उस नन्हीं झोंपड़ी का नाम है जो पूर्णिमा के दिन प्रत्येक नगर-ग्राम में नदी अथवा सरोवर के तट पर बनाई जाती है। दक्षिण गुजरात के आदिवासियों के लिए होली सबसे बड़ा पर्व है, छत्तीसगढ़ की होरी में लोक गीतों की अद्भुत परंपरा है और मध्यप्रदेश के मालवा अंचल के आदिवासी इलाकों में बेहद धूमधाम से मनाया जाता है भगोरिया, जो होली का ही एक रूप है। बिहार का फगुआ जम कर मौज मस्ती करने का पर्व है और नेपाल की होलीमें इस पर धार्मिक व सांस्कृतिक रंग दिखाई देता है।

इसी प्रकार विभिन्न देशों में बसे प्रवासियों तथा धार्मिक संस्थाओं जैसे इस्कॉन या वृंदावन के बाँके बिहारी मंदिर में अलग अलग प्रकार से होली के श्रृंगार व उत्सव मनाने की परंपरा है जिसमें अनेक समानताएँ और भिन्नताएँ हैं।


‘ऐसा लगा वो गुंडे मुझे मारना चाहते थे’: ऑपइंडिया से BJP विधायक अरुण नारंग की बातचीत

कृषि कानून के विरोध में प्रदर्शन कर रहे कुछ प्रदर्शनकारियों ने कल (मार्च 27, 2021) पंजाब में अबोहर के भाजपा विधायक अरुण नारंग पर हमला बोलते हुए बीच सड़क पर उनके कपड़े फाड़ दिए। घटना मलोट में घटी। कुछ ही देर में हमले की वीडियो हर जगह वायरल हो गई। वीडियो में देख सकते हैं कि कितनी मुश्किल से भाजपा कार्यकर्ताओं और पुलिस ने अरुण नारंग को उग्र प्रदर्शनकारियों से बचाया।

मेरे पहुँचते ही हुआ मुझ पर हमला- अरुण नारंग

आज ऑपइंडिया ने इस घटना की बाबत भाजपा विधायक अरुण नारंग से संपर्क किया। नारंग ने हमसे बातचीत में अपने ऊपर हुए हमले को कॉन्ग्रेस की नाकामयाबी करार देते हुए कहा कि उनकी प्रेस वार्ता कॉन्ग्रेस शासित प्रदेश पंजाब के मलोट में आयोजित की गई थी। जैसे ही वह वहाँ पहुँचे हमलावरों ने हमला बोल दिया।

किसी प्रकार की नारेबाजी के बारे में जब हमने नारंग से पूछा तो उन्होंने कहा कि हमले से पहले कोई नारा नहीं दिया गया। लेकिन जैसे ही वह गाड़ी से बाहर निकले, हमलावर चिल्लाने लगे कि ये रहा भाजपा विधायक, ये रहा।

‘मैं हमेशा किसानों के साथ हूँ और किसान मेरे साथ’

नारंग ने बताया कि उन्होंने इस मामले में शिकायत दर्ज करवा दी है। पार्टी उनके साथ है और हमलावरों पर उपयुक्त कार्रवाई होगी। नारंग ने घटना पर दुख व्यक्त करते हुए कहा कि वह हमेशा से किसानों के हित में थे। उनके विधानसभा क्षेत्र में किसान उनके साथ हैं।

हमलावरों पर बात करते हुए उन्होंने बताया, “जिन्होंने मुझ पर हमला किया उन्होंने भले ही किसान संघ का झंडा लिया था लेकिन वे गुंडे थे। मेरे क्षेत्र के किसान मेरे दोस्त हैं और वे मुझे भली भाँति जानते हैं।” 

गुंडों की पहचान करने के लिए जाँच जरूरी

नारंग ने हमलावरों की पहचान को लेकर कहा कि ये जाँच का विषय है। वहीं बीकेयू प्रवक्ता राकेश टिकैत के बयान, जिसमें उन्होंने भाजपा को इस हमले का जिम्मेदार बताया, उस पर अपनी बात रखते हुए नारंग ने कहा कि जाँच के बाद ही हमलावरों की पहचान हो पाएगी। वह बोले, “उनकी (हमलावर) पहचान और फंडिग का स्रोत जाँच का विषय है। पुलिस को पता लगाना चाहिए कि इसके पीछे कौन है।”

‘सत्ता में लौटने के लिए कॉन्ग्रेस भड़का रही विरोध प्रदर्शन’

अरुण नारंग के अनुसार, साल 2022 के विधानसभा चुनाव में सत्ता पाने के लिए अमरिंदर सिंह की सरकार इस प्रदर्शन का इस्तेमाल कर रही है। वह किसानों को भड़का रहे हैं और केंद्र सरकार के प्रति भ्रम पैदा कर रहे हैं।

भाजपा विधायक कहते हैं कि पंजाब में कानून व्यवस्था चरमरा गई है। कॉन्ग्रेस सरकार, लोकतांत्रित ढंग से चुने गए प्रतिनिधियों को सुरक्षा दिलाने में असमर्थ है। उन्हें विधायकों की सुरक्षा की कोई परवाह नहीं है और यदि सुरक्षा ख़िलवाड़ में कोई भाजपा नेता मर भी जाए तो उन्हें इससे कोई लेना-देना नहीं है।

नारंग कहते हैं, “लोकतंत्र में हर पार्टी के पास अपने विचार रखने का अधिकार है। लेकिन कॉन्ग्रेस हमें बोलने नहीं दे रही। मैं एक नेता को सुन रहा था जिसका कहना था कि हमें तब तक बोलना ही नहीं चाहिए जब तक उनकी माँगे नहीं मान ली जातीं। ये सब ऐसे नहीं चलेगा। ये लोकतंत्र नहीं है।”

जनप्रतिनिधियों को सुरक्षा देने में असफल हुए पंजाब सीएम को लेकर नारंग ने कहा कि कैप्टन अमरिंदर सिंह को जनप्रतिनिधियों को सुरक्षा मुहैया करवानी चाहिए, लेकिन वह कुछ नहीं कर रहे। पुलिस उस समय वहीं थी लेकिन किसी ने कुछ नहीं किया।

ऐसा लगा वो मुझे मारना चाहते हैं- नारंग

नारंग ने बताया कि ये स्पष्ट नहीं है कि कौन लोग किसानों को भड़का रहे हैं और भाजपा पर हमले करवा रहे हैं। कल के हमले पर वह बोले, “ऐसा लगा जैसे उनका प्लॉन मुझे मारने का था। हालाँकि उन्होंने किसान संघ के झंडे लिए थे। लेकिन वह गुंडे थे। उनके ख़िलाफ़ जाँच होनी चाहिए और जल्द से जल्द उन्हें पकड़ा जाना चाहिए।”

2 मई को खेलेंगे ‘हरे गुलाल’ से दूसरी होली: CM ममता ने ‘बड़ी जीत’ का दावा कर साधा BJP पर निशाना

पश्चिम बंगाल में विधानसभा चुनाव के मद्देनजर, मतदान का पहला चरण बीतने के बाद तृणमूल कॉन्ग्रेस की प्रमुख ममता बनर्जी ने रविवार (मार्च 28, 2021) को एक चुनावी रैली में कहा कि इस बार दूसरी होली वोटों की गिनती वाले दिन यानी 2 मई को ‘हरे गुलाल’ से खेली जाएगी।

इंडिया टुडे की रिपोर्ट के अनुसार मेदिनीपुर जिले के चाँदीपुर में चुनावी रैली के दौरान उन्होंने कहा, “कल लोगों ने 30 निर्वाचन क्षेत्रों में मतदान किया। हम भविष्यवाणी नहीं कर सकते। लेकिन चूँकि मतदान 84 प्रतिशत था, इसलिए मैं कह सकती हूँ कि हम बड़ी जीत हासिल करेंगे।”

उन्होंने बिना केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह का नाम लिए कहा कि एक नेता ने कहा है कि भाजपा 30 में से 26 सीटें जीतेगी। उन्होंने 30 पर ही दावा क्यों नहीं कर दिया। क्या बाकी की सीटें कॉन्ग्रेस और सीपीआई (एम) के लिए छोड़ी हैं।

मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने टीएमसी की जीत पर आश्वस्त होते हुए केंद्रीय सुरक्षाबलों पर इल्जाम लगाया। उन्होंने कहा, “हमारे जिन वोटर्स ने चेहरे पर मास्क नहीं लगाया था उन सबको बाहर भेज दिया गया और उनको धमकी भी दी गई। मैं सुरक्षाबलों से अनुरोध करती हूँ कि ये भाजपा के लिए कैम्पेन करना आपका काम नहीं है। ये आपकी ड्यूटी नहीं है कि आप बंगाल की महिलाओं को डराएँ।”

ममता ने अपने पोलिंग एजेंट्स से किसी कीमत पर पोलिंग बूथ न छोड़ने को कहा। ईवीएम पर अभी से इल्जाम मढ़ते हुए वह बोलीं, “ध्यान रहे कि कुछ जगहों पर आप यदि टीएमसी के लिए वोट करते हैं तो आपका वोट भाजपा को जाता है।”

उन्होंने स्थानीयों को भाजपा के ख़िलाफ़ भड़काते हुए कहा कि लोगों को भाजपा से सतर्क रहना चाहिए क्योंकि उनके हाथों में बंदूक हैं। दूसरी ओर उन्होंने ये भी कहा, “हमने बंगाल में अल्पसंख्यकों को सुरक्षा प्रदान की है।” वह बोलीं, “मुझे यकीन नहीं है कि उन्होंने आज क्या योजना बनाई है। लेकिन याद रखें, भले ही वे मुझे मार डालें, मैं भाजपा और भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (मार्क्सवादी) के खिलाफ अपनी लड़ाई कभी नहीं छोड़ूँगी।”

गौरतलब है कि पश्चिम बंगाल में 8 चरणों में चुनाव होने तय हुए हैं। 27 मार्च को इस क्रम में 30 सीटों पर मतदान हो चुका है। बाकी 7 चरण 29 अप्रैल तक चलेंगे। इसके बाद 2 मई को वोटों की गिनती के साथ जीत-हार का फैसला होगा।

‘इतना तो मैं मुख्यमंत्री के लिए भी नहीं करती, क्या तुम मुझे बेवकूफ समझते हो’: रोड शो में नुसरत जहाँ खफा, वीडियो वायरल

सोशल मीडिया पर बहुत तेजी से एक वीडियो वायरल हो रहा है जहाँ एक रैली में तृणमूल सांसद नुसरत जहाँ को पार्टी के कार्यकर्ताओं पर अपना आपा खोते हुए देखा गया। वीडियो में नुसरत को यह कहते हुए सुना जा सकता है, “मैं एक घंटे से अधिक समय से रैली कर रही हूँ। मैं मुख्यमंत्री के लिए भी इतना नहीं करती। क्या तुम मुझे बेवकूफ बना रहे हो?”

कथित तौर पर यह घटना तब हुई जब नुसरत शनिवार को तृणमूल के अशोकनगर के उम्मीदवार नारायण गोस्वामी के लिए प्रचार कर रहीं थी। हालाँकि, आनंदबाजार डिजिटल ने ये वीडियो जारी करते हुए कहा कि वे स्वतंत्र रूप से वीडियो का सत्यापन नहीं कर सकते।

लेकिन इस वीडियो का सोशल मीडिया पर जमकर मजाक उड़ाया जा रहा है।

गौरतलब है कि वर्तमान में पश्चिम बंगाल में 27 मार्च को पहले चरण का मतदान हुआ, जिसमें बहुत भारी मात्रा में लोग मतदान करने के लिए बाहर निकले। वहीं अशोकनगर विधानसभा क्षेत्र में मतदान 22 अप्रैल को होगा।

‘वे मुझे गंदे इरादे से अपने फ्लैट पर बुलाते थे’: केरल विधानसभा स्पीकर को लेकर स्वप्ना सुरेश ने किया बड़ा खुलासा

केरल के सोना तस्करी मामले में प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने केरल हाईकोर्ट में एक दस्तावेज जमा करवाते हुए चौंकाने वाला खुलासा किया। इसके मुताबिक आरोपित स्वप्ना सुरेश ने एजेंसी को बताया कि राज्य विधानसभा अध्यक्ष पी श्रीरामकृष्णन ‘निजी गंदे इरादों’ से उन्हें अपने फ्लैट पर बुलाते थे।

इससे पहले विधानसभा अध्यक्ष पी श्रीरामकृष्णन को लेकर इस मामले के दो आरोपित ईडी को यह भी बता चुके हैं कि उन्होंने ओमन में एक कॉलेज में निवेश किया हुआ है और उन्होंने ही यूएई वाणिज्य दूतावास अधिकारी के लिए नोटों का बंडल सौंपा था।

बता दें कि एजेंसी ने अपने अधिकारियों के ख़िलाफ़ केरल पुलिस द्वारा दायर एक एफआईआर रद्द करने की माँग करते हुए कोर्ट में याचिका दायर की है। इसी याचिका में उन्होंने सोना तस्करी केस के ब्योरे के साथ श्रीरामकृष्णन एवं अन्य के खिलाफ लगाए गए आरोपों को संलग्न किया। इसमें आरोपित स्वप्ना सुरेश, संदीप नायर और सरित पीएस के अलावा निलंबित आईएएस अधिकारी एम शिवशंकर का बयान भी शामिल है।

स्वप्ना सुरेश ने राज्य विधानसभा अध्यक्ष को लेकर खुलासा करने से पहले केरल के सोना और डॉलर तस्करी मामले में कस्टम अधिकारियों के सामने केरल के मुख्यमंत्री पिनराई विजयन का नाम लिया था। सुरेश ने बताया था कि मुख्यमंत्री महावाणिज्य दूत (Consulate General) के सीधे संपर्क में थे। उनके अलावा उनकी सरकार के तीन और कैबिनेट मंत्री इस डॉलर की तस्करी के मामले में शामिल थे।

सुरेश के इस चौंकाने वाले बयान के बाद केरल विधानसभा में विपक्षी नेता भी हमलावर हो गए थे। रमेश चेन्निथला का कहना था कि कॉन्ग्रेस द्वारा सोने की तस्करी और डॉलर की तस्करी के मामले में लगाए गए सभी आरोप सही साबित हो रहे हैं।

मामले में लगातार नाम उछलने के कारण पिनरई विजयन ने पिछले दिनों प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र लिखा था। इस पत्र में उन्होंने राष्ट्रीय जाँच एजेंसियों के पड़ताल के तरीके पर सवाल उठाया था और उन पर बिना किसी उद्देश्य के जाँच का आरोप लगाया था।

उन्होंने लिखा था कि इससे ‘ईमानदार अधिकारी हतोत्साहित’ हो रहे हैं। उनके अनुसार मामले की पूछताछ को रस्‍सी फेंक कर मछली पकड़ने का अभियान नहीं बनना चाहिए, जिससे केंद्रीय जाँच एजेंसियों की विश्वसनीयता का भारी नुकसान होता है।

कॉन्ग्रेस शासित छत्तीसगढ़ में पुलिस ने नागा साधु को बुरी तरह टॉर्चर किया, गुप्तांग पर मारी लाठी, लूट लिया कैश

कॉन्ग्रेस शासित राज्य छत्तीसगढ़ की न्यायधानी बिलासपुर में पुलिसवालों द्वारा नागा साधु को निर्दयतापूर्वक पीटने का मामला सामने आया है। नागा साधु को बुरी तरह मारने के बाद पुलिसवालों ने उनके पास से सभी दस्तावेज, 1.25 लाख रुपए नकद, 12 हजार रुपए कीमत का मोबाइल फोन और चाँदी के बर्तन लूटकर उन्हें घायल अवस्था में थाने के बाहर फेंक दिया।

रिपोर्ट्स के मुताबिक पीड़ित संत की पहचान जूना अखाड़े के योगी गंगापुरी के रूप में हुई है। वो केरल के त्रिवेंद्रम से बिलासपुर अपने सहयोगी साधु शम्भू महाराज से मिलने के लिए आए थे। उन्होंने AC सेकेंड कोच की टिकट ले रखी थी। उन्हें चकरभाटा रेलवे स्टेशन के पास स्थित अनुसुइया धाम आश्रम में जाना था। बिलासपुर पहुँचने के बाद रेलवे स्टेशन के बाहर वह नहाने लगे।

इसी दौरान वहाँ पहुँचे दो पुलिसवालों ने शक के आधार पर उन्हें हिरासत में ले लिया और वे दोनों नागा संत को तोड़वा पुलिस स्टेशन ले गए। ये जानते हुए भी कि संत को छत्तीसगढ़ी भाषा नहीं आती है। इन पुलिसवालों ने उनसे वहाँ की स्थानीय भाषा में बातचीत की। नहीं समझ पाने पर बुरी तरह से पीटा।

पुलिस की पिटाई से बुरी तरह से घायल संत योगी गंगापुरी घायल अवस्था में रोते हुए रास्ते पर जा रहे थे। उन्हें इस अवस्था में देख रेलवे के एक अधिकारी प्रमोद नागई ने उन्हें रोका। पहले तो उन्हें लगा कि ये कोई मानसिक रूप से विक्षिप्त व्यक्ति हैं। लेकिन, जैसे ही उन्हें यह पता चला कि वो एक संत हैं, नागई अपने घर से कपड़े लाए और उन्हें पहनने के लिए दिया। योगी ने यह कहते हुए मना कर दिया कि वह कपड़े नहीं पहनने के नियमों से बँधे हुए हैं।

बाद में रेलवे अधिकारी साधु को अपने घर ले गए और उनके घावों की मरहम पट्टी की। बाद में वह उन्हें उस आश्रम में भी ले गए जहाँ उन्हें जाना था। मामले की जानकारी मिलते ही भाजपा और बजरंग दल के कार्यकर्ता पीड़ित संत को थाने ले गए।

सुदर्शन न्यूज की रिपोर्ट के मुताबिक पुलिसवालों ने नागा साधु के गुप्तांगों पर लाठियाँ मारी थी। न्यूज चैनल ने इस घटना का वीडियो यू-ट्यूब पर शेयर अपलोड किया है, जिसमें पुलिस की निर्दयता को स्पष्ट रूप से देखा जा सकता है। इस मामले में योगी गंगापुरी के साथ अन्य हिंदू संगठनों ने बिलासपुर रेंज के आईजी रतनलाल दांगी से शिकायत कर इंसाफ की गुहार लगाई है। ‘

योगी गंगापुरी ने पुलिस से उनके प्रमाणपत्र वापस करने की माँग की है, जो उन्हें जूना अखाड़ा ने जारी किया था। हालाँकि, पुलिस वालों ने केवल उनका मोबाइल फोन लौटाया, बाकि सारा सामान वापस नहीं किया।

सचिन वाजे को मीठी नदी लेकर पहुँची NIA, गोताखोरों ने निकाले हार्ड डिस्क, CPU, नंबर प्लेट समेत कई अहम सबूत

मनसुख हिरेन की मौत के मामले में जाँच करते हुए राष्ट्रीय जाँच एजेंसी रविवार (मार्च 28, 2021) को निलंबित पुलिस अधिकारी सचिन वाजे के साथ मीठी नदी पहुँची। यहाँ गोताखोरों की मदद से NIA को नदी में से नंबर प्लेट और डीवीआर समेत कई अहम सुराग हाथ लगे।

समाचार एजेंसी एएनआई ने बताया कि NIA मुंबई के बांद्रा कुर्ला कॉम्प्लेक्स में मीठी नदी के पुल पर वाजे को लेकर गई। वहाँ गोताखोरों ने नदी से एक गाड़ी की नंबर प्लेट और अन्य सामान बरामद किया। कहा जा रहा है कि वाझे ने ही पूछताछ में NIA को बताया कि उसने सबूतों को नष्ट करने के लिए मीठी नदी में फेंक दिया था। 

जानकारी के अनुसार, नदी से गोताखोरों को 2 सीपीयू, 1 प्रिंटर, 1 लैपटॉप और 1 हार्ड डिस्क मिला। इसके अलावा दो नंबर प्लेट बरामद हुए हैं, जिन पर एक ही नंबर MHO2FP1539 लिखा है। जाँच एजेंसी के सूत्रों की मानें तो ये सारी चीजें एंटीलिया और मनसुख हिरेन केस से जुड़ी हुई हैं।

उल्लेखनीय है कि एंटीलिया केस और मनसुख हिरेन मामले में सचिन वाजे के बाद अब उसके करीबी एपीआई रियाज काजी की सीसीटीवी फुटेज सामने आई है। इस फुटेज में वह विक्रोली में नंबर प्लेट की दुकान में प्रवेश करते हुए पाया गया। 

रिपब्लिक टीवी की रिपोर्ट के अनुसार रियाज काजी ने नष्ट करने के इरादे से दुकान के मालिक से डीवीआर फुटेज माँगा। मालिक के साथ बातचीत के बाद उसे डीवीडी और एक कंप्यूटर ले जाते हुए देखा जा सकता है।

दुकान के मालिक को एजेंसी द्वारा पूछताछ के लिए हिरासत में लिया गया। दुकान मालिक का बयान दर्ज किया गया है। एनआईए और एटीएस सूत्रों का हवाला देते हुए, रिपब्लिक ने कहा कि काजी को वर्तमान में सबूतों को नष्ट करने के आरोप में जाँच की जा रही है।

एनआईए और एटीएस दोनों द्वारा रियाज काजी को एंटीलिया बम कांड की जाँच और व्यापारी मनसुख हिरेन की हत्या में अपनी भूमिका जानने के लिए कई बार तलब किया गया है। इससे पहले, रियाज काजी को ठाणे में सचिन वाजे के आवास परिसर से सीसीटीवी फुटेज एकत्र करते देखा गया था। सूत्रों के मुताबिक, दोनों एजेंसियों को कथित तौर पर रियाज काजी पर शक है कि सचिन वाजे को फर्जी नंबर प्लेट खरीदने और अहम सबूत नष्ट करने में मदद मिली है।

‘हम BJP और RSS को कुचल कर टुकड़े-टुकड़े कर देंगे’: चेन्नई में राहुल गाँधी ने दी धमकी

पंजाब में भाजपा विधायक के साथ बदसलूकी की तस्वीरें हर जगह सोशल मीडिया पर वायरल हैं। ऐसे में कॉन्ग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गाँधी ने चेन्नई में भाजपा और आरएसएस को फिर धमकी दी है। टाइम्स ऑफ इंडिया की रिपोर्ट के अनुसार, राहुल ने कहा, “हम भाजपा और आरएसएस को कुचल कर टुकड़े-टुकड़े कर देंगे (We will smash the BJP and the RSS into smithereens)।”

राहुल,  इससे पहले भी कई बार आरएएस पर निशाना साध चुके हैं। उन्होंने कुछ समय पहले आरएसएस द्वारा संचालित स्कूलों की तुलना पाकिस्तान में चलने वाले इस्लामी संगठन व मदरसों से की थी। जबकि हकीकत ये है कि आरएसएस द्वारा चलाए जाने वाले विद्या भारती स्कूल राज्य या फिर केंद्र सरकार द्वारा संबद्ध हैं। वहीं मदरसों का मुख्यधारा स्कूलिंग और शिक्षा से संबंध हो, ये कहीं भी जरूरी नहीं होता। 

अपने बयान में राहुल गाँधी ने कॉन्ग्रेस के डेमोक्रेटिक प्रोग्रेसिव गठबंधन को तमिलनाडु के लोगों के साथ बताया। उन्होंने कहा कि DMK अध्यक्ष स्टालिन CM बनेंगे। स्टालिन और कॉन्ग्रेस कभी भी उन विचारधाराओं और ताकतों के साथ समझौता नहीं करेगी जो तमिलों और तमिलनाडु के हित के खिलाफ हैं। आगे राहुल ने तमिलनाडु को भारत के नींव का एक महत्वपूर्ण हिस्सा बताया। लेकिन फिर थोड़ी देर बाद उन्हें एहसास हुआ कि बाकी राज्यों में चुनाव हैं तो उन्होंने अपनी बात सुधार करते हुए कहा कि बाकी राज्य भी महत्तवपूर्ण हिस्से हैं, मगर तमिलनाडु उनमें प्रमुख है।

भाजपा पर आगे हमला बोलते हुए राहुल गाँधी को कहते सुना जा सकता है, “मैंने एक तस्वीर देखी कि एक निर्वाचित प्रतिनिधि अमित शाह के पैर छू रहा है। इस तरह का रिश्ता बीजेपी में ही संभव है जहाँ आपको बीजेपी नेताओं के पैर छूने पड़ते हैं, जहाँ नरेंद्र मोदी और अमित शाह के सामने झुकना पड़ता है।” 

आगे राहुल ने कहा, “जब मैं प्रधानमंत्री को तमिलनाडु के सीएम को कंट्रोल करते हुए देखता हूँ, सीएम को चुपचाप उनके पैर छूते देखता हूँ, तो मैं इसे स्वीकार करने के लिए तैयार नहीं हूँ। तमिलनाडु के सीएम अमित शाह के सामने झुकना नहीं चाहते हैं, लेकिन उन्होंने जो भ्रष्टाचार किया है, उसकी वजह से वह मजबूर हैं।”

राहुल के इन बयानों के बाद सोशल मीडिया यूजर्स ने जमकर उनकी चुटकी ली। बिन सोचे समझे दिए गए बयानों पर यूजर्स ने निशाना साधा और ऐसी तस्वीरों की लाइन लगा दी जब तमाम लोग उनके और उनकी माँ यानी सोनिया गाँधी के आगे झुकते नजर आए। एक तस्वीर में छत्तीसगढ़ के पूर्व सीएम टीएस देव, राहुल के पाँव छू रहे हैं। इस पर अभिषेक सिंह लिखते हैं, “चलो आपने ये स्वीकार कर लिया कि छत्तीसगढ़ के पूर्व सीएम घपलेबाज थे और आपने उन्हें पाँव छूने को मजबूर किया।”

बता दें कि तमाम तस्वीरों में पाँव को छुआते नजर आने वाले राहुल गाँधी ने तमिलनाडु की जनता को संबोधित करते हुए कहा, “मैं यह देख नहीं सकता कि इतनी बड़ी भाषा और समृद्ध परंपरा वाले तमिलनाडु के सीएम अमित शाह और नरेंद्र मोदी के पैर छुएँ। ये तस्वीर देखकर मुझे गुस्सा आया कि एक नेता इन लोगों के सामने झुक रहा है, और यही कारण है कि मैं आज यहाँ हूँ। मैं तमिल लोगों के साथ एक रिश्ता, बराबरी का रिश्ता चाहता हूँ। मैं चाहता हूँ कि तमिलनाडु, तमिलनाडु से चले, दिल्ली से नहीं।”