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आतंकी अख्तर से पूछताछ के बाद सचिन वाजे गिरफ्तार: तिहाड़ में फोन और एंटीलिया के बाहर बम कनेक्शन खोज रही पुलिस

दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल ने 13 मार्च को तिहाड़ जेल का दौरा किया। इस दौरान उन्होंने इंडियन मुजाहिद्दीन (IM) के आतंकी तहसीन अख्तर के बैरक से मिले मोबाइल फोन को लेकर पूछताछ की। अख्तर को बम बनाने के लिए जाना जाता है। वह यासीन भटकल का करीबी सहयोगी है, जिसने इंडियन मुजाहिद्दीन आतंकवादी समूह की स्थापना की थी।

कथित तौर पर फोन का इस्तेमाल टेलीग्राम चैनल बनाने के लिए किया गया था, जिसमें जैश-उल-हिंद एक समूह था। इसी चैनल से 27 फरवरी की रात मुकेश अंबानी के घर के बाहर एसयूवी खड़ी करने की जिम्मेदारी ली गई थी। इसी समूह ने इस साल जनवरी में इज़राइल दूतावास के पास कम तीव्रता वाले बम विस्फोट की जिम्मेदारी भी ली थी।

रिपोर्टों से पता चला है कि जेल नंबर 8 में उसके बैरक से दो स्मार्टफोन बरामद किए गए थे। शुक्रवार को पुलिस ने अख्तर से पूछताछ करने के लिए स्थानीय अदालत से अनुमति माँगी। हिंदुस्तान टाइम्स ने एक जेल अधिकारी के हवाले से कहा, ”विशेष सेल अधिकारी तहसीन अख्तर से पूछताछ कर रहे हैं। हमने उन्हें गुरुवार (मार्च 11, 2021) रात को फोन सौंप दिया था। वे 13 मार्च की दोपहर में आए और अभी भी अंदर पूछताछ कर रहे हैं।”

कई आतंकवादियों ने फोन का इस्तेमाल किया- रिपोर्ट्स

जब पुलिस को फोन के बारे में पता चला और उसने एक निजी साइबर एजेंसी की मदद से इसका पता लगाया, तो पाया कि यह फोन या तो तिहाड़ जेल में या फिर इसके आस-पास ऑपरेट किया जा रहा है। शुरुआती जाँच के दौरान, पुलिस ने पाया कि कम से कम पाँच अन्य आतंकवादियों ने फोन का इस्तेमाल किया।

ऐसा माना जाता है कि इज़राइली दूतावास के बाहर हुए धमाके में भी इसी फोन का इस्तेमाल किया गया होगा। उप-जेल नंबर 8 में दर्ज अन्य आतंकवादी हैं, जिनके अल-कायदा और अंडरवर्ल्ड अपराधियों से संबंध हैं।

भारत में कई विस्फोटों में अख्तर की भागीदारी

अख्तर 2006 से 2013 तक बम विस्फोटों की सीरीज में शामिल था, जिसमें वाराणसी में 2006 विस्फोट, मुंबई में 2011 के सीरियल धमाकों और हैदराबाद में 2013 के विस्फोट शामिल हैं। उसे 2013 के हैदराबाद विस्फोट मामले में शामिल होने के लिए मौत की सजा सुनाई गई थी।

एंटीलिया बम कांड मामला

गौरतलब है कि हाल ही में, बिजनेसमैन मुकेश अंबानी के घर (एंटीलिया) के बाहर एक संदिग्ध कार बरामद हुई थी। मामले में मुंबई पुलिस के विवादित अधिकारी सचिन वाजे को NIA ने गिरफ्तार कर लिया है। सचिन वाजे से शनिवार (मार्च 13, 2021) को 12 घंटे तक पूछताछ की गई और फिर देर रात उन्हें गिरफ्तार कर लिया गया। 

वाजे की गिरफ्तारी के बाद मुकेश अंबानी के घर एंटीलिया के बाहर मिली स्कॉर्पियो कार को लेकर बड़ा खुलासा हुआ। ख़बरों में बताया गया कि एंटीलिया के बाहर खड़ी स्कॉर्पियो वही थी, जिसका इस्तेमाल अर्णब गोस्वामी की गिरफ़्तारी के दौरान सचिन वाजे ने किया था

ख़बरों में कहा जा रहा है कि ATS को अब वो CCTV फुटेज भी मिल गया है, जिसमें अर्णब गोस्वामी की गिरफ़्तारी से उसका कनेक्शन सामने आ रहा है। ये भी पता चला है कि उस गाड़ी का रजिस्ट्रेशन नंबर फेक है।

कमला नेहरू ट्रस्ट: कॉन्ग्रेस की पूर्व सांसद के बेटे सहित 12 पर FIR, रायबरेली में 5 बीघा जमीन हथियाने का मामला

कॉन्ग्रेस की राष्ट्रीय अध्यक्ष सोनिया गाँधी के संसदीय क्षेत्र रायबरेली में कमला नेहरू ट्रस्ट की जमीन से जुड़े मामले में उत्तर प्रदेश की पुलिस ने FIR दर्ज की है। जिला प्रशासन ने ट्रस्ट को जमीन देने में सरकारी अभिलेखों में छेड़छाड़ करने वाले ट्रस्ट के पदाधिकारी, तत्कालीन अधिकारी और कर्मी समेत 12 लोगों के खिलाफ मामला दर्ज कराया है। ADM (वित्त एवं राजस्व) ने शहर कोतवाली में इसकी तहरीर दी थी, जिसके आधार पर मामला दर्ज हुआ।

अब इस मामले में सीधे कॉन्ग्रेस के शीर्ष परिवार पर आरोप लग रहे हैं। शहर के सिविल लाइंस स्थित करीब 5 बीघा भूमि कमला नेहरू ट्रस्ट के नाम की गई थी। यह ट्रस्ट प्रथम प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू की पत्नी के नाम पर है। उस पर एक महाविद्यालय बनाया जाना था। इसके लिए प्रस्ताव भी तैयार कर लिया गया था। लेकिन, जमीन पड़ी हुई थी और कई लोगों ने यहाँ पर दुकानें खोल ली थीं।

16 दिसंबर 2020 को हाईकोर्ट के आदेश के बाद अवैध अतिक्रमण को जिला प्रशासन ने हटवाया। दीवानी न्यायालय में इस मामले में सुनवाई चल रही थी, लेकिन अब नया ट्विस्ट आ गया हो। ADM प्रेम प्रकाश उपाध्याय ने इस मामले में कॉन्ग्रेस की पूर्व सांसद शीला कौल के बेटे विक्रम कौल, ट्रस्ट के सचिव सुनील देव, तत्कालीन ADM (वित्त एवं राजस्व) मदनपाल पाल आर्य, सब-रजिस्ट्रार घनश्याम, प्रशासनिक अधिकारी विन्धवासिनी प्रसाद, नजूल लिपिक रामकृष्ण श्रीवास्तव और गवाह सुनील तिवारी के खिलाफ मामला दर्ज कराया।

इन सबके अलावा सरकारी अभिलेखों में छेड़छाड़ के मामले में तत्कालीन तहसीलदार कृष्ण पाल सिंह, प्रभारी कानूनगो प्रदीप श्रीवास्तव, लेखपाल प्रवीण कुमार मिश्रा, नजूल लिपिक छेदीलाल जौहरी समेत अन्य पदाधिकारियों पर FIR दर्ज की गई है। सिटी मजिस्ट्रेट ने जब दस्तावेजों की जाँच की तो कई जगह सफ़ेद रंग लगा था। तत्कालीन DM की अनुमति नहीं ली गई थी।

उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के सूचना सलाहकार शलभ मणि त्रिपाठी ने FIR की कॉपी शेयर करते हुए लिखा, “कॉन्ग्रेस और जमीन का गहरा नाता है। जमीन पर काम करने का नहीं, जमीन लूटने का। अमेठी में ‘सम्राट साइकिल के नाम पर गरीबों की जमीन लूटने के बाद अब तैयारी थी सोनिया गाँधी के इलाके रायबरेली में बेशकीमती जमीन हथियाने की। लेकिन, योगीराज में दाल ना गली, उल्टे कमला नेहरू ट्रस्ट पर ही हो गई संगीन FIR।”

दिसंबर 2020 में कमला नेहरू ट्रस्ट के नाम से दर्ज जमीन विवाद मामले को लेकर जिला प्रशासन ने अवैध रूप से कब्जा जमाए लोगों की दुकानों और मकान पर बुलडोजर चलवाया था। कमला नेहरू ट्रस्ट चालीस साल पहले एक शैक्षिक समाज, स्कूल और अस्पताल बनाने के उद्देश्य से बनाया गया था। कमला नेहरू एजुकेशनल सोसायटी की स्थापना 1976 में रायबरेली के सिविल लाइंस इलाके में सिधौली के रहने वाले कैलाश चंद्र द्वारा की गई थी।

टॉलीगंज से भी चुनाव लड़ सकती हैं ममता बनर्जी, नंदीग्राम में चोट लगने के बाद ‘सेफ’ सीट की तलाश: रिपोर्ट्स

पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री और तृणमूल कॉन्ग्रेस (TMC) की मुखिया ममता बनर्जी दो सीटों से विधानसभा चुनाव लड़ सकती हैं। संडे गार्डियन ने अपनी रिपोर्ट में इसके आसार जताए हैं।

रिपोर्ट के मुताबिक, नंदीग्राम से नामांकन कर चुकीं ममता बनर्जी अब किसी ‘सुरक्षित’ सीट से भी चुनाव लड़ने पर विचार कर रही हैं। बताया जा रहा है कि वह दक्षिण कोलकाता के टॉलीगंज सीट से भी नामांकन दाखिल कर सकती हैं।

टीएमसी के शीर्ष सूत्रों ने संडे गार्जियन से इसकी पुष्टि की है। इसके मुताबिक चोटिल होने के बाद ममता बनर्जी टॉलीगंज से चुनाव लड़ने पर विचार कर रही हैं। चोटिल होने के बाद नंदीग्राम में आक्रामक प्रचार करना उनके लिए कठिन हो गया है। नंदीग्राम में ममता बनर्जी को अपने पूर्व सहयोगी शुभेंदु अधिकारी की कड़ी चुनौती का सामना करना पड़ेगा। हाल ही में बीजेपी में शामिल हुए अधिकारी से नंदीग्राम में ममता बनर्जी को तगड़ी टक्कर मिल रही है और कयास लगाए जा रहे हैं कि वे यहाँ से जीत जाएँगे।

ममता बनर्जी ने नंदीग्राम में जिस दिन नामांकन किया था उसी दिन उनको चोट लग गई थी। फिलहाल वे घायल हैं। उनके पैर पर पट्टी बँधी है। इस वजह से वह फिलहाल किसी तरह की गतिविधि में हिस्सा नहीं ले सकती। इससे उनके नंदीग्राम के चुनाव प्रचार अभियान पर असर पड़ने वाला है। ममता बनर्जी किसी तरह का चांस नहीं लेना चाहती, इसलिए संभावना जताई जा रही है कि वह टॉलीगंज से भी चुनाव लड़ सकती हैं।

बता दें कि 5 मार्च को विधानसभा चुनाव के पहले चरण के लिए टीएमसी उम्मीदवारों की सूची की घोषणा करने वाली ममता बनर्जी ने संकेत दिया था कि वह बाद में दूसरी सीट- टॉलीगंज से चुनाव लड़ने पर विचार कर सकती हैं।

टॉलीगंज में आक्रामक प्रचार नहीं करने का निर्देश

शुभेंदु अधिकारी के पार्टी छोड़ने के बाद ममता बनर्जी ने घोषणा की थी कि वह पूर्व और पश्चिम मेदिनीपुर जिलों में टीएमसी कैडरों के मनोबल को बढ़ाने के लिए नंदीग्राम सीट से चुनाव लड़ेंगी। बता दें कि अधिकारी समेत कई वरिष्ठ नेताओं के पार्टी से निकलने के बाद इस क्षेत्र में TMC को बड़े पैमाने पर झटका लगा है।

टीएमसी के सूत्रों ने कहा कि पार्टी और ममता बनर्जी के करीबी नेताओं ने पहले ही टॉलीगंज सीट से टीएमसी उम्मीदवार अरूप विश्वास को यह सूचित कर दिया है। पार्टी सूत्रों ने कहा कि पार्टी ने अरूप विश्वास को टॉलीगंज सीट पर चुनाव प्रचार धीमा रखने को कहा गया है। साथ ही अपने नाम वाले पोस्टर और ग्रैफिटी का उपयोग नहीं करने के भी निर्देश दिए गए हैं। बता दें कि विश्वास टॉलीगंज सीट से तीन बार के विधायक हैं।

दक्षिण कोलकाता की टॉलीगंज सीट को बंगाली फिल्म उद्योग का केंद्र और टीएमसी के लिए एक सुरक्षित सीट माना जाता है। टॉलीगंज सीट पर 10 अप्रैल को मतदान होगा, जबकि नामांकन भरने की अंतिम तारीख 23 मार्च है।

चुनाव आयोग ने घोषणा की थी कि पश्चिम बंगाल 8 चरणों में चुनाव में होगा। राज्य की 294 विधानसभा सीटों पर चुनाव 27 मार्च से शुरू होकर 29 अप्रैल तक होंगे। मतों की गिनती 2 मई को होगी।

विस्फोटक लदी स्कॉर्पियो के साथ थी सफेद इनोवा कार, मुंबई के CP परमबीर सिंह के ऑफिस से मिली: रिपोर्ट्स

उद्योगपति मुकेश अंबानी के मुंबई स्थित घर ‘एंटीलिया’ के बाहर विस्फोटक लदी स्कॉर्पियो खड़ी करने के मामले में चौंकाने वाली जानकारी सामने आई है। राष्ट्रीय जाँच एजेंसी (NIA) के अधिकारियों ने मुंबई पुलिस आयुक्त के कार्यालय से सफेद इनोवा कार बरामद की है। शक है कि 25 फरवरी को एंटीलिया के बाहर विस्फोटक लदी स्कॉर्पियों खड़ी करने की घटना में एक सफेद इनोवा कार का भी इस्तेमाल किया गया था।

मराठी मीडिया आउटलेट साकाल के अनुसार, एनआईए के अधिकारियों ने सफेद इनोवा को मुंबई पुलिस कमिश्नरेट कार्यालय में ट्रेस किया है। करीब से देखने पर उन्होंने पाया कि यह वही सफेद इनोवा कार है, जिसका इस्तेमाल विस्फोटक से लदी स्कॉर्पियो के साथ किए जाने की आशंका है। जानकारी के मुताबिक इस कार पर ‘पुलिस’ लिखा हुआ था।

जाँच के दौरान, NIA अधिकारियों ने पाया कि सफेद इनोवा मुंबई पुलिस की CIU यूनिट की थी और इसका इस्तेमाल सचिन वाजे ने किया था। एनआईए ने वाजे पर विस्फोटक रखने का आरोप लगाया है।

मुंबई पुलिस कमिश्नर कार्यालय में सफेद इनोवा कार पाए जाने के बाद, मुंबई पुलिस कमिश्नर परमबीर सिंह पर कई सवाल उठ रहे हैं। संभावना जताई जा रही है कि एनआईए के अधिकारी एंटीलिया बम केस में मुंबई पुलिस और शिवसेना के कई नेताओं से पूछताछ कर सकते हैं। बताया गया है कि वाजे ने घटना के संबंध में कुछ हाई-प्रोफाइल नामों का खुलासा किया है।

गौरतलब है कि मुंबई पुलिस के विवादित अधिकारी सचिन वाजे को NIA ने गिरफ्तार कर लिया है। सचिन वाजे से शनिवार (मार्च 13, 2021) को 12 घंटे तक पूछताछ की गई और फिर देर रात उन्हें गिरफ्तार कर लिया गया। उनके खिलाफ IPC की धारा-120B (आपराधिक षड्यंत्र), 286 (किसी विस्फोटक पदार्थ के बारे में उपेक्षापूर्ण आचरण), 465 (कूटरचना), 473 (कूटरचना करने के आशय से कूटकृत मुद्रा को बनाना या कब्जे में रखना) और 506(2) (आपराधिक धमकी) के तहत मामला दर्ज किया गया है।

वाजे की गिरफ्तारी के बाद मुकेश अंबानी के घर एंटीलिया के बाहर मिली स्कॉर्पियो कार को लेकर बड़ा खुलासा हुआ। ख़बरों में बताया गया कि एंटीलिया के बाहर खड़ी स्कॉर्पियो वही थी, जिसका इस्तेमाल अर्णब गोस्वामी की गिरफ़्तारी के दौरान सचिन वाजे ने किया था। ख़बरों में कहा जा रहा है कि ATS को अब वो CCTV फुटेज भी मिल गया है, जिसमें अर्णब गोस्वामी की गिरफ़्तारी से उसका कनेक्शन सामने आ रहा है। ये भी पता चला है कि उस गाड़ी का रजिस्ट्रेशन नंबर फेक है।

काँवड़ लेकर जा रही महिला के साथ पड़ोसी अकरम और उसके साथी ने किया गैंगरेप, तलाश में UP पुलिस ने बनाई 2 टीमें

उत्तर प्रदेश के अलीगढ़ से भगवान शिव के दर्शन के लिए काँवड़ लेकर गई महिला से गैंगरेप का मामला सामने आया है। यूपी पुलिस ने इस मामले में 2 आरोपितों के खिलाफ FIR दर्ज की है। आरोपितों को धर-दबोचने के लिए पुलिस ने 2 टीमों का गठन किया है। आरोप है कि महिला अपने पति के साथ गई थी, लेकिन उसका पड़ोसी अकरम उसे फुसला कर आगरा ले गया और अपने साथी संदीप के साथ मिल कर गैंगरेप किया।

थाना हरदुआगंज क्षेत्र में हुई घटना के बारे में यूपी पुलिस ने बताया है कि अभियोग पंजीकृत कर लिया है। पुलिस का कहना है कि पीड़िता और आरोपित के बीच पूर्व से परिचय था। अलीगढ़ के SSP मुनिराज ने बताया कि महिला ने शिकायत की थी कि पति-पत्नी दोनों काँवड़ लेकर जा रहे थे, उसमें पति आगे निकल गया और महिला पीछे रह गई। आरोपित पीछे से बाइक से आए और लालच दिया कि वो महिला को आगे छोड़ देंगे।

पुलिस के अनुसार, इसके बाद महिला बाइक पर उनके साथ बैठ गई। इसके बाद वो महिला को लेकर कहीं और चले गए। इसके बाद महिला ने थाने में आकर गैंगरेप की FIR दर्ज कराई। महिला को मेडिकल टेस्ट कराने के लिए भेज दिया गया है। SSP ने जानकारी दी कि जल्द ही आरोपितों को गिरफ्तार कर के उन्हें कड़ी से कड़ी सजा दी जाएगी। उनकी तलाश में दबिश दी जा रही है।

वहीं ‘लाइव हिंदुस्तान’ की खबर के अनुसार, थकान हो जाने के कारण पीड़िता तालानगरी स्थित एक पेट्रोल पम्प पर आराम कर रही थी, तभी दोनों आरोपित वहाँ आ धमके। उससे पहले अकरम ने फोन भी किया था और पूछा था कि महिला कहाँ है? इसके बाद वो बाइक से पहुँच कर और घर छोड़ देने के बहाने आगरा ले गया। अलीगढ़ के हरदुआगंज थाने में मामला दर्ज किया गया है। अकरम महिला के पड़ोस में किराए पर रहता है।

‘वसीम रिजवी का सिर काटने वाले को दूँगा ₹11 लाख… पैसे कम पड़े तो औलाद को बेच दूँगा’ – कॉन्ग्रेस नेता का ऐलान

कुरान की कुछ आयतों को ‘हिंसा को बढ़ावा देने वाला’ बता कर सुप्रीम कोर्ट में उन्हें हटाने के लिए याचिका दायर की गई है। इस याचिका को दायर करने वाले शिया वक़्फ़ बोर्ड के पूर्व अध्यक्ष वसीम रिजवी हैं।

वसीम रिजवी लेकिन अब फँस गए हैं। उनके खिलाफ मौलानाओं व कट्टरवादियों का आक्रोश आसमान छूने लगा है। मुरादाबाद बार एसोसिएशन के पूर्व अध्यक्ष और वरिष्ठ अधिवक्ता अमीरुल हसन जाफरी ने शनिवार (मार्च 13, 2021) को एक कार्यक्रम में उनका सर काट कर लाने पर 11 लाख रुपए के इनाम की घोषणा की।

उन्होंने आईएमए सभागार में चल रहे रहत मौलाई कौमी एकता प्रोग्राम के दौरान घोषणा करते हुए कहा कि जो भी वसीम रिजवी का सिर क़लम कर के ले आएगा, उसे 11 लाख रुपए का इनाम मिलेगा। कार्यक्रम के दौरान लोगों के सामने उन्होंने मंच से खुलेआम ये घोषणा की।

अमीरुल हसन जाफरी ने ऐलान किया कि सुप्रीम कोर्ट में कुरान की 26 आयतें हटाने के लिए जो याचिका दायर की गई है, उसकी वो मजम्मत (भर्त्सना) करते हैं। उन्होंने कहा कि घोषित इनाम की व्यवस्था वह अपने पास से और बार एसोसिएशन के लोगों के माध्यम से एकत्र करेंगे और अगर इसके बाद भी रकम कम पड़ जाती है तो वो अपनी औलाद को बेच देंगे, लेकिन वसीम रिजवी का सिर क़लम करने वाले को पूरा इनाम देकर रहेंगे।

राहत मौलाई के जन्म दिवस के अवसर पर आयोजित कौमी एकता कार्यक्रम के दौरान उन्होंने शहर के कई गणमान्य लोगों के सामने ये ऐलान किया। अमीरुल हसन जाफरी के बारे में खास बात ये है कि वो कॉन्ग्रेस पार्टी के नेता भी हैं।

पुलिस अधीक्षक नगर अमित आनंद का कहना है कि इस मामले में अभी कोई भी शिकायत प्राप्त नहीं हुई है। उन्होंने कहा कि शिकायती पत्र मिलने पर जाँच की जाएगी। उधर लखनऊ में शिया-सुन्नी उलेमाओं ने वसीम रिजवी की निंदा की और संयुक्त प्रेस कॉन्फ्रेंस आयोजित कर वसीम रिजवी को इस्लाम से खारिज करने का फतवा जारी किया।

टीले वाली मस्जिद के इमाम मौलाना फजले मन्नान रहमानी नदवी ने रिजवी को इजरायल का एजेंट करार दिया। मौलाना डॉक्टर कल्बे सिब्तैन नूरी ने कहा कि वसीम रिजवी मुस्लिम समाज का हिस्सा नहीं हैं और उन्हें कभी माफ़ नहीं किया जा सकता।

दोनों ने रिजवी को मुस्लिम समाज से बेदखल करने का फतवा जारी किया। उन्होंने कहा कि रिजवी ने हमेशा मुस्लिम समाज को बदनाम करने का कार्य ही किया है। सोशल मीडिया पर कइयों ने ‘मैं वसीम रिजवी के साथ हूँ’ तो कइयों ने ‘अरेस्ट वसीम रिजवी’ ट्रेंड कराया।

बता दें कि शिया वक़्फ़ बोर्ड के पूर्व चेयरमैन वसीम रिज़वी ने सुप्रीम कोर्ट में कुरान की 26 आयतों को हटाने के संबंध में याचिका दाखिल की है। उनका कहना है कि इन 26 आयतों में से कुछ आयतें आतंकवाद को बढ़ावा देने वाली हैं जिन्हें बाद में शामिल किया गया।

शिया पर्सनल लॉ बोर्ड के प्रवक्ता मौलाना यासूब अब्बास ने कहा कि कुरान से एक हर्फ भी नहीं हटाया जा सकता है। इसके अतिरिक्त मौलाना सैफ अब्बास और मौलाना सुफियान निजामी ने भी वसीम रिजवी के इस कृत्य की कड़ी आलोचना की है।

सचिन वाजे ने NIA की पूछताछ में लिए शिवसेना नेताओं के नाम, खुद को बताया बड़े षड्यंत्र का छोटा सा हिस्सा: रिपोर्ट

भारत के सबसे अमीर उद्योगपति मुकेश अंबानी की दक्षिणी मुंबई के ताड़देव में स्थित बहुमंजिला आवास एंटीलिया के बाहर एक संदिग्ध स्कॉर्पियो खड़ी मिली थी और उसमें से बम बनाने के समान मिले थे। कार के मालिक मनसुख हिरेन कुछ ही दिनों बाद संदिग्ध अवस्था में मृत पाए गए।

NIA ने इस मामले में मुंबई पुलिस के अधिकारी व पूर्ण शिवसेना नेता सचिन वाजे को गिरफ्तार किया, जिसका शिवसेना नेताओं ने विरोध किया है। खबर आ रही है कि वाजे ने अपने जुर्म कबूल कर लिया है।

NIA ने जानकारी दी है कि सचिन वाजे को ‘कारमाइकल रोड में बम रखी हुई गाड़ी पार्क करने में भागीदारी’ वाले मामले में गिरफ्तार किया गया है। वाजे की SUV को जब्त कर लिया गया है और सबूत के लिए कार की तलाशी ली जा रही है।

‘ABP News’ की खबर के अनुसार, ताज़ा अपडेट ये है कि सचिन वाजे ने कबूल कर लिया है कि वो मुकेश अंबानी को दी गई बम वाली धमकी षड्यंत्र का हिस्सा थे। इसी खबर में सूत्रों के हवाले से बताया गया है कि वो इस पूरे षड्यंत्र का एक बहुत छोटा सा हिस्सा थे और बड़े खिलाड़ी शिवसेना के वो नेता हैं, जिनका उन्होंने नाम लिया है।

सचिन वाजे ने पूछताछ में कहा है कि वो तो सिर्फ इस पूरे प्रकरण का छोटा सा ऊपरी हिस्सा हैं। अब जब इस मामले में शिवसेना नेताओं के नाम सामने आए हैं तो पार्टी के प्रवक्ता संजय राउत ने सवाल उठाते हुए कहा है कि एक उद्योगपति के मामले की जाँच एक केंद्रीय एजेंसी क्यों कर रही है?

NIA हर एंगल से इस मामले की जाँच कर रही है, जो अभी भी जारी है। राउत ने कहा कि मुंबई पुलिस ने कई बड़े केस हल किए हैं और इस केस की भी जाँच हो रही थी, लेकिन अचानक NIA घुस आती है और ताबड़तोड़ कार्रवाई करती है।

संजय राउत ने दावा किया कि इससे मुंबई पुलिस का मनोबल गिरा है। सचिन वाजे की जो इनोवा गाड़ी तलाशी के लिए लाई गई है, कहा जा रहा है कि वो उस दिन उक्त स्कॉर्पियो से कुछ ही दूरी पर खड़ी थी।

भाजपा नेता राम कदम ने सच्चाई सामने लाने के लिए सचिन वाजे के नार्को टेस्ट की माँग की है। हाल ही में मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे ने भी कहा था कि पुलिस अधिकारी के साथ ऐसा बर्ताव किया जा रहा है, मानो वह ओसामा बिन लादेन हो। जबकि पूर्व मुख्यमंत्री देवेंद्र फड़नवीस ने चुटकी लेते हुए कहा कि वाजे को वकील की कोई आवश्यकता ही नहीं है क्योंकि उनकी वकालत खुद राज्य के सीएम ही कर रहे हैं।

सचीन वाजे के बारे में बता दें कि उन्हें एनकाउंटर स्पेशलिस्ट कहा जाता रहा है। कोल्हापुर के रहने वाले वाजे 1990 बैच के IPS अधिकारी हैं, जिन्होंने 1992-2004 के बीच 63 अपराधियों का एनकाउंटर किया।

बई के घाटकोपर ब्लास्ट से जुड़े मामले में ख्वाजा यूनुस की पुलिस हिरासत में मौत हो गई थी, जिसके बाद CID जाँच हुई और वाजे गिरफ्तार हुए। निलंबन के बाद वो शिवसेना में चले गए लेकिन 2020 में उन्हें शिवसेना की सरकार में फिर वर्दी मिल गई।

टेक्नोलॉजी पर अच्छी पकड़ के चलते उन्होंने साल 2010 में लाल बिहारी नाम की नेटवर्किंग साइट भी शुरू की थी। कहा जाता है कि तकनीक की अच्छी जानकारी रखने वाले वाजे ने कथित तौर पर सॉफ्टवेयर भी डेवलप किया है।

निलंबन के समय वो मीडिया में बतौर ‘विशेषज्ञ’ आते थे। कहा जाता है कि उस दौरान भी कुछ जाँच एजेंसियों ने उनका सहयोग लिया था। वाजे ने शीना बोरा हत्या मामले में और डेविड हेडली पर किताब भी लिखी है।

ख़बरों में यह भी बताया गया है कि एंटीलिया के बाहर खड़ी स्कॉर्पियो वही थी, जिसका इस्तेमाल अर्णब गोस्वामी की गिरफ़्तारी के दौरान सचिन वाजे ने किया था। ‘रिपब्लिक टीवी’ के संस्थापक को गिरफ्तार करने के लिए अलीबाग पुलिस गई थी। सचिन वाजे ने उन्हें गिरफ्तार किया था। ATS को अब वो CCTV फुटेज भी मिल गया है, जिसमें अर्णब गोस्वामी की गिरफ़्तारी से उसका कनेक्शन सामने आ रहा है। ये भी पता चला है कि उस गाड़ी का रजिस्ट्रेशन नंबर फेक है।

1 Bitcoin की कीमत ₹44 लाख के पार, साल भर में 15 गुना से भी अधिक का रिटर्न: भारतीय ऐसे कर सकते हैं निवेश

मार्केट कैप के मामले में दुनिया की सबसे बड़ी क्रिप्टोकरेंसी बिटकॉइन (Bitcoin) ने पहली बार $61,000 (44.34 लाख रुपए) का आँकड़ा पार कर लिया है। यानी, अब एक Bitcoin का मूल्य 44.34 लाख रुपए है।

खबर लिखे जाने तक दुनिया के सबसे बड़े क्रिप्टोकरेंसी एक्सचेंज ‘Binance’ पर इसका मूल्य $61,084 चल रहा है। इसका कुल मार्किट कैप $1.14 लाख करोड़ (83 लाख करोड़ रुपए) हो गया है।

वहीं Bitcoin के दाम इतने ज्यादा बढ़ने के कारण लोग मार्च 2020 का वो समय भी याद कर रहे हैं, जब इसका मूल्य $4000 से भी नीचे चला गया था। इस तरह से मात्र 1 वर्ष में Bitcoin ने निवेशकों को 15 गुना से भी अधिक का रिटर्न दिया है। इसके दाम बढ़ने के कारण बाकि क्रिप्टोकरेंसी के भाव गिरने लगे। लेकिन, माना जा रहा है कि जैसे ही Bitcoin की वैल्यू स्टेबल होगी, ये सभी आगे बढ़ने लगेंगे।

जहाँ तक भारत की बात है, यहाँ भी क्रिप्टो में ट्रेड करने वाले लोगों की संख्या लाखों में है। भारत में WazirX, Coincdx और Zebpay जैसे कई ट्रेडिंग प्लेटफॉर्म हैं, जो आपको Bitcoin सहित अन्य क्रिप्टोकरेंसी खरीदने की सुविधा देते हैं।

भारत में इसे लेकर कानून स्पष्ट नहीं है, लेकिन अभी ये यहाँ अवैध भी नहीं हैं। ये बैंकों पर निर्भर करता है कि वो क्रिप्टो ट्रेंडिंग में अकाउंट का इस्तेमाल होने देते हैं या नहीं। खास बात ये है कि Bitcoin को किसने बनाया, इसके बारे में किसी को पता नहीं। न ही इसकी कोई कंपनी है और ना ही कोई संस्था, जो इसका प्रबंधन करती हो।

केंद्रीय वित्त राज्यमंत्री अनुराग ठाकुर ने कुछ दिनों पहले ही कहा था कि तकनीक और इनोवेशन का मोदी सरकार हमेशा स्वागत करती है और नए विचारों का विश्लेषण होना चाहिए। उन्होंने कहा था कि पूरी समीक्षा और अध्ययन के बाद इस पर बिल आएगा।

लेकिन, RBI गवर्नर शंक्तिकांता दास इस मामले में अलग विचार रखते हैं। उनका कहना है कि सरकार इसे एसेट मान कर रखने की अनुमति दे सकती है, लेकिन इसका ट्रेडिंग नहीं होना चाहिए। उनका कहना है कि जिस ब्लॉकचेन तकनीक पर ये आधारित है, वो ज़रूर भविष्य में काम आने वाला है। 2018 में केंद्रीय बैंकों ने क्रिप्टो ट्रेडिंग पर रोक लगा दी थी लेकिन सुप्रीम कोर्ट ने ट्रेडर्स के पक्ष में फैसला सुनाते हुए इसे रद्द कर दिया था।

अगर आप क्रिप्टो ट्रेडिंग करना चाहते हैं कि ऊपर बताए गए किसी भी क्रिप्टोकरेंसी एक्सचेंज पर जा कर KYC करा सकते हैं। वहाँ अपने बैंक खातों के डिटेल्स जोड़ने के बाद Bitcoin सहित सैकड़ों क्रिप्टो कॉइन्स ख़रीदे-बेचे जा सकते हैं। इन क्रिप्टो एक्सचेंजेज ने हाल ही में बड़ी फंडिंग उठाई है और उनका कहना है कि वो बैंकों, सरकार और स्टार्टअप के नियमों के तहत कार्य कर रहे हैं। रोज उनसे करोड़ों का लेनदेन होता है।

हाल ही में दुनिया के सबसे अमीर कारोबारी एलन मस्क ने भी Bitcoin खरीदी। उन्होंने $1.5 बिलियन (10,903 करोड़ रुपए) के Bitcoins ख़रीदे। साथ ही माइकल सेलर की कंपनी ‘माइक्रोस्ट्रेटेजी’ ने भी 90,859 Bitcoins ख़रीदे, जिसके बाद कई बड़ी हस्तियाँ इस तरफ आकर्षित हुईं।

इनके उलट भारतीय शेयर बाजार के निवेशक राकेश झुनझुनवाला ने दावा किया है कि वो Bitcoin को $5 में भी नहीं खरीदेंगे। बता दें कि क्रिप्टो की दुनिया में गोते लगाने वाले निवेशक अब ऑनलाइन एसेट्स के लिए करोड़ों खर्च कर रहे हैं।

कुछ ही दिनों पहले 10 सेकेंड्स का वीडियो क्लिप 6.6 मिलियन डॉलर (48.43 करोड़ रुपए) में बिका। ये ब्लॉकचेन टेक्नोलॉजी का कमाल है। 50 करोड़ रुपए वाले वीडियो में उल्टा लेटे हुए डोनाल्ड ट्रम्प के पास एक पेड़ है और सड़क पर कुछ लोग पैदल चहलकदमी कर रहे हैं। इस पर इसके क्रिएटर का डिजिटल सिग्नेचर भी है।

‘वो पचा नहीं पा रहे कि भारत में कोई है, जिन्हें उनके अप्रूवल की जरूरत नहीं’: एस जयशंकर ने ऐसे लगाई लताड़

केंद्रीय विदेश मंत्री सुब्रह्मण्यम जयशंकर ने भारत की विदेश नीति और विदेशी संस्थाओं द्वारा दी जा रही नकारात्मक रेटिंग को लेकर बड़ी बात कही है। उन्होंने ‘इंडिया टुडे कन्क्लेव‘ में राहुल कँवल के सवाल का जवाब दिया।

‘फ्रीडम हाउस’ नामक संस्था द्वारा भारतीय लोकतंत्र के ख़त्म होने की बात कही गई थी। इसी तरह स्वीडन के ‘फ्रीडम इंस्टिट्यूट’ ने भी इसी तरह की रेटिंग दी थी। कँवल का सवाल था कि संस्थाएँ भारत को लेकर ऐसा क्यों सोच रही?

केंद्रीय विदेश मंत्री ने जवाब देते हुए कहा कि अब जब ‘लोकतंत्र और एकतंत्र (डेमोक्रेसी एंड ऑटोक्रेसी)’ के रूप में भारत की व्यवस्था के लिए दो वर्गों में विभाजन कर के बातें की जा रही हैं, लेकिन, इसका सच्चा जवाब है – हिपोक्रिसी (दोहरा रवैया)। उन्होंने कहा कि दोहरा रवैया है कि दुनिया में कुछ संस्थाएँ हैं, जो खुद को विश्व का संरक्षक मानती हैं और उनके खुद के तय किए गए कुछ मापदंड हैं, जिसके आधार पर वो ऐसी टिप्पणियाँ करते हैं।

एस जयशंकर ने कहा कि ये संस्थाएँ इस चीज को नहीं पचा पा रही हैं कि भारत में कोई है, जो उनके अनुमोदन का मोहताज नहीं है और उनके द्वारा बताए गए खेल को खेलने से इनकार कर रहा है। उन्होंने कहा कि ये संस्थाएँ अपने नियम-कायदे बनाती हैं, खुद ही मापदंड तय करती हैं और खुद ही फैसले सुनाती हैं। बाद में यही संस्थाएँ ऐसा प्रदर्शित करती हैं, जैसे ये कोई बहुत बड़ी वैश्विक प्रक्रिया हो, जबकि ऐसा नहीं है।

एस जयशंकर ने कहा कि भारतीय जनता पार्टी (BJP) को वो लोग हमेशा ‘हिन्दू राष्ट्रवादी पार्टी’ कह कर सम्बोधित करते हैं और भाजपा नेताओं के लिए ‘नेशनलिस्ट’ कहा जाता है। उन्होंने याद दिलाया कि भारत के इन्हीं ‘राष्ट्रवादियों’ ने विश्व के 70 देशों को कोरोना वायरस की वैक्सीन मुहैया कराई है। उन्होंने कहा कि जब ‘नेशनलिस्ट’ ने 70 देशों को कोरोना वैक्सीन दी तो ‘इंटरनेशनलिस्ट’ देशों ने दुनिया को कितनी वैक्सीन दी है?

उन्होंने पूछा कि दुनिया के उन देशों में से किसी एक का नाम बताइए, जिसने ऐसा कहा कि वो अपने लोगों के लिए जो कर रहे हैं, वो अन्य देशों के लोगों के लिए भी करेंगे क्योंकि सभी को इसकी ज़रूरत है।

एस जयशंकर ने कहा कि अचानक से कुछ लोग आकर सिविल राइट्स के ख़त्म होने की बातें कर रहे हैं, जबकि इस देश में चुनाव पर सवाल नहीं उठते लेकिन क्या यही उन देशों के बारे में कहा जा सकता है?

उन्होंने कहा, “उन देशों की राजनीति को देखिए। आप कुछ भी कहिए, हम सब आस्था और मूल्यों में विश्वास रखते हैं लेकिन उन्हें अपने पद की शपथ लेने के लिए किसी धार्मिक पुस्तक के ऊपर हाथ नहीं रखना पड़ता। आप पता कर सकते हैं कौन सा देश ऐसा करता है। हम खुद पर विश्वास करते हैं। हमें बाहर से सर्टिफिकेट की ज़रूरत नहीं है। कम से कम उनसे तो निश्चित ही नहीं, जो एक एजेंडा लेकर चल रहे हैं।”

याद दिला दें कि स्वीडन स्थित वी-डेम (V-Dem) इंस्टीट्यूट ने अपनी रिपोर्ट में दावा किया है कि भारत अब ‘इलेक्टोरेल डेमोक्रेसी’ नहीं रहा, बल्कि ‘इलेक्टोरेल ऑटोक्रेसी’ बन गया है। कॉन्ग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गाँधी ने इसके आधार पर दावा कर डाला कि भारत अब लोकतांत्रिक देश नहीं रहा। उक्त संस्था में दो ऐसे भारतीय भी हैं, जो सीएए समेत मोदी सरकार की सभी नीतियों के हमेशा विरुद्ध रहते हैं।

बीच सड़क पर ट्रैफिक रोक पढ़ी नमाज, झारखंड पुलिस ने फोटो डालने वाले 3 को किया अरेस्ट, बोला – ‘अफवाहों से बचें’

झारखंड के हजारीबाग स्थित पेलावल में सड़क जाम कर के बच्चों से जुमे की नमाज पढ़वाने का मामला अब तूल पकड़ता जा रहा है। इस मामले में पुलिस ने अब तक 3 लोगों को हिरासत में लिया है। एसपी कार्तिक एस ने जानकारी दी कि पेलावल में बीच सड़क पर बच्चों को बिठाकर सड़क जाम किए जाने की एक तसवीर ‘वायरल की गई’ थी। उन्होंने कहा कि इसके तुरंत बाद पुलिस हरकत में आ गई और कार्रवाई शुरू की।

एसपी का कहना है कि कुछ शरारती तत्वों ने जानबूझ कर सांप्रदायिक सौहार्द्र बिगाड़ने की कोशिश की थी और पुलिस ने उनकी पहचान कर ली है। उन्होंने लोगों को सोशल मीडिया पर फ़ैल रही अफवाहों से बचने की भी सलाह दी। हालाँकि, घटना के सही निकलने के बावजूद उन्होंने ‘अफवाहों’ की बात की।

एसपी ने लोगों को ‘सांप्रदायिक सौहार्द बिगाड़ने वालों’ से सावधान रहने की भी सलाह दी। पुलिस ने कहा कि ऐसे तत्वों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी।

हजारीबाग के भाजपा विधायक मनीष जायसवाल ने इस घटना की पुष्टि करते हुए इस पर हैरानी जताई है और कहा है कि छोटे बच्चों को सामने कर सड़क पर नमाज पढ़ने के पीछे छोटी मानसिकता वाले लोग हैं। उन्होंने कहा कि मामला उनके संज्ञान में है और उन्होंने जिला प्रशासन से बात कर के कार्रवाई की माँग की है।

ये मामला पेलावल ओपी क्षेत्र स्थित हजारीबाग-कटकमसांडी मार्ग का है। नमाज पढ़ने वाले बच्चों की संख्या 8-10 के करीब है। शनिवार की शाम इस पर चर्चा के लिए DSP राजीव कुमार की अध्यक्षता में शांति समिति की बैठक भी हुई।

स्थानीय मुस्लिम प्रतिनिधियों ने इस घटना की आलोचना तो की, लेकिन पुलिस-प्रशासन ने तस्वीर सोशल मीडिया पर डाल कर अपने दर्द बताने वालों पर ही कार्रवाई कर दी।