मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने असम में चुनाव प्रचार के दौरान कॉन्ग्रेस नेता राहुल गाँधी पर जमकर हमला बोला। सीएम ने गुरुवार को कामरुप (रूरल) जिले के पलासबड़ी में एक जनसभा को संबोधित करते हुए राहुल गाँधी का फुल फॉर्म भी बताया।
उन्होंने अंग्रेजी में राहुल (RAHUL) के नाम का मतलब हुए कहा, ”राहुल गाँधी ने कॉन्ग्रेस को कहीं का भी नहीं छोड़ा है। अब तो RAHUL का मतलब हो गया है- R से Rejected, A से Absent Minded, H से Hopeless, U से Useless और L का मतलब Liar है।”
His lying tendencies have made me question meaning of his name Rahul. I think Rahul stands for R- rejected by people, A-absent minded, H-hopeless like his party, U-useless, no use for the party or the people, L-liar: MP CM & BJP leader SS Chouhan in Guwahati#AssamAssemblyPollspic.twitter.com/4SMAvp7qpc
शिवराज सिंह चौहान ने कॉन्ग्रेस नेता को आड़े हाथों लेते हुए आगे कहा कि राहुल गाँधी कॉन्ग्रेस का भला नहीं कर सके, तो असम का भला क्या कर पाएँगे। राहुल गाँधी से बड़ा झूठा आज तक कोई पैदा नहीं हुआ। वे हमेशा ही झूठी घोषणाएं करते हैं। वे असम की पाँच बातों की गारंटी दे रहे हैं। जिन पर कॉन्ग्रेसियों को ही भरोसा नहीं हो रहा है, तो उनकी गारंटी पर कोई कैसे भरोसा करेगा।
इसके साथ ही उन्होंने गुवाहाटी में कहा कि हम प्यार के खिलाफ नहीं हैं, हम ‘जिहाद’ के खिलाफ हैं। किसी को धोखा देकर, नाम बदलने या बेईमान तरीके से प्यार नहीं करना चाहिए। हमने फ्रीडम टू रिलिजन एक्ट 2021 कानून बनाया है। पार्टी ने कहा है कि राज्य में एक समान कानून लागू किया जाएगा।
We aren’t against love, we’re against ‘jihad’. One should not love by betraying, deceiving, changing names or unscrupulous ways. We made Freedom to Religion Act 2021 law. The party has said a similar law will be implemented in the state: MP CM & BJP leader SS Chouhan in Guwahati pic.twitter.com/IQoLAaJzZ6
जापान की एक स्थानीय अदालत ने एक महिला को शादीशुदा महिला के साथ यौन संबंध बनाने का दोषी मानते हुए जुर्माना देने का आदेश दिया है। टोक्यो की एक रिपोर्ट के मुताबिक, अदालत ने 16 फरवरी को अपना फैसला सुनाते कहा कि दोषी महिला को दूसरी महिला के पीड़ित पति को 1 लाख 10 हजार येन (70,000 रुपए) का जुर्माना देना होगा।
बताया जा रहा है कि 39 वर्षीय पति ने 37 वर्षीय महिला के खिलाफ कोर्ट में मुकदमा दायर कर आरोप लगाया था कि उसने उसकी पत्नी के साथ यौन संबंध बनाए थे। वह उसकी पत्नी के साथ रिश्ते में थी। पति के मुताबिक दोषी महिला उसकी पत्नी से एक ऑनलाइन प्लेटफॉर्म पर मिली थी।
वहीं, आरोपित महिला ने कोर्ट में अपना पक्ष रखते हुए कहा था कि उसके कारण उन दोनों की शादी को कोई नुकसान नहीं हुआ और ना ही कोई बेवफाई हुई। लेकिन कोर्ट ने महिला को यह कहते हुए पीड़ित पति को मुआवजा देने का आदेश दिया कि उसके इस कार्य से शांति भंग हुई है, इसमें बेवफाई का कारण नहीं बनता है।
इस मामले पर टोक्यो कोर्ट ने यह भी कहा था, “समलैंगिक युगल भी दो लोगों के बीच एक समझौता है और इस आधार पर यह कहा जा सकता है कि यह रिश्ता भी निष्ठा के लिए उसी तरह के दायित्वों का निर्वहन करता है जो विपरीत लिंग के रिश्ते के लिए जरूरी होता है। यह एक वैसा ही रिश्ता था जैसे कि एक महिला और पुरुष एक साथ वैवाहिक जोड़े के रूप में अपना जीवन व्यतीत करने के लिए साथ आते हैं।”
बता दें कि जापान में कुछ समय पहले देश की एक जिला अदालत ने समलैंगिक विवाह को अंसवैधानिक बताते हुए समलैंगिक युगल को शादी की अनुमति देने से इनकार कर दिया था।
मुकेश अंबानी के घर से कुछ दूरी पर जिलेटिन से भरी कार मिलने के मामले में निलंबित पुलिस अधिकारी सचिन वाजे की पुलिस हिरासत 3 अप्रैल तक बढ़ा दी गई। कोर्ट में वाजे ने कहा कि उसका इस अपराध मामले में कोई लेना-देना नहीं है और उसे केवल बलि का बकरा बनाया जा रहा है।
अदालत में वाजे ने कहा, “मैं केवल डेढ़ दिनों के लिए जाँच अधिकारी था। इस दौरान मैंने मामले की जाँच वैसे ही की, जैसी की जानी चाहिए थी। फिर प्लॉन में कुछ बदलाव हुए। मैं खुद NIA दफ्तर गया, जहाँ मुझे गिरफ्तार कर लिया गया।”
सुनवाई में NIA की ओर से एडिशनल सॉलिस्टर जनरल अनिल सिंह ने कहा कि हर कोई इस केस में पुलिस की भूमिका को जानने के बाद हैरान है। पड़ताल में वाजे के घर से NIA को 62 बुलेट मिली है। इसकी जाँच होनी चाहिए कि आखिर वह वहाँ क्यों थी।
एएसजी अनिल सिंह ने बताया कि पुलिस विभाग ने वाजे को सिर्फ़ 30 बुलेट दी। जिसमें से 5 बुलेट मिल चुकी है। और बाकी की मिलनी बाकी है। सिंह ने कहा कि ठाणे के व्यवसायी मनसुख हिरेन की हत्या जिनका कहना था कि कार उनके घर से चोरी हुई, वो इस केस से संबंधित है।
उन्होंने कोर्ट को बताया कि NIA को एक दिन पहले ही ATS ने इस मामले से जुड़े दो आरोपितों की कस्टडी दी है। इसलिए एजेंसी उनसे वाजे का आमना-सामना करवाना चाहती है। सरकारी वकील ने वाजे पर कई सीसीटीवी कैमरा के डीवीआर को खत्म करने के आरोप भी लगाए हैं। इसके साथ ही वाजे पर जाँच में सहयोग न करने के भी आरोप लगे हैं।
बता दें कि मनसुख हिरेन मामले की जाँच एनआईए ही कर रही है। वाजे के घर के अलावा टीम ने दक्षिण मुंबई के एक पाँच सितारा होटल पर भी छापा मारा था। जहाँ से पुलिस को पता चला की वाजे फर्जी आधार कार्ड दिखाकर वहाँ रुके हुए थे। इसके अलावा हाल में एक बिल्डर ने सचिन वाजे के खिलाफ रंगदारी का मामला दर्ज कराया है।
बिल्डर ने वाजे और उसके साथियों पर डरा-धमका कर रुपए वसूलने की कोशिश करने का आरोप लगाया है। इस संबंध में मुंबई पुलिस कमिश्नर और महाराष्ट्र के DGP को भी शिकायत पत्र भेजा है। बिल्डर ने कहा है कि जब सचिन वाजे को सस्पेंड कर दिया गया है तो उसके द्वारा चलाए जा रहे रंगदारी और भ्रष्टाचार के रैकेट की जाँच होनी चाहिए। उसने बताया है कि वाजे और उसके साथियों ने उसे बार-बार धमकाया और रुपए न देने पर केस करने की धमकी दी।
IPL- 2021 के मद्देनजर चेन्नई सुपरकिंग्स के कप्तान महेंद्र सिंह धोनी ने टूर्नामेंट के लिए टीम की नई जर्सी का अनावरण किया है। चेन्नई सुपरकिंग्स फ्रेंचाइजी ने इसका वीडियो इंस्टाग्राम पर पोस्ट किया। इसमें धोनी टीम की जर्सी को अनबॉक्स करते दिखाई दे रहे हैं।
सोशल मीडिया पर लोग इसकी जमकर तारीफ कर रहे हैं, लेकिन टीम की जर्सी में सेना को सम्मान देने से कथित लिबरल वामपंथियों के पेट में दर्द होने लगा है। वामपंथी सीएसके की जर्सी के कंधे पर बने केमोफ्लॉज पर सवाल उठा रहे हैं।
वामपंथी इसे टीम को संघी रंग में रंगने जैसा करार देने से भी नहीं चूक रहे हैं। आपको बता दें कि महेंद्र सिंह धोनी टेरिटोरियल आर्मी में लेफ्टिनेंट कर्नल हैं। CSK टीम की ओर से यह बताया गया कि जर्सी पर यह केमोफ्लॉज सेना के सम्मान में बनाया गया है।
चेन्नई सुपरकिंग्स ने कहा- केमोफ्लॉज सेना के सम्मान के लिए
लिबरल जमात द्वारा जर्सी के संघीकरण के आरोपों के बीच सीएसके ने एक आधिकारिक बयान जारी कर कहा है कि जर्सी का केमोफ्लॉज वाला स्वरूप सशस्त्र बलों के सम्मान के लिए है। इसके ऊपर लगा थ्री स्टार फ्रेंचाइजी का लोगो है।
सीएसके के CEO के विश्वनाथन ने कहा, “हमारे दिमाग में बीते कुछ समय से आ रहा था कि सशस्त्र बलों के स्वार्थ रहित कार्य के लिए कुछ करना चाहिए। केमोफ्लॉज उनकी सेवा के सम्मान के लिए है, क्योंकि वे असली हीरो हैं।”
सेना के सम्मान से लिबरल वामपंथियों के पेट में मरोड़
चेन्नई सुपरकिंग्स की कामोफ्लेज वाली नई जर्सी से लिबरल वामपंथियों के दिक्कत होने लगी है। सोशल मीडिया पर कुछ लोग सीएसके के जाँबाज सैनिकों को सम्मान देने के फैसले पर सवाल उठा रहे हैं। उनके मुताबिक ऐसा करके चेन्नई सुपरकिंग्स राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के एजेंडे को आगे बढ़ा रहा है।
CSK getting army stripes to spread soft military Sangh propaganda. The left supporting CSK fans won't utter a word now because deep inside they are also Sanghis, just admit it and move on. https://t.co/tTTOTHmXVM
कुछ लिबरल जमाती सोशल मीडिया पर कह रहे हैं कि सीएसके की जर्सी अब राष्ट्रवादी रंग ले चुकी है। इनका आरोप है कि चेन्नई सुपरकिंग्स सॉफ्ट मिलिट्री और संघी दुष्प्रचार को आगे बढ़ा रहा है। वामपंथियों के मुताबिक राष्ट्र के प्रतीकों और सेना का सम्मान करना संघ के एजेंडे को बढ़ाना है।
एक यूजर ने टीम की जर्सी को कोट करते हुए धोनी को संघी बताया और कहा, ‘सीएसके पागल हो गई है। धोनी को बैन कर देना चाहिए।’ एक अन्य यूजर ने ट्विटर पर लिखा, ‘चेन्नई सुपरकिंग्स हमेशा आईपीएल में जहर घोलती है। आर्मी स्ट्रिप्स नहीं चलेगी।’
लोकसभा के बाद राज्यसभा में राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र सरकार (संशोधन) विधेयक, (GNCTD) बिल 2021, पास होने के बाद आम आदमी पार्टी के नेता मोदी सरकार पर निशाना साध रहे हैं।
दिल्ली के उप मुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया ने कहा कि इस विधेयक के पास होने से पता चलता है कि भाजपा सरकार सीएम अरविंद केजरीवाल और उनके कामों से कितना असुरक्षित महसूस कर रही है। लोग इस बात को कहने लगे हैं कि अरविंद केजरीवाल, मोदी के विकल्प हो सकते हैं। ये बिल मुख्यमंत्री केजरीवाल को आगे बढ़ने से रोकने के लिए लाया गया है।
Passing of the Bill shows that PM Modi’s BJP govt is feeling insecure with Arvind Kejriwal & his work. People have started saying that Arvind Kejriwal can be an option to Modi ji. The Bill has been brought to stop Kejriwal ji from moving ahead: Delhi Dy CM on GNCTD Amendment Bill pic.twitter.com/VcqhsgV6B5
मनीष सिसोदिया ने कहा, “पीएम मोदी आज नकारात्मक राजनीति में उतर आए हैं। तो उन्हें राजनीतिक जवाब मिलेगा। हम अपने कानूनी विशेषज्ञों से बात कर रहे हैं और हमारे विकल्प तलाश रहे हैं। सीएम केजरीवाल एक योद्धा हैं, पिछले 6 वर्षों में उनकी कोशिशों के बावजूद उन्होंने अपने सभी वादे पूरे किए जिनका मेनिफेस्टो में उल्लेख था।”
PM Modi has come down to negative politics today. So he’ll get political reply. We’re talking to our legal experts & exploring our options…CM Kejriwal is a fighter, despite their attempts in last 6 yrs he fulfilled promises made in manifesto: Delhi Dy CM on GNCTD Amendment Bill pic.twitter.com/d46We5fcIc
बता दें कि केंद्र सरकार ने GNCTD विधेयक को लोकसभा और राज्यसभा से पारित करवा लिया है। ये नया बिल एजली को विशेष शक्ति देने वाला विधेयक है। विधेयक में यह स्पष्ट किया गया है कि दिल्ली में सरकार का मतलब उप राज्यपाल है। इसके पास होने पर आम आदमी पार्टी के नेता जमकर विरोध कर रहे हैं। उनका मानना है कि इससे सीएम की शक्तियाँ कम हो जाएँगी। राज्यसभा में विधेयक पेश होने के वक्त भी विपक्ष ने जमकर हंगामा किया। राज्यसभा सांसद सुशील गुप्ता ने भी इस दौरान भाजपा सरकार पर सवाल उठाए।
सुशील गुप्ता ने कहा कि दिल्ली की जनता ने धर्म और जाति की राजनीति को फेल करके अरविंद केजरीवाल के विकास के मॉडल को तवज्जो दी है। आज दिल्ली का विकास मॉडल जिस तरीके से पूरे देश में फैल रहा है। अरविंद केजरीवाल की लोकप्रियता से घबराकर मोदी जी ने इस सवाल का जवाब संसद में खुद दे दिया।
आगे आप नेता सुशील ने भी PM मोदी का विकल्प अरविंद केजरीवाल को बताया और कहा कि दिल्ली मॉडल को रोकने के लिए यह बिल पास किया गया है। उनके अनुसार, आदमी जिस से डरता है, उसका रास्ता रोकता है। दिल्ली में किस तरीके से विकास हुआ, उस विकास को पसंद कर अब देश के अन्य राज्य भी अरविंद केजरीवाल की तरफ बढ़ रहे हैं।
केंद्र सरकार ने डिजिटल न्यूज प्लेटफॉर्म्स और ओटीटी (ओवर-द-टॉप) प्लेटफॉर्म के लिए नए नियम जारी किए हैं। नए नियमों का उद्देश्य लोगों को पारंपरिक मीडिया जैसे न्यूज चैनलों व समाचार पत्रों के समान ही ऑनलाइन कंटेंट मुहैया करवाना है। नए नियम फेसबुक, व्हाट्सएप, ट्विटर और ओटीटी प्लेटफॉर्म जैसे नेटफ्लिक्स, अमेजन प्राइम, डिजनी हॉटस्टार और कई अन्य जैसे सोशल मीडिया/डिजिटल मीडिया प्लेटफॉर्मों पर लागू होंगे।
अधिसूचना में सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय ने कहा, ”भारत सरकार ने सूचना प्रौद्योगिकी (मध्यवर्ती संस्थाओं हेतु दिशा-निर्देश और डिजिटल मीडिया आचार संहिता) नियम, 2021 को 25.02.2021 को अधिसूचित किया है। नियमों का भाग III डिजिटल समाचार प्रकाशकों और ऑनलाइन क्यूरेट सामग्री (ओटीटी प्लेटफॉर्म) के प्रकाशकों से संबंधित है। नियमों के तहत प्रकाशकों को आचार संहिता का पालन करना, शिकायत निवारण तंत्र स्थापित करने और भारत सरकार को कंटेंट संबंधित सभी जानकारी देनी होगी।”
ओटीटी प्लेटफॉर्मों, सोशल मीडिया प्लेटफॉर्मों और समाचार पोर्टलों के लिए सरकार ने नए नियम अधिसूचित किए (फोटा: ट्विटर)
केंद्रीय मंत्री रविशंकर प्रसाद और प्रकाश जावड़ेकर ने फरवरी में डिजिटल मीडिया, सोशल मीडिया और ओवर-द-टॉप (ओटीटी) प्लेटफॉर्म के लिए दिशा-निर्देश जारी किए थे। रविशंकर प्रसाद ने कहा था कि सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म का भारत में कारोबार करने के लिए स्वागत है, लेकिन उन्हें भारत का संविधान और कानून मानना होगा।
वहीं, प्रकाश जावड़ेकर ने कहा था कि ओटीटी प्लेटफॉर्म के लिए तीन स्तर का तंत्र होगा। ओटीटी प्लेटफॉर्म/डिजिटल मीडिया को अपने काम की जानकारी देनी होगी, वो कैसे अपना कंटेंट तैयार करते हैं और उन्हें एक शिकायत निवारण तंत्र बनाना होगा।
दरअसल, डिजिटल मीडिया/ओटीटी प्लेटफॉर्म पर नियंत्रण के लिए अब तक कोई स्वायत्त संस्था नहीं थी, जिसके चलते यहाँ पर हिंसा से लेकर नग्नता तक सब कुछ परोसा जा रहा था। इसे लेकर कई बार हाईकोर्ट और सुप्रीम कोर्ट ने भी चिंता जताई थी।
बता दें कि सूचना व प्रसारण मंत्रालय के अंतर्गत आने के बाद नेटफ्लिक्स, अमेजन प्राइम वीडियो जैसे ओटीटी प्लेटफार्म पर हिंसा व नग्नता पर लगाम लगेगी।
राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में गणतंत्र दिवस के अवसर पर हुई हिंसा के दौरान लाल किला पर जाकर निशान साहिब का झंडा फहराहने वाले जुगराज सिंह की तलाश दिल्ली पुलिस काफी समय से कर रही है। इस बीच खबर आई है कि उसके परिवार को अमृतसर के हरमिंदर साहिब में बुधवार को एक आयोजन के दौरान सम्मानित किया गया।
जुगराज सिंह, पंजाब के वान तारा सिंह गाँव का निवासी है। उसके विरुद्ध दंगे करने और देशद्रोह जैसी धाराओं में मुकदमे दर्ज हैं। पुलिस ने 3 फरवरी को पूरे मामले में दीप सिद्धू, जुगराज सिंह और अन्य आरोपितों के ऊपर ईनाम की घोषणा की थी।
जानकारी के मुताबिक, बुधवार को हरमिन्दर साहिब में एक कार्यक्रम आयोजित किया गया। इसमें मुख्य आयोजकों में संयुक्त किसान मोर्चा के प्रतिनिधि जैसे बीकेयू (क्रांति) के अध्यक्ष सुरजीत सिंह फूल, दल खालसा के अध्यक्ष हरपाल सिंह चीमा, आम आदमी पार्टी के पूर्व नेता सुखपाल सिंह खैरा, शिरोमणि अकाली दल (अमृतसर) के महासचिव प्रो सिंह जैसे तमाम लोग थे। जिन्होंने कार्यक्रम के दौरान 26 जनवरी को हुई हिंसा के आरोपित लक्का सिधाना को अपना समर्थन दिया। सिधाना पर पुलिस ने 1 लाख रुपए का ईनाम घोषित किया हुआ है। इसके अलावा भारत बंद को सबने सपोर्ट किया।
बता दें कि हरमिंदर साहिब में इस कार्यक्रम को नवरीत सिंह की याद में आयोजित किया गया था। नवरीत की मृत्यु गणतंत्र दिवस पर बैरिकेडिंग तोड़ने के कारण हुई थी। गणतंत्र दिवस पर दिल्ली में अराजकता पैदा करने वाले उन दंगाइयों के परिवारों को सम्मानित करते हुए बुधवार को स्वर्ण मंदिर में पंजाब के सिख युवाओं के परमजीत सिंह मंडा ने बताया,
“26 जनवरी को दिल्ली में ट्रैक्टर मार्च के दौरान पुलिस की गोलियों से मारे गए नवरीत सिंह की याद में समारोह आयोजित किया गया। पंजाब के सिख युवाओं द्वारा अरदास और श्रद्धांजलि समागम का आयोजन उन सभी किसानों को श्रद्धांजलि देने के लिए किया गया जिन्होंने आंदोलन में भाग लेते हुए अपनी जान गँवाई।”
उल्लेखनीय है कि 26 जनवरी को हिंसा के बाद दिल्ली ने तमाम दंगाइयों के विरुद्ध पुलिस ने मुकदमे दर्ज किए थे। नवरीत की मृत्यु पर झूठ फैलाने वाले पत्रकार राजदीप सरदेसाई, शशि थरूर, जैसी नामी हस्तियों के ख़िलाफ़ भी कार्रवाई हुई थी। इसके बाद 19 फरवरी को दिल्ली पुलिस नेलाल किला हिंसा मामले में 200 लोगों की तस्वीर जारी की थी। इन सभी पर हिंसा में शामिल होने का आरोप है। दिल्ली पुलिस ने बताया था कि उन्होंने विभिन्न स्रोतों से मिले वीडियो को स्कैन करने के बाद आरोपितों की तस्वीर जारी की।
चुनाव जीतने के लिए प्रत्याशी कई बड़े वादे करते हैं। पार्टियाँ तो अपना घोषणापत्र बनाती ही हैं साथ ही प्रत्याशी भी अपने स्तर पर कुछ घोषणाएं करते हैं। ऐसे ही एक प्रत्याशी का मैनिफेस्टो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है। तमिलनाडु विधानसभा चुनाव में एक प्रत्याशी ने जीतने पर मुफ़्त आईफोन, एक मिनी हेलीकॉप्टर, प्रत्येक घर को सालाना एक करोड़ रुपए, शादियों में सोने के गहने, तीन मंजिला मकान और चंद्रमा की यात्रा कराने का वादा किया है।
थुलम सरवनन दक्षिण मदुरै विधानसभा क्षेत्र से निर्दलीय प्रत्याशी के रूप में चुनाव लड़ रहे हैं। उनके द्वारा किए गए वादे न केवल उनके क्षेत्र अपितु पूरे भारत का ध्यान अपनी ओर खींच रहे हैं।
#TamilNaduElections2021: Thulam Saravanan, an independent candidate from Madurai South constituency, promises a mini-helicopter, an annual deposit of ₹1 crore for every home, gold jewellery for weddings, a 3-storey house and a trip to the moon in his manifesto. pic.twitter.com/B8dIBrApTU
उन्होंने गृहणियों को उनका कार्यभार कम करने के लिए एक-एक रोबोट मुहैया कराने की बात की है। साथ ही क्षेत्र को ठंडा रखने के लिए एक 300 फुट ऊँचा बर्फ का पहाड़ स्थापित करने और प्रत्येक परिवार को एक बोट देने की योजना भी सरवनन के मैनिफेस्टो में है।
सरवनन यहीं नहीं रुके। उन्होंने अपने क्षेत्र में चुनाव जीतने के बाद एक अंतरिक्ष शोध केंद्र एवं रॉकेट लॉन्च पैड स्थापित करने का वादा भी किया है।
आर्थिक स्थिति नहीं है सही :
मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार सरवनन अपने गरीब माता-पिता के साथ रहते हैं। नामांकन भरने के लिए उन्होंने 20,000 रुपए उधार लिए हैं। उनके मित्र और रिश्तेदार उनकी सहायता कर रहे हैं। उन्होंने अपना चुनाव चिन्ह कचरे का डिब्बा रखा है।
उनके मैनिफेस्टो को देखकर एक बार कोई भी व्यक्ति इसे मजाक मान सकता है किन्तु उनका यह घोषणापत्र एकदम सही है। असल में सरवनन का उद्देश्य लोगों में जागरुकता लाना है। उनका मैनिफेस्टो वर्तमान राजनैतिक परिस्थितियों पर व्यंग्य है। सरवनन का कहना है कि जिस प्रकार राजनेता, जनता को तरह-तरह के लालच दे रहे हैं, उससे राजनीति दूषित हो रही है। चुनाव में मतदाताओं को लुभाने के लिए ऐसे लालच दिए जाते हैं जिन्हें पूरा करना बहुत मुश्किल होता है। इसी लालच के कारण मतदाता सही नेता का चुनाव नहीं कर पाते।
सरवनन ने कहा कि उनका उद्देश्य ही है कि जनता में जागरुकता आए। वे भले ही चुनाव जीतने में असफल रहेंगे किन्तु उनका संदेश सोशल मीडिया के माध्यम से प्रसारित हो रहा है, यही उनकी जीत है। आपको बता दें कि तमिलनाडु की 234 विधानसभा सीटों के लिए एक ही चरण में 6 अप्रैल को चुनाव का आयोजन किया जाएगा। चुनाव परिणाम 2 मई को जारी किए जाएँगे।
पश्चिम बंगाल में आगामी विधानसभा चुनाव को लेकर हर पार्टी अपने प्रचार-प्रसार में जुटी है। इस दौरान आरोप-प्रत्यारोप का दौर भी जारी है। इसी कड़ी में अब तृणमूल कॉन्ग्रेस के नेता शेख आलम ने विवादित बयान दे डाला है। उन्होंने समुदाय विशेष के लोगों को भड़काते हुए कहा है कि यदि हम 30% लोग इकट्ठा हो जाएँ तो 4-4 पाकिस्तान बन सकते हैं।
समाचार एजेंसी एएनआई के अनुसार तृणमूल कॉन्ग्रेस नेता शेख आलम ने भड़काऊ बयान देते हुए कहा, “हम जो अल्पसंख्यक लोग 30 प्रतिशत हैं और वो 70 प्रतिशत हैं? अगर पूरे भारतवर्ष में हम 30 प्रतिशत लोग एकत्र हो जाएँ तो हम 4-4 पाकिस्तान बना सकते हैं? उसके बाद कहाँ जाएँगे ये 70 प्रतिशत वाले लोग?”
आलम के इस बयान के बाद तृणमूल कॉन्ग्रेस व पार्टी के नेताओं की आलोचना शुरू हो गई है। भाजपा केंद्रीय सह प्रभारी अमित मालवीय ने तो इसे सुनने के बाद ट्वीट में लिखा, “बीरभूम के नानूर के बासा पाड़ा में टीएमसी नेता शेख आलम ने एक भाषण देते हुए कहा, अगर भारत में 30 प्रतिशत मुस्लिम एक साथ आते हैं तो 4 पाकिस्तान बन सकते हैं… वह स्पष्ट रूप से ममता बनर्जी के प्रति अपनी निष्ठा रखते हैं…तो क्या वह इस पद का समर्थन करती हैं? क्या हम ऐसा बंगाल चाहते हैं?”
This is reality of our SECULAR country …no doubt BJP is winning elections one after another…these people are the real reason why Indian citizen doesn’t want to vote for secular parties
बता दें कि बंगाल में तृणमूल कॉन्ग्रेस पर पहले तुष्टिकरण के आरोप लगते रहे हैं, लेकिन अब खुले तौर पर देश को तोड़ने वाले बयान सुनने के बाद यूजर्स का कहना है कि हमारे सेकुलर देश की यही सच्चाई है। ऐसी ही लोगों के कारण भारतीय नागरिक किसी सेकुलर पार्टी को वोट नहीं देना चाहता।
उल्लेखनीय है कि पिछले विधानसभा चुनाव में भी टीएमसी नेता के कारण पाकिस्तान शब्द चर्चा में आया था। तब, 5वें फेज के मतदान से कुछ ही घंटों पहले ममता बनर्जी के मंत्री फिरहाद हाकिम ने गार्डन रीच इलाके को मिनी पाकिस्तान करार दे दिया था। उनके इस बयान के बाद काफी बवाल हुआ था।
हाकिम ने पाकिस्तान के डॉन अखबार से बातचीत में इलाके को मिनी पाकिस्तान कहा था। उस समय डॉन की लीहा हामिद सिद्दिकी गार्डन रीच इलाके में हाकिम की चुनावी रैली में गई थीं। इस दौरान बंगाल के शहरी विकास मंत्री हाकिम ने उनसे कहा, “प्लीज मेरे साथ आइए और मैं आपको कोलकाता के मिनी पाकिस्तान में ले चलूँगा।” रिपोर्टर सिद्दिकी ने इसी बयान के बाद ‘कोलकाता का मिनी पाकिस्तान’ हेडिंग से खबर की थी, जिसे डॉन के ऑनलाइन एडिशन में प्रकाशित किया गया था और हजारों लोगों ने फेसबुक पर शेयर भी किया था।
भारत के विपक्षी दलों की खासियत ये है कि जब पालघर में दो साधुओं की भीड़ पीट-पीट कर हत्या कर देती है तो वे चुप रहते हैं। लेकिन जब किसी आसिफ को दो थप्पड़ पड़ जाते हैं तो ये उसे कई गुना बड़ा मुद्दा बना देते हैं। पादरी पर लगे बलात्कार के आरोप पर वे शांत रहते हैं, लेकिन ननों से मामूली पूछताछ होते ही देश खतरे में आने की बातें करने लगते हैं।
2 ननों से पूछताछ पर इतना क्यों भड़क गए राहुल गाँधी?
झाँसी रेलवे स्टेशन पर शुक्रवार (मार्च 19, 2021) को 4 ईसाई महिलाओं को ट्रेन से उतारा गया, जिनमें 2 नन थीं। कुछ लोगों को शक था कि ये महिलाएँ मानव तस्करी कर रही हैं, इसीलिए उन्होंने शिकायत की थी। रेलवे ने बस पूछताछ भर की और जब पुष्टि हुई कि ऐसा कुछ नहीं था तो जाने दिया। कंजीराप्पल्ली में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह कह भी चुके हैं कि अगर कोई प्रशासनिक गड़बड़ी हुई होगी तो कार्रवाई की जाएगी।
लेकिन, उससे पहले ही इस पर राजनीति शुरू हो चुकी थी। जब कहीं कोई अपराध होता है तो एक मामले में दर्जनों लोगों से पूछताछ होती है, जिनमें आरोपित और गवाह से लेकर कई ऐसे भी होते हैं जिनसे सिर्फ जानकारी ली जाती है। किसी से पूछताछ का ये अर्थ कतई नहीं है कि वो अपराधी ही है। लेकिन, असली मुद्दा तो ईसाई वोटों का है, जिसके लिए केरल में राहुल गाँधी कड़ी मशक्कत कर रहे हैं।
राहुल गाँधी ने इस पर एक के बाद एक दो ट्वीट्स किए। पहले ट्वीट में उन्होंने लिखा कि यूपी में केरल की ननों पर ‘हमला’ संघ परिवार के ‘घृणित प्रोपेगेंडा’ का हिस्सा है, जिसके तहत एक समुदाय को दूसरे के सामने खड़ा कर अल्पसंख्यकों को कुचला जाता है। उन्होंने कहा कि ये देश के लिए कड़े कदम उठा कर ऐसी विभाजनकारी ताकतों को परास्त करने का समय है।
कुछ देर बाद उनका एक और ट्वीट आया। इसमें राहुल गाँधी ने लिखा, “मेरा मानना है कि RSS व सम्बंधित संगठन को संघ परिवार कहना सही नहीं। परिवार में महिलाएँ होती हैं, बुजुर्गों के लिए सम्मान होता, करुणा और स्नेह की भावना होती है- जो RSS में नहीं है। अब RSS को संघ परिवार नहीं कहूँगा!”
ये वही राहुल गाँधी हैं जिन्होंने हाल ही में केरल में कहा था कि वे महिलाओं को एक ‘रहस्य’ बताना चाहते हैं कि उन्हें कोई पुरुष नहीं बताएगा – वो पुरुषों से बेहतर हैं।
पालघर पर चुप रहने वाले राहुल गाँधी ने ननों से पूछताछ होने पर मचा दिया हंगामा
ये अलग बात है कि केरल कॉन्ग्रेस की एक बड़ी नेता KC रोसक्कुट्टी ने पार्टी में महिलाओं के साथ ठीक व्यवहार न होने के कारण इस्तीफा देकर LDF का दामन थाम लिया। वो केरल प्रदेश कॉन्ग्रेस कमिटी की उपाध्यक्ष होने के साथ-साथ पूर्व विधायक भी हैं। लेकिन, महिलाओं के लिए बात-बात पर अच्छी-अच्छी बातें करने वाले राहुल गाँधी उस ‘लव जिहाद’ पर क्यों कुछ नहीं बोलते, जिससे केरल के ईसाई परेशान हैं?
केरल में ईसाई वोटों पर है सभी दलों की नजर
सबसे पहले आँकड़ों की बात कर लेते हैं। 2011 की जनगणना की बात करें तो केरल में हिन्दुओं की जनसंख्या 54.72% है, जबकि उसके बाद मुस्लिमों (26.56%) और फिर ईसाइयों (18.38%) का नंबर आता है। यानी, वहाँ चुनावों में ईसाई वही हैसियत रखते हैं जितनी भारत के कई राज्यों में मुस्लिम। भारत के कई राज्यों की तरह मुस्लिम तुष्टिकरण की नीति यहाँ भी अपनाई जाती है, लेकिन ईसाइयों को भी खुश रखने की कोशिश होती है।
तभी केरल में जैसे ही ननों से पूछताछ की खबर आई, मुख्यमंत्री पिनराई विजयन ने केंद्र सरकार को पत्र लिख कर विरोध दर्ज कराया। केंद्रीय केरल में ईसाई जनसंख्या ज्यादा है। एर्नाकुलम, कोट्टायम, इड्डुक्की और पथानामथिट्टा की 33 सीटों पर उम्मीदवारों की हार-जीत के लिए ईसाई वोट अहम भूमिका निभाते हैं। कॉन्ग्रेस शुरू से इनका वोट पाती रही है, लेकिन इस बार उसे डर है कि कहीं LDF या भाजपा उसे अपनी तरफ न खींच ले।
भाजपा इसलिए, क्योंकि दिसंबर 2020 के अंतिम हफ्ते में केरल के कई चर्चों के पादरियों ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मिल कर शिकायत की थी कि अल्पसंख्यकों के लिए जो फंड्स भेजे जाते हैं, उनका उन्हें उचित हिस्सा नहीं मिल पाता। केरल में ऑर्थोडॉक्स-जैकोबाइट ईसाई समूहों के बीच लड़ाई भी कई वर्षों से चलती रही है। उनका आरोप है कि उन फंड्स में से मात्र 20% उन पर खर्च होते हैं।
ईसाइयों की माँग है जनसंख्या के हिसाब से उन्हें उन फंड्स का 41% हिस्सा मिलना चाहिए। ऑर्थोडॉक्स-जैकोबाइट वाला मामला तो कोर्ट में भी चल रहा है। हाल के स्थानीय चुनावों में जिस तरह से LDF का प्रदर्शन रहा है, ऐसा लगा कि ईसाई वोट्स कॉन्ग्रेस से छिटक गए हैं। मार्च 2021 में ही जैकोबाइट चर्चों के कई प्रतिनिधि अमित शाह से मिलने दिल्ली पहुँचे थे, लेकिन ये मुलाकात नहीं हो पाई। 2017 में भाजपा अध्यक्ष रहते शाह ने केरल दौरे में कई पादरियों से मुलाकात की थी।
मुस्लिम लीग के साथ गठबंधन, ईसाइयों के लिए ट्ववीट: 2 नाव वाले राहुल
केरल के मुख्यमंत्री विजयन ने भी दोनों ईसाई पंथों के बीच समझौता कराया, लेकिन इसका कोई परिणाम नहीं निकल पाया। केरल कॉन्ग्रेस (M) राज्य में ईसाइयों की सबसे बड़ी पार्टी हुआ करती थी, जो अब टूट चुकी है। उनमें से एक गुट UDF में चला में चला गया है तो एक LDF में। भाजपा ने ‘लव जिहाद’ के खिलाफ कानून का वादा किया है। केरल में ‘लव जिहाद’ की घटनाओं पर अल्पसंख्यक आयोग ने भी चिंता जताई थी।
कॉन्ग्रेस पार्टी मुस्लिमों और ईसाइयों को एक साथ रिझाना चाहती है। कट्टरवादी इस्लामी दल ‘इंडियन यूनियन मुस्लिम लीग (IUML)’ कॉन्ग्रेस के साथ है और वायनाड में राहुल गाँधी की जीत में पार्टी की बड़ी भूमिका है। ऐसे में ईसाई ननों के लिए ट्वीट करने वाले राहुल गाँधी ईसाई लड़कियों को फाँसने वाले ‘लव जिहाद’ के विरुद्ध कुछ बोलेंगे, सपने में भी ऐसी आशा नहीं की जा सकती। राहुल IUML का साथ चाहते हैं और ईसाईयों का समर्थन भी।
अगर बात ईसाई महिलाओं का हितैषी बनने की ही है, तो ‘लव जिहाद’ तो दूर की बात, राहुल गाँधी ने ननों का यौन शोषण के आरोपित फ्रैंको मुलक्कल सहित अन्य पादरियों के खिलाफ आज तक ट्वीट नहीं किया। केरल में ननों के यौन शोषण की बातें कई बार सामने आई हैं, एक नन ने किताब लिख कर भी इसे उठाया था। लेकिन, वोट बैंक तो पादरियों से आता है। इसलिए, कॉन्ग्रेस उनके खिलाफ नहीं जा सकती।