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‘इस बर्बर घटना से हम व्यथित, खुलेआम घूम रहे अपराधी’: भारत ने हिंदू नेता की हत्या पर बांग्लादेश को फटकारा, कहा – ये चिंताजनक पैटर्न का हिस्सा

बांग्लादेश के दिनाजपुर जिले के बसुदेवपुर गाँव में गुरुवार (17 अप्रैल 2025) को हिंदू समुदाय के नेता भावेश चंद्र रॉय की हत्या कर दी गई। पुलिस ने बताया कि 58 साल के भाबेश का अपहरण कुछ बाइक सवारों ने उनके घर से किया था। उसके बाद उनका शव बरामद हुआ।

इस पूरे मामले पर भारत के विदेश मंत्रालय ने युनुस सरकार को जमकर लताड़ा है। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने सोशल मीडिया प्लैटफॉर्म एक्स पर लिखा, “बांग्लादेश में हिंदू अल्पसंख्यक नेता भाबेश चंद्र रॉय के अपहरण और नृशंस हत्या की खबर ने हमें बेहद व्यथित किया है। यह घटना एक बड़े और चिंताजनक पैटर्न का हिस्सा है, जहाँ अंतरिम सरकार (मोहम्मद यूनुस) के शासनकाल में हिंदू अल्पसंख्यकों को लगातार निशाना बनाया जा रहा है, और पहले की ऐसी घटनाओं के अपराधी अब भी खुलेआम घूम रहे हैं। हम इस बर्बर घटना की कड़ी निंदा करते हैं और एक बार फिर अंतरिम सरकार को याद दिलाते हैं कि वह हर अल्पसंख्यक, विशेषकर हिंदुओं की सुरक्षा की जिम्मेदारी से मुँह न मोड़े और बहानेबाज़ी या भेदभाव करना बंद करे।”

बांग्लादेश की ओर से पश्चिम बंगाल में हुई चुनावी हिंसा पर टिप्पणी की गई थी। केंद्रीय विदेश मंत्रालय ने इसके जवाब में कहा कि ढाका सदाचार का पाठ पढ़ाने की बजाए अपने देश के अल्पसंख्यकों की सुरक्षा पर ध्यान देना चाहिए।

हत्या से पहले के 30 मिनट

भावेश चंद्र रॉय ‘बांग्लादेश पूजा उडजापान (उपासना) परिषद’ की बिराल इकाई के उपाध्यक्ष और क्षेत्र में हिंदू समुदाय के नेता थे। भावेश की पत्नी शांतना का कहना है कि किडनैपिंग से पहले एक कॉल आई थी।

इसके 30 मिनट बाद चार लोग मोटरसाइकल पर आए और भाबेश को अगवा कर लिया गया। वह लोग उनको नाराबारी गाँव ले गए, जहाँ उनके साथ बेरहमी से मारपीट हुई। जब उन्हें वापस भेजा गया तो वह अचेत अवस्था में थे। अस्पताल तक पहुँचने पर उन्हें मृत घोषित कर दिया गया।

इस घटना पर बिरला पुलिस थाने के प्रभारी अब्दुस सबूर ने बताया कि केस दर्ज करने की तैयारी अभी चल रही है। संदिग्धों का कुछ पता नहीं चल पाया है।

अंगुली, अंगूठा और प्राइवेट पार्ट… जानिए क्या होता है ‘डिजिटल बलात्कार’ : गुरुग्राम के मेदांता अस्पताल में भर्ती फ्लाइट अटेंडेट हुई शिकार, हॉस्पिटल का कर्मचारी गिरफ्तार

गुरुग्राम के मेदांता अस्पताल में एयरलाइन कर्मचारी का यौन उत्पीड़न करने वाला आरोपित गिरफ्तार हो गया है। वह इसी अस्पताल का कर्मचारी था। उसकी पहचान दीपक कुमार के तौर पर हुई है। वह ICU में तैनात था। उस पर अब ‘डिजिटल रेप’ का आरोप लगा है। डिजिटल रेप सामान्य रेप से अलग आरोप माना जाता है।

आरोपित दीपक कुमार को शुक्रवार (18 अप्रैल, 2025) को गिरफ्तार किया गया था। उसे गुरुग्राम पुलिस ने कई CCTV और बाकी चीजों की जाँच करने के बाद पकड़ा है। दीपक कुमार बिहार के मुजफ्फरपुर का रहने वाला है और उसने पाँच महीने पहले ही मेदांता अस्पताल में नौकरी चालू की थी। अब वह डिजिटल रेप के आरोप में गिरफ्तार हुआ है।

क्या होता है डिजिटल रेप?

आमतौर पर जब किसी शब्द के आगे डिजिटल लग जाता है, तो हम समझते हैं कि यह मामला तकनीक से जुड़ा होगा। तकनीक से ही जुड़े होने के साथ हम इसे विशेष तौर पर इंटरनेट से जुड़ा समझते हों। डिजिटल लेनदेन हो या डिजिटल मीटिंग, इसके ऐसे उदाहरण हैं। लेकिन यहाँ मामला थोड़ा अलग है।

डिजिटल रेप का तकनीक से कोई भी लेना-देना नहीं है। दरअसल, डिजिटल रेप यौन उत्पीड़न के एक प्रकार को कहते हैं। जब कोई व्यक्ति किसी महिला के गुप्तांगों में बिना सहमति के उंगली या अँगूठे आदि का प्रवेश करवाता है तो इस डिजिटल रेप की संज्ञा दी जाती है।

डिजिटल रेप शब्द में ‘डिजिटल’ का उपयोग उँगलियों या अँगूठे के उपयोग के लिए किया जाता है। दरअसल, यह शब्द अंग्रेजी के शब्द ‘डिजिट’ से आया है, जहाँ इसका अर्थ संख्या होता है। डिजिटल रेप को भारत में रेप का ही एक प्रकार माना जाता है, भले ही इसमें पुरुष के गुप्तांग का उपयोग ना हुआ हो।

क्या है डिजिटल रेप की भारत में सजा?

डिजिटल रेप को पहले भारतीय कानूनों में छेड़छाड़ की श्रेणी में रखा जाता था। इन्हें रेप का दर्जा नहीं दिया जाता था। हालाँकि, 2012 के बाद से कानूनों में बड़े बदलाव किए गए हैं। कानून के अनुसार, कोई व्यक्ति अगर किसी महिला की मर्जी के बगैर उसके गुप्तांग या फिर मुंह में तक किसी भी तरह की चीज का प्रवेश उसकी सहमति के बिना करवाता है, तो यह रेप ही माना जाएगा।

अब अगर कोई व्यक्ति डिजिटल रेप का दोषी पाया जाता है तो उस 5 साल तक की सजा जा हो सकती है। यह सजा कुछ मामलों में बढ़ भी सकती है। यह सजा के प्रावधान IPC के अलावा बच्चों को यौन अपराधों से बचाने के लिए बनाए गए कानून POCSO के उल्लंघन पर भी होती है।

‘डिजिटल रेप’ जैसे अपराधों को लेकर अब कोर्ट भी कड़ा रवैया अपनाते हैं। फरवरी, 2025 में दिल्ली की एक अदालत ने एक व्यक्ति को 2 वर्ष की एक मासूम से डिजिटल रेप करने के दोषी को 25 वर्ष की सजा सुनाई थी। कोर्ट ने कहा था कि भले ही दोषी व्यक्ति ने पीड़ित के गुप्तांगो को लेकर कोई अपराध नहीं किया। कोर्ट ने ₹13.5 लाख का मुआवजा पीड़ित को दिया था।

गुरुग्राम का मामला डिजिटल रेप क्यों?

गुरुग्राम के अस्पताल में रेप का आरोप लगाने वाली एयरलाइन कर्मचारी ने बताया था कि उसके साथ ICU में यह हरकत हुई थी। पीड़िता ने पुलिस को बताया था कि ICU में भर्ती होने के दौरान वह कुछ देख नहीं पा रही थी लेकिन अवचेतन अवस्था में होने के चलते सब कुछ सुन रही थी।

पीड़िता ने बताया कि आरोपित ने पहले ICU में आकर वहाँ रखे सामान के विषय में जानकारी ली। पीड़िता के अनुसार, उसे यह जानकारियाँ वहाँ पर मौजूद 2 नर्स दे रही थीं। आरोपित ने इसके बाद पीड़िता के कमर पर लगाए गए बैंड का नाप पूछा। लेकिन कुछ देर बाद वह स्वयं ही नाप लेने के लिए आ गया।

पीड़िता ने बताया कि इसके बाद आरोपित ने चादर के नीचे से हाथ डाला और उसका यौन उत्पीड़न किया। चूंकि, आरोपित ने हाथ का से यह अपराध अंजाम दिया, इसलिए इसे डिजिटल रेप की श्रेणी में रखा गया है। यह पूरी घटना 6 अप्रैल, 2025 को हुई। पीड़िता ने स्वस्थ होने के बाद यह बात अपने पति और पुलिस को बताई। पुलिस ने इसके बाद दीपक कुमार को पकड़ा।

‘युसूफ पठान बाहरी, वोटर्स के साथ खेल रहे खेल’ : मुर्शिदाबाद हिंसा के बाद TMC सांसद का रवैया देख पार्टी नेताओं ने ही लताड़ा, कहा- तौर-तरीके नहीं बदले तो नहीं मिलने देंगे टिकट

पश्चिम बंगाल का मुर्शिदाबाद 11-12 अप्रैल को एक तरफ जब हिंसा की आग में जल रहा था, तब दूसरी तरफ इस जिले की बहरामपुर सीट से तृणमूल कॉन्ग्रेस के सांसद युसूफ पठान चाय की चुस्की लेते हुए सोशल मीडिया पर फोटो अपलोड कर रहे थे। उनकी इस हरकत की वजह से नेटीजन्स ने उनकी खूब आलोचना की थी, मगर अब खबर है कि उनकी खुद की पार्टी के सदस्य भी उन्हें इस हरकत के लिए लताड़ रहे हैं।

फोटो साभार: इंस्टाग्राम

जानकारी के मुताबिक, मुर्शिदाबाद में हिंसा के बाद जब तृणमूल कॉन्ग्रेस पर सवाल उठने शुरू हुए तो पार्टी नेताओं ने प्रभावित इलाकों में शांति बैठकें करने का प्रयास किया। सांसद अबू ताहिर खान और खलीलपुर रहमान समेत स्थानीय पार्टी नेता इसमें शामिल थे, मगर युसूफ पठान इन बैठकों से गायब थे। न उन्होंने हिंसा प्रभावित इलाकों का दौरा किया, न ही इस पर कोई बात रखी। उनके इस अनुचित व्यवहार को देख साथी पार्टी नेता उखड़ गए। उन्होंने युसूफ पठान को ‘बाहरी’ तक करार दिया।

युसूफ पठान ‘बाहरी’

इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक, सांसद अबू ताहिर खान ने कहा, “वह (यूसुफ पठान) बाहरी व्यक्ति हैं और राजनीति में नए हैं। उन्होंने अब तक इससे दूर रहना ही बेहतर समझा। लेकिन इससे लोगों में गलत संदेश जाता है। हमारे सांसद, विधायक और यहाँ तक ​​कि बूथ कार्यकर्ता भी लोगों से संपर्क कर रहे हैं।”

उन्होंने आगे कहा, “समसेरगंज में शांति बैठक थी। मैं वहाँ पहुँचने के लिए 100 किलोमीटर की यात्रा की। खलीलुर रहमान के साथ-साथ कई टीएमसी विधायक भी वहाँ मौजूद थे। लेकिन वह (यूसुफ पठान) अनुपस्थित थे। कोई यह नहीं कह सकता कि यह मेरा क्षेत्र नहीं है और यह मेरे लोग नहीं हैं और इसलिए मैं नहीं जाऊँगा।”

‘यही हालात रहे तो नहीं मिलने देंगे अगली बार टिकट’

वहीं भरतपुर से टीएमसी विधायक हुमायूँ कबीर ने युसूफ पठान को घेरते हुए कहा कि युसूफ ने मतदाताओं के साथ खेल खेला है। कबीर बोले, “वह गुजरात में रहने वाले एक प्रसिद्ध क्रिकेटर हैं। उन्होंने (कॉन्ग्रेस नेता) अधीर रंजन चौधरी को लोकसभा चुनाव में लोगों के वोटों से हराया था। यह सज्जन अब मतदाताओं के साथ खेल खेल रहे हैं। वह अपनी मर्जी से काम कर रहे हैं।

उन्होंने ये भी कहा कि अगर पठान ने अपने तौर-तरीके नहीं बदले तो वह पार्टी हाईकमान से अगले चुनाव में उन्हें टिकट देने के लिए कहेंगे। कबीर ने चेतावनी देते हुए कहा, “यूसुफ पठान को सांसद बने हुए लगभग एक साल हो गया है। अगर वह अपना व्यवहार नहीं बदलते और लोगों तक पहुँचने की कोशिश नहीं करते तो मैं उनके खिलाफ पार्टी के शीर्ष नेताओं से संपर्क करूँगा। मैं यह सुनिश्चित करने की कोशिश करूँगा कि अगली बार उन्हें पार्टी का टिकट न मिले।”

TMC सांसद डेरेक ओ ब्रायन ने साझा की लंच की तस्वीर

गौरतलब है कि पिछले दिनों वक्फ संशोधन विधेयक पारित होने के बाद बंगाल में कट्टरपंथी तत्वों ने जमकर उपद्रव मचाया था। इस दौरान हिंदुओं के घरों, दुकानों को निशाना बनाया गया था। उस समय युसूफ पठान ने इंस्टा पर फोटो डाली थी जिसमें उन्होंने चाय और शांत माहौल की तारीफ की थी।

फोटो साभार: इंस्टाग्राम

इसी हरकत पर सब उनपर भड़के हैं, मगर मालूम हो कि युसूफ पठान अकेले टीएमसी सांसद नहीं है जिन्होंने इस मामले में असंवेदनशीलता दिखाई हो। टीएमसी के सांसद डेरेक ओ ब्रायन ने भी 13 अप्रैल को अपने भोजन की तस्वीर सोशल मीडिया पर डाली थी और लोगों से पूछा था- “पालोंग साग (पालक)। टेंगरा माछ (कैटफ़िश) झाल। रविवार के लंच में आप क्या खा रहे हैं?”

डेरेक ओ ब्रायन के इस पोस्ट के बाद तमाम लोगों ने उनसे मुर्शिदाबाद हिंसा पर चुप रहने की वजह पूछी और उनकी हरकत की आलोचना की।

महाभारत के 5 गाँवों में जिसका जिक्र, वहाँ से मिलीं 4000 साल पुरानी चीजें: ASI को ताम्रपाषाण सभ्यता के मिले सबूत, सिनौली के पास ही हुई है खुदाई

उत्तर प्रदेश के बागपत में लगभग 4 हजार साल पुराने अवशेष खुदाई में मिले हैं। भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) ने बताया है कि यह अवशेष ताम्रपाषाण काल के हैं। ASI को बागपत में हुई इस खुदाई में जमीन में दबे मिट्टी और ताँबे के बर्तन, माला के मनके और नक्काशीदार वस्तुएँ मिली हैं। ASI को यह सफलता 4 महीने की मेहनत के बाद मिली है। यहाँ से मिली वस्तुएँ इस काल की सभ्यता समझने में और सहायक हो सकती हैं। अब इस मामले में और भी अनुसंधान किया जा रहा है।

ASI ने एक्स (पहले ट्विटर) पर एक पोस्ट में बताया, “बागपत के तिलवाड़ा में 4000 साल पुरानी सभ्यता, ताम्रपाषाण युग की धरोहरें मिलीं।”

संसद टीवी ने एक ट्वीट में इसी को लेकर बताया, “बागपत जिले के तिलवाड़ा साकिन में ताम्रपाषाण काल की वस्तुएँ मिली हैं, यानि लगभग 4000 वर्ष पुरानी। खुदाई में पुरातत्वशास्त्रियों को मिट्टी के बर्तन, तांबे की वस्तुएँ, ईंट और मनके मिले हैं। ताँबे के एक बड़े चौकोर टुकड़े पर ज्यामितीय आकृतियाँ उकेरी गई हैं।”

तिलवाड़ा में हुई खुदाई

यह खुदाई बागपत के तिलवाड़ा गाँव में हुई है। यह गाँव हरियाणा की सीमा पर है और राजधानी दिल्ली से लगभग 85 किलोमीटर दूर स्थित है। तिलवाड़ा गाँव में खुदाई की शुरुआत दिसम्बर, 2024 के दौरान चालू हुई थी। ASI ने अप्रैल 2025 तक यहाँ लगभग 18 गड्ढे बना कर खुदाई की। इसी में यह सारे अवशेष बरामद हुए हैं।

इस खुदाई में मिले अवशेष अब मेरठ ले जाए जा रहे हैं। वहाँ अब देश के नामी पुरातत्वविद इस पर अनुसंधान करने वाले हैं। इन अवशेषों को यहाँ से समेटने के पहले ASI ने इस पर शुरूआती जाँच की थी। इससे इस बात की पुष्टि हुई थी कि जहाँ खुदाई हुई है, वह लगभग 4 हजार साल पुराना एक शवाधान केंद्र था।

यहाँ ASI को एक ताबूतनुमा आकृति भी मिली है, इस पर नक्काशी उकेरी हुई है। ताबूत तांबे का बना हुआ था। उसका तांबा सुरक्षित नहीं रहा लेकिन नक्काशी अब भी मौजूद है। ASI इसे सबसे बड़ी खोज मानती है। इसी कथित ताबूत के साथ मिट्टी के बर्तन रखे हुए थे।

यह मिट्टी के बर्तन सुराही के आकार में हैं। इनके साथ पुरानी ईंटे मिली हैं। इन सबके अलावा बाकी जो बर्तन और बनावटें मिली हैं, उनसे स्पष्ट हुआ है कि यह क्षेत्र एक शवाधान केंद्र था। इतिहासकार मानते हैं कि यहाँ शव दबाए जाते थे। हालाँकि, यहाँ कोई मानव कंकाल नहीं मिला है।

ग्रामीणों को मिलना चालू हुए थे अवशेष

यहाँ खुदाई से पहले ग्रामीणों को अवशेष मिलना चालू हुए थे। यह अवशेष उन्होंने ASI को दिए थे। ASI के अधिकारियों को इसके चलते उत्सुकता जगी थी। उन्होंने यहाँ खुदाई की अनुमति माँगी थी। यह अनुमति 2023 में मिली थी। इसके बाद दिसम्बर, 2024 में काम चालू हुआ लेकिन होली के मौके पर रुक गया।

इसके बाद दोबारा काम चालू किया गया। तब अवशेष समेटे गए। दैनिक भास्कर की एक रिपोर्ट के अनुसार, तिलवाड़ा में यह खुदाई के 3 बीघे के खेत में हुई है। यह खेत एक श्मशान के पास मौजूद है। जहाँ खुदाई हुई है, यह खेत बाकी से लगभग 6 फीट ऊँचाई पर है। ASI को यहाँ बड़ी सफलता 18 में से 2 गड्ढों में ही मिली है।

सिनौली से नजदीक है यह गाँव

बागपत का यह तिलवाड़ा गाँव उस सिनौली के पास मौजूद है, जहाँ ASI को खुदाई में 100 से अधिक मानव कंकाल मिले थे। सिनौली में वर्ष 2005 में ASI के अधिकारी डॉ. डीबी शर्मा ने खुदाई शुरू कराई थी। सिनौली में जो कंकाल मिले थे, 3 हजार साल से अधिक पुराने थे।

सिर्फ शव ही नहीं यहाँ से रथ, मुकुट और बाकी बर्तन समेत हथियार भी मिले थे। सिनौली की सबसे बड़ी खोज रथ ही थी, इसने सिद्ध किया था कि भारत में 4 हजार वर्ष पूर्व भी राहत और युद्ध का प्रचलन था। इसे महाभारत से जोड़ कर भी देखा गया था।

गौरतलब है कि बागपत को भी महाभारत के उन पाँच गाँव में से माना जाता है, जो पांडवों ने बसाए थे। बागपत के अलावा सोनीपत, पानीपत, इन्द्रप्रस्थ और तलपत बताए गए हैं। तिलवाड़ा गाँव के रहने वाले पहले भी यहाँ से चीजें मिलने की बातें बताते हैं। अब पुरातत्व विज्ञानी इस मामले में और तथ्य निकालने की कोशिश कर रहे हैं।

‘EVM से छेड़छाड़ के लिए ₹10 लाख का ऑफर’: जिस पुलिस अधिकारी के बयान पर उछल रहा गिरोह वो चुनावी ड्यूटी पर था ही नहीं, किया जा चुका है निलंबित

एक बार फिर से गिरोह विशेष ने EVM में छेड़छाड़ का रोना शुरू कर दिया है। इस बार एक निलंबित पुलिस अधिकारी का बयान का हवाला देकर ऐसा किया जा रहा है। हालाँकि, चुनाव आयोग ने जब बयान जारी किया तो सच्चाई कुछ और ही निकली। ‘कॉन्ग्रेस टास्क फोर्स’ नामक सोशल मीडिया अभियान चलाने वाले अमित मयंक ने पुलिस अधिकारी रंजीत कासले के बयान का वीडियो शेयर करते हुए लिखा कि चुनावी ड्यूटी के दौरान उन्हें EVM से छेड़छाड़ और वोटिंग मशीनों को स्ट्रांग रूम से हटाने के लिए 10 लाख रुपए की पेशकश की गई।

पहले चुनाव आयोग ने साफ़ कर दिया था कि ये आरोप एक ऐसे पुलिस अधिकारी की तरफ से आए हैं जो पहले ही निलंबित और रुष्ट चल रहा है। इसके बावजूद भी ECI ने DM व SSP से इस मामले को लेकर रिपोर्ट तलब की। चुनाव आयोग कई बार बताता रहा है कि जिस प्रोटोकॉल और सख्ती के साथ EVM को स्ट्रॉन्ग रूम में रखा जाता है, उसके बाद उसे वहाँ से हटाने की कोई संभावना नहीं बनती। जाँच रिपोर्ट के बाद अब चुनाव आयोग ने साफ़ कर दिया है कि माजरा क्या है।

DEO (जिला चुनाव अधिकारी) और SSP (वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक) ने ये जानकारी दी है कि जो रंजीत कासले आरोप लगा रहा है कि उसे EVM को लेकर चुप रहने के लिए पैसे ऑफर किए गए, वो दरअसल महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव की ड्यूटी पर था ही नहीं। ये आरोप सार्वजनिक शांति व व्यवस्था को भंग करने की मंशा से लगाए गए हैं। रंजीत कासले के ख़िलाफ़ कार्रवाई करने के लिए भी वरीय अधिकारियों को निर्देशित किया गया है। मामला परली विधानसभा क्षेत्र का है।

बीड जिले के चुनाव अधिकारी द्वारा दिए गए बयान में बताया गया है कि 2024 के चुनाव वहाँ शांतिपूर्ण तरीके से संपन्न कराए गए। रंजीत कासले मुंबई पुलिस में सब-इंस्पेक्टर के पद पर हुआ करते थे। उनका आरोप है कि उन्हें स्ट्रॉन्ग रूम की सुरक्षा की ड्यूटी दी गई थी, लेकिन EVMs से छेड़छाड़ के लिए उन्हें वहाँ से हटा दिया गया। मतदान, स्ट्रॉन्ग रूम में EVMs का रखा जाना और मतगणना – पूरी चुनावी प्रक्रिया में रंजीत कासले को चुनावी ड्यूटी में तैनात किया ही नहीं किया गया।

परली से 2024 में NCP (जीत पवार गुट) के धनंजय मुंडे ने 1.40 लाख से भी अधिक वोटों से जीत दर्ज की। वो महाराष्ट्र सरकार में खाद्य, सिविल सप्लाइज एवं ग्राहक व्यवहार मंत्री भी हैं। उनकी जीत को धांधली बताते हुए रंजीत कासले ने कहा था, “मतगणना के लिए मुँह बंद रखने के लिए मेरे खाते में 10 लाख रुपए भेजे गए। मैंने इसमें से साढ़े 7 लाख रुपए वापस भेज दिए, बाकी मैंने खर्च किया। वाल्मीक कराड की ‘संत बालू मामा कंस्टक्शन कंपनी’ से ये फंड भेजा गया था।”

स्थानीय एसपी ने अपनी रिपोर्ट में इसकी पुष्टि की है। स्ट्रॉन्ग रूम के लिए त्रिस्तरीय सुरक्षा व्यवस्था लागू की गई थी – EVMs के पास केंद्रीय बलों को तैनात किया गया था, इमारत के चारों तरफ ‘स्टेट रिजर्व्ड पुलिस फ़ोर्स (SRPF)’ के जवान तैनात किए गए थे, और बाहरी घेरे में जिला की स्थानीय पुलिस थी। पहले दो लेयर की सिक्योरिटी में स्थानीय पुलिस की कोई भूमिका ही नहीं थी। उस दौरान रंजीत कासले की ड्यूटी बीड के साइबर पुलिस थाने में भी – जहाँ ऑनलाइन ठगी व अपराधों की शिकायतें दर्ज होती हैं।

साथ ही कहीं से भी EVM से छेड़छाड़ की कोई शिकायत किसी ने नहीं की। सभी उम्मीदवारों के प्रतिनिधियों व इलेक्शन ऑब्जर्वर की उपस्थिति में स्ट्रॉन्ग रूम को सील किया गया था। साथ ही CCTV कैमरे में सारी प्रक्रिया व 24 घंटे की गतिविधियाँ रिकॉर्ड की गई थीं। सभी दलों के उम्मीदवारों के प्रतिनिधियों के सामने ही ये कैमरे इनस्टॉल किए गए थे। रंजीत कासले एक अन्य अपराध के मामले में गिरफ़्तार भी किया जा चुका है। बता दें कि रंजीत कासले और भी अनर्गल बयान देता रहा है।

शुक्रवार (18 अप्रैल, 2025) को उसे पुणे से गिरफ़्तार किया गया। उसने दावा किया था कि उसे वाल्मीक कराड के एनकाउंटर के लिए ऑफर दिया गया था। वाल्मीक कराड NCP का कॉर्पोरेटर रहा है, साथ ही मस्साजोग के सरपंच संतोष देशमुख की हत्या का मुख्य अभियुक्त भी। रंजीत कासले ये सब बयान देकर बीड से फरार हो गया था। पुणे के स्वारगेट क्षेत्र में एक होटल में उसके रुकने की सूचना मिली, जिसके बाद छापेमारी करके उसे गिरफ़्तार किया गया।

बीड के प्रशासन ने भी बताया है कि सोशल मीडिया पर आधारहीन, लापरवाह और अनुचित बयानबाजी करना रंजीत कासले की आदत रही है। कई नेताओं और पुलिस अधिकारियों के विरुद्ध भी वो इस तरह की बयानबाजी कर चुका है। प्रशासन का कहना है कि न केवल व्यक्तिगत अनुशासन बल्कि सार्वजनिक व्यवस्था के लिए उसके ये बयान नुकसानदेह हैं। चुनावी प्रक्रिया को संदेह में डालने और पब्लिसिटी के लिए उसने इस तरह का बयान दिया, जो अब झूठा साबित हो चुका है।

‘जिन्हें बुर्के से समस्या नहीं, उन्हें जनेऊ से क्यों दिक्कत’: कर्नाटक में CET परीक्षा में हिंदू छात्रों के साथ भेदभाव देख BJP ने उठाए सवाल, बवाल के बाद कॉन्ग्रेस मंत्री ने जाँच के आदेश दिए

कर्नाटक के बेंगलुरु में ब्राह्मण लड़कों से ‘कॉमन एंट्रेंस एग्जाम’ के दौरान उनके जनेऊ उतरवाने का मामला अब तूल पकड़ चुका है। भाजपा नेताओं ने राज्य की कॉन्ग्रेस सरकार से सवाल किए हैं कि जब शैक्षणिक संस्थान में बुर्का पहनकर जाने से प्रशासन को समस्या नहीं है, तो फिर जनेऊ से क्या दिक्कत है। इन सवालों के उठाने के बाद खबर है कि शिक्षा मंत्री डॉक्टर एमसी सुधाकर ने इस घटना की निंदा करते हुए मामले की रिपोर्ट माँगी है।

उन्होंने कहा कि एग्जाम के प्रोटोकॉल में कहीं ऐसा नहीं है कि किसी बच्चे की जनेऊ उतरवानी पड़े। ऐसा पहले कभी भी नहीं हुआ है। इस मामले को गंभीरता से लेंगे। इसे स्वीकारेंगे बिलकुल नहीं। रिपोर्ट मिलने के बाद इस पर कार्रवाई होगी। मामले में बीदर और शिवमोग्गा के उप-आयुक्तों से रिपोर्ट माँगी गई है।

गौरतलब है कि 16 अप्रैल 2025 को कर्नाटक के शिवमोगा के स्फूर्ति कॉलेज में परीक्षा केंद्र पर स्क्रीनिंग कमेटी ने ब्राह्मण लड़के से जनेऊ उतारने को कहा और जब छात्र ने इससे इनकार किया तो उसे वापस भेज दिया गया। लड़के ने बताया कि ऐसा उसके साथ गणित परीक्षा वाले दिन हुआ जबकि इससे पहले वो दो परीक्षाएँ बिना समस्या के दे चुका था।

इसी प्रकार शिवमोग्गा के आदिचुंचनगिरी इंडिपेंडेंट पीयू कॉलेज परीक्षा केंद्र में तीन लड़कों को जनेऊ हटाने के लिए कहा गया। हालाँकि बाद में एक छात्र को जनेऊ के साथ एग्जाम लिखने की अनुमति दी गई, जबकि दो अन्य को ये अनुमति नहीं मिली।

इस घटना के बाद 17 अप्रैल को राज्य में हिंदू संगठनों द्वारा जमकर प्रदर्शन किए गए। कॉन्ग्रेस शासित सरकार और उनके प्रशासन पर सवाल उठाए गए। साथ ही मुख्यमंत्री सिद्धारमैया से इस मामले पर माफी की माँग की गई।

भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष बीवाई विजयेंद्र ने मुख्यमंत्री सिद्धारमैया से माफी माँगने की माँग करते हुए कहा, “कॉन्ग्रेस सरकार, जिसे बुर्का पहने छात्राओं से कोई समस्या नहीं थी, उसे हिंदू धर्म के पवित्र प्रतीक में खतरा नजर आ रहा है।” वहीं विपक्ष के नेता आर अशोक ने भी कहा कि जनेऊ का अपमान मराठा और वैश्य लोगों का भी अपमान है क्योंकि वो भी जनेऊ पहनते हैं।

अभी 10 साल कुर्सी पर रहेंगे PM मोदी, अगला चुनाव भी जीतेंगे, 90+ साल जिएँगे: जिन्होंने सबसे पहले देखी दिल्ली में केजरीवाल की हार, उनकी भविष्यवाणी

पत्रकार सुशांत सिन्हा ने अपने पॉडकास्ट में प्रसिद्ध एस्ट्रोलॉजर डॉ. विनय बजरंगी से पीएम नरेंद्र मोदी, राहुल गाँधी और दिल्ली के पूर्व सीएम अरविंद केजरीवाल के भविष्य को लेकर सवाल किए। डॉ. विनय ने इन तीनों के लेकर कई बड़ी बातें कही। विनय का दावा है कि नरेंद्र मोदी अगले चुनाव में भी प्रधानमंत्री के पद पर बने रहेंगे। वहीं, उनका मानना है कि अरविंद केजरीवाल अगले 6-7 वर्षों तक भी राजनीतिक जीवन में बड़ी भूमिका से दूर होंगे।

सुशांत सिन्हा के पॉडकास्ट में ही डॉ विनय बजरंगी ने पहले ही भविष्यवाणी की थी कि अरविंद केजरीवाल दिल्ली के चुनाव में हारेंगे। अब एक नए पॉडकास्ट में उन्होंने ये दावा किया है कि अगले 8 वर्षों तक दिल्ली की राजनीति में वह सक्रिय नहीं हो पाएँगे। साथ ही वह दोबारा जेल जा सकते हैं। इसके अलावा उन्होंने दिल्ली की वर्तमान सीएम रेखा गुप्ता के कार्यकाल के बेहतर होने का भी दावा किया है।

इस पॉडकास्ट में पीएम नरेंद्र मोदी के भविष्य पर सुशांत ने सवाल किया। इस पर डॉ. विनय ने बताया कि वह अगले चुनाव में भी पीएम बनकर ही वापसी करेंगे। साथ ही अपने जीवन में 90 की आयु भी पार करेंगे। वक्फ बिल के भविष्य को लेकर सुशांत ने डॉ. विनय से सवाल किया। इसके उत्तर में डॉ. विनय ने कहा कि अभी जो इसके विरोध में हैं, 6 माह बाद उनके इसके पक्ष में आने के संकेत हैं।

सुशांत ने मोदी के बाद अगले पीएम के रूप में योगी या अमित शाह के होने पर सवाल किया तो डॉ. विनय का कहना था कि योगी आदित्यनाथ पीएम की कुर्सी तक पहुँच सकते हैं। उनका मानना है कि अमित शाह ऊँचाई तक तो जाएँगे लेकिन कुछ परेशानियाँ लगातार बनी रहेंगी। वहीं, राहुल गाँधी के कभी प्रधानमंत्री की कुर्सी तक पहुँचने के सवाल पर ज्योतिषाचार्य विनय बजरंगी का कहना था कि राहुल की कुंडली में सशक्त योग है लेकिन उनकी सोच के आधार पर वह बोल नहीं पाते। अपनी सोच और समझ बढ़ाकर वह राजनीति में एक बेहतर स्थिति तक पहुँच सकते हैं।

राहुल गाँधी के राजनीति में न होकर किसी अन्य करियर में जाने के सवाल पर ज्योतिषाचार्य का कहना है कि रेंटल और जमीन के व्यवसाय में बेहतर स्थिति में हो सकते थे।

विनय बजरंगी भारत के नामी ज्योतिषाचार्यों में एक हैं। सिविल इंजीनियरिंग में परास्नातक के बाद उन्होंने वैदिक एस्ट्रोलॉजी और वेस्टर्न एस्ट्रोलॉजी में PhD की है। उनके पास 25 वर्षों का ज्योतिष का अनुभव है। कुछ समय पहले भी वह सुशांत के पॉडकास्ट में आ चुके हैं।

चू%या, संस्कार के सरगना, आलसी, शास्त्रों के पीछे छिपने वाले… ब्राह्मणों पर पेशाब करने का ऐलान करने वाले अनुराग कश्यप बोले – नहीं वापस लूँगा अपनी बात

फ़िल्म अभिनेता अनुराग कश्यप ने इंस्टाग्राम पर एक कमेंट में ब्राह्मणों के ऊपर पेशाब करने की बात कही थी, अब उन्होंने माफ़ी तो माँगी है लेकिन इस कथित माफ़ी के नाम पर भी अपने ही घृणा भरे एजेंडे को आगे बढ़ाया है। बता दें कि महाराष्ट्र के ज्योतिबा फुले और सावित्रीबाई फुले के जीवन पर बनी फिल्म ‘फुले’ की रिलीज में देरी को लेकर सेंसर बोर्ड पर भी वो बरसे थे। साथ ही फ़िल्म में हिन्दू धर्म के नकारात्मक चित्रण को लेकर विरोध का गुस्सा उन्होंने ब्राह्मणों पर भद्दी टिप्पणी करके निकाला था।

अनुराग कश्यप को एक यूजर ने लिखा था कि ब्राह्मण से तुम्हारी जितनी सुलगेगी, उतनी सुलगाएँगे। इसी कमेंट का रिप्लाई देते हुए उन्होंने एक पूरे समुदाय पर टिप्पणी कर डाली। बाद में उन्होंने उस कमेंट का स्क्रीनशॉट इंस्टाग्राम पर डालते हुए ब्राह्मणों पर सारा जीवन शास्त्रों के पीछे छिपने का आरोप लगाया और अलसी बताया। उन्होंने ब्राह्मणों के लिए ‘चू%या’ शब्द का इस्तेमाल करते हुए कहा कि ये लोग सारी ज़िंदगी दूसरों को नीचा दिखाकर ख़ुद को बड़ा बोलते हैं। अनुराग कश्यप को लोग इन टिप्पणियों के बाद सनकी बता रहे हैं।

इंस्टाग्राम पर अनुराग कश्यप दिखा रहे अपनी सनक

अब आते हैं अनुराग कश्यप द्वारा इंस्टाग्राम पर लगाई गई उस स्टोरी पर, जिसे उनका ‘माफ़ीनामा’ बताया जा रहा है। उन्होंने लिखा कि ये उनका ‘माफ़ीनामा’ है, उस पोस्ट के लिए नहीं बल्कि उस एक पंक्ति के लिए जिसे संदर्भ के बिना लिया जा रहा है और घृणा का प्रसार किया जा रहा है। उन्होंने इस कमेंट्स में एक बार फिर ब्राह्मणों के लिए अप्रत्यक्ष रूप से ‘संस्कार के सरगना’ बताते हुए कहा कि किसी कमेंट के कारण उनके द्वारा किसी की बेटी को बलात्कार की धमकियाँ नहीं मिलनी चाहिए।

‘विक्टिम कार्ड’ खेलते हुए अनुराग कश्यप ने अपने परिवार और साथियों को धमकियाँ मिलने का बहाना बनाया। उन्होंने ऐलान किया, “कही हुई बात वापस नहीं ली जा सकती और मैं लूँगा भी नहीं, जो गाली देना है दो। मेरे परिवार ने न कुछ कहा है और न कहता है। इसीलिए, अगर मुझसे माफ़ी चाहिए तो ले लो। लेकिन, महिलाओं को बख़्श दो ब्राह्मण लोगों। इतना संस्कार तो शास्त्रों में भी है, सिर्फ़ मनुवाद में नहीं है। आप कौन से ब्राह्मण हो तय कर लो, बाकी मेरी तरफ से माफ़ी।”

बता दें कि अनुराग कश्यप बॉलीवुड में ‘देव डी’ (2009), ‘गैंग्स ऑफ वासेपुर’ (2012) और ‘मुक्केबाज’ (2018) जैसी फ़िल्मों के लिए जाने जाते हैं। अब वो दक्षिण भारत में अभिनय में हाथ आजमा रहे हैं। वो 2024 में ‘महाराजा’ नामक थ्रिलर फ़िल्म में अभिनय करते हुए दिखाई दिए थे, अब वो कन्नड़ फ़िल्म ‘8’ में अभिनय कर रहे हैं। बताया जाता है कि उन्होंने मुंबई छोड़ दी है। उनका कहना है कि यहाँ प्रतिभा का सम्मान नहीं है। हाल ही में उन्होंने अपने पास काम न होने की चर्चा को अफवाह बताते हुए दावा किया था कि वो शाहरुख़ खान से भी अधिक व्यस्त हैं।

गुरुग्राम में 7.5 एकड़, बीकानेर में 275 बीघा, फरीदाबाद में 531 एकड़, गौतम बुद्ध नगर में 12 एकड़… रॉबर्ट वाड्रा के ख़िलाफ़ ED की 3 चार्जशीट तैयार

हाल ही में ‘नेशनल हेराल्ड’ मामले में ED ने चार्जशीट दायर की, जिसमें सोनिया गाँधी और राहुल गाँधी के नाम हैं। अब रॉबर्ट वाड्रा के ख़िलाफ़ ED ने शिकंजा कसना शुरू कर दिया है। लगातार 3 दिन उनसे कुल 16 घंटे की पूछताछ हुई। अब ख़बर आ रही है कि प्रवर्तन निदेशालय ने उनके ख़िलाफ़ 3 चार्जशीट तैयार करके रखी हुई है। ये तीनों मामले मनी लॉन्ड्रिंग के हैं। चार्जशीट दायर किए जाने के साथ ही इन तीनों मामलों में रॉबर्ट वाड्रा के ख़िलाफ़ आरोप तय करने का रास्ता भी साफ़ हो जाएगा।

संजय भंडारी के साथ रॉबर्ट वाड्रा के संबंध

दो अन्य मामले भगोड़े हथियार कारोबारी संजय भंडारी के साथ उनके संबंधों से जुड़े हुए हैं। उसने रक्षा समझौतों के जरिए लंदन में अकूत संपत्ति जमा की। बीकानेर में एक जमीन के मामले में मनी लॉन्ड्रिंग के आरोप भी इन दोनों पर हैं। उधर सोनिया-राहुल के ख़िलाफ़ ED ने हाल ही में चार्जशीट दायर की। आरोप है कि उन्होंने YIL (यंग इंडिया लिमिटेड) के जरिए AJL (एसोसिएटेड जर्नल लिमिटेड) की 5000 करोड़ रुपए की संपत्ति हड़प ली। YIL में 76% शेयर सोनिया-राहुल के हैं, मोतीलाल वोरा और ऑस्कर फर्नांडिस के निधन के बाद बाकी के 24% शेयरों के मालिक भी यही लोग हो गए।

‘नेशनल हेराल्ड’ अख़बार चलाने वाली कंपनी AJL को कॉन्ग्रेस पार्टी ने 90 लाख का ऋण दिया था। AJL ने 50 लाख रुपए देकर उसकी सारी संपत्तियों पर कब्ज़ा कर लिया। उधर रॉबर्ट वाड्रा पर गुरुग्राम में 7.5 करोड़ रुपए की जमीन ख़रीद कर 58 करोड़ रुपए में बेचने के आरोप हैं। CC थम्पी और संजय भंडारी के साथ मिलकर उनपर मनी लॉन्ड्रिंग का आरोप है। स्विट्जरलैंड की कंपनी Pilatus से 75 ट्रेनर एयरक्राफ्ट की ख़रीद में इन दोनों ने पैसे कमाए थे। ED ने पूरे मनी ट्रेल का विवरण तैयार किया है।

बीकानेर, फरीदाबाद और गौतम बुद्ध नगर में भी ख़रीदी ज़मीन

संजय भंडारी की दुबई स्थित कंपनी के खाते में दलाली की 310 करोड़ रुपए की रकम भेजी गई। इस कंपनी का नाम ‘ऑफसेट इंडिया सोलूशन्स FZC’ है। इन रुपयों का बाद में दुबई व लंदन में संपत्ति ख़रीदने के लिए इस्तेमाल किया गया। ED ने 150 करोड़ रुपयों का पता लगाया और संजय भंडारी की 26 करोड़ रुपए की संपत्तियाँ जब्त की। लंदन में संजय भंडारी द्वारा ख़रीदी गई संपत्तियों से रॉबर्ट वाड्रा के भी तार जुड़े। एक अन्य मामला बीकानेर लैंड डील का भी है।

राजस्थान के बीकानेर में रॉबर्ट वाड्रा ने विस्थापितों के लिए जमीन ख़रीदने का दावा किया। बताया जाता है कि इसके लिए उन्होंने अपने सहयोगियों के माध्यम से फ़र्ज़ी प्रमाण-पत्रों का सहारा लिया। उनकी कंपनी ‘Skylight Hospitality’ के माध्यम से 275 बीघा जमीन ख़रीदी गई। मात्र 72 लाख रुपए में इन जमीनों को ख़रीद कर इन्हें 5.20 करोड़ रुपए में बेचा गया। एक अन्य मामले में प्रियंका गाँधी भी आरोपित हैं, जिसमें 21 नवंबर, 2023 को सप्लीमेंट्री चार्जशीट दायर की जा चुकी है।

रॉबर्ट वाड्रा, प्रियंका गाँधी और CC थम्पी ने मिलकर हरियाणा के फरीदाबाद में 2005-08 के बीच रिटेलर HL पाहवा से 531 एकड़ ज़मीन ख़रीदी। उत्तर प्रदेश के गौतम बुद्ध नगर में 12 एकड़ ज़मीन ख़रीद के एक मामले में भी वाड्रा और थम्पी के विरुद्ध जाँच चल रही है। तीनों ने मिलकर उस ज़मीन को वापस पाहवा को बेचा, फिर पाहवा ने उस ज़मीन को DLF को बेच दिया। 22 दिसंबर, 2023 को जब कोर्ट ने चारजधीत का संज्ञान लेकर आरोप तय करने शुरू किए, तब रॉबर्ट वाड्रा और प्रियंका गाँधी इस मामले में आरोपित नहीं थे।

हिन्दू मृतकों को ठीक से अंतिम संस्कार भी नसीब नहीं, आतंकी के जनाजे में 2 लाख की भीड़: मुर्शिदाबाद के ब्राह्मण-नाई हों या सीलमपुर के गिहारा, ‘उनके’ लिए सब एक

भारत एक धर्मनिरपेक्ष राष्ट्र है, आम बोलचाल में इसका अंग्रेजी अनुवाद आजकल अधिक इस्तेमाल में आता है – सेक्युलर। आपातकाल के दौरान 1976 में संविधान के 42वें संशोधन के दौरान Secularism शब्द को भारतीय संविधान की प्रस्तावना में भी घुसा दिया गया। बड़ी बात ये है कि संसद के दोनों सदनों में घंटों की बहस के बाद जो क़ानून बनता है उसे इस देश में न्यायिक समीक्षा से गुजरना पड़ता है, लेकिन आपातकाल के दौरान बने क़ानून उसके बाद भी लागू रहते हैं।

तो, आइए एक ताज़ा घटना से समझते हैं कि भारत में सेक्युलरिज्म क्या है। हाल ही में पश्चिम बंगाल के मुर्शिदाबाद में मुस्लिम भीड़ सड़कों पर निकली। कारण – दिल्ली में महीनों तक चली प्रक्रिया के बाद एक क़ानून पारित किया गया – वक़्फ़ बोर्ड संशोधन का। JPC (संयुक्त संसदीय समिति) की दर्जनों बैठकों और सैकड़ों हितधारकों से चर्चा के बाद सांसदों ने बहुमत से इस अधिनियम को पारित किया, राष्ट्रपति ने इसपर हस्ताक्षर किया। इसके बाद मामला सुप्रीम कोर्ट में गया, जहाँ सरकार से सवाल-जवाब हो रहे हैं। क़ानून के प्रावधानों पर रोक लगी हुई है।

वक़्फ़ के नाम पर मुर्शिदाबाद में हिन्दुओं पर अत्याचार

सरकार ने चीख-चीख कर समझाया कि कैसे ये क़ानून भारतीय मुस्लिमों के हित में है। खैर, तो हम बात कर रहे थे मुर्शिदाबाद की घटना की। 5000 की भीड़ ने बाहर निकलकर रेलवे सेवा ठप्प कर दी। सड़क पर सार्वजनिक वाहनों को आग के हवाले कर दिया गया। बसें धू-धू कर जलीं। पुलिस वालों ने मस्जिद में छिपकर जान बचाई। हिन्दुओं की दुकानों को चुन-चुनकर निशाना बनाया गया। 400 हिन्दुओं ने पलायन कर मालदा में शरण ली। इसी बीच हिन्दू देवी-देवताओं की मूर्तियाँ गढ़ने वाले हरगोविंद दास और चंदन दास को घर में घुसकर काट डाला गया।

हमने उस घर की महिलाओं का आर्तनाद सुना, मासूम बच्चों को बेबस होकर ताकते हुए देखा, पिता-पुत्र की क्षत-विक्षत लाशें देखीं। एक बुजुर्ग महिला को देखा, जिसकी माँग और कोख एक साथ सूनी कर दी गई। मेनस्ट्रीम मीडिया ने इस हिंसा की कवरेज के लिए स्टार एंकरों को नहीं भेजा, बात-बार पर कोर्ट जाने वाले गिरोहों ने चुप्पी साध ली और बात-बात पर विरोध प्रदर्शन करने वाले समूह बिल में घुसे रहे। हिन्दुओं की जान की शायद कोई क़ीमत नहीं है, ख़ासकर जब हिंसा मुस्लिम भीड़ ने की हो।

मृत शरीर के भी कुछ अधिकार होते हैं, सम्मानजनक अंतिम संस्कार के। दुर्भाग्य से, भारत देश में ये आतंकियों को तो सहज उपलब्ध है लेकिन बेचारे हिन्दुओं को नहीं। आज अगर एक आतंकी की लाश को दफनाने की जगह जला दिया जाए तो कल को सुप्रीम कोर्ट से गिरोह विशेष कोई नया फ़ैसला लेकर आ जाएगा। ये तो ऐसा देश है जहाँ हिन्दुओं का नरसंहार करने वाले मुग़ल बादशाह औरंगज़ेब की कब्र को बचाने के लिए भी हिंसा होती है। हरगोविंद दास और चंदन दास के लिए कोई सड़क पर नहीं आता।

हिन्दू पिता-पुत्र को अंतिम संस्कार तक नसीब नहीं

अब तज़ा ख़बर ये है कि इन पिता-पुत्र को मृत्यु के बाद सम्मानजनक अंतिम संस्कार भी उपलब्ध नहीं हुआ। कारण – जो मुस्लिम भीड़ तलवारों, चाकुओं, लाठी-डंडों, पत्थरों और देशी बमों से लैस थी, उसे न केवल पश्चिम बंगाल की TMC सरकार का वरदहस्त प्राप्त है बल्कि जो स्थानीय हिन्दू हैं वो भी डरे हुए हैं। क्या सामान्य वर्ग, क्या OBC और क्या दलित – मुस्लिम भीड़ से सबको पलायन के लिए मज़बूर होना पड़ा है। पीड़ितों में अधिकतर दलित ही हैं।

उनके परिवार के 13 सदस्यों ने भागकर झारखंड के राजमहल में शरण ली। जिसने भी 500 दंगाइयों द्वारा 2 निर्दोष व्यक्तियों को बेरहमी से काटे जाने का मंजर देखा होगा, वो ख़ौफ़ में आएगा ही। क्या आपको पता है, दोनों के अंतिम संस्कार में न पुरोहित आए और न नाई। भारत में हर आयोजन की ऐसी व्यवस्था की गई है जहाँ समाज का कोई भी वर्ग भूखा न मरे। छठ में हम उस डोम समाज से बाँस के पात्र ख़रीदते हैं, जो समाज के सबसे निचले पायदान पर है। रुद्राभिषेक से लेकर लखराँव तक जैसे आयोजनों में फूल माली समाज के हाथ का ही शुद्ध माना गया है।

ठीक इसी तरह, अंतिम संस्कार में ब्राह्मणों द्वारा श्राद्धकर्म संपन्न कराए जाने की प्रक्रिया है। नाई को बुलाया जाता है, जो मृत शरीर का मुंडन करता है। हरगोविंद दास और चंदन दास के अंतिम संस्कार में न कोई पुरोहित आया और न कोई नाई। पुरोहित सामान्य वर्ग में आता है, नाई OBC में। मुस्लिम भीड़ से हिन्दुओं के हर वर्ग को भय है। वो किसी को दलित जानकार छोड़ते नहीं, उनके लिए सारे ग़ैर-मुस्लिम काफिर हैं। अंतर इतना है कि इन दलितों के लिए देश में ख़ुद को पिछड़ों का ठेकेदार बताने वाला समूह कोई आवाज़ नहीं उठाता।

ब्राह्मण, नाई गिहारा… मुस्लिम भीड़ के लिए सब एक

ब्राह्मणों ने इसे पुलिस से जुड़ा मामला बताया तो नाइयों ने सामान न होने की बात कहकर टाल दिया। कारण – मुस्लिम भीड़ का ख़ौफ़। मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने 10 लाख रुपए की क़ीमत लगाई इनकी जान की, लेकिन परिवार ने इसे ठुकरा दिया। परिवार को न्याय चाहिए। हिन्दुओं की सुरक्षा के लिए BSF इलाक़े में तैनात है, लेकिन न्याय कौन दिलाएगा? दोषियों को सज़ा कैसे मिलेगी? वो हमेशा हजारों की भीड़ में निकलते हैं, वो वोट बैंक हैं। ब्राह्मण या नाई वोट बैंक थोड़े हैं!

हाल की ही एक और घटना है – दिल्ली के सीलमपुर में गिहारा समाज से आने वाले कुणाल नामक नाबालिग लड़के को चाकुओं से गोदकर मार डाला गया। 17 साल के कुणाल के हत्यारे मुस्लिम हैं, इसीलिए किसी भी पिछड़ों के ठेकेदार ने कोई आवाज़ नहीं उठाई। ST समाज से आता है परिवार, राहुल गाँधी या अखिलेश यादव की तरफ से कोई पोस्ट नहीं आया। जिनलोगों ने राष्ट्रपति दौपदी मुर्मू के ST होने व महिला होने का सर्टिफिकेट रद्द कर रखा है, वो भला कुणाल के लिए क्या न्याय माँगेंगे।

मुर्शिदाबाद का ब्राह्मण और नाई हो या फिर सीलमपुर का गिहारा, मुस्लिम भीड़ की हिंसा में सब समान रूप से निशाना बनाए जाते हैं और कोई इनके लिए आवाज़ भी नहीं उठाता। कश्मीर से पंडितों का पलायन हुआ, पश्चिम बंगाल में दलितों का हो रहा है। बांग्लादेश में तख्तापलट के बाद जिन हिन्दुओं को निशाना बनाया गया, वो भी दलित ही थे। गाज़ा के लिए चिंतित समूह पड़ोस में बांग्लादेशी हिन्दुओं के लिए चूँ तक न कर पाया। कुछ तो मजबूरियाँ रही होंगी। कुछ तो मजबूरियाँ हैं कि हिन्दुओं को अंतिम संस्कार तक ठीक से नसीब नहीं होता।

आतंकी बुरहान वानी के जनाजे में जुटे थे 2 लाख

जिस जम्मू कश्मीर से हिन्दुओं को भगाया गया, वहाँ बुरहान वानी नामक एक आतंकी मारा जाता है तो उसका जनाजे में 2 लाख मुस्लिम जमा होते हैं। उसे कश्मीर का ‘भगत सिंह’ बताकर बलिदानी क्रांतिकारियों का अपमान किया जाता है। 9 जुलाई, 2016 की वो तस्वीरें देखिए, क्या बच्चे, क्या बूढ़े, क्या महिलाएँ और क्या बुजुर्ग – सब के सब उसमें आपको शामिल दिखेंगे। पुलवामा के त्राल का आसमान उस दिन भीड़ की ‘आमीन-आमीन’ की आवाजों से गूँज रहा था।

उसके जनाजे में दूर-दूर से आए लोगों के लिए खाने-पीने की भी व्यवस्था थी। पके हुए चावल, पानी के बोतल और बिस्किट बाँटे जा रहे थे। वहाँ जुटे ‘भारतीय’ मुस्लिम कह रहे थे कि अब सैकड़ों की संख्या में लड़के हथियार उठाकर कश्मीर को ‘आज़ाद’ करेंगे। जम्मू कश्मीर में जगह-जगह सुरक्षा बलों से मुस्लिमों की झड़पें हुईं। उस भीड़ में शामिल कितने लोगों को सज़ा मिली? ये संभव ही नहीं है। तभी तो कभी नागपुर, कभी महू तो कभी मुर्शिदाबाद में ये भीड़ निकलकर हिन्दुओं का क़त्लेआम मचाती है और उन्हें अंतिम संस्कार तक नसीब नहीं होता।