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जापान: अकेलेपन से जूझ रहे लोगों के लिए बनाया Loneliness मंत्रालय, जानिए क्यों पड़ी इसकी जरूरत

ग्यारह सालों में पहली बार जापान में सुसाइड के मामले बढ़ने लगे हैं। ऐसे में, सरकार ने इस मुसीबत से निपटने के लिए एक ‘Minister of Loneliness’ (अकेलेपन को दूर करने के लिए एक मंत्री) को नियुक्त किया है। ये मिनिस्टर न केवल स्थानीय लोगों के अकेलेपन को दूर करने के तरीकों पर काम करेगा बल्कि सामाजिक अलगाव कम करना भी इसी की जिम्मेदारी होगी।

जापान टाइम्स की रिपोर्ट के अनुसार, प्रधानमंत्री योशिहिदे सुगा (Yoshihide Suga) ने टेटूसि सकामोटो (Tetsushi Sakamoto ) को ‘लोनलीनेस मिनिस्टर’ के रूप में नियुक्त किया। सकामोटो पहले से ही जापान में घटती जन्म दर पर काम करने में लगे थे और क्षेत्रीय पुनरोद्धार को बढ़ावा दे रहे थे।

12 फरवरी को एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में पीएम सुगा ने सकामोटो को नियुक्त करते हुए कहा, “पुरुषों के मुकाबले महिलाएँ अकेलेपन से ज्यादा जूझ रही हैं और इसलिए आत्महत्या के आँकड़े बढ़ रहे हैं। मुझे उम्मीद है कि अब इन परेशानियों को पहचानेंगे और बड़े पैमाने पर नीतिगत उपायों को बढ़ावा देंगे।”

जापान में अकेलेपन का इतिहास

जापान में लोगों के लिए अकेलापन एक बहुत बड़ी समस्या रही है। इसे ‘Hikikomoi’ के साथ डिस्कस किया जाता रहा है, जिसका मतलब होता है बहुत बड़े स्तर पर सामाजिक अलगाव। कई बार इससे निपटने की कोशिशें हुईं। जैसे इंजिनियर्स ने रोबोट बनाए जो किसी का हाथ पकड़ने में समर्थ थे ताकि इंसान को अकेले होते हुए भी अकेलापन महसूस न हो। इसके अलावा, ऐसी व्यवस्थाएँ चालू की गईं जहाँ लोगों को साथ देने के लिए पैसे लिए जाते। गले लगने के साथ दोस्त,ब्वॉयफ्रेंड/ गर्लफ्रेंड भी पैसों के बदले लेने की सर्विस जापान में है।

रिपोर्ट के अनुसार, जापान में महामारी के दौरान ये समस्या बढ़ी जब लोग सामाजिक तौर पर अधिक अलग हो गए। इसी के बाद 11 वर्षों में सुसाइड केसों में बढ़त पहली बार दर्ज किया गया।

कोरोना के दौरान जब लोग पहले से ज्यादा एक दूसरे से अलग अलग रहने लगे तो जापान में सुसाइड केसों में बढ़ौतरी देखी गई। जापान टाइम्स के अनुसार, केवल साल 2020 में 20, 919 लोगों ने आत्महत्या की। ये आँकड़ा पिछले साल के मुकाबले 750 ज्यादा थे। इनमें युवा लोग और महिलाएँ बहुत ज्यादा थी। अकेले अक्टूबर में जापान में  879 महिलाओं की मौत हुई जो 2019 की तुलना में 70% अधिक थी।

जापान में आत्महत्या का अध्ययन करने वाली एक प्रोफेसर मिचिको उएदा का इस पर कहना है कि कई महिलाएँ अकेले रह रही हैं, और बड़ी संख्या में उनके पास स्थिर रोजगार नहीं है। इसलिए जब भी कुछ होता है तो वह उन्हें बहुत बुरी तरह चोट पहुँचाता है।

अकेलापन एक विश्वव्यापी मसला है

जापान अकेला देश नहीं है जो अकेलेपन से लड़ रहा है। साल 2017 की रेड क्रॉड रिपोर्ट बताती है कि  ब्रिटेन में 9 मिलियन लोग इस समस्या से जूझ रहे थे या इससे हार मान चुके थे। इस स्टडी के रिलीज होने के बाद यूके पहला ऐसा देश बना था जिसने लोनलीनेस मिनिस्टर का कॉन्सेप्ट अपनाया था।

इस पर रमोना हर्डमैन ने कहा था कि अकेलापन ऐसी अनचाही भावना है और एक ऐसा अनुभव है जिसके नतीजे खराब स्वास्थ्य के परिणाम देते हैं। इसी प्रकार  2018 की रिपोर्ट में, वैश्विक स्वास्थ्य संगठन Cigna ने कहा कि अकेलापन मृत्यु दर पर उतना ही प्रभाव डालता है जितना कि एक दिन में 15 सिगरेट पीने से। यह मोटापे से भी अधिक खतरनाक है।

UP पुलिस की गाड़ी में बैठने से साफ मुकर गया हाथरस में दंगे भड़काने की साजिश रचने वाला PFI सदस्य रऊफ शरीफ

उत्तर प्रदेश पुलिस की जीप में बैठना अपराधियों के लिए किसी खतरे की घंटी से कम नहीं है। उत्तर प्रदेश पुलिस का बदमाशों और अपराधियों में खौफ इस कदर कायम है कि हाथरस कांड की आड़ में दंगे भड़काने की साजिश रचने वाले पॉपुलर फ्रंट ऑफ इंडिया (PFI) की छात्र विंग कैंपस फ्रंट ऑफ इंडिया(CFI) के महासचिव रऊफ शरीफ ने मेडिकल जाँच कराने के लिए ले जा रही STF टीम से गाड़ी में बैठने से साफ मना कर दिया।

रिपोर्ट्स के मुताबिक, STF की टीम पाँच दिन की पुलिस रिमांड पूरी होने के बाद आरोपित रऊफ को मेडिकल करवाने के लिए ले जा रही थी, लेकिन जैसे ही टीम ने उसे गाड़ी में बैठने की कोशिश की उसने तुरंत बैठने से मना कर दिया और गाड़ी से नहीं जाने की जिद्द पर अड़ गया।

बता दें, हालही रऊफ शरीफ को एसटीएफ की टीम मथुरा लेकर पहुँची थी। 18 फरवरी को एडीजे प्रथम कोर्ट की अनुमति मिलने के बाद एसटीएफ की टीम ने आरोपी को पाँच दिन की पुलिस अभिरक्षा में रखा था। 5 दिन बाद यानी मंगलवार को रउफ की कोर्ट में पेशी थी। जिसके लिए एसटीएफ को उसका मेडिकल जाँच करवाना था। फिर क्या, जैसे ही सोमवार की रात पुलिस ने उसे गाड़ी में बैठाया वह फौरन उतर गया, और पुलिस की गाड़ी से नहीं जाने पर तूल गया।

रिपोर्ट्स के अनुसार, काफी समझने बुझाने और कड़ी मशक्कत के बाद रउफ ने पुलिस की बात मानी और सरकारी अस्पताल जाने के लिए सरकारी पुलिस की गाड़ी में बैठने से माना। जिसके बाद अगले दिन सुबह अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश न्यायालय प्रथम अनिल कुमार पांडेय की अदालत पेश किया गया। जहाँ से उसे न्यायिक हिरासत के तहत जेल में डाल दिया गया।

पुलिस ने हाथरस के बहुचर्चित किशोरी हत्याकांड को लेकर सांप्रदायिकता फैलाने के आरोप में गिरफ्तार रउफ से की गई 5 दिन की पूछताछ में कई अहम जानकारियाँ हासिल की है। आरोपित की निशादेही पर एसटीएफ ने राम मंदिर और बाबरी मस्जिद को लेकर भड़काऊ पोस्टर और पर्चे बरामद किए हैं। संगठन के नेटवर्क के संबंध में भी एसटीएफ को कई अहम जानकारी एसटीएफ के हाथ लगी हैं। उसने प्रदेश में सक्रिय संगठन के सदस्यों के नाम भी बताए हैं। एसटीएफ मामले में आगे की जाँच में जुटी हैं।

गौरतलब है कि रउफ को केरल एयरपोर्ट से गिरफ्तार किया गया था। उस पर यूपी के हाथरस में दंगे की साजिश रचने और विदेशी फंडिंग जुटाने का आरोप है। यूपी में CAA और NRC के दौरान भड़के दंगों में भी उसकी भूमिका संदिग्ध रही है।

हाथरस मामले में जमकर हो रही राजनीति के दौरान मथुरा जाते समय PFI के चार सदस्य सिद्दीक कप्पन, अतीकुर्रहमान, आलम और मसूद को गिरफ्तार किया गया था। पूछताछ के बाद यह खुलासा हुआ कि उनकी हाथरस में दंगा फैलाने की साजिश थी। साथ ही रऊफ शरीफ का नाम सामने आया था। इसके बाद यूपी पुलिस ने प्रोडक्शन वारंट के लिए आवेदन किया था।

हाथरस मामले में जाँच कर रही पुलिस को पता चला था कि दंगे भड़काने के लिए PFI के सदस्य कप्पन और उसके साथियों को पार्टी के वरिष्ठ पदाधिकारी रऊफ शरीफ व पी.कोया द्वारा फंडिंग की गई थी। आरोपितों को 1.36 करोड़ रुपए ओमान व कतर में बैठे पीएफआइ सदस्यों के जरिये रउफ तक पहुँचाई गई थी।

UP: भीम सेना प्रमुख ने CM आदित्यनाथ, उन्नाव पुलिस के खिलाफ SC/ST एक्ट के तहत दर्ज की FIR

उन्नाव पुलिस ने तीन दलित लड़कियों को जहर दिए जाने वाली खबर पर फर्जी खबर फैलाने के आरोप में 21 फरवरी को आठ ट्विटर अकाउंट पर एफआईआर दर्ज की गई थी। इस एफआईआर में बरखा दत्त की ‘द मोजो स्टोरी’ और भीम सेना प्रमुख नवाब सतपाल तंवर के चैनल का भी नाम है। बता दें कि तीन लड़कियों में से दो की मौत हो गई, जबकि तीसरी बहन की हालत गंभीर बनी हुई थी। उसे फ़ौरन अस्पताल में भर्ती किया गया और आज ही उसे होश आया है।

अब इस एफआईआर के जवाब में, भीम सेना प्रमुख ने उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ, उन्नाव के पुलिस अधीक्षक, अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक, डीएसपी सिटी और पुलिस स्टेशन कोतवाली सदर प्रभारी पर गुरुग्राम में एससी/एसटी एक्ट के तहत जवाबी शिकायत दर्ज करवाई है।

नवाब सतपाल तंवर ने ट्विटर पर शिकायत की कॉपी शेयर करते हुए लिखा, “माननीय CM योगी जी, उन्नाव SP, ASP, DSP City, SO कोतवाली सदर प्रभारी पर गुरुग्राम में SC/ST ACT के तहत शिकायत दर्ज। आप कानून का दुरुपयोग करो साहब। हम कानून का सदुपयोग करेंगे, क्योंकि हम हैं कानून रक्षक, संविधान रक्षक भीम सैनिक उन्नाव में हमारे खिलाफ दर्ज झूठे केस पर आपके ऊपर भी तैयार FIR।”

तंवर ने दावा किया कि उन्हें सोशल मीडिया से इस घटना के बारे में पता चला और उन्होंने पीड़ितों के लिए आवाज उठाने की कोशिश की। उन्होंने आगे दावा किया कि उनके संगठन ने कोई गलत सूचना नहीं फैलाई और केवल यह माँग की कि जीवित लड़की को निष्पक्ष जाँच के साथ एम्स में स्थानांतरित कर दिया जाए ताकि यह पता लगाया जा सके कि लड़कियों पर यौन हमला हुआ था या नहीं।

गौरतलब है कि उन्नाव पुलिस द्वारा दर्ज कराई गई FIR में कहा गया है कि इन ट्विटर अकाउंट्स ने झूठी जानकारी फैलाई थी कि इन लड़कियों का बलात्कार किया गया था, जबकि पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट में साफ तौर पर इससे इनकार किया गया। इन ट्विटर अकाउंट ने उनके शवों का घर वालों की मर्जी के खिलाफ अंतिम संस्कार किए जाने जैसी अफवाह फैलाकर आम जनता में आक्रोश पैदा करने का भी प्रयास किया।

बता दें कि भीम सेना (अखिल भारतीय भीम सेना या ABBS) और भीम आर्मी (भीम आर्मी भारत एकता मिशन) नाम के दो संगठन हैं। भीम सेना की स्थापना अक्टूबर 2010 में हरियाणा के गुरुग्राम में नवाब सतपाल तंवर द्वारा की गई थी। भीम आर्मी की स्थापना उत्तर प्रदेश में 2015 में चंद्रशेखर आज़ाद रावण द्वारा की गई थी। उन्नाव हत्या मामले के बारे में जानकारी फैलाने के मामले में भीम आर्मी से जुड़े दो ट्विटर अकाउंट्स का नाम लिया गया है।

अगवा किया, नंगा कर बनाया वीडियो.. मार-मार कर तोड़ा पैर: इमरान खान की पार्टी के नेताओं पर पाकिस्तानी पत्रकार ने लगाए आरोप

पाकिस्तान में अपने खिलाफ खबर चलाए जाने से बौखलाए प्रधानमंत्री इमरान खान की पार्टी के लोगों ने एक पत्रकार को अगवा कर लिया और उसे पार्टी कार्यालय में ले जाकर खूब टॉर्चर किया। अब किसी तरह पाकिस्तान तहरीक-ए-इंसाफ (पीटीआई) के गुंडो से बचकर भागे पत्रकार ने प्रेस कांफ्रेंस कर सरकार और इमरान खान पर गंभीर आरोप लगाए हैं और पूरे मामले की न्यायिक जाँच की माँग की है। पीड़ित पत्रकार का नाम सैफुल्लाह जान (Saifullah Jan) है और वो चरसड्डा प्रेस क्लब की गवर्निंग बॉडी के सदस्य हैं।

प्रेस कॉन्फ्रेंस कर लगाए गंभीर आरोप

सैफुल्लाह खान ने कहा कि उन्हें पाकिस्तान तहरीक-ए-इंसाफ (पीटीआई) के नेताओं जिसमें अब्दुल्लाह, उनके भाई फहीम, जकात कमेटी के चेयरमैन इफ्तिखार और अन्य हथियार बंद लोगों ने अगवा कर लिया और चरसड्डा बाजार में स्थित पीटीआई (PTI) के कार्यालय में लेकर गए। वहाँ उन लोगों ने उन्हें नंगा किया और जमकर टॉर्चर किया। जानकारी के मुताबिक सैफुल्लाह खान का वीडियो भी बनाया गया है, जब उनके कपड़े उतार दिए गए थे।

स्थानीय लोगों के दबाव के बाद छोड़ा

सैफुल्लाह जान ने कहा कि पीटीआई के लोगों ने उन्हें तब छोड़ा, जब स्थानीय लोगों ने उन पर दबाव बनाया। पीड़ित ने कहा कि जिले के पुलिस अधिकारी मोहम्मद शोएब ने स्थानीय सरदारी पुलिस स्टेशन के पुलिसकर्मियों को केस दर्ज करने का आदेश दिया था, लेकिन स्थानीय पुलिस मामले में जान बूझकर देरी कर रही है और न उपयुक्त धाराओं में केस भी दर्ज नहीं किया। 

पत्रकार ने कहा कि पिटाई की वजह से उनका पैर फ्रैक्चर हो गया। लेकिन पुलिस ने एफआईआर में लिखा है कि उन्हें मालूमी चोटें आई हैं। उन्होंने कहा कि पुलिस ने मुख्य अभियुक्त इफ्तिखार का नाम एफआईआर में डाला ही नहीं है। यही नहीं, पेशावर हाइकोर्ट के आदेश के बावजूद पुलिस ने उन्हें मुख्य आरोपित नहीं बनाया और स्थानीय कोर्ट ने इफ्तिखार को जमानत दे दी। 

गौरतलब है कि पिछले दिनों जाने-माने ट्विटर यूजर और पाकिस्तानी मानवाधिकार कार्यकर्ता राहत ऑस्टिन पर चाकू से हमला किया गया। खुद ऑस्टिन ने मंगलवार (जनवरी 5, 2021) को इसकी जानकारी दी। उन्होंने ट्विटर पर लिखा, “मुझ पर एक जिहादी ने चाकू से हमला किया। मुझे नहीं पता कि वह कौन था, मगर वह शायद मध्य-पूर्व या कहीं और से था।” राहत ने कहा कि वह घायल हो गए हैं और उन्हें अस्पताल में भर्ती कराया गया है।

ऑपइंडिया के साथ शेयर किए गए एक वीडियो मैसेज में राहत ऑस्टिन ने कहा था, “अभी कुछ समय पहले मुझ पर एक इस्लामी जिहादी ने हमला किया था। उसके पास एक चाकू था और जिस तरह से उसने ‘अल्लाहू अकबर’ कहा था, मुझे लगता है कि वह मध्य-पूर्वी देश से है। ये लोग दुनिया में हर जगह ऐसी चीजें क्यों करते रहते हैं? हम कुछ भी गलत नहीं कर रहे हैं।”

लाल टोपी देख एक बच्चा बोला था- मम्मी, वो देखो गुंडा: सदन में रंगीन टोपियाँ देख CM आदित्यनाथ ने सुनाया किस्सा

उत्तर प्रदेश की विधानसभा में बोलते हुए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने बुधवार (फरवरी 24, 2021) को हँसी-मजाक में बातें करते हुए माहौल काफी हल्का कर दिया, लेकिन साथ ही समाजवादी पार्टी को उसी अंदाज़ में आईना भी दिखाया। सदन में सपा के नेता प्रतिपक्ष राम गोविंद चौधरी की लाल टोपी पर मजे लेते हुए सीएम आदित्यनाथ ने कहा कि विधायिका को ड्रामा कंपनी ना मान लें, कोई लाल टोपी, कोई हरी टोपी और कोई नीली टोपी पहन कर आता है। उन्होंने कहा कि पता नहीं ये क्या परिपाटी बन गई है।

राज्यपाल आनंदीबेन पटेल के अभिभाषण पर विधानसभा में बोलते हुए सीएम योगी आदित्यनाथ ने कहा कि नेता प्रतिपक्ष राम गोविंद चौधरी बेहद सरल व्यक्ति हैं, लेकिन ग़लत पार्टी में होने के कारण कभी-कभी भटक जाते हैं। साथ ही, उन्होंने कहा कि पता नहीं ये लोग घर में भी यही टोपी पहन कर चलते हैं या नहीं। इस दौरान सीएम ने एक वाकया भी सुनाया, जब वो किसी बेसिक विद्यालय के उद्घाटन के लिए गए थे।

उन्होंने बताया, “वहाँ मेरा विरोध करने कुछ लोग टोपी लगा कर पहुँच गए थे। टोपी पहन कर आने वालों की तरफ इशारा करते हुए ढाई साल के एक बच्चे ने कहा- ‘मम्मी-मम्मी, वो देखो गुंडा।’ अगर आप गमछा बाँध कर आते या पगड़ी पहनकर आते तो मैं आपका स्वागत करता और ये अच्छा भी लगता। वो इस नाटक से तो बेहतर होता।” इसके बाद समाजवादी पार्टी के विधायकों ने सदन में ही हंगामा शुरू कर दिया।

इस पर मुख्यमंत्री ने चुटकी ली कि मैंने किसी का नाम तो नहीं लिया, फिर भी ये हंगामा ‘चोर की दाढ़ी में तिनका’ की तरह है। उन्होंने केरल जाकर ‘उत्तर प्रदेश की खिल्ली उड़ाने’ के लिए राहुल गाँधी को भी आड़े हाथों लिया। उन्होंने कहा कि राहुल के पास इटली जाने के लिए समय है, लेकिन अमेठी जाने के लिए नहीं। उन्होंने प्रियंका वाड्रा की भी आलोचना करते हुए कहा कि उन्हें मंदिर तभी याद आता है, जब वो यहाँ आते हैं।

मालूम हो कि राहुल गाँधी ने त्रिवेंद्रम में आयोजित एक कार्यक्रम में कहा था, “मैं 15 साल तक उत्तर भारत में सांसद था। मुझे एक अलग तरह की राजनीति की आदत हो गई थी। मेरे लिए केरल आना बेहद नया था क्योंकि मुझे अचानक लगा कि यहाँ के लोग मुद्दों में दिलचस्पी रखते हैं और जमीनी तौर पर मुद्दों के विस्तार में जाने वाले हैं।” इस बयान के बाद अमेठी से वर्तमान सांसद स्मृति ईरानी ने राहुल गाँधी के लिए ‘एहसान फरामोश’ शब्द का इस्तेमाल किया। साथ ही, कहा कि इनके बारे में तो दुनिया कहती है- थोथा चना बाजे घना।

बेंगलुरु दंगों के लिए जानबूझकर चुना था कृष्ण जन्माष्टमी का दिन, SDPI ने रची थी देश में सांप्रदायिक सद्भाव बिगाड़ने की साजिश: NIA

राष्ट्रीय जाँच एजेंसी (NIA) ने हाल ही में बेंगलुरु की विशेष अदालत में एक आरोप पत्र दाखिल किया है। इस आरोप पत्र में कहा गया कि बेंगलुरु में पिछले साल 12 अगस्त को हुई हिंसा, सोशल डेमोक्रेटिक पार्टी ऑफ इंडिया (SDPI) द्वारा रची गई देश में सांप्रदायिक तनाव पैदा करने की एक बड़ी साजिश थी।

11 अगस्त को 3000 से ज्यादा लोगों की भीड़ ने कॉन्ग्रेस विधायक आर अखंड श्रीनिवास मूर्ति, उनकी बहन और डीजे हल्ली व केजी हल्ली पुलिस थानों में आग लगा दी थी। भीड़ सोशल मीडिया पर विधायक के एक रिश्तेदार की तरफ से अपलोड की गई भड़काऊ पोस्ट को लेकर नाराज थी।

एक व्यक्ति ने इस मामले की जाँच एनआईए से कराने के लिए कर्नाटक उच्च न्यायालय में याचिका दायर की थी, जिसके बाद राष्ट्रीय जाँच एजेंसी ने इस मामले में जाँच शुरू कर दी। एनआईए के मुताबिक, एजेंसी ने मामले में 247 लोगों को आरोपित बनाया है। 

विशेष अदालत में आरोप पत्र दाखिल कर गहरी साजिश को किया उजागर

एनआईए के आरोप पत्र के मुताबिक, अल्पसंख्यक समुदाय के चार हजार से ज्यादा लोगों द्वारा हिंसा का तात्कालिक कारण पुलकेशीनगर के विधायक आर अखंड श्रीनिवास मूर्ति के भतीजे नवीन की कथित इंटरनेट मीडिया पोस्ट थी, लेकिन असल में एसडीपीआइ कैडर ने हिंदू देवताओं के खिलाफ अपमानजनक पोस्ट और उन्हें टैग करके नवीन को उकसाया था। आरोप पत्र में कहा गया, “बेंगलुरु SDPI अनुच्छेद-370 हटाने, सीएए व एनआरसी, अयोध्या पर सुप्रीम कोर्ट के फैसले और तत्काल तीन तलाक जैसे कुछ मुद्दों पर केंद्र सरकार के फैसलों से नाराज था। वे देश में सांप्रदायिक सद्भाव बिगाड़ने और उसके जरिए देश में अशांति फैलाने की फिराक में थे।”

SDPI ने आपराधिक और हिंदू समुदाय को भड़काने की साजिश रची थी

प्रमुख अभियुक्त फिरोज पाशा के SDPI में शामिल होने के बाद मुहम्मद शरीफ, मुजम्मिल पाशा और एसडीपीआई बेंगलुरु के अन्य नेताओं ने एक आपराधिक साजिश रची। इसके तहत उन्होंने फिरोज पाशा के फेसबुक अकाउंट के जरिए हिंदू देवताओं का अपमान करने वाले कुछ संदेशों को पोस्ट करके हिंदू समुदाय को भड़काने का फैसला किया। उन्होंने जानबूझकर 11 अगस्त, 2020 की तारीख चुनी क्योंकि उस दिन हिंदुओं का पवित्र त्योहार श्रीकृष्ण जन्माष्टमी थी।

फिरोज पाशा हिंसक हमले की योजना पर अमल के लिए पूरी तरह तैयार था: NIA

जाँच एजेंसी ने बताया कि एसडीपीआई का कैडर किसी भी स्थिति और हिंसक हमले की योजना पर अमल के लिए पूरी तरह तैयार था। इसी के तहत फिरोज पाशा ने 11 अगस्त की दोपहर को वीडियो और आडियो क्लिप पोस्ट की थी। इसके बाद फिरोज ने नवीन को पोस्ट में टैग कर लिया, जिस पर नवीन ने उसी आक्रामक अंदाज में पैगंबर के खिलाफ प्रतिक्रिया व्यक्त की। 

नवीन के जवाब को देखने के बाद फिरोज ने मुस्लिम समुदाय और संगठनों के नेताओं से नवीन के खिलाफ शिकायत दर्ज कराने और पुलिस व सरकार पर कार्रवाई का दबाव बनाने के लिए संपर्क किया। रात में फिरोज पाशा ने एसडीपीआई कैडर और अन्य को नवीन व मूर्ति के घरों के साथ-साथ केजी हल्ली व डीजी हल्ली पुलिस थानों पर हमला करने के लिए भेजा था।

वहीं, आरोप पत्र पर प्रतिक्रिया देते हुए, कर्नाटक के गृह मंत्री बासवराज बोम्मई ने कहा कि यह एसडीपीआई की एक साजिश थी और सोशल मीडिया ऐसे संगठनों के लिए एक आसान औजार बन गया है। बोम्मई ने संवाददाताओं से कहा, “ये (सोशल मीडिया के) आका भारत में ही नहीं, बल्कि बाहर भी हैं। मुझे भरोसा है कि न्याय होगा।”

नेहरू-गाँधी परिवार के नाम 450 प्रोजेक्ट्स, लेकिन ‘नरेंद्र मोदी स्टेडियम’ पर लिबरल्स का ‘रवीश रोना’

गुजरात में नरेंद्र मोदी के नाम पर स्टेडियम के उद्घाटन के साथ ही लिबरल गिरोह का रोना-धोना शुरू हो गया है। राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने मोटेरा के सरदार वल्लवभाई पटेल स्पोर्ट्स एन्क्लेव में इस दुनिया के सबसे बड़े स्टेडियम का उद्घाटन केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह की मौजूदगी में बुधवार (फरवरी 24, 2021) को किया। लिबरल गिरोह ने इस दौरान कई गलत अफवाहें भी फैलाईं और जनता को भ्रमित करने का प्रयास किया।

कॉन्ग्रेस के आईटी सेल से जुड़े लोगों ने झूठा दावा किया कि सरदार पटेल के नाम पर बने स्टेडियम का नाम बदल कर नरेंद्र मोदी स्टेडियम कर दिया गया है और कॉन्ग्रेस सत्ता में वापस आते ही इसका नाम वापस बदल देगी। आबशार नामक व्यक्ति ने दावा किया कि उनकी पार्टी एक महान कॉन्ग्रेस नेता का अपमान बर्दाश्त नहीं करेगी। सच्चाई ये है कि पूरे एन्क्लेव का नाम सरदार पटेल के नाम पर ही है, जिसमें ये स्टेडियम सहित कई खेल फैसिलिटीज हैं।

उन्हीं में से एक स्टेडियम का नाम प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नाम पर है। ये स्टेडियम महज उस स्पोर्टिंग कॉम्प्लेक्स का एक हिस्सा है। स्वीडिश ‘प्रोफेसर’ और फेक न्यूज़ के लिए कुख्यात अशोक स्वाइन ने कहा कि हिटलर ने भी एक फुटबॉल स्टेडियम का नाम अपने नाम पर रखा था। स्वाति चतुर्वेदी ने दावा किया कि जब मायावती ने अपनी प्रतिमाएँ बनवाई थीं तो ‘भक्तों’ ने उन पर हमला किया था। प्रदेश कॉन्ग्रेस अध्यक्ष हार्दिक पटेल ने भी झूठा दावा किया

उन्होंने ट्विटर पर लिखा, “दुनिया के सबसे बड़े अहमदाबाद स्थित सरदार पटेल क्रिकेट स्टेडियम का नाम बदलकर नरेंद्र मोदी क्रिकेट स्टेडियम रखा गया है, क्या यह सरदार पटेल का अपमान नहीं हैं? सरदार पटेल के नाम पर मत माँगने वाली भाजपा अब सरदार साहब का अपमान कर रही हैं। गुजरात की जनता सरदार पटेल का अपमान नहीं सहेगी।” गौरव पाँधी ने इसे पीएम मोदी का अहंकार बताया। संजुक्ता बसु ने भी इसे दोहराते हुए भारत को दुर्भाग्यशाली देश बताया।

सबसे बड़ी बात तो ये है कि उस कॉन्ग्रेस के समर्थक इसका मजाक बना रहे हैं, जिनके नेहरू-गाँधी खानदान के लोगों पर 450 प्रोजेक्ट, स्ट्रक्चर, सड़कें, इमारतें, कॉलेजों और विश्वविद्यालयों के नाम रखे गए हैं। 2013 में एक RTI से खुलासा हुआ था कि 12 केंद्रीय और 52 राज्य योजनाओं, 28 खेल टूर्नामेंट/ट्रॉफीज, 19 स्टेडियम, 5 एयरपोर्ट/पोर्ट्स, 15 पार्क्स, 39 अस्पतालों और 74 सड़कों के नाम नेहरू, इंदिरा और राजीव के नाम पर हैं।

नए स्टेडियम को दुनिया के सबसे बड़े और सबसे हाइटेक स्टेडियम के तौर पर विकसित किया गया है। इस स्टेडियम पर क्रिकेट मुकाबले की शुरुआत भारत-इंग्लैंड पिंक बॉल टेस्ट से हो रही है। ये दोनों टीमों के बीच चल रही टेस्ट सीरीज का तीसरा मैच चल रहा है। अमित शाह ने कहा कि हमने यहाँ इस तरह की सुविधा कर दी है कि 6 महीने में ओलंपिक, एशियाड और कॉमनवेल्थ जैसे खेलों का आयोजन कर सकता है और अहमदाबाद को अब स्पोर्ट्स सिटी के नाम से जाना जाएगा।

गैंगस्टर मुख्तार अंसारी को पूरी बेशर्मी से बचा रही है पंजाब सरकार: UP सरकार ने लगाए मिलीभगत के आरोप

बाहुबली माफिया मुख्तार अंसारी को लेकर उत्तर प्रदेश सरकार और पंजाब सरकार सुप्रीम कोर्ट में आमने-सामने हैं। इसी मामले पर सुनवाई के दौरान बुधवार (फरवरी 24, 2021) को कोर्ट में सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने उत्तर प्रदेश सरकार की ओर से कहा कि पंजाब सरकार बेशर्मी के साथ एक गैंगस्टर को बचा रही है। उन्होंने पंजाब की राज्य सरकार और अंसारी के बीच मिलीभगत का आरोप लगाया।

बता दें कि मुख्तार अंसारी को उत्तर प्रदेश की जेल में ट्रांसफर करने को लेकर राज्य पुलिस ने बुधवार को सुप्रीम कोर्ट में हलफनामा दायर किया। इस केस की सुनवाई आज ही होनी थी, लेकिन सुनवाई शुरू होते ही कुछ देर बाद कोर्ट ने इसे अगले हफ्ते के लिए टाल दिया। अब ये मामला कोर्ट में 2 मार्च को सुना जाएगा। इस बीच दोनों पक्षों में काफी नोकझोंक और तीखीं बातें भी हुईं।

अंसारी के वकील मुकुल रोहतगी ने कहा कि मुख्तार अंसारी एक छोटा आदमी है और यूपी सरकार जानबूझकर उसे परेशान कर रही। इस पर उत्तर प्रदेश सरकार की ओर से तुषार मेहता ने कहा कि अगर वो छोटा आदमी है तो क्या इसलिए पंजाब सरकार बेशर्मी से इसके पीछे खड़ी है? तुषार मेहता के इस बयान पर अंसारी के वकील रोहतगी ने कहा कि अगर वो इतना महत्वपूर्ण है तो उसको उत्तर प्रदेश का मुख्यमंत्री क्यों नहीं बना देते? इस पर सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने भी चुटकी लेते हुए कहा कि पंजाब सरकार यही तो कर रही है।

उल्लेखनीय है कि मुख्तार अंसारी फिलहाल पंजाब के रोपड़ जेल में एक हत्या के आरोप में बंद हैं। बुधवार को सर्वोच्च न्यायालय में सुनवाई से पहले यूपी सरकार ने उसकी हिरासत को माँगते हुए हलफनामा दाखिल किया था। यूपी सरकार अंसारी को यूपी की जेल लाकर नए दर्ज मुकदमों का निपटारा करना चाहती है और दूसरी ओर पंजाब सरकार बार बार किसी न किसी बहाने मुख्तार को जेल से छोड़ने से मना कर देती है।

पिछले साल की बात करें तो अक्टूबर में खबर आई थी यूपी से 50 पुलिसकर्मी उसे लेने पंजाब के लिए रवाना हुए हैं और उसे प्रदेश में बख्तरबंद गाड़ी में बैठाकर लाया जाएगा। हालाँकि बाद में पता चला कि माफिया मुख्तार अंसारी को पंजाब के रोपड़ जेल से उत्तरप्रदेश वापस लाने गई यूपी पुलिस को खाली हाथ लौटना पड़ा। पंजाब पहुँचकर यूपी पुलिस को बताया गया कि अंसारी को डॉक्टर ने 3 माह का बेड रेस्ट कहा है। 

शिवसेना नेता ने खुलेआम उड़ाई कोरोना गाइडलाइंस की धज्जियाँ, बचाव में उतरी मंदिरों को जिम्मेदार ठहराने वाले ठाकरे की पुलिस

महाराष्ट्र में कोरोना के बढ़ते कहर के बीच पुलिस को जहाँ नियमों की अनदेखी करने वालों के ख़िलाफ़ सख्ती से पेश आना चाहिए, वहीं राज्य पुलिस आम जनता और सत्ताधारी पार्टी के नेताओं में फर्क करने में लगी है। यही नहीं, इस बारे में सवाल पूछे जाने पर महाराष्ट्र पुलिस इस भेदभाव को सही साबित करते हुए भी देखी जा रही है। ख़ास बात यह है कि हाल ही में ठाकरे सरकार ने महाराष्ट्र में बढ़ते कोरोना के मामलों के लिए मंदिरों को ही जिम्मेदार ठहरा दिया था।

टाइम्स नाउ के अनुसार, महाराष्ट्र से खबर है कि वाशिम इलाके में स्थित पोहरा देवी मंदिर में शिवसेना नेता संजय राठौड़ ने जाकर कई समर्थकों के साथ दर्शन किए। जहाँ खुलेआम कोरोना नियमों की धज्जियाँ उड़ाई गईं। इस दौरान न तो तय दूरी का ख्याल किया गया और न ही कुछ लोगों ने मास्क पहनना जरूरी समझा।

घटना की वीडियो वायरल होने के बाद बात जब शिकायत दर्ज करने पर आई तो पुलिस ने 10 ज्ञात और कई अज्ञात लोगों के खिलाफ़ मामला दर्ज किया। वाशिम जिले के एसपी से जब पूछा गया कि क्या इस मामले में संजय राठौड़ के ख़िलाफ़ भी मुकदमा दर्ज हुआ तो पुलिस ने इससे मना कर दिया। आम जन और मंत्री पद पर बैठे व्यक्ति के बीच इस भेदभाव पर सफाई देते हुए एसपी ने कहा कि राठौड़ ने सिर्फ़ मंदिर में दर्शन किए थे और दर्शन करने के बाद वह वहाँ से चले गए।

रिपोर्ट के मुताबिक, ये रवैया वाशिम पुलिस का पहले से अनुमानित था। बहुत लोगों को पता था कि संजय राठौड़ अपने कई समर्थकों के साथ मंदिर में दर्शन करने आने वाले हैं, क्योंकि वह पहले से एक डेथ केस के कारण विवादों में थे। मीडिया को भी पता था कि वे वहाँ आने वाले हैं। फिर भी बात जब केस दर्ज करने की आई तो पुलिस ने कहा कि उतने लोगों में से केवल 10 लोग पहचाने गए हैं।

हैरानी की बात यह है कि पुलिस सामने आई वीडियो से संजय राठौड़ को भी नहीं पहचान पाई है, जहाँ भीड़ उनके आस पास खचाखच भरी थी और किसी ने मास्क पहना था और किसी ने वो भी पहनना जरूरी नहीं समझा। वाशिम पुलिस की इस हरकत के बाद ये सवाल उठना लाजिमी है कि क्या कोरोना प्रोटोकॉल्स सिर्फ़ आम आदमी के लिए ही हैं।

गौरतलब है कि महाराष्ट्र में कोरोना के बढ़ते मामलों के बाद अमरावती जिले में एक हफ्ते के लिए लॉकडाउन लगा दिया गया है। वहीं नागपुर में भी 7 मार्च तक के लिए लॉकडाउन है। अन्य जिलों में भी आम जन को इस समय सख्ती से नियम फॉलो करने के निर्देश दिए गए हैं। राज्य सरकार ने आदेश दिया है कि जरूरी सामान की दुकानों को छोड़कर लॉकडाउन में सभी दुकानें, सरकारी और निजी शैक्षणिक संस्थान, कोचिंग सेंटर, ट्रेनिंग स्कूल बंद रहेंगे। लोगों को सुबह नौ बजे से शाम पाँच बजे तक ही सामान खरीदने की छूट होगी।

लोगों को पिछले 10-15 सालों से थूक वाली रोटियाँ खिला रहा था नौशाद: पूरे गिरोह के सक्रीय होने का संदेह, जाँच में जुटी पुलिस

उत्तर प्रदेश के मेरठ में थूक कर रोटी बनाए जाने के वीडियो वायरल होने के बाद पकड़े गए नौशाद ने खुलासा किया है कि वो पिछले 10-15 वर्षों से विभिन्न शादी समारोहों में इस तरह की हरकत कर रहा था। थाने का एक वीडियो भी सामने आया है, जिसमें उसने बताया है कि वो 10-15 सालों से रोटी बना रहा है और उतने ही समय से रोटियों पर थूक भी लगा रहा है। पुलिस अब आगे की कार्रवाई में जुटी हुई है।

पुलिस उक्त वीडियो के बारे में और अधिक जानकारी जुटा रही है। 16 फरवरी को आयोजित शादी समारोह में समर गार्डन लिसाड़ीगेट निवासी नौशाद का वीडियो वायरल होने के बाद महामारी एक्ट के तहत उसे दबोचकर 14 दिनों की रिमांड पर जेल भेज दिया गया था। नौशाद के साथ शादी समारोह में लगे ठेकेदारों की जानकारी भी जुटाई जा रही है। वो शहर की कई मंडपों और शादियों में खाना बना चुका है।

साथ ही, नौशाद अलग-अलग ठेकेदारों के साथ इस तरह के कार्यक्रमों में जाता था। मोहम्मद नौशाद से जुड़े अन्य लोगों के साथ भी पूछताछ की जाएगी। नौशाद के मोबाइल की कॉल डिटेल्स भी जुटाई गई है। पुलिस उससे जुड़े लोगों को पकड़ कर पूछताछ करेगी क्योंकि उसे संदेह है कि शहर में इस तरह का पूरा का पूरा गैंग कार्य कर रहा हो सकता है। सबसे पहले उसे ले जाने वाले ठेकेदारों से पूछताछ होगी।

बता दें कि मेरठ में थूक लगा कर रोटी बनाने के मामले में गिरफ्तार नौशाद के पिता का नाम अख्तर है। हिरासत में लेकर जब पुलिस ने उससे पूछताछ की तो उसने कबूल किया कि इस वीडियो में दिख रहा शख्स वही है और उसने ही इस तरह की हरकत की है। इस मामले में ‘हिन्दू जागरण मंच’ के सचिन सिरोही ने हाजा थाने में लिखित शिकायत दर्ज कराई थी। उन्होंने अपनी शिकायत में कोरोना वायरस संक्रमण महामारी का भी जिक्र किया था।