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‘जाकर मर, मौत की वीडियो भेज दियो’ – 70 मिनट की रिकॉर्डिंग, आत्महत्या से ठीक पहले आरिफ ने आयशा को ऐसे किया था मजबूर

23 साल की आयशा की मौत के बाद उसकी आखिरी वीडियो और माता-पिता से हुई बातचीत की रिकॉर्डिंग ने सबको झकझोर दिया है। हर कोई उसके शौहर आरिफ को सख्त से सख्त सजा दिलवाना चाहता है। ऐसे में इस केस की जाँच में जुटी पुलिस को आरिफ के ख़िलाफ़ एक महत्वपूर्ण सबूत मिला है। ये सबूत 70 मिनट की कॉल रिकॉर्डिंग है।

अहमदाबाद पुलिस ने आयशा और आरिफ के बीच हुई बातचीत की कॉल रिकॉर्ड्स को एक्सेस किया। ये बातचीत आयशा ने नदी में कूदने से पहले आरिफ से की थी। इसमें आरिफ को साफ कहते सुना जा सकता है – “जाकर मर और मुझे अपने मौत की वीडियो भेज दियो” – पुलिस को ये अहम सबूत आरिफ का मोबाइल फोन बरामद होने के बाद मिला है।

गौरतलब है कि गुजरात के अहमदाबाद में आयशा ने 25 फरवरी 2021 को साबरमती नदी में कूद कर जान दी थी। बाद में उसकी आखिरी वीडियो हर जगह सोशल मीडिया पर वायरल हुई थी। जिसकी जाँच पर पता चला था कि राजस्थान के जालौर के आरिफ ने न केवल उससे दहेज माँगा था बल्कि उसे प्रताड़ित भी किया था।

इसके अलावा आयशा के घरवालों ने आरोप लगाया था कि आरिफ का दूसरी लड़की से अफेयर था। वह उनकी बेटी के सामने अपनी गर्लफ्रेंड से बात करता था। एक बार वह आयशा को गर्भावस्था में मायके छोड़ गया था। इस घटना से वह इतना डिप्रेस्ड हुई कि सर्जरी के बावजूद बच्चा न बच सका।

बता दें कि पुलिस ने 1 मार्च को आरोपित आरिफ को गिरफ्तार कर लिया है। मामले में आगे की जाँच भी चल रही है। पुलिस पता लगा रही है कि कहीं तीसरी महिला के कारण तो आरिफ ने आयशा को दहेज आदि माँगने के लिए मजबूर नहीं किया।

यह भी पता चला है कि साल 2020 में आयशा की ओर से आरिफ के ख़िलाफ़ वतवा पुलिस थाने में दहेज का केस दर्ज कराया गया था। दोनों की शादी जुलाई 2018 में हुई थी। शादी के वक्त आयशा के पिता ने डेढ़ लाख रुपए दिए थे लेकिन कुछ माह बाद आयशा को वापस भेज दिया गया। ससुराल वालों ने आयशा से बात भी बंद कर दी। वह इस दुख को बर्दाश्त नहीं कर पा रही थीं और खुद को मारने का फैसला किया।

आत्महत्या से पहले बनाए गए वीडियो में आयशा ने कहा था, “प्यार करते हैं आरिफ से। उसे परेशान थोड़े न करेंगे। उसे आज़ादी चाहिए, आज़ाद रहे वो। चलो, अपनी ज़िंदगी तो यहीं तक है। मैं खुश हूँ कि मैं अल्लाह से मिलूँगी। मैं उनसे पूछूँगी कि मुझसे क्या गलती हुई। अच्छे माँ-बाप मिले, दोस्त भी बहुत अच्छे मिले- फिर भी कमी कहाँ रह गई? सुकून के साथ जाना चाहती हूँ। और अल्लाह से मैं ये भी कहूँगी कि मुझे दोबारा इंसानों की शक्ल न दिखाए।”

गलत नहीं तो डेटा डिलीट क्यों: अनुराग कश्यप, तापसी पन्नू और टैक्स चोरी मामला अब ₹650 करोड़ का, आएँगे एक्सपर्ट्स

इनकम टैक्स चोरी के आरोप में आयकर विभाग की ओर से फिल्मी सितारों के मुंबई और पुणे स्थित आवास व कार्यालय में चल रही छापेमारी अभी खत्म नहीं हुई है। कहा जा रहा है कि ये छापेमारी 2-3 दिन और चलेगी। इस बीच जाँच में जुटे अधिकारियों को इन हस्तियों के ख़िलाफ़ कई सबूत हाथ लगे हैं। 

कुल मिला कर ₹650 करोड़ की टैक्स चोरी का मामला उजागर हुआ है। अकेले तापसी व उनकी कंपनी पर पूरे ₹25 करोड़ की कर चोरी का संदेह है। करीब 5 करोड़ रुपयों को लेकर तो वह अधिकारियों के सवालों के जवाब भी नहीं दे पाईं।

कल शाम तक यह आँकड़ा 300-350 करोड़ तक की टैक्स चोरी का था। क्योंकि तब तक मामला अनुराग कश्यप और तापसी पन्नू तक सीमित था। लेकिन जाँच का दायरा जैसे ही फैंटम फिल्म्स और प्रोडक्शन कंपनियों के शेयर होल्डरों तक पहुँची, यह आँकड़ा लगभग ₹650 करोड़ की टैक्स गड़बड़ी तक पहुँच गया।

इनकम टैक्स अधिकारियों का ये भी मानना है कि तापसी पन्नू और अनुराग कश्यप समेत सभी फैंटम फिल्म के स्टेकहोल्डर्स ने अपने मोबाइल से डेटा डिलीट कर दिया है।

खबरों के अनुसार, आयकर विभाग को संदेह है कि एनसीबी की ओर से हुई कानूनी कार्रवाई के बाद तापसी और फैंटम फिल्म्स के शेयरहोल्डर्स ने अपने-अपने मोबाइल फोन से डेटा डिलीट कर दिया। जिसे लेकर सवाल उठ रहा है कि यदि कोई संदिग्ध डेटा था ही नहीं, तो उसे क्यों डिलीट किया गया।

इन सबके फोन का डेटा रिट्रिव करने के लिए भी अधिकारी एक्सपर्ट्स की मदद ले रहे हैं। तापसी का बयान कुछ दिन में दर्ज कर लिया जाएगा। छापेमारी में सामने आए सबूतों के बाद बता दें कि अब इस केस में दो मामले समानांतर चल रहे हैं। एक फैंटम फिल्म्स के शेयरधारकों के ख़िलाफ़ और दूसरा तापसी पन्नू के ख़िलाफ़।

बता दें कि कल तक मुंबई, पुणे के अलावा दिल्ली और हैदराबाद मिलाकर कुल 28 ठिकानों पर छापेमारी हुई। सीबीडीटी ने बताया कि आयकर विभाग सर्च और सर्वे ऑपरेशंस अंजाम दे रहा है। इसकी शुरुआत मुंबई में 2 फिल्म निर्माण कंपनियों, एक अभिनेत्री और दो टैलेंट मैनेजमेंट कंपनियों से 3 मार्च को हुई थी।

सीबीडीटी का कहना है कि 5 करोड़ रुपए कैश पेमेंट लेने की रसीदें तापसी पन्नू के घर से बरामद हुई हैं। कथित तौर पर टैक्स बचाने के लिए यह पेमेंट कैश के तौर पर ली गई। यही नहीं, फिल्म प्रोडक्शन हाउस फैंटम फिल्म्स ने बॉक्स ऑफिस पर जितने कलेक्शन की बात कही थी, उससे ज्यादा रकम की जानकारी मिली है।

कंपनी के अधिकारी 300 करोड़ रुपए का हिसाब नहीं दे पाए हैं। यह भी बताया है कि फैंटम फिल्म्स की हिस्सेदारी बेचने के लिए उसका अंडरवैल्यूएशन किया गया। फैंटम फिल्म्स को 2018 में डिजॉल्व कर दिया गया था। तब शेयरों की कीमत कम दिखाई गई थी और लेनदेन में गड़बड़ी की गई थी।

इससे पूर्व अधिकारियों ने छापेमारी के पहले दिन फ़िल्मी हस्तियों से पूछताछ करते हुए कुछ इलेक्ट्रॉनिक डिवाइस और दस्तावेजों की जाँच की थी। साथ ही पता चला था कि संभव है ईडी भी अनुराग और तापसी के घर छापा मारे।

‘अब पार्टी में नहीं रह सकता, हमेशा अपमानित किया गया’- चुनाव से पहले राहुल गाँधी के वायनाड में 4 बड़े नेताओं का इस्तीफा

केरल में आगामी विधानसभा चुनाव से बस 1 माह पहले कॉन्ग्रेस को बड़ा झटका लगा है। राहुल गाँधी के लोकसभा क्षेत्र वायनाड में पार्टी के 4 बड़े नेताओं ने कॉन्ग्रेस से अपना किनारा कर लिया है।

पिछले एक हफ्ते में पार्टी को छोड़ने वाले इन नेताओं में केरल प्रदेश कॉन्ग्रेस कमिटी के सचिव MS विश्वनाथन, महिला कॉन्ग्रेस राज्य सचिव सुजया वेणुगोपाल, इंडियन नेशनल ट्रेड यूनियन कॉन्ग्रेस के मुख्य सचिव पीके अनिल कुमार और केपीसीसी सदस्य केके विश्वनाथन हैं।

इनमें से सुजया हाल में सीपीआई (एम) के मार्च में नजर आई थीं। तभी यह साफ हो गया था कि वो वामपंथी पार्टी के साथ जुड़ने वाली है। वहीं सुल्तान बाथरी नगरपालिका के पार्षद एमएस विश्वनाथन ने भी उस समय माकपा में शामिल होने के संकेत दिए थे, जब उन्होंने जिले के कुछ वामपंथी नेताओं के साथ एक प्रेस वार्ता को संबोधित किया।

एमएस विश्वनाथन ने यह आरोप लगाते हुए बुधवार को इस्तीफा दिया कि पार्टी नेतृत्व आगामी विधानसभा चुनाव के लिए सीट बँटवारे में सामाजिक न्याय सुनिश्चित करने में विफल रही है।

केके विश्वनाथन ने भी इस्तीफा देते हुए वायनाड डीसीसी की आलोचना की। उन्होंने पिछले हफ्ते कहा था कि पार्टी वायनाड में तीन सदस्यीय टीम द्वारा चलाई जा रही है। वह कहते हैं:

“एक भी समय ऐसा नहीं है कि मुझे अपमानित न किया गया हो, इसलिए मैं इस पार्टी में अब नहीं रह सकता।”

मालूम हो कि इन नेताओं के अलावा पीके अनिल कुमार ने औपचारिक रूप से सांसद एमवी श्रेयसकुमार की उपस्थिति में लोक तांत्रिक जनता दल (LJD) का दामन थामा है।

बता दें कि पार्टी नेताओं के इस्तीफे के बाद कॉन्ग्रेस नेतृत्व ने क्षेत्र में कार्रवाई की है। उन्होंने पार्टी के जिला नेतृत्व में संकट को खत्म करने के लिए कुछ नेताओं के समूह को नियुक्त किया है। इस क्षेत्र को राहुल गाँधी ने साल 2019 में लोकसभा चुनाव लड़ने के लिए चुना था। जहाँ से वह जीते भी।

कुछ दिन पहले उन्होंने वायनाड पहुँच कर उत्तर प्रदेश का मजाक उड़ाया था, जिसके चलते तमाम भाजपा नेताओं ने उनकी क्लास ली और समझाया कि जिस जगह ने उन्हें इतने दिन सर-आँखों पर बैठाए रखा, वहाँ से हारने के बाद वह भारत को दो भागों में बाँटने का काम नहीं कर सकते।

स्मृति ईरानी ने तो उन्हें यहाँ तक कहा था कि वह एहसान फरामोश हैं। वहीं शिवराज सिंह चौहान ने कहा था कि राहुल गाँधी जहाँ भी जाते हैं, वहाँ का बँटाधार करते हैं।

उल्लेखनीय है कि केरल में 140 विधानसभा सीटों के लिए मतदान 6 अप्रैल को एक ही चरण में निपटाया जाएगा। इसके परिणाम 2 मई को घोषित होंगे। हालाँकि इन तरीखों से पहले ही कॉन्ग्रेस टूटती नजर आ रही है। पलक्कड़ जिले में पूर्व डीसीसी अध्यक्ष और विधायक एवी गोपीनाथ ने यूथ कॉन्ग्रेस के अध्यक्ष शफी परंबिल के खिलाफ चुनाव लड़ने की धमकी दी है।

2013 से ही ‘वीर’ थे अनुराग, कॉन्ग्रेसी राज में भी टैक्स चोरी पर पड़े थे छापे, लोग पूछ रहे – ‘कागज दिखाए थे क्या’

तब कॉन्ग्रेस की सरकार थी। मतलब ‘लोकतंत्र’ था। फिर भी ‘फ्रीडम ऑफ स्पीच’ और ‘फ्रीडम ऑफ टैक्स चोरी’ जैसे ‘मूलभूत अधिकारों’ को कुचला गया था। देश में अंधेरा था… क्योंकि अनुराग कश्यप को मनमोहन सरकार ने 2013 में घेर लिया था।

55 लाख रुपए की टैक्स चोरी या छुपाने (जो भी तकनीकी शब्द लिखिए) के मामले में अनुराग कश्यप को श्रीलंका से शूटिंग छोड़ भारत आने का आदेश दिया गया था। 2013 का वो दिन लोकतंत्र के इतिहास का काला दिन था… आपातकाल की रातों से भी ज्यादा काला!

खैर! 8 साल बाद 2021 आ गया है। ‘फ्रीडम ऑफ टैक्स चोरी’ निरंतर जारी है। बस अब ‘चोर’ बड़े हो गए हैं। 55 लाख रुपए वाले ‘चोर’ अब करोड़ों में खेलने लगे हैं। अब लोकतंत्र भड़भड़ा कर आए दिन गिर जाता है।

टैक्स ‘चोरों’ के समर्थन में नेता खुलेआम उनकी वीरता और उनके नायाब और दुर्लभ कैरेक्टर के बारे में कविता लिखते हैं। 2 लाइन की कविता से मन नहीं भरता है तो फिर 10 लाइन का महाकाव्य भी लिख डालते हैं। अपनी पार्टी का तो पता नहीं लेकिन देश भर लोकतंत्र के खंभों को इन्हीं नेताओं ने बचा रखा है – क्योंकि इनके अनुसार ‘किसानों’ ने आत्मरक्षा में दिल्ली पुलिस पर हमला किया था।

लोकतंत्र में जनता सब देखती है, देख रही है। सोशल मीडिया पर जवाब भी देती है। जो टैक्स चोर होते हैं, वो जनता के ही पैसे को चुराते हैं। इसलिए जनता कविता लिखने वाले नेताओं और टैक्स चोरों के साथ मिल कर ‘मर गया लोकतंत्र’ के गीत गाने वालों को जवाब दे रही है। पढ़ा जाए 2-4 मस्त जवाब… अंग्रेजी में इसको “befitting reply” कहते हैं।

नोट: जहाँ-जहाँ ‘चोर’ लिखा गया है, उसे कृपया ‘टैक्स चोरी के आरोपित’ पढ़ें। वाक्य को छोटा और सहज करने के लिए ऐसा लिखा गया। कृपया इसका कोई अन्य आशय न निकालें।

2020 में टीवी पर सबसे ज्यादा देखे गए PM मोदी, छोटे पर्दे के ‘युधिष्ठिर’ बनेंगे बड़े पर्दे पर ‘नरेन’

पीएम नरेंद्र मोदी सोशल मीडिया पर बहुत बड़े फैन बेस होने के लिए जाने जाते हैं। 2017 में ही वह वैश्विक स्तर पर फेसबुक पर शीर्ष पर चल रहे नेता बन गए, पिछले साल, मोदी ट्विटर पर 50 मिलियन से अधिक फॉलोवर्स के साथ और तीसरे वैश्विक नेता के रूप में स्थापित होने वाले पहले भारतीय बन गए थे। हाल ही में कोलकाता में पीएम मोदी के उतरने की फोटो वायरल हुई, जिसे 24 घंटे से भी कम समय में फेसबुक पर 1 मिलियन से ज्यादा लाइक मिले। अब, ताजा आँकड़ों से पता चलता है कि उनके सोशल मीडिया फैन-बेस के समान ही, टेलीविजन पर पीएम मोदी का प्रभाव भी कई गुना बढ़ गया है।

ब्रॉडकास्ट ऑडियंस रिसर्च काउंसिल (BARC) ने 2019-2020 की सालाना टीवी व्यूअरशिप रिपोर्ट जारी की है। इसके मुताबिक, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पिछले साल भारत में टेलीविजन पर सबसे ज्यादा देखे जाने वाले व्यक्ति रहे हैं। चाहे वो कोविड-19 महामारी के दौरान दिए गए मोदी के संबोधन हो या कोविड वैक्सीन निर्यात करने में देश की अग्रणी भूमिका, लाल किले से दिया गया भाषण या किसान आंदोलन पर दिए गए भाषण हों। यह तमाम बातें इस रिपोर्ट में शामिल हैं।

प्रधानमंत्री मोदी के इम्पैक्ट को समझाते हुए BARC के इस रिपोर्ट में कहा गया है, “चाहे उनके मीडिया को दिए इंटरव्यू हों, वैश्विक कार्यक्रमों में दिए गए उनके भाषण, देश के लिए संबोधन हो और यहाँ तक कि डिस्कवरी पर दिखाया गया वाइल्डलाइफ एडवेंचर शो हो। हर तरह के कंटेंट ने उनकी व्यूअरशिप को लेकर नए रिकॉर्ड बनाए हैं।”

रिपोर्ट के अनुसार, साल 2019 में स्वतंत्रता दिवस के मौके पर दिए गए भाषण की तुलना में पिछले साल लालकिले पर दिए गए उनके लगभग 2 घंटे के भाषण की व्यूअरशिप 40 फीसदी ज्यादा थी। उनके इस भाषण को 133 मिलियन (13.3 करोड़) दर्शकों ने देखा था। इसी तरह 24 मार्च, 2020 को पहले लॉकडाउन की घोषणा वाले भाषण को जितने व्यूइंग मिनट मिले थे, उतने तो उनके किसी भी संबोधन को नहीं मिले थे।

BARC की रिपोर्ट में यह भी कहा गया है, “हर बार जब भी प्रधानमंत्री मोदी के कोरोनावायरस संबंधी भाषण हुए, तब जनरल एंटरटेनमेंट चैनल्स (जीईसी), फिल्मों और बच्चों के दर्शकों की संख्या में भारी गिरावट आई।” यहाँ तक कि 9 मिनट बत्ती बंद कर दीया या मोमबत्ती जलाने के उनके राष्ट्रव्यापी आह्वान ने भी जीईसी टीवी व्यूअरशिप में 60 फीसदी की गिरावट ला दी थी।

‘एक और नरेन’: पीएम मोदी के जीवन पर बनेगी एक और फिल्म

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की लगातार बढ़ती लोकप्रियता के बीच आज उनके जीवन पर बनने वाली एक और फिल्म की घोषणा हुई है। इस फिल्म में फिल्म अभिनेता गजेंद्र चौहान मुख्य भूमिका में होंगे। गजेंद्र चौहान ने बीआर चोपड़ा की महाभारत में युधिष्ठिर की भूमिका निभाई थी। अब वह प्रधानमंत्री मोदी पर बनने वाली फिल्म में मुख्य भूमिका निभाने जा रहे हैं। फिल्म का नाम ‘एक और नरेन‘ होगा। मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक इस फिल्म में प्रधानमंत्री मोदी और स्वामी विवेकानंद के जीवन चरित्रों को एक साथ दिखाया जाएगा।

फिल्म निर्देशक मिलन भौमिक ने गुरुवार (मार्च 4, 2021) को मीडिया को यह जानकारी दी। उन्होंने कहा कि फिल्म ‘एक और नरेन’ की कहानी में दो किस्से होंगे। एक में नरेंद्रनाथ दत्त के रूप में स्वामी विवेकानंद के कार्य और जीवन को दर्शाया जाएगा जबकि दूसरे में नरेंद्र मोदी के दृष्टिकोण को दिखाया जाएगा। भौमिक ने कहा कि फिल्म में दो हस्तियों के जीवन को पेश किया जाएगा। विवेकानंद ने अपना जीवन वैश्विक भाई-चारे के संदेश के प्रसार में समर्पित किया था। उसी तरह PM मोदी का जीवन भी राष्ट्र को समर्पित रहा है।

भौमिक ने कहा कि दूसरी शख्सियत नरेंद्र मोदी हैं जोकि भारत को एक नई ऊँचाई पर ले गए और वह राजनीति क्षेत्र के सबसे मशहूर नेताओं में शुमार हैं। इस अवसर पर, अभिनेता गजेंद्र चौहान ने कहा, “वह प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पिछले 20 वर्षों से निजी तौर पर जानते हैं। एक कलाकार के तौर पर ऐसी शख्सियत का किरदार निभाना उनके लिए बड़ी उपलब्धि है।”

‘मैं 25 की हूँ पर कभी सेक्स नहीं किया’: योग शिक्षिका से रेप की आरोपित LGBT एक्टिविस्ट ने खुद को बताया था असमर्थ

LGBT एक्टिविस्ट दिव्या दुरेजा पर हाल ही में एक योग शिक्षिका ने बलात्कार का आरोप लगाया है। दिव्या ने एक टेड टॉक (Ted Talk) के दौरान दावा किया था कि वह पेनिट्रेटिव सेक्स (penetrative sex) में असमर्थ है।

दिल्ली के कमला नेहरू कॉलेज में 2018 में यह टेडएक्स (TEDx) इवेंट हुआ था। उसने कहा था कि वह 25 की है और कभी सेक्स नहीं किया है, लेकिन इन्टमसी को महसूस करती है। उसने अपने फिजिकल इन्टमसी को लेकर बात की थी जो उसके अन्य महिला और पुरुष के साथ थे।

गौरतलब है कि इंस्टाग्राम पर Elodie नामक महिला ने दुरेजा पर रेप का आरोप लगाते हुए नॉर्थ गोवा के पर्नेम पुलिस थाने में FIR दर्ज कराई थी। इंस्टाग्राम पर अपना दुःख बयाँ करते हुए उन्होंने लिखा, “इसके बारे में लिखना काफी कठिन और दर्द भरा है। यहाँ तक कि ये शर्मिंदगी भरा भी है, इसके बावजूद भी कि मुझे पता है कि जो भी हुआ, उसके लिए मैं जिम्मेदार नहीं हूँ। मेरा शोषण करने वाली की लोकप्रियता को देखते हुए काफी समय तक हिचकिचाने के बाद मैं समुदाय के लिए इसे अच्छा समझती हूँ कि जो भी हो, उसके बारे में मैं बताऊँ। इसके लिए ऑफलाइन और ऑनलाइन, मैं दोनों माध्यमों का इस्तेमाल करूँगी।”

पीड़िता ने बताया था कि मानसिक स्वास्थ्य और LGBTQ एक्टिविस्ट होने के कारण वह दिव्या से खासी प्रभावित थी। यही कारण है कि दिव्या की लंच की पेशकश से वह मना नहीं कर सकती। Elodie का कहना है कि वो लंच के लिए दिव्या को लेने अश्वेम स्थित ‘होटल सी व्यू रिसोर्ट’ गईं, जहाँ दिव्या ने उन्हें अपने होटल के कमरे में बुलाया और बालों को ठीक करने को लेकर मदद माँगी।

पीड़िता ने लिखा था, “उसने मुझे मेरे पीठ के दर्द को ठीक करने का झूठा वादा किया और इसी बहाने उसने मुझे ड्रग्स देकर अपने कमरे में 6 घंटों तक बंद रखा। साथ ही उसने भूत-प्रेतों से बात करने वाली एक तंत्र क्रिया करने का भी ढोंग रचाया। उसने दवा किया कि हम दोनों एक-दूसरे से पिछले जन्म से ही जुड़े हुए हैं और हमारा मिलना लिखा हुआ था। और इस तंत्र क्रिया के बाद दोनों हमेशा के लिए साथ हो जाएँगे। आप जितना सोच सकते हैं, मुझे उससे कहीं ज्यादा विक्षिप्तता महसूस हुई। उसने मुझे बिना रुके 1 लिटर पानी पिला डाला। वो कह रही थी कि मुझे नकारात्मक ऊर्जाओं से बचाने के लिए ये ज़रूरी है।”

FIR में कहा गया है कि दिव्या ने पीड़िता के प्राइवेट पार्ट्स के भीतर अपनी उँगलियाँ घुसा डालीं और उसके शरीर पर जगह-जगह किस करने लगी। Elodie ने एक अंग्रेजी कविता भी पोस्ट की, जिसमें दिव्या ने लिखा कि दोनों हमेशा के लिए एक हो जाएँगे, यही भाग्य में लिखा है। पीड़िता ने लिखा कि काफी देर खड़े रखने के बाद दिव्या ने उन्हें बिस्तर पर भेजा।

पीड़िता के अनुसार, “उसने मेरे वजाइना में हाथ घुसा दिया। वो गहरी और गहरी घुसाती चली गई। मुझे खासा दर्द हो रहा था लेकिन वो कह रही थी कि वो एक पेड़ रोप रही है। जब मैं दर्द से चिल्ला कर वहाँ से जाने के लिए कहने लगी तो उसने कहा कि आओ प्यार करें। काफी देर बाद उसने कहा कि अब आत्मा ने आदेश दिया है कि वो जा सकती है। कई वेटरों ने भी ऐसा सुना और पुलिस के सामने बताया। दिव्या को फिर कस्टडी में लिया गया।”

माफिया मुख़्तार अंसारी के लिए SC में योगी से भिड़ी कॉन्ग्रेस सरकार: बाँदा जेल को न सौंपने के लिए पंजाब ने दीं ये दलीलें

पंजाब की कॉन्ग्रेस सरकार और गैंगस्टर से नेता बने मुख्तार अंसारी ने गुरुवार को सुप्रीम कोर्ट से कहा कि यूपी की योगी आदित्यनाथ की सरकार को उन्हें रूपनगर जेल से उत्तर प्रदेश के बाँदा जेल में ट्रांसफर करने की माँग करने का कोई मौलिक अधिकार नहीं है। वहीं यूपी सरकार ने सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाकर पंजाब की अमरिंदर सरकार और रूपनगर जेल प्रशासन को निर्देश देने की माँग की कि मऊ के विधायक माफिया मुख़्तार अंसारी की हिरासत जल्द से जल्द जिला जेल यूपी के बाँदा जेल को सौंप दी जाए।

मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, न्यायमूर्ति अशोक भूषण और न्यायमूर्ति आरएस रेड्डी की पीठ ने इस मामले में सुनवाई करते हुए कहा है कि वह उत्तर प्रदेश सरकार और मऊ के विधायक अंसारी की याचिकाओं पर फैसला सुनाएगी। वहीं योगी सरकार के डर से मुख्‍तार अंसारी ने अपने खिलाफ मामलों को यूपी के बाहर स्थानांतरित किए जाने की माँग की है। सुनवाई के दौरान उत्तर प्रदेश सरकार की ओर से सॉलिसीटर जनरल तुषार मेहता ने दलीलें दी। वहीं अंसारी की तरफ से वरिष्ठ वकील मुकुल रोहतगी ने दलीलें पेश की।

सुनवाई के दौरान, सॉलिसीटर जनरल तुषार मेहता ने जेल नियमों का हवाला देते हुए कहा कि भले ही राज्य के पास मौलिक अधिकार नहीं है… यह बात गलत है। राज्‍य पीड़ितों के अधिकारों का समर्थन कर सकता है। राज्य हमेशा पीड़ित और समाज की भूमिका का निर्वहन करता रहा है। माफिया मुख्‍तार अंसारी ने जेल नियमों का उल्लंघन किया है। ऐसे में पीड़ितों के अधिकार के साथ ही राज्य के अधिकार को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता है। अपराधी को किसी भी सूरत में निष्पक्ष सुनवाई बाधित करने की इजाजत नहीं दी जा सकती।

वहीं पंजाब सरकार और माफिया डॉन मुख़्तार अंसारी की तरफ से वरिष्ठ वकील मुकुल रोहतगी ने दलीलें पेश करते हुए कहा कि विपक्ष की एक पार्टी से जुड़े होने के कारण उन्‍हें निशाना बनाया जा रहा है। मैं अंसारी से जुड़े मामलों को उत्तर प्रदेश से बाहर स्थानांतरित करने का अनुरोध करता हूँ। इन्‍हें दिल्ली स्थानांतरित किया जा सकता है।

वहीं पंजाब सरकार की तरफ से पेश हुए वरिष्ठ वकील दुष्यंत दवे ने कहा कि यूपी में मुख़्तार अंसारी के खिलाफ पिछले 14-15 वर्षों से आपराधिक सुनवाई चल रही है। उत्तर प्रदेश की रिट याचिका सुनवाई के लायक नहीं है और इसको खारिज कर दिया जाना चाहिए।

गौरतलब है कि मुख़्तार अंसारी उगाही के एक कथित मामले में जनवरी 2019 से ही पंजाब के रूपनगर जिला जेल में बंद है। वह उत्तर प्रदेश में कई गंभीर आपराधिक मामलों में भी आरोपित है। योगी सरकार उन मामलों में सुनवाई के लिए कई बार यूपी पुलिस को पंजाब रवाना कर चुकी है लेकिन हर बार पंजाब की अमरिंदर सरकार अंसारी को बचाने के लिए कोई न कोई पैंतरे अपनाती रही है।

4 शहर-28 ठिकाने, ₹300 करोड़ का हिसाब नहीं: अनुराग कश्यप, तापसी पन्नू सहित अन्य पर रेड में टैक्स चोरी के बड़े सबूत

फिल्म डायरेक्टर अनुराग कश्यप, अभिनेत्री तापसी पन्नू सहित अन्य के ठिकानों पर आयकर विभाग (IT dept) की छापेमारी में बड़े पैमाने पर टैक्स चोरी पकड़े जाने की बात सामने आ रही है। आईटी डिपार्टमेंट की छापेमारी लगातार दूसरे दिन गुरुवार (4 मार्च 2021) को भी जारी रही।

चार शहरों- मुंबई, पुणे, दिल्ली और हैदराबाद के 28 ठिकानों पर कार्रवाई हुई है। सीबीडीटी ने बताया है कि आयकर विभाग सर्च और सर्वे ऑपरेशंस अंजाम दे रहा है। इसकी शुरुआत मुंबई में 2 फिल्म निर्माण कंपनियों, एक अभिनेत्री और दो टैलेंट मैनेजमेंट कंपनियों से 3 मार्च को हुई थी।

सीबीडीटी का कहना है कि 5 करोड़ रुपए कैश पेमेंट लेने की रसीदें तापसी पन्नू के घर से बरामद हुई हैं। कथित तौर पर टैक्स बचाने के लिए यह पेमेंट कैश के तौर पर ली गई। यही नहीं फिल्म प्रोडक्शन हाउस फैंटम फिल्म्स ने बॉक्स ऑफिस पर जितने कलेक्शन की बात कही थी, उससे ज्यादा रकम की जानकारी मिली है।

कंपनी के अधिकारी 300 करोड़ रुपए का हिसाब नहीं दे पाए हैं। यह भी बताया है कि फैंटम फिल्म्स की हिस्सेदारी बेचने के लिए उसका अंडरवैल्यूएशन किया गया। फैंटम फिल्म्स को 2018 में डिजॉल्व कर दिया गया था। शेयरों की कीमत कम दिखाई और लेनदेन में गड़बड़ी की। विभाग के अनुसार कुल 350 करोड़ की टैक्स अनियमितता से यह मामला जुड़ा हुआ है।

छापे के दौरान फर्जी खर्च के भी सबूत मिले हैं। इस दौरान 20 करोड़ की टैक्स चोरी का मामला सामने आया है। करीब इतनी ही टैक्स चोरी के दायरे में तापसी भी हैं। जाँच चलने तक 7 बैंक लॉकर्स के इस्तेमाल पर भी रोक लगा दी गई है।

आयकर विभाग की कार्रवाई की गाज अनुराग कश्यप और तापसी पन्नू के अलावा विकास बहल और मधु मंटेना पर भी गिरी है। अनिल अंबानी की रिलायंस एंटरटेनमेंट के सीईटो शुभाशीष सरकार, अफसर जैदी (CEO Exceed) और विजय सुब्रमण्यम (CEO Kwan talent management agency) भी कार्रवाई की जद में हैं।

बुधवार को अधिकारियों ने छापेमारी के दौरान इन फ़िल्मी हस्तियों से पूछताछ करते हुए कुछ इलेक्ट्रॉनिक डिवाइस और दस्तावेजों की जाँच की थी। विभाग के अधिकारी जानना चाहते थे कि आखिर टैक्स चोरी की रकम का बँटवारा कैसे हुआ। इससे क्या-क्या खरीदा गया और कहीं इस रकम को मनी लॉन्ड्रिंग के जरिए देश से बाहर तो नहीं भेजा गया।

अधिकारियों ने जाँच के दौरान कुछ इलेक्ट्रॉनिक डिवाइसों को कब्जे में लिया है। कहा जा रहा है कि तापसी और अनुराग के घर प्रवर्तन निदेशालय (ED) भी छापा मार सकता है। संभव है कि अनुराग और तापसी की व्हॉट्सएप चैट भी खँगाली जाए और जिन लोगों ने उनकी फिल्मों में निवेश किया उनसे भी पूछताछ हो।

इस रेड की खबर आते ही सोशल मीडिया पर हड़कंप मच गया। वहीं कॉन्ग्रेस और एनसीपी ने इस कार्रवाई को केंद्र सरकार का बदला कहा। जबकि केंद्र की मानें तो आईटी रेड कानून के मुताबिक हुई है।

गौरतलब है अनुराग कश्यप और तापसी पन्नू पहले ऐसे बॉलीवुड के जाने-माने चेहरे नहीं है जिन पर आईटी विभाग ने शिकंजा कसा हो। इससे पूर्व एकता कपूर के घर पर भी आईटी ने रेड मारी थी। ये मामला शूटआउट एट वडाला के रिलीज से पहले का है। इसी प्रकार कटरीना कैफ के घर पर भी साल 2011 में छापा पड़ा था। प्रियंका चोपड़ा के घर भी 2011 में छापेमारी हुई थी। इसी तरह 90 के दशक की मशहूर अदाकारा माधुरी दीक्षित के घर भी सालों पहले आईटी रेड पड़ी थी।

‘नमक हराम’ बागियों को TMC विधायक हमीदुल रहमान ने दी खुलेआम ‘धमकी’, कहा- चुनाव बाद उनके साथ ‘खेला होबे’

पश्चिम बंगाल में आठ चरणों में चुनाव ऐलान के साथ ही पश्चिम बंगाल में सियासी गर्मी बढ़ गई है। अलग-अलग दलों के नेता एक दूसरे के ऊपर जमकर हमले कर रहे हैं, इन सबके बीच टीएमसी के एक विधायक हमीदुल रहमान का धमकी भरा बयान चर्चा में है जिसके खिलाफ बीजेपी के बड़े नेताओं ने चुनाव आयोग से मिलकर शिकायत की है। इसके लिए टीएमसी विधायक रहमान ने धमकी भरे अंदाज में क्या कुछ कहा था उसे जान लेते हैं।

टीएमसी विधायक हमीदुल रहमान ने खुले मंच से विवादित भाषण के क्रम में वोटरों को खुलेआम धमकी देते हुए कहा कि जिसका नमक खाते हैं, उसकी नमकहरामी नहीं करते हैं। चुनाव बाद हम उन लोगों से निपट लेंगे, जो हमें धोखा देंगे। बेईमान लोगों के साध खेला होबे। हम सभी चाहते हैं राज्य में ममता बनर्जी एक बार फिर मुख्यमंत्री बनें।

दरअसल, टीएमसी विधायक हमीदुल रहमान ने कहा, “हमारे पूर्वजों का कहना है कि जिसका नमक खाते हैं उसके साथ नमकहरामी नहीं करते हैं। चुनावों के बाद, हमें उन लोगों से मिलना होगा जो हमें धोखा देंगे। बेईमान लोगों के साथ खेला होबे (खेल खेला जाएगा)। हम सभी दीदी को हमारे सीएम के रूप में देखना चाहते हैं।” यहाँ पश्चिम बंगाल में राजनीतिक हिंसा का लम्बा इतिहास देखते हुए लोग ‘खेला होबे’ को किसी संभावित हिंसा भरे धमकी के रूप में देख रहे हैं।

टीएमसी विधायक ने इसके साथ ही कहा, “इस महागठबंधन (कॉन्ग्रेस, लेफ्ट) को वोट देना, बीजेपी को रास्ता देने के समान है। अपना वोट खराब मत करना। हर घर ने दीदी (ममता बनर्जी) के विकास के विज़न को महसूस किया है।”

मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, भाजपा के एक प्रतिनिधिमंडल ने टीएमसी विधायक हमीदुल रहमान के खिलाफ चुनाव आयोग पर शिकायत दर्ज कराई है। भाजपा के धर्मेंद्र प्रधान, भूपेंद्र यादव, ओम पाठक, नीरज कुमार और डॉ संजय मयूख आदि कई बड़े नेता शिकायत दर्ज कराने शाम करीब पाँच बजे चुनाव आयोग के पास पहुँचे थे।

बंगाल बीजेपी के प्रभारी कैलाश विजयवर्गीय ने ममता बनर्जी के विधायक की धमकियों का जवाब देते हुए कहा, “हुबली में ममता बनर्जी ने कहा कि हम तो खेला करेंगे, खेला क्या होता है मतलब पोलिंग बूथ पर कब्जा, मतदाताओं को डराना, निष्पक्ष चुनाव न होना। ये सब खेला करने की कोशिश टीएमसी करना चाहती है और इसी बात को ध्यान में रखते हुए हमने सारी जानकारियों से चुनाव आयोग को अवगत कराया।”

यहाँ गौर करने वाली बात यह भी है कि इस तरह के बयान सिर्फ टीएमसी की तरफ से ही नहीं दिए जा रहे हैं। सभी दलों के नेता समय-समय पर ऐसे जहरीले बोल बोल रहे हैं। लेकिन जानकार की माने तो यह कहा जा रहा है कि ममता बनर्जा को लगता है- इस दफा चुनावी मुकाबले में सिर्फ बीजेपी है। लेफ्ट और कॉन्ग्रेस हारी हुई जंग लड़ रहे हैं। लिहाजा बीजेपी और टीएमसी के कार्यकर्ताओं के बीच एक तरफ सड़क पर झड़प होती है तो नेता जुबानी जंग के जरिए एक दूसरे को नीचा दिखाने में जुट जाते हैं। इसके अलावा भी हम सभी बंगाल की राजनीति में हिंसा की खबरें लम्बे समय से देखते सुनते आ रहे हैं। ऐसे में किसी भी तरह की संभावना से इंकार नहीं किया जा सकता।

गौरतलब है कि पश्चिम बंगाल की 294 विधानसभा सीटों पर आठ चरणों में विधानसबा चुनाव होंगे। पहले चऱण के मतदान 27 मार्च को शुरू होगा। इसके बाद 1 अप्रैल, 6 अप्रैल, 10 अप्रैल, 17 अप्रैल, 22 अप्रैल, 26 अप्रैल और 29 अप्रैल को वोटिंग होगी। नतीजे 2 मई को घोषित किए जाएँगे।

फ्रांस के चर्चों में 10000 बच्चों का शोषण: स्कैंडल की जाँच कर रहे आयोग को आशंका, 17 महीने में 6500 कॉल

फ्रांसीसी चर्चों में शोषण के शिकार हुए बच्चों की संख्या 10 हजार के करीब हो सकती है। यह आशंका चर्चों में बाल शोषण के मामलों की जाँच के लिए गठित स्वतंत्र आयोग के अध्यक्ष जीन मार्क सेवे (Jean-Marc Sauve) ने जताई है।

इस जाँच आयोग का गठन कैथोलिक चर्च की ओर से किया गया था। सेवे ने मंगलवार को कहा कि 1950 से अब तक कम से कम 10 हजार बच्चे चर्च में शोषण का शिकार हो सकते हैं।

रिपोर्टों के अनुसार सेवे ने कहा कि पिछले साल जून में तीन हजार बच्चों के पीड़ित होने का अनुमान लगाया गया था। यकीनी तौर पर असल पीड़ितों के मुकाबले यह संख्या काफी कम है। आयोग के कार्यों के बारे में जानकारी देते हुए एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में उन्होंने कहा, “आशंका है कि यह संख्या कम से कम 10 हजार हो सकती है।”

जून 2019 में एक हॉटलाइन शुरू की गई थी ताकि पीड़ित और चश्मदीद मामलों की जानकारी दे सकें। बताया जा रहा है कि शुरू होने के बाद 17 महीनों में इस नंबर पर 6,500 कॉल आए। सेवे ने कहा कि आयोग के समक्ष सवाल यह था कि कितनी संख्या में पीड़ित आगे आएँगे और अपने साथ हुए शोषण के बारे में बताएँगे।
उन्होंने कहा, “हमारे सामने बड़ा सवाल यह है कि कितने पीड़ित आगे आएँगे? क्या यह 25 फीसदी होगा? 10 फीसदी? 5 फीसदी या उससे भी कम?”

2018 में चर्चों में बच्चों के शोषण के लगातार मामले सामने आने के बाद उसी साल नवंबर में इस स्वतंत्र जाँच आयोग का गठन किया गया था। बिशप कॉन्फ्रेंस ऑफ फ्रांस की सहमित से इसका गठन किया गया। इस फैसले को मिली-जुली प्रतिक्रिया मिली थी। कुछ लोगों ने इसका समर्थन करते हुए पीड़ितों से आगे आकर आपबीती बताने की अपील की थी। वहीं, कुछ लोग इसकी सफलता को लेकर सशंकित थे।

20 सदस्यीय आयोग के सदस्य कानूनी, शैक्षणिक, चिकित्सकीय सहित अन्य पृष्ठभूमि से चुने गए थे। आयोग को 2020 के अंत तक अपनी अंतिम रिपोर्ट देनी थी। लेकिन, अब इसकी नई मियाद सितंबर 2021 तय की गई है।