पश्चिम बंगाल में चुनावों के नजदीक आते ही उसके तेवर अब पार्टी कार्यकर्ताओं के बयानों से नजर आने लगे हैं। राज्य में चुनावी हिंसा के आरोप झेल रही TMC के एक नेता ने एक कदम आगे बढ़ते हुए वोटरों के खुलेआम धमकी दी है कि वो पोलिंग बूथ में TMC के अलावा किसी और को नहीं घुसने देगा। TMC के इस कार्यकर्ता का ये वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है।
तृणमूल कांग्रेस के नेता का बयान : अपने कार्यकर्ताओं के अलावा पोलिंग बूथ में किसी को भी नहीं घुसने दूँगा pic.twitter.com/NGgyjgOvGA
आगामी विधानसभा चुनाव से पहले टीएमसी नेता मुदस्सर हुसैन ने वोटरों को धमकाते हुए कहा कि वो सिर्फ और सिर्फ उनके लोग को ही वोट डालने देंगे। वायरल वीडियो में हुसैन ने कहा, “अपने कार्यकर्ताओं के अलावा पोलिंग बूथ में किसी को भी घुसने नहीं दूँगा। सिर्फ हमारे लोग वोट डालेंगे। जो हमें वोट नहीं करेगा उसे बूथ पर आने की जरूरत नहीं है। वो घर पर आराम कर सकते हैं। जब केंद्रीय सुरक्षाबल बूथ पर होंगे तब हमारे लोग सड़क पर तैनात होंगे।”
टीएमसी नेता मुदस्सर हुसैन ने यह भी कहा कि जब केंद्रीय बल मतदान केंद्रों की रखवाली करेंगे, तो टीएमसी के लोग मैदान में होंगे। टीएमसी नेता ने कहा, “अन्य सभी पार्टियाँ खेल खेलेंगी, लेकिन हम एक अलग खेल खेलेंगे।”
इस चौंकाने वाली टिप्पणी पर प्रतिक्रिया देते हुए, पश्चिम बंगाल के भाजपा सांसद अर्जुन सिंह ने कहा, “इन दिनों पश्चिम बंगाल में कुछ भी हो सकता है। लोग अपने घरों में बंद हो रहे हैं। उन्हें धमकी दी जा रही है कि अगर वो घर से बाहर निकलेंगे तो मार दिया जाएगा। कई बार बच्चों का अपहरण कर लिया जाता है और उनके अभिभावक को धमकी दी जाती है कि अगर उन्होंने टीएमसी के लिए वोट नहीं किया तो उन्हें उनके बच्चे वापस नहीं मिलेंगे। हर वोटिंग बूथ में, आपको टीएमसी एजेंट मिलेंगे, जो खड़े होंगे और देखेंगे कि कौन किसके लिए वोट कर रहा है। ममता प्रशासन पूरी तरह से ध्वस्त हो गया है।”
बंगाल भाजपा के उपाध्यक्ष जय प्रकाश मजूमदार ने भी इस पर प्रतिक्रिया व्यक्त की और कहा, “ममता और उनके भतीजे अभिषेक के नेतृत्व वाली टीएमसी इस चुनाव को हिंसक बनाने के लिए उतारू हैं। दूसरी तरफ, हम भाजपा, शांति में विश्वास करते हैं और बंगाल के लोगों के अधिकारों के लिए खड़े हैं। हम चाहते हैं कि हर कोई बिना किसी डर या परेशानी के अपना वोट डाले।”
गौरतलब है कि कोयला घोटाला मामले में केंद्रीय जाँच ब्यूरो (CBI) के अधिकारी TMC सांसद और मुख्यमंत्री ममता के भतीजे अभिषेक बनर्जी की पत्नी रुजिरा बनर्जी को तलब करने के लिए उनके घर पहुँची थी। सीबीआई की तीन सदस्यीय दल ने अभिषेक बनर्जी की पत्नी को जाँच में शामिल होने के लिए कहा है।
रिपोर्ट के अनुसार, सीबीआई की टीम उन्हें कोयला तस्करी मामले में समन देने के लिए उनके घर गई थी। समन में लिखा था कि उन्हें 24 घंटे के अंदर सीबीआई दफ्तर उपस्थित होना होगा। सीबीआई की टीम दक्षिण 24 परगना के डायमंड हार्बर निर्वाचन क्षेत्र से टीएमसी सांसद अभिषेक से पूछताछ भी करेगी।
उन्नाव पुलिस ने तीन दलित लड़कियों को जहर दिए जाने वाली खबर पर फर्जी खबर फैलाने के आरोप में 21 फरवरी को आठ ट्विटर अकाउंट पर एफआईआर दर्ज की है। बता दें कि तीन लड़कियों में से दो की मौत हो गई, जबकि तीसरी बहन अस्पताल में भर्ती है और उसका इलाज चल रहा है।
FIR में कहा गया है कि इन ट्विटर अकाउंट्स ने झूठी जानकारी फैलाई थी कि इन लड़कियों का बलात्कार किया गया था, जबकि पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट में साफ तौर पर इससे इनकार किया गया। इन ट्विटर अकाउंट ने उनके शवों का घर वालों की मर्जी के खिलाफ अंतिम संस्कार किए जाने जैसी अफवाह फैलाकर आम जनता में आक्रोश पैदा करने का भी प्रयास किया।
भारतीय दंड संहिता (IPC) की धारा 153 और सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम की धारा 66 के तहत ‘द मोजो स्टोरी’ (बरखा दत्त की समाचार एजेंसी), निलिम दत्ता (यूनीफाइड पीपुल्स मूवमेंट के अध्यक्ष), @janjagranlive (जनजागरण लाइव- समाचार एजेंसी), SurajKrBaudh (आज़ाद समाज पार्टी का प्रवक्ता), @VijayAmbedkarUP (जय भीम आईटी टीम), @Abhaykumarazad9 (भीम आर्मी सदस्य), @Rahuldkkr (गाडगे यूथ ब्रिगेड नेता) और @BhimSenaChief (नवाब सतपाल तंवर) के खिलाफ मामला दर्ज किया गया है।
उत्तर प्रदेश फैक्ट चेक ने बरखा दत्त के ट्वीट को किया खारिज
19 फरवरी को, उत्तर प्रदेश सरकार के ही ‘उत्तर प्रदेश फैक्ट चेक’ अकाउंट ने बरखा दत्त द्वारा पोस्ट किए गए एक कथित फर्जी ट्वीट को खारिज कर दिया था। उन्नाव पुलिस ने कहा था कि ट्वीट में दावा किया गया कि पुलिस रात में लड़कियों का अंतिम संस्कार करना चाहती थी, जो भ्रामक था। दोनों लड़कियों का अंतिम संस्कार परिजनों द्वारा विधिपूर्वक किया गया है।
ट्वीट में दावा किया गया कि उन्नाव में मृत बालिकाओं का अंतिम संस्कार पुलिस रात में करना चाहती थी।#InfoUPFactCheck: उन्नाव पुलिस द्वारा अवगत कराया गया कि दोनों बालिकाओं का अंतिम संस्कार परिजनों द्वारा विधिपूर्वक किया गया है। pic.twitter.com/2oG9pYjCVU
— Info Uttar Pradesh Fact Check (@InfoUPFactCheck) February 19, 2021
अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक विनोद कुमार पांडे ने अपने बयान में कहा कि उन्नाव मामले के संबंध में आठ लोगों के खिलाफ भ्रामक प्रचार करने और सोशल मीडिया पर गलत जानकारी देकर भड़काने के आरोप में मामला दर्ज किया गया।
सोशल मीडिया पर विद्वेषपूर्ण,तथ्यों से परे,भ्रमात्मक एवं अफवाहजनक जानकारियों के प्रसार द्वारा जनभावनाएं भड़काने वालों के विरुद्ध कृत कार्यवाही के संदर्भ में अपर पुलिस अधीक्षक उन्नाव द्वारा दी गई बाइट @Uppolicepic.twitter.com/UMgyi8DJif
उत्तर प्रदेश में उन्नाव जिले के असोहा थाना अंतर्गत बबुरहा गाँव में कल एक खेत में तीन दलित लड़कियाँ बेहोशी की अवस्था में पड़ी मिली थी। उनमें से दो को कथित तौर पर डॉक्टरों ने मृत घोषित कर दिया, जबकि एक की हालत गंभीर है और जिला अस्पताल में उसका इलाज चल रहा है।
उन्नाव केस
गौरतलब है कि उत्तर प्रदेश के उन्नाव जिला स्थित बबुरहा गाँव में बुधवार (फरवरी 17, 2021) की शाम 13 और 16 वर्ष की आयु की दो लड़कियों (क्रमशः, काजल और कोमल) के शव खेत में पड़े मिले। इनके अलावा, एक 17 वर्षीय लड़की रोशनी, गंभीर हालत में पाई गई, जिसका कि कानपुर के अस्पताल में इलाज चल रहा है।
दोनों किशोरियों का पोस्टमॉर्टम करने वाले डाक्टरों का कहना था कि दोनों किशोरियों की मौत जहरीला पदार्थ खाने से हुई है। दोनों ने मौत से करीब 6 घंटे पहले खाना खाया था। दोनों के पेट में 100 से लेकर 80 ग्राम तक खाना मिला है। खाने में जहर होने की वजह से मौत हो गई।
उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ रविवार (फरवरी 21, 2021) को केरल पहुँचे। इस दौरान उन्होंने केरल में बढ़ते लव-जिहाद के विषय को उठाया और राज्य में सत्तारूढ़ वाम सरकार पर भ्रष्टाचार के आरोप लगाए। केरल के कासरगोड़ में भाजपा की ‘विजय यात्रा’ का शुभारंभ करते हुए सीएम योगी ने कहा, “भाजपा के कार्यकर्ता, जो CPM और अन्य तत्वों के खिलाफ मजबूती से लड़ाई करते हुए मूल्यों और आदर्शों की राजनीति करने के लिए समर्पित हैं, मैं उन सभी कार्यकर्ताओं का अभिनंदन करता हूँ।”
भाजपा के कार्यकर्ताओं जो CPM और अन्य तत्वों के खिलाफ मजबूती से लडाई करते हुए मूल्यों और आदर्शों की राजनीति करने के लिए समर्पित हैं, मैं उन सभी कार्यकर्ताओं का अभिनंदन करता हूं: उत्तर प्रदेश मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ, केरल के कासरगोड़ में भाजपा की ‘विजय यात्रा’ के उद्घाटन में pic.twitter.com/1Y5hsbgoqT
सीएम आदित्यनाथ ने केरल राज्य की वाम मोर्चा सरकार को निशाने पर लिया। सीएम योगी ने कहा कि वर्ष 2009 में केरल उच्च न्यायालय ने यहाँ की सरकार का ध्यान ‘लव जिहाद’ की ओर आकर्षित किया था, लेकिन यहाँ की सरकार ‘लव जिहाद’ के खिलाफ कोई कानून नहीं बना पाई। वहीं, दूसरी ओर उत्तर प्रदेश सरकार ने ‘लव जिहाद’ के खिलाफ सख्त क़ानून बना दिया है।
In 2009, a Kerala court said Love Jihad is part of a conspiracy to make Kerala an Islamic state. Despite this, govt is sleeping & doesn’t care about the conspiracy against Kerala & the country. No effective step has been taken. That is why Kerala needs BJP: UP CM Yogi Adityanath https://t.co/n54T0qW6VPpic.twitter.com/kgJn7vO2Pj
अपने भाषण में सीएम योगी आदित्यनाथ ने कहा, “वर्ष 2009 में केरल की एक कोर्ट ने कहा कि लव जिहाद केरल को इस्लामी राज्य बनाने की साजिश का हिस्सा है। इसके बाद भी यहाँ की सरकार सोई हुई है। उसे इस राज्य व देश के खिलाफ साजिश की परवाह नहीं की। लव जिहाद के खिलाफ कोई प्रभावी कानून नहीं बनाया गया, कोई कार्रवाई नहीं हुई। आज भाजपा केरल की आवश्यकता है।”
Whether it was CPM govt or Congress govt, they haven’t done anything but corruption. They have been playing with the feelings of people & created chaos in Kerala for political gains: Uttar Pradesh CM Yogi Adityanath in Kasargod, Kerala pic.twitter.com/pLEIAgK1D9
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने आगे कहा कि चाहे केरल में माकपा सरकार रही हो या कॉन्ग्रेस सरकार, उन्होंने सिवाय भ्रष्टाचार के कुछ नहीं किया। उन्होंने कहा कि ये लोग राज्य की जनता की भावनाओं से खेलते रहे और अपने राजनीतिक लाभ के लिए केरल को संकट में डाल दिया। उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री ने कहा कि वामपंथी और कॉन्ग्रेस सरकार द्वारा केरल की जमीन पर अराजकता फैलाकर इसका इस्तेमाल राजनीतिक स्वार्थ के लिए किया जा रहा है।
कॉन्ग्रेस सांसद शशि थरूर के खिलाफ केरल के तिरुवनंतपुरम की एक अदालत ने शनिवार (फरवरी 20, 2021) को समन जारी किया। शशि थरूर को 10 मई को अदालत में पेश होने के लिए कहा गया है। उनके खिलाफ नायर समुदाय की महिलाओं का अपमान करने का आरोप है। यह मामला शशि थरूर द्वारा लिखे गए एक उपन्यास पर आधारित है। शिकायत में कहा गया है कि उपन्यास, ‘द ग्रेट इंडियन नोवल’ केरल में नायर समुदाय की महिलाओं का अपमान करता है।
इससे पहले, शशि थरूर के खिलाफ समन के बावजूद अदालत में पेश नहीं होने के कारण गिरफ्तारी वारंट जारी किया गया था। कोर्ट ने 1 नवम्बर को इस मामले में नोटिस जारी कर थरूर को पेश होने का निर्देश दिया था।
जब कोर्ट की कार्यवाही शुरू हुई, तो न तो थरूर वहाँ मौजूद थे और न ही उनकी ओर से कोई वकील अदालत पहुँचा। इस पर फर्स्ट क्लास चीफ जूडिशियल मजिस्ट्रेट ने नाराजगी जाहिर की और उनके खिलाफ वारंट जारी कर दिया। इससे पहले भी नोटिस जारी करने पर थरूर कोर्ट नहीं पहुँचे थे।
संध्या श्रीकुमार ने दायर किया मामला
इस मामले में समुदाय की एक महिला ने शिकायत दर्ज कराई थी। संध्या श्रीकुमार ने कॉन्ग्रेस नेता थरूर के खिलाफ अतिरिक्त मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट के समक्ष एक निजी शिकायत दर्ज करवाई थी। संध्या श्री कुमार, एनएसएस के लोकल यूनिट नायर सर्विस सोसाइटी पेरुमथनी करायोगम की सदस्य हैं। यह संगठन नायर समुदाय का प्रतिनिधित्व करता है।
किताब को लेकर पहले भी विवादों में रहे थरूर
किताब को लेकर थरूर पहले भी विवादों में रह चुके हैं। 2014 और 2019 के लोकसभा चुनाव में भी यह मुद्दा उठा था। कॉम्युनिस्ट पार्टी की महिला इकाई ने महिलाओं के प्रति अपमानजनक शब्दों के लिए माफी माँगने को कहा था। थरूर पर 1989 में प्रकाशित उनके उपन्यास ‘द ग्रेट इंडियन नॉवेल’ में नायर समुदाय महिलाओं का गलत चित्रण करने का आरोप है।
इसमें 20वीं शताब्दी का राजनीतिक इतिहास बताने के लिए महाभारत के चरित्रों का इस्तेमाल किया गया है। किताब में पांडु नाम का किरदार नायर समुदाय की महिलाओं के बारे में आपत्तिजनक शब्द कहता है। इस पर कुछ संगठनों ने भी आपत्ति जताई थी।
पड़ोसी मुल्क पाकिस्तान में एक ऑनलाइन याचिका दायर की गई है। इस याचिका में माँग उठाई गई है कि ‘Islamabad’ (इस्लामाबाद) का नाम बदल कर ‘Islamagood’ (इस्लामागुड) कर दिया जाए।
इस याचिका को बांग्लादेश के रहने वाले ऐहम अबरार ने Change.org पर साझा किया था। याचिका में कहा गया था, “इस्लामाबाद को इस्लामागुड में तब्दील किया जाना चाहिए। इस्लाम असल में गुड (Good) है, पाकिस्तान को इस्लाम से प्रेम है। तब क्यों IslamaBAD? (इस्लामाबैड) बांग्लादेश से बहुत सारा प्यार।”
याचिका पर अब तक लगभग 335 लोग हस्ताक्षर कर चुके हैं और यह संख्या बढ़ ही रही है। यानी इतने लोग याचिका पर सहमति जता चुके हैं। याचिका दायर करने वाले अबरार का मानना है इस अभियान के लिए और भी लोग आगे आएँगे। याचिका का मिजाज़ ही कुछ ऐसा है कि कुछ ही देर में इसे लेकर पूरे सोशल मीडिया पर बहस छिड़ गई। इंटरनेट की जनता इस याचिका पर तमाम तरह की प्रतिक्रिया देने लगी।
इसके अलावा, पाकिस्तान के लोगों ने भी इस पर खूब प्रतिक्रिया दी।
यह पहला ऐसा मौक़ा नहीं है जब किसी जगह का नाम बदलने के लिए याचिका दायर की गई है। पिछले साल 2020 में कोलंबस (columbus) का नाम बदलने के लिए भी एक याचिका दायर की गई थी।
केरल के एर्नाकुलम जिले की कुन्नाथुनाडु पुलिस ने शनिवार (फरवरी 20, 2021) को 74 वर्षीय ईसाई पादरी मैथ्यू को एक नाबालिग लड़की के यौन उत्पीड़न के आरोप में गिरफ्तार किया है। गिरफ्तारी के बाद आरोपित को अदालत ने न्यायिक हिरासत में भेज दिया।
पुलिस ने कहा कि मैथ्यू पर प्रोटेक्शन ऑफ चिल्ड्रन फ्रॉम सेक्सुअल ऑफेंस (POCSO) एक्ट के कई प्रावधानों के तहत आरोप लगाए गए हैं। कुन्नाथुनाडु पुलिस स्टेशन के एक अधिकारी ने कहा, “ये अपराध कहाँ पर हुआ या फिर इससे संबंधित अन्य जानकारी का हम खुलासा नहीं कर सकते हैं क्योंकि इससे बच्ची की पहचान उजागर हो जाएगी।”
आरोपित मैथ्यू इडुक्की जिले के कोन्नथडी के पास मुक्कदम का निवासी है। पुलिस के अनुसार, अपराध जनवरी माह में हुआ था और लड़की की माँ ने घटना के बारे में कुन्नाथुनाडु पुलिस थाने में शिकायत दर्ज करवाई। पुलिस ने बताया कि आरोपित धार्मिक मामलों का प्रचार करने के लिए घर-घर में जाता था।
गौरतलब है कि हिंदुओं के देवी देवताओं को लात मारकर साधारण ग्रामों को ‘Christ Villages’ (क्राइस्ट विलेज) बनाने वाले ईसाई पादरी प्रवीण चक्रवर्ती को आँध्र प्रदेश की CID टीम ने 13 जनवरी 2021 को गिरफ्तार किया था। उसके व उसके संगठन साइलम ब्लाइंड सेंटर (Sylom Blind Centre’) के खिलाफ LRPF (Legal Rights Protection Forum) ने साल 2019 में गृह मंत्रालय में शिकायत दर्ज करवाई थी।
पादरी के ख़िलाफ़ विभिन्न धार्मिक समूहों के बीच दुश्मनी को बढ़ावा देने और पूजा स्थल में अपराध करने के लिए आईपीसी की विभिन्न धाराओं- 153 ए, 153 बी (1) (सी), 505 (2), 295 ए, 124 ए और 115 के तहत आरोप लगाए गए। उसके ऊपर सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम की धारा 66 f के तहत भी मामला दर्ज हुआ।
वहीं केरल के कोट्टयम के सेंट पायस कॉन्वेंट में रहने वालीं सिस्टर अभया की सदिंग्ध परिस्थितियों में मौत के 28 साल बाद तिरुवनंतपुरम की सीबीआई अदालत ने बुधवार (दिसंबर 23, 2020) को एक पादरी फादर थॉमस और नन सिस्टर सेफी को उनकी हत्या का दोषी पाते हुए उम्रकैद की सजा सुनाई।
सीबीआई अदालत ने प्रत्येक पर पाँच लाख रुपए का जुर्माना भी लगाया। अदालत ने कैथोलिक चर्च के फादर थॉमस कोट्टूर और सिस्टर सेफी को भारतीय दंड संहिता की धारा 302 (हत्या) एवं 201 (सबूतों के साथ छेड़छाड़ करना) के तहत मंगलवार (दिसंबर 22, 2020) को दोषी पाया था। अदालत ने फादर कोट्टूर को भारतीय दंड संहिता की धारा 449 (अनधिकार प्रवेश) का दोषी भी पाया। फादर कोट्टूर को पूजापुरा की केंद्रीय जेल भेजा गया, जबकि सिस्टर सेफी को यहाँ अत्ताकुलनगारा महिला जेल भेजा गया।
पश्चिम बंगाल में विधानसभा को लेकर सियासी खींचतान दिन प्रतिदिन बढ़ती जा रही है। राजनीतिक दलों के बीच जितना टकराव चुनावी ज़मीन पर जारी है उतनी ही ज़ोर आज़माइश सोशल मीडिया पर भी हो रही है। इसी क्रम में भाजपा ने एक अलग दाँव खेला है, जिसकी चर्चा पूरे ट्विटर पर हो रही है।
दरअसल भाजपा बंगाल के आधिकारिक ट्विटर हैंडल से एक वीडियो साझा किया गया है। इस वीडियो में एक गाना सुनाई दे रहा है, जो कि चर्चित वेब सीरीज़ मनी हाइस्ट के थीम सांग ‘बेला चाओ’ (Bella ciao) की तर्ज पर बंगाली भाषा में ‘रीक्रियेट’ (पुनर्निर्मित) किया गया है।
वीडियो में साफ़ सुना जा सकता है कि गाने में ‘बेला चाओ’ को ‘पिशी जाओ’ कहा गया है, जिसका हिन्दी में अर्थ होता है ‘आंटी जाओ’ (बुआ जाओ)। यानी कि भाजपा का ये संदेश पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी और उनके भतीजे अभिषेक बनर्जी के लिए है। वीडियो के गाने में और भी कई बातें कही गई हैं, जो प्रदेश के वर्तमान हालातों की सटीक तस्वीर बयाँ करती हैं।
गाने के बोल कुछ इस तरह हैं, “बांग्ला ए शुदु, दंगाबाजी, ओ पिशी जाओ, पिशी जाओ, पिशी जाओ, जाओ, जाओ। रास्ता बेहाल, बांग्ला ए अकाल पिशी जाओ, जाओ, जाओ, पिशी जाओ। कानो मिट्ठे, मिट्ठेहेर प्रोचार? पिशी जाओ, जाओ, जाओ पिशी जाओ।” इसका मतलब ये हुआ कि बंगाल में सिर्फ दंगे हो रहे हैं, आंटी जाओ। सड़कों की हालत अच्छी नहीं है इसलिए प्रदेश भी बुरी स्थिति में है, आंटी जाओ। आप खोखले दावों का मिथ्या प्रचार क्यों कर रही हैं? आंटी जाओ।
वीडियो के साथ ही एक कैप्शन भी दिया गया है, #BanglaDidirThekeMuktiChay मायने बंगाल को दीदी से मुक्ति चाहिए। ममता बनर्जी के समर्थक उन्हें आम तौर पर दीदी कहते हैं लेकिन आलोचक और तंज कसने वाले इस लाइन पर नहीं चलते हैं। वो प्रदेश की मुख्यमंत्री के लिए ‘आंटी’ शब्द का इस्तेमाल करते हैं। वीडियो फ़िलहाल सोशल मीडिया पर पर्याप्त सुर्ख़ियाँ बटोर रहा है। ख़बर लिखे जाने तक इस वीडियो को लगभग 22 हज़ार लोग देख चुके थे। इसके अलावा लगभग 1.6 हज़ार लोगों ने इसे लाइक किया और 1.2 हज़ार लोगों ने इसे रीट्वीट किया है।
दरअसल तृणमूल कॉन्ग्रेस ने हाल ही में एक नारा दिया था, “बांग्ला निजेर मेयेकेई चाए” मायने बंगाल को अपनी बेटी चाहिए। इस नारे के ज़रिए ममता बनर्जी को पश्चिम बंगाल की बेटी के रूप में दिखाया गया था। जिसके बाद भाजपा ‘पिशी जाओ’ लेकर आई।
बेला चाओ गाने की बात करें तो यह इटैलियन भाषा का ‘फोक सांग’ है। इसका मतलब होता है ‘अच्छा, बाय बाय’ जो कि अमूमन दमनकारी हुक़ूमतों के विरोध में गाया जाता है। यह पहली बार 1943 से 1945 के बीच गाया गया था, जब इटैलियन लोगों ने जर्मनी के नाज़ियों का विरोध किया था। हाल ही में महशूर वेब सीरीज़ ‘मनी हाइस्ट’ (money heist) ने इसका इस्तेमाल नए सिरे से किया था जिसके बाद इस गाने को युवाओं ने खूब पसंद किया था।
एक ऐसा शैक्षिक संस्थान, जो देश के 5 सर्वश्रेष्ठ संस्थानों में आता हो, वहाँ के छात्रों को अगर किसी बाहरी चीज से दिक्कत आए तो क्या सरकार और स्थानीय प्रशासन का फर्ज नहीं बनता कि वो उसे दूर करे? IIT बॉम्बे में ऐसा ही हो रहा है, जहाँ छात्रों ने कैम्पस से 1 किलोमीटर की दूरी पर स्थित एक मस्जिद से बजते भोंपू को लेकर समस्या जताई है। छात्रों का कहना है कि मस्जिद के लाउडस्पीकर से आती आवाज़ के कारण वो पढ़ नहीं पाते।
इस समस्या के बारे में अधिक जानने के लिए हमने IIT बॉम्बे के ही एक वरिष्ठ छात्र से बातचीत की। उन्होंने बताया कि दिन भर में कम से कम 5 बार मस्जिद के लाउडस्पीकर से अजान की आवाज़ आती है और ये समस्या कई हॉस्टलों में है। उन्होंने कहा कि जब एक-डेढ़ किलोमीटर दूर स्थित किसी मस्जिद से आवाज़ आ रही है, तो इसका मतलब है कि माइक काफी तेज़ आवाज़ में बजाया जा रहा है, जो कि सुप्रीम कोर्ट के भी दिशानिर्देशों का उल्लंघन है।
आगे बढ़ने से पहले एक बार वहाँ का नक्शा समझ लेते हैं। पवई झील (Powai Lake) के आसपास कई हॉस्टल मौजूद हैं। हॉस्टल्स से कुछ ही दूरी पर ‘Renaissance Mumbai Convention Centre’ नामक हॉस्टल स्थित है। वहाँ आपको हॉस्टल 12, 13, 14, 7 और 5 दिख जाएँगे। छात्रों का कहना है कि मस्जिद के लाउडस्पीकर की आवाज़ गूँजने की समस्या से ये सभी हॉस्टल जूझ रहे हैं। उन्हें पढ़ने-लिखने में परेशानी हो रही है।
अब बात करते हैं मस्जिद की। जिस मस्जिद की आवाज़ के कारण छात्रों को परेशानी हो रही है, उसका नाम है – ‘चाँद शाह वली सुन्नी मस्जिद’, जहाँ का रास्ता ‘दरगाह रोड’ से होकर जाता है। वहाँ चाँद शाह वली के नाम पर दरगाह, होटल और दुकानें भी स्थित हैं। हॉस्टल 12 से उक्त मस्जिद की दूरी करीब एक किलोमीटर है,जबकि हॉस्टल 13 तक 1.1 किलोमीटर। इस तरह ये 15-20 मिनट का पैदल रास्ता है।
चाँद शाह वली मस्जिद से कुछ ही दूरी पर स्थित हैं IIT बॉम्बे के हॉस्टल्स
उक्त छात्र ने हमें ये भी बताया कि खासकर जुमे के दिन उन्हें ज्यादा परेशानी होती है, क्योंकि उस दिन पूरे दिनभर विभिन्न कार्यक्रम होते रहते हैं और उसकी आवाज़ें गूँजती रहती हैं। कभी-कभी तो रात को भी तेज़ आवाज़ में माइक बजाए जाते हैं। उस क्षेत्र के आसपास जितने भी छात्र रहते हैं, उन्हें खासकर मस्जिद से आने वाली माइक की तेज आवाज़ से ज्यादा परेशानी है। ये हाल देश के सर्वश्रेष्ठ इंजीनियरिंग कॉलेजों में से एक का है।
छात्र ने बताया कि इस बात की शिकायत पिछले कई वर्षों से की जाती रही है। उनका कहना है कि स्टूडेंट वेलफेयर के डीन से शिकायत की गई थी, लेकिन उन्होंने कहा कि चूँकि ये मामला संस्थान के कैम्पस से बाहर की है, इसीलिए इस मामले में निदेशक या कुलपति से ही शिकायत की जा सकती है। लेकिन, छात्रों की दिक्कत ये है कि उन तक बात पहुँचाने के लिए खासी मशक्कत करनी पड़ती है।
मुंबई पुलिस से सितंबर, 2018 में ट्विटर पर की गई थी शिकायत
हमने एक छात्र से बात की, जिसने ट्विटर पर मुंबई पुलिस को टैग कर के इस मामले की शिकायत की थी। ये ट्वीट आज नहीं, सितम्बर 2018 में ही की गई थी। उक्त छात्र ने बताया कि मस्जिद के माइक का वॉल्यूम कभी भी बढ़ा दिया जाता है। मुंबई पुलिस सोशल मीडिया पर खासी सक्रिय है और अक्सर मीम्स के जरिए अपनी बात रखती आई है, ऐसे में हमने उक्त छात्र से पूछा कि क्या इस शिकायत का कोई जवाब आया?
जवाब चौंकाने वाला था। छात्र ने बताया कि मुंबई पुलिस ने उस ट्वीट के जवाब में लोकेशन भेजने को कहा। जब लोकेशन भेजी गई तो उन्होंने अपना ट्वीट ही डिलीट कर दिया। छात्र ने कहा कि उसने इसका जरा भी अंदाज़ा नहीं था कि पुलिस अपना ट्वीट डिलीट कर देगी, इसीलिए उसने इसका कोई स्क्रीनशॉट वगैरह नहीं लिया। उसने बताया कि कई जूनियर छात्र भी इस आवाज़ से परेशान हैं और समाधान खोज रहे हैं।
शिकायत करने की प्रक्रिया जटिल होने के कारण समस्या आ रही हैं। एक छात्र ने बताया, “हम प्रशासन में जाएँ। पुलिस से शिकायत करें। फिर हार्ड कॉपी और मेल द्वारा संस्थान के उच्चाधिकारियों को शिकायत करें। उन्हें बार-बार इसकी याद दिलाएँ। पढ़ाई के साथ-साथ ये सब कैसे होगा? इतनी भाग-दौड़ कौन करेगा?” सवाल जायज है, क्योंकि अधिकतर छात्र तो स्थानीय भी नहीं हैं। वो देश के अलग-अलग हिस्सों से आते हैं।
वास्तव में, समस्या एक मस्जिद नहीं है। वहाँ एक और मस्जिद है, जहाँ से माइक पर ऐसी ही तेज़ आवाज़ें आती हैं। IIT बॉम्बे के मार्किट गेट से कुछ दूरी पर भी एक ‘सुन्नी जामा मस्जिद’ है, जिसके लाउडस्पीकर की आवाज़ से छात्रों को समस्या है। संस्थान के कैम्पस से इस मस्जिद की दूरी आधा किलोमीटर भी नहीं है। वहाँ कुछ डिपार्टमेंट भी हैं। छात्रों का कहना है कि काँच से घिरे होने के बावजूद माइक की तेज़ आवाज़ उन्हें डिस्टर्ब करती है।
IIT बॉम्बे के मार्किट गेट के पास स्थित मस्जिद
याद दिलातें चलें कि मुंबई पुलिस गणेश चतुर्थी के समय वॉल्यूम कम रखने की अपील करना नहीं भूलती। 2018 की एक ट्वीट में उसने गणेश जी की फोटो लगा कर लिखा था कि आप जब भी वॉल्यूम बढ़ा रहे हैं तो आप किसी की शांतिपूर्ण सेलब्रेशन की प्रार्थना को नीचा दिखा रहे हैं। साथ ही ‘से नो टू नॉइज़ पॉल्यूशन’ का हैशटैग भी लगाया गया था। साथ ही एक उद्धरण लिखा था – “प्रार्थनाएँ हमेशा शांत होती हैं, आपके हृदय में एकदम गहरी।”
ऑपइंडिया ने इस मामले में पुलिस का पक्ष जानने के लिए पोवाई पुलिस थाने के इंस्पेक्टर (क्राइम) दिलीप गजानन धामुनसे से बात की, जिन्होंने बताया कि वो छुट्टी पर हैं। उन्होंने पुलिस चौकी पर कॉल करने को कहा, लेकिन वेबसाइट पर दिए गए दोनों टेलीफोन नंबरों पर पूरी घंटी जाने के बावजूद किसी ने जवाब नहीं दिया। IIT बॉम्बे के DSW उर्जित यजनिक के दफ्तर में कॉल करने पर भी किसी ने रिसीव नहीं किया।
मई 2020 में इलाहबाद हाईकोर्ट ने फैसला दिया था कि मस्जिद में लाउडस्पीकर्स बजाना इस्लाम का अभिन्न अंग नहीं है और न ही ये संविधान के अनुच्छेद-25 के तहत आता है। हाईकोर्ट ने कहा था कि अज़ान तो इस्लाम का अभिन्न अंग है, लेकिन लाउडस्पीकर से अजान नहीं। अनुच्छेद-35 के तहत मूलभूत अधिकारों की श्रेणी में भी ये नहीं आता है। बावजूद इसके काफी तेज़ आवाज़ में अजान होने की खबरें अक्सर सामने आती हैं।
CAA विरोधी आंदोलन के दौरान हमने बताया था कि कैसे वहाँ उन छात्रों का ब्रेनवाश किया जा रहा था, जो राजनीति में ज्यादा दिलचस्पी नहीं रखते। राजनीति से दूर रहने वाले प्रोफेसरों को बरगला कर उनका हस्ताक्षर ले लिया जा रहा था और उसे आईआईटी बॉम्बे का विचार बना कर पेश किया जा रहा था। शाहीनबाग़ में शुरू हुए प्रदर्शन के बाद आईआईटी बॉम्बे के सोशियोलॉजी विभाग के छात्र केंद्र सरकार के विरोध में ज्यादा सक्रिय रहे थे।
उत्तर प्रदेश स्थित बागपत जिले के सिंघावली थाना क्षेत्र के एक गाँव के खेत में सात वर्षीय मासूम बच्ची की हत्या कर दी गई। मीडिया रिपोर्ट्स में यह दावा किया गया कि इस घटना का किसी को पता न चले, इसलिए बच्ची के शव को खेत में ही छिपा दिया गया। खबरों के अनुसार, ग्रामीणों ने आशंका जताई थी कि दुष्कर्म के बाद हत्या की गई है। लेकिन सूचना के बाद पहुँची पुलिस ने शव का रात में ही पोस्टमार्टम कराया। अगली सुबह जब रिपोर्ट आई तो इसमें पुष्टि हुई कि बच्ची के साथ दुष्कर्म नहीं किया गया था।
मीडिया संस्थानों ने बागपत में बच्ची से दुष्कर्म के बाद हत्या का दावा किया है।#InfoUPFactCheck: यह दावा गलत है। इस संदर्भ में बागपत पुलिस द्वारा अवगत कराया गया है कि पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट के अनुसार बच्ची की दु:खद मृत्यु जंगली जानवर के हमले से हुई है। pic.twitter.com/mwjFjgtud0
— Info Uttar Pradesh Fact Check (@InfoUPFactCheck) February 21, 2021
इस घटना पर बागपत के पुलिस अधीक्षक अभिषेक सिंह ने 20 फरवरी 2021 को जानकारी देते हुए कहा, “जनपद बागपत के थाना सिंघावली अहीर क्षेत्रान्तर्गत कल रात एक सात वर्षीय बच्ची का शव बरामद हुआ था। उनके परिवार वालों के तहरीर पर नामजद, 302, 301 का मुकदमा दर्ज किया गया। नामजद अभियुक्त मनोज को गिरफ्तार करके उससे पूछताछ की जा रही है। प्रकरण की संवेदनशीलता को देखते हुए रात में ही बच्ची की डेड बॉडी का पोस्टमॉर्टम करवाया गया था। पोस्टमॉर्टम में मौत का कारण एन्टी मॉर्टम इन्जरी की वजह से हुआ शॉक एंड हैमरेज है। एन्टी मॉर्टम इन्जरी जानवर के काटने की वजह से बताई जा रही है। इसमें बच्ची के साथ किसी भी प्रकार का दुष्कर्म या लैंगिक अपराध नहीं हुआ है। मेरा ये निवेदन है कि किसी प्रकार का कोई अफवाह न फैलाएँ और यदि कोई इस प्रकार का अफवाह फैलाता है तो हम इसका खंडन करते हैं।”
दिनांक 20-02-2021 को थाना सिंघावली अहीर क्षेत्रान्तर्गत 7 वर्षीय बच्ची के साथ हुई घटना के संबंध में पुलिस अधीक्षक बागपत श्री अभिषेक सिंह द्वारा दी गई बाईट। pic.twitter.com/QQQsI5J5om
इसके साथ ही, बागपत पुलिस ने इस संबंध में एक बयान भी जारी किया है। इसमें कहा गया है, “उक्त घटना थाना क्षेत्र सिंघावली अहीर के बिल्लौचपुरा गाँव से संबंधित है, जहाँ पर महावीर द्वारा अपनी 7 वर्षीय पोती की हत्या करने का आरोप पड़ोसी मनोज एवं उसकी पत्नी के विरुद्ध लगाया गया है। इनका पूर्व में भी आपस में झगड़ा हुआ था। तत्काल सुसंगत धाराओं 302, 301 आईपीसी में अभियोग पंजीकृत कर आरोपित मनोज को हिरासत में लिया गया है। शव का पोस्टमॉर्टम डॉक्टरों के पैनल से कराया गया है। जिसमें दुष्कर्म अथवा लैंगिक हमले की पुष्टि नहीं हुई है। पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट में एन्टी मॉर्टम इन्जरी जंगली जानवर की पाई गई है। आवश्यक वैधानिक कार्रवाई की जा रही है।”
बता दें कि बागपत जिले में शनिवार देर रात एक सात साल की बच्ची का शव गन्ने के खेत से बरामद हुआ है। मीडिया रिपोर्ट में दावा किया गया कि उसके शरीर पर चोट के निशान मिले और शव गन्ने की पत्तियों को छिपाकर रखा गया था। बच्ची शनिवार की शाम से लापता थी। मीडिया रिपोर्ट में कहा गया था कि परिजनों ने पड़ोसियों पर दुष्कर्म के बाद हत्या करने का आरोप लगाया। हालाँकि बागपत के एसपी ने इस आरोपों का खंडन किया है।
दिल्ली के बेगमपुर में ‘लव जिहाद’ की घटना सामने आने के बाद क्षेत्र में तनाव व्याप्त है और मामला दो अलग-अलग समुदायों का होने के कारण वहाँ भारी संख्या में पुलिस बल की तैनाती की गई है।अब खबर आई है कि नाबालिग लड़की की हत्या करने वाला लईक खान को लड़की के परिवार वाले काफी मानते थे और उसे अपने परिवार का हिस्सा समझते थे। उसके साथ काफी अच्छा व्यवहार किया जाता था।
लईक खान बवाना औद्योगिक क्षेत्र में एक फैक्ट्री में काम करता था। करीब 2 वर्ष पहले उसकी मुलाकात मृतका से हुई थी, जो अपने सहेली के साथ वहाँ रहती थी। उसी सहेली के घर पर वो अक्सर जाता था और वहीं पर उसकी मुलाकात मृतका से हुई थी। बताया गया है कि वो काफी कम समय में लड़की के परिवार वालों के साथ घुल-मिल गया था। जब उसके पास घर नहीं था, तब इसी लड़की के परिजनों ने उसे आशियाना दिया था।
लईक कई दिनों तक पीड़ित परिवार के घर में रहता था और वहीं से काम करने भी जाता था। पीड़ित पिता ने कहा कि लईक को उन लोगों ने अपने बेटे से भी बढ़ कर माना, लेकिन उन्हें नहीं पता था कि वो इतना बड़ा विश्वासघात करने वाला है। वहीं मृतका के भाई ने भी बताया कि लईक खान ने फोन पर उसकी बहन को धमकी दी थी कि अगर उसने निकाह का प्रस्ताव नहीं माना तो वो उसे जान से मार डालेगा।
स्थानीय अख़बार में प्रकाशित खबर
मृतका ने अपनी माँ को शुक्रवार (फरवरी 19, 2021) को ही बताया था कि उसे फोन पर जान से मार डालने की धमकी दी गई थी, लेकिन परिवार को नहीं पता था कि इतनी जल्दी वो इतना बड़ा कदम उठा लेगा। आस-पास के लोगों का भी कहना है कि परिवार जिस पर इतने दिनों से भरोसा किए हुआ था, उसी ने ज़िंदगी में न भूलने वाला गम दे दिया। लईक खान फ़िलहाल फरार है और पुलिस को उसकी तलाश है।
बता दें कि आरोपित युवक ने लड़की के सामने शादी का प्रस्ताव रखा था, जिसे लड़की ने ठुकरा दिया था। पुलिस ने मामला दर्ज कर के उसकी तलाश शुरू कर दी है। पुलिस ने कहा है कि लईक खान ने हथौड़े से मृतका के सर पर वार किया था, जिससे उसकी जान चली गई। जब ये वारदात हुई, तब मृतका के परिजन सामान लेने बाजार गए हुए थे। माता-पिता जब वापस आए तो लड़की को जल्दी-जल्दी में अस्पताल लेकर गए, जहाँ डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया।