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केरल के ‘कोरोना मॉडल’ पर इतनी बातें, ड्रग्स, पॉलिटिकल मर्डर और लव जिहाद पर कब बात करेंगे कॉमरेड राहुल

बात जब गंभीर विमर्शों की हो तो कॉन्ग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गाँधी जैसे अपरिपक्व नेता, जिनकी सबसे बड़ी पूँजी ही परिवार का नाम है, की चर्चा का तुक नहीं बनता। गुरुवार (11 फरवरी 2021) को कॉन्ग्रेस के युवराज ने लोकसभा में ‘हम दो हमारे दो’, ‘अडानी-अंबानी’ टाइप ढेर सारी बातें की, जबकि चर्चा बजट पर थी। बावजूद उनका जिक्र भर क्योंकि वे केरल के वायनाड से ही लोकसभा पहुँचे हैं। वायनाड ने उन्हें तब सदन में भेज दिया, जब अमेठी की परंपरागत सीट पर 2019 के आम चुनावों में हार की आहट पाकर वे वहाँ गए थे।

इच्छा हो तो राहुल का ‘कालजयी’ भाषण यहॉं सुन सकते हैं

केरल एक ऐसा प्रदेश है जहाँ बारी-बारी से वाम दलों और कॉन्ग्रेस का गठबंधन सत्ता में रहता है। अभी लेफ्ट फ्रंट की सरकार है। दक्षिणपंथ के लिए यह अभी अभेद्य किला ही है। इस साल होने वाले विधानसभा चुनाव में इस खेमे का प्रभाव बढ़ने की उम्मीदें भी जताई जा रही है।

पर आपने कभी राजनीतिक विमर्शों में उन मुद्दों पर चर्चा सुनी है, जिनसे केरल जूझ रहा है। ऐसा नहीं है कि केरल के मुद्दे देश के राजनीतिक विमर्श में नहीं आते। कोरोना संकट के बाद लिबरलों ने केरल मॉडल का खूब झुनझुना बजाया था, जबकि तथ्य इस मॉडल के फ्लॉप होने की तस्दीक करते हैं। दिसंबर 2020 में कोरोना के जितने मामले देश में थे, उसमें 40 फीसदी महाराष्ट्र और केरल से ही थे। जनवरी 2021 में जब पूरे देश में संक्रमण में सुधार दिख रहा तब भी केरल मॉडल उछाल मार रहा था।

बावजूद इस मॉडल पर खूब शोर हुआ। लेकिन कभी आपने केरल के ड्रग्स के दलदल में धॅंसते जाने पर चर्चा सुनी है। केरल हाई कोर्ट ने अपनी टिप्पणी में कहा है कि केरल में नशीली दवाओं के इस्तेमाल की दर काफी ज्यादा है। न्यायालय ने इसे देखते हुए युवाओं और छात्रों को नशीली दवाओं का इस्तेमाल करने से रोकने के लिए कई दिशा-निर्देश जारी किए हैं।

लाइव लॉ की रिपोर्ट के अनुसार न्यायालय ने एक रिपोर्ट का विशेष तौर पर उल्लेख किया। इस रिपोर्ट के अनुसार राज्य में लगभग 400 शिक्षण संस्थान ड्रग्स की चपेट में हैं। ऐसे संस्थानों में से 74 फीसदी से ज्यादा स्कूल हैं। इसे देखते हुए अदालत ने शिक्षण संस्थानों में पुलिस कैंपस यूनिट के गठन का निर्देश राज्य सरकार को दिए हैं।

‘उड़ता पंजाब’ वाले लिबरल जमात के लिए भी यह कोई महत्वपूर्ण मसला नहीं है। शायद इसलिए क्योंकि उनके ‘वैचारिक पुरोधा’ सत्ता में हैं!

ड्रग्स की तरह ही केरल लव जिहाद से भी त्रस्त है। इसे देखते हुए पिछले दिनों बीजेपी ने कहा था कि यदि वह राज्य की सत्ता में आती है तो इसे रोकने के लिए कानून बनाएगी। केरल में ईसाई भी बढ़ते लव जिहाद से हलकान है। कुछ महीनों पहले राष्ट्रीय अल्पसंख्यक आयोग के जॉर्ज कुरियन ने केंद्रीय गृह मंत्रालय को पत्र लिख कर केरल में ईसाई लड़कियों को निशाना बनाए जाने की बात की थी। उन्होंने आँकड़ा दिया था कि 7 साल में केरल में 4000 महिलाएँ लव जिहाद की शिकार बनीं। कुरियन ने कहा था कि उन सभी का ब्रैनवॉश हुआ और जबरन इस्लाम में धर्मान्तरित किया गया। ढेरों पीड़ितों की आपबीती हैं जो बताती हैं कि कैसे उनको जान-बूझकर निशाना बनाया गया। फिर भी रवीश कुमार को यह हिन्दू-मुस्लिम सिलेबस का हिस्सा लगता है।

इसी तरह केरल में राजनीतिक हिंसा, खासकर संघ परिवार से जुड़े लोगों को जिस तरह निशाना बनाया जाता है, वह भयावह है। एक रिपोर्ट के मुताबिक मोटे तौर पर 2000 के बाद से केरल में 200 से ज्यादा पॉलिटिकल किलिंग हो चुकी हैं। इनमें से आधे तो केवल कन्नूर जिले में ही अंजाम दिए जाते हैं। सत्ता में नहीं होने पर कई मौकों पर वामपंथियों की हिंसा के शिकार कॉन्ग्रेस के भी कार्यकर्ता होते हैं। लेकिन कॉन्ग्रेस उसी तरह की रहस्यमयी चुप्पी साध लेती है, जैसा उसने मरीचझापी नरसंहार के वक्त किया था।

1979 में मरीचझापी द्वीप पर बांग्लादेशी नामशूद्रों का ऐसा नरंसहार किया गया था कि कई लोगों का दावा है कि इसकी वजह से सुंदरबन के बाघ आदमखोर हो गए। उस समय बंगाल की सत्ता में वामपंथी थे और विपक्ष में कॉन्ग्रेस। आज दोनों बंगाल के मैदान में साथ उतरने की तैयारी कर रहे हैं।

उस समय मरीचझापी को न तो वामदलों ने मुद्दा बनने दिया था और न कॉन्ग्रेस ने नामशूद्रों की फिक्र की थी। केरल में भी वही युगलबंदी है। वामपंथी न तो अपनी हिंसा पर चर्चा चाहते हैं, न लव जिहाद की साजिशों पर। ड्रग्स जैसे मुद्दे तो खैर कभी हमारी राजनीतिक विमर्श का हिस्सा ही नहीं बन पाए।

कॉन्ग्रेस को बचना है तो ‘हम दो (मॉं-बेटे), हमारे दो (लिबरल-लेफ्ट)’ से छुटकारा पाना ही होगा। फिलहाल इसकी उम्मीद दिखती नहीं!

73 देशों में हमारा संगठन, उनसे है हमारा गठजोड़: BKU वाले राकेश टिकैत ने कबूला ग्लोबल कनेक्शन

केंद्र द्वारा पारित तीन कृषि कानूनों के खिलाफ ‘किसान आंदोलन’ का नेतृत्व करने वाले प्रमुख नेताओं के रूप में उभरे भारतीय किसान यूनियन (बीकेयू) के प्रवक्ता राकेश टिकैत ने हिंदी न्यूज़ चैनल आज तक पर दिए एक इंटरव्यू में अपने ग्लोबल लिंक होने की बात स्वीकार की है।

आजतक के शो ‘सीधी बात’ पर पत्रकार प्रभु चावला से बात करते हुए टिकैत ने पुष्टि की कि वह जिस संगठन से जुड़े हैं, उसकी शाखाएँ 73 देशों में हैं और उनका भारतीय शाखा के साथ भी गठबंधन है। बीकेयू के प्रवक्ता ने आगे कहा कि उनके संगठन का प्रदर्शन ब्राजील देश में भी हो रहा है, जहाँ ब्राज़ीलियाई मजदूरों को किसानों में परिवर्तित करने का प्रयास किया जा रहा है। राकेश टिकैत ने कहा, “ब्राजील में हम मजदूर से किसान बना रहे हैं।”

हालाँकि, इंटरव्यू के दौरान टिकैत अंतरराष्ट्रीय सितारों, जैसे रिहाना, मिया खलीफा और पर्यावरण एक्टिविस्ट ग्रेटा थनबर्ग को नहीं जानने का दिखावा भी करते है, जिन्होंने भारत के किसान विरोध का समर्थन किया था। वहीं बातचीत के दौरान उन्होंने अनजाने में ही सही लेकिन विदेशों से अपने कनेक्शन के बारे में खुलासा कर दिया।

दुनियाभर में फैले संगठन की सभी 73 शाखाओं से मिल रहे समर्थन को लेकर प्रभु चावला द्वारा पूछे गए सवाल का जवाब देते हुए कि बीकेयू नेता ने पुष्टि की कि वे सभी सदस्य जिनकी विचारधारा उनके जैसे हैं, वह उनका समर्थन कर रहे हैं।

गणतंत्र दिवस के मौके पर ट्रैक्टर रैली प्रदर्शन के दौरान राष्ट्र की राजधानी में प्रदर्शनकारियों द्वारा हुए उपद्रव और हिंसा के लिए संदेह के घेरे में आए टिकैत ने साक्षात्कार के दौरान स्वीकार किया कि वह जिस संगठन से जुड़े हुए है वह आने वाले 50 सालों की नीतियों को लेकर पॉलिसी बना रहा है, जोकि आंदोलन के पीछे अंतरराष्ट्रीय स्तर चल रही बड़ी साजिश का खुलासा करता है।

गौरतलब है कि इस पूरे इंटरव्यू के दौरान राकेश टिकैत काफी भ्रमित दिखाई दिए, क्योंकि उन्हें पता ही नहीं था कि वह वास्तव में सरकार से क्या चाहते हैं या पिछले 75 दिनों से वे वास्तव में किस लिए विरोध कर रहे हैं। इस समय उन्हें बस इतना पता था कि वह बड़ी बहुराष्ट्रीय कंपनियों के खिलाफ मैदान में उतरे हुए हैं।

यहीं नहीं जब पत्रकार ने टिकैत को बताया कि इस साल एमएसपी में सरकार की धान खरीद का रिकॉर्ड ऊँचाई पर पहुँच गया है तो उनके चेहरे पर एक अजीब ही झुंझलाहट देखने को मिली। और वहीं जब कई बार सरकार द्वारा इस साल एमएसपी में अधिक धान खरीद के दावे को लेकर पत्रकार ने सवाल किया, तो टिकैत उनकी बातों से भागते नजर आए।

इसके अलावा भ्रमित बीकेयू नेता को यह कहते हुए सुना गया कि उनकी एकमात्र माँग यह है कि सरकार को यह आश्वासन देना चाहिए कि व्यापारी भी किसान की उपज एमएसपी या एमएसपी से अधिक कीमत पर खरीदेंगे।

बीकेयू नेता आगे दावा करते हैं कि प्रदर्शनकारी किसानों और सरकार के बीच सभी 11 दौर की वार्ता के दौरान, मंत्रियों में से किसी ने भी उनसे बात नहीं की। टिकैत ने कहा, “हम तो सरकार को ढूँढ रहे हैं। सरकार है कहाँ? उन्होंने आगे माँग की कि भारत के प्रधानमंत्री को बातचीत के लिए व्यक्तिगत रूप से समय प्रदान करनी चाहिए।

टिकैत के पूरे इंटरव्यू को यहाँ देखें।

उल्लेखनीय है कि राकेश टिकैत मौजूदा किसान आंदोलन का चेहरा रहे हैं। वह अपने राजनीतिक करियर की शुरुआत करने के लिए इस विरोध का तरह अपने फायदे के लिए इस्तेमाल कर रहे है। दिल्ली में 26 जनवरी को हुई हिंसक ट्रैक्टर रैली के पीछे एक बड़ी साजिश और आपराधिक घटना के मास्टरमाइंड का पता लगाने के लिए दिल्ली पुलिस ने भारतीय किसान यूनियन (बीकेयू) के नेता राकेश टिकैत के खिलाफ लोगों को भड़काने और उकसाने के आरोप में मामला दर्ज किया था।

गणतंत्र दिवस पर हुए हिंसा से पहले टिकैत का एक वीडियो वायरल हुआ था, जिसमें वह प्रदर्शनकारियों से ट्रैक्टर रैली में लाठी, झंडे लेकर चलने के लिए कह रहे थे। जिसके बाद गणतंत्र दिवस पर हुए ट्रैक्टर रैली के दौरान, प्रदर्शनकारियों ने राष्ट्रीय राजधानी में काफी उत्पात मचाया और पुलिस बैरिकेड्स को तोड़ते हुए हिंसा को अंजाम दिया।

हजारों प्रदर्शनकारियों ने लाल किले पर भी धावा बोल दिया, और इसकी प्राचीर पर खालिस्तानी झंडे को फहराकर भारत की संप्रभुता के प्रतीक को अपमानित किया। रैली के मद्देनजर जो हिंसा हुई उसमें 300 से अधिक पुलिस कर्मियों को गंभीर चोटें आईं। प्रदर्शनकारियों द्वारा बसों, निजी कारों और सरकारी संपत्तियों की भी तोड़फोड़ की गई थी।

हालाँकि, बाद में टिकैत ने हिंसा की जिम्मेदारी लेने से इनकार कर दिया, और केंद्र और दिल्ली पुलिस को गणतंत्र दिवस के व्यवधान के लिए दोषी ठहराया था।

लाल किला हिंसा में गिरफ्तार दीप सिद्धू की ‘गर्लफ्रेंड’ रीना रॉय रह चुकी हैं मिस साउथ एशिया: खुला वीडियो से जुड़ा राज

लाल किला पर हुई हिंसा के मुख्य आरोपित दीप सिद्धू के पकड़े जाने के बाद उसकी गर्लफ्रेंड रीना रॉय का नाम चारों ओर मीडिया में है। रीना ही वह शख्स हैं जिन्होंने सिद्धू के गायब होने के बाद इंटरनेट पर उनकी वीडियो पोस्ट की और जब पुलिस ने लोकेशन का पता लगाना चाहा तो पता चला कि वीडियोज विदेश (कैलीफोर्निया) से अपलोड हो रही हैं। 

कुछ दिन पहले जब दीप सिद्धू गिरफ्तार हुआ तो रीना का नाम प्रकाश में आया। अब पुलिस रीना के बारे में भी जानकारी जुटा रही है। वहीं डिजिटल मीडिया के पाठक भी ये जानने में उत्सुक हैं कि रीना कौन हैं? आइए आज इसी सवाल का जवाब देते हैं:

विभिन्न यूट्यूब चैनल्स पर मौजूद जानकारी के अनुसार रीना राय अपने ब्वॉयफ्रेंड दीप सिद्धू की तरह पंजाबी फिल्म इंडस्ट्री का मशहूर चेहरा हैं। सोशल मीडिया पर काफी एक्टिव रहने के अलावा वह अपने रिलेशनशिप के लिए भी चर्चा में रहती हैं। हालाँकि, दीप के साथ रिश्ते पर उन्होंने कभी खुल कर बात नहीं की थी।

हाल में जब दीप 26 जनवरी की हिंसा को लेकर विवादों में फँसा तो उसने विभिन्न फोन का इस्तेमाल करके रीना को अलग-अलग नंबरों से संपर्क किया। साथ ही टेलीग्राम एप्लीकेशन के जरिए उसे वीडियोज भेजी, जिसे रीना ने उसके फेसबुक से अपलोड किया।

दैनिक जागरण के अनुसार रीना की मुलाकात दीप से पंजाबी फिल्म की शूटिंग के दौरान हुई थी। कहा जाता है कि तो रीना का मकसद कभी फिल्मों में आने का नहीं था। उनके पास तो डिग्री भी फिजिशियन की है। मगर साल 2014 में जब उन्हें मिस साउथ एशिया यूएसए चुना गया तो उनका आत्मविश्वास बढ़ा और उन्होंने अभिनय जगत में खुद को आजमाया।

कई म्यूजिक वीडियोज में काम करने के बाद साल 2018 में रंग पंजाब नाम की फिल्म से रीना ने फिल्मों में कदम रखा। इसी फिल्म में दीप भी लीड रोल में थे। रीना का कहना था कि वह खुद को बहुत खुशकिस्मत समझती हैं जो उन्हें ये मौका मिला कि वो दीप के साथ फिल्म कर पाईं। बता दें कि सोशल मीडिया पर रीना की काफी फैन फॉलोइंग है। लेकिन उन्होंने अपना अकॉउंट प्राइवेट किया हुआ है।

अल्लाह-हू-अकबर का नारा और तलवार लहराते लोग: महाराष्ट्र में डिप्टी मेयर हाजी राशिद के जन्मदिन का Video वायरल

महाराष्ट्र के बुलढाणा जिले के मलकापुर नगरपालिका के डिप्टी मेयर हाजी राशिद जमादार के जन्मदिन का एक वीडियो सामने आया है। वीडियो में कई लोग मजहबी नारे लगाते और तलवारें हवा में लहराते दिख रहे हैं। वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल है।

पुलिस ने इस पर संज्ञान लेते हुए राशिद खान और उनके समर्थकों के ख़िलाफ़ आर्म्स एक्ट के तहत केस दर्ज कर 2 लोगों को गिरफ्तार किया है। वीडियो में स्पष्ट तौर पर नारा-ए-तकबीर, अल्लाह-हू-अकबर के नारे सुने जा सकते हैं। वहीं अन्य क्लिप में देख सकते हैं कि कोरोना काल में तमाम भीड़ के बीच समारोह का आयोजन हुआ और किसी नियम का पालन नहीं किया गया।

मलकापुर थाना प्रभारी के अनुसार 10 फरवरी को हाजी राशिद का जन्मदिन था। इसी कार्यक्रम में कुछ लोगों ने तलवारें लहराई। इसका वीडियो वायरल हुआ और उसी आधार पर पहचान कर दो लोगों को गिरफ्तार कर 5 तलवारें बरामद की गईं। आगे की कार्रवाई की जा रही है।

बता दें कि डिप्टी मेयर राशिद खान का जन्मदिन मलकापुर तहसील के म्यूनिसिपल स्कूल परिसर में मंगलवार और बुधवार की आधी रात को मनाया गया था। इस दौरान कार्यकर्ताओं ने शक्ति प्रदर्शन करते हुए तलवारों के साथ डांस किया।

सोशल मीडिया पर जो वीडियो सामने आई है उसमें भी कार्यकर्ता जोर-जोर से नारेबाजी कर रहे हैं। पुलिस का कहना है कि इस पार्टी में 100 से ज्यादा लोग शामिल हुए थे और किसी ने भी मास्क नहीं पहना था। मालूम हो कि महाराष्ट्र का यह इलाका संवेदनशील माना जाता है। पिछले कुछ सालों में यहाँ कई बार दो समुदायों के बीच विवाद हुए हैं।

‘सबसे ज्यादा आग लगाने वाला योगेंद्र यादव, आज पकड़ लिया जाए तो किसानों से होगी सीधी बात’: कॉन्ग्रेस सांसद

गणतंत्र दिवस (26 जनवरी) के दिन हुई हिंसा पर कॉन्ग्रेस सांसद रवनीत सिंह बिट्टू ने संसद ने अपना बयान दिया। इस बयान में बिट्टू ने किसान आंदोलन में फैलती अराजकता के लिए सीधे-सीधे योगेंद्र यादव को जिम्मेदार ठहराया। उन्होंने केंद्र सरकार से कहा कि यदि आज योगेंद्र यादव को पकड़ लिया जाए तो किसानों से बात करने का रास्ता आसान हो जाएगा।

पंजाब के लुधियाना से कॉन्ग्रेस सांसद रवनीत सिंह बिट्टू ने संसद में बताया कि 26 जनवरी वाली हिंसा के पीछे योगेंद्र यादव है। उन्होंने कहा ये आदमी 2018 तक इस बिल के समर्थन में था और आज सबसे ज्यादा आग लगाने वाला ये आदमी है।

वह योगेंद्र यादव पर निशाना साधते हुए कहते हैं, “अगर इस आदमी को आज भी पकड़ लिया जाए तो किसान और आपकी बातें सीधी हो जाएगी। कोई किसान आपका दुश्मन नहीं है। किसान देश के साथ है। ये जो झंडा लहराने वाले हैं ये योगेंद्र यादव और इसकी पार्टी के वो दुश्मन हैं जिनकी बाहर से खालिस्तानी फंडिंग हो रही है।”

उन्होंने कहा, “देश के झंडे के लिए ऐसा (अपमान करने की बात) सोच सकते है क्या पंजाब वाले। वहाँ बॉर्डर पर हम रोज मरते हैं, रोज जानें देते हैं। इस झंडे के शान के ख़िलाफ कोई सपने में भी सोच सकता है क्या। हम सोते भी रात में इस झंडे के सपने के साथ हैं और उठते भी हैं तो इसको सलाम करते हैं।”

गौरतलब है कि पिछले दिनों कॉन्ग्रेस सांसद रवनीत सिंह ने पहली बार योगेंद्र यादव को लेकर अपना गुस्सा जाहिर नहीं किया है। इससे पहले जब सिंघु बॉर्डर पर किसानों के आंदोलन में पहुँचे थे तो उनसे धक्का-मुक्की की गई थी। इसके बाद भी उन्होंने योगेंद्र यादव और अरविंद केजरीवाल पर निशाना साधा था। बिट्टू यह भी आरोप लगा चुके हैं कि किसानों के आंदोलन के पीछे खालिस्तान समर्थकों का भी हाथ है।

Newsclick ने अमेरिकी कंपनी से लिए 10 करोड़, CPI कनेक्शन भीः ED रेड के बाद सामने आए कई झोल

प्रवर्तन निदेशायल (ED) द्वारा मंगलवार (फरवरी 9, 2021) को न्यूजक्लिक (Newsclick) के संस्थापक प्रबीर पुरकायस्थ के घर छापेमारी किए जाने के बाद मीडिया गिरोह ने इस पर बवाल मचाना शुरू कर दिया है। एडिटर्स गिल्ड ऑफ इंडिया, प्रेस क्लब, सीपेजी एशिया ने इस छापेमारी की निंदा की है। एडिटर्स गिल्ड ने तो इसे अभिव्यक्ति की आजादी को दबाने वाला बताया है।

इस बीच ईडी के सूत्रों से पता चला है कि इस छापेमारी में उन्हें बेहद चौंकाने वाली जानकारी मिली। सूत्रों के अनुसार, छापेमारी के बाद ईडी को पता चला कि न्यूजक्लिक को FDI से वो 10 करोड़ रुपए मिले, जिनके बारे में वेबसाइट के मालिक प्रबीर को मालूम तक नहीं है कि वो आखिर उन्हें क्यों दिए गए।

इसके अलावा एक दूसरी अमेरिकी कंपनी से न्यूजक्लिक को 20 करोड़ मिले हैं। कथिततौर पर यह रुपया  Export Remittence के रूप में दिया गया। आगे, करीब 1.5 करोड़ रुपए मेंटेनेंस के नाम पर प्रबीर द्वारा लिया गया, जिसका काम एक इलेक्ट्रिशियन के हाथ में है और वह केवल 9वीं तक पढ़ा हुआ है।

सूत्र बताते हैं कि न्यूजक्लिक के मालिक के पास इन सब चीजों का कोई डॉक्यूमेंट तक नहीं हैं। इसलिए ईडी के पूछने पर भी वह कोई प्रमाण पेश नहीं कर पाए। लेकिन इस दौरान एक चीज और ईडी को पता चली कि कैसे इस कंपनी का संबंध एक राजनीतिक पार्टी से है।

दरअसल, न्यूजक्लिक में काम करने वाले एक शख्स को अमेरिकी कंपनी ने 52 लाख रुपए दिए थे, जिसका खुलासा भी ईडी के सामने हुआ। सूत्रों का कहना है कि ये व्यक्ति कम्युनिस्ट पार्टी से है। ये शख्स न केवल वामपंथी पार्टी का आईटी सेल सदस्य है बल्कि सीपीआई नेताओं के ट्विटर हैंडल भी संभालता है।

अब वामपंथी मीडिया गिरोह की तमाम निंदा के बावजूद इस छापेमारी से ये सवाल उठना लाजिमी है कि आखिर पत्रकारिता के नाम पर किस तरह प्रोपगेंडे को हवा दी जा रही है। विदेशी फंडिग और सीपीआई एंगल से साफ पता चलता है कि इनका सरोकार जर्नलिज्म से नहीं है। 

इस वेबसाइट को एक ही जगह रजिस्टर्ड अलग-अलग कंपनियों से बड़े पैमाने पर धन मिलने की बात भी ईडी के सामने आई है। इनमें एक डिफेंस सप्लॉयर कंपनी है, जिसने प्रबीर को भीमा कोरेगाँव दंगों के मुख्य आरोपित गौतम नवलखा के साथ मिल कर कंपनी खोलने के लिए 20 लाख रुपए दिए।

गौरतलब है कि इससे पहले प्रबीर की कंपनी पर 3 साल में 30 करोड़ रुपए से अधिक धन प्राप्त करने का आरोप लगा था। सूत्रों का कहना था कि अवैध तरीके से कमाई गई इस धनराशि का कंपनी की मुख्य व्यावसायिक गतिविधि से कोई लेना-देना नहीं है।

कहा गया था कि यह धन पत्रकारों या कार्यकर्ताओं को वेतन के नाम पर बाँटा गया । लाभार्थियों में तीस्ता सीतलवाड़ से जुड़े लोग भी शामिल हैं। अन्य लाभार्थियों में गौतम नवलखा, प्रंजॉय गुहा ठाकुरता आदि शामिल हैं।

‘चंदाजीवी’ पर घिरे अखिलेश यादव, निर्मोही अखाड़े के महंत बोले- ये सब गजनी के परिवार से

अखिलेश यादव ने लोकसभा में राम मंदिर के लिए चंदा इकट्ठा करने वाले लोगों को ‘चंदाजीवी’ संगठन का सदस्य कहा था। सपा सुप्रीमो और यूपी के पूर्व मुख्यमंत्री की इस बयान को लेकर काफी आलोचना हो रही है। संत समाज ने भी कड़ी प्रतिक्रिया दी है।

निर्मोही अखाड़े के महंत राजेन्द्र दास ने कहा कि गजनी ने हज़ारों-लाखों हिन्दुओं की हत्या करवाई थी। अखिलेश यादव उसके ही परिवार वालों में से एक हैं। जिन लोगों ने राम मंदिर आंदोलन के दौरान हज़ारों-लाखों को मरवा दिया था, ये सब गजनी के परिवार से हैं। इस तरह के लोगों को हिन्दू संस्कृति, राम मंदिर या चंदा के मुद्दे पर कुछ भी कहने का अधिकार नहीं है। इन नेताओं की वजह से सिर्फ हमारे धर्म को क्षति पहुँचती है। 

काशी में अखिल भारतीय संत समिति के प्रवक्ता और पातालपुरी मठ के मुखिया महंत बालकदास ने भी अखिलेश यादव पर टिप्पणी की। महंत बालक दास ने कहा कि अखिलेश यादव और उनके पिता मलायम सिंह यादव ‘मियाँ की औलाद’ हैं। पिता-पुत्र दोनों का ही कोई अस्तित्व नहीं है, दोनों ही सनातन धर्म, हिन्दू संस्कृति, राम मंदिर और साधू-संतों के विरोधी हैं इसलिए इनके बयानों पर ध्यान नहीं दिया जाना चाहिए। इसके अलावा महंत बालक दास ने अखिलेश यादव को अयोध्या में हुए गोलीकांड और काशी में हुई प्रतिकार यात्रा के दौरान साधु-संतों और बटुकों पर हुए लाठी चार्ज की याद दिलाई।

दरअसल मंगलवार (11 फरवरी 2021) को राष्ट्रपति के अभिभाषण पर धन्यवाद प्रस्ताव पर चर्चा के दौरान अखिलेश यादव ने कहा था, “हमारे देश को आंदोलन की वजह से आज़ादी मिली। आंदोलनों की वजह से देश के लोगों को कई अधिकार मिले, महिलाओं को वोट करने का अधिकार भी आंदोलन की वजह से ही मिला। अफ्रीका समेत देश और दुनिया में आंदोलन किया गया इसके बाद महात्मा गाँधी राष्ट्र पिता बने थे। उन आंदोलनों के बारे में क्या कहा जा रहा है? वो लोग आंदोलनजीवी हैं। मैं उन लोगों को क्या कहूँ जो लगातार चंदा लेने के लिए निकल जाते हैं। क्या वो चंदाजीवी संगठन के सदस्य नहीं हैं।”   

Koo में चीनी कंपनी के 10% से भी कम शेयर, वो भी बेच के बाहर होगी कंपनी: CEO ने दूर किया संशय

ट्विटर का देसी विकल्प तलाशने वाले जितनी जल्दी में koo ऐप की ओर शिफ्ट हो रहे हैं उसे देख ये भारतीय माइक्रोब्लॉगिंग प्लेटफॉर्म अपने नए यूजर्स को हर सुविधा देने की कोशिश कर रहा है। इस दौरान इस ऐप पर कुछ लोगों ने सवाल खड़ा कर ये बताया है कि इसका कनेक्शन चीनी इन्वेस्टर से है।

हालाँकि, ऐसे प्रश्नों के जवाब देते हुए koo के सह संस्थापक अप्रमेय ने अपने ट्विटर पर बताया कि एक चीनी कंपनी के पास उनका थोड़ा स्टेक है लेकिन वह प्रतिशत जल्द ही दूसरी कंपनियाँ खरीदने वाली हैं।

बुधवार को उन्होंने अपने ट्वीट में बताया कि KOO एक भारत में रजिस्टर्ड कंपनी है और इसके सभी संस्थापक भारतीय हैं। उन्होंने लिखा, “2.5 साल पहले पूँजी जुटाई थी। बॉम्बिनेट टेक्नोलॉजीस के लिए नए फंड्स भारतीय निवेशक 3one4 कैपिटल से मिले हैं। शुनवेई, जिसने हमारे वोकल में निवेश किया था, अब पूरी तरह से इससे बाहर जा रही है।”

अप्रमेय ने यह भी बताया कि कैसे लोग धड़ाधड़ उनकी एप्लीकेशन पर शिफ्ट हो रहे हैं कि उन्हें पहले से बहुत अधिक लोड झेलना पड़ रहा है। वह आभार व्यक्त करते हुए लिखते हैं, “हमें उम्मीद से अधिक प्यार मिला। हमारे सिस्टम ने इससे पहले कभी इतना लोड नहीं महसूस किया। अपना विश्वास दिखाने के लिए आभार। हम इस पर काम कर रहे हैं। हम इस दौरान आपका संयम और समय दोनों की कामना करते हैं। आइए इसे साथ में करते हैं।”

गौरतलब है कि ऐसे समय में जब देश में चीन के खिलाफ़ नाराजगी और गुस्से का माहौल हो, उस दौरान घरेलू ऐप में चीनी निवेश उस ब्रांड की छवि को खराब करने का काम कर सकता है। इसलिए KOO ऐप इसका पूरा ध्यान रख रही है। हाल में 30 करोड़ का फंड इकट्ठा किया गया है। इसके निवेशकों में पूर्व इंफोसिस सीएफओ मोहनदास पई द्वारा समर्थित 3one4capital भी शामिल है। इसके दूसरे निवेशक में कलारी कैपिटल और ब्लूम वेंचर्स का नाम भी शामिल है। बता दें कि मार्च 2020 में अप्रमेय और मयंक बिदावतका द्वारा स्थापित किया गया था, जिसे आज आत्मनिर्भर भारत की चुनौती का एक तरह का विजेता माना जा रहा है।

‘मैंने तुम जैसे कई कुत्ते देखे, पुलिस इन्हें यहाँ से निकालो’: रैली में विरोध से ‘दलित शक्ति’ पर भड़के तेलंगाना के CM

तेलंगाना के मुख्यमंत्री के चंद्रशेखर राव ने बुधवार (11 फरवरी, 2021) को एक रैली के दौरान विरोध कर रहे लोगों की तुलना ‘कुत्तों’ से कर विवाद खड़ा कर दिया है। मुख्यमंत्री के बयान की आलोचना करते हुए विपक्षी पार्टियों ने उनसे माफी की माँग की है।

रिपोर्ट्स के मुताबिक, नालगोंडा जिले के नागार्जुन सागर क्षेत्र में एक योजना की आधारशिला रखने के बाद CM ने रैली को संबोधित करते हुए यह विवादित टिप्पणी की। यहाँ उपचुनाव भी होने हैं। सीएम जब रैली को संबोधित कर रहे थे, उसी दौरान ‘दलित शक्ति’ नाम के महिलाओं और युवाओं का ग्रुप उन्हें ज्ञापन देना चाह रहा था। प्रदर्शन कर रहे लोगों ने रैली में ही विरोध करते हुए नारेबाजी शुरू कर दी और विरोध के तौर पर तख्तियाँ दिखाने लगे।

इससे केसीआर भड़क गए। उन्होंने कहा, “वो पेपर देना चाहते हैं, उनसे ले लो, मुझे शांति से सुनिए। अगर आप सुनना नहीं चाहते हैं तो कृपया यहाँ से चले जाएँ। ये पागलपन यहाँ मत दिखाएँ नहीं तो दंडित किए जाओगे। पुलिसकर्मियों इन्हें यहाँ से निकालो। बाकी लोग इनको नोटिस न करें। मैंने ऐसे बहुत ड्रामे देखे हैं। मैंने तुम जैसे कई कुत्ते देखे हैं। पुलिस इन्हें यहाँ से निकालो।”

सीएम ने प्रदर्शनकारियों को धमकी देते हुए कहा, “आप बस मुट्ठी भर लोग हैं। अगर हमारी तरफ से प्रतिक्रिया हो गई तो कुचलकर धूल में उड़ा दिया जाएगा। आपकी बेवकूफी से कोई बाधा नहीं पड़नी चाहिए। यहाँ से चले जाएँ नहीं तो आपको पीटा जाएगा।”

इस टिप्पणी के बाद सीएम केसीआर विपक्ष के निशाने पर आ गए हैं। कॉन्ग्रेस के तेलंगाना इंचार्ज और सांसद मणिकम टैगोर ने ट्वीट कर कहा, “तेलंगाना सीएम ने नागार्जुन सागर जनसभा में महिलाओं को ‘कुत्ता’ कहा, ये मत भूलो कि जो महिलाएँ वहाँ खड़ी थीं उन्हीं की वजह से आप अपनी कुर्सी पर हो। आपके शब्द आपके रवैए को बयान करते हैं। ये मत भूलो कि ये लोकतंत्र हैं। वो (लोग) हमारे बॉस हैं। माफी माँगों चंद्रशेखर।”

बीजेपी की राष्ट्रीय उपाध्यक्ष डीके अरुणा ने कहा, “केसीआर की ओर से महिलाओं और युवाओं के लिए इस तरह के शब्दों का इस्तेमाल किए जाना उनके चरित्र को दिखाता है। उनकी माँ तक इसके लिए शर्मसार होंगी।”

बीजेपी प्रवक्ता कृष्णा सागर राव ने इस टिप्पणी को हिंदुओं का अपमान बताया है। उन्होंने आरोप लगाते हुए कहा, “केसीआर ने दावा किया है कि उन्होंने राकासुलु (राक्षसों) से निपट कर उन्हें मात दी, इसलिए गोगासुलु (गाय चराने वालों) से निपटना उनके लिए कोई बड़ी बात नहीं है। उन्होंने इन शब्दों का इस्तेमाल तब किया जब वो बीजेपी को निशाना बना रहे थे। इससे स्थापित होता है कि वो ये बयान सीधे-सीधे हिन्दुओं और यादवों के संदर्भ में दे रहे थे। बीजेपी ने माँग की कि सीएम केसीआर बिना शर्त हिंदुओं से, खास तौर पर यादवों से माफी माँगे।”

राम मंदिर के खिलाफ प्रपंच: ऑल्ट न्यूज का मो. जुबैर फैला रहा था हिन्दू धर्म से जुड़ी 4 साल पुरानी खबर, पकड़ा गया तो डिलीट कर भागा

ऑनलाइन स्टाकिंग और मजहबी अपराधों को क्लीन चिट देने वाली वेबसाइट ऑल्ट न्यूज़ का सह संस्थापक ट्विटर पर फेक न्यूज़ फैलाते हुए पकड़ा गया है। मोहम्मद जुबैर ने पहले तो इस पर पर्दा डालने का प्रयास किया लेकिन जब लोग उसे अन्य नामों से संबोधित करने लगे तो मोहम्मद जुबैर ने अपना ट्वीट डिलीट कर दिया। मोहम्मद जुबैर द्वारा डिलीट किए गए ट्वीट को आप इस लिंक पर देख सकते हैं।

बृहस्पतिवार (फरवरी 11, 2021) सुबह मोहम्मद जुबैर ने एक अखबार की कटिंग ट्वीट की। इस खबर का शीर्षक था- “गो सेवा के नाम पर 20 लाख का दान जूता फरार हुआ पुजारी।” मोहम्मद जुबैर ने इस तस्वीर को शेयर करते हुए लिखा, “गाँव में गोशाला बनाने व मंदिर में भागवत कथा के नाम पर 15-20 लाख की राशि उसके हवाले कर दी। मौका लगते ही भगवाधारी बाबा मंदिर को ताला लगाकर कब गायब हो गया ग्रामीणों को पता ही नहीं चला।”

वास्तव में, जो तस्वीर मोहम्मद जुबैर ने ट्वीट की वो आज की खबर नहीं बल्कि चार साल पहले राजस्थान की एक घटना थी। राजस्थान में श्रीगंगानगर के गाँव में मंदिर का पुजारी गोसेवा के नाम पर दान में मिले लगभग 15 लाख रुपए लेकर फरार हो गया था। इस ठग के फरार होने के बाद लोगों ने पुलिस थाना में ग्रामीणों ने उसके खिलाफ 15 से 20 लाख रुपए लेकर फरार होने के आरोप में रिपोर्ट दर्ज की थी।

अनन्त गिरी नाम के इस ठग ने गाँव के लोगों को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और रामदेव के साथ अपनी कुछ फोटोशॉप की हुई तस्वीरें दिखाकर प्रभावित कर दिया था। जिसके बाद ग्रामीणों ने उसे शिव मंदिर में रहने की इजाजत दे डाली थी।

लेकिन मोहम्मद जुबैर का ये तस्वीर पोस्ट करने का असली उद्देश्य श्रीराम मंदिर निर्माण को लेकर चल रहे देशव्यापी समर्पण निधि अभियान से जुड़ा हुआ साबित करते हुए लोगों को गुमराह करने का था। खास बात ये है कि इस भ्रामक और पुरानी तस्वीर को ट्वीट करने वालों में मोहम्मद जुबैर अकेला नहीं था। ट्विटर पर और भी कई लोगों ने इस खबर को अलग-अलग समय पर भ्रामक तरीके से शेयर किया है।

जुबैर की ये घटिया हरकत देखकर एक ट्विटर यूजर स्नेहा संघवी ने लिखा है, “जिस तरह से राम मंदिर समर्पण निधि अभियान के कारण ये इतना परेशान हो रखा है और पुरानी तस्वीर शेयर कर रहा है, मैं सोच भी नहीं सकती कि जिस दिन श्रीराम मंदिर निर्माण पूरा हो जाएगा, उस दिन इसकी छाती पर कितने साँप लौटेंगे। जल-जल के काला हो जाएगा ये।”


एक अन्य ट्विटर यूजर ‘स्मोकिंग स्किल्स’ ने लिखा है, “मिलिए ट्विटर के आधिकारिक फैक्ट चेकर से, जो सांप्रदायिक तनाव पैदा करने के लिए पुरानी तस्वीर शेयर करता है।”