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स्वागत समारोह में गिरा राकेश टिकैत का मंच, लोगों ने ग्रेविटी को बताया ‘संघी’

केंद्र सरकार द्वारा लागू तीन कृषि कानूनों के खिलाफ किसान संगठनों के आंदोलन के 70वें दिन हरियाणा के जींद जिले में महापंचायत हो रही है। महापंचायत के लिए कंडेला गाँव पहुँचे राकेश टिकैत का जोरदार स्वागत हुआ। मगर मंच पर तय सीमा से कहीं अधिक लोगों की भीड़ जमा हो गई, जिससे वह टूट गया। अचानक मंच टूटने से राकेश टिकैत समेत अन्य नेता नीचे गिर पड़े। मौके पर हड़कंप मच गया।

जींद में महापंचायत में शामिल होने के लिए भारतीय किसान यूनियन के नेता राकेश टिकैत पहुँचे। कंडेला गाँव में 50 खापों के प्रमुख भी इस महापंचायत में शामिल होने अपने समर्थकों के साथ पहुँचे थे। मंच पर राकेश टिकैत का स्वागत करने और उन्हें माला पहनाने की होड़ मच गई।

महापंचायत के दौरान मचा हड़कंप

दर्जनों लोग एक साथ मंच पर आ गए और राकेश टिकैत का सम्मान करने लगे। इसी दौरान अचानक मंच टूट गया और राकेश टिकैत समेत अन्य नेता नीचे आ गिरे। मौके पर हड़कंप मच गया। आनन फानन में राकेश टिकैत को उठाया गया। कुछ देर बाद कार्यक्रम शुरू किया गया। इस घटना पर कटाक्ष करते हुए ट्विटर पर लोगों ने ग्रेविटी (गुरुत्वाकर्षण बल) को ‘संघी’ बता दिया है।

टिकैत के अलावा कई खाप नेता भी इस महापंचायत में शामिल हुए हैं। टेक राम कंडेला ने कहा कि किसानों के आंदोलन का समर्थन करने के लिए यह बड़ा जमावड़ा है। करीब दो दशक पहले हरियाणा में किसानों का आंदोलन चलाने वाली कंडेला खाप ने कृषि कानूनों के खिलाफ किसानों को अपना समर्थन दिया है। दूसरी खाप ने भी आंदोलन का समर्थन किया है। टेकराम कंडेला ने कहा कि आज के कार्यक्रम में कृषि कानूनों को निरस्त करने और न्यूनतम समर्थन मूल्य पर कानूनी गारंटी की माँग की जाएगी।

गौरतलब है कि पिछले दिनों भारतीय किसान यूनियन (BKU) के नेता राकेश टिकैत के रोने की तस्वीरें और वीडियो खूब वायरल किए गए थे, जिसके बाद कई नेताओं ने मामले को जातिवादी बना दिया, तो कइयों ने सहानुभूति लहर पर सवार होकर ‘किसान आंदोलन’ को फिर से ज़िंदा कर दिया। उनके रोने से 2 दिन पहले गणतंत्र दिवस (जनवरी 26, 2021) के दिन दिल्ली की ‘ट्रैक्टर रैली’ में जम कर हिंसा हुई थी। जिसके बाद सवाल उठने लगे कि क्या खालिस्तानियों ने उनकी पिटाई की थी?

मीडिया पोर्टल ‘Kreatey’ पर प्रकाशित एक खबर के अनुसार, राकेश टिकैत के रोने से पहले खालिस्तानियों ने टेंट के भीतर ही उनकी पिटाई की थी। प्रेस कॉन्फ्रेंस से पहले कुछ कट्टर सिखों ने उन्हें थप्पड़ और लातों से तो मारा ही था, साथ ही उनसे पैसे वापस लेने की भी धमकी दी थी। जबकि राकेश टिकैत ने रोते हुए दावा किया था कि प्रशासन किसानों का दमन कर रहा है और उनका आत्महत्या करने का मन कर रहा है।

‘कैमरे के सामने अपना नितम्ब हिलाने वाली पुसी कैट डॉल.. बिकाऊ पोर्न सिंगर…’: कंगना ने रिहाना को कुछ यूँ धोया

दिल्ली में चल रहे ‘किसान आंदोलन’ को लेकर प्रोपेगंडा फैलाने वाली रिहाना अचानक से पूरे भारतीय मीडिया और सोशल मीडिया में चर्चा का विषय बन गई हैं। उन्हें लेकर लेख लिखे जा रहे हैं। लेकिन, कंगना रनौत ने अमेरिकी-कैरिबियन गायिका को करारा जवाब देना बंद नहीं किया है। रिहाना को लेकर ‘ज़ी हिंदुस्तान’ ने एक लेख शेयर किया था कि वो कौन हैं, जिस पर अभिनेत्री कंगना रनौत ने प्रतिक्रिया दी।

इस पर प्रतिक्रिया देते हुए कंगना रनौत ने लिखा, “हाँ, कृपया बताइए। पूरा भारत जानना चाहता है। अगर सरल शब्दों में कहें तो वो सुनिधि चौहान और नेहा कक्कड़ की तरह ही है। उसमें भला क्या खास है? वो बम-चिक करते हुए अपने नितम्बों को हिलाती हैं और ठीक कैमरे के सामने अपने कमर के निचले हिस्से (Ass) को दिखाते हुए एकदम लेंस के सामने ले जाकर हिलाती है। बस यही है। इससे ज्यादा कुछ खास नहीं।”

कंगना रनौत ने रिहाना के लिए ‘बिकाऊ पोर्न सिंगर’ विशेषण का भी प्रयोग किया। उन्होंने लिखा कि भारत साथ है और प्रोपेगंडा के खिलाफ एक है। उन्होंने लिखा, “रिहाना! तुम शर्म करो।” उन्होंने खुद को संघी नारी बताया और रिहाना को ‘पुसी कैट डॉल’ नाम से सम्बोधित किया। उन्होंने भारत के लोगों को अपनी शक्ति भी दिखाने के लिए कहा। उन्होंने बताया कि पिछले 5 वर्षों में रिहाना एक गाना तक नहीं रिलीज कर सकी है।

कंगना रनौत ने लिखा, “लगता है कि कोरोना के कारण रिहाना का भी कारोबार ठप्प हो गया है, तभी उनके गाने नहीं आ रहे। फ़ोर्ब्स में ज़रूर आय दिखाई जाती है, लेकिन ये सब PR या पब्लिसिटी के लिए आजमाए गए तिकड़मों के लावा और कुछ नहीं है। उन्होंने लिखा कि एकाध मिलियन डॉलर अगर उनके पास आता है तो उन्हें क्या हर्ज है? 99% भारतीयों को इससे कोई फर्क नहीं पड़ता कि अमेरिकी कैसे जीते हैं।” अब ‘किसान आंदोलन’ पर ट्विटर पर ‘रिहाना बनाम कंगना रनौत’ ट्रेंड हो रहा है।

जिस लेख पर कंगना रनौत ने ये लिखा है, उसमें बताया गया है कि रिहाना हॉलीवुड की पॉप गायिका और अभिनेत्री हैं। ट्विटर पर उनके 10 करोड़ फॉलोवर्स हैं। फॉलोवर्स की इस संख्या के साथ रिहाना चौथे स्थान पर हैं। उन्होंने ‘Don’t stop the music’, ‘Love the way you lie’ और ‘Umbrella’ जैसे कई बड़े हिट गाने दिए हैं। रिहाना एक्ट्रेस भी हैं। वो हॉलीवुड फिल्म बैटलशिप और ‘Ocean’s 8’ में दिखी थीं।

उधर अब पूर्व पोर्न स्टार मिया खलीफा (Mia Khalifa) ने भी दिल्ली में चल रहे ‘किसान आंदोलन’ में अपने हाजिरी दर्ज की है। पॉर्न इंडस्ट्री में कई वर्षों तक काम कर के लोकप्रियता बटोर चुकीं अमेरिकी-लेबनानी मिया खलीफा ने 2014 में पॉर्न फिल्मों में एक्टिंग शुरू की थी और 2 महीने में ही सबसे ज्यादा देखी जाने वाली पॉर्न अभिनेत्री बन गईं। अब उन्होंने दिल्ली में चल रहे ‘किसान आंदोलन’ को लेकर मोदी सरकार पर मानवाधिकार उल्लंघन का आरोप लगाया है।

उत्तराखंड: सोशल मीडिया पर राष्ट्र विरोधी पोस्ट करने वालों के रद्द होंगे पासपोर्ट और हथियार लाइसेंस के आवेदन

उत्तराखंड पुलिस ने सोशल मीडिया पर देशविरोधी और भड़काऊ पोस्ट करने वालों पर नकेल कसने की पूरी तैयारी कर ली है। डीजीपी अशोक कुमार ने चेतावनी दी है कि अगर सोशल मीडिया पर कोई देशविरोधी या भड़काऊ सामग्री पोस्ट कर हालात बिगाड़ने का प्रयास करते हैं, तो इसका परिणाम उन्हें अपना पासपोर्ट और हथियार लाइसेंस बनवाते वक्त भुगताना होगा। यहीं नहीं, नौकरी के आवेदन के समय भी सोशल मीडिया पोस्ट को अब सुरक्षा के मद्देनजर आधार बनाया जाएगा।

पुलिस महानिदेशक अशोक कुमार ने ट्वीट कर यह जानकारी दी हैं। उन्होंने बताया, “सोशल मीडिया पर राष्ट्र विरोधी एवं असामाजिक पोस्ट करने वाले व्यक्तियों का रिकार्ड रखा जाएगा और भविष्य में उनके द्वारा पासपोर्ट एवं आर्म्स लाइसेंस के अनुरोध करने पर सत्यापन कार्यवाही में इसका उल्लेख भी किया जाएगा।”

उत्तराखंड पुलिस का कहना है कि पासपोर्ट आवेदन और शस्त्र लाइसेंस में सत्यापन के समय उक्त व्यक्ति के वेरिफिकेशन के लिए उसके सोशल मीडिया को भी खंगाला जाएगा। इसके रिकॉर्ड को रिपोर्ट के तौर पर आगे की जाँच के लिए बढ़ाया जाएगा। सत्यता पाए जाने पर आवेदन निरस्त भी किया जा सकता है। वहीं पासपोर्ट और शस्त्र लाइसेंस के अलावा अब नौकरी के आवेदन के समय भी इसी प्रकार की जाँच पड़ताल की जाएगी। ताकि युक्त साइबर अपराधों पर रोक लगाई जा सके।

गौरतलब है कि देहरादून में पुलिस मुख्यालय में आयोजित एक सम्मेलन के दौरान डीजीपी कुमार ने बताया, “अब तक, किसी भी व्यक्ति द्वारा सोशल मीडिया पर कोई भी राष्ट्र-विरोधी पोस्ट डालने के मामलों में, पुलिस पहले उसकी काउंसलिंग करती थी, उसे भविष्य में इसे न दोहराने के लिए कहती थी। वहीं गंभीर मामला सामने आने के दौरान ही केवल मामला दर्ज किया जाता था।”

डीजीपी ने कहा, “लेकिन अब से, पुलिस आरोपित व्यक्ति के सोशल मीडिया व्यवहार की जाँच करेगी कि क्या उसे ऐसी राष्ट्र विरोधी पोस्ट डालने की आदत है। साथ ही यह भी देखा जाएगा कि उसकी सोशल मीडिया पर किस तरह की गतिविधियाँ रहती थी। यदि राष्ट्र विरोधी रहीं तो उसके खिलाफ निगेटिव रिपोर्ट लगाकर आवेदन रद्द कराने की संस्तुति की जा सकती है।

इस मामले को लेकर एक अन्य पुलिस अधिकारी ने कहा, “यह निर्णय इसलिए लिया गया क्योंकि राज्य में सोशल मीडिया पर राष्ट्र विरोधी पोस्ट डालने वाले लोगों की संख्या लगातार बढ़ रही है। सोशल मीडिया मॉनिटरिंग टीम ऐसे पोस्ट और लोगों को ट्रैक करने के लिए उनपर कड़ी निगरानी रख रही है क्योंकि यह कानून के लिए एक स्पष्ट खतरा है।”

पुलिस ने यह भी कहा कि, “ड्रग्स माफियाओं एवं साइबर क्राइम के अपराधियों के विरूद्ध गैंगस्टर के अन्तर्गत कार्रवाई एवं उनकी अवैध रूप से सम्पत्ति को जब्त किया जाएगा।”

NSUI ने राम मंदिर के लिए शुरू किया चंदा अभियान, वामपंथियों ने चेताया- बंद नहीं किया तो कॉन्ग्रेस खो देगी परंपरागत वोट

राजस्थान में कॉन्ग्रेस की छात्र विंग NSUI ने राम मंदिर निर्माण के लिए अभियान शुरू किया है। इस अभियान का नाम है- ‘1 रुपया राम के नाम’। कहा जा रहा है इस पैसे को इकट्ठा करके अयोध्या में राम मंदिर निर्माण के लिए दिया जाएगा। NSUI ने भी स्वयं कहा कि वह 15 दिन की इस पहल से मिली राशि को अयोध्या के राम मंदिर अधिकारियों को सौंप देंगे। 

कार्यक्रम की शुरुआत जयपुर के कॉमर्स कॉलेज से की गई। NSUI के प्रदेश अध्यक्ष अभिषेक चौधरी ने बताया कि इसका मकसद स्पष्ट रूप से समाज के सभी लोगों को इस नेक कार्य से जोड़ना है। उन्होंने कहा कि राममंदिर निर्माण के लिए चंदा एकत्रित करने का काम प्रदेश के सभी जिलों में संगठन के पदाधिकारी करेंगे।

इसके अतिरिक्त यह भी बताया गया कि कार्यक्रम 15 दिनों तक चलाया जाएगा। छात्र संगठन की ओर से कार्यक्रम को लेकर कहा गया है कि वह न सिर्फ कॉलेज बल्कि प्रदेश के सभी स्कूली छात्र-छात्राओं के बीच भी चंदा माँगने जाएँगे।

बता दें कि एक तरफ कॉन्ग्रेस की छात्र ईकाई इस अभियान को शुरू करके आरएएस पर हमला.बोल रही है और ये जता रही है कि एक रुपया व एक करोड़ दोनों बराबर हैं। वहीं पार्टी के दिग्गज नेताओं ने इस अभियान पर आपत्ति जताई है।

पार्टी नेता पवन बंसल ने कहा कि दिल्ली के लेवल पर राम मंदिर के लिए कॉन्ग्रेस की चंदा इकट्ठा करने की कोई योजना नहीं है। उनसे संपर्क किया गया था, लेकिन उन्होंने इसके लिए मना कर दिया। वह कहते हैं, “मेरे लिए धर्म मेरी व्यक्तिगत आस्था और निजी मामला है, कॉन्ग्रेस पार्टी के तौर पर सेकुलर है, भाजपा ने राम मंदिर के नाम पर कई बार चंदा इकट्ठा किया है।”

उधर राणा अयूब ने भी इस अभियान की जानकारी होने पर ट्विटर पर आपत्ति जाहिर की। उन्होंने पीटीआई की खबर को शेयर करते हुए लिखा, “ओह हेलो! राहुल गाँधी।” हालाँकि, बाद में उसे डिलीट कर दिया गया।

इसके अलावा कई अन्य कट्टरपंथियों ने भी इस जानकारी पर एनएसयूआई का विरोध किया था। उस्मान अहमद ने लिखा, “आखिर इसकी जरूरत क्या है? तुम्हें मालूम है कि राम मंदिर अवैध भूमि पर बन रहा है, ये सुप्रीम कोर्ट के निर्णय में भी। मुस्लिम आखिर कॉन्ग्रेस का समर्थन ही क्यों करें।”

मो शान ने कहा, “राम मंदिर का फ़ैसला भाजपा की वजह से आया है अब एनएसयूआई या कॉन्ग्रेस का कोई भी संगठन कुछ भी कर ले, राम मंदिर के नाम पर वोट नहीं ले पाएँगे। उल्टा ग़लत फ़ैसले को समर्थन करने की वजह से परंपरागत वोट का नुक़सान ही होगा। समय रहते NSUI ये बंद करे ताकि कॉन्ग्रेस का नुक़सान न हो।”

राजद्रोह के आरोपों के खिलाफ SC की शरण में पहुँचे शशि थरूर और राजदीप सरदेसाई

राजद्रोह के मामले में फँसे पत्रकार राजदीप सरदेसाई और कॉन्ग्रेस नेता शशि थरूर ने अब सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया है। दिल्ली में एक प्रदर्शनकारी ‘किसान’ की मौत होने के बाद इन दोनों ने सोशल मीडिया के जरिए अफवाह फैलाई थी, जिसके बाद कई राज्यों में इनके खिलाफ FIR दर्ज करवाई गई थी। हिंसा भड़काने के मामले में दोनों आरोपितों ने अब सुप्रीम कोर्ट से राहत पाने के लिए याचिका दायर की है।

इन दोनों के अलावा, वरिष्ठ पत्रकार मृणाल पांडे, जफर आगा, परेशनाथ और अनंतनाथ जैसों ने भी अपने खिलाफ दर्ज मामलों को सर्वोच्च न्यायालय में चुनौती दी है। नोएडा के सेक्टर 20 थाने में अभिजीत मिश्रा की शिकायत के बाद राजद्रोह का मामला दर्ज किया गया था। इसमें कॉन्ग्रेस नेता शशि थरूर और टीवी पत्रकार राजदीप सरदेसाई सहित 7 आरोपितों के नाम हैं। आरोप है कि इन सभी ने फेक न्यूज़ फैला कर दंगा भड़काने की साजिश की।

अपनी शिकायत में मिश्रा ने कहा कि वह परिवार के साथ सेक्टर 74 सुपरटेक केपटाउन में निवास करते हैं। उनका आरोप है कि गणतंत्र दिवस के दिन दिल्ली में हुई हिंसा के पीछे तिरुवनंतपुरम से कॉन्ग्रेस सांसद शशि थरूर, हाल ही में ‘इंडिया टुडे’ से ऑफ एयर किए गए पत्रकार राजदीप सरदेसाई, पत्रकार मृणाल पांडेय, पत्रकार जफर आगा, परेशनाथ, अनंतनाथ, विनोद जोशी और एक अज्ञात – ये सभी शामिल हैं।

शिकायतकर्ता ने जनवरी 26 को दिल्ली में हुई हिंसा को जानबूझ कर अंजाम दी गई वारदात करार दिया है। उन्होंने इसे षड्यंत्र बताते हुए कहा कि सब कुछ एक सुनियोजित साजिश के तहत किया गया और इन लोगों का उद्देश्य था कि दिल्ली में दंगा होने के साथ-साथ सरकारी कर्मियों की हत्या भी हो। साथ ही गुमराह करने वाली और उकसाने वाली खबरें फैलाने के आरोप लगे। विभिन्न समुदायों के बीच वैमनस्य फैलाने का आरोप भी लगाया गया है।

नोएडा के अलावा भोपाल के मिसरोद थाने में भी राष्ट्रद्रोह की धाराओं के तहत शशि थरूर, राजदीप सरदेसाई, मृणाल पांडे सहित 8 लोगों के खिलाफ FIR दर्ज की गई थी। भोपाल के ASP ने बताया था कि किसान आंदोलन की आड़ में इन शशि थरूर पर ऐसा ट्वीट करने का आरोप है जिससे दो समुदायों के बीच में अशांति फैले। आरोपितों के खिलाफ धारा 153A (1B) और 505 (2) के तहत FIR दर्ज की गई है।

कन्हैया कुमार के ख़िलाफ़ CPI ने पारित किया सेंसर प्रस्ताव, पटना में समर्थकों के साथ प्रदेश सचिव से मारपीट और बदसलूकी का आरोप: रिपोर्ट

JNU के पूर्व छात्र नेता कन्हैया कुमार के खिलाफ़ भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (CPI) ने सेंसर प्रस्ताव पारित किया है। समाचार पत्र ‘द हिंदू’ के अनुसार, कन्हैया के ख़िलाफ़ ये कार्रवाई पटना में कार्यालय सचिव इंदू भूषण के साथ हुए दुर्व्यवहार के बाद हुई। इससे पहले, इस संबंध में फैसला हैदराबाद में नेशनल काउंसिल बैठक के दौरान 31 जनवरी 2021 को लिया गया था।

बता दें कि 1 दिसंबर 2020 को कन्हैया कुमार पटना में अपने समर्थकों के साथ कार्यालय पहुँचे थे। जानकारी के मुताबिक, वहाँ बेगुसराय जिले काउंसिल को लेकर बैठक होनी थी लेकिन उसके स्थगित होने की खबर कन्हैया कुमार को नहीं मिली।

इतनी सी बात पर कन्हैया के समर्थकों ने प्रदेश कार्यालय सचिव इंदुभूषण वर्मा के साथ बदसलूकी और धक्का-मुक्की कर डाली। बताया गया कि इस मामले पर कन्हैया कुमार और उनके साथियों के खिलाफ राष्ट्रीय नेतृत्व से कार्रवाई की माँग की गई थी।

रिपोर्ट के अनुसार इस घटना पर कई स्रोतों से पुष्टि हुई मगर दिग्गज नेतृत्व ने इस मुद्दे पर टिप्पणी करने से इंकार कर दिया। कन्हैया कुमार ने बाद में इस मसले पर सफाई देते हुए कहा कि वो इस हिंसा का हिस्सा नहीं थे। वहीं, एक वरिष्ठ नेता के भी हवाले से कहा गया, “अगर कुछ लोगों के व्यवहार से किसी की भावनाएँ आहत हुई हैं, तो वह अपनी ओर से माफी माँगते हैं।”

गौरतलब है कि सेंसर मोशन पारित किए जाने पर ‘द हिंदू’ ने कन्हैया की प्रतिक्रिया जानने की कोशिश की मगर उन्होंने ऐसी कोई जानकारी होने से इंकार कर दिया। उन्होंने तो पटना में हुई हिंसा की बात को भी नकारा। वह बोले, “लेफ्ट, भाजपा जैसा बर्ताव नहीं करती। हमारी पार्टी के भीतर किसी एक के बीच व्यक्तिगत मतभेद नहीं हैं; अगर हम में से किसी को वैचारिक घर्षण हुए तो एक अनुशासित पार्टी में शांति से हल भी हो गया।”

बता दें कि कन्हैया कुमार के साथ विवाद आए दिन जुड़ते जा रहे हैं। पिछले साल फरवरी में दिल्ली सरकार ने उनके ख़िलाफ़ देशद्रोह का केस चलाने की अनुमति दी थी। उससे पहले 2019 के लोकसभा चुनाव में स्थानीय लोगों ने यह बताया था कि कन्हैया के समर्थकों ने उनसे भी मारपीट की है।

किसानों के सम्मान में पॉर्न स्टार भी मैदान में: मिया खलीफा ने कहा- इंटरनेट मत बंद करो

अब पूर्व पोर्न स्टार मिया खलीफा (Mia Khalifa) ने भी दिल्ली में चल रहे ‘किसान आंदोलन’ में अपने हाजिरी दर्ज की है। पॉर्न इंडस्ट्री में कई वर्षों तक काम कर के लोकप्रियता बटोर चुकीं अमेरिकी-लेबनानी मिया खलीफा ने 2014 में पॉर्न फिल्मों में एक्टिंग शुरू की थी और 2 महीने में ही सबसे ज्यादा देखी जाने वाली पॉर्न अभिनेत्री बन गईं। अब उन्होंने दिल्ली में चल रहे ‘किसान आंदोलन’ को लेकर मोदी सरकार पर मानवाधिकार उल्लंघन का आरोप लगाया है।

मिया खलीफा ने दावा किया कि केंद्र की मोदी सरकार ने दिल्ली में इंटरनेट भी बंद कर दिया है। साथ ही उन्होंने आंदोलन में शामिल बुजुर्ग महिलाओं की एक तस्वीर भी शेयर की, जिसमें लहराए जा रहे पोस्टर पर लिखा है – ‘किसानों की हत्या करना बंद करो’। बता दें कि इससे पहले, रिहाना ने भी CNN की जिस खबर को शेयर कर के मोदी सरकार पर निशाना साधा था, उसमें भी इंटरनेट बंद किए जाने का जिक्र किया गया था।

हालाँकि, कुछ लोगों ने मिया खलीफा के इस ट्वीट पर चुटकी भी ली। ‘पूनम चौधरी’ यूजरनेम वाली महिला ने लिखा कि इंटरनेट बंद होना दुर्भाग्यपूर्ण है, क्योंकि अब प्रदर्शनकारी मिया खलीफा के वीडियो कैसे देख पाएँगे? एक व्यक्ति ने संजय राउत की तस्वीर शेयर करते हुए लिखा – ‘अगला पेड ट्वीट शिवसेना से होगा’। मिया खलीफा के ट्विटर हैंडल पर 34 लाख फॉलोवर्स हैं। एक ने जॉनी सीन्स की तस्वीर शेयर करते हुए पूछा कि ये भी किसान हैं क्या?

उधर पूर्व भारतीय क्रिकेटर प्रज्ञान ओझा सहित कई हस्तियों ने रिहाना और ग्रेटा थनबर्ग जैसों को जवाब दिया है। प्रज्ञान ओझा ने लिखा, “हमारा देश अपने किसानों को लेकर गर्व की अनुभूति करता है और जानता है कि वो कितने महत्वपूर्ण हैं। मुझे पूरा विश्वास है कि उनकी समस्याओं का समाधान हो जाएगा। लेकिन, हमें दूसरों के मामलों में टाँग अड़ाने वाले किसी बाहरी की ज़रूरत नहीं है। ये हमारा आंतरिक मसला है।”

चीन देता है श्रमिकों को असहनीय यातना, सड़ा खाना और बस 2-4 घंटों की नींद, तब बनता है सस्ता ‘मेड इन चाइना’ माल

हम अक्सर सोचते हैं कि आखिर ‘मेड इन चाइना’ लिखा सामान इतना सस्ता कैसे होता है। आखिर अन्य देश के मुकाबले चीन ऐसी कौन सी क्वालिटी का सामान इस्तेमाल करता है कि उनके उत्पाद की कीमत बाकी ब्रांडों से कम होती है। वास्तविकता ये है कि इसका कारण कम्युनिस्ट राष्ट्र चीन का कोई नया संसाधन या प्रणाली नहीं है, बल्कि उनका तानाशाही रवैया ही है, जिनके चलते वह एक व्यक्ति को मजदूर बनाकर इतना काम करवाता है कि उनके लिए चीजों की कीमत नगण्य रह जाती है।

न्यूऑर्क टाइम्स में आज एक बुक रिव्यू प्रकाशित हुआ है। इसमें अमेलिया पाँग (Amelia Pang) की किताब ‘मेड इन चाइना’ (Made in China) का जिक्र है। उन्होंने चीन में जबरन मजदूरी कराने की प्रथा पर काम किया है और उनकी इस किताब के 5 अध्याय इसी विषय को समर्पित हैं। इसमें बताया गया है कि कैसे कोई भी चीज तैयार करवाने के लिए मजदूरों से से दिन रात काम करवाया जाता है। वह मुश्किल से दो-चार घंटे सो पाते हैं। हालात इतनी बुरी होती है कि सपने में भी उन्हें सिर्फ़ वही काम दिखाई देता है। लोगों से ऐसे काम करवाने के लिए चीन में बाकायदा एक कैंप है जिसका नाम- ‘मसंजिया’ रखा गया है।

इसमें ‘सुन ई’ नाम के मजदूर से जुड़े किस्से का उल्लेख है। जिन्हें पेपर मशरूम बनाने का काम दिया गया और प्रति दिन उनके लिए लक्ष्य 160 पेपर मशरूम तैयार करने का रखा गया। इसमें बताया गया कि कैसे सुन ई के हाथ कागज रगड़ते-रगड़ते हाथ छिल जाते हैं। लेकिन वह फिर भी काम करते रहते हैं।  बदले में उन्हें खाने में घटिया बदबू वाला सब्जियों का सूप पीने को मिलता है। वहीं इतने काम के बाद नींद लेने के लिए उनके पास सिर्फ़ 2 से 4 घंटे का समय होता है। जिसमें उन्हें सपने भी फोल्डिंग पेपर मशरूम के आते हैं।

मालूम हो कि साल 2020 में डिटेंशन की घटनाओं और जबरन मजदूरी कराने की घटनाओं में बहुत विस्तार हुआ है। पांग ने अपनी किताब में इसी पर गौर करवाया है। उन्होंने बताने की कोशिश की है कि जो पेपर मशरूम या हैलोइन डेकोरेशन हम देखते हैं उसके पीछे उसे बनाने वाले के साथ हुआ अत्याचार और कई जटिलताएँ होती हैं।

इसमें एक पोर्टलैंड में रहने वाली महिला का भी जिक्र है जिसे सुन ई ने हैलोईन डेकोरेशन के पैकेज में पत्र छिपाकर भेजा था। जब महिला ने पैकेज खोला तो वह नोट उसे मिला। इसमें लिखा था कि अगर आप किसी अवसर पर इस उत्पाद को खरीदती हैं तो कृपया इसे विश्व मानवाधिकार संगठन को भेज दें। यह पत्र कथित तौर पर सुन की रिहाई यानी साल 2010 से दो साल बाद मिला। पांग ने इसी केस पर रिसर्च की है। इसके अलावा साल 2018 में इस पत्र पर ‘लेटर फ्रॉम मसंजिया’ नाम से डॉक्यूमेंट्री भी बनी है।

खबर के अनुसार, पीड़िता सुन ई की रिहाई के लिए उनकी माँ और बहन ने बहुत मेहमत की थी क्योंकि कैद में उन्हें असहनीय प्रताड़ना दी जा रही थी। पांग के लिए दुखद यह रहा कि जब तक उन्होंने अपनी किताब पूरी की तब तक सुन की मृत्यु हो गई थी। उन्हें केवल 2017 में उनसे मिलने का मौका मिला था।

पांग लिखती हैं कि चीन में सांस्कृतिक क्रांति ने लाखों लोगों को मार डाला और चीन की अर्थव्यवस्था को खराब कर दिया है। यही कारण है कि आधुनिक मुख्य धारा के चीनी आदर्श मानवाधिकारों की तुलना में सामाजिक स्थिरता पर अधिक जोर देते हैं। उन्होंने अपनी किताब में बताया है कि कैसे जेल में बंदियों से काम करवाया जाता है और कैसे हमारी खर्च करने की आदतों के कारण आज लगातार ऐसे रास्ते खोजे जा रहे हैं जिससे उत्पाद के डिजाइन, मैनुफेक्चर और वितरण के बीच का समय कम हो।

वह कुछ रिटेलर्स का जिक्र करके कहती हैं कि तेजी से बदलती माँगों से चीन कंपनियों पर जब दबाव बनता है तो वह पैसे बचाने वाले लेबर सॉल्यूशन की ओर आगे बढ़ते हैं जो उन्हें जेलों में मिल जाते हैं। सामान की घटती बढ़ती घटनाओं पर पांग समझाती हैं कि कैसे खरीद करते हुए किसी सामान के प्रोडक्शन की बात लोगों के दिमाग में होने चाहिए। वह कहती हैं,

“कीमत कम होने पर हम खुशी महसूस करते हैं। अगर कीमत बहुत अधिक है तो हमें दर्द होता है। जब हम खड़े होते हैं … एक कंप्यूटर स्क्रीन की चमक के सामने, हम उन श्रमिकों की पीड़ा को महसूस नहीं करते हैं जिन्होंने हमारी इच्छाओं को महसूस करने के साथ ही हमारे लिए उत्पादों को गहराई से बनाया है।”

दिल्ली पुलिस की बैरिकेडिंग से किसानों का ‘टट्टी-पेशाब बंद’: खुले में शौच करने को हैं मजबूर

‘किसान आंदोलन’ के बीच पुलिस ने दिल्ली सीमाओं की सुरक्षा के तगड़े प्रबंध कर लिए हैं, जिससे हिंसक प्रदर्शनकारियों को फिर से गणतंत्र दिवस के दिन ट्रैक्टर रैली के नाम पर की गई हिंसा जैसी वारदातों को दोहराने का मौका न मिले। दिल्ली में सीमा पर स्थित तीन बड़े प्रदर्शन स्थलों के आस-पास बैरिकेडिंग की गई है। अब किसानों का दावा है कि इससे टॉयलेट्स और स्वच्छ पानी तक उनकी पहुँच बंद हो गई है।

दिल्ली की सीमा पर पिछले कुछ दिनों से लगातार बैरिकेडिंग को मजबूत किए जाने का कार्य जारी है। इसके साथ-साथ सीमेंट से बने नए स्लैब्स भी फिट किए जा रहे हैं। कटीले तारों का उपयोग कर के घेरेबंदी की जा रही है। टिकरी और गाजीपुर सीमाओं पर खास तौर पर ये प्रबंध किए गए हैं। प्रदर्शन स्थल से आगे आने वाली सड़कों पर धातु के नुकीले कील भी लगाए गए हैं, ताकि ट्रैक्टर लेकर किसान फिर से दिल्ली में घुस कर उपद्रव न करने पाएँ।

पिछले दो महीनों से सिंघु सीमा सबसे बड़ा प्रदर्शन स्थल बन कर उभरा है। किसानों का कहना है कि बैरिकेडिंग के कारण अब वो 100 से अधिक उन पोर्टेबल टॉयलेट्स तक नहीं पहुँच सकते, जिनका उपयोग वो अब तक करते आए हैं। टॉयलेट्स से कुछ ही दूरी पर दिल्ली पुलिस एक अस्थायी किचेन का निर्माण कर रही है। किसानों का कहना है कि अब उन्हें खुले में शौच करना पड़ रहा है। सीमा के उस तरफ टॉयलेट्स की संख्या कम ही है।

वहाँ पर एक पेट्रोल पंप भी है, जहाँ एक टॉयलेट है। वहाँ रोज लम्बी लाइन लगी रहती है क्योंकि सैकड़ों लोगों के लिए कोई और व्यवस्था नहीं है – ऐसा दावा किया जा रहा है। सिंघु सीमा पर किसानों ने पानी न मिलने की भी शिकायत की है। दिल्ली के जल मंत्री सत्येंद्र जैन का कहना है कि दिल्ली जल बोर्ड के उपाध्यक्ष राघव चड्ढा को पुलिस ने किसानों तक स्वच्छ पानी पहुँचाने से रोका है। उनका आरोप है कि दिल्ली पुलिस ‘ऊपर से ऑर्डर होने’ की बात कह रही है।

कई पत्रकारों का भी कहना है कि अब उन्हें खेतों से होकर प्रदर्शन स्थल पर जाना पड़ रहा है। हालाँकि, कुछ किलोमीटर चलने पर स्थानीय लोग कुछ टॉयलेट्स का उपयोग किसानों को करने दे रहे हैं। टिकरी और सिंघु जहाँ हरियाणा में है, गाजीपुर उत्तर प्रदेश में पड़ता है। किसानों का आरोप है कि पहले सफाई कर्मचारी भी आते थे लेकिन गणतंत्र दिवस के बाद वो भी नहीं आ रहे। बोरवेल और ट्यूबवेल से पानी भरे जा रहे हैं।

बैरिकेडिंग से सम्बंधित सवाल पर दिल्ली के पुलिस आयुक्त एसएन श्रीवास्तव ने भी कहा है कि वह ये देखकर आश्चर्यचकित हैं कि 26 जनवरी के दिन जब पुलिसकर्मियों पर हमला किया गया और प्रदर्शनकारियों द्वारा बैरिकेड्स तोड़कर हिंसक घटनाओं को अंजाम दिया गया, उन पर कम सवाल उठाए गए। उन्होंने कहा कि हमने सिर्फ बैरिकेडिंग को मजबूत किया है ताकि यह फिर से टूट न जाए, पुलिस पर हमला न हो।

बाहरी लोग हमारे आंतरिक मामलों में अपनी नाक ना घुसाएँ: प्रज्ञान ओझा ने रिहाना को यूँ किया क्लीन बोल्ड

भारत के पूर्व-क्रिकेटर प्रज्ञान ओझा ने अपनी ‘लेफ्ट आर्म ऑर्थोडॉक्स स्पिन बॉलिंग’ से अंतरराष्ट्रीय गायिका रिहाना को क्लीन बोल्ड कर दिया है। दरअसल, रिहाना ने दिल्ली में चल रहे ‘किसान आंदोलन’ का समर्थन करते हुए पूछा था कि लोग इस पर बात क्यों नहीं कर रहे हैं? इस दौरान उन्होंने CNN की एक खबर भी शेयर की थी, जिसमें भारत सरकार पर अनर्गल आरोप लगाए गए थे। इंटरनेट बंद करने और किसानों पर ‘अत्याचार’ की बातें की गई थीं।

रिहाना के ट्वीट का रिप्लाई देते हुए प्रज्ञान ओझा ने लिखा, “हमारा देश अपने किसानों को लेकर गर्व की अनुभूति करता है और जानता है कि वो कितने महत्वपूर्ण हैं। मुझे पूरा विश्वास है कि उनकी समस्याओं का समाधान हो जाएगा। लेकिन, हमें दूसरों के मामलों में टाँग अड़ाने वाले किसी बाहरी की ज़रूरत नहीं है। ये हमारा आंतरिक मसला है।” प्रज्ञान ओझा के इस जवाब के बाद लोग भी उनके मुरीद हो गए।

हालाँकि, किसानों पर प्रोपेगेंडा फैला रही रिहाना को जवाब देने पर कई लोग प्रज्ञान ओझा को गाली देने भी आ गए। दिल्ली पुलिस द्वारा की गई बैरिकेडिंग और सीमा सुरक्षा की व्यवस्थाओं की तस्वीरें शेयर करते हुए उन्होंने ओझा से पूछा कि तुम्हारी पिच खोद दी जाए और तुम्हारे रास्ते में नुकीले काँटे बिछा दिए जाएँ तो तुम्हें कैसा लगेगा? एक ने इसे ‘शांतिपूर्ण आंदोलन’ बताते हुए पूछा कि अब अब तक शांत क्यों थे? कई लोगों ने तो रिहाना के 100 मिलियन ट्विटर फॉलोवर्स की धौंस दिखाई।

वहीं, रिहाना के ट्वीट के बाद कुछ अंतरराष्ट्रीय संस्थाओं को भी मौका मिल गया है। ‘वर्ल्ड अफेयर्स’ ने ट्वीट किया है कि वो इस मामले को देख रहा है। साइबर क्राइम पुलिस अधिकारी प्रणव महाजन ने कहा कि जिसे किसी मुद्दे के बारे में जानकारी न हो, उसे उस पर बात नहीं करनी चाहिए। अभिनेता गजेंद्र चौहान ने रिहाना को ‘अपने काम से काम रखने’ की सलाह दी। लोगों ने गणतंत्र दिवस के दिन हुई हिंसा की तस्वीरें शेयर की, जिनमें 400 पुलिसकर्मी घायल हुए हैं।

बता दें कि लोकसभा में सरकार से ‘किसान आंदोलन’ के मृतकों के परिजनों को मुआवजा सम्बन्धी विवरण माँगे गए थे, जिसके उत्तर में सरकार ने ‘No Sir’ (नहीं सर) जवाब दिया। किसानों से हुई वार्ताओं के सम्बन्ध में पूछे गए चौथे प्रश्न के जवाब में सरकर ने कहा कि अब तक 11 राउंड की बैठकें हो चुकी हैं। हिंसा की कई तस्वीरें और वीडियोज वायरल होने के बावजूद कुछ सेलेब्रिटीज इस आंदोलन के समर्थन में लगे हुए हैं।